Bharatiya Vidya Bhavan Library, Mumbai

Shlokpadsuchi

Harivansh · 2012/08

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POINTS TO BE NOTED IN CONNECTION WITH THE USE OF THE ŚLOKA-PADA-SŪCĪ OF HARIYAMSA (1) In this Sucı, we have taken into account the padas or verse-quarters occurring in the Constituted Text of Harivansa We have altogether ignored the star passages and Appendix passages (2) These verse-quarters are reproduced in Devanāgari script in the alphabetical order as set forth below Vowels (et, a ), 97 %, 6, , 5, #, #, £ 5, d, et and ot-- the scheme represented by &T, 57 (shown within brackets after 9) being made applicable mutatis mutandis to each of the vowels Consonants क (क, क , का, का, का, कि, किं, कि etc ) ख, ग, घ, ड, च, छ, ज, श, भ, ट, ठ, ड, ढ, ण, 2, 4, 6, 7, 7, 4, 5, 9, 7, A, , T, (7), s, a, 7, 7, 9, -the scheme represented by क, के, क, का, का, का, कि, किं, कि etc, ( shown within brackets after ) being made applıcable mutatis mutandis to each of the consonants (3) Each verse-quarter is followed by the reference or references to the place or places where the verse-quarter occurs These references are given in the serial order 3 o & (4) The figure in black or Clarendon Type indicates the adhyaya in the constituted text of Harvansa The next figure in running type represents the number of the sloka in that adhyaya Letters , and' attached to the number of the sloka denote respectively the first, the second, the third, the fourth, the fifth, and the sixth padas of that slohe चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य श्लोकपादसूची [भ] कम्प्यमान इवाचल ] [अक्षौहिण्यो हि तस्यासन् [भ]कम्प्यमान इवाचर 39 311 अकम्प्य पुरुषोत्तम 904 अकरैर्विप्रयुक्तार्था 416 अकरोत्पुत्रकामस्तु 930 अकरोत्पृथिवीमिमाम् 9 174 भारोत्समरे सन् 11054 अकरोषिसत्तम 21 34 भकरोदानवोत्तम 58 1 धरोद्यन्महाबाहु 911 धकर्तव्य मयानघ 2132 अकर्तव्य यदि कृत 66 19° अकर्मण्येपु वृक्षेषु 52 13 अकस्मादेव चाइसत् 1940 मकरसाटेपिणी घो। 40 260 सकारण देवाना 43 36° [भ]कारयन्मणिपर्वतम् 91 140 अकिंचिदुक्ला व विप्र 102 184 भकुत्सना च पतिते 16 100 भकूपार इति श्रुति 65 424 मकृतामाणि मोक्ष्यन्ति 116 38" मते श्राद्धकर्मणि 9 43 भकृत्वा पादयो शौच 3 106" भकृशाश्व कृशाश्वश्व980° मकृष्टपच्या पृथिवी 5310 प्रक्रियाविति सर्यथा 72 20° मबुद्ध एव भगवान् 5635° भनेर बुर मे प्रीतिम् 65 96* भर गछ शीघ्र स्वं 65920 भरयज्ञा इति ते 29 27. मयूरवचनं श्रुत्वा 69 270 मधुरस्तु तदा रत्नम् 29 भदूरस्तु महातेजा 0 100% भरसवन्धक साधम् 29 30° भारस्य कथाभिस्तु 69 310 अरस्य च प्रत्यक्ष 9636% चक्रूर कुकुरान्धका 29 32d अबूर प्रददौ धीमान् 29 34 भकर प्रशशस ह 68 180 भर सुपुवे तस्मात् 2480 मरात्काशिकायाया 25 5° भरेणार्कतेजसा 71 भरणीग्रसेन्या तु 24 11 28 420 धक्रूरे विपृथौ चापि 87 45° भकरोऽथ महाभाग 28 38° भरो दन्त वक्त तु 87 53° अपूरोऽन्तरमन्विच्छन् 292 अरोऽपि यथाशप्त 67 10 भक्लिष्ट मरण श्रेय 78 80 साकेशेन महामति 29 381 भक्षकैचीनकैचैव 93 19 अक्षतो मधुसूदन 950 क्षक्षनियाश्च रान 1166° अक्षयूते पराजित 89 31 अक्षप्रपतने चैव 97 100 अक्षयश्चाव्ययश्चैव 113 34° अक्षय चापि प्रेतेभ्य 78 480 अक्षय तव गारच 112 1230 थक्षय या रस्त्यन45250 अक्षय कशमिक्ष्वाको 10 51 अक्षराटे करीपस्य 7280 अक्ष श्रुतर्चा चाणूर 89 17° अक्षालमी ततो हृष्ट 89 379 अक्षिणी विकृते चके 67 36° भक्षुद्रा सत्यवन्तश्च 100 500 भक्षेवनिपुणोऽपि च 89 20% भक्षौहिणी प्रकर्षन्त 1009 मक्षौहिण्यश्व शूराणा 62 760 भक्षाहिण्या तु सैन्यस्य 25 14° मक्षौहिण्यो हि वस्यासन् 82 28* अखिल धारयिष्यसि ] चिकित्सितपाठात्मरस्य हरिवंशस्य [भजाते दर्शन नास्ति अखिल धारयिष्यसि 45 181 गच्छदारुवा भूत्वा 8 10° भगच्छ महाण सभाम् 46 124 मगति पापकर्मणाम् 30 30° मगम खगमोऽभवत् 61 320 भगस्त्यगुप्तामाता य 87 12° अगाधपरिणायुताम् 9324 गाध दुर्दिन महत्त् 61 130 भगाध घोतमान घ5547 भगाधेशाम्भसा पूर्ण 55 420 भगाधो भ्राज एव च 110250 भगाधोऽस्मि जनार्दन 1035 भगावह महारमानं 257 भगावह सुमिनश्च 98 16 भगृभु सुपुर्व नृप 24 2003 भगृहीतो पराया 92 67° भमावमिमिवाहितम् 1261 भग्निजिह्वो दर्भलोमा 31 220 भनिनाग्मिसमो भूय 243° अग्निपुत्र कुमारस्तु 336° भनिभूतोऽग्निवर्चसाम् 30 35d भनिमारुतयोस्तस्मिन् 36 46" अनिमावनीय च 3021 अमिराहवनीयस्तु 110 17° अमिष्टुदतिराजश्व 2 1 अनिष्टोमादयो यज्ञा 100770 भनिष्पाता इति स्याता 13 24 अग्निसूर्यसमौ युधि 97 90 पमिहोन कुशेष्वेर 23 105" अनिदोनाकुले काले 68 110 भमि सुवणस्य गुरु 42 अ. मग्नीनग्निविवाहितान् 13 29 भग्नीना वासुदयेन 110 23 भग्नीषोममय गत् 30 451 अग्नीषोममय लोक 39 11 भग्नीषोमात्मके सधौ 68 11 भनेर हवनीयस्य 110 130 भग्नर्जन्म यथा श्रुत्वा 1357* अन्यभावेऽपसु वा पुन 13 671 भग्रेभुज सोमभुन 31 90 भगजेन मयूराणाम् 47 44 भङ्गदेन च भास्वता 47 441 भनपुप्रो मदानासीत् 23 330 अगरातच परमान् 80 120 भगवनकलिङ्गानाम् 87 27° भगवाकलिन 87 500 भन सुमनस स्वाति 2 186 अग प्रथमतो जशे 23 290 महारसुनीथापर्य 2 2 100 मलाना फुलवर्धनम् 23 40" मझान्यान्यरिशाच 117290 भगारसेतुम्तत्पुन 23 130 मगारस्य तु दायाद 23 13200 अङ्गिरा पुलह ऋतु 77" मगुटमाम पुरुषम् 126 महुष्टाद्रदाणो जात 2010 शचन्द्रार्कप्रहा भूमि 114 18° अचराश्च घराव 2 480 अचल चैव पुरत 2 110 भचरा मागिनां योनि 58440 अचरा द्वादशायताम् 93 27 अचिन्तयच तत्त्वाथ 10653° अचि तयित्वा देवेन्द्र 97 14° अचिन्त्य कर्म तच्छुत्वा 655° अचिन्त्य रूपमास्थाय 65 380 भचिन्स्य शूलपाणिनम् 85 100 भचिरान्मुख्यता प्राप्ती 79 220 भचिरेणैव कालेन 79 6° 82 21° 86 41° अच्छोद नाम सदिव्य 13 25° अच्छोदा नाम निम्नगा 18 250 अच्युत भीतभीतवत् 109 381 अजकस्य तु दायाद 23 81" भजको नाम वीर्यवान् 23 81' अजपार्श्वस्ततोऽभवत् 114 13' अजमीढस्य केशिन्या 23750 अजमीढस्य दायाद 15 31* अजमीढस्य पल्यस्तु 23 74 अजमीढ समेयिवान् 23 106 अजमीढातु नील्या वै 23 95" अजमीढो द्विमीढश्च 23 73° अजरामरचैव 1121180 भनयामी च पाचौं तो 114 12° मजस्तु रघुतो जज्ञे 1074 भजातपुत्राय सुतान् 288° अजातशनु शण्य 24 330 भजाते दर्शन नास्ति 48 48.

मनानन्काश्यपस्तस्मात् ] श्लोकपादसूची [ अथ पुनानिमासस्य अजानन्काश्यपस्तस्मात् 842 अज्ञाश्चवोपयोक्ष्यन्ते 118 29° मजितेन्द्रियमस्थिरम् 118 11 भजीजनरपुष्करिण्या 2 16° अजेयश्चति मत्वा त 10860% अजेयर निभिरोक 112 108* भजेय शाश्वतो नित्य 113 340 मजेयो बलदेवोऽयम् 89 31° भनेकपादहिचुन्य 3 420 अटक सरोष्ट्र च 117 34° अझिल्लिकण्टकरन 52 220 मटव पृथिवीं कृत्वा 46 260 महसूला जनपदा 116 120 अणुधर्मरतिनित्यम् 18 4° भणहस्तु नृपश्रेष्ठ 18 21 अणुह कस्य चै पुन 15 अशुहापार्थिवश्रेष्ात् 1540 अणुहोऽध्यामत्पदम् 18 40 अणुदो नाम तस्यासीत् 18 4 भणुदो नाम पार्थिव 15 2300 अत ऊ च्युते धर्म 11730 मतर्पयत सच्योर 118 20 मतश्व बलवान्काल 115 260 मतस्ते वर्तयिध्येऽहम् 15684 मतस्त्वां क्षमयाम्यहम् 112 110 मत परतर कृप्या 70380 भतिधान्तस्य कालस्य 38 140 मतियन्नाभास्वर 93 34 अनिथिस्तु कुशाजज्ञे 1016 मतिथिरव हि मनोच 99 26° भसिदान्ते वृहदुर्गे 87 470 भतिदेवरमानुष्य 65 25° अतिदेव कृत फर्म 62 11. अतिदेव तु कृष्णस्य 61 60" भतिनामा सहिष्णुश्च 7 27* मतिप्रवृद्धो मत्तश्च 67 30 भतिप्रसत्तो पो ष्वा 51 120 गतिमानुपरुमणाम् 6287 मति बायोरथ गतिम् 11010° अतिवृष्टिः कृता कृष्ण 63 14° मतिप्टेन लोकस्य 61 150 भतिष्ठत्समराकाद्धी 33 80 भतिष्करिणीकिन 27 21 अति सूर्य च चन्द्र च 31 140° भतीक्ष्णदण्डाश्चतुर 417 अतीतानागतजश्च 115 220 भतीतानागत वाक्यम् 118 1 अतीतानागताना चै 7460 क्षतीता वर्तमानाश्च 7 6", 37° अतीत्य च यदून्सर्वान् 107 71 अतीव निपु लोकेषु 21 3° अतीव त्वं हि लोकेऽस्मिन् 73 28° अतीव देवा रक्षन्ति 78 13° अतीव बरयन्त हि 9020 भतीर शुशुभे रूप 110 3° अतीव सौम्य सोऽप्यासीत् 93 49° भती हि पुरी रम्या 91 23° अतीरामानुषी मेधा 79 अत्यद्भुतमचिन्त्य च 92 41" अत्यनुतमिद चासीत् 96 33° अत्यद्भुतानि कर्माणि 1 3* 96 290 अत्यन्त शिरसो रक्ष्मी 77g अत्यर्थ श्राम्यते वीर 99 20° भर ते वर्तयिष्यामि 7 55° 11 160 अत्र मे 'भारद प्राह 65580 भर मे भगरन्किनु 43 31" भर मे शङ्कते बुद्धि 65 46° मन मे सशयन्तीव 1340 भन वै निमह कार्य 75211 भन्न वॉशा निमज्यन्ता 43 53* मनिर्वसिष्ठो भगवान् 7 30° भनियशसमुत्पन 51 मनिहानि गोत्राणि 23 120 अय कार्यनिरोध स्यात् 113 100 भय केतुमत पुत्र 23 670 अथ चित्ररथस्यापि 23 360 अथ तान्वाग्मिरुणाभि 108 340 भय ते गुरव शप्ता 118 29% भय तो जातही तु 58 " भय दामोदर श्रीमान् 52 86 भय दिव्येन मधुर 82 100 भय दीर्घस्य कारस्य 42 239,27 भय दुर्योधनो राजा 29 28- भय पर्वतभूत तन् 103 21 अथ पुरसहस्राणि 360 अय पुयानिमास्तस्स 7 24 -7- भय प्रविन्यथुर्देवा ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [भव मदाणनिप्पिष्ट अय प्रविष्यथुदेवा 36 60° मथ भीमरथस्यासीत् 26 23° अथ भूत्वा कुमारी सा 27 10° अथ मा प्रत्यभापत 10061 अथ राजा शिर मात 19 150 अथ रामोऽत्रवीद्वाश्य 1101 भर्यणि च यन्मतम् 100 66* भय शिरसरपि 20 120 अथ घा कस्य पुनरव 45 456 अथ वा प्राणिनस्तात 8390 अथ वा रजतान्वितम् 13 66° अथ विज्ञाय योगेन 29 35" अथ सा दशमे मासि 27 11° मथ सिंह प्रधावन्तम् 28 16° अथ सिंह प्रसेनस्य 28 210 अथ सौभपति श्रीमान् 73 18* अथ सौमित्रिणा याणे 44 49" अथाकाशे पुनर्वाचम् 102 101 अथाक्षतमहावृष्टया 96 190 अथानय महारौद्रम् 112 190 अथाङ्गिरास्त्रिशूलेन 110 290 भथाज्ञप्तस्तु बाणेन 110 220 मथाधिश्रितपर्यने 60 17" भधान्तरिक्षे गन्ध 91 420 मथान्तरिक्षे व्यनदन 108 37° अथान्यद्धनुरादाय 88 21* मथान्वगच्छद्गोविन्द 85 39° अथापरे महाभागा 110 25% अथाब्रवीत्समुद्रस्त 103 4" अथायवीरसमुद्रस्तु 103 8" अथाभ्ययाघदून्क्रुद्ध 81 51° अथाभ्युत्थाय विमना 109 650 अथामजस्पुनस्तत्र 7031° मथार्थगृहमासाद्य 9220 अथाश्मकानामधिप 89 17° अथाशुपरिपूर्णाक्षम् 95 10° अथाष्टबाहु कृष्णस्तु 1104 अथास्त गच्छति तदा 68 1° अथाह कृष्णमक्रूर 70 80 अथाहान्तस्तिो विप्र 67 520 अधैतान्सुमनावधीत् 177 मंथन सनातर्धारा 19 24* अथैन्द्रसेनिरानीत 97 120 भयोग्रचरश्वत्रेण 9156 भयोवाच महातेजा 91330 अदम्भवृत्तय सर्व 65 14. अदशदाहुविवरं 67 30 अदात्तद्वारयद 29 ° अदितिदितिदनुधैव 3 48" अदितिर्देवतारगि 38 20% अदितिर्देवमातेव 96 10° अदितिस्तो मुतौ प्रीत्या 92 560 अदिति धर्षयामास 91 16 अदिति सप्रविश्य ये 3 48 अदितिं सुरभि तथा 45 231 अदिति सुरभिश्चोभे 45 21 मदिति सुरभिस्तथा 45 36' अदितेरपि पुनरा 3250 अदितेगंभपर्याये 62 35° अदित्या भवन पुण्य 92 53° अदित्यां पुत्रजन्म तत् 32 6" अदित्या कुण्डले मोहात् 91 34° अदुष्टास्तु स्त्रियो राजन् 118 36° अदृदयग्रहतारकम् 61 16' माष्टश्चाश्रुतश्चैव 107 490 अद्भिदंदी सुत वीर 24 28° अनिश्चापि श्रमो नित्य 75 110 अनि प्रक्षाल्यमानाभि 6323° अद्भुत चाकरोन्महत् 90 91 अद्भुतानि महाद्युते 105 20 अद्य व जननी भीष्म 15390 अद्य त्वा नाशयिष्यामि 38270 अद्य द्रक्ष्यसि माधव 12 533 अद्य नानयसि क्षिप्र 107 78° अद्यप्रभृति गोपाना 56 43° भद्यप्रभृति गोविन्द 86 40° अद्यप्रभृति तानीह 91 10% मद्यप्रभृति देवेन्द्रम् 118 11 अद्यप्रभृति नो राजा 62 41° मद्यप्रभृति भूतानाम् 46 24" अद्यप्रभृति मासी दी 62 46° भद्यप्रभृति याज्योऽह 60 24 भद्यप्रभृति सैन्यमें 81 360 अद्य बाहुसहस्र मे 12 56° अद्य बाहुसहस्रेण 11254 अद्य मदाणनिप्पिष्ट 38 16 -8- जय सो निवास्तात] लोकपावसूची [मनिरदस्ख मागणे अद्य मो नितातात 837° मध हि त्वं मया युद्धे ॥2 55* भद्यापि च हितार्थाय 31 1080 मद्यापि न निवतन्ते 3 17°, 21 अद्यापि भुवि गाय 43 486 अद्यापि स परत्युत 8 44 अद्याइमिममुत्पाव्य 61 27° अव किचिरेण स 53 3° भयेव तु नगर्येपा 81 50° अधैव दिवस पुण्य 84_14° अद्यैव निश्चयप्राति 53 अद्रिकाया भविष्यसि 13 39 अद्वितीय प्रदारपु 3841 अधमस्व मम मत 38250 अधर्म एष युप्माक 18 27° भधर्मनिरतस्य 2 15560 अधर्मप्रायपुरुष 43 600 अधर्मरचयस्तात 5 100 अधर्मशकुना तो 991 मधमैं कुरु मा येन 59 अधर्मे धीयमानस्य 23 141° अधमें पादविग्रहे 36 430 अध मस्तारशयने 154 भधिक शुशुभे तदा 8 350 मधिपश्च महाबल 89 18" अधिराम गिरि मेरु 1240 अधिरूढा सगोत्तमम् 110 490 अधिश्रयणवेलायां 6850 अधिष्ठानवरोत्तमम् 8530 मधीत्य बुद्धि लभते च नैष्ठिकीम् 118 40 अयि सर्वभूतानाम् 92 500 अश्या सर्वभूताना 8 36 अध्याय घेदशास्त्राणि 10 360 मम्वन शतयोजने 2016 मध्वयुनिसपछ 118 15 भपयुभंगवाम्भृगु 2023 भ-वय सामग विप्र 316 भनवरश्मिमयुक्त 32 27" अनन्तस्याप्रमेयस्य 90 18 भनन्त नीलवामसम् 70 भनन्त य विदुर्नागम् 9033 अनन्त शाश्वतो दव 6540 भन तो भागिनामप्सु 38 अनन्या प्रमदा लोके 87 38° अनपत्या तु तस्यासीत् 99 64 अनपरयोऽभवदाजा 23 125° सनपाकृत्य ता राजन् 22 23° भनमात्यस्य शून्यस्य 65390 अनमित्रममित्राणा 28 10° भनमिनसुतो नित 28 11 क्षनमिनस्तु धर्मात्मा 10736 भनमित्र महाबलम् 241 अनमिनाछिनि ई 24 24*98 25° अनमित्रो रघुश्चैव 10 71 भनया धर्मवृष्णया 116 भनया सह जाहव्या 43 410 अनरण्यसुतो निन्न 10 720 भनरण्यस्तु पुनोऽभूत् 1071 अनभन्देहमुरराज्य 22 420 भनष्टद्रव्यता यस्य 23 1640 अनागताच सप्तते 7 41 भनागताश्च सप्तव 7420 धनाथदत्ता रुदता 107 31* धनाथा इव सजस्ता 109 20 अनाथा जगतो नाथ 42 360 अनाथा ह्यपराध्यन्ते II5 23' मनादत्य च यादवान् 80 400 थनाटिश्च पुष्टिमान् 27 281 मनाष्टिं महायलम् 109 460 मनाष्टिं यशस्विनम् 24 26° अनाटि कनवक 2418° अनानीय च रुक्मिणीम् 882 मनानीय स्वसार तु 88 310 धनाप्तौ च वधाहौं च 29 130 अनारोप्यमसभेद्य 71 40% भनार्यस्वागुरास्तथा 16 15 भनादृष्टिभये तसिन् 10202 अनावृष्टिं चकार 65 39d भनाष्ट्या तदा राष्ट्र 29 320 भनाइता दुदुभय 48 16* भनीत्या हि नृणा गति 71 16 क्षानिमित्तागम क्रोध 66 32" अनिरद्धमिति ख्यान 899 अनिल्दशरीरगा !131' मनिल्दस्य बैकस्य 109 110 अनिवस्य मार्गणे 109 32", God हरि पादसूची-2 अनिरुद्धस्य वदनं ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [अन्तर्धानगता देवा भनिरन्तुस्य वदनं 107. 82°. भनिरुद्धं गुणातुं 89 11. अनिरुद्धं योधयित्वा 108 98° अनिरद्धेन सयुगे 108 48". भनिरूद्ध हृते वीरे 109 27. भनिरुद्धो नदन्हष्ट 108 26*. भनिरुद्धो भयात्तेन 10974". अनिरुद्धो रणे योद्धा 98 19. भनिरुद्धो वयोन्वितः 89 10. अनिरुद्धो हृतो ग्रहान 109 69. भनिर्णिकमविज्ञातं 117. 47. भनिन्तिस्तथाष्टाभि 87.55°. थनिर्दिष्टा मया भिक्षा 22 23 भनिलस्य शिवा भार्या 3 35*. मनिवार्यमभेद्यं च 90 10". अनिवार्यमसहाय 112 109. अनिवार्य भविष्यति 77.45". मनिशं चाप्यविच्छिना 106 46°. [भ]निस्पिष्टा दिवमुत्पतत् 48 28'. अनीक भीमविक्रमैः 11065. अनीकं सुमहदात्री 108 35°. भनीकाग्राणि कर्पन्तः 84 20° अनुकम्पार्थमेव च 9 990 अनुकूलं तु ते देव 8 336. अनुक्त्वा वचन किंचित् 89 369, 41° अनुगच्छन्ति विश्वशं 13 45. अनुगच्छस्व मा भने 96° अनुगम्यमानः कृष्णश्च 85 46* अनुग्रहाय लोकानां 12230 अनुग्राह्योऽसि मे सदा 112 1194 अनुजग्मुर्यदुगणा 79 31. अनुजग्मुश्च गोपाला 60 31 अनुजग्मुस्ततः सर्वे 1186 मनुजग्मु पुरीमार्गे 78 41. अनुजग्मु मुरा सर्वे 420 अनुजज्ञे गृहं प्रति 95 11 अनुज्ञातो नरेन्द्रेण 44 44. भनुज्ञातो भगवता 12 18. अनुज्ञातौ नरेन्द्रेण 72. 25. अनुज्ञाय ततो ज्ञातीन् 94.24" मनुत्तमं नाम तप• 2030. भनुरपोपु नवसु 9.3. मनुध्यात्या पुर ययौ 18. 36. भनुध्यान्ति स्वकर्म तत् 16 18. अनुनीयमानो दुर्बुद्धिः 15 55. अनुनीयर्थराजानं 28 29. अनुनेतुं तदा धेनं 5 14. अनुनेतुं न शक्यते 15 554. अनुप्रविश्य यवनः 85 48°. अनुप्रविश्य योगेन 45 136. अनुप्राप्ते महीपतो 817. अनुभूय सहोमया 107. 17. अनुमान्य तु सर्वज्ञं 115 14. अनुमान्य सहामर. 86 67'. अनुमेने महाबाहुः 92 67. अनुयातश्च पौण्ड्रेण 87 27. अनुयात. सहस्रशः 34 6. अनुयातो महाधुति: 81. 14. अनुरागात्ततम्तस्य 529. अनुलोमकर. सूर्यः 41 15. भमुवशे पुराणज्ञाः 27 12. अनुशिष्टौ च तौ वीरौ 71.6°. अनुसृत्य दिवो लोकान् 46 8. अनुहादश्व हादश्च 3 59. अनुहादो हरिहरी 31 72. भर्नु च भरतर्षभ 22 29. भनूपदेशं सूताय 5 39. अनूपं सिन्धुराजस्य 84 22. अनूपोपवनै कान्त. 86 49. अनेकशाखश्चैत्यश्च 106 49%. अनेकशिरसां तात 3 85. अनेन तव धर्मेण 9 10° अनेन यदुमुख्येन 105 18. अनेन शम्बर हत्वा 99 444 अनेन शिशुना यानम् 50 18. अनेन स्नीकलत्रेण 77 100. अनेनास्तु ककुत्स्थस्य 9 44'. भनोस्तु पुत्रो धर्मोऽभूत् 23 113'. अन्तकप्रतिमे तस्मिन् 43 58", भन्तकश्चाभवद्दोग्धा 621. अन्तरस्य सुयज्ञस्तु 26 6. अन्तरिक्षगता ये 143 9. अन्तरिक्षारसुभाषितम् 89 42. मन्तलमधश्चैव 3 16. भन्तर्धानगत छाया 627. भन्तर्धानगता देया 75 38*. - 10 - मन्तर्धानमुपागम्य ] लोकपादसूची [भपन्नशमनुप्राप्ता। . मन्तर्धानमुपागम्य 112 986 अन्तर्धान गतो विष्णु 47_9° अन्तर्धान जगामाशु 60 34° अन्तर्धानापजायत 2 271 अन्तर्भूमिगतस्तत्र 9530 मन्तवान्भविता शाप 178° अन्त भरतसत्तम 2234 मन्त पुरागताना च74 6° मन्त पुरद्वारगतं 108 21° मन्त पुर घ कृष्णस्य 86 43° मन्त पुरमशोभत 799 अन्तो हि कर्मणामस्य 97 390 भन्या मध्ये निवत्स्यन्ति 116170 अन्धकस्य वच श्रुत्वा 66390 अन्धक च महाबाहु 2720 अन्धक च शुभाक्ष ध 113 63° अन्धकारकाश्यदुहिता 27 16° अन्धकारभिवार्णवम् 35 17 अन्धकारीकृते लोके 112 28° अन्धसवनाविमना 662 भन्घतोसरको हत्या 76 80 पन्धमल्ल महामल्ल 765° मन्धे तदा महामले 7690 भलजा भुवि मानां 40 290 भन्नता भविग्यामि 5510 अन्यत्र मधुसूदनात् 97 350 मन्यवान्यतो देवि 48 38° अन्यस्वाविक्षितो राजा 23 124° अन्यस्त्वा धयिष्यति 103rd अन्य वर घृणीप्वाद्य 112 119 भन्या वृद्धान्वृष्णीना 956" अन्ये च मजा यह 74 12° भन्येऽप्येव गमिष्यन्ति 103 60 भन्ये पानाहरहु 60 33° अन्येषां सुमहानासीत् 82 6° अन्ये स्म परिगायन्ति 55 250 अन्ये इयगता भान्ति 33 24. भन्यश्च परिणमि साधैं 89 13° भन्योन्यकिरणग्रस्ती 51 6° मन्योन्यपितरो यूय 12 31" भन्योन्यपितरो ते 12 41 भन्योन्यबाणवर्ष तत् 37 36° मम्योम्यमनुवर्विनाम् 41 17° भन्योन्यमन्ये समरे 37 330. भन्योन्यमभिगन्त 81 931 भन्योन्यभिजग्मतु 44 48 भन्योन्यमभिधावताम् 82 9, 120 भन्योन्यमभ्यमापन्न 10981 अन्योन्यमिथुनश्चय 55 30° भन्योन्यमूचुस्ते सधैं 3 200 भन्योन्यराष्ट्राभिमुखा. 59 51° भन्योन्यवेगाभिहता 22 14 भन्योन्यव्यतिपत्ताभिः 8160 भन्योन्यसदृशाम्बरौ 585 अन्योन्यस्य हि ते सर्वे 109 17° भन्योन्य जन्नतु क्रोधात् 112 17. अन्योन्य सुमहात्मनो 110721 भन्योऽप्येय गमिष्यति 103 44 अन्वगच्छत त पूर्व 114 भन्वयुर्मागध सख्ये 906 अन्ववर्तत भार्य द्वे 45230 भरवायस्तु सुमहान् 9 34° अन्वशासथ मुदित 118 10° अवास्ते य प्रिया भायो 118 22° अन्याहार्येण कर्मणा 30 21' मन्वित पुरुषोत्तमम् 108 94 सम्धिता तीरवासिभि 83 40* अन्यीयमान कृष्णेन 85 61° अन्वेपयन्परिधान्त 28 200 अन्वेषितव्यविधाम 52 13° अन्वेष्यमार्गा यमुधा 55 17° अप एवं ससर्जादौ 1 23 अपनान्तस्ततो रणात् 11 124 भपक्रामन्त ते सर्वे 112 10 अपगच्छापगच्छ व 11249 अपचारेण वेनस्य 2 1 भपतन्यसुधातले 108 49 क्षपतित्व खिया श्रेय 7 240 झपत्य कृत्तिकानां स 3 36* अपत्यानीद्द पोडश 354 अपत्यार्थ ददाम्यहम् 43 44 अपत्यार्थों नु कम्तस्या 69 130 अपध्यानाच पापारमा 96" अपध्वना विमताश्च 35 10 भपध्वसेति बहुश 9910 अपभ्रशमनुप्राप्ता 1490 द -11 अपयाते तदारे] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [भनयीचिनलेसा वाम भपयाते तदारे 29 310 अपयाने ततो बुद्धिं 29 14° अपयानेऽभवन्मति 84 111 भपयाने मतिं कृत्वा 8529 अपर पेशवस्याय 31 1430 भपरावृत्तिवर्तिनाम् 45 100 अपराश्चाभवनद्य 93 64' अपरे ये तु दैत्या वै 38 51° अपरे विविधै शौ 81 49° अपरे हा हता स्मेति 56 20° अपर्णमेकर घ 13 150 भपर्वणि विशां पते 106 45% भपश्यत्स्वगृह कृष्ण 941° अपश्यन्ती च त गर्भ 48 40 भपश्यन्वृष्णय सर्वे 81 10 अपश्यमश्मयूटाभ 100 330 अपश्य तत्र चैवाह 1260 अपश्य वदतां वर 103 243 अपश्य शकट भुपि 50 17d भपश्य सपितामहान् 46 13d भपश्य सप्त वै द्विजान 16 3d अपश्य समतिक्रम्य 103 1" अपश्याम तथान्तिकात् 27 136 अपाशामत हर्षेण 107 16° अपातयदेवगणान् 37 430 अपान पश्चिम कायम् 30 48° भपापास्त्यज्यमाना वै 118 360 भपापा विगतज्वर 118 350 भपापे पापहृदय 65 650 भपामा सुरेशस्य 86120 अपामधस्तालोको वै 62 24° अपायाद्भरतर्षभ 29 30% भपारतेजा दुर्धर्ष 91 50° अपावृते चन्द्रपये 36 40° भपाहते महाद्वारे 36 440 भपास्तभिन्नाक्ष 50 13° भपा च जनमेजय 20 190 भपा तु वरुण राज्ये 430 सपा पतिरभिनुद्ध 113 19% भपा पूर्णो यथा घन: 758 अपि देवसमूहे 67 51 भपि प्राप्स्याम्यई युद्ध 106 34° मपि भेदेन वा तस 1552 अपि मे स्वन्ति पुनाय 50 14° अपीडयदरिष्टस्य 64 19° अपीदानी भन्मिथ्या 10655° भपुनस्य स राज्ञस्तु 25 120 अपुत्रस्याथ राज्ञस्तु 85 150 अपुत्र पुत्रकामुर 85 120 अपुग्न स तु धर्मात्मा 1145° अपुत्राणा विधीयते 69 146 अपुत्रोऽपि च राजा स 26 15° अपुनरावर्तिनी गतिम् 13 480 भामानिति भूपते 85 80 अपूर्व भयमागतम् 109 130 अपृच्छद्धर्मराजो हि 116° अपृच्छ चैर दुर्धर्षे 12 80 अपृच्छ तद्यथावृत्त 1043° अपृच्छ तमह तात 11310 अपृथग्धर्मचरणा 2 330 अपेय च जलार्थिनाम् 55, 430 अपौरवा न तु मही 114 18° [भ]प्यवन्दस्तान्यथाक्रमम् 113 584 भप्रकाश तदाफाश 86 47° भाष्य सुरासुरै 40 6 अप्रमत्ता प्रमत्ता स्म 7732° अप्रमतर्मम हित 475° भप्रमाण करिप्यन्ति 117" अप्रमेय तथाक्षयम् 110 380 भप्रमेय महाधनै 93 370 अप्रमेया महोत्सेधाम् 93 24* अप्रमेयोऽनियोज्यश्च 97 37. अप्रत्ता प्रपत्स्यन्ते 116 28° अमाप्त एवं नगर 107 26° भप्राप्य योग ते सर्वे 143 भप्रोक्षितोपयोगाच 10 17" अप्सराभिश्च नादितम् 46 11t अप्सरोभिश्च माधव 91 42° अप्सरोभि समन्तत 92 B4" अप्सु पारिप्लवा पृथ्वी 1 27° भगरो वाल्यमास्थाय 65 31 भनयोनिरनुष्णभार 36 8' भन्दकृकारयोगारमा 367 भन्द घृतमुर्ख सूर्य 38 69° भन्मक्षा वायुभक्षाश्च 35 35° भववीचियोसा ताम् 107 720 -12- ममयीत्तिष्ठ तिठेति] लोकपादसूची [अभ्यपिचाराधिपम् अग्रवीतिः तिष्ठेति 108 53. अमवीरपाफशासन: 96 11. अपीसतेत्येवं 108. 33°. भयवीवृषभध्वजः 106 12. अनुवं कृतकृत्योई 1 28. अमुचस्तत्र दारका. 50 18. अभज्यत तदा सख्ये 11015 अभयं में प्रयच्छतु 42 Bd अभयं रुक्मिणे दत्वा 88 28. अभयं वो ददाम्यहम् 31 62. थभवजनमेजयः 15274. शभरत्तारकामयम् 115 16". अभवत्पर्यताकारः 112 105° अभवत्पाकशासन: 3 105. ममवत्स यदा राजन् 89 10", अभवत्सा सरिच्छेया 846. अभयदैत्यसैन्यस्य 33 21. अभवद्यारम्पहार्या 36 27. अभवदहुधा कृशम् 29 32. अभवदोपनिर्यास: 76 14. अमरदरतर्षभ 91 46'. अभवद्वयनमाकाशम् 59 42" अभवन्दनुपुजास्तु 365. अभवनष्टशोका सा 107. 44. अभवन्मे जनार्दने 104 234. अभवन्निग्धसकल्प] 99 336. समाविनो भविष्यन्ति 17, 19, अमारे पापकर्मणाम् 36 42". अभिगम्य जनार्दनम् 104 3'. अभिगम्य द्विजोत्तम Ior gi अभिगम्याग्रुघन्सवें 89 19. मभिगुप्तं समन्तत 53 22. भभिजित्तु पुनर्वसोः 27. 171. अभिज्ञो रोहिणेयस्य 58 34. भभितप्ता दवाग्निभि 54 . अभितम्तन्महबुद्ध 62.86 67.63° अभितो मणिपर्वतम् 92 19*. अभिदुदार कृष्णं च 12 33. भभिदुदार रामं तु 82 16". अभिमबन्धने मृत्यौ 36 41. भभिपरस्यनि वृत्यर्थ 117. 12%, अभिप्रायररंकृताम् 9381 अभिप्रेतजनाकीणां 86 52. अभिभूतश्च कृष्णेन 97. 23. लभिभूत सुसमुहः 108 66°. अभिभूय दिवाकरम् 92 20. भभिमनपाइवे स्थित 113 23. अभिमन्युरजायत 258. मभिमन्युश्च दशमः 21. मभिमन्यो परीक्षितु 23 121. भभियातं सुदारणम् 113 13. भभिवर्तन्निन शुभ्राः 81 5. अभिवर्धति चाधर्मे 31 95*. अभिवाद्य कृताञ्जरि: 11 28'. अभिवाद्याभिवाद्यानाम् 39 * अभिवृष्टस्य ते धैः 61 440 अभिशप्ता तु सा भर्ना 9 82. अभिशप्तास्तु ते देवाः 12 28°. मभिशापभयादीतः 103 8° अभिषिक्तं तु तं गोभिः 62 67* भभिपिच्य च राज्ये च 10 20% भभिषिच्य तदा राज्ये 18 21° अभिपिच्यन्तमव्ययम् 62 60*. अभिषिच्य स्वराज्ये तु 19 23. अभिषिच्याधिराज्ये तु 4 1". भभिषेकाक्शन 44 29 अभिपेकेण गोविन्दं 62 580 अभिपेकेण गोविन्द. 78 39° अभिपेरण दिव्येन 47 46° अभिषेक्ष्याम्यई पुत्रम् 10 12° भभिसधाय पितर 11 12. अभीक्ष्णमभिशुपयन्ती 73 130 अभीषणं नि वसन्तीपु 55 18. अभीतपर्वताकार 108 85" अभूच निभृतोऽर्णय 59 42d अभोज्यं तत्पशूना हि 55. 43° अभ्यद्रवरसुसमुन्द्ध' 81 86%, अभ्यधारत गोविन्द 64 120 अभ्यनन्दन्प्रियैर्वात्रैः 67 46° अभ्यन्तर च भार्गवं 109 340 अभ्ययान्मधुसूदनम् 8814 अभ्ययुर्नयमिच्छन्त: 21 17. अभ्यवर्तत युद्धाय 758 अम्यवादयता देवी 96. भम्यपिञ्चरस नाहुपः 22 nd भभ्यपिजनराधिपम् 5 अ. --18- अभ्यागारसमरे महत्] चिकित्सितपाठात्मरस्य हरिवंशस्य [भरणीमिष संरघा भय वै भम्यागात्समरे महत् 110 37* भयाशमागतो ता तु 112 46° भन्याशे वर्तते फार 67 61° ममनोक्ता यथाहुति 66 14 अमरप्रतिमा युद्धे 47 12° समरैरपि दु सहम् 10 360 अमरैराहत पुण्य 30 40 अमत्यैरजितो युद्धे 77 अमर्यात्प्रेत्यभाववित् 26 8° अमर्यादन्वशासच 118 20° अमर्षी वैरशीलश्च 65 69 अमानुप धेनि चैन 68 37 समानुपाणि कर्माणि 63 4 अमित्राणा प्रियकर 44 320 क्षमीयाममरेन्द्राणा 45 13° अमीपामुत्पथस्थाना 55 56° अमुक्त्वा विग्रह तस्य 112 अमूर्तय पितृगणा 370 भमूर्तिमन्त पितर 13 49 अमृतस्येव चास्वाद 118 अमृतारम्भनिर्मुक्त 34 40° अमृतार्थे पुरा चापि 65 42" अमृते निर्मिते पूर्व 65 410 अम्बरीषस्तु नाभागि 10 68° भम्बरीषोऽभवत्पुत्र 921 अम्भसा सलिलेश्वर 10044' भयजस्ते फरार्थिन 12 211 भयज्ञीयाश्च देवता 31571 भयन तस्स ता पूर्व 1240 भयने द्वे चार ह41] भयमसि स्थितो युद्ध 112 90° अयमात्थाय वसुधा 68 31° अयस्मन्तमयस्पतिम् 29 भय चोर स वै सखि 107 120 अय तु तनयो मम 9 620 भय तु मार्गों बल्त 75 भय ते देवि सप्राप्त 99 43° भय त्रैलोक्यनाथस्य 107 786 भय त्वा गरडस्तत्र 91 360 भय देवसमूहस्य 107 26 भय धनीष सुमहान् 96 3 भय तो मया शैल 61280 भय बालो महानन्ध्र 75 17 अय भावये दृष्टो 2 68 28* अयं ममानुजो भ्राता 44 430 भय विज्ञायता कस्य 108 90° फुलपासन 10888" भय स कालो दैत्यानां 38 14 अय स किट युद्धेपु 38 130 भय स नाथो देवानाम् 38 10% भय स निधने हेतु 38 120 भय स निघृणो युद्ध 38 8 मय स पुण्डरीकाक्ष 68 19° भय स रिपुरस्साक 386 अयं स विग्रहोऽस्माकम् 3870 भय स विष्णुर्देवानां 389 भय दि पुरुषोत्कर्ष 108 930 भय शकुस्तथैव च 31 70% अय शिरा अश्वशिरा 3170% अयाचेता ततस्तानि 71 7° अयाजयदरद्वाज 2351" भयाज्यान्याजयिष्यन्ति 116 340 अयादवो यदि भवान् 6640 भयुक्तो गर्हित सद्धि 66 3° भयुताजितु दायाद 10 68° अयुताजित्सहस्राजित् 27 6* अयुतानित्सुतस्त्वासीत् 10 69° अयुतान्येव भोक्ष्यथ 60 250 अगुतैर्वित सितम् 940 अयुद्वेनैव दाशाई 85 30 भयुध्यत जनार्दन 110530 भयुभ्यत महावीय 108 39* अयुध्यतो धृथा ह्येषां 100 10° भयुभ्यस्तेऽपि चाय 110 251 भयोगे केशधरणम् 35 41° अयोधस्य तु दायाद 9 440 अयोध्याधिपतिर्भूत्वा 31 138° भयोध्यायामयोध्याया 44 25° अयोध्या चैव राष्ट्र च 104. अयोनारसृजत्त तु 20 380 अयोनिजा योनिनाव 43101 अयोनिजाश्चापि तनू 43 10° अयोमुख शम्बरश्च 3 66" अरक्षितारो हार 11660 भरक्ष्यमाणामाव 23° भरणीमिव सरधा 5 20° भरण्यमिदमल्पोदम् ] श्लोकपादसूची [अल्पवीमदाश्चय भरण्यमिदमपोदम् 52 13° भरण्यश्व प्रकाशश्व 7250 भरण्य रूढसावलम् 55 51 भरण्यानि च यत्स्यन्ति 117 30° भरविन्दकृतापीडी 52 5. मरविन्दाभनपन 6423 मराज्या ते मजा मूढ 22 28° भरास्त्रीणि च यश्चके 30 22° भरिक्षेपस्सयोपेक्ष 240 मरियमसुरानीके 34 36° अरिष्टनेमिरश्वश्च 24 130 अरिष्टनेमेस्तु सुता 28 440 भरिटनेमे परनीनाम् 3 54" अरिष्टश्च मदाविष्ट 62 69 अरिष्ट चैव जानामि 456° भरिष्ट वृषभ देशि 31 144° अरिष्ट प्रत्याश्यत 64 11 मरिष्टा तु महासरवान् 3 930 अरिष्टा सुरसा तथा 3 45 मरिष्टो दारुणाति 647 मरियो नाम हि गवा 6471 अरिष्टो परिपुत्रश्च 3770 मरिष्टो बटिपुतस्तु 33 20° 44690 अरिष्टो विनिपातित 69 20% मरिष्टो वृपमश्चैव 46 25° भरणावरज श्रीमान् 34 46° मरणो गरुदम्तथा 3 84 {मल्धतीप्रमुखा खिय 73 32° मरन्धती वसु मी 3 26° परन्धत्या व्यजायत 329 बरूपज्ञा तव विभो 69 120 अरूपवन्ति रूपाणि 32 17° भरोगवीरपुरुषा 44 5 भरोगा प्राणिनश्वासन् 31 134 अर्गलेश्वाप्रताडित 37 11 मध्यपाद्यासन दरवा 115 8° भादिसमुदाचार 91 31' भयोग्रतमुजा सर्वे 3924 भचयाम गिरि देव 59 67° अर्चयिरवा विभावसुम् 8 30° मर्थित सर्पकन्याभि 106 490 भयंते दस्युभि|रे 65 62° भव्यमर्थितमन्यनम् 94 230 अर्जुनस्य च नित्यश 62 790 अर्जुनं विद्धि मा कृष्ण 62 81" अर्जुनाभ्यो धक 51 1 भर्जुनाभ्यो घरबने 51 16 अर्जुनायोपपादितम् 10517 अर्जुनार्थे च तान्सर्वान् 62 97" भर्जुनो नाम कारव्या 23 152° भर्णवावासिनश्चैव 38 6° अर्थतत्यविशारदा 107 476 अर्थवाक्यविशारद 109516 अर्थवादपरो धर्म 117 47" अर्थान्लानि चाध्याणि 29 26° भयन्वैनतेयस्था 122 भर्धचन्द्रप्रतीकाशा 44 87° अधचन्द्रस्तथा तीक्ष्ण 110 30° अधंयोजनमायतम् 93 B' भर्धरात्र करिष्यामि 47 350 अध दशकाना शिरस 1042 अर्धन नारी तस्या स 1 37° अर्धन पुरुषोऽभवत् 1 370 भर्यमा चैव धाता च 360° बईते दैत्यसनम 103 920 अलकायामदीनात्मा 91 140 अरकाया विरूपाक्ष 91 51 अलकाया विशालाया 216" भरभन्ती तु सा ताण 546* अरस्य तु दायाद 23 690 भलर्क काशिराजस्तु 23 66" भरी राजपुनश्च 23 63° भलकृता गातरदै 62 650 अरकृतैर्विरानगि 74 30 अल खेदेन माधव 82 2011 भलचक समन्ताद्वै 937 अल दर्पबल दैत्य 38 24 अल दूरप्रवासेन 77 340 भल सरक्षणे तेषा 23 986 अलातचक्रवत्सूर्ण 112 103 मराबुपातमादाय 622 भलाभाद्धर्मशीरिन 117 41 अल्पकक्ष निराश्रयम् 52 136 त्पत्वादभिभूतास्तु 82 29° अस्पवीर्यपराक्रमै 85 62d अल्पवीर्यमदश्चिव 62 470 -15- भपा गम्या परस्य ना] चिकित्सितपाठात्मस्य हरिवंशस्य [भशौचे वर्तमानेन अल्पा गम्या परस्य न 848 भल्पाना बहुभि साधैं 81 52° भरपोत्साहरल्पयरे 85 62° भरकाशा विभज्यन्ते 67 620 अवकाशे स्वया दत्ते 86 37° अवकीर्य च लाजस्ता 96 19° भरगच्छात्मनात्मान 5836* भवगीतमिद सर्पम् 52 90 भवघुष्टे समाजे तु 75 " भवतारयामास महीं 23 390 भवताय महीतरम् 45 38° भवतीर्णेयु मेदिनीम् 446 अवती! भवायेद 68 27° भवतीर्णो महीतलम् 43 76 अवतीर्णोऽर्णयाकार 74 39° भवतीय गृहद्वारि 94 17" अवतीर्य स तादात्तु 92 50% अवदन्यादवा कृष्ण 113 49° अवध्यममरेन्द्राणा 31 63 अवध्यममरै सदा 3 104 भवध्यश्च भविष्यसि 92696 भवभ्यश्चापि न शनु 85 25° अवध्य सर्वभूताना 91 370 अवध्य सर्वसरवाना 67 21" अवध्या देवताना हि 3 740 भवघ्याश्च स्त्रिय प्राहु 5 B2 अवध्या स्याम भगन् 47 160 अवध्यो यो मया सरये 85 60% भवभ्योऽसौ कृतोऽस्माक 84 10° अवनामितपादपाम् 55294 भवन्तिपुरवासिनम् 79 31 भवन्दत महातेगा 39 19° अवमत्याङ्गिर सुतान् 20 290 अवमन्यत दुर्मति 96 24 भवमृद्य दुराधों 96 626 भवर वर प्राथयसे 173° अवरुह्य ततो यानात् 68 15° भवलेपाच पार्थिव 5 14 अवश्य तु मया वाच्य 1056 अवश्य विदशास्तेन 31 520 अवश्य स्विह कतव्य 8627 अवश्यभाविन झात्वा 13 350 अवसक्तैश्च मुद्गरै 33 12 अवस्थाप्य घ तरसन्य 887 अवस्था कृपणा प्राप्त 112 116° भवदन्वाजिनो रणे 25 11' भवातारयत प्रभु 10 660 भवाप श्रियमुत्तमाम् 26 10% भवाप्य तपसो वीर्य 97 21° अविज्ञातगतिश्चैव 3 350 अविज्ञाता तु सा तदा 108 11' विज्ञानान्मया कृष्ण 56 330 भविद्यमाने मासे तु 10 13° अविद्यो दुबर श्रीमान् 89 31° अविरुद्धैश्च पक्षिभि 65 Bd अविश्वास्यमनायुप्य 73 23° अविश्वास्य कृत कर्म 65 81° भविषह्य ततो मत्वा 58 170 अवीजयेता त देव 70 23° अवृद्धाहेण दण्डेन 76 21 भवैक्षत तमग्रत 8551 भक्षत्सर्वतोदिशम् 29 12 अवैष्णवस्य यज्ञस्य 39 27° भव्यन्यौवन कृष्णम् 68 18° भव्यक्त कारण यत्तत् 1 170 अव्यक्त प्रकृतिध्रुव 31 50% अव्यक्त शाश्वतो देव 7 54 अव्यक्ता व्यक्तलक्षणाम् 113281 भव्यक्तो व्यनलिङ्गस्थ 32 30 अव्यवच्छिन्नधारीधै 54 320 अन्युच्छिन्नोऽभवद्राष्ट्रे 31 1390 भशक्तानामिव रणे 112 1010 अशक्तानिव म यन्ते 109 27° अशनीनामिव स्वन 110711 भशपोऽसहशैक्यि 43 29° भशरीरा ततो वाणी 16 भशस्त्र निर्मित पुरा 75 100 भशस्त्र बाहुतेजसा 75 330 भशाम्य वैरमुत्पन्न 65 820 अशाम्य क्लि कथ्यते 3871 अशास्त्रविदिता प्रज्ञा 116 30° भशिव परमानना 109g अशिष्याम्यमरो यथा 70 124 अशीतिचर्मणा युक्त 27 20° अशोभयत्तन धनेन भूरिणा 85 67 अशीचे वर्तमानेन 15 51° 16 मनुवन्ति विधा हुतम्) लोकपादसूची [सिरापेरपर्णा 102 103 भापन्ति निधा हुतम् 38 1 भश्मा दरातपा 3535° भश्मषयलमतापत्यम् 24 360 अश्मश्या जनयामास 2110 भश्मभिशापारी 37 100 अश्मभिधायसघन 36 360 अश्मभि क्षेपणीयैश्च 58 10 भश्मयप्राणि युज्यन्ता 81 34° अश्मयत्रायुधापेता 3178 भइमसारमय नून 56 220 भश्रुतच सुतो जज्ञे 98 1300 अभ्रत श्रुतसेनायै 98 130 भीप पारकस्य वै भक्षाप्या वृष्णय पुत्र 66500 अश्लाघ्यो में मत पुर 66 3" अश्वनीवोऽश्वयाहुध 24 12° अश्वत्थामा महाघुति 7 430 भश्वमेध कलियुगे 115 400 भवमेघ ऋतु श्रष्ठ 115 28" मधमेधन यक्ष्यन्ति 116 33° भश्वमेधन राजान 22 19° अश्वसेनोऽश्वयाहुश्च 28 43° अश्व विचारयामास 10 46° अश्वानुट्रागर्दभाव 3 83° अश्विनादवभिपजो 4420 अश्विनोश्च परतप 92 484 अश्विनी च महाबली 342 113 46° अश्विनी च महीनसी 107 52 अश्विनी भिपना बरौ 8 38 अश्विनी मरतस्तथा 11317 अश्विभ्या वा सुराभ्याम्या 43 bf अश्विम्या साधु 'नानामि 62 934 भश्चाष्ट्रशकृतो राशे 85 230 भटकस्य सुतो रोहि 23 94" अष्टयाहु सहस्रेण 112 66* भष्टभि प्रत्यविध्यत्त 8764 अष्टमस्य तुमासस्य 47 360 मष्टमस्य प्रज्ञापते 83gd अष्टमागमहाक्ष्यां 93260 अष्टमे च मया गर्भ 47 100 अष्टमे मयि गर्भस्ये 47 32° अष्टमे मासि ते स्त्रिया 48 111 अष्टम्या निहतो युद्ध 99 27 भष्टयोजनाविन्ताम् 93 270 अष्टादशापयशंगा 14 120 अष्टापदायरान् 89 49 भधारयो नाम 7923 80° भष्टाविंशे भविना स्व 13 390 भष्टा तानीगर्भान् 43 41 भष्टी भार्या प्रकीति: 9 1' अष्टा महिप्य पुग्रिण्य 982 अष्टौ रथसहप्राणि 93 260 भी शासहस्राणि 91 52092 120 भसामीयमानस्तु 89 29 असायसहित 107 26° डासदलदवेन 307" असकृयाहरतीपु 68 6 असकृसिजिता देवा 106 8° असक्त प रयो याति 103 19° भसत्ता विचचार 3 38d असगगतिभि चिर 81 180 अस कान दिव्य 228° असलो युयुधानस्य 98 270 असञ्जन्यायुना क्षिप्त 76 26° असती यपुष्टमामेता 118 20° अपत्यह नदामध्ये 83 430 भासदेतच्या दूत 44 39° अमद्भिरिव मे मतम् 35 450 असना सप्तपर्णाश्च 59 536 असमौजास्तथा धीर 287° असहन्ती तु स्वां ठायां 8 ४" असहन्ती स्म तत्सज्ञा 831 असकल्पे व्रतश्यिा 35 410 असल्येयानि दियानि 1052 असप्रामेण यो वीर 24 300 असप्रामे हत कस 76 40% मसहप्तोऽयमश्वस्ते 118 14 असप्रदायोऽस्माभि 108 16* असप्राप्तदिवसे 103 30° असशय पुन महत् 8 250 असिनीमावहत्पत्नी 350 असियामय वैरण्या 3g भसिन्या जनयामास 36° भसिचत्रगदायाणा 1105 असितस्य यागदुर्धर्षा 18 22° असितस्यैकपणा तु 13 220 हरि पादसूची-3 17 मसिताम्बरसवीत चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [भह च परममीव असिताम्बरसवीत 70 18° असिभिर्मुसरै शूलै 103 67* असिभि शक्तिभिःशूले 108 220 भसिरोमा पुलोमा च 31 76% 109 40° असीना पात्यमानाना 8776° असुररमा घसर्वश 112 nd मसुराणा विनाशाय 36 20 मसुरानथ राक्षसान् 334 भसुरै श्रूयते चापि 6 250 असृजत्स पुन प्रजा 42 324 असूजरसविता व्योति 59 500 असेव्य दुरतिक्रमम् 57 11 अस्त याते दिनकरे 82 240 अति प्राप्तिश्च नानास्ता 800 अस्तुवरप्सरोगणा 10760 अस्त्रमनविदा पर 112 19, 874 अखमनविदा श्रेष्ठ 11043 अस्त्र प्राशिरस्तेन 112 41" भन महाशिरो नाम 112 370 अस्त्र धारणतेजस्मा 112 234 अस्त्राणा वारणार्थाय 112 25° अस्त्राणि न प्रयोज्यानि 1551° असे विमुक्त बाणेन 11271 अखैरन्ये विनिर्भिसा 37 34* अनरस्त्राणि सवार्य 88 220 भस्त्रैश्चतुर्भिश्चत्वारि 112 26° अस्थनो मजा समभवत् 30 400 भस्मदर्थे सुविहितं 86 140 अस्माकमपि मल्ली द्वौ 65 87* भसाकमिन्द्र प्रहाद 21 21 असाक गौ परा वृत्ति 5921 अस्माक चापि यत्कार्य 109 520 सरमाक ज्ञानसयोग 17 10% धमाक तु वन वृत्ति 35 34 भस्माक पार्थिव पदम् 106 31" अस्माक बान्धवा सर्वे 83 17. भस्साक बान्धवो जात 6380 अस्मादि मे भय कसात् 496 अस्मानाप्याययिष्यन्ति 1 33 भस्मानिच्छन्ति बाधितुम् 85 280 भस्माभिविभकृष्यताम् 38 10° अस्माभिश्चापि दवता 109 63* भसामि सपतन्निस्तु 50 18' भस्मिन्यारे महामृधे 110 49 अस्मिस समरे सर्वे 38 66* अस्मिक मृधे विष्णो 38 633 भस्मिन्महति समन्दे 38 67° मस्मिन्वयसि सुव्यक्त 99 370 अस्मिन्स कारियो नाम 55 480 अस्मिन्स्थाने निवेशोऽय 51336 अस्मिस्तु समये राजन् 21 22° भस्य कुर्मों महाराज 77 490 भस्य कृरया नरेन्द्रस्य 78 260 भस्य शोध समासाद्य 38 10% अस्य गश्चलेपस्य 23 78° यस्य चक्र प्रवृष्टानि 38 120 भस्य छाया समाश्रित्य 38 11 लस्स त्वत्कोधदग्धस्य 78 25° भस्य देवान्धकारस्य 39 170 अस्स पार न पश्यन्ति 39 160 अस्य प्रभस्य महत 100 31° अस्य प्राप्त कृतेन चे 17 gd अस्स नुद्धिविशपेण 65 46° मस्या गर्मोऽयम क्स 46 16" अस्याग्निं पश्चिम दवा 78 2800 भस्यापत्यस्य ते विन 35640 भस्वामुत्पत्स्यते विद्वान् 2 42° अस्थाश्च देव गहाया 43 350 अस्यास्तनुस्तमोद्वारा 40 AM भस्सा हि पीड़ने दोष 41 0gm अस्येत्येव मतिर्मुने 10 124 भस्येद शासने सर्वे 68 30° भहस्वा युधि गोविन्दम् 88 2" महमादी पुरानेन 42 14" भहमीज्यश्च यष्टा 1570 भइमेव च पाटक 10+ 194 आई कदाचिद्गङ्गाया 100 320 अह कसस्य धासासि 7190 अहकारस्तु महत 1 190 महकार च सत्यज 113290 भ६ किलेन्द्रो देवानां 62 430 भई क्रोधश्च कामच 31 450 मह गता नदीमार्य 50 17. बह च का भूतानां 10+ 14* अह च दरवथैव 81 - अह च परमप्रीत 103 280 - 18 भई समो धनीभूतम्] ग्लोफपादसूची [भाप सागरण महं समो धनीभूतम् 104 13. भई सब विधेयामा 4320° महे तु तय पुत्रस्य 35_66° मई ते जननी पुग्न T755. भई ते पर्यंता सत 104 13. भई स्यनेन गोविन्द 67 65". भई स्वभिजितो योगे 47 35. भई यस्याय वसति 69360. अह त्वां दत्य पश्यामि 38 26. भई निमित्तमिति चेत् 115 36". अहं ब्रह्मपुरोगमान 468 भई भूतपतिः पृण 62 330 महं यपि सामानि 104 190 मह यशोदां यास्यामि 47 370 मह य स भवानेव 58 480 भई यास्यामि भद्र ते 8 100 महं युद्धोत्सुस्तात 67 64 भह व प्रथमो देय 60250 भई वाच्यो भविष्यामि 4950 मह वा स्वजन साध्य 65 66° भई पै दुमिलो नाम 73 24 भई चै रत्नभाग्भुवि 15 10 भई स एवं गोमध्ये 78 35". भईस भरनश्रेष्ट 104 महं स्तम्भयिता जगम् 104 121 मई हि पराजयने 65 470 अहिच्छय सकाम्पित्य 15636 महितं स्वस्थ बसस 66 34° अहिस्स सर्वभूतेषु 2020 महीनगोस्तु दायाद 1077 भहप्यत मुदा युन 48 26° भदो कारो महावीर्य 77 120 महो क्षिप्रमदृश्येन 7725 अहो जनार्दनस्यास्स 90 40 भहो तात कृत कर्म 67 470 अहो तारपा पकै 57 7° महो दुष्टस्वमावासि 99 120 अहो धाय च दुर्मने 103 1 भदोधिकिमिदं लोके 109 24. महो धिगिति देवाना 112 63° महो न शोभन राजन् 106 38° महो नास्ति भय नून 109 5" महो निष्करुगा यात्रा 77 230 अहो नीचा पपुपा 65 35. भदो सुपरथोद्मा 81. महो यत न शोमेत 51 30° मही यत विपशा म 7 17. भवो मयातियाल्येन 78 4. महो मे सुप्रिय कृष्ण 02 16. अहोऽयं मानुषो भार 58 35*. अहोराग्रेक्षणो दिग्य 31 23. भहोराश्चतु पाट्या 795. हो या जीवितं स्यतं 71 11 महो वीर यथं शेपे 77 330. अहो धीराल्पमायाया 77 56*. बहो धीर्यमहो धर्मम् 103 17. हो ये मददाय 113 13° मदो श्रुतमहो प्रतम् 2 13. महोऽम्य तपसो घीय 2 130 अंशं स्म नानुयुमसे 44 17. भशारतरण मया 43 696 अंशावतरण विगो 44 130 भशारतरण सो 43800 अशावतरणे वृत्त 44 1° अंशुमन्त तथा कार्य 876 भशुमाशाम वीर्यवान् 10 64 अंदोऽरिम युग्योर्जाता 98 अशोत्सगों महात्मभि 45 14 भशो भगश्यातितेजा 361 आ भा कचाहणादेवि 8120 भाकरिपतसटो रौद्र 673° भाशशप्रभवो वायु 30 38° माकाशमरोरपगु ! 7 आकाशमपि बाणाधे 81 360 भाकासखोपरि रवि 62 25° भाकारा छादयामासु 61 8° भाकास दर्शयामास 103 22. भामाशापुपवर्ष 1 48 16° भाकाशादप्यसबाय 55 44 भामाशादिध गोविन्द 76 28° भागाशे तु स्थितो विष्णु 32 31° आकाशे दर्शिने नदा 103 23 आकाशे शस्त्रसकाशे 62 51° भाकृष्य चैन तरसा 112 80% आकृपय राजराण 10 511 - 19 Ir भाफी पनगेन्दस्य चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ मादाय मणिपर्वतम् भाकी पत्नगेन्द्रस्य 56 18. आफीडे वासवस्य ६ 92 63. भासुद१रवाश्च 31. 82. भाख्यास्यामि मतं तुभ्यं 8 12. मागच्छत द्रुतं देवा. 3. 480. भाग शहरचनात् 9824° भागता च विपर्यन्तम् 50 17. भागतो नाल्मा तम् 90 मागतो भरणे कृते 10 106 भागावहः पृथु. कदः 81. 99% सामीप्रश्चाग्नियाहुश्च 7.9". भायमा एवाच 10 26. आमेयं चैव सौम्य च 113 330 भामयं तं महाभागम् 10 36*. भाप्रेयं प्रशमं यातम् 112 23°. खानेयान्ताहते हरी 11221. भाचा मम केशव 104.74. भाचचक्षे विवस्वत, 8294. भाचारातनया रणे 21 97d. भाचारेणाभ्यलंकृती 7940 आचार्यत्वं चकार ह 18 18* भाचारयेयु शैरास्ते 43 740 [भा]च्छाद्य रूपमनिन्दिता 8 15 भारिद्य मम मन्दाया 77 56°. भाजगाम गृहद्वार 48 22° भाजगाम पुरी रम्या 99 290 भाजगाम महायोगी 85 37 भाजगाम महीतलम् 6224 भाजगाम मुमूर्षत' 76 44 भाजगाम युवैवाथ 9 260 आजगाम वनेचर 50 120 आगाम पडन 8020 भाजगाम समीप वै 86 566 माजगाम हरि सभाम् 31 64d भाजगाम हरायुध 90 भाजग्मतुस्तमुद्देश 42 23° भाजग्मुर्यादवपुरी 100 90 भाजग्मु कृष्णमन्दिरम् 100d भाजयान ध्यधास्य 88 190 आजमीढोऽपरो वंश 23 94 भाजहार च रोकेषु 10 376 भाजहार निरगलान् 29 2431. 1286. भाजहार रजि. प्रभुः 21 23. भाजहाराश्वमेघानां 10 53. भाजहे पितृदायाचं 23 64. भाजानयाहु सुमुस. 31 137°. भाजानुबाहु सिंहास्य. 109 84. भाजीयो य परस्तेषां 81". माझिको नरकवैध 3180 भावक्षयान्वै सप्रामे 15 43. भाज्ञा च देया मल्लानां 72 11". भाज्ञापयत युद्धिमान् 72 6. भाज्ञापयत वीर्यवान् 109 16. भाज्ञापय प्रियं किं ते 1m 10° आज्ञाप्यतां हय केशी 46 251 भाग्यधूम समाधाय 39230 भाज्यनास खुवस्तुण्ड 31 23°, भाग्यमागा प्रवर्तन्तां 38700. भाज्यं महर्षिभिर्दत्तम् 38 11'. भारम ते वपुोम्नि 58 42° आत्मज मां किमारमना 43 394. मात्मजान हथेश्वर. 23 1656. भारमनश्च परस्य च45 110 आत्मनः प्रपितामहम् 115 100. भास्मन. स्वरस्य च 106 17. मात्मनो वा परस्य या 61. मात्मनो विपुल वंशं 27 31° आत्ममायामयं रूपं 09 47. भात्मवृत्तपत्तानि 58 37°, श्रात्मा च विवृत कृत. 66 10% भारमा तेऽह यथा शश्वत् 62 81° भारमानमात्मना वाक्यम् 61 26°81 9° आत्मानमात्मना हि त्वम् 45 38*. मात्मान प्रथयित्वाह 64 आत्मानं मा वपुष्टमाम् 118 33. आत्मान मा च रक्षस्व 107 810 10817. मात्मानं योजयामास 45 490 क्षारमा विशोधित. पापा 28 31. भाददान इब क्रोधात् 110 29. भाददानमयांप्रतम् 58 आदधरस्वोर्जित तेज 35 30. भादशैश्च विमूपितम् 65 56. भादाने कृतलक्षणा 81 550 आदाय बिरमाविशत् 28 16. भादाय भरतर्षभ 29 मादाय मणिपर्वतम् 94 18. -20 भात विमुक्त मुतम् ] चिरित्सितपाठात्मरस्य परिवंशस्य [भाग्योयुनिक भास विमुक्त उतम् 103 43' मानुसोऽय गिरिः पक्ष 61 30° भामुत्य सासामुस 108 68" भायभ्य गोदिनीपुर 29 40 भायमा सर्पतला 61 17° भामाप्य शृणुते 65 ।' मा भूमिपाराम्भोजास्वान् 27 23° भाभोगप्रयणायताम् 55350 माभ्यन्तराध पाहाच 109336 भामय पितरं सात 187 मामय पोरान्धीसारमा 188 आमपाये महारा16 28° आयत्यां च तदारये 1 7221 मायस पायमादाय 625° मायस पाहयन्रथम् 33 ° भायसैनिगडाकार 76 20° भायसैश्च महाचक्र 93 25° मायस परिधै पूर्ण 33 11' भायागभूत क्सस्य 71 39" मायातिर्यातिरदय 22 11 भायातो मथुरा भूय 79 25° मायान्तममणीईर 112 16° मायान्तमथ त दृष्ट्वा 11251 मायान्तमनुगच्छन्ति 113 46° मायान्त पुरुषोत्तमम् 113 611 मायुधागारिक तदा 71 381 मायुधाना पुराणाना 81 550 मायुधानि व्यसनयत् 40 30 भायुधैरुपशोभितम् 32 23 भायु/मानमावमु 21 100 मायुन्या बरग्यानि 117 4" भायुष्मान्कीर्तिमान्धन्य 1 40° भायुस्तन च माना 117 380 भायु कीर्ति धन पुनान् 23 166° भायु क्षेत्राण्युपचय 30 27° भायु प्रक्षवसरोधात् 117 39° भायो पुत्र यशस्विनम् 13 260 आयो पुग्राम्तथा पञ्च 21 11" आराधयन्महादेवम् 85 10° भारुसम्पर्वताग्राणि 92 45* भारुरुक्षुर्महाबाहु 76 250 भारुरोह तत कस 96 57. भारुरोह दिव राजा 85 64° भारोह मुदा युरा 49 130 भाररोह रणे हरि 38 40 भारोह रथ क्षिा 87 58° भारद विहगाम् 02 18 भाररोह सुरद्विपम् 34 3 भारत गट सरें 1136° भारसायनानधान् 8763 भारमा सरिता सा 109 37. मातारात नागम् 622 भाग स तयेत्युस्या 112 86° भारोपयामाम पदा 92 43° भारोपयामास पटरी 71 42° भारोपायरया येगेन 71 51° भारोप्य माह्मण कृष्य 102 220 भारोप्या'मानमारमनि 12 13' भारोह गरट पूर्ण 13. भारोदयपर कृष्ण 561 मारोहणाथै पुर्यास्ते 81 27° भारोदन्ता विमर्दता 81 43° आर्जवास सु यरस से 16 13" आर्तनाद रदन्तीपु 77 220 भातपणिर्महीपति 10 70% भातव पारमात्मकम् 30 42 मार्तस्रालितविक्रान्त 56 17° माति जम्मु सगगणा 61 41° भागानौ विरेजतु 71 30° भाईस्प युवनाश्वस्तु 9 45° भार्य तिछार सहिती 817" मार्य नास्सिन्यने शक्य 528° भार्याध्यजनभूयिष्ठ 85 3° भापं वै सेवता कर्म 35 320 भारानाभ्यामियोत्स्टी 71 6 आलिसद्भिरिवाफाशम् 93 34° आरिखिप्याम्यह सखि 107 64* भारोक्य मधुसूदनम् 94 13d भावनश्च दशाश्व 26 21 भावन्त्यो नृपतिर्महान् 23 1670 भावभृथ्य तथैव च 30 226 आवयोर्गर्भव्यत्यासे 47 37° भावयोर्गाप्रसाश 71 27 भावयादहमात्रेण 58 47° भाग्योभंगवन्युद्धे 21 14* भावयोर्युद्धनिकप 81 6° भावयोरत्वं महामागे] लोकपादसूची [भास्याप सामसी विद्या - भाश्योरव महाभागे 91" भातिमिराभाति 90 ° मानितमुसस्कन्ध 57 19° भावर्तनाभिगम्भीरा 5533 भावतंयति लोकाना 40 12 भावाभ्या भुनभोजनम् 52g शापाभ्यां रोपयुक्ताभ्या 72 24° भाषाहप्रतिवादी च 24 10 28 40° आवाहयस्तदा शीघ्र 110330 मावा खलु न शक्ती व 70 160 भाषा जहि न यत्रोची 42 280 क्षावा ते सचियो स्थाव 17 . भावा देवानृपीच 5 350 भाविकानि च सूक्ष्माणि 92 140 भाविद्धपुच्छो हपित 57 16* भाविध्य परिघ घोर 108 24" भाविवेश सभा शुभाम् 91 31 मावृण्वनाम्यपाद्वीर 828° आता हवनर 8560 आवृत्य दिचि लीलया 34 44' मा वृष्णियशाद्वक्ष्यामि ! 220 मा शापाव कार्दचित् 8 120 भाशाच विचरिष्यति 62 48* माशिषध शुभा पुण्या 117 50° भाशीभिरनुरूपाभि 92 56° आशीर्वादा प्रयुज्यन्ते 5 38° पाशीस्तु पुरुष दृष्ट्वा 117 494 पाश्चर्य इत्यभिहित 100 26* थाश्चयपर्यमशिल 113 820 माश्चर्यमिति ते सरें 50 19° आश्चर्यमेतलोकेषु 100 750 आश्चर्यशब्दो मास्मासु 100 78* माधव धन्यश्च 100 23° पाश्चयश्वच नान्योऽस्ति 113 75° भाश्चयं खलु देवानाम् 100 22* पाश्चय उद्यानसि 104" भाश्चय धनुषो गृहे 71 47" भाश्चय परम विष्णु 30 56° 100 78° भाश्चर्य परम वेदा 100 686 माश्चय भवता विना 70 360 भाचर्य स्खलु लोकानां 100 44" भाश्चर्या चासि भूतेषु 100 49 माश्चर्याश्चैव धन्याश्च 10011 भाश्चर्येणेह रपिणा 7038 माययों भगवाोक 100 60 मानमरधानसपुताम् 55 381 आश्रमान निमगंज्ञा 65 18' आश्रमेषु महाभागान 31 650 आनिता सर्थयादवा 109 200 भामन्शुभानीन्द्रियाणि 32 37° आमनस्थ यदुश्रेष्ठम् 100 21 भासन चामिवर्णाभ 468. भासायाणि विविशु 95 120 बासर विप्रकृष्ट वा 116 10 भासपूर्वयुगे तात 14 1 मामन्ये तुपिता सुरा 3520 भासन्यनेचरा क्षान्ता 1624 छासन्यर्पसहपाणि 91 194° भासन्स्यायभुपेऽन्तरे 784 भाससाद महातेजा 9730 आससाद महायर 8189d भाससाद सुदुर्मति 85 480 भासा विलपमानाना 77 190 भासीत्काशिकुलोदह 23 67 भासीकृष्णाभिपे हि 62 66° भासीचत्ररथिवार 26 40 भासीपर क्यविख्यात 32 10° भासीत्पञ्चवन पुत्र 23 100% भासीत्पुत्रो वृहद्रय 87 18 भासीत्प्रतिज्ञा रेय 56 भासीत्सुधर्मण पुत्र 15 330 भासीदहीनगु म 10776 आसीदिय समुद्रान्ता 6 390 भासीद्वर्मस्य समाप्ता 5 10 भासीद्राजा प्रतापवान् 43 49d भासीद्वत्स प्रतापरान् 6 21" चासीन चैव सोमेन 70.70 भासुरेणान्तरात्मना 44 66 भासेदुस्ते ततस्तत्र 10 48° भासे साधैं तनूजेन 43 15 भास्ता गाठघरी धीरौ 96 47 आता भार्ये तयोस्तस्मात् 27 3' भास्ता मा समुदीक्षन्तौ 70 14 भाम्तीकोऽग्याश्रमपदं 118 9° भारथाय गरडलदा 110 100 भास्थाय तामसी विद्या 108 820 -23 - भास्थाय तिमिरं महत् ] चिमित्सितपाठात्मपस्य हरिवंशस्य [इति मे धीयते मतिः आस्थाय तिमिर महत् 30 180 भास्थाय भुकुटी नरा 109 62 भास्थाय स रथ वीर 8830 मास्थिता गरुड ते 110 20. मास्थितो गरुढ देर 109 884 1138 सास्थितो गरह राम 1107° थास्थिती यदुनन्दन 103 63° भास्यै सरुधिरोद्गार 56 32 भाहस्य दुन्दुभीन्सवें 84 17" भादवा भगवान्ब्रह्मा 62380 माह मा सत्यभामा च 11390 भाइरिष्यति राजेन्द्र 115 41° माहरिप्ये मणिमिति 28 18° पाहर्ता चाग्निहोत्रस्य 21 2 आहर्ता राग्यस्य 10 2300 आइवस्थ शयानो वा 46 220 माइवेषु महासु च 62 80% भाहारमेकपर्णेन 13 170 माहार फलमूलानि 6 130 माहिच्छत स्वक राज्य 1563 भाहुमश्चाहुकी चैत्र 27 180 पाहुकश्चैव नो राना 109 28° आहुकस्य च या स्त्रिय 94 15961 आहुकस्य तु काश्याया 27 250 माहुक प्राह कृष्णस्तु 109 330 माहुक वसुदेव च 136gal आहुक विनयान्वित 95 gd शाहुकी चाप्यवन्तिभ्य 27240 माहुर्वेदविदो विप्रा 319 माहूता रुक्मिणा तेऽपि 89 140 माहूतो पर देवस्तु 89 24 साहूयेदमुवाच ह 1156 माहतो बरणेनापि 115 11 आहृत्य मणिकुण्डले 97 206 माहृत्य यदुसिंहाथै 93 610 माहृत्य यदुसिंहेन 93 540 माह्वयन्निर युद्ध स. 113 10 भाहान तर सचके 72 13° भावृति कैशिकश्चैव 80 10 इ इक्षुमत्सु च देशेषु 62 54" इक्ष्वाकुलनन्दन 31 149° इक्ष्वाकुणा परित्यक 9 43* इक्ष्वाकुधमुपाचच 733° इक्ष्वाकुरभवासुत 9 383 इक्ष्वाकुज्येष्ठदायाद 918 इक्ष्वाकुवराजो राजा 66 5 इक्ष्वशप्रमया 1079° इक्ष्वाश्च नमागध91° इक्ष्वाकोमूरिदक्षिणम् 9 384 इक्ष्यको सस्थिते तात 9 43° इनितेश्चापि वीक्षन्ती 99 10. इच्छन्त्यनुपभुक्तानि 50 17. इच्छन्दहेय पृथिवीं 5 130 इच्छामि पुरुषोत्तम 110 46' इच्छेय युद्धदुर्मदै 110 470 इज्यते यत्र देव स 70 31 इज्यमान निरीक्षसे 39280 इज्यमान महर्पिमि 39 20* इज्योऽस्माभिगिरिर्यने 5921 इटा गर्गशिरास्तथा 367 इडा जज्ञ इति श्रुति 954 इडा सुयुम्नता गला 9 144 इडा धर्मपरायणाम् 99 इतर सुपुये तुम्ब 10 680 इतक्रयताच मानुष्य 17 8° इति कुम्भाण्डवचने 106 32° इति कृष्णस्य ज-मेद 25 170 इति गोपगणा वाक्य 61 20° इति चत्वररध्यासु 95 80 इति चरितमिद महात्मनाम् 118 51° इति तच्छृणु कौरव 101 50 इति त्रामवरस्वन 10721 इति तद्वचन सत्यं 12 400 इति तस्य प्रजापते 5 इति ने समय कृत 5 100 इति भरपतिरात्मचास्तदासौ 118 42° इति निश्चित्य चाप्यहम् 11 19° इति पारिक्षितो राजा 113 83° इति पुरुषवरस्य लागले 90 196 इति प्रकारान्द्वात्रिंशत् 108 43° इति प्राधान्यत स्थिता 982" इति धुभ्यस्त्र भारत 104 1st इति ब्रह्मानुशासनम् 1 37 इति मत्वा शम व्रजेत् 22 386 इति मे धीयते मति 106 576 -24 इति मे यतते मति] लोकपादसूची [इद यज्ञियमातिथ्य इति मे वर्तते मति 1284 इति रोरूयते भूशम् 77 38° इति धा समाप्यते 98 अर इति चाचश्चरन्ति हि 113530 इति विद्याधरोरगा 61 36' इतिवृत्तश्च यहुभि 43 16 इति वेदविद प्राहु 10 इति ज्योधि व्यवस्थिता 13 30° इति श्रुत्वा वचस्तध्यम् 89 420 इति सप्तर्षय सर्वे 25 390 इति सर्ग सनातन 1 190 इति सचोदित कृष्ण 110 430 इति सयोधयकृष्णम् 9671 इति सस्तूय गोविन्द 97 420 इति नेहादभाषत 84 इतिहाससमन्वितम् 1152 इतिहास तमृपिणा 118 40 इतिहासं पुरातनम् 15 66° इतो वय गमिप्याम 19 26° इत्यम्मुपतिना प्रोक्त 45 310 इत्यथै चाहमागत 46 196 [इत्यपद्धचन वदन 50 140 इत्युक्तचन्त तमहम् II 280 12 180 इत्युक्त वाणयुद्ध ते 113790 इत्युक्त पुण्डरीकाक्ष 91 380 [इत्युन प्रवस्ततस्त्वरन् 110 221 इत्युक्त स तु कृष्णेन 85 GI इत्युक्त सनिराक्रामन् 993° इत्युक्त सस्मित कृत्वा 101 15 इत्युन सोधिरूढस्तु 11350 इत्युक्ता पितृभि सा तु 13 3 इत्युक्तास्तत्युजुविधा 18 19° इत्युक्तो रोचयामास 8921 इत्युको निमुना राजा 23 31" इत्युनोऽद्द भगाता 13 1 इत्युक्त्या गरड गते 954 इत्युक्वा चरमाणा सा 108 11' इत्युक्त्वा नारद याते 46 20% इत्युक्वान्तरधीयत 11 411 इत्युक्त्वा भगवान्देव 14 11 19 120 इत्युसरा भरतर्षभ 8s 320 इत्युपत्य सप्तराग्रेण 107 66. इत्युवाच तता हटा 107 42° हारे पादसूची-4 इत्युगाच पुरा ध्यास 97 41% इत्येतदाख्यानमुदाहृत व 118 50* इत्येतद्भद्रमस्तु ते 115 3 इत्येतान्पुरष सर्वान 30 530 इत्येवमनुशुश्रुम 6 130 इत्येवमनुशुश्रुम 1350 इत्येवमाधासयत 118 ] [इत्येवमाह पितामह 31 101 इत्येपमाह्वयामास 89 36° इत्येवमुक्त कुम्भाण्ड 106 38" इत्येवमुक्त कृष्णस्तु 109 24 इत्येवमुक्त प्रहसन् 106 14, 21* 113 41" इत्येवमुक्ता बचन 107 44 इत्येवमुक्ता रुदती 107 390 इत्येवमुक्त कृष्णेन 109 320 इत्येवमुक्ते पचने 107 47", 57° 108 89* 109 46', 579, 70%, 76° 110 660 111 इत्येवमुक्त्वा प्रदसन् 110 59" इत्येवमुक्त्वा वचन 112 620 इत्येवमुशवा सरथ 108 80° इत्येवमूचुस्तेऽन्योन्य 109 15° इत्येर हा रुदन्त्यश्च 109 90 इत्येव बापपूर्णाक्षी 107 30° इत्येव याचितो वर 3 63° इदमायद्भुत कर्म 90 15 इदमन्तरमित्येव 19 170 इदमस्त्र महाघोर 113 244 इदमाद प्रियवद 61 26 इदमेवविध कृत्वा 1097 इद कर्म त्वया कृष्ण 109 42 इद कलियुग विद्धि 85 53 इद किं विति सस्ता 50 250 इद चक्र समुद्यतम् 112 103* इद च वाक्यसदर्भ 17 11 १६ जात हलायुध 110 131 इद तु ते कार्यतम 107 BEN इद तु सुमहत्कष्ट 10930° इद तृतीय वक्ष्यामि 7 140 इद ते सतत सौम्य 77 70 इद नरहय युद्ध 67 64' इद भगवते त्वया 81 इद महाकाव्यम्पेर्महात्मन 118 43° इद यज्ञियमातिथ्य 3925 25 इद रूप न शोभते] चिकित्सितपाठात्मक्स्य हरिवंशस्य [ईवय प्रराम जन्म इदं रूप न शोभते 8 916 इद वचनमब्रवीत् 29 9 102 14, 20% 109 38" इद वचनममुवन् 75_92 31610958 इद वचनमुत्तमम् 85 530 इदं शृण्वतराधिप 22 450 इद समुस्थित घोर 85256 इन्द्रकूटश्च नामत 103 16. इन्द्रकेतुप्रतीकाश 93 16 इन्द्रजिस्सर्य निश्चैव 3 68 इन्द्रतापनवातापी 3176° इन्द्रधुम्नसर प्रति 93 644 इन्द्रद्युम्नो हत कोपात् 97 6° इन्द्रसेना यतो गर्भ 23 99° इन्द्र पुनो निहन्ता ते 3 100% इन्द्र समुपनृत्यन्ति 348 इन्द्र स्थान तथोत्तमम् 21 36 इन्द्राचव धनजय 24 230 इन्द्राणीमर्चयिष्यन्ती 87 320 इन्द्रादवरजोऽभवत् 32 5 इन्द्रेण सह सग्राम 77 270 इन्द्रोत शौनक राजा 22 11 इन्द्रो भवामि धर्मेण 21 20° इन्दोऽसि तात भूताना 21 25° इममर्थमनर्थवत् 5 114 इम ते पितर वृद्ध 77 64° इम नारायण हत्वा 38 16° इम मे प्रियदर्शने 83 48. इम श्लोक सहाथै व 1830° इम सलिलसक्लेद 43 41° इमानि मणिरत्नानि 92 100 इमान्प्राणेश्वरान्गृह्य 47 270 इमान्यासनराधिप 16 19° इमामवस्था नीता व 107 386 इमामवस्था नीतासि 107 380 इमामवस्था नीतोऽपि 108 96 इमामवस्थां पश्यन्त्य 774° इमाश्चोदाहरन्त्यत्र 27 196 इमारते किं करिष्यन्ति 77 53° हमा च माया गृह्णीव 35 690 इमा मिथ्याभिशस्ति य 28. 450 इमा विसृष्टिं विज्ञाय 26 28. इमा हि सृष्टिं दक्षस्य 2 66° इमाः समभिगच्छन्ति 100 45" इमे ते कुण्डले देव 91 59° इमे ते पृथिवीपारा 81 10° इमे ते ब्रह्मणा साध 40 37° इमे त्वा त्वरयन्तीह 49 13° इमे स्वा ब्रह्मविदुप 40 380 इमे स्वा सप्त मुनय 40 40° इमे नो यान्धवास्तात 56 280 इमौ च वारको मझ 8 11 इमौ ते श्रवणौ शून्या 77 8° इमौ निपतितो भूमौ 51 30° इयमप्यायतापाङ्गी 43 27° इय च स्वा सरिच्छेछा 43 40° इय च माधुरी भूमि 8486 इय द्वारवती नाम 8660 इय हि प्रकृतिष 113 390 इयेप बरवान्दय 67 320 इरावत्या महाभोजी 979 इरा वृक्षरतावल्ली 3920 इरिण सदन सर्व 67 100 इरिण समपद्यत 53 100 इला नाम तु यस्यासीत् 23 450 इल्वर खसमस्तथा 3771 इप अजस्तन्पश्च 7 10 इपीकास्तम्बमासाद्य 20 38° इधुसाहा निकुम्माश्च 59 640 इधर्मेषु लोकेषु 78 120 इष्टश्चासीन्मदारमन 23 111 इए दान तपो नाम 117 480 इष्टे देशे न्यवेशयत् 94 230 इश्या भरतसत्तम 94 इह त्वै जातसवृद्ध 65770 इह वास्ते त्रिनयन 10656* इह त्वा नाभिजानाति 9921 इह धर्मार्थकामाना 117 50% इह सपतितो भुवि 100 80° इह सौहृदता यातु 62 840 इहापि यशसा युक्त' 78 10° इहासावाक्यमब्रवीत् 92 320 इहैव मामभिगच्छस्स 83 28° ई ईजे ऋतुशते पुण्य 31 141" ईन्यो यज्ञरसोऽव्यय 367" ईतय प्रशम जग्मु 62 63* 26-- ईतिं पृकाणां रवा ] ग्लोफपादसूची [ उत्तमा च पृथिव्यां ये ईति कागा रट्वा तु 53.11. इंट भयमागतम् 77. 314. इंडशः कामसंकाशः 99. 95. इंशो जनितः सुतः 66.". ईरयन्मुखनिःपास: 36. 51. ईशा भवन्तस्तस्येति 96. 3. ईशो न म व्यकम्पत 36. 30'. ईश्वरस्य हि तस्येमा 32. 2. ईश्वरः पक्षिवाहनः 93. 8. ईश्वरः स महाबल: 87. 274. ईश्वरानुचरो हरिः 94. 16". ईपत्तमःसंवृतासु 68.2. ईपद्विगाहमानायां 68.9. ईइन्ते काष्ठशभिः 117. 34'. ईहया सुखिनो लोका: 16. 25. ईहामृगगणाकीण 33. 4". ईदामृगगणाकीणों 86.23. उक्तस्तस्मादधोक्षनः 96. 324. उक्तः संरब्धया वाचा 43.21. उक्ताश्च यस्साघुष्माभिः 12 34*. उकास्ते विस्तराः सर्वे 113.730. उक्तोऽद्य वचनं प्रियम् 106 35*. उक्कोऽयं हरिवंशस्ते 115. 11. उक्त्वा चान्तहिता क्षिप्रं 107. 85°. उक्त्वा स्थपतयस्तदा 86. 15. उक्थ्यं वृहद्रयं चैव 104. 1. उग्रसेन इति ख्यातः 44. 60°. उग्रसेनपुरोगमा: 79. 26.86.8". उग्रसेनसुतस्य वै 46. 24. उग्रसेनसुतं भुवि 45. 4. उग्रसेनमुतः कंसः 96. 26*. उमसेनसुतापाय 48 31". उमसेनसुते शान्ते 67.63. उग्रसेनसुतो राजा 65. 11. उमसेनस्तु कृष्णस्य 78. 1. उग्रसेनस्स्वयं शोच्यः 66.7%. उमसेनस्य रक्षार्थ 98 28. उग्रसेनस्य रूपेण 73. 18. उमसेनस्य हस्तिप 73. 36. उग्रसेनहिते स्थितः 80.. उनसेनं च राजानं 95.86. उग्रसेनं नरपति 86.76*. उग्रसेनं न संशयः 68. 334. उनसेनं पुरस्कृत्य 95. 17°. उग्रसेनं विचेतसम् 77. 47. उग्रसेनः सहापत्यः 27.30% उग्रसेनात्मजे करे 87. 46. उग्रसेनानुगौ भूत्वा 79. 40. उग्रसेनोऽभवदाना 80. 6. उग्रसेनोऽभिषिक्तश्च 83. 11'. उग्रसेनो महीपतिः 78. 40*. उग्रसेनो यदून्गृह्य 78. 16. उग्रसेनो ययौ राजा 94. 14'. उग्रायुधस्य राजेन्द्र 15. 38. उमायुधः कस्य मुतः 15. 30°, उग्रायुधः स चोरिसक्तः 15. 299. उमायुधेन यस्यायें 15 28. उमा हिंसाविहाराश्च 16. 15. उग्रेण तपसा तस्याः 26 18. उग्रेण पृथिवीं जित्या 23. 141'. उग्रेण विधिना जिता 23. 144. उग्रे परमदुर्धर्षे 112 38. उच्चावचानि भूतानि 1. 36". उच्चैःश्रवसमश्वानां 4.8. उन्द्रित का महन् 93. 39. उच्छ्रितेन समीपतः 47. 44'. उच्छ्रितेनामहस्तेन 36 65*. उच्छितैः श्यामपर्वभिः 57.6. उच्छ्वसन्तीव पर्वताः 54 . उजहारारिसूदनः 30 11. उजहाराणवान्महीम् 65. 40". उजानक इति स्मृतः 9. 52". उत्कणों नष्टचेवास्तु 67. 36'. उत्कलच गयश्चैव 9. 15 उत्कलस्योत्तरा राजन् 9, 16". उत्तङ्कस्तु वरं मादात् 9.76*. उत्तकस्य नियोगाद्वै 9. 65. उत्तई दर्शयामास 9. 750. उत्तडून महात्मना 9.61'. उत्तमश्च हयेन्दाणां 67.20. उत्तमस्त्वं च मत्येषु 60. 6, 7. उत्तम वपुरास्थितः 32. 31'. उत्तमागारिकाश्चान्ये 74.13%. उत्तमाङ्गगताम्तस्य 61.49". उत्तमा च पृथिव्यां वै 86.29%8 -27 - उत्तमौजाश्च शल्यध] चित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [उदानो व्यान एव च उत्तमौजाश्च शल्यश्च 81 45* उत्तरस्या तथा दिशि 27 236 उत्तरस्यां दिशि तथा 7 80 उत्तर नगरद्वारम् 81 43° उत्तर नरवाहन 34 181 उत्तर नृपते सुत 78 44 उत्तरान्ते समुद्रस्य 30 18° उत्तरान्स कुरून्प्राप्य 217 उत्तरापथदेशस्य 9 40 उत्तरा च धनाधिप 38 684 उत्तरा दिशमत्यर्थे 93 16 उत्तरेण गिरेस्तदा 12 उत्तस्थुरपरिधान्ता 3720 उत्तस्थु प्रीतमनस 60 190 उत्तानपाद जग्राह 270 उत्तानपादाचतुर 270 उत्तानपादाऽजनयत् 290 उत्तानशायिन दृष्ट्वा 68 18d उत्तारयितुमर्हसि 69 171 उत्तिष्ठ गच्छ दुर्मेधे 51 24° उत्तिष्ठत इति भुवन् 36 650 उत्तिष्ठति बजे तस्मिन् 53 13° उत्तिष्ठतु भवाशीघ्र 109 750 उत्तिष्ठदुदका सर्प 5640 उत्तिष्ठ नरशार्दूल 77 58 उत्तिष्ठमान शुशुभे 53 14° उत्तिष्ठ शतपत्राक्ष 40 41* उत्तिष्ठोलिष्ठ बाहूनाम् 106 170 उत्तिष्ठोत्तिष्ठ भद्र ते 107 25% उत्तिष्टोत्तिष्ठ वत्सेति 48 44° उस्थिता पृथिवीतरान् 87 344 उत्पतन्द्रिरिवोरगे 81 180 उस्पतनिश्च गगन 3540 उत्पतेयुरथाकारा 43 74° उत्पतिश्च निरोधश्च 2 53* उत्पत्ति विस्तरणव 31 उत्पत्य चासत्पाद 67 37* उत्पत्योत्पत्य गगनात् 61 41° उत्पत्स्यति पुमानीच 73 34° उत्पबदोपप्रमव 10657 उत्पनमानश्चोवाच 35 61° उत्पम कुमुद चैर 98 18" उत्पनान्सत मानसान 3 96* उत्पना ये कृतयुगे 117 20° उत्पना ये स्वधाया तु 13 61 उस्पसा वाचि धर्मेण 28. उत्पशास्त्रिदिवौकस 43 44 उत्पपात गृहीत्या सा 108 6° उत्पपात रश्चापि 81920 उत्पपात रथाद्वोर 88 230 उत्पपाताशु शयनात् 42 24° उत्पलानि चनौलानि 59 410 उत्पाठ्य पर्वतानेप 107 160 उत्पाव्य बलिना वर 89 450 उपाय्य यमदण्डवत् 64 20% उत्पाट्यारोपयामास 92 65° उत्पाता बन श्यन्ते 51 33° उत्पादयामास तदा 20 440 उत्पाद्य त्व वसूशीघ्र 43 450 उत्पेतु सहसा स्वेभ्य 109 130 उरफुल्वाम्बुजपत्राक्ष 31 610 उत्सङ्गे पुत्रगृद्धिनी 77 41° उत्सनसत्यसयोग 43 60° उत्सनसचयतृण 5215° उत्ससर्ज महार्णव 86 380 उत्सहन्ते नराधिपा 41 120 उत्साहनाशात्सर्वे वै 109 67° उत्सृजस्व महाभुज 86 25% उत्सृज्य मथुरामाशु 85 35° उरसृज्य सागरे वास 5549* उत्सृज्योत्सृज्य गच्छन्ति 112 8° उत्स्रष्टुमिह तोयराट् 86 344 उदरप्रवणसश्लिष्ट 72 4 उदगच्छद्दिवाकर 703d उदगायनमप्यग्नौ 13 07 उग्रायतनूरुह 68 211 उदष्ठित्पुनलोयात् 70 290 उदतिष्ठद्धपीकेश 40 42° उदतिहज सर्व 53 12° उदपानपु शोभना 60 111 उदभारमहा सर्वे 729 उदयास्तगचण 34 21 उदयास्तमयाविह 3 57 उदरेपु न्यानाणा 54 16° उदानो शरीरिण 30 48d उदानो व्यान एव च 304 28 - उदीक्षमाणावन्योन्य] श्लोक्पादसूची [उपादाय । पदभी उदीक्षमाणावन्योन्य 70 30% उदीय रियतेन्द्रिया 92 31' उदीची कौरवर्षभ 102 234 उदीच्या दिशि दुर्धर्षे 4 11 उदीयैश्च महापीय 81980 उदेशत सतोऽहसन् 108 56* उद्गाता प्रथमधिनाम् 44 110 उद्गाग्राम्रो होमरिन 31 25° उहिश्य देवानुत्सृष्टं 20 33° उद्देशतो धर्मशीला 1176 उद्देशेन नरश्रष्ठ 17250 उत स्वेन तेजसा 34 300 उस्यो देवभागस्य 24 25° उन्दतानीद सपा 66 220 उद्धतश्च महाबात 43 320 उद्धृता पृथिवी देवी 31 30° उद्यच्छनेव सहसा 48 28° उद्यतस्येच सूर्यस्य 76 ° उद्यत घोरदर्शनम् 660 उद्यत द्विपता हेतो 33 130 उद्यत किल पापात 67 50° उद्यतायुधनिखिंशा 38 30° उद्यते धारणास्त्र तु 112 23° उद्यद्भास्करवर्णाभ 93 40* उद्यजित निशाकर 11071 उद्यस्य च परश्वधान् 108 53" उद्यम्योतमतेसम् 34 360 उद्यानवनसपना 44550 उद्यानधनसबाधा 934 उद्यानानि शिला शैरा 109596 उद्यानेषु सम तत 109 36* उद्यानरपशोभिता 8646 उद्योग विपुल चा 33 1 उद्दरपुकारणात् 11418" उदासयति दर्पित 44 244 उगमगमत्कस 651 उन्ननाद सिंहयत् 89480 उ मध्य सहसा कृघ्या 87 410 उन्मार्गानीतमागा सा 83 390 उन्मुसो नित्यवित्रस्त 16 23 उन्मूलानय वृक्षोस्तान् 2 37" उपगम्य जनार्दन 95g उपगम्यानपीदेतान् 2 38 उपजदुन्ततस्तस्मै 83 21 उपतस्थुमदायलम् 31b8d उपतस्थुमुनिगणा 362 उपतस्थु कुरप्राध्या 862 उपतस्थु सहाप्सरा 48 174 उपतस्थु सुरगणान् 34 33° उपतस्थे गज हित्वा 62 8° उपतस्थे गदाग्रजम् 8604 उपतस्थे महात्मान 408° उपदानयी सुतारेमे 23 470 उपदानवी क्ष्यशिरा 371 उपनिन्युर्महाभागा 23 79° उपनियुस्ततस्तानि 92 80 उपनिन्ये जनार्दने 103 उपनीतोत्तरच्छदा 721 उपनीय पयो घृनम् 69 29* उपप्रेक्षत तजस्वी 85 17° उपलुतक्षणा नित्य 69 100 उपवाह्य कराया 275 उपभोगेन शाम्यति 22 379 उपभोगै परित्या 5544° उपमद्गुम्तथा मद्गु 24 ° उपयुज्य च गा सर्वे 16 130 उपयुञ्जन्त भारत 16 191 उपयेमे महाबाहु 88 40° उपयेमे हपीरेश 88 43° उपर्युपरि तत्रापि 62 29° उपलभ्य यथाविधि 86 1sd उपविष्ट ततो राम 83 55° उपविष्टानुवाच ह 96 243 उपविष्टेषु सर्वेषु 895 उपसर्यो भवाम्बार 67 196 उपस्थानगृह यत्र 9352 उपस्थाय च गोविन्द 103 16° उपस्थितश्च भाऽद्य 1 41* उपस्थितेऽतियास 347 उपस्पृष्ट च तीर्थयु 46 10 उपस्थापास्तथैव च 28 33* उपाकमाष्टरुचक 31 270 उपागम्य भयादसान् 1027" उपातिष्ठन गोविद 91 58° उपात्तयज्ञो देवेम्य 115 390 उपादाय तु वैदभी 898 उपाध्यायस्तु देवानां] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ उवाच वदतां पर उपाध्यायस्तु देवाना 23 117 उपानीयत वारणी 83 196 उपायत समारब्धा 5604 उपाय पश्य येन त्व 550° उपाय शृणु मे विभो 45 m उपायादुपपादिता 91 92d उपायाद्वारकां विष्णु 92 70° उपायान्मथुरां तत 8070 उपायेन महामना 85 65 उपाय शास्त्रचिन्तकै 15 55 उपायो लोकविश्रुत 43 656 उपावर्तन्त सर्वश 31874 उपावृत्तमहापथा 86 511 उपावृत्तासु चै गोषु 68 64 उपासनस्तथा मद्गु 28390 उपासनस्य तु सुती 98 17° उपासतश्च देवेश 14 120 उपासाचक्रिरे दैत्या 47 13° उपासाचक्रिरे विष्णु 40 10° उपासाचक्रिरे हृष्टा 64 24° उपाशुवतमास्थाय 1030 उपेक्षसे दानवेन्द्र 10875° उपेक्षित इच व्याधि 65230 उपेतानि नृहर्पणे 93 300 उपेन्द्र इति कृष्ण त्वां 62 440 उपेन्द्रप्रमुखास्तदा 95 120 उपोपविविशु प्रीता 96 20° उभय जयता वर 1564 उभयोरपि तमासीत् 109 73° उभयोरेव एतयो 44 47° उभयोर्देवदैत्ययो 11276 उभयो सेनयो राजन् 81 91 82 6° उभाभ्यामपि सयोगे 62 73° उभाभ्यामभवोर 7529° उभाभ्यामभिवर्धित 114 14 उभाभ्या चापि विद्विष्ट 73 3. उभावपि सम प्रेम्णा 498" उभारपि समाहिती 114 121 उमावस्यवदत्तदा 92 561 उभायेकगारीरी स्व. 58 46* उभे कंसस्य ते भायें 80 3. उभे सध्ये पुरी घोरा G6 26° उभी पददिवाकरी 797 उभी तारपि कृष्णेन 97 10° उभी तावपि पर्वसु 79 8 उभौ तावभिनग्मतु 79 31 उभौ तौ परमाचार्यों 82 120 उभौ पुरुषसत्तमौ 98 20 उभौ रामजनार्दनौ 7940 उभौ विविशतुर्वीरौ 96 61° उ मा इति निषेधन्ती 13 18° उमा तासा वरिष्ठा च 13 21° उमेत्येगभवत्ख्याता 13 19° उरगाधिपति साक्षात् 55 48° उरश्चास्योरसा हन्तुम् 67 320 उरसा पातयामास 38 480 उरोमि समपीडयन् 63 23° उर्वशी वरयामास 214 उर्वश्या सहितो राजा 21 8° उर्वश्था नज्ञिरे यस्य 20 44' उलूक कैतवेयश्च 81 440 उलूकी प्रत्युलुककान् 3 82 उल्का निर्यातनादेन 66 276 उल्लिसन्खे गभस्तिभि 6625* उवाच कसो नृपति 72 15° उवाच किं मया कार्य89 उवाच कुम्भाण्डसुतां 107 67° उवाच चैन कुपिता 197° उवाच चैन भगवान् 19 12" उवाच चैनाश्चतुर 100 68° उवाच चोग्रसेनस्य 466° उवाच त्रिदशै सह 85 43" उवाच देवता सर्वा 32 31 उवाच परमप्रीता 19 240 उवाच परम याश्य 411 उवाच परमाद्धतम् 107 220 उवाच भगवन्गार 45220 उवाच भरतश्रेष्ठ 11 20 उवाच मधुसूदन 95 184 उवाच मुनिरय्यय 100 21 उवाच यदुनन्दनम् 86 40" उवाच यदुमसदि 78 17 उवाच राजा गोरिद 85 86" उयाच रुदती वाश्य 77 47" उवाच पचनं धीमान् 109 46* उपाच पदतां वर 5778035 उवाच बदला श्रेष्ठ 3 लोकपादसूची [यमामयजुषा सस्यम् F । उवाच पदता श्रष्ठ 22 26° उवाच चैन्य नाधर्म B4 उवाच व्यथिता देवी 7330° उवाच शुभया गिरा 38 640 उवाच हृदि मनवित् 81 उवाचेद वचोऽर्थवत् 109 66" उवाह मधुसूदन 92 360 उवाइ महिषी भोजा 740 उदाह लीलया पक्षी 92 43° उशत शत्रुतापन' 261 उशतो यज्ञमखिल 268 उशदयो महाबाहु 23 26° उशना तस्य जग्राह 20 31° उशना वाक्यमरवीत् 34 611 उशीनास्य पल्यस्तु 23 21 उशीनरम्य सुवास्तु 23 220 उशीनर च धर्मज्ञ 23 200 उपया सह सयुक्त 108 12 उपा कमललोचना 107 30% उपा नाम सुता तस्य 109720 उषा भाव हदा चक्रे 107 130 उपा मनोरथ के 107 100 उपाया दर्शयामास 107 67° उपाया वचन श्रुत्वा 10779° उपायो धर्पिताया हि 108 16* उपाया पर्वतारमजा IoT II उपा तो इसतीशने 107 611 उपा पर्वा समागता 107 311 उपा इयती शनै 107 111 उपिरवा परिवत्सरम् 1 26° उपेमा भकिमेव स्व 107 23° उप यदुना देग्यासि 107 40% उपे शीघ्र स्वमप्येव 107 10 उपे गृणुष्व कल्याणि 107 14 उष्ण पास्यामि शोगितम् 48 350 उष्णीपिणो मुकुटिन 31 86° उद्यमान इवैकेन 58 30° उद्यमाना समन्तत 10846 अनुरध्रुपरीताक्ष्य 107 310 अचुरमजयाय स्व 21 19° अचुमहर्पय 58 उचुमी सात्ययुगानि 100 56 अचुवैषस्यतेऽन्तरे 346 अचुश्चन नृवीरास्ते 9660 उचुश्चैव नभोगता 75 300 अचुस्ते पितर कन्या 13 31° अचु सर्वे सुसमीता 56 420 उनपोडशवर्षाश्च 116 11 उने वर्षशते चास्या 3 105° उरप्रभृतयो राजन् 7290 उरुयेगमतिक्षिस 37 430 ऊरु पू शतद्युम्न 2 17* अरोरजनयापुत्रान् 2 18° उर्जा जाता सुतेजस 7 150 अर्ववाहुर्महाधुति 2020 अर्वयाहुश्च सोमज 7 22 अर्वमाचक्रमे तस्य 2050 ऊर्वमाचक्रमे पक्षी 952 अर्चमाचक्रमे बरी 91 400 अर्घ्य रेतसमव्ययम् 85 8 ऊध्र्यलोमा मृदुस्वच 109 83° अ चापानि बाह्यन्ता 81 34° उर्वस्तु तपसाविष्ट 35 48° अघस्योरु विनिर्भिद्य 35 50% उपराबहुला भूमि 1161g अपु सरुध्य मथुरा 80 17" रक्ष एवं महारथ 23 112 सक्षचविनदान 108 Br° वृक्षराजस्य समताम् 28 280 ऋक्षराजो महाबल 28 16 क्षन्त गिरिवर 28190 रसवन्त गिरिं चैव 109 35° अक्षवन्त गिरि जिरवा 2014 अरक्षस्य तु द्वितीय 23 114 ऋक्ष साजनयामाप 23 106° ऋक्षारसरणो जज्ञे 23 101% ऋक्षेण निहतो दृष्ट 2821 ऋक्ष सह यथायोग 38 89" ऋक्सामयजुपा घोष 31 139* ऋक्सामयजुषा सत्यम् 10068" ऊचतुर्यशियोध तत् 9 ऊचतुयुद्धसमत्ती 72 220 उचतु प्रीतमनसा 42 276 ऊचतु सहचारिणी 171 31 ऋम्भिर्यजुर्भि सामभि ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ एकलव्यस्य पुत्र च ऋभियंजुभि सामभि: 2012 ऋचवाथर्वणानि च 104 190 ऋचीकस्य महात्मन 7 31 मनीकाजमदग्निस्तु 23 850 अचेयुतनयो राजन् 23 430 अचेयुश्च जलेयुश्च 230 कचेयोस्तु महाराज 23 420 ऋचो ब्रह्मर्पिसत्कृता 3 54' ऋचो यजूर्षि सामानि 1 35° ऋजुप्टिलता यथा 71 324 ऋज्यासीनो यथान्याय 109 66° ऋपांच विनयभ्रश 116 28° अण वै प्रतिकर्तव्य 69 24 ऋतुपर्णसुतस्त्वासीत् 10 70° स्तुपो महायशा 106 ऋतवश्व भविष्यमित 11614 ऋनद कारयोगाव 30270 ऋतब सप्रवर्तन्ता 38780 ऋतुचक्र प्रभवति 9 810 ऋतुपर्यायशिथिल 59 43° मते तु पृथिवीं लोके 100 47* झते देवप्रसादाई 1980 ऋते राम महाबाहु 101 17° ऋत्यिपुरोहिताचार्यान् 1156° ऋत्विाग्द्विमूर्धा दैत्याना 6260 ऋत्विग्भिर्देवक पैश्च 15 46° ऋत्विजश्चाप्रवीकुद्ध 118 18" ऋविन पायिवाश्चय ICT ऋवि समृद्धि विपुलाश्च भोगान् 31 1530 अश्यशामभावेन 23 370 अपभाक्ष निरीक्ष्य तम् 92 30% पय सह गन्ध 38 370 कृपय सप्रचक्षते 40 19* अपय सशिसया 40 381 अपय साप्रस दिधि 7 314 ऋपयोऽग्न न मुह्यन्ति 2 534 ऋषयोऽय मया मोक्ता 7 10 पयो देवता यशा 104 19° पयो या न मा शाप 3142" अपपो येदपारगा 23 11' ऋपिकारिद्राणी 117 206 पिकान्ता महायगा 9730 अपितमजुतवीर्यकर्मणाम् 181 ऋषिभिदवगन्ध 13 17, 50 मापिभिश्च महाभाग 109 866 मपिभिस्ती नियुक्छौ तु 5 370 ऋषिभि पूजितस्तैस्तु 40 10 मपिभि भूयते चापि 6 16° पिभि समुदाहृता 117 48" मपिमध्ये सुरेषु ३ 62 74 ऋपि तोऽत्रिवशे च 23 ga मपिवशेषु भगवन् 35 26° अपि नाम्नाथ देवरम् 3 37° मपि विज्ञापयामास 35 25° पीकाधिपतिस्तथा 89 181 अपीणामिव वो वृत्त 65 18° मपीणा कदन कृत्वा 38 59° ऋपीणा च स वर्तते 91 356 ऋषीणा ब्रह्मवर्चसाम् 3921' कषीणा मानुपाणा च 916° ऋपीन्देवान्सगन्धर्वान् 3 3° मस्तेपा प्रवक्ष्यामि 76* ऋपेरगिरस पुत्रा 7 29° रुपे परिपदा श्रुतम् 118 10 ऋप्यन्तरविवाहाश्च 23 90* एक एव ज्वरो लोके ॥lga एक एव तुकार स117450 एककार्यान्तरगता 51 40 एकचको महागहु 3 66° एकचों महाधीयों 51 एकाप्कृतकारिण्य 77 17° एक्देदानि तिष्ठन्ति 35 280 एकदेदो द्विधा त 56264 एकदही द्विधा कृती 51 एकदही महायलरी 58 480 एकनिमाणनियुको 5130 एकपसरामशिष्यन्ति 1167° एकपनीयतामिद 73 21 एकपादा द्विपादाश्च 33 26° एक्प्रमाणो लोकानां 51 0. एकमायशरीरक्ष 50 26' एकमप्रघरी काम्ती 51 एकमागपरिक्षिक्षा 9320 परमासीनमेशाम्त 806." एकरम्पय पुन र 87. 92 एकलव्यो महाक्षन] लोकपादसूची [एतन्मे सर्यमाचव एकरव्यो वृहत्क्षत्र 81 44° एकलव्यो महाराज 24 27° एकवर्णा वसुधरा 54 130 एकविंशरछतानि घ91 131 एकवेणीधरा सर्वा 91 13 पकवेणीधरा स्त्रिय 92 26° एकवेपधरावेक 51 3 एकाद्धास्तथा मार्य 116 3500 एकशय्यासनाशनी 51 एकशङ्गा इति ख्याता 13836 एकश्चक्रधर श्रीमान् 42 62° एकश्च मे मतो राशि 111° एकस्तम्भश्च भूषितम् 72 3 एकस्त्वमनपत्यश्व 35279 एकस्वमसि रोकाना 62 19° एकस्रव पुरषोत्तम 100 220 एकस्थानचर कृत 52 381 एकस्य शिशुना गती 51 एकस्यार्थाय यो हन्यात् 6 14 एक गोग्राह्मण स्मृतम् 45 25d एक मृदुतर मेने 42 170 एक वशधर स्वेका 10 b6%, 57" एक सहस्रशस्तत्र 108 44° एक पश्चानो नाम 10 63 एक त्रुनिबईण 107 510 108 424 एक शोको हि नारीणाम् 69 14" एकाक्षश्चन्द्रहा राहु 31 77° एकास प्रयतश्चैव 4 23 एका तत्र निराहारा 13 186 एका रव भोक्ष्यसे जगत् 47 56 एकादश सदस्राणि 109790 एकादशते कथिता 3 440 एकानोति मानपा 9614 एकानोति यामाहु 96 11 एकार्णवगति प्रभु 31 28 एकाणवते लोके 30 16" एकाणाडे प्रयाम् 31280 एकाणवविमुक्त च 62 620 एकार्णवाम्बुनिचये 42 20% एकाणये तदा लोके 42 25° एफाइमिति मे मत्ति 14 12s एकाहे महागहु 1017 एवेन व तदुमय 118 30° एवेन समुहतेन 109 80 एपेनामरपग्रेण 55 100 एकैकस्योपरि सदा 108 47 एकैक तर चोद्यान 109 36* एकैक शतशो राजन् 109 590 एकैक सतथा चके 3 108 एको वैवस्वतस्तेषां 7 39 एतथा निवर्तितम् 1121 एतच्चानुमत मम 45144 एतच्छ्रत च दृष्य च 10424" एतच्छुत्वा कुरुश्रेष्ठ 104 25 एतच्छुत्वा तदा पाक्य 110 16° एतच्छुत्वायवीदेन 26 17 एतरवा चलस्य 78 300 एतच्छ्रत्वा सुरा सर्वे 31 530 एतत्कार्य विचिन्तयन् 109 254 एतले कथित मया 90 18 एतत्ते प्रथम राजन् 7 10% एतत्त सर्थमाख्यात 89 bal एतविध्यमुच्यते 59 210 एतत्पादेन पातितम् 50 18 एतत्सथै यथावृत्तम् 1047" एतत्सर्वं वदिष्यति ॥ 40" एतत्सोमस्य ते जन्म 20 47" एतदयं च वासोऽय 55 56° एतदाख्यातमिच्छामि 11 80 एतदाश्चर्यसूतस्य 32 9 एतदाश्चर्यभूत हि 51 57" एतदाश्चर्यमभवत् 38 80* एतदाश्रर्यमाख्यानं 30 370 एतदिच्छामि वेदितुम् 1121 एतदिच्छाम्यह श्रोतु 11 11 1586 एतदनमानण 31 1010 एतदैरसभाध्य 61 63° एतदाहुद्वय यते 31 980 एतद्यद्यनुकूल व 84 8" युद्धमुखे व्रतम् 75 200 एतद्युष्मत्प्रवृत्तन 42510 एतदै श्रोतुमिच्छामि 11 एतहीलोत्पलश्याम 54 24° एतन्मे कृष्ण कात्स्न्येन 62 88 एत मे कृष्ण विज्ञाप्य 78 29 एतन्मे सर्वमाचक्ष्व 10200 हरि पादरची--5 83 एतयोश्च हि को युद्ध चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [एन पृच्छ महाभागम् एतयोश्च हि को युद्ध 106 61° एतस्मिनन्तरे कृष्ण 99 43° एतस्मिन्नन्तरे क्रुद्ध 37 37" एतस्मिनन्तरे गोपा 83 199 एतसिडान्तरे गोभि 50 120 एतस्मियन्तरे तात 15 61° एतस्मियन्तरे दीना 77 380 एतस्मियन्तरे प्राप्ता 50 एतस्मियन्तरे ब्रह्मा 35 530 एतस्मिसन्तरे भीता 56 14° एतस्मिन्वन्तरे मेघा 32 13 एतस्सिनन्तरे राजा 84 124 एतस्मिन्नन्तरे वायु 73 14° 100 17" एतस्मिसेव काले तु 5 32° 23 b829 24.64 10° 83 1987 10 एत कदम्बमारा 55570 एत ऋतुमवाप्तवान् 115 18" एत मे सशय विप्र 2 520 एत सपरिगृह्णीब 89 35 एतानपि हनिष्यामि 73 37° एतानि कृत्वा कर्माणि 31 1286 एतानि शशिकल्पानि 81 40 एतानुत्पाद्य धर्मात्मा 13 4ga एतानुत्पाथ पुनरित्व 13 38° एताम्परित्यज्य सदा 113 630 एताम्मच्छीतनिर्दग्धान 36 12° एतान्यम्बुप्रहृष्टानि 54 270 एतान्युक्तानि कारव्य 7 380 एतान्स यादवान्सर्वान् 65 11 एतावच्छत्तशोऽप्येव 78 360 एतावदुक्रवा ते सर्वे 18 320 एतावदुरवा भगवान् 112 12900 पतावानिह वासश्च 85 26 एतास्तु योगेश्वरयोगमाया 31 1530 एवो परमदुर्लमाम् 0596 एने कश्यपदायादा 3936 एतेवराजा सर्व 23 41" एते चान्ये च बहव 31 1490 एते धान्ये च राजाम 80 160 एते चापि महाभागे 13 23° एते तपसि तिष्टत 35 36" एते स्वद्विरस पुना 23 720 एसे दिया परास्ताव 146 एते दुर्गसहा नृपा 81 43 एते देवेषु ये मुख्या 107 68° एते दैत्या विनिहता 44 750 एते धन्या द्विजश्रेष्ठ 100 530 एतेन बहवो मल्ला 75 23° एतेन मुरमाक्रम्य 96 66 एतेनैव प्रयत्नेन 69 21 एते पुत्रा महात्मान 13 430 एते बाह्यकक्षम्या 274 एते मदर्पयस्तात 7 11 एतेऽमृतत्त्व समासा 27 14° एते ययातिपुराणा 23 1640 एते युगसहस्रान्ते 3 55° एते रुद्रास्तथादित्या 113 88° एते लोकस्य सेतब 100534 एते लोकहितार्थाय 31 1481 एते वत्सविशेषाश्च 649 एते विवस्वतो वशे 1079° एते वृन्दावनगता 6130 एते वे दानवा श्रेष्ठा 379* एते वै योगविभ्रष्टा 13 9" एतेषामात्मभूताभा 40 39° एतेषां काल्यमुत्थाय 7 46" एतेपा कीर्तिताना तु 7 34* एतेषा मानसी कन्या 13 13", 269,449, 55" एतेपु वनमुख्येषु 218 एतेष्वायत्तमस्तु ध 81 46° एते सप्त महात्मान 744 एते सतर्पयोऽपरे 7 221 एते समय राजान 89 194 एतेऽस्त्रविदुप सर्वे 378° एते स पितरस्तात 13 11. एते दपि गणा पत्र 1091° एतैश्च कारणे श्रीमान् 113 720 एते सह रणे योद्ध 11046 एनी पक्षी भविष्यन्ति 43 64" एतौ युद्धविदो रज 65 86* एतौ रगती युद्धे 72 19 एती हरा गजेन्द्रेण 73" एती हि वसुदेवस्य 96 44. एत्य यादवनन्दन 32 3 एनमेव गदाधरम् 4236* एन पृष्ठ महामागम् 1141' --84- पमित्वमभिपिच्यस] लोकपादसूची [एवं ते कुपंत कृष्ण 35470 एभिरत्वमभिपिच्पस्व 62 49° एमि सह समागन्तु 11047° एलपत्रच राहश्च 3880 एवमयूरवचनै 109 5" एवमक्षतचारित्रे 65 17 एवमभ्यर्चित कृष्ण 92 61" एवमस्त्विति तान्यिमान 39 29" एवमस्त्विति ता गृह्य 35710 एवमस्रिवति शास्तम् 85 43° एवमस्त्विति सहृष्ट 36 10 एवमस्त्विति सोऽप्यग्नि 35 620 एवमा श्यमानस्तु 65 970 एक्माज्ञापयान तु 76230 एवमाज्ञापयामास 6170 एवमाज्ञाप्य राजा स72 120 एवमात्मानमारमा मे एवमादिश्य तान्ब्रह्मा 4376* एवमतिकरस्य 77 20° एवमा रुदन्तीपु 785 एवमारोफयामास 9414 एवमासीद्रमक्षय 2 370 एवमा पुन पुन 85 420 एक्माद प्रजापति 1006 एवमाहु परे लोके 35 30 एवमुक्तस्तत कृष्ण 86 35* एवमुक्तस्तत प्राह 86 310 एषमुक्तस्ततो याण 106 18" एवमुक्तस्तु कृष्णेन 111 124 एवमुक्तस्तुमा मुद्ध 43 280 एवमुक्त स दूतस्तु 44 44* एवमुन्त सित हत्ता 100 230 ततो गङ्गा 100 41 एवमुक्ता दासेयी 13 40 एपमुत्ता तु सा भीर 99 100 एवमुक्ता दैत्यसुता 107 16 पचमुक्तास्तु कृष्णेन 86 110 एवमुक्तास्तु ते गापा 63 14 एवमुक्त तदा देव्या 107 130 एवमुक्त तु बचने 209 680 एवमुक्तो स्वरबदा 110680 एवमुक्तो भगरता 3864* एवमुक्तो मुनिश्रेष्ठ 100 एवमुक्तोऽस्मि कृष्णेन 104 23° एकमुश्या तत कृष्ण 81 8° 112 1020 एवमुक्या तु ते सर्व 3 49 एवमुश्रवा तु भगवान् 3147* एवमुश्रवा पर्ति भोज 77524 एवमुवा परिष्वज्य 11310° एयमुरखा महादेव 112 1136 एवमुस्त्या यदु तात 22 28" एवमुक्त्वा वचो घोर 48 364 एवमुक्त्वा स देवेश 13 740 एवमुक्त्वा स भगवान 31 64* एवमुक्त्वा स राजर्षि 22 414 एवमुक्त्वा सुरगणान् 38790 एवमुञ्चारिता वाच 112 10° एवमुथै प्रभारन्त 118 230 एवमुत्तमरतानि 91 11 एवमूर्जितवीर्यस्य 77 450 एवमेतत्पयो दुग्ध 59 170 एवमेतत्पुरा गीत 19 34 एवमेतत्पुरा वृत्त 19 30° एवमेतन्मया पूर्वं 43 460 एवमेतानि कर्माणि 97 40° एवमेव पुरा प्रश्न 1 6° एवमेव भविष्यति 116 30% एवमेनानीद्रामा 22 200 एक्मेप दशाणा 97 360 एवमेप निरया वै 65 44 एवमेष महाबाहु 31 149° 97 28* एवमेपा च गौधने 16 11 एवमेपा पुरी क्षिम 8! 48° एषमेपा हितार्थाय 40 33° एक्मेपोऽवतीणों वै 113120 एवं कथयतन्तस्य 52 290 एवं कथयतामेव 113556 एवं कथयतोरे 106 390 एवं क्षान्तमना कृष्ण 62 370 एवं गत्वा पराकाष्ठा 1175 एव चतुर्विधै सैन्यै 81 19 एवं च श्रुतमस्माभि 11 20 एवं जगति ववन्ते 41 30° एवं तदानव सैन्य 33310 एवं ताकिनिर्माणौ 79 40% एवं तु ता समादिश्य 47 57 एव ते कुर्वत कृष्ण 69 25", - - 35 एवं ते विस्मिता सर्वे चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [एप में प्रथम कृष्णी एव ते विसिता सर्वे 56 490 एव ते समय चक्रु 17 20 एव तो बाल्यमुत्तीणों 52 10 एच त्रीण्यस्य शनि 10 18 एवं त्वमसि देवाना 62 200 एव दत्तालि मनचे 42484 एव देवनिकायास्ते 357° एव द्वारवती चैव 84 344 एव धर्मे च ते बुद्धि 14° एव निश्चित्य गोविन्द 1036° एवप्रभावो वैन्य स 6 42° एवं प्रवर्तिते गर्भ 30 46* एचप्राया नृणा योनि 48. 420 एव प्राणान्सर्चान 54 41* एव बहुविध कृष्ण 68 380 एवं बहुविध वाक्य 5 530 एव सुवति गोविन्दे 78 160 एव मुवति तत्व वै 83 180 एव युवति वाक्य तु 3828° एव सुवन्तस्तेऽन्योन्य 110 49° एव भवतु भद्र ते 112 1234 एर भवत्सु युक्तेपु 65 20° एव भविष्यते याण 112 128° एव भविष्यन्ति तदा 117 37 एवं मम परा प्रीति 60280 एवं मयि निरालम्ये 43 340 एव मिथ्याभिशस्तेन 28 310 एवं यज्ञवराहेण 31 300 एवं यद्यपराद्धोऽद्द 43 330 एव ययाते शापेन 23 1200 एव राज्य च ते स्फीत 15400 एवं चत्सान्पालयती 5270 एवं चाविषमुतगश्य 72 250 एव विभज्य पृथिवी 2221 एव विभज्य राज्यानि 4100 एवं विलुरिते लोरे 117 10 एव विविधरूपाणि 106 60° पव करदाणस्तु 52 36 एव शाया मुतासन् 22 311 एव गुभूपो दाने 117 420 एर शौनक सक्षेपात् 11384 प्रय शुरया प्रयरन ये 479 एव स वृष्णो गोपीनां 63 33. एवं स चिन्तयाविष्ट 106 620 एव स चिन्तयित्वा तु 61 290 एव स दिव्यभामेश्च 8674 एव स देवदैत्यानां 97 30° एव स मणिमाहृत्य 28 30° एवं सम्यक्प्रवृत्तेपु 41 169 एव स यत्नवान्कस 4786 एवं स विरपसेव 46 31" एवं स विश्वारसुनानुतीत 18 39° एव सजल्पतामेव 75 290 एव सदूषणकरी 107 280 एव सदूषिता साध्वी 107 27* एव हि विहिते योगे 78 240 एवं ह्यपरमेतस्मात् 97 38° पुप कसरय सहज 67 2000 एप कृत्रा मनोमयम् 35 46* एप कृष्ण इति ख्यात 65 214 एष घोरो प्रह स्वाती 66 250 एप चाहच सुबत 3560* एप चैकशत हत्वा 97 160 एप ते कथित सौम्य 99261 एप ने कृष्यते पुत्र 56 18° एप ते त्रिपु रोकेषु 23 780 एष ते द्रुपदस्थादौ 15 630 एष ते पौरवो वश 23 1220 एप ते वामनो नाम 31 92° एप ते धैष्णव श्रीमान् 31 100% एप ते सुभ्र सदेश 83 490 एप दृष्टोऽसि भरता 12 17° पप देवमयश्चैव 399 एष देवानुवर्तिनाम् 46 24 एप वान्परिभवन 38 50* एप धाता विधाता च 113780 एप नारायणो भूत्वा 32 4. एष पार पर चैर 3918 पप पोकरको नाम 31 200 एप याण रणे जिस्वा 13 60" एप घाण स्थितो युद्धे 12 13" एप मझविदा मध्ये 40 41 एप मयन्तरे सात 394 एप मानुषको यत्न 476" प मे कृष्ण संदश 67 06* एप मे प्रथम' कृष्ण 62 68" -96 एप मे प्रथमो देव श्लोकपादसूची [ औषधेश्च सुयोजित एप मे प्रथमो देव 112 1180 एप मे विसयो महान 305 एष मे समय कृत 113 430 एप मे सशयो महान् 30 540 एप मोह गत कृष्ण 56 15 एप लोकमयो देव 39 " एप धामि शिशिर 36 11 एष यामुभयोरस्तु 98 14 एप विष्णुरिनि रात 3250 एप विष्णो सुरेशस्य 31 1090 एपपीतमले ब्योग्नि 59 47" एप वै पितृभक्तश्च 11 40% एप वै प्रथम कल्प 13 120 पप वै मुदिता प्रजा 2 21 एप यो यदुनन्दन 113 64 एप को विदधे भयम् 110 28 एप श्रीमानुपसुत 9 66° एप सपर्तक कर्तुं 67500 एषा गरछाम्यह भीर 10784" एषा ते वैष्णवी चर्या 113 81" एपा से स्वस्य पशस्य 3570* एषामपी बसता 84 6° पुपामधै प्रयच्छामि 62 45° एपा मू भिगच्छामि 83 46° एपा मे त्वद्गता प्रीति 46 19° एपा धूम्रारणाहाना 534 एषा नृपतिमुख्याना 81 120 एपा प्रीत प्रयच्छामि 6027 एषां स्वसार पञ्चासन् 27 29° एपा द्वियन्ता गावश्च 76220 एपोऽग्निरन्तकारस्य 3561" एपो.न्तक पुरा भूत्वा 38 18" एषोऽसि परिदृष्टार्थ 8625" एपोऽस्य मृत्युरन्ताय 67 57° एषोऽहमस्य विदधे 108 79° एषोऽहं सगण दैत्य 31 630 एपो ह्यहमवस्थित 112 एप्वाश्चर्याणि दृश्य ते 100 530 एहि देशव नातेति 6817 एह्यागछ यशोदेति 51 21 एहि जय मा वाण 112 61 एह्येहि ज्वर युध्यस्व 11067° एोहि युध्यस्व रणे 112 59* एोहि राजन्धर्मारमन् 77 48° पे ऐक्ष्याकी चाभवद्भार्या 26 370 ऐन्द्रेण पपसा सिर 54 12° ऐन्द्र विनिहित पदे 62 261 ऐरावतगतचाह G1 5 ऐरावतगत सख्ये 37 47 ऐरावतमथादिशत् 480 ऐरावतशिरागत 109 43 ऐरावतो महापम 3870 ऐश्वर्यविधिमास्थित 13 40° ऐश्वर्य भूय एव च 23 166d ऐश्वर्य मुनिसत्कृतम् 20280 ऐश्वर्येणाश्चमाविश्य 118 34 ओ भोघा इव महार्णवम् 68 294 ओघा इव समुद्रस्य 84 15° मोघेश्व चारिराजस्य 86 48° ओये पवनविशित 53 18 ओषधीना परित्राण 34 250 ओषधी मूर्तिमती 6 33° भोपधीश कियायोनि 3681 भोषध्यस्ता समुद्भूता 2018" औ भीग्रसेनि स दुष्टात्मा 96 63° भौग्रसेनि समारोथ 754 औत्तमतामसधैव 740 भौत्तमेयान्महारान 7 16° मौरपातिकमिद घोपे 51 320 भौद्धिदो भरिता कश्चित् 115 40° भीर्यस्ताभ्या वर प्रादात् 10 55° भारखा भारतात 10 340 गौर्वस्तु जातकर्मादि 10 360 भीर्यस्याने प्रभारज्ञा 35 63° भीर्षस्याश्रममासाद्य 1025° और्व प्रणतस 35 64 और पूर्व स तेजस्वी 35239 और्य सवर्तको रिभु 30 14 औषेण निर्मिता पूर्व 3572 औवा नामान्तकोऽनल 3550 श्रीवा वसिष्ठपुरश्च 7 II भोपथैन सुयोनित 4 -- -37- क भाश्रमस्तवान्योऽस्ति ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [कथं जीवितुमुसहे क काश्रमस्तवान्योऽस्ति 22 27° क एते पितर स्मृता 1111 ककुत्स्थकन्यां गा नाम 222 काकुत्स्थो नाम वीर्यवान् 9 44' ककुदोदप्रनिर्माण 6440 कधिनस्तु त लोक 9 34 ककुनिनि हतेऽरिष्टे 65 40 ककुनी नाम धार्मिक 924 ककुमी वृपरूपथक् 44 69 कक्षासक्ता सखीमिव 44 8t कक्षेऽग्निरिव सवृद्ध 1124 कक्षे महति सवृद्ध 36 49* कक्षेयुतनयारत्वासन् 23 150 कक्षेयु स्थण्डिलेयुश्च 23 6. कक्ष्योपरि विरम्बिते 75 43d कङ्का चैव वराङ्गना 27 290 कशकुसुभूमय 27 280 कञ्चिच्छागिदापाणे 106 24° कञ्चित्तव बराश्रयात् 106260 कचित्रिभि भी पूर्व 106 28° कञ्चित्रैलोक्यराज्य ते 106 220 कञ्चिदागमन भवेत् 106 11 फञ्चिदिन्द्रम्तय भयात् 10633° कञ्चिदीश्वरतोपेण 106 31° फश्चिद्गच्छेत्पराभवम् 106 560 कश्चिदुष्ट मनस्तव 107 320 कचिदाज्यमबास्यति 106264 कचिद्विष्णुपरित्रास 106 23° कचिदृपध्वजस्तात 106 30% कञ्चिद्वैराचनि तात 106 27° कञ्चिन्नारायण दव 106 20° कच्छे जर निधेम्तदा 29334 कटस्छस कुटीमठम् 49 230 कटाभ्यामतिमुत्राय 74 35° कटाम्या विदलीहत 67 350 कंटेस्तृणगृहस्तथा 53 25 कठिनत्व गतानि 59 48 कठिनरव धधन 6436 फठिन चेद चापरम् 42 1 कठिन कैटभोऽभवत् 42 161 कठोरतृणमाभाति 59320 कण्टकीभि प्रवृद्धाभि 53 22° कण्टकीवाटसकुलम् 49226 कण्ठयाहानिरस्तासु 76 40° कण्ठसूनापर म्बिना 55 10% कण्ठ निमिवाम्बरम् 64 194 कण्डरीकश्च भारत 19 194 कण्डरीकश्च योगारमा 15 126 कण्डरीकस्तथापर 18 17 कण्डरीकस्य चैव ह 15 68% कण्डरीको द्विजर्षभ 19 16 कण्डरीकोऽपि योगात्मा 19 280 कण्डूयमान सतत 4630° कतरत्तद्धनु सौम्य 71 390 कत्थितानि च ते बाण 11290% कथमन्यैरनाचीर्ण 118 310 कथमष्टभुजो रणे 11264 कथमस्य मया काय 58 330 कथमश प्रयुज्यताम् 43 8 कथमशावतरण 439 कथमेव कृता नाम 107 29° कथयन्ति महात्मान 902° कथयन्तो नशोभनम् 51 331 क्थयझेद यलवान् 54 41° कथयस्व कुल तेपा 1 190 कथयस्व पुचिसिते 8 90 कथयस्व सुखावहम् 30 57" कथयामास ता कथाम् 1 140 कथयामास भारत 10424 कथयामास राज 118 180 कथयिष्यामि तच्छृणु 7 18° कथयेदिह नित्यश 23 1636 कथ कार्यमिद कार्य 108 4° कथ गच्छ त्यथो पितॄन् 11 133 कथ गतिर्गतिमताम् 30 64° कथ घ दत्तमस्माभि 11 330 कथ च महरोक्स्थ 398 कथ च भगवाधिष्णु 30 3° कथं च शक्तास्ते दातुं 11 13° कथ च सप्तमस्तेषा 156" कथं घसमय परवा 11342° कर्य पाल्पेनकालन 1047" कर्य जाता महाया 1038 कथ जीवन्विमुयेत 1097" कथ जीवितुमुरसहे 107' 38- कप ज्ञास्यामहे सखि] लोकपादसूची [कन्या द्वौ च प्रजापती कथ ज्ञास्यामहे सखि 10757 कथ शेयो भयेजोर 107 490 कथ तग्रासतस्तस्य 3940 कथं त्वचिन्तयान्वित 1090 कथ स्व दोषदुष्टा वै 107 350 कथ दीनेन कर्तव्य 77 100 कथ द्रक्ष्यामि शुष्यन्त 77540 कय धारयिता चासि 5 47* कथं पापं करिष्यन्ति 109 49° कथ पुष्टिरवाप्यते 1180 कथ प्रणाशिता पुना 3 14° सय प्राचेतसत्व स 2510 फथ प्राणान्तिक घोरम् 77 31 कथ बहुयुगे काले 9 20° कथ मानुषमाग्रेण 7726 कथ यास्याम विक्रियाम् 83 16 कथ परस्याम विधषा 7713 कथ वै गन्तुमर्हथ 18 280 कथ पै धाददेवस्वम् 11 10 कथ शान्तिभवेन्मम 110651 कथ श्वशुरता गत 2 520 कथ समुद्र स्तब्धोद 104 40 कथ स सगरो जात 10 280 कथ वक्ष्यथ वै प्रजा 3 161 कथ स्वपिति धर्मान्ते 395* कथ स्वस्ति भवेन्मम 1084 कथ यकीय सयुक्त 115 37* कथान्ते बहुवार्षिके 12 200 कथा यहुविधाश्विना 115_9° कथाभिस्तत्प्रदिष्टाभि 40 190 कथाभि पूर्ववृत्ताभि 43 16° कथाममितबुद्धिमान् 11 11 कथा यत्र समुरपसा 13 49 कथायोगेन सान्सर्वा 117 20% कथितमिद हि समासविस्तर 118 61° कथितं कसवय विधि 99 130 कथित तस्वमिरछामि 99 15 कथित तस्य गौरवात् 4439% कथितं भवता पुण्य 140 कथित भवना विप्र 180 कथित सागरगमे 83 40" फथितानि मया साधो 105 कथितो नारदेन मे 85 261, 64 कथ्यते वैष्णव यश 31930 पध्यमान द्विजातिभि 112 कथ्यमान पुरातनम् 7 56 कध्यमाना मया चित्रा 1 16" कदम्यपादपप्राय 52 220 कदम्बशिखर युवा 5610 कदम्बा वायुघहिता 73 18 कदम्बैर्वासित वनम् 54 83 कदाचिचारयमेव 65 270 कदाचित्काशिराजस्य 243 कदाचितु तदा कृष्ण 55 1" कदाचिापुत्रगृद्धिनी 50 कदाचिदभवद्भव 107 1 कदाचिद्रह्मदत्तस्तु 192 कदाचिदरतर्षभ 126 कदाचिन्मृगया यात 28 15* कदाचिल्लभते शमम् 19 33 क्र्मुनिश्च रोश 3 45 कनिष्टादृष्णिनन्दनात् 24 24 98 254 कनीयान्भरतर्षभ 23 30% फनीयास्तव चाप्ययम् 498 कन्दराकीर्णकाननाम् 36 22 कन्दरेषु नदीपु च 73 11 कन्दलामलदगतीपु 55 14° कन्यागणसमावृता 107 16° कन्या चारुमती तथा 9861 कन्या चास्य वसुधरा 28 41' पन्या घेय सुमध्यमा 8 11' कन्या जीवितुमुसहे 107 29 कन्या त्रिगतराजस्य 25 86 कन्यापुरवर महत् 962 कन्या भद्रवती तथा 984 कन्याभावाच सुद्युम्ना 9 18* न्यायास्तस्यतिक्रमम् 108 13d कन्याया नारदो मह्य 3 12° कन्यायां भरतश्रेष्ठ 2 16" कन्याया सा व्यजायत 26 18 कन्या चै जनमेजय 23486 कन्या कृत्वी तथैव च 1347 कन्यां च वासुदेवाय 29 340 कन्यो ता बल्देवाय 9 27 कन्या ता वरवर्णिनीम् 48 21" कन्या द्वौ च प्रजापती 86 -39 - कन्या पुनश्च धनुरः] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [क सक्स्य पानघ 896 फन्या पुनाथ चतुर 13 46° कन्या प्रदद्याद्योगात्मा 1570 कन्यव घाभवनित्यं 48 29° कन्यैव भूला लोका स्थान 13 33* कपदी रैवतस्तथा 3430 कपालद्वयदेहिनम् 100 33" कपाराभ्यां समादृत 100 30 फपिरश्च वन ययौ 98224 कपिल च महारमान 23 64 कपिरो वामनस्तया 3 G6, कपीवानकपीवाध7 18 सशेवरोमर साथ 27 ° फफवगै भवेच्छुक 30 430 कफस्य हृदय स्थान 30 43° कफ सोमो विभाज्यते 30 450 कबन्धानि समुरास्थु 827° कबन्धावस्थित सख्ये 38 47° कम्पमानार्णवप्रमे 74 160 कम्पमानरिवारबुदै 81 19° कम्पयन्ती भुव धीरी 82 10° कम्पिताना तु शाखिनाम् 61 30° कम्बलराश्वतरावुभौ 3 84 कम्बलाश्वतरी नागी 70 230 कम्बुप्रीवा सुवर्चस 31 8ed करदान्मम शासनात् 65 836 फरदरविहिता 416 करभारप्रपीडिता 117 23d करमादाय वार्षिकम् 65 8693d करवीरकरम्भि93 19d कर च श्रीधरस्तस्य 74270 कर चानदुइ सर्पि 69 290 कर चोपायनानि च 69 30% करंधमस्तु वैशानो 23 124" कराज्वरनरनिभः 5211 कराल केशिरेव च 3177 करिष्यति मनोमयम् 99 480 करिष्यति महातेजा 2 21" करिष्यन्ति च सकोच 117410 करिष्यसि जगद्धितम् 63d करिष्यसि मनोहराम् 93 30 करिष्यामो विधान ते 18 290 करिष्याम्यहमुत्तरम् 110 154 रिप्ये कसघातनम् 47 560 परिष्ये साह्यमुत्तमम् 35 54 करीपपासुदिग्धाहर 63 30° परीपप्रोक्षिती पचित् 5180 परीपाकीर्णयसुधं 4923 फरीपेण च मलस्य 7511 फरीपे प्रलाप 68 8" परुण धीरहर्पणम् 118 3 फरपश्च पृपध्रध920 करपस्य तुकारूपा 936° करूपाधिपतिस्तथा 81 380 करूपाधिपतेर्वीर 24220 करूयेषु प्रसूतोऽय 75 22 करेण काली घपुपा 34 37° करे मस्पृश्य गोविद 96 23° करोति कदन महत् 67 6 करोति निनद महत् 59 13° करोति रणमूर्धनि 112 920 फरोत्यन्यस्य सश्मियाम् 59 23 करोमि कदन महत् 46 244 वर्कशा यान्ति मारुता 54 380 काटकधननयो 3 886 कोटकपुर सरै 70 240 र्णधारो रणे रणे 411 कर्णपूरमनोरमौ 58 60 कर्णस्रोतोद्भवा सौ दि 42 18" कर्तब्यमागा भाजेते 55 53° कर्तव्य मात्र सशय 109446 कर्तव्य पारलौकिकम् 78 120 कर्तव्य मे महत्कर्म 72 17° कतन्याना च कर्तार 65 13° कर्तव्ये भगवाम्प्रभु 45 28' कर्तव्यो न परिग्रह 77 336 फतव्यो निग्रहो मया 55 64 कतन्यो भगवान्मुखी 35 74° कर्तव्यो यत्न एव हि 72 200 कार सुलभा रोके 78 13° कर्ता शिल्पवतां पर 3 40% कर्ता शिल्पसहस्राणां 3 40% कर्तास्मि तदतन्द्रित 9670 कर्तुमईति क पुमान् 96 64* कर्तुमईसि भाषितम् 62 88' कतुं मातृवास्तव 8 26 कर्नु लोकस्य चानध 11 224 40 कतुं व्यवसितो नृप ] श्लोकपादसूची [कश्यपश्च महानृषि कर्तुं व्यवसितो नृप 10 380 कर्तृणा दास्यते परम् 115 43d कर्दमस्य प्रजापते 26 4 12 13 58' फर्म कृष्णस्य वै तदा 92 611 कर्म चाम्बरगामिनाम् 100 500 कर्म धारग्धमुत्तमम् 1564 कर्म धैव शशस तत् 92 550 कर्मज निहते दैत्ये 58 58 फर्मज फरमुच्यते 11 11 कर्मणा च विशेषत 107 34 कर्मणा चोपपादितम् 107 37* कर्मणा तेन तस्य ६ 10524 कर्मणा तेन ते तात 16 270 कर्मणा तेन दैत्यस्य 38 336 कर्मणा परितोपित 67 650 फर्मणाप्रतिम भुवि 89 90 कर्मणा मनसा वाचा 20 122 39° कर्मणामनुसधानं IOL 3° कर्मणामानुपूर्या च 30" कर्मणाश्चर्यभूतस्य 30 31 कर्मणा गहना गतिम् 3220 कर्म तरवेशवादम्य 9664 कर्म तद्विपलीकृतम् 65 486 कर्मती जन्मतोऽपि वा 40 160 कर्मभिश्चानुचिन्त्यताम् 75 22d कर्मभिम्तोपिता दिव्य 62 380 कर्मभि सोऽनुमीयते 65 25 कर्मभि स्वर्जित शुभै 85640 कर्मभूमिरिहस्थाना 41 24° कर्माणि तव दृष्टवान् 67 50* कर्माणि रिपुघातिन 301" कर्माण्यपरिमेयानि 105 1 1061° कर्माण्युनानि वै राजन् 10540 कमैतदनुरूप वा 5 34° कर्पकाणा कृपिवृत्ति 5921 कर्पका-पुरवैयाही 62 400 कर्पणाधोमुस बरी 83 300 कर्षणायुधष्टास्मि 83 45 कर्पगेन च वृक्षाभ्या 65 6* कर्षणेन महायादो 83 43° कपणेनास्य गर्भस्य 486" कृपन्माणम्तत 89 40 कर्षमाण उदूसाम् 31 15, 16 हरि पादसूची-6 कर्षमाणमुदूसलम 51 260 क्रमापरपाण्डपु 59 30 क्लमाए सस्येषु 59 45 करमारनतामासु 62 520 फलहायास्पद घोर 89 26° कासकाल्यमेव च 30 26 कलिभराजस्तच्छुत्या 89 32* कलिङ्गस्य तथानीक 87 68° कलिङ्ग च जनार्दन 97 15° शलिङ्गाधिपतिश्चय 80 10% करिङ्गाधिपति तथा 87 50 करिङ्गाधिपतेरपि 89 440 करिङ्गा पुण्ड्काश्चैव 23 32° करिस्व हि विनाशाय 65 69% कलेभांगे तथैव च 444 कल्को विष्णुयशा नाम 31 148° करपयित्वा च भाग 67 44 कल्पयेय गया स्थान 61 27° कल्पस्य परिमाणत 23 304 कल्पान्तेषु पुन पुन 7 64* कल्पितेय मया भूमि 86 51 करिपत रणकोविंदै 81 16* कल्पो नि शेष उच्यते 7 52" कल्प्यन्ता निकचत्वरा 86gs कल्प्यन्ता राशयोऽव्यया 728 करप्यन्ता सूपकल्पिता 72 114 करमापपादस्य सुत 10 71° कल्माष खसमस्तथा 11024 कल्याणस्वान्सरपते 27 8° कल्याण समवाप्स्यसि 19 120 कवच च महाप्रभम् 5 2ga कवचासिगदापासान् 112 8° कवचेपु महास्वन 8776 कन्यादाश्च पित्नपि 3025 कशापाणिप्रचोदितै 84 180 कशेरुमगमत्तदा 91 कश्च काल प्रसुप्तस्य 8566° कश्न त्वं विकृताकार 73 20° कवितो जिजीविपु 67 61 कचिच्छतो महामृधे 109 894 कश्चिन्जानाति तत्वेन 107 48° कश्मीरराजो गोनद 81 38° कश्यपश्च महानृषि 7 30* कश्यप लोकभावनम् ] चिकित्सितपाठात्मक्स्य हरिवंशस्य [फंस च रुपितानवी कश्यप लोकभावनम् 42 438 कश्यप समुपस्थिता 42 41. कश्यपादभिजज्ञिरे 370 कश्यपादिति न श्रुतम् 3 58 कश्यपाय त्रयोदश 2 47324 कश्यपाय निवेदिता 42 403 कश्यपाय वसुधराम् 31 1066 कश्यपेन महात्मना 43 1645 326 कश्यपे शापमुत्सृजत् 45 316 कपायस्य च ससर्ग 75 19° कपायाश्चैव कुम्भश 72 10% कपायीकृतलोचन 75 8° कपाये हानिरुच्यते 117 45° कपायोपप्लवे काले 117 130 कस्तदन्येष्टुमर्हति 58 400 कस्तल्लधयितुं शक्त. 609 कस्तस्या जावितेनार्थ 107 54° कस्ता धर्षयितु शक्त 45 250 कस्त्व भरसि रुद्राणा 63" कस्त्व वृष्णिकुल सर्वे 99 404 कस्मादेषोऽनिरुद्धस्य 109 14" कस्मानोद्विजते मन 77 35d कस्मिन्काले बभूव इ 156" कस्सिन्देशे नृपो जज्ञे 87 8° कस्मिन्प्रतिष्ठितो वश 114 " कस्मिन्धशेऽथ जज्ञिवान् 15 30° कस्मिल्लोके च ते गणा 13 3" कस्यचिवथ कारस्य 79 3980 1984196 530 100% 118 110 कस्यचित्पुरवासिन 9 900 कस्य चेय सुषेति वै 26 कस्य स्वमिति यच्चाई 7329° कस्य वा केन वा कार्य 40 450 कस्य वा वश्यता यामि 56 340 कस्यान्ववाये द्युतिमान् 87 88 कस्येदमनुलेपनम् 71 23° कस्येद कर्म चेति च 50 250 क्स्येद सुमहद् हृदम् 55 47d कब चाहूय यादवम् 658 कहावरजमेव च 658d क काम करवाणि ते 12 10,1d कविसाल मुमोदतु 79 40% क वा धार नियम 39 30 के था योगमुपास्त स 39 30 कस फैस विनाशाय 48 34. कस गर्भकृते महान् 65 48" कसगोपस्स समता 48 121 कसदेहमदूरत 76 37 कसदेह यथाक्रमम् 78 43° फसद्विप्टेन चेतसा 74 320 फसनारीप्रापाश्च 7830 क्सनाशार्थमच्युत 76 250 कसपरन्यो इतं कस 77 1° कंसभ्रातरमूर्जितम् 76 45 फसमाता प्रवेपत्ती 77 38" कसराजपुरी प्रभो 70 39* कसवकारस्य रोपेण 7616° कसवैकृतशसिन 66 40 कसश्च नराधिप 96534 कसश्च विनिपातित 83 1 कससस्कारकारणात् 77 50d फसस्तस्मिन्हते युधि 87 24' कसस्तु पितर बध्वा 965a कसस्त्रीणा सविस्तरम् 77 69° कसस्य करदायक 45 350 कसस्य ध भयाधस्त 6970 कसस्य चरिसानुग 67 sh कसस्य निधनक्रियाम् 78 40° कसस्य निधनाविरम् 78 d कसस्य पुरतो न्यस्ता 48 27° कसस्य बलमव्ययम् 78 220 कसस्य भयमाहृतम् 96 411 कसस्य मत्सर चैव 1424 कसस्य विफले यत्ने 47 28° कसस्य सहतेऽवशा 69 234 कसस्य हि वध श्रेयान् 787" कसस्याज्ञा पुरस्कृत्य 72 14* कसस्यानृण्यमानुयाम् 78 280 कसस्यापचितिं चरन् 80 20 कसस्यापि मुखे स्वेद 76 14 कंसस्याभावदशिवान् 75 400 कसस्यारिष्टसज्ञितम् 47 gh कसस्थाशुभकर्मण 78 250 कसम्यास्य कृते कृतम् 78 " कस इशाईता गतम् 76 350 कस प रुपितायवीत् 48 330 42- कैसं त्याच देवकी ] ग्लोकपादसूची [कामगा कामरूपिणी कैसं वाच देवकी 48. 244. कंसं परुषमापिणम् 76 23. कंसं मातेव जल्पती 48.44 कंसः कृष्णस्य वै तदा 76, 399. कंसः कृष्णेन तेजसा 76. 348. संसः पापरतिश्चैव 18.50 फंसः प्रेतगतोऽपि सन् 78. 32. कंसः स विनशिष्यति 44.8. फंसः सम्येन पाणिना 75.304, कसः संरक्तलोचनः 66. 300. कसा फसवती तथा 27. 29. कंसाज्ञया समुचितं 69.3. कंसादींश्चापि तान्सर्वान् 45. 12*. कंसायं चकारोग्रं 50. 29. कंसामात्यं जनार्दनः 97 24. कंसामात्यो निपातितः 96.43% कसायानकदुंदुभिः 48.21. कंसारिरतुलं पचा 86. 26". कंसेन विनिपातिताः 48.8. कसेन स निरस्पने 71.4. फंसेनादीर्घदार्शना 65, 98.69, 16, कंसेनापि समानतः 75.7% फंसेनाशुभबुद्धिना 66,6'. कंसे भूयः समेष्यामि 67. 67. फंसे विनिहते कृष्ण 62.86°. कंसो गच्छतु मूढतान 47. 374. कंसो न ममपे च तम् 80. bf. कसो नाम रिपुध्वंसी 73.29. कंसो नाम विशालाक्ष: 44.62 कंसो नियनतां गतः 76. 31. कंसोऽप्युद्विममानसः 71. 54. कंसो यत्नं करिष्यति 47.326. कंसो वासि यथातथा 66.6'. कंसो रङ्गसंसदि 76 2. कः श्वसन्का नेइते 40. 17, काकपक्षधरः श्रीमान् 55, 2". कामपक्षधरावुभौ 52.. कापक्षधरैर्यालैः 49, 26". काकी तु जनयामास 3. 82°. काकी श्येनी च भासीच 3 81. फाकोच्यासोऽभ्यभापत 71. 46. कासन्यः कृष्णदर्शनम् 9227. काडमाणास्तवागमम् 83. 104. काईस्तस्य रयो यधम् 108, 61, काङ्कितध्ये समागमे 35. 56. का च धारयितुं शक्ता 45. 45. फायनम्तम्भचरणां 42.70. काञ्चनस्यारत्नस्य 100.65. काधनं पात्रमादाय 6. 18. कानं महदासनम् 95. IT', काचनाप्राणि भास्वन्ति 93. 320, कानाञ्जनराजनी: 61.374, काञ्चने निपसाद 100. 13". काञ्चनर्मणिसोपानः 93. 30'. काञ्चनो वनभूपितः 76. 30'. काण्डपृष्टाः श्रोत्रियाश्च 116.7. कातरं वाक्यमववीत् 56. 324. कादयेयास्तु बलिनः 3. 86%. काननानि वनानि च 52.10. काननेषु मदान्विताः 54. 264. काननन्दनप्रख्यैः 93. 13. कानिचिच्छादितानीव 61. 380. कानीनं चापि जानामि 62. 94. कान्त तिष्ट गृहाण माम् 71. 33. कान्तनारीनरगणा 86. 450. कान्तपुत्रालतोऽभवत् 23. 136". कान्तया सह संगतम् 99. 32. कान्तदत्रो निशामुखे 64. 23. कान्त वृष्णिकुमाररत्वं 99. 22. कान्तं पद्मपलाशाक्षं 107. B0%, कान्ता गोपखियो निशि 63. 196. कान्ता जनमनोरमा 86 40, कान्तारकान्तवरं द्रष्टुं 8 36. कान्तारेप्यवसवानां 47. b39. कान्तारैः सर्वतो वृतम् 65.556. कान्तां शैवलसूर्धजाम 55. 35. कान्तिद्युतिसमन्विता 89.4', कान्तिश्चन्द्रमतो यथा 24. 17. कान्तेन सह संयुक्ता 108. 11'. कान्त्या लक्ष्या प्रसादेन 60.70. कान्यजामो वयं पुनः 11. 13', 32. कापाली गरडश्चैव 98 18%. कामकामा रतिः शुभा 99. 46. कामक्रोधपरायणान् 21. 35%. कामगं कामरूपिणम् 38. 41. कामगा कामरूपिणी 86.69%. - फामगा रनभूषिताम्] चिकित्सितपाठात्मरस्य हरिवंशस्य [कारनेमि मावद वामगा रलभूपिताम् 42 8 कामगेपु विहंगमा 1369 कामचारी यथा गज 78 351 कामपली हि कन्यैपा 99 46° कामयामास कामिनी 99 10 कामरागाणि शतश 71 g" कामरूपी महासुर 44 690 कामरूपी वरानन 5511 कामवीर्योऽतितेजस्वी 91 36° कामन्याहारिणश्चैव 92 14° कामस्तव जनार्दन 92 133 कामस्य परावतिन 18 20° काम क्रोधमयो रतिम् 1 28° काम तस्य गति सूक्ष्मा 99 8° कामात्तमपि वादयन् 55 12* कामात्मानो दुरात्मान 117 18° कामालोकेप्ववर्तत 530 कामिनी कामिनस्तस्य 19 3° कामेन व्यथितेन्द्रिया 99 16 कामै सर्वे समेधिता 88 431 काम्पिल्य द्रुपदायैव 15 64° काम्पिल्यात्पृषतोऽभ्ययात् 15 61" काम्पिल्ये नगरे ते तु 18 14* काम्पिल्ये नगरोत्तमे 15 46 17 4' काम्पिल्ये समरो नाम 15 20° काम्पिल्ये सहचारिण 18 24 काम्बोजानां तथैव च 10496 काम्बोजान्पारदास्तथा 10 38* काम्बोजा पहवा खशा 10 31 काम्य सवृतमैथुन 21 36 काम्या नाम महाबाहो 260 काम्यापुत्राश्च चत्वार 260 कारण किंचिदुत्पन्न 40 41° कारण तञ्च कीतय 4 221 कारण त्व न वै पुन 48 45° कारण श्रावितश्चास्मि 15 476 कारणानन्दगोपस्य 65 220 कारणैरनुमीमहे 66 240 कारणस्त्वत्प्रवर्तिते 43 33 कारण्डवाकुण्डलिनी 55 360 कारयत्यम्बुदश्वर 40 25 कारयिष्यति वै सुखी 65390 कारयिष्यामि गोयज्ञ 59 60% कारण्य कुरु देवेश 43 34° कारुण्य खलु नारीपु 78 5% कारुण्यात्समधारयत् 10 344 कारुपो दन्तवनश्च 80 100 कार्तवीर्यस्य तनया 23 157" कार्तवीर्यम्य धीमत 31 976 पातवीर्यस्य यो जन्म 23 163° कार्तवीर्यार्जुनो नाम 112 912 कार्तरीयोऽनिसभवम् 23 1390 का? नाम महाबल 15 35* कार्तिकेय इति स्मृत 3 36' कार्तिकेयमतेन च 106 31 कार्तिव्यश्च वीर्यवान् 10656 कार्यमन विधीयताम् 13 11 कार्यमाधानमात्मन 47 100 कार्य कार्यविशारदे 108 10° कार्य पार्थिवविद्महे 43 84 कार्य साहाय्यमद्य वै 108 330 कार्याकार्यान्तर गता 44 181 कार्या भूमिसमा सर्वा 81 50° कार्यार्थ प्रतिभाति मे 44 14d कार्येणामित्ररर्शन 91 330 काणि कमललोचनम् 99 8' काल इत्यभिविश्रुत 105 191 काल एवं नृणा शनु 48 41* कारकल्प दुरासदम् 112 37' कालझल्पैश्च मुसलै 37 9° कालक कालकेयश्च 31 750 कारज्ञ कालमेघाभ 36310 कारनुल्य सपत्नानां 77 120 कारनाभस्तथैव च 3 64', 78 कार निर्माणयोधिनी 65 86° कालनिष्ठां हि ता गतिम् 115 250 कालनेमिनमुत्तमम् 37 80 कारनेमिमुखा हता 38 66 कालनेमिरिति रयात 36 47° कारनेमिनिपातित 30 17138 600 कालनेमियंभी दैत्य 36 590 कारनेमिमहादैत्य 44 61° कारनेमिमहासुर 38 32, 58' कारनेमिहता युधि 37 44 कालनेमि पुरस्कृत्य 37 14 कारनेमि भयावहम् 36 60" कालनेमि स दानव ] सोक्पादसूची [का सा भाग्यविभूपिता कालनेमि स दानव 37 1', 37 फाल्पाशान्समाविध्य 34 130 कालभूते मयि स्थिते 38 14 कालमेघायगुपिठता 32 103 कारमेन चन्द्रमा 58 304 फालयन्तो धनानि च 60 31 कालयुक्त च मुद्गरम् 34 11' कालरात्रिमहीक्षिताम् 4026 काररानिस्तथैव च 4704 कालरोहाष्टचरण 33 10° कालच पर्नन्य 28 13° कारश्च परिणामक 48 41 कालमर्पोपम कृष्ण 85 32° कालसपकविज्ञान 66 37* कारस्य परिणामेन 14 11 कारस्य यशवर्तिनी 762 कारस्य शवर्ति वै 115316 कारस्येव दिघक्षत 110 001 काल चरतु चन्द्रमा 38 69' फाल जगति योनयन् 36 40 काल मदान्तमवसत् 96 51° कार काल इवापर 642 काल सप्रतिपायताम् 63 12° काल संविदितो मम 14 131 कालाअनचयोपम 55 48" कालानलस्य धर्मज्ञ 23 160 कालान्तकयमोपम 11067" कारिन्दा चनदा रम्या 52 279 कालिन्दी मित्रविन्दा च 88 410 कारिन्द्या श्रुतसत्तम 98 13° कारियश्च महानाग 96 35° कालिय च महानसम् 97 26 काग्यि चापि जानामि 457" कालिय समदृश्यत 56 कारिये च परानिते 650 कालियो दमितालथा 65 27 काली नयनशाहिनी 40 8' कालरी विचित्रवीर्य तु 23 119° काल क्रीडानुवर्तिनी 58 g काले क्षाणे भविष्यति 116 400 काले खलु मृप प्राप्त 816° काले गच्छति सौम्यौ तौ 51 1" काले देवश्च वर्षेति 44 58 कालेन कलिनापि या 434 काले महता चापि 22 4I कारेन महता तव 85Bf कालेन महता राजन् 23 31* कालेन समयुज्यन्त 16 14° कालेनाद्य परीतास्ते 115240 फाले रक्तदिवाकरे 711 कालोऽग्न परमेश्वर 115 30% कालो गयति सर्व ये 48 410 कालोऽय समनुप्राप्त 102 8" कारो यास्यत्यविरत 113 68° कालो रोकाकारा 33346314 कारो हि दुरीक्रम 107 35d काल्यमाने च गोधने 6870 कावेरी नदुरारहत् 23 80° काव्य पृथुस्तथैयाग्नि 7 18 काव्यादग्न कवे सुता 13 Bot काशीमोज्झिता यरा 83 376 काशचामीकर वास 55 360 काशपुष्परता 59 40 काशिकच महासत्व 23540 कादिराजसुता मता 118 25° काशीनामधिपो इत 97 11 काश्चित्प्राणाअहु प्रान्ता 61 32" काश्चित्सवत्सा पासता 61 22° काश्चिदश्यैस्तथा यानै 107 18* काश्चिदाकाशमास्थिता 107 181 काश्चिदानग्य फोडेन 61230 काश्मीरानथ मेक्रान् 117 20° काश्यप काशयो रानन् 23 55° काश्य चैव पुरोहितम् 86 76. काश्य सादीपनि चैव 95 50 काश्य सादीपतिस्तदा 79240 काश्याधिपतिमेव च 871 माश्या सुपाश्चै तनय 99 24 कापाये वाससी विभ्रन् 50 12 काष्टाध्यशिराभूत 2023 काष्टाध्यसमौ स्थिती 42 156 काष्ठभारानतरसधै 688 काष्ठसचयबन्धना 74 19 काष्ठानि च गृणानि च 52 12 काष्ठान्यपि तरनपि 5320 का सा माग्यविभूपिता 99 16" कासारसलिल यथा] चिकित्सितपाठात्मरस्य हरिवंशस्य [किं तु शक्यमिदं कार्य कासारसरिल यथा 77 BAL कांघ काठा समासाद्य 11720 काश्चित्कण्ठे न्यपीडयत् 38 62" काश्चिरकेशेषु जग्राह 38 630. कितवैरक्षकोविद 89 24 किमत कार्यमुत्तरम् 109 611 किमत परम तप 35 404 किमन्यत्करवाणि ते 85 51 किमपरमिच्छसि कि प्रवीमि ते 118 511 किमर्थमिह सप्राप्ता 110 206 किमर्थमुग्रसेनेन 66 100 किमर्थं गोपचेपेण 6370 किमयं च परित्यज्य 852 किमर्थं च शकादीना 10 28° किमर्थं चादिदेवेन 3920 किमर्थं चाम्बुदश्याम 99 36° किमर्थं चैव भवता 15 30° किमर्थं तनयेषु चै 8 28 किमर्थं तेन ते वाला 1046° किमर्थ दिव्यमारमान 30° किमर्थं न निवारित 115 206 किमर्थ नाभिभापसे 77 85. किमर्थ भगवान्विन्णु 3111" किमर्थ युद्धमुत्सृज्य 112 13° किमर्थ शप्तवानसि 43 204 किमाश्चर्यमत परम् 100 38, 471 किमाश्वयं मयि मुने 100 37° किमाहारविहारिण 117 11 किमिद ते चिकीर्पितम् 99 161 किमिद स्वरित तात 77 43° किमिद त्व विहन्यसे 107 484 किमिद हि नस्तत्व 110 120 किमिद लोकविख्यात 108 310 किमुर्वि समगाड्मुखी 42 42 किमु वृष्णिमहारथा 93 281 किमेतदिति चान्योन्य 109 11 कितनाभिजानीम 100270 किमेव चिन्तयाविष्ट 109 20, 23° किमेव चिन्तयाविटा 109 670 किमेव बलमत्तोऽसि 11058 किमेव भयविक्कुवा 1121 किमेव वतैसेन्यथा 99 11 किमेव शनुमुद्यतम् 108 751 कियन्तो वै पितृगणा 13 30 किरदेवगणानणे 36 26* फिरन्ति पौरा सर्वोस्तान् 113 60° किरीटच्छन्नमूर्धजम् 32 23 किरीटलान्छनेनापि 68 229 किरीटिनो रम्बशिखा 31 86° किरीटेनार्कवर्णेन 62 10 किल्पिपैकशते हत 105 11 किशोर इव चोदित 33 21' किशोरप्रतिमो महान् 27 20° किशोरस्त्वतिसहर्षात् 33 21° किशोराविव चचली 52 14 किशोरौष्ट्री तथैव च 3770 किंकर समनुप्राप्त 86230 किंकराणा सहस्राणा 92 37° किं करिष्यामहे सर्वे 65 79° किंकरराहृतो मया 963 किंकरैर्यत्समाहृतम् 95 13 किं करोमि प्रशाधि माम् 86 25* किं करोमीति चाब्रवीत् 103 24 किंकर्माण किमीहन्त 117 20 किंकिणीजालनिघोपं 33 36 किंकिणीशनिघोंप 108 57° किं कुर्मेत्यब्रुवस्तदा 103 16° किं कुर्वाणो न शोचति 18 किंक्रीडसि महादेव 113 36° किं चकार महाबाहु 85 6° किं च त्व साधु जानी 65730 किं च मे गमने नदीम् 50 11" किं चाई तब दास्यामि 38 620 किंचिञ्चलितवर्मणा 36 640 किंचिच्छिष्टपु शाखिपु 2 380 किंचित्तारागणाकुले 68 124 किंचित्सव्यापत्तन 70 20* किंचिदप्यनुवन्क्रोधात् 66 39° किंचिदप्यविचिन्तयन् 100 360 किंचिदम्युस्थिते सोमे 68 9* किंचिदावृतमौलिमा 83 23" किंचिदुरपाद्य कारणम् 52 280 किं जासमिति चाबवीत् 48 23" किं राभूत समुत्पत्र 68 25° किंतु लोकहितार्थाय 78 34* किं तु शक्यमिद कार्य 10762 कि स्वनिधनवर्जिता ] श्लोकपादसूची [ कुण्टुरेरधर मत कि स्वनिधनजिता 23 140 कि त्या सर्वाममो विभु 44 11' किंनरोद्गीतमधुरा 73120 किनरोरगयक्षाणा 107 680 किनर्य इव सघश 109 11 कि निमित्त भविष्यति 115 33 किं नु ते करण वीर 77220 किं नु वक्ष्यति ते पुत्र 50 10° किं नु श्रादस्य वै फलम् 11 330 किं पुत्र शयन विना 77436 किं पुन पृथिवीतले 67 B' किंप्रमाणा किमायुप 11723 किं भवन्तोऽन्तरिक्षगा 11280 किं भविष्यति लोकेषु 70 36° किं भूय कथयामि ते 18844 किं भूयो वर्णयामि ते 6 494 किं मया देव कर्तव्य 86660 कि मा क्षिपसि दोपेण 73 26" किं मा दग्धुमिहे-छसि 113 300 किं मा नारद भाषसे 100 61d किं मा वक्ष्यन्ति रुपिता 73 220 कि मिथ्यागजितेन ते 112 594 कि मेरो पाश्चंगा वयम् 110 12t मे सानेन दुसान 50 11° किं मोहयसि न सर्वान् 113 40° कि वय सति गन्तव्ये 7737 किंवा ते प्रार्थित भूय 11 27° किंवा मथिन वतते 40 45d किंवीर्यश्च बभूव ६ 156 किंवीर्य कालयवन 856" कि शेषे याहि योजय 53 131 कीटमूषकसश्च 117 24° कीदश नागलोकस्य 7034 कीनाशो दामदम्भको 286 कीण नागपने कान्तै 8421 कीण नानालताद्रुमै 55 51 कीण वायसमण्डले 53 194 की क्षत्रियकोटीभि 31 1040 कीर्गा भूतगणोरै 47 45* कीतन स्थिरकीतीना 121 कीर्तनासुखमेधते 7 46 कीतनीय सुरैरपि 83 13 कीवयन्तो महात्मन 27 100 कीर्तयन्यहु किरियएम् 106 Bd कीर्तयित्वा पृथु नृपम् 646° कीर्तयिष्यामि तरछृणु 135,6 16 14' कीर्तयिष्यामि तान्शूशु 24 34 कीर्तयेयमह राजन् 4 240 कीर्तित कीर्तनीयस्य 31 151 329° कीर्तित कार्तिवर्धनम् 20 47' कीर्तिता मनवस्तात 76 कीर्तिता लोकवीराणा 23 164* कीर्तिता ह्यनवो मया 23 1331 कीर्विवा कीर्तिवर्धना 7496 कीर्तिता पृथिवीपाल 713 कीर्तिता स्थाणुजलमा 3 930 कीर्तिमाशु भवेनर 22 450 कीर्तितिश्च रक्ष्मीश्च 20 26° कोतिर्भवति शाश्वती 15 25% कीर्तिश्च हरिवाहने 118 320 कीर्ति कीर्तिमता पर 10371 कीर्ति पाप्यनिवर्तिनीम् 10 51 कीयमानमत शृणु 20 470 कीयमान निबोध में 32 " कीत्यमान शृणु मया 1 20° कीय॑मानालियोध मे 7 16 कीर्त्यमा पुरातने 1 11 कीयर्थं च सुतस्तव 78 34° कीर्यमाणो जनार्दन 109774 कीलैरारोन्यमाणैश्च 53 240 कीयंत्रनिपातैश्च 75 31 कुकुरस्य सुतो ष्णु 27 17" कुकुर भजमान च27 16° कुकुराणामिम वश 27 31° कुक्षिरित्येवमादय 3 52 कुचाने गोपयोषिताम् 63 344 कुक्षरस्यार्तचेतस 74 350 कुजराल्लागरक्षिप्तान 81 69* कुझरौ युद्धकाङ्किणी 716 कुटीभिश्च प्रवृद्धाभि 72 3° कुटुम्यस्येश्वरी स्वासीत् 94 370 कुट्टयन्यन्तथापरा 63 कुण्डराय महासुर 91 162 कुण्डले चाह्ते शुभे 96 6 कुण्डलेन विराजता 83 23d कुण्डलैकपर मत्त 70 18 47 - कुण्डलोसमयोग्याम्यो] चिकित्सितपाठात्मयस्य हरिवंशस्य [कुराझारा निराश्रया -- पुण्डलोत्तमयोग्याभ्यां 68 22 कुण्डा पा नेकृतिका 110330 कुण्डिनस्थोग्यशासपा 87 12t कुण्डिन न प्रवेश्यामि 88 कुरामागम्यते सौम्म 7120" कुतस्ते शान्तिरात्मा 66 330 कुतस्त्यस्तस्कर शुभे 107 730 कुतो नो भयमागाम् 109 144 कुतो यायमिहागत 103 90" कुतो यो भयमागतम् 40 48' कुतो यो विग्रहो देवा 40 45* कुत्र वास्य नियाम स्यात् 35 07" कुयास्वास्तरणेषु च 42 11 कुनेतारश्च मानवा 115 234 कुन्तिस्तस्यारमजोऽभवत् 26 20° कुन्तेष्टि मुतो जज्ञे 26 20° कुन्त्यस्य श्रुतदेवाया 24 200 कुन्त्या निर्यातयिष्यामि 62 970 कुन्त्याच प्रमुख प्रोक्ता 105 18° कुन्त्या प्रमुररतो विभु 97 at कुपन कोपन थ 31724 कुब्जाया श्रुतविस्तरी 71 340 कुब्जा दशतुर्भूय 71220 कुमार इति विद्धि भाम् 12 16 कुमारकोटो याश्चमा 84 6° कुमारभवयोरिह 106 61 कुमारसहितोऽब्रवीत् 112 1064 कुमार जनयामास 101 कुमार दस्युहतमम् 20 38, 40d कुमार धर्मनिर्मितम् 62 926 कुमार स्कन्धगाया 49 140 कुमारान्प्रद्रुता भयात् 116 28° कुमाराविव पायको 5184 कुमारास्ते यथाकाल 10 610 कुमारैरपरैर्वृत 89 3 कुमारो दस्युइतम 20 40% कुमारोऽभून्महाबल 9881 कुमारो वृकदोशिश्च 98 11° कुमारी तु कनीयसौ 9780 कुमार्यश्चापि तिस्रो वै 28 33° कुमार्य सप्त चाप्यासन् 27 26° कुमुदोत्फुलमुदक 59 380 कुम्भनाभा गर्दभाक्ष 3 620 कुम्भाण्डदुहिना पुन 107 470 उम्भाण्डहिना पाश्य 107 39* कुम्भामिदममधीत् 106 20 कुम्भाण्डवचनैरेय 108 180 कुग्माण्ड यध्यता शीघ्रम् 108 88* कुम्भावितयाविष्ट 106 83° कुम्भाण्डसगृहीत तु 108 620 कुम्भाण्डसगृहीताश्वे 112 330 कुम्भाण्डस्तापशिवान् 10681,62 कुम्भाण्डस्य पद्य शुरम 108 98" कुम्भाण्डो नाम याणस्य 112 12 कुम्भाण्डो वाक्यमग्रवीत् 108780, 80' चुम्भाम्यामुपशोभिता 65 53' कुम्भाश्च विनियेश्यन्ताम् 60 11° कुररीणामिव प्रभो 77 19° कुररीणामिपाकाशे 109 12° कुरुक्षेत्र धकार ह 23 107 कुरक्षे नरर्षभ 144 कुरक्षेत्र पितृमतान् 1630 कुरु पासधरस वै 3626 कुरुक्शे च देवास्ते 43 720 कुरुष्व वियुधधध 93 4 कुर वैनतेय स्व 110 180 कुरु सागर मच 10370 कुरु सवरणातथा 23 1076 कुस्नथोत्तरानात्वा 8 15° कुरूनप्युत्तरान्वयम् 103 13° कुरोश पुत्राश्चरवार 23 109" कुरो पौत्रस्य राज्ये तु 2280 कुर्म कृत्वा सुख स्थान 59 28° कुर्म सर्वे पितामह 439 कुर्या विफलमन्यथा 113 420 कुर्वतस्तु कथास्तास्ता 43 m कुर्वनिर्गगन धनै 59 16 कुर्वन्योर महास्वनम् 110 190 कुर्यन्तीपु नदीषु च 62 63* कुर्पललीला सहस्रश 34 13d कुर्वाणस्य वपुर्घोर 67 56 कुर्वाण शुभकर्माण 5521° कुरजा रूपसपना 107 38° कुलस्य निष्कृतिस्तात 10 11 कुल नो धर्पित महत् 108 16° कुलाद्वारा निराश्रया 107 294 -48 - कुलानि कुरयूथप ) लोकपादसूची [कृतागा न स शोच्यस्तु कुमानि कुलयूथप 777 कुलान्यस्माकमाइये 38 120 कुलापदेशिनः सर्वे 108 320 कुले गर्भो भविष्यसि 47 3" कुले पूज्ये यशस्काम 43 77° कुले महति विख्यात 65780 कुलोपोशनकरी 107 29 कुल्पाय च स भ्रातृणा 29 8° कुवलाधस्तु पुत्राणा 9 640 कुवराश्व न्ययोजयत् 9 496 युवराव सुत प्रादात् 961° कुचलाश्च सुतस्तस्य 9420 कुरा इत्याभिविश्रुत 10153 कुशरा नृत्तसामसु 96540 कुशरै कारयामास 9655° कुस्थली द्वारवती 25 16 कुशाग्रकुसुमाना 58 6° कुशिकस्तस्य चात्मज 23 896 कुशिरस्तु तपस्तेपे 23 83° कुशिकस्य तु गोत्रण 47 47° कुशीलानायभूयिष्ठ 16 23* कुशेष्वेव तदा पिण्ड 11 19 कुसुमभूषिताजिराम् 89 22 कुसुमै पारिजातस्य 107 30 कुहर पुप्पदृष्ट्रच 3890 फुर्मकुक्कुटवक्त्राव 31 81 कूर्म धयश्च मे मत 100351 कूर्मलक्षणशोभिनीम् 55 38° कूर्मेणाभिहित पूर्व 100 840 धर्मो मानुपवरस्वयम् 100 37 फूल च लवणाम्भस 117 30 कृकणेयुस्तथैव च 236 कृष्मानकदुदुभि 98511 कृरण निहतो बली 23 131' कृच्छ्रेण महता युन. 6 130 कृतकर्मणि पाचके 36 37 कृतकर्मा गदाधर 38 bd कृवकर्मा नराधिप 9764 कृतकर्मा महायल 8540 कृतकार्य गते काले 44 1 कृतकापेण धीमता 856 कृतकार्योऽप्रवीद्धीमान् 85 530 कृतकार्या हि गास्तास्तु 4525 हरि पादसूची- कृतकृत्य इवाभवत् 19 130 कृतकृत्योऽभवत्तदा 104 1 कृतकृत्योऽन्यभाषत 79g कृतकौतुकमङ्गला 87 32 कृतघस्याहितस्य या 4 24 कृतजम्यो हपीरेश 86 10 कृतप्रेतादियुक्तानि 7 48° कृतदारोऽभवत्प्रमु 2 31 कृतधाया तथैव च 23 1376 कृतपूर्व तदा घोरं 911 कृतपूर्व करिष्ये वा 65 76° कृतप्रतिकृतश्चिने 75 30 कृतबुद्धिनृपस्तदा 89 11 कृतमन्यो हरिष्यति 23 1524 कृतमेव वचस्तथ्य 8 270 कृतवर्माग्रतस्तेषा 28 50 कृतवर्माणमेव च 65 10% कृतवर्मा बिभेदाजी 87 64° कृतवानसि गोविन्द 109 4" इतवान्पुण्डरीकाक्ष 97 40" कृतवान्मधुसूदन 9629 कृतवासो हि न पुरे 106 59d कृतवीर्य कृतौजाश्च 23 1370 तिवीर्यात्तथार्जुन 23 1370 कृतशीच शरावापी 15580 क्तस्ते कमलेक्षण 1044 हतस्वस्त्ययनो विगै 15 50%, 88° कृत कर्मेति चाब्रवीत् 92 671 रुत कृष्णेन धीमता 96 69% हेत ते कयमच्युत 104 40 कृतं के शिजिघासया 67 531 कृत गिरिग्रह गोपा 61 53° कृत तुरगदेरयेन 67 10 कृत तेन महात्मना 31961 कृत दूतेन यत्कार्य 44 420 कृत देव महत्कर्म 38 07. वृत नस्तद्तागतम् 104" कृत मघवता स्वयम् 109 45 कृत मे सुमहत्कार्य 8554 हत वृन्दावन क्षेम 67 4ga कृत सेम पुन पन्था 971 कृत सैन्यक्षयश्चापि 84 11 कृतागा न स शोग्यस्तु 109 ga 49 कृपणानामिद घच ] श्लोकपादसूची [कृष्णस्य विदितात्मन कृपणानामिद वच 7825 कृपया च प्रतिज्ञया 1011 कृमयो मासमादाय 8 26° कृमिलाश्वश्च पञ्चम 23 97% कृमेस्तु कृमिला पुरी 23 20 कृम्या कृमिरजायत 23 23 कृर्श मलिनमेय वा 86 60° कृशो वा मलिनो दापि 86 620 कृष्ण इत्युच्यते सुत 65 58% कृष्ण कस्मादपूर्ववत् 110 11 कृष्ण कृष्ण महादेव 112 107" कृष्ण कृष्ण महायाहो 56 27062 11° 110 419, 46", 65° 11170 कृष्ण कृष्णेति चासरत् 67 624 कृष्णकेश प्रलय 109 824 कृष्णग्रीवम्म विद्युति 106 47' कृष्णजरिनाङ्गस्य 74 350 कृष्णज्वरमुजप्राणै 110 70 कृष्ण तात न पप 67 19° कृष्ण त्व पर्तुमईसि 109 786 कृष्णरर मानुषेषु च 32 11 कृष्णदर्शनयुोन 76 120 कृष्णदर्शनारस 67 11 कृष्ण दिव्या च ते चेष्टा 636 कृष्णदेव निवेश स !" कृष्णद्वैपायन वैव 23 1200 कृष्ण धर्ममवाप्स्यसि 69 18t कृष्णपक्षस्य वै तिथी 47 380 कृष्ण पर्याप्तयाक्योऽसि 100 24° कृष्णप्रणिहितक्षा 75 3300 कृष्णप्रणिहितेक्षणा 63 250 कृष्णप्राणान्महामृध 110294 कृष्णप्रियार्थ भूयर 93 30 कृष्णयाणागिरदा 1124 पष्णयाहुबराभया 96 68" कृष्णयाहुरशोमत 67 380 कृष्णमपिटर्माण 62 3 86 31* 109 390 कृष्णमलिष्टकारिणम् 66 380 कृष्णमद्भुतविरमम् 58 17 कृष्णामधानमं रणे 110 11' कृष्णमप्रतिमौनसम् 12 51 कृष्णमान दनि स्ते 76 434 कृष्णमाद विचेतन 1106 कृष्णमित्यन्धका स्मृता 2880 कृष्णमुत्तीय विष्टितम् 56 411 कृष्णमूचुरियातवत् 61 241 कृष्णमूर्हितैपिण 67 18 कृष्ण रक्षितुमईसि 101 II कृष्णलीरानुकारिण्य 63 26° कृष्णवर्मा युगान्ताम 34 34° कृष्णवाश्य निवेद्य च 861 कृष्णश्चापि बभूव ६ 5 16* कृष्णश्चाश्वर्यसनिधि 11378 कृष्णसकर्षणायुभी 52 1 54 426712768 कृष्णसकर्षणौ चैव 65 850 कृष्णसकर्षणौ चोभी 511 कृष्णसदर्शनेरित 7614 कृष्णस्तु कुजा कामाती 71 350 कृष्णस्तु तेन नागेन 74 320 कृष्णस्तु परवीरहा 8424 कृष्णस्तु यदुनन्दन 94 17 कृष्णस्तु यौवन दृष्ट्वा 63 1500 कृष्णस्तु रथमुत्तमम् 81794 कृष्णस्तु विदितार्थो वै 69 26° कृप्यास्तूणे गरत्मता 112 113 कृष्णन्तासरक पुन 76 11 कृष्णस्तोसलमुद्यम्य 763 कृष्णस्त्वरितविक्रम 7144 कृष्णस्य कृष्णवदना 52 330 कृष्णस्य गतिगामिन्य 63 26* कृष्णस्य च परस्य च 59 1' कृष्णस्य च महात्मन 110 111 कृष्णस्य गतीपते 101 ।' कृष्णस्य जयकाविण 75 380 कृष्णस्य दर्शन शक्र 62 " कृष्णस्य निधनाकाड्डी 64 15° कृष्णस्य पतितो मूर्धा 71 20° कृष्णस्य प्रमुख स्थित 8620d कृष्णस्य भरतश्रेष्ठ 51 370 कृष्णस मुसपङ्कजम् 76 13* कृष्णस्य येऽम्यरक्षस्त 93 58 कृष्णस्य रपितो हय 67 30/ कृष्णस्य वचन थुवा 109610 कृष्णस्य वधकाशिणी 112 44 कृष्णस्य वार्तिनम् 775t कृष्णस्य विदितारमन 86 64 51 कृष्णस्य प्रजयोषित ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ कृष्णो जिष्णु प्रजापति कृष्णस्य चनयोपित 63274 कृष्णस्य शुभदर्शनाम् 87 396 कृष्णस्य शुशुभे भुज 67 431 कृष्णस्य समुदाहृताम् 28 45* कृष्णस्य साक्षात्रिदिव 6299% कृष्णस्याक्रियतालये 109 63d कृष्णस्याक्लिष्टकर्मण 86 70% कृष्णस्यानुमते तदा 86 800 कृष्णस्यानुमते स्वयम् 83 14 कृष्णस्यापि निमित्तानि 67 20 कृष्णास्याप्रतिमोजस und कृष्णस्यामिततेजस 1064 कृष्णस्यास्य पराक्रमम् 96 25 कृष्णस्योरगपुगव 56 40% कृष्ण कमललोचनम् 51 1364 2475 11 11370 कृष्ण कृष्णमिवाचलम् 32 214 कृष्ण कृष्णमृगेक्षणा 63 314 कृष्ण गूढ न्यवेशयत् 49 300 कृष्ण गोपाङ्गना राबी 63 24° कृष्ण गौर प्रभु शभु 13 47" कृष्ण च वसुदेवनम् 65 494 कृष्ण चेदमुनाच द 58 314 कृष्ण धैवाब्रवीत्प्रीत 6920 कृष्ण जग्मु प्रधानत 60214 कृष्ण जलदगम्भीर 71 24° कृष्ण नाथमुपाश्रिता 67 141 कृष्ण प्रदरता श्रेष्ठ 109 19° कृष्ण यर निपूदन 628 कृष्ण भाण्डीरवासिनम् 5524 कृष्ण भशायस्तमुस 75 4° कृप्या यदृष्टयानहम् 104 30 कृष्ण पक्षस्यताडयत् 67 296 कृष्ण यचनमग्रवीन 54 210 वृष्ण विज्ञापयामास 80870 101 ge कृष्ण वियाधतु शेरै 81 811 कृष्ण मतगत शुत्रा651 कृष्ण कदम्यशियरात् 562" 'ण कमायनान्तिमम् 76 26 कृष्ण याततरो भयम् 63 206 कृष्ण कुनामस्थिताम् 712 कृष्ण प्रणाअननिभ 64 IC सृष्ण पननिभक्षण 63 10 कृष्ण पापलाशाक्ष 67 44' कृष्ण परमहर्षित 78 30° कृष्ण पुर्यामनिन्दित 8679 कृष्ण प्रहरता वर 112 100% कृष्ण प्रदरता श्रेष्ठ 110 690 कृष्ण प्राक्षेपयत्तदा 85 300 कृष्ण प्राग्ज्योतिष ययौ 91 43d कृष्ण प्रोवाच तत्र 59 39 कृष्ण प्रोवाच वचन 110 27° कृष्ण श्रीदामसहित 58 194 कृष्ण सत्यपराक्रम 76 234 कृष्ण समितिदुर्जय 10966 कृष्ण सकर्षणश्चैव 110 18° कृष्ण सरक्षितो यया 96 150 कृष्ण स्खलन्निव मुहु 11 30 कृष्णाक्षायोहिताक्षांश्च 8935" कृणाजिनोत्तरासग 4490 कृष्णाकृष्णतरश्व क 40 17t कृष्णायससमप्रण्य 259 कृष्णायाविष्टकारिणे 86726 कृष्णार्थ वैरमभवत् 87 24° कृणे किं प्रत्यपद्यत 854 कृष्णे च भवतो द्वेषात् 66230 कृष्णेन च महात्मना 29 290 कृष्णेन स्वो प्रधपितम् 298 कृष्णेन परमस्नेहात् 11066° कृष्णेन मनसा दृष्टा 87 35* कृष्णेन यमुनाइद 571 कृष्णेन चरणो जित 97 136 कृष्णेन विहित वास 53 35° कृष्णेन सह सगत 67 31' पणेन सह सप्तदम् 69 300 कृपणेन हियमाणा 881 कृष्णेनाद्भुतकर्मणा 97 12 कृष्णेनामिततेजसा 1249 कृष्णेनामितयुदिना 102 18' कृष्णेनामिनपातिना 2831' कृष्णे रतिपरायणे 641 कृष्णधितधने 5. ' कृष्णो गिरिरिवापर 6.11 कृणो गिरिरिपार 81291 कृणो गाघि गत 628,' कृष्णा पिन्शु प्रजापति 3' कृष्णो ज्ञातीन्समानाट्य] श्लोक्पादसूची { फेस वाश्यमयवीत कृष्णो ज्ञातीन्समानाय्य 66 360 कृष्णोऽय रौहिणेयश्च 707 कृष्णो ददर्श पितर 954 कृष्णो द्विपममोहयत् 74 290 कृष्णो नाग इव शसन् 109 46° कृष्णोपस्थानिकोऽभवत् 94 3 कृष्णोऽपि कालयवन 84 350 कृष्णोऽपि गोपसहित 60 35* कृष्णोऽपि त गिरिश्रेष्ठ 61 64° कृष्णोऽपि मूले शैरस्य 61 56* कृष्णोऽप्यमितविक्रम 67 33° कृष्णो बभ्रुगत मणिम् 29 300 कृष्णो भुतबलाम्यो त 111° कृष्णो भोगपती रम्याम् 97 320 कृष्णो महात्मा सहसाजगाम 1157" कृष्णो राममयाबवीत् 29 17 कृणो राम महाद्युतिम् 89 480 कृष्णो सीराविधानवित् 71 311 कृष्णो वचनमब्रवीत् 113 41° कृपो विसर्जयामास 76 37° कृष्णो विस्सापयन्त्रजम् 51 15 कृष्णो वै दामव धनात 51 36 कृष्णो वै विपुल हदम् 55 47° कृष्णो हत्वा तु कुञ्जरम् 74 37° कृष्णोऽद मााण स च 102 23 कृष्णो हि सुरकार्येषु 93 60 कृप्यते सास वेगेन 83399 कृष्यन्ता प्रथिता सीमा 59230 कृप्यमाणप कानुणा 48 356 कृष्यमाण तु तत्तन 71 520 कृष्यमाण यथा भृगम् 56211 इष्यमाण स कृष्णेन 76 360 क्लप्तरत्नसमाकीणी 42 9 केका पटुरमा वृता 54 64 चिचवामिनिर्दग्धा N 490 पेचिचाचि तय शूरा 109 62° नेचिरकसवधाचापि 85 28° पेचिरकायारलम्बिमि 53 11 केचिरिक्षतिस्था प्राफोशन 108 370 केचिरखरोष्ट्रयातार 33 250 फेचित्तु कृष्ण हाहेति 56 2G चित्तीयवादना 33 23 पेचिरपयनवादना 33 250 केचित्समृदिता रथै 37 320 पेचिदणि मुमुचु 118 4 केचिदोघपलान्विता 43 71 फेचिढविलोपरा 11780 कचिद्धि विदरीकृताः 37 400 केचिदाप्पाविरेक्षणा 10362 केधिद्वमन्तो रधिरम् 108 49° फेधिन्मारवर्चस 61 10% केचिन्मध्यस्थता गता 117 ° केतकीपण्डमण्डितम् 84 211 केतक्यश्च समन्तत 59 54d केतुना यशराजा 340 स्तुमन्त महारमान 4 13 केतुमानिति विश्रुत 23 65*93 500 केनुमा-वरदर्पित 3176 केनुवीर्यशतहदी 3 676 केतुयेपप्रतिच्छन 34 45° दारा सरितश्चैव 59 40° केदारपु वनेषु च 59 45 केनचिद्यदि कार्येण 63 ° केन जातश्च वीर्यवान् 8560 केन वायमिदानीत 108 90° केन सुप्तप्रहारोऽय 77 36° केनापि निशि सुव्रत 109 69% केनेमो पातितौ द्रुमौ 51 29 केनेमौ पारितौ वृषी 51 28° केयूरभरितेन च 11 18 क्वल कसपावस्थ 7627. देवर स्वतु गण 66 14 क्वा वयसा वृद्ध 65726 क वा ते पितरोन्ये स! 13. के वापीमे जनात्रय 110 201 फेशय धेा शामिता 47 43 केशबन्धै सुयोजित 60 320 केशरश्चापि त पट्या 88 20* केशवस्य च माहात्म्य 113 800 केशवस्य प्रियविभि 93 22 केशवस्य मतितत्र 84 30% केशवस्य महामन 93 520 104 4 110 16 देशवयात्मजोऽभवत् 898 श्वस्योपशृण्वत 100 100 केशन गरुहे स्थितम् 112 740 केशव वाक्यमब्रवीत् 110 41 M58 - फेशव समुपस्थिता ] चिकित्सितपाठात्मरस्य हरिवशस्य [कोशमापूरयन्सदा केशव समुपस्थिता 103 14' केशव केशिमथन 112 390 पेशव परवीरदा 94 24 शिव पुनरेवाह 84 14 देशव रानुसूदन 112750 केशव सह यादवै 84 32 फेशव सह रुक्मिण्या 89 130 केशय सुमहायल 87 40° केशवान पुरे शिशु 99 30° केशवाय महाणि 92 90 केशवायासधूमेन 76 15° केशन निशिता 8673 93 44 केशवेन बलेन च 96 83° केशवेन महद्यश 9667 केशवेन मदारमना 97 11' 10970° वेशयेनाभिपूजिता 82 25d केशवेनाहृत स्वयम् 93 571 केशवो माम नानात्व 67 586 केशवो विश्वकर्मण 86 26° केशवो वृष्णिपुगच 97 3d केशानारूल्य दुखिता 77 520 केशा केशान्त एवं च 99 39 केशिदन्तक्षतश्चापि 67 430 केशिनस्तु समभ्याशे 67 18 केशिनस्ते द्विधाभूते 67 42° केशिन चापि जानामि 45 4° केशिन सोऽभिदुद्रुवे 67 150 केशिन हयदानवम् 67 17 फेशिन हयमाहये 67 48 केशिन पापदर्शिन 49 10 केशिन प्रेपितो दूत 67 3° के शिना सह युद्धाय 67 22° केशिनो दशना मुखात् 67 40° फेशिनो दुष्टचेतस 67 56 फेशिनो मम च ध्रुवम् 65 320 केशिनो रूपमाबभौ 67 41' केशिवक्त्रापिलमस्तु 67 38° फेशी कृणमुपादयत् 67 281 केशी क्लेशकरो नृणाम् 67 ' केशी च कृष्णससक्त 67 39% केशी च तुरगाधम 62 69% पेशी चाभ्युद्यतम्रीच 67 16 केशी तुरगदानव 67 70 फेशी तुरगसत्तम 67 200 केशी नाम हयो जात 44 67° फेशेषु यर पद्य 76 35° पाचिसरके पुन 11 11 घेसराणा नर्गन्धै 55 15° प्सरा पुष्पवर्षेच 73 16 फेसरी जातविक्रम 76 250 केसरी निरवाह 44 68676 कैई ये प्राप्स्यते मुसम् 35 56* कैलास इव शगवान् 1107 कैरामशिसराकार 107 87° कैलासशिखरोपम 93 424 कैलासेनेव मन्दर 83 240 कैशिकस्य च भ्रुणा 82 2 कैशिकस्य तु भीष्मक 87 11 कैशिक पञ्चभिथापि 81 83° कैशोरक मानयान 63 18° कोकितेश्च सदामदै 93 65946 कोटिभूत निशामय 112 564 कोटिशश्चापि बहुधा 110 37° कोटिसरयैर्वरैत 4121 कोऽत्र दोषो ममात्मन 43 300 को न पासुपरीताङ्गय 77 6" कोप कृष्ण समादधे 61 254 कोप निगृह्य धर्मात्मा 5 B3° कोप यच्छत राजान 2 390 कोपारस मगधेश्वर 81 BT कोपाद्धर्मसमन्वित 1690 कोऽप्येष रमते दर 65 35° को भवान्किमिहागत 85 56° को भित्वा स्वस्तिमान्व्रजेत् 38 261 को भोगवा को द्युतिमान् 40 17" कोऽय यस्य भयत्रता 108 324 कोऽय विधिन जानामि 5027" कोऽय शक्रमहो नाम 59 3* कोऽय शीलव्यविक्रम 99 13 कोलश्चोलच पार्थिव 23 129* फोलिसर्पा माहिपका 1044° को वरो व प्रदीयताम् 12 33*47 14 को वा धर्मो विधीयते 22 23 कोविदाराश्च पुष्पिता 59 531 को चै पिपीलिकरत 198 कोशमापूरय सदा 416 - कोशसचयरक्षिण ] श्लोकपादसूची [ झीटाभिश्चरतुर्यनम् कोशसचयरक्षिण 92 90 कोऽस्ति यो मानुपे लोके 46 23° को घेतेन न विसयेत् 62 130 कौदहरमतीव च 11 34 कौतूहलसमाविष्ट 100 48° कौतूहरादिद वाग्य 59 30 कौन्त्यस्ता पाण्डुरावहत 24 220 कौमार व्रतमास्थाय 35 27° 47 45° कौरवाणा धुरघर 23 118 कौरमा कयास्तथा 81 45° कौशाम्ब्यो मालाश्चैव 81 42° कौशिकस्य सुतास्तात 165° कौशिकाना महात्मनाम् 23 88° कौशिका वदव स्मृता 23 901 कौशिकी त्व भविष्यसि 47 44 कौशिकी सश्रयिष्यन्ति 117 28° कौशिको गालवश्चैव 7 440 कौशिक्या सुतसोमाया 98 18° कौशेयेन च भास्वता 63 20% कौसल्य काशिराजश्च 80 130 कौसल्या सुपुवे सुतान् 27 1" ऋतुदन्तश्चितीमुस 31 22 ऋतुमशिरस शिवम् 2 180 अनुरिन्द्रेण ते विभो 118 271 ऋतुर्वसिष्ठ पुरद 12 14 कैशिकभर्वा तान् 87 30° ऋयकैशिकमुरयाश्च 88 8 भयकशिकमुष्यास्तु 87 10% कथकैशिकमुरयास्ते 88 150 कयस्य त्वशुमान्वशे 87 11° फन्दन्ति स गृहे गृहे 53 54 क्रन्दन्त्यो विस्मयन्त्यश्च 51 20° प्रन्दमाना जगन्नाथ 67 140 क्रन्दमाना बज जग्मु 56 146 क्रमन्त कारनेमिाम् 36 37 क्रममाणस्त्रिभि क्रमै 38 200 क्रममाण हृपीरेशम् 3187° क्रमविक्रमसत्कृत 31 24° प्रमशतानि राज्यानि 3 110 क्रम प्रणीय पाञ्चाल 1929 क्रमेण विपरीतेन 76 38 ऋमेण स पितामह 4101 क्रमेण सप्स स्वन्धान्स 91 40° प्रमेणान्तरधीयत 91 420 फ्रमेणतेन भारत 7 37 प्रमो येन प्रवर्तित 15 Ips प्रन्यादानस्यनेजमा 110433 यादानि च भूतानि 38 43° प्रन्यादा ग्रह्मरूपेण 117 16 ज्यादैरनुपातानि 81 67 ज्यादो याधते रोकान् 44 66 फ्राथश्चवाशुमानपि 80 12 89 171 साथस्य वसुदेवेन 8220 झायोऽशुमा श्रुतर्गच 88 4° फ्रान्तविप्रान्तगामिना 553° कान्तुकाम इवौजसा 38 360 क्रियतामा मन्दिरम् 86 14 क्रियतामविचारितम् 59 611 क्रियता किं विचार्यते 59 290 क्रियतेऽति पुन पुन 8 28° क्रियते न च ते सुश्रु 107 32° क्रियन्ता मञ्चबाटाच 727' क्रियमाणरितस्तत 5326 क्रियातश्च विनि मृत 7527° क्रियावरसमाज्ञातम् 75 10, क्रियालोपश्च लोकाना 41 25° क्रियावन्त प्रजावन्त 133° क्रियां च पुण्या लभते गुणान्वित 118 46" क्रिया काश्चित्करिष्यति 12 351 कीडतासीरया पुरा 31 1154 क्रीडता वासुदैन 96 35° फ्रीडतो सह गोपा 542 क्रीडव सह वान्धवै 79 314 क्रीडन्त बहुधा युद्धे 108 44° फ्रीडन्त मधुसूदन 97 170 क्रीडन्त शिशुरील्या 569 क्रीडन्तावनिलानली 36 35", क्रीडन्ति प्रजयोपित 63280 क्रीडन्तौ वत्सशालासु 519° क्रीडजिव घ युद्धषु 103 91 क्रीडमानो व्यलोडयत् 96 334 क्रीडमानी चिवचित् 52 6 क्रीडापयन्त्या मणिना 28 230 क्रीदाभिरपराजिती 587 क्रीडाभिरभिशोभिती 516 क्रीडाभिश्चरतुर्यनम् 588 55- कीडाविहारे नारीभि ] चिपित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [क्षणेन तजस्थानम् क्रीडाविहारे नारीभि 103 30 क्रीडाविहारोपगत 107 1" श्रीराम विविधासु चा 96 48' क्रीडितन्य मजे मम 65346 क्रीडित्वा देवकीसुर 75 40° क्रीडित्वा शिशुना यया 74 3.' छुद्धस्त्वष्टारमभ्यगात् 8 291 बुद्ध पारिचित गृपम् 118 23° कुद्धानाद्रवतो धीरान 88 17° मुद्धा भिन्धुर्महीतलम् 4374 मुन्दा रोकपितामह 31 426 मुद्धा सूक्ष्मो पिपीरिकाम् 194' मुद्धर्महर्षिभिस्तात 4 22° बुद्धो दुष्टपराक्रम 6750 छुद्धो भरतसत्तम 23 77 कुद्धो रुद्र पशूनिव 10 374 छुद्धो विव्याध मार्गणे 88 20% क्रूरा बुद्धि समभवत् 167° रा रक्षणवनिता 117 361 क्रोधदीप्तो गदाधर 38 440 क्रोधरनान्मुसात्तस्य 76 174 क्रोधवर्धन एव च 31 74° क्रोधश्च सफलरो नृणाम् 116 29 क्रोधसरक्तनयना 76 8° फोघसरतलोचन 108 550 क्रोधसरतराचना 109 18 क्रोधा सरक्तनयन 38 34° क्रोधादभिययौ यदून 80 71 क्रोधादश्रूण्यवतयत् 89 48d क्रोधाद्विगुणविक्रम 67 30d क्रोधाद्रुधिररक्ताक्ष 38 39° क्रोधानि श्वसतस्तस्य 37 390 फोधन तजल तस्य 568° क्रोधेनाभिप्रजग्वाल 108 650 क्रोधनारुजते दुमान् 67 130 क्रोधो हि तेपा प्रदहेत् 66 12° क्रोशमण्डल विस्तार 100 33° क्रोशमात्र निरामये 5546d क्रोशमान च मेघवत् 1 1024 कोष्टा नीरोऽझिकस्तथा 23 1344 क्रोष्टुकनाश्च दानवा 318" फोटारेवाभव पुत्र 26 10 कोप्टामार्ये बभूवतु 24 1 28 g" गोष्टोहि यश धुत्येम 23 168 कोप्टोस्तु शृणु राजेन्द्र 23 107" पौधययाम्तथापरे 318 पौधेन दिवि कामगाम् 36 2' कोयो नाम महागिरि 13 11' जिसपनोत्तरछदा 54 16 क्लिन शयरपङ्किरम् 100 34' लिश्यते कृष्ण देवकी 69 13' क्लीया इव विचेतस 108 31 109 67 दयामास चपले 43 20° प्लेदिते धरणीतले 702 केशमेवानुवर्तसे 35 27 क गच्छामस्त्वया विना 77 184 फ गरछामि महाभुज 83 46* क गच्छामीति वै मुहु 9 92* कच गोपत्वमशुभ 65 34. कच देवप्रभावेन 65 34° कच भावविपर्यय 35 42" चिच्छिन्नाभ्रसस्थिते 59 16 कचिन्छीकरमुक्ताभ 59 16° कचिजानुभिरुष्टै 51 9 कचित्कदम्बदासादय 54 11 चित्केसरवर्चसम् 3311 धचिरक्वचिदुदमाप्रै 86 51 क्वचिदासीनमासने 40 160 कचिद्गायन्यचिक्रीडन् 55 11" क्वचिदुर्दिनसकाशे 59 16 क्वचिद्धस तावन्योन्य 52 6" क्वचिद्भमप्रदिग्धाङ्गी 51 8. कचिदनगतो युवा 55 120 चिनिदान्तरेपिणौ 52 60 क्क ते स मुकुटो वीर 779° के दारा कच सयोग 3542. क मे बस व मे पुत्र 7738° कयास्यसि मया रुद्ध 71 33° क्षणदाक्षयसहते 701 क्षण तात प्रतीक्षताम् 70 94 क्षणं म सतिष्ठति जीवलोक 11761 क्षणा निमेषा काठाव 3026% क्षणा सवत्सरास्तथा 104 001 क्षणेन कालयवन 85520 क्षणेन च विहीना स 77 16° क्षणेन तद्रजस्थानम् 53 19. 56 क्षणेन नृपसत्तम] लोकपादसूची [क्षीणप्रहरणा रणे सणेन नृपसत्तम 103 30 सणेन भलसाचीता 56 10° तणेन समतिकान्ता 103 13° प्रणेन समनुप्राप्ता 107 80° क्षणेनादर्शन ददात 65 271 क्षणेनेच प्रमाण स 12 103 क्षत च यपुरात्मन 38 346 क्षत्रधर्मरत सदा 9790 क्षत्रधर्मा जयद्रथ 81 44 क्षत्रधर्मे व्यवस्थित 8171' क्षत्रमिन्द्रभयावदम् 21 12 क्षत्र भुवि परिश्रुतम् 11430 क्षत्रियाणा कुरुश्रेष्ठ 10 270 क्षत्रियाणा परिश्रुत 15 28° क्षत्रियाणा बलवता 42 60° क्षग्रियाणा महात्मनाम् 81 68" क्षत्रियाणा महौजसाम् 10 280 क्षत्रियाणा पुर्भिश्च 41200 क्षत्रिया नाहरिष्यन्ति 115 350 क्षत्रिया भरतश्रेष्ठ935* क्षत्रिया युद्धदुर्मदा 9 36 क्षनिया वाजिमेधन 118 17° क्षत्रियेण विधिसता 23 651 क्षत्रियविप्रयोजिता 42 390 क्षत्रिय शस्त्रत्तिभि 42 44° क्षन्नुमईसि मे ब्रह्मन् 43 33° क्षन्तुमहसि मे विभो 62 360 क्षमया परया युत 31 93d क्षमा त्वत्त प्रसूता च 100 50% क्षमापराक्रममय 37 21° क्षमायलेन मनसा 38 23° क्षमा भूर्दहनो मुखम् 58 38 क्षमावन्ती मनीपिणी 33rd क्षमा मनसि संघाय 6598 क्षमा योऽतीत्य भापसे 38244 क्षयमक्षयवर्वस 52 क्षयवृद्धिम्तव व्यक्ता 36 4. क्षय यास्यन्ति शत्रण 43560 क्षय सृष्टिं च भारत 104226 क्षयाय दितियशस्य 31610 क्षयाय पृथिवीन्द्राणा 44 13* योदयाम्या परिवर्तमान 17 51 क्षयो भुवि मया रेट 45 10% क्षयोऽय भविता महान् 10667° शरजलाना शैलानां 54 284 क्षरजलानां पाशा 37 34° क्षरन्तीपु पयो बहु 62 50 क्षरस्तु विक्षान्दति 33 17" क्षरेय येन यत्सा 670 क्षान्तमेव तदानेन 66 37" क्षामकुक्षिपयोधरा 61 211 क्षितिनाथ गतायुपम् 77 क्षिति क्षितितले स्थित 100 48' क्षिति सर्वेऽभ्यधावन्त 113° क्षिति शैथिल्यमेष्यति 43 55d क्षितौ ताजहि दानरान् 44 830 क्षिती समभिवर्तत 113 क्षिपनारायण रणे 38220 क्षिपन्पदरा महीधरान 36 61' क्षिप्तचित्त इव श्वसन् 110 64 लिप्त यदुवृप दृष्ट्वा 661 क्षिप्त क्रोधेन दानव 73 24* क्षिप्ताभि पवनेनादि 43 31° क्षिसे रितरि चुक्रोध 7624° क्षिप्तोक्षिप्तगदाविरम् 37 35' क्षिप्यमाणमनेकश 65 99 क्षिप्यमाणेश्च मुसलै 3500 क्षिप्यमाणोऽसुरेन्द्रेण 38 230 क्षिप्रकारी महाबल 12 31d क्षिप्रमद्यय वध्यताम् 76214 क्षिप्रमारयातुमर्हसि 71 230 क्षिप्रमागन्तुमईसि 91 3rd क्षिप्रमाज्ञापय विभो 4380 क्षिप्रमानय मे कान्त 107 83° क्षिप्रमानयितु ब्रजात् 65 83 क्षिप्रमारोहयन्त्विति 81 390 क्षिप्रमावेदये चेद 96 69°° क्षिप्रमुक्तश्च पर्वते 357 क्षिणमेव बधियामि 38 17" क्षिण वध्य स मे भवेत् 56 3rd क्षिम विशन्तु यूयानि 61 54* क्षिम समभिवर्तध 8173 क्षिप्र सवाह्यतां बज 52 20 शिप ससाध्यतां कल 62 69* क्षीणपुण्यमिव ग्रहम् 77 1 क्षीणप्रहरणा रणे 32 12 हरि पादसूची-8 57 - क्षीण विस्तारयिष्यति] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवशस्य [ख सा देवालय दे क्षीण विस्तारयिष्यति 6828 क्षीणाकारासु तारासु 703* क्षीणा जयेन हृदयाम् 29 16 क्षीरमासीदनुपम 6 17 क्षीरमूर्जस्कर चर 6 100 क्षीरवत्य इमा गाव 59 10° क्षीर रधिरमेव च 6310 क्षीर सपा भावयेत् 68 क्षीराद्यथा दधि भवेत् 39 120 क्षीरिकाक्षसधाता 43700 क्षीरिण्यो द्विगुण गाव 59 48° क्षीरोदस्यामृतोदध 30 18' क्षीरोदस्योत्तरा दिशम् 45 470 क्षुद्रकाणा समन्तत 108 616 क्षुद्दा क्षुद्रपरि छदा 117 17 क्षुधा मे बाधते तात 35 61 क्षुब्ध नरवरानीक 81 639 क्षुब्धाविध महार्णवो 36 154 क्षुभिता सागरगमा 83 38* क्षुरतीक्ष्णाग्रचरण 642" क्षुरपर्य तमण्डलम् 38 41 क्षुरान्तान्मारवान्याशान् 91 44 क्षुवतस्तु मनोस्तात 9 380 क्षेत्रजोऽह मुतस्त्वेव 73 36° क्षेत्र सर्वस्य कर्मण 62 304 क्षेत्राणि रसवन्त्यस्या 44 680 क्षेत्रे वैचित्रवीर्यक 23 120° क्षेपण क शुभ मन्येत् 66 110 क्षेपणाद्यस्य मुह्यन्ति 38 43° क्षेपणीयाश्च मुद्रा 81 34 क्षेपणायैश्च मुद्गरै 33 114 37g81 786 क्षेपणमुष्टिमिश्चैव 75 310 क्षेप्तार कूरभाषिणम् 89 43' क्षेप्तुकामस्रिलोचन 112 30° क्षेमको नाम राक्षस 23 584 क्षेमधन्वसुतरत्वासीत् 10770 क्षेमध वा तत स्मृत 10760 क्षेमप्रचारबहुर 49 240 क्षेमस्य केतुमान्पुन 23 890 क्षेम सुभिक्षमारोग्य 17 25* क्षेमी तरति कीतिमान् 6464 क्षेमो नाम महाया 23 69 क्षेमो मुदितगोकुल 604 क्षोभयन्धरणीतलम् 38 490 क्षोभयेयुर्महोदधिम् 43 74 क्षोभयेऽह घरामिमाम् 46 23' क्षोभित स महादद 563 क्षोभिनानि महीक्षिताम् 10571 शोभिवास्ते महासुरा 31 690 वेहमानश्च पत्तिमि 81 200 वेडयन्ती प्रगायन्ती 58 30 वेडितास्फोटितरव 74 2781320 श्वेडितास्फोटितेन च 74 21' क्ष्वेदितास्फोटितोष्टै 8192* स खगाना गतिरुच्यते 62201 खगाना च विकूजितम् 73 13' खगराकाशगोचरैः 55 44 सट्वाङ्ग इति विश्रुत 10644 खड्नचर्मधर तदा 108 b8t खड्गचर्मधर ते तु 108 59° खनचर्मधरोदमै 81 180 खगचर्मपरश्वधान 128 खड्गपाणिश्च यादव 108 60% सनमादाय धर्म च 88 230 खनमुद्यम्य ताश्चापि 89 44. खड्ग चकनकत्सरुम् 47 40 खही चर्मी शरासनी 23 150 खनिश्च पुरी द्रुतम् 81 351 खन्यमाने महाणचे 1048* समस्थिराणा विषय 62310 खमारूदं नृचक्षुप 61 13* खमुस्पेतुरथ प्राणा 29 17 खर इत्युच्यते दैत्य 44 120 खरयूथेन महता 57 12 खरलम्बावुभावपि 37 6 खरस्तारपर साधं 57 20° खरोष्ट्रवदनाश्चैव 31 81 खला बला च राजेन्द्र 23 8° खसा तु यक्षरक्षासि 3929 खसम कारवदन 31 770 खसम पितृवर्वी च 164 ख च गा चैव पूरयन् 38 36 ख बभूवातनि प्रभम् 61 160 ख सपाश इव द्विज 115 3rd स सा देवालय देवी 48 36* 58 - खादितु मोक्तुमेव वा] श्लोकपादसूची [गजेन्ददाशनाक्षित खादितुं भौतुमेर या 67 34 खानयामास पार्थिव 10 471 खिम्रो घम्युपवासेन 16 370 खुरनेमिसमुद्धतम् 81 320 खुरदारयते भूमि 67 80 सुरैनिंदरियन्महीम् 57 15 खुरोद्धरणमुत्तेन 67270 खेचराणा महात्मनाम् 3 850 खेचरा से समन्तत 61 40% खेचरीव च गां गता 86 450 खेचरैश्च महाग्रहै 31 3rd खेदात्करणमापिणी 42 130 खे नदत्सु समन्तत 61 144 खेलेन रुधिरस्रये 11412 खे सगतान्यवाद्यन्त 75 360 ख्यात कल्माषपादो वै 10 70° ख्यातास्तस्य महात्मन 297 ख्यातिमन्तत्रयस्तेषा 28 320 ख्याति कन्येति यास्यसि 9 11 ख्याति गच्छेयमीश्वर 112 1250 ख्याति यदुपयास्यति 865 ख्याति यास्यामि कर्मभि 21 256 ख्यातो लोके भविष्यसि 67 58d ख्याती ख्यातिमता वरी 27 180 ख्यायते यस्य नाम्ना वै 23 1320 ग गगनक्षोभण सगम् 34 390 गगन भूर्दिशश्चैव 1137 गगन सागरस्य 54 34 गगनादिव पर्वतम् 12 80% गगनाइष्टसङ्गिा 3853° गगना?च्छ्रिताकार 55 180 गगने तव गायाणा 54220 गश्या सह सागर 4349d गगा परिचरिष्यति 43401 गङ्गामभिमुस नृप 90 14 गङ्गामुसाभिर्दिव्याभि 4370 गङ्गामुपागमनूणे 110 16 गाशापेन देहाध 23 80% गमा सर्वाङ्गशोभना 437 गङ्गासिन्धुप्रकाशाभि 93 11 गारष्ट्वा महर्षय 23 790 गय निम्नगा घम्या 100 38. गाछ कृष्णस्य निल्य 66 38° गच्छ तात यथासुसम् 18 310 गच्छतो भरतपंभ 103 180 गरछत्वय दानपति 65 83° गच्छ त्य दूत माचिरम् 44 42' गच्छत्विय यसुमती 43 60° गच्छ देवि यथासुखम् 8 120 गच्छ दोषेण कालो हि 118 33° गच्छ धर्मिष्ठ माचिरम् 70 16 गच्छध्व सहिता सर्वे 108 15 गच्छ निद्रे मयोत्स्टर 47 26° गच्छन्ती पितुरन्तिकम् 9 13° गच्छन्तु धनिनो बजा 50 174 गच्छ मारुत देवेशम् 8667° गच्छ विज्ञाप्यता कृष्ण 77 600 गच्छ सोम सहायत्व 3620 गच्छानया सह त्व तु 492 गच्छाम दिवमुत्तमम् 38 61' गच्छाम द्वारका पुरीम् 1136" गच्छामो मधुसूदन 45464 गच्छाणवजल सर्प 56360 गच्छाणव महीपार 43 24 गच्छाव पृथिवीतरम् 44 80° गच्छेरन्यत्र कश्यपात् 45 40' गजकुम्भोपमस्तनी 48 30 गजचर्मचयोपमम् 100 340 गजदन्तकृतोल्लेख 750 गजदन्तेन केशव 755 गजमङ्गस्य वीर्यवान् 876 गजमेक यथा वने 108 631 गजरूपेण पाइ917" गनवाजिसरोष्ट्राणां 85 210 गजवाजिरथोषैस्ते 108 46* गज स्वेवर गान 74 30° गजा इव समन्तत 108 370 गजा इवान्ये ससक्ता 61 10% गजानीकरिवाशीणे 54 370 गजारोहमथोल्यणम् 74 3rd गजाश्वातिवरास्तत्र 81 940 गजेनासाद्य कवस्तु 87 87° गजेन्द्र इव तम्तम्भ 89 486 गजेन्द्रचर्मवमना: 31 850 गजेन्द्रदशनाहित 67 43d 59 - गजेन्द्राम्भोदवपुप] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य गदेन चेदिराजस्से गजेन्द्राम्भोदवपुप 337" गजेन्द्रांश्च महामति 31 1071 गजैरन्यास्तथा रथै 107 18 गजैगजा इयरवा 82 40 गजैगंजा हि समुद्धा 87 74° गजैश्च जलदोपमै 81 23° गजैश्च मदशिक्षित 81 20° गणयन्तु मम स्त्रिय 47 गण क्रोधवश विद्धि 3 30° गणाश्रव पदातिनाम् 846 गणिकानां पृथङ्मशा 74 90 गण्डशैलराहदासिनीम् 36 22* गण्डौलेश्च दशिते 37 10 गण्डशैलेश शैलेश्च 3330° गण्डूपाय वपुत्राय 24 290 गतमेघजराशया 59 31 गतसत्वा गतासव 38536 गतस्य यमसादनम् 77 496 गत सुकृतिना लोक 11 31° गत किल भवाम्यहम् 78274 गत सूर्यसन तात 46 8° गतागताम्या यो नेता 3029 गताः विमले व्योन्नि 61 62° गता वनकुतूहलात् 73 10 गतासुप्रतिमोऽभवत् 65 6 गतासुविकृतानना 91 49 गतासु स जगाम ह 58 524 गतासु स पपातोग्यो 71 139 गतिमिष्टामनुत्तमाम् 19 26° गतिमेतामप्रमत्त 13120 गतिर्गतिमतामपि 30 37444 161 गतिभवति मेदिनी +4 784 गतिस्तव तपोमयी 62 29% गति तत्वेन चिन्तयन् 1164 गति प्राप सुदुर्लभाम् 19371 गति यास्यन्ति पार्थिवा 23 149 गति वेगतरगिणीम् 43 18 गति शमदमाट्याना 6231° गते कृष्णे ततो नन्दी 112 114° गते चानङ्गता पुरा 99 46* गते स्वेद मम वच 461 गते देवकिन दने 932 गते द्वादशवार्षिके 10 20 गते यास्यन्ति यादवा 65 894 गतेऽर्थे दुरतिक्रमे 78 31 गतेऽधरानसमये 1027" गते शके सत कृष्ण 63 1" गतेषु तेषु गोपेपु 50 26° गतेऽहनि पुन सर्वा 107 17° गतोऽन्तर्धानमीश्वर 47 57 गती वैवस्वतवश 105 21° गत्वा गोपस्वमप्यति 45 321 गवा च शोणितपुर 105 12 गत्वान्तिक घरारोहा 9 8° गरवा वैन्यभयात्तदा 5 44 गत्वा स मिथिला प्रभु 29 28* गत्वा समुद्र तेजस्वी 79 120 गदया च जधानाचान् 81 87° गदश्चास्या सुलावुभी 250 गदा कौमोदकी च ह 81 594 गदा गदाभृता भ्रष्ट 8218" गदा गुरीश्च दानवा 37 271 गदा तस्यापरे करे 81 64 गदानिपातैर्भग्नाङ्गा 37 28° गदानिपातो रामस्य 82 170 गदापरिघतोमर 112 94° गदापरिघयुद्धेषु 79 22° गदापरिघशक्तीनां 4371 गदापरिघसपूर्ण 335 गदापागिरदृश्यत 34 161 गदापाणिरवस्थित 3314 गदाभिश्चैव गुर्वाभि 81 78° गदाभिस्तोमरैस्तथा 108 226 गदामादाय वीर्यवान् 81 86 गदामुद्यम्य बाहुभि 38 320 गदामुसरलागलै 110 50% गदायुद्धविशारदौ 82 16 गदायुद्ध कुरुपति 90 18 गदायुद्धपु विश्रुती 82 114 गदाशिक्षा ततो दिल्या 29 28" गदाशूलासिपाणय 108 496 गदासयोगमिच्छति 68 266 गदिनो ये गदाभिरते 81 490 गदे गृहीत्वा विक्रान्ती 82 g" गदे च कृतवर्मणि 87 45' गदेन चेदिराजस्य 82 2 - 60 गन्तव्यस्तेन दारगः] श्लोकपादसूची [गर्भमाधत्त देवकी गन्तव्यस्तेन दारणः 65. 65. गन्तव्यं चापि नि सङ्गम् 109 36', गन्तम्या नात्र संशयः 320". गन्तुं भरतशार्दूल 105.5. गन्तुं वृन्दावनं प्रति 537. गन्तुं वैवस्वतक्षयम् 74 20. गन्तुं शक्यं महामुन 10978. गन्धकाली यशस्विनीम् 15. 39. गन्धमादनपादेषु 21. 7. गन्धमादनमेव च 103 13* गन्धर्वऋषयश्चैव 61. 36°. गन्धर्यनगराकारः 108 80'. गन्धर्यपतयस्तथा 107.24. गन्धर्वराजः प्रोवाच 118 23. गन्धर्यराजोऽतिबल: 634. गन्धर्वाणामधिपतिं 4.7°. गन्धर्वाणां च याः कन्या:91.12. गन्धर्वानमितौजसः 3.93. गन्धर्वाप्सरश्चैव 2 48.43. 68*. गान्धर्वा मुनयस्तथा 31. 48. गन्धर्वासुरमुख्यानां 92. 23. गन्धर्वरप्सरोगणैः 31. 38. गन्धरप्सरोभिश्च 23. 147". गन्धः सासरोगणैः 2, 25.6 330. 38 56'. गन्धर्वो नारदस्वथा 23 148. गन्धौरंगयक्षाणां 44.5. गन्धवारगरक्षसाम् 1. 2.2 50. 3. 1. 107.63. गन्धर्वो शापविक्षती 31 119. गन्धाघाती द्विपाविद 71 16". गन्धान हृदयंगमान 83 22. गन्धन कमलस्य च 55.6'. गन्धैः कोलाहला यान्ति 54. 33. गन्धोदाममिवाकाशं 107. 3. गमनं ते महाराज 77. 20. गमनाय च ते सजा 69 280. गमनाय मति चके 10987. गमनायोपतस्थिरे 69 304. गमिष्यति युगक्षये 115 32. गमिष्यन्ति युगक्षये 116 nt. गमिष्यन्ति स्त्रियोऽन्यत: 116 39", गमिष्यामः शिवाय ये 692 गमिष्यामि यथागतम् 100 24, गम्भीरमसोम्यज- 55.41". गम्यता कीरवश्रेष्ठ 101. 16'. गम्यतां च यथासुखम् 83 49. गम्यता पुनकाश्चेति 12 27. गयस्य तु गया स्मृता 9 164. गयं कृष्णं प्रजाजिना 2. 284. गयं गर्ग तथैव च 23534 गरिष्ठश्च वरिष्ठश्च 31.75. गरुडस्येन चोरिसक्तः 30. IT', गरुडस्थो जनार्दनः 91. 41. गरुडस्थो महायाहुः 91. 47. गरुडस्य व दर्शनात् 94 10. गरुडस्य च सप्रामे 112 163. गरुडस्योपरिस्थितम् 94 11. गरुडं चैव पक्षिणाम् 4.84. गरुडं पततां श्रेष्ठं 92 199. गरुडः कालनेमिनम् 38 48". गरुडः पततां वरः 92.43d. गरुडः पनगरिपुः 56 39. गरुडानना खड्गमुखाः 31. 84°. गरुडेनाथ पक्षिणा 112 81'. गरडे पक्षिणां वरे 92 42. गरुत्मानिव पन्नगम् 1087% गरुत्मानिव वीर्यवान् 88. 23. गरुत्मामक्षिणां श्रेष्ठ 62.23. गरेणैव सहाच्युतम् 10. 35. गरेणैव सहाच्युतः 10. 28. गर्गरा इ मध्यन्तः 61. 42. गर्गरीभिस्ततस्ततः 53 23. गगरीस्तम्भमूर्धसु 53 25. गर्गरेपु नदत्सु च 704. गर्गरोद्गारनिस्वनम् 49. 24. गर्गरोदारहासिषु 59 55. गर्गस्य हि सुतं यालं 22. 9". गतस्तस्य वास्यौपाः 112. Br:: गर्जतीति जना विदुः 59. 13*. गर्जन्तमिव तोयदम् 33. 10*. गजमाने यथा घनम् 75.3. गजमाने यथा घने 74.26. गर्जितेन घ मेघानां 61. 19*. गर्दभः परिरक्षति 57. 13. गर्भकाले स्वसपूर्णे 48. 11. गर्भन्तनमेतन्मे 48.46. गर्भमाधत्त देवकी 48.8. -- गर्भमाधाय कश्यप ] चिकित्सितपाठामपस्य हरियंशस्य [गाव परिरक्षिता गर्भमाधाय ५५५ 3 103* गर्भमोक्ष यामुगम् 47 35* गर्भस्थानामपि गति 40 27. गर्भस्थान्यो पधिप्यनि 4700* गर्भस्ये यदि सारयते 40 18' गर्भ पदहरेय तु 48 10 गर्भ दुर्धरमध्युतम् 2310851 गर्भ नि सूतमारमा 48" गर्भाग्यां परितोपय 45 sst गर्भाग्यो भयविश्र 4820 गौम्युनिसमूर्धजा 48 27 गर्भापकर्तनादीनि 69 230 गर्भावसाने नशे चकार 30 194 गर्भास्ने तिरममिता 10694 गर्मास्ते सर्व एप हि 472 गर्भ घेछरदा शतम् 3 100% गर्भऽपि नियतो मृत्यु 48 47" गर्मो धायें कथचन 20 370 गर्भोमसभो शेय 30 41 गौ सव वधाय घे 65 50" गर्विताविद्धलार 64 3° गर्विता सुहद पृता 78 19 गईता यसुदेवं च 66 18* गलबन्धानमहापा 9 100% गवामरिस्वमापन 4469° गवामिह हि शान्तये 61 64 गपामुद्वेजनो भृशम् 644 गवामेव हि गोराक 62 32° गवारोहेषु घपर 64 6. गवां कारणतावश 4531° गवा घोपस्य चानध 5643 गवा धाप कदाचन 49 10% गवां च गजविक्रम 62370 गवा चैव परिक्षय 11616" गया चैव मुसाय च 5370 गवां चैव मुखावहम् 5320 गवा तस्कदन दृष्ट्वा 61 26° गवा प्राणाय दुर्मति 96 39 गवा ग्राणाथमिछता 96 371 गया नीराजनोत्सवे 60 346 गवा पिशितभोजन 67 6 गर्वा वाक्येन चोदित 62 34 गवा वै सप्तरात्रिकी 62 144 गर्ग परशाकरिगो 5338 गयो मूर्यो गुर स्गा 42 sr' गयो इम्भारयाधिस 6156' गर्मा हम्मारयेण 536 गर्या देयो प्रयाम् 60 10 गयेधुपिनउरा 11035 गयेपणरय द्रुतम् 87 13 गयेषणम्य मूल च 87 07" गयेपणोऽपि तु 87 85" गहनानीह यान्यासन् 52 100 गागर तथाशयम् 100 60 गानीयधन्या यीमरमु 101 गाण्डीर पामिना दाम् 105 17* गाता घाणों येदानां 44 !" गाग्रयागायगुप्तध 98 120 गाग्रविन्दश्च पीर्ययान् 98 12 गायाखागशिर प्रख्या 37 380 गाग्रेभ्यम्नस्य जशिरे 1 36" गाने परिदग्ध ये 83 गाविस्तभूपण 76 33 गाथा अप्यत्र गायन्ति 31 136. गाथा प्रति माहुकम् 27 10 गाया प्रीतमर्षिभि 13 56' गान्धर्व प्राणोऽतिके 9 23 गान्धारतनया हता 105 164 गाधारदेशजाश्चैव 23 1320 गान्धारराज सुबल 80 18" गाधारविषयो महान् 23 1324 गान्धाराधिपति तथा 871 गाधारी चैव माद्रीच 24 1 28 90 गान्धारी जनयामास 24 10 289° गान्धारी भरतभ्रए9344° गान्धारी भुवि विख्याता 43 52° गाधारीमावद्धीमान् 97 18° गान्धारो नाम पार्थिव 23 132" गान्धायाँ विनियुज्यताम् 43 630 गायन्ति सरनिप्रिया 55280 गायन्तीति परिश्रुतम् 27 18' गायन्त्यस्ता वराङ्गना 63 29* गायन्त्य कृष्णचरित 63 25° गाग्येण परमर्षिणा 96450 गाईपश्येन विधिना 3021 गावश्च परिरक्षिता 83 1 -62 - - गावश्वाकासा दिवि लोकपादसूची [गुरपुर सदायुषः गावश्चाकाशगा दिवि 62 38 गावस्ता सह यूथप 62 66 गावस्तेनैव मार्गेण 61 534 गाव कृष्णसमीपगा 64 10 गाव शीकरवेजिता 61 290 गावो गिरियर सर्ग 59 30° गावो गोवृपभेक्षण 55 27 गाचो वत्ससमाकुला 6028 गादो वरसाश्च वत्सला 67 49 गावो वर्षपराजिता 614 गादो वर्षभयातीर्णा 63 30 गावो वै वृपमेक्षण 113 43" गावोऽसवत विदि 59 20° गावो हि पूज्या सतत 59 610 गाश्च ते रक्षतो विष्णो 45 41 गाश्च सूर्यों रसान्सोम 38 740 गाचव सविशेपत 59 674 गास्तवाद्वयत्सु च 6810 गास्तु जनयामास 3 910 गाव कि परिरक्षसि 634 पास्यन्ति दिवि देवता 62 441 गा गत शशिन पया 63 194 गो गता इव तोयदा 54 203 गागतायातबाज्ञया 43336 गादिनी नाम सा गां तु 24 T" गादीपुत्रो महायशा 29 2sd गर्दीि सस्यास्तु गादीख 28 376 गां दोग्धी समकाल्यन् 166 गो प्रोक्षयित्वा धर्म 17 10% गा सप्रयच्छ मे देव 113410 गिरयश्च धनानि च 5920 पिरिकुशे रुरोद ६ 114 10 गिरिकूटमिवोच्छ्रितम् 32 2 गिरिक्षिपम्तयापेक्ष 28 390 गिरिणा काप्यमानेन 61 390 गिरिणा पादपेन या 31 43 गिरिमाये महात्मना 105 13' गिरिमूर्ति स्थित दृष्ट्वा 60 21 गिरियक्षप्रवृत्तेन 60380 गिरियज्ञ प्रति प्रभो 60 गिरियज्ञ घय बने 59 28 गिरियज्ञ प्रवर्तताम् 59 594 गिरियज्ञा क्य गोपा 59 27 गिरिरमाभिरिज्यताम् 59 5sd गिरिरदामबहिण 61 350 गिरिगाधनो नाम 45 350 गिरिभूत्या समभुते 60 180 गिरिशृङ्गनिर्भयुद्ध 110 50% गिरिशङ्गप्रहार 437 गिरिराङ्ग व्यदारयत् 110626 गिरिशगोपम बली 76 360 गिरि गोवर्धन रम्य 572° गिरि त परिवार्य 61 61 गिरि सव्येन पाणिना 61 30° गिरि स शिखरैत 61 47 गिरि सुप्रभया गिरा 60 24 गिरीणा शिखराणि च 687 गिरीश शूलपाणिनम् 4 6' गिरी सशिखरावुभौ 82 100 गिरेगोभि समाकुल 60 161 गिरेमेघ प्रविष्टानि 61 38° गिरे राज द्विधा कृतम् 91 571 गिरी कालजरेऽच्युत 16 26° गीतमप्सरसा तदा 107 40 गीतं सनत्कुमारेण 11 7° 15 66° गीयन्ते ब्रह्मवादिमि 31 149d गीमिमगरयुक्ताभि 48 170 गीर्भि परममन्त्राभि 34 47° गुणकाय वर ददौ 71 1900 गुणको नाम तत्रासीत् 71 18" गुणबुड्या तु भगवान् 109 गुणशोराभिजनत 107 74° गुणहीना प्रजास्तत 1173 गुणान्देवावृधस्याय 27 12 गुणास्तध्येन कर्मणा 117 484 गुणेषु दुष्टवृत्ताना 78 120 गुणेषु परिवर्तताम् 117 43 गुणे वर्माभिनित्ति 17 4B° गुणोपेता कुलोदवा 88 40% गुसवीर्ययान्वित 81 1000 गुप्त राक्षसकोटीभि 31 123° गुप्तो बराहकगण 34 6 गुरवे वासगनुन 7920 गुरुकर्मसु घोद्यता 6s 14 गुरणा मे हृता इति 45 2nd गुरुपुत्र तदाच्युत 79 150 -63- गोपा गोधनजीविन ] लोकपावसूची [गोविन्द निशित शरः गोपा गोधनजीविन 59 20% गोपा गोपस्त्रियश्च ता 67 45 गोपानामपि मे राज्ये 76 196 गोपाना ऋन्दितेन च 67 156 गोपाना तद्वच ध्रुत्मा 67 220 गोपाना तुमुलो जज्ञे 61 56° गोपाना नन्दिवर्धन 56 270 गोपाना भयाधना 52 33d गोपाना वचन श्रुत्वा 63 10° गोपाना विपुल धनम् 60 270 गोपाना हर्षवर्धन 60 150 गोपाना इवर्धिनी 600 गोपाकृष्ण समासाद्य 67 68° गोपान्वृद्धान्समानीय 69 10 गोपाभ्या रङ्गसनिधो 72 21 गोपा मार्गगता भान्ति 53 17° गोपा मुदितमानसा 55 250 गोपायन य कुरुते 30 ? गोपायसि यथा सात 497° गोपाल कृतलक्षण 45 39 गोपाल पुपं गोपा 58 15° गोपाल वसतिं गते 45 420 गोपाररेषमास्थाय 58 130 गोपारास्त्यपरे गाव 60 33° गोपालास्त्वपरे पिता 58 214 गोपालास्स्वपरे द्वद 58 20° गोपारांश्च यसोदमान् 63 17° गोपारा कृष्णमेवान्ये 55 25° गोपाला सर्व एवं ते 5614 गोपाली चप्सरास्ता 25 10085140 गोपलिरपर सह 58 20% गोपालैदशकार 83 19 गोपाल कृष्णपक्षीय 58 21 गोपारे क्रीडितालयम् 49 26 गोपाले सह क्रीडितुम् 52 d गोपार सहितावुभौ 58 11 गोपालो यादव यश 68 28* गोपा वन निवासिन 57 25% गोपा बनविचारिण 512* गोपावेतो समानांधात् 76 18° गोपास्त पयंगारयन् 50 254 गोपाश्रामसवदनान् 61 20 गोपांचोरसवलायमान 5924 गोपास्तेनैव विधिना 83 4 गोपीना गगरीभिश्च 53 15" गोपीना जनितस्वनम् 49 25° गोपीना मागंगामिनी 53 16d गोपीना सुखसचार 52 23° गोपीभिश्च समन्तत 53280 गोपीभि परिगीयते 51 360 गोपीपु च यथाकाम 52 31° गोपेषु महदद्भुतम् 51 2 गोपेषु मुदितेषु च 654 गोपैरभ्यागतस्तथा 68 8 गोपरापूर्यमाणासु 708 गोपैमथितपादपम् 52 गोपैयूंथप्रकल्पिता 61 67 गोपैयंप्रकरभृशम् 53 290 गोपै सवै समन्वित 65 84d गोपै सद्द बनेचर 78 360 गोपो वाक्यमुवाच ह 59 40 गोलारश्चाप्यगोसार 117 31" गोप्यस्त ददृशु शिशुम् 51 20% गोग्राह्मणपरियाणा 45 30° गोभानोस्तु सुतो राजा 23 123° गोभिर्लोकाश्च रक्षिता 62 39 गोभिस्तृणनिममाभि 49 ° गोभि समवकीर्णासु 70 40 गोभि सह परिव्रजन 55_17 गोभि सूर्यस्य वारिद 59 17" गोमत्या सम्यवेशयत् 23 600 गोवध स्त्रीवधोऽपि वा 65 633 गोवर्धनघर श्रीमान् 63 1 गोवर्धननगोपगे 49 16 गोवर्धनशिलातरे 62 3 गोवर्धनत्यानुचरी 587 गोवर्धनस्योत्तरत 57 30 गोवर्धनो यथा रम्य 54250 गोवाटेष्वपि ये वृक्षा 52 ll" गोविन्द इति रोकासवा 62 43° गोविन्दमुजपालिताम् 1009 गोविन्दमरविन्दाक्ष 6726" गोविन्दरामी सप्राप्तौ 79 31° गोविन्दस्य महाराज 101 3° गोविन्द ददृशु बुद्धा 88 6" गोविन्द निशितै शरै 88 8' हरि पादसूची- -65 गोविन्द पुरुषोत्तमम् ] चिकित्सितपाठात्मरस्य हरिवशस्य [घोराश्चिन्तयतसस ग्रामणी सर्वदेवानाम् 34 3° ग्रामाणा वा तदाभवत् 6 10° ग्रामाभोगाश्च पुष्कलान् 18 31' मामायुताढयै राष्ट्रैश्च 41 220 ग्रामा शतसहस्रश 41 214 ग्राम्यान्धर्भानवेक्षवा 44 360 ग्राम्याश्च विषयाश्चैव 30 520 ग्राह्या रारयितव्याश्च 118 380 ग्लह एको ममापर 89 351 ग्लह तस्य महात्मन 89 290 गोविन्द पुरुषोत्तमम् 104 251 गोविन्दागमनेऽत्यर्थ 79 29° गोविन्दाभिमुखो ययौ 67 161 गोविन्दे चैव समान 86 390 गोविन्देन हत दृष्ट्वा 64 32° गोविन्देनाभिपूजित 86 53d गोविन्देनोपलक्षित 102 19d गोविन्द समुपस्थिते 79 320 गोविन्दो न च तं लेभे 28 14° गोवृष तु गवामपि 4g गोरज गोपनादितम् 4929 गोवज गोरुतशिव 4921° गोबजे नन्दगोपस्स 501 गोषु चापि कृतो यावत् 92 130 गोपु चैव जनार्दन 83 551 गोपु चैव प्रहृष्टासु 62 50% गोपु तिष्ठति भूतले 45 340 गोपु नातासु च तथा 65 3° गोपु नागेद्रविक्रमी 57 26° गोपु यद्यस्ति वो दया 60 240 गोपु वत्सेप्वथो नृपु 52 31" गोष्टाविपरिधावति 64 d गोठाच परिधावत 45 430 गोटेपु गोम्यो वत्सेभ्य 49 11° गोठेपु न रति लेमे 64 9° गोष्टेष्वदति रूपिणी 59 556 गौतमोऽय भरद्वाज 7 30° गौरवात्तव धागत 62 344 गौरी नाम पतिव्रताम् 9 821 गौ म दिवि विश्रुता 13 520 गौर्भूत्वा प्राद्रवन्मही 5 43 प्रसन्ति स महात्मन 11236° प्रसितुं कि पुनर्नजम् 61 551 प्रसवानिति माधव 79 14 प्रम्त स्वर्भानुना सूर्य 66 29° प्रदत्व स तु एब्धवान् 8 44 प्रहनक्षग्रय धुरे 32 270 प्रहनक्षग्रहासिनी 37 10 प्रहीतुमहमुस्महे 22 24 ग्रहीनु परकारी 90 50% प्रहात योगधर्मिणम् 85 394 ग्रहीतुं समुपागतम् 96 40* महीप्यवि स यासर 47 47 घटयानो नरेन्द्राणां 46 30° घटान्दिव्यपयोधरान् 62 58 घयामास पार्थिवम् 85 49 घण्टाभिश्च प्रलम्बाभि 59 58° घण्टामालाकुरा रणे 108 714 घण्टामाराकुरा शक्ति 112 430 घननीराम्बुदागमे 37 160 धन चक्रेण पाटितम् 1048° धर्मदोषपरित्यक्त 54 400 धर्ममासि निरामये 53 33° धर्मान्ते तोयदो ज्योति 108 26° धर्मान्तचिव तोयदा 108 370 धर्मान्ते सागरगत 81 24° धर्मापाये यथा धन 74311 घातनीभिश्च गुर्वाभि 37 घातयित्वात्मन शत्रु 85 650 घृणया स विसर्जित 23 61 घृतपूर्णेषु कुम्भेषु 10 60° घृतस्तस्यारमजोऽभवत् 23 133 घृतानु दुदुहो जज्ञे 23 1330 घोरमादा भयादा 618' घोरमाशीविष कृष्ण 85 30° घोररूपा महावेगा 112 70 घोररुपा भयावहाम् 108 71' घोरं तालयन दैत्य 44 720 घोरं मधुवन नाम 44220 घोरं धनमुपाशित 4426 घोरा नरपरक्षया 10530 धारा निहदिकारिण 32 11 घोरा मुखासाथा 31 820 घोराधिसयनम्नस्य 52 30% घोरण तमसाविष्टा ] श्लोकपादसूची [धनुस्ते यदुपुंगा पोरेण तमसाविधा 35 14 घोरेण तमसा वृता 32 100 घोपमेव जगाम 51300 घोषयन्त्यपरे जना 75 340 घोपरच्यासु सर्पश 70 घोपवृद्धा समागता 536 घोपस्यास्य न विद्यते 51 336 घोपस्यैवाप्रपादपी 51 280 घोष सागरघोपवान् 53 4 घोषाणा भूपण वनम् 50 16 घोपावासेषु सुप्तेषु 68 33 घोपे तरप्राकृतैनरै 53 10% घोपे दामोदर इति B1 36* घोपे निवसतस्तदा 51 374 घोपोऽय नगरायते 52 1st मता पापमिम तात 67 489 प्रन्ति तानेच दुर्वृत्तान् 59 26° मन्ति देवान्सगन्धर्वान् 32 110 च चकमे वासबस्तदा 118 13 चकमे वासुदेयता 87 14 चकच महार) 76 35° धकर्ष यमुना राम 83 32° चकार ध रुरोद च 5060 चकार चहल दस्ते 83 300 चकार चोदितो यत्न 74 233 पकार गती पुन 31 204 धकार तप उत्तमम् 31 320 चकार तम्या पूर्ण 2 86 43° धकार देत्या सलिशयस्थान 30 20 चकार नि गोष्ट 64 110 पकार प्रियमापगाटा पकार यरदर्शनम् 818 चकार मथुरां धीर 7920 चकार मिथ्या पतिशवितात्मा 118 390 पकार रोप सफ्ल 81 686 पकार पायोराद्वान 86 630 धकार स महामुर 108 624 धकार सह कृष्णेन 78 400 चकारात्ममुखेशयम् 3754 चकारात्मवशानुगम् 37b4 चकारात्मयशे वीर्यात् 3755' सकारानिमहायशा 20 46" चारामहित याण 108890 सकाराभिप्रदक्षिणम् 2014 चकाराभ्यधिक स्नेह 8 18 चकारारणमूर्धजम् 67 चकारातों ररास ह 74 3" चकारोरगमोगन 62 20 चकाशे काननावृत्तम् 53 30° चक्रदेवे सुनक्षत्र 87 45° चक्रदेवो दन्तवत्र 87 610 चद्विधाकृत तस्य 91 57* चक्रपाटनमा घोरा 112 1220 चक्रवन्धमकारयन् 50 10* चक्रमप्रतिचफस्य 112 40° चकमुद्यम्य समरे 3844 चमहारपातैश्च 112 30 चक्रवर्ती सुतो जज्ञे 23 49° चक्रवाकरत्रमागता 16274 चक्रवाकस्तनतटा 55 330 चक्रवाकम्तनतटा 59 370 चक्रवाका सरिटीपे 19 18° चक्रवाको मुखस्तनी 83 36° चक्रवारीररकृत 63 35 चफ क्षिपति शत्रुपु 38 136 चक्र चक्रगदाधर 3436" चक्र जमाद वीर्यवान् 112 39d चक्रं ते दर्पशमन 112920 चक्र भूय क्षेप्तुकाम 112 106° धाते तस्य नाम है 114 13d चक्राते वेदसहिता 15 घकानुयात सहितान् 97 180 धक्रायुध करोग्यहम् 11 100 चक्रायुधारमा क्रुद्ध 99 26° चक्रास्ट इवाभाति 61 60* चविर विजिगीषव 89236 धारकं प्रदक्षिणम् 32 350 चारानन्दित वरम् 33 30* भुगोपा द्विनै सह 60 10 चदिवसत्तमा 86 12 चकुर्वास्तुपरिग्रहान् 86 11 चथैव प्रदक्षिणम् 36414 पास्ते जलदास्तथा 61 चकुस्ते तस्य सत्कियाम् 78 434 चकुस्ते यदुपुगवा 78 42 - चकु सर्वे तथा च ते] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [चत्वारस्तस्य चारमजा चक्रु सर्वे तथा च ते 86 611 चक्रे चक्रगदाधर 113471 चक्रे चक्रभृता वर 306 चक्रे चित्ररथ प्रभु 47 चक्रेण पुरुषोत्तम 7 चके तालस्वन प्रभु 74 28° चक्रे निवेश सौमिनि 44 450 चक्रे सुरेश पुरुहूतमेव 30 204 चक्रश्च दैत्यप्रवरा 33 30° चक्रश्च सपरश्वधै 379 चक्रोचित इवेक्ष्यते 68 263 चकोयतकर दृष्ट्वा 112 970 चक्षुर्दवा सविज्ञान 13749 चक्षुर्दिव्य सविज्ञान 13 720 15 !' चक्षुपा क्रोधदीन 85 4200 चक्षुष्मन्तो हि तस्वत 12 260 घधार च यथोद्देशम् 94 16° चचार तद्वनवर 551 चचार घुतिमान्प्रभु 55 121 चचार नगशृङ्गेपु 73 110 चचार परम धर्मम् 268° चचार मध्ये देवाना 3422° चचार रुचिर कृष्ण 55 39° चचार विपुल तप 9 96022 41276 चचार समर वीर 81 67° चचारान्त पुरसृत 182° चचाल धरणीधर 61336 चचालान्त पुर पर्व 71 450 पञ्चविद्युद्गणाविद्धा 32 14 चर्यन्ते म्म ते सुखम् 57254 चर्यन्तौ रमन्तौ स्म 5270 चञ्चयश्च चित्धचित् 55 11' चण्ड कररुचि सदा 44 656 चतश्च दिश सर्वा 104 150 चतस्रो जज्ञिरे तेषां 987 चतस्रोऽरिष्टनेमये 3240 चतसो विद्युत स्मृता 3540 चतुरङ्गबल न्यूह्य 81 51° चतुरहरैर्युक्ता 418 चतुरस्य पुनस्तु 23 380 धनुरङ्गो महायशा 23 376 चतुरस्तान्सुरोघत 23 4 चतुर पूरयजान 22 31 चतुरो नियतान्वर्णान् 23 30 चनुरोऽन्यान्निबोध मे 13 50" चतुरो बार कान्गृह्य 103 26° चतुरो भूरितेजस 23 140 धतुरोऽलभतारमजान 27 16 धतुर्णामपि सयुगे 110 404 चतुणां तु पिता योऽसौ 19 13" चतुर्थे चैतदन्तरम् 7210 चतुर्थ तु निबोध मे 13 61 चतुर्थे ते वर दद्मि 112 124° चतुर्थाश हि धर्मस्य 101 9° चतुर्दश वने तया 31 1180 चतुर्दश धनेश्वसत् 31 116 चतुर्दश सहस्राणि 91 13° चतुर्दशैते मनव 7 490 चतुर्दश्चतुर्बाहु 109 82° चतुर्दैवानि चत्वारि 86 17° चतुद्विगुणपानास 32 23° चतुर्धा तेजसो भाग 65 43° चतुर्धा प्रभुरीश्वर 31 111 चतुर्धा विदधे तदा 37 51 चतुर्धा विभजिष्यति 13 364 चतुर्धा स्वा गतिं जग्मु 40 14° चतुभिर्विपृथो शरै 87 56° चतुर्भिश्चतुर शरै 88 13 चतुर्भि सागरैर्गुप्त 34 120 चतुर्युगान्तपर्याये 32 170 चतुर्युगेशो लोकाना 58 45% चतुर्युजा रथनेन्द्र 87 31 चतुर्योजनमायतम् 93 37 चतुर्विशे युगे चापि 31 1100 चतुर्वेदषडङ्गवित् 109 820 चतु' युनाश्चत्वार 34 19 चतुश्चक्र सुवपुष 332 चतुश्चरणसश्लिष्ट 100 34" चतुष्पादप्रवृत्त च 117 42° चतुष्पाद धनुर्वेदे 796 पतु सागरभोगरत्व 58 480 घरवरा राजमार्गाश्च 867" चवरोद्गारहासिनी 44 560 चरवारश्चवरण्डा 17 पवारश्च प्रजापते 7394 चस्वारस्तस्य चारमना 23 1281 ३ चत्वारखिदशोपमा ] श्लोफपादसूची [धर्म शारे सथा पाप पत्यारखिदशोपमा 27 28 चत्वारस्ववो पिता 10 490 चावार प्रथितौजस 35 चरवार सप्तका गणा 736° चरवार सागरा ह्यस्था 86 33% चस्वारिंशदथाष्टौ च 9 41 चत्वारोऽच्छिदर्शिन 18 250 धवारोऽन्ये यवीयस 85 Brd चत्वारोऽपि समन्तत 112 20° चत्वारो ब्रह्मण सुना 110 33° चत्वारो मनः स्मृता 70 चत्वारो मूर्तिमन्तो 2 13 4 चत्वारो योगधर्मिण 18 13" चत्वारो रोकसमता 15 17 चरवारो विहिता मम 62 45° घावार्यतानि तेजासि 81 50° चन्दनागरुकाष्ठानि 92 160 चन्दनागरुशीतेन 83 240 चन्द्रप्रभाभिर्विमल 34 490 चन्द्रभास्करते नसा 37 161 चन्द्रमाश्च सनक्षत्र 41 140 चन्द्रमायेन्द्रतापन 360 चन्द्रवक्ता चतुर्भुजा 48 30* पदसापल्यभूतेन 47 420 चन्द्रसूर्यग्रहात्मवान् 3758 चन्द्रसूर्यद्वय ज्योति 30 320 घद्रसूर्याविराम्बरे 5160 चन्द्रसूयाँशुरहित 61 16 चन्द्रहन्ता क्रोधहन्ता 31740 चन्दं धा प्रदक्षिणम् 32 350 चन्द्रामात इवाम्मुद 58244 चन्द्राकान्ततराननम् 491 चन्द्रादित्यावहोराने 104 20° चन्द्रादित्यावियाचलम् 79 384 चन्द्रादित्यो सनान्तरे 31 800 चदापीइश्व नृपति 114 23 चन्द्रापीढस्य पुत्राणां 114 30 पदार्फकिरणोपेत 32280 धद्राचारचिते 32 260 भद्रार्धकिरणेधन 67 38 चन्द्राविम्यसयुक्त 75" घद्रार्धाकारसस्थितम् 53 21' चन्द्रांशुशुक्ने बसने 4480 चन्द्रो वसति पार्पिकीम् 54 230 चपल क्रोधनो नृयु 73 26 चपर श्वेतवाहन 368 चपला क्षिप्रकारिणी 86 19 चमरच्यजन चापि 19 160 चमसोलखलरानि च 317 चम्पस्य तु पुरी चम्पा 23 38* चम्पो नाम महायशा 23 384 चयमूर्ति निविष्टेन 931 चयाहार फक्यूरा 44 56° 86 42° चरण पततामेष 8 20% धरणासनखैस्तथा 11277 चरणाम्यामरिंदम 68 250 चरणौ ते हलायुध 83 46° चरतस्तस्य सग्रामे 11060% चरवा मारलेन च 618 चरता सहचारिणाम् 16 34 चाते वागुदीरिता 12 690 चरत्यतिबलो युद्धे 110 51 चरत्युत्सारयन्प्रजा 44 720 चान्ति यहुधा तदा 113 52° घरन्ति सागरान्सर्वान् 45 24° चरन्ति स्म सुख गाव 57 24° चान्त्ययुतशो जले 100 380 घरमाणम्तयो दीप्त 31 108° चराचरगुरु श्रीमान् 31 394 चराचरस सर्वस्य 6380 चराम सहिता गोभि 52 200 चराम्येक क्षपापाये 100 32° घरा कृष्ण प्रयुज्यन्ताम् 109 320 चरित च महाधुते 31 120 चरित तस्य विप्रन्द्र 39 6° चरित वासुदेवस्य 85 10 चरित स्वप्रभावजम् 4031 चरिष्णुरायो पृष्णुश्च 7 45° चरिष्यामि मृगै सह 78 26° चरेय पृथिवीमिमाम् 22 22, 32 घरेपु स्थावरेषु च 70 364 घकामो यथासुखम् 67 50* चर्मणा व्यवधूय स 108 62° चर्मचारिवर्मा च 28 40% चर्मनृयुधिवर्मा च 24 100 चर्म शान तथा चाप 1106 69 घनिदोऽनलान] चिरित्सितपाठामरस्य हरिवंशस्य [चित्तसेन महामना 406 परजिलोऽनरानन 666 चलति स्ल सफानना 9554 पररप्रसवणे पाय 81 339 घरायपर्वणि मही 66 27° घटरसमचागता 41 204 चरिता देयता स्थानान् 60 30% परित न शशाम 37474 चपालाप्रविभूषितान् 39220 पाधिको घोपयामास 95 8° सापरयान्वरे तात 7270 चाक्षुपसान्तो पूर्वम् 3 820 चाक्षुपस्थान्तरे मनो 3 47', चाक्षुप सर्वतेजसम् 2 100 चाक्षुपेऽमिततेजसि 4 17 घाझेय पानयोजिता 74 14 चाणूरस्थ गवायुप 75 450 घाणूरस्याप्रमेयस्य 72 13° चाणूर पूर्णजीवितम् 75 42* चाणूर मुष्टिक तथा 31 143 चाणूर पूर्वमेव तु 78 चाणूरान्धी विनिस्पिष्य 96 63° घाणूरेण चिर काल 72 40 चाणूरे बलदर्पिते 761 धाणूरो नाम नामत 7522 घाणूरो विगतप्राण 75 44" चातुरक्षे नितेतु 89 37° धातुराशम्यमेव च 104 144 धातुरानन्यशिथिल 115 44° चातुराश्रयसश्रय 30 31 चातुर्थयमपकीणे 31 96 चातुर्वर्ण्यविभागवित 58 48 चातुर्वर्ण्यस्य प्रमत्र 30 30° चातुर्थय॑स्य रक्षिता 30304 चातुर्वण्य मत्प्रसूत 104 14 चातुर्यण्यै च संकीणे 31 940 चातुविद्यस्य यो वेत्ता 30 310 चातुर्वेद्यश्न कादम् 104 150 पातुत्रिफलाशनः 58 45d चापतोमरशालिन 92 114 पापमुद्यम्य विष्ठित 113 18t चापदस्ता कापिन 87 60d चापैविस्फार्यमाणैश्च 355° धामीकरकरासत 32 23° चारणवा महारगे 430 धारणा समन्तत 113 50 घारयन्ती विवृद्धानि 583 धारयन्ती सुनिती 54 1 पारान्धस्य ममैव तु 65 230 पारित पेन मे लोके 108 88° पारुचामरवीजिता 81 77' पारधिनायनान्तरम् 52 23 बारदेष्णहवानिति 24 31 चारुदेष्ण सुयाह च 24 290 धारदष्ण सुदण च 88 37° चारया च धीगन् 89 380 चात्याहु पनिटश्व 98 6. चारभद्रो भद्रचार 9860 धाविन्दश्च पास्मान् 98 0 चारविन्द सुचारं च 88 38* चार विधसिर केशा 63340 चार चयलिना श्रेषु 88994 घास्नयोपयोदयाम 2431 चालयात वसुधराम् 7530 चारयामास साखरून् 57 10 चालयामास दीसाशु 3753" चारग्रामे ससग्रहे 1960 चिकीर्पितज्ञो नारीणा 99g चिकी'द्वैरथ युद्धम् 887 चिकीर्षु कर्म दुष्करम् 108 65 चिफ्रीडरसिभि शुभै 34 31° चिफ्रीडश्व समन्तरा 107 2' चिक्रीद्धरने शततीभि 33 29° चिक्षेप चैन तद्भस्म 10 68* चिक्षेप तृणराजनि 57 210 चिक्षेप नगमूर्धनि 90 160 चिक्षेप रुपितो गुह 112 45 चिक्षेपाथ महीतले 11 ] चिच्छेद धास्य भल्लन 8772 चिच्छेद परमेपुभि 110 30° चिरहेद याहूश्चक्रेण 38 450 चिच्छेद भृगुनन्दन 31 103* चिच्छेद युधि केशब 88 2 विच्छेद मशय भीष्म 12 196 चिच्छेदानेण बुद्धिमान् 44 B' चितिस्थाने विधि विना 78281 चित्तज्ञेन मदारमना 112 30 270- चित्रकम्बलपणे च] लोकपादसूची [चोदितो देवराजेन चित्रकम्बलवर्ण च 93. 17" चिनकश्च वफल्कश्च 87.68. चित्रकस्यामवन्पुया: 24.12.28. 43". चित्रकायनवेदिकः 94.21. चित्रनियोगशोभितः 74. 14. चित्रपटगतामुख्यान 107.66%, चित्रया वनमालया 63.21. चिनलेखानवीद्वचः 107.70. चिग्रलेखामवीद्वाक्यम् 107. 61". चित्रलेसा मनस्विनी 108 4. चित्रलेखा मनोजवा 107.856. चिग्रलेखामप्सरसं 107. 58. चित्रलेखा यशस्विनी 108 5. चित्रलेखा वचः निग्धम् 107. 22. चित्रलेखा पराप्सराः 107.6. चित्रलेखा स्वयंकृतम् 107.67'. चित्रलेसां भयातुरा 108 6. चित्रलेखे पदस्वैनं 107.14. चिनवर्षीच पर्जन्यः 116. 18. चित्रसेनषिणः 81.87'. चित्रसेनस्य वीर्यवान् 81.85°. चित्रसेनः सुते चास्य 98 16. चित्रसेनो महारथः 81. 81'. चिया चित्रवती तथा 98 164. चित्रा सुभद्रेति पुन: 25. 3". चिमासु वनराजिपु 55 15.59.524. चिनो नाम कुमारी च 25. 3. चिनितां विश्वकर्मणा 93. 10% चिश्चिनरयस्तस्य 26 3. चिन्तयद्भगवान्दः 112. 82°. चिन्तयन्कार्यमारमनः 112. 81. चिन्तयामिपरीता सा 27.8. चिन्तयामास माधव: 86 18. चिन्तयामास वीर्यवान् 47.90. चिन्तयाविरचेतसः 109.69% चिन्तयाविष्टदेहा सा 108 4. चिन्तां कतु वृथा देव 109. 23. चिरमष्टं यमक्षयात् 79.11. चिरनटेन पुग्रेग 79.24. चिरप्रनष्टं च मुतं 99 49. चिरप्रवृत्तानि विधिस्वभावात् 17.1'. चिरश्रुतमरिंदमम् 92. 34. चिरसुप्तं नराधिपम् 85.53. चिरं तु भवता कालं 70 35*. चिरं युगातैरपि 9.60*. चिरं विप्रोषिती प्रजे 76. 48. चिराप्रभृति कुम्भाण्ड 106 33. चिराप्रभृति मे वक्तुं 109 39. चिराय प्रतिगृह्यताम् 78 38. चिरायावादासो दीनः 112. 61. चिहान्यायतनानि च 86.7. चिह्नस्तीरानुहासिमिः 83 35". चीरसंवृतगानाश्च 31. 85*. चीरं पणं च विविध 117.33*. चुकोप निद्राच्छेदेन 85 50. चेकितान. सवाहिकः 81 38'. चेदिराजप्रियेप्सया 87.11. चेदिराजश्च वीर्यवान् 80. 10. चेदिराजश्च संगताः 81.47'. चेदिराजस्य हि वसोः 87. 18'. चेरतुर्दानवानीके 36 35. घेरतुर्वलदर्पितो 42. 19. चेरतुलौकसिद्धाभिः 58 7. चेरतुर्वत्सयूथानि 54 1. चेरतुस्तन यादवी 81 64. चेरतुस्तन्महद्दनम् 54 42. घेरतुः परमप्रीती 57. 4. चेजलदपुंगवा. 61. 10. चेरर्मा शन्द इत्येवं 81 30'. चेलविद्याधरैः सायं 75. 38:. घेर चरितं तस्य 63.27'. चेात्तमुसा दिवि 34 32. चेररते देवदानवाः 3723. चेलुश्च धरणीधरा: 48 14. चैत्ययूपशताङ्किता 97. 33. चैत्यवृक्षेपु सहसा 106 44. चैना परिणता सती 26. 18', 184. चद्यस्यार्थे सुनीयस्य 87.17. चैरप्रक्षालनार्थिनी 50. 11'. चोदयामास तं मुनिम् 115. 10'. घोदित कालधर्मणा 67. 136. चोदितः क्रोधमुदिश्य 19. 25. चोदितः पुरुषर्षभः 106 32. चोदितः पुरपोत्तमः 109. 54'. चोदितर्विश्वकर्मणा 93. 29. चोदितो देवराजेन 35.22. -71- चोदितोऽहे स्वयंमुवा] चिकित्सितपादात्मफस्य हरिवंशस्य । जगाम घ महामुनि घोदितोऽई स्वयंभुगा 10007. चोदिसी विष्णुपाक्येन 36 32*. च्यवनस पुषःश्वक' 23 117" चोग्रमानेन थे मुशम् 74 32. चोरपायाच राजानः 116 130 घोरवद्वादयन्धनम् 9681 घोराश्चोरक्षये चापि 117 22. चोराचोरस्य हरिः 117 22° युतः पुनर्षिन्दति चात्मनः स्थितिम् 118 46. प्युता धर्माध शाश्वतात् 117. 11'. छत्राचार्य विराजन्ते 81 4'. छोण नियमाणेन 113 18: छन्दोगोऽध्ययुरेव च 18 18', छन्धमानो वरेणाय 10 19* छयममिमिव प्रजे 56454 एवं सद्वेदिकाभिश्च 728. छसो मायाधरो यली 108 824. छो हि तमसा सोम 117 46". छागयूयश्च सपूर्ण 65 64° छागलि. पुरमित्रश्च 81 43. छादनार्थ प्रकोश्च 53 25° छादयन्तं दिशो दश 36 530 छादयन्तो नभस्तरम् 32 1361. 11'. बादयामास केशवम् 112 65. छादायित्वात्मनात्मान 45 40° छादयित्वात्मनो वपुः 65 350 छादिताशीतरश्मिभि 3621' छादितो वसुदेवेन 86 17" छायापत्नीसदायो वै 31 270 छाया सज्ञा नरेश्वर 8 96 हिरवा बाहुसहस्र ते 23 1530 लिला वन स सौमित्रि 44590 छिद्रदर्शी सुनेनश्च 18 16 छिद्राण्याकाशयोनीनि 30 51° छिद्रान्वेषी तयोस्तदा 58 12d छिद्रयु प्रदरन्त्येते 38 780 छिनत्ति मम मूलानि 65 620 लिन्दन्तश्वोत्तमानानि 87 780 छिन्दवज्रेण ताशरान 3512 छिमदग्धप्ररोहणम् 6 370 छिसबाहुमहासुर 112 1050 दिसपक्षा इवाचला 35 164. सिग्नभिसशिरोरस: 37 44. टिममूल मिदं कुरम् 35. 26". हिसमूलाः स्म संभृत्ताः 7.6. शिमूरो निरागम्य- 73° हिसमूगेधयं यश 66 36. रिसननी सा सहसा 50 22. छिमहारण यक्षसा 76 33. रिख पाहुसहयं च 31_146. छिनाशवं वृथा वृदः 6574. छत्तासि सशय सात 11 30'. ज जगश स देयेशः 113 78. जगत जगरपते 67 664. जगतनासजननं 356, जगतः प्रथम भागं 34 26% जगतः प्रभवो छसि 113 31. जगत. सभ्रमोपमम् 71 47". जगत सार्यरोक्किम् 3076 जगतोयस्य भाजनम् 68 21'. जगतो जगतीपते 2016 जगतो दहनाकासी 35 49° जगरप्रदरण स्विदम् 62 21. जगत्प्रियो धर्मशील. 9 12° जगत्यर्थे कृत्तो योऽयं 45 14. जगत्यां च यथानयम् 44 1' जगत्यां विनिकीर्णस्य 5863° जगत्यां सतरिष्यन्ति 4418° जगरयेषा हि शाश्वती 41 24". जगरसदेवगन्ध 11 37° जगत्सवतकाम्भोदै 36 16 जगत्स्थावरजगमम् 42 38. 100 614. जगत्स्थास्यति शाश्वतम् 68 30° जगदर्थे द्विधा कृती 58 464 जगदथें समागतान् 40 431 जगदिधक्षनिव से 112 58° जगदक्ष्ये त्यजस्व माम् 35 61 जगद्धितार्थ 4251° जगई तानृषिगणान् 35 31 जगहे स दुरात्मनः 74 240 जगाम गतिमिधा 1374 जगाम घोषसवास 67 13° जगाम च पुरी दीना 73 350 जगाम घ महामुनि 118 0 जगाम तत्र प्रधुन्न शोषपादसूची [जधान सचिव सा जगाम तत्र प्रधुन्न 89 30 जगाम तत्र यनास्ते 112 113 जगाम तद्विधा कृत्वा 71 630 जगाम विददशेश्वर 6293 जगाम निदिव देव 86 530 जगाम निदिव हृष्ट 35 71 जगाम ग्रिदिवारयम् 86 70 जगाम पर्वतायैव 3 104963° जगाम मह्मणा साधं 3879 जगाम मह्मदत्तोऽथ 19 230 जगाम भगवानृषि 11850 जगाम मार्ग बरवान 110 ° जगाम यमुनातीर 55 27 जगाम यमुना नदी 56 8 जगाम यमुना नदीम् 50 40 जगाम रथमास्थाय 26 130 जगाम रथमुख्येन 671 जगाम रोपमुत्सृज्य 11880 जगाम वसुधातरम् 108 744 जगाम विमना भृशम् 48 51" जगाम विष्णु स्त्र देश 45 47° जगामशरणायाथ 2045" जगाम शिविरं राम 89470 जगामस रथा नाश 2280 जगाम सातो मेघ 61 61° जगामामारामाविश्य 48290 जगामामासमेव तु 73 350 जगामाकाशमेव 31476 जगामाप ततो विष्णु 47 230 गामादर्शन हृदात् 56 400 जगामामितदक्षिण 70336 जगामाशु पुरीं प्रति 87 440 जगामारत दिनकर 775 जगामकविनिश्चयम् 2780 गामेको पज राम 83 16 जगृहुर्नि स्ना पाणी 63 33° जगृहुरंगगामिन 60 330 जगृहुस्ते प्रचेतस 2 44 जग्मानिधन चापि 42 30% जग्मतुर्माल्यकारणात् 71 18 जग्मतुहधमानसी 76 46 जग्मगुस्तौ तु सरती 5720 जग्मुराति महामृध 350 जग्मुर्गापगणा घोप 56 48 जग्मुनिवरता नृपा 62 634 जग्मुर्भयसमाकुरा 108 60 जग्मुर्विगतसकल्पा 66 40° जग्मुस्ते चै मुदा युता 31 530 जम्मु कसनिवेशनम् 71 14 जग्मु कृतयुग चैव 40 35 जग्मु सबल्याहना 100 864 जग्मु स्पन्दनवाहमा 706 जग्राह माहवद्विभु 83 17 जग्राह च चतुर्मुख 112 29d जग्राह ज्वलिता दीप्ता 1087 जग्राह तद्धनूरत्न 71500 जग्राह पुरुषव्याघ्र 11294' जमाह पुरुषोत्तम 10873 110424 112 311 जग्राह प्रथम राम 81 61 जग्राह मधुसूदन 11272 जग्राह मुष्टिक र) 76 1 जग्राद मुसोत्तमम् 81 62 जग्राह रणमूर्धनि 108 426 जग्राह वारुण सोऽत्र 12 220 जग्राह विधिवत्प्रभु 88 344 जग्राह वैष्णव सोऽस 112 26° नग्राद शिरसि क्रुद्ध 112 78° जग्राह स गुहस्तदा 112 3rd जग्राह सप्त तान्गर्भान 48 12 जमाहात्मविशुद्धये 28 29 जघने तद्वन कृत्वा 44 46" जघान कृष्ण प्रीवाया 110 700 जधान चाश्वाश्चतुर 87 660 नघान चैषा सरब्ध 88 16* जधान जनमेजय 10 144 जधान तुरगांश्चाजी 81 800 जधान दानवान्सर्वान् 21 220 जधान निशितै शरै 88 17 जधान नृपति प्रभु. 31 1010 जधान परमाखवित् 29 1gd जधान पुरुषव्याघ्र 97 25° अधान पुरवयानी 31 119 बधान पुरषोत्तम 79 1596 12,426 जधान यो नरम्यान 978 जधान राम सनद्ध 87690 जधान सचिव साध 31 1.50 हरि पादसूची-10 73 जपान सहितान्सर्वान् ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [पन क्षयमुपैष्यति जधान सहितान्सन् 97 18' जधानापतत परान् 87 12 जधानावांबा सङ्गेन 10868° जघानाष्टापदेनैव 89 43 जघानेकप्रहारेण 74 37 जधानकाणये घोरे 38 18° जधानोरसि दैत्य स 57 18 जन्मतुहिमपाले 36 11 जास्तग्रासिचमिण 37 330 जलमानि च सर्यश 526 जजपुस्ते ययाकाम 51 28" जज्ञाते गुणसपना 28 350 जज्ञाते चित्रयोधिनी 98 18 जज्ञाते तनया से 28 30° जज्ञाते सनयी प्णे 243° जाते देववचंसी 24 11 28 420 अशाते निराठोल्मुको 98 20 जज्ञातेऽन्तपिपारिगो 2 370 जज्ञाते पुनरेव हि 3 50 जज्ञिरे गाजवन्त्येते 98 12 जज्ञिरे तस्य पुनाच 88 44. जज्ञिरेऽनेकमस्तका 386* जज्ञिरेऽम्याच जातय 248 जहिरे पत्र पुग्रारत 26 11° जज्ञिरे बहव सुता 273 जज्ञिरे वीर्यवत्तरा 2820 जज्ञिरे सत्यभामायां 9870 जज्ञिरे सोमदत्तातु 23 116" जज्ञे कुलविवर्धन 23 370 जज्ञेच रखमकवचात् 26 11 जसे जस प्रतापवान् 23 78 जसे तत्र महायशा 31 1121 जज्ञे तस्य विनाशन 24 336 जज्ञेऽनिभगवानृषि 2011 जने दशरथस्याथ 31 110* जज्ञे नारायण प्रभु 4977 जज्ञे परमकोपन 35 bod जजे पुनर्वसुस्तस्मात् 27 17" जज्ञे प्राज्ञोऽय मागध 533 जज्ञे यस्य प्रसूतस्य 24 16° जज्ञे राजा महाबल 25 116 जने वीर सुरगणै 23 190 जजे वृष्णिकुले प्रभु 48 12 जझे शूरो महायल 85 18 जशोरिमहायशा 25 जो शायस्तको राजा 9460 जशे सत्यरतेः पुन 16 390 जज्ञे स मृगरेसन 98 190 जज्ञे सर्वगुणोपेत 15 20 जज्ञे सह गरेण ये 10 250 जज्ञे सकल्प एव च 3 294 जझे समतिमानराजा 15 34 जज्ञे सुतपस सुत 23 271 जग्यलुवामय शान्ता 4814 जटाभार समुददन् 407 जटामण्डरधारिण 47 131 जटामण्डलमुदहन 4471 जटी मुण्टोऽपि या भव 66 6° जनकम्य महारमन 31 118 जननी च भविष्यति 4511 जननी पृथिवीपते 23 1034 जनम्या तपता दर 8280 जनमेजय इत्येव 1143 जनमेजय युद्धेषु 105 22 जनमेजयस्तु नृपति 115 3%,4° जनमेजयस्य के पुत्रा 14 1" जनमेजयस्य पुत्री तु 23 111" जनमेजयस्य राजर्षे 23 18* जनमेजयेन यत्पृष्ट' 160 जनमेजयो महाप्राज्ञ 11 जनमेजयो महाराज 23 17" जनयति च सुतान्गुणैरुपेतान् 118 47" जनयन्ति नवाम्बुभि 59 60 जनयामास पक्षिराद 92 44" जनयामास पश वै 1 12 23 631 जनयामास पार्थिवम् 15 जनयामास मारत 23 20, 119 जनयामास शैलराट् 13 15 जनयित्वा तत सात 9 14 जनस्त समुपागमत् 56 184 जनस्थाने वसन्कार्य 31 118 जनस्यामध्रितस्यायें 65 90° जनस्वास्थ भवरय घ8490 जनस्योत्सुकचेतस 1025 जनं च विप्रकुर्वाणी 51 10° जन क्षयमुपैयति 116 240 74- जन सर्वोऽभ्यसूयक ] श्लोकपादसूची [जलने पिता गुण जन सर्वोऽभ्यसूयक 11610 जनानिमान्धनौधैस्तु 86 54 जना येसिकृशधना 86 590 जनार्दनमयाचैव 100 40 जनार्दनमिद वच 92 580 जनार्दनवशे स्थित 92 46 जनार्दन पुरस्कृत्य 82 55 जनार्दनो द्वारवती च ता पुरीम् 85 67' जनार्दनोऽपि सहित 100 8?" जना शेषपुरस्कृना 117 10* जनौघप्रतिनादिता 86 48 जनीधप्रतिनादिते 74 16 जनौघमतिनादेन 756 जनौ परिवार्यताम् 81 330 जन्म चाग्यमनुत्तमम् 1 30 जन्म चास्मासु गर्दितम् 636 जन्मतस्तूपपद्यते 48 500 जन्मप्रभृति चाप्येतो 96 450 जन्मप्रभृति दिव्यस्तै 60 जम प्राप्स्यसि कुत्सितम् 13 381 अम्भमैरास्त चापि 97 250 जयतो था कुतो रति 75 271 जयत्सेन कलिङ्गानां 89 18° जयध्वजश्व नानासीत् 23 1670 जयध्वजस्य पुत्रस्तु 23 158" जयन्तो वैनयन्तश्च 103 1 जयन्त्यन्धकवृष्णय 957 जय याण मदागदो 109 89" जयशद पुरस्कृत्य 3229° जपस्व कृष्ण चाणूर 75390 जपार्थ च दिवाकयाम् 362 जयाशीभिर्मदारलम् 58660 जपाशीर्वचनैरत्येते 45 37 मये दासताक्षस्य 38 390 जरा नाम निपादाना 9823 जराया यहयो दोपा 22 24 जरासक्रमणे तदा 23 127 जरासमणे पूर्व 114 IT भरासपकरप्युना 82 180 जरासंघपुरोगमा 81 20 जरासप्रियेषिण 809 जरासंघमयाचापि 84 35" जरासपमयेन च 25 130 जरासधमभिप्रेप्सु 81 8° जरासधमुपाद्रवत् 81 88 जरासघश्व नो राजा 85270 जरासधश्च सप्तमि 81 834 जरासधस्तत क्रुद्ध 81 140 जरासधस्तु तच्छुरवा 82 320 जरासधस्तु भूमिप 87 nd जरासधस्य कल्याण्यो 8030 जरासधस्य चरणे 82 11 जरासधस्य दारुण 81956 जरासधस्य निधने 105 150 जरासधस्य नृपते 82 28° जरासधस्य पार्थिवा 808 जरासधस्य यादवा 82 27 जरासधस्य राज्ञस्तु 8260 जरासधस्य वृष्णिभि 87 24 जरासध गदायुद्धे 90 ° जरासध ततोऽभ्ययात् 87' जरासघ तु ते जित्वा 82 26° जरासधं पुरस्कृत्य 87 23° जरासघ महायलम् 87 52° जरासध महीपतिम् 82 30° जरासघ समाश्रित्य 96 520 जससघ प्रतापवान् 80 187 1 जरासंध स्वसुतवत् 87 229 जरासधान्तिक वीरा 81 70° जरासधे च विमह 8430 जरासधेन चामिमो 81974 जरासधेन चोदिता 8174° जरासधे महीपती 82 240 जरासधो पृतवत 81 194 रामघो नराधिप 81387 261 जरासघो बृहद्वाश्य 81 320 जरासघोऽभिसत 81 89 जरासधा महाबर 81 87482 15871 जरासघो महीपति 81 6° जरासधो व्यवस्थित 81 51 जरा स्वयि समाधाय 22 22, 320 जरा न यास्यति वधू 92 60% जरा मे प्रतिगृह्णीय 22 21 जरकारविचारिण 62 471 जउगर्भगृहेशया 4723 जलजैपिता गुण 55 310 जलजेई रिसोदकाम्] चिकित्सितपाठात्मत्स्य हरिवंशस्य [जातो वृष्णि देवाया जर ईरितोदकाम 55314 जरजेशाध्ययो हरि 86 जलज पुसुमशिया 5531 जर प्राणिभि कोणी 55 31 जरदाना समागमे 37 380 जरप्रसरणान्वित 61 350 जरस्परितगामिनी 83 3 जलस्रार प्रवर्वते 30 81 जहारी भिरावृतम् 4928 जाल ट्वेव सृषित 65 100% जर स्तम्भय साधो स्व 103 11 जलाारविघातजम् 31 131 जलानि जलदक्षये 59 300 जलेन जर दागमे 5946 जरेन समभिता 42280 जयराइकोरर 54 जलोस्पीडाकुला स्वेद 41 19° जरोपकासम्नस्यासीत् 31 330 जवेन प्रथयो कुन्द्र 8330 जवेनाम्यद यथापि 81 820 जवेनावर्जित धैव 59 13 जहार कन्या कामास 990° जदार कृष्णस्य मुक्त 99g जहार ध शिर कायात् 88 ° जहार तरसा सन् 20 200 जहार दितिनन्दन 91 341 जहार दिनकर्म ध 37554 जहार नरको बली 91 190 जहार पृथिवीमिमाम् 65 360 जहार यज्ञिया गाव 45206 जहार रक्ष्मी सोमख 37 520 जहाराशु वमप्सरा 10970 जदाराशु स मेदिनीम् 31884 जहासच महाहास 48330 जदास दानव शोधात् 3828° जहास मध्ये वृक्षाभ्या 51230 जहासोचस्तत क्स 46 20° जहासोच्चै स्तनता 71 32 जहि त पापप्रपम् 91 350 जहीदि निद्रा सहजा 4037 जलपुएरोमान 960 जदुर्धाता च भारत 7 180 जहौस्तु दयित पुत्र 23 81 जंगमाजगतम् 12 30 जागति कोऽयक शेते 40 17" जागति व यथा देव 44 410 जागर्ति जनपक्षये 40 230 जागति मधुसूदन 4022024 जातकमादिभिर्गुण 4930 जातकामा च सं प्रति 8971 जानकौतूहर स्तदा ।। 31 आतपोपु तोयेपु 62 120 नातमात्र स भगवान् 20 390 जाधमाने त कृष्ण 10036 जातमानोऽपयाहित 99 18 मातरागाविदंष्ट्वा 71 10 जातरागा पृथिन्य 43 64 जातरूपमय पी 7020 जातरूपस्य शुभ्रस्य 9262 जाम्वरेण चेतसा 6621 जातस्याद्भुतकर्मण 6524 जात धाररसायनम् 52 10° जात किल सुतार्थिना 738 जात कुन्त्या कुरुवद 6274 जात कुछ करो भुवि 45 100 जाता जातिसरा मृगा 1622 जातानि पृथिवीपते 1062" जाता वयोश्य भार्ग 23726 जातागवा तत समम् 47 36" आता वृद्धस्य चात्मना 23 24 जाता व्याघा दशार्गेषु 16 17* जाता शिवजला सर्वा 56440 माता सत्यवती तदा 1340 जातास्तीचपराक्रमा 3760 जातास्मि बदता पर 7 जाता कौशिकदायादा 1440 जावा सहमहममान 18140 जातिसरणसभवम् 16 24 जाति स्मरति पौर्विकीम् 92 94" जातेत्युक्त्या वृथामति 48 26d जातेन निभृतेन वै 6824 जातेप्येतेषु गर्भ 47 980 जातो जातो महागहो 101 11 जातोऽप्यज्ञातां याति 4848° जातो मृत्युमुनाया से 58 जातो वृष्णिषु देवस्या 121 119 120 जांती घाणूामुष्टिको] श्लोफपावसूची [ जीवितान्ते महीतले जाती चाणूरमुष्टिको 44 734. जातो श्रोनियदायादी 18 16° जात्यन्तरगतो टेप 38 11'. जात्यन्तरेषु सर्वेषु 15 13. जात्या हि यादव कृष्ण' 60910. जानतो भरतर्षभ 3 112, आनन्या त्वं महाराज 1925. जानन्दिव्येन चक्षुपा 65 100 जानन्धर्म घसिष्ठस्तु 108. जानामि कंस सभूतं 45 4. जानामि भवतो भावं 62 91. जानामि स तदानध 14 13. जानाम्यपकृतं स्वयम् 48 434. जानाम्यर्जुनसभाम् 62 91. जानी मां नरर्पभा. 96 244 जानुभिश्वाश्मनिर्घोप 75 32° जानुभ्यां जगतीं चैव 58 52. जानुभ्यां तो व्यवस्थिती 31 90'. जाने स्वां पुरुषोत्तमम् 112 107'. जाने पितृथ्वसा दत्ता 62 91. जामदग्य इति रयात 31. 1090 जामदश्य पुन पुन:31 1080. जामदग्यात्तथा रामात् 87 13. जामदग्नयेन रामेण 42 39*. जामाता त्यभवत्तस्य 87240. जाम्बस्त्यथ पौरवी 984 जाम्यवत्यामजायत 100 जाम्बवल्या विभूपित. 93 44 जाग्नवस्या सुतो जशे 98 8. जाम्नयन्तं ददर्श ह 28 25. जाम्ययन्तं महाबलम् 28 28. जाम्बवाय पराजित. 105 20. जाम्यूनद इयादीठ: 93 439, जाम्यूनदमयं दिव्यं 93 560 जाम्बूनदमयान्यत्र 924", जायतेन्द्रियगोचरा 30 490 जायन्ते पुनरेव ह 3 584. जायन्ते ब्रह्मवादिनः 139. जायमाने जनार्दने 48 14, 15. जायेत्तस्मात्स्वयं हन्त 279 जारूच्यामाहृति फ्राय 97.50 निगाय पुरुषोत्तम 97. 184, 20". जिगाय पृथिवीमेक 23 138. जिगाय पृधियी इत्या 10 26. जिगाय भरतश्रेष्ठं 97.17. जिघांसन्तो जनादनम् 87.49'. जिघांसुर्मुसलायुधम् 81 86. जिघांसुईि पदूकुदः 802. जिघृश्चयवनेश्वरः 85 39. जिजीविपुर्न स ह्यन्ति 65.740 जिज्ञासां पारपे घशे 258 जितमाशी महामुर 106 54. जितपूर्ग विभिः प्रमः 68 33. जितमित्येव हृष्टोऽय 89 30°. जितरोपोऽपि धर्मवित् 89 331 जितमान्यो न चावधीत् 90 5. जिता मे दानवाः सर्वे 32 320 जितो वा यसुधातले 112 61. जित्वा जीवन्विसर्जित 105 121 10054 जिया तु मागधं सख्ये 82 309 जित्वा पाशधर कृतम् 77 284. जित्वा पृषी ससागराम 22 16. जित्वा वाण महासुरम् 113 6'. जित्वा यक्षाश्च सयुगे 77 26. जित्वा शमपुरोगमान् 21 20'. जित्या सर्वान्दिवौकस 106 280 जिणु कृष्णश्च वर्णत 109 82% जिह्य वाक्य नराधिपात् 89 39. जियोप्टो पुन पुन' 64 जीमूत इव वेगवान् 31 68". जीमूतघनदीप्तौना 31 66. जीमूतघननिस्वन 31 66 जीमूतघनसकाश 31 66* जीमूतपुत्रो कति 26 22, जीरता देव वाणोऽयम् 112 111", जीवग्या परिदेवनम् 7737. जीरसाई प्रदास्यामि 113 13", जीपप्रतिगमिष्यसि 12 52, जीवन्या कथं च स 106 30. जीरपुना त्या पुन 99 36° जीवंजीपकमंघेश्च 92 41'. जीवित नाय कामये 106 10. जीवित मे प्रदीयताम् 56 34", जीवितं वसुदेवस्य 45 44". जीवितान्तकरी तदा 108 73. जीवितान्ते महीतले 75 .. - 77 जीवितार्थी ततो बाणः] चिकित्सितपाठारमकस्य हरिवंशस्य [ज्वलन्तमिव तेजना जीवितार्थी ततो वाण: 112 116. जीविताधहरी घोरा 40 273 जीवितुं स्पृहयेवारी 107 296 जीविते चास्य का दया 78 90 जीवितौ तस्य तेजसा 105 21. जुगुप्सिताच वत्स्यामि 73 22. जगह प्रोष शम्गण 87.7. जुझानस्य माणो वै 395. जुम्मणं नाम सोऽभ्यस्खें 112 31. जुम्मते घ तदा कृष्ण 1 4". जृम्भमाणेव गगने 112 446 जम्भमाणो दिशो दश 35 12. जुम्भमाणो मुदुर्मुहु. 40 28. जेतम्यानीन्द्रियाण्यादौ 44 29. जेतव्या रिपः सर्वे 44 28. जेता स्वमसि कस्तव 113.4. जेतारं च महाबलम् 28 10d जेतुमिच्छाम त धयम् 8921' जेष्याम समितिंजयम् 100 290 गीपव्यस्य तु तथा 13 230 शातपत्र सहोषिता. 632. ज्ञातिकार्य चिकीर्षस्तु 96 28. शातिकार्षिसिद्ध्यर्थं 80.. शातिभि सहितस्य ये 31 103 शातिभेदभयारण 2931" शातिभ्यो भयमुत्पर 77 48* शातीनां च प्यांटा 7624. कानन्दपार्वन 82117. हातीनिदमुवाच ह 85 24 शातीनसर्गन्समागतान 63 10 शातीस्थापनस्य 57 31 माम हसि भारत 101 10 हाते समानवंशस 8723 शाया फेशिनिपूदन 84 35. जावा गुपरराट्रपम् 8000 भारमा सामानिनपान 53 6' शायपरदान व 85 1 शाया रपमेप शेश 6279 शारग प्रमापिपा 320 शाग jिlrani ss. शापिने 17. 13 शम्पति मम माना 02 40 ऐप पर 781. ज्ञेयो वीर्यबलान्वित, 168 974. ज्याघाततलनिर्योप 37 25. ज्याघोपश्च महात्मन 31 139. ज्याघोपश्च महात्मनाम् 87.77% ज्यामघस्य महारमन 26 28. ज्यामघस्याभवनार्या 26 15. ज्यामघ पालितो हरि. 26 1. ज्यामघोऽदसदाश्रमे 26 121. ज्येष्ठभावेन मान्यस्ते 113 30° ज्येष्ठं भ्रातरमब्रवीत् 101 '. ज्येष्ठ पशुपते प्रिय 64. ज्येष्ठ पुत्रशतस्यासीत् 92. ज्येष्ठ सकपणो नाम 50 2. ज्येष्ठा च धरवर्णिनी 13 21' ज्येष्ठ पत्नी महाराज 25 1. ज्येष्ठ कानिष्टरमप्येषां 2 65. ज्योति सियु भार्गव 1381 ज्योतिर्भिगगनं यथा 9656. ज्योतिधथुपि तेजश 3053". ज्योतिपामधिप शशी 367'. ज्योतिपामीरणं प्योति 34256. ज्योतिषां च महारमनाम् 62 r'. ज्योतिषां पेश्वरेचर 365. ज्योतिषां घोपरि स्थित: 306. ज्योति परिकीर्तिता. 3 30* ज्योतिष्टोमहविर्भागी 110 26'. ज्योतिष्मत पतगम्य 112 93'. ज्योतिष्मान्युतिमान्दस्य 7. ज्योसपि धनमुनानि 89 49". ज्योतीपिच प्रशाम्ते 48 15. ग्याधिपादस्तिशिरा 11056. ग्यरम्प महामासीत् 11011. स्य शत्रुनियन ॥1. स्पर सशिहिशोगन ॥ स्वरः साशाग्महामना 1111 पराभिमुष्टमाामान m. परमाविमोगमा 1100. गरे गामितोत्रमा " स्वमिर 11265 शनिशिगे 543 गारमादिगा 10911 मादिममनिभा 120 पाभिEss ज्वलन्तमिव पावकम् ] श्लोकपादसूची [ ततस्तेजः प्रज्वलितम् ज्वलन्तमिव पावकम् 20 38". ज्वलक्षिय घ तेजसा 5671 नलिताग्निप्रतीकार 447 ज्वालागर्भ महागदः 110 68 ज्वालाप्रज्वलित इदम् 55 46. ज्वालामाली निरिन्धन 35.49%. ज्वालावलीढवदनः 108 85. शाहर. शकुनिश्चैव 3 64'. सपनकानुलिप्साङ्गी 55 38. त तपते पितरो देवाः 12 41" त एनमन्वयुः सर्वे 809". तऋनिस्नायबहुलं 49 26. तक्षमाणो धरा खुरै 67.28. तय कार्य शचीपते: 10956 सचक्रं परमास्त्रवित् 112 102 सचक रणमूर्धनि 112 104". तश्चक्रेण निहत्यास्त्रं 11289*. सबके पर्यवस्थितम् 112 954. तय नाधिचचार स 91 11 सच मांस स्वयं चैव 10 15. सच मे सोयपं मुखम् 35 380 तश घस्यशतं घोरं 3846° सच सर्व यथाभवत् 8947 तच सर्व विजानामि 45. तथापि भवता श्रुतम् 41 27 सचायुधावतरण 83 12. तचित्रमभवत्तदा 949 तररया परित कैस: 48 220 तच्छुत्या नन्दगोपस्य 53 12. तरपुरवा मोहमगमत् 19 10 तपुरषा रोहिणेयस्य 56 29 तपुरमा वासुदेवस 96 40 तर या विष्णुगदिरा 411:. समये हि यो जयः 44 29. सजलं धननिष्पे 59 13. सजातिगुणयुक्ताभिः 58 8. तटजामरणोपेतां 55 370 तत उत्सारयामाम69% तत एतन्मम घच 5961. तत एनमई शरम् 66. सव एनं नपा म्लेच्छा 85 18. तत एव हि धर्मस्य 16 2. ततश्चकम्पे वसुधा 106. 41. ततश्चक्रं सहस्रारं 112 94". ततश्चक्रेण गोविन्द 103 229. ततश्चचार वसुधा 75 41° सतश्चन्दनचूर्णश्च 109 776 11360*. ततश्च योग प्राप्स्यन्ति 148 वतश्चरास्तु व्यादिष्टा 109 34° वतश्चक्रोध यलवान् 83 30°. 90 9° ततश्चैयमुपादाय 87 26 ततस्तत्सुमहद्युद्धं 108 38°. वतस्तद्धनमक्षय्य 95 136 ततस्तवतो ज्ञात्वा 9 27° ततस्तद्वरुणो देवः 113 25". ततस्तहसु गोविन्द 97 430 ततस्तद्वारण छर्न 92 184. ततस्तद्विपहिरवाजी 112 220. ततस्तम सहियते 32 34. ततस्तमायंवरप्राप्तं 29 39° ततस्तयोर्विचित्राश्च 83 670 ततस्तस्मिस्तु विपये 9 95. ततस्तस्म ददी राज्यं 20 19. ततस्तम्या दयायास्तु 29 17. ततस्त कामसकाशं 99 320 ततस्तं चक्रवाकी दो 17 1 ततस्तं पाण्डुर शौरि. 948 ततस्त मुद्रयिस्वा तु 85 310 ततस्तं वाग्मिरुप्राभिः 108 87*, ततस्तानववीत्प्रभु 12 230 ततस्तानप्रवीदेव 12290 वतस्ताभि. सदैवाशु 20 8. ततस्ता सान्त्वयामास 92350. सतस्तु देव्या रूपेण 107 6- ततस्तु पर्वता सत 103 14. तस्तु वारण सैन्यम् 113 13° ततस्तूर्यनिनादेन 74 A. ततस्तूयं निनादैश्च 109 63*. 110 1". ततरतूर्यप्रणादव 94 120 ततस्यं प्रगदिश्व 112 50". ततस्ते कुण्डले दवा 92 65*. तस्ते क्षत्रिया सर्वे 81 74. ततरते अलदा कृष्णा 61 8. ततस्तेन प्रज्वलितम् 103 24. AM Tun 79 - ततस्ते परसर स्मृत्वा ] चिकित्सितपाठात्मश्स्य हरिवशस्य [तत प्रावर्तत पूर्व ततस्ते सत्सर स्मृत्वा 19 22° ततस्ते तन्महद्भुत 46 17° वतस्ते दीनमनप्त 109 610 वतस्ते दीर्घमध्यान 113 60 ततस्तेनाभिसतता 108 450 ततस्ते पुनरागम्य 12 32° ततस्ते पुनराजाति 14 6° सतस्ते धापपूर्णाक्षा 109 18° ततस्ते यादवा सर्वे 96 20* ततस्ते युद्धमार्गज्ञा 112 35° ततस्ते योगविभ्रष्टा 1440 ततस्तेपा स्वन श्रुत्वा 108 190 ततस्ते सहिता सर्वे 112 10 ततस्तै जगाकार 110 70° ततस्तैश्वारपुरुषै 108 130 ततस्तै स क्रम सर्व 15 540 ततस्तौ कुटजया मुक्ती 71 35° ततस्तौ पतितौ दृष्ट्वा 73 bf सतस्ती यदुनन्दनौ 79 38 सतस्त्वरितमागभ्य 2990 ततच प्रस्थितो धीर 77 21 तत्तरत्वा गृह्य चरणे 47 380 तत कथान्ते तत्राहम् 104 3° दत कथान्ते नृपति 115 10° तत कदाचित्पश्यामि 12 8° तत कदाचिद्द खेन 103 20° तत कदाचिद्धर्मात्मा 1017" हत कमररोचने 107 60% तत कर्म चकारास्य 21340 तत कसो महातेजा 9655 तत कालात्ययो महान् 29 371 तत काले व्यतीते तु 89 1 सत काले शिये पुण्ये 79 36* तत विलपिलाशब्द 61 56°75 16 91270 1078 चत किंकरसैन्य तत् 110 37° चत फिकरसय तु 108 14 तत कुम्मे मदास 85 30° खत कृष्णस्य वचन 86380 तम कृष्णस्य वचनात् 29 38" तत कृष्ण सुरणेन 94 16 उस कृष्णो भोजयित्वा 104 1. तत प्रमेण घापस 53 20 सत ममेण राज्यानि 410 सत क्रमेण सवास्तात् 107 71° तत क्रीडाविहार तम् 107 17* तत सुद्धा महर्षय 5 144 तत युद्धो महाबाहु 112 100% तत सानिपतन्ति स्म 81 660 तत पहजपत्राक्ष 864 तत पर्जन्यधाषेण 9740 तत पर्वतमालानि 103 1° तत पिता में सुप्रीत 11 20° तत पिपीरिकरत 1930 वत पीता महात्मान 23790 वरा पुनर्देवगणे 6 18. तता पुनर्मदारमान 5200 तत पुस्पसिंह सा 95 16 तत पूजामवाप्स्यति 62461 तत पूरी सकाशाद्वै 22 35° सत प्रक्षुभितस्येव 81 90° तत प्रजायन्ति पुनश्च पादपा 118 45 तत प्रत्युद्ययु सर्वे 79 26" तत प्रदीपस्तु विभु 110 690 तत प्रध्माप्य त शङ्ख 10 35° तत प्रध्माय जरज 113210 तत प्रमानो वायु 42 120 तत प्रभाते विमले 70 1986 11109 64" तत्त प्रभृति राजेन्द्र 2 49490 140 तत प्ररम्ब दुत्त 58 510 तत प्रय॑ते पुण्या 62 560 तत प्रववृते युद्ध 29 12 तत प्रविविशुमल्ला 74 200 तत प्रविश्य सहसा 108 20 तत प्रवेशे सरुद्धौ 96 69 तत प्रयाहता मर्वे 57 250 तत प्रशान्ते दद्दने 110 190 तत प्रसादयामाम 13 302 तत प्रसादयामामु29 32° तत प्रस्विनवदन 15 350 तत प्रदसितः कृष्ण 742f" तत प्रदस्य भगवान् 106 120 तत प्रारज्योतिष माम 91 530 तत प्राप्ती नराध्या तु 96 11 सत मायाद्वारवती 92 66 तत प्रास्ता पूत 89 26* B0 सतः माडनुमाप्ता] श्लोकपादसूची [ ततो न निगृहीतः सः ततः प्रायटनुप्राप्ता 54.30. ततः प्रास्त्रीय पढें सा 107.678. ततः शकान्सयवनान् 10. 38. ततः शकुनयो दीप्ता 102 30. ततः शमस्तु तान्गृह्य 62. 68". ततः शङ्खपणादेन 110. 36. ततः शङ्ख समानीय 110. 34. ततः शतसहस्राणि 112. 18". ततः शमदमाभ्यां च 31. 34", सतः भारदि युक्तानां 62. 49". ततः शरीधैर्यहुधा 113. 22". ततः शान्तिमुपागमत् 110.11'. ततः प्राविनिर्मुक्तः 91. 47. ततः शिनिरनाराष्टिः 81. 96%, ततः शुश्राव राजा 85.12. ततः शेपानभिक्रम्य 95. 11. ततः श्रीमान्हपीकेशः 100.111. ततः स तप भास्थाय 85.619 ततः स दुःपसंतप्तः 22. 114. सतास माझणस्तदा 19.11. ततः समानयामास 95.14. सतः समास्थाय रथं 102.23. सतः स राजा कौरव्य 9.73". सतः सर्पदशाणाम् 96.7". ततः सबै यथावृत्तं 8. 29. ततः सर्वाणि दिव्यानि 95. 12. सतः सर्याण्यनीकानि 112.2. सतः सर्व दशा 94. 18. ततः सव्यं दक्षिण घ67. 23". सतः स शूलरहितः 44. 490. सतः सस्यं प्रवर्तते 59.. ततः सह तया रेमे 88,356. ततः सह मया भुक्त्वा 104.34 ततः सहैव शक्रेण 91. 39. ततः संचिन्त्य तु पुनः 3. 4. ततः सचिन्य मनसा 83.01. ततः सपूज्य गरदं 95.1". ततः समनयामासुः 84 10. सतः संशयमापया: 20.399.. ततः संसर्गमागम्य 15. B. सप्तः संम्मारितो मया 19 26'. सतःसा चिन्तयाविधा 107.58', ततः सा निर्मिता कान्ता 8641. ततः सा संनतिदीना 19. ततः सांदीपनि पूर्वम् 95. g". ततः सांदीपनेः पुत्रं 79 23. ततः सांदीपनेः पुत्रः 79. 18. ततः सुखं प्रकीर्णासु 57. 26'. ततः सुम्भनिसुम्भी च 47. 49". ततः सूर्ये चिरोदिले 78. 42, ततः सैन्येन महता 81. 894. ततः सोमस्य वचनात् 2. 44*. ततः सोविग्रहा भूखा 83. 41'. ततः स्थानसहस्त्वं 47. 48°. ततः स द्वारकां प्राप्ताः 103. 30*. ततः स्वपिति धर्मान्ते 40.23. ततः स्वायतलक्षण्या 86.34%. ततोऽपूराय दत्तवान् 29 3. ततो गन्तासि सागरम् 45. 28*. ततो गम्भीरनिर्घोपा 89. 40". ततो ग्रामस्थ मध्येऽई 102.2. ततोऽजपा इति तो 14. 13° ततो जयमुदीरयेत् 1. o. ततो जरासंधबलं 84 13. ततो ज्ञातीन्समानाय्य 65.1". ततो ज्ञानमयास्यथ 12.24". ततो ज्वरं कनकविचित्रभूषणं 110. 73*. ततोऽथ वितयो नाम 23. B2. ततो दक्षः सुतां प्रादात् 3. 139. ततो ददर्भ घृथिवीम् 85. 62. ततो दशम् मासेषु 10.61". ततो दाहाय्प्रमुच्यते 110.66'. ततो दीक्षितमासीनम् 101. 89. ततो दूतस्य वचनात् 44.46". ततो दृष्ट्वैव गरुडम् 113. 1". ततो देवकिनन्दनः 93. 30'. ततो देवगणाः सर्वे 112, 73. ततो देवश्रवाः पुन: 24. 18. ततो देवाश्च नागाश्च 31. 48*. ततो देवाः सगन्धर्वा: 82. 13', ततो देवेषु नदसु 112. 48. ततो देव्यास्नु रूपेण 107.7". सतो द्वादश वर्षाणि 85. 10", तो द्वारवतीमध्ये 108.1". ततो द्वारवीं गत्वा 102. 19%. ठतो न निगृहीतः सः 99.. हरि. पादसूची-11 [सवो मजस्य भाण्डानि सोरमाग] चिपित्सितपाटात्मस्य हरियशस्य रातोऽनन्सरमाण 15 19 ततो मन्दि महादेय 112 83° ततो नादो महानभूत् 767" ततोऽनिरस्य गृहे 109 1" ततो निर्भासित रपं 8 35. ततो निवाोशनर्स 20 36 ततो निष्प्रभतां याते 112 43 ततो नीराना ये 60 29 सतोन्तरिक्षे पागामीत् 82 20* ततोऽन्त पुरमध्ये सत् 94230 ततोऽन्या मधुसूदन 88 40" ततोऽन्ये तपसा युक्ता 737" ततोऽपरे महावीर्या 318. ततोऽपसत्य सकुन्द 89 44 सतोपली चादेयं 87020 सतो पतिथे काले 21 29° ससोयाणसमीपस्था 108 29" सतो याणसहसाघे 108 64. ततो पुयुधिरे जना 5023 ततोऽग्रवी महादेव 112 128" सतो भगवतादिष्टी 36 32" ततो भय विष्णुमय 331" ततो भवन्त घोप्यन्ति 63 120 ततोऽभिसधि चके 3 120 सतो भूमी प्रतिष्ठित 91 at ततो भूय स्वकर्मणा 1471 तसो भूः स्तुतिवाक्येन 100 510 सतोऽग्ययाद्विरिष्ठम् 92 190 सतोऽभ्युपगमास्वष्टा 8 34 सतोऽभ्युपगमाहित्या 3 1030 ततोऽभ्युपगमाद्राज्ञ 6 40° सतो मनासि गोपीना 96 470 ततो मनोगति याति 19 33° ततो मन्वन्तरेऽतीते 4 170 ततो मामब्रवीद्वय 100 460 सतो मामाह गोविन्द 101 18° ततो मामाद भगवान् 100 64* ततो माहेश्वर युगम् 43 59 ततो मा मानवेन्द्राय 42 46° ततो मा वरुणोऽभ्येत्य 45 220 ततो मा प्रीडितं ज्ञावा 101 160 ततो मुख्यतमा सर्वे 84 20% ततो मुमुदिर जना 94 20% रातो मूभिभूरांत 108 76* ततो मोह प्रपर्वते 113 390 सतोऽम्यरतटम्यास्ते 1131* ततो यक्ष्माभिभूतस्नु 20 45" तो यशोदा समुद्धा 51 13" ततो यशोदा गई ये 51 350 ततो यान्तु यन पुरा 59 30 ततो यास्याम्यहं रथी 103 11' ततो युगाते भूतानाम् 35 60* ततो पुवानि पृष्णीना 82 1" ततो योगमयाप्पय 17 11 ततो योरस्यामि सयुगे 21 20" ततो रतासनयन 665. ततो रजि महावीय 21 24 ततो र प्रज्वलिसे 354 सतो त्यै सारगे 3729° ततो रामो महायाहु 110 41" ततो रामो रपान्वित 29 21 ततोऽयमुदधि साक्षात् 103 20 सतोऽर्जुनेन तरसा 15 63° सतोऽर्णय यमुत्तीर्य 103 13° ततोऽधरानसमये 50 20° सतोप्यरतसस्तस्य 2011 सतो ऐभे सुरैश्वर्यम् 21 36* ततो रोकहित वाश्य 3161" सतो लोको म्यमुदत 12 224 ततोऽवघुप्यत तदा 53 100 ततो पचनममयीद 89 34 113 634 ततो बनान्तरगत 83 18 सतोऽवप्लुत्य सहसा 108 70° ततो वय पुन सर्वे 103 29* ततो विज्ञाय पहस्थ 107 65° ततो विभाण्डकस्तस्य 23 39° ततो विभाजितं तेन 18 120 ततो विरोधे देवानां 3 97" ततो विशीणदेहास्ते 112 20° ततो वृष्ण्यन्धका कृ25 15*28 17 ततो वै देवमीदुपम् 24 1128 10* सतो वैयभयतस्ता 5 430 ततो वैन्य महाराज 5 41" ततो वैवस्वत देव 79 17° ततोऽवोच नरोत्तम 101 14* ततो प्रजस्व भाण्डानि 61 690 -82- ततोऽश्वराकृदिरयेय] श्लोकपादसूची [तम तयुद्धमभयत् सतोऽश्वराकृदित्येव 85 23° ततोऽसजरपुनर्गमा 1 310 ततोऽसबलयेगेन 12 700 सतोऽस्त्र प्रत्यपादयत् 10 360 ततोऽस्त्र वैष्णव घोरम् 113 23° ततोऽख सुमहायेग 112 72° खतोऽस्ने ज्वलिते पुन 113 27 सतोऽसाभिस्तदा तात 102 110 ततोऽस्य विज्ञाय चिकीर्षित तदा 11574 ततोऽस्य सम्यमूरु ते 5 150 ततो हत्वा जरासंध 22 14° सतोऽहममुव यज्ञान 100730 ततोऽहमर्थमेत 2 12 19 ततो हम्य शयाना तु 107 19* सतो हरघरो मत्त 110 65* सतोऽह कामयामि स्वा 99230 सतोऽद्द तस्य दुर्बुद्धे 15 43° सतोऽह तस्य वचनात् 12 1 ततोऽह तानपश्य 2 15 20 सतोड देवदेवेन 106 350 ततोऽद नातिधर्मिष्ठान् 16 30 ततोऽह परमप्रीत 106 37* ततोऽद प्रस्थितस्तदा 102 18" यतोह वृष्णिमैन्येन 101 18" तसो हाहाकृता सर्वा 48 24. पतो हिमकरोत्सृष्टा 36 139 ततो हिरण्यकशिपु 47 19° खतो हृष्टमना कृष्ण 812 ततो हमवती वाक्य 107 14° ततो शानधन देवा 43 690 ततोऽशुमन्त गोविन्द 88 124 तत्कष्यमानममृतम् 11520 सत्कर्मास्यामितुष्टुवु 64 224 तस्कपायस्य लक्षणम् 117 11, 12, 144 सस्कारययनो युवा 85 320 तत्काररमणीयानी 43 40° तरकाले शातिभिर्वत 83 20° तत्काल शातिभि साधैं 54 420 वरकृष्ण परिचित्यताम् 69 21 उत्तथा न तदयया 12 294, 331 तसद्पमुपागत 65 41 तत्तस्य करतो यद्ध 5111 वृत्तस्या यचनं श्रुत्वा 19 10% वत्तालवनमुत्तमम् 57240 तत्तालवनमुत्सज्य 58 " तत्तापरकर्तुमईसि 9 51 तत्तु तालवन नृणा 57 11 सत्तऽनुपा वक्ष्यामि 11 ° तत्ते प्रतिकरिष्यामि 65 76* तत्ते मम कृते नृप 31983 तत्तेऽह सप्रवक्ष्यामि 16°31 120 तत्वतो मम शोभने 107 74 तस्वदी च नामत 18 25% तत्वदशी निरुत्सुक 7 240 तत्त्वदृष्टार्थया वाचा 4044 तत्वमिच्छाम्यह देवि 99 13° तत्वया समुदाहृतम् 58 41 तत्व किमिदमत्यर्थ 107 43° तत्त्वान्वेषी तथा कुरु 4971 तत्पङ्कजमपङ्कजम् 30 161 नरपद परमं ब्रह्म 104 11 तत्पयो दधि चोत्तमम् 60 18° तत्परसन्मनाश्चास्मि 109 490 तत्पर प्रयत शादी 119 14 11' तत्परा व्रतमास्थिता 3101 तत्पश्यन्ति दिवौकस 58 40° तत्पुरुररसे मादात् 9 200 तत्प्रणेय निबोधस्व 115 31° तत्प्रमाथेऽकरोढुद्धिं 87 40° तत्प्रयच्छस्व मानाई 29 36° तत्प्रवतस्व वशाय 35 30° तप्रसीदस्व भगवन् 31 49° तय कन्यामवापस 26 180 तय कार्य विधीयताम् 107 46* तत्र फालं मनी वाच 1280 तत्र गाथा महाराज 22 36* तन गोवर्धन चैत्र 52 270 तत्र घामरहासच 7480 तर स्वय ब्रह्मा 1 25° तत्र म कुरूणा चै 15 तत्र तत्र निवेशिता 93 531 तत्र तत्र प्रजा सर्वा 6 120 तरता प्रभासनि 94 तत्र तत्र विशा पते 934 तत्र तत्र समासेन 1 100 वर वधुद्धमभवत् 20 34" - 832 सम सस्यासनः कालः] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य (तोपविष्टः प्रसन् तत्र तस्यासत: काल: 50,1". तत्र संपालसूर्याभं 49. 30. तग्न ता घरहेमामाः 92.239. तन्त्र नेपां नृवीराणाम् 62 87*. तम त्वं शिशुरेषादी 45. 39. सत्र स्वामुपयास्यत्ति 43. 27. तत्र मां पातक्राक:47. 46". तय दामोदरो वाक्यं 57.70. तन दिव्याम्बरधरा 9.64 तत्र देवाः समरुतः 113. 45*. सन देयो हुताशनः 30. 44. सान स्थाद्विचारणा 75. 150. तर निक्षिप्य दारकम् 48. 19'. तर पाण्डोः श्रिया जुष्टे 43.613 सन पुण्या वदुर्वाताः 92, 20. तन्न प्रासादमुल्यो वै 93.01. तत्र भूतानि सर्वाणि 7. 53. तन मञ्चसइस्राणि 96.56*. तत्र मन्त्रयतामेवं 46.14. सत्र महाः समापेतुः 96 54". सन्न मिथ्याप्रलापं ते 66. 15. तत्र यत्नपरो भव 49.40 तन यादवपुंगवा: 84. 316. तंत्र युद्धमभून्महत् 91.63% तन्त्र रक्षा विधीयताम् 101. 12. तराजश्रिया वृतः 43 399. तत्र रैवतको नाम 84.276. तम वासेतु भेतव्यं 49.10. तन्न विघ्नं चरन्ति स्म 91.4. सत्र विष्णुश्च शक्रश 3.50% तन्त्र वृद्धतमरत्वेकर 59.4". सत्र वृष्ण्यन्धकाः सर्वे 91.254 तत्र वैदूर्यवर्णानि 92. "" तन वै विहिताः साक्षात् 93, 29. तत्र शकस्त्वया कृष्ण 109.43*. तन शिष्टास्तु ये देवाः 20. 35", तनशूरा: समाख्याताः I .. तत्र पहिसहस्राणि 10 59: वन समर्पयो नृप 7. 18'. तत्र सर्वे च दष्ट्रिण: 3.90. तन सुसजने निशि 50 22, तत्र सोमगतिश्चैव 62.278 तत्रस्थ एवं भगवान् 86 63. तस्थैरुपधार्यते 78 10. तन स्पन्दोलिकाभित्र 58. 10. तत्र स्स दानया घोराः 32, 11. तत्र हत्वा पशून्मेध्यान 59. 294, वनाक्रुभ्यदलायुधः 89. 32", ताजग्मुनराधिपाः 89, 14, तयात्रिः सर्वलोकानां 20. 1. तयादितिमुपास्यन्तीम् 92. 54": तत्रानिन्युः सहस्रशः 89. 25. तत्रानिरुद्धहरणं 109. 45". तगानिरुद्धं दृष्ट्वा सा 107. 720. तनानुबन्धश्च महान् 109. 44. तत्रान्तरिक्षं यहुधा 108. 36*. तवान्तर्हितमेव च ।। 31. तपापां प्रथमो भागः 30. 414. स्यापि सहना लीला 43.254. वनाप्याडीकमभूत् 115. 18. तयायं वसतां पापः 52. 28". तनावतर लोकानां 45. 370, तत्रावशिष्टान्मनुजान 43 576. समाश्रयं मया दृष्टं 7037". तमासनमलंकृत्य 91. 31". तत्रासनानि मुख्यानि 74. 10%. तत्रासीनेषु सर्वेषु 91.26". तत्रासीतरणास्य 91.54. तन्नासौ गोपु निरत: 45, 35. तवाहमासे निरतः 35. 69". तमाहूताश्च राजानः 89.96 तमौ दारको गत्वा 49 30. तह व विधीश्वरः 30291. कलव्यसंवासः 84 28". तत्रैका जगृहे पुमान् 1057": नव गजयूथानि 93. 66. तत्रैव गुरुकं भाण्डं 70.6". तत्रैव स्वां भगिन्यर्थे 47. 47. तर पार्वती नाम 45.484. तर यलकेशवा 70. 30%. तत्रैव वसुरष्टमः 43 48'. तत्रैवान्तरधीयत 14, 11'. 19. 121.4 108 800. 112.124. तत्रैवान्तहिनास्ते च 103. 19% तनपा देवकी या ते 46. 15. वनोपविष्टः प्रहसन् 106 20, - सोपविष्टस्तान्वीरा लोकपादसूची [ वधाई तच्च मे मतम् सोपविष्टांस्तान्वीरान 95. 18". तत्रोयाच महामतिः 86. 13. सोपा काममोहिता 107. 57. तत्रोपा नाम भामिनी 107.9. तग्रोपा विम्मिता दृष्ट्वा 108.8". तत्रीजसा महातेजाः 88 33°. तरस यालो बृहदूपं 71.51. तत्सर्पभवनं महत् 56. 4. तत्सर्यमुपनीयताम् 60. 12. तरसर्व पुण्डरीकाक्षः 100. 79. तत्सर्षे वासुदेवल 85. 45*. तत्सुरासुरसंयुक्तं 35, 3. तत्सृष्टं पायोनिना 112. 884. तसैन्यं निहतेश्वरम् 85. 66. तत्सन्य प्रत्यपद्यत 85. 650. तत्सत्यं महदायादै 85. 24". तत्स्तम्भितमिवाभाति 35, 11. तत्स्यादित्यवगम्यताम् 89. 41'. तथा कष्टकितैर्दुमैः 53226 तथा कर्म महाकया 92.700. तथा कारीषयः स्मृताः 23.90. तथा कालीयकान्यपि 92. 1. तमा कुण्डलिनोऽमुराः 31. 86'. तया कुरु जनार्दन 101. 12. तथा कृष्णाजिनाम्बराः 31.85. तथा क्षणमुहूर्ताभ्यां 96. 12. तथा गाण्डीवधन्यानं 97.11. तथा गृरसमतिः प्रभुः 23. 54f. तथा गृत्समतेः पुयाः 23 55. तथा गोपयलाच स्त्री 23.8', सया घोरमवर्तत 91.484. सया चित्रागदं प्रभुम् 13. 376. तथा धैग्ररथोपमः 93. 13. तया चैलापहारिणः 117.216 तथा तम्वृणु दानय 106. 12. सया तथापि दोऽयं 112 92. तथा तात करिष्यामि 21.23. तथा तृप्ति न गच्छामि 115. 13*. तथा ते यान्ति संक्षयम् 100 63". तथा स्वं देव मान्योऽसि 86.24. तथा दशरथोप्यजा 10. 74. राया देवर्षिभिः स 20. 30*. तथा दानववंशजाः 107.68.. तथा देवान्सवासवान् 22.6. तथा द्विदायना दम्याः 116. 18. तया नागपति तोये 97. 26. तथान्यानि सितानि च 59.41. तथान्ये चापि राक्षसाः 31. 120. तथान्ये पृथिवीपाला: 85. 27. तथान्ये सैन्धवायनरः 23.90% तथान्यवृष्णिवीराणां 82. 30. तथा पद्मावती चैव 28. 34. तथा परिघपाणयः 31.78. तथा पल्पलककाः 16. 18. तथा पुत्रसहस्रिणः 31 13 तथा पुत्रं महायलम् 87.4. तथा प्रकृतयः स्मृताः 7. 236. तथा प्रत्याययस्व माम् 19. . तथा प्राणेश्वरावाति: 39. 14. तथा बाभ्रव्यवत्सयोः 18. 18. तथा बाईद्रयो नृपः 10 50. तथामध्यस्थ भक्षिणः 116. 34. तथा भुजापश्लिटेन 83 26. तथा मन्त्रः प्रयतताम् 41. 30. तथा मन्दाकिनीटे 21.6. तथा मन्दाकिनी नदी 93. 21'. तथा महर्पिप्रभवा इमा गिरः 118: 45. तथा मे दक्षिण भवान् ११७. 48. तथा यज्ञफलानां च 115.32%, तथा रैवतक गिरिम् 109. 35. तथा लगुडपाणय: 31.79%. तथा लोको जनार्दनात् 39. 12". तथा वज्रख संचयान 92. 34. तथा वनगतः शारिः 96.42 तथा वल्कलवाससः 31.854. तथा वृद्धिः प्रमागता 117.44 तभा थैदैश्च देवश्च 39. 13. तथा शशिरा विभुः 3. 66'. तथा शतसहस्रशः 97, 39'. तथा शूरः नजिन् 98. 10 तथा गुण महीपते 3.04. तपा सत्यवती नृप 23. 85. तथा सिंहासनानि च 92.4. तथा सुदुष्टोऽतिबल: 96. 38*. तथास्त्विति विनिर्गना 47.76 तथाई तय मे मतम् 58.46. . 85 पधाई मष्टपेशन ] चिपित्सितपाठात्मरस्य हरिवंशस्य सिदार सधाई नएचेतन 102 13 तथाई नायगन्ताय 63 11' तथाई भयताप्युफ 109 25° सया हिरण्यलोमान 4 11. तया हिवामान 8580 तथा यस्तोत्थिता युदि 68 35° तथेत्यभिहितो भर्ता 3 1020 तथेस्याह ततो मुनि 10 871 तरयुता तया च सा 8 13' सपेत्युपरश च तस्यासीत् 172" तयेत्युपरवा च ते स 16 120 तयेरयुक्रया तु गरुन 13 12 तथेत्युपरया पुनर्नन्दी 12 85- तयेत्युक्त्या स सधुद्ध 110 23° तोरयेयामवीकृष्ण 79 121 तथेत्येवाप्रवीद्राजा 21 26° सयेय हि त्वया कार्या 86 290 तथैव फामान्विविधा समश्नुते 118 44' तथैव च मनो नित्यम् 104 23° वथैव च विसमूढ 76 31" तथैव च श्रुतर्वाण 88 14. तथैव च समारूढी 114 130 संथैव ज्ञातिलुब्धस्य 7746* तथैव रिस्थत प्रह्म 16320 तथैव तब दुर्धर्ष 118 320 तथैव तव सोर्जुन 62 811 तथैव निदिध देवा 31 62° तथैव परिहर्षयन् 830 तथैव पुत्रो भगवान् 7 31" तथैव प्राह तान्सर्वान् 838" तथैव बरहा शक्र 109 210 तथैव भरतर्षभ 103 291 तथैव भ्रातर चास्य 78 45* तथैव मरुतोऽभवन् 3 100% तथैव मेरुसावर्णा 75° तथैव यवनाधिप 8534 तथैव रामोऽनियल 96 17* तथैव वनवेषेण 83 530 तथैव वसुधा जित्वा 68 330 तथैव शुदै शुचिभि 6 48° तथैव सह गोपीभि 83 5 तथैवानिरसनत्र 20 120 तथैवाद्यापि दृश्यन्ते 16 26° रावधानागाश ये 7 6 तथैवान्त पुरं मुनि 10 स्थैराप्सरसो गण 113 17 तथैवाभयदस्यासीत् 23 5 तथैवायुयुगे युगे 117 500 सधैासीनमुत्सङ्गे 70 32* तथैवारिस तवानघ 86 65° तथैवातिभीमको 96820 तथ्यमेतन्मम यच 3564 तदण्डमकरोकैध 1 26° तदण्डमुदकेशयम् 1 2 तदमृतमपूजयत् 35 64 सदद्धतमिवाभवत् 112 100 समास दैत्यसहसगार्ड 33 320 सदनीकपुर सरम् 112 11" मदनुविचिन्त्य बभूव वीतमन्यु 18 420 तदनुष्ठीयता धच 78 320 तदनेन तपोग्रेण 38 600 तदप्यतियरी विष्णु 92 420 तदप्यमिततेजसा 9355 तदप्यवसित कृत्स्र 113 67° तदप्युत्पाव्य कृष्णार्थम् 93 56" तदप्रतिहत युद्ध 8 45° 112 67° तदभूतुमुल युद्ध 42 26° तदरण्य श्मशानाभ 6774 तदर्चन्ति दिवौकस 58 420 तदथकृत्य सचिन्त्य 43 10 तदर्थे या समागता 82 281 सदशक्यमचिन्त्य च 79 192 तदसण्येयमेकस्थ 11038" तदसस्रस्तधनुप 36 290 वदनशस्त्रप्रथित 37 350 तदस्माक गुरुस्त्व हि 62 41" तदस्माकं परा यज्ञा 100 72° सदस्माकं विनिश्चितम् 10982* तदस्य कश्यपस्याश 4534 तदस्य सर्पराजस्य 55 5 तदस्था श्रुतवन्त स्म 41 270 तदद स्वरया विष्णो 44 190 तदद श्रोतुमिच्छामि 10620 सदर समनुप्राप्त 6234 तदा क्रुद्धो बले सुत 108 82' तदापूर कुतूहलान् 70 31 -86- पहानवमन महत्] चिकित्सितपासात्मकस्य हरिवंशस्य [तपसा नियमेन सदानयवनं महत् 44 45 तजस्थानमधिक 53 30% सद्दाम तस पारस्य 81 194 तनया वृपपर्पण 22 सहुर्दिनतल भिरया 100 18 तनयेषु महीपते 23 50% सवयक्षगन्धर्य 82 140 वनय सह वीर्यवान् 9 68 सन्द दैत्यपूजितम् 71 43 तनयो वृद्धशर्मण 24 210 सदनु सम्भसनिभम् 71 40% तनुप्रेण विहीनश्च 108 60% सद्धविस्तर पुत्रस्य 35590 सनुव सारो गत 43 20% सद्धायस्व गाड्नेय 19 30° तनूजस्तय सोऽर्जुन 62 986 तादल कृष्णयाणौधे 13 16 तनूरुदैरुत्पतितै 54 170 मल पृथिवीशाना 81220 सनूरदैर्यथाजात 117 36° सहुभ्याच दिवौकत 12 310 तघ्रिजस्तनिपालश्व 24 32° सहि भरतश्रेष्ठ 1970 तम्रीवैराणि चव ६ 46 30 सह मम धर्मज्ञ 1 34 वन्न कार्य विपश्यता 3 220 सहि मम युद्धस्स 10611 तर यो भविष्यति 348d तदक्तस्वरिप्रये रत 109 4g तनिबोध कुरुश्रेष्ठ 13 160 तनवान्क्ष तुमईति 8 230 तलियोध नराधिप 7 144, 26° 10051 सगवान्प्रयवीत मे 16159d तनियोध महारान 15 67° सहयान्वतुमईति 15 8°23 11 तन्मत्तो यदि सरकार 7211 तद्भस वक्षसस्तस्य 110620 तन्मय विद्धि मा विप्र 10066 तद्वित्वा भोगवन्धनम् 56292 तन्मया विमला लोका 3646 तमोजकटमित्येव 88 320 तन्मह्य दीयता भर्ता 42 480 तथा रोहिणेय व 491 तन्मय रोचते गोपा 59 281 तयुगान्तस्य लक्षणम् 116230 तन्मुमोच घले सुत 112 67' तयुगे तत्कुलीनच 15 41* तन्मे न रोचते वय 847° तघुद्धममवद्वोर 35 637 21.42 25° 44 47* तन्मे न स्यान्मृषा वाक्यम् 112 110 7533°81628773 तन्मे निगदत शृणु 39 8 91 54" तद्रूपक्यस तदा 79 230 सम्मे भूहि पितामह 45 16 वद्वधार्थ महाबाहु 91210 तन्मे मनसि वाष्र्णेय 99 24° तद्वध्यमान रक्षोभि 9 334 घद महामुने 91 11 तदनं तस्य दैत्यस्य 4461 सन्मे शृणु यदीच्छसि 108 894 वदन वनचारिणा 53 394 तन्वी धन्वी परतप 7 200 सद्वाक्य पर्ययागतम् 100844 सन्वी शशिनिभानना 87 7' सद्वागतमाख्यात 601 तप भास्थाय दारुणम् 9 640 द्विदुभोगवानिति 93 40* तप एवं गरीयोऽभूत् 2 550 तद्विद्धि मधुसूदनात 39 100 तपता रोकमव्ययम् 34 214 तद्विधत्स्व स्वय बुद्धया 11014 सपनश्च महाबल 1024 तद्विधास्यामि यद्धितम् 65 930 सपश्चात्सु पृथिवीं 2 36 तद्विशिष्टश घाणेऽपि 106 60° तपश्चान्त्य सुमहत् 13 16° तवीर्यास्तदपाश्रवा 6244 तपसा चैव महता 23220 तद्वै मन्वन्तर स्मृतम् 1 380 तपसा जगव्ययम् 3524" तद्वैश्रवणसुलिष्ट 34 480 तपसा ते मुनिश 35 650 तद्वै स्थान शतक्रतो 21 28 तपसा दग्धकिल्विये 10530 तयास्यास्यामि तेऽनघ 104 18 तपसा नियमेन 3134 -B8- तपसा निर्मित महत् ] श्लोकपादसूची [तमुवाच जनार्दना सपसा निर्मित महत् 112 67 तपसा निष्फलेन च 16 3rd तपसानेन सुवत 31 40% सपसा ब्रह्मचर्येण 7520 तपसा भावितारमन 3800 तपसे एतमानस 85 630 तपसे सशितनत 3 1049630 तपसोऽन्ते महायशा 22 420 तपसोऽन्तेऽस्य भगवान् 31 52° तपस्तेपे महाभाग 2017 तपस्तेपे महाराज 2 10° तपस्तेपे सुदारुणम् 35 23 85 gd तपस्युप्रे सान्सदा 23 130 तपस्विनो महावीर्या 365 तपस्वी ब्राह्माणध त्यां 23 163° तपस्वी सत्यविस्कवि 2 17 सप परमदुश्चरम् 2 3° 23 139 तप प्रकर्षाददिति पुराणम् 50 19' तप फलेवा राजन् 198" तपशरीरा सर्वास्ता 13200 सप सत्य च भारत 104 170 तपान्ते जरदो यथा 27 11 तपोऽतप्य सुदुश्चरम् 12 4 तपोदीर्घेण चक्षुषा 97 41 तपोयरसमाधिभि 961 तपो ब्रह्म च शाश्वतम् 6nd सपोभूतस्तपस्विनाम् 30 360 तपोमूलतपोधन 720 सपोयज्ञार्थवेदाना 116 14° सपोरतिरकल्माष 7 20% तपो धर्षशत तेपे 23 104 तपो घर्षाणि राघय 31 118 तपोवा नियमोऽपि वा 1637' सपोया रक्षत प्रजा 118 16 तपोवीयरिसमुत्पन्न 12 110 उसकामनभूषणम् 32 22 खसकुण्डर भूपणम् 3442 तप्यमानास्तपस्तीन 47 133 तमयूर जनार्दन 29334 समनिमभिपेचयत् 110 तमो द्विज कृत्वा 101 18* तमतिकान्तमर्यादम् 58 तमनिइिल दृष्ट्वा 517 हरि पादसूची-12 तमध्यासन्त निवृता 53356 तमन्या भावविकचै 63 310 समन्वयुजेरास 80 180 तमन्ययुदरगणा 34 47° तमन्वयुपाश्चैव 88 40 तमपास्य च तव 114 g" तमपृच्छ सनातनम् 12 19 तमध्याहुर्मनुष्येन्द्र 31 112 तमप्रतिमकर्माण 38443 तमसा निष्प्रभ सर्व 32 18 तमसा नीलपर्चस 35 16" तमसा युज्यते सदा 113 39 तमस्तथ कथ घोर 10450 तमह भणया वाचा 43360 तमशुमान्महाबाहु 88 11" तम प्रोत्सार्य वपुषा 366° तमागस्कारिण कर 31 126° वमादिपुरष देव 10 48° तमापतम्तमत्त 64 140 तमापतन्त दृष्ट्वैव 108 200 तमापतात प्रमुखे 64 160 तमापतन्त विव्याध 87 720 तमापतन्त सप्रेक्ष्य 67 17 वमाविशत्तदा विष्णु 9 650 तमाह कृष्ण कासौ भो 79 130 तमाद कृष्ण सहृष्ट 70 15° तमाह वेशरो हृष्ट 70 340 समाह सस्मित कृष्ण 58340 तमाहामितदक्षिणम् 69 26* तमाहृतिरभापत 89 30% तमिडा प्रत्युवाच ह 960 तमिन्द्रो रुपित पुन 3 108' तमुक्त्वा कर्म साकरोत् 51 144 तमुचुह्मपय 35 26° समुत्तकोऽय विप्रपि 9 50% तमुत्सृज्य तदात्मान 12 21* तमुपश्रुत्य सत्रुद्ध 909 तमुपानाय्य स नृप 85 130 तमुपाशुमबुध्यत 10 तमुपेक्षितवानय 29 311 तमुपेत्य महादव 112 106° तमुपेन्द्रमरिदमम् 79 3 तमुराच नादन 1033 89 सरिससन्तर्दिते देवे] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ तस्य देशस्य शाखिनाम तस्मिनन्तर्दिते देये 15. 1". तस्मिनपरितोपो यः 10 10%. तस्सिसहनि निवृत्ते 74 1". तसिसानाजनाकीर्ण 7416, तस्मिनारायणाभ्रमे 40 34, तस्मिनिपतिते देवा: 2011 तस्मितिपतिते दैत्ये 38 50°. तस्मिद्गुरपातलक्षणे 32_17'. तलिापरते राजन् 85 26". तस्मिन्नेव क्षणे प्राप्ते 108 12. तसिलेव ततः काले 86 23. तस्मिन्नेव महायज्ञे 5 33. तस्मिसेव मुहूर्ते तु 65 101". तस्मिसेव प्रजस्थाने 52 1. तस्मिन्पर्यायनिवृत्ते 60. 34. तस्मिन्पुरवर श्रेष्ठे 93 29. तस्मिन्पुरवरे नद्य 93 63. तस्मिन्प्रयाते दुर्धर्षे 9 66". तस्मिन्ब्रह्मशिरस्यस्खे 112 42. तस्मिन्भूमौ निपतिते 100 20% तस्मिन्मगुवनस्याने 44 530 तस्मिन्मुक्त दिश. सर्वाः 112 68° तस्मिन्यज्ञे महादाने 31 106° तस्सिन्यादवससदि 78 3. तस्मिन्युद्धे सुदारुणे 12636 तस्मिन्वनगते नृपे 10 30 जलाधिकाऐ जति 4. तसिन्विनिहले त्वया 9 584. तस्मिन्विमर्दै निर्वृत्ते 38 BBA तस्मिन्विमर्दै योधाना 82 7. तस्मिन्धिमाने पर्यवं 12 6° तसिन्सने समाप्ते तु 1155° तस्मिन्समरमूर्धनि 112 5. तस्मिन्सुते न वर्तन्ते 40 240 तस्मिन्मुरिहिता सर्वे 93 630 तस्मिन्स्थातु स्व भाश्रमे 987', तस्मिन्हते नाम्ति भद्रे 620 तस्मिन्हते महामाने 80 500 तस्मिोके यात्रिय. 77 21. तस्मिंश्च पुरुषोत्तमे 62 736 तस्मितनावपतिते 99 31* तमिस्तु देवसदृशे 21 27. तसिस्तु मध्यमाने 4 5 16. तसिंस्तु न्युस्थिते दैत्ये 35 73%. तस्मै चुक्रोध वै कृष्ण. 71 12. तरी दत्तानि चास्त्राणि 31 113. तस्मै दत्तो वरान्प्रादात् 23 140%, तस्मै धुन्धुनियईणे 9 61. तसै ब्रह्मा ददौ प्रीत. 2 11. तम्मै राजे महात्मने 976. तस्य कर्माण्य विम 903. तस्य का परिदेवना 44 40. तस्य कृत्वा महात्मन 2036* तस्य कृष्णभुजोता. 67. 40". वस्य कृष्णाभिपनस्य 76 44. तस्य कृष्णो महाबर 88 22. तस्य क्रोधानिपूर्णेन 568. तस्य गङ्गा च तत्सद 23 764 तस्प गर्भस्य ता दिश 208' तस्य गर्भस्य मार्गण 4884 तस्य गोवर्धनो नाम 52 243. तस्य गोत्रजवासिन 65 32. तस्य गौरवदर्शनात् 73 190 तस्य चक्षु समुत्थेन 40 49". तस्य चन्द्रोपम ववनम् 92. 31. तस्य चानु हलायुध 109 88° तस्य चाभ्युत्पतिष्यतः 110 3. तस्य चायं ऋतु कृष्ण 59 b. तस्य चारयतः सोऽश्व. 10 476 तस्य बालदिशापा 022 तस्य चित्ररथः सुत' 23 341 तस्य चिन्तयतस्त्वेवं 47 11. तस्य चैत्ररथी भार्या 9840 तस्य चैवोद्यमानस्य 59 140 तस्य तत्पापशमन 20464 तस्य तत्प्राप्य दुष्प्राप्यम् 2028° तस्य तद्वचन श्रुत्वा 10981° तस्य तद्वदन श्यावं 76396 तस्य तां तरसा सगे 112 16. तस्य ते युध्यत कृष्ण 6285%, तस्य दर्पबल हत्वा 64 19 तस्य दाशरथिर्वीर. 23 370 तस्य दीप्तशरोधस्य 112 360 तस्य दूतस्य तच्छुत्वा 44 38. सस्य देवबरस्य ह 34 190 तस्य देशस्य शाखिनाम् 55 21. 92 - तस्य देह सुखोचित.] श्लोकपादसूची [सस्य संम्तम्भयामांस तस्य देह सुसोचित 76 380 तस्य देहे प्रकाशन्ते 7641 तस्य दैत्यस्य चरेण 38 46 तस्य दैत्यस्य दुर्बुद्धे 44 43° सस्य देवी स्थिता बुद्धि 86 19" तस्य द्वारवतीपते 86 56 तस्य नाहगति जाने 65240 तस नि श्वासातेन 966 तस्य नि सत्य भोगिन 1132 तस्य नेने समाधने 75 43 तस्य पली गले बद्धा 9 97" तस्य पद्यामथाक्रम्य 5630* तस्य पर्षतमुख्यस्य 92 38° तस्य पुनस्यमापन 44 61° तस्य पुत्रशतस्यासन् 23 156* तस्य पुनरात त्वासीत् 9 38° 2340 तस्य पुनशत दग्ध972° तस्य पुरस्य धीमत 20 430 तस्य पुत्रा बभूवुदि 28 50 तस्य पुना बभूयुस्ते 21 100 तस्य पुत्राश्च दाराश्च 56 11° तस्य पुत्रास्त्रय शिष्टा 9780 तस्य पुना शतारयास्तु 23 168 पुत्रै सना 9700 तस्य पुत्रोऽभवद्वेन 520 वस्य पुरोऽभवन्मधु 23 161 तस्य पुत्रो मदानासीत् 44 23° सस्य युमो यदुज्यष्ठ 85 8" तस्य मभुरद विभो 29 10 तस्य प्रस्फुरितीष्ठस्य '76 16° तस्य फेन सुतोऽभवत् 23 260 तस्य बाहुसहस्रस्य 112 104" तस्य याहुसहरू तु 23 143° तस्य भनोत्तमानस्य 58 542 सस्य भस्म तदा विहं 11061 सस्य भार्याद्वय चैव 45 360 तस्स भार्याभवत्सना 81" सस्य भार्यात जातमी 26 तस्य भायोपदाननी 23 4cd तस्य भीमरथ सुत 20 22d तम्य भ्रातृशत त्वासीत् 9336 तस्य मध्ये सदस्रास्य 70 17" तस्य मलद्धयस्य 2 72 13 तस्य मूल हि युद्धस्य 115 20% तस्य ययावित तेज 20 150 तस्य यज्ञे पुरा गीता 13 56* तस्य योगो विधातव्य 62780 तस्य रश्मीगृहाथ 19 160 तस्य राज्ञ सुनिर्मिता 84 200 तस्य राज्ञो वसो कन्या 13 35° तस्य रूपमभूत्तदा 58 B3% तस्य रूप बभूव ह 61 44 तस्य रूप बलस्यासीत् 81 31° तस्य लोके सुदुर्मते 1095 तस्य वर्षसहस्राणि 40 3500 तस्य वशकरा नृप 10 50% तस्य यशरा भुवि 23 291 तस्य धशमह राजन 15 146 तस्य यश नियोध में 19 354 तस्य वशे महाराज 22 430 तस्य वाक्यस्य पर्याय 100580 तस्य वाक्य विचिन्तयन् 46 20% तस्य वारिसहसं तु 208 586 तस्य बारिमय वेग 9740 तस्य विक्रमतो भूमि 31 89° तस्त विधुचलापीडा 37 384 तस्य विप्रस्य भवने 102 90 तस्य विप्यो सुरेशस्य 31 100 सस्य विस्तरमारयास्ये 4 18* तस्य वै पुनमिथुन 27 180 सनत पुत्र 15350 तस्त शवस्य शब्देन 94 96 तस्य शाखो विशाखश्च 3 360 तस्य शापान्महामुने 23 155 तस्य शुक्रो ददी प्रीत 2250 तस्य शृङ्गाणि चाभयन् 61 380 तस्य शैरस्य विपुर 61 64 तस्य शैरत्य सानुपु 61 31 तस्य सत्य रति मुत 15 314 तस्य सत्यरथा नाम 1021 तस्य सत्यव्रतो नाम 9 88* तस्य सम्यमत्तस्य 4520 तस्य सपमिदं जगत् 3 1117 BAL तस्य सकल्प भासीय 18 10 तस्य सविदभूत्तदा 18 19d तस्य सस्तम्भयामास 70286, वै --93- व दिव्य दुमश्रे] श्लोकपादसूची [तसुस्तामध्यगच्छत सच दिव्य गुमश्रेष्ठ 94 23 त च देश व्यवसित 43 210 वच पञ्चजन घोर 91 52 सच राजानमाहुक्रम् 91 30% तघराजा समागध' 8284 त च वृद्ध प्रियसुत 69 18° चशमस्य दयित 94 190 चाश्वमेधिक सोऽश्व 10530 त चास्य विषय महत् 37 520 सचित्रसेन साब्ध 81 830 सं जगाद हदोत्तमम् 56 171 तं जघान महाघोर 91 50 व जयाय सुरेन्द्राणां 38 37* त जिगाय ततो रुक्मी 89 280 त तथा पतित दृष्ट्वा 106 400 ततपन्तमिवादित्य 3524 ततं वृणीष्व भद्र से 112 126° तु कृष्णश्च गोपाश्च 5866 सगर्भ प्रयत्नेन 489 स तु यह गठे दृष्ट्वा 998 तं तुष्टुवुदैत्यगणा 37 69° सत्यजामोऽध वै ययम् 66 34 समेलोक्यान्तरगतं 372 स व प्रत्यभिजानीहि 107 70° त दहेयमह सुरा 85 42 व दिग्य विष्टर विना 7020 सदीनमनस ज्ञारवा 112 820 तं पश्य घाल महता 6240 प्वा चितयामास 55 47" से दवा दुदुथुर्गोंपा 67 140 सं दृष्ट्वा निर्ययो हट 85 38" तं दृष्ट्वा परमप्रीता 5400 तसा प्रमुसे तस्य 12 49 ते वा मुनय माहु 2 210 या सर्वनियुक्त 7220 त देशमगमत्र 51 25° त देशमाजगामाशु 38_536 मक्ष्यथ समृद्ध च 69" चनमस्तुहमारत 113181 निवार्य ततो घझा 2041 समृपं जाामन्यव 118 19 त पिता मम इस्तन 11 17' त पुन शरवर्षण 108 69 त प्रक्षारयता जले 114 1 त प्रत्यविष्यकारूप 87 53 त प्रत्यविध्यरसप्तत्या 888 त प्रदाय हपाश 98 14* त प्रविष्टो हृषीकेश 103 25° त प्रवेक्ष्यन्ति चै सर्वे 62 7800 त प्रस्थितमभिप्रक्ष्य 10025° त विभेदाष्टभि क्रुद्ध 87 72° त ब्रह्मवादिन क्षात 21 " त भागवतमव्ययम् 7029 त भूयो जनयामास 39 त मणि बनवे पुन 29 394 त मन्न मनसा वहन् 70 33" त महीशयने सुप्त 77" त मा पश्य समापस 3567 त मुद्रयित्वाय घट 85 34 त मुमोच हरि स्वयम् 1117' त मूर्युपानाय तदा 20 430 त मे त्वं पुनरानय 79 d त य? प्रत्युवाच इ 22 220 त बन कृष्णापूर्वज 83 % त वारय महाकाय 9580 त वासुदेव श्रीमन्त 85 53° त वितत्य महापक्षी 38 48" त विविक्त नगगत 628 संवै रद्र च शकरम् 2036 त वै विद्धि महाराज 1 180 त वै स्वयभूमंगवान् 31 35* वंबान्त सुपर्णन 425 वीडितमुख दृष्ट्वा 99 330 तशयान महात्मान 40100 से शरत्कुसुमापीडा 59 30° त शशाप तत शोधात् 8200 त श्रुत्वा निनद घोरम् 109 130 सायित्वा कसस्य 69 30° त सतराये सपूणे 9930 त समाचर भार्गव 14 10 व समाजमनुत्तमम् 96 61" त समुद्राश्च नद्यश्च 5250 त सर्पमिव सर्पन्त 8161° तस यादवा मुख्या 78 41* तसुरोधोऽप्रतिरथ 23 तसुस्तामभ्यगच्छत 23456 95- सोमममि लोक प] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवशस्य [साम्यां सह नियोस्येते हसोममनिरोक च 39 110 संसो सुरोघो रानपि 23 46* # मधीक्षन्ति भूतानि 38074 त स वृताभिनन्दन्ति 63 g" स स्यन्दनमधिष्टाय 112 879 सहत केशिन दृष्ट्वा 67 45* तहत परिदेवन्त्य 71 14. त हस्या पशिन युद्धे 67 44" सहरवा पुण्डरीकाक्ष 743907642° से हरवा रथमारुह्य 87 700 वहनिष्यसि विक्रम्य 15 56 सा गाप प्रनुता यासे 60 30° सा गांव सप्तरायण 6140 ताअधान महाबाहु 91 4° ताभधान शिरातले 486 सात नैवविधा भूमौ 77 430 तारो विद्महे वृत्त 109 41 माननिरदहदोर 2 370 सानधर्मविदो मन्दान् 113 38° सानन्यान्भास्करो यथा 93 41' तानयाचन्त चतुर 176° तानरीशरवृष्टिमि 81 821 तानई समरे हन्या 45 16° तानामन्य सदोगतान् 40 20 ता नार्यों जग्मुरगुता 107 174 तानि किन विकाथसे 112 90% तानि तेषा विमानानि 113 560 सानि दूरावधानि 52 220 तानि दृष्ट्वा महातपा 10 18" शानि पुनशतान्यस्य 21 280 तानि याणसहस्राणि 108620 तानि मे चतुमईसि 105 30 सानि रत्नाघक्लप्तानि 74 70 तानि शष्पाण्यबालानि 59 46* तानि श्राद्धानि दत्तानि 11 13* तानि सन्तीह सर्वाणि 92 16 तानि सर्वाणि पश्याम 66 31° तानि सर्वाण्यदृश्यन्त 79 35s तानुक्रवा विरराम इ963 तानुवाच जरासंध 817 तानुवाच तत कृष्ण 100 280 तानुवाच ततो ब्रह्मा 47 18* तानुवाच हरिदवान् 40 44* तानुवाच हृपावेश 103 11 सानृपीन्सूतमागधी 5 35 तान्कवि सस्मश्चैव 168 तान्क्षग्रियगणान्तात 1350 साना निदधुन्तत 10 60° तान्धनौघान्सतिमिरान 32 20° तान्दानवगणा सर्वे 13 420 तान्या कृष्णमनवीत् 11046' सान्दृष्ट्वाचिन्तयस्तत्र 110 200 सान्धरेनामिपूरय 86 89 तासमस्यस्व भार्गव 13700 तान्पासहस्तमथितान् 3621" तान्प्रत्यगृह्णन्सरब्धा 87573 तान्यिभेद जनार्दन 81 84' तान्मजमानानेक्रसव 109 220 तान्यनन्ति स्म रोका चै 1 36° तान्यजस्व महाभागान् ॥ 38° तान्याफाशनिकाशानि 52 100 तान्येवास्या कारयिष्ये 867° सान्समीक्ष्य महोत्पातान् 1025° तापनीये यथा घण्टे 75 430 तापयन्स्वेन तेजमा 62 484 वाभिर्धायों हय लोक 2016 ताभिर्हतो न सदेह 109 56° पाभ्यामन्तर्दधे तदा 42 330 वाभ्यामागमने प्रीति 65 930 ताभ्यामाप्लावित सैन्य 36 16 ताभ्यामुद्रान्तमेशभ्या 38 3za ताभ्यामेकस्तु पद्माक्ष 71 50* ताभ्यामेव स जग्राह 57 190 माभ्यां जपकृतक्रिया 36 481 नाभ्या ते सलिल चक्रु 78 46* ताभ्यां प्रवाजितो राज्यात् 26 120 ताभ्या प्रीतो ददौ माल्य 71 18" ताम्या वत्साभ्यां सजज्ञे 351° ताम्या बलराम्या सहृष्टा 37 330 ताभ्यां भीमा सुरासुरा 3623 ताम्या मृधे प्रयुक्ताभ्या 81 550 ताभ्या युद्ध सुदारुणम् 75 290 ताभ्या युधि निरम्ताभ्यां 72 21. ताभ्यां समवतीर्णानि 81 60% ताभ्यां स विदो दशभि 87 690 ताभ्या सह नियोत्स्येते 65 87° 96 - सामन्त प्रसवो ट्वा श्लोकपादसूची [ ताश्च प्राग्ज्योसिपपति साम त प्रसवां दृष्ट्वा 20 37* वा ममानय भद्र ते 113 10° सामसस्य मनोरेते 7310 तामसस्यान्तरे मनो 7 190 तामसेनास्वनाठेन 35 133 सामस्या छादयामास 10BB सामापतन्ती सप्रक्ष्य 108 730 तामावसरपुरा कृष्ण 86520 तामासनवती रम्या 95 15* तामाद कृप्या कुब्जेति 71 230 शामाद निद्रा सविता 4850 तामाहुरसती नाम 107 370 तामिडेत्येव होवाच 960 तामिन्द्रवचनादरवा 9370 तामियेप च स प्रभु 27 10 वामुत्थाप्य परिष्वज्य 88284 वामुवाच हसन्नी तु 7127 वामेकभारसयुक्ता 18 23° वामेकामाहुरुरपसाम् 96 140 तामेव रजनी कन्या 48 120 तामेव मुवतीं दृष्ट्वा 83 47° साम्रजाक्षो जान्तकः 987 ताम्रतुङ्गनखी सुधू 87 37 साना क्रोधवशा इस 3 450 ताम्राया परिकीर्तिता 381" ताम्रावश' प्रकीर्तित 3834 ताम्रौटनयनापाही 87 36° तारकश्च महाबल 3684 तारकाचित्रकुसुमे 32 27° तारणायेह कल्पते 1155d तारस्तु कोशविस्तारम् 339° तारागणपताकिनी 37 17" तारापतिरिवाम्यरात् 53 150 तारापनिमिवोदितम् 108 21 ताराभिश्चित्रमम्बरम् 59 38 सारामकथय सुरा 20394 तारा नाम यशस्विनीम् 20290 तारा पप्र सरायम् 20 41 तारे कस्य सुतो झयम् 20 411 तालजड्डा इति श्रुता 23 1584 तालजवान्पहेक्ष्यान् 10260 सारजाम्नयच च 23 100% तालजलो महायल 23 158 साल्पानि सहिती 578° तारपश्च पावित 57220 शारशब्द स तं श्रुत्वा 57 14° तालशब्देन ते कृष्ण 64720 तारस्तम्भवनश्याम 625* वालस्वनमिव द्विप 57 144 तालानां तमधो दृष्ट्वा 57 17* तारैस्तविपुलस्कन्धे 5760 सावती पोपणे नृप 10 600 तावती प्रापयिष्याम 92 13° तावरस्थास्यति मे यश 83 49' तावदेव व विस्तीणम् 93 37° तावदेवापर भूय 89 28° तावट्विगुणमायतम् 53 211 तावदृत्त समन्तत 100 330 तावस्येव सदस्राणि 27 23° तावमात्र प्रकुर्षन्ति 16 180 तावन्योन्यगती यारी 5130 तावन्योन्यमयावुभी 81 66 तावन्योन्यावरुद्धाहौ 64 18° तावप्युभौ सुवसनी 71 16 तावरिएपरिप्लुती 72 24 तावर्जुनी कृष्यमाणो 51 18° तावागतौ समालोक्य 42 200 तावानय ममाज्ञया 65920 तावापतन्तौ स्वरिती 7422 तावायुधानि विन्यस्य 79 390 ता वार्यमाणा पितृभि 63 24. तावाद वरवर्णाकी 11 30 तावुद्दिश्य बनौकसी 733 तावुद्यतमहागदौ 82 103 तावुद्यताशुपाशौ तु 36 17 तावुभावनुम्तिाङ्गौ 30° तावुभावाहतो तोये 42 310 तावुभौ जलगर्भस्था 42 220 वायुभौ दानवोत्तमौ 44 730 तावुभी मधुकैटभी 38 1842 233, 30% तावुभौ मलपुगवी 72 250 तावुभौ बजसवृद्धौ 71 360 तावूचतुस्खदा सर्शन 535° तावूचुपय सर्वे 5 34 तावेव मानुषी दीक्षा 58 81 ताश्च प्राग्ज्यातिषपति 91 15% हरि पादसूची-13 97 ताश्चैवाप्सरसस्तदा) चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ना हृष्टयनस सर्वे ताश्चैवाप्सरसस्तदा 10770 तासामपत्यान्यभवन् 3 530 तासामपत्यान्यष्टाना 981" तासरमरारपक्ष्माणि 109 110 तासा प्रथितसीमन्ता 63 340 तासां नामानि मे शृणु 3 250 तासा परममूलानि 93 60° तासा परमनारीणाम् 92 30% तासा पुरवर भौम 91 144 तासा वाष्पाभिपूर्णानि 109 10° तासा भर्ता प्रभाकर 23 " तासा यथाह हाणि 94 28° तासा दिवशब्देन 53 6*67 10° ताला विलपित श्रुत्वा 56 26" तासा हयंतलस्थाना 109 120 तासु कृष्णो मुद लेभे 55_16 तासु चक्रे मनम्तदा ॥38 तासु देवा खगा गाव 2 480 तासु वीरा सहस्रश 884 वासु वीर्यमवासृजत् 1 230 तासु सृष्टास्वया देवा 44 81 तास्तस्य नृत्य गीत 63280 तास्तस्य वदन कान्त 63 196 तास्त पयोधरोत्ताने 63230 तास्ता हि गतयो मम 45 133 तास्तिन स्थाणुजगमान 13 160 सास्तु कामदुधा गाव 53 81 सास्तु गाव स घोरथ 53 950 सास्तु पलीकृता सर्वा 93 25* वास्तु सभ्रान्तवदना 5121 तास्वपत्यानि मे शृणु 3 26', 451982 साकश्यप मससारमा 3980 सांगांचे हिसितु सदा 167* ता गुहा मुचुकुन्दस्य 8546° तो घसनीपसगम्प 96 160 सरं च द्रक्ष्यसि गोविन्द 698 तांघ पमोरपरवती 55280 सो घरन्स नदी धेष्ठां 55 40° तो म्याण्यातुमईसि 900 तो चोयाच सदा निद्रा 47 26* सां तथा रक्षती रष्ट्वा 107 22 वा स्थायादिना साधीम् 99* तो हो भाति जगदिसताम् 146* ता तु कुरजां तत कृष्ण 71 310 ता तु रूपेण कान्तेन 8 40" ता तु सर्शनवद्यागीं 118 13° तर ददर्श ततः कृष्णा 87 330 ता ददर्श दशाहाणाम् 93 8" ता ददौ न तु कृष्णाय 87 16 ता ददौ भीष्मकश्चापि 87 25° सा दर्शयस्व समरे 110 67. ता दीर्यमाणा महतीं 112 60 ता दृष्ट्वा वध काम 87 390 ता परिष्वज्य भाविनीम् 96 17* तां पुरी द्वारका दृष्ट्वा 93 9* तां पृथुधनुरादाय 5 43° ता प्रविश्य तत सर्वे 89230 ता प्रविश्य भवन्तीद 104 10 ता मायौं मुदितोऽब्रवीत् 98 14' ता माता प्रत्यवेधयत् 13 18 तामाया समयामाता 36 17° ता मुखे समभावयत् 8 37" ता मेने मृत्युमात्मन 48 3rd ता यशोदासुता विद्धि 65 49° सा विसृज्य महावेगां 83 61" ता वै कोधाच मोहाच 10 14 वा वै रोपाच बायाच 8 19° ला चे सर्वे गुमनस 96 15° सा शकामो भगवान् 8 29* ता शोकसलिले ममाम् 69 170 तांश्च मोजान्धकांस्तथा 956 ताच राज्ञ र सर्वान् 88 26" तांश सर्वान्वजौकस 8361' ताथापि नधान्विज्ञाय 3 234 वांनापि मतिजमाह 103 16° साधासुरान्समुत्साप 4519" वां शुरवा माधवी एक्ष्मी 1006 तो समुद्रस्य महिषी 55 39 सां सूर्यसदनप्रया 97 34. तासया मुवतः सर्वान् । निच्छामि घेदितुम् 1 13 स्तु वा महाभागान 37. तांस्तु प्रबलतोश 13 28. स्तु येश्यगणातात 19 50 हानीनभीप्यतो राय 17. सोहटमनस स 42. 10 98 का कृष्णमनुवगिरे] लोकपादसूची [तुष्टगोपजनाकीणी ता कृष्णमनुवनिरे 63 30% ता कृष्ण पर्यवारयन् 92280 हा क्षरन्ति नव शीर 59 19 ता त्रिय पूजयामास 94 24 तितिक्षुरभवदाजा 23 260 तितिक्षु च महाबलम् 23 200 तितिक्षोस्तु प्रजा ,शृणु 23 250 तिथौ नवम्यां पूजा च 47 51° तिमिना सह विग्रह 83 12 तिमिरनस्त्वमृक्षरा 3850 तिमिरं समपचत 103 21 तिमिरातमाकाश 61_g तिमिरूपेण त बाल 79 14 तिमिरोद्गारिकिरण 33 10 तिमिरौघपरिक्षिप्तम् 40° तिमिरोधपरिक्षिप्ता 32 18° तिमिरीय विदारयन् 40 42 तिरो वर्पन्तमव्ययम् 55 21" तिर्यगायतरताक्ष 36 520 तिर्यगूर्व च गगने 37 400 तिर्यगतमुदूसरम् 61 17 तियंग्यौनिगसेवपि 563 तिर्यग्योनिषु ते जातु 19 310 तिष्ठ तिष्ठन मे जीवन् 110 58* तितिष्ठनमेऽधत्वं 112 590 तिष्ठतिष्ठेति च तदा 108 380 तिष्ठतीव ममाप्रत 65 330 तिष्ठते देववन्द्रीमान् 31 108* तिष्ठरिवति समाज्ञाप्प 74 172 तिष्ठध्वममयो यूयम् 110 28° विष्ठम्वमिति चुकोश 108 27° तिष्ठन्तमपराजितम् 92 25 तिटकारायणस्याशे 446 तिरस्वेद महाबाहो 29 18 तिष्ठेया देवचोदित 21 22 तिदानीं न मेऽद्य 112 93° तिष्ठेदानी स्थिरो भय 13 24 तिप्यं प्रपत्स्यते पश्चात् 43 89° तिप्ये स्कने शतक्रतो 61 621 तिश भागश कक्ष्या 74 20% तिस कन्या मेनायां 13 150 तितो योगलाविता 13 200 तिम्रो वै यशसान्विता 23 14 तीक्ष्णदष्ट्रायुधेन वै 67 304 तीक्ष्णयन्त्रशतनीमि 93 25° बीक्षारहिमशिरेश्यन् 5980 तीक्ष्णशुकै समंदन्त 87 37 तीक्ष्णशृङ्गोऽर्कलोचन 64 वीरगोदत्तकेशान्ता 83 370 वीरपायताननाम् 55 33* वीरे गृह्य महानदीम् 83 32 तीरे त्रिपवणातिथि 100 32* तीरेष्वपि दुरासदम् 55 45 तीर्ग शफ्रेश मायया 118 30° तीर्थगौ पक्षदिग्धाझी 71 30° तीन रोपमय विपम् 34 32 तुण्डागनखविक्षतान् 11064 तुण्डेनाम्यहमत्तदा 112 784 तुतोप जनमेजय 8 40 तमुरास्तुम्बुरास्तथा 5 19 तुमुल दुर्दिन पासीत् 100 17 तुमुल भोजकृष्णयो 29 10 तुमुल सर्वतोऽभवत् 81 920 तुमुलो विग्रहसदा 351 तुम्यवीणा च तरह 55280 तुरगाणा महावल 6721 तुरगा वाजिना धरा 23 1321 तुरगैश्च जवोपेते 81 2300 तुयो समभवद्वीर 98 23° तुर्वसु मतिमानुष 22 16 तुर्वसोश्च द्विजोत्तम 23 11 तुर्यसोच परतप 23 30 सुर्वसोस्तु प्रवक्ष्यामि 23 122° तुर्यसोस्तु सुतो चति 23 1230 तुलायित्वा च समितम् 61 52% तुल्यकाल हि गर्भिण्यौ 48 13. तुल्यकालो नराधिप 15 10° तुल्यनिर्यातनिस्वन 110 57 तुल्यमापद्यते नम 54 100 तुझ्यशीलेषु सर्यत 117 19 तुल्यसहनन प्रभुम् 70 तुल्येष्वभ्यधिक बेद 828° तुल्योऽसि देवताण 112 113 तुपिता नाम तेन्योन्यम् 3 46° तुषिताव भारत 20 350 तुष्टगोपननाकीण 60 16. - 99- सुष्टा सपर्णभोजना ] चिकित्सितपाठात्मपस्य हरिवंशस्य [ तेजोभिरवरोइन तुष्टा सपूणभोजना 60 196 खgयुनिइते दैत्ये 58 55 तुष्टुयुब्रह्मण पुत्रा 20 11 सुष्टुयुर्मधुसूदनम् 38 3rd तुष्टुयुश्च गदाधरम् 34 47' तुष्टुयुश्च जनार्दनम् 79 28 तूणमभ्युत्पपात ह 64 161 तूर्णमासीन्मदास्वन 109 12 तूर्णं चापि ययौ बिरम् 28 26' तूर्यघोपाश्च सर्वश 75 370 तूर्यप्रणादघोपैश्च 60 14 तूणीभूतेषु सर्वेषु 109 19° तृणजातीश्च सर्वश 392 तृण तत्र व्यवर्धत 53 330 तृणानि तरुभि सह 61 190 तृणानि शतपनाक्ष 54 27 तृणान्येव चचार सा 8 154 तृणप्यपि पतत्स्वनौ 55 450 तृण पुष्टा सपुगा 59 104 तृतीय द्वापर युगम् 43 581 तृतीय वतते रिवद 51 320 तृतीया तव पूर्वेषां 23 103° तृतीयामेकपादलाम् 23 100 तृतीये तु मुहूर्त सा 107 86" तृप्तान्येतानि ते गुण 77 57" तृति यान्ति महामृध 38 434 तृप्तिं यान्तु यथासुखम् 38714 तृप्तोऽमृतसुतर्पित 62 66 तृषिता गोपकन्यका 63 32* तृपितान्याहवे भोक्तु 81 57° ते कथ भगवनवा 115239 ते कालयवन चैव 84 130 से कृताञ्जलय सर्वे 32200 ते कृष्णस्य वच श्रुत्वा 103 Is ने कृष्ण सर्पपतय 56 13° ते बुद्धा शरवर्षेण 87 60% ते गता रत्नपर्षतम् 426 ते गरवा दूरमध्यान 88 6° ते गदाचनिदग्धा 38 530 ते गदापरिधरौ 33 284 ते गदाभिश्व गुर्वाभि 3790 ते गिरिजवदय 110 21' ते ग्राम्यधर्मनिरता 18 20° ते च गोपा समागम्य 69 20 ते घरा सर्यत सर्वे 109584 तेच विंशतिसाहस्रा 92 120 ते च सर्वे महपय 3563 ते च सर्वे यथावेश्म 66 40% ते चापि विजिता रणे 90 64 ते चाप्यभ्यवदत्प्रेम्णा 92 b8" ते चासा रक्षिणो वृद्धा 92 290 ते चैवेति निबोधत 12 31* तेज भाप्याययिष्यति 9 591 तेजसा कश्यपोपम 45 34' तेजसा च बलेन च 4120* तेजसा चास्य यादव 68 290 तेजसा ज्वरनाकार 46 4 तेजसा तेन सयुक्त 112 96° तेजसात्मसमान्भुवि 43 120 तेजसा दीसमध्ययम् 624 तेजसा नियमेन च 8 36d तेजसा निहन्निव 2 22 तेजसाप्यायितस्तदा 9 69 तेजसाप्यायित सदा 21 30% तेजसा प्रज्वलन्त्युत 20 15 तेजसा प्रतिबुध्यत 1049 तेजसा भास्करोपम 31 1114 तेजसाभ्याहृत तेज 115 39° तेजसा भ्रष्टतेजस 35 21 तेजसाल्पेन शक्यते 9 60% तेजसा वपुषा चैव 32 21 तेजसा सहतेन वै 8 350 तेजसा स्वेन ते विष्णु 9 59* तेजसो धर्धन तदा 21 34* तेजस्तस्य च भूपते 85 450 तेजस्तेजस्विनश्चैव 62 36° तेजस्तेजस्विनामपि 30 361 तेजस्वभ्यधिक सात 850 तेजस्येवावतिष्ठते 115 39 तेजस्वी दानशीलश्च 21 1 तेज सक्षिप्य तिष्ठत 1 320 तेज सभृत्य दुर्धर्षे 3 104 तेज सोमस्य भास्वत 2018 ते जातवेदस सर्वे 11024 ते जाता श्रोत्रियकुले 18 35 तेजोभिरवरोहत 43 13 100 वेजोयुक्तास्तपस्विनः] श्लोकणदसूची [ तेनैव पपन्य तेजोयुक्तास्तपस्विनः 13. 45. तेजोराशिमनिर्जितम् 90.2. तेजोवीर्यस्लोपेतः 87. 16. ते तन रमणीयेषु 84. 234. ते सथेति महायाहुम् 86. 15. ते तदा म सुसंमूढाः 21. 356. ते तन्वानास्तनस्तत्र 32. 8. तेऽतप्यन्त महत्तपः 2. 33. ते समूचुर्दिनाः सर्वे 18. 29". ते तस्य सत्यसंधस्य 32. 33%. ते तामपश्यन्पतितां 50.24". ते तु गोग्रकरा राजन्,23. 11". ते तु ज्ञानप्रदातारः 12.30°. ते सु तद्वचनं श्रुत्वा 317". ते तु ग्रहर्षयः सर्वे 40 16. ते तु युक्त्या रथवरं 71.1. ते तु सर्वे समानार्थाः 47. 16". ते ते श्रेयो विधास्यन्ति 11. 38°. ते दह्यमाना और्वेण 35.21. तेऽदित्या दक्षकन्यया 3. 494. दे देवदानवाः प्रीता: 21. 17. ते देवाः पृथिवीतले 43. 70*. ते धर्मचारिणो निस्य 14.7* तेन कार्यस्त्वया सद 109. 44. सेन क्षीरण रक्षांसि 6. 320. तेन सल्वनयस्तृप्ति 100. 76. तेन खल्वसि देवानां 100 63*. तेन सल्वसि योनिस्त्वम् 100. 48. तेन खल्वसि लोकानां 100.50. तेन तद्विषयाश्रयः 67.12. तेन तस्मै वरं प्रादात् 10 19. तेन तात न कोमि 9.576. तेन ते च महाशैलाः 93. 68*. तेन तेन विधानेन 45. 12. तेन तेवयन्तीह 6 29. तेन ते समरे सर्वे 108 28. तेन चिदानी बहता 10. 11. तेन दक्षस्य पुत्रा वै 3. 10. तेन दुष्टप्रचारेण 67. II. तेन देहेन गिरिः 60.34. तेन द्वादश वर्षाणि 10. 100. तेन धर्मरयेनाथ 23. 35. तेन नटेपु घेदेषु 31.94. तेन नारायणः स्मृतः 1.244 तेन निःक्षत्रिया कृता 31. 104". तेन नो वर्णवरूप्यम् 10. 13. तेन पुत्रेषु पालेपु 23. 65. तेन प्रागानधारयन् 2. 26. तेन यालेन रहसा 51. 18. तेन ब्रह्मशिरो नाम 20. 330. तेन भावेन ते यझं 115. 28°. तेन मत्तेन नागेन 74.22. तेन म्लेच्छेन शत्रुणा 85. 46. तेन रत्नाकराः सर्वे 100.65*. तेन विनासिता देवाः 37. 46°. तेन धीरेण मोक्षितः 9. 1004. तेन वैरं त्वया साधं 109. 44. तेन शक्रः सहस्राक्षः 37. 47. तेन शब्देन विनम्ता: 50. 23°. तेन शब्देन संक्षुब्धं 56. 4. तेन शैला विवर्धिताः 69. तेन शैलाः प्रतिष्ठिता: 6. 364. तेन सप्तसु द्वीपेषु 23. 145". तेन सचोदिता मेघाः 59.6*. तेन संपादित सस्यं 59.8. तेन संयुग्यतां क्षिप्रं 93. B. तेन सवर्धिता गावः 59, 10°. तेन सौदासकर्मणा 67. 10. तेन बहेन भगरान् 20. 32". तेन स परितुधाव 83. 14 तेन हेइयराजस 31, 97. तेनाधर्मेण वै तदा 9, 95". सेनानन्त इति स्मृतः 58 43. तेनालेन प्रजास्तात 6. 15. तेनाश्चर्येण विस्मित: 60. 36". तेनासी मोक्षमास्थाय 22.2. तेनास्मि परितोपितः 62. 12. ते निषेदुर्यथोक्तेषु 42. 116 तेनेमाः श्रुतयो व्याहाः 40. 21'. तेनेयं गौमहाराज 2. 24. तेनेयं दूपिता सर्वा 55. 50. तेनेयं पृथिवी कृत्वा 23. 144. तेनैव गजदन्तेन 74. अ. तेनैव प्राहरत्तदा 74. 33. तेनैव प्राहरद्वक्त्रे 64.20%. तेनैव वर्तयन्त्युमाः 6. 24, -ol तेनोत्पदोऽपि दोषो न ] चिकित्सितपाठात्मक्स्य हरिवंशस्य [ तेषां दत्वामयं तदा . तेनोत्पन्नोऽपि दोषो न 106 66° तेऽन्योन्यमभिसपेतु 37260 तेन्योन्ययपुपा बद्धा 61 11 तेऽन्योन्य ददृशुभीमा 94 20° सेन्योन्य नावबुध्यन्त 35 14 तेऽन्योन्य भयपीडिता 108 47 तेऽन्योन्य लघुविक्रमा 58 204 ते पराजयसनता 1009 ते परावरहयार्था 41 120 ते पर्वत रैवतक 100 100 तेऽपि गोवृत्तय सर्वे 64 24 तेऽपि तेनैव मार्गेण 3 21" तेऽपि सर्वे भय यवरवा 378" तेऽपि स्वर्गजितो नरा 13 571 तेऽप्युझे तस्य वै भार्ये 45 330 ते प्रजानां शुभकरा 41 6* ते प्रदीतप्रदरणा 110 300 ते प्राप्य तां स्मृति भूय 13 10" ते बाणमुत्सृज्य रणे 108 50* ने मझचारिण सर्वे 16 330 ते भग्ना सहसा यान्ति 113 14 ते भवन्त पुरस्कृत्य 89 211 से भूय प्रणता सर्वे 12 236 तेभ्यस्ते प्रयतात्मान 12 25° तेभ्य पुष्टि प्रजाश्रय 12 380 सेग्यो ब्रह्मर्पिमुरयेभ्य 20 25° तेभ्योऽभवन्महात्मभ्य 32 8° तेऽमृतप्राशनोपमा 47 12 से युद्धरागा रथिन 81 780 से युध्यकृष्णसगता 110 3gd ते योगधर्मनिरता 1810 से योगनिरता सिद्धा 18 261 ते रक्तसूर्ये दिवसे 8431 ते स्थैर्विविधाकार 87 430 तेऽर्थमूचुस्ततश्च ताम् 13 350 ते वध्यमाना बरिभि 3584 ते वध्यमाना विमुखा 32120 ते वध्यमाना वीरेण 10 390 तेवनारयजीविन 59 263 ते घय सामपूर्व वै 15 49 ते वाय पितरोऽन्ये या 11 320 ते वाहयन्तस्वन्योन्य 58220 ते विध्यमाना रामेण 81 70% ते वीतभयसनासा 37 34 ते वृका पञ्चद्धाश 52 320 ते चै पुग्रा प्रजापले 131 ते वै सदीप्तमनस 37 140 ते वै दिसतया भूरा 16 15° ते शप्ता ब्रह्मणा मूढा 12 200 ते शुभा काचनम्तम्भ 89220 ते शूरसेनानाविश्य 80 17 ते श्रुत्वा पृथिवीवाक्य 43 1" तेपामथाभ्युपगमात् 13 640 तेषामन्यतरस्य 2 18 10° तेपामपि च ता प्रिया 77240 तेषामपि च राजेन्द्र 3 56° तेपामरतिनाशनम् 89 26° तेपामापतता सख्ये 113 14" तेपामासीत्कुरूद्वह 6 311 नेपामुत्पादनार्थाय 43 430 तेषामेव च ग्राद 108 400 तेपामेव प्रभावेन 41 13° तेपामेव महात्मनाम् 82 23° तेषामेव प्रवृद्धानां 3 110° तेपामेव भविष्यति 112 121 तेषामेवासि यस्रष्टा 200 630 तेपामरावतो दोग्धा 6230 तेपा कर्मावदातानि 1 100 तेपा कसस्तु पूर्वज 27 28° तेषा कुले महाराज 23 169 तेषा ख्यातानि गोग्राणि 23 88° तेषाच बरिना बलै 41226 तेषा च बुद्धिसमाहम् 21 34° तेषा चरितमुत्तमम् 19 31 तेषा च ब्रजवासिनाम् 56 28" तेपा च सुरुचिस्वासीत् 6 34° तेपा चित्रा कथास्तत्र 100 160 तेपा जनपदा पञ्च 23 320 तेपानपदा स्फीता: 23 1296 तेपा जात्यन्तरेऽभवत् 16 161 तेषा ज्येष्ठस्तु रापासीत् 114 4" तेषा ज्वलितकीर्तीनाम् 41 17 तेषा पर विहेगानां 1634 तेपा तु तपसा तेन 16 31° तेपातु दिवि दैत्याना 36 200 तेषा दत्वामय तदा 10400 =102- तेपा देवा भविष्यथ ] श्लोकपादसूची [तोयगम्भीरसम्बेपु तेषा देवा भविष्यथ 12 30' तेषां देवामुरोपमम् B1 52 8773 तेपा धर्माभिमानाना 117 430 तेपा नामानि मे शृणु 23 860 तेषां नामानि रोकाश्च 136 तेषा नारायण तेज 10 636 तेपा नास्त्यनयागम 62571 तेषां पथि क्षुधााना 167° तेषा पायविशेषाश्च 4 210 तेपा पितृप्रसादेन 146 तेपा पुत्राश्च पानाच 3 796, 94° 114 16 तेषा पुरुपदेवानाम् 45 10° तेपा पूर्व विसृष्टिं च 1 1307 !" तेषां प्रत्यक्षदर्शियान् 1 126 तेषां प्रधाना सतत 387" तेषा प्रसाद चकुस्ते 1770 तेपा प्रियाथै च रणे 109 48° तेपा प्रीतोऽभवझा 47 14 तेषा मतमथाज्ञाय 537" तेपा मध्यममानुप 58 14 तेषां मध्ये व्यवस्थित 108 24 तेपा मरु साधयता 16 26° तेपो यन्तु मन स्मृतम् 30 500 तेपा ययाति पञ्चाना 223° तेपायवीयान्पृपत 23 1020 तेपा युद्ध समभवत् 81 101 तेषा युधि जनार्दन 88 16 तेषा येते महाराज 9 34 तेषां रथाना तुमुल 37 31" तेषा लोक विसर्ग च 138* तेया वक्ष्यामि वितरम् 3 31" तेषां वधार्थमामेय 110 420 तेषा वशकरो राजा 15 20% तेपा वशस्विधा भूत 24 20 तेषां विकुक्षियेष्ठस्तु 9 39 तेषा विमर्द दायाये 43 84° तेपा विसर्गाश्चत्वार 27 2 तेषां वै मानसी कन्या 13 52", 60", 63* तेषा शृणु गति विष्णो 44 20° तेपा सकञ्जुकोष्णीपा 81 30% तेपास गायतामेव 5526* तेपा सह महायशा 133° तेषां सविदयोरपना 18 26* तेपा सुतुमुल शब्द 81 29 तेपु काननसधिषु 93690 तेषु ते नास्ति कारणम् 35 29. तेषु तेषु च पापु 2 260 तेषु तेववकाशेषु 81 370 तेपु प्रभवमानेषु 117 19 तेषु वेश्मसु युक्त' 86 18° तेषु सर्वेषु दैत्येषु 3850 ते सर्वे गोपपतय 69 30% ते सव चारश्रूणि 69 22 ते सर्व याणवपेंश्च 108 22° ते सर्वे बाहुभिर्यासा 38 5. ते सर्वे शुभकर्माण 18 250 ते सर्वे सहसा देहान् 11320 ते सर्वे साधुलोचना 56 19% तेऽसूजातमन्यव 2 360 ते सृष्टा प्राणिनामोधा 4014 तेऽस्त्रजालै प्रमथिता 35g. ते स्म कालवश प्राप्य 42 49 तेस नानारताचित्र 84 214 ते इन्यमाना रौदेण 108 359 ते ये काञ्चनापीडै 81 750 ते हृष्टमनस सर्वे 21 190 तैत्तिरिस्तनयोऽभवत् 27 17" तैराप्तकारिभिनित्य 55 520 तैरिय पृथिवी तात 7 470 तैरिय पृथिवी सर्वा 4 15022 18° तैरता सा तु मा भैषी 13 30° तैरेव च महायुद्धे 108 40 तैरेव तत्कर्मफल 13 32 वैरेव मुपिनेसात 16 200 तैदाशाईमहाभागै 93 3500 तैहन्यमान दैत्यानाम् 110 530 तैस्तैरुत्पातदर्शनै 106530 तैत्रिभि सह यादवै 110310 ते स्तूयमानो गोविन्द 9421. तोत्रादित इव द्विप 108 191 तोमराकुशपटिसै 33 29 तोमरेण विभेदाङ्ग 87 67° तोमरेणासदेशे व 8786 तोमर पट्टिसस्तथा 108 69" तोमरै स परश्वधै 33 124 तोयगम्भीरलम्भेयु 54 160 103- [अयः परमधामकाः ग्रयः परमधार्मिकाः 9 15.23.43%, 133.2691 वोपदानामयाप्रवीत् ] चिकित्सितपाठात्मफस्य हरिवंशस्य खोयदानामथानवीन 61. ". तौ दैत्यो युद्धदुर्मदी 42. 27'. तोयदाम्यामिवाम्बरम् 34. 44. तो पाशशुक्लांशुधरी 36, 14. सोयदाविद्धवसना 37. 17. तो पाशहिमयोधिनी 36 16. तोयदाः शशिनं यथा 67 17. तो प्रजहतुरन्योन्यं 82 16. वोयधर्मश्च रङ्गजः 75 190 तो यालको ललितको 51. 11'. सोयपैः श्वापदेस्त्यक्तं 55 41'. तो मायामपकर्षताम् 36 32. तोयप्रदानमाण 78 28. तौ यथा निपीदतुः 57. 26. वोयमभ्यारसमुद्धता 42. 344. तो युद्धकुशलावुभौ 65. 871 तोयमुत्तारयन्तीभिः 53 28". तौ रामयन्तावन्योन्यं 54 42°. तोययोनिनिशाकरः 35744. तो विवेश स्वयं वायुः 42. 16*. तोयलम्प इवाम्बुदः 58 28'. सौ व्यायाममकुर्वताम् 58. 100. तोयवातोद्धतर्ग:55. 29". तो ध्युपारमतां चैव 82, 22. तोयव्यावृत्तगामिनीम् 83 44. तो शरैः साधुनिशितैः 44. 48". तोयं च मम आयते 83 42. तौ समहरणौ वीरौ 81. 65. तोयं मुमुचुरक्षयम् 61. 490. तो समीपगतो मला 72 15. तोयानि चाभिषेकायं 5 25. त्यक्तवान्दिजसत्तम 85. 31, तोयार्थ कूलमाश्रिताः 117. 35. स्यतच्या तात गमने 71.30. सोये घरसि नि.शङ्कः 10036. त्यक्त्वा कामांस्तपस्तेपे 18 9. तोरणZलनप्रख्या 94 9. त्यक्त्वा प्राणानरिंदम 15. 604. तोलयामास वीर्यवान् 71 41. त्यपत्या प्राणानवर्तत 81.95. तोलयित्वा यथाकामं 71 42". त्यक्त्वा मेघमयं वास: 59.47 तोषयामास कश्यपम् 39. त्यस्त्वा सहचरीधर्म 16 28. तोपयिष्याम्यहं जगत् 7521. त्यरवा सा वाससी पुनः 112 98. तोपिता वसुधा जलैः 54 84. त्यक्त्येमा सागरी तनुम् 43 38": तो क्षीणशखौ विरथी 82 g". स्वक्ष्यन्ति भुवि जीवितम् 61.64 तौ च कृत्वा मनसि मां 47 49. स्पक्ष्याम्यहं प्रियाप्राणान् 107. 60. तौ च श्रुतिधरौ वीरौ 795. त्यज कोपं युधा वर 113 31, सौ चामरधरावुभौ 70 23 त्यज गर्भकृतां चिन्वा 48. 40*, तो चोपविधावभितः 1159". त्यजन्ति विहगा नगान् 66. 300. तो जातहासावन्योन्यं 71 34. त्यज्यतां निर्गुणं वनम् 52. 28. सौ जितारी जितक्रोधौ 76 480. त्याजितो धनदक्रियाम् 37. 49. तौण्डिोरा इति ख्याताः 23 160*. प्रय एते गणाः प्रोकाः 13 61. तो ततः शरनिशि. 112. B49. श्रय एते मया प्रोक्ताः 13. 50%. तो तय परिधावतां 81. 8. अय एव महारथाः 23 15, 111 तो तालपर्णप्रतते 57.40 जय एपराममूर्तपः 134. तौ तु पूर्वमतिक्रम्य 96 9. यस्तु परिमोहिता. 18. 141 तौ तु भाण्डीरमुचिते 58 gi. प्रयस्ते सहचारिणः 17 6. तौ तु मल्लौ महावीयों 72 14. अयस्त्रय इवाग्नयः 112.11,34. तो तु मागंगतं दृष्ट्वा 717". अयस्खयाणां लोकानां 110.18% तो तु वृन्दावने प्राप्ती 54 11. ग्रयस्विभिरनुत्तमः 112 3 तौ तु स्वभवनं वीरौ 71 24. त्रयस्त्रिंशत्तु कामजाः 3.50*. तो दिवं छादयन्तौ तौ 42 16. अयं स्यादभिसजितम् 35.421 तो दैत्या कृतनामानौ 42. 19. 104- अपूर्व हृता येच श्लोकपादसूची [विविध भुवि विद्यते व्रय पूर्व हृता ये च 103 27 भ्रयोदश महायरा 3760 प्रयोऽपायानयो गुणा 30 280 प्रयोऽमिसधिता लोका 1065° प्रयो ये परमा गणा 136 प्रयो स्थगता जग्मु 707 प्रयो वर्णाध लोकास्त्रीन् 38 72° प्रयो वर्णानयो लोका 30280 नयो हृताश्चतुर्थ ख 101 11° असदस्युर्महीपति 9 86 प्रसदस्योर्जनन्यपि 13 63 प्रसरेणुप्रमाणानि 13 28° प्रस्तमीनविद्दगमा 83 360 यस्तसमूढवाहनम् 81 534 अस्तं शापानिलेरितम् 43 364 नातव्या प्रथम गाव 4530% धात स पुरपव्याघ 5240 प्रातार मनसा जग्मु 3212° नातार शरणार्थिनाम् 65 164 ग्राताखायन्ति ता द्वितान् 45 30° पातुकाम समभ्ययात् 11066 पायावमित्युवाचार्ता 13 23° जायस्व नोऽद्य देवेश 31 60° ग्रासन यादव कृतम् 85 32 ग्रासन परसैन्याना 67 210 ग्रामन सर्वभूताना 44 33° प्रासन मुरसघाना 915°,55° श्रासयद्भिश्च गोबजान् 52 34 प्रासयन्द्रिश्च दान 97 220 प्राप्तयन्त्रकैशिकान् 89 451 प्रासयन्ति नभश्वरान् 81 58 त्रासयन्तो द्रुमच्छिद 59 25t प्रासयन्यहुधा बली 108 34 ग्रासयन्समदो गोहान् 64 1 प्रासयन्सर्मदेवता 36 58 प्रासयान स दुर्मति 57 130 त्रासयामास दुष्टारमा 64 100 ग्रामयामास पार्थिवान् 89441 पास विसृज्य चैरस्था 108 30° प्रासादयेत्य जज्ञिवान् 23 83* ग्रासित जलदरण 54 8° प्रासिता स्पर्धिनो युधि 98 ग्रासोद्वगेन सविना 16 22 प्रास्यन्ते सप्रजा गाय 61 28° ग्रास्यमानो गजेन वै 74 24 ग्राहि दीन जन स 7758 नाहीनि धदनीने 61 24 विगानामथेश्वर 80 140 नितरगवलीधराम् 55 33 निदशाना चकार स 31 118 निशाना च वर्धकि 3 40% विदशाना र शाश्वत 109 86' त्रिदशाना धुरधर 68 278 निदशाना वय मान्या 83 10" निदशाभिमुख कृष्ण 86 21° निदिवद्वारचित्रण 34 21° त्रिदिवस्य गतिश्च स 46 18 त्रिदिव व गमिष्यसि 47 45d त्रिदिवारोहिभिाले 35 52° त्रिदिवे ऽयम्बकेऽपि वा 67 534 त्रिधन्वा नाम पार्थिव 9 87° निधा दीप्यतु पावक 38723 त्रिनल्यान्तरमव्ययम् 33 2' निनेत्री गणसवृत 112 129 त्रिपादरिग्रहे धर्मे 36 43 त्रिपुरस्य विहायसि 61 440 त्रिपुरान्तकर बाण 112 29° त्रिभिरून तु रक्षसा9736 त्रिभिर्विव्याध ससक्त 81 82° त्रिभितस्यैर विक्रान्तै 45 48° त्रिभित्रिभिश्च नाराचै 81 84° त्रिभिखीस्त्रिदशेप्सया 30% निमि क्षुब्धोलि कारणे 43 390 त्रियज्ञशतयज्वान 118 24° त्रियज्ञशतयाजिन 118 29, 29, 21 विरान चैव सदोद 60 12 ग्रिलोकपतयो यथा 707 त्रिलोकविजयी नृप 9 830 त्रिवर्गप्रभवात्रय 30 त्रिस्य प्रवर्तका 651 निवर्णपरिचारिभि 6 48 निवर्ण परिघो भानो 10047* निवणन त्रिविक्रम 54 300 निविक्रमे विक्रमन्त 3657° विविधस्ते व्यनिक्रम 10 174 विविध भुवि विद्यते 41 11 हरि पादसूची-14 - 105 प्रिविष्टपसमे देशे] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [बद्धतेन नगेन ह निविष्टपसमे देशे 92 250 विविष्टपादापतित 4620 निशङ्कुरिति होगच 10 18 विशङ्करतेन स स्मृत 10 18 जिशष्यगस्त्यचरिताम् 62 4g निशानुरपराजित 23 1234 विशिख शूलमुयम्य 47 400 निशिखा भृकुटी कृत्वा 108 96° निशीविव पसगी 5234 त्रिशूल तस्य तद्दीप्त 110 30* विपु पिण्डेपु नित्यदा 11 11 त्रियु रोकेषु दुर्लभम् ।। 250 त्रिपुरोकपु भामिनी 8 11 त्रिषु लोकेषु विश्रुतम् 93 bod निपु लोकेषु विश्रुता 21 111 ग्रिषु लोकेषु शोभने 9 120 त्रिषु लोकेषु सुन्दरी 13 190 निशता प्रत्यविध्यत्त 87 64 त्रिंशदिशनिबद्धाश्च 52 390 नि सप्तकृत्व पृथिवी 31 10 त्रि सप्तकृत्योऽतियशा 2014 श्रीणि दिव्यानि भारत 2 10% जीणि वर्षसहस्राणि 2030 प्रीणि वर्षाणि विपये 24 ° वीण्यपत्यानि कौरव्य 86 त्रीण्यपश्यद्विमानानि 13 286 नीन्दधार चचार च 34371 श्रीपिण्डानामगोन्नत 12 39* श्रील्लोकानिात न श्रुतम् 20 25* नीलोकान्कश्यपात्मज 8bf बील्लोकान्धारयन्तीमान 12 14° प्रील्लोकानात्र समय 21 161 जोलीकामावयामास 2020° जोललोकाश्च जहारष 38 20 जता चैत्र युगातमम् 40 350 जतायुगे समुत्पत्र 85 59 त्रैकाल्य त्रीणि आणि 30 28° Jलाक्यचारिणो सा स्व 47 50° त्रैलोक्यज्ञापिका वाचम् 86 25° त्रैलोक्यमप्युत्सहते 61 55 भैरोक्यमातर सर्वा 38750 प्रैलोक्यमिदमव्ययम् 30 12 लोक्यरायण क्रूर 31 1230 त्रैलोक्यस्य हितार्थाय 4520 लोक्य प्रतिगृह्यताम् 32 320 त्रैलोक्य वशमानीय 31 56* त्रैलोक्य सचराचरम् 115 310 रोरशान्तिभूताभ्या 68 95° लोक्यान्तरचारिणा 58 500 रोक्यानगरविस्तारि 36 50° त्रैलोक्ये जलता गते 42 250 प्रैलोक्ये मुक्तब धने 36 38 विद्य पावकावय 30 280 शङ्कच इति स्मृत 10 220 ध्यक्षपल्या समादिष्ट 107 776 ज्यम्बक्रश्च महायशा 31180 त्र्यम्बकश्च यथाच्यय 8624 व्यम्बकश्चापरानित 343° ग्यम्बकेन महामना 206 180 ध्यहमुन्मत्तश्ाद 15 59° स्वगो नाम प्रजापति 514 स्वच्छरीरगत कृष्ण 6221 स्पत्कथाद्वपिण सर्वे 44 760 स्वतस्त्वत्परायण 43 290 त्वरकते कृष्ण घोपोऽयं 60 4° स्वत्कृते भरर्यमानी तो 69 16* त्यत्तश्चैव सुदुर्धर्षात् 116 29° स्वत श्रुतवता भ्रष्ठ 106 1' त्वत्त सर्वमिद जात 100 61' स्वत्तो बिभ्यति सागरे 44 77' स्वत्ताऽम्यनुज्ञा संप्राप्य ! 26° त्वत्तोऽहमि महाद्युते II 29* त्वत्पुरोगाश्च गच्छन्तु 101 17 स्वत्प्रणीतोऽद्य गोपाना 60 10° विप्रभावान्न सशय 67 654 स्वरप्रलापेवकुशरा 69 120 त्वत्प्रवृत्तन बोन 69 11 त्वाप्रसादान सशय 35741 त्वत्प्रसूनमिद जगत् 112 108* स्वरप्रसूत फल भवेत् 39 28* स्वप्रियायन सशय 2133% स्वदढे काडित गतम् 77 16 स्वद्तो यो हि न सह 6634 स्वदर्शनपरायणाम् 69g विशनपरा नित्य 69 1" स्वतेन नगेन 630 106 स्वद्धता पुण्डरीकाक्ष] लोकपादसूची [स्वरते सलु कंसोऽय रहता पुण्डरीकाक्ष 45 43° स्वदशे वर्तमान स 62 71° स्वद्विधेनापि सिद्धन 13 736 स्वनिरुद्धेन भारत 89 16* स्वामय सर्वरोकाना 3630 स्वन्मयान्नन्ति मागिन् 44 76 रवन्मयास्त्वत्प्रचोदिता 44 18 त्वमपत्यं भविष्यसि 13 351 त्वमप्रतिमवीर्यश्च 36 3° त्वमस्य यज्ञपूतस्य 3926° स्वमादित्यपथादूर्य 366 स्वमाश्चर्यशरीरोऽसि 100 350 स्वमाश्चर्य जनार्दन 10081% स्यमिन्द्रो वै भविष्यसि 62 41d स्वमिमा शोककारिकाम् 48 40° त्यमिवाज्ञातवसतिं 54 23° स्वमेकोऽस्य मृधे हन्ता 38 58° त्वमेव च भविष्यसि 9 114 स्वमोधैर्दीततेजसे 112 60 त्वया गोविन्द मस्कृते 62781 स्वया च भरतश्रेष्ठ 1240 त्वया चैव गजेन्द्रण 7340 स्वया तरार्थदर्शिना 44 15 त्वया खभिहित ब्रह्मन् 115 120 त्वया रिवदमद पृष्ट 115 200 स्वया दायादवानस्मि 1191 स्वयाय कुलपासन 9 121 स्वया एस प्रनुश्य 115 35" त्वयानघ नमोऽस्तु ते 113 353 स्वया नान्येन श्रीधर 44 786 स्वया नियम्या सरें वै 45280 स्वया पौरजनस्यायें 77 29 त्वया प्रार्तिते गाधे 10356 स्वया प्रीतिमता गवाम् 62 111 स्वया धान्धवकाम्यया 65660 स्वया पात्ये वियोजिनाम् 69 120 स्वया भाग्यदर्शिना 62 861 स्वया मान्यच नित्यश 62 76 त्वया यत्नरतेति चै 75 स्वया यादवनन्दन 830 खया यादवपुमाणा 66 180 स्वया युद्धे पराजित 4466 स्वया रोकानिमाक्षित्वा 6282* स्वयारहसिता राजन् 196° त्वया विधाने विहिते 110 18" त्वया वि जो निराहता 4475 स्वया सनाथा देवासा 44 18. स्वया सागरमक्षोभ्य 77 28° त्वया साध्विति भापित 66 10° रथया सृष्ट जगदिद 113 330 त्वया स्या पूर्वमेव दि 21 320 रपया स्वर्गप्रतिच्छन्दै 77 18* त्वया हि नित्य रक्ष्य स 62 80* त्वया हि मदधोपाय 65 81" त्वया हीनाविहासितुम् 70 15 स्वया झनुगृहीत स 6271° त्वयि कामवशा सर्वा 77 18° त्वयि कार्यान्तरगते 67 60° त्वयि चासुरसूदने 413 खयि जाग्रति केशव 4470d त्वयि देवकिनन्दन 96 स्वयि न भविष्यन्ति 11331° स्वयि न महरिष्यति 56 391 स्वयि माथे निपातिते 77 320 त्वयि पञ्चत्वमापने 77" स्वयि मानुष्यमापने 62 17° स्वयि योद्ध गने विष्णो 39 स्वयि राजासनस्थे हि 67 65° त्वयि लोकान्तर गते 77 101 स्वयि वीरवतप्रिये 770 स्वयेद दवाासनम् 43 420 लयेह माने मह्य 8 10° स्वय बहुलीतम् 113 354 त्वर विनिपातित 915% खयैव स्थापित पूर्वम् 103 5° त्वयैवाराध्यमानास्ते 11 39* स्वयोक्त रोमहर्षणे 15 सयोक्त शाधिन्धनि 31 1 स्वयोतानि द्विजातम ! 10° त्वयोती मत्तकाशिनि 73 29 त्वय्यध शस्टे सुप्त 50 10° वग्यावेय जयानयो 109 त्यय्येव केवल युन 67 53" स्वय्येव पर्वतस्तम्भा 58 44" स्वरता चा कर्तव्य 43 420 स्वरते सलु फसोऽय 14254. 107 श्वरते खलु कार्यार्थ ] चिकित्सितपाठात्मास्य हरिवंशस्य [ दक्षिणाभि सहेत्येवं स्वरते खलु कार्यार्थ 81. स्वरयन्तोऽभिधावन्तु 81 46° त्वरित मुक्तकेश्यश्च 71 14° स्वरिता कामिनी प्राह 1089 त्वरिता पृष्ठत कृत्वा 70 6° स्वयमाणा महेन्द्रेण 61 49" स्वरोप्य च दारुकम् 102 22 स्वष्टा तु त यथान्यायम् 8 30% स्वष्टा तु तेजसा तेन 8 450 त्वष्टा त्वष्टादशहय 3318 स्वष्टा पूषा तथैव च 360 स्वष्टा रुद्रश्च वीर्यवान् 3 4 त्वष्टा वासवचोदित 93 384 स्वष्टुर्दुहितर भौम 91. चष्टुश्चैवात्मज श्रीमान् 3 420 त्वष्टु समीपमगमत् 8 13° त्वमेको ज्वरो भुवि 18° स्व कान्ति कान्तवपुपा 36 gh स्वक्षिप्रमपनीयसे 77 124 स्व गच्छ भारते वशे 43 38" त्व गच्छ विनयाय 2 45 46' त्व गतिस्त्व रतिश्चैव 6030 त्व गति परमा नृणाम् 47 b36 त्व गवामिन्द्रता गत 62 430 त्व चक्षुरवं परायण 4483% स्वच गच्छ महाणवम् 56 38° स्वं च पातो भविष्यसि 8 271 त्व घ स्थापयितेति ६ 23 30% व चापि वितस्ताभ्या 60 21 त्व चापि स्वजनद्वेषी 66 320 स्वचाशीचगत प्रभो 15486 स्व चैव सुहृदा सुहृत् 6030 स्व जात्या वृष्णिनन्दन 99 ind स्व तु कर्कशशीर श्च 65720 स्वतु नस्त्यज्य गरछसि 17 II स्वतु शक्रसम पुत्र 69 150 त्व दवि भन देवकीम् 47 370 स्व नो वृत्ति विधत्स्चेति 5 41 स्व पूरो यदि मन्यसे 22 324 त्व बाणाप्रतिम महत् 106 360 त्व भारते कार्यगुरु 44834 त्व मया विनियोजित 4345d त्व मुखेन विराजिता 47 420 स्व विप्र जनयिष्यसि 13 360 त्व वेत्ता त्व परायणम् 6033 त्वं सिद्धि श्रीधृति कीर्ति 47 54° त्व सोम सोमवृत्तिनाम् 36 * त्व हि चक्षुष्मता चक्षु 44 16° स्व हि तस्य वधायक 9594 त्वहिन परमा गति 45261 स्व हि न परमो गुरु' 31 600 स्व हि न परमो देव 31 60° स्व हि न परमो धाता 3160* स्वं हि न सा गतिश्चिता 77 144 श्व हि लोकस्य चेश्वर 432 त्व हि शेष सनातन 58 47' स्व हि सूक्ष्मो महानेक 58 43° त्वामृते न च रस्यते 62 124 त्वाष्ट्री देवी विवस्वत 8 11 त्वा च सत्यमय ज्ञात्वा 62830 स्वा चातिमकर्माण 67 64° त्वा निदत्याद्य बाणेन 64. स्वा पतिं सुपति प्राप्य 77 53° त्वा बालमनुशोचती 99 20° स्वा मत्वा मानुपं प्रभो 56 28" द दक्ष एवं प्रजापति 360 दक्षशापभयान्मुनि 38 दक्षश्वोक्तस्त्वयानघ 2 B1 दक्षस्तु परमेछिना 3 120 दक्षस्य च महात्मन 2500 दक्षस्य पुत्रा हर्यश्वा 3150 दक्षस्य चै दुहितरि 3 8. दक्षस्यते हि दौहिया 7 40* दक्ष प्राचेतस पुन 3 18 दक्ष प्राचेतसो ददौ 3 30* दक्षिणस्या तथा दिशि 9 41 दक्षिणस्यां महात्मान 4 120 दक्षिणस्या रतावेष्ट 93 15* दक्षिण नगरद्वार 81 47° दक्षिण पक्षमासेदु 81 sr" दक्षिण पार्श्वमास्थिता: 1108' दक्षिणापथगामिनी 18 630 दक्षिणापथवासिन 884 दक्षिणाभि सहेत्यहम् 100 23d दक्षिणाभि सहेत्येव 100 269,894,832 - 108 - दक्षिणामदरसोम ] ग्लोक्पादसुची [ ददृशुस्तां प्रियां मध्ये दक्षिणामददरसोम 20 250 दक्षिणार्थ हि सा दत्ता 23 1200 दक्षिणाश्चापि वर्तन्ता 38 73° दक्षिणाहृदयो योगी 31270 दक्षिणा दिशमास्थाय 106 46" दक्षिणा भृगुनन्दन 31 106° दक्षिणेन कराग्रेण 96 16 दक्षिणेन च पक्षेण 112799 दक्षिणेन चपुग्मता 36 556 दक्षो जज्ञे महातेजा 2 450 दक्षो नाम प्रजापति 2 424 दग्ध कृष्ण इति ब्रुवन् 112 450 दग्धाञ्जनगिरिप्रभम् 58 25% दुग्धाद्विसदृशे व्योनि 68 12° दग्घान्यादित्यरश्मिभि 763° दग्धा वाराणसी चैत्र 97 11 दग्धा सा पार्वती माया 36 33° दग्धा सर्व महाराज 10 490 दण्डसेनारमज शूर 15 27" दण्डसेनो महीपति 15 26 दण्डाश्वकपिलाची तु 978 दण्डी कमण्डलुधर 443 दत्तमाराधयामास 23139% दत्तवानविचारयन् ।। 100 दत्तशमुश्व शत्रुजित् 28 दत्तस्त्वयैर गोविन्द 91 590 दत्त नदनदीपते 103 34 दत्त स्वधा पुरोधाय 1366 दत्त पूर्वमभूस्किल 10 330 दत्त गुण तुटेन 22 13 दत्ताातदत्तो बरिनी 28 2 दत्तात्रेय इति ण्यात 31 93° दत्तात्रयेण धीमता 1971 दत्तोऽनियवनस्तथा 7 114 दत्तो वृत्तविनाशन 73 330 दत्तोऽस्साकमर्फित 7736 दत्या घोराननेकश 112794 दरवा चवरमव्यग्र 3 100% दवा जगाम शिसरं 928 दस्वाभय तु कृष्णो वै 67 18 ददशाक्षयं वित्त 976" दद कृष्णमब्र 70 320 ददर्श च महच्छत्र 925° ददर्श च महात्मानी 798 ददर्श तान्या सा मध्ये 51 26° ददर्श दर्शने राजा 19 11 ददर्श द्वारका धैर 107 87° ददर्श धनमक्षय्य 9220 ददर्श नरकास्यम् 92 10 ददर्श पृथिवीपतिम् 85 48 ददर्श पृथुरश्रोणी 92 240 ददर्श भवन यत्र 108 10 ददर्श भोगिना नाथ 70 220 ददर्श मधुसूदन 92 21, 23° 474 ददर्श मध्ये नारीणा 1082° ददर्श यदुनन्दनम् 107 71 ददर्श यमुना नदीम् 25 28 ददर्श योगमास्थाय 8 360 ददर्श विपुल देश 84 24° ददर्श विपुलरानि वै 83 ददर्श विपुलोदन 55 170 ददर्श विबुधाधिपम् 92 50 ददर्श स नृपात्मज 10 131 ददर्श हृदमुत्तमम् 55 40 ददर्शाथ पुरी कृष्ण 93 12 ददर्शादोहने गवाम् 68 16* ददर्शाद्भुतरूपिगौ 70 300 ददर्शान्तरमच्युत 3 1050 ददर्शायस्तनयन 76 23° ददर्शालयमात्मन 40 4 ददर्शन जुगोप च 87920 ददशुर्दशनस्तीशै 56 130 ददानि त्व प्रतीच्छस्व 11 250 ददानि वरमुत्तमम् 11 270 ददानीत्यप्रवीद्राजा 89 120 ददावाङ्गिरसे तारां 20 360 ददावासनमुत्तमम् 83 542 ददासि यदि नो वरम् 47 171 ददाह पायास्त तु85520 दगुर्न चैन समरे 82 270 दशातेऽय तौ वीरौ 57 3 दशाते महात्मानौ 82 10 92540 ददृशुर्दानवा सोम 34 26 ददृशुर्देवतास्तत्र 426° दहशुन हि त सर्वे 76 27 ददृशुस्तां प्रिया मध्ये 96 18. -(109 दशुम्ता विनिहता] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [दशधा भावन्दिश दहशुस्ता विनिहता 96 320 दहशुस्ते स्थित देव 32 28° दशु कृष्णमासीन 968 दद्दा पुरवासिन 7627d ददृश रणमूर्धनि 108 4 दो द्वारका चार 93 360 ददशे द्वारका पुरीम् 93 254,270 दशे यादवीं पुरीम् 92 694 दशे वासुदेवस्स 93 370 ददी जिया वसुमती 30 120 ददौ तस्मिन्महायज्ञे 31 107' ददौ त बामुदवस्य 9970 ददौ प्रापेतसो दक्ष 20 21° ददी प्रीत प्रजापति 109 85d ददौ विपु नित्यश 24 7t ददी शफाय वसुधा 31 91° ददी शिष्य तदात्मान 90 130 ददौ सत्राजिते त धै 28 30° ददौ स दश धर्माय 2 43 4" ददी स्तन च कृष्णाय 50221 ददी हरमना कृष्ण 29 396 दधार मन्दर विष्णु 65 420 दधार सहसा वपु 62 624 दधारायुधजातानि 34 38° दधारकेन हस्तेन B1 38 दधिमण्डादमृत्तिकम् 49 25° दधिवाहनपुत्रस्तु 23 330 दधिहदो घृतावर्त 60 180 दन्न सपिर्यया भवेत् 39 126 दमो दयुत्तरस्य च 6591 दनुवाविवर्धना 3 79 दन्तवनश्चकारूप 105 110 दन्तववरच वीर्यवान् 81 41" दन्तववरस्य तनय 87 3* दन्तरक्वस्व शभुना 82 21 दन्तपरण यायिना 87 261 दन्तरक्यो जरासध 87 49° वन्तयनो महाबल 24 206 दन्तानिदेशमानस्तु 67 28° दन्ताबमा सरम्भात् 89 44 दन्तान्विदर्शयन्हृष्ट 89 32° दन्ताभ्यामित्र मातही 82 16° दन्तिदन्तोद्यतायुधम् 754 दन्तोलसलिनस्तथा 35 350 दमघोषस्य पुत्रास्तु 87 20° दमघोपोऽपि चेदिराटू 87 190 दमयिष्यामि कारियम् 55 510 दमिते सर्पराजे तु 57 !" दमितो यमुनाहदे 69 193 दमितोऽह हतविप 56 33% दम्भो रजिरनाथ 21 11 दम्यतामेप वै क्षिम 56 270 दयाथै तस्य मेघास्तु 114 10% दयिता कसगोपते 47 33° दयितानकढुंदुभे 25 10 दरदश्च महाबल 80 14d दर्दुरव्याहतेन च 54 13 दसजननान्यावत् 112 930 दर्पस्य विनयस्य च 37 21 दाद्विगुणवर्चस 58 330 दन्वितो दर्परुचि 15 29° दर्शविलटानन 57 15 दर्पण विनयेन च 350 दोवृत्तश्च बलवान् 69 200 दर्भप्रायस्थलीभूत 5750 दाया सुनतोऽभवत् 23 230 दवाचोरा सवेरा 104 दर्शनादेव भारत 15 444 दर्शनीय च लोकेषु 81630 दर्शनीय सुदर्शनम् 38 390 दर्शनेन कृतार्था हि 92 34 दर्शयन्ती मुहुर्मुहु 41 190 दर्शयस्व यदीरसि 71391 दर्शयामास त घटम् 85 311 दर्शयामास त तदा 79 13* दर्शयामास भास्कर 8 40* दर्शयिष्यामि सानहरा 107 65* दशकोटिसहस्राणि 89 350 वश चाष्टौ च भारत 154 दश चाष्टौ च भूमिपा 100 g" दश चाप्टौ च समामान 82 27. दश देच्यो दधुम्तत 206 दशधर्मगतो राजा 10 14 दशधा तद्गत क्षत्र9 17° दाधा द्योतयदिश 20 दाधा भाग्यन्दिश 2074 -110 दशनल्व महारथम् ] लोकपादसूची [ दानवा युद्धवाविण दशनल्य महारथम् 108 bad दशनाम्या तुतोद 74316 दशनैर्मूलनिर्मुक्त 6731 दशनीष्टक्षणायुधः 33 23 दा पुग्रान्मनोरमान 7 160 दश पुत्रान्महारमान 23 13° दश पुना महात्मन 7 334 दश पुनरा महाबरा 11' दश पुत्रा महौजस 7 10% दश पुत्राश्च विश्रुता 7 296 दश प्राचीनयहिप 2 320 दश पद्धास्तथापरे 52 320 दशम्यस्तु प्रचेनोम्य 2 45° दशवर्षशतानि च 31 138* दशवर्पसहस्राणि 2 33%, 35° 31 33°, 138° दश वर्षाणि पञ्च च 216 दशान्ते शोपित्त वृद्ध 69 60 दशाणाधिपतिस्तथा 80 130 दशाईस्य सुतो व्योमा 26 220 दशाश्वमेधाजारूयान् 31 128° दस्युभिर्वा निरुद्धाना 47 53° दस्युमि शरभरिव 85 20% दइत्यर्को मुरा कान्त 777 दहन शोपणधैव 11024° दद्दन सर्वभूताना 35 61° दहमानो व्यराजन 112 50 दान्ते वारुणा सर्वे 113 270 दद्यमानमिवाम्बरम् 32 151 दामान दिधा रानी 697 दलमान समन्तत 113 186 दद्यमाना दिवौकस 35 20% दह्यमानाच वद्विना 112 200 दह्यमाने एक्शवे 112 710 दह्यमाने व दानवै 35 22 दह्यमानेन चेतसा 46314 दयामि सयंतस्तात 110 65* दशितानि दिशो दश 81 58d दष्ट्रया य समुदत्य 31 2906 दंष्ट्रामे परिवर्तते 1096 दंष्ट्रायुधयल हयम् 96 42 दवाष्पुनानन 36 50% दष्ट्रिणा मुखार्षिणाम् 53 4 दाक्षायण्यामरिंदम 81 दाक्षायग्यो महानता 2021 दाक्षिणात्या जिवासन्त 88 10° दाक्षिणात्या नराधिपा 89 250 दाक्षिणा याभिरक्षिताम् 97 30 दाक्षिणात्या महर्दय 89 10 दाक्षिणात्येश्वर जना 87 12 दाता यग्या च धीरश्च 2486 दातुमईसि मानद 77 190 दानमानगृहीतानि 77 576 दााव कारनेमिनम् 374 दानव दुश्वादिनम् 73 30% दानव देवसदन 35 170 दानव मल्लदेहिनम् 75 39 दानर कारचोदित 997 दानव प्रत्यदृश्यत 36471 दानव स विचेतन 112 116 दानव सुमहाबल 96 39 दानवा भतिदारणा 375 दानवा गिरिशृङ्गामा 108 49 दानवा जनयन्ति हि 9922 दानवा देवत साधं 352 दानवानामभावाय 40 290 दानवाना क्षयो भवेत् 44160 दानवानाच भारत 3 976 दानवाना च विष्णोश्च 38 80° दानवाना तु पिप्रीपु 37 14 दानवाना परंतप 91 500 दावाना पितामह 65 374 दानवाना पुरा रणे 108 486 दानवाना भयावदम् 38 16 107 850 दानवाना महात्मनाम् 106 494 11234 दानयाना महामृधे 32 304 दानवाना विनाशाय 38 3° 44 800 दानराना विमानेषु 36 360 दानवा निर्जिताम्तदा 108 Bot दानवान्तचिकीर्पया 8 450 दानवान्दिदि दानव 36 21' दानवान्देवनिहतान् 36 550 दानवान्पुरुषव्याघ्र 110 520 दानगन्युद्धदुर्मदान 108 21 दानवा भयपीडिता 112 10d दानवा यदुन दनम् 92 29 दाना युद्धकाविण 373 -111- दानवा विक्रमोपेता] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [दिक्षु सर्वासु देई दाना विनमोपेता 38 660 दानवाश्चापि समरे 38 300 दानवास्ते महायरा 374 दानवान प्रशान्त तु 112 13° दानवा इतशिष्टा ये 92g दानवाश्चाप्यनीवयत् 36 250 दानव। कृतिनो जग्मु 3780 दानवा पेतुरम्बरात् 91 496 दाना समभिद्धा 108 18° दानवा समरे जनु 3570 दानवा सुमदाबला 3700 दानवी काममोहिता 9981 दानवेन्द्र निहन्मि तम् 31 630 दानवेन्द्र प्रचोदित 109 78 दानवैर्जितकाशिभि 358 दानरका पुरीम् 92 17" दानवै सह संयुगे 108 39 दानवो दानयेश्वर 35 250 दानवोऽप्रतिमो युधि 67 204 दानवो मुष्टिकोन 96 43° दानवो युद्धदुर्मद 99 44 दानवो युधि दुर्जय 44 22% दानयो विष्णुमक्षोभ्य 38 5° दानवी दानवान्तक 44 74' दानवी नगवारिणी 47 49% 65 51d दानवी मधुकैटभी 31 186 दानसत्यसमन्विता 117 104 दान भेद तथैव च 15 496 दानोत्कटकटश्चण्ड 7320 दामनीदाममारैश्च 53 120 दामनीपाशपाशितै 5324 दामनीग्रायबहुल 49 940 दाम भिर्यम्यमानेपु 7000 दामभिश्च विभूषितम् 49 23 दामोदर इति ख्यात 96 34° दामोदरपरायणा 61 3° 63 29076 22 दामोदरमुखा स्थिता 61 244 दामोदरवच श्रुत्वा 57 10° 60 1 दामोदर च श्रीमन्त 67 46* दामोदरोहामरवा 54 290 दाना चैवोदरे यध्या 51 144 दाना चोलसरे यद्ध 96 34. दाना निबद्धमुदर 51 26° दाम्भिकास्ते भविष्यन्ति 117 9" दापाद शाश्वती समा 98 141 दायाद्यमिन्द्रादाजहु 21 27 दायाद्यमिव धार्यते 117 474 दारक क्षिप्रमेव तु 48 18 दारक जगृहे तदा 508 दारवेण सहानेन 50 280 दारको कृतनामको 51 दारको कृतनामानौ 50 20 दारको सुकुमारको 51 110 दारयन्तु पुरीमिमाम् 81 491 दारयोग विना स्रक्ष्ये 35 46° दारास्तु तस्य विषये 9 960 दारिका पुन जातेति 48 24 दारिका या स्वया रानौ 65 49" दारिकेय हतैवैषा 48 25° दारिदमनपात्य 18 28° दारू प्रत्यभापत 102 214 दारुक केशवस्य वै 86786 दारुण प्रतिभाति न 77 200 दारुण विरलद्रुमम् 52 134 दारुण स्वेन कर्मणा 3844 दारुणाभिनिवेदशेन 44 64 दारुणाल्लोमहर्षणान् 102 3 दारणेनान्तरात्मना 44 64* दारुणेऽपि पिता पुत्र 66 16" दारणो धेनुको नाम 57 120 दारुणो लोमहर्षण 8251 दार्यता चैव वौष 81 35° दावाग्निज्वरितप्रख्यै 93 340 दागाईगणमध्येऽद्य 10926" दाशाईगणसत्तमा 11351 दाशाहरणामधोक्षज 9511 दाशार्हाणा यशस्विनाम् 93 29 दाशाहन्यिदुसलमान् 95 14 दासा कि कुर्म किंकरा 60 231 दासीभिर्धनसचयै 9425 दास्यन्ति पितर सदा 12 384 दास्यन्ते च परस्परम् 116 24 दाहित च वन घोरं 105 16" दिक्पूर्वा भरतभ्रेष्ठ 9 16 दिक्षु स्याता नराधिप 28 330 दिक्षु सगसु देह स्व 3751. -112 | दिक्षु सर्वासु धार्मिका ] लोकपादसूची [दिव्यानीति हि 7 श्रुतम् . दिक्षु सर्वासु धार्मिका 9 35 दिक्षु सर्वासु भारत 7 34 दिक्षु सर्वासु शुद्धासु 36 39° दिशु सर्वासु सर्पत 6824 दिशु सर्वासु सहाद 92 44° दिक्षु सयानरतिपु 36 420 दिगन्तरो नमोभूत 30 31 दिग्धा क्षत्रियशोणिते 42 41' दिग्भ्यो गर्भ प्रभाम्वित 207' दिग्वासा कोटवी स्थिता 112 971 दितिर्विनष्टपुना 2 3 970 दिति शयनमाविशत् 3 100% दित्या पुत्रद्वय जज्ञे 368 दिक्षन्ती महतत्र 71380 दिदेशान्धकणिषु 97 436 दिधक्षन्तमिव प्रजा 35 47° दिधक्षन्तमिवायान्त 36620 दिधक्षयिय लोकानी 35 50° दिनसवत्सराम्तथा 30 260 दिलीपस्तस्य तनय 10 64°, 73° दिलीपस्य तु दायाद 1066° दिलीपस्य महात्मन 13 551 दिलीप यजमान ये 13 370 दिवमाचप्रमे प्रभु 31 1420 दियमावृत्य तिष्ठत 2 2 दिवश्युतस्य दैत्यस्य 44 78° दिवसः को विना प्यं 56 25* दिवसानेकविंशतिम् 28 200 दिवसान्ते दिवाकर 70 390 दिवसे दीप्तमारकरे 61 620 दिवसे ससमे याल 99 18° दिव च पृथिवीं चैव 1 37 दिव ज्योतिर्गणैरिव 82 14 दिवं प्रग्वाल्य तेजसा 125" दिय प्राप्त महीपती 21 200 दिवं मुश्मयापि च 1 26 दिगकरमरिंदम 9 10 दिया मत्तमजायत 6620 दिवि नाता महारमान 21 10° दिविजाताच भूमिजा 3766 दिवि तारेव सस्थिताम् 107 871 दिवि भाति सुदर्शना 13 41 दिवि शब्दो महानभून् 966 हरि पादसूची-15 दिदि सचरता तदा 113 56 दिविस्थाश्च दिवौकस 58 56* दिवोदास इति ख्यात 23 b7° दिवोदासस्य पुरस्तु 23 620 दिवोदासहृत बलात् 23 64 दिवोदास मजेश्वर 23 60°, 61. दिवोदासेन बालो हि 23 64' दिव्यकुण्डरपूर्णान्या 47 420 दिव्यगन्धो ववी वायु 91 26° दिव्यभृङ्गारचमरै 65 56* दिव्यमप्रतिम बली 90 100 दिव्यमभ्यर्चित चत्य 92 83 दिव्यमाकाशमावने 37 41° दिव्यमालाकुल मृध 81 61 दिव्यमाल्याम्बरधर 106 ar" दिव्यमाल्याम्बरधर 108 12° दिग्योकमये रथे 32 28 दिग्यशुक्लाम्बरधर 62 67° दिव्यसहनना चैव 95 दिव्यस्य पयसो घटै 62 42° दिन्यस्रगनुलेपनम् 60 21 106 27" दिव्यस्रगनुलेपन 629° 108 124 दिग्यस्रगनुलेपना 48 29 दिन्यस्रग्दामधारिणी 81 58° दिव्यस्वर्गरसाक्षित 62 660 दिग्य कृष्णवपुरि 32 20* दिग्य देवावृध नृपम् 27 10 दिय न कथयाम्यहम् 46 11 दिन्य नारायणाश्रमम् 40 11 दिव्य भगवतो दिवि 398 दिव्य मत्रपद महत् 100 27 दिव्य वपुरधारयत् 96 360 दिव्य स्यमन्तक मास 28 120 दिव्य स्वबरमास्थित 51 19 दिय स्वर्भानुदर्शितम् 37 52* दिग्याक्षहृदयज्ञो वै 10 69 दिव्या विधारा दृष्टा मे 46 10° दिव्या त्वमपराउनु 99 40% दिव्या देवगणान्विता 1 330 दिग्या दयगुणैर्युता 31 1490 दिग्या देवमहाचमू 37 19 दिव्या देवैरभिष्टुता 38 291 - दिव्यानीति हि न श्रुतम् 20 3° 113 दिव्याभरणभूपिता] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवशस्य 1 दीजिशोऽनयन दिव्याभरणभूषिता 9 दिव्यामिरपपत्तिभि 40 18 दिव्यामप्सरस हरि 92 66° दिव्यासनगतान्देवान् 46 13° दिव्यास्तु सविशंपत 118 364 दिव्यातूणीरधर 33 4° दिव्या पुण्या कथा शुभाम् 31 11 दिव्या कामदुधा विभो 45 24° दिव्येन विधिना मया 61 53 दिव्येषु च यथाक्रमम् 48 10% दिव्यैर्भागवतैर्मत्रै 70 10° दिव्यैर्माल्यैश्च व देवा 9 67" दिव्यै परमवाजिभि 22 61 दिशमावृश्य पश्चिमाम् 9 700 दिशश्चके जनार्दन 113910 दिशश्च दशधा दधे 120 दिशश्च समपूरयत् 37240 दिशश्वैध पुपूरिरे 71 45 दिश परण एव च 38 68 दिश प्रच्छाद्य बाहुभि 38 38d दिश प्रदुद्रुवु सर 112 27° दिश माफमदच्युत 9 930 दिशापाल सुधन्वान 4 110 दिशाभिर्विदिशाभिश्च 31 37" दिशा पायानथ तथा 4 10% दिशि दक्षिणपूर्वस्या 22 16° दिशि पूवात्तरस्यों तु 22 172 दिशो जग्मुईतौजस 108 464 दिशो भीता प्रदुद्रुवु 113 271 दिशो यास्यथ विक्षता 10 284 दिट्या ते निहता मला 83 11 दिष्ट्या ते मातरुत्थिता 120 दिष्ट्या बाहुसहस्रस्य 106 15. दिट्या सहस्त्राक्षमई 106 15° दिष्ट्येदानी समक्ष मे 38 18" दीक्षणीयैर्द्विजातिमि 38736 दीक्षामय स कवच 29 25° दीक्षा तामुद्वहन्बती 10 13 दीक्षां तां दुर्घहा भुवि 10 11 दीक्षा द्वादशवार्षिकीम् 10 30 दाक्षितो गधुसूदन 1017" दीक्षितो वाजिमेधाय 118 I" दीक्षिताऽसि प्रताविति 101 120 दीनया सजमानया 78 174 दीन पुत्रवधधान्त 695 दीप्तचापधरस्य च 112 36° दीसतेजसमच्युतम् 5 45 दीप्ततोयाशनीपात 32 15* दीप्तपीताम्बरधरं 32 220 दीपप्रदरण तदा 110 374 दीप्तमतगत तस्य 76 15° दीप्तमाकाशग दिव्य 338 दीप्तशस्त्राणि सयुगे 113 150 दीप्तरङ्ग इवाचल 33 140 दीप्त तेजोनिधि तदा 103 25* दीस ब्रह्मशिरो नाम 112 87° दीप्ताग्निसदृशं घोर 38 39 दीक्षान्यमिततेजसाम् 3534 दीक्षान्यत्राणि बीयवान् 88 214 दीप्लान्याहृवसप्लवे 81 56 दीसाया दिशि वाशन्त 102 3° दीसा शीतोष्णतेजोभ्या 37 16° दीप्तास्यो मितभाषिता 31 137° दीप्तिमान सदस्यैश्च 345 दीप्तिमस्ति च तेजासि 32 35° दीप्तिमन्तो बहुश्रुता 7 43 दीतिरङ्गिरसामिप 65 184 दोहन समधावत 110296 दीप्तन सुमहायशा 11031' दीतनेह समन्विता 831 दीप्यद्रियापि तोमर 37 136 दीप्यमानमिव श्रिया 91 53 दीप्यमान प्रकाशते 109 841 दीप्यमान स्वतेजसा 31 140% 76444 दीप्यमान स्ववपुषा 5 21° दीप्यमानाननो दैत्य 58. 26° दीप्यमानेन वपुपा 87 320 दीप्यमानेषु सर्यश 68 8 दीप्यमानश्च रश्मिभि 34. 200 दीयतामनुरेपनम् 714 दीयता भुज्यतामिति 31 1990 दीयता मे सपा शक्र 35 74° दीयता शीघ्रमित्येवं 48 23° दीर्घकालगत प्रत 79 186 दीर्धकार महारान 82 23° दीजिदोऽर्कनयन 81 731 114- दीर्थबाहुमरिंदमम् ] लोकपादसूची [दु पन्तस्य तु दायाद दीर्घबाहुरिदमम् 70 21 दीर्घबाहुजनार्दन 113 53 दीर्घयाहुर्दिलीपस्य 1073 दीर्घयाहो महापर 758 दीर्घमध्यानमल्पवत् 92 68 दीर्घमायुरवामुयात् 113 820 दीर्घखोतायतभुजाम् 55 35 दीप योरनविस्तार 55 40° दीर्घायुष्व पितु प्रभो 12 3 दीर्घायु प्रियदर्शन 99 35 दुग्धा चेय वसुधरा 4100 दुग्धा सस्यानि मारत 2280 दुग्धेय वृक्षपीरुद्धि 6 37 दुग्धेय श्रूयते मही 6 184 दुदोद पुष्पित सार 6 310 दुदोह पृथिवीं तत 014 दुदोद सवितुर्गा 2 89 120 दुवमंगजातय 61 140 दुराचाराच निहता 31 1470 दुराधर्षा विशेषत 107 sod दुराधर्षा महाग्ल 90 350 दुरारोहा हि सा गति 62 991 दुर्गकर्मणि सभारान् 86 15 दुर्गरथानदिक्षमा 86 20 दुर्गस्पारम्पमान्क्रियाम् 88 30 दुर्मदं देवतैरपि 71 50 दुर दुर्धर 7 31 1240 दुर्भातीयेन येन स्वम् 667 दुईय भुवि मानुपै 13 100 दुर्दम दमन बन 25 20 दुर्दम कामचारी च 676 दुर्दमेन महात्मना 23 64 दुर्दशें मेरसूरे 32 दुर्दान्तो शशनिदैत्योऽयौ 87 8. दुदिनं भाति वै नभ 54 31 दुर्दिन विपुल चा 61 11 दुर्दिन व्यपरायत 100 200 दुर्दिनागम भयम् 61 2 इर्दिनाम्मोदनिस्वन 421 दुर्धराणि सुरैरपि 31 1130 दुर्धर्षममरैरपि 5 45 इनिरीक्ष्य सुरगण 31 124 इनिरीक्ष्या मुरैरपि 87331 दुनिरीक्ष्योऽरिवृन्दानां 31 99 दुर्निवार्य महत्तदा 84 13 दुर्निवार्य मयि स्थिते 62 150 दुर्बला विषयाराना 117 38° दुर्बुदिरमितेन्द्रिय 44 37 दुर्बुदिवैरकृत्सदा 15 36 दुर्मतीना क्षयावहम् 89 26 दुर्मुख सुमुसतया 38 दुर्योधनमुखा सर्वे 1008 दुर्योधनस्य कन्या तु 90 8 दुर्योधास्य यज्ञे वै 1000 दुर्लभ स्वर्गगमन 44 75° दुर्रभागिह रोकिमान 23 106 दुर्विगावमपर्यन्त 61 13 दुझियाकृतात्मभि 187 दुर्वृत्तस्य इतस्यापि 44 780 दुश्चरं देवदानवै 13 16 दुष्कृतस्यह कर्मण 78 130 दुष्टात्मा २ हवस्त्वया 6920 दुधा या निभिरेतैस्तु 107 34° दुष्टाश्वा वनगोचर 67 दुष्टेन मनसा देवि 107 320 दुस्तर निदशैरपि 55 40 दुम्तर प्रतिकूल हि 118 350 दुस्तरो दानमूल्यान् 113 44 दुहिता फुल शालिनी 93 44° दुहिता समता नाम 23 125° दुहितु कारयामास 89 1 दुहित्यमनुप्राप्ता 6 40% दुहितृत्व च मे गच्छ 660 दुहितृत्वास नाझवीम् 23 79d दुहितृत्वे पापयत् 10 660 दुहितृभ्या जरासध 80 ?" दुदमाग यसुधरा 2 280 दुसमानासु च बजे 68. दुंदुभीना च निनदा 37 250 दुदुभ्य प्राणदन्दिवि 24 25 दुसानि सुबहूनि सा 69 230 दुसित यत पश्याम 56 231 दु सै शिधिरता गवम् 696 दु खोपपप्य तरिषु 55 42 दु पन्तमथ सुपत 23 17* दुपातस्य तु दायाद 23 48", 1987 - 115 दु पन्तस्य महायशा ] चिकित्सितपाठांत्मकस्य हरिवंशस्य [ राष्ट्वा ते दानवेश्वरा दु पन्तस्य महायशा 23 49" दु पन्त पौरवं चापि 23 126° दुसहाना यथा यस 115 150 दुस्पशा पारकैरपि 356 दूत च प्रेषयामास 25 14 दूत तस्मै ससर्ज है 85 291 दूत पुरपवादिनम् 44 264 दूतान्तरितमेतद्वै 15 420 दूतैस्तै कृतसधाना 10070 दूतोऽभ्येत्य वचोऽनवीत् 15 380 दूरादेव तु तो हवा 13 47° दूपमिष्यामि यन्मतम् 75_186 दूपित च जगद्भवत् 41 254 दूपित तद्दन महत् 67 11 दूपित दूपितात्मना 108 184,88d दूपिताश्च धनौकस 44 350 दृदजानुर्महोदर 64 हदनेमिसुतश्चापि 15 320 बनेमि प्रतापवान् 15 32° दृढप्रतिकृती चैव 65 86° दृढायुश्च वनायुश्च 21 10° बढावा ज्येष्ठ उच्यते 9 786 दृढेन दाम्ना तत्रैव 51234 इसकुकुटसनाद 6554 दृप्सयोधजनाकुलम् 81 22° हप्तशादूर नि?षा 33 270 सशार्दूर विक्रमम् 31 67% प्ससारङ्गनिनदै 54 13 वृक्ष मृत्युमियोत्थितम् 36 634 इस वृपभदानवम् 64220 सदैत्यगणैर्गुप्त 31 6° सो गच्छत्यनातवम् 64 8° हप्तौ वलभकाविध 5170 इयते दवसूनुवत् 108 91 दृश्यते मासचक्षुषा 13 730 दृश्यते यत्र दृश्य ते 59 11 श्यन्ते गार एनास्ता 11311° दृश्यन्तेऽद्य यथासुखम् 52 10 दृश्यमाने विनाश च 654 दृश्य सर्पमिद वपु 100 Bd दृश्यादृश्या सुरोत्तमै 44 81 दृश्यादृश्येन वर्मना 30 100 दृपदोलखलस्य च 8611 पदतीसुतश्चापि 23 930 उपदत्यास्तु सजजे 2324 दृष्टदोषा या मया 29 18' दृष्टपूर्य पुमान्कचित् 12 10 दृष्टपूर्वो न केनचित् 97 390 इष्टपूर्वो न च श्रुत 9274 दृष्टमन प्रणाशनम् 115 38' दृष्टमेतद्यच्छया 50 181 दृष्टवीर्यस्य शनुभि 77 31 दृष्टवाय मया विष्णु 100 80° दृष्टश्चासि मया प्रभो 67 67 दृष्ट मे बह्मसदनं 46 110 दृष्ट मे भवत कर्म 67 670 दृष्ट स्पृष्टश्च कृष्णेन 11330 दृष्ट स्वमे त्वयान 107 491 दृष्टा कमलरोचना 40 320 दृष्टिं परिदधे कृष्णे 58 16° दृष्टो योगो गवामिति 61 26° दृष्टो राजन्महारणे 108 91° दृष्ट्या पाचा च माधव 92 350 दृष्ट्या कंसस्तु तां कन्याम् 48 26° दृष्ट्वा कारमिधायान्त 36 60° दृष्ट्वा कृपान्विती गृह्य 114 11" दृष्ट्वा कृष्णमवस्थितम् 67 180 दृष्ट्वा कृष्ण निपातितम् 73 60 दृष्ट्वा कृष्ण हृदगत 56 9% दृष्ट्वा कृष्णेन धीमता 96 37 दृष्ट्वा क्रोधपरीतात्मा 15 45° दृष्ट्वा धाम्बुधरान्धनान् 5421 दृष्ट्वा चैत्ररथ वनम् 46 दृष्ट्वा चैनं श्रिया जुष्ट 62 6° दृष्ट्वा जगति विश्रुतौ 72 15 दृष्ट्वा जहपिरे भौमा 94 114 दृष्ट्वा तस्कर्म वज्रभृत् 61 60 दृष्ट्वा तत्तस्य भास्वत 63 220 दृष्ट्वा तत्र मतिं चक्रे 55220 दृष्ट्वा तत्सर्वमागच्छ 11022 दृष्ट्वा नमभिषिच्यन्त 62 590 दृष्ट्वा नमृधिमागतम् 1158 दृष्ट्वा तावसुरी घोरी 42 24" दृष्ट्वा तां वाहिनी तदा 108 51' दृष्ट्वा नु सौ महावीयों 65 93* दृष्ट्वा ते दानयेश्वरा 37. 116 दृष्ट्वा दैत्यविनाशा श्लोकपादसूची [ देवप्रहरणा सुता दृष्ट्वा दैत्यविनाशाय 38. दृष्ट्वा पैतामहं पदम् 39 18 दृष्ट्वा यमूपुरवस्था 19 200 दृष्ट्वा वाण पदातिनम् 108 59 दृष्ट्वा मधुनिघातिनम् 102 196 दृष्ट्वा मूर्धसु सागरे 56 30 प्टवायान्त श्रियोपेत 16 36° दृष्ट्वा रथस्य स्वां वृदि 29 16° दृष्ट्वा लोकान्सुदु खितान् 40 36' दृष्ट्वा वृपभदानवम् 64 146 दृष्ट्वा सा मतकाशिनी 107 71 एष्ट्वा सुमहदद्रुतम् 79 19 दृष्ट्वा हेस्वर्थकारण 68 39 देवकश्योग्रसेनश्च 27 25° देवकस्सामवन्पुना 27 26 देवकार्यादपि मुने 13 60 देवकीगर्भकुन्तने 478 देवकी च गृहे गुप्ता 47 30 देवकीच यशोदा च 48 11 देवकी देवतोपमा 48 10 देवकीनन्दनवच 91 330 देवकीप्रमुसा स्त्रिय 4824 देवकीभग्नान्तिकम् 47 26* देवकी रोहिणी चैव 45 360 देवकीशयनेऽन्यसत् 48 100 देवकी शान्तिदेवा च 2727 देयकीसप्तमा देश्य 988 देवकी समुदक्षत 76 11 देवी देवसकाश 698° देवकी रामनावी 96 देवी रोहिणी धैय 45 38 देवस्यजनविष्णु 48 13 देवक्या गर्मम्तने 47 14 देवया सह रोहिण्या 94 26° देयकमा सफ्ले धमे 47 284 देयक्षयस्य नन्दन 2625 देवशनोऽभवत्तस्य 2024 देवगन्धर्षनिघोंप 46 110 देवगन्धर्ष मा मैव 100 520 देवगन्धर्वपक्षीय 34 देवगन्धर्यरत्नानि 92 16 देवगन्धर्वसेवितम् 92 41 देवगर्भसमावुभौ 2725 देवगर्भसमो जज्ञे 26 25° देवगर्भोपन सुतम् 89 देवगुह्यधर प्रभुम् 8664 देवतानामपि चमू 37 16° देवतानामवध्यश्च 9 53 देवतानामृषीणा च 31 135* देवताना कृतो राजा 62 82° देवताना त्रिविष्टपे 63 320 देवताना दिविस्थानां 67 66° देवताना न सराय 81 21 देवतानां भवान्वर 62230 देवताना मया श्रुत 46 146 देवताना हि पितर 13 69° देवतायतन शुभा 87 314 देवतायतनान्तिके 87330 देवतायै च मे यत्न 109 480 देवतायें वय चापि 109 53° देवतास्त्वशनीारा 3727 देवतुल्य महाद्युते 63 34 देवत्यनिनादैश्च 65 56° देवाग्यनेकश 75 36 देवदर्यानुनादिपु 348 देवरखे प्रत्य मानुपे 13 330 देवदत्तवरो नृप 85 60° देवदानवपूजिता 12 140 देवदानवयक्षाणां 107 630 देवदानवसकुलम् 356 37 21' देवदानवसाध 37 350 देवदानवसधानां 106 590 देवदुन्दुभयश्चैव 9 67 देवदेव पृथिव्यथें 44 150 देवदय सदा युद्धे ॥3 देवदेव सनातनम् 112 1071 देवदेव सुवपुष 1075 देवदव सनातन 100 630 देवदेवेन भास्वता 13 11 देवदेवो जगत्पति 3114 देवदेवो हरि देव 38 56 देवदैत्यसमागमे 85 42* देवपझे प्रमुदिते 38 430 देवपुत्रसमद्युती 96 47 देवपुत्रोपमौ वीरौ 71 49 देवप्रहरणा सुता 255. - 117 ।

देवभागस्ततो जज्ञे] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य 1 देवाना स तु सर्वस्व देवभागस्ततो जज्ञे 24 180 देवभागान्गतान्दृष्ट्वा 44 17 देवमाता यशस्विनी 92 58 देवमातुर्ददौ चापि 97 23° देवमातुर्मइद्धिमत् 92 B3 देवमाता महायल 9261 देवमानुपयोनता 305 देवमायाधरा दिव्या 429 देवमायानुवर्तिन 99 देवयानीमुशनस 22 3 देवयानी व्यजायत 22 4' देवयोश्चन्द्रसूर्ययो 92 46 देवयोघोपमे भुवि 43 610 देवराजरिपुर्मवान् 915 देवराज वरप्रद 38 11 देवराजविराजितम् 34 486 देवराज पुरदर 62 350 देवराज शतक्रतु 92 Bor देघराजाभ्यनुज्ञात 92 61 देवराजेन देशर 91 380 देवराजोऽप्रवीदिदम् 62 6793 24 देवरातादय स्मृता 23 86 देवरातोऽभवनप 26 24 देवर्षिगणपूजितम् 93 480 देवर्षिभिस्तपोवृद्ध 31 380 देवर्षिरपि नारद 92 324 देवर्षि बीतकल्मपम् 464 देवर्षि प्रियसवाद 370 देवरस्य महात्मन 13 220 देवलस्य सुता तदा 1924 देवलस्यात्मजाभवत् 18 220 देवलायोगधर्मिणीम् 18 9a देवलोकमरिंदम 92 490 देवलोक समुत्सृज्य 304 देवलोक परस्तस्मात् 62 26° देवरोकादरिंदम 92 Hd देवरोकोपमो रोक 62 66" देवद्दिव्यधपुपा 96 150 देषानुपदेवभ 27 280 देववृत्तान्तमानुपौ 51 5 देवच्याघातकारिणम् 38 270 देवशनुमरिंदमम् 107 at देवश्रवसमुद्धवम् 24 250 दयश्रदा कतिश्चैव 23 8. देवश्रेष्ठमगात्तदा 19 10 देवसद्मप्रतीकाशा 921" देवसमानि सर्वाणि 92 47* देवसगीतयोगिन 67 68 देव सजायते मम 106 34 देवहेतो सुदारणे 109 41 देव गिरिवरे स्थितम् 60 23* देर नारायण प्रभुम् 32 13d देर नारायण हरिम् 19 11 42 271 देव प्रक्रीडित दृष्ट्वा 107 9 देव ब्रह्ममय यज्ञ 31 590 देव घिनृम्भित दृष्ट्वा 112 32° देवा भपि न तद्विदुः 58 411 देवा भपि पिढन्स्वर्ग 1 14 देवा इव पितामहम् 37 59d देवा इव शतक्रतुम् 78 411 देवा इवान मोदन्तु 86 8 देवा एकोनपञ्चाशत् 3 109° देवाकोडायरिफ्रामन् 92 62* देवा ज्योति पुरोगमा 3 31° देवाशमुखान्सर्गन 38 64° देवा दर्शनकालिण 40 370 देवा देवर्षिभि सह 35 240 देवा दैत्यपराजिता 32 28° देवानचोदयद्रा 43 670 देवानभिमुख तस्थौ 33 31" देवानसनत ब्रह्मा 12920 देवानामपि दुर्लभम् 13 744 देवानामपि देवता 112,32* देवानामपि यो देव 106 420 देवानाममितौजसाम् 3 103" देवानामाक्षिपद्वपु20 39 देवानामीश्वर शक्र 5950 देवाना कार्यगौरवात् 40 411 दवाना च सनातन 62 19 देवानां निदिवे यथा 86 730 देवानां दानवानां च 13250-31 2034 देवानां दिवि वैष्णरी 39 144 देवानां प्राणदन्दिवि 48 16 देवाना यद्गवासता 62 18* देगना विप्रिये नित्यम् 91 350 देवाना स तु सर्वस्व 46 16* %3D118 देवाना सुमहत्वाय] लोकपादसूची [ देव. सह शतरतुः देवाना सुमहकायें 96 By देवाना सोमवर्धना 13 देवानिन्द्रपुरोगमा 35 देवानीकस्य सस्थिवान् 34 15 देवानीक प्रतापवान् 10771 देवानीकात्मज प्रभु 107 देवानुयातनिर्घोष 113486 देवान्तश्च नरान्तश्च 286. देवान्तस्याभवत्पुत्र 2870 देवान्या वाहनानि वा 35 14 देवान्परिपुर्यया 864 देवापत्य न विद्महे 65 750 देवापिरभवन्मुनि 23 117 देवापि,लिकचव 23 114 देवा ब्रह्मर्षिभि सह 7 520 देवा मसमुखे स्थिता 38 110 देवामिविनाशनम् 86 310 देवायुधविरातितम् 37 38 देवा या त्या विना प्रभो 6277 देवाश्च तुपिता नाम 7 120 देवाश्च पितरथ ह 12 41d देवाश्च पितरश्चैव 12 31 देवाश्च पितरस्तथा 12 41 देवाश्च बलिहोमेन 38 710 देवाशाभूतरजस 7 23° देवाश्वतन्मणा दिवि 39 देवाश्चैत्ररथ यथा 56 480 देवाचवासुराचैव 21 13 देवासुरगगाना हि 31 1220 देवासुरमभूयुद्ध IIS 17° देवासुरमिवाभवत् 15 590 देवासुरविमर्दै स 36 31 देवासुरविमर्देषु 34 41 देवासुराणामाचार्य 2 12 देवास्तान्भावयन्त्युत 13240 देवा हुताशनप्राणा 30 38° देवाश्यामिपुरोगमान् 43 680 देयांत्रिभुवनस्थांश्च 31 560 देवा पादपमुत्तमम् 93580 देवा प्रीति पर जग्मु 32 330 देवा शपुरोगमा 32 290 देवा सप्तर्पयश्चय 31 15 देवा सर्पिगणावदा 38 50 40 100 देवा सपिगणा पुरा 31 19. देवा स्वर्गगता इव 84 234 देवि देवी भविष्यसि 47 204. देवी काश्या वयुग्मा 18 10 देवी च प्राइसत्तदा 10760 देवो तब मनोगतम् 107 43d देवी दुश्चरचारिणी 13 19 देवी नग्नजिती तथा 98 33 देवी पृथ्वीति चोध्यते 6404 देवी प्रहास मुमुचे 1077 देवी सरस्वती चैव 10° देवेन वर्धते यद्धि 39 10° देवेनोमा रजेजये 21 17 देवेन्द्रेणाभिरापित 118 34 देवेम्पररमिहानय 86 6 देवेषु स परिज्ञात 23 18 देवेषु सुचिरोषिता 14 4 देवेष्वपि दधारना 40 31 देवेवपि पुरातनम् 40 20 देवेष्वपि सदैत्येषु 13T6° देवेस्विर निशाकर 600 देवेतिर पुरदर 606 देवरकृतसस्त्रिय 39 देवरपि दुरानुगा 39 8 देवैरपि दुरासदम् 9 60 देवैरपि दुरासदा 35 720 देवैरपि दुरासदे 58 584 देशपि समास 462071 10d देवैरपि सुदुष्करम् 9680 देवैरपि मुटु सहम् 9664 देवरागिरसे सह 5 26 देवैरिव स ते सह 96 31 देवरुक्तः स पाथिर 21 220 दवर्गुप्तो महात्ममि 97 14 देवेदेवावृध सम 27 130 देवदैत्यश्च कथ्यते 30 56 दवन दृष्टश्चान्तस्ते 58 430 दवैर्निगदितार्थस्य 81 64 देवेश्वोक्त दिवि स्थित 58 Brd देवे परिवृत प्राह 43 1 देव सदानवगणे 62 18 दुवै सर्पिगगै सह 2 240 देये सह शतानु A 24 - 119 देवोऽदृश्यत सयुगे] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ दैवतैरपि पूजिता देवोऽदृश्यत सयुगे 3628 देवो देवसभा दत्वा 86720 देवो वर्षति लोरेपु 599% देवो वा दानवो वा स्व 63 8° देवी किं करवाणि वाम् 98 देवौ तस्थामजायेताम् 8 380 देवौ दैतेयनिर्मिताम् 36 17 देवी वैवस्वती स्मृती 7 320 देण्या वचनचोदित 107 200 देयाश्च चरणो शुभौ 92371 दच्या सह नदीगतम् 1079 देव्या सद नदीतीरे 107 10 देव्या क्रीडागते भये 107 450 देशकालानुवतिनी 117 490 देशजाश्चोत्तमा हया 92 124 देशमन्य वजी रथी 26 131 देशमम्बुप्रदानेन 83 28° देशानामिति विश्रुता 23 970 देशे निदशपूजिते 86 430 देशे देशे पृथरथर 17 26d देशे पुण्यतमे चैव 21 90 देशे पुरनिवेशाय 84 320 देशेऽमिस्त्वमपासुले 89 351 देशो नृपतिपीडित 61 bod दहकृष्टा चकार ६ 76360 देवन्यासकृतोऽभवन् 18 134 देहयन्धानमानुपान् 94 20° देवभूताच सिन्धर 37554 देहस्य मध्ये हृदय 30 44° देव हरिदारधी 4549" दह पनगराशिभि 108 830 देहारसुसाद शोणितम् 58 54' देहान्तरगतो हरि 503 देहीति चाभिभापत 86 60° देहयुवार ताकाळ 71 17 देहेन तस्य रगम्य 75 450 देतेप क्रोधमूर्षित 11271 देतेया सह दानये . देवदानयनारीभि 100 62 देत्यवानवयोपिठ 100 56 देस्यदानमक्षसाम् 32 6 देत्यदानमराक्षसा 1103 दैत्यदानवसपोगा 376 दैत्यदानवहन्तार 4370 दैत्यपक्षे विषोदति 36 433 दैत्यमन्तदंधु स्वनम् 37 25* दैत्यमायापकपणम् 36 " दैत्ययोमदसा छमा 42 330 दैत्यराजोऽभवत्पुरा 24 21 दैत्यवंशसमुत्पना 112 दैत्यव्यूहगतो भाति 33 220 दैत्यसधान्महाहवे 36 13 दैत्यसेना ददहतु 36 34° दैत्यस्कन्धगत श्रीमान् 58 31" दैत्य तुरगविग्रहम् 454 दैत्य पञ्चजन तथा 96 66" दैत्यं वचनमबवीत् 31 390 दैत्यं वृपभरूपिणम् 45564 120 दैत्य सोऽतिबल एस 31 671 दैत्य कसस्य वाहन 44 700 दैत्य क्षितिचर कृष्ण 67 47" देय पञ्चजनो महान् 79 14° दैत्य पुष्यति विग्रहम् 45 30 दैत्यानामय सिद्धाना 120 दैत्यानामादिपुरुप 31 32° दैत्याना दानवाना 144 देत्याना शुशुभे धम् 37 11' दैत्यासादेन भीपयन् 34 110 दैत्यान्मानुपदहस्थान 31 145" दैत्याम्मेघगणा हव 36 13 दैत्या महागमभुवन् 47 18 दैत्याश्च सह दानवै 91 10 दैत्याचादित्यवपुष 35 190 दैत्येद रसैनिकम् 109 90 देस्येभ्यस्यज्यता भीति 3876* दैरयेम रथमाविष्ठ 11286° देव्यै सर्यायुधोद्यते 38 31 दैत्यो गर्दभरपयान् 57 12 देस्यो पमरूपेण 64 देयक्षनिर्महामन 28 28. देयशा कथयति हि 60 31 दैवत छसि देवानां 12 g' देयतानां चार 13 देयतानि च सर्वाणि 700 देयताम्यभिच 151 देवगापि पूनिता csort 120- दैवते समहोरमै ] लोकपादसूची [द्रोण्यश्च विपुरायता दैवते समहोरंग 47 16 दैवते सह योश्यते 47 46 देवमप्यनुवर्तते 477 देवं पुरषकारेण 48 39° 115 39 देयेन परिणामिता 42 51 देवेन मनसा क्षिप्र 86 23° दोग्धा चाझिरस सुत 6 16 दोग्धा तु सविता विभु 6 19° दोग्धा भरतसत्तम 6 34 दोग्धा मेरमहागिरि 6 36 दोग्धा रजतनाभस्तु 6 31 दोग्धार क्षीरमेव च 649 दोर्भिश्चायतपीनाभि 37 12" दोश्यामानाय कृष्णस्तु 75 420 दोामुरिक्षप्य दर्पिता 37 331 दोामुक्षिप्य नगर 996 दोामुत्पाटयामास 61 29* दोामुत्पाव्य भास्वरम् 92 42' दोम्यों कमरपग्राक्ष 71 41° दोभ्यो ती समपीडयत् 42 30° दोयो विक्षिप्य स प्रभु 32 20° दोग्यां विषाणमुत्पाव्य 74 33° दोपभूता हि दानवा 106 58d दोषाणा न भवेनाश 106 570 दौत्य च तहत घारे 105 17" दाराल्यानृपतेरस 106 58 दौर्य य भवतामेतत् 118 18° दौप्कुल व्युस्थितेन्द्रियम् 73 23' दीहिरव सोमस्य 2 520 धावापृथिव्यो सयोग 37 20° द्यावापृथिन्यो ससर्ग 54 320 घा यथैयानमालया 93 124 धां वै भुव च रन्धेय 5 130 धुतिस्तपस्य सुतपा 7 20% धुति पुष्टि प्रभा वसु 20 26' धुमत्सेनमपोययत् 970 धूत खमी महारथ 8921" घो व प्रभयो विभु' 305 घोरप्यनुगृहीता स्यात् 65 चौरिवायत शारदी 57220 धौनं मायभिभूताको 32 19° धानिमीरितनक्षया 37 150 द्रक्ष्याम पितर तव 100 71 मक्ष्यावश्चरत सुसम् 52 274 दवन्वीमन्वधावत 5 43 दव्याणि विविधानि च 29 28° द्रव्याययनिर्धूत 53 19 द्रव्यैरलकरोति स्म 86 74° द्रष्टव्य स यथा वै 62 790 दष्टम्यौ च मयावश्य 65 88° द्रष्टा हि ता भवानद्य 8 390 द्रष्टुकामो जनार्दन 36 310 द्रष्टुमिच्छति वै कस 65 85° द्रष्टु कौतूहल हि मे 65 920 द्रष्ट दानपति स्वयम् 65 1010 द्रष्टु धनुर्मह दिव्य 71 280 द्रष्टु स्वर्गादिहागत 67 546 द्राक्षावनधन चित् 84296 द्रुतजलवेगतरगमारिनी 90 17 द्रुत नगाम विमुख 58 230 द्रुपदस्य पिता प्रभु 23 1024 द्रुपदस्य पिता राजन् 15 82° द्रुमक्षयमथो बुवा 2 38 द्रुमपर्णासने कृत्वा 57 26° दुमपर्वतपफटा 36 271 द्रुमपोताविवोद्गती 52 4 दुमभार्गवतुल्ये वै 8950° द्रुमभार्गवशिक्षिते 89 50 द्रुमयो शकटस्य च 51 32d द्रुमसघातनि सृत 55 16 द्रुम किंपुरुषश्चैव 81 300 द्रुमाणां च वरानन 54 36" द्रुमात्यार महाबल 87 130 द्रुमाभ्यामात्मज शिशुम् 51 26° दुमायेवगतावपि 51 31 दुमिरस्त्येवमुक्तस्तु 73 350 दुमिलो नाम दानव 73 180 द्रुधु चानु च नाहुष 22 164 द्रुधु चानु च पूरुच 22 40 द्रुह्योश्चानार्यदोश्चैव 23 19, 30 द्रुह्योश्रानोर्यदोस्तथा 23 122d द्रुह्योस्तु सनयो राजन् 23 1302 द्रोण द्राणिं कृप कण 97 18" द्रोणायाथापवर्जितम् 15 636 द्रोणेनाध्युपितश्विरम् 84 28 द्रोण्यश्च विपुलायता 60 11' हरि, पादसूची-16 -121 द्रौपदीव पुरा पतीन् ] चिकित्सितपाठात्मक्स्य हरिवंशस्य [द्वितीयो राशिरुपने द्रौपदीर पुरा पतीन् 114 gd द्वद्वमन्ये युयुत्सुव 37 264 द्वद्वशो गोपकन्यका 63 251 द्वादशात्मा दिनेश्वर 34220 द्वादशासन्सुरोत्तमा 3 46 द्वादश्या (वा दिनक्षये 107 153 द्वादश्या शुक्लपक्षस्य 107 19°, 41° द्वापरस्य युगस्यान्ते 43 56° द्वापरे मत्स्ययोनिजा 13 394 द्वाभ्या भुजाभ्या दीघाभ्या 68 230 द्वारका द्यारिवाम्बुभि 93 13d द्वारकापि तथा भीरु 107 80° द्वारका प्रत्यराजत 86 496 द्वारकामभिजग्मिवान् 85 354 द्वारकामभिमप्राप्ते 88 34° द्वारकामाग्मसात्कृत्वा 97 320 द्वारकामावसन्पुरीम् 97 44d द्वारकाया महाभुज 109 870 द्वारका परणावास 97 330 द्वारका वासवक्षयात् 91 23° द्वारकावासिन सर्वे 11361. द्वारकावासिना तदा 113 556 द्वारकावासिना वाच 113 520 द्वारका कृष्णपालिताम् 107 864 द्वाररा गरुड स्थित 931 द्वारका च समाश्रित्य 855a द्वारका द्वारकास्थान्वा 112 520 द्वारकां द्वारमालिनीम् 113 47' द्वारका पुनरागत 113651 द्वारका प्रति दाशाई 93 10° द्वारकां प्राप्य कृष्णस्तु 11370 द्वारका भगवान्विष्णु 912 द्वारकां मधुसूदन 29 द्वारकां वृपभेक्षण 941' द्वारको शोणितपुरे 112 63. द्वारकां स्वर्गमनिभाम् 93 ' द्वारकोपरि शठिन 113 800 द्वारयस्यारामा माये 86730 द्वारपाया गृद गृदे 80 611,62 द्वाररया नियमना 105 द्वारपापा मुग 95 8" द्वारं म्यगंग भानुमान् 62 23 द्वाराणि विधुध त 86 " द्वाराणि शयनानि च 92 210 द्वाराण्यायतनानि च 86 16 द्वारै सौधश्च शोभिता 86 51" द्वावग्नी सप्रयुध्येता 110 06° द्वारना स लभते 59 29 द्वावम्बुनाथौ समरे 36 15* द्वारिमी सचिवौ तव 17 " द्वावृक्षी तव वशेऽस्मिन् 23 113° द्वावेव च परीक्षितौ 23 113 द्वावेव जनमेजयो 23 1136 द्वावेव तु विनि सृदा 38 67° द्वावेव विहिती ह्यावाम् 58 48° द्विगुण दीप्तदेहस्तु 12 29° द्विगुणोपनिवेशा च 93 27° द्वितस्त्रीवध एव वा 6576° द्विजस्येव वध कृतम् 66 111 द्विन कृष्णो महायशा 103 31' द्विज भुजगभोजनम् 34 390 द्विजातीनभिपूज्य च 86 12 द्विनातीना स्ववशिन 100 750 द्विताना वीरुधा चैव 420 द्विजाना वृत्तयस्तित्र 35 34° द्विजास्तान्भावयन्त्युत 13 511 द्विजिद्धपतय कुद्धा 61 40° द्विजित श्रीविभूषितम् 70 136 द्वितो व कथयिष्यति 100 284 द्वितीय उद्यतश्चैव 68 26° द्वितीयमापयस्यैतत् 1 380 द्वितीयमिव मन्दरम् 33 134 द्वितीयमेतरकथित 7 14. द्वितीयश्चारुदेष्णश्च 99 द्वितीय ननयियति 3547 द्वितीय नानुपश्यामि 62 19° द्वितीय स हि मां विप्र 654 द्वितीय स यमौ राजा 23 112 द्वितीया तु सपायर्या 8 10. द्वितीयायां मियां पृष्टा 43 49. द्वितीया शासमोननु 43 40 द्वितीया उरुसाम् 35 30" हितीये समुपस्थिो 741' दिनीयानगरिय ज्यान 1371 द्वितीयो य मुगमम्प 8 . द्विता राशिहापां 3041 -122- द्वितीयो यसुदेवा ] श्लोकपादसूची [धन्या धर्म परिप्यन्ति द्वितीयो पसुदेग? 65390 द्विधा हत्वा च तत्पुन 80 136 द्विधा प्रत्यारमनो देहम् 1 37° द्विधाभूतमभयत 71520 द्विधाभूतमभूगमध्ये 71 43° द्विधाभूत यषु कृपया 38 19* विभेद धार्यते जगत् 58 47" द्विपदोऽय चतुष्पद 2464 द्विपादपृष्टपुच्छाधैं 67 420 द्विवाहुत्वेऽपि मे देह 112 1276 द्विवाहु समरे कृत 112 910 द्वियाहु समयस्थित 108 97° द्विमूर्धा शकुनिश्चर 3 680 द्विरेकाभरणाविव 73 15 द्विवेद कण्डरीकस्तु 18 18° द्विपतामन्तको यथा 8167 द्विपता काल समितम् 3656° द्विपता रोमहर्पणम् 9480 द्विपरसु प्रानकुर्वाणी 81 68 द्विपवृषभसूदन 640 द्विपनिधनदक्षाभ्या 68 206 द्विस्तावत्य करेणव 92 12 द्वीपिचर्मपरिष्कृतम् 33 3 दे भर्धे रेनतु क्षिती 67 42 दे चै बहुपुनाय 3 250 द्वे चैवाहिरसे तथा 325 द्वे भार्ये पश्यपस्य तु 45211 द्वे मायें यौवनस्थिते 43 51 द्वे मार्य सगास्पास्तां 10 550 द्वे भृशाश्चाय विदुपे 3 250 द्वैपायन सर्वपरामरक्ष 1157" दौ च देश समाश्रिता 43 61 दौ द्वौ युगपदुत्पतन् 58 18 द्वौ पुत्रातिलस्य तु 3 350 द्वौ पुगौ दवरस्थापि 3 37° द्वौ पुत्रौ सबभूवतु 27 25 114 द्वयारेनाप्रपाणिना 71 31 ध घक्ष्यते शकरस्यांश 43 57* घनश धनाध्यक्ष 3145* धनदेन च धीमता 37 16 धनधान्यापजीरिन 110273 धरमतुल लमते द्विपनय च 11248 धन धान्य च यत्किचिन् 78 236 धनानि श्लाघनीयानि 116 10° धनान्यादाय सर्पश 89336 धनुरादाय वीर्यवान् 87 70 धनुरायागभूपितम् 71 38', धनुद्य पृपत्काश्च 5 42° धनुगृह्य महारवम् 5 22 धनुलदनिस्वनम् 8163 धनुय॑स्य पृपत्काच 22 19 धनुभि परिषैरपि 37 41 धनुर्विस्फारयन्महत् 33 16 धनुवेदचिकीर्षार्थम् 793 धनुदपरा सधैं 419* धनुयदस्य पारगा 2320 धनुर्वेदे च वेद च 89 90 धनुयायामशालिन 33 28 धनुचिच्छेद चाप्यस्य 87 66* 88 20° धनुचिच्छेद समस्य 81 87° धनुषश्च निनादेन 9720 धनुषा कूजितानि च 3725 धनुषा प्रवर शाई 81 590 धनुषो भङ्गनादन 71 450 धनुषो राधरेन 1 62 धनुष्कोट्या तदा वैन्य 69 धनु शारां गतौ तौ तु 71 37° घनेन तर्पयित्वा च 103 31° धनौधैरभिवस्य॑ते 71 190 धनविरभिवध 86 610 धन्यवद्धन्यभावन 11376 धन्यमायुग्यमारोग्य 20 480 धन्यमेधा प्रकीननम् 7495 धन्यशब्दोऽपि वा मुने 100 78 धन्यश्च वगतो गुरु 100 600 धन्यश्चासि महागहो 100 200 धन्यश्चासि महार्णर 100 444 धन्यवासीति भवता 100 81° धन्यवाह कथ विभो 100 धन्यश्चवार्णवो द्विा 100 43 धन्य यशस्य शत्रुप्त 121 धन्य वेदेन समितम् 4 25 धन्या सवसि शोमने 100496 धन्या द्रश्यन्ति ते वयु 45 4' धन्या धा चरिष्यन्ति 115 450 123 ।'

धन्या भवन्त पुण्याच] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ धर्मो धर्मभृदेव धन्या भवन्त पुण्याश्च 100 69% धन्या भवन्तो दृश्यन्ते 100 540 धन्याया खल्वय पुत्र 99 350 धन्या वेदाश्च नारद 100 6° धन्याश्चर्याप्रितेर्वाक्य 100 64° धन्यासि व नदीश्रेष्ठ 100 39° धन्यास्यनुगृहीतासि 107 559,7 धन्या हि भर्तृसहिता 107 10 धन्या खलु भवन्तो ये 100760 धन्या साऽनुगृहीता स 63 2 113632 धन्योऽसीति च माधर 100 26' धन्योऽस्म्यनुगृहीतोऽस्मि 3556, 68* 111 10° धन्याऽस्यनुगृहीतोऽसि 56 42° धन्वन्तरस्तु तनय 23 56" धन्विना निशितैणि 26 10° धरणी मनुजारणि 100 50% धरणी समपीढयत् 106 434 धरण्या भारनिणये 41 314 धरण्या भारसनति 4396 धरण्याथ्रयभूतान्या 68 25° धरण्या मृदित होते 76384 धरण्या विगतात्सवे 61 61 धरत्सूत्सन्नभूलपु 35 29 धरथैवानिलाइनर 3 320 धरस्य पुत्रा द्रविण 3 34. धराधर इवापर 33 206 धराया प्रसव स्मृत 3 91 धरिनि दहिना योनि 100 49° धर्म एव स्वदिष्यात 117 436 धमकामाथकाविदा 18 204 धमझ सत्यवादिनम् 8 256 21 धर्मज्ञ श्व काम 12 33° धर्मशन विपश्चिता 1121 धर्मदवस सस्वास्यात् 70 120 धर्मामी 23 136* धर्मनेयस्य यान्तस्तु 23 136° धर्मामो महायता 2346 धर्मपर या दश श्येता 326 धगमप्यम्प धीमत 4131 धममान मानग 17420 धर्ममूर्विधरा मुन 13 40 धर्मगधिरारत 136 धर्मरात इमा प्रा 8 41 धर्मराजो युधिष्ठिर 104 25 धर्मशास्त्रोक्तमेव च 41 11 धर्मश्चास्या सुसाधनम् 41 31 धर्मवाद प्रकीर्तित 104 14 धर्मसत्यमय श्रीमान् 31 24° धर्मस्तत्र जयस्तथा 21 164 धर्मस्तेषा निराकृत 10 45 धर्मस्य कन्या सुश्रोणी 2 80 धर्मस्य गतिरम्येष्या 66 13° धर्मस्य च विवृद्ध्यर्थे 31 12 धर्मस्याशोऽध कुन्त्या चे 43 63* धर्महेत्वर्थयुनया 40 44 धर्म कुलोचित बुद्ध 10 29° धमै जधान तेपा ये 1041 धर्म निरसदच्युत 10 धर्म पितृहतन वै 145 धर्म प्रविचलिष्यति 115 444 धर्म शुक्रो वृहस्पति 3240 धर्माचारेषु पार्थिव 11 230 धर्माजज्ञे युधिष्ठिर 24 23 धर्मात्मानमहमपम् 23 1100 धरिमानो यशस्विन 23 156* धर्मारमा यत्र वर्धते 24 4' धर्मारमा सत्यसगर 2010 धरिमा सशितपत 202 धर्माधर्मममायुक्तः 35 3 धपिता स पार्थिव 54' धर्मारामो महायशा 107 धर्माधकामसयुफ 118 3. धर्मायशरास्ते तु 88 39° धर्माप्तगत प्रभुम् 70 230 धर्मिणा वीजभान 113 32 धर्मे चालतां गते 31 350 भमण परिपाल्पो 4 1822 18 धर्मेण रक्षयामास 8 41 धर्माधिगत स्वया 92 18. धर्मेजय महाराज 22 धर्मेणेयानुरणनम् 23 10 घमर पराजित 60 101 धमें प्रयनमानानो 41" धर्म पर्तिरमा ... धम तिधितो गते 3114 भों पगंगार 29 ।।'

यो मास सामुपाम् ] लोक्पादसूची [तो येइम इवाकाशे 486 धर्षयामास तामुपाम् 107 20 धर्पयित्वा गृह महत् 99 100 धर्षयित्वा रथाकाम 31 102° धयिष्यति य स्वमे 107 15° धर्षयिष्यनित मानवान् 117 24 धातुभिर्भान्ति पर्वता 62 651 धातुभ्य इव काञ्चनम् 62 21 धातुमन्तमिनावरम् 34 420 धातूना च विशेषत 100 55 धात्री कसस्य भोजस्य 5020° धात्रीश्चैकैकश प्रादात् 10 60° धाच्या कुमारमादाय 28 230 धानजय्यास्तथैव च 23 80% धाम रक्ष्म्याश्च स्वरम् 85 धारणारयणाञ्चय 23 166 धारणेनास्य शैलस्य 634 धारयत्यसिर नगत् 58 440 धारयन्त्यात्मना जगत् 2018" धारयसमितौजसाम् 27 31 धारयन्यिपुल वपु 36604 धारयन्धिपुल यश 24 350 धारयन्स्पेन तेजसा 4325 धारयामास गर्भ तु 3 1020 धारयामास गाय॑स्य 25 10° 85 14° धारयामास नित्यदा 1064 धारयेथा प्रजा नृप 5 Bot धारा निर्मलनाराच 54 350 धराभिस्तुत्यरूपाभि 61 12° धारा शतसहस्रश 926° 10044 धारोमिकलिलो महान् 971 धार्तराष्ट्राश्च मे सरें 62 950 धार्मिकस्य महात्मन 9 33 धामिको जनमे नय 23 110 धिक्ते वृत्त सुरवत्त 73 31 धिक्रवामीरामक्षान्त 73 23° धिकानातेन तप्यते 69 140 धिशदपतितश्चैव 7890 घिसन्दर्यमसकृत् 2921 धिगेतत्तय वाम्बरम् 38 25 धिगेतां क्षत्रवृत्तिताम् 81 73° धिगेतां क्षत्रवृत्ति य 81 71° विधिगित्यसते 65 990 घिधिगित्येव सोऽब्रवीत् 12 491 धिग्याण सव पौग्यम् ॥2 1011 धिषणाजनयत्सुतान् 2 28 धौर परम्म प्रययौ 58286 धीवरानसनचापि 5 18° धुन्धुमारत्वमागत 9 47, धुन्धुमारो न सशय 9 620 धुन्धुमारो भविष्यति 9 66* धुन्धुरासादितो राजन् 970° धुन्धु म सुदारुण 9 64 धुन्धु धुन्धुविनाशन 9 736 धुन्धोर्यधमद ब्रह्मन् 9 48* धुन्धोस्तस्य निरहणे 9 644 धुर यस्ते समुद्हेत् 62 196 धुर वहति रौकिकीम् 395 धूमकेतु स्थितोऽभवत् 106 46* धूमवर्ण सुदर्शनम् 23 1060 धूमान्धकारवपुप 32 2200 धूमिनी च वराङ्गना 23744 धूमिनी पुनगृदिनी 23 103° धूमिन्या स तया देव्या 23 1060 धूमेन परिवेष्टितम् 55 43 धूमोत्पातैर्दिशो व्याप्ता 66 29° धूम्रवेशो हरिश्मश्रु 36 50* धू सा रणवाहिनी 62 851 पृतराष्ट्रबाहकों 3 880 तराष्ट्रवशानुगा 1008 धृतराष्ट्रश्च सूर्यश्च 3 61 एतराष्ट्रस्य राज्ञरनु 43 520 धृतराष्ट्र च पाण्डुच23 1200 एतराष्ट्र प्रतापवान् 6230 धृतवान्सप्तमे पद 1071 धृत गोवर्धन दृष्ट्वा 62 10 धृत यदुकुल बारे 65 19° धृता गौण वै मया 240d धृताम्ताभिस्त्रयो होश 73 320 एतिमान ययो युक्त 724° धृतिमास्तस्य पुषस्तु 15 31° तिर्महामना विद्वान् 18 250 इते गोवर्धने चैत्र 65 30 तो गोवर्धन शैल 96 376 धृतो गोवर्धनो गिरि 65 304 धृतो प्रातमता वीर 62 33° धृतो वेश्म इवाकाशे 62 13, 125 [ नग्नजित्या प्रजा श्रेणु तोऽहं तैर्मया च ते ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य तोऽहं तैर्मया च ते 100 664. पृष्टद्युम्नादयो नृपाः 100 84 पृष्टस्य जज्ञिरे शूरा. 261 पृष्टोक्तः कृष्ण एव च 23 1576 धृष्णु शर्यातिरेव च 911 कृष्णोस्तु तनयम्तथा 27 11'. प्णोस्तु धाणिकं क्षन 9 22° धेनुकस्तार शिखरात् 65 280 धेनुकं च महाकायं 90 16° धेनुकः स महासराय 96 39° धेनुक. सोऽमुरोत्तम. 44 720 धेनुके प्रत्यं नीते 65 . धैर्यादविकृतं वच 660 धैर्यादसभ्रान्तवपुः 44 380 धैर्यान्मनः सनियम्य 89 34', 38. धौन्धुमारिददाश्वस्तु 9 790 ध्यारया प्रसादं ते च? 13 34° ध्रियते सेवनीयेन 40 33° ध्रुवमद्यामरानन 83 10° ध्रुवस्य जननी शुभा 2 81 ध्रुवस्य पुत्रो भगवान् 3 33° ध्रुवं च कीर्तिमन्त चापि 290 ध्रुवं सप्तर्पय स्थिताः 2 130 ध्रुवाच्छंभुळजायत् 2 14 ध्रुवाय तय न्ययसत् 84 320 ध्रुवाय घरदो विभु 61 64 भुवो वर्पसहस्राणि 2 10° ध्वजसनश्च नाभवत् 5300 ध्वजस्यास्य यदा भग 106 130 चनं चास्य महायर 88 पिन चिच्छेद घोरिमृतम् 87 63. ध्वनं रानपिभूपितम् 87 121 ध्वज पपात येगेन 106390 पनामरामु प6ि230 पोन शिविणा 47 41. बसपं सहयान्धये 118 19. बसेयभ्ययुमनवीर 118 11'. न किचिदन्यत्पश्यामि 100 61". न किंचिदपि भापसे 109 23. न कीर्तिनापि पौरपम् 107 48. नकुलं सहदेवं च 62 93. न कृतस्य लोकोऽस्ति 65 63. न कृतप्रतिकर्ता च 116 40. न कृपिन वणिक्पथ 6 11. नकंचरेषु हृष्टेषु 68 3. नमेपाननाः शूराः 31 83°. नक्षत्रग्रहयोस्तथा 420 नक्षस्थानसकुरम् 40. नक्षत्राख्या ददौ प्रभु 2 47' नक्षत्राणां गुरु सोम. 42 37°. नक्षत्राणां यथा दिवि 55 86. नक्षत्राणि दिशो दश 31. 44. नक्षत्राणि नियोक्ष्यन्ति 116 32. नक्षत्राणि विहीनानि 116 36. नक्षत्राणीति या विदु 20 21. नक्षने चाभिपूजिने 89 15'. नक्षत्रैश्च मुहूतेश्च 31 37° न क्षुत्पिपासे कालं वा 14 13. न सत्वपुशल लोके 40 463. न खत्ययं मृतोऽण्डस्थः 8 4" नसामा जीवितग्छिद: 7641. नगरमभिमुसा यदाढ़ता 90 17. नगर कौरवस्य तत् 90 11. नगर रोरिण्यातम् 107 51. नगर यारणारतम् 29.64. नगराद्वचनापितु 993. नगरासि समीठा 81 33'. नगरे शिकिगीरिनाम् 93 26'. नगरे पमितं जये 855 नगरे नागपादये 90 8" नगन्ति रणे मिथा 11239. नगया निधनं नरम् 80 60* नगर्या पधिमंदार 81 39° मगाप्रे घना 0 मगाना मगशादिनाम् 54 18. न गानेतरे ना 533. न गाध परिरक्षितुम् 52.351. म गृहनिगमया 32 18 माधिपमहास, 80 131. मनजिन्या प्रत्रा शुगु 09. नक्तंप्यं विगनया 751 म कधिरगनुमति 70 10 म कधिदरपि म 116 31'. ममारी तस्य कमंग 28 181 म तिपिपरिहापो 62 16,00*. -120- न प्रहीष्यामि ते जराम्] श्लोकपादसूची [न त्वया राम वध्योऽयम् न महीध्यामि ते जराम् 22, 23". न ग्लानिरभवत्तदा 14. 18. मच कश्चिरपठिप्यति 116 351. न घचाल हरियुद्धे 38 31° न च चुक्रोध केशरः 69. 26. नच तं वारयामास 9. 93. न च वावमुरी युद्ध 42 26. न च वास्तमशानुवन् 20.6. न च ते दुप्यते भीरु 107. 35*. नच तो युद्धयमुख्यं 44. 48. न च परिमाईति वपुष्टमां च 118. 414. न च पश्यामि राक्षयम् 102. 10*, न च मे मृप्तिरस्तीह 1 11. न च रक्षसि मे सुतम् 102 14. न घरामा भविष्यति 68.31. न च वा सरितुं नदीम् 52. 356. न च विनियति यज्ञशीलनात् 118. 41'. न च विरमति विषपूरनान् 118 41". न च विषयपरिरक्षणारयुतोऽसी 118 41. न च वृन्दापने कार्यः 49. 10% न च ग्याधिमयं भवेत् 28 130, न च शोपि रक्षितुम् 102 17. नयमविज्ञातः 107.81". न च शेते सुखं रानी 96 00. मच सत्मयतस्तस्मात् 107". नसत्यवतस्तम्य 10. नघसामन्तमिच्छन्ति 44.276. न च सा श्रदधाति सत् 19.7'. न घस्कन्देऽय पौरराम 2584 न च स्म वृद्धा पालाना 31. 131. न चातिशतवानहम् 48 304. न चात्मनो गुणांस्तात 668. नचापराधः शश्स्य 115, 30% न चापि राज्यलुब्धेन 78 33. न साटो मसीम्यहम् 115.21' मधारयन्त ते साग्यो 108. न पामसाद पालं 79. 18. म चामुरगण सः 91. 11". न पास विदो कर्म 5.36*. न पाहमुपसेनेन 139. नचिन्तयति न धितान् 10895 मचिन्तयति राधां 109 96. चिरप्रनिलप्ससे 2133. न चुकोप गदाधरः 38. 23. न चुक्रोध गदाधरः 86. 300. न चेलुः स्तम्भितोपमाः 61. 21. न को द्रष्टुमिच्छामि 76 19. न चैनमशकद्राना 85 39. न चैनं शेकुरम्वेष्टुं 40 18. न चप प्रथमः कल्पः 1548. न चेपा वस्य कौमारे 99.47. न पां संस्थितिधंग 38 78. न जरा क्षुत्पिपासे या 931". न जरा रेवती प्राप्ता 9 29. न जातु कामः कामानो 22370. न जाने कोऽयसी नृप 71.531. न जीर्यन्ति महासुराः 113 .. नवरायां महौजसः 2 16, 171. न तत्र कश्चिद्दीनो श 7932". न तत्र पुरुषा. सन्ति 38 25. न तत्र परसाः सीदन्ति 53 34". न तत्र विषयो वायोः 40.6* न तथा पूर्व जेषु वै 8 18, न तथा रक्षणं यशः 536. न तमिथ्या भविष्यति 106.55 मतभ्रं जलजेक्षणाम् 55 3'. न तस्य वित्तनाशः स्यात् 23 163". न तं पसिष्टो भगवान् 10 12. न द स्वयं ब्रह्मा 40 15. न तारस्क्रियते तम्मान 112. 112. न तु कधन मानुप: 6080 ननु देहे निपानित: 8 23. न तु या कृत्रिमा भवेत 86 684 न तु वृष्ण्यन्धकानां वै 1 5. न तु शूर, खियाः पतिः 77.24. न सूर्ण भुञ्जते गावः 52 19 न ते तपः सुचरितं 12 9. न ते धर्म चरिष्यन्ति 116 19. न ते प्रभविता मृत्युः 11 26'. न तेषां दुर्लभं किचित् 47.59. न तेषु पापं विज्ञेयं 10950. न तेव्ह रिमुवनात 112 12. न त्यजनयगमायाणि 54 15*. नस्यमई मि माधव 109230. में त्रया न च वृशिभिः 2004 न स्वया राम वध्योऽयम् 82 20. 127- न स्वह तस्य जाने वै] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [न पश्यामि शिशोर्मुखम् न वह तस्य जाने वै 15 57" नत्व मम पतिर्बुवम् 73 20 न स्व मम सुत सौम्य 99 17" न स्वानुगन्तु शको वै 62 226 मत्वा स पभावनम् 106181 न त्वा वयमुपास्महे 66 344 न ददर्शान्तर घापि 19 14° नदन्त दन्तिना घरम् 74 39 नदन्ती द्विपयूथपे 36 23 नदतोऽतियारणे 112 d नदशिव महास्वन 108 26* नदन्मेघ इवोणगे 108 230 11294 नदन्मेघ इयोप्यान्ते 65 230 नदन्मेघसहस्रस्य 11037 न दारयोग बीन या 3544 नदीतीरं च सर्वश 107 30 नदीनामय सागरम् 46 नदीभि सागरस्तथा 31 37 मदी वृन्दावन वनम् 83 41' नदी सा याहुदा कृता 9 820 मदीस्रोतमि रोत्स्यन्ति 117 381 मदी गमामुपस्थित 100 300 न दुप्यतीय पत्नी ते 118 24° न देवासुरगर्धा 31 41 न देया क्षुद्रकर्मिण 109 47 न दोषापश्यन मदार 10684 नद्वारपधारणा 50 180 म धर्म स्यामालि... न धमाऽस्ति विशेषयात् 14 10 नधारयितुमुरमदे 42 4' मनदा नापि धरय 11228° मनांरचिरागद 50 31 नम सोधिनासयेत् 108 TI मम गया प्रोप्रमेत् 533 मनारस महापर 113256 मनावती भूमी 100 41 मासेऽद मुत माप 10 13. मनु माम विप. साप 111 म नूनं काय 23 11 माावसाक्षिण 33 26 म मरारिया भपेन 7811 #finaffa 07 11' मसन 109 ' नन्दकानन्दितकर 32 240 नन्दगोप गा। रात्रि 49 120 नन्दगोप तथा कुरु 49 नन्दगोपपुरोगमा 69 97676 10 नन्दगोप प्रसन्नी ते 31 31 नन्दगोप ममात्मजम् 497 नन्दगोपमुखा गोपा 56 19 मन्दगोपश्च दुर्मेधा 76 20° नन्दगोपसुतो योग 65 27 नन्दगोपसुतो मजे 65211 नन्दगोपस्तु तछुरवा 56 17" नन्दगोपस्तु सहसा 51 94. नन्दगोपस्य गोपारा 96 48° नन्दगोपस्य घासरत् 68 14 नन्दगोपस्य भवने 6524 नन्दगोपस्य भार्या 2 48 12 नन्दगोपं च गोपाथ 65 83° नन्दगोप पुरस्कृत्य 50 25° मन्दगोप वनेचरा 56 42" नन्दगोप हुदान्तिके 58 23' नन्दगोप सयारधव 5029 नन्दगोप मुदुर्मदी 51 120 नदगोपादय स्थिता 6027 नदगोपादयो गोपा 61 3 नन्दगोपाय ये निमं 56 16 नन्दगोपे च पाय 76 21 नदगोपो पृदाय 53 8° नन्दगोपो वियेश 5133 नदगोपो प्रजातिकम् 50 12 नदनस्ये मन्दर 522 मन्दन च महरनम् 9320" नन्दन मघवाशिय 18 मदन र पनौतमे 210 मदनोपमाननम् 53 37 मन्दिर र मंपादि 112 83 मन्दिग्पिादन 7025 मन्दिपापयशादिन 112 115 मम्पायरममापुनं 112 11. म परेग्मम गान 8211 म पपात दिश महीग 2311 म पपासा मदिन 03 मादाममपा 19 नपपामि famijगा 10 -128 - न पिरणा परा गति] श्लोकपादसूची [नरश्रेष्ठो जनार्दन न पितृणा परा गति 13 73 न पुत्र शम्बरस्य च 99 21 मता कृष्णस्य धीमत 107 750 नपुरानतिफमेत् 118 310 न प्रजहे ततस्तस्मै 82 220 नप्रमातु महाबाहु 97 380 म प्रवेश्यश्च सगर 15 B1 न प्राकम्पत दानव 38 47* न प्राज्ञायत किंचन 32 18 112684 न प्राणिनां भय घासीत् 31_131" न प्रावर्तन्त न क्रिया 3927 न बभूव भय तारक 108 40 न बुभुक्षादितो जन 59 11 न भर्य विद्यते लोके 107240 म भविष्यति मत्कृत 75 18" न भविष्यन्ति कार्दचित् 19 314 न भवेद्वञ्चना यथा 102 80 नभस पुण्डरीकस्तु 1076° नभस्य इव मूर्तिमान् 3500 नभस्यरुणसस्तीर्णे 7021 नमस्ये च नमश्चक्षु 54 31° नभस्ये जलदस्वने 37 310 नभस्यो नभ एव च 7 17* नभ पुत्रो नरस्य तु 10763 मम प्ररममाणस्य 189" मम सस्थान हि यथा 37 31° नम सूर्यस्तथैव च 7 130 न भात्येप नभश्चर 54 31' नमेतव्य द्विजश्रेष्ठ 101 10% न भेदं कुर्वते मिथ 416 न ममार च वीर्यवान् 56 13" नमस्ते पुरपोत्तम 104 16 नमस्तेऽस्तु गमिष्यामि 112 1120 नमस्यश्चैव पूज्यश्च 6 42° न मानुपा पिशाचा वा 31 41" न मामहसि इन्तु वे 5 49 नमा यातीति भारत 108 नमा धर्मा हतोऽहनत 970 न मा पश्यसि सयुगे 110 580 न मा भविष्य पप्रच्छु 11524° न मिथ्या मम तर्कितम् 99 38" न मृत्युभरतर्षभ 9 31 न मृत्युम्तय विद्यते 112 119 हरि पादसूची-17 न मृत्यु प्रभविष्यति 62 80° न मे कार्य नृपत्वेन 78 36* न मेघाना प्रवृष्टाना 61 340 न मेघा सचरन्ति च 112710 न मे यहुमतस्त्वेप 37 33 युद्ध विना देव 106 110 न मे वृद्धवंध कश्चित् 65 76° न मे श्रेयोऽद्य जीवितम् 107 284 नमो दामोदरायेति 63 22 न यक्षोरगराक्षसा 31 410 न यक्ष्यन्तीति शौनक 118 1nd नयता त्वा रणप्रियम् 77 25% नयनानि चकाशिरे 109 10, 114 न यष्टव्य न होतब्य 560 नयस्यम्बुजपनाक्षि 71 23° नयानामुपदेशेन 44 30° न युक्त जानता देव 44 15 न युद्ध प्राप्यते मया 106 336 न योग न परायणम् 6524 नरकच हत सख्ये 31 146° नरकच इतो भौम 96 67" नरकस्य जनार्दनः 9220 नरकस्य धन बहु 92 1 नरकस्य नियईणम् 91 380 नरकस्य निवेशने 92 161 नरकस्य पुरे रतौ 44 740 नरकस्य महाबलान् 91 44' नरकस्य महासुरम् 91 821 नरक निहत ज्ञात्वा 92 28° नरक मधुसूदन 9156° नरक साधु तर्कये 45 नरक पुरुषोत्तमम् 91 550 नरकाध्युपित पन्था 65 650 नरवेण समानीता 92 24° नरकेणेति न श्रुतम् 92 6° नरको दानरो हत 105 90 नरको नाम दानव 91 5 नरको वाक्यमब्रवीत् 918 नरस्य विष्णुरागत 30 530 नरनारीगणा सर्वे 79 3300 नरनारीसमुदिता 44 590 नररोषानुवतिना 784 नरभ्रेष्ठो जनार्दन 92 51 - 129 [न दोकुशलिन देवा चिकित्सितपाठात्मक्स्य हरिवंशस्य नरस्य कृत्वार्थतनु] नरस्य कृत्वातनु 31 650 नर चव नरोत्तमम् 10 नर चैव पुराणपिं 43 67 नर धर्मपरायणम् 78 13 नरा इव दिवौरस 67 60% नराच्या कपिरो जज्ञे 98 294 न राजधर्माभिरत 44 650 नराणामन्तरात्मसु 32 370 नराणामाध्यदेहिकी 77 23° नराणा च यो वर्णा 41 28° नराणा विजिगीपताम् 81 4 नरा धर्मप्रवृत्ताच 78 110 नराधिपसहस्रीधे 81 140 नरा मद्यामिपप्रिया 1168 नरा म्लेच्छगणे सह 17 300 नरा ये कामरूपिणीम् 96 11 नराश्यामिहोत्रिण 116 38* नराम्नदा भविष्यन्ति 117276 नरारत्या चव मा चैव 62864 नरा क्षुद्भयपीढिता 117 284 नरा श्रयिष्यन्ति बन 11723 नरिष्यत शत पुरा 921" मरिप्यन्तम्नथा प्राशु 92 न रजा प्रमविष्यति 112 1236 न र प्रत्यारश्यत 112 28 नरेनुश दिशा दश 32 161 नरी कम्यापि सहित 71 48" मतका गाया 9651 मदमानो महार 64 11' नर्मदापूलमेशकी 26 "" नगंशयामधारपर 980 मर्मदा मरितो यरा 13 63' नगंदा पिसावतीम् 2011 मएमीग्यतिरिष्यस 5.25 मरिमरितां यरा 52 26 म भ म कार्दचिर 22 10 माग पतिपदा 22 गर्गद्वारव गिया 10:s. मनापागा ' गरदाप गिर 2006 पपलीग 23:. म माहिर 233. मानो :. नवम्यामेव सजाता 47 34° न चय स्ववशे स्थिता 100120 नवस्य नवराष्ट्र तु 23 25* न वाद्यानेण दुष्यन्ति 44 41" न याचा साधित कार्यम् 66 10° नगःभ्राजते वपु 54 नवायास्तु नर पुत्र 23 23° न वारयामास मुनि 106° नवासु वनराजिपु 52 20% न विग्रह प्रहाश्चनु 32 360 न विनानाम्यद केन 50 16 न वित्तदरण घासीत् 31 129° न विदुस्त फचिरसुप्त 40 16° न विदु सोम देवाध 363° न विद्यते रोकगुरो 45 27° न विद्विष्टस्य जीवितम् 78 8* न विभाति विपर्यस्त 76390 न विरूपो भवेद्य 112 1971 न विव्यय स भूतारमा 108 86° न विष्णोभयसग्रामात् 106 24 न वृथा धारण मम 106 131 नवैते परिकीर्तिता 9371 मते पुरतर्षभ 9 न च राज्ञा कुपरेण 92. नवैश्च शिरिविष्टे 54 13° नवे स्थास्यसि पारपे 1157' नगप्रसेनस्य सुता 27 28" मध्ययस्येर भागिभि 10891 नव्याधस ये प्रजा 3 म सना शागितपुर 107 32. म शश्यमन्त ते 7500 गश्यमेतमिया 7820. श्य विनर तान73. मशिंग यमेर 0211 मशहयामाग्रगामराम्11' मभिर देल्या 1081 मगुप₹7032 मतपयम पापग3143. नमा गुग 100" रन मन 31 म सभीfuTOG an मग 37 -130- म शेकुश्चालितु दैत्या ] श्लोकपादसूची [ नागाना भरतश्रेष्ठ न शेकुश्चलितु दत्या 36 18° न शेकुश्चलितु रणे 385 न शेकुश्चलितु त्या 37 sd नकुश्चष्टितु प्रजा 2 350 नोकुस्ते विचेष्टितुम् 35 101 न शेकु सुसमच्युतम् 40 236 मशैलस्याश्मवर्षिण 61 3 न शोभते विकुण्ड 77 8' न शोप स्वमिहाहसि 103 10 नष्टदावानिधूमानि 54 5 नष्टमप्स्स्वि मोहिता 1436 मष्टवर्षावसिक्तानि 5450 नष्टवीर्य महौजसि 112 42 नष्टशोकभयो मोहात् 918 मटशोका वय कृता 113 670 नष्टसझा विचेतस 12220 नष्ट प्रतिरमेश स 23 1630 नष्टा बाणपुरात्तदा 107 863 नष्टे देवासुरनरे 31 17° नऐ धर्म प्रजापति 13641 नष्टै स्थावरनामे 31 17 न स दौरारम्यमामुयात् 21 37 न स शोचेरफताकृतम् 426* न सस्यानि म गोरक्ष्य 6 11 न सपतन्ति रागमा 61 14° न सरम्भान बारम्भात् ।।527 न सा वुवोध तत्तेन 50 gm न सा शोचितुमईति 69 154 नम्ततोऽथ स शब्दवत् 64 170 नस्पृशन्ति कदाचन 28 451 नस कम्पयते राम 82 180 नसकिंचिस्ववानन्ति 12 200 न म दारान्स विन्दति 85 न स्याता वैकृती पुन 10 160 न स्यु लोकसेतब 45 270 न स्वादु सोभाति नर 118 220 न हतो वासुदेवेन 89 49* नहि कर्म विधीयो 397 न हि कश्चिप्रमाण ते 103 11. न हि तवचन मिथ्या 107 43" महि तस्स कुन देवि 107 48* न हि ते प्रमुखे स्थातु 109 83° महि ते शान्तिरन्यथा 15 41' न हि त्व जनितो मया 9923 न हि व शभ्यरात्मज 99220 न हि त्या यादवा वीर 60 4 न हि धुन्धर्मदानेजा 9 60 न हि पूर्वविस वै 6 10 न हि मे तृप्तिरस्तीह 10120 न हि मे स्थास्यते मन 112 Bt" महि योगगतिर्दिव्या 13 73° नहि राज्येन मे कार्य 78 33° न हि शक्रोमि पार्थिव 961 नहुपस्य तु दायादा 221" नहुप प्रथम जझे 21 11 नहुप शङ्खरोमा च 3 90% न ह्यन्यस्य भवेच्छति 109450 न ह्यन्येन तमध्वान 10978 न घय प्राकृत कश्चित् 107 51* न ह्यय याहुयोधाना 75 180 न झल्पवीर्याय शुरु 157° न झस्य निपु लाकेषु 107 764 न यह प्रतिद्वेपी 113 360 न ह्यासानियता धुद्धि 73 26° माष्टमुपागम्य 106 90 मारपृष्ठ विधीयते 75254 नाकमार्गादयनय 32 360 नाकम्पत तदा वायु 11271° नाकालधर्मणा मृत्यु 41 40 नापुर मारतो क्यौ 31 1290 नाकृतज्ञा न वा लीबा 109 41° नारोऽभ्युपपद्यत 29 130 नानुभ्यासर्वभूतारमा 103 230 नागच्छेता यथाकाल 65 94° मागच्छेदन्यात 10+8 नागभोगश्च देष्टित 108 95* नागयूथायुतोपमा 61 1 नागलोफस्तु दारण 62 30° नागपीथी च जामिना 3 280 नागकन्धगत परे 33280 नागहस्तैरियोति 576 नाग कुपरयापीड 31 145° नागा इवान्ये गगने 61 100 नागा दितिनदानवा 2 48 मायानामुपरिष्टाद 62 24 नागाना भरतश्रेष्ठ 6336 a 131- नागाना वासुकिं चके चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ नापि तत्सयसो हितम् नागाना वासुकिं चक्रे 470 नागायुतयरा वेचित् 43 711 मागायुतबगे महान् 23 480 नागायुनसममाण 907 नागा सर्पा सुपर्णाश्च 13 42° नागे वे दमितं मया 5555 नागेषु च इयेषु च 81 680 नांगैश्च श्रूयते दुग्धा 6 220 नागेश्वाम्भादमाशे 81 75° नाप्तित्रिमते सनी 113 31° नाचचक्षे विवम्बत 8281 नाइलया महाराज 7 29° नातिनामियाभवत् 830 नातिदीर्पण कारेन 426° नातिदूरे गिरिर्महान् 52 2 नात्मपक्षमुसायद 44 65 नारमराज्यप्रियकर 44 65° मात्मभारिपु नायेषु 44 42° नात्यर्थ धार्मिक्तात 1024 नात्य धार्मिकोऽभवत् । माम पार्या विचारणा 5130 नाप फार्पण्यमाधिता 77 134 मायबादिकरशन 115 220 नाय पणे प्यारिधते 10926 नायडरमा महापट 73" नादय तो दिशा दश 82 161 मादया दिश स; 81 21 मादिनासु ममात 55 13 नाश्याशरण्या 112 206 गादा प्रतिमादितम् 65 55 मापना विरेत 6063. माधर्मनाम्भगियति 113 80* माधोगमाम्भविष्यति 10 111 माभ्यगासोपारी 279 मानविययि मरिप्रयम् 107 30 मायामपरादा 31 130 मानरिह दुरपा 2330 गारिभूषितम् 112 56 मानादिर भिया"ला 0 गाभिरापित 3126 मानासान, मागासा-ि10st मानायुमा 36 नानापक्षिगता पेचित् 33 25° नानापक्षिसमाकुलम् 49 20° नानारण्यसमाकीर्णा 86 45° नानाप्रहरणाकोण 91 46° नानाप्रहरणा घोरा 3180* नानाप्रहरणोद्यतम् 108 352 113 130 नानाप्रहरणोयताम् 1126 नानाप्रकरणोद्यता 3500 नानाप्रहरणोपेत 112 56* नानाप्रहरणोपेत 108 64° नानामाल्यानुलेपना 31 861 नानायुधविशारद 108 21 नानायुद्धविशारदा 108 324 नानारत्नविभूपितान् 46 13' नानारत्नसमाचित 13 144 नानारपधरास्तु ते 109 18" नानारपाणि सर्या 113660 नानारपासर्वान् 29 24 नानारपा भयायदा 110 204 नानारपैरियाद्रिमि 93 33 नानारूपैर्भयानकै 1104 मानायर्णा सहस्रश 131 मानावर्णमहातर 91 41 नानायेपधरा देत्या 31 86° मानायेपचरभीमे 8520 नानाश महाजपा 31800 नानाशमोधराकरा 108 18" मानाहतोश्मभि कधित् 30 26. मानिस्दा दुमगगै 30 28 मातुबानाति मे गुरु 45 231 मानुयाम्पति राजान 0277 नानुमयुगदा लिन 82 28 मात पाय हिकमंगम् 105 मामपप्रभाव 1015 मामा विपत भपम् 10000 माम्यगन.' मम्पप्रन विध38Bs माया मार्गापमा ति 11022 माम्पो मापांमदिन 2018 मम्मी मारापमान 105 मार गिरा 32 3 माFILERT 0 11' माharm Enा 82 - 13:- नापि ब्रह्मयोऽन्ययाः] ग्लोकपादसूची [ नाराचैर्मागास्मभिः नापि ग्रहार्पयोऽव्यया 40. 15. नापि यौन राक्षस: 109 15. नापुत्रवादाशतद. 27 21" नाप्य राज्परालम: 78 33. नाप्याश्चर्याणि सन्ति नः 100 57. नाप्याश्चर्योपशोभिता 100 42. नामविष्यत्वप्रियार्थम् 21 39 नाभागस्तु श्रुतस्यासीत् 10 67. मामागस्य तु पु द्वी936%, नाभागस्य तु भारत 921' नाभानेदिष्ठससमा 9 नाभिकण्ठान्तरस्थस्तु 30 440 नाभिभान्ति दिशो दश 54 39° माभिमध्यात्समुत्थितम् 40 11", नाभिमध्यारसमुस्थिते 42 21. नाम्यरण्यां समुत्पलं 30 16. नाम्यवर्तत तं देशं 83 290. माभ्यां रिल समास्थिती 31 89. नाभ्यां पित्तं प्रतिष्ठितम् 30 43d नाम किं चास्य भामिनि 107 740 नामगोत्रादिकीर्तने. 11 39. नाम चास्याः कृतं पुर्या. 865° नामवस्तानिबोध मे 25 64. नामधेयानि चाप्येषां 16 19. नाम नवा बभूप है 85 23. नामनी तु तयोश्चके 42 18". नामभिाहरन्ती च 58 30 नामभिस्तेऽभवन्मृगा 16 23. नाममि कर्ममिश्चव Ig नामभि कर्मभिस्तथा 164 नामयंवरण क्षितिम् 58 24. नामयामास चामकृत् 71 42. मामयामास लीलया 16. नाम राजेत्यजायत 5294 नामर्पयत समुद्धः 57 14° । नाम विधावितं मुबि 78 184 । भारतेनापि मृप्ति स्पा 15 13. भामैतम्मे प्रतिष्ठितम् 12 16. नाना फौमोदकीति सा 81 64. नाना तेनैव सशित. 23 114. मानाद्वारबती नाम 84 29. नाना पूर्वमिति श्रुति 1.24. नाना मायावती नाम 99 6. नाना मित्रसहोऽभवत् 1010 नाम्ना रुक्मवतीति सा 89 101. नाम्ना वसुमिति ख्यातम् 13 26. नाना वृन्दावन नाम 52 21. नाना शामिति ख्याते 81. 83°. माना शीलेन कर्मणा 15 34. मायं देवन गन्धः 109 B5". नायं देशो निषेव्यते 55 50. नार्य वक्तं दोषम् 108 920 नायं वध्योऽन्यथा भवेत् 108 76. नायं सरक्षितुं काल 109 760 भारदस्तानुवाच ह 315. नारदस्त्रिदिवं गत. 97 42". भारदस्य वच श्रुत्या 45 1.67 689.99, 41. भारदं देवगन्ध 100 41. भारद. सगमो मुनि 67. 52. नारदः परमेष्ठिनः 3 नारद प्रत्यदृश्यत 44 6. 100 18 नारदः प्रहसनिय 109.644 नारदः प्राबवीदिदम् 376 नारदान्मधुसूदन, 85 ॥ भारदाय ददौ प्रभु 109 666. नारदायं कृतो मया 45 18. भारदे तु गते स्वर्ग 100 86. नारदेन निवेदितम् 85 45. नारदेन महर्पिणा 3 14. नारदेन महात्मना 109 68* नारदेन समागत 65 47'. नारदेन हि गर्नेम्य 46 37 नारदेनैव चोदिता 3 10. नारदे मुनिपुगवे 100 20. नारदोऽकथयद्विभु 25 136. नारदोऽग्निशियाकार 100 19. मारदोन विशारद 48 14. नारदोऽपागमत्सभाम् 96 220 नारदो मथुरा ययौ 46. नारदो मा यदुतवान् 65 45*. नारदो वै न्यवेदयत् 85 16. नारसिंहमत शृणु 31 311. नारसिंहेन वपुषा 31. 65', भाराचाना शतेन स. 112 164. नाराचैर्विभिः शित 87 68. नाराचैर्मागस्तिभिः 87.72 -133 - नाराचैर्मुसलायुधः] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [निकृत्ताg कामि नाराचैर्मुसलायुध 87 720 नाराचैश्च त्रिभि कुन्दः 88 24°. नाराच फैशिकान्यहून् 87 70. नारायणगुणारमझम् 12 11' नारायणपरायणम् 1 180 नारायणपरायणा 37 181 नारायपितामही 42 220 नारायणमिवापरम् 36 37 . नारायणविसर्ग स: 1 390 नारायणश्च भगवान् 42 320 नारायणं नमस्कृत्य 1.0. नारायणं विभु देवाः 31 00 नारायणारमशाना 1 30° नारायणी चन्द्रसेना 897'. नारायणेन कौरव्य 969". नारायणेमं सिद्धार्थम् 45 11" नारायणे समावेश्य 43 75. नारायणो धनन्तारमा 32 3'. मारिकेए पनायुतम् 84 21 मारीप्येवं सुदारुणम् 77 36. भारमश्च नरोत्तमी 28 331 मार्जुनस्य रिपु कश्चित् 62 96. माय जानामि कि विदम् 50 28* नायं. पररंगता 1621 मार्यों नात्यपरन्मन् 31 133. माईसे देय हा में 112 90° भारमरमविद कचित् 22 ।। मालमेकस्य तरसर्वम् 22 38* मावशा सनकांप्पा 7220 मात कदाचन 23 30' मारशासन 993 10102684291 मापमान 2: मापनिसावारिया 100 मारम्पारमारत 110 Gok मानिस मगिर 28:0" मागमपमा 311 मापोह पाप्पु 20 पापि नाप्पा 100 मपि पारंग.0000 मासमनाती पा2 33. मामाथि माविमामि गुमान् ।।2 .. मार लान B... नाशाय वचन तेपा 31. नाशायामितविक्रमः 3 11. नाशिभ्यस्वायतस्य वा 4 24. नाशुचे क्षुद्रमनप्स. 4 24. नाशुद्धकर्मा नायज्वा 27 21. नाशुभ प्रामुयाकिचित् 113 82. नाश्वयं द्रष्टुमुरसहे 70 36. नाधूयन्ताशुभा वाच 31 129 नासत्यश्चैव दसच 8 39. नासमौजाश्च तावुभौ 287 नासस्या नातृणा गाय 59 11". नासहसातायुध 27 21. नासिकाया विरस्वत.838 नासीन भविता कचित् 97 33. नास्ति कश्चिद्वयतिक्रम 107 33'. नास्ति कालस्य सस्थितिः 48 124. नास्ति पिचिगप विष्णो 412". मास्तिस्यपरमाथापि 117.8. नास्ति ते तपसानेन 3568. नाति देयकां भपम् 46 23. नास्ति धन्यतरोऽरयुतात् 11370*. नास्ति योग शिना सिद्धि 35 39. नाम्नि रोकसमो गुर 4430". नास्ति हो यसोमूर 35 39. नाति म्याधिमपंढर 24. मानि सामन्नत भयम् 4:31. मामि मिदि पिना या 35 39. मानाति धोपाप 23 31" मायामयम् 11373. माम्मि धन्या न चा 100. मारम्पायों दिमागम 100 . गाया जातील मुर 3 10 माइसा सापालापा 2010 माईजीपिणमुरादे 100 माह धम्या दिम 100 माई ग्रेग पुवाया 9: मानिस 1335 मा भारदिप 40. मार स्पर्म पर ना ना मिमा मन ममा 233. महतjarrior.. 131 निहत्ताई पाशुभ श्लोकपादसूची [निपेतुस्तारका भूशम् निकृत्तशर्बु शत्रु 24, 26. निकृत्या तं जिगीपन्तः 89.25% निक्षिप्तशत्रः पृथिवीं 22. 20*. निक्षिप्य पितरि प्रभाम् 35 62. निखातोन्ट्रिनशाखाः 53. 22. निखिलं भावयस्व नः 83. 48". निसिलं सर्पमादितः 19. निगृहीतश्च पेशेषु 76 32. निगृहीतस्तदाई तु 15. 46". निगृह्य च तदात्मानं 89. 48. निगृह्य तं महात्मानः 5. 15. निगृह्यमाणरतीक्ष्णाभिः 89 33°. निग्रहार्थं सुरद्विपान 43 67. निराशावपि ती मम 65, 94. निजतामितरेतरम् 82 23687.73%. निधतोपद्रवं गवाम् 62. 33. निमगावै सगोपालमः 67.6% निनपुत्रौ यभूयतुः 10. 72. निनस्य द्वौ बभूवतुः 28 1. निजग्राह ततः क्रोधात् 96 50. निजघान महाबल: 97 24. 11279 निजधान महाबलान् 108 41. निजधान महामनाः 31. 119. निजधान महासुरान् 91.41" निजम रणगोचरम् 108. 224. निज देवसांस्तान 36 25. नित्यपुष्पधरं दिव्यं 92 64". नित्यमद्भुतकर्मणा 87. 13'. नित्यमम्युङ्गिनात्मना 66 13. निस्यमाश्चर्यदर्शने 100 394. नित्यमाश्चर्यविश्रुता: 100 63'. नित्यमाहयदर्पितम् 38. 42. नित्यमेव न मृप्यते 85.27'. नित्यमेव विवस्वतः 8.' नित्यमेयोपशोभिताः 23 1476. निस्ययाजिनि पातिते 89.61. नित्यं कृष्णे महात्मनि 9672, नित्यं क्षुद्रा हि दानवा. 3877'. नित्य छनचरो मम 76 21. नित्यं तन मनोरमे 65.67 नित्य पर्पसु पूजिता 45. 48. निस्य भक्तानुयायिनः 109 50, नित्यं मलिनवाससम् 69. 10. नित्यं मांसलिप्रिया 47 51. नित्यं श्राद्धातिको द्विजः 169. , नित्यं सदसदात्मकम् 1. n. नित्यं सानिध्यता चैव 106.6. नित्या भूतेषु भारत 2 3 निदर्शनार्थ गोपानां 51. 19. निदर्शनार्थ गोविन्दः 85. 31. निदाघ इव पावकः 36 491, निद्रया कालरूपिण्या 47.24. निद्रया चाभिभूयते III 4. निद्रया सहसाविष्टा 48 3. निद्रा तं कालरूपिणी 40 86. निद्रान्विततनुर्मुहुः 110 63*. निदामाहारयामास 3 106°. निद्रामेव गृहीतवान् 85. 41'. निदायै प्रददौ तदा 47 256 निद्राविधान्तलोचनः 40. 44. निद्रा सर्वस्य लोकिको 40. 29". निद्रति जरति स्थिता 40 26. निधनाय मति चक्रे 7432, निधने हि प्रसूतस्त्वं 5 10. निधानममृतस्य च 34 25% निधिस्तासामभूदेवः 20 18. निधीनः केशवस्य सः 86.61. निधीनाज्ञापयामास 88 61%, निधीनामधिपः प्रभुः 34 164 निधीनामुत्तमं निधिम् 86 58. निनेदुर्हिणतत्र 61 18. निन्दती तस्य तं घरम् 73. 30'. निन्दनीयो महीक्षिताम् 66 . निन्दामि कृपणं वच. 66 18. निपताम्बुजेक्षणः 56 24. निपपात दिवं त्यक्त्वा 38 49°. निपपात महीतले 106 43'. निपपात वसुंधराम् 20 8. निपातानन्तरं शीघ्र 72 19. निपानश्वापदापीडां 55 38. निपीड्य यदुनन्दनः 76 43'. निपात्य श्रवणान्दस्त: 66 1', निपीतं शशिनं यथा 77 39%. निपुणौ सूतमागधौ 2. 23. निषेतुर्धरणोतले 38. 531. निपेतुस्वारका भृशम् 106.444. । -135 निपेतुः काश्चिदातुराः] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ निर्दग्धो र मुनस्य च 1566 निपेतुः काश्चिदातुराः 61 22'. नियि पत्रमचयः 55.18. नियोध गदतो मम 7.24 नियोघ तन्मे गानेय 13 2. नियोधानागतानि मे 7 384. निमित्तं भविता वय 115.34". निमित्तानि निशामयन् 106 50'. निमित्तान्यशुमानि ते 66 23. निमित्तान्यशुभानि वै 66 314. निमित्त तुमईसि 11634 निमिहंस दानगे 97. 10. निमिष मणश्रेय 27. 4. निमोरितगुहामुसः 61 46'. निमीरिनाक्षो व्यसनत् 112 102. निमेपमायमिव मे 115 11. निमेपान्तरगामिभिः 76 13t. निमेपान्तरचारिणी 97.8. नियप्रेयं मद्धार्थम् 66° नियतं दोप एवायं 106 08. नियन नियसा पदाचारिणी 107. 354,38. नियते: परमर्षिभिः 47. 16*. नियन्तुमुपचकमे 87 19. निधर्मगुरहान 65 66. नियुनाव पुनः पुनः 8. नियुनामनुलेपने 71. 26. निपुणा येश्मकर्ममु 88 10. नियुश्यम्तो प्रदेशेषु 86 10 निपुण्या पर्याय: 15 12. नियोगगरारम: 53 25. नियोगागिन: 25 11.85 15. नियोगात गुरोम्नस्य 10 ". रियोगापिन्स 00.20 नियामी गौतु यः कृतः 62 06'. नियोजय महापात 8058. निरमा देवी 1381. निरपेशाम1.7.25'. नियम गुन 11.15'. निगमरमुर 0736. मितिमा गरम् 12. FARIामा ने 7.1.1 निम् ि41.:'. म निरापार 52 : निरालम्ब इवाभाति 61. 47. निराशा मत्पराजये 106 g'. निराहारा बहुतिर्थ 19.5°. निराहाराः कृशोदरा: 61 23. निराहाराः क्षमायुक्ताः 112. 121". निरिन्धनामनिमयीं 35. 69. निरीक्षन्ते वराङ्गनाः 63. 23. निरीक्षस्व यथासुसम् 49. 8. निरीक्ष्य पृथिवीपतिः 22.20. निरीक्ष्यादाय कुण्डले 91.68. निरुच्यन्ते च देहया: 23. 164. निरुत्पाता च यमुधा 41. 14. निरद्विमतपश्चत 9. 81. निरुप्माण इवामयः 36 10. निरोधोत्पत्तिरुच्यते 3. 56". निणः स मुखी भवेत् 25. . निर्गुणो निरपनमः 117. 11'. निर्घातश्रामरन्महान् 106. 45*. निर्घातानन्तरं किंचिन् 75. 14. निर्पणादै शिशोर्षधे 49.6. निघोंपः सुमहानभूत् 92 37. निर्जगाम गुहामुसात् 85 61. निजंगाम ततोऽक्षणात् 51. 14'. निजंगाम नियेशगात् 48 20. निजंगाम सभाद्वारा 89.43. निजंगामासुरः कमः 405. निर्जलं गोकुठं या 65. 30. निर्जराम्भोदसा: 37.48. निसारसप्रमः 37.48. निस्तिो भगवान् 105.10. निर्षितः स नराधिर: 89. निर्मित सहया12.3. निर्मिताः पापाय 105.13. निर्मिने नगने पर्षे 301.. निर्मिती पाहुरीश 100 . नितिो यमुना 00.33. निर्षिय युपर रणे 156. निषिITH: 07.26. निधिय पुरसम्पा: or.ar. निवि पुरुसोजमा '. मिमग 30. निhिe ot. fringilla Is «.

निदस्युरभवन्मही] लोकपादसूची [निवृत्तराः कालिक निर्दस्युरभवन्मही 31. 1336. निर्दहन्सर्वभूतानि 35.59. निर्दिष्टः शाधन्वना 93. 46. निद्वा निष्परिग्रहा: 164. निर्बिभेद कलिकराट् 87.66'. निर्बिभेद ततो वाणं 108. 74. निर्षिभेद रणे कृष्णः 112. 62°. निर्भत्स्य॑मानो यष्टः 69. 12. निर्मथ्य नाशिताः सर्वे 3. 10, निर्मन्युः कृतिरेव च 16. 19". निर्ममन्य ययाचलान 81.69". निर्ममेऽन्यत्पुरं महत् 88. 32'. निर्ममे पुरुषश्रेष्ठः 84. 33. निर्ममे यज्ञसिद्धये I. 35. निर्ममे विश्वमीश्वरः I. art. निर्मपूररुतं धनम् 59. 32". निर्मयूररतर्थनैः 61. 47. निर्माणभूतमिरिणं 57. 11. निर्मितं द्विरिप्रजम् 87. 18". निर्मित विश्वकर्मणा 94.7. निर्मित स्वेन तेजसा 85.561. निर्मिती विश्वकर्मणा 429, निर्मितां स्वेन पुत्रेण 38.24". निर्मितविश्वकर्मणा 93. 34'. निर्मुक्तजलदे भृशम् 59.50. निर्मुक्तरिय पनगैः 34. 314. निमोहः सत्यवाकृतिः 7. 25. नियत्नचरणाकारः 56. 12°. नियत्नचरणोऽभवत् 67. 37'. नियत्नाच शरैः कृताः 35. 10', नियंयुर्यादवाः सर्वे 84. 170 निर्ययो कमलेक्षण: 100. 116. नियंयौ च तदा बिलात 28. 29. निर्ययो चेदिराजः सः 87.50. निययौ स महाबाहुः 109. IT. निर्याणसदृशी क्रियाम् 77.40'. निर्यातयतनलोश्यं 38. 63*. निर्यात्य जगतो जलम् 62.51'. निर्यान्ति विजिगीषवः 59.51. निर्याम सपदानुगाः 84. 14. निर्योगपाशेरासती 584. निरसशिशुपुंगवम् 64 11'. निर्वाणाझारमेघाभः 64.2. निर्वाणानारवर्षसः 32 19. निसियत मे गृहात् 118. 20, निर्विकारोऽद्य दृश्यते 108. 16, निविटरमणीयेषु 59 39. निर्विहंगमिदं शून्यं 52. 14, निर्विहंगरुतः 61. 47. निर्विहारस्य भीतस्स 116 23. निर्णयपा न संशयः 35.73. निर्वृत्तमसिकाले यत् 71, 47'. निर्वृत्तं लोकसाक्षिकम् 35. 65. निर्वृत्तं सुमहद्युद्ध 109. 71". निवृत्ते जनमेजय 113. 81". निवेदाच तमेवाधैम् 18 3. निर्वेदादात्मसंयोधः 117.. निर्वेदो व्याधिपीडनात् 117. 4. निरो निर्धतः क्षान्तः 16. 19°. नियंजनमियाशनम् 52. 14. निर्व्यापारः कृतस्तेन 37. 48°. निलिल्ये शकटाक्षेसा 50 21. निवत्स्यन्ति किमाचारा: 117.1'. निपत मधुराधिप 1 34. निवसन्ति यथासुखम् 106. " निवसन्तु यथासुखम् 61544.65. 90'. निवसन्त्यो यथा देव्यः 92. 25°, निवातकवचाः कुले 380. निवातशरणं गवाम् 61. 53". निवातेषु च देशेषु 61 54". निवासकृतलक्षण, 74 156. निवासश्च कृतम्तय 93 06. मे बदहा 45 150. निवासं समरोचयन् 6. 12. निवासाय दिवा प्रभु. 55 22, निवासो द्वारका देवैः 91, 22, निवासो यदुपुंगवा: 84.7. निविशत्यां महामणिम् 28 12. निविष्टः कुरुनन्दनः 102 2. निविष्टा मन्त्रयामासुः 81. 28, निविष्टा यमुनातीरे 44 21. निविष्ठां सागरान्तरे 100.64 निविष्टस्तानराधिपान 81, 1. निविष्टेन विराजितम् 34. 40. निविष्ट विषयश्चैच 44.59. नित्यशत्रुः कालिङ्गं 87.66. निवासं तुन हरि. पादसूची-~18 197 निष्प्रयरनम्वुरानना ] श्लोकपादसूची [ नीलपीताम्बरधरा निष्प्रयत्नखुरानना 61 .I निष्प्रयत्न सुरानीक 36 290 निष्प्रयत्न स्थितश्चापि 108 880 निष्प्रयत्न स्थित स्वस्थ 108 84° निष्प्रयरनायुध कृतम् 35_111 निष्प्रयत्नास्तत स्थिता 103 21 निष्प्रयत्नेषु दैत्येपु 36 380 निष्प्रयोजनमारुतम् 52 14 निष्प्राणनकराविद 35 600 निष्प्राणसदृशाकृति 35 11 निसुन्दनरको हतो 96 1 109 40° निसुन्दमयपोथात् 91 450 निमुन्द सगणो हत 9666 निस्तोयमिव पङ्कजम् 777 निखिंव चर्म चोत्सष्ट 108 420 निदतस्तद्रनीहि मे 15 30 निहतस्य पिनाकिना 67 41" निहत समरिष्यसि 112 55d निदवामित्रसामन्त 68 30° निदतामित्रसामन्त 100 3° निहता युद्धदुर्मदा 75230 निदताश्च नृपा' सर्षे 105 22° निदतो दक्षिणापथे 105 11 निहतो धूतमण्डले 89 49 निहतोऽरिएक क्षिती 96 380 निहतो वासुदेवेन 96 39 निहतौ च निराशौ च 31 114 निहती शाङ्गधन्धना 97 90 निहत्य त महाकाय 9780 निहत्य तान्महाबाहु 87 '71' निदत्य दानवा सर्वान् 21 23° निहत्य नरक भीम 92 197 28° निहत्य पुरपच्यान 91 500 निहत्य मणिरत्न तम् 23 16° निहाय स्खमकरच 26 100 निहायामुरसत्तमम् 99 28 निदन्तु पाशवी 74 230 निशन्दस्तिमितस्य 4 81 !' निन्दस्तिमिते नने 75 नि शन्दस्तिमिते तस्मिन् 81 320 निसन्दस्य महोदधे 8131 नि सन्दे स्तिमिते तस्मिन् 42 13 निशेषाणि रणे रणे 109 41 निश्वसञ्जम्भमाणश्च 110 630 नि वसन्त मुहुर्मुहु 109 10 नि श्वसन्तो व्यतित 109 18° निश्वस्य सुचिर पुन 109 24° निश्वासपरनेरिता 40 13" निश्वाप्साङ्गारवर्षिणी 6626° नि सङ्गभग्ना महतीं 108 511 नि सङ्ग तमसावृता 109671 नि सज्ञ पातयामास 1280% नि:सपात यधा भवेत् 81 360 नि सपात कृत पन्था 67 12* निसामध्ये च पश्यामि 11525% नि सारा सह वन्धुभि 11723 नि सारे क्षुमिते लोके 117 23° नि सृता पृथुमूर्धान 61 40° नि सूतेति ननाधिप 85 23° नि सृते साश्रुरुधिरे 75 43" नि स्वाध्यायवपदारा 550 10 436 117 16" नीच नीचेन कर्मणा 73 214 नीचा शर्करवर्षिण 11626° नीडरथेषु विहगेयु 68 30 नीत सलिलयोनिना 392 नीत स्वा दिशमाविशत् 37 50d नीतिशाखे च पारगम् 89 9 नीतेषु च यमक्षयम् 47 28° नीतो याच्या दिश रिपु 78 18 नीपसन्दरमालिनी 558 नीपस्यैक्शत तात 15 19° नीपा इनि समाख्याता 15 130 नीपा दीपा इवाभान्ति 73 160 नीपानन्यांश्च पार्थिवान् 15 370 नीपानामनामनृप 15 28 नीपानामीश्वरो राजा 1634* नीपानां कीर्तिबधन 15 20' नीपातकरणोऽभवत् 15 36* नीपार्जुनकदम्बानां 54 330 नीपो नाम महाराज 15 35 नीयमाने हि तवामीत् 93 58* नीयसे नयकोविद 7758 नीरामयिया सैन्यानि 59 51 नीलकुचिनमूर्धजा 87 374 नीलचिग्रावणेश्च 55 150 नीलपीताम्बरधरा 48 30 1392 नेधनेन चितामिना] लोकपादसूची [ पमुद्रुतगतिं यथा धनेन चितामिना 78. 44. धनेऽस्मिन्कयं लोके 30 53. नैनं गुणमाप्तवान् 9. 18. नैना द्रष्टुमपीच्छामि 118 21. नैराश्येन कृतो यत्नः 48. 394. मैतान्प्रत्यपादयत् 9I. 3. नताश यथामुख्याः 91. 18. नेतो नरको नाम 91. 34. नैव तासु मनः कृथाः 13. 10", नेय दारुणतां प्रजेत् 66 16'. ने धर्मो विलुप्यत्ते 107. 36". मैवमेवं प्रहर्तव्यम् 110.72 नै वर्षशती भवेत् 65.71. नैव यस यत्तारा 20. 30. नव शून्या न घाशून्या 17. 316. नेत्र स्थानमविन्दत 113. 16. मेव स्थान ददाम्यहम् 56 36. नेवं विधमहं दोपं 109 30. नैवविधेषु पासेपु 107. 28°. नैशमन्तर्दधे रूपम् 70 3. नेशप तमसः क्षयम् 34. 24. नेशाकरी यारगी 136 26. मैशाफर रश्मिजाले 70 1. मेशा मयति लोकम्य 40.29. दो तमसि रोहिणीम् 48.6. नैप कल्पविधियः 11. 19', नेर रटा सतां विधिः 44. 34. नेप धर्मः सतां मत: 5.01. मैप भावोऽति पारि 1911 नेपादियः परिश्रुत: 24 27. नेपामविदितं किंचिन 41. 111. मेरोऽर्थ. शश्यतेऽस्माभिः 107.61. मैछिन विधानेन 78 43. मोत्तरे यरपत 71.21. मोत्तर प्रत्यभारत 65.986. नोसर विदथै एचित् 109. 25*. नोसरं प्याजदार 89. 39. मोजनीया भूतानां 41.8", मोपायन्ति योषितः 118. 37. मोपाध्यायगण ते 115.30'. मोयाय स सदा किंचित् 89. 45. मौरियामधीलया 41. 18. योषध मुनामा 27.25. न्यग्रोधं पर्यताकारं 55. 22. न्यग्रोघं शाखिनां वरम् 58.6. न्यग्रोधो योजनोच्छ्रितः 52.26. न्यकुभिश्च वराहैश्च 92 40". म्यपीडयद्भुजवलयेन संयुगे 110.73'. न्ययोजयत सात्यकिम् 29 8". न्यत्सद्दानमो भुधि 31 37. ज्यवसन्त बहिश्च ते 87. 30*. स्यवसं पूजितस्तत्र 101.6°. न्यवारयत तूर्याणि 75. 35°. न्यवेदयत कृष्णाय 89. 47. न्यवेशयदमेयात्मा 94, 22. न्यापीदच्च व्यथान्वितः 88. 144. न्यस्यन्तामोदनस्य च 60 12. न्यस्य पुत्रमुसे रष्टिं 56. 23, ग्यदनत्सारथि चास्य 87.63": न्यायवृत्तान्तशलाः 65. 12. न्युज पयोधराकासी 50.6. म्युःजानि च रिमानानि 32. 16. न्युजाः फेचिच जज्ञिरे 37. 28". प पक्रकेदारपशिपु 62 52. पानम्यवहारेण 117. 35. पक्षमादो भविष्यसि 67.64. पचतुण्डमहारेस्तौ 12.77. पक्षप्रहाराभिहतान् 1106'. पक्षयातेन सागरम् 113. 12'. पशाम्यां धारपग्राम्यां 34. 14. पशाम्यां पक्षिगरः 6271. पक्षा मामानया क्षपाः 104, 204. पक्षिण. प्रियदर्शनाः 92 14. पक्षिणः सम्प्रदक्षिणा: 49. 12. पक्षिणामिय शुश्रुये 87.764 पक्षियरयेगशन 34.. पक्षिभिश्व विराजितम् 33. '. पक्षिम्याहारसंकुले 70.1'. पच्छन्नमूर्धनम् 70. 25. पर्व मुनिमरम् 47. 40. पानानि च पनानि 59.41. पानानि जलागमे 109. 104. पजोगिपरचमा 55 3. पभून हि तिमिरं 103.20. पतगति यया 62.22 - 141 पतिमुपलभते व सत्सु कन्या ] श्लोकपादसूची [पप्रच्छ गृपमध्वजम् पतिमुपरभते घ सत्सु कन्या 18 47". पतिरेकः परा गतिः 77. 14. पतिलोमेन यं गड़ा 2376°. पतिवंशे ममाव्ययः 73 34. पतियतागुणोपेता 88. 36. पतिव्रता घश्येष्टा च 9.84. पतिव्रता महाभागा 114,9. पति यान्ति समुद्रगाः 59 376. पतीनामपरित्याज्या: 77 11. पतीन्सुतान्वययित्वा 116. 39". पत्तयश्च सदसशः 8194. पतितस्त्वपर दैत्याः 33 26. पत्तिमिलिगताम्बरैः 81 18. पत्तिभि. सामैरिय 81. 23. पत्नी कृष्णस्य भामिनी 88 36', पत्नी केकयवंशजा 1021. पत्नी तु यादवी तस्य 10 33°. पत्नीत्येवं व्यथा भवेत् 99 451. परनी दत्ता महाब्रह्मन् 13 22°, परनी या विश्वमहत: 13. 550. परनीशारागता: स्त्रियः 118 20. पत्नी हिमवता श्रेष्ठा 13 13° परनों धर्मेण मारिषाम् 2 44. पन्यथै वरयामास 89 10. पल्या चानुगतो दुखी 10 32". परल्या. श्रुत्वा वचस्तदा 19 27. पत्न्येषा मम पुनस्य 99 48*. पल्यो लोकनमस्कृताः 100 45. पत्युम रूपमास्थाय 73 21 पग्रहन्ति मेदिनीम् 54 24. पथि सा सुपुर्व सु. 1148. पदस्थानानि भारत 16 26. पदस्थ त्वयि केशव 67 63. पदातयः पदातींश्च 87.76*. पदाताश्च पदातिभिः 37. 30.82 . पदातिगणसकुरम् 78 220 पदातिः पुरुपच्याघ्र 85.37*. पदानि यो लोकपदानि कृत्वा 30 20*. पदा सतजपामास 8 19. पदयामानम्य वसुधां 38 38. पद्यामुभाम्यां च पुनः 57. 18". पदगमुभाम्यो सहयः 67 23. पद्यामेव ततो गत्वा 29. 19". पद्यां गत्या हरिष्यामि 29. 18. पद्यां तं दैत्यगर्दभम् 57. 10. पद्धयां पार्थाभिघातांध 112.79° पनयां यस्यैर तिष्ठति 65 61. पद्मकिाल्कमप्रमे 554. पाटमिति ख्यातं 93. 45". पद्मनाभ इति स्मृतः 38 18. पद्मनाभ महाद्युते 39. 25. 40. 41. पद्मनाभरिविक्रमः 34 34. पद्मनाभ सितानाभं 70 21. पद्मनाभो महायुतिः 42 24. पद्मपत्रे पुनर्दुग्धा 6 330 पद्मयोनिगतानुगम् 428. पद्मलोमानुरञ्जिताम् 55. 32. परवन्ति जलानि च 59. 49. पद्मरण महाप्रभम् 93. 45. पद्मपण्डाकुलाभिश्च 93 11', पद्माकुलजलोपेता 93 59.94 4". पद्मानां दशतीर्दश 20 17. पन्यानं समवस्थितः 91 20. पन्थान. शोधिता ब्योग्नि 67,624 पन्यानो नगरान्तरा 16 14. पन्नगानां च यद्वसु 92 16. पझगानां सुघोराणां 118 8. पपात धरणीतले 48 34.57. 2006627. 106436 10324 पपात पुष्पवर्षे च 24 18. पपात भासयरोकान् 2070 पपात भूमौ जानुन्या 74 31. पपात मणिरुत्तम 75 414. पपात महती चोल्का 10240 पपात रुधिरोद्गारी 64 210 पपात शकुनी भुवि 50221. पपात स महामातः 74 38. पपाताभिमुखस्तत्र 76. पपाताभिमुख शूरः 15 60. पपुईि नेग्नभ्रमरै. 76 13. पपो तोयमयं हविः 3014. पपी पानमनुत्तमम् 48 38. 100 82. पप्रच्छ कुचलं कुष्णः 7644. पप्रच्छ कुशलं जे 83 55% पप्रच्छनुश्व तौ वीरी 71385. पप्रच्छ वृषभध्वजम् 10671. 143 लोकपादसूची परिणामे तु गर्भस्य] [ पर्येति यहु पाशवी परिणामे तु गर्भस्य 4740 परितुष्ट पितामह 35 661 परितुष्टोऽस्मि कर्मणा 38 60% परित्यक्त प्रिय सुतम् 106 परित्यक्ता स्म शोभने 77" परित्यजेता तो शोक 6925° परित्यज्य प्रिय जनम् 77 55 परिग्राणाय याणस्य 112 98° परित्रात घ गोकुलम् 61 1 परिवात जगद्भवेत् 45 30° परियाय च तक्षकम् 189 परिवाहीति चायवीत् 1018" परिदेवन्ति करण 56 28° परिदेवितमायण 786 परिधावनितस्तत 22 10. परिपाल्या नरेश्वरै 747 परिपतु श केचित् 37 28° परियोश्च पुष्कलान् 94 28° परिरक्षन्त आसते 91 25d परिरक्ष शिशु बजे 49 31 परिरक्षस्व मा विभो 101 g" परिवनमान ददृशे 8352° परिवर्तस्यहोरान 364 परिवर्ते कृते साम्या 48 20° परिवर्तेत भारत 19 320 परिवत सुखाश्रये 49 291 परियनुर्गिरिवर 60 290 परिवग्रुजनार्दनम् 88 10 परिवधुर्मदाबाहुम् 92 26° परिवबुहरायुधम् 87 430 परिवाय पुरीं सर्वे 81 26° परिवार्य प्रदक्षिणम् 59 30% परिवायानीश्वरा 100 10° परिवृत्त युग मेने 85 53 परिवृत्तागलेषु च 52 11 परिष्वक्त क्रमरणे 36 59 परिप्यको हरायुध 110 66 परिष्वन्य जनार्दनम् 91 30° परिष्वज्याभिनन्यच 92 56" परिहाँ कथचन 15 29 परिहतु न शक्ष्यामि 115 250 परीक्षिच महाबाहु 23 100° परीक्षितस्तु तनय 23 110 परीत कारधर्मणा 76 281 परेण मृदितामिह 118 220 परेणाधिष्ठित चैव 85 62 परेणोक्का गुणा नौण्य 66 8 परेपामप्यमयद 69 15 परो धर्म परो दम 118 32 पर्जन्यतुल्यनिघोपै 93 33° पर्जन्यनिनदेन च 61 190 पर्जन्यस्तपनो व्यक्त 3 111° पर्जन्यस्य प्रजापते 4 140 पर्जन्य च सतर्ज ह 1 340 पर्जन्य सर्वलोकाना 59 17° पर्जन्यास्त्रऽभिमन्विते 11273 पर्णवाद्य श्रुतिसुख 52 3° 55 11" पर्णवाद्यान्तरे वेणु 55 26° पर्णशय्यासु ससुप्ती 52 6 पर्णाशाया जल स्पृशन् 2770 पत्करधना सर्वे 59 34° पर्याश्च हिरण्मया 74 10° पर्यवैश्चावरोपित 53 24 पर्यगच्छत्ततो द्रष्टु 51 27° पर्यदेवन विधवा 31 130° पर्यन्तेवावृत वन्यै 49 220 पर्यपृच्छद्विजोत्तमम् 85 16 पर्यपृच्छद्विजोत्तमान् 25 130 पर्यप्वजत कृष्ण वै 58 550 पर्यस्त शकट मम 50 160 पर्यम्ता पृथिवीं कृत्स्ना 97 20° पर्यस्त ज्योतिमण्डले 702 पर्यस्ते शकटे पुत्र 50 11 पर्यस्तैघूर्णमानश्च 61 48" पर्यहीयत दानव 44 494 पर्याप्ततृणसस्तरम् 49 202 52 21 पर्याप्तनयन शक्र 625° पर्याप्तमिव लक्षये 100 580 पर्याप्तविपयाकारा 86 37° पर्याप्त वचन मम 100 824 पर्याप्ता इति मे मति 110 18 पर्याप्ते कृष्ण विग्रहे 78 24 पर्याप्त यज्ञसविधौ 60 170 पर्यामुवन्तु मा क्षिप्र 60 28° पर्यायेग पुन पुन 112 104" वाशती 66264 पयात बहु - - 145 हरि पादसूची-19 [पाञ्चालाधिपतित पर्येति मघवान्गजम् ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य पर्येति मघवान्गजम् 347 पर्वणा चेन्दुयुक्तेन 43 32° पर्यतप्रवर शुभ्र 13 14° पर्वतप्रवराकृति 68 194 पर्वतस्येव दीर्यत 82 171 पर्वता इव निष्कम्पा 65 13° पर्वता पर्वते 35 पर्यताकारसनिभ 1104 पर्वता धारयन्ति माम् 100 63* पर्वतानाच विवर 104 40 पर्वताना सहस्र च 977" पर्वतान्समुपस्थित 100 54° पर्वताभेपु मेघेपु 61 14° पर्वताश्च ददुर्मानें 5 30° पर्वतास्तस्थुषा वरा 100 56* पर्वतास्तु शिलाशझै 34 33" पर्वतेषु पतन्तीनाम् 110 71 पर्धतैरिव कामगै 34 64 पर्वतैरच्छ्रितैरिव 37 41 पर्वतैरेव शातयेत् 107760 पर्वतै शैरमुख्यैर्वा 4370 पर्वतोदप्रवर्चसा 58 32 पर्यंतो नातिदूरत 84 27 पर्यसु श्रावयेद्विद्वान् 25 17" पर्वाणि निखिरानि च 11510 पलायव महामृधे 11216 पलायनमरोचयन् 25 16 पल्लवापीडधारिणौ 524 पल्बलोद्गीर्णरक्तेन 54 190 पवनस्तोयद यथा 74 286 पवनापूर्णितगुमाम् 36 236 पवनाधिकसपात 34 39° पवनाभोगकारिणम् 55 18'. पवनाम्भोदधारिणम् 55 20% पवनाविद्धनिर्घोप 34 49° पवित्रमितमोजना 23 105 पवित्र परमात्मयान् 39 16 पवित्र परिधीनपि 3024 पविग्रान्तरितानना 39 24 पशुजानुहारप 31280 पशोरिय महाघोरं 67 41' पद्याग्छि यसकाशातु 14 18" पवादनिश मारवाद 30 336 पश्चादसृजत स्त्रिय 2 41 पश्चाद्विदभोऽजनयत् 26 16° पश्चानुतापाध्यायन्त 78 26 पश्चिमस्या तथाक्षय 93 150 पश्चिमस्या दिशि तथा 4 13° पश्चिम कससस्कार 78 420 पश्चिमाझ्या पराङ्मुख 57 18° पश्चिमा तव नैष्ठिकीम् 774 पश्चिमे तु तत पक्षे 53 33° पश्चिमेनाग्निना दीप्ते 68 12° पश्य कृष्ण घनाकृष्णान् 54220 पश्य कृष्ण जलोदग 54 280 पश्यतामेव गोपाना 56 40° पश्यता यदुसिंहाना 91 40° पश्यता सर्वभूतानाम् 93 55° 112 129° पश्यध्व देवसद्मवत् 8650 पश्यन्ति सुसमाहिता 13 571 पश्य पुत्र जनेश्वरम् 77 48" पश्य राजन्यशोवीय 108 94 पश्य वृन्दावन कृष्ण 5440% पश्यस्व यदि मन्यसे 48 256 पश्यस्व हिमयेष्टितान् 36 12* पश्यस्तम चचार ६39 230 पश्यामि च रमामि च 70371 पश्येयमहमुत्कटौ 73 4 पहवांश्चैव नि दोषान् 10 38° पहवा शतशचान्ये 85 190 पहवा श्मश्रुधारिण 10 430 पाहावैः सह सवृद्ध 23830 पाकशासनकल्पस्य 99 19" पाचजन्य इति श्रुत 79 16" पासजन्यवन महत् 93 11' पायजयस्य घोषेण 112324 पायजन्यस्य निघोर 9, 10*11347 पायज यस्य निस्वनम् 113 48" पाशजयस्वनेन च 970 पाशजन्यं च माधय 79 20 पाशजन्य महायर 11321 पासम्मो बीत 105 11 पायालाण्टीमाम्या 18 19 पामार पचममात्र 18 11 पाशाला इति विभुता 23 9 पामासाधिपतित: 15 331 146 - पाशारेषु च पार्थिवा लोकपादसूची [पापस्यापि तथा मूढ पाश्चालेपु च पार्थिवा 43700 पाचारो बढ्चर नासीत् 18 18" पारयन्कम्यचिद्वक्र 38 62 पाटविया करदह 48 360 पापिया तु तत्सम 103 20 पाटापु पमेक च 13 17. पाणिग्रहणमत्रागा 9 89107 पाणिनो यत्रयश्चैव 23 890 पाणि पेनस्य दक्षिणम् 5 20% पाणि सरपश्य पाणिना 31631 पाणी गृहीते वैदा 89 16 पाण्डाप्रमुसाधेच 100 8 पाण्य कुन्दिनन्दन 23 1521 पाण्डवानक्षतान्युधि 62 970 पाण्यानो तु दग्यानी 29 8° पाण्डवानां प्रतिष्ठित 114 160 पाण्डवानां महात्मनाम् 114 10 पाण्दया परिरक्षिता 105 16 पाण्डयेनापि दुनर 115 100 पाण्डपाण्दुरझैच 93 320 पाण्गुरक्षोगवासिनी 87 38 पाण्दुरे गामास्थित 9128 पाण्डुरं पाण्डुराननम् 70 180 पाण्दुर पार्थिपंम 93 160 पाण्हुरेण यपुस्मता 113 18 पाण्डरोतसा 34 140 पाप एराश 43500 पापमोरपरम धेच 62 930 पाडोधनंजय पुन 23 121 पापडोर्वसुमतीपर 62 91 पाष्टायोर करिशा 1009 पायय परलर 23 123 पाम् सि धीमान 8018 पाग्यशपलियां यर 80 151 पार पीच मर च 97 16* पाथरा 23 129 पालक मोपपातरम् 620 भायमा परस्परम् 37 26 पातयार पानि 57 16 पारायाशापराधिर 80330 पानयानो गा गर्भात् 64. पापयामास पार्थिव 80 31 पारयामास भूतो 112 46* पातयावो लघुक्रमो 57 88 पातयित्वार्जुन भुवि 31_1020 पातयेयमई बूर 10 160 पातारमगमन्मन 47 11 पातारमुपयास्यति 100 230 पातालयासमुत्सृज्य 106 25 पातालस्थोऽणवगत 30 140 पाताल यत्र तेऽसुरा 47 23 पातिताय महासरया 12 47° पातितो जीवित विना 65 28 पात्यमानश मुद्गरै 3554 पात्र चार्य नराधिप 5341 पात्र छन्दासि भारत 6 17" पात्र तु शैलमेयासी 6 36° पान पायस पावन 3926 पाग्राणि च पवित्राणि 316 पायाणि च मयोक्तानि 6490 पार्टी च पूर्णी मधुन 47 40° पादा वनशोभिन 59530 पादपांश्च समाक्षिपन् 92 450 पादसे वाय वा गिरी 59284 पादपोरकटाटामा 36230 पादयोन्यपतन्तुं 88 27 पादयो पनितोऽब्रवीत् 106 14' पादस्पर्शवियाधित 8550 पादस्परेन तेन 185504 पादहस्ततस्ततः 31 88 पादाहुएन शस्ट 96 330 पादात धान्यानम् 844 पादावूर्ण प्रसारयन् 504 पाद वां गृह्य पुरर 48 28" पादनारमपिनाशाय 85 490 पादेशस्य मूचित 28 214 पादेस्तैरन्धियायाय 28 22. पादोश्व दारण 753 पादी ते याम मूर्धमि 17 34 पादौ निहतरण 76490 पाद्याम्यिामनयम् 121" पानभूम्यश्व नोभिता 14 11' पानभोजनकारिता 2221 पान महसमीरणम् 83 20% पापचर दुरामद 67 10 पापम्यापि तया मूट 102 16° 147 पापा सा प्रोच्यते भुवि] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [पिवर च विशेषत पापा सा प्रोच्यते भुवि 107 344 पापेष्वभिरतस्य च 78 70 पापेप्वभिरतो मम 76 20% पाप्मान पुरुषोत्तम 91 518 पारक्येय तिर्मम 100 520 पारदानां च धर्मवित् 102rd पारदा मुक्तकेशास्तु 10 43° पारदाश्च विशा पते 1044 पारदास्तङ्गणा खशा 85 19 पारपुत्र पृथुर्बभी 15 214 पारमेष्टयेन कर्मणा 30 25% पारमध्येन वाक्येन 100670 पारमेष्ठ स्थित स्थाने 37 590 पारपर्यादिहागतम् 100 8" पारंपर्यादुपगत 100 500 पारानीपोऽथ जज्ञिवान् 15 180 पाराशर्येण दर्शितम् 118 44 पारिक्षितस्तु नृपति 11580 पारिक्षितस्य काश्याया 11420 पारिक्षित द्रष्टुमदीनसत्त्व 1157° पारिजातदुमो हृत 97 140 पारिजातप्रभावेन 94 20° पारिजातममिन्नजित् 94 23* पारिजातस्तु तत्रैव 93 57 पारिजातस्य हरणे 109 42° पारिजातं महाद्रुमम् 92 6394 19. पारिपातो हृतो बलात् 105 10° पारितवनिमानि च 93 31 पारिश्ववक्षौमां 55 37° पारिष्ठवश्व रैम्यश्च 7 23° पान्य नाम भगवान् 12 13 पार्थधवसमन्तरम् 265 पाधिवत्वममीसुभि 641 पार्थिवर्षभसत्तम 9 210 पार्थिवर्षभसत्तमी 10724 पार्थिव गन्धमाघ्राय 54 12* पार्थिव देदमाहुस्तु 30 61 पार्थिनापार्थिव गता 42476 पाधिया देघराता 23 83° पाधियानां कुरेपुर 43 10 पार्थिवाना तथैव च। 14st पार्थिवा ये महीतले 31 147 पार्थिवाव परस्परम् 4131 पार्थिवा पृथिवीक्षित 59 61* पार्थिवा पृथिवीपते 90 60 पार्थिवा प्राहुरीश्वरम् 100 25° पार्थिवा सहवाइनै 43 564 पार्थिवेन यशस्विना 109 34 पार्थिवे भारते वशे 43 140 पार्थिवे वार्मनि स्थिता: 81 10* पार्थिवेषु महात्मसु 89 5 पार्थिवैश्च महाभागै 6 44° पार्थिवौघप्रपीडिता 41 26' पार्थिवौ भुवि सांप्रतम् 43 50' पार्वतीयश्च दामन 81 39 पार्वत्या मत्तकाशिनि 107 554 पार्वत्या यदुदाहपम् 107 43° पार्वत्या सनिधौ तदा 107 10* पावतो मे विहार स्यात् 3 63° पार्श्वस्थाश्रूण्यवर्तयत् 29 70 पाणिग्राहच नास्ति ते 109 414 पाणिग्राहोऽभवद्देव 20 32° पानिमशिरसस्तदा 20 31 पालयन्त उपासते 91 154 पालयन्त क्षमापरा 417' पालयश्रतुरो वर्णान् 43 39° पालयिष्यन्ति यत्नत 117 34 पालयिष्यसि कृत्नां च 31 99* पारयिष्याम दंशिता 81 4 पालाश पायमादाय 637 पारित च हरिं चैव 26 12. पालित चेदिराजेन 81 97" पारितो गुरुपुग्नेण 65 39* पावकानिरसघात 37 68" पारक्नासतेजसा 4357 पायकेनोर्वस्नुना 35 720 पावना द्विजोत्तम 22 12* पावनी र वमुधरा 0 38 पाचपात दानयान 30 11 पासमारहता ये 3179 पागल प्रसिता गूथे 38 18' मुभि परपीहत 76 35 रिक्षारशीनरी 25.1 पितरश पयोता 1 1300 पिवर निश्पामि 107 पितरं च विशेषत 10781 148 पितरं चोप्रशासन श्लोक्सादसूची [पिया तु तं तदा राष्ट्रात पितर चोप्रशासन 650 पितर दीप्तया गिरा 3551 पितर पुनरेव हि 18 29 पित्तर प्रार्थयित्वान्य 13 27° पितर मे जपानक 38 190 पितर वसुदेव च 695 पितर पासवानुज 95 10% पितर सोऽतिमेव च 20451 पितर सोऽयवीरयर 9990 पितर प्रामुवन्ति हि 66 16 पितर प्रीणयन्ति सम् 13 68° पितर सपितामहा 12394 पितर सोममव्ययम् 12 36 पितरो दिवि देवता ।। 360 पितरो दिवि वर्तन्ते 13 24° पितरो दिवि विधुता 13 411 पितरो धर्मकामस्य ।। 10% पितरो यो न सशय 12 30 पितयुपरते मह्य 15 37° पितर्युपरते सर्षे 168 पिताच परितोपित 1620 पिता तब जनेश्वर 23 1214 पिता सानमनीत्तदा 1827 पिता ते कृष्ण सप्सदि 69 220 पिता ते गरदावज 99210 पिता स्पेनमथोवाच 9923 पिता देवातको रणे 107 24 पिता परमकोपन 50 100 पितापि मे परित्यक्त 738° पिताप्यस्य वन ययौ 99 पितामहपुरोगमा 40 16 पितामहप्रसादेन 374 पितामहमयामुगन् 21 13443 11 पितामहमुपस्थिता 31 480 पितामहमुपागच्छन् 12 28° पितामह भगवान् 5 26* पितामहस्य मे राजन् 15 100 पितामह पाण्डवानां 115 10° पिता सविधियति 47 214 पिता सोमस्य वै राजन् 2011 पिनुरापीन्महात्मन 10 10 पिनुर्नियोगादपसन् 10 30 पिनुध वितरं सया 112 पितुश्चापरितोपेण 10 170 पितुस्ते भगिनीसुत 62 84 पितुस्ते वाघुदेवस्य 99 19 पितु पितामह चैव 11 12 पितु पूरु प्रतापगन् 22 330 पितु पूर्व बृहस्पते 20 31 पितु समीपगा सा तु 8 14 पितृकन्या मनीपिणा 1860 पितृकार्य विशिष्यते 18 69 पितृकृत्यानि देयानि 16 20% पितृतुल्येन शसन्ति 67 20 पितृपक्षेप पुत्रिणाम् 49 50 पितृप्रसादो ह्यस्माभि 17 9° पितृभक्तोऽसे विप्र 1371 पितृभक्त्यैव रब्ध च 12 30 पितृभिदानवैश्चैव 2 250 पितृभि श्रूयते चापि 6 20 पितृभ्य उपाल्पताम् 17 10 पितृभ्य कल्पयित्वैना 16 12° पितृराजस्तु दक्षिणम् 34 18° पितृवर्तीति पिरयात 15 3* पितृवर्ती तु यस्तेषा 16g पितृप्यसरि कर्ण 2 62 94 पितृष्वसरि जातस्ते 62 700 पितृवस कृतो यरन 48 380 पितृष्वसुमै भर्ता घ657 पितृप्यम प्रियाथै च 87 230 पितृप्वसु सुतौ मुस्यो 65 88° पितृसर्गेपु वै मया 1871 पितृणामादिसगैच 111 पितॄणामादिसर्गेण 1365° पितॄणामाधिपत्य च 8 49 पितॄणा कारण प्रारे ।। 35" पितॄणा सर्गमुत्तमम् 114,51 पिट्नम्ययं धर्मेण 16 11', 16" पिनुद्दिश्य साधिमाम् 16 10° पिरन्पुत्रा नियोक्ष्यन्ति 116 37° पिन्प्रीणाति यो भक्त्या 13 68. पिन्स्वान्सप्रसादयत् 13 30 पितेव मुनिपुगत्रम् 39 पितमति स्मृतस्येव 3045 पित्तवर्ग घ शोणितम् 30 43 पित्रा तु त तदा राष्ट्रात् 106%, --1149 - - [ पुत्रशोकाभिसतप्त पित्रा ते मृदितो रणे] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य पित्रा ते मृदितो रणे 107 264 पित्रा त्यक्त न्यवारयत् 10 12% पिना त्यक्तोऽवसद्वीर 9 94° पित्रा निर्भत्सिता शुभा 8 14 पित्रापरञ्जितास्तस्य 5 290 पिना मम पुरा गीत 1116 पिश्य प्राप्य महाद्युति 15 62° पिनाकपरिघायुधम् 110 44% पिनफिन समुद्दिश्य 96 53° पिपीलिकरुतज्ञताम् 19 25' पिपीलिकाना चण्डाना 85 320 पिबन्त मधु माध्वीक 108 3° पिबन्त स्तनमालक्ष्य 50 150 पिबन्ति नयनाक्षेप 63 19° पिबन्ति रतिरारसा 63 32d पिबन्तो मधुमाधीक 113 68° पिबन्त्यतृप्ता वनिता 63 310 पिबन्यो नयनासवम् 99 324 पिबन्निव तदाकाश 112 15° पिबन्वारिमय हवि 35 596 पिशितामिपकाशिपु 68 3 पिशुन कविरव च 164 पीठं तथा महागाहु 97 240 पीठेषु च जनाधिपा 100 140 पीडयाप्यथ धर्मस्य 16 20 पीडितस्य बलीयसा 764 पीडितो दानवो युधि 44 49° पीच्यते वसुधातलम् 41 171 पीड्यन्ता वृष्टिमारुतै 614 पीड्यमाना नराधिपै 41 18" पीतशर्करवाटुका 93 63% पीतश्वेतानुलेपनी 52 2071 48 पीताम्बरधर विष्णु 70 26° पीतेनोत्तरवाससा 47 41 पीते प्रीतिकरे नृणा 554 पीते वसानो वसने 42 4 6824 पीनश्रोणिपयोधरे 8036 पीनोरुनघनस्तनी 87 36" पीवरी नाम विश्रुता 13 4 पीवयों जनयियति 1346 पुट पुटके मधु 5 314 पुण्डरीकनिमेक्षणे 75 3 पुण्डरीकपाशाक्षं 60 350 पुण्डरीकशतैर्जुष्ट 93 58 पुण्ड कलिङ्गश्च तथा 23 290 पुण्यकर्मभिराहवे 106 63 पुण्यकृगिरलकृतम् 30 पुण्यकृद्भिनिपेवितम् 23 108° पुण्यगन्धमनुत्तमम् 92 64 पुण्य च रमणीय च 23 108* पुण्य सकल्पसाधकम् 20 48* पुण्या त्रिपथगा नदी 46 10' पुण्यान्देवगुणैर्युतान् 31 131 पुण्यापणवती दुर्गा 44 68° पुण्याहयोपैविपुलै 86 30 पुण्या पापप्रणाशिनीम् 1 15 पुण्येऽहनि महाराज 86 12° पुन इत्येव वक्ष्यति 45 446 पुत्र एको हि मे जात 79 11 पुत्रका इति वै वयम् 12 34 पुनकिल्बिपशङ्कित 78 160 पुन कृत्यान्तरेण वै 22 216 पुत्रगर्मास्त्वया विभो 48 25 पुत्रजन्म भवेदर 112 1200 पुनतो धनतोऽपि वा 47 520 पुत्रत्व प्राप्य योगेन 18 10 पुरत्वे कल्पयामास 396° पुननाश धनक्षयम् 47 556 पुन निर्याप्तत क्रोध 78 18" पुनपौरान्विता 13 100 पुत्रप्रसवज देवान् 85 12° पुनमत्रिः प्रनापति 21 पुनमन्य वृणीव यै 22 250 पुरमात्मतनूरहम् 35 46 पुरमात्मसम तदा 8 160 पुत्रमानय जीवन्त 51 24 पुरमिजाम्यह दत्त 79 10 पुनमिन्द्रवधार्याय 3 99* पुनमिन्द्रसम प्रमु 23 83' पुप्रयोगेन सयोग्य 69 18 पुग्रयामात्र पश्यत 65751 पुनरत्तर देवकि 48 43 पुनरागस्यमाना 2 00 13 पुधवारयेन सेन ये 12 23 पुत्र रमते पुन 7 " पुतोशामिसंतस 78 ।' -150- पुत्रशोकेन गुप्यन्ती] लोकपादसूची [पुनरेव रराज पुत्रशोकेन शुष्यन्ती 699 पुत्रश भीष्मकस्यापि 80 110 पुरश्चापधर' प्रमु 99 430 पुनश्चापि प्रसेनजित् 9 810 पुनसक्रामित श्रीस्तु 9 50° पुनस्तस्य महायशा 15 180 पुत्रस्व वासुदेवस्य 99 17 पुत्रस्य मुखमीक्षन्ती 7752 पुनस्य मे भय भीरु 50 27° पुनस्योपरि तावेतो 51 220 पुत्र कथमिम दृष्ट्वा 56 22 पुत्र च पाण्ड्यराजस्य 87 56 पुत्र धर्मविदो जना 66 20 पुत्र पुनमिगत्मजम् 997 पुन वै रानपुत्रिका 20 416 पुत्र शद्धपद नाम 4 120 पुर समभिपीक्षन्ती 7740° पुग्न समुद्र च विभु 1051. पुन सर्यगुणोपेत 27 11 पुन सांदीपनेस्तथा 97376 पुत्र स्वस्थोऽयवीरपुन 50 150 पुत्र कन्या मुकन्या च 9 220 पुन कर्मभिरन्वित 2636 पुन पळायतेक्षण 31 1100 पुत्र परमधार्मिक 10 671 184 पुत्र सर्पगुणोपेत 216 पुत्र सादीपनेरिति 79 130 पुराणाममितौजसाम् 15 19 पुत्राणां च सहस्राणि 10 53* पुराणां चाक्षयाल्लोकान् 977 पुत्राणां नाहुपम्तदा 22 18. पुयाणा हि सयो रामो 4353° पुमानपुत्रो लभते सुवर्चस 118 46° पुत्रानमितविममान् 73 270 पुत्रानुत्पादयामास 2 46°23 286 पुत्रान्चुदिचौकम 12 32 पुमान्दक्ष प्रजापति 3231 पुवान्दश महारयान् 88 37" पुनारष्ट्वा पुन प्रभो 103 28 पुनान्देवगणाoया 76 पुत्रा पमछुरात रन् 12 23 पुत्रान्सजिनार्दन 103 27 पुवाम्या गुशुभेऽधिकम् 96 10 पुनार्थीश्चैव पुष्करान् 18 280 पुनार्थे ह्यापद कटा 66 16° पुनावै कालनेमिन 47 124 पुत्रा वै नर तत्समा 91 पुनश्च पितरश्चैव 12 40° पुत्रास्तस्य महायरा 87 10 पुनाश्च परिपृच्छध्व 12 24° पुना पञ्चशत स्मृता 9 40% पुना परमधर्मज्ञा 15 21. पुत्रा पौग्राश्च भारत 7 1960 पुना सप्त महात्मन 20441 पुना सेननितश्चासन् 15 170 पुत्रिकाश्च दश स्त्रिय 2371 पुत्रिकासु सनामकान् 23 13° पुत्रत परमारमनि 20 11' पुत्रद धार्यता तेज 35 83° पुष्पेतेपु भारत 9 31 पुरमृदितस्तनीम् 69 8 पुरुक्ताश्च ते तदा 12 2 पुन सकपणेन च 89 13 पुत्रोऽग्नि समपद्यत 35 490 पुनो जज्ञे विदूरथ 23 111 पुनोऽणुहस्य राजपि 15 24. पुनो दशरथोऽभवत् 23 36 पुत्रो दिविरथस्यासीत् 23 34 पुनो दीर्वतमास्तथा 23 554 पुत्रो नवरथस्तथा 26 23 पुत्रो मे हियते विभो 101 11' पुत्रो राजन्महामुनि 23 51 पुत्रो राजा बभूव ह 10 63d पुनो विश्वजितश्चापि 15 16° पुनौ सुरसुतोपमो 96 44 पुन्या विदर्भ सुभगा 26 18 पुनरन्याश्चतु षष्ट्या 88 170 पुनराप्याययन्ति वै 11 37 पुनरायाजगत्पति 79 20* पुनरायान्महीतरम् 86714 पुनरावृत्तिदुर्लभाम् 13 100 पुनरासीच्छरीरवान् 79 181 पुनराह जनार्दन 101 160 पुनरेव जनार्दनम् 1038 पुनरेव महाराहो 101 1" पुनरेव रराज ६ 64 230 - 151 पुनरेव हलायुध ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [पुरा स्वर्गगतो यथा पुनरेव हलायुध 82 220 पुनरेवाप्रवीद्वच 21 24 65 471 पुनर्जातोऽयमित्याहु 96 32° पुनर्दुग्धा वसुधरा 6 16, 20', 25, 28, 30° पुनदृष्ट्वा श्रिया वृतम् 68 18° पुनर्देवी वसुधरा 6 35 पुनर्दक्ष्याम इत्युक्त्वा 1186° पुनरिवत्तीमेत्य 28 270 पुनरवती प्राप्ते 29 330 पुनर्भमा प्राद्रवन्त 108 45° पुनर्युगसहस्रान्ते 13 9 पुनलेंभे महातपा 2 51 पुनरोंकानवाप्स्यसि 13 38 पुनर्विव्याध केशव 88 26° पुनश्चक्र सजग्राह 112 48° पुनश्चरणमध्यग 74 286 पुनश्च स्खलते भृशम् 1 4 पुनश्चिच्छेद त चापं 88 22° पुनश्चैव निरुध्यन्ते 2 54° पुनस्तेन महात्मना 105 9 पुन कृष्णोऽभ्यभाषत 109 544 पुन पुनरथाववीन 3 1074 पुन पुनश्च स बली 67 30° पुन पेतुरवाड्युखा 61 41 पुन प्रतिजगामाशु 83 51" पुन प्रत्यानयिष्याम 106 280 पुन प्रत्यावरिष्यति 115401 पुन प्राप्स्यसि दुर्लभान् 13 351 पुन स परिघ घोर 108 41 पुन सवारयामास 11275° पुन सागर सागरीम् 43 45d पुनानो नरकात्तदा 524 पुत्रानो नरकात्पुत्र 66 20° पुलये गोपसूनुना 58 195 पुरपत्तनमालिगी 6 41 पुरमन्त पुर तथा 7768d पुरमासादयामाम 9153° पुरमेतद्विर्णितम् 90 11' पुरलक्षणसपन 8+ 250 पुरवास्तु विचिन्वन्स 8424 पुरस्कृत्य ननादनम् 81 1 पुरस्स्य पुरदरम् 38 65 पुरस्कृत्य महामतिम् 25 131 पुरस्कृत्य वसुधराम् 41 321 पुरस्कृत्य हलायुधम् 88 294 पुरस्कृत्योमसेन वै 78 47° पुरस्य स महाबल 90 11' पुरजयसुतोऽभवत् 23 17 पुरदरपुरोगमै 6 186 पुरदरो दिव यात 113 70° पुर दुर्योधनो नृप 90 125 पुर पुरस्कृत्य यथा 61 61° पुर प्रविविशुद्धष्टा 107 18° पुर प्राग्ज्योतिषं गत्वा 105 90 पुर प्राग्ज्योतिष प्रति 96 197224 पुरा कमलनाभस्थ 31 190 पुराकल्पे प्रजापतीन् 3271 पुराकल्पे हि याणेन 3 630 पुरा कृतयुगे राजन् 31 320 पुरा ज्येष्ठक्रमादहम् 62 820 पुराणदेवोऽथ पुराणि चक्रे 31 16° पुराणप्रभवैगुंणे 43 16 पुराणमेतचरित महात्मनाम् 118 49° पुराणस्य महात्मन 1012d पुराण कथ्यते यत्र 31 200 पुराण तम विन्यस्य 4549 पुराण त पुराणेषु 40 19° पुराण वर्तते यत्र 31 1500 पुराण लक्ष्णया गिरा 1 पुराणे कीर्तितास्तात 7 19 पुराणे नागराजोऽसौ 904 पुराणे निश्चय गता 1 30 पुराणे परिनिष्ठितम् 4 181 पुराणे भरतर्षभ 10 78 पुराणोऽय हि गीयते 68 34 पुरातनानां देवाना 58 37. पुरा तमिपुरं प्रता 65 381 पुरा विक्रमे यथा 45 39* पुरा देवामुरे पुद 8540 पुरा धर्पितास्तु स 3185. पुरान्तधानमक्षपम् 628 पुरा परमते उसम् 35250 पुरा पुरंदरो राजा 68 32 पुरा प्रमर्पित शक्र 35 23. पुरा लोकपितामहम् 47 18. पुरा सपंगतो पया 65 23 - 152- पुराई द्वारका पात ] लोकपादसूची [पुप्पैच विविध शुभै पुराह द्वारकां यात 1016 पुरा हि कश्यपो विष्णो 45 204 पुरी घासीत्कुशस्थती 9230 पुरी विय जनस्यास्य 86 32° पुरी द्वारवती तदा 8644 पुरी द्वारवती त्वया 935 पुरीभूमिपु पार्थिवा 81 37 पुरीय मामक बलम् 86 37 पुरीरोध प्रवरयंताम् 81 30° पुरी समभिवर्तत 79 270 पुरी सा ये प्रियकरी 86 192 पुरी स्यात्पुरुषोत्तम 86 344 पुरी ता सुसमापसत् 791 पुरी द्वारवती चैव 1006 पुरी द्वारवती ययौ 84354 पुरी निर्यादा कृत्या 737° पुरी निवेशयिष्यामि 8470 पुरों परमधर्मवित् 44 520 पुरी प्रविविशुहृष्टा 82 280 पुरी प्राप्त जनादने 79 354 पुरीं प्राप्य सयान्धवा 84 34 पुरी वाराणसी नृप 23 58, 6E पुरीं शरपुरीमिय 86 53% पुरी सस्थापयिष्यति 86200 पुरी स्वा प्रमदामिव 86744 पुरुसुरससुतरवासीत् 9 86° पुरुकुत्सस्य या पत्नी 13 630 पुरसुरस धर्मज्ञ 9836 पुरजाति सुशान्तेस्तु 23 95" पुरुवान्पुरषोतम 26260 पुरमित्रस्य दायाद 15 150 पुरुमीढश्च वीर्यवान् 23 70 पुरसस्याल्पमेधस 7880 पुरर त मनु विद्धि 1 38 पुरष प्रत्यपद्यत 230 पुरपादाल्योपमम् 57 11 पुरपामारित श्रुत्वा 17 11' पुरपान्न्यायनान्बहून् 76 18 पुरुपाल्प यहुलाक 116 23" पुरुषाश प्रमुप्तासु 116 39° पुरुषा कृष्णशासनात् 95 130 पुरपेद्र भवानिह 109 20' पुरुपराप्तकारिभि 28 10 पुरपो मनुरच्यते 24 पुरपो मृष्टकुण्डल 958 पुरुषो वै मनोजर 110 22° पुरुहूतस्तु पुरत 34 30 पुरुहूतस्य खाण्डवम् 105 16d पुरुहूतस्य तेजमा 35 140 पुरहूत पुरदर 5976230 पुरे गोमहिपास्तथा 93 66 पुरे पुरे नरपति 41 210 पुरे वारणसाहये 1005 1144 पुरेऽस्मिनिति केशव 852g पुरोडाश विधत्स्य मे 21 30° पुर्यथै विनिवेशिता 84 30% पुर्या यदुकुरस्य च 86 300 पुर्या वैधव्यशसीनि 6624 पुर्या तस्या तु रम्याया 93 670 पुर्या क्षिप्र निवेशार्थ 86 18° पुर्या सदृश्य वास्तु तत् 86 39 पुलस्त्यश्च वसिष्ठश्च 770 पुरस्त्यस्य प्रजापते 13 436 पुलस्त्य पुलह क्रतुम् 1 29* पुलस्त्योऽनिस्तथाङ्गिरा 12 14* पुलिनप्रोणिमण्डलम् 55 39' पुलिनधोणिमण्डरा 59 37' पुलोमा कालका चैव 3720 पुरोम्नस्तु शची सुना 31 पुष्कर पुष्कलर 3171 पुष्करिण्यस्तडागानि 59 40° पुष्करिण्य सरासि च 93 590 पुष्करे यन्त्र समूता 31 19° पुष्टिकामस्य पुष्टिं च ॥ 10° पुष्टिकामेन धर्मज्ञ 1180 पुष्पकण्टकधारिण 73 160 पुष्पक च महदनम् 99 18t पुष्पदन्त तथैव च 86 111 पुष्पमुच्चावच भूमी 61 39 पुष्पवर्षे पपात ह 91260 पुष्पवर्यैश्च सर्वश 113 60 पुष्पवृष्टिसमप्रभ 93 33 पुष्पाकुर जलोपेता 93 64 पुष्पाणि च फलानि च 83 21 पुस्पिताम्या यथा गना 37 230 पुष्पैश्च विविध शुभै 96 196 हरि पादसूची-20 153- पृथिव्या पार्थिवात्मकम् ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [प्रकुर्वीमहि गा सम्यक पृथिच्या पार्थिवात्मकम् 43 46 पृथिव्या सारमव्ययम् 83 520 पृथिव्युपरि मानुषा 62 244 पृथुकाश्च दिवौकसः 7 285 पृथुकीर्ति पृथा चैव 24 190 पृथुकीयों तु सजज्ञे 24 21° पृथुचायतेक्षणा 87 36 पृथुना प्रविभक्ता च 641 पृथुपुत्रौ तु धर्मज्ञौ 2 270 पृथुभि पञ्चभिर्पोरै 56 6° पृथुरानेनस स्मृत 9 440 पृथुरुक्मश्च सश्रित 26 19d पृथुरेभिर्नराधिपै 4 16 पृथुरेव नमस्कार्य 6 43°, 47° 48° पृथुर्विपृथुरेव च 24 12° 28 43 पृथुन्यस्तदा चेमा 2 220 पृथुन्य न्य प्रतापवान् 5 286 16, 441 पृथुलाक्ष इति स्मृत 23 38" पृथुराक्षसुतो राजा 23 38° पृथुश्रवा पृथुयशा 26 50 पृथुपेणस्य पारस्तु 15 18° पृथुपेणो महायशा 15 18° पृथुस्तस्मारसमुत्तस्थौ 5 22. पृथु बैन्य पितामह 4 1 पृथु पश्चान्महाबर 5374 पृथु प्रादात्मजेश्वर 5390 पृथोन्यस्य भारत 6 40% पृथोन्यस्य सभवम् 4 23, 26* पृथोस्तु सुकृता नाम 15 220 पृथो पूर्व तु भारत 3 110' पृथो स्वार्थे तो तत्र 5 33° पृश्नि पुनो युधाजित 28 36" पृपतस्य पितामह 15 354 प्पधा हिययित्वा तु 937. गृष्ट पय भदिप्यस्य 11640 पृष्टवान्देयमग्ययम् 13 1 पृट पिक्षणा सगं च 12 19° पृष्ठतोऽनु यरस्थापि 109 88° पेतुराकाशगान्यपि 32 161 पेतुरात घेपमाना 61 24. पेतुल्कासहखाणि 32 16. पेतुत्या हिमादिता 30 10 पेतुम्तामरससज 83 31" पेतुस्ते दानवगणा 35 16° पेतु शरदि निस्तोया 67 40° पेतु सह महोरग 37 456 पैठिक चासिलोमान 97 24" पैप्पलादी च ती द्विजो 114 11' पैशाच राक्षस चैव 112 24° पोष्टा हि भगवान्सोम 20 16 पौण्डूश्च कपिल व 9821 पौण्ड्रश्च बलिना पर 80 10 पौण्डूश्च सुतनो सुत 98 220 पौण्डूस्य वासुदेवस्य 87 4 पौण्डू पड्भि शिलीमुखै 87 6st पौरजानपदै नै 96 56 पौरजानपदस्त्यक्त 22 100 पौरवस्य महात्मन 15 14 पौरवस्य महाराज 23 91° पौरव तुर्षसोवैशः 23 1270 पौरवी रोहिणी नाम 25 1" पौरवो जनमेजय 227 पौरवो घेणुदारिश्च 81 40% पौराण ब्रह्मसदर्न 401 पौराणा रविवर्धन 9621 पौराण्यश्च कथाभवन् 83 57 पौराश्च पुर्या श्रेण्यश 78 15° पौरावागन्तवश्व ह 19 200 पौरा प्रोचुयाशिष 74 190 पौरुपादन कर्मणा 59 -6 पौरपेण समायुक्त 108 81 पोरैर्युददिक्षुभि 74 1" पौर्णमास्या यथा शशी 112 18. पौरस्त्य पुरसर्पम 31 126 पौलोमा कारल्याच 37 पौलोमी सत्यभामा घ9261 पौलोम्येव पुरदर 88 350 प्रार्गदुरगापगम् 71 43 प्रकाराशनश्चिरम् 40 20 प्रकारावरानक्षण 67 16 प्रशाशा मश्यपया 74 19 प्रकाश जीवितमय 109 10 प्रमादिनपर्वत 6010 महीणदामनीry 6:. प्रकी क्याधिया 74 101 मावीमहि गा मम्प 10 10 156 प्रकृतयोऽनुयास्यन्ति] श्लोकपादसूची [प्रनासर्गेण तापत प्रकृतयोऽनुपास्यन्ति 78 A प्रतिर्मा विकारपु 213 370 प्रकृतिर्विकृतास्मिका 113 320 प्रतिस्येषु लोकेषु 36 40° प्रकृति सा मम परा 104 10° प्रतीशास्तथैव च 86780 प्रकृयावस्थिता शरा 11320 प्रकृत्य वेदमादित 113 330 प्रष्टमायु समवाप्य दुईम 118 43° प्रकोप सुमहानभूत् 2 19 प्रक्रिया मसपु च 310 प्रनीहिताश्च ते स 58 15, 18° प्रक्षीणतृणकाष्ठ 5200 प्रदीप्तुमच्छमाया 90 11 प्रवेहमाना वदव 33* प्रख्यातबल्पोरष 12 126 प्ररयातयर वीर्यस्य 30 57° प्रख्यात तारवामयम् 20 34 प्रख्यात स्वेन कर्मणा 2018: प्रख्याता किं भयान्विता 107 234 प्रख्यातानिपु रोरे 23 86° प्रस्याता पञ्च पह्वय 11024 प्रगाढं यरनमास्थाय 7090 प्रगृहीतशरासनम् 544 प्रगृहीशरासना 81 93 प्रगृहीते ततो धर्मे 117 44 प्रगृहीतोत्तमायुधा 37 14 प्रगृह्य रणमूर्धनि 108 41 प्रगृहानगर धनु 20320 प्रप्रद भोजराजस्य 96 420 प्रचकारोऽधिक श्रिया 74 150 प्रचशाम सभा शुभाम् 42 120 प्रचल निश्च सानुभि 61 48° प्रचिन्वन्तौ च पादपान् 583 प्रचेतस मुचेतास्तु 23 133* प्रचेत सुमहीर 2 349 प्रदेताम्नस्य चारम1 23 1336 मच्छन्नरभिरक्षिता 473 प्रनहास भृश तदा 89 320 प्रमाकामस्य चाभिभो । 10 मनाता पुनमेगाने 491 प्रजाधम काम च 12 133 प्रजा धर्मेण रक्षा 23 1610 प्रजा धारयिता स्वयम् 64 रजानामभवत्तदर 016 प्रजानामेति सायुज्य 10 80* प्रजाना पडयो ह्योधै 40 130 प्रजाना पतयो राजन् 7 49 प्रजाना पुष्टिदस्य च 10 800 प्रजाना पृथिवीपाल 5 49° प्रजानां पोपणे नृप 551 प्रजाना लोमहर्पण 44 64 प्रजानां वृत्तिकामेन 220 प्रमाना वै हितार्थाय 4378 प्रजाना शुभमिच्छता 44 28 प्रजाना सक्षयो भुन 115 211 प्रजापतिकृतं सेतु 38 26° प्रजापतिरसशयम् 5 10 प्रजापतिरिव स्थित 61 520 प्रजापतिरिव स्वयम् 113 40% प्रजापतिसमद्युति 35 290 प्रजापतिसुत प्रभु 86 20% प्रजापतीना दक्ष तु 442 प्रजापतीना साध्याना 10986% प्रजापतेरात्मजाया 2 160 प्रजापतेर्द्विनश्रेष्ठ 3 14 प्रजापाल महाद्युतिम् 5 अ' प्रजाभिस्तपसा चैव 747 प्रजा भोक्तु नरर्षभ 6 30 प्रजा मैथुनसभवा 2 49 प्रकारक्षणयुक्ने पु 36 48° प्रजा राजन्विना मया 5 474 प्रजा रद्रश्च भारत! 390 प्रजार्थमुपयोऽथास्य 2 20° प्रजावन्तो महारथा 23 411 प्रजापानामुत नर 27 31 प्रायानायुरचार्ण 2 56 प्रतावाश्च भवत्युत 26 280 प्रजापाव भोजर 140" प्राश्च पारयिध्येऽहम् 5 10 प्रगश्च विपुरास्तथा 13 681 प्रवाश्चैव चतुर्विधा 2016 प्रजा समनुपरस्त्रति 117 3rd प्रासमुद्वेगार 116 30 प्रजासर्ग इहोच्यते 3 15 प्रवासर्गेण तापत 48 50* 157 प्रजासु शीर्यमाणासु] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [प्रतिश्रुत्यानुनादिताः प्रजासु शीर्वमाणासु 31 35 प्रजास्तदनुवर्तन्ते 11 23° प्रजास्तस्मिन्प्रजापती 553 प्रजास्तस्यानुपालय 91 594, प्रजातस्याययोनिजा 1 394. प्रभास्तेनानुरञ्जिता. 5 29 प्रजास्तेषां पुरस्ताजु 22 18. प्रजासत्वङ्गस्य मे शृणु 23 320. प्रजास्यन्ति नरास्तदा 116 11'. प्रजाहितचिकीर्षया 5 420 प्रजाहेतोः प्रजापति: 3 4 प्रजा पार्थिव विद्धि तत् 5 48. प्रजा प्राहुर्मदर्पय 5 40% प्रजा. समभिदुदुवु 5 41'. प्रजाः सवर्धयिष्यति 2 43d. प्रजा सजेति व्यादिष्ट 320 प्रमालयति दु सहम् 109. प्रणमिष्यन्ति मत्रिण: 7821. प्रणमिष्यन्ति मानया 47 520 प्रणमिष्यामि भोगिनम् 70 11. प्रणम्य च जनार्दनम् 95 2 प्रणम्य चादिदेवाय 402 प्रणम्य मामेकमना परंतु यः 111.11. प्रणम्य मुनिपुगवम् 3571 प्रणम्य शिरसा कृष्णम् 11 126 प्रणम्य शिरसा देवं 106 37. प्रणम्य शिरसानत 45 22 प्रणम्य शिरसा प्रभुम् 121° प्रणयाचापि कृष्ण सा 71 33° प्रणयाता ससी सखी 10758d प्रणामं चक्रिरे तदा 83500 रणरमाग्नतामन 100 590 प्रणामावनतास्थितान् 103 1. प्रणिधार तानन· 64 10 प्रणिपत्याभिवाद्य च 106" प्रणिपेतुर्मनीपिणम् 10 300 प्रणिपेतुर्य योधिमा 92 290 प्रणेदुर्नहपुस्तदा 12 730 प्रणेदुभागभ 9 6 प्रतप्तनाम्यूनदचित्रपुर 31 120. प्रतदनस पुग्नी दी 23 620 प्रतस्थे गरनाय 91 390 प्रतस्ये दुदिनासरः 42 1. प्रतस्थे द्वारकां कृष्ण 92 68. प्रतापस्ते प्रकाशित. 78 20° प्रतापार्थे हता, मला 75 28. प्रताशवनता ये हि 808 प्रतापावनता सर्वे 77.30 प्रतिकूलं च गगने 20 430 प्रतिक्षास्य चात्मज. 28 4. प्रतिगृहाण कृष्णेद 78 29. भतिगृह्य च पर्पता 103 18, प्रतिगृह्य ततो दोण 15 64". मतिगृह्य तु तां पूजां 103 30 प्रतिगृह्य परीक्ष्म च 92 17. प्रतिगृह्य यथाविधि 87, 30% प्रतिग्रहीतुं धर्मज्ञ 22 25. प्रतिच्छनानि भासन्ते 54 360. प्रतिजग्मुर्दशास्तं 81 81. प्रतिजग्मुर्यथागतम् 118 " प्रतिजग्राह तं च स. 9013 प्रतिजग्राह तं वरम् 71 20%. प्रतिजग्राह तो काश्य. 79.4. प्रतिजग्राह दुर्धरम् 64 16. प्रतिजग्राह वक्षसा 74 37. प्रतिजग्राह वै द्विज 16 131. प्रतिजसे महावाहु 91 36. प्रतिज्ञात च मे कृष्ण 62.74 प्रतिज्ञा पाण्डवानप्रति 105 18. प्रतिज्ञामकरोत्तुद 88 1". प्रतिज्ञाय वनं ययौ 28 18. प्रतिदास्यामि ते गुतान् 105 18'. प्रतिपयत माचिरम् 31 64. प्रतिभानाय शोभनात् 161. प्रतिसहनिघातजा 15211 प्रतियातसतो मझा 35 63. प्रतिरम्य ततः संशा 1921 प्रतिगम व पारने 8028 प्रतिगेम सतोपद 31 30° प्रतिरोमो कर्मणा 83 42 प्रतिवरयं जगग्राय 77 191 प्रतिवाश्य जगाद628 प्रतियारणरोपण 730 प्रतिविण्यापपुर 6765* प्रतिविम्याप 18736. प्रतिभुन्यानुनादिला 73" -158 प्रतिपिद्धे मम महे] श्लोकपादसूची [प्रददी वासुदेवाय प्रतिपिढे मम महे 62 14° प्रतिपिद्धषु तूर्येषु 75 36° प्रतिपिद्धौ वराननी 74 23 प्रतिष्ठा धर्मराजस्य 9 19° प्रतिष्ठान महात्मन 9 19% प्रतिष्ठा योनिरेव च 6 380 प्रतिष्ठा घ शतकतो 21 37 प्रतिष्ठितयशास्तथा 23 180 प्रतिष्ठिता च वसुधा 83 13° प्रतिष्टिताया मेदिन्या 78 24 प्रतिसधातुमईसि 99 243 प्रतिसहियतामारमा 86 36° प्रतिस्मरन्तो द्विजमण्डलेपु 118 50* प्रतिस्रोत इवाम्भस 118 350 प्रतिस्रोताच भीतेव 56 8° प्रतीभन्ते सदोगता 38 611 प्रतीच्यामुत्तरस्या तु 22 16* प्रतीपमकरोत्तदा 916 प्रतीपस्य तु रान 15 100 प्रतीपस्य तु शतनु 23 114 प्रतीपो भीमसेनस्य 23 114° प्रतीद्विपता मृधे 81 1030 प्रत्यक्षमनुमान च 1177 प्रत्यक्ष कुर तरस्वयम् 1371 प्रत्यक्ष शूरसेनाना 96 30° प्रत्यगृलाद्ययाविधि 91 311 प्रत्यग्रजर दाभे 83 25% प्रत्ययवसेन्धनम् 50 16 प्रत्यमरमणीयानि 83 21 प्रत्यापनमालेन 83530 प्रत्यङ्गिरसजा श्रेष्ठा 3 64 प्रत्ययुसा ययुर्हृष्टा 84 19 प्रत्यपद्यत रत्नानि 9130 प्रन्ययन्धदुदूखले 51 140 प्रत्ययारपुनरेव स 61 630 प्रत्ययुध्यन्गुह तदा 112 34 प्रत्यक्षत वीर्यवान् 91 2 प्रत्ययोच सनातनम् 12 18 प्रत्याख्यातश्च सैरपि 22 204 प्रन्यागच्छदरिंदम 1921 प्रत्यानीतम्ततोऽम्माभि 109 280 प्रत्यानीता हि तेन वै 31 06° प्रन्याहते थे कृष्णेन 617° प्रत्युक्तेऽपि च नारदे 100 26 प्रत्युक्तोऽहमनेनाद्य 100 820 प्रत्युनगाम गोविन्द 67 1 प्रत्युत्तो गोप? 49 29 प्रत्युहम्य नराधिपान् 87 286 प्रत्युद्ययुर्महात्मान 91 29° प्रत्युवाच जनार्दनम् 29 20 प्रत्युवाच ततो राम 83 16", 66" प्रत्युवाच मुनि प्रभु 100 230 प्रत्युवाच यदुश्रेष्ठ 86 26° प्रत्युवाच यशोदा त 50 16° प्रत्युवाच शुभ वाक्य 451 प्रत्युवाच स त कृष्ण 7036° प्रत्युवाच स्मित कृत्वा 63 10° प्रत्युवाचाथ सा कृष्ण 71 290 प्रत्युवाचाम्युजक्षणम् 71 24° प्रत्युवाचार्णववधू 83 47° प्रत्युवाचोप्रसेन वै 78 30° प्रत्युपगचोरगेश्वरम् 56 350 प्रत्यूचुरविशङ्ख्या 60 1 प्रयूचुमी पर वाक्य 100770 प्रत्यूनुस्ते सतो वाक्य 100 71 प्रत्यूषपवनासारै 7020 प्रत्यूषश्च प्रभासच 3 32° प्रत्यूषस्य विदु पुन 3 370 प्रत्येत्य द्वारका विष्णु 91 11 प्रथम पदमात्मन 68276 प्रथम पापकर्मणाम् 67 210 प्रथम समरातिथि 816' प्रथम स्यामह विभो 112 1250 प्रथमादव हन्तव्या 47 go प्रथमे क्रोधमूर्छिनौ 7620 प्रथितश्च नभस्यश्च 7 130 प्रथिता पार्वती माया 86 24° प्रथिते चक्रवर्तिनाम् 6578 प्रथितोदारकर्मण 105 6 प्रददर्शाग्रतो वैन्य 5 44 प्रददावसमौजसे 28 8 प्रददु कामतो मार्ग 103 18° प्रददी त मणिं बभ्रु 29 38° प्रददौ ग्राह्मणायाय 103 27 प्रददौ मधुसूदन 98 150 प्रददा वासुदघाय 22 14 159 प्रदर गह्वरोदरम्] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [प्रभुश्चायतलोचन प्रदर गहरोदरम् 61 574 प्रदर्शयित्वा महती 58 32° प्रदाय कुण्डले दिव्ये 92 51" प्रदास्यामि यथाकाम 15 40° प्रदिशामि च तेऽनघ 13120 प्रदीप्तचक्रो बलवान् 15 36° प्रदीप्तज्यर नाभानि 92 40 प्रदीसज्वलनोपम 93 43 प्रदीप्तवैश्वानरतुल्यतेना 31 16 प्रदीप्त पतित तत्तु 110 62° प्रदीप्तानीव तेजमा 31 876 प्रदीप्ताशनियर्पिण 37 980 प्रदीप्ते ऽयम्बके तदा 112 28° प्रदीप्तेनाकरोविधा 91 56 प्रदीप्ते ब्रह्मशिरसि 12 88° प्रदीप्तोऽस्म्यभयकर 10 654 प्रदीयमाना गास्तास्तु 45 21" प्रदोषाधे कदाचितु 64 1° प्रदोषेऽभ्याशतस्करे 684° प्रद्युम्नपुरोऽपहृत 109 58. प्रद्युम्नमरिसूदनम् 89 प्रद्युम्नश्च महाबल 110 181 प्रद्युम्नश्वापि नो बाल्ये 109 29 प्रद्युम्नस्य महाबाहो 10 go प्रद्युम्नस्य सुतो यस्तु 98 196 प्रद्युम्नं च महाचरम् 88 374 101 1 प्रद्युम्न कामदशा 99. प्रद्युम्न प्रथमो जसे 985 प्रद्युम्न शत्रुकर्शन 109 88 प्रद्युम्न शरजारीस्तान् 110 520 प्रधुन्न स कथ जन्मे 98" प्रद्युम्नादिभिरर्जित 94 180 प्रधुम्नो द्वारका यया 89 81 प्रधुलो मम पुत्रक 99 370 प्रघुम्नो रक्मिणीसुत 94 19d प्रद्रुता एड्यन्तो वै 58 20% प्रवर्षयितुमिरछति 74 251 प्रधर्षिता यथा सिंहा 109 18 प्रधानपुरपराध्या 117 20% प्रधान पुरष तरमात् 1 17. प्रधान प्रथमोनय 65956 प्रधानारमा पुराए 32 7. प्रधारति यतो हरि 12 1 प्रधावरसु ततस्तत 112 396 प्रमाप्य बहुश शड 110 53° प्रनटचेतना मा 116 11° प्रनष्टधम धर्मज्ञ 116 3° प्रनष्टशोका रस्याम 113 69° प्रनष्टोरगराक्षसे 31 11 प्रपतत्सूपतत्सु च 36 36* प्रपतद्भिश्च पादपै 3620 प्रपतन्त्युत्पतन्ति च 32 16*36 200 प्रपत्स्यन्ति कृत पुन 117 441 प्रपरस्यन्ति कृत युगम् 117 d प्रपावापीप्रसन्नोद 86 46° प्रपेदुर्यदुपुगया 84 22 प्रबन्ध कर्मणामेप 65 330 प्रबभौ मणिपर्वत 92 23 प्रयोधन महाबाहो 109 63° प्रबूया सर्वशस्तात 10530 प्रभया भासमानानि 81 58 प्रभयाभ्यभवन्सर्वान् 93 41' प्रभया स्म समाहता 110 131 प्रभवं तस्य वाक्यस्य 100 300 प्रभविष्यन्ति शासिन 117 11 प्रभवोऽव्यय एव च 32 3 प्रभा चन्द्रमसो यथा 118 प्रभाजाराभिसवृत 91 27' प्रभातकाले समाते 35 56" प्रभाताग्नतश्चन्द्र 67 39° प्रभाया समपद्यत 51 18 प्रभा येन प्रतिता 23 100 प्रभावशोऽपि शक्रस्य 59 19° प्रभारश्रय कारणम् 2 550 प्रभाव चमहायच 138" प्रभावारपनामस्व4233 प्रभावादभवहृदम् 51 1 प्रभायन नरेन्द्र स्प23 164 प्रमान समम्बिन 10 350 प्रभारी महतामिव 65 18' प्रभामगिरना 8731 प्रभामसभार्या सा 331* प्रमासेनीयात्राया 79 प्रभुः प्रभारमनाम 30 33. प्रमुग युरिपती मम 5. प्रमुधापाठापन 50 1st - IGO प्रभु लोकनमस्कृतम् ] लोकपादसूची [प्रग्यो दानवोत्तम प्रभु लोकनमस्कृतम् 315 प्रभु प्राणधनेश्वर 4976 प्रभु सर्वधनुष्मताम् 98 23 प्रभु सर्वमहीक्षिताम् 81 145 प्रभूतधनधान्यवत् 85 3' प्रभूतमाल्यापणरान् 71 16° प्रभूतयवसेन्धनान् 80 170 प्रभूतस्थहस्त्यश्व 85 66" प्रभूत कमलोत्पलम् 83224 प्रभूत माल्यजीवन 71 18 प्रभूतायुधकल्पितम् 9658 प्रमत्ता द्विगुण वृषा 59 48* प्रमत्तो मत्त एव या 46 224 प्रमध्य घ वरारोहा 1800 प्रमध्य तरसा बली 23 1631 प्रमथ्य सन्दैितेयान् 31 88° प्रमदा वासवानुज 92351 प्रमदासु नरास्तदा 11637 प्रमदा शिशूलाश्च 16 120 प्रममाय यलाद्धरि 38 46* प्रमाणमिति निधिता 117 7" प्रमाण किं करिष्यति 11770 प्रमाण यदि कुरुत 11 23° प्रमाण पद्यवेक्षसे 43344 प्रमाण विविध नृपु 3027 प्रमाणाचरित सदा 11 230 प्रमाणादरतिकम 644 प्रमायगणपावे हि 112 84* प्रमाथगणभूयिष्ठ 108 35° 11044 प्रमाथगणमुख्याश्च 110390 प्रमाथगणवंशस्य 112 1254 प्रमाथगणशेपं तु 112 11" प्रमाणोन्मथनैस्तथा 75 304 प्रमादाक्तिमुपेक्षसे 10877 प्रमुसस्थी बनौकसी 7220 प्रमुखे तस्य सस्थित 13 236 प्रमुखे तस्य सैन्यस्य 33 14 प्रमुसे वामुदेवस्य 112 97° 113 13° प्रमुसे शमरस्य वे 112 1150 प्रमुख मुमुखो ग्रह 33 230 प्रमृष्टवरगाधोऽय 68 340 प्रयच्छ कुरुपुगव 15 39 प्रयच्छन्ति युधिष्ठिर 11 10% हरि पादसूची-21 प्रयच्छन्ती महात्मने 96 311 प्रयतिष्यामि दयेन्द्र 21 33° प्रययुरका हृष्टा 88 29 प्रययुर्वृष्णयश्चान्ये 87 29 • प्रययु पुरुपर्पमा 11360 प्रययौ केशवौ रणे 109911 प्रययौ त्वरया युक्त 110 43 प्रययौ द्वारका चापि 11344 प्रयया रथमारुह्य 29 6° प्रययौ स्वपुर तत 88 300 प्रययौ स्वा पुरी तत 88 28 प्रयागे पृथिवीपात 21 प्रयात सह सेनया 101 184 प्रयाता नन्दनस्येव 52 26° प्रयाता सर्वतोदिशम् 3 17, 21' प्रयाता स्म दिश सौम्याम् 102 23° प्रयाते पुण्डरीकाक्षे 88 30° प्रयातो नश्यति विभो 3220 प्रयान्तमृपिसत्तमम् 118 6 प्रयान्त प्रत्यवारयत् 9500 प्रयास्यन्ति दिशोऽसुरा 106 241 प्रयास्यसि जयाय वै 15 50d प्रयाधुत्तिष्ट गच्छाम 53 13° प्रयुक्त शास्त्रकोविदः 15 64 प्रयुक्ता विघ्नमिच्छता 118 28" प्रयुने ब्रह्मशिरसि 112 380 प्रयुक्तपा दृढव्रत 1 220 प्रयोक्तु कार्यमीदशम् 44 15 प्रयोक्ष्यामस्तत शुद्ध 15 49° प्ररम्बनरकावुभौ 31 750 प्रलम्यश्च महाकाय 9643 प्रलम्यश्च महासुर 45 6° प्ररग्बस्य प्रवृद्धस्य 5833° प्रलम्बस्याम्बरस्थस्य 58 536 प्रलम्ब मुष्टिनैक्न 90 16 प्रलम्ब य मृध देवा 6529 प्रलम्ब रोहिणीसुत 58 21 प्रलम्बाभ्या च बाहुग्या 7633° प्ररम्बाम्बरभूषण 33 2058 286 प्रलये च निपातिते 65 प्ररम्बन सहानघ 58. 194 प्ररम्बो गोपता गत 58 16' प्रलम्बो दानवोत्तम 58 14, 250 -161- प्रलम्बो धेनुकस्तथा ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवशस्य [प्रवेष्टुमुपचक्रमे प्रलम्बो धेनुकस्तथा 46 25° प्रलम्बो नाम भूत्वासौ 44 71° प्रलम्बोऽम्यागमत्तेपा 58 12° प्रवक्तार सुनियता 65 16° प्रवक्तुमुपचक्रमे 100 30 प्रवदन्ति मनीषिण 66 8 81 720 प्रवरश्चारिमेजय 23 109d प्रवरा लोकविश्रुता 107 644 प्रवर्यावर्तभूषण 31 270 प्रवर्तता च यज्ञोऽय 60 13° प्रवर्तयति श्राद्धानि 13 64° प्रवर्धयन्ते तमृर्षि प्रवर्तिता 118 456 प्रववर्ष सहस्राक्ष 29 33° प्रववधुर्मदापोरा 543° प्रववुश्च शिवा वाता 32 340 प्रववु सप्त मारुता 32 141 प्रववी व्यथयन्दैत्यान् 34 30° प्रवालपुष्पशवला 62 64° प्रवालमणिभूषण 43 19 प्रवालरुचिराङ्गद 34 14 प्रवार विकृताशा 92 10 प्रवासात्पुनरागतम् 83 64 प्रविभाग पुराणा वा 6 10° प्रविवेश गृह शौरि 94 18° प्रविवेश गृह श्रीमान् 94 21 प्रविवेश गृहोत्तमम् 71 64 प्रविवेश जनार्दन 92 491 प्रविवेश जनावृत 118 10% प्रविवेश ततो राम 29 2300 प्रविवेश तपोवनम् 114 1 प्रविवेश नृपोत्तम 23 120 प्रविवेश पुर कृष्ण 110 35° प्रविवेश पुरी प्रीत 19 16 प्रविवेश मनोजवा 10870 प्रविवेश महद्वनम् 85 63* प्रविवेश महाबल 68 161 प्रविवेश विनीतवत् 8546 प्रविवेश सभामेक 10964* प्रविवेशाणयमुख 35 62 प्रविशन्त तयेगेन 75 1. प्रविशन्ति ततो गाय 61 37. प्रविशन्ति सुरश्रेष्ठ 7 64 प्रविशव च द्वारि 68 16" प्रविशन्नेव पप्रच्छ 68 140 प्रविशन्नेव भगवान् 40 3° प्रविशामो न यास्याम 56 24 प्रविश्य चासुरी माया 65 39° प्रविश्य तास्तास्तनव 5924" प्रविश्य द्वारका पुरीम् 107 84* प्रविश्य श्रमकर्शित 8544' प्रविश्यान्त पुर सखि 107 bod प्रविष्ट तमसावृतम् 40 150 प्रविष्ट शोणितपुर 10753° प्रविष्ट सहक्शव 69 1 प्रविष्टा दानवीं मायो 35 10° प्रविष्टाना महात्मनाम् 10 63" प्रविष्टा पुण्यसरिला 93 23° प्रविष्टाश्च रसातलम् 49 43* प्रविष्टा कुरुनन्दन 9 354 प्रविष्टे तु विल कृष्णे 28 27" प्रविष्टे तु मनी तात 9 17" प्रविष्टो न सुबारिश 108 171 प्रविष्टोऽसि कुतश्च तत् 104 51 प्रविष्टी राजवेश्म तत् 71 364 प्रविष्टौ राजससदम् 71 351 प्रविष्टौ हृष्टवदनी 79 38 प्रवीरमनघं तथा 23471 प्रवृत्तचक्र पापोऽसौ 15 48. प्रवृत्तधर्मा सवृत्ता 32 390 प्रवृत्त तस्य तथक 1566* प्रवृत्तास्तरसमागमे 100 16 मवृत्ते क्षणदामुखे 68 10 मवृत्ते धर्मसस्तरे 36 394 मवृत्तेषु मखेपुष 6254 प्रवृत्तैरिव सवृतम् 36 16 प्रवृद्धाम्यां महामृधे 38 33' प्रदेशिन्द्रियारिभि 44 31 प्रवृदेश पलाहकै 4332 प्रवक्ष्यात समानना 9733 मयेशयामास गृ 94 10 प्रवेशयामास तदा 108 8. प्रवेशयनो भवन 0945 प्रवेशितयते स 3611 प्रदेशिन बुद्धिमता 71 प्रवटामितनु स्पराग 4345. प्रवेष्टमुरपामे 03 - 168 प्रवेष्टुं कुण्डिनं पुरम्] लोकपादसूची [प्रहपादिव सत्तम प्रवेष्टुं बुण्डिनं पुरम् 88 31 प्रवेष्टुं द्वारकां पुरीम् 107. 81', प्रवेष्टुं भीमविक्रमाः 107 16, प्रन्याहरत धर्मवित् 68 . प्रशस्तं सर्वदैवतै: 93 50'. प्रशस्ता वै प्रजा लोके 50 18, प्रशंसन्तोऽद्भुतं कृतम् 96 20. प्रशान्तकल्मपे लोके 36 45. प्रशान्तमभवदुजः 48 18%. प्रशान्तः स वनस्थस्तु 26 13. प्रश्नभारो महांस्तात 1". प्रभामिच्छाम्यहं किंचित् 11 29. प्रभं समेवान्वपुरछं 12 1. प्रश्च बहुभि श्रुतः 68 34. प्रमो मम समाप्तवान् 100 834. प्रश्रयेण दमेन च 9 10 प्रसक्तमभनधुई 82 234. प्रसजन्ती तु तां देवीं 99 11'. प्रसन्नवदनो भूत्वा 106 14". प्रसमसरिरा हृदाः 93 634. प्रसन्नाश्च दिशो दश 32 344. मसा ईसहासिनीम् 55. 34. प्रसने सयि सत्तम 1 28", प्रसनोऽस्मि महामते 43 37. प्रसह्य धर्षितस्तत्र 2045* प्रसह्य यदुपुंगः 89 43. प्रसा हृतवान्प्रभु 97 19. प्रसारमितविक्रमः 92 939. प्रसाद ह्यम्य विभोः 326. प्रसादनाय लोकस्य 31 1124. प्रसादमागम्य यपुष्टमायाम् 118 39. प्रसादमुपयान्ति वै 59 49. प्रसादसुमुखम्तर 106 30. प्रसादसुमुखोऽहं ते 112 117. प्रसादसुमुखो सहम् ॥2 1244 प्रसादं कर्तुमईसि 43 350. प्रसादं कुरु मे वीर 83 45". प्रसाद ते करिष्यामि 47.29. प्रसाई यान्ति पादपाः 59. 34. प्रसाद सागरा जग्मुः 62 63. प्रसादातस्य देवस्य 1373.14 13. प्रसादादमितौजसः 79 18. प्रसादानुगतं तदा 17. प्रसादे ते ध्रुवा लक्ष्मीः 109. 90*. प्रसाद्य तु ततो रामः 29 294. प्रसाधमाना भी सा 1964 प्रसाद्योमापति प्रभुम् 363. प्रसीद नाथ भीताः स्म 77.34% प्रसीद भगवन्मयम् 103. 4. प्रसीद राम भीतास्मि 83 420. प्रसुप्त इव खे गिरिः 61, 464. प्रसुप्तश्चासि विवृते 77. 43. प्रसुप्तं योधयेद्यो मां 85. 42. प्रसुप्तं सूततां गतम् 62. 94. प्रसूता देवसकाशान 1327. प्रस्ता. पादपद्धयः 76 17. प्रस्ता. स्वेदबिन्दवः 76 11. प्रसृष्टाभिस्तथैव च 75 31. प्रसेदुश्चापि सिन्धवः 32 36. प्रसेनवधकारणात् 28 17. प्रसेनश्वाध समाजित् 28. 11'. प्रसेनश्चोपदेवश्च 24 11. प्रसेनस्तेन भूपित. 28 16. प्रसेनस्य पदं गृह्य 28 19. प्रसेने चित्रके तथा 87 47'. प्रसेनो द्वारवत्यां तु 23 12. प्रस्थानं कृतवानसि 77 42". प्रस्थितस्रोतचरणां 55 32. प्रस्थिताः सर्व एव हि 18. 26'. प्रस्थिताः स जलेन वै 103. 12'. प्रस्थिती दीर्घमध्वानं 77.55. प्रस्थिती प्रेक्षकावुभौ 71.6. प्रसवोसीडवर्पिणी 80214. प्रसवोत्पीडिता कृष्णं 76 11:. प्रस्रवत्सु नदासु च 54 16. प्रस्रवन्ति घना रकं 66 30°. प्रस्वपन्त कृतान्ताभं 85 48", प्रहरध्वं च सर्वेषु 46 26. प्रहरन्गोषु दुर्मद. 64 0. प्रहरन्तीह मद्विधा 44 44. प्रहर्तुकामो पिघरते 65. प्रहतुं दानवं बलम् 34 330 प्रदर्पमतुरं गता 113 48", प्रहर्षमतुलं चापि I07. 6. प्रहमतुलं लेभे 106 40. 108 89. प्रदर्षादिव सत्तम 106.28. 163 प्रहाद्विगुणकमः] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्ये । प्राणोऽथ रमणतया प्रहाद्विगुणकम. 76 42. प्रहषोत्फुलनयना 108 99. प्रहसन्मुसलायुधम् 89 30. महस्य नारदः प्राह 109700 प्रहस्य वरुणं देषं 113 44° प्रहस्य सुचिरं कालम् 106 356. प्रहृतं केन सर्वासु 77 36, प्रहृतं तस्य भारत 23653 महतं नः कृतान्तेन 77.26. प्रहतं राक्षसे नीचे 44. 34. प्रहृष्टमुदित सर्व 79 29. प्रहृष्टा गोहयद्विपाः 79 33. प्रहृष्टास्ता वराङ्गना. 63 33. प्रहृष्टा' कृष्णयोपितः 99 334. प्रहृष्टेनान्तरात्मना 71414. प्रहष्टर्यादबेश्वरैः 94 21. प्रहृष्टो ब्राह्मणम्तात 103 28". प्रहादबरिशम्बरै. 96 6. प्रदादममिवौजसम् 4 4. प्रहादश्चैव वीर्यवान् 3.59". प्रदादोऽश्वशिरा कुम्भ 171. प्रह्लादनाथं च गवां 55 12. प्राकारव रिन्यस्य 90110 प्राकारपरसंपन्न 93 24° प्राकारस्तस्य वेश्मन. 946. प्राकारस्य च या गति.8694 प्राकारेणार्कवणेन 86 50093 124 प्राकारैरुपयोभितम् 108. 1. माकारो वै हिरण्मयः 93 6. प्राकृतस्यापि जायते 785" प्राकृतान्यपि सर्वश' 105 26 प्राकामदसुरो युद्धे 36580 प्राक्सच्या परिघप्रस्ता 6028 प्रागल्भ्यं यान्ति तोयदा: 2429. मागेन जहि दानम् 58 49" प्रागेव कृतबुद्धिमान् 86 35" प्रागेर नरेन्द्रेण 673° मागेव धरणी गते 44 3 भागेर वसुदेवस्तु 49 " प्रागेवाभिमती मम 78 7' प्राग्ज्योतिपपतिनदा 91 माग्ज्योतिपपुरे चापि 45.8 माग्ज्योतिपमुपादयत् 91. bf. प्राग्ज्योति तो भौमस 44 74. प्राग्दिशं सप्त सप्तकाः 735. प्राग्लोके परमं यश. 12 30 प्राग्वंशकायो घुतिमान 31 26°. प्राग्वंशं यज्ञभूमि च 317. प्राङ्मुखश्चारुनियुक्त 74 14". प्रामुखशानिर्मुकैः 74 30 प्रामुखै सिच्यमानश्च 53 276 प्राचीनबर्दिभगवान 2 29. प्राचीनदिपं शुक्र 2 28° प्राचीनहरभवन् 2 30° प्राचीनाया कुशास्तस्य 2 30* प्राच्यैश्च दाक्षिणात्यैश्च 81 100%. प्राजापत्यं च यत्तेत्रः 112 93. प्राजापत्येन कर्मणा 35 43. प्राजापत्येन विधिना 43 42. प्राज्ञस्यापि सतो मम 49 6. प्राज्ञानां वचन काले 15. 5300 प्राजारिगरडवजम् 103.4 प्राञ्जरिवश्यिमववीत् 084.113. प्राञ्जलि प्रणता भूत्वा 8 9". प्राञ्जलि प्रत्यवेदयत् 82100 प्राञ्जलि समुपस्थाय 103.3. प्राणदता गणा 0870 प्राणदश्च महाबल 62 41'. प्राणयोनिस्तु भूतानां 8664. प्राणस्वात यहिश्वर: 67.20. प्राणारमानं च मारुतम् 30 51' प्राणानां या पुरस्य या 15 41. प्राणाम्राजयते भृशम् 40 30 प्राणान्वापि परित्यक्ष्ये 199° प्राणागनी समान 30 47 प्राणोस्वान जयविणाम् 10975 प्राणास्त्यश्यति मागध 82 21'. प्रागात्त्यश्यामि या प्रियान् 107. 8s'. प्राणांस्त्यध्याम्यई मुझे 107.18. प्राणिनां नियतंग ॥. धरांश निर 47250 प्राणे प्रियतरो नित्यं 100 60. प्राग सह दुरासदा 65 26. मागस मनाइ50211. प्राणोऽमर्मभुमदनः 3035 मागोऽध मगमपा 331. 161 ।

प्राणो वृहस्पतिश्चैव ] लोकपादसूची [प्राप्तो देश्या प्रसादेन माणो बृहस्पतिवैव 7 11 प्राणोऽस्य प्रथम स्थान 30 48* प्रादाय भगवान् 10 510 प्रादालन्या शुक्रस्तस्मै 1850 प्रादारकृष्ण प्रतीताय 79 230 प्रादादाईद्रयो नृप 80 31 प्रादाद्यथेप्सित क्षीर 2 26° प्रादुरास महारमन 114 104 प्रादुरासरततो रौद्रा 12 68° प्रादुरासोन्ममानध 15 10 प्रादुरासीन्महात्मन 1080 प्रादुरासीन्महास्वन 81 911 प्रादुर्बभूव तुमुल 81 90° प्रादुर्बभूवु शतश 52 290 प्रादुर्भवति कार्यत 31 130 प्रादुर्भपति कार्ययान् 31 14° प्रादुर्भयति मायया 23 1430 प्रादुर्भावसहस्राणि 31 10 प्रादुर्भाव प्रकीर्तित 31 20% प्रादुर्भावानुकीतनम् 31 1111 प्रादुर्भावानुकीतनात् 31 152% प्रादुभावानुकीर्तने 31 1500 प्रादुर्भावा महारमन 31 1480 प्रादुर्भावाथ ये विभो 302 मादुर्भावाध वै नृयु 68 370 प्रादुर्भागश्च वक्ष्यामि 31 13 प्रादुर्भावा पुराणेपु 31 149° मादुर्भागोऽद्भुत शुभ 31 100% प्रादुर्भावो महात्मन 31 21, 926, 934, 100, 109', 1430 प्रादुर्भून समन्तत 1078 प्रादुर्भूने दिवाकरे 109 64 प्रादुश्चकार दिव्यानि 88 21 प्रादुश्चक्षे तदा रौद्रम् 112 87° प्राधुनिगणयो सख्ये 109 73° माधुनिमपराजितम् 108 6 प्राधुनिरपरानित 103 56,81' प्राधुनिरभवणे 108 85* माधुनिस्वसरसुसम् 108 10 प्राथुनिनाम्याम्पत 108 672 माधुग्निर्मीमविक्रम 10770 प्राधुग्नियय सांप्रतम् 109 74 प्राथुम्निर्विशिखबद्ध 108 83° प्राधुनिव्र्यहनचापि 108 27° प्राधुम्निवधकासया 108 50 प्राधुनियधकाविण 108 180 प्राधुनिं युद्धदुर्मदम् 108 60 प्राधुग्नि क प्रवासित 109 30° प्राधुनि सायकैश्चित 112 1133 प्राद्रवन्त भयात्सर्वे 108 253 प्राधान्येन नियोध तान् 3 650 प्राधान्येनेह कीर्तिता 1079° प्राध्यायहरुड हरि 109 81' प्रानृत्यत भये जाते 112 116 प्रापयिध्यति कामग 91 360 प्रापयिष्याम तत्सर्वं 92 18 प्रापित भयतामिह 96 650 प्राप्तयौवनदेवस्तु 79 20 प्राप्तवानप्ति सर्वेषाम् 106 31° प्राप्तवान्बर देवस्तु 86 80° प्राप्तव्य तपस फलम् 31 52° प्राप्त च दिवि देवेषु 96 670 प्राप्त शझमह वीरौ 590 प्राप्त हयंतले मया 107 451 प्राप्त परमधर्मज्ञ 9 39° प्राप्त स मुनिसत्तम 23 920 प्राप्त सुरसभामिमाम् 44 19° प्राप्ता किलेय हि गर्ग 59 310 प्राप्ता चैकार्णवामही 61 20° प्राप्तानि विधिना राज्ञा 23 145° प्राप्ता ममारय विणो 41 23° प्राप्ताया गृहमेधिनाम् 68 8 प्राप्ताया प्रावृष क्षये 59 67' प्रातारिष्टमिवात्मान 65 6° प्राप्तारिष्टाय मूर्खाय 71 130 प्राप्ता वय च धर्म स्व 1620 प्राप्ता वय हि त काल 116 20 प्राप्त मा सागरे नून 83 44" प्राप्ता स्मो विधवाशब्द 77320 प्राप्तुकामैय युधि 6 45 प्राप्त तरवृणु मे वाक्य 107 620 प्राप्त कसस्य शासने 47 360 प्राप्त कृष्णे महाभागे 13 52° प्राप्त दिनव्युपरमे 68 10 प्राप्तो दानपतिर्वजम् 68 134 प्राप्तो देश्या प्रसादेन 107 55" 165 प्राप्तोऽन्तकालो लोकाना] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [प्रांशुप्राकारसपत्रा प्रान्तकालरे लोकाना 61 20 प्राप्तो भवति कर्मणा 89 41' प्राप्तोऽय पुण्डरीकाक्ष 113 54° प्राप्तोऽय स्वपुरी हरि 113 660 प्राप्तो रुक्मिणिनन्दन 109 290 प्राप्तो वृन्दावन वनम् 53 20% प्राप्तौ परमवाखान्य 58 g प्रामुयाच महद्यश 8 48d प्रामुयाय सुरोत्तम 42 206 प्रामुवन्तीह देवता 13 320 मामोति शीघ्र भगवत्प्रसादात् 31 153° प्रामोतु तुमुल भयम् 81 484 प्रामोतु सुगति तत्र 78 29 प्राप्यते यदिदामामि 113 590 प्राप्य पुण्यकृताल्लोकान् 92 49° प्राप्य योगगति सिद्ध 1928 प्राप्य योगमवाप्स्यथ 178 प्राप्य योग बनादेव 19 27° प्राप्य रोहितकूटानि 97 130 प्राप्यावभृथमध्यम 20 270 प्राप्येक्ष्वाकुकुल महत् 42 47° प्राप्येवामृतमुत्तमम् 32 33 320 प्राप्स्यते नात्र संशय 1611 प्राप्स्यते नृप सरकार 78 320 प्राप्स्यते विपुल यश 62 714 प्राप्स्यन्ते हासमायुप 117 30 प्राप्स्यसि वन सशय 31 46* प्राप्स्यसे सपशुक्रियाम् 47516 प्राप्स्ससे सिद्धिमुत्तमाम् 14 " प्राप्स्यसे सुमहयुद्धम् 106 36° प्राप्स्यानो गर्भयत्यास 47 36° मात्रुप्यत महातेजा 40 38 प्रायच्छद्विदित तव 156 प्रायसो भुवि देहिनाम् 4030" प्रायश्चित्तप्रिया से 12280 प्रायश्चित्तनखो धीर 31 24 प्रायश्चित्त घरम्य ये 12 36" पायश्चितानि चाय च प्रायश्चित्तानि धर्मशा 1226 मायत्तिार्थतत्यक्षा 12 27. प्रायात पितामहम् 12 23 प्रायानिकान्वे सभारान् 10378" मायामरस्तपश्रत 18 8 मायादुत्तङ्कसहित 96 प्रायोधयमह रिपुम् 1558 प्रार्थनां ता मणेर्बुध्या 28 170 प्रार्थयन्ति पर्स गतिम् 35 360 प्रार्थयन्सुमहद्यश 2100 प्रार्थित परम वरम् 23 140% प्रार्थित सुमहातपा 3 99% प्रारोभयत सलिता 99 100 प्रावर्तन पपु सोम 55° प्रारर्तयश्च सग्राम 110 21* प्रावलात घ गोविन्द 75 16° प्राविशन्बरशालिन 74 200 प्राइट्प्रवृत्ति सटश्य 54 210 प्राशन चामृतोपमम् 35841 प्राश्निकाश्च निमश्यन्तां 72 100 प्राभिक समुदाहृत 75 120 प्रासादवरकुण्डरा 4466 प्रासादवरचत्वरै 9331 प्रासादवरसपबै 93 38* प्रासादशतशोभितम् 94 10 प्रासादशिखराणि च 94280 प्रासादस्तन सुमहान् 94 * प्रासाद चैव हेमाभ 93 39* प्रासादाबावरोहन्त 108 20° प्रासादरुपशोभित 92 22 प्रासादपशाभिता 86 47" प्रासादेपशोभिताम् 107 8' प्रासादो हरितप्रम 834 प्रासाचे सोमराम्तथा 81310 प्रास. पाशेश सबैध 33 29" मास पाशैश्च मुद्गरै 37 10 प्रामे पाश्च वितते 33 120 मासत्सद कृष्णेन 87 13 माह कृष्ण प्रतापगन् 112 89 माह गम्भीरया गिरा 12 83 माह देयोक्तो वारयम् 107 ॥" माह माये महीरिताम् 100 भाहरण्मुष्टिना मूर्ति 752 माह पारपस पाश्पक्ष 1092f प्राहिणोतामसहैन 108 10 माहिणारा मुराद 67 30' माहियोगमपादनम् 87 मागुममारसपा 485 -166- प्रियका स्वर्णकास्तथा] लोकपादसूची [प्रेपयाणा वराहणि प्रियका स्वर्णकास्तथा 59 64 प्रियकै पुस्तैिगौर 59 320 प्रिययूतश्च रामोऽसौ 89 20° प्रियमोगेष्वयश्चिता 77 11' प्रियमावेदयिष्यामि 10620 नियमिच्छसि चेलतुं 93 30 प्रियया प्रीयमाणया 88 356 प्रियव्रतोत्तानपादौ 28 प्रियस्तेऽह महाबाहो 104 18* प्रिय दृष्ट्वार्थका विदा 108 प्रियं नाथमपश्यन्त्य 109 10 प्रिय मीतस्य भाषितम् 62 99" प्रिय प्रोवाच वचन 99 100 प्रिय मधुरभाषिण 836 प्रिया दुहितरस्तथा 92 230 प्रियाम्या बरवामृप 807 प्रियामिव सखी सखा 96 16' प्रियायास्तनया नृप 7 40% प्रियाय वीरपत्नीभ्या 80 7° प्रिया वै परमेष्ठिने 3 13 प्रियो मेऽसि धनजय 104 18 प्रियोऽसि मम दर्शने 71 29 प्रीगयत्यखिल जगत् 5970 प्रीणपरयेव न सर्वान् 60 20 प्रीणयाच स्वकर्मभिः 5 35d प्रीणास्यमृतसमितम् 14 मीणात्यस्मानमृतवत् 115 20 प्रीतश्चैवाम्यनन्दत्त 92 50% प्रीतस्तु मनसा कृप्या 71 130 प्रीत शङ्खमुपध्मासीत् 94 8° प्रीतारमा दास्यति स ते 18 311 प्रीताश्च पितरो येन । " प्रीताश्चैव धय वीर 83 8 प्रीतास्नुष्टास्तथा वयम् 96714 प्रीतिमन्त परस्परम् 12 320 प्रीतिमाञ्जनमेजय 89 120 प्रीत्तिमानभवदाजा 22 20° प्रीतिमान्पुण्डरीकाक्ष 65 101 प्रीतिमान्विचरिष्यामि 78 350 प्रीतिस्ते तेन रोचताम् 66 381 प्रीति वदति दारण्यम् 65 64 प्रीतेन मनसा युक्त 6289% प्रीतो निवेशयामास 61 64 मीतोऽसि तव भक्तस्य 3140 प्रीतोऽसि दर्शनादेव 62 90° प्रीतोऽसि विष्णो देवेश 67 620 प्रीती दम्तव युद्धेन 42 280 प्रीती स्वो वरवणिनि 9 100 प्रीत्यर्थ कुरुनन्दन 29 344 प्रीत्यर्थ वज्रपाणिन 97296. प्रीत्या कारवनन्दन 22 14 प्रीत्या च सैक्मिणेयस्य 89 11 प्रीत्या परमया युते 92 57 प्रीत्या भीता च साभवत् 509 प्रीत्या वरमनुत्तमम् 11 25° प्रीयता तेन भारत 12 181 प्रीयता भरतर्षभ 104 231 प्रीयन्ते पितरस्तस्य 31 1520 प्रीयमाण शतकतुम् 21 260 प्रीयमाणा सभा जग्मु 967° प्रीयमाणा समाजग्मु 94 13° प्रीयमाणो मयानघ 11 200 प्रेक्षकाणा तथैव च 72 11' प्रेक्षता चामवत्प्रीति 3740 प्रेक्षन्तौ पुरुपर्पमो 82 11 प्रक्षन्ती मथुरा वीर 715 प्रक्षन्यो हृष्टवदना 99 320 प्रेक्षमाण शिवसस 34 11 प्रेक्षमाणे प्रदलिगतै 81 170 प्रक्षागारमयाययौ 74 174 प्रेक्षागार जगामाशु 72 10 प्रेक्षागार नृपोत्तम 7220 प्रेक्षागार स कसस्य 74 15% प्रेक्षागाराग्यदूरत 746 प्रेक्षापूर्व च कृष्णोऽपि 85 380 प्रेक्षितु सह सा स्वीमि 73 10° प्रेतकार्य त्रियेत ह 78 251 प्रेतकार्याणि कार्याणि 77 51" प्रेतकार्याणि कुर्वते 31 1310 प्रवत्यमुपपन्नस्य 77 49° प्रेतरूपौ तपस्विती 72 23 प्रेतसस्कारमात्रेण 78 27° प्रेत्य चेद च मानव 59224 प्रेत्य चेह च मोदते 114 प्रेत्येह प्रास्यते फलम् 13 330 प्रेषयाणा वराणि 77 30° - 107 प्रेषयामास कंसस्य] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [यभापे कृष्णमन्ययम् प्रेषयामास कंसस्य 462 प्रेषयामास कृष्णाय 85 34° प्रेषयामास रामाय 44 26° प्रेपयामास सागरम् 97 26'. प्रेषयामि यमक्षयम् 81 731 प्रेषित. प्रीतिमानभूत् 85 100% प्रेष्यकर्मकरा जना 86 10. प्रेष्यन्तां शिल्पिमुख्याश्च 80 10. प्रेष्योऽसाविति चिन्तयन् 87 16. भैरयत्तालमूर्धनि 57 19. प्रोक्तवाअरचारिणम् 100 38. प्रोक्ता व सर्ववंशास्ते 113 84. प्रोक्तो जनगणो मया 23 94 प्रोक्षणीय ध्रुगं चैव 30 22° प्रोक्षणी दक्षिणायनम् 316° प्रोक्षन्तीभिश्च तदूनम् 53 28. प्रोक्षयामास सर्वत 67260 प्रोक्षयित्वा च गां ततः 16 12, प्रोक्षयित्वा च गां तदा 16 16. प्रोक्षिता खल्विमे मन्ये 81 11 प्रोच्छ्रितानि सितानि च 81 44 प्रोवाच गोता गोपानां 61 52° प्रोवाच नृपति तदा 106 38. प्रोवाच परमाद्ध. 110 67" प्रोवाच पितर तदा 8 211 प्रोवाच प्रियदर्शन. 71 18 प्रोवाच बाण समरे 112 100°. प्रोवाच भगवान्यायं 31 51' प्रोवाच मथुरेश्वर 62 114 प्रोवाच राजनिक स्वेतत् 106 21 प्रोवाच धदनां वर. 106 320 108784 प्रोवाच वदतां श्रेष्ठ 66 9 86 4. प्रोवाच शुभया गिरा 49. प्रोवाचामपितो घच 108 874 प्रोवाचामितदक्षिण 69 10 प्रोपितोत्सुक्ष्यकारिण. 5-5 20. प्लक्षवाम्पपेचयत् 49 प्लेवगा. सप्लवं गता 61 18" पूवद्भिरिव पतिभि 811 सावयेयं यथा जले 5 13. छतवलिंगतपादस्तु 67 28- गुलजयते नभ 67 6. फलकामा न संशय 11 12. फल्बीजमहौषधि: 31.25. फलवासु तृणेपु २ 8254 फलवन्तश्न पादपा 62 644. फलं दत्तस्य चानध 11. 351 फलं पुण्यस्य कर्मण 78 10. फलं प्राप्स्यति दुर्मति. 38 14. फलं प्राप्स्यन्ति तस्य तत् 12 35. फल श्राद्स्य चानघ 12 19. फगप्रशाखिभिर्भाति 57.6%. फलादिन्द्रसमादिह 118 29. फलावदंशपूर्णाश्च 74 11. फलेन तेन सर्वेण 118 16° फले. प्रवालश्च घनं 55 19° फुल्लनीपद्रुमं वनम् 54 11. फेनप्रहष्टदशनां 5534. फेनमेखर सुनश्च 83 33. फेनहासह सिध्यन्ति 83 44. फेनानु सुतपा जज्ञे 23 270 घ यदरीफ्लमा 2 21 30 बद्धगोधाहुलिश्च 208 5. पद्धगवतीपु च 595. पद्धमांना दिश. सर्वे 63 11. पद्धवासासु धेनुपु 68 6. यद्धवरसेव सौरभी 5011 यद्धस्तव पिता नृप 106 20. यद्. प्राधुनिराइये 108 8' पददधिताम्यर 49 28. पदो नागैर्महायर' 109. पदो घत्स इयोदरे 51 23 पश्या परिवरं हवम् 561. पभ्या पितरमाहुकम् 800626. यन्दिमागधसूतानां 110 " पन्धुनीयामितानासु 59 82. पन्धुभित समागमम् 68 13 पयाधे से गज कृष्ण 71 25' यजिरे स्थापित 37.32%, समजुर्वाभिहन 37 26. पभार रूप मोमा-110s. यभार दिनये स्थित 101 यभारे कृष्णमायणम् 60 61. 168 बभापे क्षुब्धमानप्त ] लोकपादसूची [यलमाहारयामास यभाये क्षुन्धमानस: 386 पभापे चारहासिनीम् 99 11 घभापे धरणी वाक्य 42 13° बभापे पुण्डरीकाक्ष 84 1° यमापे मत्तकाशिनी 71 336 यभापे हस्तिजीविनम् 73 11 यमासे छत्तजरदा 57 22 पमासे भवनहद 93 35 पभु कृतयुगे पुरा 79 80 यभूपतुर्यरसपाली 52 3 बभूव दीर्घतमस 23 26° बभूव नृपति पुरा 23 28 बभूव परमोत्सव 89 150 पभूव पुरपोपेत 84 28° बभूव भुवि विश्रुतम् 88 32° पभूव मृगयाशील. 23 82° यभूव येन विक्रम्य 15 380 यभूव रकमकवच 26 9° बभूव वदता घर 5 18 पभूव स महातेजा 969 पभूब स समागम 3720° मूव सुमहायल 1058 बभूवाथ पिता राज्ये 9 49° बभूवाय प्रजाक्षय 2 344 बभूवादर्शन सूर्य 54 30 बभूवाभिजित किल 27 18" यभूवामित्रकर्शन 19 1 23 154 पभूवुरमरोपमा 23 96 पभूवुरमितौजस 15 136 यभूवुगोपयोपित 83 16 पभूयुभरतर्षभ 3 108 यभूवुर्मुदिता सर्वे 67 45° पभूवुर्वीर्यसपना 87 10° बभूवुर्मजवासिन 69 28 यभूयुस्तु यदो पुना 231340 पभूवु परमोपेता 93 66948 बभूयु सुमहान्त्यथ 82 1 पभूवेति मया श्रुतम् 15 100 यभूल पुरूपया 2044 बभी चारुपरिचिप्ता 93 13° यभो तस्य निविष्टस्य 81 26° यमा प्रमुसनम्नस्य 108 620 यभी याहुसहस्रण 108 53 हरि पादसूची-22 वभौ भूतगणाकुले 48 32 यभी शुरूस्य जामाता 15239 बधाजुरधिक गो 60 32 बभ्रुर्मतिमता घर 29 2 यध्रुर्विपृथुराहुक 81 96 यध्रुसेनच पार्थिर 23 130* यधु दानपतिं चैव 65 10* पत्रु देवावृधामृपात् 27 11 पन्न श्रेष्ठो मनुष्याणा 27 13° यनोदेवाधादिति 27 14 बम्रोईस्तादरिंदम 29 390 बनोश्च प्रियमन्विच्छन् 97 19* बईकेतु सुकेतुश्च 10 50° यईभारैश्च भूपिता 65 530 बर्दापीडैश्च दशित 59 68 बर्हिणाना च चिरत 73 13° धर्टिभिश्च निनादितम् 92 41* बलग्राम्या विवर्णता 1174 बलज्येष्ठस्य नृपते 44 31° बरज्येष्ठेन लोकेषु 77 44 बलतश्च कियातश्च 75 14" बढतो मित्रतस्तथा 8486 बलदेवस्तु तस्कृत्वा 89 390 बलदेवस्तु दक्षिणम् 82 15 बलदेवस्य त कोप 8940 बलदेवस्य धीमत 90 10 बलदेवस्य माहात्म्य 90 18° बलदेव च कैशिक 81 83 बलदेव च माधव 955 बलदेव जिगाय स 89 28 बलदेव ततो कमी 89 38* बलदेव पुरस्कृत्य 81 96° बलदेव शिते शरै 81 84* बलदेवेति नामास्य 58 57° बलदेवेन धर्मेण 89 380 बलदेवो ग्लई ददौ 89 270 बल्देवो धनुश्चाजी 81 85 बलदेवो धनुश्चास्य 81 82° बलदेवोऽपि धर्मात्मा 76 45% बरमाणेन शूराणां 75 33° बलभद्रादवाप्तवान् 2928" बरमद्रण धीमता 11000 बरमाहारयामास 75 40% 169 - बलमोजश्न माधव ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [बहुर नसमाकीर्ण बरमोजश्च माधव 97.310 बल्यश्चानुरूपत 72 84 बल्यश्वोपकल्प्यन्ता 72 10% बलराष्ट्राभिसवृता 81 121 बलवन्तो मनस्विन 16 161 बलवन्तो महारथा 80 1688446 वलवान्मदलोलाक्ष 7320 बल्वान्सरवसपन्न 108 920 बलवीर्यप्रवतिना 99 19 बलश्चध महाबल 377 बलश्री शिबिरस्य वै 81 26° वलस्थो वा स्थितो रङ्गे 75 136 बल तदभवक्षितौ 110 44 बल तावद्विमृश्यताम् 817" बल तु बरदेवस्य 58 58° बल प्रद्युम्नमेव च 112 330 बल बरवदुद्धत 34 60. बल भग्न समालोक्य 112 120 बल रणौघाभ्युद्याभ्युदीर्णे 33 32° बल सुराणामसुरै 35 11 बलाकाश्वो महीपति 23 81" यलाकोत्पातभूपणान् 54 22° घलात्कुर्वन्ति यादवम् 66 40 बलादपि न सशय 59 60" बलायनमिवायसम् 7151 बलाद्वर्ष प्रवर्तितम् 7729d बलराध्यक्षाश्च युक्ताश्च 86 76° बलरानि चन सशय 15 40" बलानि च ससैन्यानि 84 11 घलानि पृथिवीक्षिताम् 81 33° पराहकतनूरुदम् 32 21 बराहकाअननिभ 32 21. बलिना विष्णुना पुरा 31 69° बलिनी युद्धशालिनी 72 14' बलिपुनो रणश्लाघी 1065° यलिभागस्य पाथिवा 116' बलिनशे विरोचनात् 360 बलिर्मानुपयोनी तु 23 20. वलिर्विष्णुशलाकान्त 106 26* मलिवासवयोरिय 10973 परिसूनुरिद याश्य 106 पति शान्ति परां ययौ 2331 पली वाणर्मदापरम् 87 6 बली विष्णुहरश्च य- 26 बलेन च पराध्येन 60 6" बरेन च समन्वित 103 घलेन बलिना वरौ 31 114 यसेन महता वृत 80288 31 चलेन महता वृता 87 324 बलेन महता वृता 81 103 योनाय हतो दैत्य 58 570 घलेनास्त्रबलेन च 1559 चलेनोदकराक्षसम् 975 घले महति तस्थिवान् 44 230 बलेबलवतो यज्ञे 169 बलेईस्ताधिभि क्रमै 62 89 बलेस्तु ब्रह्मणा दत्त 23 30° चलेत्रिभुवन हरि 97 214 बले पुत्ररात त्यासीत् 3 6. पले पुत्रेण घाणेन 108 11 यले पुनो महावीर्य 97 23° थले सकाशादैत्यस्य 42 35° यले सुतसुता घ व 107 23" बले सुतो महावीर्य 105 120 बलौघप्रतिवारणा 84 181 बलौघानां परिक्षय 82 6" बरीघरभिपीडिता 81 190 बलवत्वं प्रकुर्षत 50 11 पल्लवाय निवेद्यताम् 56 161 यहवचव राजान 906. बदव क्षत्रिया पूरा 42 49. बहव पारतद्रिण 39 161 पहय पुरतर्षभा । यहयो ज्ञानयश्चद 85 29 यहवो दानया हता 381 पहुगरिकसयुक्त 58 8 पहुस्वासानुकीर्तिता 23 160 पदार मनोरमाम् 9 26 बहुधा प्रशाधतम् 32 84 पहुनेपर एयत 50 43 पहुपुयस्य विदुप-380 बहुभिर्देवगधरे 03 पनि कामग 50 18. पहुभि निमिंग rot. वयाचनका काम 1100 मराराममाडी 073 - 170- बहुवर्षसहस्रिके] श्लोक्पादसूची [पाणश्व शकलीकृता बहुवर्षसहस्रिके 12 4 बहुविधमुत्तममन्यदेव च 90 19 बहुश सर्वभूतात्मा 31 13 बहुशाख महाउसम् 24 35 बहूदकेन मार्गेण 49 130 बहूनां स्वीसहस्राणाम् 981" बहूनि विप्रगोत्राणि 35 28 बहून्याश्चयंभूतानि 1050 महन्वपंगणानप्सु 42 22 पहून्य प्राणिनो रोके 6 10 यसनदक्षिणा सर्वे 29 270 बलपत्या प्रजाहीना 117 36 बद्भपरये महासरचे 372 घय प्रभापसे 112600 बह्वयं यहुविस्तरम् 1 8 115 11' यहाँ श्रुतिसमिताम् 1 100 बताश्चर्याश्च भूधरा 100 540 पातमित्यवीरपुन 89 360 यादमित्यप्रवीत्प्रभु 42 46* बादमियरकीदृष्ट 89 24° बाढमित्येव तेथी 69 26° यादमित्येव सह ते 42 1° यादमेवं भविष्यति 1038 बाण किं गजैसे शूरा 112 59 याणगारो ममानय 113 पाणजालै समावृणोत् 113 204 घाणज्येष्ठ नराधिप 3610 बाणनाशार्थमच्युतम् 112 106° याणपुत्री गुमेक्षणा 107 440 याण बाण प्रनृत्यस्व 112 114° बाणगहुप्रशान्तये 112 940 याणमप्रतिम रणे 106 21' 112 89,990 पाणमाम्म्य मूर्धनि 107 53d याणमाद शनैरिदम् 112 854 याणमाह शुभ वच 112 114' वाणयुद्धमनुत्तमम् 113 80* याणरक्षणमातुर 112820 पाणवर्ष समाहतम् 110 550 याणवकुरा सर्ग 13 21 माणवर्महायग 120 भाणवश वीहितम् 1123 माणवर्षे समाहत 108 66" माणवृष्टिं समुद्यताम् 112 16, याणसरक्षणपरा 112 99* याणसाहाय्यकाटिसणो 106 61" याणस्तेषामतियर 3620 याणस्य च महामृधे 103714 याणस्य छेदन के 12 104° याणस्य जन्मनक्षत्र 106 480 याणस्य दुहिता कन्या 1079° बाणस्य पुरमन्तिकात् 110 330 बाणस्य प्रमुपे स्थितम् 112 96* याणस्य रथमूर्धनि 108 684 बाणस्य वदत सख्ये 108 56° बाणस्य सचिवस्तर 106 510 वाणस्याद्भुतकर्मण 31 146 110 35* बाणस्याप्रतिमौजस 109 720 बाणस्यादित तदा 108 13 बाणस्यास्याभय दत्त 112 110% वाण जित्वा महादेव 113 61° याण नित्वा सुदुर्नयम् 113 54° बाण प्रति महावल 112 103d याण प्रनि महासुरम् 20620 बाण सदर्शयिष्यति 109 80d बाण सरक्ष गम्यताम् 112 846 बाण स्थितमथान्तिके 112 128" बाण कृष्णमभिद्रवत् 112 50* वाण क्रुद्धोऽतिवीर्यवान् 112 87" बाण शोधात्प्रजग्वाल 10851 बाण पञ्चनदस्तथा 81 4gd बाण परपुरजय 106 190 बाण परममविग्न 112 81° बाण प्रीतमनास्त्वेव 10652 बाणः साये पराजित 1063 बाण सुबहुसो मुदा 106 14 बाग स्वगृहमाविशत् 108 981 बाणानीकानि सहसा 110 36° याणानीकै समभवत् 108 36* बाणेन मायामास्थाय 109 740 घाणेन सह सगम्य 112 66" बाणेन साथै समय 113 42° बाणेदशभिराशुगे 87 530 याणेगाव विच्छेद 88 16 बाणर्मातिगै शिते 87 62 बाणैर्युधि जनार्दन 88 8 बाणैश्च शकीकृता 37 28* 171 बाणै संनतपर्वभि ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ याहूनो वीर्यसभा बाण सनतपर्वभि 108 65* बाणो द्रविणवत्तर 97 236 बाणो धन समाश्रित्य 108 870 बाणोऽनिरुद्धशिरसि 108 G1° बाणो बलमदोन्मत्त 106 50° बाणो वाहुसहस्रवान् 105 120 बाणो वाचमससत्ता 106 320 बाधते स दुरासद 67 44 बाधन्ते भुवि मानवान् 44 TE बाधमाना रिपुगणान् 868° बान्धवश्व भविष्यति 65590 बान्धवस्य विशेषत 65 63d बान्धवानामपि तथा 65 680 बान्धवा कुलपासनीम् 73 220 बान्धवेन समागमम् 67 20 बान्धवेभ्यो भय घोर 77 450 बान्धवेषु च सर्वेषु 83 85° बान्धवेपु विशेषत 66 ३० वान्धवेश्च विशेषत 73 370 बान्धवो देवसप्रभ 63 13' बान्धरो धर्मतो मद्य 65 60° बाभ्रव्य समवाक्षिपत् 19 164 बाईदथेन राजेन्द्र 82 23° बारकीडनक तत58 18" बार चन्द्रार्कवचंसी 5124 धार मेवापवाहितम् 99 21 बालशृङ्गाविवर्षभी 584 बालस्यासीद्विचेष्टितम् 51 37% बाट कुरान्तकृन्मूद 669° बार कृष्णो महानन्ध्र 75 150 धार क्रीनरिव 97 3741338 यारानुघ्रासयन्ति हि 4911 बारासहशेक्षण 447' चारासहशेक्षणा 48 31 यारावपरिशङ्किती 71 301 यारापि नितमी 72 181 याराविमौ चारको 72 20* यालाविव हुताशनी 71 400 पालिश स्व प्रभापसे 109 500 पालिता यत यूय ये 3 16 पाठे स्वयि महायादो 45 42" साहेन मुहिनोन 65 2g यारेनालिटकर्मणा 587 बालेनाबालकर्मणा 655 बालेय क्षत्रमुच्यते 23 294 बालेया ब्राह्मणाश्चैव 23 29° बालो वा यदि वा मध्य 75 13* बालौ तावमरोपमो 65 88 बाल्यारकामाच मोहाच 9 900 बाल्यात्प्रभृति केशव 9624 वाड्यात्प्रभृति रामेण 1002 बाल्यादेवकता गतौ 512 बाल्यावा यदि वा मोहात् 8 23° बाल्यान्मोहाच्च भारत 167* बाल्ये केलिकिल सर्व 49 " बाल्ये चण्डतम सर्व 494 बाल्येन चरितेन च 608 बाल्येऽपि न निवर्तते 48471 बाल्ये मूर्छ त्यमानुपा 49 4' बाकल प्रमदो मद 31 761 बापसदिग्धया गिरा 56 114 बाष्पसदिग्धया वाचा 78 17" या पेणारितेक्षण 76 120 बाप्पणातलोचनाम् 107 39" बाहुच्छाया समाश्रित्य 1098 बाहुदण्डेन वृष्णस्य 61 450 याहुना कृत्तदेहस 67 41 याहुमहरणस्तदा 85370 याहुभिश्च ससकदै 75 30 याहुमिस्तु निमितदा 11070 पाहुभिस्तुल पन्थ्योम 36 81 याहुभि परिघाकार 3328 याहुभि परिघोपमै 47 43 याहुभि स महाभुज 103 ' पाहुण्यामेव गोविदा 28 26 पाहुभ्यामेव तरसा 76 450 याहुमामोगिर्न रग 67 330 पायुदमिद रहे 75 100 वायुद्धविधिधि 75110 पाहुयुद्धे परागित 90. पाहुयोधी शरीरेण 75 200 माहुल्यमुपवर्णयन् 8331 यादमदारण 753 पाह परिघसंनिमम 70200 पाहना धारण मम 100 101 पाहना पोयमंभर 1122 172- बाहूनां समयुध्यत] श्लोकपादसूची [ब्रह्मचर्याद्रिाह्मणस्य बाहूना समयुध्यत 112 66" माहूना सश्रयारसर्वे 113 60% याहूपधाने कृष्णा 61 48 याहोव्यसनिनम्नात 10 30° बायका चोराहाका 2736 बाह्यतश्च समन्ततः 109340 पायावतनया पञ्च23960 याह्याश्व पुरुजानित 23 956 याहिकस तु राज्य वै 23 115 याहिस्स्य सुतश्चैव 23 116 बाहिरूस्यात्मजा नृप 25 1' याह्रीका द्रविडा शका 100 याबोवर दर्शयिष्यन् 61 20° विभर्ति च मही कृत्स्ना 919 विभिदीप्ततेनस 112 350 पिभीमो निशि गर्जताम् 53 4 विभेति बरसूदन 67 56° विभेति हि सदा त्वत्त 118 30° विभेत्यभिभवारछक 118 270 विभेद दामि चारै 87 620 विभेद निर्मित शरै 87 660 यिभेदामश्च स शरै 87 671 विभेदनमथोरसि 88 240 विभेदरमि फर्णिना 3161 विभदोरपि वीर्यगन् 88 120 विनती परम वपु 27 10' विनती मानुषी सनुम् 43 40° विनती निपुरान्याहून 47 390 विभ्रष्णवपुईरि 4220 श्रितोयमय वपु 3410 विभ्रदत्यदनुत्तमम् 12 100 बिले जायता सह 28 26 पीजपूर्णमिति श्रुति 10 580 थीजानामाकृति यु 117 34" पीनौषधीना विप्राणा 20 19 घुद्धिा मया सखि 10762 धुद्धिमन्तछयुता गयात् 115 23 बुद्धिरित्यनवीय तम् 110 47' बुद्धिनियतते शनै 16 बुद्धिद्विारी गुणाम् 60 धुया घन बहुश्रुत 6572 युद्धयाथ पयसापिघा 6222 पुना निश्चित्य 83 51 वुझ्या सत्येन चानघ 1080 बुध इत्यारोलाम 20 43° बुधस्य तु महाराज 21 10 बुधेन तात दान्तेन 60 130 युधेनान्तरमासाद्य 9 13 बुध्यते चाम्बुदक्षये 395 वृहतस्तनयाय 23730 वृहती चारपाङ्गी 87 370 वृहरकीर्तिमहाजित 31 73% बृहत्या तु गदस्याहु 98 15° बृहदश्वस्य पुत्राणा 9 4900 बृहदश्वो महीपति 9468 वृहदुर्गश्च पद्धभि 87 55 वृहदुर्गस्य भल्लेन 87_57° बृहदुर्गस्य वीर्यवान् 87 58 बृहनुहदिषो 15 15° वृहद्धर्मति विरयात 15 16 वृहनि पतितैर्दुमै 49 224 बृहस्पतिरिय स्वग्रम् 109 240 वृहस्पतिरिवाददे 53 881 320 वृहस्पतिर्महातेजा 017 वृहस्पतेरागिरस 23 51° वृहस्पतेस्तु भगिनी 3 38" बृहस्पते स वै माय- 20 29* वृहस्पत्युशनोभ्या या 433 वृहित हरितेपसा 10 31 बोद्धव्यायाभिमानाच 605" बोधयन्ति दिवौकम 59 561 प्रवीमि यदद तात 78 320 ब्रवीमि धूयवामिदम् 118 160 ब्रह्मकोपत प्रभो 11534 ब्रह्मक्षयम्य विश्रुत 23 914 ब्रह्मगाय विच 95 50 ब्रह्मगाग्र्येण सस्ती 96 440 ब्रह्म च ब्राह्मणाश्चैव 104 17. ब्रह्मचर्यविदो जना 35 374 ब्रह्मचर्य च चर्या च 35 41° ब्रह्मचर्य पुरस्कृत्य 35 36 ब्रह्मचर्य समाधत्ते 35 400 ब्रह्मचर्य सुचरित 35 33° ब्रह्मचर्य मुरनितम् 117 48* ब्रह्मचर्यास्परं तप 35390 प्रझर्याद्राह्मणस्य 35 36. 173 ब्रह्मचर्येण धानध] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ ब्रह्मा परिशम्शने ब्रह्मचर्येण चानघ 31 34' ब्रह्मचर्य स्थित तप 35 38* ब्रह्मचर्य स्थित धैर्य 35 380 ब्रह्मचारी पुरा भूत्वा 857° ब्रह्म चैव सनातनम् 13780 ब्राह्मणच महाभाग 6234° ब्रह्मण शृणु मे वाक्य 62 370 ब्राह्मण सलिलस्य च 5837 अह्मण सूर्यसनिभम् 40 11 ब्रह्मणा छिससदेहा 12 990 ब्रह्मणा देवदेवेन 39 10 ब्रह्मणाभिहित वाक्य 10014 ब्रह्मणा विहित पूर्व 112 67. बहाणा सह मोदते 391d ब्रह्मणा साधु चोदित 42 12, 16 ब्रह्मणा साधु निर्दिष्ट 62 210 ब्रह्मणा हरिरीश्वर 386 माणे पद्मयोनये 400 ब्रह्मणो वरदर्पित 91 34 मह्मण्य सत्यसगर 23666 ब्रह्मण्य सुदृढायुध 27 16 मह्मण्मा सत्यवादिन 2380 मह्मतेजोमय दिव्यम् 104 g" मझदण्डानुमनितम् 90 101 प्रदादत्ततृतीयानां 15 68° यहादत्तपुरोगमा 18 11 महादत्त प्रभाते व 19 120 मझदत्तमकल्मषम् 1824, 30 मदत्तस्तदानघ 1913 यादत्तस्तु सप्तम 16300 बह्मदत्तस्य चरित 1580 ब्रह्मदत्तस्य चैत्र ६ 1565 महादत्तस्य जननी 1341 यह्मदत्तस्य तनय 15250 19 1 मझदत्स्य पौराण 1510 मझदत्तस्य भार्या 18220 मादत्तेन यामाठ 16 1" प्रझदत्तो नरपति 1560 मदत्तोऽभवाप्रभु 1524 प्रझदतोऽभवदाजा 16 3. मादत्तो महायशा: 18 18. महादसो महाराज 15 11 ब्रह्मदेव सनातनम् 315 ब्रह्मद्विपश्च सवृत्ता 21 350 ब्रह्मन्कृशोऽह विमना 21 310 ब्रह्म पर्यचरत्क्षः 31 1320 बह्मभूतोऽभवन्मुनि 22 23 ब्रह्मयोनी प्रसूतस्य 35 33° महर्षयस्त्वा तत्रस्था 38 61 ब्रह्मर्पिगणसेवितम् 31 47 48 11' महर्षिगणसेवित 62270 ब्रह्मर्षिभिरभिष्टुत 345 ब्रह्मोन्पुरत हत्या 110 ब्रह्मर्षे न वय धन्या 100 670 ब्रा येन तिष्ठेय 21 30° ब्रह्म कौशिकस्य च 23 91' ब्रह्मलोकचरोऽभ्यय 44 12' ब्रह्मलोकमनामयम् 736 ब्रह्मलोक गतो ब्रह्मन् 39 1" ग्रहालोक महायशा 3873 ब्रह्मलोक यथारूद 397 ब्रह्मलोक सनातनम् 38 76*39 21" ब्रह्मलोक परा गति 62 32' मझलोके च किं स्थान 393 ब्रह्मरोके पुरातनम् 39 " ब्रह्मलोके सदानघ 931 ब्रह्मपशाननुत्तमान् 328" ब्रह्मवादिन्यधिग्री 1 23 45° ब्रह्मयादी परामात 21 22 23 46' प्रमों महातपा 3123 ब्रह्म सपद्यते सदा 22 39%8,400 ब्रह्मसम्तववादिन 40 380 प्रझसूत्रोद्यतकर 40 12 प्रास्थरमहादुमा 9350 यदादयामाय 22 ब्रह्मा च कपिर व 31 15. प्रमाणमग्रत या 753 प्राणमपि धारयेत् 35 331 प्रमाणममितौजपम् 1 18 प्रझायमर गु- 32" प्रमाण परदं प्रभुम् 2012 महामशरण अग्मु 2015 प्रशीनों यपाकमम् 8016 मादीनां गुरोत्तम 31001 मग पीरशाशने 12' . 10 -174- ब्रह्मा प्रजापतिर्धन्य ] श्लोकपादसूची [भगिन्या वसुदेवस्य ब्रह्मा प्रमापतिर्धन्य 100576 ब्रह्मा प्रीतमनाम्नस्य 31 34° ब्रह्मा ब्रह्मत्वमेयिवान् 20230 ब्रह्मा ब्रह्मविदां वर 20 19 महा ब्रह्मविदा श्रेष्ठ 31 39° प्रहा लोकपितामह 20 38 5441 42 20° 100 64 ब्रह्मा शश्च सोमश्व 324 प्रसव हि पितामह 39 290 माझणत्व विधीयते 35 370 मादाणस्य च ते सुता 103 29 प्राह्मणस्य प्रतिश्रुता 22 23 प्राह्मणस्यारमनास्तदा 103 26" माह्मणस्यारमवर्तिन 35 330 मामण विपुलेर) 19 220 ग्राह्मण पर्यभापत 102 134 माझणा दिवि ते स्थिता 32 381 माझणा धनतृष्णार्ता 116 34 पाहाणाननुयायिन 41 28d माझगाना च योनिषु 43 73% पाहाणाना महारमनाम् 19 13* माझणान्कौशिकात्मजान् 15 20 माह्मणान्स्वस्ति वाच्य च 18 80 माझणा मदथे च 1037 माह्मणा क्षत्रिया विश 2355 याह्मणा क्षत्रिया वैश्या 23120 माह्मणेनावयोधित 26 13 माह्मणेभ्यो नमस्कृत्य 4 28° माह्मणेभ्योऽपि वासव 118 30° पाह्मणेषु निवरस्यति 115 3g" माह्मणरम्यनुज्ञात 1550° माह्मणवादैश्च 68 34 पाहाणध महाभागै 6 430 माह्मणो भपविध 1027' ग्राह्मणोऽऽतस्वरं करवा 102 120 ब्राह्मणी सचिवौ घ सो 14 161 ब्राह्मण्य प्रतिलप्स्यन्ति 141 माहाण्या प्रसवस्व मे 1028' माया सूतिकारगेऽद्य 101 120 माक्षमखमवासवान् 87 130 माझ करिरिवापर 44 11' माझ तपसि युताना 62. 32. मुवन्तो रानशासनान् 81 30 धूत वो यस्य य काम 47 14° मूहि तत्वेन मद ते 101 10° धूहि त्व यद्यदिच्छसि 66 3rd धूहि न सर्वभूतेश 21 14 मूहि नारद तत्वार्थ 100 29* चूहि भीष्म यदिच्छसि 11 30° भ भक्ताना नृत्यनामेव 112 1200 भक्तिच्छेदानुरितागा 60 31° भक्त्या नारायण प्रभुम् 19 10% भक्षयद्भिश्च तर्यत्सान 52 340 भक्षयित्वा शश तात 9 420 भक्ष्यते सर्पराजेन 56 150 भक्ष्यभोज्यहराश्चैव 117 21° भक्ष्यमाण किलाङ्गेपु 85 33° भक्ष्य भोज्य च पेय च 60 120 भगदत्तश्च वीर्यवान् 80 180 भगवन्श्रोतुमिच्छामि 85 10 भगन्कि मया कार्य 86 58" भगवन्क्रियतामस्या 432 भगमन्तमरिंदम 13 20 भगवन्त रणाजिरे 12 971 भगवन्त वृपध्वजम् 106 37 भगवसद्भुतमिदं 35 65* भगवव्यस्त शस्त्रोऽद 9 62° भगन्यदि शक्यते 115 334 भगवन्सर्वभूतेश 104 16° भगवस्तपित पुत्र 35 66° भगररत्वरप्रसादेन 43 30° भगवस्त्यसमो नृप' 42 45* भगवस्त्वद्वशे युता 60 23° भगवानपि तेनैव 60 220 भगवानप्रवीत्तदा 1164 भगवान्देवसुत 911 भगवान्प्रत्यपूजयत् 3929 भगवान्प्रवीतु मे 98 1 भगवान्बासवानुज 92 70 भगवान्सर्पभूतानां 31 50° भगवान्दोकपूजित 157 भगवास्तेजसा प्रभु 9653 भगिनी रामकृष्णयो 96 18 भगियानुनया सह 08 121 भगिन्या वसुदेवस्य 87 20° - 175- भगीरथसुतो राजा चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवशस्य [मछेनानी द्विधाकरोद भगीरथसुतो राजा 10 670 भग्नपृष्ठो दुराकृति 57 20% भमप्रहरणाविरम् 36 29% मनस्कन्धश्च दानव 6421 भन्न माहेश्वर चाप 31 115° भन्न वरुणमाश्रित्य 113 16° भग्नावशेष युद्धाय 112 110 भडक्त्वा ताश्चापि पार्थिवान् 88 29" भक्त्वा तु तद्धा श्रेष्ठ 71 440 भक्त्वा स्तम्भमिव द्विप 71 536 भगकारस्तु पूर्वज 28 394 भङ्गकारे विदूरथे 87 46° मग भोजविवर्धन 72 16 भजतामयनै सह 38 69d भजते भूतमोहिनी 40 32 भजमानश्च चपल6480 भजमानस्य पुत्रोथ 28 10 भजमानस्य सृञ्जय्यौ 27 30 भजमानाद्विजज्ञिरे 274,51 भजस्व पुनरागतम् 99 491 भजिन भजमान च 27 " भज्यमानेप्यनीरेषु 110 56* भगकारा भद्रबिन्द 9890 भद्रचार तथैव च 88 384 भद्रवत्यां कुरूद्व 26 26d भद्रावण वसित 63 20° भदथण्यस्य पुराणा 23 610 भद्र श्रेण्यस्य पुत्रण 23 64° भद्वासनेषु पीटेषु 42 11 भयक्षोभितसर्वाता 76 10° भयदस्तव वामोह 107 21 भयदस्ते पिता रणे 107 261 भय च विगत मम 103 230 भय तीव्र च जायते 115 36 भय यजध्वममरा 31620 भय न समुदाहृतम् 46 971 भयात्तस्योरगपते 55 50° भयारपतगराजस्थ 5549° भयाभयकर कृष्ण 9730° भयार्ता विप्रदुद्रुवु 109 200 भयेन मन्त्रयामास 478 भयेप्वभयदररव न 60 30 भयेप्नमयद योनि 32 28* भयेसर्स च राजान 659° भरण तस्य चाफरात् 999 भरतस्य विनटेपु 23 50 भरताना स भारत 17 भरतो नाम वीर्यवान् 23 48° मरद्वाजारमजा द्विजा 14 1 भरद्वानात्सुतोऽभवत् 23 520 भर्वा च भविता हि स 92 334 भर्वा तव विशालाक्षि 107 780 भर्वा तु मम ययेप 107 46* भर्तारमनुगच्छति 31 11 भारमभिधीक्षती 48 44' भारममरोपमम् 107 786 भर्तारमानयाम्यय 107 84' भर्तार दीसतपस 2 3° मोर ध्यायती सदा 107 40" भर्तारं पतितं दृष्ट्वा 771 भरि प्रतिहप्त्यसे 107 651 भर्तार यदि मऽध वं 107 59° भर्वा वैशिशिरायण 258 मतानस्य प्रते स्थिता 43 Bf भनिवद्य दुखार्ता 297 भत समीप गऐति 8 भर्तृरूपेण मासुध्यत् 82 भास्येकदा सह 107 15 भर्ना सहरमियसि 107 10 भासयन्ती पुन पुन 51 13 भर्मयविध सश 100 45 भरपर्यतच दिया रात्री 71. मारपुमो दुर्पदि 15 27 मार मारोऽभूत 15 26. भाहमानी धारा 81 8 भयदस्य महद्भयम् 109 4' भपद सर्वविद्विपाम् 38 491 भपद सर्वभूतानां 44 630 भयमोह सुमन 35 686 भयमस्ति धरानने 107256 भयमावेदयन्ति मे 102 31 भयमुत्पाद्य वीर्य गन् 11035 भयमोहितलोचना 112 भयविश्वाचन 112 116 भयविकालोचना 103 204 भयवित्रतरोयना 38 56 170 महेनायतपणा लोकपासची [ भविष्यति तदा रोक भालनायतपणा 8766 भलनास्य द्विधारोत् 81 854 भवकाले भवत्येप 40220 भवत सानुगस्येद 46 140 भवता परिकीर्तितम् 1 1 भवतामसि यूय च 9670 भवता रक्षण कार्य 981" भवता रक्षिता गाव 62 39 भवतां कोटची स्थिता 112 101. भवता चार्जवा मति 38780 भवता पुण्यकीतीनां 96 10 भवता भदमस्तु व 96690 भवता वैभवाय 5961 भवतो मनसोऽनुगम् 106 20 भवतो स्वमिदं चेति 71 18° भवत्वय दियौरस 12 40 भवत्सु प्रभाहित 100100 भवद्भिरभिसवृत 100 80° भवद्भिर्म हि मे युद्धे 108 33° भवद्भिर्यदिद प्रोक 47 18 भवद्भिधिताधव 83 16 भवद्भिर्यसुधाधिपै 81 50 भवद्भिश्चण्डणि 61 6" भवद्भि किमुपेक्षित 65 20 भवद्भि किं पुनर्मही 65 " भवद्धि हयातकीर्तिभि 65 10" मपनयां च विनाकृतम् 697' भवद्भश स्वेन तेजसा 72 1 भवदो नाशिम्यते 10018 भवन तस्य तन्महत् 1080 भयनाकारविटप 55200 भवने मधुसूदनम् 83 52 भवन्तमाश्मिता कृष्ण 10920 भवन्त जायते मठि 109 394 भवन्य शरण गता 30 भवन्त सर्यकार्यज्ञा 65 12 भवन्ति सर्पदवेश 100620 भरतो यद्धसहिदा 83 1 भरन्तो भयमोहिता 112 136 भरतो भीमरिक्रमा 63 11' भान्को भुवि शाश्वता 100 130 भवन्तो मम सन्धया 8310 भयन्तो मा विशेषत 5101 भवन्तो यान्ति वैक्लव्य 108 31° भवन्तो यान्त्यनेकश 108 320 भवन्तो विगतज्वरा 868. भवन्तो हि यथाकाम 46 28° भवन्तो मम विख्याती 72 16" भयन्ती सगतायुभी 70 14 भवन्त्यगमभेदिन 59 140 भवस्य तु गुह सदा 106 60° भवस सतव प्रिय 106 Bot भवस्थामिततेजस 11287 भव प्रसादयामास 1076° भवानक्षेपु कुशल 89 204 भवानपि च सर्वया 15200 भवानस्तु यथासुखम् 1119 भवानेव जयेमित्य 112 60° भवाने महायुते 113 34 भवान्या वय स्थिता 86 27 भवानराजास्तु मे मान्य 78 370 भवान्दिकुरुत सदा 113 381 भवाम्यस्य सहवता 27g भवाय जगत प्रभुम् 40 100 भवाय तस्य देशस्य 44520 भवाय भवता काले 848 भवाय भुवि वर्षात 59 10 भवाय मधुसूदन 4537 भवाय मधुसूदन 5334 भवाश्च दशकुशल 1 12th भवाश्चास्या परा गति 41234 भवारतु तपसा श्रेष्ठ 85 290 ते 106120 भविता विग्रदो महान् 43 632 भविता स हि ते भर्ता 107 420 भवितीति नरभ 2380 भवित्रीति नराधिप 22 28 भस्त्रिीद्वापर प्राप्य 13 44" भविष्यकुशलर्बुधै 68 28° भविष्यत सखायौ 17 भविन्यति कदाचन 114 180 भविष्यति घशव 68 35* भविष्यति विस्तीर्ण 86330 भविष्यति जनेचर 540% भविष्यति तदा तेषां 117 39 भविष्यति तदा लोक 117 11', मविता याण युद्ध हरि पादसूची-23 177- भविष्यति द्विजश्रेष्ठ चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [भाति गोवर्धनो गिरि भविष्यति द्विजश्रेष्ठ 982% भविष्यति धनुर्मद 694 भविष्यति नरेन्द्रीय 81 13 भविष्यति न संशय 31 9846028 10658 भविष्यति पुन पुन 14 भविष्यति पुरी रम्या 806, 420 भविष्यति मदइयम् 43 544 भविष्यति महीक्षिताम् 62 86 67 634 भविष्यति यदासुर 106 360 भविष्यति युगक्षये 116 26° भविष्यति युगे क्षीणे 117 14" भविष्यति युगे तस्सिन् 13 45° भविष्यति वसुधरा 117 31 भविष्यति स ते मृत्यु 37 34° भविष्यति सुजीवितम् 45 4 भविष्यति सुतस्तेऽय 3 101° भविष्यत्यग्रजो भ्राता 47 31° भविष्यत्यत्र कारणम् 8 25° भविष्यत्यनुरूपश्च 62 720 भविष्यत्यपरे युगे 116 360 भविष्यत्यफलो हर्ष 110 290 भविष्यन्ति करौ युगे 116 191 भविष्यन्ति गते युगे 11625 भविष्यन्ति कामाना 117 41* भविष्यन्ति तत कस 47 220 भविष्यन्ति द्विजातय 116 271 भविष्यन्ति नरा मूढा 117 8° भविष्यन्ति नरा सर्वे 136 भविष्यन्ति न सशय 12340 भविष्यन्ति महासुरा 106 254 भविष्यन्ति युगक्षये 11664,94, 100, 12, 139, 30 भविष्यामीति सज्ञा मे 10323 भविष्या मुनिसत्तमा 7 441 भविष्या श्रीसहायिनीम् 87 354 भविष्यै स्तूयतामिति 5 37 भवेच्छिवजलाशया 55 54 भवेता घातिवी रहे 730 भवेत्तस्येह पातकम् 61 भवेदपि न सबाय 114 18* भवेद्यदिन नीव स्यात् 99 37° भवेद्युद्धविशारद 107 64 भवेद्वपशवरपि 8560 मवेन च्यायित्ता देत्या 65 38° भवेयमहमीदृश 16 360 भवेयमहमेवार्क 31 440 भवेय सतत विभो 112 1180 भमना कृष्णपूर्वज 11063 भसना गुण्ठित पाद 109 310 भस्मप्रहरणो घोर 11067* भमभूता ननाश30336 भसरेणूषित कृत 118 20/ भसावयवभूतेषु 36 36 मसीभूतोऽभवत्तदा 85 334 भाग प्रामोत्यरक्षिता 102 164 भाग भागवह च यत् 31 g" माग यज्ञियमभान 39 20 भागा यज्ञविधिना 30 23° भागांशेषु गतेध्वथ 44t भागांश्च निदिवौकसाम् 461 भागे देवपुरोधस 44s भागेऽवतीण धर्मस्य 442" भागे मै भाकरस 44g भागेडमेसेषु गगनात 4460 भागे सोमस्य वदेव 44 " भागेश्च निदशा स 10016 भाजनानि च मांसस्य 6013 भाण्ड समधिरोप्यताम् 53 11 भाग्हाना हारिण 1721' भाग्दीरक परिश्य 58220 मादीरे च पनस्पतिम् 52 2' भाण्डीर नाम मामत 552 भाण्डारे कापते राजन् 00 15. भाग्दीरा माम गुशुभे 52 25 माति गायनो गि1ि251 117250 भविष्यन्ति युगस्या ते 116 21° भविष्यन्ति समाहिता 141' भविष्यतीति मे मति 570 भविष्यसि नृणां मर्ता 43 250 भविष्यसि महाभागे 47 50 भविष्यप्तीन्द्रो जित्दैव 21 220 भविष्यस निवेदनम् 115261 भविष्य जानता तात 240° भविष्य पश्यता मार 43460 भविष्य शृणु कारणम् 43 31 भविष्या दश भारत 71 - 178- भाति चैनरयं चैव] श्लोकपादसूची [भिन्नभाण्डघटीघटम् भाति चैत्ररथं चैव 93. 20. भाति पुष्करिणी रम्या 93 21. भाति भार्गवनं चैव 93 18, भाति रेवतकं प्रति 93 . भाति रैवतक शैलः 93 14. भाति शाहलमालिनी 54 174. भात्यगाधमपर्यन्तं 54 34. भानवस्तन्न देवाश 7. 11: भानुमधैिव निष्प्रभः 102.4. मानुर्भीमरथ क्षुपः 98 7. मानोस्तु भानरस्तात 3 28. मानो. प्रभा शिरसा रद्धेः 18 37. मान्त्यातिवृष्टया मातङ्गा 54 20%. माभिराहावयाग 34 230 माभिर्वरिततेजसम् 7021 भाभिर्वनाति भास्करम् 66 28. भारतस्य च वंशस्य 62 72. भारवस्याहवोदधे 67 61. भारतं त्वयि चासक्तं 62730 भारतानां कुलोद्वद. 43 25. भारतानां च सर्वेपा 11. भारताश्च सुनाताश्च 23 160. भारती परिभूय सा 83 29. भारती महतीं धुरम् 459 भारद्वाजस्तथा दीणि 7. 430 भारमायेश्य यन्धुपु 22 196. भारशैथिल्यकारणात् 42 821. भारावतरणेप्सया 42 39. भारावतारणार्थ हि 41 27'. भारो यद्ययरोतव्य 42 03. भार्गभूमिस्तु भार्गवात् 23 1. भार्गव कौशिकरवं हि 23 92. भार्गवः सुमहातपाः 31 1010 भार्गवारसगरो नृप 10 26. मायेण पितु श्राद्ध 42 40. भार्गवेण महारमना 42 436. भार्गयेणाभिरक्षितः 10 230 भार्गोऽहिरमेन वै 65 39. मार्यया सहितो वने 19.2. भार्या गोपगडहा 47. 334. भार्या मित्रा भविष्यन्ति 11689. मार्यामुराध समासात् 26 16. भार्या राजन्मुखोचिता. 77.53. भार्या रूपगुणान्विता 996. भार्या घे तनयस्य ते 99. 45. भार्या घोऽस्तु महाभागा 2 41', भार्यासु च परखियम् 116 39. भार्यास्तस्य विचुशुः 71 14. भार्यास्तासां शतं सुताः 28 32. भार्यास्वेतासु भूमिप 7.22. भायो नात्यचरत्पति' 31. 133. भार्याः कृष्णस्य ता ददी 28. 34. भार्याः स्म दृष्ट्वा शोचन्ति 77. 2. भार्यका तुल्यचारिणी 43 52. भावन्निध्यसमधुरं 63 24° भाषयन्ति फलार्थिन. 13 54",694. भाधयन्ती समन्ततः 93 23%. भावयन्तो भुवं देवीं 43 13'. भावयन्त्यमितौजसः 18 42. भावयामास सर्वत: 2013 भावयिष्यन्ति सतत 12 39. भाविनोऽर्थस्य वा यरात् 8. 194. 10. भाये तपसि शुद्धानां 36 42. भावेनोपससर्प तम् 73 11. भावी रसानुगायेतो 30 42. भाग्य. सोऽनागते तसिन् 8 43. भापमाणा प्रतस्थिरे 78 484 भापसे यद्यदिच्छसि 73284. भापित ताववादिन 44 38'. भासयस्यखिलं जगत् 366. भासान्गृध्राश्च गृधिका 3. 82d. भासामिपादानुसृतं 49 19 माकरस्येव तेजसा 34 10. भास्कराकारमुकुट 36480 भास्करेणानिलेन वा 424. भास्करे तेजसि गते 68 10° भास्करेऽम्युदिते तदा 86 1. भास्वता प्रश्वरमृशम् 112 96. भावन्ति तानि दृश्यन्ते 11357. भिक्षा पलिमदत्वा च 16 38. भिडिपारायुधास्तथा 31 78. भिाषा भूमिमयाचत 11. 176. भिद्यते वर्धते पुन 30 47. भिद्यमान इवार्णव. 563". भिद्यमानाश्मनिचय B1 33. भिनभाण्डवटीघटम् 50 13. 1792 भिनवेल इवार्णच ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [भूमिनिरन्तर धैर्य भिन्नवेल इवार्णव 34 160 भिनाजनचयोपमम् 85 30* भिन्नालीकस्य तस्य वै 7616 भिन्नोरस्का दितिसुतै 35 ° भीतस्त्वरितमागम्य 50 14° भीतस्वरितविक्रम 71 46° भीता गद्दभाषिणी 50 16° भीताश्चराभवस्तदा 99 310 भीता कस्मानिवर्त व 81730 भीलो दानपतिस्तदा 713 भीमघोपमहायोपै 93 310 भीमरूपाश्च मातगा 92 10° भीमसेनश्च नामत 23 110 भीमसेनस्तथा वातात् 24 23° भीमसेन च जानामि 62 920 भीमसेन सुयोधनम् 97 18 भीमसेनास्चयो राजन् 23 113° भीमसेनोऽभवत्सुत 23 114 भीमस्त रथमुत्तमम् 22 14° भीमा मकरवक्त्राश्च 31820 भीमो भीमपराक्रम 90° भीमो विदर्भस्थ सुत 26 20° भीरुत्व समुपागतम् 50 27 भिपग्वैतरण य 286° भीषणा विकृतानना 33 26° भीपयाणश्व त नृपम् 85 316 भीमाश्च नराधिप 80 101 भीष्मकस्य सुतदापि 88 30 भीष्मकस्य सुताया 487 2" भीष्मकस्याहुकेन च 8220 भीष्मक भीमविक्रमम् 87 17 भीष्मक वरयामास 87 25° भीष्मक कुण्डिने चैव 88 33' भीष्मरेणाभिगुप्तस्य B1 100° भीष्म वक्ष्यामि तावेन 12 2° भीमाय परिपृरछते !" भीष्मेण परिचोदित 101 4 भी मेणोदाहत यथा ॥ मुक्तपूर्वापरण्यानि 832 भुतपूर्गमित्र मनम् 40 31 भुला राजकुलश्चापि 42 48 भुश्या चापमृधे कृष्ण 60 20° । मरेप मम पात 65 66 भुजगाभोगनि|प 47 43 भुनगाभोगवर्तिना 83 26° भुजगारिध्वज प्रमु. 34 38 भुजगेन्द्रेण वदने 34 40° भुज विव्याध दक्षिणम् 88 131 भुजाप्रे सघनो गिरि 61 50" भुजाभ्यां साधु भूषित 68 200 भुजाभ्यां साधुवृत्ताभ्यां 558 भुजाश्चास्य व्यवर्धन्त 38 350 भुनासकेन शशुभे 735 भुनायतपर्यणा 67 57 भुजै प्रहरणावृत्तै 60 320 भुज्यन्ता सर्वकामार्था 46 19 भुवि पद्यामस्थित 68 250 भुवि यत्ते जनयिता 4517' भुवि सत्योपयाचिता 47 50° भूतमाम च पञ्चकम् 35 40% भूतमामैन सशय 6 40 भूतपूर्वश्च ते स्पर 46 180 भूतपूर्वश्च मे मृत्यु 65 330 भूतभव्यभवत्प्रभु 4378 भूतभन्यभविष्यस्य 31590 भूतभेदाच भूनेभ्य 1 19 भूतल पर्यतैरिव 65 106 भूतसर्गमनुत्तमम् 1 200 भूसर्गमिम सम्यक 311 भूतसधनिपेविता 65 32 भूतसघास्तथैव प 6320 भूतसतापनस्तथा 3 64 भूत यद्भवता समम् 100 61 भूतानां जनमेजय 3 110" भूतानां भावन प्रभु 103 831 भूतानां भूतभावन 40 39 भूतानीष महाराज 23 16 भूता तकरणं तदा ॥248 भूतारासिनतम्वस्य 30 490 भूत्या धोरराशिो दया 741 भूरा कमरिण सिंहा 59 25. भूपा भूवहिताधिना 31 sot भूरपा सहगर पुरा 028 भूमिपाना सहसैन 412 भूमिरेषा प्पयो गाड़ी भूमिनिलरा पे 81 1 - 180 भूमिनिधिरीकवा ] श्लोकपदिसूची [ भोजपुनो वधिष्यति भूमिनिर्विवरीकृता 41 200 भूमिश्चादर्शयत्तृगम् 54 31 भूमिस्तस्थामवरसुत 98 279 भूमिस्तु पतित पुन 91 580 भूमिस्तोयमयी यथा 61 भूमि धैव प्रवेशित 10 47" भूमीगृहनिभोपम 61 28 भूमेरासीत्तदानघ 6 12 भूमेस्पायमानस्य 61 31° भूमेर्युगधर पुत्र 98 27° भून्यापोव्योमभूतात्मा 34 350 भूय एस तु विप्र 90 10 भूय एव द्विजश्रेष्ठ 105 10 भूय एवामिरर्धते 22 374 भूयश्च जामदयोध्य 31 100% भूपश्च पुष्पोचम 88 63 भूयश्च सहसोरथाय 70 330 भूयश्चातो जनादने 104 240 भूयशैव मया शप्त 43 230 भूयर श्रुतानि ते 10540 भूयश्चैव भविष्यन्ति 31 10* भूयश्वोरपरस्पते प्रभु 31 1480 भूयस्नु बुद्धिरभवत् 86 540 भूयस्रियदानी समरे 38 21 भूय कृतयुग क 41 120 भूय क्रोधसमाविष्ट 89 390 भूय शापभयापि3131 भूपशु यथा विष्णु 43760 भूया सछादयामास 11274° भूप सामर्पताम्राक्षी 112 98 भूय मिद्धिमनुप्राता 1480 भूयो देवर्पिसत्तम 300 भूयोऽपि ते घर दधि 112 1261 भूयो परसमन्वित 966 भूयो भाण्डीरमागतौ 58 1 भूयो भूतात्मनो विष्णो 31 93* भूयोऽय वामनोऽपर 31 68 भूगो रम्यतरं बभौ 51234 भूरितेजसमक्षोम्यं 65 10° भूरिभूरिश्रवा शल 23 1] भूरिश्रवसमेव च 65 100 मूरिश्रवास्निगत 81 420 भूग्योमायनिलाग्मसाम 40 394 भूपण तेषु वेश्मसु 93 480 भूपणाना च शिक्षित 758 भूषणाना च सर्वेपा 340° भृगुतुङ्गे तपश्ची 22 490 भृगुर्नभो विवस्वाश्च 726 भृगोरेवात्मजै सह 2012 भृत्य इत्यवगन्तव्य 35 66° भृत्सवत्तकरिष्यामि 62 989 भृत्या निर्विष्टभुज 116 g भृत्यानामग्रत स्थित 4621 भृत्याश्चान्ये महोरगा 56 11' भृश पीडितमानस 841 भृश विषण्णा सेन्द्राश्च 12 450 भृग बापभयोद्विग्न 8 1 भृशाती घणपीडित 112 120* भृशाश्वस्य तु देवर्षे 3 55* भेजिरे चन्द्रविषय 35 20° भेजिरे पिहितानना 63 14 भेजिरे मनस सुखम् 79 33* भेजिरे वारिजा श्रियम् 59 411 भेजे वृष्णिपुरस्कृत 95 170 भेत्ता जगति गुह्याना 44 10° भेचार परराष्ट्राणा 65 16° भेदकाले नरेन्द्राणा 67 64 भेदकाले समुस्थिते 65 68 भेदयलभते रतिम् 46 204 भेदशीरश्च नारद 46 29 भेरीण घ महास्वन 94120 भेरीणा व महास्वने 11036 11250 भैरोशलमदगाना 87 भेरीशहरवे सह 94 14 भोक्तु गावस्तृणानि च 50 17' भोक्ष्यात पुरुषा स्वयम् 116 38d भोगराशि रोक्षितम् 56 300 भोगाथममिप स्यन्ते 116 350 भोगिभोगावसनेन 34 43° भोगेनान पर्चसा 567 भोगर्वा स्थाच्चुभेक्षणे 107 54t भोगेश्च समयोजयन् 19 220 भोगोदरासने शुभ्रे 70 10 भोजन च किमारमकम् 35 57' भोजनान्युपकल्प्यन्ता 60 11 भोनपुरो पधिप्यति 47 10 181 भोजयामास तच्छुत्वा] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [मजतो यमुनायो र भोजयामास तच्छुत्वा 10 15 भोजराज श्रिया जुष्ट 965 भोजराजो महाद्युति 76 36° भोजवशविवर्धन 44 62 भोजवृष्णयन्धकान्सान 96 27° भोजवृष्ण्यन्धका वच 96 4 भोजवृष्ण्यन्धकैगुप्ता 9 26* भोतवृष्ण्यन्धकैत 8064 भोजवृषण्यन्धकोत्तमै 1016d भोजश्च के भयादित 29 14' भोजश्च विजयश्चैव 2570 भोजस्य घडवा राजन् 29 15° भोजस्य शतधन्वन 297 भोजस्येत्यनुमोदनम् 27 22 भोज वैतरण चैव 65 9° भोज हवा महापरम् 29 ।' भोजा ये मार्तिकावता 27 15 भोजाश्चावन्तयस्तथा 23 1094 भोजेन शतधन्वना 29 10 भोनो या यादवो वासि 6660 भोज्याधिधयणाय च 65 911 भोज्याया पुरुषा दश 24 144 भोज्या ये महिपादय 60 13 भो बलाहकमातङ्गा 61a भो यज्ञा परम तेज 100740 भो कसधनुषा पाल 71 3g भौत्यो नाम रुचे सुत 7 416 भौरयो रीच्यस्तथैव च 750 भौम स नरकोऽसुर 91 37" भीम स नरको हत 9611 भ्रमणमहावेगा 54 14. भ्रममा रणतिरे 112 103 भ्रमिमारोप्य तत्तेज 8 34° भ्रष्टराज्याश्च शोकार्ता 105 16. भ्रष्टा दुश्चरितेन 14 1 भ्रष्टा प्राप्स्यन्ति कुत्सिताम् 14 ot ध्रटेवर्या स्वदीपेण 13 31 घटेश्वयों व्यतिग्रमात् 13 31 भ्रंशितस्य च विप्राच 11829 भ्रंशितनोतरीयेण 76 34 भारते दीशियर 52 28 मानित समन्तत 79 28 भाजते कृष्णसारमा 54 26* भ्राजमानमतीवोन 93 57. भ्राजमानस्पतिकामत् 92 48* भ्राजमानेन तेजसा 34 223 भ्राजमानेपु राजसु 36 45" प्राजमानी यधा रवि 34 g" भ्राजिष्णोस्तेजसा वृतम् 34 50 भ्रातर वीक्ष्य रुक्मिणी 8827 प्रातर साधु भाषितम् 83 66 भ्रातर सप्त दुर्धर्षा 12 13° भ्रातरौ देवसकाशौ 99 20° भातरी लोकविश्रुती 79 31 भ्राता शनैश्चरश्चास्य 844 भातुरन्वेपणे नृप 3 22 धातुवितकाङ्किणी 88 अ भ्रातृत्वान्मर्पयाम्येप 29 220 भ्रातृभिर्माभिस्तथा 63 24° प्रातृभि सुमहारथै 87 bod प्राणामयुतस्य सा 9 Bd भ्रातृणा पदवी क्षेत्र 3200 भ्रान्तमुद्रातमाविद्धम् 108 43" भ्रामयन्त गदा शुभाम् 33 30 भ्रामयश्वकमुत्तमम् ॥2 100% भ्रामायित्वा शतगुण 7630 भ्रामिताक्षश्च पदनै 63 23° भ्रूणहत्यापि सतार्या 65 630 भ्रूणहयामिवासहा 81T अभेदस्वेदवर्षिण 36 39 भ्रूभेदातरगोचर 76 11 माराविद सरब्धी 8154 मखेपु घ महापिभि 39200 मगध मागधाय च 530" मगधेषु पुरा ये। 87 18 भमसूर्यरस नभस 54 300 ममा महाणये 47 531 मनानां दिजवाहर 02 200 मम धुरि नियुज्यते 62 20 मनो वैवारियाद 50 10 भपयाकौशिक म्पयम् 23 8t' मपानीपणा 4739 महापाररानीम् । मगती दिशाम 51 16 ममतो यमुनापांच 4565 182 - - मासिव महार्णवे] श्लोकपादसूची [ मथुरा राष्ट्रवर्धनी मजाशिव महार्णये 40 280 मजाया शुक्रमभव 3040* मञ्चयांदर्निरन्तरम् 7220 मयागार सुनियुक्त 74 40 मचानामवलोकक 721 मनानिष्कम्य वेशय 76 35" मक्षा भान्त्यचलोपमा 74 मचारोहणमुत्तमम् 72 40 मशाश्चैव जुपूर्णिरे 75 41 मणिकाबनतोरणम् 92 38* मणिकाधनवोरण 93 14 मणिपर्यंतमुत्पाठ्य 9623 मणिपर्यंतयानां हि 93 2 मणिपर्यंतशृङ्ग च 92 430 मणिभिश्च महाप्रभै 94 25d मणिमुक्तावालानि 92 30 मणिमुक्ता सुवर्ण च 89 250 मणिरत्न स्यमन्तकम् 28 14 29 14, 184, 40" मणिरत्नेन भास्वता 34 431 मणिरियेवमादय 3 90° मणिवर्तेन भास्वता 103 120 मणिविद्रुमतोरणाम् 95 130 मणिविद्रुमराजते 9420 मणिशृङ्ग इवोचित 31 271 मणिश्यामोत्तरवपु 34 14° मणिम्तम्भसहस्राणाम् 94 20 मणिहेमनिमाश्चित्रा 944 मणिहेमप्लयाकी 93 60 मणि चैव स्यमन्तकम् 29 20 मणि स्वमन्तक चैव 28 29 मणीना च विचियाणां 748° मणीनां हेमवर्णानाम् 92 20° मण्डलानि परिभ्रमन् 67 23' मण्डलानि विदर्शयन् 76 5 मण्डलनि सहनश 110 60° मण्दले भरिष्यन्ति 117 26° मतज्ञ शाधन्वन 973 मतिनारसुताधासन् 23 43° मतिनारो महीपति 23 43 मतिमेतां ददातीद 35 55 मति चफेरिसूदन 67 206 मतिं मशास्तविस्तराम् 100 67 मरकृते न विनश्येयु 5 48° मत्कृते विग्रहा रोके 42 50° मत्तकाशिनि विश्मात् 107 50° मत्तौञ्चप्रणादेपु 62 500 मत्तमाचारपुष्टेषु 59 390 मत्तद्विपरथाकुरम् 81 24 मत्तबहिणसधैश्च 93 65*94 b" मत्तमातङ्गविक्रमम् 107 60% मत्तस्तद्विद्धि पाण्डव 104 17t मत्त मदजलोक्षितम् 62 20 मत्त प्रादुर्भवन्ति वै 104 211 मत्त प्रियतरा नृप 22 25° मत्ता विरुरुलु खगा 59 45° मत्ताविव गजौ युद्ध 82 120 मत्तजस्तत्सनातनम् 10494 मत्तजो भरतपभ 104 194 मत्तेर कुटिला नारी 83 38 मत्तेपु वृपभैषु च 62 50% मत्तश्च वरवारणे 84 180 मत्तो मदबाभ्या च 85 26° मत्ती हैमवती यथा 96 46° मत्पदानि च ते सर्प 56 39° मत्प्रदिष्टन कर्मणा 47 46 मप्रभावानुरूपैश्च 86 28° मप्रसादसम भुवि 47 29% मत्समीपाच नश्यत 108 336 मरसाधनेप्सया प्राप्त 65 45° मरस्ययोनावनुपमा 13 40% मरस्यस्य गतिरप्स्विर 66 194 मथुरा नाम नामत 44211 मधुरा नाम सा पुरी 44 533 मथुरामपदाय + 84 d मथुरामभ्ययात्तदा 25 14 मथुरामभ्यवर्तत 85 800 मथुरामभ्युपागमत् 84 124 मथुरायास्वदूरन 45 35* मथुराया ननाधिप 65 14 मथुराया पितृप्वसा 46 15 मथुराया प्रवेशश्च 83 130 मथुराया यभा रानन् 79 326 मथुराया महोत्सवम् 96 531 मथुरायर्या शुभाननौ 79 40* मथुराया स निर्ययो 65 101' मथुरा राष्ट्रवधनी 840 -183 मथुरा पालयिष्यति] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ मनसा तमनुष्याय मथुरा पारयिष्यति 65130 मथुरा मधुसूदन 85 2, 370 मथुरा यादवाधीना 79 10 मथुरा रोहिणीसुत 83 51 मथुरोपवने गत्वा 81 10 मथुरोपवने वसन् 96 29 मथुरोपवने स्थित 462 मथ्यमानेषु भूतेषु 39 120 मध्यमानो ररास ह 74 30% मध्यमानी जलरोमिभि 42 311 मदनि श्वसितोपमै 55 150 मदनोद्दीपनीषु च 55 13 मदपाश्रयमेव च 15 450 मदरता प्रवृत्ताश्च 54 6° मद जहु सितापाड़ा 59 420 मद प्रसुवुर्नागा 62 650 मद सुस्राव रोपाच 74 31' मदासान्तालसो बल 83 471 मदाचलितवृत्तन 67 13° मदीयाया न ते योनी 20 37° मदेन रुधिरेण च 75 d मद्गतस्त्यज्यता रोप 48 430 मद्गत मन्युकारणम् 48 49° मदर्शनार्थ ते याला 104 8" मद्दोपारसमदोपाया 43 35° मदर्यत्रमास्थित 47 30 मद्भक्ताना बने घने 60 26 मगता ये हि नृत्यन्ति 112 1210 मदक्त्या ते तपश्चीणं 12 17. मदराजश्व बलवान् 80 140 मदराजसुता चापि 88 420 मद कलिङ्गाधिपति 81 380 मद्धो वा जयो वाथ 65 80° मदश्यश्व भविष्यति 61 28d मद्विधै प्रतिहन्यते 47 64 मधुकैटभयो कृत्वा 6 30° मधुकैटभहन्तार 112 107° मधुपर्क चगा पैर 109 650 मधुरक्षोदण्दुना 67 27 मधुर क्षणया वाया 10951" मधुर धूयते सन 10987 मधुरेणैर तो मन्दी 65 93" मधुरो माणसमत 57 मधुदोग्धा महाबर 6 260 मधुर्नाम महानासीत् 44 22° मधुर्मधुरवागपि 26 250 मधुर्माधव एव च 7 1 मधुवन्मधुसूदनम् 91 55 मधुशाकफरैल 117 320 मधूना वशदाजा 26 25" मधोर्जज्ञे तु वैदभ्यां 26 26° मधो कैटभस्य च 38 60 मधोश्च तनयो इप्स 31 127" मधोस्तु माधवा स्मृता 23 162* मधो पुत्रशत त्वासीत् 23 161 मधो पुत्रस्य जज्ञेश्य 28 36. मध्यदेशमवाप्तवान् 9 180 मध्यदेशस्य ककुद 8520 मध्यम तन्महच्छिर 5631 मध्यम पुत्रमौरसम् 9970 मध्यस्थ सलिलारम्भ 62 63" मध्यस्थो धन पार्थिवा 100 81 मध्य सागरसनिभम् 100 21' मध्याश्वान्तावसायिन 16 17 मध्ये काश्चिदगृह्यत 38 bat मध्ये गोस्थानसकुलम् 49 260 मध्ये चास्य महाशाख 52 250 मध्ये तु तेजससस्य 91 28° मध्येन चास्य कारिन्दी 52 26° मध्ये नि मृतलोचन 7544 मध्ये पावस्यर्चसाम् 100 10" मध्ये पूरु च राजान 22 17° मध्ये मधुनिपूदन 100 10' मध्ये योजनविस्तार 53 21 मध्ये रविरिवोदितः 33 21 मध्ये होहितगगस्य 91 81 मनये सप्रयायत 4246 मनश्चक पुनस्तदा 112 11 मनश्चक रति प्रति 63 184 मनश्यके विनाशाय 3230 मनसरनुरुपगामिना 671 मनसस्तुष्टिकारकम् 1003 मनम कामचारिणी 13. मनम कामदीपनी 5.3 मनसा चर पाणच 107 31. मनमा मनुष्याप 86 21" - 184- मनसा स्वेच भूतानि ] लोकपादसूची [मन्द धिरेऽनिला मनसा सेर भूतानि 3 30 मनसा निमिता चेय 8641 मनसा निमिता योनि 3544 मनसा मानसी प्रजा 35 40d मनसा यादवोत्तम 84 330 मनसा समनुज्ञात 89 41° मनन्तस्या समादधत् 87 390 मनस्तिष्ठति कान्तासु 59 520 मनस्युम्नम्य चात्मज 23 4" मनस्यारभवरसुत 23 40 मन रणसुख तन्मा 14° मन प्ररित सदा 107 350 मन प्रजापतिशय 30 45 मन स्रष्टा मनुस्तय 58 3801 मनासि च मनुष्याणा 59 49° मनास्थालादयनिय 113544 मनुराहुतिमाजदोत् 90 मनुरित्युच्यते लेके 8 47" मनुरिष्टिं प्रजापति 93 मनुरेवाभवताना 8 17 मनुर्दण्डधरस्तदा 960 मनुहारमा भगवान्प्रजाकर 31 16" मनुवस्वत पूर्व 87 मनुष्य युद्धयो गोपा 67 18 मनुष्यलोकादूर्व तु 62 250 मनुष्यलोक कृत्स्नऽपि 24 17. मनुष्यलोक याणेन 106 4° मनु'परोके ये चापि 107 64 मनुष्याणा च सर्यश 31 1356 मनुष्याणा च सर्वेश 107 69% मनु'याणा मनोभूत 30 36* मनुष्या धर्मकारणात् 41 30" मनुष्या कालकारिता 117 370 मनुष्या बन पालिता 117" मनुसन्या क्षमत्तत्तु 8 10% मनुस्तान युगे युगे 13 64 मनु स्वायमुर प्रभुम् 611 मनु प्रापतिस्त्यासीत् 8 43* मनु सावाणऽन्तरे 8 43 मनु स्वाराचिपम्तथा 7 मनोनको मसागरीय 109 800 मनोनिर्माणचियाा 428 मनोमास्तरासा 34 4 मनोरजायन्त दश 2 16° मनोरथफर गुमान् 217 मनोरन्तरमासाद्य 7 42 मनोरतरमुच्यते 1 387 236, 480 मनोवानिमा शृणु 7 274 मनोवेशकर पुत्र 9 11° मनोवेशविपर्धन 9 120 मनोवैवस्वतस्य 4 1867 85 मनोवैवस्वतस्यासन् 9 10 मनोवैवस्वतस्यैते 7 330 मनोस्तात महात्मन 7 130 मनोहराया शिशिर 3 34 मनोहयाँ मुनेरपि 62 53d मनो स्वायभुनस्यैते 7 100 मन्त्रनामै सुविहित 47 7° मन्नत प्रतिगृह्यताम् 39 254 मन्नपूना ऋतुक्रिया 40240 मध्रप्रवचनार्चितान् 100 680 मन्त्रमभ्यस्यतां तेषा 374 मन्त्रयज्ञपरा विप्रा 59 270 मन्त्रयामस्त्वया सह 41 276 मन यज्ञवह वदि 319 मन्त्राश्च विविधा पार्थ 104 21. भत्रिणोऽथ पुरोहिता 79 271 मन्निभि सहितोऽभवत् 96 494 मर्मत्र इवार्यते 39 15 मधेर्वाहनमुत्तमम् 23 391 मन्त्रैश्चैव महर्षय 100 160 मन्ययन्धानुकपणे 53 23 मन्यानवरयोद्गारै 49 25° मन्यायतनपूर्णेषु 704 मन्थरारोप्यमाणैश्च 53 230 म दमाल्नकम्पिना 55 100 मन्दरश्मौ दिवारे 681 मन्दरश्मौ विराजति 68 मन्दराक्षरतान्तरे 32 260 मन्दरादिप्रतीकाश 93 16° मन्दरादिमिरोतिम् 34 40d म दरोस्कोणसकाश 36 480 मन्दरोदप्रवक्षप्तम् 36 55 मदरोदारगिसर 84 27° मन्द वपति वासचे 77 30 मन्द ववृधिरेऽनिरा 59 49 हरि पादसूची-24 185 मन्दारेश्योपशोभितम् ] चिकित्सितपाठात्मक्स्य हरिवंशस्य [ मयस्तु काचनमय मन्दारैश्चोपशोभितम् 93 19 मन्दासुरिव नि श्वसन् 76 32* मन्दा पण्डितमानिन 1178d मनिदेशानुवर्तिनी 47 45 मन्मथे तु गते नाश 99 46° मन्मय विद्धि कौन्तेय 104 220 मन्यन्ते नैव त जितम् 82 26° मन्यमाना स्वबान्धवम् 58 150 मन्यसे यद्यकर्तव्य 66 17° मन्यसे या वपुष्टमाम् 118 28' मन्युनाभिसमीरित 25 94 मन्ये दृष्ट स्वयाश्चर्य 70 350 मन्येऽह कार्यमव्ययम् 62 17 मन्वन्तरकथा ब्रह्मन् 7 2° मन्वन्तरमिहोच्यते 240 मन्वन्तरमुदाहृतम् 7 10, 171 मन्वन्तर चतुर्थ ते 7 180 मन्वन्तराणा कौरव्य 730 मन्वन्तराणि सर्वाणि 7 17, 38° मन्वन्तरे प्रसूयाम 3 48° मन्वन्तरे व्यतिक्रान्ते 7 36° मन्वन्तरेषु सवपु 7 350 मन्वन्तरेषु सहार 7 51 मन्वन्तरेषु सहारा 7 500 मम कृष्णस्य चोभयो 65826 मम गाव प्रतीयन्ता 45 260 मम गा कश्यपाहते 45 256 मम चार्धेन तेजस' 2426 मम चित्तानुवर्तिपु 65 20* ममजामितदक्षिण 70 16 मम सक्षन्तुमईथ 8471 ममता बक्षया गाय 45 24. मम तो परिभापितम् 65 94' मम त्वेतद्वच शुस्या 100 56* मम दर्शनकावया 12 17 मम देवनिघातिन 7745 मम धर्मभृता घरे 6 मम नारायणो गुरु 42 371 मम निर्वतितातुरा 1244 ममन्थुर्जातमन्यव 51 ममन्युदंरिण करम् 2 200 ममन्थुस्ते महर्षय 5200 ममन्यशेन दभण 35 48° मम पित्रा विवर्धित 65 77 म पुनस्य धीमत 77 46' म पुरेण निर्मिताम् 35 696 म पुनो मम भ्राता 535" म पुत्रोऽर्जुनो नाम 62 74 म प्रभावाञ्च गवा 6025° म प्रज्वलित चक्र 15440 मम प्रत्यक्षमच्युत 19 30° मम बाहूपमान्भुवि 47 394 मम भर्ना हृतो वीर 99 19° मम माता रजस्वला 73 10 मम मृत्यु समुस्थित 48 381 मम युप्मावह स्थित 96700 मम योनिर्जल विप्र 35 58° मम वत्सोऽथ गौर्मम 535 मम वाक्यादनन्तरम् 10077 मम वाक्येन चोदिता 81730 मम वीणाकृति में 100 34° मम शत्रुस्त्वया दग्ध 85600 मम शीताशुदर्शन 47 31* मम सदूपितं स्वया 73 21 मम स्थानमिद कार्य 86 300 मम स्यादिति निश्चित 2761 ममागमनकारणम् 62 68d ममाग्रतो हता गर्भा 48 400 ममा प्रभविष्यति 62964 ममाचक्ष्व महामुने 30 560 ममाघ द्वारका सर्वा 295 ममाप्येव सजावा 10 47* ममामिप्रायनं वय 848" ममाम्युप्रभव द 62 46 ममाश्रमसमीपे 9 59 ममात्रतेजसा दग्धा 11028 ममांशोऽहमिव स्थित 62 70' ममैवारमा चतुर्विध 104 151 ममैयानुनहाय पै ॥ 41 ममैवानुमत तदा 1562 ममवापहरिष्यन्ति 91 10 ममोपरि ययेन्द्रररर 62 " मयतारपुरोगमा 37 139 30' मयनारा यरादध 376 मपन तामी दान् 35 18 मयस्तु कायनमय 33. -186 मयस्य च पराजये। ग्लोकपादसूची [मर्यादाश्चैव सच D मयस्य च पराये 36390 मया कसो निपातित 78 350 मया कान्येन कीर्तिता 113 816 मया केशिनिपूदन 112 110° मया चतरविज्ञासा 11220 मया च प्रतिभापितम् 1002gd मया जितमिति लयन् 89 381 मया दत्तवर पूर्व 103 10 मया दत्तास्तवाद्धता 31 46° मया दृष्ट पुरातने 43 56 मया दृष्टौ परिव्यक्त 71 496 मया देव पुरा व 13 420 मया पृत धारयते 42 386 मया निसृष्ट राज्य स्व 78 38° मयानुशिष्टास्तियन्तु 81 37* मया पिण्ड समुद्यत 11 17° मयापि हि प्रसादा 12 30 मया पुष्टो विनानता 65 66 मया प्रारा विमो 86 41' मया बलमदोत्सेका 1068° मया भर्तरि पातिते 7856 मयाभिभूत पमरे 11253° मयाप बहुशो युद्धे 108 91° मया राजर्षिसत्तम 22 30* मया मिनिहतो युधि 15 290 मया सह समागम्य 3821° 11254° मया सृष्टेषु मेषु 62 120 मया इम्तारनामित 62 420 मयि कामात्प्रवर्तसे 99 121 मयि मानायक कृथा 29 364 मयि यतो विधातन्य 57" मयि युद्धविशारद 110671 मयि लोका स्थिता राजन् 5 48° मयि होतम्यमित्यपि 570 मयूरगरुडावुभौ 112 77 मयूरचिनाइदिन 60 320 मयूर यजमगस्तै 106 360 मयूरपरन्तानो 60 330 मपूरवधुष्टासु 55 130 मपूरबदनाम्तथा 3184 मयूरस्य च युध्यत 112764 मयूर दीसतेजमम् 112 78 मयूराङ्गदचित्रैश्च GS 530 मयूराङ्गदयाहू तो 524 मयूराङ्गर भूमि 59 43 मयूराणा श्लापिनाम् 54 60 मयूरे पातिते तस्सिन् 112 81" मयेद धार्यते जगत् 5480 मयेय रुपितेन वै 62 14 मयते भुवि दानवा 45 30 मयदेते यथाश्रुति 7 6 मयोक्त ते समासत 113 73 मयो ददर्श मायावी 36 21° मयोद्यत वधार्थ ते 113 24° मय्यासत्ता च जानामि 45 मय्येव प्रणामिप्यति 38 151 मय्येव प्रत्य गता 42496 मय्यैवैप प्रीयताम् 111 gd मरणान्तानि वैराणि 77 51° मरीचिगर्भान्सा रोकान् 13 530 मरीचिप्रमुसास्तदा 584 मरीचिमध्यशिरसी 1 29 मरीचिमिव सोमस्य 87 350 मरीचिरनिर्भगवान् 710 मरीचिर्मघाश्चैव 3 670 मरीचेर्यन वै सुता 13 200 मरुनामथ वासवम् 44 मरुता पतिरुच्यते 23 130d मरुता वा महाबल 6353 मरता सहवासर 91 40 महतो देवगन्धर्वा 34 31° मरतो नाम दयास्ते 3 108* मरत्तस्तस्य चात्म: 23 1243 मरुत्तस्तस्य तनय 2670 मरुत्त कथितस्तर 23 1246 मरुत्तोलभत ज्येष्ठ 2684 मरुत्वत्या मस्त्वन्त 327 भरुद्भिदैवतै सह 31 360 मरु साध्य हु प्राणान् 16 25° मत्यैलोमिहागत 304 मार्यलोकेऽमरोपमम् 626 मत्यै बहुयुग प्रमो 9 250 मयां पश्यन्तु मे रक्षमा 86 30% मत्नासि कथ हत Tar मर्ममेदिभिरागुगै 108 64 112 62 मर्यादाश्चैव सचके 8678 - 187 मर्यादा पुनरागमन ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ महापुरुषसेवितम् मर्यादा पुनरागमन् 58 220 मर्यादा स्थापयामास 5 40 मरदा मलहा तथा 238 मलिनो वा विचेतन 79 320 मलमार्गश्च दूपित 75 23° मलहन्तुर्वधो हि स 75280 मल्ला माता वरानने 71 286 मल्लेवा स्वयमेव वा 737 मल्ली चाणूरमुष्टिको 45 572 220 मल्ली रङ्गगतौ तौ तु 44 730 मला वीरध्वजोचिती 72 16 महतस्तपस पारे 2 310 महतस्तमस पारे 140 महता तपसान्वित 313d महता तपसा युक्ता 7 400 महता परिवारित 10L 18 महता राराज्येन 5270 महता स समन्धित 18 11' महती निर्मिता मया 61 65d महती लोकधारणीम् 351 महत्त कर्म कुत्सितम् 44 330 महत्या क्षमया युते 100 491 महत्वृक्षविले वाणी 28 220 मदद्धयेतदधिष्ठान 4 16 महदि ऋतुभिर्विभु 23011 महदि साधु पूनिता 25 264 महद्भूत न जानीम 56456 महद्युद्ध मुदारणम् 109733 महर्षय सगन्धर्वा 48 17° महर्पयो बीतशीका 32 380 महर्षि कुरसमिते 42 480 महर्षिगणसस्तुत 92 58 महपिपुर धर्मात्मा 9 980 महरिभिरभिष्टुने 21 महभिररस्तम् 82 14 महर्षिभिरलता 1 330 मापिरापराविष्ट 38 420 महरिधिप्रहरूचि 44100 महरिपिभी प्रभु 110 26 महर्षिरचनातक्षा 641 महर्षिसमतास 411 महरि कौशिकतात 9 100 महणां च सर्पश 1001 महागा महौजसाम् 7 346 महोणा मदा नर 7 466 महर्षीनत्रवीत्तदा 51 महर्षी-ब्रह्मचर्यया 41 10% महायो रस 118 21 महाकटि स्थूलमुख 643 महाकायनिकेतनम् 34 453 महाकाय महाबलम् 31 1250 महाकाया महाबरा 96 311 महाकाया महाबरा 6240 महाकायो नराम्तन् 96 38* महाकायो महाबर 953* महाकाल इति ख्यात 12 125" महाकाशगतो महान् 62 280 महाकुम्भा यथाक्रमम् 72g महाकनुभिरीने य 2630 महातपा स विभ्राज्ञ 18 In महात्मा कुरुवर्धन 157 महात्मानो द्विजर्षभा 13 Bod महात्मानो महाभागा 13 43° महात्मानो महौजस 729 महात्मानौ महाधुती 110 26* महात्मा सूर्यसनिभ 6 344 महादेवमुपस्थिता 13 अ महादेवस्य त रथम् 112 860 महादेवस्य मिपत 113 63. महादिशिखरोपम 92 ॥ महानदी द्वारवती 93230 महाननो महाग्रीव 58 270 महानाभव विकान्त 361 महानासीरजापति 2 29 महानिद नराधिप 84 महातीरमहारणों 3 88 महान्ति सुष्टानि च 81 56* महान्ती युदुर्मदौ 42 21 महान्यायसक्षये 103 48 महाशरवण्दन 150 महामुदितगोकुर 60 11' महास्या मधुसूदन 41 25 महारगुपटिनिया 85 3r महारादपसेतनम् 4. 20 मदारागारमभूति 10 20 महापसेवितम् 100 - 188 -- महाप्रस्थानमच्युतम् ] श्लोक्पादसूची [ महेन्दीपेन्द्रसहिते महाप्रस्थानमच्युतम् 11471 महायुद्धस्य भारत 204 महाभाग सुतोऽभवत् 24 256 महाभागा महायरा 88441 महाभागासु सासु 25 6 महाभागा तपोन्विताम् 92 641 महाभारतमारयान 180 115 11" महाभारतसहार 115 19° महाभिपस्य पुत्रौ च 13 37° महाभूतपतिर्मदान 37 57 महाभूतानि भूतारमा 30 8° महाभूतेषु सर्वेषु 112 390 महाप्रयगयफाश 31 1250 महानधनसनिभम् 110 38° महामना नाम सुत 23 190 महामनास्तु पुनो द्वौ 23 204 महामारप्रचोदित 81 750 महामात्र तत कस 731° महामारोत्तमार? 81 16° महामृधे तव मम च द्वयोरिम 111 11 महामृधे महाराज 105 120 महामेघगणार्पितम् 54 10% महामेर सकैलास 103 15° महायुद्ध महानाद 117 14" महायोगयरापेता 13 21 महायोग महास्मान 5 45° महायोगिस्वमायुश्च 23 30° महायोगी तदा गन्ता 13 480 महायोगी विनर्पभ 13 450 महायोगी महानुद्धि 97 41° महायोगी महामना 85 gu महायोगी स तु पलि 23 260 मदारजनस्टानि 923 महारजनसा 36486 महारथाना राजेन्द्र 15 190 महारानस्य दयिता 71 26° मदारानो भगीरथ 1066" महार्णवपरिक्षिता 91 23° महार्णवमथायुवम् 43 30 महार्णये प्रवपा 42 156 महाथै महता गतिम् 19 320 महाहाणि पहूनि घ 79 21 महारागार निर्भिया 91 48* महावक्तास्तथापरे 31 83 महा महाभयम् 117 14 महावातसमुदत 54 10° महावीर्यपराकमा 7 131 महावीर्या परानित 26 111 महाशक्ति महामृधे 112 46 महाशिरामहरणा 31 80% महापोडशचत्यराम 93 280 महासत्रमयो महान् 31 27 महासालस्य धार्मिक 23 106 महासालोऽभवत्सुत 23 18 महासूर्य इवोदिती 112 58* महासेनपराक्रम 44600 महिमान निरीक्ष्य च 2 12% महिना तस्य विस्मित 23 14ed महिनारस्तथैव च 15 1 महिना व्याप्य तिपति 1 371 महिपाश्च बनेचरान् 10 20 महिपाश्चोपनायिरान् 69 20° महिपी स्वामीढस्य 23 1036 महिपी वणुहस्य या 13 47d महिपी नहुपस्य च 13 60 महिपी प्रियदर्शनाम् 97 161 महिषी सप्त कल्याणी 88 40% महिष्य पेशवस्य या 99 31 महिप्या वासुदेवस्य 93 48°, 50° महिध्या जज्ञिरे शूरात 24 14° महिघ्या परुप विभो 19 10 मही नपणच्छना 73 17" महीमहारन पूरै 54 10 महीयेतां महीतल 62 581 महीं सागरसन्ना 31 28° महेद्रभान 311 97 110 महेन्द्ररचनादपि 97 420 महेन्द्र वेदमप्र म 94 7. महेन्द्रशिसरे चैर 9780 महेन्द्रश्वाप्युपेन्द्रश्च 62 56 महेन्द्र सउिगेहदा 3870 महेन्द्रस्येर वृत्रण 825 महेन्द्रायुधससती 58 50 महेन्द्रगामृतस्यार्थे 34 41 महेन्द्र पर्वतोत्तमे 31 108) महेन्द्रोपेन्द्रसहिते 62 57. 189 महे प्रतिहते शक ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ मान्यस्य महगमपि महे प्रतिहते शक्र 61 10 महेश्वर कुमार च 43 610 महेश्वराशेऽपस्ते 43 59% महेश्वरेण वा ब्रह्मन् 43 6° महेष्वासान्स वीर्यवान् 87 71 महेष्वासा महावीर्या 800 मदै सुरेशमर्चन्ति 59 18° महोपातभय चैव 105 550 महोदधिरिवोदये 9 710 महोदधे महीपाल 43 39% महोऽय यस्य ववते 71 304 महोल्कामिव ता दीप्तां 112 430 महोल्का ज्वलितामिव 108 Ti मा तु रोचते कस 66 386 मह्य पूर्व ततोऽनघ 9 59° मा शिरपवता पर 93 मा कार्यों पुरजा चिन्ता 48 420 मागधस्य महामात्यै 8210 मागधस्य सुत नृप 803 मागधाना महारथ 87 714 मा च ते शम्बरस्येय 99 45" मातर मे प्रधर्षयन् 73 160 माता च पूजिता वृद्धा 16 20° माता नध्य वैदयों 26 26° माता वदहरेव मे 73 350 माता ते देवकी कृष्ण 69 230 मातापितृभ्या सवण 6924° मातापितृभ्या सत्यक्त 73 36* मातापिनोरनुमहम् 69 मातापियास्तु कार्येण 48 50 मातुश्च शिरसा पादौ 76 43 मातुम्तर भविष्यति 82 मातस्तस्यामजायत 26 27 मातृभाष परित्यग्य 99 11' मातृम्रम दुखिता 13 161 मातणां तात कापेन 23 50% मा तेभूद्विएव मन 21 331 मात्र ग्रहेन सर्वेषु 8 200 माधुरेणीमसनिना 67 30 मादी युधाजितं पुन 24 1 28 10 मादयों प विनियुपताम् 43 63' मादया कुक्षिमयावुभी 62 930 मादया पुनो न जाते 2+s. माधरस्य निवेशने 109571 मानयगिन गतव्य 112 ° मानयन्त पिनाकिनम् 25 16 मानयामास माधव 113443 मानयिष्यश्च तारकमी 87 280 मानवाना कुतो भयम् 41 3° मानवाना च पतय 415* मानवा निर्गते युगे 116 190 मानवा विगतज्वरा 41 4 मानवा प्रणमिप्यन्ति 62570 मानरेद्राय धीमते 42 48 मानयेयो महाराज 9 20° मानवौधभरक्षमम् 720 मानसस्य विसज्ञिता 142d मानस पूर्वन प्रभो 12 11 मानसा नाम ते लोका 13620 मानसा सप्त ये श्रुता 2011 मानसेन प्रयत्नन 86 44° मानित सर्ववृष्णिभि 100 21 मानुपरवमुपागतः 45 116 मानुषवमुरागता 109530 मानुप पतिमाश्रित्य 73 25* मानुष मासमभान 675" मानुप धपुरास्थाय 4*76958 14 मानुपाणामनामयम् 306 मानुपाचोपजीवन्ति 3 4 मानुपास्ते न पानीयु 103 10° मानुरीणा विशेषत 73264 मानुषेणालपवीर्येण 739 मानुपेषु महात्मन 1367 मानुपैरव साध्यते 476 मानुषो येत्तुमई। 1980 मानुप्यमुपसावितुम् 68 3300 मानु'य मृत्युदयरम् 653 मानुप्या गाग्यभाया 251185 13. भानु ये स कय यदि 306" मानुप्ये म ययानयत् 300* मानेषु विनियाजयत् 100 माधाता दी मुसी 10 8. मान्धाता युग्नाव 9 83* माधागुम्नु मुतो रा 85 40 मापरयं दय गवाम् 112 113' मा यस्य महमावि 0 11' 190 मान्याश्चैवाभिगम्याच ] लोकपादसूची [माल्या छसयक्षसम् मान्याश्चैवाभिगम्याश्च 66 124 मा भूदधो नो भगवन् 47 17° मा भून्मे देवसत्तम 112 1273 मा भेट मरुता गणा 32 326 मा भेट मा भैष्ट इति 108 30° मामनादस्य दुर्बुद्धे 22 23 मामनुज्ञातुमईति 112 1100 मामपि प्रतिगर्जति 38 5gd मामप्रेषीत्सुरश्रेष्ठ 96 71° माममात्य परिवृत 15 38° मामुत्सृज्य वरो यस्मात् 47 200 मामुपस्थितमग्रत 13749 मामुगच जनार्दन 101 15" मामुवाच तत शीरि 102 23 मामृते न पुमान्कश्चित् 1037° मामेव तद्धन तेज 104 120 मामेव हि विशेषेण 102 13° मा मेर देवगन्धर्व 100 470 मा यजेथाश्च ऋतुम् 115 290 माषया कालशम्बर 9927 माययाभिजहार तम् 99 5" मायया योगरूपया 45 40° मायया शीघ्रविक्रम 9929 मायापाशान्विकपैध 35 120 मायापाशविमुक्तास्तु 35 150 माया मविकल्पिता 35190 मायामयी तु सा सज्ञा 88 मायामाश्रित्य युध्यम्य 108 76° मायामेता हनिप्यामि 357" मायामौवी समासाद्य 35 200 मायायुद्धविशारदम् 99 4t' मायारूपेण त दैत्य 99 480 मायावतीनि विख्याता 99 45° मायावत्या प्रभाषितम् 99 26° मायारत्या सह तया 9930 मायावधै विनिमुत्ते 36 37° मायाविदग्धा पुश्वल्य 109 56° माया विष्णुशरीरजा 40 31 मायाश्चास्म ददो सौ 99 8° मापामु पविशारदम् 87 34 माया भूमिगतामिव 87 34 माया मानुपरूपिणीम् 58 3gd माया शत्रुनियणी 6250 मायेऽन्तर्दधतुम्तत 36 26 मायेव शुभदर्शना 9960 मायैपा वासदेनेह 118 28° मारिया नाम नाना 2 416 मारिपाया प्रजापति 2456 मारीचश्व सुपाहुश्च 31 114° मारीचस्तामभाषत 3 100% मारीचारकश्यपाजाता 3 43° मारीचाय ददौ प्रीत 31 106° मारीचिजनयामास 373 मारीचेस्तु परिग्रह 3 720 मारत जगत प्राण 86660 मारुताग्निभव महत् 36 47" मारतापूर्णिताम्वरम् 36 58 मारतारलिाताम्वरम् 751 मारतेन नघोकृतम् 54 12 मा रोदीरिति त शक 3 107° मा रोदीरित्यधेरिताम् 28 231 मार्कण्डेय शिशामय 13720 मार्कण्डेयस्तु तेऽशेप 11 40° मार्कण्डेयस्य पश्यत 42 34 मार्कण्डय समाहित 12 1 मार्कण्डयाय पृछते 11 7 15661 मार्कण्डयेन कथित 115 मार्कण्डयेन कथिता 159 मार्कण्डेयेन धीमता 19 34 मार्कण्डेयो महातपा 12 2 15 131 मार्गध्व त्वरिता हयै 109 35* मागध्व यदुनन्दनम् 109 3rd मार्गमादिष्टमिच्छामि 83 46° मार्गमजवनध्वना 93534 मार्गस्थो विवभी भानु 62 64° मागितव्यस्य देवते 39 110 मार्गित य समन्तत 109 36* मार्गितम्यानि भूमिपु 52 12t मार्गित न च दृश्यते 109590 मारिशशवकनाश्च 31 83° मातण्ड इति चोच्यते 841 मार्तण्डस्य महात्मन 8 मातण्डस्य विवस्वत 8340 मातण्डस्य स्वतेनसा 83 मार्तण्डम्यारमजायेती 8 39 मारया एववक्षसम् 70 200 -191 मालाकारमकातरम् ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ मुचुकुन्दं च पार्थिवम् मालाकारमकातरम् 71 174 मालिनी पृष्ठतोऽन्वगात् 114 8. मालिनी भ्रातृमालिनी 114 6', माल्यदामारतसित: 74 3. माल्यवृत्तिरधोमुख 71 20% माल्यवृत्तिः प्रियंवदः 71 16. माल्यार्थमभिसृष्टया 71 11. मा वधी रमेतं वै III ?'. मा वास मा च गुरु 118 33%. मा शब्द इति सर्वत्र 42 12%. मासान्परिचतुर्दश 23 1314. मासान्नै पुष्पमासादीन् 47 . माहात्म्य केशवस्य च 11379. माहात्म्य केवावस्य मे 104 24. माहात्म्य केशवस्य यत् 101 4. माहात्म्यं तस्य धीमतः 31 1364. माहात्म्य श्रोतुमिच्छामि 90 1. 101 ! माहात्म्येनानुजेन वै 83 11. मां क्षोभयितुमुत्सद्देत् 46 23. मां च दक्ष्यन्ति तत्वतः 63 124. मां च बध्वा कृती पूर्व 42 14". मांच वो नाथमाधिस 46 28. मां चैवात्मानमात्मना 62 81. मां जिला दिवमाश्रिताः 42 49. मां त्वं धर्मभृतां वर 68. मां दृष्ट्वा वरणालयम् 113 11 मां नियोजय गोविन्द 101 14° मां प्रमो देवदेवेश 43 26. मां यक्ष्यन्तीति भार्गव 12. मांसग्छेदघना सर्वे 76 41° मासमेदोस्थिदुर्गन्धा 42 41". मांसराशिप्रक्लप्साक्ष्य 60 16* मांसशोणितकर्दमः 8260 मांस चमायया कृष्ण 60 18. मांस सदधयन्धत 1024 मांसातु मेदसो जन्म 30 39° मिग्ररूपेण शत्रुणा 65 50" मिग्रवत्यपि घागना 9881 मित्रवास्मिनविन्दच 99 8. मिग्रवाह मुनीयश्व 9890 मिप्रविन्दा पालि दी 98 . मिश्च परणयामी 90 श्र180. मित्राणि त्यांभजिन्यन्ति 18 206 मित्राणि बहुलानि च 84.4 मित्रावरुणयोरंशे 9 49,7. मित्रावरुणयोरिडा 98. मित्रावरुणयोस्तात 93. मित्रेण वरुणेन च 96 10. मित्रो वरण एव च 3 51. मिथिराममितो राजन् 29 19. मिथिलामरिमर्दन. 29 23. मिध्याप्रणीते यज्ञातें 118 21. मिध्याप्रतिज्ञो जलदान 61 60. मिथ्याभिशप्तो गाय॑स्तु 259", मिथ्या ह्येवं विचारितम् 65. 74. मिथ्योपचय ते तं तु 16 14. मिश्रीकृत इवाभाति 91 35°. मिषतां देवतानां च 10 20. मीननिर्मलमेखराम् 55 37'. मीयन्ता राजमार्गाश्च 86 9. मुकुटश्चापतत्तस्य 7630". मुफुटाचापि क्सस्य 75 41. मुकुटेन त्रिचत्रण 47 43. मुकुटेनार्कवचसा 58 26. मुक्तकेशा विचूलिनः ॥6 11: मुक्ततोयासु सोयदै 54 39. मुक्तमानस्तु याहुग्यां 116 मुत्तमूल क्षितेस्तरात् 61 36 मुक्तं मृत्युमुखादिव 51 24. मुक्ता भरतसत्तम 104 101 मुक्त्वा कृष्णमुदूखरान 51.3t मुक्त्वा गा ये महायना. ॥341 मुसजेनाग्निना क्रोधात् 9 711 मुखमस्यापरा धीश्य 63328 मुखं नारायणस्येव 99 35. मुसाधिरमत्यर्थं 76. मुसानिश्चररपिंप: 37 394.50 मुरे मुद्ध. समादधत् 67 33t. मुरोम्यो वायुमप्तिं च 2 16. मुरो एम्पसटे हास्य 67 #. मुरुपा युदपर मरा: 373 मुख्यपु मधुसूदनः 87 48 मुन्ध रामःि 8300 मुगदस्य वार 854 मुसुईयपाधिम 9851 -198 - मुधुकुन्दो महायशा ] लोकपादसूची [ मूर्ति तिष्ठन्गलमत मुचुकुन्दो महायशा 85 40° मुच्यमानेन चासत् 61 1 मुञ्चन्त शरवर्षाणि 88 150 मुण्डयित्वा व्यसञ्जयत् 10 490 मुण्डा कापाययासस 116 15 मुदितमना रमयन्यपुष्टमा ताम् 118 40* मुदिताश्चानुकुर्यन्त्य 63 28° मुदिताश्चाप्यगायन्त 79 30° सुदिती सिंहविक्रान्ती 58 11 मुगलस्य तु दायाद 23 99% मुद्र सञ्जयश्चैव 23 960 मुनयश्च समाहिता 34 47'. मुनयश्वाभिमानिन 117 16 मुनयो धर्मचारिण 16 28° मुनयो बहुरूपिण 117 19 मुनिमूर्व सभाजयन् 35 53 मुनिरप्सरसस्तथा 3 924 मुनिर्मनसि तादित 3531 मुनिवेदशिरास्तथा 7 22 मुनि प्रीतस्विशङ्कये 10 100 मुनीना भावितात्मनाम् 31 114 35 28' मुनीनां विहित पुरा 35 32* मुनीन्वै सशितमतान् 31 55 मुमुचुर्गन्धमधिक 73 16 मुमुचु पुष्पकाया 83 310 मुमुदाते यदुवरी 79 39 मुमुदुर्यादवा सर्वे 84 23° मुमुदे ब्रह्मलोकस्थ 39 29° मुमुदे यदुभि साधे 86790 मुमुदे शम्पारिता 37 16 मुमूर्षु कारचोदित 112 53d मुमोच रचलितां घोरा 38 32* मुमोच रपितो रद 112 19° मुमोच यक्वज पेन 64 17" मुमोच विशिसाम्तीणा 108 82° मुमोचत्राणि घरवारि 112 24° मुरस्य विषय प्रति 91 144 मुरं चैर महासुरम् 92 28 मुरे हरया सद्दान्वयम् 91 4 मुर पुनसहनश्च 91 199 मुरोश्चर दशारमना 91 18 मुष्टिकस्य तव ध 72 13 मुष्टिक च निपातिते 76 मुष्टिदेशे विकूजित्वा 71 82 मुष्टिना वज्रकल्पेन 58 510 मुटिनकेन चोरसि 11070 मुष्टिनन तेजस्वी 766 मुष्टिमिर्जनयन्भयम् 110 590 मुष्टिमिनिहता केचित् 37 450 मुसलाक्षेपताडितान् 81 696 मुसलापाश्रितोदरम् 70 d मुसलेन च भास्वता 83 260 मुसलेन व्यपोथयत् 110 1 मुसलै पट्टिपेश्चापि 112 65° मुसले पहिसैश्चैव 112 74 मुहु कुर्वन्ध्रमस्तदा 11064 मुहूर्तभूत देवस्य 9 25° मुहूर्तमन्तरिक्षेऽभूत् 91 27° मुहूर्तमभवत्तदा 11069 मुहूर्तमभवद्युद्धम् 110 720 मुहूते प्राप्य जीवितम् 10 650 मुहूतै योधयामास 91 86 मुहूर्त व्यथिताभवत् 48 4 मुहूर्तादिव चाप 102 ° मुहूर्तादिव राजा स 19 21 मुहूर्ताश्च कराश्चैव 104 200 मुहूर्तास्तिययो मासा 30 26° मुहूर्तास्तु मुहूर्तजा 3 28 मुहूर्तेऽभिजिते प्राप्त 48 13 मूढे पण्डितमानिनि 51 243 73 251 मूत्रण शकृता चैव 85220 मूर्खा स्वाथपरा लुब्धा 117 17" मूखौं प्राकृतविज्ञानी 71 110 मूतयो हि तवाव्यक्ता 44 81 मूर्तिमन्तमिवाम्बुदम् 92 19 मूर्तिमन्नमिवाणवम् 3350 मूर्तिमन्ति वृहन्ति च 8107 मूर्तिमन्तो हि ते स्मृता 13 50% मूर्तिमान्सरहस्यात्मा 68 21 मूर्धजयाकुरेक्षणी 51 11 मूर्धजपु परामृष्ट 76 290 मूधंरक्षोभुनैस्तुल्य 99 390 मूी पदयां निपतवा 48 46' मूर्मि धाम्राय वीर्यवान् 113636 मूर्ति घोत्तसितैघरै 53160 मूर्ति तिष्ठ गरुत्मत 94 g" हरि पादसूची-25 193 - मूर्ति देवरिपु देव] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ मेनिरे त गतायुषम् भूप्रिं देवरिपु देव 58 490 मूर्ति वीर समाहनत् 58 510 मूर्युपाघ्राय सव्येन 96 17 मूलच्छेद कृतस्तस्य 78 14° मूल न परिकृन्तति 65 214 मूलादेव हि हन्तव्य 472 मृगयन्ति रतिप्रिया 63 240 मृगन्दविलोडितम् 92 41° मृगाणामथ शार्दूल 49 मृगाश्च क्रूरभाषिण 102 3° मृगा कालजरे गिरौ 19 186 मृगमस्यैर्विहंगैश्च 117 32° मृगै सह विवर्धितो 71 10% मृग्यो मृगवधै यथा 77 21 मृण्मयौ द्वौ महासुरौ 42 14d मृत इत्यभिविज्ञाय 110 मृतस्य रङ्गे क स्वर्ग 75 270 मृत पुनरिवागतम् 51 340 मृत किमपराध्यते 7761 मृत्युकाले च भूताना 40 30° मृत्युना नृपपुगवा 81 11' मृत्युनापहृते पूर्व 48 49° मृत्युपहरणो रणे 37 50 मृत्यु प्राणहर रणे 10879 मृत्यु प्रभविता तव 1 26' मृत्योर्भागे क्षितिगते 44 4" मृदङ्गादिपु तेषु वै 75 36 मृदरश्चारिमेजय 240 मृदितैस्तोयताहित 83 350 मृदुपादो मृदुप्रिय 31 730 मृदुरश्चारिमर्दन 28 390 मृदुरेणाभिरक्षितम् 81 10 मृदुस्त्वय मधुर्नाम 42 180 मृद्यमान स कृष्णेन 56 320 मृधे घेरतुरम्भोभि 36 160 मृधे याधति दानवान् 38 17 मृधे प्रतिकरिष्यति 44 431 गृधे यद्यसि वीर्यवान् 44 3rd मृधे श्रीवत्सधारिणी 38 28 मृधप्यधणीयेन 68 20 मेघरारमुरोपितम् 5956 मेघवालाम्युदश्याम 559 मेषप्णस्तु कृप्योभूत 503. मेघजालेविवाशुमान् 103 194 मेघतोयविभूषितम् 54 40% मेघनादप्रतिव्यूहै 55 13 मेघनादश्च बाह्यत 61 660 मेघनादानुसारिण 54 20% मेघपुष्पबराहको 102 21 मेघपूर्णमिवाम्बरम् 55 420 मेघप्रख्यैरनीकैश्च 97 30 मेघराशिसमप्रभ 56 मेघरूपेण तत्सर्व 62 36 मेघवृष्टिर्दुरासदा 62 15 मेघश्चन्द्रमिवोद्विरन् 110 340 मेघसैन्यमिवावभी 81 22d मेघस्य पयसो दाता 5970 मेघस्येव विदीयंत 58 53° मेघानामिव सर्वत 108 240 मेघाना चारिसूदन 590 मेघानीकमिवोद्धतम् 33 3rd मेघा वातेरिता यथा 108 251 मेघाश्च दिवि मुक्ताभि 62 60° मेघा पवनवाहना 61 49" मेधैरिवातपापाये 112 41° मेधैौरिव सवृता 93 36 मेधैर्नभसि दारणे 61 18 मेधै शिखरसधान 61 351 मेधै शीतातपकर 5431 मेघोघेरेकतां गते 61 33' मेघौधनिप्पभाकार 61 16* मेदसा सजल व्याप्त 42 330 मेदसाभिपरिहता 6 39 मेदसोऽस्थि निरुप्यते 30 39 मेदिनीति तरा स्मृता 42 33* मेदिनीति परिधुता 6 39 मेदो मुमुचतुर्दत्यौ 42 31. मेदोस्थिमभारधिरै 38 40 मेधादी प्रदूतमान 30 21 मेधा मेधातिधिर्यमु 78 मेध्य मेघौषधारितम् 59 120 मेयांश विविधान्भशान 83 22 मेध्यन इविपा मुरान् 62 40 मेम्पो या मेपर्मणाम् 303 मेग माम महागिरे 13 13 मेनिर गायुषम् 601 194 मेने चाहवमागतम् ] लोकपादसूची [ ययाति वसु फिंचन मोहारिक्षपसि दुर्बुद्धे 66 33° मोहात्प्रत्युदियादिषु 109 60 मोईरएतिरीश्वर 44 320 मोद्गत्यश्चेति विश्रुता 23 88 मौद्गल्य सुमहायशा 23 99% मौनमूपु बर्हिषु 62 49 मौलिना हेमचूलिना 7020 म्लेच्छा हैमरतास्तथा 85 196 य महत् 93 180 मेने चाहवमागतम् 106 40% मेने तागतं विभुम् 76 280 मेने वागगतौ देवी 79 7° मेने स मथुरेश्वर 656 मेने सकर्षणस्वदा 53 31 मेरुकूटनिभानि च 93 32 मेरुपयन्तगामिना 34 21 मेरुपृष्ठे तपो नित्य 8 44 मेरुपृष्ठे महौजस 7 40% मेल्लभवन मेरुमन्दरभूपणा 31 1010 मेररित्यभिविश्रुत 93 43 मेरुशृङ्गसमप्रभ 74 14 मेरशृङ्ग तथोत्तरे 21 मेस्सारर्णता गता 7391 मेरु गतस्य वा तस्य 9 30° मेरु दीप्त इवाशुमान् 338 मेरोरिव गिरे शगम 93 39° मेरोस्तपसि सधित 9 28° मेरो शिरसरमागतम् 110620 मेरो शिखरमुत्तमम् 93 56 मेरो शिखरविन्यस्ता 42 70 मैथिलेनाभिपूजित 29 230 मैथुनाय विवेष्टन्ती 8 370 भैयुनायोपचश्मे 25 9 मैथुनायोपवर्तिता 9 130 मैनाक इन पर्वत 108 840 मैनामस्य सुत श्रीमान् 13 14° मैन्द द्विविदमेव च 31_1443 मैदो द्विविद एव च 105 20° 109 40d मोक्षयामास भारत 9 980 मोक्षितश्च महातेना 105 19° मोनितं य धनागुप्त 9630 मोक्षिता सर्यपाथिया 105 150 मोक्ष्यसे रणमूधी 110 581112 93* मोघ गाण्डीवमेतत्ते 102 17° मोघ वीय यशश्च ते 102 11 मोदरयेप सदा भूतै 97 370 मोदन्ता गिारा 46 28 मोदमानो ममाया 43 41' मोहयअगदन्यय 40 31 मोहयत्यसहरमा 99 46 मोइयिया प त कसं 47 66° य माजद्द महासत्र 23 75 य इद च्यावन स्थानात् 21 370 य इद जन्म देवाना 8 48° य इमामावसेकश्चित् 97 35° य एप भगवान्प्रभु 32 33 य एप मवता पूर्व 99 10 यक्षगन्धर्वजालिनी 37 190 यक्षगन्धर्वपतगा 37 45 यक्षगधर्षपतिमि 47 17 यक्षगन्धर्वराक्षसा 13 420 यक्षराक्षसकिनरै 31 360 यक्षराक्षसगधौं 4380 यक्षराक्षसपक्षिणाम् 31 1220 यक्षराक्षससैन्येन 34 16* यक्ष किंपुरराधिप 31 450 यक्षाणा राक्षसानाच45° यक्षाविमाविति तदा 71 21* यक्षाश्चैवामरोपमा 632 यसैध श्रूयते राजन् 6 28° यक्ष पुण्यनिस्तथा 6 29 यक्षो गन्धर्य एव या 63 8 यत्येव वाजिमेधेन 11560 यच जातिपरिज्ञान 68 370 यच्च तरकथित पूर्व 106 20 यच तत्परम पेज 104 यच ते दीर्घमध्वान 104 6° यद्य तेपा पर वरम् 113 यच्च ते हृदि वतते 994 यच वक्ष्यति मां शक 62 980 यचान्यद्वमुकिंचन 78236 यचाय पर्वतोत्तम 62 13 यद्यासि तनुतां गत 43 26' यद्याम्नि वसु किंचन 76220 195- यथास्य वेद वेदोऽपि] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ यस्खया नोक्तपूर्व हि यच्चास्य वेद वेदोऽपि 40 21 यच्छ कोप महाद्युते 5511 यच्छकस्य प्रभो कार्य 109 520 यच्छन्ति पितर पुष्टिं 13 68° यच्छिव च सुखादय च 53 20 यच्छिशु पुरुषोत्तम 96 33° यजता सह शक्रेण 23 350 यजनान्ते तदन तु 60 18" यजन्ति च यथाकाल 419 यजन्ति तान्देवगणा 13 8° यजन्तीति चन श्रुतम् यजन्तु बहुभिर्यज्ञे 96 68 यजधान हरायुध 90 16 यज्ञकर्मण्युपरते 117 24 यज्ञवाट समन्तत 23 776 यज्ञविघ्नकरी येन 31 114 यज्ञशोभिपु देवेषु 36 41° यज्ञश्चेति कुरूद्वद 57" यज्ञस्य पुनरावृत्ति 115 38° यज्ञ गिरेस्तिथौ सौम्ये 60 17° यज्ञाझैश्च दुरासदै 115 21 यज्ञाना घ दिवो महीम् 21d यज्ञाना तपसा चैव 4 20 यज्ञाना हि गतिर्विष्णु 100 830 यज्ञार्थे तु वय सृष्टा 100 720 यज्ञाश्चात्मपरायणा 100710 यज्ञाश्च चयनानलान् 30 240 यज्ञियानकरात्यान् 31 57 यज्ञियानि च द्रव्याणि 3024° पज्ञे पैतामहे क्रमे 5 320 यज्ञे विवरमासाद्य 118 26", 28° यशेपु र इवि स्वादु 32 38° यज्ञेपु विनियोजयत् 29 261 यज्ञेष्वनि चैव 23 120 यहरिज्यन्तमारमान 39 230 यौरिष्ट्वाप्तदपिणे 97 31 यज्ञरिष्ट्वा महारमान 97 44° योनिस्तपोभिर्या 23 149° यसैविपुलदक्षिणे 41 यज्वन पुण्यकर्मण 23 1671 यया दानपति(मान् 27 15. यज्या देवायो राजा 276. यज्यान पुण्यकर्माण 88 .. यज्वा विपुलदक्षिण 21 1 23 125 26t 28 386 114 यज्वा ह्यसि कुरुश्रेष्ठ 118 26° यतमानस्य चिच्छेद 88 90 यतमानस्य रुक्मिण 88 201 यतमानस्य वीर्यवान् 81 800 यतमान महारथम् 89 28° यतमानाश्च ताशरान् 88 161 यतस्व परिहत् तत् 115 34° यतिर्येष्ठस्तु तेषा वै 22 1" यतिर्थयाति सयाति 22 1° यतोऽदृश्यत तदलम् 110 43" यतो तिश्च श्रीश्चैव 21 161 यतो बाणस्ततो गत्वा 112 85° यतो बाणस्ततो भीता 108 28° यतो बाणस्ततो रथम् 112 830 यतो रजितिस्तत्र 21 16° यतो हरतनुखत 112 180 यत्कर्तव्य महेन्द्रेण 43300 यत्कार्य तन्महेश्वर 112 112 यत्कार्य यदुनन्दन 86 584 यत्किंचिनिपु लोकेषु 935. यत्कृत कर्म दुष्करम् 109 420 यस्कृत यदुसिंहेन 96 6. यत्कृत शारिणा पुरा 90 180 यत्कृते सगण कस 96 12° यत्कृत्वा दुष्कर कर्म 96 6* पाकृष्ण भुवि दुरंभम् 70 37 यत्क्षम तत्समाचर 10361 यत्तरसनाजिते कृष्ण 29 " यत्तद्रन मणिवर 29 36. यत्ता भवत सर्वे 247" यत्ता भरतस्तिष्ठतु 1028" पत्तु ते कृत्रिम रूप 58 420 पतु शक्ष्याम्यई दनु 398 यत्ते दर्शितवानदम् 62 36* यत्त मनसि यतंत 1121112 पायमहसि दुर्मते 102 11 पायमेवैविध पै 7831 यावया दर्शित लोक 58.40 पायया निहतो मोहार 4433. पाययानुष्ठितो परन 6s 45* पारपा मोग हि 58 40 -196 यया देवासुर युद्धम् ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [यथा हानि क्रममासा यथा देवासुर युद्धम् 91 46° यथा देवर्षिमि 4 20% यथा देवो मया साध 107 12 यथा दैत्यैश्च नाश्च 4200 यथा धर्ममवाप्नोति 6921 यथा धर्मवधो न स्यात् 41 30° यथा धियेदपत्य मे 101 120 यथा न मम पुत्रस्व 99250 यथा न सीदेत्तरकाय 41 24° यथा नाग सुदुर्वृत्त 69 19 यथा नाति तथैव स 48 48" यथानिदेश निदशा 42 10° यथानिदेश सहृष्टा 86 11° यथानिम्न प्रजा सर्वा 16 17. यथा निम्नानुसारिणा 54 19 थथानेन कृत प्रभु 68 32° यथानेन शयानेन 96 30° यथान्यायमवेदयन् 109 171 यथान्याय निर्मिमिरे 86 160 यथान्याय यथावय 8340 यथा पारमह गत 100 310 यथा पुरोक्तानि तथा IIST यथापूर्वे यथाविधि 83 यथाप्रज्ञ यथाश्रुवम् 1 20° पथाप्रदेशमद्यापि 4 15 22 18° यथाप्रधानांस्तान्सर्वान 107 64° यथाप्रीति यथावय 95 18" यथाबल मनुष्याणा 115 420 यथा पलिनियमित 106630 यथावाणस्थ नगर 107800 यथा माग चराग्य च2133° यथाभिरपित सखि 107 70 पथाभिरिसिताम्मया 107 69d यथा भूतेन्द्रियावाप्ति 39 14. यथाभूद्विग्रहो महान् 106 4 यथा मन्यन्ति मां सर्वे 63 1. यथा मम पुरी तथा 934 यथा महात्मना तेन 4 19° यथा मामा नारद 730 पया मुनिजनालथा 17st यया ययथा दुमै 4 20% यथा या नृप स्वर्ग 11532 यथाय शायतो धर्म 9532 ययाय सनिकृष्टो हि 81 3* यथा युगाना परिवर्तनानि 107 BI" यथायोगमुदाहृतम् 69 24 यथा रूप महोदधे 81 261 यथार्थमूहु सरित 32 37* यथार्थ व वदुर्वाता 41 13 यथाईत सान्त्वयित्वा 92 36* यथाई पुण्डरीकाक्ष 91 3 7 43* यथाहै पूजयामास 94 17. यथावत्प्रतिपद्यताम् 79 यथावत्समुदाहतान् 48 1 यथावदनुपूर्वेण 3875 यथादग्रवीचैव 92 88° यथावदभिनन्दिता 92520 यथा वास्तु तथा वास्तु 45286 यथा विद्युदनादनात् 76 260 यथा विष्यन्दमान मे 68° यथा वैचारिण 52 184 यथा वे निदिवे तथा 86 30% यया ये भूधरस्त्वया 69 194 यथा वैश्रवण तथा 86 57 यथावज यथायूथ 61 54" यथाशक्ति तु वक्ष्यामि 311" यथा पाच्या शतमातु 192 यया शरदि तोयर 85 700 यया सप्तनं भूतानि 320 ययासारं च ये सुसम् 61 6% यथासार यथायूर्य 60 29 पथा सूर्यस्य कोरग्य 3 370 यथास्थानं यथावय 42 1067 4817641. 91301 100 13 यथा स्थास्यन्ति ते नृपा 4394 यथा स्यातां गतायुषी 733 यथा स्यात्पममण्डम् 551 यया स्वात्सर्वमम्यरम् 65 90* यया स्यादेवदेवेश 8628. यया म्याधुगपर्यये 37 200 यथास्यासीरपक्षिमाये 18 136 यया स्वागतमाया 60" पया स्वर्गमुखेन वा ॥ पपा स्वर्ग मरावती 80 पथाई शोणितादिग्या 112 120 पया हानि क्रमप्राप्ता 117. + -198- यदि दुष्करं कर्म] चिकित्सितपाठात्मक्स्य हरिवंशस्य [यद्येवं नाय गन्तव्य पदिद दुष्कर कर्म"67 53 पदिद लुप्तधर्मार्थ 35 45° पदि देवगणान्सर्वान् 21 20% यदि धारयसे शौच 3 1010 यदि निष्प्रभतां गता 110 14 यदि नो भगवान्प्रीत 47 15° यदि पुत्र शिशुस्तदा 66 11 यदि प्रभववा दण्ड 45270 यदि मे पचन नाय 6 30 पदिय ब्रह्मणा सृष्टा 35 420 पदि युद्धानि वचन 11260° यदि वा नात्मज शुभे 99 15 यदि वा नास्ति ते व्यथा 78 38 पदि वा नोपजसोऽसि 65 96° यदि वा प्रतियोत्स्येते 722f" यदि वा मे हृता भार्या 44 40" यदि वा रावणो हत 44 40* यदि वा विस्मृता वयम् 77 33° यदि वा सुहृदो वयम् 59 60" यदि वो मप्रिय कार्य 612 यदि शोषि गच्छेति 5114 पदि शुधूपसेऽनघ 4 180 यदि श्राध्यमिद कृष्ण 100 27" पदिष्ट चो यदुश्रेष्ठा 76 70* यदि सुप्ता सती साध्वी 10736* यदि म सनिकपंस्था 110 14 पदि स्यादिह गोविन्द 102 13 पदि स्यामम तन्मतम् 8332 यदि स्युनिधूता लोका 78 11 यदीच्छेत्सागर किंचित् 8634 यदुक्त चैव युप्माभि 12 33* पदुभिधर्मधुद्धिभि GST पदुभि पावकोपमै 100 87' पदुभि पूजित सर्दै 97 49 पदुभि सर्वतो वृता 95 16* मदुर्दशस्य धर्षित 10s 18 पवश च निदता 66 18 यदुवदो समुत्पन 85 58 मदुभेशस्य धीमत 85 1 यदुसिंहस्य धीमत 1051 यसिंहेन धीमता 1057 पाच सूर्यसु धेर 2210 पई ज्येष्ठ न्ययोजयत् 22 ?' यदूनाममणी प्रभु 78 37 यदूनामन्तरप्रेप्सु 10580 यदूनामभिवर्धनी 86 19 यदूनामवगुण्ठिता 65 800 यदूनामृषभ रणे 12 51 यदूनामृपभोहि स 103 12 यदूना कुलनन्दन 837 यदूर्ना स्वत्कृने कृत 66 36 यदूना नन्दिवर्धन III यदूना निहता नृपै 8529 यदूना पार्थिवाना घ 100 18° यदूना प्रथमो गुरु 65 d यदूना यूथमुख्यस्य 6579 यदूनां शनुसूदन 78 240 यदूना हृदयानि वै 66220 यद्दपिरचि स्यतपा पुरायवीरस 118 4g यदेकस्तै समागत 108 39 यदेवत्पार्थिवं क्षन 44 140 यदेतदृश्यते श्लम् 220 45 यदेव भपसे बच 106 380 पदैन वीक्षितु देवा 40 230 यदोर्देशधरस्येह 23 1610 पदोस्तु शणु राजर्षे 22 44 यदि नाधिगत पूर्व 96 650 पद्यपि स्वारसुदुष्करम् 101 10" यद्यवश्य प्रकर्तग्या 16 10* यद्यस्ति तपसो वीर्य 3548* यथति मयि कारुण्यं 42530 यद्यस्ति मयि मापा B6 361 यद्यस्ति मे यर 118 16" ययति सुहत किंचित् 1837" यपस्त्याचासयस्व माम् 115 38* यषद लिखो मझन् 43 30° पग्रह तं न पश्यामि to7 82 यघई ते सुराव 02 88 पपई भवतां साम्य: 63 15. यह सापये मूठ 44 40 यधारमानमिहास्माभि 39 28° यायपोरतो प्रमुखे 72 23. ययन धारयिष्यसि 3 1014 चपन में विशालाक्ष 107 16. पपय प्रादिठ 2137 यप मापगन्ताय 133 - 200 पयेषा प्रतिहतम्या ] श्लोकपादसूची 48270 [ ययातियंदुमप्रवीत ययेषा प्रतिहतम्या 3574 योगामीदशो गन्ध 579 योपोऽनुग्रहो मम 63 13 यदोषोऽभूत्तदा मम 29 37 यद्वय पुगदै सार्धं 62 390 यता कार्य धनेशेन 4330 यदा चन्द्रमसा कार्य 43. यद्विरोधपसे भृशम् 65 690 यद्विप प्रभविष्यति 70 120 यदेदितव्य लोकेऽस्मिन् 58 41" यन्त्रजालेश्च भूपिताम् 93 25 यस कार्यमनन्तरम् 110 10 यनागभवने प्रभु 96 36 यन्नामा यरकुलश्य स 107580 यदाद्यापबुध्यसे 77 22 यन्मया त्व पुरस्कृत 65 70* यन्मयाभिहिनो लेप 100 81" यन्मयासीनिशामितम् 13 76* यन्मा वदसि नारद 4520 यमा वदसि युद्धाय 36 11 यन्मा क्षिपसि दोपेग 44 39° यन्मा त्यक्त्वा गमिष्यथ 18274 पन्मा व नावबुध्यसे 71 26° यन्मा र परिपृच्छसि 11698 80113 720 यन्मा पृच्छमि भारत 11 30", 35 यमा पृच्छसि राजेन्द्र 104 24° यन्मा भवन्त पृच्छन्ति 100 850 यन्मेऽद्य भगवाशिशो 3555 यमे पृष्ट पुरा पिता 12 14 यन्मे दरिहेरितम् 100 74 यन्मे व्यवसित कान्त 9924° यमक्षय समुपनयजगत्पति 11073° यमजी सबभूवतु 87 यमदण्ढोपमा शुभाम् 108 72' यमद्य पुरत कृत्वा 2 13° यमश्च यमुना चैव 870 यमसह्य समारक्ष्य 85 6° यमन्तस्या न चक्षमे 8 19 यमस्तु कर्मणा तेन 8 410 यमस्तु तरिपतु सर्व 8 21 यमस्तु दण्डमुद्यम्य 34 11' यमह भारसतसा 42 53° यम राज्येऽभ्यषेचयत् 4 5 यम वैवस्वत हरि 977 यम सर्वहरस्तेन 37 50* यमान्तकनिम रणे 11270d यमान्तकनियुधि 110 300 यमान्तकसमप्रभम् 110421 यमारूद स भगवान् 34 7° यमासाद्य जन सर्य 92 649 यमाहुरग्नेर्यन्तार 34 28 यमाहुराकाशगम 34 29° यमाहुर्भे युगे युगे 30 16 यमी कन्या यशस्विनी 8 46° यमुनाफर्पण दृष्ट्वा 83 500 यमुनातीरमार्गस्था 51 20° यमुनातीरमाण 49 28° यमुनातीरमाश्रितम् 57 31 यमुनातीरमानित 70 8 यमुनातीरशोभिता 44 574 यमुनातीरशोभिना 49 150 यमुनातीरसबद्ध 49 16° यमुनातीरसश्रितम् 52 220 यमुनामनु ने नृपा 81 28" यमुना मुनिसेविता 56 44 यमुनामुपशोभयन् 55 390 यमुना याति सयता 59 441 यमुनाया हदे ह्यस्मिन् 70 10 यमुनाया यथा वृषौ 71 300 यमुनाया हदे नाग 65 27° यमुना राममग्रवीत् 83 411 यमुना लोकभावनी 8461 यमुना सागरगमा 5560" यमुनाइदगोचरम् 457 यमुना चावगाहतो 544 यमुना रागरायुध 83 473 यमेन वरुणेन च 43 3 यमेन्द्रवरुणर्गुप्ता 37 18 यमो वैवस्वतस्तेषां 621 यया कृष्णमयोधयत् 29 15 यया जज्ञे सहेश्वर 96 12 ययातिरपराजित 22 200, 30° ययातिरपि रूपेण 22 33° ययातिर्गस्य सुतम् 22 26* ययाति म नाहुप 85 57° ययातिर्यदुमब्रवीत् 22 21 हरि पादसूची-26 201 ययातियुधि दुर्धर्षः] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ यसव सोऽहं सनातन ययातियुधि दुर्धर्षः 2280 ययातिवंशजस्थाथ 43 77. ययातिस्तु ततः परम् 22 11. ययातेजननी ब्रह्मन् 13 60°. ययातेश्चरितं नित्यं 22 45. यया दह्याम सयुगे 36. 100. यया मे चरणो मूर्ति 118 20. ययुद्वारवती पुरीम् 89 53. ययुयुद्धपराङ्मुखा 108 28. यो द्वारपती प्रति 87. 484. यया नारायणान्तिकम् 38 2. यया पूर्व महोदधिम् 95. 30 थयो बागरथ प्रति 108664. ययौ यत्रानिरदो चै 108 52. यया वातजयः पक्षी 92 46. ययौ विदर्भान्सहित 87 26° ययौ सौमित्रिणा सह 44 44. ययौ स्वभवनं येन 106 19. थवनश्च करोरमान 97.6. यवनश्च महाबल 311464 यवनश्च हत. सख्ये 105. 19. यवनस्य महाराज 512. यवमाधिपतिर्थरम् 85 1200 यवनाधिपतिश्वव 80 154. यवनानां महाबल.85 186 यवनानां शिरः सर्वे 10 420 यवना. पारदाश्चैव 10 31 यवीनरश्च विक्रान्त: 2397%. यवीयसी तयोर्या तु 8 46° यवीयान्कृप्या एव तु 504. यवीयांसस्तु ते मम 12 13 यवीयास बुभूपति 8224 यश उत्सृज्य दूरतः 108 31. यशश्च प्राप्स्यते महद 2 21. यशश्चार्य महातपा 19 206 यशसा त्वं तु योक्ष्यसे 62.87. यशसा पौरुपेण च 136 यशसाप्रतिम सदा 213 यशसा विश्मेण च 606 यशसा विजयेन च 1346. यशसे विजयाय 109 184 यश प्रदीपा लोकानां 65 13. यशोदा च मुपिल्लमा यशोदा तं समुत्सृज्य 50 4. यशोदा तां तु कन्यकाम् 48. 13. यशोदा स्वब्रवीगीता 50 26". यशोदा देवकी तथा 48 13. यशोदर नाम भद्रं वे 47. 33: यशोदा नाम विश्रुता 13 530. यशोदानिकटं ययुः 51 20. यशोदापि व्यजायत 48 12. यशोदापि समाधत्त 48 10. यशोदामनुगच्छन्त्य. 56 24. यशोदामूचुरङ्गनाः 51. 21. यशोदाया गृहं भीत. 48 18%. यशोदायामजानन्यां 5020% यशोदायास्त्वविज्ञातं 48 19. यशोदा शीघ्रगामिनी 507 यशोदा नन्दगोपस्तु 50 26. यशोदे नावदीर्यते 56224, यशो मानश्च दूषितः 118 21'. यश्चकार महातपा. 23 121. यश्चकार महाभाग 93 38. यश्चक्र वर्तयत्येक 306. यश्चतुर्दियदाध्वज 93 41. यश्च दत्तस्वया सुतः 73 34. यश्च दैत्यान्तको विभु' 30 336. यश लोकान्तकान्तक 304, यवेक्ष्वाकुकुलोद. 1078. यह भूयो दृश्येत 56 37. यश्चन कीर्तयेनित्यं 4 26". यश्चना धारयेत्तात 1 16. यष्टुं स बाजिमेधेन 1158. यस्तु प्रासादमुण्योऽत्र 13 497. यस्ले जनिष्यते पुत्र 26 17. यस्तरमा देयता गावः 4539 यस्ते मा यथारूप, 107 10. पस्तेषां सप्तमो दिन 153'. पारवमेवमभेदाम्यां 100 36* यस्वयं नन्दगोपस्य 0238 परस्वया वात दयुमः 450 परपया मम पुत्रो 7333 पररयषा प्रचारिणा 436 पर जगम्भय गुर्स 58 35 पर देयोपमं पदं 605 यएवं सदसनातन. 18. As'.

यस्त्वं स्वाथेन चेतसा] श्लोकपादसूची [या चास्य प्रकृतिम्रहान् यस्त्व स्वस्थेन चेतसा 6510 यसारकात्यायना स्मृता 23 81 यसारकामप्रधानस्त्व 1736 यसाधाता पितत्सदा 66 20% यस्मारपया हत केशी 67 68 यस्माच्च राजनुल्येन 4324 पमान वनितमिद 23 1520 यस्मिंश्च कारणे पाणि 4220 यसिंस्तु निहते सुभे 620 यस्य चक्रभयास्ता 106340 यस्य ते पुन इंदश 56 420 यस्य ते वृत्तमीदृशम् 6570 यस्य तेऽह गुरुर्मत 3568° यस्य नाधिगतो मृत्यु 97 220 यस्य नाम्ना स्थ कौरवा 23 1081 यस्य नाम्ना स्थ भारता 23494 यस्य पुनशत यमौ 23 102 यस्य पुनो महायशा 155* यस्य पैतामह गृहम् 30 16 यस्य प्राग्योतिष पुरम् 91 18* यस्य धुदि परिणता 65 71° यस्य यज्ञे जगी गाथा 23 148° यस्य यस्यान्वये ये ये 1 130 यस्य वीर्यात्प्रवर्तिता 30 624 यस्य शान्ता सुताभवन् 23 360 यस्य शिल्प महारमन 3 414 यस्या दुष्ट मन पूर्व 107 37* पसानिरुद्ध पौग्र स 109 4° यस्या नैव विधो भर्ता 10761 यस्यान्ववायजो विष्णु 23 168° यस्यामेवविध सुत 27 पस्या मनाक उच्यते 13 134 पस्या भूमिरागता 44 804 पस्यार्थे विनपामहे 21 21 पस्याप्टगुणमैश्वर्य 109 85° पस्यासीरपुरपाम्यस्य 24 17° यस्यास्ते पानरीश 107 550 यस्यास्ने यदुपुगव 107 17 यस्यारत्वत्पाशो गुण 69 16 यस्थाहमिन्द्र पुत्रस्ते 21 2' यस्यां स धर्मविद्राजा 24 23° यस्या पशानदीकृतम् 23 80° यस्था पुत्र पुरोजव 3 350 यस्येन्द्रप्रमुखा देवा 109 3° यस्यते परि यत्सका 15 171 य कश्यप सुतर 38° य त्वष्टा विदधे स्वयम् 93 51' य मही सुपुवे देवी 921180 य यज्ञ शाश्वत विभुम् 319 य यान्त पृष्ठतोऽन्वयु 24 31' य वदन्त्यशरीरिणम् 34 29 यं वदन्त्युत्तम भूत 34 29 य विदुर्विदुपो जना 39 11 य विदु सर्वभूतानि 93 470 य कर्ता भुवनप्रभु 106 59d य कृतघ्नोऽनुबन्धेन 65 64 य पर प्राह परत 30 330 य पर श्रूयते ज्योति 30 32° य पर श्रूयते तप 30 320 य पापमनुतिष्ठति 65 65 य पुर भवन चेद 108 17 य पुराणे पुराणात्मा 30 110 य पुरा पुरुहूतार्थे 30 120 य पुरा ह्यनलो भूधा 30 140 य पूर्व परवीरहा 89 490 य प्रभुर्भाति भूतात्मा 109 85° य प्रयागादपक्रम्य 23 107° य प्रविष्ट प्रसह्य न 107 51' य माण सर्वभूताना 34 य शुचिनियतन्द्रिय 25 17" य शृणोति कृताञ्जलि 31 152d य शेते शाश्वत याग 30 18° यस गङ्गा सरिच्छेष्टा 10 66" य स दवमनु येषु 79 16 य स दवो हृषीकेश 34 34" य सधुन्धुवधादा 9 47° य स वाहुसहस्रेण 23 138° यसमा सर्पधर्मज्ञ 31 1180 य सर्वा निन्दसे स्त्रिय 73 31 य सर्वेषा विमानानि 3414 य सहनसमावेक 91 45* या गार स त्वमव्ययम् 4520 याचत कोशतो भृशम् 1930 याचमानाय कसय 87 16° या च सा सुरभिनाम 45 33* या चास्य प्रकृतिबेदन 302 203 याचित परमेष्ठिना] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य यावमिरिष्यति याचित परमेष्टिना 3 114 याचेता निर्भयावुभौ 718 याचेते नेति व तदा 16 8% याचे त्वा कृष्णपूर्वज 83 45 याजयामास चेन्त्रोत 22 124 याजयामास त मुनि 10 204 याज्ञिकाना समृद्धाना 43 73° याज्योपाध्यायसयोगात् 100 यातास्त्रोपं बने मृगा 62 63 या तु सा नन्दगोपस्य 47 330 याते भगवति व्यासे 11870 या ते शतिर्मदामृधे 10 61 या त्वमेव महादहै 100 400 या स्वा पश्याम्यपाहतम् 50 111 याथातथ्येन विज्ञाय 96 45° यादवा दीनमानसा 78471 यादवा धामिका ह्यते 86 680 यादवानामिय भूमि 8420 यादवानां कुल करान् 86 770 यादवाना प्रियकर 86 63d यादाना प्रियकरा 79 304 यादवाना महर्श 45 18° यादवान शिसूदन 86 4° यादवान्यादवर्षभ 94 17 यादवान्सत्यसगरान् 84 14 यादवाभ्या मतिर्वभौ 81 856 यादवाभ्या महारणे 81 60% यादवा यदुनन्दनम् 86 20 यादवा यदुनन्दनौ 79 260 यादवा यदुना चाग्रे 23 1620 यादवा युद्धदुर्मदा 109 180 यादवा रणशोभिन 84 20% यादवा पीतमत्सरा 966sd यादवाश्च धन प्राप्य 9744 यादवास्तव सहिसा 75 9° यादवाश्चैव तान्सर्वान् 7644 यादया कृष्णपक्षिण 7384 यादया पुण्यकर्मिण 23 161 यादवा धुतविस्तरा 66 40% यादवी प्रत्य रयत 1146 यादी धधिय दृष्ट्वा 100 * यादयेषु जनार्दनम् 9020 पाइवेषु महात्मसु 6018 यादवेष्वपि सर्वे 83 15 यादवैरभिसवृतम् 782 यादासि च ससर्जादौ 1 34° यादिविश्व सुरारणि 45 33 यादश तु गृहे इष्ट 9210 यादश युध्यमानानाम् 108 48° यादोगणविचित्रेण 43 18° यानमास्थाय दानव 33 18 या नरेषु प्रसज्जन्ते Ig I यान यशोदया सार्धं 49 13° यानि कर्माणि कृतवान् 5 37° 96 25" यानि देवमनुष्येपु 1 9 यानि राजविनाशाय 6031 यानि रिङ्गानि रोकस्य 79 350 यानि शास्त्राणि कानिचित् 104 2' यानुवाच विभुर्मम 15 20 यानै फिकरसयुक्त 92 36° यान्ति योगगति सिहा 13 10° यान्ति वेदार्थसमिता 66 81 यान्यति जनार्दन 92 94 यान्यद विविधा यस्य 10530 यान्वक्ष्यामि द्विजश्रेष्ठ 1350° या पली ध्यानस्य 9221 या पश्यति प्रिय पुन 56 21 या पुत्रभावमुत्सूज्य 9912 या पूर्व मालिनी यमी 23 331 या भावयति भूतानि 13 63* याभिर्देवानयाधत 9944 याभि प्रत्यारेकामान् 22 36° यामा नाम तथा देवा 78 यामेव रजनी कृष्ण 48 12° याम्यामपरथाममर 37500 थाम्या पम पालयां 3868" या राजन्सामा पस्तु330 यारमीवितुमिच्छसि ॥ 26 यावता प्राणधारणम् 1618 यावरहष्णस्य दर्शनम् 85 41 यावत्त सनामा वै 22 याधारण मानुष 92 60f यायरमुखतरेस्ताये 62000 यावदन्तिवासमा 70146 पावोरणगापौ 81 पावभूमिरिष्यति 115 13 201 मावर्षध घोरं] श्लोकपादसूची [युद्धमाविशारद यावद्ध घोर 53 3° यावन्तश्व गणा प्रोक्ता 11 30 यावन्त कारमेव च 720 यावन्त स्थ समागता 38 65100316 यावन्तो मनवश्वव 70 यावसास्त प्रजयेप 7039 या विपनमनोरथा 77531 यावेतौ मम समृद्धी 72 180 पाश्च देवमनुष्याणा 91 120 यासा पीरवा किल क्षीर 11396 यास्त्वेकपन्य श्रूयन्ते 73 32" यास्यन्ति च वजा सर्वे 69 30 यास्यन्ति तु महीतले 8 26 यास्यन्ति निधन नृपा 62 736 पास्यन्ति निरूपस्कृता 117 136 यास्यामि गमनीयताम् 103 bf यास्यामि यमसादनम् 107 82d यास्याम्पपचिति दिष्ट्या 38 16° यास्यायोऽचामम्तिी 71 याहि प्रभवसे तात 112 84° या सपा गह्वरी माया 40 26° यो न विमो वय सर्वे 62 29° यां यां तनु समास्थाय 45 3° युक्तमक्षसहरण 337 युनरूप तदानय 15476 युनश्चन्द्रमसा पूण 43 190 युवश्च शङ्कपद्माभ्यां 34 16° युनस्तेनैव दर्पण 44 64 युसतोयदमारत 43 17 युक्तं खरसहस्रेण 33 13° युग नगति पर्वत 93 383 युन मनोवै शुभ्रे 22 5 युक्त हयसहनेण 33 150 युनानि शक्टानि च 61 69% पुना सर्वे प्रचेतस 2 36 पुनर स्वतेजसा 62 1 युको मातरिना तदा 34 10" युक्तो राजनिया परन् 79 युको वाजिसहस्रण 20 10 युको यसहस्रेण 349 युगपतुल्य जीविन 14 16 युगसमारसभृता 117 26 युगसरकोपमम् 356 युग दारणमानुपम् 43 594 युग धर्मभृता वरा 13 44 युगानि सप्ततिस्तानि 7 480 युगानुरूप य कृत्वा 30 25° युगान्तद्वारमृपिभि 115 420 युगान्तप्रतिम चैव 43 54 युगान्तप्रतिमेन वै 56 10 युगान्तसदश रूप 41 19° युगान्त समुपस्थितम् 116 33 युगान्त स्पृहयाम्यहम् 161 युगान्तामिनिमानि स 112 24 युगानाग्निनिभैोरै 110 590 युगान्ताग्निमिवोस्थितम् 32 220 युगान्ताग्निरिवार्चिमान् 112 56 युगान्तामिसमप्रमाम् 112 43 युगान्तावतकारिपु 62 12 युगाते जनमेय 115 45d 11671,8*, 330 युगान्ते पूर्वरूपाणि 116 4 युगान्ते प्रत्युपस्थिते 116 31, 326 117 114 युगान्ते प्रभविष्यन्ति 1168° युगाते भिद्यमानाना 81 29° युगातेवन्तको यश्च 30 340 युगान्तेष्विव मूर्छिनौ 36 34 युगान्ते समनुप्रापे 116 220 युगान्ते समुपस्थिते 116 34 युगान्ते सयभूतानि 110 500 युगान्ते सेन्द्र चापाग्यां 34 44° युगान्तोगतजननी 35_180 युगापक्रमणे पूर्व 16 27. युगे क्षीणे भविष्यति 116 18, 280 युगे युगे भान्त्येते 2 54 युगे युगे यथाकाल 117 49° युगैर्यत्रेश्च निर्मु। 37 11 युज्यते परया प्रीत्या 26 280 युज्यता शकटानि च 53 10 युज्येयमिति भारत 18 10 युद्धकाली हि स यथा 65 33° युद्धकालकुदहला 81280 युद्धदुर्दिनमावभी 37 360 युदमत्य दुत बभौ 3533 युद्धमतकर्मणा 93 58 युदमप्रतिम रणे 106 171 युद्धमार्गविशारद 108 69 10 205 - युद्धमार्गश्च दक्षितौ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [यूय वै पितरोऽस्मा युद्धमागेंश्च दशिती 58 100 युद्धमार्गश्च विविधै 58 10 युद्धमासीत्सुदारणम् II072 युद्धमासीद्धि सैन्याना 82 3 युद्धमेव चिकीपति 85 26 युद्धमेवाभिरपते 106 54 युद्धमेवाभ्यरोचयत् 38 220 युद्धवेलामभिरपन 34 15° युद्धव्यतिक्रम कश्चित् 75 18* युद्धव्युपरमे ते तु 65 67° युद्धसमामिवाम्बरम् 54 ad युद्धसज्जविषाणाम्र 646 युद्धस्थश्च भविष्यसि 31996 युद्ध कृत्वा सुदारुणम् 109 286 युद्ध कृष्णान्धमल्लयो 75 15 युद्ध क्षत्रविनाशनम् IIS Ig युद्ध चके सुदारुणम् 65 411 युद्ध चाभूद्वाहनयो 12764 युद्ध नाम कदाचन 15484 युद्ध परमदारणम् 9164' युद्ध मम सदानेन 75 17 युद्ध सुमहदासीद्धि 23_131° युद्धाकासी मन ह 64 130 युद्धानि समयोजयत् 63 161 युद्धाभिकामो राजा तु 85 16° युद्धाभिराप सुमहान् 106 34" युद्धाय युधि दुर्जया 33 10 युद्धाय शिशिरायुधम् 36 " युद्धाय समवर्तत 34 500 युद्धाय समवस्थितम् 34 496 युद्धायातिष्ठदायस्त 33 20% युद्धायाभिमुख स्थित 33 19444 46* युद्धायामिमुखे स्थितम् 108 60" पुद्धायैव मनो दधे 15 450 युद्धारम्भ प्रयोक्तव्य 81 युद्धार्थमुपपरिपतम् 115 1 युद्धार्थ सुविभूपिते 74 " युद्धार्थी नरवाइन 34 It युद्ध कृष्णपायुभी 64 18 युद्ध चरतुरोगमा 112 6t युद्ध पराममा 38 81 युधिष्ठिरं च जानामि 62 93" युधिष्ठिर जितामित्रम् 101 . युध्यत किल भारत 23 143' युध्यत प्रामुखस्थास्तु 110484 युध्यता युध्यता सख्ये 112 1010 युध्यतो रोहिणेयस्य 1100 युध्यध्व दानवर्षभा 108 304 युध्यमानान्सहस्त्रश 10 bad युज्यमाना रणे स्थिता 112 11 युध्यमाने हृपीरेशे 75 370 युध्यमानी वनेवरी 72 196 युध्यस्व पुरुषो भव 12 900 युध्यस्वाद्य मया साध 44 376 युयुस्सयोन्मत्तमिवाबमासे 33 300 युयुधानपुरोगाश्च 1026" युयुधानश्च वीर्यवान् 81 101 युयुधानस्तु सात्यकि 2424 युयुधानस्त्वजायत 98 260 युयुधाने च वीर्यगन् 87 440 युयुधानो महामृधे 87 520 युयुधे वासुदेवस्तु 28 28" युवस्यो गोपन्याश्च 63 169 युरनावस पुनी तु 23 800 युवनाश्वो नराधिप 7 83 युवभि स्थविरैधव 53 290 युक्योहि ते वृद्ध 714 युवापि मृत्योर्वशग 48 41 युवाय समेप्यम 69 युवा रूपेण सपा 23 670 युवा कस्य बनेपरी 71 युवा फस्स यने जाती 71 10" युष्मत्त रोमयेन 2 2 43 युप्मत्परतर नावि 10010 युप्माकमपि निश्चय 43 12' युप्माकममितारमनाम 35 43' पुप्माक तेतमोधन 242. युप्मा नाय सहाय 178' युष्णाक हितकाम्यया 4323 युप्माभिरिह निर्भये 3545 युप्माभियांन्ति बर्षिता 1000 युमामु सउपरे 1008 यूर्व समिर 11. पूरागसमिरराय सोम 3020 पूर्व सेम्याम्पतीक्ष्य 1918 पूर थे पितोऽमा 12 31 206- यूय वै मझगादिन] श्लोकपावसूची [ये हि देवैरिध्यन्ते यूय चै ग्रामवादिन 12 29 यूर्य शरीरकार 12 30° ये करिष्यन्ति मानवा 12 38 ये गता पृथिवीतलम् 44 300 ये गृहाश्रमवासिन 35 34 ये च स्वां मत्प्रभावज्ञा 47 520 ये च नक्षग्रयोगिन 360 ये च मेरुरुदास्तथा 93 61 ये च सप्रेक्षका गोपा 76 10° ये च हेमवता वृक्षा 93 610 ये धान्ये दिव्यचक्षुप 68 37 ये चान्ये धारयिष्यन्ति 19 31° ये धान्ये मेघनादिन 62 41 ये धान्ये विग्यलिया 5 19* ये घावयो स्थिता वृत्त 62 57" ये चास्यानुचरा रणे 1098 ये चेद धारयिष्यन्ति 113 80° ये मे प्रथिता गोपा 60 270 ये चेगे प्राकृता गोपा 76 220 ये चेने यादवा मूर्खा 73 6° ये मे वार्षिका मासा 62 45° ये तग्रासन्समागता 10426" ये तस्य चरितं विदु 40 190 ये तु केचिरस्वदोपेण 75 280 ये तु तत्र मयस्यासन् 375% ये हत ददृशुस्तत्र 65 99° ये यथाशिरस पुत्रा 13 54 ये श्यनेके सुरगणा 3 310 ये पये ब्रह्मणा पुत्रा 12 13* ये त्वया काररूपिणा 48 453 ये स्वया निदता दैत्याः 44 200 ये या विविधास्त्वया 104 13 येन चार्णवमध्यस्थी 31 17° येन सप्त महत्पुरा 20 येन तस्य सुपणस्य 38 33 येन ते निहता दैत्या 30 17" येन स्वमसितापानें 107 50° येन त्वं शात यास्यसि 103 येन व पतयिष्यसि 18 29° येन रवामिगतोऽस्म्यद्य 91 33° येन त्वामाविशत्कोध 823° येन दानवनारीणा 388 पेन न कुलचारित्र 108 15 येन न सयुगेप्वद्य 38 ?" येन पर्यायकर्मणा 77 120 येन भार्या हृता पूर्व 9 89° येन भायों समुद्रहत् 22 81 येन मानाववुध्यसे 1200 येन मे मूर्मि पातित 109 31 येन य शान्तिमेष्यति 45 12d येन लोकान्क्रमजित्वा 30 ga येन वर्तन्ति देवता 6 100 येन वृन्दावन धनम् 83 390 येन वेषेण वा वसन् 4516 येन यो हर्ष भागत 59 30 येन सर्वस्य लोकस्य 47 29° येन सवर्धिता प्रजा 2 29 येन सह यपु कृत्वा 30 1300 येन स्वर्गादिवागत्य 10 650 येनातितापयामास 86° येनानन्त्येन वर्मना 30281 येनासि मलिनीता 73 204 येनाह दूपिता पूर्व 107 730 येनाशो हृता गाव 45 320 येनेपा नाशित यश 20 33d ये परित्यज्य दारान्स्वान् 77 230 पुत्रा जज्ञिरे शूरा 2560 ये पुराणविदो जना 31 136 9021 येय ते वैष्णवी मूर्ति 113 30° ये रोका धारयन्ति वै 23 1644 ये लोकान्धारयन्ति स 100 65° ये यध्या वज्रपाणिना 21221 ये विनाशमिहेष्यन्ति 81 10 ये विशिष्टतमा नरा 107 63* ये विशिष्टा प्रभावेन 107 63° येपामर्थाय सप्रामे 21 15" येषां कुलमिच्छसि 83 560 येषां त्वमनुशासिता 668, येपा नो जगत पति 113 53' येपा भवानभयद् 4120 येषा वशा प्रतिष्ठिता 12 130 ये स्थिता ब्रह्मचर्येण 35 38 ये स्मशास्त्वया तात 83 100 येऽम्माकै पक्षदूपरा 46 26* ये हता सव्यसाचिना 3741 ये हि दवैविरुध्यन्त 106 63* 207 पैवेयं प्रतियोधिता ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ यो मया याहित पुरा यैर्धय प्रतियोधिता 12 330 याता पृथिवी सर्वा 22 43° यै फ्रियन्ते हि कर्माणि 13 320 योगकन्यां दुराधर्षों 96 14° योगजो यज्ञकर्मणि 30234 यो गतिधर्मयुक्ताना 30 30° योगधर्ममनुध्यान्त 16 33° योगधर्ममनुप्राप्य 14 1° 18 32° योगधर्ममपास्य चै 173 योगधर्ममवाप्स्यसि 14 116 योगधर्मरतां सदा 1860 योगधर्मात्मकान्बुध 18 3 योगधर्माद्धि धर्मज्ञ 14 10° योगधर्मापचारिण 142 योगधर्म च निरत 14 9° योगधर्मों हृदि सदा 19 32° योगभ्रष्टा पपात ६ 13 271 योगभ्रष्टा विचेतस 17 6° योगभ्रष्टास्त्रायश्चैव 18 130 योगमाज्ञापय तत्र 102 6° योगमाता तथैव च 13 444 18 11 योगमास्थाय गोपते 8 320 योगसिद्धा जगरहरन 3 38° योगस्य चाभिनिवृत्त्या 16 31° योग तमुपलभ्य च 19 22 योग विहितमात्मन 85 35 योगेन रमते च य 30 296 योगा च योगपस्नी च 13 44° 187° योगाचार्यगति प्राप 19 296 योगाचार्यान्महाबलान् 13 46* योगाचार्यान्महावतान् 13 48* योगाचार्याय धीमते 13 2nd योगाचार्यावुपस्थिते 13 234 योगाचार्यों महायशा 15 12' योगाचार्यों महावीर्य 908. योगारमा तपसा युक्त 19 1" योगारमा तस्य तनय 15 24 योगादिव महार्णवे 81 320 योगायोगेश्वरस्थाने 23 143° योगादनगत नृपम् 19 24 योगिना च तपस्विनाम् 104 11' योगिनां द्विजसत्तम 13 12 योगिनां मह्मचारिणाम् 15 68* योगिना योगवर्धना 13 11' योगी योगेन वनिं च 974° योगी राजषिसत्तम 15 11' योगीश क्षणदातनु 30 320 योगीश्वर महामते 11329 योगी सदश्यते नृभि 23 1500 योगेनारमसमुरथेन 45 46° योजनाना जनार्दन 109 79 योजनाना शत साम्र 29 14° योजनानि जलाशये 8636' योजनायतविष्कम्भ 93 61 योजनायुतविस्तृता 91 24 योजयन्ति रिपुक्षये 62 830 योजयस्व यथाक्रमम् 47 271 योजयामास योगवित् 62 58478 394 योजयाश्वानिति तदा 102 21" योजयित्वा रणे चैव 113 64 योजयित्वा रणे तात 49 3° योजयिष्यन्ति मृत्युना 62 76* योरस्यते ते विजेप्यन्ति 21 10° योत्स्यसे गरुडध्वज 11254 यो दधात्यकंसप्रभ 770 यो दधार चकार च 308 योग्य सह कृष्णेन 75 7° योद्धकामौ सुदुर्धर्षों 31 18. योदुकामौ सुनिर्भयौ 42 19 यो द्रक्ष्यति घने गतम् 66 33 योधमुल्यस्य योधानां 8678 योधयामास तेजस्वी 91 550 योधयामास वीर्यशन् 63 11' योधयित्वा महायल 763 योधाना प्रथमो नृप 645 पोधा पुयुधिरे नृप 82 4 योधास्तत्रायतस्थिरे 110 45 योधरपिच विशाम्त 6 45. यो निगृह्मेन्द्रियमाम 35 400 योनिभिरुदीयते 34 280 योऽनिष्वा च पितम्मादे 12 33. पोऽन्तकाले जगत्पीरया 30 10 योऽग्यस्य परमभान 5922 पोऽप्यसो हयविकारत 44 Gr" यो भोजमभिता प्रज2721 यो मया वाहित पुरा 3500 208 - यो मामनेन नागेन] श्लोकपादसूची [रम विविशतुम्नदा यो मामनेन नागेन 74 251 यो मा सागरमालिनीम् 42 450 यो मृतो रवणाम्भसि 79 10 यो यथामार्गत स्थित 751.' योऽय करीपधर्मश्च 75 100 योऽय स्वया हतो विष्णो 38 580 योऽयं मया ज्वर सृष्ट 1119 यो यादवकुरोद्वद 738 यो विद्यात्सचराचरम् 2 56 योपिरिस्वर समन्तत 55 151 योपेवावुलता गता 83 34 योऽसि सोऽसि नमोऽस्तु ते 63 86 योध्मौ दैत्येषु दर्पित 44 710 योऽसौ विष्णा त्वया हत 44 61' योऽसाक कुरुपांसन 667 योऽइमेकस्य पुत्रस्य 49 5° योऽद दोामुदाराम्यां 46 23° हितिष्टममाग्रत 65740 यो हि योद्धा रण याति 6 480 यो हीद धारयेनप 113 820 यो धावां युधि निर्जेता 42 29° योऽपा मोम्यो ममाग्रज 47 30' यौ तापर्जुनवृक्षा सु 51 22° यो ती मयख तारश्च 44 740 योधिष्ठियों युधिष्ठिरी 98 18 पौधयास्तु नृगस्य ह 23 24 यौ भवताविधागती 71 11 योगारथ कदम्बानां 54 7° योयनस्येव लक्ष्यते 54 40 यौवनस्थेर यनिता 73 11 यौवनाश्चन समरे 23 131 पारने प्रथमे स्थित 99 350 र रवचन दिग्धान 70 21° रतधापनाकिनम् 108 37° रतपीतारणग्या 93 620 रत्नपीतासिताम्बरा 60 31 रतमा धादर्न यहु 71 100 रनमांसरसाशना 52 25d रासूर्यायते वपु 76 16 रक वेमुद्द।। युधि 37 34' गिरनाय 1 180 रमाहुलिनसातर 109 830 रक्षणीयस्त्वयानघ 111 रक्षणे सुमहा-गुण 108 93 रक्षन्ती तापसाल्यान् 100 40* रक्ष मा रक्षणीयोऽह 113 350 रक्षसस्तस्य रत्नानि 7921" रक्षमा निग्रहाय च 31 1126 रक्षसा वातरहसाम् 92 370 रक्षा च वाह्मणे कार्या 101 133 रक्षाधिकारी भवत 101 9° रक्षामि त्वा कुतोऽनघ 101 10% रक्षार्थ केशवस्य च 96 141 रक्षार्थ प्रविवेश ह 29 25 रक्षा प्रति नराधिप 9660% रक्षांसि श्वापदानि च 117 24° रक्षितव्यमथा योय 110 49° रक्षितस्य त्वया तस्य 62 80° रक्षित सर्पराजस्य 55 52% रक्षिता चापि गोप्सा 11383° रवितारो विशा पते 9 40, 41d रक्षिता लभते फलम् 101 9 102 161 रक्षिता तसा पितु 99 290 रक्षिता स्वेन तेजसा 45 24t रक्षिमि पुरपर्पभी 96 62 रक्षिभि सह येगित 48 22' रक्षिष्यत्यात्मपक्ष च 3570° रक्षिष्यामि द्विज भयात् 101 144 रक्षिध्यामीति चोक्त ते 102 14, 17" रक्षेत्सग्रामनगरा 42 450 रक्ष्यते देवि सर्वत 107 80° रक्ष्यमाणा समतत 92 244 रक्ष्यी ते द्वाविमा शिशू 49 111 रघुर्मानाभवत्सुत 10734 रगदारमुपस्थितौ 74 21 रङ्गद्वारे गज मत 96 58° रङ्गप्रतापकामेन 75 03 रजमध्यादवलुनम् 76 27 रजमध्यादुत्पपात 76 26" रजमध्ये धरलातु 768 रङ्गमावलिगताम्यरा 7420% रणबाट महाधनम् 96 553 खसिद्धिस्तु महाना 7524° रगत्य द्वारि कुअर 74 11 रङ्गं विविशतुस्तदा 96621 हरि पादसूची-27 209 रङ्गे च नियता सिद्धिः] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ रया रनिरुध्यन्ते रङ्गे च नियता सिद्धिः 75. 20%. रचितं रत्नजालैश्च 33. 3. रज उद्भूयते महत् 9. 56'. रजकं रङ्गकारकम् 71.7. रजकः स तु तो प्राह 71.8. रजकायाल्पमेधसे 71. 12. रजको व्यस्तमस्तकः 71. 134. रजन्यां तु प्रभातायां 78. 42. रजन्या दिवसे गते 68.94. रजसः पुत्रमच्युतम् 4.13. रजसा मुह्यसे कथम् 113. 281. रजसा वापि संदुष्टा 113. 39. रजसा समभिप्लुताः 117.384. रजसा स इयः कृष्णं 67.27. रजस्वलेव युवतिः 42. 41. रजामि विविधानि च 71.. रजिपुत्रैः कृतो विभो 21. 31'. रजिपुत्रोऽहमित्युक्त्या 21. 24. रजिरात्तायुधः प्रभुः 21. 16* रजि दैतेयदानवाः 21. 19'. रजिः पुत्रशतानीह 21. 120. रजुयज्ञोपवीतिनी 52.5. रणदृष्टं बभूव ६ 9. 22. रणरष्टः प्रतापवान् 26. 20. रणात्प्रतिनिवृत्तोऽयम् 95. 7. रणे तेऽभिगता रेजुः 81. 77. रणे नारायणं शरैः 38. 17 रणे पावकमारतो 36. 32'. रणे वाणं सुविक्लवम् 112. 82°. रणे राज्ञा महात्मनाम् 97. 16. रणे विजयमानस्य 75,250. रणे वैश्रवणस्तेन 37. 49. रणे शत्रुभयंकरम् 112, 1094. रणे स्वस्थमवस्थितम् 38.6'. रणे घुभयतः सिद्धिः 75.26. रतिचिन्ताकुलीकृताः 63. 34. रतिमाप्स्यन्ति ते त्वयि 45. 431. रतिमिन्द्रेण रम्भायां 18 28. रतिरस्ति प्रसीद मे 106. 114 रतिसंसर्गलालसाः 77.6. रत्नकूटा पता दश 23.81. रत्नजालानि तर 93. 53. एनजालान्तरवती 42.8. रत्नज्वालाकुलानि च 74.6", रत्नप्रवेकैशाई: 95. 6. रत्नभूतं प्रपश्यसि 93.58. रत्नाभूता च कन्येयं 2.40". रत्नभूतानुभूयताम् 118.254. रत्नसर्वस्वहरणं 77. 28°. रत्नसंचयगर्विता 44. 58'. रत्नसंनिचयस्तादृक् 92.7'. रत्नसोपानभूपिताः 94.4. रत्नसौगन्धिकोत्पलाः 93. 594.94.4. रत्नं देहीति लागली 29 20. रत्नानां येत्स्यते नरः 103. 11', रत्नानि च महााणि 79.20. रत्नानि च विचित्राणि 84.4. रत्नानि विविधानि च 6. 35.91.9.92, 2". रत्नान्यन्तःपुराणि च 92.8". रत्नान्याच्छादनानि च 77. 304. 78. 25. रत्नान्यादाय सर्वश: 5.25%, रत्ने चोपक्षयं गते 116.21. रत्नेश्च प्रतिपूजितः 92. B2,61', रत्नश्च स्वयमर्जितः 96.6. रत्यन्तरगवा रात्रौ 63. 32. रय एव स्थितश्चाई 103. 25. रथपन्थानमिच्छामि 103. 3. स्थपन्थानमुत्तमम् 103.22. रथपा व्यवस्थितः 108.10. रथमारा काञ्चनम् 19. 16. रथमारोपयामास 20.9. रथमार्गः प्रदीयताम् 103. 17. रथमास्थाय वीर्यवान् 108. B2'. 112.16 स्थमुख्यो विदूरयः 28. 11, रथमूहुस्तुरंगमाः 103.20'. रपयंदोन सर्वशः 88 18. रथविस्तीर्णजघना 48. 30'. रयस्थ पार्थि रामः 31. 1026. रथस्थो दंशिता धैय 81. Bf. रथं घ रविनां यर 31. 107. रय सेनेव मार्गग 7033:: रथ परममास्वरम् 220. रथ पररथारुजम् 33 8. स्थानां चाप्यनेकताः 10037 स्थानों पातहमाम् 81.st. रया स्थनिरयम् 37. 30. -210- रथा स्थैथिमिश्राश्च श्लोकपादसूची [ राक्षसी निहता रोदा रथा त्यधिमिधा 82.4. रथिनः सादिनश्चैव 81. 94*. स्थी द्वीपाननुचरन् 23. 150. रथी निष्यम्य वै पुरात् 15 58. रथी रामो जरासंध 82.8". रये तिष्टन्गुहन्तदा 112. 33. रपेन जित्या नृपतीन् 105. 15. रथेन रथिनां वरः 8858. 112 85. रयेन सहसूतेन 103 9. रयेनादित्यवर्चसा 23. 138. 97.. रयेनाम्बरगामिना 34. 20%, रये युक्तं महात्मना 108, 58. रथेषां च मिभिः शरैः 88. 224. रथेपां चापि चिच्छेद 81.85°. रथेपां तस्य सोऽच्छिनत् 108. 68'. रथेप्वतिरपो यन्ता 86.78. स्य रथाश्च संरब्धाः 87.74. स्थैरश्वेश्च दंशितः 84 16. रवैश्वाम्बुदनादिभिः 81. 76. रथस्तत्र बलान्विताः 87. 29. स्थैः पचनसंपातः 81. 236. स्यैः सांसामियुक्तः 18 15. रयो भाति घनोन्मुक्तः 112. 10. रघ्याः पताकामालिन्य: 79.28. रमणं भाग्न चैर 93 20. रमणीयं तदाण्यानं 118 3. रमते याललीलया 65.31. रमन्ते जन्मभूमिपु 83.. रमन्ते स्वेषु सानुषु 59. 24. रमन्येवं समागताः 107. 10*. रममाणानिढेन 108 11. रममाणा यथासुसम् 107. 164. रमयन्ति मनोरमम् 63 25. रमयन्ति स्म बहवः 5524. रमयन्यो यथा नाग 63 30. रमपंधर मेदिनीम् 45 40". रमसेऽरमासु गर्दितम् 63.11. रमे रवयाई विप्र 12 20. रम्भा नामाप्सरा देवी 118.25%, एय एपोपलक्ष्यते 61. 43. रम्यसानुगुहाजिरः 93 14'. रम्यसानुगुहाशुलै. 93. 326 रम्य गालवनं तद्धि 57. 23. रम्य तालवनं महत् 57.3. रम्य वननिवेश ये 53. 30. रम्यान्दष्टिमनोहरान् 93. 10. रम्यायां वर्षसक्षये 62. 54. रम्यां निवेशयामास 23. 68. रम्ये कालंजरे गिरी 16 224. रम्ये तालवने रतौ 57.4. रम्ये श्रीमति स प्रभुः 107. 14, ररक्ष क्षत्रपूर्वज: 2.2d. ररक्षुस्तस्य रक्षिणः 48. राज केशी मेघेन 67. 31'. रराज तस्य तद्वाल्ये 55. 6. रराज देवराजो वै 62 9. रराज यहि पग्मेण 55 10. रराज माला शिरसि 55. 8. रराज मुखपङ्कजम् 557. राज युधि दानरः 37. 58*. राज वपुषा शुनः 8335%. रराजापूर्णिताननः 83. 27. रराजास्त्रवती भीमा 37. 19. ररास घोरेस्पात: 32 15. ररास च नमः कास्नं 94.9. रसमूलेन यर्मणा 80 40'. रसं रसविदो विदुः 36. 3. रसातलचरो गीत: 65 27. रसातले स ददशे 70 16. रसाद शोणितं भवति 30 39. रसानां रसनं प्रभुम् 34. 25'. रसेनामृतकल्पेन 57.9. रहस्यमृपिभिः प्रोकं 4. 25. रहस्यं पुरुषोत्तमः 86 06. रहिते वसुदेवेन 49. 13. रंस्यते सलिलेश्वरः 43 394. रंसामः प्रीतिसंयुता. 113. 68. रंस्ये च सह युमामि 60 26. राक्षसस्य मघोः पुनः 9. 54". राक्षसं तं महाबलम् 9 13. राक्षसं राक्षसेश्वरम् 31. 12. राक्षसा दानवा नागा: 12.35% राक्षसानां च सर्वशः 107.684. राक्षसानां भयारहे 44 256. राक्षसानां समागमे 77.44'. राक्षसी निहता रौद्रा 96 31". -211- राक्षसी ते वनेचरा ] चिकित्सितपाठात्मक्स्य हरिवंशस्य [राजानो बलदर्पितम् राक्षसी ते वनेचरा 96 326 राक्षसैश्च पिशाचैश्च 6 300 राक्षसै सा कुशस्थली 9 321 राक्षसौ भीमविक्रमी 31 119 रागोन्मता विधर्मिण 21 351 राघवेण महात्मना 44 440 राघवोऽसौ महाबल 31 1411 राजचोरादिदण्डात 116 24° राजत पातमादाय 6 20° राजधर्मपराङ्मुख 66 36 राजन्पुनाश्च पौत्राश्च 7 34° रायानामुपप्लव 115 15 रानन्वक्ष्याम्यह किंचित् 108 89° राजन्वेणुहयस्तथा 23 135 राजसत्येन ते शपे 19 gd राजन्सप्तर्षय स्थिता 7 8 राजपुत्र त्रिभि शरै 87 641 राजपुत्राश्व रक्मिणा 8920 राजपुत्री च साभवत् 897 राजपुच्या तु विद्वासी 26 19 राजभक्तिपुरस्कृतम् 61 20 राजभिश्च तथासने 104 26° राजभिश्चापि बहुभि 81 104° राजभि सहितेन वै 82 294 राजमञ्च महर्दिमत् 96 57 राजमन्त्रधरा सर्वे 65 14 रानमार्गगतावुभौ 71220 राजमार्ग च धार्मिक 71 " राजमार्गेण गच्छनी 83 386 रानमार्गेषु गायना 79 30% राजराजेश्वर श्रीमान् 34 16° राजराज्य तत कुर 62 69d राजराज्येन राभि 4 164 राजराज्येन राजरा 20 20 राजर्षिभि पुण्यतमै 31 38° राजरिभवनृप 267 रानर्पि(न्धुनिमहे 9 63 राजर्षीणामनुष्ठित 26 राजपर्जननी तात 13 55 रामदिवस्यासीत् 870 राजवृत्त स्थिताश्चौरा 116 राजवेश्माम्ययादा 106 Bs' राजधीं वहति प्रभो 67 65* राजसूयमपि ऋतुम् 15 41" राजसूय तथा मन्ये 115 156 राजसूयाभिषिक्तश्च 4 16° राजसूयाभिषिक्तानां 2 23° राजसूये ह्यसहायें 115 21° राजसूयो मतो मम 115 140 राजसूयो महायज्ञ 115 20° राजसूयो हि सामेन 115 16° राजहसा इवाम्बरे 74 130 राजश्विरप्रसुप्तोऽसि 8554" राना कुवलयापीड 74 170 राना कोपसमन्वित 22 26 राजा चाभयदो नाम 23 40 राजा अय्यारुणोऽत्यजत् 991' राजा व भविता तात 174 राना दिविरथस्तथा 23 33 राजा धनुर्मद नाम 65 83° राजा धर्मभृता श्रेष्ठ 155" राना धर्मार्थकोविद 23 185% राजाधिदेवस्य सुता 2820 राजाधिदेव शूरस्तु 28 1 राजाधिदेवी घ तथा 24 190 राजाधिदेवे मृदरे 87 4. राजाधिदको मृदर 81 1020 राजा मरमसो बली 10694 रामानश्चोरशीलिन 16g" राजाने कृष्णशासनात् 78 41 राजानं जनमेजयम् 118 राजान यदुससदि 78 39 राजाने सहमग्रिणम् 18 30° रान सागर 114 रानान मोऽभ्यपेचयर 4 11, 12, 13, It' राजानं खापयामामु 70 °5" राजान कणवेदन 117 18. राजान कारचोदिता 436 रापान कीर्निता मया 2341 राजान शखयाधिन 6275 राजान सर्य पय ते 15 12189 10 राजान पुराणित 89 8 रामा निरमायुन 10 gm राजानी दमाहिता 1030 रामानार यथारयाने 1001 राजानो वरदरितम् .." 212 राजानो भूरितेनस'] श्लोकपादसूची [राम शत्रुभयंकर राजानो भूरितेजस 10700 राजानो राष्ट्रवर्धना 41 28° राजा पञ्चजनो नाम 10 580 राजा परमतेजस्वी 21 186 रामा परमधार्मिक 947 15 1612371 राजा पारिसितम्नदा 115 राजापि हास्तिनपुर 118 100 राता पृथिव्या विख्यात 44 620 राजा प्रमादी दुर्बुद्धि 106 64° राना वृदिपु¥प 15 150 राता बृदिपुस्तथा 23 960 राजा भोजकुरोदद 44 60" राजा राजगृहेश्वर 801 राजाईमिदमस्य च 71 290 राजा बनधरोपम 89 491 राजा यनचरै सद 23 820 राजा विधानमानस्तु 18 20 राजा विश्वस्थश्च है 23 846 राता विपमिबोरग 118 81 राजा सनतिमान्भुवि 23 63' राजासीच्छशबिन्दुज 266 राजासीदणुहात्मज 18 19° राजासीदाजपत्तम 6 42 राजा सोम प्रतापवान् 2 380 राजा हतियर सवै 82 26* राजाहस्थ प्रमाणस 8555 रानिमति शुभानि च 109 11 राजेद्रो दधिवाहन 23 336 राजेयमित विख्यात 21 120 राय व भविष्यसि 43 24 राजोवास महामना 88 331 राज्ञ ऊरी प्रजज्ञियान 5 16 राजस्तस्य यसो सुप 13 404 राक्षस्तेजस्विनो द्विता 536 रामनिधन्धनरत्वासात् 9 88° राज्ञ पण्डितमानिन 7528 राश पारिक्षितस्य ६ 228° राक्ष धानगृह यामि 71 23. राक्षा न तेन चोदित 108 30° राशा रमनकाम्यया 4428 राज्ञा राजपतस्येन 44 28 राक्षां चैव वध कार्य 41 31" राशा प्रिदियगामिनाम् 67611 राज्ञा बरेबरवता 41 170 राज्ञा भयकरो घोर 44 630 राजा भविष्यत्युपरि 68 31° राज्ञा मध्ये महाराज 1016 राज्ञा वैश्रवण पतिम् 4 36 राज्ञा समामशालिनाम् 62 16 राज्ञा हेतु रणक्षये 42 511 राज्ञो वासासि यो मूखौं 718 राज्य केवरमात्मन 85 621 राज्य जग्राह दुर्बुद्धि 96 26° राज्य प्राप्य कुशस्थलीम् 9 240 राज्य प्राप्य महायशा 9 20% राज्य शासति धर्मजे 44 250 राज्य स कारयामास 2190 रात्रावहनि चैव ह 4750 रात्री त मणिमादाय 29 3° राजी व्यावर्तितावेतो 65 50° रात्रौ सकाल्य कार वित् 63 18" राधेयेन इत पुरा 15 26 राम एकोऽभवद्भर्ता 31 1330 रामकृष्णपुरोगमा 91250 रामकृष्णाग्रगान्मोतान् 81 89° रामकृष्णावुभावपि 87 290 रामकृष्णौ च राजा च । रामकृष्णौ विचिन्तयन् 96 60" रामकृष्णौ व्यराश्रित्य 806 रामकृष्ण समागतौ 96 59 रामणौ समाश्रित्य 89 53 रामस्सयोसदा 83 574 रामगोपि दरक्षणौ 81 60 रामतत्य विमोक्षायम् 900 रामस्य तनयो नशे 10 750 रामस्य गदाग 82 1900 रामस्य प्रथित मुवि 90 16 रामसप्रपितामह 10730 रामस्य मुमदारमन 90 13' रामस्यानुमते स्थित 79 10 राम चैत्र महाभुजम् 9680 राम रमपना श्रेष्ठ 836 राम राइलधारिणम् 83 51" रामं वचनमप्रवीत् 8120 राम पारयितामवत् 31 1331 राम शनुभयंकर 83 8. 213 रामाच निशठो जज्ञे ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ कमी वीर्यमदान्वित रामाय निशठो जज्ञे 25 40 रुरुमदण्डा पताकिन 93636 रामात्ततोऽस्य मृत्युबै 23 1556 रुक्मपननिभस्तम्भ 7414 रामादनन्तर चैव 1000 रुस्मपद्मकरन्यग्रा 96 180 रामाय विदितात्मने 83 19 रुक्मिणश्व वच श्रुत्वा 8933° रामाहुकगदाकूर 94 18° रुक्मिणस्तनया तदा 89 44 रामे चासज्य त भार 87 44° रुक्मिण निकृतिप्रझं 89460 रामेण सह गोविन्द 95 170 रुक्मिण पतित दृष्ट्वा 88 26° रामेण सह निश्चित्य 87 40° रुक्मिण रथमारोप्य 88 30° रामेण सह भारत 79 रुक्मिण रहसि प्रभुम् 89 196 रामेणासीत्समागम 82 5 रुक्मिण रोहिणीसुन 89 36* रामे दाशरथी स्थिते 44 256 रुक्मिण सुहृदश्च ये 89 14' रामे निबद्धास्तस्वार्था 31 136° रक्मिणा शवाग्रत 89 290 रामे राज्य प्रशासति 31 1294, 130%, 1344, 1351 रुक्मिणा च महात्मना 81 100* रामे वृष्णिबलान्विते 88 34 रुक्मिणा वासुदेवस्य 82 20 रामो दशरथाजज्ञे 1074° रक्मिणा सह सपाते 89 27° रामो दाशरथिर्बभौ 31 1400 रुक्मिणी विशा पते 87 121 रामो धर्मभृता पर 31 128 रुक्मिणी त्वभवद्राजन् 87 14 रामो भूतपति पुरा 31 1261 रुक्मिणी त्वेव त दृष्ट्वा 99 34" रामो मदसमीरित 83 30° रुक्मिणी निर्ययौ बहि 87 31' रामो राज्यमकारयत् 31 1384 रुक्मिणी भीष्मकारमजा 94 27" रामोऽर्जुनमनीकस्थ 31 101 रुक्मिणीमाजदाराशु 97 3° रामो विराजन्समरे 81 69° रुक्मिणी रकमसनिमाम् 89 104 रामो व्यासस्तयात्रेय 7 43° रुक्मिणी रूपिणी देवी 87 98° रावणस्याभितश्चरौ 97 80 रश्मिणी सत्यभामा च 98 3° रावण निजधानाशु 31 126° रुक्मिणी देवतामिव 99 48* रावण युधि दुर्जयम् 31 1224 रुक्मिणो निधन यथा 89 590 रावण यशसत्तदा 65436 रुक्मिण्या मन्दिवर्धन 99 ' रावण सगण हत्वा 31 1420 रक्मिण्या भ्रातर ज्येष्ठ 89420 रावणेन पुरा गीत 77 44° रुक्मिण्याचाप्युपग्रहात् 89 11 राष्ट्रपालोऽथ सुतनु 27 28" रश्मिण्या रस्मभूपण 87 2' राष्ट्रस्येच्छसि चेत्स्वस्ति 15 410 रुक्मिण्यो वासुदयस्य 992 राष्ट्र चैव महद्धिमत् 71 280 रक्मिण्या स्शव पानि 8838 राष्ट्राणि नृपमुरयाना 105 7° रश्मिग्या प्रवरं वासं 933 राष्ट्रे राष्ट्रे च यदव 41 21° रखमी कृष्यनिर्यासया 88 21 स्लमी क्रोधवशं गत 88 18" राहुरमसदादित्यम् 106 450 रिङ्गियो समपद्यताम् 51 11 रस्मीघ भोजाधिरति 8140 रिपुजनमर्दनवीर्यशालिन 118471 समी चाखागि दियानि 87 13. रिपु रिपुजय विन 2 14 लमी सस्वाभवरपुर 87 19 लमी देपान्यदायर 871 रिपूर्णा ग्रासजननी 65 07. समी परमदाधित 89 1' रिपूम्ता प्रत्ययुध्यताम् 81 65* लमी महति दीपंपान् 89 1' रिपोराधत्त वृहती 2 150 हामी मुल्यो पानाम् 80 ।' रिटो नाम दिते पुन 44100 समी पीपंगदाधित 8931 रीतीनिषतयामास 61 3 21- - रूखमी वेदविदां पर] श्लोकपादसूची [रेमे च सन रम्यासु समी चेदविदां वर 87.8. रकमी श्रुत्वा तु रक्मिणीम् 88.1'. खमेपुरभवदाजा 26. 12. खमेपुः पृथुरस्मश्च 26, 11. रुचितं यदि ते राजन् 108. 97. रचिरद्रुमसानुषु 73 11. रुचिरस तु दायादः 15. 18%. रविरः श्वेतकाश्यश्च 15. 17°. रुचिराप्रकरश्वास्य 68. 26". रुचिरागी चतुर्दशीम् 91.10. रुचिराछादनस्रजी 71. 49'. रुचिराभिः पतामाभिः 92. 11. रचिरोत्पलपनाक्षी 55. 34. रुचिरोटपुटं मुसम् 55.6. रुचेः प्रजापतेः पुग्न. 7. 41. रजा तीना हि या मम 112. 122. रुतज्ञः सर्वभूतानां 15. 11. रदवीनां भूशार्तानां 77.59. रदतीनां सहस्रशः 109. 124. रुदती परिवप्यसे 107 230. रुदती प्रसभं भुना 107. 50°. रुदन्ती तव मृत्यानां 77.67°. रदितानुशयो नार्याः 77.37". रुदिमो भयमोहिताः 109.20. दस्कन्दसहायवान् 106 6. रुदम्बरमै घरं प्रादात् 85 11'. रुदस्तस्य वृहस्पते. 20 32. सदस्यानुचरामयः 110 20. रुद्र रोपात्मसभवम् 1.1. रुद्राणाममितीजसाम् 3. '. रुद्राणामिय यः क्रोधः 65. 18. रद्रादित्यांस्तथाश्विनी 43.681. हदायां जनयामास 23, 9". रुदादा घमदा घ238". रुद्रास्त्रिभुवनेश्वराः 3. 44. रुद्रा लोकभावनैः 43.41. चिमहायैश्च 31. 36. रधिरेणामुनानीव 109 11. रधिराधपरिमुतः 112. 105'. रघिरोरसरिताः 108. 45'. रुधिरायालुतर्गाने. 108 66". 110 32. रुरुदुर्भशादु सिताः 50. 20'. ररुः सर्पयोपितः 109.11. सरभिश्च निपेवितम् 92. 40. रुरुः काश्यप एव च 7.44 रुरोद मधुरं कृष्णः 50.. रुपद्गुर्वदतां वरः 26. 2. रुपनुः सोऽध्यमात्मजम् 26 3. रुपितस्तलशब्देन 64. 13. रूपमप्रतिमं दृष्ट्वा 74. 19. रूपयौवनशालिनी 8. 2. रूपयौवनसंपन्ना 28. 41. रूपवानसि विक्रान्तः 99 17. रूपवानिव मन्मथः 99 304. रूपशीलगुणान्विता 88. 364. रूपं कृत्वा महाभीमं 31. 880. रूपं ते सौम्य पश्यन्ती 99. 23. रूपं दैत्यविनाशनम् 31 68. रूपं निर्यतैयाम्यद्य 8. 33°. रूपिणं समुपस्थितम् 86.66*. रूपिणी प्रत्यभाषत 100. 41. रूपिणी यस्य पावस्था 31. 1178 रूपिणी वै सरिच्छ्रेष्ठा 43. 27°. रूपिणी सागरंगमे 83. 284. रूपेण न मया कश्चित् 12. 10. रूपेण प्रजदास वै 60 204. रूपेण यशसा निया 87.38. रूपेणाग्येण संपनां 87. 33. रूपेणाच्छादितः प्रभुः 60. 22. रूपेणाप्रतिमो लोके 89.6. रूपेणाभिजनेन च 107 634. रूपेणासरशी भुवि 9. 84.87.14. रूपे नास्ति समो भुवि 24. 17'. रूप्यकाशनकक्ष्याणां 27. 22. रेजनुमघसमये 64. 18. रेजतुश्चन्द्रवदनी 51. 11. रेजतुः पाशुदिग्धाही 51... रेजुरायोधनगता: 37. 3. रेजुर्जवनिकाक्षेपः 74.7. रेजुश्वारोपिताः सिंहाः 61. 42. रेजुः कानचित्राणि 74.6. रेजु. प्रस्तरशस्तत्र 74. 12, रेणुना सूर्यमागे तु 85.22". रेणुयस्याथ रेणुका 23. 87. रेमिरे वृष्णयस्तत्र 89. 16. रेमे च तन रम्यासु 55.13. -215 रेमे परमया मुदा चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवशस्य [क्षण रूपसौष्टवम् रेमे परमया मुदा 21 80 रेमे यदुगणैर्वृत 113 70 रेमे रामोऽपि धर्मात्मा 9 286 रेमे रामो महाबल 83 181 रेमे वैदिवस कृष्ण 55 23° रेवतस्याथ कन्या च 86 80* रेवती शीलसमताम् 86 80% रेवत्या चाहुकेन च 9426 रेवत्या सहित सुखी 9 28 रेवत्या दयित सुत 25 40 रेवत्या बलदेवस्य 98 20% रेवस्य रैवत पुन 9 240 रेवो नाम महाधुति 9 23 रेभ्योऽथोपदिशो बली 87 21 रैक्तचाक्षुषस्तथा 7 4 रैवतस्य गतस्य ह 9 330 रैवतस्य मनो पुत्रा 7 25° रैवत च ककुमिनम् 9 290 रोगैरिन्द्रियसक्षय 117 39" रोचता यदुससदि 84 80 रोचते बाहुशालिना 75 रोचते मे सुरश्रेष्ठा 43 120 रोचयन्ति स यादवा 84 30d रोचयन्मधुराः कथा 83 1 रोचय वै गणनष्ठ 3 103° रोचयामास वसतिं 42 21 रोचयामास विस्मित 62 11 रोदितव्ये ध्रुये ममा 77 18° रोदिषीन्दुनिभानने 107 48 रोमाशोस्थितगावस्तु II 4° रोमाञ्चोद्गतराजिमान् 42 33 रोस्यमाणे खगमै 83 40° रोपनि श्वासवायुना 76 16' रोपपर्याकुरेक्षण 564 रोपपर्याकुरे चैव 112 68" रोषमादारयामास 89 33" रोपानि सप्तकृत्वोऽह 42 39" रोपादन्यान्यमाहवे 37 294 रोपेण च परेन च 12 99% रोपेणाभिप्रजम्वाल 110 63. रोपोऽय विनिवस्यताम् 83 45* रोपोऽय समदशित 5633' रोहिणी च ययादशम् 94 15 रोहिणी व शुभानना 968 रोहिणीतनया नव 25 3 रोहिणीमभिवाद्य च 96 g रोहिणीमिव सोमस्य 48 50 रोहिणा कामरूपिणीम् 88 41* रोहिण्यामहनि श्रेष्ठे 86 30 रोहितस्य वृक पुन 10 230 रोहितन्द्रधनूपि च 1 34 रोहितो दीतिमाश्चैव 987 रोहितो नाम विश्रुत 10 23° रौक्मिणेयानिमाम्शृणु 98 44 रौक्मिणेयो महाबाहु 24 30° रोच्यो नाम मनु स्मृत 7 41' रौद्रमागिरस भव 112 24° रौद्र रूपमभूत्तदा 110 500 रौद्र शकटचक्राक्ष 58 27. रौद्राश्वतनयस्य वै 23 420 रौद्राश्वस्तस्य चात्मज 23 5" रौद्राश्वस्य दशार्णेयु 23 6° रौहिणयतृतीयस्य 69 31 रौहिणय स्वया कृता 83 43% रोहिणेयमवस्थितम् 57 16 रोहिणेयवध यत्न 58 17° रौहिणेयस्य चाकूर 68 14. रोहिणयस्य धीमत 58 24 रोहिणेयस्य शैध्येण 110 60° राहिणेय खरो दुष्ट 57 17 रोहिणेय च मे पुग्न 49 30 रोहिणय निरायुधम् 57 18 रोहिणेय महामुर 58 200 रोहिणेय पुराानम् 58 50 रोहिणय प्रतापवान् 58 530 रौहिणेये च दारणाम् 58 16" रौहिणयेन धीमता 9643 रोहिणेयेन सगतम् 692 रोहिणयेन संगत 791 रोहिणेयेन सगग्य 96 41 गहिये हत तस्मिन् 70 1. रोहिणयो महापल 8931 रोहिणयो मिय काल 52 रोहिणयो इसचिव 57 10 र एग रूपसोधपम् 30: -216 लक्ष्मणा चारहासिनी श्लोकपादसूची [लोकपालस्य शाश्वत लक्ष्मणा चारहासिनी 98 d लक्ष्मणानुचरो राम 31 116 लक्ष्मणाया पुरश्रेष्ठ 93 46° लक्ष्मणाया प्रजा शृणु 98 111 रक्ष्मणां चारदासिनीम् 88 42d लक्ष्मीकामो तयत 990 रक्ष्मीवान्माल्यजीवन 71 16 लक्ष्मी साक्षादिव स्थिताम् 87 33° रक्ष्यन्ते हि ध्वजामाणि 81 3° एम ताम्या समूभ्या 51 17° लम्वाहारास्तपस्विन 1625% लष्वाहारो जिनेन्द्रिय 14 11' लता इव विचेष्टन्त्य 7760 एतापुष्पसुमण्डितम् 55 20 लनालकृतपादरम् 55 271 एतापल्लीमहागुमम् 49 17 लतावेष्ट समन्तात्तु 93 18° लब्धमात्र बरे चापि 31544 ब्धरक्ष्या महाबला 82 250 धरक्ष्यो सय वीर 108 76° लब्धसज्ञा दिवीफस 12 27 लब्धा त्रिभुवनश्रियम् 43 136 ज्या नारायणाद्वरम् 1915 एभेत सर्वज्ञपर च केवरम् 118 434 एभेत्पञ्च वराधप 23 166° एभयमिात त शक्र 23 83° एग्यता कण्ठचर्मणा 6451 लम्बमानमहाबुदम् 54 34 रम्यमानाऽम्बुदाकृति 562 सम्बस्नु एम्बमेघाम 33220 साभरणपूर्णन 36 54° रूम्या भानुर्मरस्वती 3 26° स्म्यायाधव घोषोऽथ 328* लम्बो नामेति विख्यात 44 71* राङ्गनाइसकेन 83 26° राङ्गोलिखितापानी 83 38° रागर चास्य येगेन 74 360 राजश्थापि समन्तत 109 77° लाजै प्रणामै पश्च 11361 लाल्ये स्वजन भाग 96 6° सालिता म रतिप्रिया 77 18" राणेरम्बुधिसबै 43 20% रिसाचक्र प्रसेनात्तु 28 14 लिप्सु पुत्र ततो गत्वा 85 9° लीनमीनग्रहस्येव 81 31° लील्या वदनेन च 1077 लीलाकृताङ्गद पीर 7520 लीरा तलमाथ्रिता 67 60% लुब्धकस्यात्मजातात 16 15* लुब्धा शूरान्वहस्तथा 10 57* लेसाश्च नाम राजेन्द्र 7 28° लेखा हि कारलिखिता 115 27° लेभे कन्यामनुत्तमाम् 18 23° रेमे जाम्बवती कन्या 28 28° लेभे ज्येष्ठ सुत राम 25 20 लेम तस्मादहादथ 22 138 लेमे पुरमकल्मषम् 23 1261 लेमे प्रसेनजिद्धार्थी 9820 लेमे प्रीतमना भव 107 81 लेमे वै पुरुष पत्नी 2 10 लेभे साम्बात्तरस्विनम् 98 24 सेलिदिश्च पसगै 34 12 रेरिहन्त इवोरगा 37 400 सेलिहान सनिष्पेष 64 30 लेलिदानानि दिव्यानि 81 56° देशमात्रण भारत 105 6* रेदस्य पायसस्वार्थे 60 11 लोककान्तस्य साहाय्य 99 480 लोक्क्षयकरस्य इ 115 20° रोक्क्षयकर महत् 20 340 लोकक्षयकर काठे 106 45° लोकक्षयकरे तदा 12 38d लोक्च्छायामय रश्म 365° रोक्तनधरो धप 39 18" लोकनाथस्य भार्यया 107 46' होमपालत्वमेव च 8 420 लोकपालस्य शाश्वत 59 50 लरामप्रतिम हरम् 81 61 एवजर गमा महानदी 90 17° रवणस्य महामृधे 44 50 लवणो नाम दानव 31 127 44 236 हायव समुपागम्य 112 लाङ्गाष्टमार्गा व 83 48* सागराकृण्मार्गा सा 83 34* लागरामगहस्ताय 7017 लागलान समुद्यम्य 9010 हरि पादसूची-28 217 लोकपाल सहस्रक] चिकित्सितपाठात्मक्स्य हरिवंशस्य [ लोहेपायुगबरम् लोकपाल सहस्रक् 34 3 लोकपाला बलोत्कटा 34 19* रोकपालेषु सर्वेषु 36 420 लोकपालोपमश्चैव 637 लोकमाप्याययिष्यति 12 37* लोकमूर्ति प्रयच्छति 100 794 रोकमेकार्णव चक्र 30 10° लोकयानामिमा कृत्स्ना 91 25° लोकयोनि चतुर्मुखम् 100 59 लोकवृत्तान्ततत्परम् 62 8° लोकवेदानुगामिभि 43 16 लोकसरक्षणाय च 7 350 लोकसरक्षणार्थ हि II2 88° लोकस्त्वर्वाग्दुष्कृतिना 62 30% लोकस्य विबुधोपमा 65 13° लोकस्याप्यायन परम् 1370% 19 35* रोकस्रष्टा महीतले 8679d रोकहेतुरनुत्तम 30 37 लोक मानुषमागमत् 85 434 लोक क्षुभितमानस 54 124 लोक क्षोभमुपागमत् 112 88' लोकाशान्तिमुपागमत् 43 750 लोकानटति चञ्चर 46 30° लोकाननु परिक्रमन् 30 250 लोकानन्तर्गतानपि 66 121 लोकानल्पेन कालेन 40 320 लोकानामन्तकालज्ञा 40 80 रोकानामपि सभव 100 631 लोकाना कृष्णवर्मना 40 33° लोकाना क्रियता दया 35 534 लोकाना गुरुरव्यय 42 4' लोकाना त्वत्प्रवृत्तानां 45 29° लोकाना त्व गतिर्देव 112 108 रोकाना त्व विपर्यये 58 361 लोकाना प्रभवाप्यये 3759 लोकाना प्रभवाय च 31 13' लोकाना भूतभावन 4022 लोकानां भृगुनन्दन 31 108 लोकानां यदय भवेत् 32 11' लोकानां वेद माधव 39 161 रोकाना शाश्वतो देव 58 47* रोकानां हितकाम्यया 9 561,652031 29 लोकानुरसहने गन्तु 115 37 लोकानुद्वर्तयजिव 971 लोकान्तरगतास्तात 1 33° लोकान्तरगतेन वै 1 164 रोकान्प्राप्य सनातनान् 130 लोकान्सतापयामासु 13 16° लोका मुदितमानसा 32 39" लोकाश्चर्यकरो लोके 100 43° लोकाश्चतन्मयास्त्रय 399 लोका हि यावत्स्थास्यन्ति 83 49 लोकाश्च सचराचरान 38 590 लोका सनातना नाम 1370 लोका सस्थाणुजगमा 38 43* लोका सोमपदा नाम 13 24° लोका स्वस्था भवन्त्वद्य 9 58" लोक कार्यमजानताम् 45 27 रोके ख्यात महात्मन 112 40d लोके रयातो महाबली 82 12' लोके नस्थविरायुप 43 61 लोके नान्योऽस्ति कश्चन 100 200 लोके पतितवृत्तस्य 78 8° लोके प्रख्यातयशस 112 89° लोकेऽप्रतिरथो वीर 24 230 लोके प्रथिततेजस 91 22 रोके प्रवदता श्रेष्ठ 1186° लोके भूतेन्द्रियात्मका 100 600 लोके राम इति ख्यात 31 m' होपु दिवि वर्तन्ते 13 69 रोकेऽस्मिकृष्ण निखिले 62 65 रोकेऽस्मिताश्रमेषु च 36 44' लोकेऽस्मिन्मनः स्मृता 7411 लोकेश्च विदितो हरि 39 13 लोको पालत्यमेष्यति 45 43 लोपामुद्राप्रसादेन 23 67 रोभयान स सौ पोरी 58 13 रोभानुतविरोधिता 16 200 रोभानृतविवर्जिता 16 होमपाद इति ज्यात 23 36° होलशाइलास्पिन 5s Is होष्टपापागाति 57. सोहनारेन महता 33 लोहपा निगृपताम् 7020 लोहिल्या पमहतार 23 00° रोहेपायुगायाम् 33 10 218 - वक्तव्यं च मजे तस्मिन् लोकपादसूची [ परस सोमोऽभवत्तेषां यत् 115260 व वक्तव्य च बजे तस्सिन् 65 899 वत्तव्य न च कारणम् 4761 वक्तुकामोऽसि मस्प्रियम् 106 21 वक्तु वर्षशतैरपि 73, 50% 1013" वस्त्रयोधी महासुर 377 घनश्च सह सैन्येन 978. वक्त्रस्यास्येन्दुवर्चस 69 120 वक्त्रेण चास्य घोरेण 67 30° वक्त्रेणाभूध मारत 56 81 वक्त्रेणामिपगृद्धिना 65 614 वक्त्रेभ्यो विपसभवम् 56 110 वक्रमगारकश्चके 66 25° 106 48° वक्षसाभिविराजता 83 536 वक्षस्याहत्य जानुना 75 420 वक्षस्येनमयोऽनदत् 110 31* वक्ष्यामि नृपसत्तम 22 181 वक्ष्याम्यागन्तु भावि घगराजस्य कुक्षरम् 89 63 वनरान घ सयुगे 87 69 वराज तथैव च 97 150 वङ्ग सुझस्तथैव च 23 29 घनामा सुहाकास्तथा 23 32* बङ्गानामधिपस्तथा 80 120 वचनं चेदमब्रवीत् 35 310 91 581 112 121 वचन तस्य सश्रुत्य 108 56* वचन धर्मसहितम् 35 26° वचन नारदेरितम् 100 250 वचन प्राह दुर्यच 107 58 वचन मे शुचिस्सिते 107 790 वचन साधु भापितम् 53 120 पचनात्तस्य विप्र 23 11' वचनात्तस्य वै विभो 15 1 वचसा गढ़दे। 68 170 पचासि बनशोभिता 100 560 वयोभिटमानसी 72220 वनकल्लेन मुष्टिना 58 490 यन्त्रनामम्तथैव च 368 घनाभ भयापहम् 38 40% चत्रपाणिस्ततो गर्भ 3 106" वनपातोपम वच 56 17 पत्रपूर्ण प्रभु 62 पत्रपति मगौरवा 81 430 पन्नाभिन्न इवाचल 74 380 वनविस्फूर्जितोद्धतै 346 पनवेगानलानिले 32 15 वनसघाततोरणाम् 427 वनसहननास्तथा 43701 वज्रस्त्वादावनायत 98244 वन सुक्षिण एव च 98 17 वज्ञान प्रतिवद 98 250 वन्नावपातप्रतिम 81 48° वनाशनिगदाढ़े 97220 वज्राशनिसमप्रभम् 615 वज्राशनिसमा शब्दा 59 14' वत्राइतमिवाचरम् 77 480 वज्रेण कृतलक्षणम् 34 41 वज्रण प्ररुरोद ६ 3 107 वनेणेव महागिरिम् 7660 पत्रेणेव महागिरीन् 37 430 पत्रेणेव विदारिताम् 50 24t वज्रेणेव हतो गिरि 88 250 वप्रेणेवावराणाना 54 180 वणवारिक्शन 3 1080 वन्ने प्रहरणीयैश्च 37 130 वञ्चितस्तेन मायया 21 26° चट भाण्डीरमाश्रित 44714 वडवामुखेऽस्य वसति 35 58 वणिम्भिरपशोभिता 86 45' वत्सपार सहानघ 55 231 वत्समध्ये स्थित कृष्ण 68 16° वत्सयूथानि काल्यन्ता 53 11 वरसवत्यश्च निवृता 59 10" वत्सवानय गृञ्जिम 24 184 वत्सश्चावन्तको राजा 1511 वरसस्तु मघवानासीत् 6 19. यरसस्तु हिमगनासीत् 6 360 वत्सस्तेपामभूत्तदा 6 26 वत्सस्य वत्सभूमिस्तु 23 110 वत्स दृत्वा तु तक्षकम् 629 यत्स चित्ररथ कृत्वा 633° वत्स तु मम त पश्य 67 वत्स वैश्रवण कृत्वा 629 वरस प्लक्षोऽभवत्तदा 6 370 वत्स सुमाली कौरव्य 6 31 वत्स सोमोऽभवत्तपा 6 16" 219 वत्साना रोपित कील ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ वन्यन्यापारयुक्ताभ्यो वत्साना रोपित कीले 49 230 वरसान्क्षीरविशेषाश्च 4 21° वत्सावते स्वपुनाय 24 28° वत्साश्चोन्मुखका बाला 61 24° वत्सास्तिष्ठन्ति मातर 61 23° वत्सेपु तरणेषु च 7050 वत्सो भार्गर एव च 23 620 वत्सोऽय गृह्यतामिति 16 134 वदता मधुसूदन 67 22 वदनेन स्मितेन च 607 वदने पुष्करेक्षण 110 34 बदन्क्रोधसमन्वित 991 वदन्त्यश्च पुन पुन 10990 वदन्त्येव द्विजातय 31 90% वदाम्यर्थवती गिरम् 109 26° वधमृच्छन्ति वीरध 65 67% वध चाभ्यधिकागणे 23 1420 वध प्राप बनेचरात् 28 151 वध प्राप्तोऽप्यय बली 108 942 वध विष्णु करिष्यति 3152d वधाय तेपा चिक्षेप 108 21 वधाय पृथिवीक्षिताम् 43 661 वधायोपेन्द्र कारणात् 67 30 वधार्थ देवशणा 31 113° बधार्थ सुरशत्रूणा 32 6° वधिष्यति स नोऽसुर 31 49* वधिष्यामि महासुरान् 45 12° वधेनानेन दत्याना 38 67° बधे ह्यस्य महान्दोष 108 930 वधोपाय सुदारुण 46 14 घधोऽस्य प्रविचिन्त्यताम् 31 494 पध्यतामयमद्यैव 10877 वध्यते योऽन्तरप्रेप्सु 65 68° घध्यश्व प्रत्यपद्यत 23990 वध्व श्वधूश्च कर्मसु 11637 वननित्यो वनेयुश्च 237" वनमार्गेपु कुर्वाणी 58 6" धनमालाकृतोरस्को 52 4 58 4 धनमारापरिक्षिप्त 45 41 पनमालापलम्बिना 83 24 बनराजिविनि सत 73 14 बनासमतेन 44 340 मनस्तम्यस्य जझाते 98 11. वनस्पतीना राजान 49° वनस्पतीना सर्वेषा 62 61" वन चैत्ररथ यथा 54 40d वन तत्प्रविवेश ह 16 358 वन ते मम हेदय 23 1520 वन निर्विषयाकार 55 520 वन राजा समाविशत् 9 50° वन वायसनादितम् 65 5" वनाना च जलागमे 54 286 बनाना द्विगुणा रक्ष्मी 59 48° वनानि परिधावत 45 41 वनानि प्रचकाशिरे 54 51 वनानि शिखराणि च 61 481 वनानि स्वानि रक्षन्ति 59 250 वनान्तरगतो राम 83 20° वनान्ता गिरय सर्वे 59 230 वान्ते निषसाद ६ 86 10 वनान्ते युद्धलारस 44 450 वनान्युपवनानि च 93 680 वनाच्या पार्वतीयाभ्या 37 23° वनितेवायतक्षणा 86 460 वने च बारक्रीडा ते 63 6° वने चरति शावलम् 8 314 चने चारयतो गास्तु 45 43° धने चैत्ररथे प्रभु 22 34 वने चैत्ररथे रम्ये 216 बने तामायरोइत 1034 वने प्राणानवासृजत् 10 32*10214 वने यरकृष्णमीदशम् 56 45' वने राजीवलोचनम् 114 81 वने विचरता पुन 96 41' पो विचरतोमासी 59 1. घनेषु च विराजन्ते 59 63* बनेपु तालहस्तानै 63 27. घनेपु रमते मन 59 39 धन स योरी गाव 63 पने सानुचौ च तो 58.' पनेऽसिम्फामरूपिण 5928 यन्यपु पविभूपित 59 13 ययपुपारतमामि 49 यस्यमूरपलागिन 3531 पम्पवररायुभी 58 पम्यायापारयुषाम्या 55. 480 वन्यानि विविधानि च] श्लोकपादसूची [वरण पर्यवस्थित चन्यानि विविधानि च 83 21 वन्याश्रमनिवासिनाम् 35 34 वन्येन रमणीयेन 83 3 वन्येनानेन विधिना 3547° वन्यैवैखानसमं 685 चन्यै क्रीडनकैस्तदा 55 24 वपुर्दीप्तान्तरात्मानम् 35 46* वपुम्यामेकता गती 42 31 वपुषा तहान तदा 182 वपुषा तेज आदत 112 96° वपुषा बोतयस्थित 99 40" वपुपा पद्मनाभस्य 406 पपुपा पर्वतोपम 75 17 वपुपा मम्मयाग्निना 6824 धपुपा समुपस्थित 43 24 वपुषा सूर्यवर्चसम् 46 40 वयु सदर्शयामास 32 200 यपि दैलसघाना 35_15 वर्षि प्रचकाशिरे 81 11 वमन्त पावक घोर 56 11 वमन्त गोणित जम्मु 108 47° घयमद्य महात्मन 92 340 घयमन्ये च माना 59 8, 18 वयमप्यालय स्व स्व 4546% घयमभ्युपपरस्याम 2950 ययमस्स महारमन 113690 घयतोऽन्ते महाबाहु 23 630 वयं कातरता गता 65461 घय च परितोपिता 38 571 घय चापि परानिता 77 50° वय चापि रिरसव 89 20% पय चैयेह सभूता 8420 वय तबानुगा सर्वे 63 घय तीर्णा महाभयात् 63 3 वय तु यतधर्माण 12 150 वय वद्य विनाकृता 1098 वय दीक्षा प्रवेश्याम 59* वयं दुरोप्वनुचिता 77 13° क्य धनचरा गोप 59 20° घय सर्वे परस्परम् 12 40% धप हि देशातिथय 71 28* वयामि साधुवाश्यानि 79 33* पयोभिर्वासशुभता 69 13 वयोरूपगुणोपेता 89. दरकारोऽयमागत 112 11t वरदत्तान्महासुरान् 914 वरदत्तो महासुर 31 12791 16, 194 वरदा कामरूपिणी 47 Bod वरदान च देवेभ्य 85 45° वरदानापिनाकिन 85 251 वरदानेन दर्पितम् 31 63%, 1241 वरदानेन दर्पित 31543 वरदानेन भगवन् 31 49 वरदेन वरो दत्त 31 970 वरप्रदान श्रुत्वैव 31 48 घरमेत घृणोम्यहम् 31 420 वरयामास ता राजा 87 17° वरयामास नृपति 27 100 वरचप हि कौरव्य 23 1550 वरस्त्री ब्रह्मचारिणी 3 38 वर वरभृता वर 38 620 वर वरय भई ते 31 40 वर वृणीष्व बाण व 112 117" वर ह्यवानपत्यता 69 130 वर प्रीतेन भारत 23 30% वराणा वरदो भवान् 38 620 वराभ्या च महीधरम् 70 194 वरासनगत तर 1083 वराहमृगपक्षिणाम् 93 661 वराहक्षगता परे 33 240 वराहपदनास्तथा 3181d वराहश्च किशोरश्च 4+ 730 वराह प्रमुखे तस्थौ 33 16 वराह सहरो रुज 31726 वराहण पुनर्भूत्वा 42 34 वराहोदतनिस्वनै 75 31 वरिष्ठ सर्वधर्माणा 14 10° वरिष्ठो दानयेषु य 44 70° घरिष्टोऽदिशिलायुध 33 203 वरीदासात्मजो विद्वान् 23 148" वरीवाश्चावरीबांध 7 450 वरुणस्य च गांगते 446 वरुणस्य महात्मन 45200 वरणस्याभिनि सृता 113 26* वरण च यम चैव 4368 वरुण पर्यवस्थित 113 11. 221 वरुणः पश्चिमं पक्षम् ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [घरभीवीथयस्त्रया वरुपाः पश्चिमं पक्षम् 34 18°. वरुणः पाशभृन्मध्ये 34 15. वरुण. पीडितो रणे 13 22. वरुण. प्रत्ययुध्यत 13 224. वरणः समधारत 113 20. वरुणादाहृतं पूर्व 92 6. वरुणालयमन्तिकात् 113 124. वरुणेन प्रयुक्तानि 113 15. वरुणेन वरूथिना 36 10. वरुणेनाइमच्युत 45 31. वरुणेनैवमुक्तस्तु 113 44. वरुणेन्दू महारणे 3614. वरुणो लोहितहदे 105 10%. वरुणो वाक्यमब्रवीत् 35 224.113. 28. वरुणो वासयो यमः 31 45. वरेण च्छन्दयामास 3 98. वरेण च्छन्दितो देवै 85 41". घरेण सा तृतीयेन 112 122. घरेण्यः प्रभुरीश्वर 45 14. बरोऽस्तु यदि मन्यसे 112 118', वर्चस्वी येन जायने 3 34. वर्जयित्वा गदाधरम् 36 29". वर्णचोरान्समुस्थितान् 54 22. वर्णरूपाणि बिभ्रन्तः 103 18. वर्णसारूप्यतां याति 64.37. वर्णा गुपुरजसा 41 70 वर्णा धर्मपरास्तथा 41.29% वर्णानां क्रमपारगा 65 161 धर्तते दानवोत्थितम् 40 46. वर्तते पुरुषोत्तम 13 37 धर्तन्ति देवप्रवरा 13 3. पर्तन्तेऽद्यापि नित्यश. 6 15. धर्वन्ते पितर स्वर्गे 11 11 वर्तन्ते समितिजय 113264 घर्तन्ते सांप्रतेऽन्तरे 7 33% वर्तमानमवैक्षत 110 23 पर्वमाने कृते युगे 32 10° पर्तमाने सत्पथे 3644. वर्तमाने जगन्मये 68 11. वर्तमाने मखे येन 31 116 घर्तयन्ति पिसाचाच 6 320. पतयन्त्यमितप्रज्ञा 6 37 पतयाना प्रयेपती 76 1॥ वर्तयामोपभुञानाः 59 8° वर्तयामो महामुने 12 15. वर्तयिष्यन्ति मानवा. 117 32. वर्तसे वं यथाविधि 13 37. वर्तितव्यं सुखार्थिना 118 34. वर्तितव्य सुतेषु वै 8 22. वर्तितेऽर्बुदसनिभे 30 46. वर्धनीया वयं नूनं 83 9". वर्धन्त यवनेषु तम् 85 17. वर्धमान इवाम्भोद 65 21. वर्धमानमिवानलम् 65 1. वर्धमान नभस्तले 38 37'. वर्धमानान्महीपतिः 22 35. वर्धमानावुभाषेतौ 49 9. वर्धमानां दुरासदाम 53 1. वर्धमानेषु शनुपु 65 5. वर्धमानो ममानर्थ. 65 20°. वर्धयन्ति दिवौकस 45 3r. वर्धयन्ति हृषीरेश 40 38. वर्धयन्ती महात्मन. 89 40". वर्धयन्परिवर्तते 3048. वर्धयस्व मझायाहो 45 33. वर्धयात्मानमात्मना 35 30'. वर्धयिष्यन्ति नित्यदा 12 36. वर्धाम प्रसवैस्तथा 62 39*. वर्धितानृतसचयम् 43 60. वर्मशस्त्रायुधध्वजम् 85 66 घर्परेनुनतोऽभवत् 23 6. वर्षरेतोस्तु दायादः 23 10. वतीवामृतं देये 53 33 वर्षप्राणाय दुर्धरम् 1 . वर्षगाननेकरा 44 घर्षमाप्तमहारया 54 11. वर्षमाणमिवानुवम् 92 6. वर्षसहया. सहस्रशः 42 26. पर्ष वासपरोपजम् 65 30 पप्पटादीय मे 14 12 वधिं च पाजो निरयं 62 16. पर्शसु पाता पहरा 110 26. पण च मयेन '. परेशासामे तदा 23 पलभाभिमूषितम् 723. पलभीपपनपी 72.."

बलयोऽनंतरगाभा ] लोकपादसूची [वमुदेवश्च सरक्ष्य चलयोऽनतरगामा 67 24° वल्लरान्यजिनानि च 117 33* वलपमान यथा सिंह 753 बलामाने तु गोविन्दे 756° वादारमानमात्मना 60220 ववन्दे त तदाच्युत 92 61 ववन्दे स महीपतिम् 10 52 ववन्दे तानृपान्मर्वान 39 180 वद देता शचीपति 92 550 ववन्दे वसुदेवस्य 76 420 वन्दे वृष्णिनृपतिम् 95 90 ववन्दे सह रामेण 95 10° ववर्ष त्रिदिवेश्वर 48 160 ववर्ष रनमामृतम् 67 25 ववर्ष शरजालानि 108 61 ववर्ष हरिवाइन 24 60 वर्ष पुष्पवर्षे च 62 61 वयुर्वाता नगद्धिता 62 63% वपुर्वाता सुदारुणा 106464 वधाते महारमानी 9644 वधाते महासुरौ 42 16 धवृधाते सुख च ती 502 वधुश्च ययासुखम् 10 59 वधुतस्य बाइव 3740% वधेऽन्त पुर शिशु 25 12 85 15' ववृध स पुनरौकान् 38 36° यवृध सुमहाकाय 58 24° वध सान्तकोऽनर 35524 वपुर्मदबोधना 73 16 ववृपुस्त बसाइका 61 126 बदौ म मयवोधन 73 14 यदी मेघरवोद्धत 100 1 वशगस्ने वरानन 56 330 वागारिविनिग्रहे 35 70° वशी भवति पञ्चानाम् 23 165° यश तिष्ठति शोभना 99 47 वशे तिष्ठत्यसशयम् 29 वादकाराश्रयो पुन 110 26 दसते परमप्रीता 65670 घसत्यात्मेच्या हरि 4800 वसन्ति दिवि देवता 109 - वसति सरिताशये 106 24 पसव प्रच्युता स्वर्गात् 43 430 घसवोऽथाश्चिावपि 113 58 घसयो नामभि श्रुता 3 320 वसवो मरतस्तथा 7 32% घसयो यत्र गङ्गाया 43 47" वसवोऽष्टी समाख्याता 3 31° वससीह यहच्छया 63 gb यसातिप्रमुखाश्चान्ये 9 41" वसाना मेचक क्षौम 47 41" वसाना विविधा कुथा 92 111 यसाना हसरक्षणाम् 55 36* वसानो रक्मभूषण 44 8° घसामेदोशिभिवृतम् 49 190 वसिष्ठपुत्रा सप्तासन् 7 15° वसिष्ठवचनाचासीत् 9 19° वसिष्ठवचनात्प्रभु 9 43 वसिष्ठवचनाद्राजन् 10 450 वसिष्ठरत्यय सान्दृष्ट्वा 10 40° वसिष्ठस्य च कौशिक 1020' वसिष्ठस्य प्रजापते 1351 वसिष्ठस्य महात्मन 10 136 वसिष्ठ च महातेजा 129° वसिष्ठ शरण गरवा 10 390 वसिष्ठ कारणेन हि 10 6d वसिष्ठ कृतवास्तदा 109 वसिष्ठ पर्यरक्षत 104 वसिष्ठऽभ्यधिक मन्यु 105" वसिष्ठे मनसाकरोत् 108 वसिष्ठोऽप्यस्य चुयुधे 10 154 वसिष्ठो भगवानृपि 9 934 वसुदेव इति ख्यात 45 34° वसुदेव कुलस्यास्य 65 690 वसुदेवकुले धीमान् 30 3 वसुदेवकुले प्रभु 113 720 वसुदेवकुरेऽभवत् 31 11 वसुदेवगृहे प्रभु 45 490 वसुदेवगृहे स्पृहा 71 36 वसुदेवपुर सरा 28 . वमुदवपुरोगमा 84 16 वसुदेवविगईणात् 66 23 वसुदव वृथामते 65736 वसुदव वृधावृद्ध 65706 वमुदेवश दुर्वृच 76 21. वसुदेवश्च सरक्ष्य 47 5 223 वसुदेवसहायवान् ] चिकित्सितपावात्मकस्य हरिवंशस्य [पास्य कृष्ण स्वतेजसा वसुदेवसहायवान् 66 38 वसुदेवसुखावहा 49 30% वसुदेवो जरा त्यक्त्वा 76 12° वसुदेवसुतस्तत 96 340 वसुदेवोऽभवन्नित्य 805 वसुदेवो वसूपम 65 97 वसुदेवसुतावुभौ 54 157 58 1165' वसुधामनुनादयन् 88 25* 79 250,3981 53 वसुधामिदमब्रवीत् 5 530 वसुदेवसुतेन वै 63 14 वसुधा वसुधेश्वर 31 99 वसुदेवसुतो बली 63 60 वसुधेय दिव गता 81 120 वसुदेवसुतौ तौ तु 71220 वसुधेय मुने धन्या 100 414 वसुदेवसुती नीची 730 वसु यत्रिपु लोकेषु 92 15 वसुदेवसुना हृष्टौ 74 21° वसुधराया माह्यार्थम् 44 17" वसुदेवस्तथैवाय 65 62° वसु नामान्तरिक्षगम् 13 26' घसुदेवस्तु सगृह्य 48 18* वसूनामय पावकम् 4 3 वसुदेवस्य तु सुतान् 24 34. वसूनामष्टमस्य तु 3390 वसुदेवस्य दुर्णय 65 80% वसूनामष्टमे भागे 44 3° वसुदेवस्य धीमत 4977 45 360 वसूना वा किमधे च 6380 वसुदेवस्य भवन 79 380 वसोरेव तदा वशे 87 19% वसुदेवस्य भार्यासु 25 6" दसोश्चदिपतेस्तदा 22 13 वसुदेवस्य रोहिणीम् 48 bf वसोस्तु बसर स्मृता 3rd वसुदेवस्य वीर्यवान् 48 220 वस्तव्य निर्विशङ्कया 8 10 वसुदेव व देवाभ 65 80 बखाणि विविधानि च । वसुदेव च पुत्रार्थे 66 160 वबैराभरणोंग 94 230 वसुदेव इतव्रतम् 66 33 वस्त्रैरुद्रथितोटित 53 160 वसुदेव पुरस्कृत्य 94 14° वहन्ती सुरपूजितौ 588 वसुदेव प्रति प्रभो 65 46 वहन्सकर्षणम्तदा 1106 वसुदेव महाबलम् 69 180 वढेरिव शिखा दीक्षा 87 340 वसुदेव सबान्धवम् 96 50% वह्वेगोंभानुरात्मज 23 1234 वसुदेव कृतार्था 2 48 2 ववैवस्वतस्य च 1300 वसुदेव पिता तव 63 वशमतिछामतुलं 113790 घसुदेव प्रतापवान् 24 2896 28 वैशमय महात्मन 23 24 घसुदेव पबान्धव 73 5* शमस्थ महाराज 2047" वसुदेवामन पुण्या 83 57* पशमापूरयिष्यन्ति 68 29° यसुदेवाच देवक्या 25 4. यशमुत्तमररूपम् 23 187 वसुदेवाजनार्दन 91 1 वशस्यास्प महज 107 26 वसुदेवारमज विभो 85 58 धश पवारमनो महद 4518 घसुदेवान्महापर 98 23 घश राजर्षिसरहतम् 22 ॥ वसुदेयाय ता ददौ 27 261 का कारसम्र्येन वे प्रोम 1565 पसुदेये स्वया क्षिप्ले 66 22 यापूर हिमयामाम 229 घसुदेचेन सा खियः 94 26' वाश्यममिशिवोपमम् 15 41 वाश्यमायण पास्यति 733 यसुदेवेत ते रात्री 65 48 वसुदेवेन धीमता 66 37 वाश्यमेतत्वाप 11299 वसुदेयेन पुत्रजम् 66 10" पाश्यस्यास्य पात्तरम् 100 82' पसुदपेन संधाय 65 500 वारपायास्य विनिर्णयम् 1008 पापर्य कृष्ण स्वतंश्मा 701 घसुदयेन सुमत 6596 234 वाक्य चेदमुवाच ह] लोकपादसूची [यारणाना च राजानम् धाक्य चेदमुवाच ह 356475161 वाक्य दामोदरोऽप्रवीत् 59 100 वाक्य पङ्कजनन्मन 3163 वाश्य मा प्रतियाधते 10040 वाक्य लोकपितामह 43 11 वाक्य सज्ञासमीरितम् 56 29 वाश्ये चिन्ताविरेक्षणा 107 13 वाक्शल्यस्ताड्यमानस्तु 65 980 वागुवाचाशरीरिणी 89 40 बाग्दुष्ट क्रोधनो हिंस्र 164. बाबुद्धिनियतास्तथा 11361 वाग्मिरप्रतिरूपाभि 38 32° वाग्मिभीष्मकसूनुना 89 330 वाग्मिर्मनपरायणा 62 62 वाग्भि समभितर्जयत् 48 23° वयन कर्मजानि वै 12 26° पाधारण तु फेवरम् 46 31 वाच स्क्षामभिकुन्द्ध 108 78° वाच धोनमुखावहा 73 120 वाच स परसास्तीवा 102 120 वाचा दुमोपि मर्मनया 66 14° वाचा मधुरया तदा 11 20% वाचो मुञ्चन्ति सुस्वरा 61 36 वाचोऽश्रूयन्त सर्वश 108 380 वाच्यश्च नन्दगोपो 2 65 84" वाच्याच यदव कृता 65 811 वाजिभिर्मेघसकारी 81 17° पाजिभिवारणश्चापि 87 43° वाजिमेध परतप 15 360 वारिमेधाप दीक्षित 10 46° याजिमेधन चेष्टवान् 31 1050 वाजिमेधे महामखे 13 56* वाजिमेधे महायशा 31 107' वाजिसारसबहिणे 13 51 वाजी सुमतिरेव च 1 450 वातयुनराइक 59 14 वातस्क धापविद्धषु 36 37° घातस्य प्रतिषेधयन् 110 90 धाता इव वाहकान् 81 46* पाठापिनमुचिश्चय 377 पाता मदनदीपना 54 330 चातोद्धता इयोर्मय 112 br वातोनरिव धनै 110 45 हरि पादसूची-29 यादयन्ती वराननौ 52 30 पादयान पचिद्वने 55 111 चादयामास वीर्यवान् 55 26 यादशीरपरायणा 17 वाद्यमाने स शुश्राव 107 4° वानरेन्द्रो महानल 31 131 वानरी च महाया 105 20° वापीषु च सरित्सु च 62 52 वाप्यश्च विकचोपला 59 40.94 1 चामनेन तु रूपेण 65 360 वायव्यमथ सावित्र 112 25° वायव्यानयपाय 112 35° वायसाना सहस्राणि 24 311 वायुजुष्टेन वै पथा 92 66". वायुना तुल्यवृत्तिनाम् 62 31 वायुनिघोपकारिणा 71 45 वायुप्राणो हुताशन 30 38 वायुप्राणी तु तो गृह्य 42 17" वायुप्रोक्ता महाराज 7 210 वायुप्रोक्ता महाव्रता 7 11' वायुभक्षो महातपा 18 90 वायुरन्तरधीयत 86 720 वायुरात्मोपमगति 86700 वायुगविष्ठो नमुचि 31 74° वायुराकायुरघास 58 38° वायुर्वायुविभावन 30 31 वायुवेगपती सौम्या 37 17. वायुवेगेन त दध्मी 110 34 वायुचरतु मार्गस्थ 38724 वायु च तरसा जिया 37 640 वायु प्रधावितस्तत्र 36 350 वायु प्रवेशन चके 30 460 वायु प्राणाश्च प्राणिषु 38740 वायोस्तस्य च गर्जत 61 344 वायो कृत्वा सम जयम् 38 48* वायो सतानमा तनुम् 62 920 वारयनितोयाग्बुदशैरकल्पम् 33 320 वाब तरात्मा मद्रास्फिा 31 256 वायम्बुभक्षा सतत 1810 वारवीरित बलोद्गार 34 136 वावीरित तु मेधपु 59 13. वारण शत्रुवारणम् 23 394 वारणाना च राजानम् 48" 2.25 वारणान्या यथा बने] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवशस्य [ वासुदेवो भविष्यति वारणाभ्या यथा वने 75 294 चारणे घातन तथा 112 40% धारणेन्द्रगत शक्र 91 41* वारणारिदोषमै 81 16 वारमुख्याश्च ता सर्वा 76 130 धारयन्वाश्यमयीत् 1126 वारयामास वै विभु 61 600 चारयित्वा च केशव 112 26' वाराह एप कथित 31 31 बारम्हस्तु श्रुतिसुख 31 21 वाराह रूपमास्थाय 65 40% वाराह रूपमास्थित 3114 वाराह वपुरास्थित 30 11* वारिणा मेघमुफेन 61_n वारिदुर्गी जनादन 85 % वारिराजपरिक्षिप्त 34 48° वारि सुनाव वेगेन 971 वारिस्पर्शसुखानिलाम् 55 28 वारुणाना सइयश 113 14* वारणास्त्रेण सयोज्य 113 250 वारुणास्तुरगाशुभ्रान् 31 1074 बारुणी दिशमास्थिता 11370 वारुणे वितते ऋतौ 3 950 बार्जिनोवतमिच्छन्ति 2011 वार्षिणानकम्पिता 59 34* चाली विनिहत सरये 31 121 वालुका तर्हितस्तदा 9700 वालुकान्नहितो महान 9 536 चालुकार्णवमव्ययम् 9 680 वाशन्तीपु शिवायु च 68 3 वासवस्वा न मृष्यति 118240 पासवस्योरसव भट्वा 65 30° वासव चरणे जित्वा 105 10% वासर्व मरुतो यथा 87 6t" वासव मोहन तथा 1225 पासव प्रत्पश्यत 91281 वासव सावतान्सर्वान् 1964 वासरावरजो विष्णु 921" वासयो धयिष्यनि 15 984 पासपोपमविश्म 921' पासयो पसुधाधिप 91 43" पासवो यासरानुनम् 91 32 यासको पामुदयश्च 92 530 वास चास्य प्रदास्यामि 35 54° वास त मित्रविन्दाया 93 480 वास सुपरमार्चितम् 93 450 वासाय वसुदीपम 68 153 घासायोपगतास्तदा 102 1* वासासि विरजानि 4 717 वासितेय वनस्थली 57 11 वासिष्ठा इनि विश्रुता 7 16* वासुकिमगुख प्रभुम् 70 2200 वासुकि पनरोश्वर 7024 वासुदेवगतिश्चैव 113 74° वासुदेवगृह देवा 113 55 दासुदेवरवमागत 304 वासुदेवदिक्षया 9674 वासुदेवनिवेशनम् 94 140 वासुदेवपुरोगमा 84 200 वासुदवपुरोगमै 9261 घासुदेवमयारक्ष्य 85 53° वासुदेवस्तु स दृष्ट्वा 85 35 घासुदेवस्तु निर्जित्य 28 28 वासुदेवस्य ती सुतौ 0821 वासुदेवस्य धीमत 52 29° 106 11 वासुदेवस्य माहात्म्य 31 120 वासुदवस्य य क्रोध 10980 वासुदेवस्य सश्रयात् 113 63' वासुदव ततोऽभ्ययु 88 18 धामुदेव सुत माया 85 490 वासुदव विज्ञानीहि 85 58 वासुदव प्रवाश्यान 10976,8112 , 18' यासुदेव समानाय्य 85280 पामुदवाया तदा 96 131 यासुदवा नाग्यो य 801 यासुदवे पहापित 662 यामुदति विधुत ॥1 यामुदपेन धीमता 87 2112 0gm घामुदयेन यमासी 106 5. घामुदधेन स कथं 1065 यामुवेदपर्नयै 3315 पामुददा ज्यादा 1106' वामुदपोऽनुमार 0951 धामुदपाऽरि धर्मामा 85 63. यामुदोशीद्वाप 100 6 13 23" पामुदरा भविम्मति - 226- वासुदेवो महावाहु ] श्लोकपादसूची [विजहार प्रहृष्टारमा वासुदेवो महाशाहु 24 160 वासुदेवो महायशा 85 36 वासुदेवो मुमोच ( 112 250 पासो याचितुमर्हथ 71 11 वास्तुदैवतकर्माणि 86 130 वास्तत्नि च गदाग्रज 8433 वाइनाना हितं चैव 84350 वाइनानि च न सन्ति 84 4* वाहनैश्च प्रचोदितै 35 40 वाहन मघश सर्वे 110 45 विकटु च महाबलम् 65 विकटु मनिपुगरम् 8676 विकपाल विधेश 58 523 विकर्णम्नस्य चात्मज 23 40% विकर्मस्था द्विजातय 16 32° विकर्षनरथयूथानि 81 68 विकासनगाणसक्षयम् 1104 विकारायतनेऽनध 113 38 विकाराऽसि रिकाराणा 113 38° विकीर्य पुण्डरीकाक्ष 977° विकुक्षित्वादयोधताम् 9 39 विकुण्डलाभ्या र्णाभ्या 76 33° विकृत सोमशोणित 31 254 विस्तौ पापदर्शिनी 76 19 विष्य च गतायुपम् 76 37 विकृष्य च महाबल 112 80° विकोशैश्वासिभितीक्ष्णै 37 13° विफमा धर्मनिश्चया 133 विक्रमेण श्रुतेन वा 23 149 विक्रमस्तिभिरक्षोभ्या 31 69° विक्रान्त वपुषो दीप्ता 47 129 विक्रान्त समरेऽव्यय 99 ° विक्रान्ताश्च सहस्रश 86 68 विक्राता पष्टिसाहस्रा 1054 वित्रान्तै वि दुफरै 60 विक्रीन्यास्पोटयवाहू 56 200 विक्रीयत नृात्मज 9 98 विझीयमाणै कांठश्च 52 15* विक्रेतारो विनातय 115 32116 14' विक्षोभणश्च पेतुश्च 3 67 विशोग्य शरदृष्टिमि 77 28 विशोग्य सागर सर्व 105 14 विण्यातस्त्रिषु लोकेषु 83 8 विख्याता कुन्दन 25 5 विख्याता त्रिषु लोकेपु 981 विरयाता हृदया नाम 29 15 विरयातो माथुरे वरपे 31 1436 विरयाती पुरुपर्पभी 43 500 विगईमाणमात्मान 78 3° विगाइति महाबर 93 64 विग्रहस्य करिमूल 43 63 विग्रहाणा ग्रहोपम 44 10" विग्रहे जनमेजय 105 17 विग्रहो विग्रहाणा 30 37° विष्टे तस्य ते पार्श्वे 114 120 वितमिन्द्रेण ते कृतम् 118 26* वित चके सुदुर्मति 9 89 विन्न तत्राफरोत्तस्य 91 56 विना हि वहनो लोके 497 विचको दानरो हत 1058 पिचरसभ्यदृश्यत 108 431 विचरिष्यन्ति न सदा 56 440 विचरिष्यन्ति रूपिण 86331 विचरिष्याम्यह सुखी 73 70 विचित्रपत्रवसन 34 4200 विचित्रमणिसोपान 93 40% विचित्रवीर्य धर्मज्ञ 13 370 विचित्रवीर्य बार च 15 45" विचित्रवीयों द्युतिमान् 43 49° विचित्रशिसरद्रुमम् 92 400 विचित्र चरित घोपे 63220 विचितामा प्रजापते 1 131 विचित्राश्च कथा दिव्या 104 20 विचिताश्च कथायोगा 13 विचित्राश्चराचर 7486 विचिौरिव पर्वते 93 320 विचेतास्त्वभवत्प्राज्ञ 106 511 विचेरुयुधि ते पृथक् 87 750 विजघान महागल 108 40d विजयति वसुधा च क्षपत्ति 18 48* विजयश्व पराक्रमे 109 90% विजयस्यानो भोक्ता 62 870 विजयाधिष्ठिना तत 112981 विजयायाभिषिच्यस्व 78 37 विरहार च कानिचित् 92 456 विजदार प्रहृष्टारमा 1930 -227 - विज़हार महाकीर्तिः] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [विद्वान्पुत्र. पुरूरवा. विजहार महाकीर्ति. 96 21. विजिगीपुः पुरंदरः 118 31. विजित्य च यम सख्ये 97 124. विजित्य वसुधामिमाम् 22. 3. विजित्येमा वसुधराम् 10 463. विजेता को भविष्यति 21 14. विजेता पुनराहवे 106 16. विजेष्यसि रणे शg 109 90°. विज्ञातो वाणरक्षिभि. 108. 121. विज्ञातो वासुदेवेन 112 30°. विज्ञातोऽसि मया चिह्न. 99 38. विज्ञाप्य क्रियतामिदम् 78 30% विज्ञाय च वधं वास्य 108 92. विज्ञाय तमभिप्रायम् 107. 11". विज्ञाय पुरुषोत्तम. 11.5. विज्ञाय मतमच्युत 15 43 विज्ञायान्नहित वाणं 108 81". विशायैवविध हि माम् 109 49*. विशेया भुवि देहिनाम् 46 27. विशेयो यस्य पुनस्तु 107 56°. विडम्बयन्त. क्रीडन्ति 67.60°. विवतेऽभिससार इ2376. विवत्यायहने कृते 59 29. वितोयौ जरदाविव 51. 30% विवासन, सुकृतिनां 91 20° विद्यास्य द्विपत सर्वान् 89 46'. विदधाति पिवामद 45 13 विदधे चैकपाटला 13 17 विदन्तो दन्तिनां चर. 74 38° विदर्भान्यो न्यवेशयत् 87 1 विदर्भान्सयो ययौ 89 131 विदर्भपुच वासायं 88 320 विदर्भो नाम सुत 87 8'. विदित तश्च कृष्णस्य 991 विदित पनवैकस्य 58 41 विदिवारमा च भार्गव 11 40% विदिता देहिनो जाता 45 3. विदिता युद्धकाविण 62 95' विदितो मे सरचय 45 6° विदितो मे जरामध 458" विश्तिो मेऽसि नारदात् 8559. विदित युधि दुर्धषों 105 20° विदिश्वा तावतश्च तत् 118 11'. विदुरं चाप्यजीजनत् 23 120*. विदूरथसुतोऽभवत् 28 11. विदूरथस्य दायाद. 23 112". विदूरथोऽपि तं पनि 87.63. विदूरस्थौ प्रकाशेने 91 416. विदेहाधिपतिस्तथा 80 13. विदेहेभ्य. पिता ददौ 26. 12. विद्धि तान्नकल्मपान 5 19. विद्धि तामेकपाटराम् 1333, विद्धि मां ब्रह्मण. पुत्रं 12 11". विद्यस्त्वा कृष्णमध्ययम् 63. 4. विद्यते सापकारणम् 43 I'. विद्यया यो यया युक्त' 59 21. विद्यया वा नराधिप 19. 81. विद्यया शुभलोचना 108.. विद्यादन्तगते युगे 116 164. विद्याधरगण सह 34 31. विद्याम त्या कथं प्रभो 12 8. विद्यावन्तश्च ये जनाः 2 53% विद्याश्च वेदितव्यं च 104.21%, विद्या प्रादाच केवरा. 79.4. विद्युतोऽशनिमेघांश्च I. 34. विद्युत्कवचनिर्मलम् 54 35 विधुरकुटिरगामिनी 71.24. विधुरप्रपतन विना 51.29. विद्युस्सावाससम् 384. विधुरतपातघपल: 99. 11. चिधुरसपाराजनना. 610. विद्युदिन्द्रायुधार्पितः 34 6. विद्युथितमेधाभ. 92,226. वियुद्धनिरियाम्मुद 108 36'. विधुद्वियोतकारिणा 62 10'. विशुद्रिस्पष्टवर्णाभा 4831 विद्रायगमहाशिरी 369 विद्रुतं स्वपलं रष्टा 88 16. विद्वाजीमूत उच्यते 2022'. विद्वानम्बरपाईिप 281. विदाकारानली नृप. 23 16. विद्वानगन्धर्ष वेदवित् 41 10, विद्वायलिनुहोऽभयर 10 73. विद्वान्याम्पर मुन 23 56 निद्वाराधनायो नाम 23 30. विद्वापुत्र प्रसपा 211 --008- विद्वानराजा यवीनर ] श्लोकपादसूची [विपृथुक्यमनवीन विद्वानराजा ययीनर 1531 विद्वास सुमहायला 3 64 विद्वातन्त्र न मुह्यति 2 64 विद्वानय्यारण प्रभु 988% विद्विपन्ति ममोत्सवम् 6134 विद्विपन्तो जनार्दनम् 80 16 विधरस्वैया महद्भयम् 110 410 विधमन्त सुतास्तदा 116 20% विधवा शून्यनगरा 42 44 विधाता यत्र नीयते 48 48d विधानमेव कृत्वा स 86 79° विधानं यदुनन्दन 109 60 विधाय विधिना विधिम् 97 36° विधास्यति भवानस्य 35 57° विधास्यामि न सशय 670 विधिदष्टन कर्मणा 13 84 467 118 120 विधिना कारयन्ति च 86 13° विधिना क्न वा द्विज 10 544 विधिना घन सशय 3 100 विधिना पूर्यदृष्टन 48 50° विधिपदमकोविदै 5 28 विधिरभूरिदक्षिण 118 11 विधिपभूरिदक्षिणे 97 4 विधिवम्मधुसूदन 97 43% 103 16" विधिविहितमशक्यमन्यथा हि कर्तुं 118 42" विधुन्द पर्यता बहून् 1100 विधूमोऽग्निरिव ज्वरन् 13 481 विरत सुमहत्तदा 61 45 विश्तेश्चात शृहै 61 32° विनतायास्तु पुत्री द्वौ 3 84° विनताश्वस्य पधिमा 9 100 विनताश्वस्य भारत 9 15 विनयादनयादता 2028 विनयादयनि गत 86 87 विरायो नयवृत्ताना 30 36° विनशियात दिलाशा 73 6° विना कृष्ण न यास्याम 5625* विना कृष्णेन को ब्रज 56 250 रिना एक जनार्दन 99 380 विना घणका निशा 5625 पुद स गोष 64 विना वात चिना वर्षे 51 390 विना वृषेण का गाव 56 250 विनाशशसी कसस्य 461° विनाशे प्रत्युपस्थिते 56 विना सकर्षण गुरुम् 55 10 विना इस्तिकृत दोप 51 29° विनिगृहसि रोपित 62 16 विनिन्दमानौ सयत्ती 112 64° विनिपत्य हदे घोरे 55 57° विनिर्जित्य स्यमन्तकम् 28 310 विनिर्मुच्य कलेवरम् 85 64 विनिवर्तिप्यते लोके 115 43° विनिवृत्त स्वरशकृत् 66 51 विनिश्चयो हि प्रागेव 45 16 विनिष्पेतुर्यलाहका 37 380 विनिप्पेतुर्भयकरा 52 30° विनेय कालदर्शिभि 75 11' विनगुर्दानवास्तत्र 91 48° विनेशुश्च बलाहका 32 34 विन्दानुविन्दावावन्त्यौ 81 410 विध्यस्य दक्षिणे पार्श्वे 87 9° विन्ध्य गिरिमिवाचरम् 82 180 विध्य च गिरिमुत्तमम् 28 194 विन्ध्ये पर्वतसत्तम 65 51 विन्यस्यन्तामदूरत 81 350 विपक्ष पक्ष एवं च4353 विपणन्त परस्परम् 117 35d विपन्नस्यौर्वदेदिकम् 78 26' विपत्र स्वयि मानद 77 17* विपरीतप्रभाणि ६ 36 20% विपरीतमिद रूपं 83 420 विपरीतस्य कर्मण 78 14 विपरीता दिशस्तथा 116 36' विपरीता युगक्षये 116 14 विपरीतेन वर्मणा 38 11 विपरीतेन भास्वती 48 320 विपयश यथाम्बुजम् 76 394 विपाटिताम्यामोठास्यां 67 35. विपाशो वरुणो मृधै 37 486 विपुलमपि धन एभेच वैश्य 18 48* विपुल च पृत शैल 69 19 विपुर मेरुपर्वतम् 46 8 विपुराङ्गलिपर्वणा 36 1 विपुरेनास्ति कारेन 42 47 विधुर्वाक्यमप्रवीत् 109 10 पिना -229 - विपृथुस्तु महाबलः] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [विमोक्ष्यन्ति दितेः सुता विपृथुस्तु महाबल. 87 5. विपृथु च पृथुश्रियम् 650. विपृथं च महाबलम् 113 64 विपृथु, शिशुपालं तु 87. b4". विपृथो चिन्तयाविष्टः 109. 25° विपृथो सारथिश्चापि 87 19. विप्रकोणरिवाचले. 110 45. विप्रकुर्धन्कुमारकान् 96 34. विप्रचित्तिप्रधानास्ते 3 70°. विप्रचित्तिश्च वीर्यवान् 3 64. विचित्तिसुत श्वेत. 33 19. 37.6. विप्रचित्ति शिविः शङ्ख 31 70*. विप्रचित्तः परिग्रहः 368'. विप्रचित्ते सुतास्तथा 3 75. विप्रमुक्तभयं शुभ्र 57 24. विप्रयोगेन नाथस्य 1098. विप्ररूपाणि रक्षांसि 117 15. विप्रशापाग्मितेजसा 115 36° वित्र माह बृहस्पतिः 20 376 विप्राणाम्मृपिकल्पानां 104 1. विप्राणां शाश्वती वृत्ति 117 12%. विप्रा मखमुखे स्थिता 34 74. विप्रार्थमेप्यते कृष्ण 104 8° विप्राः शूदोपजीविनः 1166. विप्रा. सह महर्षिभि 1187* विप्रियं यदुपुंगये 10923 विप्लुनेपु लुतेपु च 62 49 विफले शशासने 653 विवभाज पुरा यश्च 30 35. विवभावुरसा राम. 8324 विसभी पुण्डरीकाक्ष 110 4° विवभ्राम मतिस्तात 2028° विबराका विषिद्युत 59 336 विवाणग्येन धनुषा 54 300 वियाणं याहुशालिना 71 52" विधागासनिरता 106 280 विभाचत्वरपथ 86140 विभत करेनेव 157* विभत्ता ब्रह्मणा स्यम् 40 14. विभज्यतामयं देश 61 53* विभारसोस्तुल्यगुणान् 43 44 विभिसशनो भनास्थः 64 21 विमुर्नाम प्रजेश्वरः 23 10 विभुनारायणो हरिः 93. विभूतिविस्तरकथं 125 127 विभूषयति येणुमान 93 16. विभोर्भरतसत्तम 24 विभ्राजमानो वपुपा 16 350 विनामस्तस्य चारमज. 15 220 विभाजस्वणुई राज्ये 18 8*. विभ्राजस्य तु पुत्रोऽभूत् 15 23. विभ्राज पुनराजात 15 25%. विनाज पौरवान्वय 16 34. विमदा इव कुञ्जरा. 59 330 विमना समपद्यत 82 22. विमर्शशीरा वेचितु 17.6 विमलादित्यवर्णाभि 93 40. विमलाकॅन्दुसका 92 38. विमरा विजला योग्नि 59 33*. विमराहय 81.5. विमानगहनो महान् 62 26. विमानप्रतिमोजसा 749. विमानयोधी धनद 3417" विमानस्थैरलंकृता. 23 147. विमानं महदायान्तम् 123. विमानं सुकृती यथा 96 67 विमानाकुलमारिनीम् 42 8. विमानानि विचित्राणि 36207 विमानानि सहसश 113576. विमानारोहिणोधगा 67.62'. विमानेनाणेन 3135. विमाने पुपके स्थित: 3417'. विमानेषु समात. 30364 विमानेधापनेषु च 42 11 विमानश्च हिरण्मयै 93381 विमानवामुगामिभि 37.29 विमान पामरूपिभि 7538* विमायान्विमदाय 30 120 विमिधे सर्वतो मानि 8128. विमुखा प्रान्तमय 61 23. विगुन पादमप्याच 74 23 निमुमति नभोगतम् 53 विगूगायामरिक्षत . विमृगानापिमा 5130 विमगन्ति मानदेयं 40 180 रिमोदनित हित मुग 100 23. - 230 विवेष्टमाना रुदतीं] विकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [विपपेष्वेव सजताम् विवेष्टमाना रुदती 107 20° विव्याध दशभि शरै 88 11' विव्याध नवमि शर 81 83 87 53 विव्याध निशितैस्तीक्ष्ण 108 64° विग्याप युधि मार्ग, 87 61 विव्याधाजी शितं शरै 87 634 विव्याधान्तकतुल्येन 110 31° विव्याधोरसि शिवम् 88 18d विशन्त मथुरां रम्या 79 3r" विशन्ति सहिता सर्वा' 13 11 विशसद्धि कुठारैश्च 53 290 विशस्यन्ता च पशव 60 130 विश क्षत्रमनुव्रता 31 1326 विशाख इव पादप 38 47d विशाख खात्परिभ्रमन् 38 49° विशाखेन गुहेन या 43 6" विशालमाकाशतल 108 50° विशालमूलावतत 55 200 विशिरस्का इवाय 36 184 विशिष्ट शनुसूदन 107 53" विशुद्ध स्वेन कर्मणा 19 264 विशृङ्गश्च कृतो व्रजे 65 31 विशेषेण तु बाम्धये 65764 विशेपेण महीपते 44 30% विशेषो नास्ति में प्रभो 86 24 विशोका समपद्यन्त 94 10° विशोध्यात्मानमव्युत 28 30% विश्रान्तबाहमा सर्वे 102 1° विश्रुत सर्वकर्मण 10711 विश्रुता साम्बमहिपी 28 41 विश्रुता कौशिका राजन् 23 90° विश्रुती गुणसपदा 28 350 विश्वकर्मकृत शैल 946 विश्वकर्मकृतदिग्य 938 विश्वकर्मकृतो दिव्य 99 490 विश्वकर्माचता कृरवा 86 83° विश्वकर्माणमाहूय 9320 विश्वकर्मा तत कृष्णम् 88 40% विश्वकर्मा तत प्रीत 86390 विश्वकर्मा पुरी तत 937 विश्वकर्मा मतीवर 86311 विश्वकर्मा महाभाग 3390 विश्वकर्मा सुरश्रेष्ठ 86230 विश्वकर्मा स्वमत्या वै 86 20% विश्वजित्तस्य धात्मज 15 16° विश्वजिदिश्वचैव 23 85° विश्वरवं शृणु मे विष्णो 32 1" विश्वरूपात विद्यते 97 380 विश्वरूपो मदायशा 3434 विश्वस्य जगत प्रभु 34344 विश्व जगदिद महत् 39 4 विश्वाच्या सहितो रेमे 22 34° विश्वामित्रकलन तत् 101 विश्वामित्रपुर सर 32 110 विश्वामित्रस्तथैव च 7 300 विश्वामित्रस्तु गाधेय 23 84° विधामिनस्तु दाराणाम् 10 190 विश्वामित्रस्य चारमजान 10 15 विश्वामित्रस्य तुष्टयर्थम् 9 99° विश्वामित्रस्य तु सुता 23 86° विश्वामित्रस्य वै सुता 23 93" विश्वामिनारमजाना तु 23929 विश्वामिग्रादयाष्टक 23930 विश्वामित्राश्रमाभ्याशे 102 विश्वामित्रण धीमता 31113 विश्वामित्रो मदाता 996 विश्वावसुरिद पच 118 234 विश्वेऽथ वप्लवस्तथा 3168' विश्वदेवास्तु विश्वाया 3 27" विश्वया व दिवौकसाम 44 विश्वषा मरता चैव 92 48" विषता कुमुदाक्षस्य 81 64 विषण्णमनसो देवा 35 80 विपदिग्ध स्तन क्षुदा 96 31* विषपीत इव स्परन् 78 1 विपमे पृथियीतले 6 10 विपमेश्व समीभूत 1 . विपमोचयसन्टा 81 80 विषपमनुराशाम धर्मबुद्धि 118 40 विषय समतिकम्प 0246. विषय सिन्धुराउस 8420 विषपाते पुरी रम्यां 23 50 विषयासनभूतोऽस्मि 44 . विपये मेमपना 18 19 विषयेषु मुसुप्रिया 2 विषपेयेर साम् 11305 232 लोकपादसूची वोहनिः पर्वतेस्तया] [ वृपपोतावियोदवी युवा 108 964 वीरुद्भिः पर्वतेस्तथा 2.26. वीरेणामित्रघातिना 108 14. वीरो भीमरथः स्मृतः 23 57. चीरो राजा पुरंजयः 23 11. वीरो राजा प्रतर्दनः 2362. वीरो वातपतिश्चैव 28 33. वीरा तावथ गृञ्जिमी 24 326 वीर्यतुप महौजसः 35 576. वीर्यसम्धस्तदाचयत् 95.6. वीर्यवन्तं बरान्वितम् 87.. वीर्यवन्तो महाबलाः 87. 21'. वीर्यवन्तो महारथाः 23 1571. वीर्यवान्कोऽप्यसो दीय च शशिपावकी 30 42. वीय हि सुमहत्तस्य 9 60. वीर्यारस मगधेश्वरः 82 19. वृकदेव. सुनामायां 257. वृकदेवी व्यजायत 25 11 वृकदेग्युपदेवी च 27. 27. वृकलं वृकनेजसम् 2 14. वृक्षाणां कृष्णरस्त्राणां 53 4. दृकादाहुस्तु जज्ञिवान् 10 23. घृकानिपतितान्दृष्ट्वा 52 31. वृकाचो वृनितिः 98 11. करुत्सायते व्रजः 52 34. वृतविद्रावयामास 96 40. वृदयापादितेस्येयं 53 6. वृक्षगम्भीरनिपिड 65 55'. वृक्षमुत्पाठ्य रामोऽपि 87. 42". वृक्षशून्या वृता पृथ्वी 2 39. वृक्षाणामिति निर्मिता 2.41'. वृक्षाणां वरवर्गिनी 2. 40'. क्ष क्षुपलताकुलै. 5563 सृजिनीवान्महायशाः 26 1'. वृणीष्वासुर कावितम् 112 124. वृण्वाना भरतर्षभ 21 17°. वृतं समभवद्रुमै. 2 35. वृत समुपसेयने 57 12. वृतः स. सुरैस्तथा 31. 39. वृतो देवगणैः सवैः 91. 28. वृतोऽन्यै सचिवः सः 70. 24. वृतो व पद्मसभवात् 47.20. वृत्तनृत्तसमुग्मिते. 59, 43. वृत्तयाहुर्मदाभुजः 109. 84. वृत्तस्य च कुलस्य च 78 31'. वृत्तस्य च पलस्य च 58344. वृत्त भागरते हदे 70 36. वृत्तं पट्पदपसीमि. 557. वृत्तान्तो वृत्तिमरस्वपि 15. 43. वृत्तान्यामुपशोभितः 68 23. वृत्ता वर्तन्त एव च 42 50% वृत्तिद. स सनातनः 6 43'. वृत्तिदाता महायशाः 6 476. वृत्तीनामेप वो दाता 5 40. वृत्ते महति तस्थुषः 65. 13. वृत्ते वृनवधे तात 32 10. वृत्ते सप्रामकर्मणि 36 46. वृत्ते स्वयंबरे जग्मुः 89 8. वृत्रहा स्वर्गमुत्तमम् 61 61 वृत्रः क्रोधो विरोचनः 31 75. वृथा व सर्धसे नित्यं 102 15. वृथारूपसमावृतम् 116 23. वृद्धमानकदुंदुभिम् 95. 44. वृद्धशर्मा तत परम् 21. 11. वृद्धस्ताल इवारण्ये 67 43. वृद्धानग्निसमानिह 66 14. वृद्धाननुपसेव्य च 116 31. वृद्धानामिति शासनम् 15514 वृद्धानां च विशेषत. 15 53. वृद्धावृद्धत्य दुःखितौ 69 11. वृद्धास्तात यथाग्नयः 66 12. वृद्धिरस्थास्तु शोभना 86 33. वृद्धिश्चापि परास्माकं 84 5". वृद्धौ तगम्बापितरौ 69 16. वृन्दशो गोदु-रानि च 60 29. घृन्दावनगतो गोपान् 67. ". वृन्दावननिवेशाय 53 8. वृन्दावनमनुप्राप्ता 53 31. वृन्दावनमितः स्थानात् 53 11: वृन्दायनस्य मध्येन 83 40. वृन्दावने वसत्येकः 44 68. वृषणतस्य वंशभाक् 23 1611 घृपणादृष्णय. सर्वे 23 1620, वृपदंशो जगर्न च 106 41. वृषपूर्वार्धकायास्तम् 25 11. वृषपोतायियोद्तौ 574 235 - विस्तरेण तथैव च] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ वीराकाम्या व्यगायत विस्तरेण तथैव च 113 84° विस्तरेण तपोधन ! 1207 1029 1850 1000 विस्तरेण पृथोर्जन्म 4 100 विस्तरेण प्रवृत्तय 397 विस्तरेण मया श्रुतम् 18 विस्तरेण महात्मा 851 विस्तरेण महाधुते 11 14 158 विस्तरेण यथातत्त्वं 39 6° विस्तरेणानुपूा च 1 14 23 1,2 विस्तरेणेह तान्शृणु 270 विस्तरेणैव चाभिभो 1 100 विस्तरेणव सर्वाणि 3010 विस्तार यान्ति निम्नगा 54144 विस्तीर्ण सर्वकाञ्चन 9431 विस्पर्धनपि कृष्णेन 89 120 विस्फारितमहाधनु 108 56* 113 19d विस्फुरन्त महायलम् 5 18 विसय च जगाम 50 290 विस्मय समजायत 79 19d विसयोत्फुल्लनयन 106 21 विस्सयोरफुललोचना 107 72 विस्सयोरफुलोचना 50 19 विसयो मे महानयम् 50270 विसरिष्यसि सागर 43 41° विस्मितश्चाभवद्राजा 10426° विस्मितश्चाभव नृप 103 280 विस्मित दुर्जय रणे 31 101 विसितानि मनासिन 606 विसिताश्चैव हृष्टाश्च 99 31" विसितास्तुष्टुवुर्गापा 56 41 विस्मिता स्वानि राष्ट्राणि 100 86° विसितेपु यथागृहम् 50 26 विस्मितोऽमितदक्षिण 70 290 विस्मितोऽह तत पुन 103 30d विसम्भोयोन गतव्य 3877 विनम्तनयनानन 761 विहरन्ति स तन 16 331 विहरति स सुसिन 82 30 विहगा कामचारिण 1633 विहाय दुसानि विमुनसन 1840° विहाय मधुरा रम्या 2516 विहाय सपनोत्तमम् 40 विहायसगता रौद्रा 48 33* विहाय सहज धैर्यम् 100 BI" बिहायेम गृहे जनम् 77 211 विहारभूमिस्तव 84290 विहित विश्वकर्मणा 93 36%, 399421 विहित शाधिविना 1106 विहिता भुवि देहिनाम् 39 14 विहिता वासुदेवार्थ 93 590 विहिता विश्वकर्मणा 93 61 विहितावस्य सर्वश 85 26 विहितेय वयुष्टमा 18 240 विहितो विश्वकर्मणा 93 49', or" विहितो विश्वयोनिना 67 574 विहितोऽस्य मया मृत्यु 82 21* विह्वल समपद्यत 76 310 विशतिर्भरतर्षभ 82 28 वीक्षन्ति स्म सुरा सर्वे 36 56° वीक्षमाणच तान्सर्वान 819 धीक्षमाण समन्तत 55 39 वीक्षमाणौ प्रदसिटी 71 34 वीक्षमाणी वनानि च 58 24 वीणासत्तेन याहुना 100 184 वीणा गृहीत्वा महती 44 8° वीतराने तत काले 81 27° दीतशोकमयावाया 96 68* वीतशोका बन सधैं 57 25° वीतिहोत्रा सुजाताच 23 169 वीथी भाल्यापणानां 11 180 वीरणस्य प्रजापते 350 धीरणस्य महात्मन 2 16 वीर नैवविधा पुमान् 99 22 यीरपरिन निषेवसे 42424 पीरपत्नीमतमिद 42 42 वीरपल्यो हते वीरे 773 वीरभोज्पानिराग्यानि 7000 पीरमार्गानिराकृत 76 40 धीरशाधहनुव 24 पीरागमत- मुवा 81 वीरसेनारमय 1018* शीरस्पोप्रायुधस्य च 13601 यार बनाविमादत 109 पीरः पसनमा 119 पीराकाम्यापनायत 28" वीज पर्वतैस्तथा] श्लोकपादसूची [ यूपपोतावियोद्गती वीरुद्धि पर्वतेस्तथा 2 256 वीरेणामित्रघातिना 108 140 वीरो भीमरथ स्मृत 23 61' वीरो राना पुरजय 23 170 वीरो राजा प्रतर्दन 23 633 चीरो वातपतिश्चैव 28 330 पोरी तावथ गृझिमी 24 32d वीर्यतुल्यं महौजस 35 571 वीर्यरधम्तदाचयत् 956 वीर्यवन्त बटान्वितम् 87 50 वीर्यन्तो महाबला 87 21 वीर्यवन्तो महारथा 23 157' वीर्यवान्कोऽप्यसौ युवा 108 06" वीर्य च शशिपावको 30 420 वी हि सुमहत्तस्य 9 60% वीर्यास मगधश्वर 82 103 वृकदेव सुनामाया 257° वृकदेवी व्यजायत 25 71 वृकदेव्युपदेवी च 27 2 वृकल कनेजसम् 2 141 वृकाणा वृष्णपकवाणा 53 4 कादाहुस्तु जज्ञिवान् 10 230 कानिपतितान्दृष्ट्वा 52 31" काचो वृकनिर्वृति 98 11 करत्माद्यते बज 52 34 वृकैर्विदारयामास 96 40° कार्यापादितेत्येव 53 5° वृक्षगम्भीरनिनिड 65 650 वृक्षमुत्पाव्य रामोऽपि 87 42" वृक्षाया वृता पृथ्वी 2 39 वृक्षाणामिति निमिता 2 41' वृक्षाणा वरवर्णिनी 240* वृक्ष क्षुपलताकुल 55 53 वृषिनीवा महायशा 26 1 वृणीष्वासुर कासितम् 112 124 वृण्वाना भरतपम 21 174 घृत समभयमुमै 2 35 वृत समुपसेवने 57 126 वृत सर्व सुरैस्तथा 31 39 वृतो दवगणै सबै 91 28° वृतोऽन्य सचिव स 70 24° वृतो व पासमवात् 47 200 वृत्तनृत्तसमुज्झित 59 43 वृत्तसाहुमहाभुज 109 84 वृत्तस्य च कुलस्य च 7831 वृत्तस्य च बलस्वच 583d वृत्त भागरते हदे 70 3 वृत्त पट्पदपसीमि 557 वृत्ता तो वृत्तिमरस्वपि 115 43d वृत्ताम्यामुपशोभित 63 234 वृत्ता वर्तन्त एव च 42 50* वृत्तिद स सनाता 6 430 वृत्तिदाता महायशा 6 474 वृत्तीनामेप वो दाता 5 40° वृत्त महति तस्थुष 65 131 वृत्ते नवथे तात 32 100 वृत्ते सग्रामकर्मणि 36 46 वृत्ते स्वयवरे नग्नु 89 8° वृत्रहा स्वर्गमुत्तमम् 61 611 वृत्र क्रोधो विरोचन 31756 वृथा त्व स्पर्धसे नित्य 102 15" वृथारूपसमावृतम् 116230 वृद्धमानकदुदुभिम् 954 वृद्धदामा तत परम् 21 111 वृद्धस्ताल इवारण्ये 67 4300 वृद्धानग्निसमानिद 66 14 वृद्धाननुपसे य च 116 31 वृद्धानामिात शासनम् 15 51* वृद्धाना च विशेषत 15536 वृद्वावुद्धृत्य दुखितौ 69 21 वृद्धास्तात यथामय 6612 वृद्धिरस्यास्तु शोभना 86 336 वृद्धिश्चापि परालाक 8+ 50 वृद्धौ तगम्यापितरौ 69 16 वृन्दशो गोकुलरानि च 60 290 वृन्दावनगतो गोपान् 674 वृन्दावननिवेशाय 53 86 बृन्दावनमनुमाप्ता 53 31 वृदावनमित स्थानात् 53 11' वृदावन मध्येन 83 40% वृन्दावने वसत्येक 44 680 वृषणस्तस्य वशमा 23 1611 वृषणादृष्णय सर्वे 23 1626 वृपदशो नगर्न च 106 41* वृषपूर्वार्धकायास्तम् 25 11. वृपपोताविवोन 235 1 वृषप्रभृतयो राजन् ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ वेद विष्णु पितामह वृष्ण्यन्धककुल तस्य 25 13° 85 16 वृष्ण्यन्धककुरान्वया 13 496 वृष्ण्यन्धकग, सह 91 290 वृष्ण्यन्धकनिवेशनम् 92 13, 151 वृष्ण्यन्धकनिवेशने 25 14428 139 वृष्ण्यन्धकमय मइत् 8525 वृष्ण्यन्धकमहारया 1007846% 1011 1026 वृषप्रभृतयो राजन् 23 1610 धृषभाणां च गर्जित 6011 वृपयुद्ध विना केन 50 150 वृप प्रतिवृपोपम 64 160 वृषाकपिश्च बाभुश्च 343 वृपाणा घृष्टपादपम् 49 18* बृपाणा जातरागाणा 63160 वृषेणेव महावृप 64 17 वृषो चशधरस्तन 23 161 वृष्टिमन्तो बलाहकान 36 511 वृष्टिमन्तो बलाहका 59 110 घृष्णयश्चान्धकाचैव 89 51" वृष्णयरते च पार्थिवा 82 231 वृष्णय कुरुशार्दूल 82 26° वृष्णय पाण्डवास्तथा ! 11d वृष्णयो जज्ञिरे नृप 87 11' वृष्णयोऽपि जरासध 88 29° वृष्णयोऽपि महाराज 89 53* वृष्णयो भरतर्षभ 822984 194 वृष्णयो मन्त्रमुत्तमम् 84 10° वृष्णयो हतसकल्पा 102 130 वृष्णिचक्रप्रतापिता 85 2nd वृष्णिभिर्भरतर्षभ 89 52d वृष्णिभि सह योधाना 81 95° वृष्णिभि सहितोऽध्युत 94220 वृष्णिभोजेश्च सर्वश 1042 वृष्णिस्य प्रणिधाय च 87 40% वृष्णिव शासडून 7 56* 19 36* 232 वृष्णिय समुत्पत्रा 4372 वृष्णिवीरा महारथा 87 51' वृष्णिशत्रु मदायरम् 87 23 वृष्णिसमनि पूजिता 96 136 वृष्णिसिंदा महारथा 82 300 पृष्णिसिंहो महारय 98 50 वृष्णि च यदुनन्दनम् श" कृष्णीनन्यासस्वजे च 91 30° वृष्णीनामम्धकाना 1857", 11' वृष्णीनाश्वास्य चैव 585 360 वृष्णीना कुलपर्धन 24 वृष्णीनां च यथाममम् 30 550 वृष्णीनो तषियैपिणा 87 230 वृष्णीना यशयादित 16. वृशिविधमे 24 336 वृष्ण्यन्धकमहारथै 29 29 वृष्ण्यन्धकेषु चान्येपु 87 48" वेगगम्भीरवकानी 83 360 वेगवनानुगामिनी 83 34 वेगवद्भरि शोणितम् 74 354 धेगवान्स्तुमानुन 31 70% वेगात्पर्वणि वर्धित 43 30° वेगेन वासुदेवस्स 67 42° वेगेनारुजते दुमान 678 येणुदारिकृते यत्नात् 97 20° वेणुदारिमुखै सह 81 104 घेणदारिदारधी 89 10 वेणुदारिश्च वीर्यवान् 88 40 वेणुदारिश्च सप्तभि 88 11 पेणुदारिं नराधिपम् 876 वेणुदारि श्रुती च 80 120 घेणुदारेज ठित्वा 88 139 वेणुभेरीमृगाना 81 91. घेणुमद्वै समन्तत 93 20 येणुमन्त रतापेष्ट 109 35. येणुवीणामृदश्च 107 .. घेणूनां च गृधे प्वनिम् 87' यणूना चैव सर्पश 61 120 पैनुमिष्यामि त प्रमो 104 16' येनु भामिनि सुमते 107 61' घेश्स्यते मा यथावर 104 18* पैदरष्टेन कर्मणा 38 70* यदरटेन विधिना 416 वेदधर्मानविय येदधर्माब शाधना: ॥ ' वेदपादो यूपर्दष्ट 3122 येयासंघ7220 पेद मिथ्याभिशापार 28 45. पेशिक्षितिजावद 3192 पक्ष विष्णु रिकामा 39 11. - 296 वेदवेदाङ्गपारगै ] श्लोकपावसूची [पैरण्यामिति न ध्रुतम् 1500 वेदवेदाङ्गपारगै 643 109861 घेदवेदाङ्गपारगी 18 16 वेदवतपरायणा 43 730 वेदश्रुतिसमाहितम् 31 20', वेदानश्रुतिभूपण 31 23 वेदात्मान व सुस्थिरम् 44 390 वेदाध्ययनसपसा 18 250 वेदानधीत्य दीक्षाभि 41 10° वेदानुचैरधीयिरे 32 38 वेदाना च परा गति 100721 घेदाना च प्रतिक्रिया 117 50° वेदान्वै समुपस्थित 100 68 घेदा मामभित स्थिता 100 71 वेदार्य इति त विदु 117 47 घेदार्थाना विवक्षव 65 16 वेदास्त वायदर्शिन 100 65 वेदिस्कन्धो हविगन्ध 31 26° पेदि दीक्षा घर घुवम् 315 वेदीहोरे तथाहुति 118 37 घेदी चैव कुशवम् 30 210 वेदेषु स पुराणेषु 7 49 वेदोक्तमपरे जना 1177 वेदो धर्म क्षमा सत्य 38 1 वेदोपस्थानिका चके 100 67° घेद्यो यो वेदविदुपा 30 350 वेनक मपसभवान् 5 180 वेनमेक व्यजापत 2 19 वेनश्व त्रिदिव ययौ 5 230 वेनस्य पाणी मथिते 2 20° वेनस्य मथित पुरा 4 22 वेनः कारात्मजात्मज 530 वेन प्रहस्य दुबुद्धि 511" येमकस्य तु भाया तम् 114 15 वेमश्या स तु पुत्रोऽभूत् 114 15° पम् रक्त प्रणेहु 35 धेरामासाद्य पश्चिमाम् 43_15 लामिर महोदधे 609 घेरावनविचारिण्य 1137" बेलासमीपेऽपहत 1047 घे व दुरतिफमा 15 271 वेश्मानि जपे दृष्ट्वा 93 30% धश्मोत्तमघनाचिता 86 476 घेपान्यत्वं चकार ह 10 41 धेपेण वपुषा चैव 60 8 वेषेणाकृत प्रभु 83 3 वेष्टमान समाक्षिप्त 76 34" वेष्टयन्ति स्म तान्योरान् 36 13° वेष्टविस्वा तनु स्थिता 113 11 वेष्टितो बहुधा तस्य 108 83° वैकुण्ठत्व च देवेषु 32 1 वैकुण्ठश्चक्रमाददे 38 34 चैकुण्ठश्च दिवौकसाम् 38 " वैकुण्ठ किं चकार ह 39 10 वैचित्रवीयों द्वावेव 43 50° वैजयन्तोऽचलो महान् 93 64° वैदर्भ सोमकस्तथा 81 40% वैदर्भी वरयामास 895 वैदयां राजसत्तम 98 19 वैदिक रौकिक चैव 41 11 वैदिका रौकिकाश्च या 40 214 वैदिशो वामदेवश्च 81 45° वैदूर्यपत्रैर्नर 93 21 वैदूर्यमणिवर्णाभ- 93 47 वैदूर्यस्य च सचयान 92 30 वैधव्य स्त्रीसहस्राणा 784 वैध येनाभिभूता स 77 15* वैधसो मातृवर्ती घ 16 19 वैनतेय इवोरगम् 74 360 वैनतेयगतो राम 110 460 वैनतेयभयाद्विप्र 4570 वैनतेयसमारूढ 112 51' वैनतेयसमासीन 113 49° वैनतेयन्तत कुद्धः 112 78° वैनतेयस्ततो बली 110 16d वैनतेयस्यमस्यन्तम् 112 16* वैनतेयस भद ने 110 30 वैनतेय समारुह्य 92 62% 112 1 113 64. वैनतेय प्रतापवान् 109 80° 10544 वैनतेयोऽन्तरिक्षग 91 364 वैन्यमेवान्वपद्यत 5 46 वैन्यात्प्रभृति राजेन्द्र 6 11 वैभ्राजमिति तद्वनम् 18 12 वैभ्राजनिति शब्दितम् 18 120 वैभाना नाम ते लोका 13 41" वैरज विषमर्जितम् 66 18 वैरण्यामिात न श्रुतम् 3 230 297 वैरण्यामेव पुत्राणां ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ न्याघ्रगम्भीरनिघोंपा वैरण्यामेव पुत्राणा 3 18° वैरण्या चाक्षुपो मनुम् 2 16t धेरण्या पश्च वीर्यवान् 36 वैरनिर्यातन प्रति 109 450 वैरस्य च समुत्थान 89 52° वैरस्यान्त महाराज 23 65* वैरस्यान्त विधित्सस्तु 85 36° वैर तदपहाय स 89 125 वैराजस्य प्रजापते 2 161 4 11' बैराज ब्रह्मसदन 31 47° वैराजा इति विश्रुता 138 वैराजात्पुरपाद्वीर 25° वैरिकेलिक्लिो विप्र 44 11" वैरूप्यमगज किंचित् 112 127* वैरोचनिश्च देत्येन्द्र 38 67° वैवाद्वयाधिसपीडा 117 4° वैवस्वतपथे स्थित 64 1000 वैवस्वतपुर सरम् 34 480 वैवस्वतश्च कौरव्य 74. वैवस्वत पितॄणा च 450 वैवस्वताय मनवे 4 170 वैवस्वते तु महति 3 90 वैवस्वतेऽन्तरे ते वै 3 520 वैशपायन कीर्तय 3 114 19, 217 11 वैशपायनमापितम् 113 83° वैशपायनमप्रवीत् 170 वैशाखे मासि भामिनीम् 107 19 वैशाखे मासि यो राशि 107 41' वैशाखे मासि हम्यस्था 107 13. वैश्यवृत्तिमनुष्ठित 6 47 वैश्याचाराश्च रान्या 116 27 वैश्यैरपि च वित्ता 6 470 वैश्यौ ग्राह्मणता गती 9 36 वैश्वारसुते उभे 3120 वैश्वानर पुलोमा च 3 60% वैष्णव कर्म कुर्वाण 40 25° वैष्णव पदमन्विच्छन् 3820 वैष्णव शत्रुमर्दनम् 113 2 वैष्णवालस्य सामने 113 26° वैष्णपाने विमुक्त तु 112 37" वैरण विश्वमणा 864 वैष्णये तु महावीर्ये 11327 योदम्या पुंगयेनेय 62 85. व्यक्तकिष्कुशतोत्सेध 9460 व्यक्तमेव वय गोपा 56 450 व्यक्तमेवानुगृह्यते 58 35 व्यक्सजवनोद्देश 93 41 व्यक्त किष्कुशतो सेध 93 67" व्यक्त वृष्णिकुमारोऽय 99 38* ध्यक्ताव्यक्ता च भारत 104 10% व्यक्तीकृतश्च शब्द स 28 25° व्यकीणादोशतेन वै 9970 व्यगाहन्त युधा वरा 81 78" व्यग्राभ्या दण्डरजुभि 55 व्यमाया तु यशोदाया 51 14 व्यगभूत कुलस्यास्य 78 34° व्यग शल्यश्च बलिनी 31 व्यजायत महाबाहु 10 35° व्यतिक्रमात्पिणा च 13 38° व्यतियाती म वार्षिकी 59 1 व्यतिपक्तरयद्विपम् 81 520 व्यतिष्ठत च कौटवी 112 491 व्यथित स नराधिप 88 124 न्यद्रवन्त नराधिपा 88 261 व्यपयातो तनार्दन 8560 व्यभजत्पशधा राजा 22 150 व्यभिचारप्रधर्पितान् 175 व्यभिचारव्यतिक्रमै 73 20 ग्यभिचाराज दुप्यन्ति 73 26* व्यभिचारेण ते देवि 107 330 व्यभिचारो हि व कृत 12 2' व्यरात यदुध 100 120 ध्यराजत्तम मुप्रभ 93 62" ग्यवर्धत गवां मध्ये 503 ग्यवर्धत च गेन 38 35* व्यवधी महातेगा 37 । म्यवर्धत समुद्रौधै 37 3. व्यवस्थान ध धमपु 1 22 व्यवहारापशया 117 101 ध्ययहारोपवृत्ताच 117 17 प्यशीपंत समन्तत 61 39" म्यसोपु जघन्यस्य 14 31. ग्याशेपेण विलम्बितम् 70 35' व्याख्यात राहय 2730" प्पाण्यानुत्पमिहालि 2500 ग्यानगम्भीरनिर्धेश 50 21. 238 म्यानघोपमहाघोष ] लोक्पादसूची [पीडिता दीनचेतना म्याघ्रधोपमहाघोष 53 14. म्याघ्रतुल्यपराक्रम 52 36 व्याघ्राश्च नखिनां वरा 5925 म्याजदार यथान्यायम् 107 47° ग्याजहार स्वरेण तम् 62 100 न्यात्तानन इवान्तक 57 16 ग्यादितास्वमिवान्तकम् 108 440 म्यादितास्यस्य यो मृत्यो 10960 म्यादितासान्तझोपमम् 112 26d ग्यादिदेश रणे शूरान् 108 34° म्पादिश्यन्ता घरा नृप 109 336 ग्यादिष्ट तस्य निग्रहे 108 35 म्यादिष्ट भीमकर्मणा 108 14' ग्यानिष्ट शूलपाणिना 106 200 प्यादिष्ट स कथ ज्ञेय 107 46° ध्यादेमुपचक्रमे 4 11 प्याचा परमधार्मिका 16 19% म्याधिमृत्युभय चैप 47 B6° प्याधि न चामोति चिर च बन्धन 118 46° ग्यानो ल्यायरछते येन 30 490 भ्यास सदीप्तरोचनै 108 36* ग्यामुरन्तो दिशो दा 38 350 व्याभुम इव धर्मान्ते 67 38° ग्यायत पहुसाहन 33 16° ग्यायतोदप्रतुरगै 81 15 प्यायाम सरिया बलम् 75 20° प्यावतत नदी भीता 83 33° प्यावर्तमान सुमहत् 65 19 ग्याविध्यमाने चक्रे तु 112 49° ग्याविध्यमाने तु तदा 111 6* ग्यावृत्तदद सगिरि 61 43° ग्यासशिष्येण धीमता 115 11 प्यासादरण्या सभूत 13 45" म्यादरन्ति खर द्विजा 66 25° ग्याहरन्ति भयार्दिता 61 20% पाहरन्ती पुन पुन 50 21 पाइरन्तो मृगद्विजा 66 286 म्यानमुपचक्रमे 70 28 पाहत भवता स्वयम् 11 29 ग्याइव सहिरत्यर्थम् 35 45* प्युरियतस तु मेदिन्या 44 T" प्युस्थित पवनरित 100 460 म्युरियता वनितामिव 83 320 प्युपारमा युद्धानि 82 110 ग्यूढानीका प्रहारिग 81 51 घ्यूढोरस्का महायाहू 96 19° म्यूहस्य पक्ष ते सग्य 81 1030 न्यूहस्सा, समासेदु 81 1040 म्यूह च परिधारताम् 3740 म्यूहानामुत्तमा मार्गा 93 29 न्यूहितो दानवेन्यू है 33 18° मजनिर्याणभूमिपु 70 4 मजमाजग्मतुस्तौ तु 5920 मजमेव जगाम ह 54 41' प्रजमेव यशोदया 49 प्रजमेव विवेश ६ 67 680 प्रजरथ्यासु वीर्यवान् 63 16 बजगसौ वनेचरी 65 880 प्रास्य च निवेशाय 537" बजस्योत्तरतस्तस्य 55 46° प्रजस्योत्थापन चक्रु 53 6° मजगता सुस चेर 63 29* बजाम मेरुशिखर 41 32° यज्ञाम सह गोधनै 533 प्रजामोऽन्यन्महद्वनम् 532 मजे गोपालकावुभौ 72 180 व्रजेच परिवधिता 84d यजे त्रासोऽभवन्महान् 52 314 प्रजे शुधार रोहिणीम् 491 बजे शुध्रुवतुम्तद। 592 मनेपु च विशेपेण 59 550 ग्रजे सत्योपयाचिती 51220 प्रोऽसिन्गोपन्म च 55 56" प्रजो निष्पन्दचेष्ट स 52 36° प्रजापभोग्या च शुभा 55 550 घतचर्या समाहिता 23 104 प्रतमुक्त तपस्विनाम् 35 446 ग्रतलोपो न विद्यते 107 336 व्रतवन्तस्तदाभवन् 1680 नतिनी चढव्रता 28 30 व्रतेन वतिना वर 404 व्रतैरपि सुदुश्वरे 35 36 व्रतोपवासतम्बडय 9227 ग्रीडित प्रत्यभापत 48 374 ग्रीडित शोकमतप्त 102 199 वीडिता दीनचेतना 19 धीडिताधोमुखं व तु] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [शनीयो महीक्षिताम् प्रीडिताधोमुख त तु 78 390 प्रीडिता विस्मिताश्चैव 56 20° वीदितेव मनस्विनी 8 130 ग्रीडितोऽस्मि नराधिप 101 15d शकटस्य त्वध सुप्त 50° शकटं चक्रमालि वै 50 134 शकट परिवर्तितम् 309 शक्ट पर्यवर्तयत् 506 शकट पातित भुवि 50 160 शकटं वायुना विना 508 शकटान्तरचारिणा 96301 शकटारोपित बहु 706 शकटावर्तपर्यन्त 53 210 पाकटावर्तविपुल 49 220 शकटीसकटस्तु स 53 14 शकटे च विलोदिते 15 100 शकट परिवर्तिते 53 244 शकटाधेन भास्वता 53 18° शकाना पछवाना 'प 10270 शका यवनकाम्बोजा 10480 शकास्तुपारा दरदा 85 190 शकुना नामत स्मृता 16294 शकुनिप्रमुखास्तस्य 9400 शकुनिभ्यस्तथैव च 49 11 शकुनिस्तस्य चात्मज 26 23° शकुनि निहता भूमौ 50 24 शकुनि प्रत्यदृश्यत 50 200 शकुनीवेषधारिणी 96 30° शकुन्तलाया भरत 23490 शदिग्धानमूर्धजी 51 ga शकृन्मून समुत्सजन 67 33 शकृम्मूयपु तेष्वेव 52 190 शम्मूनोपलिप्साह 64 4. शकै सार्धं विशा पते 10 30 शाक्तस्त्वमसि माचिरम् 67 594 पास प्रसहितु येग 40 28° शकिचर्मासिपाणय 87 78 शक्तिचित्र हलोदम 32 250 शक्ति जमाद कायनीम् 112424 शशि प्रज्वलिसा gr 112 45* शक्रियाणतत मृद 108 11. साका दाई समागम्य 106 61 शतोऽपि न जहार स 28 14d शक्तोऽपि शाध्याद्धादिश्य 29 13° शक्तो वै प्रमुख स्थातु 113 4 शको ह्यसि महामते 86 294 शायष्टिप्रासबाणौघान् 81 101 शक्नोति प्रसमीक्षितुम् 414 शक्यते यदि रक्षितुम् 101 160 शक्योऽय मधुसूदन 97 38 शमगोपकुलानि च 54 " शक्रगोपविभूषिता 73 17 शकगोपाद्वयामोदे 684 शक्रयापविभूपिता 61 शकचापादितोदरा 543 शकचापायते पति 53 16° पाकचापायुधधर 54 350 शक्रतुल्यपराक्रम 23 342423/10890 शक्रध्वजशतैरिव 108 530 शकलोके च सत्किया 45 10 शकलोके महीक्षिताम् 67 690 शक्रसद्म समासाद्य 92490 शनिदशवर्धन 36.1 सकस दयित द्विजम् 100414 शकस्य पवनस्य५4420 शक्रस्य वचन श्रुत्वा 62890 शक्रस्येवामरावती 866 शफ च यो दैत्यगणाघरद 30 19 शक्र देवगणा इव 7937 शक स वीडितोऽभवत् 62 6. शक्राणा सदशहर 110 शक्रादपि महत्तरा 38664 शायरमौत 1340 शाय सुमहात्मने 38 636 शक्राशनिसमाहत 10639 शाशनिसमाहता 10611 राजपति देवेशे 43. शको गोवि दमाययम् 62. 67' शाको दिया पयस्वला 59 12 सो दैत्यपर्क पोरें 35 120 शशोधानं ययामर 100 शाको मृत्यैरियर 59 10 शकीया माता व GS 45 रायगीरयेवमुमत 101 शानीपा महीक्षिताम् 446 -240 शमानस्ततो भयम् । लोकपादसूची [शन सतोलयामास शङ्कमानस्ततो भयम् 65 1 शविता चाभवत्पश्चात् 73 19° शङ्कितानि मनासि न 6380 शहिता रिपव कृता 78 196 शहिता सर्वपार्थिया 83 134 शङ्कवर्णो महास्वन 31730 शङ्खचक्रगदाधरम् 32 256 3833 सद्धचक्रगदाधर 11063 112 660 शङ्खचक्रगदापाणि 94 11 शङ्खचक्रगदासिभृत् 91 21', 39*92 33° 9744,19 सहमायतोपेन्द्र 8666 रासमुनादधर 34 12° राहमुक्तामरतनु 43 194 शव शहपालश्च 3890 राजस्थनपुरोजवम् 106 200 राह गुह्मकमुत्तमम् 86 590 शङ्ख चैवास्स चामत 1106 शङ्ख लेभे जनार्दन 79 160 नाहाना च महास्वन 109 63 110 1' शहाना च सहस्रश 81 91' शहादध्मुश्च नैकश 37 24 शय क्षीरमिवाहितन् 115 124 शचीभर्ता सुरेश्वर 107 26 रातनो कामपविप्रमोक्षण 118 44" शतलीचक्रहस्ताश्च 31780 शतभीभितथव च 37 110 शाधुन्ने च केशव 87 46 शतधुग्ने विदूरथ 81 99 शवधन्वा च दुर्जय 97 60 शवधन्या ततोऽभूरम् 29 12° शवधन्वा तु मध्यम 280 शवधन्यानमच्युत 29 10 रावध वानमार्दयत् 29 16 शतधन्वा महायल 29 3 शतधन्या विदूरथ 81 42° शतप्रसवत सुत 260 शतप्रसूतिमिच्छन्दै 263",90 गवाहरणोदन 36 49 रातयाम्नथापरे 52 32 शतवाहु शतानन 36 49 शतमुत्तमपन्विनाम् 949 23 61 114 3* शतयोबनगामिना 29 15 हरि. पादसूची-31 शतरूपामयोनिजाम् 2 10 शतरूपा ग्यजायत 22, शतश कृतरक्षणान् 39 22 शतश प्रतिनादितम् 65 564 शतशासाश्च रोहिणा 93 601 शवशाखश्च पादपै 34 33 शतशोर्ष स्थित श्रीमान् 36 49° शतशून इवाचल 36 496 शतशोऽथ सहस्रश 3700, 94° 43 72 60 3068 206 शतशो दृष्टविक्रमम् 34 41 शतशो यान्ति निम्नगा 100 430 शतशो विनिपातित 81 131 शतशो ह्यप्सरागणा 3486 शत कवचिना रणे 26 10 शत चैव समारयात 344 शत जघान सकुद्ध 877" शत तीवपराक्रमा 3651 शत स सुमहायशा 10 630 शताजियाथ दाशक 275 शतानि तयाप्सरसा 107 ° मातानि दश पञ्च च 31 33* शतानि दश बाहूना 31 98° वातानि सुबहूनि च 104 1 शतायुश्चोर्यशीसुता 21 101 शतावतरन चैव 93 19 पातेन सह पार्थिव 964 मानवश्व पराजिता 84 36 शरको विद्वन्त्याजौ 15 440 शनुकालप्रदा गदाम् 34 371 शत्रुघ्न शत्रुतापन 44 43, 500 शनुमेन पुरा सृष्टा 44 53 शत्रुघ्नोऽयारिमर्दन 24 शत्रुपक्षभयावह 3161 शत्रुभियुधि दुर्जय 21 2 शत्रुमिश्चापराजयम् 976 शानुभूतास्त्यजाम्यहम् 47 204 शत्रुसेनानितावुभी 28 11 शत्रुसैन्यस्य भारत 81 970 शत्रुहा चारिमेजय 28 39d शनैरूचुरवा खा 65 99 शनैर्गददया वाचा 109 18° शनै सतोरयामास 71 310 -241 शपेयुरपि थोपित ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [शरैर्विव्याध चामि शपेयुरपि योपित 118 36 शपेयुन्तपसा युक्ता 31 42° शप्तवानर्जुन विभु 23 1610 शता हि सा मतिमता 23 69 शता खगास्त्रयस्ते तु 17 6° शप्तोऽहमम्मि लोकेश 8 24° शत्वा तानभिभायाथ 1756 शबरादयश्च सप्लान्ये 23 930 शबलावा प्रजालदा 319 शब्द पित्राभिवर्धित 47 21' शब्दानुसारी समृद्ध 57 18 शमयस्वासुरी माया 36 10° शमयामास वारिणा 9744 शम चाग्निर्गत पुन 110694 शर्मि कम्पल यहिपम् 27 161 शमीको राज्यमावहत् 24 331 शमी च दण्डशर्मा च 28 30 शमीपुन प्रतिक्षा 284 शम्बरमत्युदाहृत 99 11 शम्बरस्य गृहोपिता 99 454 शम्वरस्य वध प्रति 99424 सम्बर चारिमर्दन 97 21d शम्पर तदधीहि मे 9914 शम्बर मघवानिद 15520 शम्बर स समाह्वयत् 99281 शम्बरान्तकर सुत 985° शस्वरान्तकरो जो 992 शम्बरेण हतो ह्यभूत् 109 290 शम्बरेणात्मघातिना 100 10 शम्बरो विक्षरो महान् 3174 पायनानि महार्हाणि 92. दायनान्यासनानि च 92 14 शयनायोपचकमे 40 शपनीयानि नेप्यति 776 शपनीये महामति 49 140 शयानस्तेन घोदित 15 42 शयानस्य मदारमन 4035 शयानस्य हि ते भूमौ 77350 शयान दीप्ततेजसम् 126 शयान धरणीतले 15 38* पायानं वीरशयने 7748 शयानी न चकम्पतु 42 220 शरकल्पवयीयवान् 3780 शरखड्गनिपातिता 1 48° शरण त्व भवस्व न 31 614 शरण प्रत्यपद्यत 22 11' शरण्य शरण गना 42 36* शरण्य शरण गता 31 8918220 शरण्य शरण विष्णु 31 Bg शरण्यं सर्वभूतेशं 19 10 शरवल्पगत पुरा 11 6 शरतल्पेशयानेन 101 4" शरत्काल तु पश्चिमम् 62 450 शरप्रकाशयोपेव 59 55" शराप्रज्वलित तेज 59 60 शरत्प्रमुदिता रम्या 59 310 शरत्प्रवृत्तयज्ञो हि 4024 शरत्सुसोस्थिते त्वयि 62 55 शरदीय नभ शशी 100 120 शरद्गुणविदीपित 59 470 शरोव सुसस्थाया 59570 शरद्वानाम गौतम 744 शरभ शलभचैव 112 शरभूता सुरेन्द्राणा 34 320 शररूपा महासर्पा 1131 शस्वपरवाकिर 12 63 शरव समन्तत 102 110 शरम्तम्ये शिया वृतः 336 शराणा मतपर्वणाम् 112. 18' शराणा पनता शन्द 8776° शराशीविषधारिणम् 32 2 शरांच दिव्यानक्षार्थे 5 220 शरीरकर्ता लोकाना 43 शरीरगगनचरं महायुधे 11073d शरीरमपतनुषि 91 57 शरीरस्याविदूरत 28 21 शरीराण्युपशोपयन् 18 1 शरीरान्तकरं महत् 7746 भारीरण प्रसवता 112 103 शरीरे पर्वतोपमे 11061 शरादिवि देवठे 13 दास्याम प्रजेपर 23 128 शाररुपामादयाकी. 23 1280 शरण मतपर्वण 83 1 समितीविशपमै 828 साविम्याध चाभि 81101 212 शापेऽस्मिन्सरितां नाथ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [शिवं चास्स जरखास्त शापेऽस्मिन्सरिता नाथ 43 37° शापो निवर्तेदिति च 8 21 शापोऽय विनिवत्यंताम् 43 330 शापो ह्यस्या पुरा दत्त 3573° शाम्येतामग्निमारुती 2 394 शारदीना निशाना च 63 15° शारदीसु सचन्द्रासु 63 35° शारदैरिव तोयदै 74 3 शाधन्वा बिलस्थ तु 28 25° शाङ्गविस्फूर्जितेन च 112 32* शाादीनि महायशा 34 381 शार्दूलशब्दाभिरुत 49 200 शार्दूरसमविक्रमम् 31 124 शार्दूलेन हता धेनु 16 13° शार्दूलौ गोग्रज यथा 96 611 शार्याता इति विश्रुता 9 344 शार्याते सतति कथम् 9 30° शालापातर्हिरण्याक्ष 23 87° शाव कपारमादाय 6300 शाश्वतस्याव्ययस्य च 31 109 शाश्वती च नृणा कृता 42 334 शाश्वती जगती स्थिता 58 44' शाश्वतश्च महर्षिभि 40 4. शासन दुष्टचेतस 58 330 शासनार्थ दुरात्मनाम् 55 56* शासने पाकशासन 6174 शासने मम तिष्ठस्व 15 41 शासिते साधयाम्यहम् 67 676 शाम्ता सर्वदुरात्मनाम् 97 28 शास्त्रज्ञानविमूर्छिता 117 g" शास्त्रदृष्टेन कर्मणा 81 100 10171 शाखाक्तस्याप्रवक्तार 116300 शिक्षया च व्यपोइयत् 82 194 शिक्षामुत्पाद्य पेवराम 19 29 शिक्षामुत्पाद्य तपसा 15 120 शिसण्डिनी हविर्धान 2 27° शिसर चैतदाहृतम् 9620 शिखर मणिपर्वतम् 94 22% शिखराणि घनधनै 54 360 शिसरणमानश्च 61 320 शिसाभिस्तस्य मुताभि 55:* शिखाविततमूर्धगो 71 48 शिसिन काश्यप सगम् 38 ' शिखिन चूडिन चैव 34 42° शिञ्जिताभरणागद 36 48 शितधारैश्च मुद्रै 33 29 शितिकण्ठप्रसादेन 106 22° शितिकण्ठविसृष्टस्तु 106 190 शितिकण्ठ प्रतापवान् 106 330 शिनेयुरभवत्पुन 261 शिनेस्तु सत्यवाग्जज्ञे 98 26° शिबिकायां समारोप्य 78 43* शिविकाया समाहित 49 140 शिबिका वहता तन 92 37° शिबिरौशीनरो नृप 23 243 शिवस्तु शिबयस्तात 23 24° शिरश्चिच्छेद खनेन 44 50° शिरश्चिच्छेद चारिहा 87 57' शिरसस्तस्य कृष्णेन 76 30° शिरसा चारुकेशेन 83 230 शिरसा छमवर्चसा 68 220 शिरसा पृतकुम्भाभि 49 280 शिरसा शासन गृह्य 86 61 शिरस्यभ्यदनद्वीर 76 6 शिर ख ते जल मूर्ति 58 38° शिर स्थाने तु राजर्षे 85 470 शिरोधराया सरीनौ 77 8° शिरोभिश्चावघट्टिते 75 324 शिरोभि परिवारिन 56 6* शिरोऽस्य कृष्णो जमाह 56 30 शिलाभिश्चाप्यतारित 36 28" शिलाया कस पातिता 6549 शिलायां निरसिध्यति 47 38* शिलाया विनिपातिता 48 341 शिरायां समपोधयत् 48 28* शिक्षासघानतिषम्य 91 45. शिरा प्रशिथिलाचलु: 61 31, शिला शक्षसहस्रश 69 शिरुपयनोऽनृतपरा 1168. शिल्पाचार्यों महामति 8022 शिल्पिभि साधुनिहित: 00 B. शिल्पिमुख्योऽस्ति दवाना 80 20 नियमाप पाय 32 36 शिवलाश्रतुपथा 11012 शिवध या भविष्यामि 6026. शित चास्य पलस्तर 5035.

व वर्षति वासव ] लोकपावसूची [शुभाच्छभसरी योनि शिव वर्षति वासव 41 13° शिव कारस्तथैव च 3600 शिवाय गाव पूज्यन्ता 59 692 शिवाय भवतामय 40 47° शिवाश्च वाता प्रवयु 79 34° शिवा श्मशानानिष्क्रम्य 66 26° शिवा मप्रवदुर्वाता 48 15 शिवेन मनसा दष्ट 53 32° शिव सौम्यैश्व कर्मभि 38740 शिशिराशु द्विजेश्वरम् 34 24 शिशिरीकृतमारता 86 480 शिशुना वासुदेवेन 96 37 शिगुना स्तनपायिना 25 26 शिशुपालश निर्जित 97 शिशुपालश्च वीर्यगन् 87 49 शिशुपारश्च सपूर्णे 105 11 शिशुपालस्य नृपते 8720 शिशुपाल प्रतापवान् 87 64 शिशुपाराय वीर्यवान् 87 25 शिशुपारो दशग्रीव 8721 शिशुपालो महाबल 24 20% शिगुरुत्तानशायित 99 180 शिशुमध्यवयास्तथा 97 40° शिशुलीला तत कुर्धन् 50 6° 51 16* शिशुरवं न विनाशित 66 194 शिशु चे कारशम्बर 99 30 शिधिये सध्वज क्लान्त 88 14° शिष्टा सर्वे तपोधना 118 6 शिष्टा सोमाय राजे तु 2 47" शिष्या गाग्यस्य मारत 16 b* शिष्यो पासस्य धीमत 16 शोधणे शब्दयोनिनम् 34 29 शीचप्रमादा ह्योधा 1370% शीघ्रमागच्छ नगर 65 84° शीघ्रमानाप्यता घोप 53 9 शीघमारुह्यता पुरी 81 370 शीवमिच्छामि वैदितुम् 40 46* शीयमुरिक्षप्य दानव 58 233 शीघ्रमेदि महाबल 112 66° शीयाना मनाशुग 49 12 धीप्रगतसमुद्भूता 54 290 गीत्र गमनलारस 53 120 गीर गाव प्रकाल्यन्तां 53 10° शीघ्र समभिवर्तन्ताम् 81 33° शीतमारुतसेवितम् 49 10 शीतरश्मिप्रमाणि च 92 44 शीतरश्मिसमप्रभम् 925 शीतवातादिता गाश्च 96 37* शीतानिरविसपिणा 49 150 शीताशुजर निर्दग्धा 36 18° शीताशुनिहतास्ते तु 36 19° शीताशुरमृताधार 36 8° शीताशुसमतेजसा 34 43 शीताशुपलिरहदम् 35 200 शीताशु शान्तकिरण 70 31 शीताशु सर्वभारन 2014 शीता सपृषतोद्गारा 54 380 शीणा वै सहस्र तु 1106 शीलवत्यो नमस्कार्या 18 38° शीलव्यसनमासाद्य 17 3° शुकस्य कन्या कृत्वी त 15. शुकस्य महिषी द्विज 13 524 शुको नाम महातपा 13 459 शुक्तिमत्यामुवास स 26 141 शुक्र सोमात्मक विद्यात् 30 420 शुक्रादलाबुमध्याद्वै 10 620 शुक्रादर्भ समभवत् 30 40° शुक्लकृष्णाविधाम्बुदो 58 5 शुक्लदन्ताजिताक्षाश्च 116 15* शुक्लपर्यन्तपूर्णस्य 81 26° शुचिरौदकान्पक्षिगणान् 383. शुचिश्चित्ररथस्तथा 98 16 शुचि शुक्र सहवैव 7 17 शुचि सा वसुधाधिप 3 1024 शुचीनमधाबरोत्तम 6 330 शुदभाग मनम्विनी 107 361 शुद्धा शान्विधुन्वन्ती 73 28 शुद्धान्ते पन्नगैशम् 108 98 शुन शेपोऽना स्मृत 23929 शुमगन्धो हुताशन 41 154 शुभ गर्भमधत्तैन 38 20% शुभ तत्पुरमाविशत् 100 31 शुभ मार्गमवातरत् 110 100 शुभ वा यदि वाशुभम् 107 33 शुभाही नाम वैदी 894 शुभाच्छभतरा योनि 16 27 -245- शुभान्यङ्गगतानि वै] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [शृणु वंशमनुप्रोक शुभान्यगगतानि वै 6726 शुभान्येव धचार ह 2011 शुभान्येवाचरिष्यन्ति 117 10° शुभा नयति सद्गतिम् 44 353 शुभे कुन्ती च मादीच 43 51 शुभे तियो महाराज 89 160 शुभे देशे सरिद्वीपे 16 28° शुभेन कर्मणा तेन 16 22° शुभेन परमद्युति 8 420 शुभेनाशुभवर्जिता 16 27 शुभैरास्तरणाम्बर 74 शुभमेघप्रतीकाशै 86 510 शुभ्रनगनुलेपना 89 23. शुशुभाते वनगतौ 52 30 शुशुभाते श्रिया जुष्टौ 51 10° शुशुभे दानवोत्तम 108 540 शुशुभेऽभ्यधिक राजन् 82 140 शुशुभेऽभ्यधिक शुभ्रा 95 16° शुशुभे श्वेतमुकुट 74 18° शुशुभे सर्वपुष्पया 5500 शुश्राव निहत कस 8010 शुश्राव पुरुषव्याघौ 96 590 शुश्राव प्रमदेरिताम् 28 220 शुश्रुवे पृथिवीक्षिताम् 81 29% शुश्रुयेऽशनिनिस्वन 82 17" शुश्रूषन्त्यनहकृता 31 1990 शुश्रूपवो भविष्यन्ति 117 40° शुश्रूपामप्रयुक्त्वा च 18 28° शुश्रूपुनमेजय 4 23 शुश्रूपू निरहकारी 7940 शुष्क वृक्षमिवाशनि 85 520 शुष्काशनिसमाहता 66 294 शुष्मन्धनसमीरित 12 शूदा धर्म परिष्यन्ति 116 150 शूद्रा भोवादिनचैव 116 13" शुद्धाश्च प्राझणाचारा 11660 शुद्धाश्च भरतर्षभ 23 124 शूदाश्चैव दि वर्गास्त्रीन् 31 132* शूद्राम्तान्भावयन्युत 13 62 शून्य सोयचरै सो 5541 शून्या वर्षसहस्र वै 23 39 शून्या निवेशयामास 23386 शूरयो रणमूर्धनि 44 4. शूरसेनश्च शूरश्च 23 1672 शूरसेनस्ततोऽभवत् 44 590 शूरसेनान्शशास है 96 520 शूरसेनेश्वरो राजा 80 4. शूरस्य भवने महत् 24 161 शूरं वै देवमीदुपम् 24 14 शूर पञ्चजनश्चैव 10 50 शूर शनिबईण 107 420 शूराणा बाहुशालिनाम् 15 191 शूराम्त नायतस्थिरे 81 930 शूरैरधिष्ठित कस 96 580 शूरैस्तैर्यदुपुगवै 9623 शूरौ रणविशारदौ 26 190 शूल पहिसशक्त्यष्टि 110 44 शूर मुद्गरकस्मरै 12741 शूलहस्ताश्व दानवा 31 80' शूलैश्च शितनिर्मलै 37 130 शूरोलूखल हस्ताश्च 31790 शङ्गप्रहरणो रौद्र 64 90 शुद्ध चास्य पुन सन्य 6420" राज पृथिव्या स्वालक्ष्य 853* शङ्ग यस्परमार्चितम् 92 380 शृणु कृष्ण वचो मह्य 109 39- शृणु गीता ययातिना 22 36' गृणु चापि यदुच्यते 73 33* शृणु चाप्यत्र कारणम् 44 194 शृणु चेद वचो मम 5401 शृणु तद्रुवतां वीर 78 250 शृणु तावद्यदुच्यते 664 शृणु स्व वदतां वर 35544 शणु स्व वै मयेरितम् 107 56' शृणु दिन्या प्रवृत्तय 3120 शृणुध्व यादवा सर्वे 10926" शृणुध्वं राजशार्दूला 96250 शृणु नारायणस्पादौ 397. शृणु पूरोमहाराज 232 शशु मे मधुसूदन 91 33 शृणुयादारयेत पा 8 48 शृणुगदारयेदापि 21 शशुपादायभीगा 1 16 शशु राममा दिप 118. शुणु राजम्यवाक्यम् 420032 अणु रामनुमोन 23 शृणु वाक्यमिद शेष] लोकपादसूची [शारेराखा परिग्रह -- शृणु पास्यमिद शेप 102 11 शृणु विष्णो शुभा वाघ 40 39° शगु वे यत्तदा वृत्त 39 17° शृणुष्व प्रयतोऽनय 1200 शृणुष्वावहितो राजन् 1064 शुगुवकमना नृप 1056 शृणु सर्वमशेषत 31 130 शृणु सबै यथातथम् 12 200 शृणु सर्व समाहित 11 351 शृणोमि ग्यायतोद्यमौ 65 860 शूपवतस्तस्य धीमत 1012 शुव तस्तामचिन्त्य वै 112 10° शूदन्ती कामनननी 73 12° शृण्व वाचोन्तरिक्षस्थ 109 911 शृण्वन्वेदान्दिजेरितान् 39 23 शकु प्रातसमीक्षितुम् 96 480 शते लोकविनाशाय 9 64 शेते स हि तदा विष्णु 40 34° सोरते कृवलक्षणा 77 43 शेषपासुकितक्षका 3 87* शेपस्तेनोनिधि श्रीमान् 90 4° शेषस्य धरणीकृत 90 10 सोपस्य भरणार्याय 9 97° शेषस्य सुमहारमन 90 18 शेष च धरणीधरम् 43 676 शेष ज्ञास्यामहे धयम् 47 40 शेष धर्मपरा काल 16 18° शेषाश्च मे परित्यक्ता 73 8° शेपास्ततोऽनय सर्वे 110 33° शेपास्तु चक्रवाका वै 18 2400 शप जै प्रदीप्तानि 34 380 शेपो हेतु प्रवर्तते 48 490 शध्ययोगान दृश्यते 112 103 शैयारक्ष्ये निपतिते 110 61° शैनेय सत्यकस्तस्मात् 24 240 शैव्यायामङ्गद सुतम् 98 15 ग्या सुदचा रूपेण 88 420 शल्पृष्टाधसरीन 74 36° नौटमेवप्रतीकारी 10 45° शैलशक्षाप्रपादपै 37 43 शरबादिवोदकम् शेलसधानतिक्रम्य 96 66° शैलतम्भ इवोस्थित 61 58 शैल प्रियमिवातिथिम् 61 58 शैलानां च बनाना च54 36° शैराना भूपण घोप 50 16° शैराना हिमवत च 4 6° शैरेव श्रूयने दुग्धा 6 35* शैलोपरितन्धनम् 41 19° शैलोत्करिमसकाश 33 9° शलोत्पाटनभूरेषा 61 55 शैवारमलिनैश्वापि 55 530 शैशिरीष्विव रात्रीपु 83 270 शोकसतप्तमानसा 77 15% शोकसागरमक्षोम्य 109 22° शोक खलु विधीयते 78 6" शोकात प्रमदाजन 78 16" शोकार्ता पुत्रगृद्धिनी 99 34 शोकार्ताश्च पुन पुन 56 20° शोचनीय त्वया कृतम् 65 70% शोणाश्व श्वतवाहन 28 21 शोणितस्यास्रवन्धोरा 106 44° शोणित शोणितपुरे 106 420 शोणिताक्ता प्ररुदती 107 20 शोणितान्मासमुच्यते 30 39 शोणितास्राविलेक्षण 67 36° शोणितौघालुतैर्गात्र 108 95° 112 349, 1150 शोधिता च वसुधरा 6 41' शोध्यमानैर्गा स्थान 53 26° शोभतेऽद्य भुवि श्रष्ठ 68 27° शोभमानो हि गाविन्द 63 21. शोभयत प्रकर्पिण 84 198 शोभयन्ति महादुमा 93 60% शोभयन्तौ महावनम् 527 शोभयामास त ब्रजम् 63 21 शोभित वासनीयैश्च 33 120 शोभित पुरलक्षणे 84 26/ शोभिता वारमुख्याभि 749° शोभितो माल्यदामैश्च 74 150 शोभेतां गोबजे तस्मिन् 49 go शोपयाम्येप मार्ग ते 103 9" शौण्डीय मेज्नया भन्न 118 21. शौनको जनमेजय 22 123 शौरिणा पृथिवीपाला 969 शौरि कौशिकमौरसम् 24 284 शौरराखा परिग्रह 98 21 58544 247 - श्मशानस्थ इवानल ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवशस्य [श्रीमत्स्वस्तिमूर्धान श्मशानस्थ इवानल 65 350 श्यामपुर सुमित्रस्तु 24 331 श्यामवणे तु तदूप 8 89 श्याम पाणवन क्वचिन् 59 32° श्याम पद्मदलेक्षण 5520 श्याम पीताम्बरस्त्रज 7150 श्याम शमीको गण्डूप 24 19° श्याम शान्तिकरोऽरिहा 34 354 श्यामानि रसवन्ति च 578 श्यामावदाता सा ह्यासीत् 87 360 श्यामो युवा लोहिताक्ष 31_137" श्येनी इयेनास्तथा भासी 3 82° श्येनैश्वामिषगृद्धिमि 49 19 श्रमजा वा कथचन 40393 श्रममभिविनिवर्य मानस स 118 40% श्रम वायुपजग्मतु 44 480 श्रम शान्तो मुनिस्तथा 3 333 भ्रमार्थव क्षुधाम्वित 10 14° श्रमात्खेदाच भारत 29 17 श्रवणमुपेत्य शुभा मुनेस्तु वाच 118474 श्रवण चविष्टाच2830 श्रवणादेव लप्स्यसे 13790 श्रवणाभ्या विभूषित 68220 श्रवणान्या विभूषिता 47 420 भवणारहितदेह 38 65 श्रवणैकाक्षिनासिके 67 420 अवर्णकारलम्बेन 83 230 शवादेव जनार्दन 87 11 भवादेव महाद्युति 87 140 श्रविष्टायाश्च पुनी द्वो 114 11' श्रविष्ठानवणे नियों 24 13628 440 श्रान्तगात्रो यरोचत 67 39 श्राद्धकर्मणि चोदिष्ट 9 420 श्राद्धकाले मम पितु 1 IT श्राद्धदानेन पूजिता 12 391 श्रावदेवस्य देवस्य 1080° श्राद्धदेव वदन्ति ये 13 64 धाददेव प्रजापति 87 श्रावस्य च परं विधिम् ॥ थादस्य फर मुत्तमम् 161' श्रादव पलमुद्दिश्य 15 61.1938 पाद पीणाति वै विदन् 1,33 शादानि चैत्र कुर्यनित 11 12 श्राद्धानि पुष्टिकामाश्च 12 38" श्राद्धी श्राद्धरतन्द्रित 1 380 श्राद्ध च ये प्रदास्यन्ति 12 39° धान पितरश्चैव 38710 श्राद्ध प्रीणाात वै पिपन् 13 664 श्राद्धराप्यायित सोम 12 37" श्रादेराप्यायिताश्चैव 12 36 श्राद्धश्च मेध्ये शतश 41 10° श्राद्ध प्रीणाति हि पिन 11 go श्रान्तमूर्धा भुजगम 56 320 श्रान्तस्य तस्य वागेव 8541" श्रान्ता इव पतनिण 54 151 श्रान्तो मेरुमिवाश्रित 67 390 श्राम्यतीव वसुधरा 41 200 प्रास्यते व्यक्तमेवय 41 264 धाग्यमाणा युन पुन 77 394 भाग्यमाणेषु वधुपु 77 20 श्रावयामास किस्विपम् 15 srt श्रावयामास मा तदा 102 12d श्रावयामास राजानं 19 170 श्रापयाम्यात्मयोनिनम् 100 60' श्रावयेथा समागम्य 18 30% धावस्तस्तस्य चारमज 9404 धावतस्सदायाद 9 46° श्रावस्ती येन निर्मिता 946 श्राग्यन्तां पृथिवीक्षित 10029 घियमायामिरापमा 8735. धियमामोति विपुगे 39 40 घिय त्यक्ष्यन्ति राजान 67 63' श्रिय इष्टु हृपोशम् 1007" ट्रिप पमालयामिर 96 184 श्रिय शकृत्पवित्रण 62 400 ध्रिया जग्यास सर्वशः 20461 धिया जाज्वल्यमानेन 3420 प्रिया परमया ज्यरन 40 420 प्रिया परमया युतम् 108 3 113 491 प्रिया प्रप्सरसोपमाम् 88 421 ध्रीगर्भ सक्थ गमें 308 श्रीदाममजयाण 58 2. श्रीधारकाटनेमिनः 383 श्रीमसालोचनाम् 63 36 धीमरमु परिमार्ग 0251 धीमास्वस्तिम्मान 70 11 -248 - प्रीमद्भिदेतोदित ] लोकपादसूची [श्रूयतां मधुसूदन श्रीमद्भिरदितोदित 65 श्रीमन्तो मे हता सप्त 48 150 श्रीमान्शश्ससो मुनि 100 190 श्रीमानन्त पुरवृत 16 35 श्रामाकृष्णस्य पूर्वज 5441 श्रीमानगडवाहन 92 TO श्रीमागिरिमहस्त्वयम् 60 10 श्रीवत्सहतरक्षणा 52 33 श्रीवत्सास्य धीमत 31 100 श्रीव साकोऽरविन्दाक्ष 109 83° श्रीवत्साच्छादितोदरम् 7026 श्रीवरसेनोरमा युन 5520 धीवत्सो राजते श्रीमान् 42 30 श्रीवृक्ष शाङ्गिणम् 32 250 श्रीश्च तत्र यतो ति 21 16* श्रीश्च नारायणाश्रया 38 11 श्रीस्वा मत्सध्या सौम्य 71 19° श्रुत इत्यभिविश्रुत 10 67" श्रुतदेवाप्रज्ञातस्तु 24 270 श्रुतदेवा व्यजायत 24 260 श्रुतदवा श्रुनधवा 24 193 श्रुतर्वणो नघानाश्वान् 88 13 श्रुतण च भारत 876 श्रुतर्वा पञ्चभि मुन्द्ध88 11' श्रुतर्वाग्येत्य सयुगे 88 30 श्रुतगानतिथिप्रिय 248 श्रुनयानमरो भूत्वा 113 83° श्रुतमानिति भारत 28 38* श्रुनअवसि नहिरे 87 200 श्रुतश्रयाया वैद्यस्तु 24 20° श्रुतसेनोग्रसेनौ च 23 110° श्रुतस्ते दैत्यसैन्यस्य 34 1" थुन गुरालेषु वै 16 32 शुन न परमाइवे 83 120 श्रुतानि द्विजमत्तम 106 10 श्रुनायों दवगुह्यय 86 27° श्रुतायों नारदात्स 4 470 शुनिभि ख्यातिमेष्यसि 67 66* युनेन च समन्विता 7526 श्रुनो मे मस्य यशस्स 30 55° श्रुती यदेपु दै पुरा 12 120 श्रुत्या वा तपसापि वा 10070 वापारयानमनुत्तमम् 115 3, 4 श्रुत्वा चेदमुपास्यान 19 320 श्रुत्वा तद्देवराजस्तु 92 17. धुरवा तु याच्यमाना ता 1940 भुस्वा तु रामकृष्ण च 9661 श्रुत्वा त्वरितविनम 483 श्रुत्वा दध्युस्तथापरे 118 4 श्रुत्वा देव प्रजापति 31 11' श्रुत्वा देतेयदानवा 33 1 श्रुत्वा द्वारवती सर्वा 113 48* श्रुत्वा नदनदीपति 86 38' श्रुत्वा नरो मुच्यति सर्वपापै 31 1536 श्रुत्वा पञ्चविसगै तु 23 1650 श्रुत्वा परिहरिप्यामि 115 33° श्रुत्वा पितामहवच 43 66* श्रुत्वापि न करिष्यसि 115 263 श्रुत्वा प्रीये महामुने 105 3 श्रुत्वा राजा महामना 5 53 श्रुत्वारिनिधने गिरम् 32 39d श्रुत्वाणवमुपस्थित 100 44° श्रुत्वा विनीतवचन 86 26° श्रुत्वा वृष्ण्यन्धकाग्रणी 8524 श्रुत्वा शक्रपरिग्रहे 59 19" श्रुत्वा सुकरुणान्बहून् 783 श्रुत्याहमेव कृष्णस्य 101 14* श्रुत्येतिहास कात्सर्येन 170 श्रुत्वेमा भारती कथाम् 115 13d श्रुत्वेमौ व्यथित कस 96 49° श्रुत्वैतनिखिर सबै 99 26" श्रुत्वैतनिश्चित महत् 43 11 श्रुत्वैव धनुषो भङ्ग 71 54" श्रुत्वैव प्रतिपेदिर 84 136 श्रूयतामपर चापि 62 680 श्रूयतामावयोर्वच 71396 धूयतामिदमुत्तमम् 101 3 श्रूयतामुत्तर वच 4521 श्रूयता गृह्यता च वै 4674 धूयता तात शक्रस्य 59 " श्रूयता निदशा सर्वे 38 65. श्रूयता नो वरो वर 47 156 श्रूयतां भगवमिदम् 109 681 श्रूयता भरतर्षभ 23 940 श्रूपता भो नृपश्नष्ठा 100314 धूयता मधुसूदन 109 704 -249- हरि पादसूची 1-32 श्रूयतां मम भाषितम् ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ श्वेतशैलप्रतीकाश श्रूयता मम भाषितम् 61 2 श्रूयता मम विज्ञाप्य 7147* श्रूयता यन्मया कृतम् 43 144 श्रूयता येन दैव हि 476 श्रूयता वैष्णवं यश 3114 श्रूयते च वसुधरा 6 37 श्रूयते चास्य चरित 40 200 श्रूयते पूर्वमाहृत 15 16 श्रूयते भरतर्षभ 7 51. श्रूयते महदद्भुतम् 96 30% श्रूयते सुमहास्वन 109 14 श्रूयते हि पुरा विष्णु 65 360 श्रूयते हि बन रम्य 52 21° श्रूयन्ते गिरयश्चापि 5924" श्रूयन्ते जनमेजय 23 145 श्रूयन्ते पितरो देवा 11 320 श्रूयन्ते विविधानि स 105 20 श्रूयन्ते हि खियो बहर 7327° श्रेणीनां च गणाना च748° श्रेणीना दृढसयुक्त 722° श्रेणी प्रकृतयस्तथा 8675% घेण्यश्च सपुरोगमा 72 10% श्रेण्य प्रकृतयथैव 79 270 श्रेयवेव चिकीसि5496 श्रेयसा योक्ष्यसे व 19 30% श्रेयसा योजयन्ति हि 114 श्रेपस्तव भविष्यति 112 1140 श्रेयस्तेऽद्य विधास्यामि 13710 श्रेय परमभीप्सुमि 6 480 श्रेयो गम भविष्यति 7291 श्रेयो हि मरण मन्ये 107 28° श्रेष्पश्चापविकर्षणे 6278° श्रेयो योगवता योगी 44 16° श्रोतव्यमिति तच्छुरवा 15 B3° श्रोतय कस वा मया 5120 श्रोतय नारदरत्येप 100 28° नोतुमईसि कल्याणि 107 79° श्रोतुमिच्छाम तापत 100 271 श्रोतुमिच्छामहे यच 21 11 श्रोतुमिच्छामि तदत 314729 30, 48' 23 1906 105 11 श्रोतुमिच्छामि विभाध्य 1 1" श्रोतुमिच्छामि विष्णोरतु 300 श्रोतुमिच्छाम्यशेषेण 30 10 श्लाघमानश्च चिक्षेप 89 30° श्लाघ्यश्च स हि ते मृत्युः 46 184 श्लाघ्यस्त्व मृत्युराइवे 42280 श्लाध्य प्रभवता प्रभु 44 16 श्लाघ्या योगबलोपेता 8 320 श्लाघ्योऽस्मि यदि कर्मणा 35661 हिटेराधत्त सुच्छाया 2 14 श्लोकमप्युशना जगी 2 120 श्लोकमेकमुदाहृतम् 17 1 लोक त सचिवीच तो 19 11 श्लोक श्रावयितु तदा 19 14 श्लोक सोऽधीत्य पुग्नेम्य 19 13° श्लोकोऽपि चान गीतोऽय 114 11. लोकोऽय साधुसमत 77 4' श्वपाकावसधान्तिके 998 श्वपाक सह धर्तय 9920 श्वफल्कपरिवर्ते च 24 6° श्वफल्कश्च महाबळ81 1024 वफल्कश्चित्रकस्तथा 24342886 श्वफल्कस्तु महाराज 2440 श्वफल्क परमार्चितम् 24 6* श्वफल्क काशिराजस्य 2472837. श्वफल्कारिदक्षिण 24 8 श्वफल्के चिपके पथौ 87 471 श्वशुर कलपासन 96 37 श्वस तो रुधिरोक्षिता 108 29 श्व पुरी मथुरा सात 69 व सचिना समाल्याक्ष728° श्वापदप्रचुरस्व च 116 16* श्वापदैरपशोमिता 100 40 श्वापदै सर्वकीटके 117 120 श्वापदोच्चिएसलिलं 55 38* श्वेतकणं मजेश्वर 1147" श्वेतकण प्रतापवान् 148" शेतकुण्डर मूषण 33 19 श्वेतमइमिगन्तक 11541 श्वेतपुष्पाश्च पादपा 93 63' शतपहरणोऽरव्य 1101 तमानुहिमतनु 301. सेतरोहितपन्त 100 47" श्वतायननसामा 741B' भारतीय 33 10 250 तशैलस्य मूर्धनि] श्लोकपादसूची [स कृष्णतरविन्यस्त्र गोनशेरस्य मूर्धनि 65 38 वेत श्वेता तथाङ्गनाम् 98 16 खेतान इव चन्द्रमा 74 180 तेन परिवारेण 27 200 बेतेन शिरसा वृद्ध 6571 बोभाविनि विवाहे तु 87 31° पष्ठस्तु कण्डरीकोऽभूत् 16 30° पष्ट ते सप्रवक्ष्यामि 7260 पष्ठ मन्वन्तर स्मृतम् 7 29 पोडशातुलविक्रम 88 43 प षट्पदाहारदायिनाम् 5470 पदसहसान्ददर्श ह 91 44 षट्सु गर्भेषु देवक्या 47 27° षद सुता सुमहासत्त्वा 381" षडामयी महाप्रभान् 2 18 परिन्द्रोपमतेनस 21 10*22 1' षडेव देवकीगर्भा 47 220 पनमा इति योऽय व 4721 पडर्माणा वर दत्वा 47 19% षगर्भाणा वर ददी 47 140 षगर्मा नाम दानवा 47 11 पार्भा गर्भसस्थितान् 47 24 पगर्भावाम देहिन 47 पजानि सतास 4821 पनमा वै महासुरा 47 220 पङ्गा सयता सन्ति 47 23° पगुणानुपयुञ्जते 41 80 षड्वागमुपयुञ्जाना 416 पनिनिहत्य कारूपान् 87 710 पद्धिर्विव्याध नाराचै 87 520 पद्धिर्विव्याध मार्गणे 87 560 पत्रण महायशा 19 11 पानणाय महीम् 22 6° पष्टिवालसमुरसेधम् 93 54 पष्टिवर्षगते काठे 29 370 षष्टिश्च पट् च पुरपा 27 149 पष्टिनस्येति 1 श्रुतम् 10 53 षष्टिं दक्षोऽसरकन्या 3 23° पष्टिं दानवसत्तमान् 3736 पष्टिं पुरसहस्राणि 10 560 पष्टि रातानि च 113 150 वष्टि स्थसहप्ताणि 11316 पष्टिं वर्षशतानि च 23 660 पष्टिं वर्षसहस्राणि 23 66 पष्टि वर्षाणि धर्मात्मा 29 26° पष्टि पुत्रसहस्राणि 1062 स इमा दग्धभूयिष्ठा 2 4300 स उवाच ततो गोपान् 60 24. स एक परिलम्बने 43 484 स एव धन्यो धनिना 11376 स एवमुक्तो मुनिभि 35 31° स एवमुक्तो यदुना 22 26° स एवमुक्तो राजर्षि 9 61 स एवमुक्त्या बहुधा 38 22" स एव रामसज्ञो वै 65 43° स एव रावणो धन्य 44 360 स एव वासुदेवो वै 65 60 स एव वो गर्भगतान् 47 31 स एप तमस पारे 91 160 स एप पौरवो वश 114 16 स एप सुमहातेजा 118 31" स कथ गा गतो विष्णु 307 स कथ मन्यसे मयि 113330 स कदाचिदिनागमे 67 13 स कदाचिद्वने तस्मिन् 55 17" स कन्यासहित श्रुत्वा 9256 स करीपाइरागासु 63 160 स कश्यपस्यात्मभुव 34390 स कसस्तन सभूत 44 66° सकस व निवेशनम् 48 51 स काञ्चनघटोत्तरा 720 सकाननवन गिरिम् 617 सकारणा मतिं कृत्वा 43 230 स कालयवनश्चापि 8540 स कालयवनो नाम 25 11° 85 15° स कालयवनो नृप 85 16 स कालयवनोऽभवत् 25 1d स कालयवनो महान् 84 120 सकारयवनो स्था 85386 सकिनरमहानाग 93 55° सकिनरमदोरगा 11 36 स कुअरस्त्यमापन 44 70% स नो रङ्गसागर 75 स कृष्णतरवि यस्त 61 अ" 251 स कृष्णपाश्वमागम्य] चिकितिसतपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [सनला इव तोयदा स कृष्णपार्श्वमागम्य 109 81 सकृष्णस्तत्र बनवान् 79 1° सकृष्णहस्तात्सप्राप्य 29 400 स कृष्ण गोवृपो दृष्ट्वा 64 13" सकृष्ण तत्र सहसा 70286 स कृष्ण पुण्डरीकाक्षम् 78 17° सकृष्णेनायत कृत्वा 76 290 स कृष्णेनावपतता 56 30 स कृष्णो भोगबन्धनम् 56 12 स केशी बह्वचेष्टत 67 36* सक्त कामेपुवै मया 19 251 सक्रोधखिदशेश्वर 61 " सक्रोधो दानवेश्वर 38 20 सखामात्यश्च वीर्यवान् 112 12' सखायौ ब्रह्मदत्तस्य 18 170 सखा हि गाल्वो यस्य 15120 सखिवञ्चोपगृयैनम् 95 10 सखीगणता तदा 107 10 सखीजनवृता सदा 107 30% सखीद वै कथ गुह्य 108 101 सखीना च विशेषत 107 67 सखी भयसमन्विताम् 107 29 सखी सर्वदरस्यैपा 40 31 सख्य प्रेम्णा च भापितम् 107 83° सख्य सर्वा विचेतस 10731 सख्ये च विनियुज्यताम् 62 700 सगण स महाबल 97236 सगणा विचार है 48 360 सगत्वा जयता श्रेष्ठ 968 स गरवा ब्रह्मणो लोक 39 181 स गत्वा मथुरा राम 8352* सगरणीतिवर्धना 10 61" सगरस्तु सुवो बाहो 10 25 सगरस्यात्मजा वीरा 1064 सगर नाम पार्थिवम् 10 354 सगर वारसामरस 10400 सगर स्वां प्रतिज्ञा घ 10 41* सगरेण महात्मना 10 30,451 सगर्मा एतान्यगात् 10 3s सगवाक्षार्धचन्द्रा 740 सगवाक्षेण दशितम् 33 11' स गाधिरभवदाना 2384 सगारयस्य चरित 1568" स गुरो पुत्रमादाय 7920 से गृह्य वचन तस्य 8670° सगोकुर परिग्रहा 69 33 सगोपीगोपवृद्धश्च 51 270 स गोपै सद धर्मात्मा 96290 स घोररूपान्समामान् 646 सच गोपजन सर्व 51 350 स च तस्यै वर प्रादात् 393° स च ता शुभलोचनाम् 89 30 सच तेनैव नाना तु 51 36* सच दिग्यो रथो राजन् 22 13° सचन्न इव तोयद 58230 सचन्दाम्भोदवर्चसम् 422 स च पुत्रो मम ज्यायान् 49 8° स च प्रासादमुख्यो य 93 41' सच माझणसतम 103 256 स च संकर्षणो युवा 53 35° 50 1866 2171 स चापि तिमिना हृत 79 11 स चापि विसथ पुत्रान् 23 53° स चाप्युमायुधरतात 15 360 स चाभिरचितस्तस्या 87 15. स चाश्चर्य सुरेष्वपि 100 570 स चास्योरसि विस्तीर्ण 42 3. सचित्राशस्त्रिधरणा 74 20 स चिन्तयित्वा धनुए 721" सचिन्तयित्वा सरब्ध 61 26° सचिवानात्मनो हितान् 47 11 सचिवमनकोविद 15 46 सचिवनवासिभि 5500 सचिौ साउ पूजिता 41 8' सचिवी चास्य पामार 19 19° स चेटसमरोऽमवत् 15204 स चैयासितदक्षिण 70 स चोपेन्दो वृष हत्या 64 23. स चोरगपति मुद्ध 568. सपासच ममवारमा 104 22 समोरसेधिनः सर्वे 817. समिधामा रिय 81 86-88 23 म सिपाहुर्षिशिरा 38 47. स जगाम शिरिन 49 13. स उटामस प्ण 4221 सारी प्रतिमा 22 35. सातोपा 014 258 साराम्भोदसा] लोयपादसूची [सतूणीरा सतोमर सजराम्भोदसाश 38 40 स पहारैव वेगेन 58 200 सज्जमान पदे पदे 99 330 सज चोपायन कृत्वा 69 28° सजीभवत माचिरम् 53 90 सज्जी जयश्तोत्सवी 65 87 सज्वराणीव शरस्य 61 48° सतत कुण्डर प्रिय 77 8 सनत चानये रत 15 290 सतत दु समाजनम् 69 30 सतत पीड्यमान च 696 सतत प्रक्रिया स्मृता 75 11' सतत वितते वृत 54 32 स वकारणमाचख्या 1970 स तत्तालयन घोर 57 13° स तत्प्राप्य महद्राज्य 20220 स तत्र गत्वा रग्याणि 832 स तत्र गर्भवसति 489 स तत्र त्यरितो द्वारि 48 230 सवय दानव क्रीडन् 44 24° सदर प्रविशवेव 407 स तय प्रविशन्हष्ट 49 29° स तत्र वयसा तुत्यै 35 230 सतत वासयामास 24 6° स तत्र विविशे हष्ट 4020 समग्र समुदाचार 100 130 सतगाम्नुपतिप्रख्य 404 सतन पादेन 506 स तरसबै हपीश' 92 17" सतनुजा सनिस्त्रिंशा 81 760 सतया निद्या छस 4034° सतपा माल्या वीर 559 स तयोर्दशयामास 71 10° सतराक्षेपमन्ययो 71 34 मतरोत्तमभूपिता 74 स तस्य देहो विमुस 38 49° स तस्य प्रमुखे पाद 74 33° सतस्या नायामास 89 90 सतम्या नारदो जज्ञे 3 13° स तस्या पितृकन्याया 13 45° स तस्यैव वन्यन 446 सत देश तदा पुरै 10 47 सत नारायणाश्रमम् 403 सस निहत्य समरे 109 296 स त याहुमशक्को चै 67 34 स त मूर्धन्यवाडयत् 71 13 स त ध्यादिश्य सनय 9530 स त श्रीवत्सलक्षणम् 621 स त वर्षपरीतेन 68 170 स ताड्यमानोऽतियरे 38 31° स तानबुध्यरखचरान् 18 30 स तान्सर्वानाचभापे 83 4. स ताभ्य सहसैवाथ 2016 स तान्या मुमुदे राजा 80 40 सतामक्रोधजो धर्म 44 35° स तामाह प्रसजन्तीं 73 240 सतामुद्वेजनीयस्य 78 7° सतारका चौरिय सा 86494 स तासु जायामास 23 13° सता गतिरिय नाया 41 314 सता माता पद्वती 9 81° सता मार्गमनुव्रता I 130 सता वृत्तमपूजितम् 116 100 सति कार विपर्यये 48 400 सती चेय शुभा साची 99 450 सती खमसि भामिनि 107374 स तु फेलिकिलो विप्र 46 29 स तु छिद्रान्तरप्रेप्सु 58 16" स तु तचापरत्न वै 71530 सतु दूतवच श्रुत्वा 67 4° स तु देवेश्वरो मम 12 191 स तु देश मम निग्ध 57. स तु द्वादश वर्षाणि 10 130 स तु द्वापरपर्यते 40 36* सतु पञ्चजन हवा 79 16° सतु प्रमापयशह 113 200 स तु मध्ये उदास वै 51 184 स तु मा बीडित दृष्ट्वा 102 20° स तुषमु च दुधु च 22 29% स तु रोकस्त्वया कृष्ण 62 33° स तु चेमकशारायाम् 114 11. स तु वेष्टितसर्वाङ्ग 10884 स तु शक्रवच श्रुत्वा 21 26° सतु सत्यव्रतम्नात9940 स तु सकरणो युवा 47 3158 30% सतूणीरा सतोमरा 81 761 - 253 - स तूमुखैजयाशी ि] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ सत्सु प्रादुष्कृतानिए स तून्मुखर्जयाशीमि 11020 स तेन रथमुख्यैन 20 14° 22 6° स तेन वज्रकल्पेन 74 349 स तेन व्यचरन्मार्गान् 108 42 स तेनास्त्रबलेनाजी 10 370 स तेनाशेन जगतीं 45 320 स तेनैवानुबन्धेन 19 33° स ते बन्धु सहायश्च 62 780 स ते भर्ता भविष्यति 107 16 स ते मृत्युभविष्यति 46 15, 16 स से रक्ष्यश्व मान्यश्च 62700 सते चिये नगष्टे 47 48° स तेषामनुपस्थानात् 38 20 स तेषामभवदाजा 15 28° स तेषा ता गिर श्रुत्वा 32 3000 स लेपा नरदेवाना 100 190 स तैर्वृत पुरीं गत्वा 912 स तै परिवृतो राजा 85 200 सतोरणपताकानि 92 21° स तौ रथस्थावासीनी 70 30° सकाराही विशेषत 72 160 सत्कृत्य च यथाईत 95 11' सत्कृत्य परिपृष्टस्तु ! 14° सत्यवान्गुणसपन 31 140° सत्वशीलगुणोपेता 1880 सवस्थो नित्यमासीय 113 29° सचेषु पृथिवीपाल 5 52° सत्पथादायता गत 44636 सरपथे हि स्थिता सर्वे 41 28° सत्पुत्रण स्यया पुर 11 21 सरपुत्रेण महात्मना 524 सत्यक्णस्य दायाद 114 b° सत्यकों महाबाहु 1144° सत्यकथ महारथ 8768698 28" सत्यकस्सारमज शूर 9827 सत्यक दारुक चैव 858 सत्यकेतुरजायत 25 सत्यकेतुर्महारथ 23 71 सत्यजित्तस्य सनय 1516" सत्यनित्सेनजिय 98 16 सत्यधर्मभृतां धेटा 18 :- सत्यधर्मरता दातान 31 350 सत्यनेनलयाय 720 सत्यभामा च पौलोम्या 92 530 सत्यभामा तु तवृत्त 29 70 सत्यभामा युनर्वेश्म 93 40% सत्यभामामनिन्दिताम् 29 2' सत्यभामा यशस्विनी 296" सत्यभामासहायवान् 91 396 सत्यभामोत्तमा वीणा 28 3492 60694 27" सत्यमाह बल श्रीमान् 89 40° सत्यमेतद्रवीमि ते 88 d सत्यवत्यामजायत 23 850 सत्यवन्त महात्मान 1357" सत्यवादी पुण्यमति 213* सत्यवतस्तदा रोष 108 सत्यवतस्तु बाल्याद्वा 105° सत्यवतस्तु भक्त्या 11010 सत्यमता महात्मान 23 42° सत्यवतो महाबाहु 9 99° सत्यसघस्य तच्छुत्वा 62 99% सत्य च प्रियमच्युत 62 88 सत्य चापि प्रपरस्पन्ति 117 40% सत्य धर्मस्तपश्चैव 113780 सत्य बत पुरा वायु 92 320 सत्य भूहि सुत कस्य 2040" सत्या देवगणाश्चैव 7 100 सत्यानवपरायणा 112 121' सत्या नाग्मनितीमपि 88 41 सत्ये धर्म घ निरता 414 सत्येन चैव सुप्रोणि 9 10° सत्येन प्रप्रवीमि ते 78 36 सत्ये नष्टेऽनृते स्थिते 31 931 सत्येनापत्य दया चै 62 83 सत्ये माणाभिरक्षणे 11742 सत्येष्ट सत्यविक्रमम् 62 830 समाजिव प्रसेनय 81 103* सग्रामिछाधयना 29 10 सत्राजित सतो हरया 293 समापिती सत्यभामा 8842 समानितो दश स्वासन् 28 31 समिण समपद 3915" सरबजम्मान गर्भस 1141" सरवन मावसपमान 271* सस्यायुधागारना 71 16. सरमु मानुपलाGिS सत्सु यास्यन्ति पुरुषा ] श्लोकपादसूची [सधूममतिदारुणम् सत्सु यास्यन्ति पुरुषा 65 80° सत्सु वाध्यतां गता 65 793 सदक्षिणस्य यज्ञस्य 39 28° सदक्षिणेऽस्मिन्पुरुपे 100 84 स ददर्श गृहे कृष्ण 7820 स ददर्श जल सुप्तान् 47 24° स ददर्श मखेवाज्ये 39 20° स ददर्श महायाहु 92 63* स ददर्श महामना 28 20% स ददर्श विपर्यस्त 50 130 स ददर्श शिवे देशे 49 16* स ददर्श सुपर्णस्थ 38 3° स ददर्श सुरान्सर्वान् 40 43° स ददर्शातिथि श्लाघ्यं 46 40 स ददारितान्यूपान् 39 220 स ददर्शोपविष्ट वै 62 3° सदन मे सुरोत्तम 86 27 सदने ब्रह्मणो यथा 1001 सदने वासुदेवस्य 93 b3° स दपंपूर्णों हत्वानी 15 370 सदश्व इति ते त्रय 15 21 सदसचंच यत्परम् 104 220 सदस्यस्तत्र भगवान् 2024° सदस्य सदन सवम् 31 6° सदस्यानाच विप्राणा 43 10% सदस्यान्यजमानाश्च 3024' सदस्या सोऽम्यनुज्ञाप 18 50 सदस्यास्तस्य शौनक 115 सदस्या सदसि स्थिता 39 24° सदस्येभ्यश्च भारत 20 250 सदस्यैरमिजिता 38 70% सदा गा प्रददी हि सा 28 371 स दानवसहस्राणि 1126° स दानवो यरलाघी 44 26° सदा पापमति शेठ 65 691 सदार प्राविशद्वनम् 22 41 सदार स्वर्गमाप्तवान् 22 420 सदारापत्यवाधव 56 34 सदारो वनमेय 19 23 सदा सत्स्वितरेषु च 44 41" सदा हि प्रार्थयामास 2920 स दिश प्रदिशश्चय 38 36* सदुरारमा विवर्धते 65 230 सदुदिन इवाचर 421 स दुष्टो हेपितपटु 44 68° स दूत कारयान 85 31" सदश पुण्डरीकस्य 556 सदश प्राप्स्यसे वीर 106 1 सदश राजशार्दूल 78 3. सरश सजन पति 107 Thd सदशो ब्रह्मणो गुणे 35 234 सदशोऽयमिति प्रभु 8 17 सहशोऽस्ति पराक्रमे 107 76 स दृष्टमाय बुद्धन 8561° सदृष्ट सतत मत 3926d स दृष्ट्वा तूर्णमाया त 83 54 स दृष्ट्वा भूपित रङ्गम् 7260 सदेवदानवा मर्या 100 620 सदेवनरदानवा ॥ 36 स देवानभ्यनुज्ञाय 45 470 सदेवासुरमानुष 112 1080 सदेवासुराक्षसाम् 35 61 सदेवो विनशिष्यति 3821 स दशस्तेजसा वृत 4061 स दैत्यसघान्समरे 108 410 स दैत्य क्रोधमूर्छित 44 46% स दैत्या प्रमुखे हत्वा 35 130 सदैवतगणाल्लोकान् 44 24° सदोपस्पृशतस्तस्य 2770 सगतश्च न सशय 1311 सद्भावस्त्वयि यो मम 99261 सद्भिस्त्रिपवणार्थिभि 55 44' सद्धि स्थान्मे निबईणम् 23 141' सद्य उत्तस्थुराहये 35 19 सद्यस्तात निवर्तितम् 15 560 सद्य फलति कर्माणि 13 33. सद्य फरमवामुहि 23 780 स द्या क्रीिटेन लिखन् 38 386 सद्या दिव भुव चैव 3724 सद्योजातश्च बालक 10336 सद्योद्धृतावमुक्त च 83 220 सधनज्ञातिया धवा 84 11' सधवी कवची वात 222 स धर्मविजयी राजा 10460 सघर्माणो बनेचरा 16 251 सधूममतिदारुणम् 9 57 -255- सधूमा पनागेन्द्रस्य] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ सप्तराने तु निवृत्त सधूमा पनगेन्द्रस्य 56 go सधूमा पनगेन्द्रास्ते 56 111 सत सगतो मैथै 61 304 सध्वजाकारमव्ययम् 57 17" सध्वजेन च केशव 103_g सन किचिदुवाच ६ 89 38* स नक्षत्रपथ गत्वा 37 620 सनत्कुमार इति य 12 120 सनत्कुमारनिर्दिष्टान् 16 3° सनत्कुमारप्रमुखै 2014 सनत्कुमारश्च महानुभाव 31 162 सनाकुमारस्य वपु 11080 सनत्कुमार च ऋर्षि 1310 सनरकुमार साध्याश्च 43680 सनत्कुमारेण तदा 18 6° सनत्कुमारेण पुन 13 1° स नन्दगोपस्य गृई 68 1569 1" स नन्दगोप स्वरित 492° स नन्दगोपो गोपाश्च 50 230 सनन्दनवन चैत्र 46 स नस्त्यज्य गछसि 77 184 स नारदस्थागमन 4690 स नारदोऽथ ब्रह्मर्षि 44 12 सनिनादेपु गोपेषु 687" स निर्जलाम्बुदाकार 6220 सनिष्पतितमस्तिक 7670 स निहत्य प्ररम्ब तु 58 550 स नि श्वास विमुञ्चति 9 63* स नीतो यमुगातीरम् 78 44 सनीहार इवाशुमान् 33 221 स नूनं पूर्वदेहिक 65 330 सन्ति चैव पतिव्रता 73311 सन्ति ते बहव पुत्रा 22 250 सन्ति स्त्रियो नीचटत्ता 7331° स पक्षयरविक्षेपे 92 410 1100 स पक्षवातसक्षुब्ध 9530 सपक्षा इव से नया 747" सपशिगणमातन 92 39" स पश्चजनमासाद्य 79 180 स पञ्चधा शरीरस्थ 3047 सपताकम्पजोदय 336 सपसाकायुधध्वजा 8176 सपनाकालय घ726 सपत्नानीकमर्दनम् 33 164 सपत्नीशतसकी 99 34. सपरन्या च गरम्लस्या 10330 सपल्ल्यो वेगगर्विता 8344 सपने पग्मनाभस्य 4221* स पपात च रङ्गस्य 75 440 स पपात नरेन्द्राणा 100 19. स पपात महाबाहु 88 252 सपरीवेपमुधन्त 34 36 स पर्वतगुहा काचित् 85 44° सपाध्यमानो गर्भोऽथ 3 1070 स पीठे काइने शुभ्रे 100 30° सपुत्र च जनार्दनम् 100 सपुर भोजयित्वात 103 1 सपुर सहबान्धव 65 63° सपुना स्वफले पुने 69 14° सपुष्पस्तबकद्रुमा 74 104 स पूज्यमानविदशै 92 68° सत एते महर्षय 7 अ सप्त चाप्सरसा गणा 91120 सप्त चैव महापथा 93296 सप्तजातिकृतेन वै 16 310 सप्तमातिपु भारत 15 674 161 सतनातियु सप्तैव 15 139 सप्तजातिप्वजायत 1630" सप्त स्वेते प्रजायन्ते 1 330 सप्तद्वीपान्विभावसो 23 161 ससदीपा मपचना 4 10 22.1823 11' सप्तद्वीपा ययातिस्तु 22 18" सप्तद्वीपेश्वरोऽभवत् 23 138* सत धर्मविपक्षणा 1017" सप्तधात न्यन्तित 3 1061 सप्ताह विशां पते 23 1180 सत प्रमाण इत्येते 1 30 सप्त मानसचारिण 181 सप्तमे मासि रोहिणीम 47 30% सप्तमो अमदग्निच 731 सप्तमो देवीगर्म 47 30 सप्तमोऽय भयादिति 4732 सप्त यज्ञातानि 23115. सप्तराध महात्मना 963 सप्सरायमीर 10765. सप्तराय नित 61 61 । 256 सहीणां प्रजापति ] श्लोकपासची [समन्ततश्चाप्सरस ससाणां प्रजापति 2 114 सप्तवर्षों यभूवतु 52 1 सप्तविंशतिमिन्दोस्तु 20 21. सप्तविंशति सोमाय 324 सप्तविंशत्तु या प्रोक्ता 3530 सप्त ग्याधा दशाणेषु 19 180 सप्तरकन्धगतो रोकान् 34 27° सप्तस्वरगता यस्य 34286 सप्ताजायन्त सोदरा 16 18 सप्तातीतानि भारत 7 38 सप्ताना ब्रह्मजन्मनाम् 1 30* सप्ताइ भूमिकम्पनम् 9 56 सोमान्देवकीगर्मान् 47 100 सप्तमे वसव प्राप्ता 4348° सहते जपतां श्रेष्ठ 13 4 सप्तते ब्रह्मण सुता 770 ससवासालौकस 16 28° सप्रतिज्ञामिद वच 32 31 सपातमहासानु 92 40% सप्रमोदा करेणव 63 300 स प्रविष्ट प्रवेगेन 83 3° समाश्निकमकातरम् 75 10 स प्रेक्षन दिशो दश 108 81 सफेन रुधिर वमन् 67 340 स फेन बज चैव 67 25° स फेनगावनिर्माण 6726° सबदमुकुट श्रीमान् 78 40% स बागदनियूह 63 21 म भी मूर्तिरिङ्गस्य 91 6° सबलास्त महीपाला 81 25° सबला सानुगाश्चैव 34 2 सपरेन तदा पूर्ण 58 50° सवरेषु नरेन्द्रेषु 43 55. सालो रावणो इत 44 33 स याणैरपरिक्षत 76 40 सघालयुक्तीद्ध 56 18° सदालद्धा सा चैव 79 27* सवाला हृष्टमनस 79 26° सगप्पा वास्यमयवीत् 99 34* सबाप्पा हिमवृष्टय 36 13 सपाहुचतमुद्यम्य 38 29 समनारकटिग्रीव 57 20% समव कार्तिकयश्च 106 590 स भवान्कथयत्वेना 11 18" सभा फायनतोरणा 9128 सभाक्षो भगकारातु 28 36 सभाग्या स्म यथा पुरा 83 14 सभाण्डीरवटप्रख्य 58 25* सभाद्वारमुपागता 109 586 सभानरश्चाक्षुपश्च 23 15% समानरस्य पुनस्तु 23 16" सभामध्यगत प्राह 29 350 सभामागम्य विष्ठिता 109 161 सभामाविविशुईटा 89 290 सभायामाहता तदा 109 16" सभाया यदुससदि 84 1 स भारमसहस्तस्य 58 24° सभार्यस्त्वमिहागत 99 361 सभाय च जनार्दनम् 92 43° सभायें तस्य धीमत 90 120 सभार्य सहबान्धव 56 360 सभार्यों विनशिष्यति 7361 सभार्यों विवुधश्रेष्ठ 92 510 सभा ता स सुरेश्वर 91 311 सभा समानयामासु 95 13° सभा सुधर्मामादाय 86 67,71° स भिक्षामददाबीर 23 510 स भीत प्राञ्जलिर्भूरवा 5 10 सभृत्य सपुरोहित 65 851 स भृश भयसविन 71 210 स भीम नरक हत्वा 92 33° समक्ष भीमकस्य 88 11 समग्र वैष्णव तेज 62 16 समग्र शुचये शुचि 1 22 समग्रा विसहिष्यति 86 376 समणि स्यन्दते कम 28 13. समतीतान्यनेकश 31 10d समतीते द्विजर्षभ 929 समतीते महाबल 21 29 समतीय जलाशयम् 49 18 स मत्तदनी दुष्टारमा 74 23° समत्तो बलिना श्रेष्ठ 83 270 स मत्तो यमुनामाई 83 260 समनहान्त दाशार्दा 87 420 समनह्यन्त सर्वश 110361 समततश्वाप्सरस 82 13 -257 हरि पादसूची-33 समन्ततः संवृतासी चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ समाप्तवरदक्षिणः समन्ततः संहवाडी 86. 46. समन्तात्पर्यवारयन् 17.1. समन्तात्पतिनादिवाम् 93.14. समन्तारप्रत्यवारयत् 110. bf. समन्तात्समवाकिरन् 9. 67. समन्तादधंयोजनम् 94.11. समन्तायोजन सायं 55. 46. समन्नादृष्णिसैन्येन 102.2. समन्ताद्वेष्टिता बलैः 81. 48. समन्तामर्पिता: 54. 26. समपच्छन्त यादवा: 109, 11, समप्रचार चगा 49.180, समभित्यक्तजीवितम् 81. 101. समभित्यक्तजीविता: 81. 98. समभिलपञ्जनमेजयो यशः स्वम् 118. 40. समन्युतियते बुधः 20. 43'. सममभ्युरमयन्तीव 59 38. स ममार भृशं इतः 64.20. समयं कारयांचवे 29.4", समयामप्रतापेन 15 80% समयाः शपथास्तथा 116 28, समयेन महायुतिः 10. 40'. स मयेनासुरेन्द्रण 38. 6s. समयो धेष कल्पित: 75. 19 समरस्य परः पारः 15.210. समराः प्रजग्मिरे 81704. समरे कातरात्मनाम् 8.m. समरे कालनेमिना 37. 48. समरे क्षत्रियर्षभाः 81. 70. समरे युद्धशीण्डेन 31. 1276 समरे राजधर्मेण 8276. समरे रामगोविन्दी 8.6. समरे स्वेन तेजसा 38. 46. समर्थममितौजसम् 3.99. समय युधि निप्रहे 85. 11. समर्थः पृथिवीपते 959 समर्था ससि धारणे 6 समलान्तरसंवृतः 17. 36. समवच्चाय पार्थिवः 85.22. समवायीकृताः सर्वे 81. 28*. समाये सदारते 60 321. समसमायामापा: 99. 37* समतोऽमनपसदा 53. 11: स महात्मा महातपाः 1. 14. समाकोन्यिदृश्यन्त 96.66. समाकुरजलोपेता: 93 83. समाक्रामन्त बहुधा 21, 286. समागता महावीर्याः 3 15. समागम्य तदा वैन्यम् 5,276 समागम्य परस्परम् 3. 474 समागुलिः समनख: 109. 83*. समाजम्मुर्महावीर्याः 89. 2. समाजग्मुः सदशश: 82. 1345 समाजास्तवो मेरी: 37, 24. समाजद्वारि तितु 73. समाजद्वारि माचिरम् 73. 38". समाजबाटः शुशुभे 74.4. समाजबाटाशिफम्य 72.190. समाजवारे परिणां 76 36°. समाजवारे विक्रीव्य 70 37'. समाजवारे संस्तब्धे 74. 16. समाजबाटो निर्म: 76 9". समाजविधिमुत्तमम् 72.12. समाजस्तत्र सर्पाणां 70. 13. समाजदे राजसूयं 20.22. समाज मेरुमूर्धनि 46. 19. समाज सहपूर्वज: 74.39". समाज शुशुभे तदा 100. 18. समाजे त्रिदिवौकसाम् 42. 13. समाजे मयसोभाब 72.11. समाजे समवर्तत 15.16. समाजोत्सवमनिधी 75, 336 समागमहदोपेण 5. समा द्वादश राजेन्द्र 9. 95. समाधाय सवी तु 8. 136 समाधायेविनय 1. s. समानन्तःपुराणि घ86. समानवता कपिलों 16.6. समानवसौ या 49.01. समान पूर्यदर्पसा 38. #, समानः संनिरतते 3040'. समानीय स्वमन्य 82 251 समानुहमान 5.21. समातम चिराय मन्दति 118.ant समातमिदमायारयं 43.68. समासयरवण 31. 142. -258 - श्लोकपादसूची समामान्य च पेशवः] [सम . समामाच्य च केशवः 92. 36. समाभाष्य यदुश्रेष्ठान् 95 18. स मामुवाच धर्मारमा 11 30. 12 20, स मामुवाच प्रीतारमा 12 20% समामुगचाउचर. 100. 37". समास्तेन योगेन 8638. समार्गमाणः कामानाम् 22. 34". समाविष्यावधूय च 48 28. समावृत्य व्यवस्थिता 13.63%. समाश्रित्य जरासघम् 80. 4.85. 28.96. 27". समावस्य च माधव: 102 20. समासाकंसमोजसा 66.24. समासाद्य जनार्दनम् 91. 48. समामीनेषु सर्वेषु 96 220 समादितो निराहारः 19. 11. समाहूतौ मदपिभिः 5 33. समां च कुरु सर्वत्र 68". समां परिभववेव 43 20°. स मां ब्रह्मरियाद 42. 42", समिद्धोऽग्निरिवाध्वरे 108. b14. समीक्षकालमाइवे 36 31. समीपमाजगामाशु 43 17. समीपं तं महीधरम् 61 29 समीपं दु सितो ययौ 78.11. समीपं नृपतेर्गरवा 71. 46. समीपं मानवेन्द्राणां 100. 11'. समीपे तीरजा दुमा' 56 10. समीपे देवदेवस्य 107 40. समीपे बजगासिनाम् 65 89. समीयुयुद्धालसा 81. 27. समीयुयुध्यमाना वै 35. 2. समीयुले सुमरन्धा: 37, 29. समुनामणिविद्योतं 422 समुरिरवपताकानि 93 26°, 31. समुच्छ्रितमहाध्वजः 87. 43. समुष्टानि सारसैः 59 36. समुत्तस्थुमहीक्षितः 81. 27. समुत्तस्थुर्ययामम् 10 61. समुत्पन्नस्य पुलहात् 13 58. समुत्पन्ना सुमहता 3 80. समुत्पनाः स्वधायां तु 13. 50. समुत्पीन कारख्य 5. 24. समुदमायुधध्वजम् 88 3. समुदर महाभुन 109. 23. समुद्यतमहारास्ना 81. 93. समुद्रक्षोभणायुभी 81 51. समुद्रतनयायां तु 2 31. समुद्र दश च द्वेच 86 360 समुद्रपर्वतवनं 12 37. समुद्रमध्ये दुष्टारमा 105 9. समुद्रमभियास्थतः 5 30'. समुद्रमानयनां 10 66. समुद्रयोनिर्मधुहा 34 35. समुद्रश्चार्यमादाय 10 32. समुद्रसलिलेशयाः 2 33. समुद्रस्तमुवाचेद 79 14. समुद्ररत्वेवमुक्तस्तु 100 46". समुद्र सानयामास 9 68. समुदं गमयिष्यति 97 330 समुद्रं मकरालयम् 95 3. समुदं मेनिरे तं हि 61 13. समुद्र प्राजलिर्भूत्वा 79 13. समुद्र. सह गया 43. 11', 23. समुद्र स्तम्धतोयोऽहम् 104 12. समुद्राणा समागमे 58 36. समुद्रादिव सिन्धव. 112 57. समुद्रादुपरब्धवान् 10530 28 124. समुद्राम्भोदशीतले 40. समुद्रे च ध्रुतोऽस्माभि 83 12° समुद्रे पूर्वदक्षिगे 10 47 समुद्रेभ्य इवापगाः 31, 211 समुद्रे चै भविष्यति 35 58. समुद्रेऽई सुरा पूर्व 43 15. समुद्रोदूतजनिता 54 36. समुद्रोऽद्भिविमर्दितुम् 43 21. समुद्रो घालुकापूर्ण 9 526. समुद्रौषनिभर्घनै 54 32. समुपोढे सुदारणे 21 13. स मुहूर्तात्ततः कृष्णः 103 28% समूरचिटपौ भग्नौ 51 18. स मृत्युना परीतायु 995. समृदचत्वरवती 8647 समृद्धभवनापुरा 44544 समृद्धनस्य कंसस्य 694 समृद्ध्या पासवोपम 118 264 स मेघनिचयस्तस्यौ 61. 5115 259- स मेघौधेरिवार्णव ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य (सर्व एते दनो पुनी स मेघौधरिवार्णव 744 समेतमभवत्पुन 108 38 समेतान्सपितामहान् 40 43 समेता मघ्रयामासु 25 15° समेता प्रत्यपूजयन् 38 500 समेत्य धारयामासु 206 समेत्य मुमुदे राजन् 7994 समेत्य यदुसिंहस्य 92 27° स मेने माल्यजीवन 7121 स मे भर्ता भवेदिति 87 151 समेयाता रामकृष्णी 762° समेयु सर्वपार्थिवा 1000 स मेरुगिरिमासाद्य 92 47* समेषु मरुधन्वमु 950 स मैथुनेन धर्मेण 35 समैश्चात्यन्तदुर्गमै 61 43 सम्यगाराधितस्तया 398 सम्यगाह महानृषि 3 20% सम्यग्यतितुकामस्य 44 30% सम्राट् कुक्षिविराट् प्रभु 264 सयक्षरक्षोगन्धर्वा 11 36 सयक्षोरगचारणान् 32 111 सयज्ञा सक्रिया चेदा 31 961 स यदा ददृशे कामान् 22 35 स यदा यौवनस्थस्तु 9990 स यदुपवरो विमु 84 320 सयनै सुसमाहित 81 16 स यमाम्या प्रवृद्धाभ्या 51 16" स याच्यमानो देवश्च 20 30° स यादवनरेन्द्राणा 100 150 स युद्धकामो नृपति 25 13 सयुवा च प्रजस्तदा 51 270 स रत्नाकरभूषणाम् 79 21 स रथ पौरवाणां तु 2270 स रथमपनियों 81 20% सरमाणस्तथा चैव 378 सरसस्तस्य पाअंत 1896 सरस्वय कुहरेट 18 120 सराजयक्ष्मणामु 20 46° स राजराज शुशुभे 34 17. स राजा काचनपुधि 23 27 स राजा नामेजय 220 18 11,16 स राजानमथाधिपछत् 191f स राजा परमप्रीत 19 271 स राजा परमापन 19 10° स राजा सागराकार 81 21° स रामकरमुक्तेन 89 490 सराष्ट्रौ विनिपातितो 97 10% सरासि च श्रियान्वलन् 59 40' सरासि सुरभीणि च 8320 सरितश्च सरासि च 93 68 103" सरित नर्मदामनु 88 6° सरितो रोकभावना 100 456 सरित्सु सह दैवतै 480 सरिद्भिर्वा सुरेश्वर 437 सरीसृपेभ्य कीटेभ्य 49 11" स रुक्मत्सरुमुद्यम्य 44 50° स रुद्रमभिगम्याथ 1067 सरो यस्या समुत्थितम् 13 250 सरोष समुदैक्षत 73 4 स रोपेण तु चाणूर 758 सरोपो वाक्यमग्रवीत् 47 190 सर्गकारश्च सर्गाणा 30 370 सर्ग स्वारोचिपे स्मृत 3 940 सर्पभूत समन्तत 108 83 सर्पभोगभुजावुभी 517 सर्पभोगमये शरै 108 86' सभोगविवेष्टित 108 85" सर्पमज्ञातरूपिणम् 457 सर्पमाणी विरेजतु 519 सर्पराजवश गतम् 56 21 सर्पराजो विषायुध 5637 सर्परोकमिमं यथा 70 16 सर्पसनादन तरम् 115 34,44 सर्प सपरिस्तन 56 350 सपाणामय रक्षकम् 47 सर्पाणाममितौजसाम् 3 83 सपण च महीपते 6230 सपाणा दर्शन तीन 66 24 सशसमिम इदम् 5024 सर्पिता पध्यमानेन 49 सर्पनि महादं 56 16 सदमिय कापितः 81 67' सरिलिशमान 712 सपमय 2. 250 सर्व पते दनो पुया 370 a 260 मत जोमयं सुतम् 85. 11'. सर्व एव दिवौकसः] श्लोकपादसूची [सर्पयादवनन्दनः सर्व एव दिवौकसः 43.11. सर्व एव महारथाः 88.. सर्व एव शशतिरे 28. 174. सर्व एव समाहिताः 16. 104. सर्व एव सुरश्रेष्ठाः 43, 13. सर्व एवामराः सुखम् 13. 69. सर्व एवामितौजसः 13. 241.71.1. सर्व एवायुपः क्षये 16. 14. सर्व एपावतारयन् 43. 69. म एपासुरोत्तमाः 112. 21', अ'. सर्व एवोपतस्थिरे 5. 25. सर्वकर्मेति विश्रुतः 10 .. सर्वकामकरः शिवः 60. 25. सर्वकामगुणैर्युतः 93. 46. सर्वकामदुघा गावः 5. 1. सर्वकामदुधा दोग्ध्री 6 38. सर्वकामदुहां दोग्ध्रीं 10. 13. सर्वकामप्रदायिनः 29. 27. सर्वकामफलप्रदाः 11. 38. सर्वकामफलैस्तु यः 1.. सर्वकामसमृद्धेषु 13. 51. सर्वकामरुपचितैः 29. 23. सर्वकार्यपुरोगमः 62. 18. सर्वकार्येष्वनन्तरान् 86.77. सर्वकारतृणं वनम् 53. 31. सर्वगेनाशुगामिना 86. 65'. सर्वगोपसुसंकुलः 60. 13. सर्वघीपस्य गृह्यताम् 60. 12. मयोपस्य संदोह: 59. 29. सर्वज्ञो धसि मे मतः 11.34. सर्वतः पिपीलिक 85. 33. सर्वतस्तैः प्रदीप्तायैः 110. 40". सर्वतः कृतनिस्वनम् 49. 21. सर्वतः परिरक्षितम् 55. b. सर्वचः परियेष्टितः 108. 86* सर्वत्रः पर्वतोपमः 61.8. सर्वतः पुरमन्तिकात् 106. 42. मर्वतः शतशो का: 52.30 सर्वतः सारनियुक्तं 72.42 सर्वतीर्यमुग्याश्रया 55, 55: सर्वतो वेष्टिततनुः 108, 94". सर्पन कुशलं कृष्ण 83. 56. सर्वत्र वर्तमानांस्तान 12. 39°. सर्वथा दुरतिक्रमः 118. 33. सर्यथा मानमर्हति 108. 936. सर्वदेवमयं कृत्वा 30 17. सर्वदेवर्षिपूजितः 20. 27'. सर्वदैवतवाधिता 91.6. सर्वपापप्रणाशनम् 115.2". सर्वपापविनाशाय 31. 105. सर्वपापैः प्रमुच्यते 20 48. 23 168. सर्वप्रत्यक्षदर्शिवान् 97 41". सर्वप्रभवमव्ययम् 100 58. सर्वप्रभवमीश्वरम् 34. 28. सर्वप्राणभृतां भुवि 40 274 सर्वप्राणेन महतीं 38 32. सर्वभक्षा वृथावताः 117. 16. सर्वभक्षो ह्यसंगुप्तः 117.11. सर्वभूतक्षयावहम् 115. 17. सर्वभूतगुणस्रष्टा 30. 29. सर्पभूतगुणात्मकः 30 29. सर्वभूतपतेस्तनुम् 31. 112 सर्वभूतपिचाशानां 46. सर्वभूतमनोहरम् 93, 39. सर्वभूतरुतज्ञश्च 92. 32. सर्वभूतहिते रतः 15. 11. 31. 116. सर्वभूतादिमव्ययम् 113. 45'. सर्वभूतानि तवसुः 112 32. सर्यभूतानुकम्पकः 19. 12. सर्वभूतेषु पापकम् 22. 39. सर्यमासीजगद्दान्तं 31. 130', 133. सर्वमाहारयामास 92. 17. समिच्छामि येदितुम् 39.6. सर्वमुत्पातदर्शनम् 106. 55. सर्वमेकार्णवं लोकं 42 19. सर्वमेतत्करिष्यामि 86. 32. सर्वमेतदकारणम् 44. 136. सर्वमेतदई वीर 6.7. सर्यमेतद्दाधरः 42. 38 सर्वमेतद्दविष्यति 47. 18', सर्वमेधं महामखम् 23.25% सर्वमेवानुपूर्वशः 4. 21. सर्वयादवनन्दनः 86. 52.91, 2, 506 सदो नगरी चेयं 81. 33. सर्वतोमिविराजते 84.27 261 सर्वरक्ष प्रणाशन ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [सर्वे कालप्रतीक्षिण सर्वरक्ष प्रणाशन 23 Bd सर्वरत्नमय शुभ 93 61 सर्वरत्नमयानि च 95 12 सर्वरत्लाविभूपित 77 सर्वरत्नसमाकुल 84 28 सर्वररनानि तेजसा 31 147 सर्पकवन चैव 93 17° सर्वतकवने रम्ये 107 20 सर्वतुंकुसुमोत्कटाम् 429 सर्वर्तुनिरय शुभम् 52 23 सफर सपना 9302 सर्वसुखसचारा 55 55° सर्वलोकगुरो प्रभो 31 1510 सर्वलोकप्रभु यत 70 100 सर्वलोकभयावह 37 576 सर्वलोकमयो दैत्य 37 57° सर्वलोकहिताय 2 31_1430 सईलो समाविश्य 203940 सर्पलोकादिरव्यय 113 84 सर्वलोक धनु वाम् 79 220 सर्परोक्श्वरो विभु 97 30° सर्ववजविचारिणी 51 120 सर्वशत्रुनिबईणम् 112 674 सशनिवईण 208 274 सर्वश सर्वगहनं 9 350 सर्वशास्त्रविशारद 108 920 सर्वशास्त्रविशारदा 8510 सर्वशोऽङ्गानि धर्मवत् 22 364 सर्वसत्वगुणोपेत 26 सर्वसायमनोहर 28 424 सर्वसवरतपश्च 17 18 194 सर्वसस्यप्ररोहिणी 6 381 सर्वसावतससदि 28 3062998 सर्वसैन्यपुरस्कृतम् 96 40 सर्वस्वैवस्व सभा सर्व तदमृतमख्यम् 70 12° सर्व तद्धि जनार्दनात् 39 10 सर्वे युद्धमदोत्कटम् 33 31 सबै विभजते जगत् 104 सर्व तमियाभवत् 568 सर्व सत्यमय वाक्य 41200 सा सा विज्ञानाति 11631 सर्वाणि तनुना पान्ति 53 36" सर्वाग्येतानि कर्माणि 109 41 सर्वा दामोदर विना 56 24 सर्वा नक्षत्रनाम्यस्तु 3000 सर्वानन्तहितानिव 47240 सर्वानयुतरा पुन 108 34 सर्वानमासान्धवान् 10930 सर्वान्कामानिमास्तात 31 46" सर्वानगोपानिधासता 67 100 सर्वान्दुभिशब्देन 9514 सन्देिवगणामधे 36 52 सर्वान्देवगणाखदा 31 सर्वान्देवानपोथयत् 91 451 सर्वाग्निर्मथ्य बान्धवान् 96 26* सर्वान्याधिवपुगवान् 100 2800 सर्वा मेरे स ता समम् 88 43 सर्वामरगणैर्वत 113 100 पर्वामरपुरोगमा 112 450 सर्वायुधधर वपु. 30 12 सर्वावस्थागतैरपि 101 134 सर्या वीरप्रजायिन्य 982° सर्वा वैधव्यरक्षणा77 11 सर्वाश्च नियोऽक्षरीन् 92 270 सर्वाश्च नियतेन्द्रिया' 92261 सर्वाश्च प्रझवादिन्य 13 20° सर्वाश्च सरितो बरात् 370 सचिवोयरेस 13 204 পৰিাৰম্ভ as सर्वासामेव सकल्प 92 30° सर्वासुरविनाशिनीम् 34 37' सखिशा वीरा 87 21. सर्वासाला स 88 44 सवासग्रहणं रणे 3929 सर्गसज्ञा महेवासा 43131 सर्शनविरिपारग 999 सखिषु च तावुभी 79224 सास्तानभित स्थितान् 83 18' सर्या समसपाक्षी 92351 सरा कापायवासिभ्य 9226 सर्ग सोपाधता 3101 सर्वे कनकरर्णमा 10 12" सर्वे शाशनपूपाक्ष 23 140 सवें कासनयेय- 23 146 सय कारपतीशिश 117 at 262 ।

[स.. लोकपादसूची सर्वे कृष्णपरायणा ] % सर्वे कृष्णपरायणा 736 सर्वे केशवशासनात् 84 15 सर्वे गोष्ठामिषु गता 52 10 सर्वे च कुकुरान्धका 94 13 सर्वे तावतस्थिरे 76 10 सर्व तपसि सस्थिता 37 8° सर्वे ते क्षत्रियास्तात 10450 से ते ज्ञातयोगता 109 220 सर्वे ते पृथिवीक्षित 100 86 सर्वे ते प्रभविष्णव 74 सर्व ते यदुपुगवा 66 1 सर्वे ते प्रजवासिन 830 मवें दक्षादयो नृप 2 64 सर्वे देवगणास्त्रात 3 56 सरे देवा सासवा 112 412 सब दवैर्महाराज 23 147 सर्वे धनुपि पारगा 65 14 सर्वे नीपा विनाशिता 15 261 सर्वे न्यायागता तदा 166 सर्वे परिघयोधिन 4371 समें प्रचेतसो नाम 2 32° सवें प्राचीनदिप 2 39 सर्वे याप्पाकुरेक्षणा 109 61 सवें ब्रह्म पदिष्यन्ति 116 139 सब भीमपराक्रमा 28 b° सवें मानुषयुद्धय 56 28 सवें मायाविनोऽसुरा 6 27 सर्वे यज्ञा महाबाहो 23 146* सर्वे युदरथा सजा 1026° सर्वे यूपध्वजा स्थिता 100771 स वाजसनेयिन 116 13 सर्व वाणितकाय 116 19 सर्व विगतकल्मपा 18 141 सर्वे विप्रपरा नरा 41 29 सर्वे रिमनसोऽभवन् 89 61 सर्वे विष्णुमभिवन् 38 30% सर्वे चीरा महारया 21 11 सर्वे वेदपरा विप्रा 41 29 सर्व वेदवतनाता 23 44 सर्वे घेदपु निष्ठिता 410 कुरूपासन 73 320 सर्वे रामपुरोगमा 3660 सर्व पाक मुदा युता 59 18 संबंपामभवत्तदा 22 सर्वेपामस्त्रीर्याणा 112 40% सर्वेषामेव गजताम् 108 19 सर्वेषामेव भूतानां 79 19 सर्वेषामेव वचनात् 177° सर्वेषा कालपर्ययम् 40 124 सर्वेषा देवतद्विषाम् 38 12 सर्वेश द्विजसत्तम 13 65 सर्वेषा नाम सशय 21 2559 61 सर्वेपा नाम जग्राह 95 11 सर्वेषा पुण्यकर्मणाम् 1 2 सर्वेषा पुरवासिनाम् 94 124 सर्वेषा योगसाधन 17 100 सर्वेषा राजत पात्रम् 13 66° सर्वेपा वै यशस्करम् 115 12° सर्वेषा सहदक्षिण 100 833 सर्वेषु सततोत्थित 936" सर्वेष्वाक्षर्यकल्पेषु 113750 सर्वे समधिरोहत 86 404 सर्वे सग्रामदर्पिता 32 11 सर्वे सग्रामलारमा 43 64' सर सिध्यन्त्युपक्रमा 5 50% सनरुदक्षत 62 5 सधैर्ग्रह्मपिभि साधैं 38 56* सर्वन गुणैर्युतम् 52 220 सर्वेश्चापि सहनश 1101 सवैती सुख गाव 5641 सापधिविभूषितम् 9337 स रब्धतेजा भगवान् 2017" स लध्वा वरमन्यन 7120* सम्बसिरसट 67 311 सलग्बमान कृष्णास्य 61 500 सरिस्राविणा श्रेष्ठ 113 18° सरिल चातरिक्ष घ3114 सलिल ज्योतिरेव च 113 सलिलाशी मया कृत 3561 सलिलेनामुतानीव 109 10 सलिरोत्पीडसकुला 54 17 सलिलोद्गारिभिर्घनै 54 37 सरिलाषाद्विनि सत्य 106 26° स लेभे कर्मणा तन 8 42. स लोकपालानुत्साद्य 37 51* स लोकपाकवपु 37 38 --63- स लोहगन्धी राजर्षि ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [ ससस्थाना च सीमाना स लोहगन्धी राजर्षि 22 100 स लोहगन्धो व्यनशत् 22 12* सवत्सचर्मास्तरण 53 270 सवत्समिव गोवृपम् 68 160 सवत्सा गा परतपो 5834 सवन हवन चैव 315 सवन पुन एव च 7gd स वरिष्ठो धनुर्धर 62 72% सवर्णा जननी तदा 8 20° सवर्णाधत्त सामुद्री 2 32° सवर्णाया महीपति 2 310 सवर्णो निर्ममे तत 8 84 स वायु सर्वभूतायु 34 30° स वा श्लाघ्यतर सुत 65 66* स वासुदेव समरे 109 6° स विज्ञेय शनैश्चर 8471 सवितुर्मण्डल महत् 112 411 सवितुर्मण्डल यथा 34 361 सवितुस्तेजसा तुल्य 38 13° सवितु प्रथम सुतम् 62 94* सविद्युत्स्तनयित्नुमत् 100 1nd स विधूयासुरगणान् 110 43° स विपनष्टा देवाना 21 23° स विभुर्भूतभावन 39 30 स विभु सलिलोद्भव 42 18° स विवृद्धो यदा राजा 85 180 स विव्याध चतु पष्टया 88 8° स विष्टरे स्थित शुभ्रे 109 66° सविष्णुरिव मन्दर 36594 सविस्फुलिङ्ग सागार 9 57* स वीचिविषमा कुर्वन् 43 18% स वीतरागो विचरेसुधराम् 118 491 स वृप कक्षयोष्टिं 64 15* सपाणि सहस्रश 60 294 स वेदमेक ब्रह्मर्षि 13 36° सधै तत्र निराहार 18 90 सवै बाहुर्षन ययौ 10 330 सवै भवेजवर विगतज्वरो नर ॥ स भ्राजस्त्वज्ञायत 19 1' सबैर कतुंमुग्रत 7521 स बैराज प्रजासग 1 39 राजा हरिश्चन्द्र 10200 सय दवमो नृणाम् 6571 सवै शक्रसखो मुनि 46 स वैश्रवणवस्तव्य 86 56" स वै स्वायभुवस्तात 240 सव्य मण्डलमावृत्य 82 15° सव्यापवृत्त विपुल 447 सव्यालमृगपनगम् 92 39* सव्ये चास्य रथ पाव 3440 सत्येतराम्या बाहुभ्याम् 110 68" सम्येन सात्वता श्रेष्ठ 81 82° सव्येनालम्ब्य महतीं 34 37* सव्ये पावं च प्रद्युम्न 110 48° सनजो यदि मस्यते 68 384 स जो बजता भाति 53 18" स शङ्कयमानो धर्मारमा 28 18* स शङ्ख केशवाद्वान 86 56° स शत प्रालि वा 86 57" स शब्द शब्दवाहिनाम् 37 31' स शरैरर्दितस्तेन 112 170 सशिक्यतुम्बकरको 5230 स शिलाजालवितता 3622° स शिश्ये शयने दिव्ये 409 स शीघ्रयान सप्राप्त 44 45" स शुश्राव नराधिप 1936 सशेपास्तव तिष्ठन्ति 7 62" सशैलवनकाननाम् 31 28* स शैलेनेव लक्ष्यते 75 45* स श्रीमान्विरजो नाम 93 520 सश्रीवत्सेन वक्षसा 68 20° सश्रुत्वा भगवान्वाक्य 42460 स समीपगतस्तस्य 62 9. स समुद्रान्समानीय 37 83. ससमुद्रा सनगरा 23 144. ससमुदा सपत्तना 747 स सनाहिति विश्रुत 10 22 सस पुरुप प्रभु 139 सस सष्टि तपां 128* सस रात्री निसिंगान 37 27 ससपौविपुरीपिल: 85 42 स सपो यहुभिस्वीक्ष्ण 85 3s. स सर्वदमनो माम 2348 स सर्वारदाप्रभु ।' स सर्वानप्रवीदारन् 16 ससस्थानां च सीमाना 428 2G4 - ससस्थावा च सीमाया ] लोकपादसूची [ सहसा मुक्तमूधंजा समस्यायां च सीमायां 62 53° स सहस्रशिरा भूखा 407" स सामयितव्यस्ते 47 30° स सक्षिप्य जगत्सर्व 40 420 स सचोदयितव्यस्ते 73 30 स सदिग्धमिवात्मान 58 31" स सधान करिष्यति 66 360 ससध्य हव तोयद 554 ससध्यान इवाचल 42 4 स सपदारस्तुमुल 81 95° 11071 स सरदोऽसरप्राप्त 29 37° स ससक्तस्तु कृष्णेन 64 1767 39" समागरमिवाम्वरम् 54 34 ससादिनमरिंदमौ 96 60 ससाध्या समरगणा 106 8 ससाध्या समितिंजय 113 450 ससानुमप्रहाणि च 74 7 स सामादिभिर यादी 15 55* स सिंह इव वेगेन 76 250 स सुतो गोपितो गृहे 65 220 स सुरैरम्यनुज्ञात 85 43° स सूर्यकरतुल्याभ 38 39 सस्ने विविधा प्रजा 1 370 समजे स समन्तत 3624 स सृष्टासु प्रनास्येवम् 2 1 स सृष्ट्वा मनसा दक्ष 2 470 सस रावण युधि 31 125 सस या प्रत्यदृश्यत 81 210 ससन्येन सवाश्रयात् 1068* स सौम्यो राशिरुच्यते 30 41' सनीपुसोऽथ घोषो वै 531 समुपोऽई सभार्यश्च 78 26 सस्मित चव प्रोवाच 46 21' सस्मित मधुसूदन 45 1 सस्मित राघवोऽयवीत् 44 38 सस्मित वाक्यमानवीत् 38 23 सरिमन विमस इ7135 सत्यसोरा भविष्यति 117 21 सस्यजातानि सर्वाणि 6 13" सस्य निष्पत्तिरपला 116 28° म स्य दनवरा भाति 34 10* सस्थाकरवती सीता 641' सयादा नलजादाच 59 43" सत्यैर्गुणपती मही 59 48 सस्रगापीडशृङ्गामा 60 30° सस्वजे बलदेव घ 91 30° स स्वयभूरिवाभाति 37 670 सह कृष्णेन जाग्रत 69 31 सद कृष्णेन यादवा 78 451 सहज ते शिरस्तात 666 सहजा या क्षमा त्यक्त्वा 41 26° सहजवंध्यते सर्व 44 39 स इन प्राकृतो यथा 65294 सह ताभिर्मुमोद ह 63 18 सह ताम्या रथे स्थित 191 सह तेनामरारिणा 58 15% सह तेनैव यास्यत 45330 सह ते प्रणतो गोपे 6028° सह त्वया गत काल 77 16% स हत्वा दानव सरये 44 B1- स हत्वा यादवर्षभ 89 48 सह दानवकन्यया 1135" सह दीव्याम पण्यताम् 89 240 सहदेवसुतश्चापि 23 101 सहदवो महायशा 23 101 सहनीय त्वया कृतम् 48 46' सद नौ स भविष्यति 29 11 महन्यमानो नारा 108 23° सहयन्धु महारली 29 304 सह भर्ना रदामहे 77 374 सहमन्त्रिणमच्युतम् 19 14 सह यादवपुगवे 100 11' सह रत्नरुदारधी 79 230 स हरि पुरसो वीर 3 11 स हटेनानतामेण 83 320 सह वृष्ण्यन्धकसुतै 102 18 सह वै मन्त्रकारणात् 4132 सह सर्वनराधिप 81 814 सह सर्दै सहोदरे 104 36 सहसा पेशवार्पिता 7641 सहसा खादिवागती 71 494 सहसा चलितासन 76 386 सहप्ता र समुक्षिप्य 48 34 सहसा ते हयाधम 67 18 सहसा प्रविवेश 99. सहमा मुक्तमूर्धजा 48 29 265 हरि पादसूची-34 सहसा शोणितपुर ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [सकर्षणसमानना सहसा शोणितपुर 1087 सहसा साचुरोचन 50 14 सहसवोत्थित शूर 108 30° सहसवोत्थिता निशि 107 211 सहसोत्थाय गोविन्द 83 54 सदसोत्पत्य गोविन्द 74 26° स इस्तग्रस्तरेशश्च 76 31° स हस्ताश्च विनिष्क्रान्त 74 29* सहसकरमव्ययम् 31 30 सहस्त्रचरण च यम् 31 3 सहस्रचरण मान् 30 150 सहसचरणेक्षण 58 39 सहस्रजित भास्वन्त 314 सहसदस्य दायादा 23 1350 सहस्त्रद सहस्त्रादि 310 सहस्रद पयोदश 23 1340 सहस्रपत्रनाभस्व 58 39° सहस्रबाहू रामेण 112 910 सहस्रबाहोहूना 113 66 सहस्रबाहो समरे 108 97* सहसभुजमध्ययम् 31 44 सहस्रममितीजस 386 सहस्रमसृजत्प्रभु.3 180 सहस्रमिव सूर्याणा 109 84' सहस्रमुकुट प्रभुम् 314 सहस्ररश्मियुक्तेन 34 220 सहतरश्मिरादित्य 62 48' सहस्रवदनोऽव्यय 85 40% सहस्रशतदक्षिणम् 2022 सहस्त्रशिरस देव 3016631 3% 70110 सहनशीपों देवादि 31 23° सहससख्यासयुने 81 18° सहस्र चैव कायाना 1106 सहस्राक्षसम युद्धे 8730 सहस्राणि च ससच 27 11 सहस्राणि दशापि च 27 220 सहसाबुदनादितम् 3310 सइचारमरिक्षयम् 38 39 सहसास्यधरस्य वे 703 सहसास्य सहस्राक्ष 31 32 सहसास्व सहसा 58 39 सहवाशुधरोपरिहा 58 394 सहवाशुसमप्रभ 112 38 सहवाशु सहस्रश 30 15 सहवरयुतैरपि 85 31 सहस्वानाम पार्थिव 10111 सहादित्यगणविभो 763 सहानेन गमिष्यामि 68 38* सहाया वज्रपाणिन 3 1090 सहाया पर्घ एव से 15 136 सहामन्ति महावने 65 671 सहास्माभिर्गत बाल्य 83 16° सहामाभी रख बने 83 16% सहा परिघयादव 43111 स हि गृह्य मृधे दैत्यौ 42 300 सहित सत्यभामया 92 62 सहित सर्वयादोभिः 97 130 सदिना मुनिमण्डलै 40 40° सहिता सर्वनम्रता 91 10 स हि ते सहजो मृत्यु 65 500 सहित कर्म तत्पुरा 91 17° सहिनी जग्मतुस्तत 92 53 सहितौ रामोशवी 57 179 30 सहिती विचरिष्याव 35 60° सहि दानपतिर्धय 66 35. स हि धर्मयुगेऽभवत् 100 स हि युद्धगत श्रीमान् 36 30° स हि वर्षशत सध्या 23 139" स हि वेदमयस्तात 20 10° स हि शमादपि मदान् 99 21 स हि शिष्यो महातेजा 2091° सहिष्णुत्यानगरस्वामी 36 30° स हि सप्तसुदीपेषु 23 1500 स हि सर्वगत कृष्ण 62 26° सहि सर्वानशर 898 सहि सदाहिय 21 181 सदैव रियया रियाम् 88 64 सहोमसेनेन तदा 96 51 सशस्माक परा गति 10078 स धाविसदा तेन ॥ * सहदे यमुनापातु 70 16 सर्पणभयाना 83 3" सर्पमिधामीन 10 सर्पणमुगप ह 52 8 सपणश्रण 7218 सकर्षणममानना 47320 266- लोकपादसूची [सदृश्यति दिवाकर मप्रामे तारकामये 30 1738 55', 80% सकर्षणसहाययान् ] सकर्षणसहाययान 97 40 सकर्षणम्तदोत्याय 89 420 सकर्षस्तु सुतवान् 58 19° सकर्षणस्तु सकुद 56 26° सकर्षगस्तु सुचिर 7650 सकर्षणस्य मत्तोक्ता 83 20% सकर्षण च कृष्ण च 65 930 सकर्षण तु स्कन्धेन 58 23% सकर्षण पुरस्एत्य 87510 सकर्षणात्तु गर्भस्य 47 31 सकपणा जपानो 8770 सकर्षणो नाम शुभे 48 6° सकल्पयित्वा वरस तु 6 140 सकल्प पूर्वचिन्तित 18 153 सकल्पा च मुहूर्ता च 3 26° सकपाद्दर्शनात्स्पर्शात् 2 49° सकपायास्तु सर्वात्मा 3 29° सकीर्णार्धानि कानिचित् 61 38 मकीर्यत महारङ्ग 74 10 सकल युद्वमारभी 37 35 सक्रुद्धो धर्पणां प्राप्य 89 340 सक्षित तत्कथ पुन 1046 सक्षिप्ता नरवण या 94 240 सशिक्षा पद्मयोनिना 42 14* सक्षिप्याप पियाम्यहम् 23 78 सोप सेव मे शृणु 730 ससपर्णव ते वक्ष्ये 11 350 सत्याग्यनिन विद्यते 82 संगतश्चासि लोकानाम् 70 38° सगत परमात्मना 30 46° सगृत करमाणि 84160 सगृह वीणा ससत्ताम् 46 12° समामकरदप्रिय 100 520 समामनिदनायत 98 10% समामस्वारकामय 32 10 समाम साऽभ्याइत 33 10 समामा चारपाच 93 6° भसामान्मुयहूजित्या 23 14. समामा बदरचय 105 32° समामे विक्रमिप्यत 11081 समामे शस्त्रयोधिनाम् 75 24 सग्रामेषु भविष्यति 62 78 समामेपनियर्तिनाम् 42 500 सघुष्ट फलपातने 57 14 सचारपयसकुलम् 72 5 सचुकोप महानीक 12 30 सचे? कसशासनात् 69 270 समयस्तोयबाससा 43 18 सछिद्य पाशान्सर्वोस्तान 91 45* सजदार तदा भीम 91 11 सजहार महाभ्राणि 92 450 सजीवय प्रजा सर्वा 65" सनीवयामास मृत 97 27 सज्ञप्तमश्वमाविश्य 118 13° सहप्तमव तत्राय 118 120 सज्ञप्त दृश्य वाजिनम् 118 28d सज्ञा पार्थिवी तात 8 18" सज्ञा दृष्ट्वा विवम्बत 88 सज्ञा नाम स्वतपसा 82" सज्ञाया तपता वर 86° सज्ञावाक्यैर्विनित 821 सज्ञा वैवस्वतो यम 8 192 सज्ञेयमिति चिन्तयन् 8 160 सततासारनिर्यना 54 150 सततासारमूर्छिता 73 15 सतप्ता भास्कर 54g सतप्ता शरणैपिण 35 सतप्त मायया सैन्ये 3522" सतृप्तोऽभीति दियेन 60 20° सदधकार्मुक चैव 12 300 सदापय त्यक्त्वा 85 470 सदष्टौष्ठपुर सरये 112 31° सदष्टौटपुटा दचित् 109 620 सदष्टाछटो रद ॥2 14 सदष्टौष्ठ महाभुजन् 108 20 सदिग्ध परकश 16 26° सदित मरमोगेन 56 21 सदित शरबधन 374 सदिता पाराजालेश्च 35 100 साददगायत साम 36 " सदीप्यद्भिश्व पावकै 5320 सहश्यनि दिवाकरे 100 320 44 20', 61 समामे वतमानस 23 149° समामे या विशेष 387 - - 267 संदेदममरश्रेष्ठ ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य { संयुक्तः सुहृदस्तयां सदेहममरश्रेष्ठं 13 2. सधिविग्रहमुख्यास्त्वां 78 21° सध्यातपग्रस्तशिखः 37. 42. सध्यामयीमिव गुहां 68 4. संध्यारत्ततले व्योम्नि 68 1. सध्यारागमथावृणोत् 106 47* संध्यारागेण रक्षितः 77 594. संध्यारागोऽथ दिग्दादः 116 36. सध्यारागो जपावर्ण 102 4". सध्यारानि प्रभा निद्रा 47. 54. सध्येव सपयोधरा 48. 31". सनतिर्नाम भारत 1822. सनतिर्नाम वीर्यवान् 15 34. संनतिहाँस्तथा श्रीश्च 9672°. सनति सनतिमती 18 23. सनतेयुस्तथैव च 23 64. सनद्धा निर्ययु बुद्धाः 87. 49. सनहन्त यथाक्रमम् 34 *. सनाहभेदी कृष्णस्य 109 16*. सनिकर्षगता केचित् 91 49%, सनिकृष्टभयो ह्यसि 66 32". सनिकृष्ट भयं चैव 65 32. सनिकृष्टानि यान्यासन् 52 12". सनिकृष्ट ततो नागे 7426", सनिकृष्ट महाभये 6544 सनिकृष्टे प्रजातन्त्र 65 90. सनिधी मम शोभना 186". सनिपातावधूनश्च 75 30° सनिपाते तु सौ मलौ 7631 सनिपेतुरभीतवत् 81 94 सनिपेतु. सहस्रशः 87 74 सनिरुद्धी महामार्ग 75 45° सनिविष्टं विमानस्थं 127, सन्यस्य सागरानूपे 9960 सपूर्ण जर मेधारा. 68 19*. सप्रजवार सर्वतः 85. सप्रतस्थे स पक्षिराद 110 10 सप्रत्यतीत भाज्यांच 322". सप्रदीप्तमिवरभाति 54 11: सप्रदीप्तमुखी तत 12 4t' सप्रदीपहुसासनम् 34 49*. सप्रदीक्षामिपरना 37 18. समविटे दिवाकरे 68t. संप्रवृत्तमहावर्षे 54 34. संप्रवेक्ष्याम्यहं योग 45. 11: सपहस्येदमब्रवीत् 107. 14. सप्रहृष्ट स भगवान् 597. संग्रहृष्टानि सर्वश. 523, संप्रहृष्टा महाबाहुम् 92 31. सप्रहृष्टेषु देवेषु 36 38, सप्रासं स्वगृह ततः 108.80. सप्राप्ता शरणैपिणी 42 53', सपासे तारकामये 38 21. सप्राप्ते दुर्दिने काले 54, 2'. संप्राप्य पार्थिवं लोकं 45 11' समावर्तत यज्ञः सः 60 16. सपासियत वेगेन 56 3° सप्रेष्यद्भिश्च सायकै 35.5*. सबन्धीनयलोककः 101.6" सरन्धो ह्यस्य बंदोऽस्मिन् 23. 91" सबभूव नराधिपः 15.64. सबभूव महानृषिः 2 20. सबभूवुर्यथाकालं 10. 59. सबाधमेके संप्राप्य 37. 32. सबोधाद्धर्मशीलवा 117.5. समयन्ति युगे युगे 3 5. सभवः कथित पूर्व 2 60. सभविष्यन्ति भूतले 44 81. सभारानुपचक्रमे 115". सभाम्यारते न घाण्येयं 8 11: सभूतस्तस्य चात्मज 9 86. सभूतस्य तु दायाद 987 सभूता पुरुषेश्वरा 4370% सभूतो द्विजसत्तम 878 सभूतोऽमिरिच पतुः 115 194. सभ्रमे किं विरम्यसे 5131. समतो एतिमान्वसु 746. समाय विदितारमना 68 38. समर्दमुपर क्षये 846 समानिततरा भूमिः 544 समुन्दाम तेज 38 45". समूदा न विदुनूनं 52. सयम स्थिरता शायं 750 सयुना ज्ञानयर 80. 11. सयुक्ता कारधर्मणा 14.. सयुमा सुन्दसया 8064 --208 संयुक्ती कालधर्मणा] स्लोरपादसूची [साक्षेपमिदमब्रवीत् सयुक्तौ कारधर्मणा 16 211 सयुगम्य निवर्तने 15 47 सयुगेष्वनिवतिना 10974 सयुज्यात्मानमेव स 2770 सरक्ष्यमाण देवस्त 92 650 सरक्ष्याच वयं देवं 109 53° सरग्यत जन सर्य 75 340 सरध ममतजंयत् 108 870 सरधारभिधावन्ती 82 11 सरधो गरढोपरि 38 321 सरधो द्वद्वयुद्धार्थी 106 3° सरन्यो विष्णुमयवीत् 44 12* सल्दा गिरिकन्दरे 92 24 संवत्सरगणान्बहून् । मवत्सास्य पर्यन्ते 955* सवतंक नाम गण 61 1" सयतकाबुदोपेत 400 सवको तृपित 36 53° मामाना समरे 37 30 सवाय मदारमने 23 1.6 सधय यथासुग्वम् 493 सवाहयाम भद्र ते 52 28° मंविधानमथाज्ञाप्य 109 87° सविभत्ताश्च सर्वश 109 20% सरिपिपून्प्रजा 30 मरिवेशोपगम्याथ 118 120 सहनम्यारमहर 3562 संत विचरिष्यति 1154 महतो गोपदारको 51 6 सा मन सशय 110 12" मवेशयामास शिशु 49 14° मोहित नगभार 100 18° सापच्छेदनाय 2 12 28° मयिन्यन्ति धार्थिन 78 20 मयिायनि पार्थिवा 67 6' संशयियति मानवा 117 29 मनित्यानुययुम्तदा मय बुराधका 94 100 सपन सुपर्णेन 38 320 मपा पइयांशुमान् 671 ममताना महागधे 110 230 समयविर सोयदी 61 16 संसका सूर्यवर्चसा 427 ससारेषु द्विजातय 15 ससारेप्पपि वर्तताम् 16 320 सस्कार प्रतिपादितो 9645 सरकार लम्भयामासु 78 45° सस्कृतश्च यथान्याय 7844" सस्त स्वैश्च कर्मभि 2017 सस्तूयमानो गोविन्द 13 50' सस्तूरमानो बहुधा 113 17 सस्थाप्य धर्मान्मत्र्येषु 97 31. सस्पृशन्वदन शुभम् 91 321 समराद्य च वै वपु 58 3rd सस्मारित स कृष्णेन 58 500 सस्मृत्य च वर शत्रात् 85 51° सहताश्वसुतौ नृप 9 600 सहताश्वो निकुम्भस्य 9 80° सहतोर्मितरगौध 43 220 सहर्ता काल एव च 113781 सहचापलेन च 9 90 सहत्सिहसा दुता 5822 सहारस्य च भारत 751 सहारान्ते च नित्यश 7411 सहारान्तेषु समया 7500 सहत्य कोप सेन्य 2 44 सहत्य परमारमन 58656 सहटलोमा ग्रानाश 1106!' सहष्टपदनान 83 18° महादमानाभरणा 37 330 सहादश चतुर्थाऽभूत् 3 600 सहादस्य तु देत्यस्य 380 महाद गुमर वा 31 174 सहादा गगनप्रिय 3114 सा कन्या यवृध तत्र 0613 सारत मिनी781 43d साभाच्छक हयापर 4.1 साक्षाध्ययमर्याचाम् 798 साक्षादमिरिच सन् 21 साक्षादपि गता 109 13. साधादेव शिर मयम् 3+ ! साभादुगनमा ताम् 93201 साक्षाद्भगत यश्म 93360 साभादिष्णाननूपमो 8163 साशामररिवाचन 3744 साक्षेत्रमिदमयीत् 1108 85 18 -269 - सारसश्च विनादिताम् ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य {सिनीवाली कुहूवैष सारसैश्च विनादिताम् 55 30° सार्कचन्द्रग्रहगणं 32 13. सार्गलद्वारमोवाटं 49 26. सार्गलद्वारयेदिका. 74.2. सार्चिष्मत्यः सुदारुणाः 112 70'. सामिद्भिरिवानल: 10 40. सार्धमुत्तमविक्रमः 106. 524. सार्धरात्रे विभूषिते 48 131. सार्धराने स्थितं गर्भ 48 33 साधे पौण्डैश्च वीर्यवान् 87. 50. साध सलिलयोनिना 39 1'. सार्वभौम इति ख्यातः 15. 39. सार्वभौमः प्रजेश्वरः 15 33'. सालङ्कायनसौश्रवाः 23 89". सालस्कन्धाविवोद्गती 96 49. सालास्ताला कदम्बाश्च 9360. सा लोकान्टरमा लोकादीन् 54:". साल्पराजश्व विक्रान्तः 80.14. साल्वश्च विजितः संख्ये 105 13. सा वचस्तथ्यमशिवं 107.854. सावतंसर्विषाणश्च 59 58. सावधूता शिलापृष्ठे 48 28. सावरोह इवाचल• 33 16". सावरोहगुमं घोरं 55 51". सापरोहा इव द्रुमाः 53 170 सावर्ण इति चोच्यते 8 17, 47. सावर्णस्य मनोः पुत्राः 7. 45. सावर्णस्येद ताम्शृणु 7 42". सावर्णः स तपोधनः 8 43. सारा मनवम्तात 7 39. सावर्णिश्च मनुस्तात 7 50 सावितलजलस्रोता 83 330 सावे निशि तमोमस्ते 48 320 साचै भार्या भगवत. 82. साशनिस्तनयित्नतः 6630. साशनिम्तनयिरनुमा 766" साश्मशदः शिरायः 36 231 साश्मसंघातविषमा 36276 साश्रुपूर्णमुखी दीना 48 44 साथुपिन्दुः प्रवर्तते 106 30, साधं हतं प्रसेनं मु 28 20 साच. सवजसारथिः 108. 80. साधां सरयमराम् 97. 20'. साश्वोऽश्वपतिरेव च 31.11. सा समुद्रौघसदृशी 37. 19. सा सरोषा पुनर्भूत्वा 73. 30. सा सांख्यानां गतिः पार्थ 104 " सासिञ्चत्प्रसवोत्पीडैः 76 43. सासिहस्तैः समन्ततः 35 4. सा स्थितावेक्षिणी भूत्वा 71.26. सालि वेद्यां समारोप्य 42 40". सा स्वामिच तं दृष्ट्वा 48 4. सा स्व धर्पिता तेन 107.21. साई यथैव जानीयां 19.9*. साई विज्ञापितवती 42 43. साई विहीना विक्रान्तः 42. 44", सा हि तस्याभवज्येष्ठा 88 36°. सा हितं चकमे कन्या 89. 3. सा हि प्राणान्तिका यात्रा 75. 26". साह्यक्षया सभा वायो 86000 सामुद्दिष्टा पुरा भीम 18.6. सांकृत्यो गाल्वो राजन् 23. 88. सांख्ययोगमनुत्तमम् 13 10. 19.28.' सांदीपनेस्तथा पुनः 105.21. सांनिध्य केशवस्य सः 68 11'. सांप्रतस्य महायुते 7.06. सांप्रतं खिद्यमानाई 42, 36". सांप्रतो मनुरुच्यते 7.41 सिकतातानमतिकम् 84. 25, सिक्तं दानघसभवः 38 40". सिक्ता चन्दनवारिणा 89.24. सितवर्णाग्दोणी 59 35. सिताभावयवा इव 67.40'. सितेनेति हि नः श्रुतम् 20.10. सिद्धधारणमानवैः 47. 11. सिद्धधारणसंघानो 109.913.110.10. सिद्धचारणसेवितम् 108,7. मिदं मम्मरक्षणैः 99 42. सिद्धानां भुवि दुर्लभाम् 19 33* सिदाश्च परमर्षयः 82. 13'. मिदिमस्पेन कालेन 117.15: सिदि याम्यन्ति मानवाः 115 45. सिदैः सप्तपिभिम्नया 31.35. सिध्यन्ति दिनिनादन 112.60". मिध्यगायनानि चितपा 5.31. सिनीयाली महमेर 20.96 -272 सिन्धुद्वीपपितामवत् ] श्लोकपावसूची [सुतनुश्च नराचीच सिन्धुद्वीपपिताभवत् 10 68'. सिन्धुदीपस्य वीर्यवान् 10.68". सिटीधाभरणं कचित् 54. 11'. मिलीभामरणासु च 55 14. सिपिचुर्यानि जलदाः 59. 46. सिपिचुस्तोयधाराभिः 62. 60. सिपिचुः कृष्णमव्ययम् 62 69". सिसूक्षतस्तु नाराचान् 81.87*. सिमक्षुर्विविधाः प्रजाः 1. 23. 3 .. सिंहनादश्च संजज्ञे 84. 12. सिंहनादं ततश्चक्रुः 112. 21', 47. सिंहनादं नदमुद्धः 108 05. सिंहनाद ब्यरोचत 108. 26°. सिंहनादैश्च दैत्यानां 112. 50'. सिंहनादेश्व मोहयन 64. 12. सिंहयुनो महास्वनः 112. 10. सिंहपभमृग गैः 113 7. सिंहविस्पष्टविक्रमः 44 62'. मिंहग्याघ्रगजाकीणी 36 23. सिंदण्याघ्रगताधान्ये 33 24. सिंहप्याघवराहाणां 65. 53. सिंहशार्दूलविक्रमः 68 15. सिंहशावावियोदीणों 96 46°. सिंहसंहननो युवा 89.6. 109. 84. सिंहस्कन्धो महाभुजः 31. 1376. सया 31.65. सिंह शुदमृगानिय 89 46. सिंहः प्रमुखतो दृष्ट्वा 103.63°. मिहः प्रसेनमवधीत् 28 24 सिहा मरमस्थितम् 38 19'. सिंहापिय बजोत्कटी 7137. सिंहामनेषु चित्रषु 100. 14. मिहिका पाभवकन्या 3. B8'. सिंहिकायामघोरपना 376. सिंहगिरिगुहा यथा 95 16. सिंहो जाम्यता इतः 28.28. मीतयेर पुरा राम:8935. सीतायशाब कर्षकाः 59 27'. मीनागः पदमनिप्छन् 31. 119. सीनेति प्रथिता जनः 31.1111. सीदन्ती विहतप्रभाम् 69... सीदन्तीं वै तपस्विनीम् 69 1. सीदमानः कृतात्मना 62. 33. सीदमानश्च सर्वतः 61. 32. सीदामि हृदि दुबला 99. 23. सीमन्तमिव कुर्वती 52 26. सीमन्तोद्धरणं कृतम् 38 84. सीमान्तं श्रूयते वनम् 59. 23. सुकल्पितमहायुधम् 332 सुकाला नाम पितरः 13 61. सुकुमारक मा रोदीः 28.24. सुकुमारम्ततोऽभवत् 23. 70. सुकुमारस्य पुत्रस्तु 2371". सुकुमारः कुमारोऽसौ 114 10. सुकुमाराभितानेण 55. 36. सुकृती मद्विधो जनः 15. 37'. सुकृतेनेह कर्मणा 15 22, 23'. सुसमस्पेन कर्मणा 116.2. मुसमेघन्ति वहयः 62. सुखश्रभ्यतया गतम् 15 11', सुख भवन्तो विचरन्तु लोकम् 18.00". सुखं यक्ष्यामहे प्रजाः 3 20'. सुसं स्वपिति निश्चिन्त: 109. 21'. सुखं स्वपिति या रहः 118 22. मुखाय प्रिदिवौकसाम् 62 96. सुस्यासीनस्प धीमतः 74 19. सुसिनो म्यवसनराजन् 84.34'. सुपिन्यः कामयर्जिताः 92 25. मुरोवर तु योजिताः 77.13. मुसोपविष्टम्नावृष्णीन् 96 24. मुगतिमियारवणाय शूदजानिः 118 484 मुगाश्यां कुरुनन्दन 24. 11. 28.12. मुगुप्ता धरणीधरे 37.56. मुमीरश्रामिचिनः 31. 1211: मुग्रीस्य कृते येन 31 121. मुप्रीयं चय दौम्यं च 102 1. मुपीरी तु परंतर 3 83. सुप्रीती शुचिगृध्रि के 381 मुचारुचक्रवाण:36.. सुधादनन्य धारम:0825 मुधारो हिला मुध. 14 6. सुगनुयंगमा लो 43 26. मुतनुश नराची च 98 21 सिंहस्साधतर्नु हरि. पादपनी-35 सुतनू राष्ट्रपाली च] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [सुप्रभा रोहिणी यथ सुतनू राष्ट्रपाली च 27 29° सुतलेनोच्छ्रयवता 36 54° सुतस्य प्रभवारणिम् 35 48d सुतहोतु सुतद्वयम् 23 64 सुत कम्बल्वर्हिपम् 26 8 सुत कम्बलबर्हिप 26 g" सुत जाम्बवतो नृप 28 23° सुत परमकोपनम् 466 सुत पञ्चजनस्यासीत् 10 64" सुत पञ्चवनस्यापि 23 100° सुता चारुमती तथा 88 39% सुता जाम्बवतश्चापि 88 41° सुता भार्यामवाप ६ 22 30 सुता भार्यामविन्दत 247 28 370 सुता सुतपसा युक्का 30 सुतीर्थो स्वादुसलिला 55 290 सुतोऽभवन्महातेजा 23 71 सुतो भीमरथस्य 2 23 650 सुतो रणविशारद 9 80% सुतौ कनवकस्य तु 24 32 सुती वृष्ण्यन्धकायुभी 24 3 सुदत्ता च तथा शैव्या 98 3. सुदत्ताया निवास 93 500 सुदत्तायास्तु शैव्याया 98 104 सुदरिने सहोदरा 18 24* सुदष्ट्रच सुचारुच 288° सुदष्ट्रो दुम एव च 986 सुदान्तश्चाधिदान्तश्च 28 6" सुदाशाहीति विख्याता 91 24° सुदाशाही सुदाशार्दा 95 18° सुदेवश्वोपदेवश्च 28 42 सुदेव वीर्यसपलं 874 सुदेवा देवरक्षिता 27 27 सुदेवो देवरक्षित 27 260 सुद्युम्न इति विख्यात 9 12. सुघुम्नश्चति ते नव 2 1 सुघुम्नस्य कुरूद्वह9 194 सुधुनस्य तु दायादा 9 15. सुद्वारा प्राम्यतोरणा 86 420 सुधन्वन सुतश्चापि 9 870 सुधन्वन मुयाहुस्तु 23 5. सुधन्वा च महीपति 23 " सुधन्या रिपुमर्दन 987 सुधन्वा सुधनुस्तथा 23 109 सुधर्मा धर्मभृत्तथा 24 13' सुधर्मा नाम पार्थिव 15 30d सुधर्मा यदुमुरयाना 86 73° सुधौ ता सुधर्माय 86 733 सुधापाण्डुरलेपनाम् 93 24 सुधामा विरजास्तथा 7 261 सुनामानमपोथयत् 76 45 सुनामानममित्रम 96 40* सुनामान महाभुजम् 78 46* सुनाम्नी चैव सप्तमी 27 271 सुनिविष्टष्टदेवतम् 86 140 सुनीथ प्रददौ सुतम् 87 220 सुनीथ समवाकिरन् 87 60% सुनीथाया प्रजापति 520 सुनीथार्थेऽय रुक्मिणीम् 87 206 सुनेत्रश्च स्वतन्त्रश्च 16 29° सुन्दरा च वराङ्गना 24 104 28 401 सुपर्णध्वजमास्थाय 81 790 सुपर्णध्वजशोभिते 32 26 सुपर्णवशगा नागा 3 86° सुपर्णस्योरगाशिन 55 490 सुपणे खेचरोत्तमम् 34 46" सुपणे व्यथित दृष्ट्वा 38 34 सुपर्ण पतता श्रेष्ठ 3 84° सुपर्ण स्वेन वपुषा 34 46° सुपर्णेन सम विभु 98 350 सुपर्णो वै ममामत 10 48' सुपाचकगयेपणी 24 120 28 434 सुप्तनिष्प्रतिभासु च 703 सुप्तमम्बुरुहेक्षणम् 70 18* सुप्तसूर्य दुसरशे 61 18 सुस्ताक्ष मुकुट बिना 7638 सुप्तादिशि विचेतस 43 37 सुहा तान्देन योधिता 5028 सुप्त विष्णी पुरंदर 40251 मुस्त्वा युगसहवस 3111 सुप्रचाराध प्रहा 41 1 मुममाणि च ज्योतीपि 32 35. मुमभा रोहिणी पपा 18 274 लोकपादसूची [सुनावेन्दुनिभं पय सुप्रस्तरशिलातरम् ] सुमन्तरशिलाारम् 92 39 सुप्रियं यत पश्याम 92 34° सुप्रीतेनान्तरात्मना 47 18 सुबन महाभुज 5851 सुबलो यरवान्यली 90 सुबहूनि समन्तत 82 70 सुबाहुबहुवाहुश्च 24 13 2844 सुबाहुश्चव धार्मिक 23 44 सुमगा स्थिरयोरना 92 60% सुमद्राया रथी पार्थात् 255" मुभीमा घ तथा माद्री 98 ° मुभीमाया महापूटं 93 45° मुभीमाया सुतो माद्या 98 11' सुमुन देवकीसुतम् 7520 सुमना मुनि सुवाश्मुद्ध 16 20" मुमहय रिपोबरम् 84 10 सुमहरकर्म कारणम् 65 580 सुमहानत्य नर्तत 501 सुमहानन्तकोपम 58 27 मुमहानमवदिवि 24 16 मुमहानष्णगृत्तिक 5750 मुमिम मियनन्दनम् 28 90 मुमुहून तु यय 102 10 मुपशतनयोऽभवत् 266 मुपामुन नाम गिरिं 73 10° सुरयम्य सुविक्रान्त: 23 111 मुरथो महिमाम्नया 23 111 मुरदेवर्षिगन्धरें 4514 सुरभिनिता धेर 3 4. सुरभीनमारतम् 49 261 सुरभी महिषी तथा 391 मुरमाया महतु 383. मुराणामसिद्धये 65 सुराणाममुरागां च 3510651 10015 मुराणाममुराम्तक का सुराणामेकमार्याग 43 11 मुराणो कारणातरे 65 36. मुराणां च महायता 0730 सुरागां प्रीतिवर्धनान् 43 41. सुरागो भारत फुले 411' सुरागी विरक्षिगा 8058 सुराणा शल्यमुद्भुतम् 38 B' सुराणा सर्वसैन्यस्य 34 10 सुराणा सुरसत्तम 30 12. सुरापा ब्रह्मवादिन 16 333 सुरापिशितपूर्णान्या 65 53° सुरारणिर्गर्भमाधत्त दिन्यं 30 196 सुरारिपरदर्पित 31 32 सुरा त्यक्तजीवित 38 130 सुरासुरनरार्चिताम् 39 " सुरासुरमनुप्येषु 97 35 सुरा करत मा चिरम् 43 624 सुरेणुरिति विख्याता 81 सुरेन्द्रवज्राशनिनुल्यसारै 31 120° मुरेशोऽरिनिपूदन 303 मुरेष्वपि सदैस्येषु 38 63 सुरैराचरितेषु च 218 सुरैयस्य प्रवर्तितम् 23 120 सुवश्यममितीजमम् 87.30 मुवर्णकोटिं ग्राह 89 290 मुरर्ण रेणुपर्यन्त 38 40* सुवर्णवर्गातृक्षाप्रान् 112 53° मुवणस्य दशादित 8927 मुग्णाजनवर्णाभी 58 8. मुवाक प्रत्यभापत 1720 सुवामिता वपुष्मन्न 72 7" मुविस्तीर्णे यक्षमा 68 2300 मुमतम्य तथाम्या 23 23" मुया नाम रेवतीम् 9 271 मुशातिरदपयत 23 96 मुशील गुभोचनाम् 83 4' मुगु यासमी यिभ्रत् 74 18. मुक्षिणरि रोक्यु 4029 मुपुगते मर्म तदा 48 11' मुगुये मरिता परा 27 11 मुगवारगुता 986 मुपेण धारगुप्त 1 89 38. मुगार कारमेत ये 85 44 मुगप जनमेनय 23 103 सुमनदगंमत 8416 मुमतदारमुगी 4456 मुमीमा मुमतिष्टिता 4433 सुमूहमानारिग्यमान् 13 20. मुमावे दुनिभ पप 62 61. 275 सुखवु क्रोधज जलम् ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य (सेव्यमानो नवैति सुत 23 161 सुसुयु क्रोधज जलम् 67 240 सुस्वधा नाम पितर 135 सुस्वरा लोकसाक्षिणी 82 20° सुहृदो द्रक्ष्यसे न च 112 Bd सुहृद्भिनरपुगव 15 46 सुहोनस्य बृहत्युन 23 73% सुहोत्र सुतहोतार 23 530 सुह्येश्वरश्च विक्रान्त 80 13° सूक्ष्मजालावलोकिन 74 13° सूक्ष्मे घसानो वसने 55 40 सूक्ष्मैरपि दुरासद 58 43 सूतमागधकल्पैश्वापि 107 5° सूतमाराधयन्दिनाम् 109 57* सूतमागधबन्दिभि 5380 109860 सूत सुत्या समुत्पन्न 5320 सूतिकागारमध्यारव 99 18° सूत्रहस्तास्ततो मान 86 120 सूदयामास वीर्यवान् 31 1454 सूरता नाम विश्रुता 28 सूत्रताया प्रजापति 2gd सूत्रता सुषुव सुतान् 271 सूपविष्ट ददर्श ६ 70 260 सूपविष्ट शिलाटछे 6260 सूपविष्ट स्वर कृत 100 30* सूपस्थमगमोपमम् 33 सूर्यप्रभस्तु प्रासाद 93 46° सूर्यश्च भविता स्वयम् 97 365 सूर्यस्येव गम्तिभि 22 434 सूर्य भिया महोल्का च 106 43° सूर्य ससाश्वयुक्तन 3420 सूर्याशात इवाम्बुद 58 26t सूर्याक्षश्चैव मालद 81 40% सूर्याच इमसाविर 91 41 9650 सूर्याच नमसौ तथा 43680 सूयापीइश्व मोक्षवित् 114 34 सूर्यो विधि घरन्माये 108 24 सुगारमगसिंदेश 49 10 सुजा तेन रोपानि 56 10. मृजत तुमुल महत् 81 101 सुजतां शरवर्षाणि 87 73% रजत पाश्रय विपर 71 10 सृजतो हि प्रजापते 1 360 सृजध्व मानसाम्यवान् 35 48° सृजम्व स्वशरीराशान् 43 126 सृजत शरजातानि 81740 सूजन्त शरवर्षाणि 81 986 सृजन्त सर्पपतय 3432* सृजल्लोकान्सनावनान् 30 53° सृजाम जगतीतले 43 10d सञ्जयस्य महामन 23 100% सञ्जयस्याभवत्पुत्र 23. 17 सायो नाम वै सृतप्लुतैश्च तुरगे 84 18 भूमरा पिचुकाश्चैव 59 54 सृष्ट पुनद्वय शुभम् 62 930 सृटामौर्वेण वहिना 35 18 सृष्टा येन स्म नारद 100 700 वटा येनैव तेजसा 35 730 सृष्टा लोकास्त्रयोऽनता 3028 सष्टोऽय नैष्ठिको राज्ञां 43 65* सेतुर्यो लोकसेतूनां 30 34 सेत्स्यते च स कार्याथ 44 82° सेत्स्यते वीर कार्यार्थ 62 180 सेननित्पृथिवीपति 15 16 सेनयोरुभयोस्तयो 81 904 सेनाध्यक्षाश्च सर्वश 15 430 सेनानीस्तात मा मैव 109 47" सेनानी काश्यपो हिज 15 40 सेनानी कैशिकव 81 81" सेनापतिमनाराष्टिं 86760 सेनापतिनारष्टि 10938 सेनापालाश सचकु 84 31" सेना बाण- समासाय 112 6" से चापधनोपमम् 55 190 सेन्ट्राशनिरिदाम्भोद 8411 सेयमस्मानपाहाय 822 सेय धात्री विधानी638" सेय निरामिरया 41 234 सेय मारपरिध्राता 41 18" सेविध पहुभिर्दि 55 19 सेवितां मियुनेछौ 55 30* सेग्यते यनपिभि 071 सेग्यमानमितमात 10. सेम्यमानो नर्मात। 35 16 - 276 - सेन्य सर्वपक्षिणाम् ] श्लोकपादसूची [सोमस्य भरतश्रेष्ठ सेव्य सर्पनृपक्षिणाम् 67 480 सेहे धयण महता 82 19 सकपर्णा समाचरत् 13 17 सनिर्भरतर्षभ 82 3 सैन्यस्यार्धन दशिता 81964,901 सैन्येन तद्विधेने 84 120 सैन्येन महता तदा 85 21 सैन्येन ससृजे नदीम् 85 221 सन्यै समुदितना 800 सैम्मुरवा मनु देव 9 8 सैषा दुर्विषहा माया 35 720 सपा नारायणमुरो 40 320 सैपा योपिद्वरा रानन् 118 25° सेंहिया इति पयाता 376° सोऽग्नि देयमुरो हप्ता 37 34 सोनिप्रावसाने रष्ट्वा 39 190 सोप्रन्यनो महासुर 31 TO सोऽध्यारोपणादत्या 91 44° सोऽतणार सून कृष्ण 51 16° सोयन्प्रथम पाई 36 58 सोऽशापयत समुद्र 76 18" मो.शापयत सरध 47 1. सोऽतिकायस्तु समूत्र 74 30° सोऽतिविद्ध शरीवस्तु 108 67" सोऽतिविद्धो महाबाहु 108 65* सोकण्टेनागरारमना 691 मोगुएनिनदोरियत 75 3' सोसमागायुक्ताभि 72 30 सोऽय संपूजित पूज्य 80 23° सोजतायुध 57 } सोधर्मनिरतोऽभवत् 50 सोन्यारोहदयातमम् 33 1300 सोऽनयों या साय 47 सोनलोनिरसयुक्तः 36 34 सोरिदो महारमना 1133 मोऽनिलभानलगार 30 31 सोऽनिलोत्तसन 37 420 सोनुभाग महारमना 49 13 सोऽनुशती हि सत्य 952 सोऽनुभूग भुगानां 70 290 सोऽनुमाय सुरासर्यान् 86 11' सोन्तरिक्षगतो भाषा 9929 सोन्यशिरपतित 99 30 सोऽन्वशाक्षिणा दिशम् 88 331 सोपधा प्रियमादसा 117 18 सोपन्यासमिद यच 72 15 सोऽपश्यत्त सुत ज्येष्ठ 99 420 सोऽपश्य सत्यभामा च 92 66° सोऽपश्यदृक्षपण्डान 93 10° सोपस्त्य नदीतीर 561" सोपसप्तो जनादनम् 83 53% सोऽपि कसस्तथायम्त 7628* सोऽपियत्पाण्डुरानाभ 83 20* सोऽप्ययपंत पासव 106 42 सोध्यवीरसहसा देवी 99 4300 सोऽभवरसप्तधा गर्भ 3 108' सोऽभवद्गारयो नाम 9 100 सोभागीमदर्शन 760 सोऽभिगम्याणशेऽप्रवीत् 43 28° सोऽभिद्रुत प्रभाभिस्तु 5 42" साऽभिपत्य महाबाहु 92 65* सोऽभिजुन्य तदा शति 108 73° सोभिभूय रणे याणम् 108 830 साऽभिवाय ये तस्मै 406. मोऽभिशप्तसदा राजन् 850" सोऽभिषिक्ता महातेजा 528* 20200 सोमकस्य सुनो जन्नु 23 1090 सोमको नाम पार्थिव 23 1014 सोमवं रानुरापेर 20 मव भारितामन 20 सोमदाम्य दायाद 23 tor" सोमदत्तो महायशा 23 116 सोमदत्तो महीपति 23 100 सामयाऽथ मुयना 333" समिशनामानम 13 121 सोमपाय को मुता 1361 से मधुमाधादा 9 11 सोमभूगन भूगाना 30 33 सोमयाविधन 21 16 मंमाशपियधनान् 2 46' मानसिर्धिनी 241 मोमदोरा 85 " सामय ग्म शुरक्षेत्र 2048. सामरूप भगवर्मा 331. मोमस्व मान911 277 सोमस्याथ बृहस्पते ] चिकित्सितपाठांत्मकस्य हरिवंशस्य [सौवीरराजस्य सुंता सोमस्याथ बृहस्पते 20 40% सोमस्याप्यायन कृत्वा 13 674 सोमस्याप्यायनाय वै 19344 सोमस्यांशेन भारत 2 45 सोमस्येति महात्मान 20 42° सोम पुत्र यशस्विनम् 23 0 सोम योगवलेन 2 13 114 सोम राज्येऽभ्यपेचयत् 4 24 सोम खमिव भासयन् 8662d सोम पीतो महात्मना 23 350 सोम प्रक्षीणमण्डल 20451 सोम श्वेतहयो भाति 34 230 सोम सोमवता वर 2022 सोमो धाता प्रजापति 2043 सोमो योगेन सगत 62 64° सोमो वायुहुंताशन 31 44 सोमो हि भगवान्देव 19 350 सोऽयमेत शतगुण 107 53° सोऽयश्शूर्णमभक्षयत् 85 10% सोऽय विज्ञातरूपो मे 107 73° सोऽय विष्णु सनातन 68240 सोऽयोध्याधिपति प्रभु 9 391 सोऽर्कममाविवोद्यन्त 34 36° सोऽर्चितो देवराजेन 92 52* सोऽर्जुनो नाम मे पुत्र 62 840 सोऽर्तनाद महरकृत्वा 74 38" सोऽधगाढो हि सहसा 113 120 सोऽवगाहत नि शङ्क 58 14° सोऽवगाह नरेन्द्राणां 100 210 सोऽवतीर्य गजातूण 91 30° सोऽविदूराद्विदूरथम् 87 63 सोऽश्वरूपेण भगवान् 8 37* सोऽसिमुद्यम्य दारणम् 108 520 सोऽसुरो ध्वजमुत्तमम् 106 40° सोऽसजज्वरमन्य तु 113° सोऽसृजरपुरुष विराट् 1 38 लोऽसूजरपूर्वपुरप 321 सोऽसजरसह मानसान् 1 294 सोऽनजारपहुविधै 37 41 सोनाणां पारतप्रज्ञ 62 75" सोऽस्माभी रतितस्कर 107 40% सोऽस्मि भार्गव भद्र से 12 12 सोऽस्य मूर्ति स्थित कृष्ण 5631 सोऽह कदाचिदेवाना 46 121 सोऽह कुतूहलाविष्ट 100 390 सोऽह कृष्णेन वै रात्री 68 38 सोऽह तन्न सितोष्णीपान् 46 13° सोऽह तस्मै नमस्कृत्वा 121" सोऽह त पाणिना स्पृष्ट्वा 100 35" सोऽह त्रिपथगावाक्य 100 44" सोऽह निराशो युद्धस्य 106 10° सोऽह पितामह गत्वा 100 680 सोऽह पृथिव्या वाक्येन 10054 सोऽह प्रजानिमित्त स्वा 63* सोऽह युगस्य पर्यन्ते 12 40 सोऽह वाक्यसमात्यय 100 60. सोऽह विष्णोर्गविं प्रेप्सु 100 80° सोऽह सागरवाक्येन 100 48" सोऽह स्वयभुवचनात् 100 68" सोऽह स्वयभुवं देव 100 59° सौकुमायें तथा रूपे 116 21 सौते किमकरोत्पश्चात् 115 3° सौते सुमहदाख्यान 1 1" सौत्येऽहनि महामति 5 320 सौनन्द च तत श्रीमान् 81 62* सौनन्द मुसल तथा 81 590 सौभद्स्तस्य धारमज 23 121' सौभश्च दधन्वना 97 60 सौभश्च विनिपातित 105 134 सौभस्य पतिर्मित 73 21 सौभ साल्यश्च निहतो 109 40° सौभाग्येनाभवत्तदा 94 271 सौमिनिर्मिग्रनन्दन 4451 सौमिनिवस्य च 44 41 सौम्यस्त्वं सर्वभूतानां 36 9° सौम्य चरति योगत 41 14 सौम्य शैल्यमय रसम् 34 26' सौम्यानामृजभारानां 38 78 सौग्यासु धनरामिषु 55 16* सौम्यां नीविग्रहां मुवि 87 3' सौम्ये तेरस्युपस्थिते 68 10 सौम्यग्दो प्रयुपस्थिने 68 !' सौवर्णा पानकुम्भार 74 11 सौवर्गेनोरुगा मी 894 सोयध्यासनेनामा 89 25 सौवीराय मुतां 97 10 278 सौवीराज शेयश्च] श्लोकपादसूची [स्थाने विह भवेापः सौवीरराजः शैव्यश्च 80. 15. सोहोरिरप्रवीद्गङ्गां 23. 71. स्कन्दगोपायनेन च 106.22. स्कन्दः सनरकुमारश्च 1.32'. स्कन्धदेशे घनावृते 67.24. स्कन्धाम्यां शुभलक्षणौ 58 4. स्कन्धावारनिवेशानम् 84. 31. सनद्वयमुसाचितः 42 3'. मनपानेप्सुना पीता 65. 26. मुनेः प्रनवसंयुक्तः 62. 59. सम्धों विलोचनः 16 23. स्नग्धाक्षो हेपितपटुः 57. 159. स्तम्यः काश्यप एव च 7. 11'. तम्या स्तम्यवनश्च 98.17'. स्वम्भनीमितिश्चापि 53. 24. स्तम्भ समायाः सौवर्ण 89 45. तम्मितस्येव रुद्रेण 61. 44. स्वम्भितेन यथा भूमौ 103. 12. स्तवाशी:प्रयमा गाथा: 79 30. स्ववेषु जनमेजय 5. 38. स्तव्योऽयमेवं शतशः 97.39%. स्नुवन्तः कृष्णमध्ययम् 56.46'. स्तुवन्ति देव दिग्याभिः 40. 40. स्तरन्ति मुनयः सर्वे 62. 62 स्तुवन्तो मधुसूदनम् 48 17. सामग्राहिराप्रवीत् 34. 61. स्दयतामेष पार्थिवः 63t. स्तूयमानः सवैः सः 109 86. ग्यमाने गदाधरे 36. 37. स्तूयमानो महर्षिभिः 40 36'. दियमानो यथा शक 91.42. स्तूपमानो हि मानयैः 110'. नोककाल्पहता सगा: 61. 18. वो पेनास्य कुर्याय 5. 36. खोयन्ति खो दिभातयः 78 21'. सोप्यन्ति भूपि शाश्वतम् 62.4. सोयामि भुजगेश्वरम् 70.10. पिपत्र शिशुभिः सह 67.11. नियर यशोदा 56 21. प्रियः श्रीमानगर्विते 7326. पिया लियो जामुपागतम् 96 19. नियोऽपि यस्यां युज्येरन् 93. 28. खियो हिरण्यं वासांसि 78. 23°. स्त्रीणां कारुण्यसंभवः 786 स्त्रीणां चारित्रलुब्धानां 77.14. स्त्रीणां प्रेक्षागृहा भान्ति 74. 13. स्त्रीत्वेन चलमानसा 99. 12, स्त्रीधर्ममभिरोचयत् 73. 13". स्त्रीनिमित्तं हतो युद्ध 44. 36, स्त्रीपुंसोरंक्षणैर्युतः 9 20. स्त्रीवालनिरपत्रपः 38.8'. स्त्रीभावमुपनेप्यति 107. 41. स्त्रीभावं चापि लम्भिता 107.21. स्त्रीमिर्षवरैश्चैव 45 B. स्वीभिदाभिरेव च 49. 29". स्वीभिः परमदुश्वरम् 23. 104". स्वीरस्नमुपभुइक्ष्वेमां 118. 35*. स्त्रीरत्नं मम भार्या) 15. 396. खीवध परिपश्यसि 5. 47. सीसनापास्तु भूमिप 47.6. खीसहस्राणि धान्यानि 88 43" स्नीसहस्रोपचर्येण 68. 24. मीस्वभावेन मोहिता 83.294 स्थण्डिरानि कुम्तिया 31.8. स्थपतीनय गोविन्दः 86 13. स्थलजाः पक्षिणोऽम्जाश्च 391 स्थलीमापामु रम्पासु 62. 20. स्थलेयुश्च महाबलः 23.11. स्थले वा यदि वा जले 5037. स्थगिन्दरा तय घे 8011. स्थाविरा येनपायय. 81. 30'. स्थविरो मृत एवं 7 48 47'. स्थपिरो या शोऽपि वा 75 13. स्थागुम्यो हिमवान्धेष्ठः 82 23. स्थानमात्मसमं प्रभु. 2 1. स्थानमोनाढयतः 31 33. स्थान तरयमयुन 7.3. स्थान तस्या नगे मिथ्ये 65 36. स्थान तुमनतः स्मृतम् 3041 स्थान दाम्पति शाधतम् 47.48'. स्थान प्रापयन्ति शावतम् 14 8'. स्थान प्राप्यमि शाश्वतम् 47. 38'. स्थानानि विशुधार 86 16, म्याने रस यारिवाहिन्य: 10043. स्थाने रिह महीपः 86 38. मूचाया पृतः 90.8.

स्थानेनेह न न कार्य] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [स्फीता जनपदायुता स्थानेनेह न न कार्य 53 20 स्थाने भारपरिश्रान्ता 81 120 स्थाने यदुकुल मूढ 65 70% स्थापयामास जगतीं 37 56° स्थापयामास भारत4 100 स्थापयामास मतिमान् 86 77° स्थापयामास वीर्यवान् 96 584 स्थापयित्वा जगदशे 68 31 स्थापयित्वा द्विवाहुत्ये 113 66° स्थापयित्वा नरेश्वर 18 8 स्थापयिष्यति राजान 68 33° स्थापयिष्यसि मर्यादा 45 194 स्थापयिष्यामि देवता 38 274 स्थापित सत्सु माहात्म्य 78 190 स्थापित स्वेन तेजसा 73 364 स्थापिता जगतो मार्गा 309 स्थापितो गोभिरीश्वर 62 44' स्थापितो यादवो वश 78 19° स्थाप्यन्ता सुनिखाताश्च 72 ga स्थाप्यमानरुदूखले 53 280 स्थायराणि च भूतानि 5 26° स्थावराणि घराणि च 318 स्थास्येते गोपकिल्बिषौ 72 236 स्थितमकूरमागतम् 70 34° स्थितमगिरस दृष्ट्वा 110 270 स्थितमेकार्णवेश्वरम् 70 220 स्थितवाञ्जनमेजय 5 17 स्थितविप्रस्थितद्विजम् 52 131 स्थितस्य परमाहवे 106 244 स्थितम्यानिमिषस्य इ20 4' स्थित त्वयि विधीश्वर 44 14 स्थित धरण्यां मेघाभ 55180 स्थित पुरुषविग्रहम् 103 244 स्थित किं करवाणि च 40 471 स्थित प्रीतमना भूत्वा 1133* स्थित शक्रमहस्तात 60 10% स्थित सूर्य इवोदये 108 64 स्थिता धर्मव्यवस्थाथ 7 350 स्थितान्येव प्रश्यन्ते 113 56 स्थिता पृथिव्यामद्यापि 9 300 स्थिता घे भीतभीतवत् 108 11' स्थितास्मि तय निर्देशे 8 g" स्थितास्म्यागर भद्र ते 71 25' स्थितो देवसभामध्ये 44 13° स्थितो भूमिगतश्चैव 75 120 स्थितो मूर्ध्नि महीक्षिताम् 45 8° स्थितो राजश्रिया ज्वलन् 43 32 स्थिती धनुर्गृहे सौम्यौ 71 49° स्थिता यौवनगा मुखे 96 46* स्थिरप्रसादाश्च सदा 1370 स्थिर मरमोधन यलम् 38 24 स्थिरो भव महामात्र 73 386 स्थूणाकर्णेन चारण 110 31° स्थैर्येण जातेन पुन स्मरन्त 118 50° सातमेकार्णवाम्बुमि 7025* साता प्रनवदिग्धाङ्गी 507° स्नातुमिच्छे महानदि 83 28° स्निग्धगम्भीरनिर्घोष 106 29° निग्धगम्भीरनि?ष 109 84* स्निग्धगम्भीरण वाचा 109 64° निग्धशीवानिलवन 52 23° निग्धाञ्जनचयप्रख्य 110530 स्निग्धैश्व शास्त्रविनिश्च 15 47" सुपाणामार्तनादेन 77 40° सुपा तव वराङ्गना 99 48 खुपाया क्रयकैशिको 26 19 सुपा वै वृद्धशर्मण 13 850 स्नुषा मायावतीं चैव 99 42 सुषेति स नरेश्वर 26 16 स्नहविक्लरगद्गदा 109 180 स्नेहेन तरुणायते 76 120 स्नेहोऽत्र मम युज्यताम् 78 29 स्पर्धते म सदा पले 80 11 स्पास्तरणसते 109 66 स्पर्शाद्विज्ञायतेऽनय 103 20% स्पृष्टो यद्यसि पर्षणि 43 31 स्पृहणीयेन कर्मणा B5 3. स्पृहणीयो हि रोकस्य 68 35. स्टहयामास से नृपम् 1636 पाटिकस्तम्भविएत 943. पीतकोदावरम्येन 34 43. स्फीतसम्पमस्दानि 582 स्फीत कृतयुगे पया 68 30 सीतं निहतकष्टकम् 39 63 स्फीत विषयमिता 26 स्पीता जनादायुवा 41. 280 कानपदास्वान्स्वान् ] लोकपादसूची [स्वधाममितविक्रमै पुन पुन 110 27 स्फीताशनपदान्स्वान्स्वान् 4170 स्फीतान्पुण्यननादृतान् 23 989 स्फीता राष्ट्रसमाफी 44 64° स्फीतो जनपदो महान् 61 51 स्पुरदन्तीष्ठबदन 33 17° स्पुरविव स रोपेण 5670 स्फोटयन्तश्च दानवा 33 27 स्मयलिव सदा कृष्ण 113 220 स्मयविच समयमाणस्तत कृष्ण 112 630 सयमान इवानघ 12 स्मरण वैनतेयस्य 109 780 सर ता प्रकृति पूरी 113 28° स्मर भामिनि तद्वच 107 40% स्मरामि भामिनि वच 107 45* मरामि भनुनमा 109 300 सराय अनुसात्मान 58 36° मार्यते सुकृतानि या 72 17 स्मित हवा यचस्तदा 109 33* स्मृता दिवि महर्पय 7 420 स्मृता स्वारोचिपेन्तरे 7 123 स्मृतिमन्तोऽय घरवार 18 14 स्मृतिरसत्स्यते प्राप्य 146 स्मृति प्रत्यवमर्शश्च 16 16* स्मृती द्वावश्विनाविति 8 39 स्मृस्य गोपेषु यत्कृतम् 83 1 स्मृत्वा देवीवचस्तत 107 44 स्पन्दनस्या महीक्षित 81 17 स्पन्दन तात रक्षस्व 70 8° स्पन्दन पाइयामास 33 16" स्पन्दनेनारिमर्दन 79 36 स्यन्दने पुरुषोत्तम 110 अ' स्पन्दने गीतरश्मिवान् 34 23 पदने काचनापीट 84 180 स्पन्दन्तीभिरलकृतम् 49 17 समन्तकृते प्राज्ञ 29 25° समन्तकाते सिंहार 28 15° स्थमनाक च नापश्यत् 29 20° समतका स मगामी 29 10 म्यमतको महायाहो 29 11 स्थाव धर्मस्तगाल 69 25 स्यानु साना भवेरमीति 59 61 याच शक्तिघरस्तुल्य 608 स्यान्न चान्येन मे वध 31 434 सानाम याक्य श्रुत्वैव 65 942 स्यारोऽभिशप्तवान्गाग्य 85 8° स्युश्च धर्मपरा प्रजा 78 11 स्रक्ष्यामि वृष्टिं वात च 61 5 सग्दाममारावितत 38 41 सग्दामरम्बाभरण 58 28° स्रग्विण रक्तवाससम् 10756 खधन्तीपु नव जलम् 55 140 स्रष्टा च हण्याच्याना 31 60% स्रष्टा धर्मस्य कश्चान्य 5 190 स्रष्टार सर्वभूताा 1 18 7510 स्रष्टुमिच्छन्प्रजापतिम् 1 280 सस्तरश्मिप्रतोदो तो 19 20% चुक्सोमसूर्यमुपभृत् 316 स्रोत पुलिायिम्बोष्ठी 83 350 स्रोत स्सरितगामिनी 83 39 स्रोतोमि परिकृत्तानि 54 180 स्वर्गद्रग्ययुक्ताभि 745. स्वक्ष स्थवरोदार 338 स्वगर्भ धाहितस्य व 486 स्वगृह प्रतिजग्मतु 72 234 स्वगृहे स्वर्गलोके या 3877 स्वजनं च समेध्यय 69 साने प्रहत मया 48 39 स्वानो याति विक्रियाम् 65 684 समाति व घास च 112 " स्वजातीयोऽसि यान्धव 63 11' खतनगदमाखदा 52 30% स्वतनश्वकवास्तु 1636° स्वतघ्रस्त्वशुहानज्ञे 18 18. स्ववोध्य भविष्यति 170" म्वदेशेम्य परिभ्रष्टा 117 #. स्वदेहमपर स्थितम् 39 20 स्वदेई स्वेन तेजग्गा 43 360 स्वधर्मनिरता सरें 16 17 स्वधर्ममुरातों पर 266 सधर्मस्येषु वर्ग 38 44 म्वधर्म पृष्टत वृत्वा 536 स्वधर्माधिगता कीर्ति 78 18 खधामास विषये 1108 स्वधाममितविक्रमै 62 291 हरि,।

स्वधिष्ठित भूतगणे ] चिकित्सितपासात्मकस्य हरिक्शस्य [ स्वर्भानुश्वामरमख्य स्वधिष्ठित भूतगणै 404 स्वपक्षक्षयपीडिता 117 411 स्वपक्षबरविक्षेप 110100 स्वपक्षे चोदित सूर्य 106 43° स्वपक्षमलिनस्तारै 59 40 स्वपत सागराम्भसि 1 101 स्वपन्त पुरुष तदा 10481 स्वपश्वेव महामुनि 40 19 स्वपितुवनं वी 76 48 स्वपुन पपरक्षत 90 280 स्वपुर्या पद्मलोचन 46 34 स्वप्रयोगेन कल्याणि 107 334 स्वमरूपेण तेषावै 47 25* स्वमानाच निशाक्षये 8624 स्वमान्ते क्षीयते छपा 40 30° स्वमायमानो जलदै 61 460 स्वप्ने य दृष्टवत्यसि 107 104 स्वप्ने हयंगता सती 10733 स्थबाहुपक्षमाश्रित 108 96* स्वभाव खलु योपिताम् 99 14 स्वमीसा भास्वता बर 20901 स्वभिपृष्टयामृतोपमम् 53 304 स्वमार्गम्यभिचारिणी 83 431 स्वमेव भवन पितु 8 10 स्वमेघ भवन प्रायात् 91 43° स्वमेव भवन वीर 10087 स्वमेव स्वजनावृत 894 वयनस्थे दिवाकरे 36 40 स्वयमागग्य भूपते 31 36 स्वयमुरिक्षय माधव 92 18" स्वयमेव पितामह 3961 20364 स्वयसेव प्रवायत 7537 स्वयमेव वृत पुरा 23 151 स्वयमेवानयाशु 4 65 35 स्वयमेवाम्बुदारणाम BIB स्वय कृत्वा निवरसन्ति 117330 स्वयमाहमर्पयत् 108 16* स्वय धाई तथाभवम् 102 61 स्वयं नारायणेन पा433 स्वयपारा स्वयचोरा 117 26. स्वयभुवोऽपीह पर 100 70* स्वयंभुयोऽपाद परा 100 120 स्वयभूरादिवृद्विभु 31 500 स्वयभूरिति न श्रुतम् 1 256 रूयभूर्भूतभावन 13 34 खयभूश्च स्वयमुर 384 ख्यभूश्च स्वयमुवाम् 4617' स्वयभूखिदिवगत 47 190 स्त्रयभोज स्वयभोजात् 28 4. स्वप युद्धविशारद 109 430 ख्यवरमरिंदम 891 वय स्वयभुवा मृष्ट 38 49° सय सयभूभगवान् 62 2300 स्वरक्षणपरायणा 165 स्वराज्ये राजसत्तम 78 371 स्वर्गगानि तथा ह्या 81 11 स्वर्गद्वारास भास्करम् 37 630 स्वर्गमारोग्यमेवाथ 1968 स्वर्गलोक निविष्टपम् 21 281 स्वर्गलोके महीयते 1 160 2564 स्वर्गखीणा प्रिया शूरा 77 34 स्वस्थानपि भारत 1 390 स्वर्गस्था पितरोऽन्येस 120 खो सुकृतकाणाम् 62 310 स्वर्गादूर्वं ब्रह्मलोक 62 370 स्वर्गाथै दर्शयत्सु च 36 420 स्वर्ग तपोभृता वास 78 10° स्वर्ग देवगणा इव 84 38 स्वगें पिताणा स्मृता 134 स्वर्ग ये रक्षसा इता. 10 311 स्वर्गे वसति दान: 31564 स्वगें वास तथाक्षयम् 917 101 स्वर्गशमिवामरा G+91 सगै शानुयानेषु 348 स्वग्यमायुर्विवर्धनम् । स्वयं यशस्यमायुष्य 425* साकुण्दरपरम् 336 स्वर्भानुना हते सूर्ये 23 10 सर्भानुरास्थयोधी7 33 23. सर्भानुषपर्वा 309 सभानुयनाम्नां 69 100 ध्यमांनुश्च महामहः 3864 स्वर्भानुशामाप्ररथ: 377 282 लोकपादसूची [स्वा स्वां गतिमुपाश्रिता स्वर्भानोस्तु प्रभा कन्या ] स्वर्मानोस्तु प्रभा कन्या 371° स्वल्पधर्मपरिग्रहम् 43 60° स्वस्पेन खलु कारेन 81 130 स्ववदाधारण कृत्वा 1 16° स्ववृद्धार्थमह चैव 4756° स्वशक्त्यैर महावल 103 740 स्वसार ददुरन्धका 27 24 स्वसार शीरसमताम् 29 34 स्वसारो गरदध्वनात् 9871 स्वमारौ सयभूवतु 28 30 स्वस्तिकायतन दृष्ट्वा 70 13 स्वस्तिकाविभूपिता 61 40 स्वस्ति तेऽस्तु बनाम्यहम् 29 22 46 190 8554 स्वस्ति तेऽसिथति चोक्तो वै 23 11 स्वस्तिप्रणिहिता बुद्धिं 106 62° स्वनि मे दारकायेति 50 % स्वस्ति वाच्य द्विजोत्तमान् 86 33 स्वस्ति वाच्य ययामुसम् 60 19° स्वस्ति वोऽस्तु गमिष्यामि 38 76° स्वस्त्यस्तु देवेभ्य इति 34 B1° स्वस्त्यस्तु देस्येभ्य इति 34 510 म्यस्त्यस्तु भवतो रोरे 67 59° स्वस्त्यानेया इनि ख्याता 23 14 स्वस्थ प्रशासनायुग्मान् 22 45* स्वन्ध सम्रामरालस 81 8° म्यस्थान प्रातपत्स्यते 97 311 स्वस्थानेऽध गृहेऽपि या 62 Bs स्वस्थाने शाट धैव 50 190 सस्थाने स्थापितस्साच 106 13° स्वस्थान स्थापरात्मवान् 61 6' स्वस्थानस्य भविष्यति 1121230 स्वस्य पुनस्य ये तदा 8 18 स्वहनाचरणौ क्षिपन् 505 स्वदम्तमुने परिध 357* स्वहस्तनारनाम्य च 5630* स्वैप कर्म मुगुप्स!! 18 46* सप स्गामुपागमत् 23 31 स्वं च स्थान ततो घार 61 63* स्व जगाम महासुर 99 50 स्वं जीपाल भिया 100 46" स्व दधारात या 731 स्व निनाय रथोत्तमम् 87 41' व निवेशनमभ्ययात् 94 16 स्व रजोरक्षित जलम् 83 31 स वपुर्दर्शयामास 58 250 स्व वश पूर्वमेव हि 23 स्वस्व योग प्रचक्रिरे 30 500 स्वागत ते महाबाहो 8370 स्वागत ते सुरश्रेष्ठ 39 250 स्वादु कि न्विति विज्ञाय 117 430 स्वादुपुष्पपर रम्य 49 20° स्वादुवीर्यतृणा गुणे 59 31 स्वादुवृक्षफ्लोदकम् 52 21 स्वादूना विनिवृत्तिश्च 116 16° स्वादून्यायं सुगन्धीनि 57 8" स्वाध्यायेन महर्षय 38 71 स्वानि स्थानानि दिन्यानि 31 53° स्वानि स्वालियरामाणि 84 19° स्वान्वितन्दोनया गिरा 13 304 स्वान्यायुधानि सगृह्य 31 87° स्वाभि प्रभाभिहाना स 110 11 स्वामगच्छ पुरी पितु 99281 स्वायत सुप्रतिष्टितम् 724 स्वायताही शुचिम्मिता 71 32" स्वायनाष्टापदोपमा 8 29 स्थायभुवेन योगेन 62 130 स्वायभुवो मनुम्तात 7 . स्वारूढ स्वणपाय 38" म्बारूदै सादिभियुन 817" स्वाराधिषस्य पुनास्ते 7 130 स्वारापितधनुप्मत 8176° स्वासीन स्वनिमभ्या घ70 19° म्बामुम्बाम्बरनी पय 100 101 स्वाहागराधया 110 25* म्याहिपुयाऽभयदाना 2020 स्वादि म्याहाहा परम् 26 11 स्वां जरा प्रत्यपद्यत 22351 स्था पुरी यादहनाम् 9 26° म्या भायों यहवा तत 8 36* स्वां मायाँ गुभचारिणीम् 8. 32' स्वा यानि रोकधारिणी 4365 स्वाप समनिकमनू 43 204 स्वां श्रिय देटि वामय 100 स्वां ममा कामरूपिणीम् 42 64 स्था वो गतिमुपाश्रिता 3563*. 283- स्वधिष्ठित भूतगणः] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [स्वर्भानुशामरप्रख्यः स्वधिष्टित भूतगणैः 40 4. स्वपक्षक्षयपीडिताः 17.41. स्वपक्षबलविक्षेपः 110. 19. स्वपक्षे चोदितः सूर्यः 106.43. स्वपलमलिनस्तारैः 59. 44". स्वपतः सागराम्भसि 91. 19'. स्वपन्तं पुरुषं तदा 10. 48t. स्वपनेव महामुनिः 40. 12. खपितुभवनं वीरों 76. 46. खपुर्व पर्यरक्षत 96. 28. स्वपुर्याः पालोचन: 46.31. स्वायोगेन कल्याणि 107. 33. स्वारूपेण तेषां वै 47. 250. स्वमानां च निशाक्षये 66.24. स्वमान्ते क्षीयते शेषा 40. 300. स्वप्नायमानो जलदैः 61, 46*. स्वप्ने यंत्रवत्यसि 107.70% स्व हर्म्यगता सती 107.73, स्त्रयाहुबलमाश्रितः 108. 96. स्वभावः खलु योपिताम् 99. 14. स्वभासा भास्वतां घर: 20. 206. स्वभिवृष्टयाटतोपमम् 59. 30*. स्वमार्गग्यभिचारिणी 83. 43* स्वमेव भवनं पितुः 10. स्वमेव भवनं प्रायात् 91.43. समेव भवनं वीरः 100.87". स्वमेव स्वजनावृतः 89. 47. स्वयनस्थे दिवाकरे 38 40'. स्वयमागम्य भूपते 31. 35. स्वयमुरिक्षर माधवः 92. 18. स्वयमेव पितामहः 3. 984. स्वयंभूरादिद्विभुः 31. 50. स्वयंभूरिति नः श्रुतम् 1, 21. स्वयंभूर्भूतभावनः 113. 34. स्वयंभूश्च स्वयंभुवः 38. " स्वयंभूश्च स्वयंभुवाम् 46. 17'. स्वयंभूखिदिवं गतः 47. 10. स्वयंभोजः स्वयंमोजात् 28. 4. स्वयं युद्धविशारदः 109, 43. स्वयंवरमरिंदमः 89, 14. स्वयं स्वयंभुवा सृष्टं 38. 42". स्वयं स्वयंभूभगवान् 62. 22. स्वरक्षणपरायणा: 116.6. स्वराज्ये राजसत्तम 78. 37. खंगगानि तथा ह्येषां 81, 11... स्वर्गद्वारास भास्करम् 37.53'. स्वर्गमारोग्यमेवाथ 13.88'. स्वर्गलोकं निविष्टपम् 21. 28". स्वर्गलोके महीयते 1. 16. 2.664 स्वर्गखीगो प्रियाः शूराः 77.24. स्वस्थानपि भारत 11.39% स्वर्गस्थाः पितरोऽन्ये स 11.2. स्वर्गः सुकृतकर्मणाम् 62. 31'. स्वर्गादू ब्रह्मलोक: 62 27. स्वार्थ दर्शयरसु ध 38. 4. स्वर्ग तपोभृतां वास: 78. 10. स्वगें देवगणा इव 84. 34. स्वर्ग पितृगणाः स्मृताः 13.4 स्वर्गे ये रक्षसा हताः 10. 511. स्वर्ग उसति दान 31.66". स्वर्गे वासं तथाक्षयम् 9.77. 20. 36. 10.811 स्वयमेव प्रवाद्यन्त 75 374. स्वयमेव वृतः पुरा 23. 155'. स्वयमेवानयाशु वै 65, 95. स्वयमेवाम्बुदारणम् 61 .. स्वयं कृत्वा निवरस्य नित 117.33, स्वयंप्राहमवर्षयत् 108. 16. स्वयं घाई तयाभवम् 102.6. स्वयं नारायणेन वा43.34 स्वयंपाला स्वयंचोरा: 117.26. स्वयंभुमोऽसीद प 100. 70% सूर्यमुशोऽपीह पारा: 100.72 स्वर्ग किमिवामरा: 64.24. स्वर्ग समानुयातेषु 34.8*. स्वर्थमायुर्धिवर्धनम् 1, 21 स्वाय राज्यमायुष्यं 4.25*. स्वर्णकुण्डरस्परम् 33.6. स्वर्भानुना हते सूर्य 23. 10/- स्वानुरास्पयोधी तु 33. 23. स्वर्भानुपपर्या च 3.69. स्वर्भानुवदनमा 69. 10. पर्भानु महाप्रदा 38.67 स्थानुशामरमाइपः 37... 282 [स्वा स्वां गतिमुपाश्रिता श्लोकपादसूची सानोस्तु प्रमा कन्या] कांनास्तु प्रभा क या 3 71 मधर्म परिप्रदम् 43 60 लापन खलु कारन 81 130 सनशधारग कृत्वा 1 160 स्मथसह चैव 4756 स्वशक्त्यैव महावर 108 10 समार ददुर धका 27 24 ससार श्रीलसमताम् 29 3 ससारा गरहन्व जात् 9871 समारो मतभूवतु 28 39 मानिकपतन दृष्ट्वा 70 13 समिकाविभूषिता 61 40% ग्वनि तेनु माम्यहम् 29 226 46 194 8551 बस्ति तेऽस्विति चाक्तो वै 23 11* स्वाम्निप्रणिहिता बुद्धि 106 62 स्वस्ति मे दारकायेति 50 म्बम्ति वाग्य द्विजोत्तमान् 863 मस्ति वाय्य यथामुसम् 60 100 मस्ति वोस्तु गमिष्यामि 3876° मन्यात दम्य इनि 34 b1" माम्यस्तु देवेभ्य इति 34 51° सस्यस्तु भवतो लोके 67 59% वस्यारेया इनि झ्याता 23 14° वन्य प्रमादानायु'मान् 22 459 बन्य ममामलालस 818 म्हन्धान प्रनपत्स्यते 97 31 सम्यानेऽय गृहेऽपि था 62 8' सन्धान श चैव 50 19° सम्याने स्थापितस्याथ 106 13° मस्थान स्पारात्मवान् 61 64 मयारस्थ भविष्यति 112 1236 मम्य पुनस्य वै तदा 8 18 महन्न चरणौ विपन् 50 पहनमुक्त परियै 357 लहस्तनारनाम्य च 56 300 लेच कर्म जुगुप्ससा 48 46 से च स्थानमुपागमत् 23 31 समस्यान ततो धोए 61 63 सनगाम महासुर 9950 सनघतल भिया 100 46° न्य धारानई पपु 73 11 सनिनाय रयोत्तमम् 87 41 स्व सीवेशनमभ्ययात् 94 16 स्व रजोरञ्जित जलम् 83 31* स्व वपुर्दर्शयामास 58 250 स्व वश पूर्वमेव हि 23 2 स्वस्व योग प्रचफिरे 30 50d स्थागत ते महाबाहो 8310 स्वागत ते सुरश्रेष्ठ 39 250 स्वादु किं न्विति विज्ञाय 117 43° स्वादुपुष्पपल रम्य 49 200 स्वादुवीर्यतृणा गुणै 59 31 स्वादुवृक्षफलोदकम् 52 21 स्वादूना घिनिवृत्तिश्च 16 16 स्वादून्यार्य सुगन्धीनि 578 स्वाध्यायेन महर्षय 3871 स्वानि स्थानानि दिव्यानि 31 53* स्वानि स्वानि बरामाणि 8+ 19° स्वान्पितॄन्दीनया गिरा 13 300 स्वान्यायुधानि सगृह्य 31 87 स्वाभि प्रभाभिींना स्म 110 11 स्वामगच्छ पुरी पितु 99 284 स्वायत मुप्रतिष्ठितम् 72 4 स्वायताही शुचिस्मिता 71 32" स्वायताप्टापदोपमा 84 290 स्वायभुवेन योगेन 62 130 स्वायभुवो मनुम्तात 7 " स्वारूद स्वणपादय 3840 स्वारूढ़ सादिभिर्युक्त 81 स्वाराविषय पुनास्ते 7 130 स्वारोपितधनुष्मत 81 *8° स्वासीन स्वस्तिकाम्या घ70 196 स्वासु सास्वानीपथ 100 101 स्वाहाकाराश्रयाप 110251 स्वाहिपुत्राऽभवदाजा 262 स्वाहि स्वादाहता वरम् 261 स्वारा प्रत्यपद्यत 22356 स्वा पुरी यादवेताम् 9 260 स्वा भार्या वडमां तत 836' स्था भायौं गुभचारिणीम् 8. 39 स्था यानि रोकधारिणी 43633 स्वा वेला समतित्रमन् 43 20 स्वा ध्रिय देष्टि वामय 100 स्वा सभा कामरूपिणीम् 4266 स्था स्वां गतिमुपाश्रिता 35631, स्वां स्यां दिख रास्ते चिकित्सितपाठात्मक्स्य हरिवंशस्य 1 इन्यतामेप दुर्मति स्वा स्वा दिश ररक्षुस्ते 34 19° स्विजारोमा श्रान्तस्तु 67 37* स्वेग दन्तेन कुअर 74 34 स्पेन दूतेन हारयन् 85 31 स्वेन देहेन कल्पिते 70 100 स्वेन नाम्ना परिक्षात 40 30 स्वेन सौम्येन तेजसा 62 अ' स्वे पाणी पुरुषव्याघ्र 6 140 स्ने पुरे निर्भया सर्वे 79 31° स्पेषु वेश्मसु देवकी 94 15 स्वेपु स्वैपु च स्थानेषु 38 27° स्वैरनीकर्व्यवस्थिता 110 2' स्वैर चरतु विस्तब्धा 47 30 ह हतवानेकपाणिना 31 674 हवविधा हतलमा 67 456 हरवीर्यपराकमा 21 35* हतस्त्वरिष्टो वर वान् 65 310 हतरव जगतीपते 77 20d हतस्त्व दर्पजैप 38240 हतस्यापि प्रतोऽपि वा 75 26° इतस्यापि रणे शस्बै 75 260 इत कृष्ण न्यवेदयन् 28 271 हत स्वकर्मणा तत्तु 15 57° इत प्रसेन सिंहेन 29 100 इत सोऽय मया कस 78 144 इत सौभपति साल्व 976° हत्तानेन दुरारमना 67 49 हता नी बहवा गोपा 67490 हता पुण्यजनस्तात 9 320 हता ब्रह्माद्विप सर्व 957" इता मायाश्च ना सर्ग 9910 इतावित्यवगन्तव्या 72 23 हताशा हतवाधवा 77 33 हताश्व स रथ त्यया 87 580 इताची हतमारथी 82 " शास्ता सयजा गार 616 दत से दुरात्मनि 806 इते कसे मम सुत 65730 इते चोग्रायुधे पे 15614 इते नीपेश्वर चैव 1561 इते पितरि दुसार्ता 29 0. हते भौमे निसुन्दे च 92 8° हते रुक्मिणि वीर्यवान् 911' इते शस्त्रे महाराज 112 74° हतेषु पुरुषोत्तम 38 हतैवैषा यदा कन्या 48 26° हतो मधुवने भीम 31 127° इतोऽयमिति विज्ञाय 108 70° 112 210 हतोऽय लोककष्टक 67 47 हतो हिरण्यकशिपु 65 370 इतौ च तव पुत्रत्व 42 29° हतौजा दुर्घलो मूढ 21, 31° हती प्रभवता तेन 31 18° हत्वा कुवल्यापीड 96 620 हत्वा क्षेमकराक्षसम् 23 68 हत्वा गोपालकावुभी 73 370 हरवा चारीन्सहस्रश 23 1426 हस्वा चासुरपुगवान् 31 911 इत्वा जरासघबर 77260 हत्या र दानव रणे 44530 इत्वा निवेशयामास 23 61. हत्यापि मा न शक्तस्त्वं 5 51 हत्या भोज महाबरम् 29 20 हत्यामा नय गावस्व 113430 हत्वा मृगान्वराहाच 1030 इत्वा रजिसुतान्सर्वान् 21 36° हरवा शुम्भनिशुम्भौ द्वौ 65 6!" हत्या सत्राजितं युद्ध 29 30° हनिष्यति स भार्गव 23 1030 हनिष्यामि वसुधरे 63 हन्त ते कथयिष्यामि 4 230 113 हन्त ते वर्तयिायामि 1610 2330 हन्त विष्णो समसारव 31 ' हन्तम्या रिपयो युधि 45 194 हम्तव्यो नान सशय 72 194 हन्ता हर्नुभविष्यति 170 हन्तु कृष्णमशगुयन् 74 3d इम्त वर्षशतरपि 8.1 हम्न दोर्महारया 829 इम्मि प्सा महामुरान् 109 48* इम्यवामेप दुर्मति 10B 18 श्लोकपादसूची इन्यमानः शाहन्मू] [हविषा कृष्णवरमैव हन्यमान. सन्मू 74 34. हन्यमाना महात्मना 108 28' इन्युमो देवमत्तम 31 4. हम्मारवैश्च यत्सानां 4921. 60 156 इम्भारकै क्रन्दमानाः 61 21. इय उरमज्यतामिति 1156. हयग्रीव इति स्मृतः 44 67'. हयग्रीवश्च निहत: 105 14. हयग्रीवश्च वीर्यवान् 31 70. 37.6. हयग्रीवश्च मुमहान् 109 40. हयग्रीवस्तु दानवः 33 15. हयग्रीवं निसुन्दं च 92 28°. हयग्री महामुरम् 91 50. यमीरे घ दान 92 8'. हयग्रीवो निसुन्दश्च 91. 10. हयभाण्ड रथे तया 709. हपया प्रत्यपद्यत 29 144 इयरूपं समास्थितः 67 47'. यस्यास्य महेन्द्रोऽपि 67.56'. हयानां च सहस्राणि 109 37* हयेम्यो याम दया 709. हये शिकरोपमैः 34 13'. दरणाय प्रपत्स्यन्ते 116 20. इत्यस्तीरजाम्वृक्षान् 54 14. हरमाणो न्यगृह्मत 90 8. हरमाणा महायरी 96 47. हरच यहुरूपश्च 3 43. दरससर्गमेव च 1129 हर सम्भयामास 112 31. हरिणाकीडन नाम 58 18. हरितानि मृदूनि च 54 . हरितारापीतेन 63 20. हरिवं च कृते युगे 32 1. हरिपुमेन गोविन्दा 79 36. हरिरामीरमनातनः 32. हरिरेकार्णगोलेन 40. हरिजमाद कुपित 112 11. हरिनारायण प्रभु 20 हरिनारायगो परम् 10 51. हरिगिलप्रभु 23 168. इरिणिरुले प्रभु 7.56. हरिरिणकुलोद्वद. 22 44. हरिवंश द्विजर्षभाः 113 83. हरिश्चन्द्रमकल्मपम् 10 21". हरिश्चन्द्रस्तु राजर्षिः 115 180. हरिश्चन्द्रस्य तु सुत 10 23. हरिष्ये जीवितं रणे 109314 हरिं कृष्णं प्रजापतिम् 10 45. हरि नारायण प्रभुम् 7 14. हरिं विव्याध चुपित. 12. 16. हरिं हर इव क्रोधात् 113 20. हरि कृत्वोदकं तदा 29 8. हरि. प्रादात्प्रजापतीन् 3 110. हरि. सोऽभवदारक्ष्य. 42 4. हरेणामित्रघातिना 106 351. 112 17' हरे हर्यश्वचापेन 54 300 हरे कृष्णस्य धीमत. 30 14 हार पररत्नानां 117 18', हर्यस्था सरिसमनिधी 108 8. इम्ये पायानां रदती 107. 41. हम्य स्खीगणमध्यस्थं 108 6. हर्यद्गस्य सुत कर्ण 23 40", हयगोऽस्य सुतोऽभवत् 23 39. हर्यश्वरधमयुफे 32 26. हर्यश्वम्तस्य धारमज 97. हर्यश्वस्य निकुम्भोऽभून् 9 79. हर्यश्वा इति विश्रुता 3 10'. हृयश्वरय नमु 3 18. हर्पज वारि नेवाभ्यां 78 11. दर्पणाम्युस्थित शीघ्र 106 18. हणायस्थितोऽभवत् 109811 हलमार्गानुसारिणी 83 33* दरमुयम्य रामस्नु 81 67. हर विएता यमुना यमस्वमा 90 171 हरं सपना नाम 81.89. हलायुधमभिः 110586 हलायुधमभिद्यत् 11059'. इदिन श्वारस्य मे 99 394 हनिर्गनारामानेयी 2 28. हविर्धानान्महारान 2 29. हविर्धानेपु गायन्ति 34. इविधं सुतियोनि 7. 12, हविषा कृष्णवरमें 22 36. 2852 हविपेवानरस्याचि ] चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य [हिंसया विचरिष्यन्त इविपेवानरस्यार्चि 87 39 इवींषि भरतर्षभ 11670 हन्यकम्यप्रदान्मखे 30 220 हव्यकव्यातिवेगवान् 31 26 हन्यभुक्रतुसत्कृत 34 350 इन्य होतारमेव च 315 हव्यादांश्च सुराश्चक्रे 30 23° हव्यश्च विविधैस्तृप्त 41 16° इसन्ती च क्वचित्वचित् 51 100 हसस्तबर तस्थिवान् 67 44d इसस्तिष्ठति दैत्यानां 33 230 हस्तप्रासानि युद्धानि 67 61" इस्ताभरणपूर्णेन II 18" हस्ताश्चफ च सायुधान् 38 281 हस्तिन चोरपलापीट 4551 हस्तिना कलहे घोरे 65 670 हस्ती कुवल्यापीड 73 1° इस्तोच्छ्रितमुखा वन्या 54 20* हस्त्यश्वरपसकुला 44 or हस्त्यश्वरथसपूर्ण 78 220 हसकारण्डवोद्रुष्टा 5 300 इसकूटस्य यरङ्गम् 93 b¥ इसचामरवीजितम् 59 35 इसयुक्तिन भास्वता 31 351 हसरक्षणहासिन्य 59 37 इससारसविन्यास 59 44 इससेवितवारिभि 93 11' इसे विचरत्सु च 62 51" इसैबिदसितानीव 59 360 धिगित्यपरे पुन 56 204 हारभारार्पितोदर 34 14 हाराहेण च पीनेन 68 2300 हारेपोरसि रानता 47 41 हारैश्चन्द्राशुसकाश 9425 हासित कुटजे फुलै 548 हास्यः खलु स सायेषु 462 हास्य क्रीदनकैस्तथा 58 136 हा हतासीति शुशु 562 हा तास्मीति धाराती 774 हा हता स महायादो 73. हावाकारं प्रकुर्यती 51 25° हावामार प्रर्यन्त 56 19 दादेति कुतस्तस्स 83 330 हाहेति करवा त्वरिता 508 हाहेति हियमाणस्य 102 10° हित सर्वदिवौकसाम् 41 11 हितार्थ व सुरोत्तमा 43 40° हितार्थ सर्वलोकाना 3 47° हितार्थ सुरमानां 31 13° हित्वा गर्भतनु चापि 48 29* हित्वा मान यशस्विनी 214 हित्वायोध्या दिव यात 31 141° हिमकाले यथा ब्योम्नि 67 25° हिमतोयप्रपूर्णाभि 3423 हिममहरणं स्थितम् 34 260 हिमप्लावितसङ्गिा 36 1900 हिमवदनसभूतौ 71 370 हिमवन्तमगादाजा 8563° हिरण्यकशिपुर्दृष्ट्वा 3564 हिरण्यकशिपुर्दैत्य 31 54 हिरण्यकशिपुर्योऽसौ 24 210 हिरण्यकशिपुईत 30 13 31 314 38 100 हिरण्यकशिपुश्चय 3 5835280 हिरण्यकशिपु पुरा 38 190 हिरण्यकशिपो राजन् 31 64 हिरण्यकशिपोर्पधात् 31 60° हिरण्यकशिपो पुत्रा 3 59* हिरण्यगर्भवोद्गाता 20 23° हिरण्यगर्भस्य सुता 7 15 13620 हिरण्यगर्भो भगवान् 1 26° हिरण्यपुरवासिन 374 हिरण्यप्रतिपूर्णेच 86 50 हिरण्यमक्षय धनू 31307 हिरण्यममित मया 89 31 हिरण्यलोमा रम्य 7220 हिरण्यलोमेत्याहुयें 87 10 हिरण्ययणममयत् 1 13 हिरण्यवर्ग रुचिरं 92. विरण्य या दग्य 20 18. हिरण्यवर्य यन्तम् 92 18 दिरण्य पशष दिप 2238 हिरण्याक्षश भारत 356* दिरण्यामुसा प 360 दिसपा विधरिप्यात 145. हा 286- हिंसा चोपरमिप्यति] लोकपादसूची हिंसा चोपरमिष्यति IIT 394 हिंसाधर्मपरर्वने 16 20% हीनप्रनिज्ञो नैच्छत्स 88 31° हीनभाग्योऽपि वा नर 86626 हीनवों यथा शशी IIT 46*. हीनवीर्यपराक्रमम् 73 250 हीनादीन तदा धर्म 117 37° हुतमनिषु पारनम् 100 79 हुतहव्याहस्तथा 3 34 हुत यज्ञेषु देवता 5 हुवार्चिपमुदायुधम् 31 हुताशनाकांशुतहिरप्रकाश 31 120° हुश्वानि विधिवत्सा तु 23 105" हुरवामान्वाच्य च द्विजान 15 50 हुंकारेणव निर्भत्स्य 112 46° हूयन्ताममयो विप्रै 38 70% हूयमानं महर्षिभि 39 19 हूयमाने हुताशने 36 41' 68 61 हत एवं सयालक 102 114 हतभागो वृहस्पतिम् 21 29d इतराग्यस्तदा राजा 10 32* दसराज्योऽयरीच्छक 21 29° हतराग्यो हताशन 21 31' हतब महीपति 23 634 हतस्व पाम्बरेण 99 191 हतस्य नृशरीरिण 44100 इस राज्यमभूस्किल 10 300 हर साल्येन वै पुरा 109 28* दतानि च महीपाना 31 141 हताल्लोकानिमान्यमो 106 28* द्वतास्तेन महात्मना 1048 हताक्रमता भूय 4233. ने तरिमयुमारके 102 10 हतो यदेय प्रधुन 100 1. हस्वा तेषां च कर्म तत् 370 दत्वा स मेदिनी कस्तो 311. हृदयस्यासि मे प्रिय 71 254 हृदय तेऽभिलश्यते 50328 दर्य ते यथाधरम् 70 350 हृदय मानमापिना 76 18. हाविदीर्गेन 77 396 हृदयेनारतको रिपु 65 60 इदिक संप्रभूष, 28 हृद्यनि श्वासमारतम् 771 हृद्य कुसुमगन्धाक्ष्य 73 14 इपिताश्च सयान्धवा 83 140 हृषीकेश पुरस्कृत्य 81 99% हृष्टचेता जनार्दन 99 420 हृष्टपुष्टजनायुतम् 4924 हृष्टराङ्गरलोचन 64 13 हृष्टलोमाईतनव 61 31 हृष्ट सर्वार्थसपन्न 93 94 हृष्टा किंचिदवामुखी 487 हृष्टान्यायतनेष्वपि 79 34 हृष्टा पोमुपस्थिता 375" हृष्टा योद्ध व्यवस्थिता 81 TE हृष्टास्ते गोपु जीविन 601 हृटेन मनसा सदा 84 3° हृदो वसति चन्द्रमा 59 47" हृष्टौ विविशतुस्तदा 72 146 हेतुभूतश्च मद्विधः 48 41 हेवभूतस्त्वह तेपा 48 40° हेतुमद्वाक्यमुत्तमम् 84 1 हेतुवादकुतहा 117 6 हेतु कुरूणां नाशस्य 115 14 हेमकक्ष्यमाघण्टै 81 160 हेमरेयूरवलय 336 हेमचित्रविमानश्च 92 220 हेमजालैश्च शोभितम् 33 30 हेमवालोतिभ्याम् 70 17' हेमयज्ञोपवीतवान् 44 " हेमवन्त्रपरिष्कृत 34 हेमशरवालुका 93 64 हेमस्यमहाकक्ष्या 92 11 हेपमाणेच सुरगै 81 20% हेपमाणो जोदन 67 16 हेपित स्पर्धते वायु 676 हेपितोगाशीः 6726 हेदयश्च हय धेय 23 135 हेदयस्य दायान 23 63* हेदयस्यामवरपुर 23 136" हेयानां महात्मनाम् 23 189 हेदयानिजधानागु 1037 हैहयार्थे पराकमन् 10 310 हेहयानालनहाच 1024 हेयन्नालज 10 15 487

होताग्निदीप्तशिरसं]
चिकित्सितपाठात्मकस्य हरिवंशस्य
[घवं वैष्णवमुचतम्
होतामिदीप्तशिरसं 11890
होतारं चयनं च यत् 31 74
होतास्य भगवाननि 20 236.
हृददीर्घललाटान्तां 55 38".
हदप्रस्थितसचया 83 330
इदमध्येऽकरोच्छब्दं 56. 2.
हदशातोदराफान्तां 55 33.
हृदस्य पुनोऽप्यायुर्वे 3 60%
हृदस्यास्य तटावुभौ 55 53",
हदानां वरुणालयः 62 23.
इदिनी सागरं यासि 100. 40°.
हदिनी घेगगामिनीम् 55 29.
हस्वान्यतिप्रमाणानि 31. 8".
हस्खोऽतिमात्र पुरुषः 5. 16.
हादपुत्रो हदस्तथा 3. 60'.
हियते हि बलारप्रज्ञा 49. 6".
हियते हियते इति 102.*.
हियमाण, प्ररम्बेन 58 30*.
हियेऽहं कृष्ण दैत्येन 58 32.
हीविद्या सनतिर्मतिः 47. 64'.
ह्यब्रुवं जगतो गतिम् 100 48.
ह्यभवंश्चामलाः प्रभाः 92.20'.
यस्त्रमस्त्रविदां वरः 112 22.
ह्यखं पार्जेन्यमुत्तमम् 112. 17t.

Shlokpadsuchi

Author
Harivansh
Title
Shlokpadsuchi
File name
Shlokpadsuchi
Text
OCR done
Citation
1967
Published
2012/08
Publisher
Poona.,bhandarkar Oriental Research Institute
Language
Sanskrit
Pages
268
Library
Bharatiya Vidya Bhavan Library, Mumbai
DLI number
311260
Barcode
99999990320166.00
Scanning centre
Banasthali University
Digital publisher
Calcutta.,The Asiatic Society
VMLT id
vsdO97YKctb
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