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Kumaun Ke Kroor Sher

Jim,koirbet · 2010/12

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गयोपर
स्मो
पमान
रा
नामोग
कारोबाट
पकनमेल दुमरिया
मोहामा
गाजपा
गुलावर
मोरनीला
रामनगर
मैनीताल
पीसगढ़
हेरवान
रागा
काठगोमा
पौरिया

2200 गोवर कुमायं का मानचित्र बस्फोट हा स० मोमेत प. अल्मोड़ा काकरीपाट मुक्तेश्वर- मोरनोला देरीपूरा पाली .धूनापार लोहापाट भारी. नैनीवाह टम वस्लादेश नौवाग पापोदाम को नो कामासागर सध्यान मनोरम मोहाला बोट किधी पीपल पूर्णागिरि पारमिया टनकपर ल

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कुमायू
के
बूर
शेर

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क
२
1
जिम् कार्य

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KUVAUN HE KROOR SHER
Hind: translation of
VAN EATERS OF HUMAOY
JIH CORBETT
Translated by R. C Pande
Jim Co bett 1875 1955
First published 1953
Second impression 1957
प्रथमाप्ति
faturafa
१९५७
Printed in I dia by V N Bhattacharya WA
atch I lood Proto z Works, 60/3 Dharamtala Street Calcutta 13
and publshed by John Brows, Oxford Univerty Preu
Micraatde Bulding, Calcutta-1

पिपय सूची
२७
रोदारद
लेखका वक्तव्य
धपायत का आदमखोर
रोबिन
घोगढ़ के गर
पोलगदा पसारा
मोहान समरभक्षी
पोपल-पानीकार
प्रकति की गोद में
যামােণিক দায়ী
१००
.
-
१२९
-

लेखक का वक्तय छान इम पुम्सक म अधिकारी महानिया नरभक्षी पारा 4 विपय में है। यह समझा देना उचित होगा कि य पापा आ मखार बन जाते हैं। नरभक्षीदार की व्याख्या है वह पर जा परिस्थितिया म विवाहाका अनुकूल भोजन प्राप्त नहीं कर पाता और असमय हान पर अप्राकृतिक भाजन परता है। पर भी असमयता ना मुख्य कारण ह उसको वृद्धावस्था अपवा घाव । य घाव प्राय शिकारिया को लापरवाहीम चलाई गई गालिया द्वारा अयवा पार की क्मिी ग सडप में ममय उमक पाटा रा हो जात ह । शर का प्राकृतिक विकार मनुष्य नहीं है। पर क्वल पिया हाफर ही मनुष्यमारा सान लगता है। पर अपन पिकार मा या तो ढा पर मारता ह या उगवी पात में छिप पर। इन दाना प्रणालिया में अपन आरमण पो गफल बनान लिय दार को अपन दाता और नमा पर निभर रहना पाता है। दाता या पजा कमजार पर जान पर या शरीर में एग पावा व मारण ही पर अपन प्राकृतिक निवार को पान में अममय हा जाता है और परिणामस्वम्प नरममा बन जाता है। गरमा पशुमाग पर मनध्य-माग खाना चसका बहुषा रिमी घटना र कारण सग जाता है । उाहरणाथ मनायर ये मरभणी वा लीजिय। यह एक जवान शरमी यो और एम अवगर पर सिमी गाईम मुगावला परन में अपनी एक पाय या बठी। समन शरीर में पचामा र मत में लेखाका वक्तव्य खुम गय था गगनी न जग जहा म बाटोरा मौत म परदन का प्रयत्न किया या वग-वहा पर पाव पर गय थ। इमी भायल अवस्था में मरना एप प्राडा में रटी हई थी कि उपर माएक ग्रामीणम्याधाममारन नि-पडा। परनी नई ध्यान महा दिया और अरन पावा रा चाटता रहा। जव पसियारिन सरपरनार ऊपर जा पहया भग्नान र पप्पड मा उमौसापडाचूर कर दी। नत्यार हा स्त्रा को मत्य हा गई। का वहा छ कर रनो न लगडात हुए एक गिरे हुए यक्षरागरागरण पादानिया नाम पहाया पर एरम्हारा भा मार डाला। ममागा लकडगरा भी मत स्त्रा भी मौनि गरनी समीप पप गया था। ररिहार ने क्षत विगत गरार स टपपन हा रक्त रा देख कर हा मभवत परना का मवप्रथम यह मूसा था रि यह भी उमरा गाद्य वस्तु हा मपनी ह। दूमर दिन गरनी न जानबूप पर मारण हो पर मनुष्य का मार डाला। उमगी जिहा में मनप्यमाम का स्वाद रग पुरा था और उमो दिन म वह एक सुम्यात नरभरिणी बन गई। भौवीम मर-बयिाचपन पचात वह मारा जा सकी। गायरे (RTI) पर वटा एबा गर घाय- गर अयवा वचावारी गरना भपा जान पर हा मनुष्य का मारत है। परन्तु उ नरमधी रहना भनचित है (जमा दिप्राय महा जातार)। म स्वय र मरमभी हानका पापणा तव तर नहा परता जब घर रि मुख पूर्ण विश्वास नहीं हो जाता। र दा अवमरा पर भू मोर माता है। मवसर पातेहीम परत द्वारा मारी गई राजाच-पस्तार Pा भी चीर-पार (post mortem) बयन्त महत्त्वपूर्ण है। पगार नपवार पाआ पर नरदन्या रामिप्या आराप गामा गया है। जनमापारण भी यह निराधार धारणा है रि मद नरममा पर वह हातह मोर उनर पम में पवली (Mange) मी बीमाराहाता ह। सारण मनप्यानमगीन माम बताया जाता है। नामपनहा माता निमनप्य माम अपि ममान ता ४ या पशुमाम रितु य म दाद म र मरता पर पर मनप्पमाम मामा भी हानिराम प्रभाव नहा पता पारि जिवन भी मामगार मन मार नर पो । अपन गुन्गा में पाया। पुरा गा मा मत निग्मनी पर मा माति मी म्बर मा मसार बन 2 कुमायू कर शर जानी है। यह मत यनिपूण सा दिखाई देता है कि मस्य नहा ह क्यापि गर या सवा पा प्राकृतिक शिकार मनुष्य नही है। गर का बच्चा वहो खाता सायगा जा उसी माता उमेगी। पई अवमरो पर मन म्वय बग्चा का अपनी माता का नरहत्या करन में महायता पहचान हुए दया है। किन्तु एक भी वार एमा नहीं हुआ कि माता पिता की मरक्षता छाड देन के पश्चात या उनके मारे जान के बारपरका वच्चा नरभक्षी बन गया हो। स्या देख कर प्राय सन्देह होता ह कि हत्यारा पार ह या तदुवा गाघा रणतया पर दिन क प्रकाश में मारे गप व्यक्तिया का सप्तरलायी हाताह पर तदुवे रात्रि के अधकार म शिकार करते है। पर और दुवे दोना ही म निगार पर है और गभग सभी आदत नको एक ममान ह। परन्तु फिर भी य एष ही ममय गिवार नहा करते। इमका मम्य पारण इन पशुओं के साहम का विमद । भर आत्मसार बनते ही भय का परित्याग कर देता ह। पूकि मनप्पा के चलन फिरन या पिनह इमरियपरका रात में उनरे धरा पर जान की आवश्यकता नहीं पड़ती। तदुवा मनप्य स सदव उरता रहता है। अताव या तो यह रात्रि में मात्रमण करता है या रात्रि में बस्ती में पहुंच जाता है । उपयुक्त वारणा मे नरमसी शरामो मारना अधिक मरल ह। नरभलो गरा द्वारा की गई हया की बहुलता निम्नस्ििखत बातो पर निभर है (7) मरमभीर आखटम्थल में उमा प्राकृतिक आहारमारमी या अधिकता (ख) शरीर के घाव मो अवस्था (ग) पर नर ह ययवा बचावाली मावा' हम लाग जिनमें मोस्ति विचार शनि की यमता रहती है तुग्न ही अन्य लोगों को धारणा को स्वावार पर एतह। पिन लगान मवप्रथम गरी माति मून का प्यामा या गर मा कर आदि उपमामा का प्रयाग दिया हागा उमन रापमुच हा पारा माय वा अन्याय दिया है। उपयुक्न उपमाआ द्वारा उम सपान पवन र परित्र वा मिथ्याचित्रण ही नहा लिया किन्नु उम ममम्म विश्व में बनाम पर यिा। युरो मनध्य महाग त्रि' स्वर परागारसे अपनी म्पक्तिगत धारणा बनाना ययगर मिला हगा।

हेस का वासम्प जब भ म रा र न्याय गय मिथ्या पागपा विपप में कहा पढता है तभी मम उम नह एक या याद आ जाती ह जाए टूरो फा मराऊ (muzzel londing) वन्दूक लगर सरा' भावर १ अगला में भटकता रहता था। उम जमान म उपयन बना म आज समगन अघिय र फिरा परत थ। थक जान पर यह वाला जगर' में ही भरना हरा डाल दिया करता था। जब भी शरापी गजना में उसी ना उचट जाता तभा मह भाग म एष और पपरी का पुन रवट बार एता। उमो अनुभव न उम मिखा दिया था कि न छह जान पर पर भी भी हानि नहा पहराता। दिन * प्रमाम परि उस भी पार व मी जाता ता यह निपर सा रहता और पार विना उमको आर ध्यान दिय ही पर दता। मम उम अवसर को मा भली भाति मा है जब यही बाब धन-मगिया का दूक्त समय एक भामकाम पार एकरम ममोप जा पहुधा या और शर माना मरे तुम यहा पपा परन मा पहुध मुन्ना' करना हुआ पा गया था। फिर म मापन लगता है निप्रतिनि महमा नरनारी वना में घाममा बटोरन भान ह और मध्या समय मगर घर लोट आत ह उह मामास भी नहीं हाता गिरी भाति म्यून मा प्यासा और पर-मा पूर क क्तिन ममोप पहच पर भी व रागर घर मगेट आय है। वन-मुगिया पावते हुए घrer विस्म का चौत मान आधी गाना हा गई है जिसमें अन्तर बतीस वर्षों तर निरन्तर मा माग का अनमरण एस एम म म दम पुवाहू मिन्हें दम पर पापाण भा पिपर सपना ह रिन्तु एक भी अवसर पर मन यह नहीं दवा व न असन या भएन नि पट मरन र अरावा पण हा पूलावा सहार दिया गया। गियाहा। गुप्टिम पर क्तव्य मानि तुना मलिन रमना है अपात वन पाभापी आपापा पर म बराबर ना। प•ि भी विवाहा वारदा मानव या सभी गाना उमगा ममम्न जानितराना ममगत। मानि ममी मरे उपस्न निरप म मरमाना। मय पर विगत पार पाह और जब उस जगा में भरना प्रारकिर रिममिनाई सवयनरमान जान।

कुमायू क्रूर गर
हमारे अधिकाग पहाडो लोग हिन्दू ह और मतका का माह-बम करत ।।
कही-रही पानी बहुत दूर होता है इमरिए मीरा त उह जाना पड़ता है।
परतु
किमी सत्रामक रोग फैन पर गव+ मह म जलसा वायला हार पर
उम पाटी म गिग दिया जाता है। इही गया में भख तदुव का नरमामा
चमका एग जाता है और यह आदमसार बन जाता है।
कुमायूदा आत्मषार सटव (जिन्हान मिलकर ५२५ नगद याए का
हमी भाति आमदार बन । पहला हटवा हज के प्रकाप पन्चात नरमम
बना और दूमग १ १८१ रहस्यमय गग ( War fever या रहाई।
ज्वर) बा।

चपावत का आदमखोर उस समय म मानी में एडी नायर के साथ शिकार खल रहा था जन मन उस घर में विषय में सुना जा पाठ चपावन का आरमखोर नाम से प्रमिद हुवा। ण्डी उन भाग्यशाली मनप्यों में से या ना प्राय जावन र समस्त मुरता से - मम्पन्न रहा है। उमन इस प्रान्त म उतम गिकारी होन पो चिरम्यायी स्माति प्राप्त पररा पी। उस न जान क्तिन निवारक विस्स यार थ। उसकी भन्दूर पोमार व निशाना बजोड थ। उमका एक माई भारतदप में खरें को बन्दूष मा अन्तिाय निशानवान था और दूमय भाई पोज में टनिम का मुप्रमिट पिलाडी था। इममि जब मुझ ही न बताया कि उसका बहनाई जा समारमा सवश्रष्ट निवा था इस नरभक्षा र पा माग्न लिए सरकार द्वारा भरा जारगर तव मुक्ष विश्वास हा गया कि मद इस नित्य पर उत्पात का समय बहुत मामिल हो गया। पार पप वा म जव ननोताल पहुंचा ता मुन्न पता चल नि विमा अमात पारणवापर अभी तक मरा ना मोर मरवार अन्यत्त चितित है। सरकार द्वारा पुग्मार पापित किय गप पिपिारियों का प्रवध हुआ और ब भाडा डिपा म गुरया मनिका नी हालिया र को मारन भगा गई किन्तु इन सब उपायों व वापर नर बलिया की मन्या रिनाटिन भयरर रूप म यस्ता हो गई। यह भरना (चामा पता पनि यामबार माग पा) मायू में नपार स पूण नरभगिणा धन पर आई पा। नपाल में दा मौ मनुप्या व प्राण न चुस्न पर कुछ साम्ब नपारियागरा वा समदड दा गई था और उपर पार वर्षों म रमन कुमायू में अपना पर व्यापार पार कर गया था। इस नय प्रणा में भार उमन यानो नर महारपा मस्या में २, अब और जा रियप। जर मा ननाताल में आप था. हा नि gr प तव एप पिन वोड गार भुमम मिल्न आय । म उस समय ननातार रिप्टा कमिश्नर य और यात शात्रिय सम्जन । उनको मृत्य वा दुमप म हुई। वर - २ गुमायू के ऋर पार अव हल्ानी म अपनी छातीमी कन म विश्राम कर रहे ह । उहान मुझे बताया वि ममस्त जि में दारना न विम प्रकार याना फरा रखा था। वर्थोडम्बय अत्यन्त चितित थ। और जान समय यह मास वचन लते गय कि भविष्य में नई सारा का मूचना पात हो म अविलम्ब चपावन का कूध पर टगा। मन चना सम्मुख दा शर्ते रवखी। एक ता यह कि सरकार द्वारा घापित पुरस्कार बन्द कर लिया जाय और दूसरी पात यो वि सल्मार मे भज गय पिकारी एव मिपाही जगह स वापम युला लिय जाय । यह ममझाना व्यप सा हागा कि मन म गते गया रखपा। मुम पूर्ण विश्वाम ह दिगई भी अग्ला पिकारी पुरस्कार म साच म शिकार मारन र पक्ष में न होगा और नगर में स्तन अधिक शिकारियाबीच गितार बल्न में अपनी उपराईनमा दुघटना हान का भय सायना रहताह। मरी दाना गौ को स्वीकार पर पिया गया और एक सफाइ वा एक दिन साप ही क्यों मरे घर पर पहुच । उहान मझ बनाया कि रात्रि म एप पर हुरफार द्वारा उनका मुचना मिरी थी कि धनापाट व देवाधराम वाच पाली नामक ग्राम में यात्मसार न एक औरता मार डाला था। इम प्रतीक्षा में ता या ही इमल्यि मन पहित में ही छ मनप्य अपना सफरी गामान रानगि तयार र रक्पथ। नामाकरमन अपना १७मीर का पहला पाया यार रिया। गध्या ममय हम घारी पहप गय। पान कारमा भाजन हमन मारनोग में दिया और रात्रि देवापरा में व्यतीत की। तीमरे दिन मध्या ना हम पाला पहुच गय। उम स्त्री को मर हुए पार नि हाचुये प. पघाम-मार म्मी पुरषा का यह गांव पा भोर वचारे घरी तरह गहरे हुए थे। पद्यपि गूर्यास्त होन में दर था रिन्नु पिर भी ममम्त प्रामवामी यपन दरवाजा पर मुड़ा धाय चुपचाप बठ हा प। मोररान आग जग सी यो और म पाय पी रहा पा नमी एक्रार याबार गुलन रूग और भयभीत प्रामाण याहर निकल आप। मुग पाया गया पि गत पाच रिना ग पाई मा मनप्य यपन घर ग बाहर निपलाहान था। "घर उपर फती हुई गणम वात यो पुष्टि कर रही पा। प्रायाणा यी गाय गामणो नि पर नि बम हाती जा रही थी और म चपावत का आदमखोर ३ यदि शीघहा गरना न मारा जाता तानि मन्दह व नाग भूखा मरन लगते । यह स्पष्ट पारिनी समा बासपाम हाय बना में या वयापि तान राता से साग उस दहाडत हुए मुन रह च और गोप के पीछ की जनी भूमि में कुछ सागा न उमेदवा भी था। गौव १ ममिया न महम मर रिय क कमरा टारर रिया। हम ग मस्या में पाठ य और पमरे पादार भी आगन थी और खुलनामा जहा अत्यन गन्गी थी। अत मन रात वाहर हा साटन का निचय कर रिया। म्यार ष स्थान पर थाडा सा जलपान करने ही मतोप कर लिया गया। जव मन देख लिया नि मर आत्मो सगर कमरे में बर हा गए हैं तब म वाहर आकर एव वक्ष स पाट मटार वठ गया। गांववाल माम बता चुन थ किरनी रात्रि में सहप पर घूमन बातो था। चांदनी पूच टिपी हुई थी और मरि गरनी कहा मुझ परल रियाई पहनी सा गाली पणन का अवसर मि' गाता था। म पहल भी गई राशिफार में विना चुनाया रिंतु बारमवार मे लिय रात में बटन का मरे लिए यह प्रथम अवसर पा। मरे मामन भी सदर पोग्नी म नहा-मा रहा था और बागपाम १ वृक्ष अपना विचिन पायाए सहप पर गरह प। जब रान की हवा उनमा गासामा का हिला देती तव उनी पर गयो गाच उना पापभानमा एमा स्गमा या मि दजना पर मर कार दौड मारहा। म उग पडापाकाम रहा था जव मन रान बाहर विताना निय रिया। मुझमें इतना साहम न रहा रि गौच को पारम रोट पर । मुझ इस स्वोसार परन में सामार मा सपनाह रिम यग्यन्त भयभीत हा उठा पा। जिम नाम का पूरा परन ना मन बुध हा र पहिर मोठा गया था 'उम पूरा वग्न रा मरमें अव माहम नहा था। घुछ भय में जुट जार म मनोमीटिपिरहापो और इस भाति मर्ने वठवर गपूण रात्रि व्पनाम रक्षा मामन समिान्दाग्नि परम-गलमा पर उपा पर रहा थो। नय धिमाजमा रहा था। मघटनापीनगर रायबापा और वा में भर मामिया न मम दमा भागन में वनि में मग्न पाया। जब म गौर यापम सोग मन |गों 7 अग्यत विम्मित पाया। उनसरा मामय हा रहा पालि म नायित म यन गया । मन उनम अनुगप रिया मि मरे माप - कुमायू १ र शर पलपर मुझ वे स्थान रियगव जहा बहा गरनी न मनुष्या का मारा था किंतु उत्तर म वे देवर सर हिगवर रह गय। आंगन म मड-खडे कुछ लोगान उगली से उमरिना फी आर इगिन पर दिया जिधर गरनी न ई यत्तिया को मारा पा। परनी पा अन्तिम शिकार (जिसकी सूचना पाकर म चपावत आया था) गांव के पश्चिम में पहाटी वी भजा पे आमपास हुआ था। जिस समय गरनी न उम स्त्री पर आपमण पिया उमरे साय गभग बीस स्त्रिया व क्यिा मवेशिया वरिय वन में पत्तियां वीन रही थी। मत यवती की सहेलिया जो घटनाम्पर पर उपस्थित रही होगी मन पूरा किस्सा सुनान का अतीव च्या प्रतीत हा रही थी। पता पण निम्पिया को टाली जगल पा मध्यान्ह सदा घट पूर्व रवाना हुई और वहा परच पर पेष्टा पर पढ़ पर घ पसिया पाटन एगी। मृत यवती सपनी एप सहेरी र साथ नाल की कगार पर उग हुए एक वृत पर चढ गई। यार म दमन पर पता चला कि यह नाला एगभग यारह फीट चौडा और चार पीट गहरापा। पापी पत्तियां पार न पर युवती पर पर से उतरन भगी। शरनी पहले ही मे थापर वृक्ष मे ममीप छिप गई थी और युवती को उतरने देख अपन पिछले पाया पर पड़ी होकर उगन यवनी यो टाग परडगे। यवती पी पर दीरी पड़ गई और जिस टहनी का वह पर हुए थी गई। शरनी न अटक के साथ उसरा नाले में सीच लिया और उसकी टांग छार दी। पयराई हुई वचारी युवती मागन मा प्रयत्न पर हा रही थी मिहारना न उसका गला दवाच सिपा। ययतो यो मार डानचादरनी सा सहित पत पर नार + पार पाडो में यदाय हो गई। स्मिया का पूरा मुड इग नारा व्यापार का देवना रहा । गरनो पदष्टि मे मोझर हान ही गर एग भाग पर गौर वापरा या गय। यता म आमालपहर का भाजन परन पग पर मागय प और जब मय साग एकत्रित हो गय सर ढोल्य ताण पीमा २ यसन आर एब टारी पार करती हुई मृत युवती को गारन पर पो। आग-आग पुग्प ध और पीर-पीछ नाग्यिा। जब य ाग ना' पर पप गय और थापग में वाविवार शान गालिबाग क्या रिया जाव उमी ममय तोग गज फागर पर हारिया पाछ शरना पहाड उठा। रमा का गजना गुनपर गा म भगर मा गई ओर सव सागर पर पर रग पर गौर वारग माग बायदृध मृग्दा एन पर एग उसके हाथ - चपावत का आदमपोर एक दूसर का सामान गि विमन पहो मगर मचाई। गरम बरस का निणम यह हुआ कि सचमुच ही में परि सब इतन वहादुर पता क्या न लोटपर युती या गरना कपजों स छडा रिया जाव' यह प्रस्ताव तुरन्त मान गिया गया और तीन वार साहम पर टागनार तक गई। सासर अवसर पर टाली र एक सास्त्र मदम्य न अपना बन्दूक दाग दो परत दानी गरज कर झाडी मे बाहर मा निवार अव थाग बदनापठिन था। मन यवना बोसोजन का विचार स्थगित कर दिया गया। मन बन्दूर पानवार मनुष्य से पूछा कि उमन बन्दून हदा में पान का असा माडामें क्या महा पगई, नव उत्तर यह मिला साहब सरना गुम्म में भरा वठी हा था पहा दुर्भाग्य स उस ममस्थल पर गागनगताताप्राणा पराआवानता। उम दिन प्रातार म तीन पट तर गांव पर लगाता रहा कि विचित पहा भरना २ मोर (पदचिन्ह) मिल जाव या स्त्रय भरनी म हो मुना हो जाए। साथ ही साय दिर में भय भी मना हुआ था। पूमने पूमत म एष नार पर पटुन गरा। इस नार में पूर्व मानिया पो। म पर गाडियों किनार-मिनार पर रहा पा रिमाम्मान पुर पल मुगिपा सर H मागताहमा भरभरार पर उगा पर लिप मरे हपी पमन रमो गई।

६ कुमायू के क्रूर गर मेरे नौकरा न एफ अवराट के वक्ष के नीष मो भोजन के लिय भूमि साफ पर रखी थी। भाजनापरान्त गांव + मविया न मुमसे प्रापना को दिखता पर पडी फ्मर के पटन तर म भयभीत कृपका को रक्षा करता रह। उमन बहा नियतिमा मेरे सामनन कटी तो फिर कभी भी न कट पावगी क्याकि समम्न ग्रामवासी भयातुर प और उ’ अपन घरा मे दार परम रखन तक का साहस मथा। आध घट वान गांव में मव यामी सत कटवान में जर गय और मरे अपन मामी भा उनके काय म हाथ बटान भग। म भगे धन्दूर रिय मतरी की भानि उनको चौरमीकर रहा था। मध्या तर पाच वर-वड सना की फ्म पार कर प्वट्ठी कर ली गई। केवल घरा व पास ५ दाटक रह गय जिनका पि मखिया न पहा दूसरे दिन भाटा जा सकता था। भव गांव में स्वच्छता भी बढ़ती जा रही थी। मरे लिय अब एम अरग जमरा तयार पर पिया गया था और गघि म दरवाज पर पटारी झारिया कार पर फ्मा दी गई ताकि हवा मी आता रह और मग्नी भी घुछ दूर ही रह। मरी उपस्थिति न ग्रामीणा में नय प्राण पप दिय थ और अब उनकी चाल में पुछ पुछ म्यनत्रता का यामाम शता था। किन्तु यमी म टनका दाना प्रभावित न पर पाया था कि उनग जगए घमा मन वा अनगध फ। यह एर अयत माया पाम था। यग जगपणेवणे ग परिचिम य और पनि पाहत ता याय हा मन यह म्यान वतगमरत प जहा परनी या उमरगान मिलन पीसभावना पा। यह बात ता भव ध्रुव मय पी पिनरभ भी पादारयनिरिक्त और कोई नहाएपितु अमा या भग भाति मावित म हा पाया पारि र नर या माग और न मह मालम था कि वा बगान है या युद्धा। य गर यालमवर मा. देगन परही मारमहा मरना थी। मारामाय पोरर मन गायगाराम का विमरे मा मिया का माग गाना प्रयल इच्छा ।। गा और पूछा दि पर मारामाग में पग पुण (पहा में पा जान योग एक प्रयास जारी याणे)-सा बताय।

घपावत 7 आदमप्लोर
पूर्व में पश्चिम का आर जानवारा पहाडा गिम पर पाली धमाइमा पाभार
जहामन रात बिताया उम आर पाम बगल मानाचा मार चर गय य ।
गोवदालान बनाया वि इन माना में पापा पुट मिस मान घ और बगुल म
मागमा मा उपर चरन का प्रस्तुत हा गय। मन याना प्रमनतारा द्विाने
हा तीन मामा छार लिय और मुखिया म कह रिया नियरि मवमुच मान
में कापा पर मिल गय नाम एक घुरड मरन आमिया र लिय तथा दा गांव
बालाप रिम मार लाऊगा। महर पार पद हम ढा राम्न मनाम उनरन
स्ग। हम वा मादधाना म इधर उधर देखन जा रह मिनु बुध मा न
निवाई पडा। समग आप माल जान पर नोच दाना नार एक म्यान पर मिल
गय । उन ना मगम दाग्निा आर एक हरा भरा दाल मान था।
घर म इम मगन पा वा मुरदय दिया गया था।
गम मक चार वक्ष मगरे चटा मरन मामन व मानपा
निरीक्षण कर हो रहा पानि पहार प कार का वस्नु माहिती डरता निया
गा। मावधानी म दयन पर पना पगरि हिलन वाला वस्तु एष पार पा जा
यपन मानारायण रहा था। पाम में पर इन कारण उमा
मिर होशियाई परलथा। मरमापियान उम अमानर दयानहाथा। भव
पुरउ न मिर हिगना व पर पिया था और उमर पार का गम मामलामा
हरियाणा में घिर गया था। मयि उ म पुरर नहा लिा मा। पानयर
माम्पिमित विषय में उनथामा अनाज दर मन उनका विटारिया
ओरिनिना माधा। मर हाथ में एम पुराना मार्टिना नग' (नान
सरन या पुरान सिम्म रोरा) पी। याना तगडी HIT लिप पर
মন্ত এলাম যা বিলু নিৰাশা যা মক্কা খা। पागारगमगत
सो गरमागाहागा रिनुइमममा पान पलाया। पुरा मन पार
एर टूट पर गया मापा और माय मार पर पराग पाकर
(मानार बाग या) या भाग्नूग र घाग पर मामन मय पर ा
भर रिय प-मा गिर गया और माय गगी ने बताया किया
मगर ए मा नआ और यरित रिमा पट्टान या पपा पर जागा
पा। माना नगर पर सब मन पुन बदर भरग। रियारिम पर
मन पर पारा उगम गुमनारमा पान हि रहा पा।

८ कुमाय के क्रूर गर मुस पुरष्ठ का पिछग घड रिसा पहा। फिर धाम में म छुट पर पुरऽ वड मग से नीच पी आर एडवन गगा। आध दाल तक तय भर वह फिर पाम में अदृश्य हागया। उमी शाहा में कहा दाधुरए और लट हुए य को मृत घुरह में एक्कन की आवाज़ स चौव पड थ। भयभीत होकर पुमकारते हुए वे घास स थाहर फूट पह और विद्यम गति से पहागे पर पढन ग! अव पासला यम गया था। कौआ चढाकर म प्रतीक्षा परन लगा दिदा में म वह घरहन अपनी पार पुष्पम पर दी। मन तव उसकी पीठ पर गोली चना दी और पसे ही दूमरा घुरड मुः पर पहाड ये दूसरी ओर भागन एगा मन उसको साख पर भीगारी मार दी। पिसो अवसर पर समम्भव मे असम्भव पाम भी मनप्य बराताह। पष्ट में ऐट रेट दामो गजफासले पर घरहपी गदन पर मपद धन पर निशाना एगाना एक म अमाध्य सा था। किंतु फिर भी टाय पाउण द्वारा फसी गई गोगे अपन रदय पर मही बट गई और वन्दुप पी बावाज पर पुर" घर चाटन एगा । जय तर पहला पर पता हया चट्टाना + पाम पहुचा सय तक पाप दानो घरड भी नीच कोगदान रग गय प। गांववाग न पहल पभी गइपनको घार देगी न थी। अब तोना पुरर एपने हा हमारे विस्तू गामन थापर रख गय तव उनर आ चय की मीमा न रही। कुछ क्षणों लिप चपावत मरभनो का व भूल म गय और रूपक पर धुरडा को उठान नारे में उतर पर। पुरडा व गिफार म मा वडा नम हुआ। पेट भर खान को माम मिलन र माय ही गाय गा का मुझ पर विश्वास गाहोगया। शिवार 4 रिम्म मवा ताज रहते है और यार-बार मुना पुरन पर भा उनका मजा बना ही रहता है । म पुछ दूर पर वठा हआ जान पल हुए प्रामीणा की गा मुनता जा रहा था। कई बार जार में पिल्लार अपन मित्रा को पता रा था कि विग भानि घुराइ एम मो? यो दूरी पर जादू पी गालिया में मार गिय गप और वा इम वान पर दाना नने उगती दवा रहा था कि मर हा घरा माइव व परा पर बम आ गए। मध्यापा मारन पर पन पर ममिया न मुगम पूछा कि मन मिलन मनुष्याला साप ममताागा और म विम आर जाऊगा। मन पाग ग गाँ पर दृषि गणेता गरी वा उन्मुर पाया। पर मन अपन दा पुगन गापिया चपावत का आदमखोर था छोट पिया और पम प्रदान लिय उह साथ लवर उस आर पर पड़ा जियर आमखार न अपना मतिम शिकार क्यिा था। हमारे पहाडा में रहनवाले लाग अधिकारी हिन्दू ह और गवा का दाहकम परले है। यदि बाई मनुष्य आदमसार द्वारा मार डाला जाता ह सा मृत व्यक्ति बाधवों का यह मतव्य हा जाता ह कि दाहकम र हतु शरीर का कुछ न कुछ भाग भले ही डा पेटुरडहा *त आव। इम मृत युधपी का अभी दादभम नहा हुया या। इसीलिय जब हम वन फा प्रस्थान परन एग ता उनके रिश्तलारा न हमम अनुराप दिया कि उस शरीर मा पुछन मुछ अवापरते याव । मुझ अपन वाल्यकाल मे ही जगर की वाताना परन व उनकी व्याख्या करन ना प्यमन मा (hobby) है । इस बार मरे मामन उन स्त्रिया मा पाखा दमा यणन था जा घटनास्थल पर उपस्मित भी क्तुि पश्मदीद गवाहा पर भरोसा मही किया जा सकता। हा जगर कुछ मिह स्वयं अपनी गनी माफ वह रिया परत । पटनास्थल पर पहपत हा दखन पर मुम मारम हा गया कि रनो चिना दिखाई परवा सकवर एष हा रास्त स पहर सरतो यो और बह राम्ता पा नारन र सपेम मो गज दूर म नार में घुम पडा और माजन पर दा पड़ी पट्टाना कबीच एनी हुई मुलायम धूर पर मदित परनी वे सा मुझ मिगई पर। पपिहां स पना पत गमा रि बादमग्मार अवश्य ही बग्नी। और प्रोडायम्या में पापण कर पाह। नारे पुछ आग और भ म सामग दम गज दूर पानी एक चट्टान में पायलट धुपी घो। गभवन बह वक्ष परम उतरतीहुईम्मी का प्रतापामग्नी रहा हागा। मृत स्नान मवम पर अपनी भाव यानानुसार पत्तियां मार तरी मोर जम ही एक पतला पासा महारे वर वृक्ष स नार उतरन लगा ता परना गरप पर आग घामाई और अपन पिछल पांवा पर गडा हार उमन औरत पपरा परमपम उस नार में पीप गिया। वक्षनी यह रहनी जिगर महारे मा मास्टराई मपन प्राणा का सा पान का प्यय प्रपन परती रहगो बाना दाना मारहा पी। जिम म्यान पर स्त्रीप म रहना पिगोहागी उग जगह बार एबर पर उगमा परी मनच हुए कुमायू फर के कार चमड के कुछ रेत अव मी एटक रहे थे। जिस म्यान पर गरनी न स्त्री के प्राण रिय य वद्दा हाथापाई के स्पष्ट चिहय और पाम ही गिरा हया कुछ रक्त मूसकर जम गया था। यहा स रक की धार वा मूब चफन पर मा माफ लियाई पर रही थी नान के दूसरे किनारे की आर चला गई थी। रक वी पार देखते हुए हम उन झाडिया पर जा पटुचे जहा बठकर शरनी न स्या कापाया था। जनसाधारण में यह पका विवाम ह कि आमखोर मनप्य या स्त्रिया में हाय पर या सर का नहीं पात पितु - विश्वास गन। आमवार यदि खान ममय न घड जाव ता सब कुछ खापत ह यहा तक कि रक्त मे मन हुए पपड भी। म्वर इस बार हमका मृत स्त्री व कुछ कपड व हडिया के टुकट मि जिनको हमन एक माप पा में -पट लिया। यह गा का वाहुन हो थाडा गाप भाग था किंतु सा भी महकम पेरिय पर्याप्त था। इम उच्चकुर को म्बा का राम्ब पागगा माता में विसजन फरन रे लिय यह हड्डी व थाड मे टकड पाफी प । चाय पी चुपन पर म दूसर घग्नाम्पर पर पहुचा। गांव का आम महर प बुछ इधर मरर का एक टपरा था। इस टगड व मास्पि न अपन लिय एक सपडा बना रखा था। इस मनप्या पत्नी व उसी घहिन शाप म मुछ कार पाम पाट रहा थी कि अबस्मात दारनी निकाऔर बनी वहिन पा उगए गई। छाटी बहिन ने यरनी हसिया उठा ली और वह मो गज ना पाना पीछ भागता रही। चिना हुई वरना म अनगप करना जा रहा पाघि उगी वहिन म्यान पर वर उम सेती जाय। उमस इम अधिग्वसनीय दुरगामपूर्ण काय का गोद य ममम्न मेंगा न देखा। मो गज तय गरना सरन गितार मा हाले पाग और फिर उस भूमि पर एम पर गरजती हुई बपना पाया परन वारा स्त्रा पर मपट' पडा। घह यार रमणी गांव का आर मागी लागा 17 गुनान दि उग पर क्या पीत पुरी था। मिन्नु उम मालम न थावि गांवयाम्यय स्वयुछ टेष पर। यवती र गर म गार आवार नहीं निकल ररी था। मागान गाचा वि भय पान और उत्तनावपारण एमाहागया होगा। पितु जर व मन म्यापी मयप मान र वापस लेट तो उना मागम हुमाग घ अमागिन माना शाग्न गीति मा बा पी। यह दुगा बगना मुन्न गांव में गुनाई गई। पब म उम ययता नसर पर पचा व मन उस माह धान में मग्न पापा।

- अपायत का आदमशोर उस गूगो हुए बारह माम हा बुब उसमी आग्या में दुम की स्पष्ट छाप थी किन्तु और सब वातास यह एकम और लगनी थी। जव मने उसे वतामा किम पागक्वल थारमवार को मारन हो पाया है तो उमन झुक्कर मेर पौव छलिय । म मिमिया-मा गया मया यह जारापावि मथादमधारमामारन में मपन्ही हाऊँगा? हा यह मच या निमदम नग्ममिणी समाग्न का प्रण हो कर घर आया पा पिन्तु यह गरनी इस बान रे यि दुग्यात पोनि वह एक प्रदा में दो बार हत्या नही परती या और गा पर दुवारा नहीं औरता थी। नई मौ वग मार रम्या-धोडा उसका राय पा जिममें यह परती रती थी। एमी अवस्था में उसे मात्र पाना याम मेरम सूचना या। यपि मननोमाल मर्द माजनाए धना र चाया जिममें स एप म याजमा हो चुराया और पिरम वस मानमान का भरी इच्छा पा। जगन में पहचार शप याननाभा का मन उचित म पाया। कहा काई भा मनप्म एमा न था ना मुम गय सरना क्यापि दुमाय में यह सवप्रथम या मापार था। पुछन बुद्ध नापिर भी आवाया था। तान नि म मुबह मगाम मा जग में भटकता रहा। जा जा भरना बमूल गांववागन पतलाप उह मन छान हाणा यहा पर म ए यामागहन करना चाहनाह। पहाल में यह आम मा बाहर निकई मरमरा पर बामगारा पायावपिन परनररिय मने स्त्रियाग पार पहना है और उनका हमिया या पुल्लाहो म मागर चिन्तु वात I नही ह। मन परमा-मामा पनि कम बप में पाम पाटी और इस पर पडदा पत पार । दिनु इम पाली स मुल पमा मा मारता नहीं मिग यपि दो बार म एम वा पर पर घुराजा पर याममार मारर महान पा गिरह का बार में घिर गया था पर उगन मुम गारी पनामी अपगर न दिया। हा तादम बार एणा प्रतात हा रणाया रिगरनी नया Ter frपा। मन मन पागम १५ मा चिप में मारत जान पानिपय रिया। हम गारो रवाना गय और धनापार में पानपान र ममर परा परागय । यमरापर भरत माना गरमगारागान गातापा। .

कर शर कुमायू के एक गांव में दूमर गांव का जान के लिय राग जत्य बना कर चलत प। चपावत पहचत पहुचत हमारी आठ मनुष्या की टोग में २२ जवाना फी और वृद्धि हा गई। इनमें से कुछ या मी उन वीस मनुप्या को टारी में स य जा दो माह पूर्व चपावत आप थ। उहान मझ निम्नलिखित निम्सा मुनाया। 'चपापन की यह बाजू सडक पहाड र दक्षिण आर होती हुई घाटी स ५ गज ऊपर की जाती ह । बाज स दामाह पूर्व हम बीस जवानानीटारी घपावत बाजार ना जा रही थी और जब दोपहर के समय हम इम सहम पर होकर गजर रहे ५ तय हमें नीच घाटी म आती हु किमी मनप्य की चीलार सुनाई दी। समाप आता हुई उन चीखा का सुनगर हम भय समाप उट और इतन ही में सामन से एक नग्न स्त्री वाग्यि आती हुई एक शरनी खिलाई पड़ी। शरनी के एम बार स्नी पग भूमि पर घसिटते जा रह य और दूसरी तरफ उसमी टागें। शरनी स्त्री का पीठ स पर हुई या। स्नो छाती पीरती हुई चिल्ला-चिल्ला कर सहायता की प्राथना कर रही थी। हम लागा स पचास गज की दूरी पर शरनी अपन शिकार का राहुए निकर फिर धीर धारे स्त्री की चीत्वार बर होगई और हमन अपना रास्ता पवा। और तुम साग सस्या में बोरा हाते हुए भी उपचाप देखन रह मन पूछा। 'हा माहब हम चुपचाप दयते यह क्यापि हम यहा पर हुए य और हुजूर डर हुए आत्मा पर ही क्या सपत ह ? मान लीजिय कि अपन प्राणा का मकर में गर रहम उम स्त्री मा छडा भी एतता हमारा प्रयत्न व्यय जाता पानि वह स्वाक्षत विक्षात थी और घावान मारे अदाय हो मर जाती। तनन्नर मुम मालूम हुआ वि मृत स्त्रा पपावत व एक गाव का रहन याली पा और पग्नी व मात्रमणममय जगरपन रिय स्वाहिया धीन रही थी। उगकी गहनिया न गवार गाव में पाना का मूचना दी। जम हा कुछ राग या पावन । रिय एकत्रित हा रह पनि परनामाभी वास मनप्पा का टाग उग गांव में पहच गई। हर मालूम था जिग्ना रिम गिता में गई थी। अत वह मी माजन वायर मग हालिय। आगमा वृतान्न म उनीस पामराताई। 'हम पनाम-मार जवान मृत स्त्रा वा पाजन पर और रम में मपाई चपावत का आदमलोर बन्दूका से सस्म थ। हमें एक स्थान पर म स्त्री को जमा को हुई स्वहिपा मिनी और इस स्था से लगभग एक पलांग के फासले पर उसके पह। हम लागान जार से ढोल पीटनाप हवाई बन्दूक छाडना आरम्भ मर दिया और इम माति हम में से आप आग वर करपाटीके ऊपर पहप गम । महा हम मन युक्नो एप पडोगि पर पड़ी हुई मिल गई। परनी न शव का चाट भर साप परन के अतिरिक्त छआ भी न पा। भूमि हमार माय पोई स्त्री न पी इसलिय नग्न पाय या पानी म स्पेटते समय हमनें मुह फर लिय। नग्नावस्था में वह एमो प्रतीत हो रही थी मानो गहरी निद्रा में सो रही हो व जागन पर उसे एग्जा माम होती। सागा न ईराने दरवाजा पर मुडिया रगापर वट-वठ काट दी। एम किस्म रात दिन हो रहे प । प्रामीणों से परित्र एव जीवन में एक महान परिवतन सा हा चला था। और होता भी क्या नहीं क्यानि समस्त प्रदा म मा मसार का यात पल हुआ था। इन लागा रे बीच में या बाई वाहर मा मनुष्य आ जाता ता उम रगता कि यह एक एस करण एव भीभत्स मसार में आ गया ह जहा नुसरीर दातों और पजा मा राज्य है और जहा पर , भय साग अपारमय गुहामा में पारण र रह ह । इन दिना म अनमवहीन पा निन्तु पिर भी मममीत लेगा, उम देश में कुछ दिना रहन में मुझ परा विवाम हो गया कि भादमवार को मनहूस या रे नाम रहन स यार भपवर पाई पन्य काम नहा। अब मरा बत्तीस वर्षों का अनुभव इस याना पुष्टि चपावत सहमीरार रनिय मुन्न पूछ सरकारी परिषय पत्र यि गप थ। राना वहमीरपर मुमस मिरन सवगर में बाय । उहान मुझ राय अगर नि म एप दूसरे मकान में पना नाम जिन-गिरना न गई पतियापा मारा था। दूगर नि तप ही मतहमाल गरमा पर नम अगलमी आर पर पड़ा । ममाना मा हो रहा पारिदा मनुष्य गदर राप विदग मो दूर एस गौप में दरलो न एक गाय मार दागह। सहमारा पर यावसाम रापपावत वापस जाना पा। थन मध्यापाबार गत मर मा विताना वायगर वह पर गय। मा पथ प्रारपान में तजय मोर म दादराला हात हा भाग मौरपा पागला मत पप माग्न पुमायू रे यूर शर तय पर रिया। गांव पहुचन पर मन यह गागाला में रे गय जहा एक नही मी वछिया मरी पड़ी थी और साश का आधा माग वाया जा चुका था। स्पष्ट था कि दध्यिा का हत्यारा र नहीं बल्लि तया था। तदुव लिप लाग पर बैठन की मता मरो इच्छा थी और न मरे पास ममय ही या। इसलिय खबर सान वाग का उचित पारितापितर म दास्वगरे वापम पला आया। सहमोगर अभी लोटा न था। ग्नि इदन म अभी एक घट का समय था । म गबगले प चोपोनर का माथ पर उस आर पर पड़ा जिघर उसने बहन से बनमार परनी पानी पिया परमी यो। म स्थान से पानी का वह माता निकला आ पा जिमम मम्पूण ग्राम को मिचाई होती थी। सात के इद-गिद मुलायम कार म गरनी पई दिन पुरान मा अवित थ। किन्तु य खार उन बौदा से भिन्न य जो मुझ पाली पना में मिले थे। क्यगर लोग्न पर मन सहमीररमो उपस्थित पाया। बरामरे म घठ कर मन उह अपनी सम्पूण निर्या मुना दी। नि भर जगर में भरपन पर उन दुप प्रगट परत हुए मा वि रास्ता मराव हान ये पारण वह अव पर ग। मुभ यह मुनकर बहा विस्मय हुमा क्यारि ग्नि में दावार वह मुझसे कह चुर यदि रात व मरे माघ रहग। उनम रात म मरे मग रहन का प्रश्न न था पिन्तु व उम घन वन में स जात हुए यडा पतरा उगा रहा थ। मन उह बहुत ममपामा स्तुि उगान एव मा म मुना। एक आत्मा पा साय एफर यह पल यामी माय म एक टिमटिमाता साटन थी जिसमें स घुधः प्रपा वीक्षाण रमायें निमकर जानी रात्रि निवि अधार में या मी जा रही थी। मरे मह म दमा आवाज में वाह निकल पड़ी और जय लाग्दन का दिमतिमाहत अपनर म विरोन हा गई सब म पमरे में पग पाया। दूसरे तिप्रातमाय म पाम विस्तृत पाय व पग यगीचा में घूमन में माग्न रहा। फिर मान में ग्नान परखे सवगर लोटा ता तहगातार का घटा पाया। मन गतापमा पर गहरी गाम || म महा उनम यानें परमा जा सा था और नौप नार में बग हा ग्राम को आर पता जागा या जिसव नाग मार जत हुए गत थ। और तब मरा दृष्टि एक मनप्य पर पड़ा जा गांव म हमारी आर मरपर पाया रहा था। उगवे कुछ ममीप मा जान पर मन या विभा यह पर रहा पा और सभी दो पता था। मारम हाता पा चपावत का आदमखोर था कि वह निमा आर'या मूचना का बाहर था। महमारगररा टहरा परम दौड पर पहा म नाच उतर पड़ा। मा अपना आर मान दम वह मनुष्य मुस्तान धरना पर वठ गया। जम हा म उस ममाप पहना कह चिल्ला उठा साहब जल्ला आय आरमापारन की या मार डाला। चुपचाप मा जगह ठहरे रा पहन र म उन्ट पाव हारबगल को भागा। गइपर व वारतम उठात-उगा मन तहमालगामा बबर मुना हो और साथ हाएनम रिय महा। मरगनवाग मनप्य उनजिन स्वभाव वाले उन महानुभावा में म था जिनवा जवान और माथ माय पाम नहीं पर मवनी। जब यह बाता तामसहा जाता और चरन पर उमरा जवान में नारा पर जाना था। मन में मन उमम महा शिमह व मरपट पल्त चला और हमें राम्ना पतरामा। हम चुपचाप पहा पर म नाच उतरन रग। गांव में पहुचत हा उजित म्या-पुरपा मह न मुझ घर लिया और जमा रि प्राय एम मनमरा पर हमा भतार अपर मरन में मुझ निस्सा मुनान मा प्रयत्न न स्मा। में यामापागारागालनाध्यक्ष प्रयत्न कराया। म उमरा हाथ पर पर एर मार ले गया और घना का विवरण पूछा। उमन गांव म मगभग एप पग दूर पर मा पार नारा दिया जिस पर कुछ वाम र वरपर था मन बनाया रि गांव ष्णा पानाच सडियो बदार पजिगरनान र १६१७पोएर मानिरामा पररिया। उमर माया सुरन्न भाग पर गांव में था गय। ' मारमयारिम सार कार महरा दाह । मन लार एक दूत मा दान दौरा लिया गया। जिम मनप्रगम बातें कर रहा था उसामा घनाकामागाया। उमन "ম স ম প ফ মাং সব বি বিদৰ পাৰ ল্য না परराया। पिमा ना मनप्पन भागत समय पर मनाप्रयामन रियादि भग्ना Frn मिगि में एग। गारमा गोर में रहनामासम उस बरपामार भर लिया। पर गिरा हुमा म्यान पा और विगम नाता पा कि परमापार शामिमाति विना गि बाग मामियारयाप पर गा। गगा का पान पसीना ६वी वा मुन्न पा मारपिन था।

कुमायू र शर घटनारे परिणाम स्वाप धरती पर रक्त का मुमा तालाव यवशप था। रक्त वाग्मिा में विपरीत पास ही पग विवरा हा नार रग मानिया नाव पठा था। पहा में बन पा पार पहाड विनारे तब चली गई थी। मेरनी के खास माफ दिख रहे थे। साना के एक पार खून के बड धव पड य जिधर एवी मा गर रहा हागा और दुमरी और रागावं घमोटन के चिह य । बाघ मीर ऊपर चरन पर मन परोसी माही परी हई मिन और कुछ दूर बाग पहाड़ + पिस्तर पर उसका सहगा। पुन गरनी एव नग्न स्त्रा का पा रही थी। चिन्नु गनीमत थी कि इस अवसर पर स्नो मर चुकी थी। पहार के ऊपर गरनी सात घिधार का एक माह मचल गया । साही वाटा में मत बालिया + पुछ पार व उरहा थ। इस याग मार विद्या की प्राहीम हात हुए निकले थ। म साडी का घपर लगा पर याग वढन हो पा था कि पाछ से निगा व परा को पाप मुनाई परी। मुह पर दवा तो बन्दूक मे मुजिन र मनुष्य मरी आर चरा आ रहा था। मन उसमे पूछा मि मरे माग का उम्मान करते हुए वह क्या मरे पोछ घग आया। उत्तर म उमन बताया कि वह सहमीरारी आता म माया था और उनकी आना का उल्लघन परन का माहम उनमें न था। मर मग घएन पर यह तुग हुआ था और या यिवान परन में अमूल्य ममय न हाता था। मत मन उम। जून मोर पर सुपचाप भर पीछ आन का आजाद दी। मन उमम यह भी बह दिया कि घर-उपर माश्यानी मेषता म स्थय जाघिया हस्व माम और रबर ५ मल वारे जूते पहिन हुए था। विमामा म बच निकलनकायय उपाय न दमार म पोटासे छिना हुआ भाग वर गया । झाडा य पोछ रक्त पा घार विल्युस दाहिनी मार मुड गई पाओर फिर पहाइमपम नाच धागयो। पहानीच पागम निगर' वगन की धनी मारियो था और रक्त पी धार एगभग मौ गज नाम एष पाना गान तर पराग पा। अपन म्यान म मिमा हा पयग व मिट्टा पागमामाला पा दिशनीका मग पर गाना याप पर पलन में पापा तागपगा। पाच ए मो गर त म पाना मिनार दिनार परवा गया। जम जगम याग वर पाया मर माया का परगह भी बातो चपावत का आदमखोर १७ जा रही थी। कई वार उसन मेरा हाथ पकडरिया और सनलनों से मेरी भोर दव पर फुमपुमान लगा साहव मन यभी-अभी गर को हुधारते हुए सुना ह। माघ पहाड से नीष उतर यान पर मुम्न एष २५ ३० फीट ऊची घट्टान नजर आई। मेरे माघी की बादमबार शिकार' के म एटन की शक्ति अव समाप्त हो चुकी थी। अत मन उमस रहा वि मर लोटन तर यह चुपचाप बट्टान पर रठा रहे । यह सुनकर उनकी प्रममता का ठिकाना न रहा और एष छन्ग में बन्दर की भाति वह पट्टान पर जा बरा । उसे सकुपाल वठा देख म पुन पानी रे किनारे परन एगा। पानी का साता घट्टान र पिनारे घूमता हुआ सौ गजनीच एक गहरे नाल में मिल गया था। इसा सगम र पास एक छाटा मा पोखर था। पास पहुधन पर दया तो पोसर + पास खून ५ पब पर हुए य । परनी अपाय हा भूत मारिका का महा सर लाई थी और मरे पहुचन से उमदे भाजन में विप्न पहा था। मीषा में अति गहर खादा म मामला पानी भरना जा रहा था और इधर-उपर कुछ टूटी हहिया विखरी पड़ी थी। एक भीज वहाँ पर एमा पडी हुई पानि म बहुत दूर में देखता चला आ रहा था। समीप यान पर मालूम हुआ कि यह एडी की टाग था। इघर पौसम मरमगो शरामाणिवार सरता आया हू वितुएमा मनहस दृश्य मन कभी न देना था। मृत वारिका की उस सुगठित टाग मो शरनीर पन दातान इग भौति मार दिया था जम पिसी न तेज पुल्हाहीशी घाट से मग पर दिया हो। ठी घुटन से कुछ नीचे टाग मटी हुई था। अव भी उममें से गम सून टपक रहा था। कटी हुई टाग का दमन में म इतना तमय हो गया हो गया कि म पस सतर मे घिरा हुआ था। लपप पर मने बन्दूर मा पुनगर से गटा लिया और दाना उगरिया पार पर लगे। सर उटा र देगा तो एगभग १५ गर कार में मिट्टी मा एषा स्वरना हमा पल्स पोगर में आ गिरा। म एव नौमियियागिरीमी सी भूरपरका पा मन्पपा मुगइम प्रार मुरी जगह में गहन रहना चाहिए था। मन तयार पीराइपलाकारसा उठाई उगी रामभक्त मरे प्राण वप गय य । परना जब मुगपरएन मी या पाच कोपर भागा उसी समय उगर पराग गिमा कर वह मिष्टो मादा गिर पड़ा था। पाशि २ र शर १८ कुमायू ये पोखर का पिनारा ऊचा था और दौड पर चढन में अतिरिक्त और सोई चारा न था। मन कुछ पीछ लोट पर दौड लगाई और एक छलाग म पाखर को गपत हुए फिनारे का झानी का पपड गिया और उचर पर ऊपर था गया। स्ट्रोबिलय के मुड ए इठल घारे धार सन पर सोध हा रहे थ। शरनी अवय ही थमा इघर म गुजरा था। पाम ही घट्टान पर रक्त चिह पड प। जव शरना मत दूहन भाई थी तब भाय सा का इमा घट्टान पर रख गई थी। आग यहा मा पपरीण प्रदेश या । इमी पर हराकर शरनी ला महित गर्न था। इन घट्टाना पर चरना या परिन था। घट्टाना पी रगरा व पावा ऊपर विमाड व गैन का घनी एना उग आई थी। एक भी कदम गरत रगन पर अवय हो गय-परों में हाथ पाना पड़ता। इन वाधाओ कारण वापर घरना पड गया और उघर गना का अपना परवा घट करन का अवकाश मिलता जा रहा था। मुल क म्याना पर निगान मिठ जहा यठ कर पाना मुम्ता था। माग रयत का धार कम होता जा रहा पी। परनामा या चार मो एतीमवा मानव शिवार या और एका सात ममय लगा द्वारा छगे जान का ना यह आला पा किंतु मग ममन में -म समय प्रथम बार हा तनी दाता म उमका पीछा पिया गया था। फ्लत गुर्रा कर यह थपना पाप प्रपर फरन एगी। पार यो गर्राट का पूगातक मवर पहा समझ माना ह जो मरी जमी काटिन परिस्थिति में फम जावे। पारा र घना वन इधर-उधर वड़ा-या 'चट्टाना और मम वम पर राग में गिर पर गान तुरुवान का भय । आप मर में भाग र पाम घर बर इम कहानी का पन हागें। म इगकी पल्पना भी नहा पर सस्ता वियाप मरी भावनाभासा समझ पावग। दारनारा गजन म व पात्रमण या समावना म मुरा भय भाग रहा था और माना भी। म गोप रहा था कि यदि म हारर भरनी मा पर यस्मात् आरमण पर देता मा मण मान पाप पा मिद परन और उमर समस्त बग्यानारामा यला न पा गुलमर मिल जाय। दिनु उसका गुर्गट एव घरा मात्र पा। जव उन या पिउमा गुगन पर म और भा तगरता म उगा पाया रहा। माय' चुप हा हो। म पार पर ग उगमापाहारगपा। गामन गागाडा यानि मई ले जाय। चपावत 7 आदमखोर यार पम्प चुषा था किंतु गरनी का एक बार भी मुम अब तक नहीं लिखा या। मामन प पहाड़ों पर बात हुए अधार का देख कर आग घटना मन उचित न समझा। इस बार भा मृत युवता हिन्दू था और कम पे लिय भव का कुछ न कुछ भाग ने जाना यावयक था। इसीलिम पावर के पास से गुजरते समय मन टाग वा भूमि में गाद दिया तारि रात म भरना उमे उग चट्टान पर बठा मनप्य मुझ दस पर बड़ा मतुष्ट हमा। मेरे दर तपन प्रेग्न में और परनी की गर्ग मुनकर उन पसा विश्वाम हा गया था कि मारव वाभा परना न अपन भाजन में शामिल पर लिया है। उमन मुझसे स्पष्ट पह दिया माहव मारी पित्र इस बात का थी मि मोल गांव धम सोट पागर से नाच उतरतं गमय म गोचना जा रहा था कि भरा हुई राइफल मे मगम भनप्य प ाग लिपि नहा परना चाहिय। किंतु गुम गान हा माना बियार बल देना पन। मरे साथी के हाथ में ४५० भन्दूर या जिसमें माटी मच (पान पान ध यन् परन थाला पुजा) नही एगा हुआ था। परत परत आम्मात् उग भादमी का पाव पिगल पड़ा और वह गिर पडा। धन्दूर मानारस ठोप मरामार मह वाय तार रही थी। तवम मन प्रण र सिमा कि मात्ममार पराय गिवार में माय पिमा का न जाऊगा क्यानिमाया मनुष्य यति बिना हथियार पहाता उमरी या परना कटिन है और पविह मात्रहोसास्वम अपना रारना और भाटिनहा जाता। पहाटपिर पर पढपन पर म वठ पर धूम्रपात मग्न एगा और अगले निगरिय नई याजनायें माचन एगा। यह ताम्पर पानि गन में पारना सपना पापर मार नि पट्टानां में परा रहगी। वहा उम गाजना सम्पन्न पग्नि पा। और यश उम पर गाय पगनमा जयगर न मिनामाध्यय में एर जानबार वहापितमा पण्यि उग प्रदाता ओर उगम मग मर ए जाता। अतएव पनि पापा धारमा मिर मरत सारा माता का आगामी जा गाया। पाहामार मामा नागपिगत्या र भान कर शेर २० कुमायू था। पारों ओर कही भी आवादी नहीं थी। इस मैदान के बीच से फूल काटती हुई एक छोटी पहाडी नदी निकल गई थी। पूर्व में चट्टानों मे टकरानी हुई यह नदी उत्तर को घूम गई थी और मान के और उसके बाच में एक सकुचित मुहाना-मा था। सामन गभग २ फोट ऊचा पवत था जिस पर हरियाली बिछी हुई थी और बीच-याच म पीह के वृक्ष खड य । पूर्व की ओर ता पहार इतना ऊचा या कि पुरड के अतिरिक्त कोई भी नम जीव वहा नही पहुच सकता था। यति मुम नी म एकर पहार को पगार तर ह्वान के लिय पर्याप्त मनष्य मिल जात तो अवश्य ही शरनी महान में से हाकर निकलती। हा यह अवश्य था कि यह हावा वहा पठिन था क्याकि पहाड का यह भाग घन अगर से आच्छादित था। जिस जगह मगरनी का छोड याया या वह भाग देवर सवा तीन मोर ल्वा वाघा माल घोडा था। फिर भी यदि मुझ अच्छ हावय मिल जाते ता भवाय ही शरनी पर गारी चरान का अवसर मिल सकता था। गाव में तहमीनार मरी प्रतीक्षा कर रहा था। मन उसे समस्त स्थिति भली माति समझा दी और अनुराध क्यिा वे विना विलम्ब के अधिक से अधिक आदमिर्यो को जमा पर रेव। जिस वृक्ष के नीच एडको मारी गई थी पहा दूसरे दिन प्रातःकाल १ वा मिलने के लिय मन उनसे कह दिया। भरसक प्रयत्न करन मा वपन दर वे चपावत लौट गय । दूसरे दिन पौ फटने ही म पाग गया और मुछ मा-पारर मन अपन आ मिया से सामान बापन + पिय पह दिया और यह धादा भी दिया कि चपायत में ये भरी प्रतीक्षा कर। इमरे वाद म उस प्रदेश का निरीक्षण करन पर दिया जिमका हेदवान मा मरा विचार या। बहुत कुछ सोचन पर भी मुप्त आनी पाजना में पाई त्रुटि नहीं रियाई दी और निश्चित समय स एष घट पूर्व ही म उम जगह जा पहुंचा जहा तोरस्टार म मिल्नमा मन यायदा किया था। यह ना म जानना ही पा वि तहमीर मा आदमिया मा त्रित करन में काफी परिनता हागी क्यारि प्रत्यय मनप्य प हृदय में आमरपार प भय पी गहरी छा ग की पा और कवर पुणन ही मशग घरा के बाहर निकन्न का तयार नय! टाय दम बज एप मनुष्य का कर तहगील दार वा पहुंचा। फिर दोबा धपावत 7 आदमखोर २१ चार-चार को माया म मनुष्य एकत्रित हान रुग और दोपहर तक २३८ मनुष्य इस? हा गय। गावा मैं ग प्राय घुरा र विना 'लाइसस को बन्दूर भो रख लवे ह । इस अवसर पर तहमीलनार न पापणा कर दी बि एम गरकानूनी शस्त्रा को रेल पर मुह फिरा रंग। इतना ही नहीं का पता पधन पर तो लोग उनस गालोन्यारभारे मरतह । उम दित जामिन्नभिन्न प्रकार स्त्र लागा के हापों में रिसाई रिय उनस एक अच्छा सासा अजायपर भर सरता था। मव साग जव तहमोरदार स गोग-बाल लेटर तयार हो गय तब म उहें पहार दे पर गया जहा मग वारिता का रहगा पड़ा हुआ था। फिर मन शारे से उह एम विजला से गिरा हा वृार बता दिया और कहा कि एक पति में सब वहा पर यह रह और नाच स मर रूमार हिलात हो जिनम पाम बन्दु हा वे उहे दाग और अन्य लाग नाच को भार वर-यड हारेका पर कालाहर पारा रकम। इस बात को पडो पतावनी म उन रागा मा देता गया मिर लोग्न स पहा पगा से नीच कोई खतरन की पपा न करे। जव मुम दिल्याम हा गया जिमय लागान भरे बागारामली भाति मुन ग्यिाह तव म तहमोरार मसायनाच उतर पडा। तहमौलार हरवयां माथ रहन यातयार न थ क्याकि उन गारे पास पुरानो बन्दूर पाजिनर फन पार पा एक लवा पसर देवरम घाटी के काराभागापारपरगया। पिर मामन पगड पर पटपर बिजनाम गिरे हुए घोड़मवृक्षर समाप पहल गया। पहा म पहाड एक्भनाला गया था। स सारगार पल सलमे जून पहिने हुए थे और छागोरसारण आग परना उनर ग्यि भर साहा गया था। बतएव व अपना उतारन । उपर गान मामा मिरगचित् मार हिलाना भर गया है। हाल मुबार मचान हुए बन्दूरागरी। अभी म महान मद मो गजदूर पा। म यचपन में हा पाग में पाए और पान सपा आन है अन्यथा सम दुगम पप पर दोडन गहाप पाट जाना मायारण मी धान था। पाप वनात मग्य मुग पानिमान पाम र पामरा रिहा गा पा। जी में अन्य स्थान न मिन्न गम बहा पट गया। भग पार उग पहा का मार पो जिपर गम अभा उतरा था। पाम गमग दा पोरसा पी कुमायू के २२ शर और मर थाप शराररा उमन ढष रिया था। यदि म बिल्कुल निश्चल यता ता समव था रिशरनी मुल न देवती। जिम पहाड का हाका हो रहा था यह मेरे सामन था। महान में मामन शग्नी के निकरन की मा पूर्ण याणा थी। पहाड़ पर पागहरा आरम्भ हो गया था। माग वन यन्दूपापी आवास गोगा की चौपा व दोला ये तुमुल ना स गूज उठा। बवामात मय मन देखा कि दा मी गज पर दानाराने वीष पारना उछलती हुई ढार मे नाच उतर रही पी। वह कुछ ही दूर गई होगी वि तहसीलदार न अपनी बन्दूक की दोना नार उसपर सागेमर दी। बावाब सुनकर धरना लपप कर वापस गेट गई। उमर पाम में छिपने समय मन तत्परता से एक गोली उस पर निराशा होते हुए भी पादो। पहा के कपर आदमिया न चन्दूक पा आवाजें सुनगर निष्कप निवाला दियाय ही रनी मर गई। अस्तु। भरना वन्दूक धगत हुए उहान एर अन्तिम हल्ला बोल दिया। मुस पूण आगा थी कि अब पानी पहाड़ पर पहप जायगी। मसाम राव हुए प्रतीक्षा कर रहा था। रणगा के चार पर ही अग्नी नदी का एप छग में पार र महानीआर साती दिखाई पनी भर हाथ में आधनिक घार गपत था। वितु इम की मम्पो मगनी निवार के लिय पढी ईपी और इतना उचा पर अवापहा गारी पर कर सगनी। जब मर गाली पगन पर पर गिर गई मन माथा दिगारी पीट ऊपर मे निपर गर्न और रोना मपिल पार घह ठिप गर्न र चिन्नु वारसव में मरी गारी उगे ग ग पा यद्यपियुष पोछ त्वर । पिर गर कापर यह मुडी । पामग गज या था और या सरनो याम मरी आर विय हुआ था। मन दुमरी गाय भी पदोरिन्तु जरा गाबिहुष कर वह रह गई। म पप ग यन्दूप रागाय बग माम रहा या मिरि गरना बारमण पर सा गया ? म पर तीन गारन्म माय में साया था या माच पर मिसामरी गागमनमा घरमा धागानहा। गौमाय मरमान जारपण परन वा रिनार स्थगित कर लिया और ना पा पार पानापुर पयर द्वारा पर पार एक सापक पोर या पापी। पररावर यामाहापानियावानाच रही थी। . नयम चपावत का आदमखोर मावधानी की परवाह न कर मन तहमीरार का आवाज दी कि मुन्न अपना बष द जाय। किंतु उत्तर चिल्गकर उगन एक एम्बा वाक्य कहा जिममें से घर पाव म सुन पाया। दूसरा उपाय न दरवर मन बरना राइफल जमान पर रख दी और दोडकर मोरगर र हाथा से वन्दूक परम । उसे ही म नदा १ किनारे पर पहुंचा 'गग्ना मागे स निकर वर मरी आर रूपको। जब वह मुझसे नवल २० २५ गज पर रह गई सा मन सहमीरपार कायन्दूप माधी किंतु दया विकारतूम मरन का जगह एव मिरी मरी हुई थी। जव तसारगर न दाना नाए साथ ही चलादा या तव नाठ फटा नहा था और सायद पुन पलान पर भी न पटना स्तुि वा वा भभक स अधरान मा भय या। पर यह सतरा उठान वे अतिरिक्त और पाई मापन न था। मम्माम स्थान पर लाहे को एक गिट्टी मोगी हुई पो मी म य माधकर मन गरनी पसर मुह पर गाय दाग दी। परमा मा जान मरा निशाना ही गलत बग या उम वन्दूव में २० गज सक गाला ठार निशान पर पवन की गतिहीन या मरा गायमग्नी व मत पर न गार उमरहिन पज में जा लगा (वा में मन गारी नाना स निराग)। भाग्यवाभारनी में यव गस्ति न रह गई चा और पाय में गागे एगन उगन दम तारिया। पट्टान में कार व एपर गई। म इधर पवमा यो भून मा हो गया था। पर पाई चिल्ला रहा था वह पड़ी ह चट्टान पर पला उम उतार कर उमर टुक्रया पर पर राम भरनामा दम रिया या और जार म पिला रहय। क्यां व परनार याच में एरर्रा था। मगरनी र पाम पहुंच गया यह मर पुरा या पद्यपि मन उस परमार पर अभा तर निचय रिया ना मा पानि मरे पाग ममयम था! हा मचाना साग दरसर पप गय । भग्ना कागार गुम्ग में गा. मुम्हाला कामाले गिर पाएमा पाइ मनप्या बिमरा पग्नान नागानन पिया। भार में एष मनप्प जा पा उम् दरपा गातारपा बाना तयार हया में हिना पर चिा रहा या वर पा २४ कुमायू के र शेरे यह यही चुडल ह जिमन मरी औरत और दो पा का मारा था। फिर मरम्मात् कालाहर घात हा गया और उस मनुष्य न अपनी तरचार नीची कर मुझसे रहा साहय मिस हत्यारिन न हमारा सवनाश किया है उसे मरी देख हम पागल हो गय थ। हमारा म अमभ्यता के लिय आप य तहसीलदार साहब हमें क्षमा परे। बन्दूक में से बचा हुआ पारतम निगार पर म नीचे उतर गया। मन लागामी चट्टान पर पहपन का रास्ता बता दिया। उहान सरनी का नीचे उतार लिया। उस देखन चारा पार गापी मोड सग गई। जद गरनी चट्टान से मापर कान का प्रस्नुन यो मन दम्बा कि उमवे में कुछ मष्ट पा। अव भरी प्रकार देखन पर ज्ञात हुआ कि उसके पुछ र और नीच क दात टट हुए य । धिमी गिरी थी बन्दूक २ छरों के कारण उस य दार टूर हुए थ। धूकि अपना स्वाभाविक शिकार करन में उसे वष्ट होता था पलस्वरूप वह नरसिणा बन गई थी। गौपधारो न मुझमे मायना की कि भरनी की खाल जगत में न उतारी पाप । दभरनोकामा ममस्त ग्राम में प्रान सरना पाते प। साव अगर गांव औरतें-मञ्च इम देख न ल ता उहे भी यकीन ही नहागा कि यह पत्यारिन मर एपीह। मन अपनो अनमति दे दी। दो बडो टनिया में धातो व मापा वी महायता मगरनी मा याच कर पुछ आमियान यादमपोरा टिषठी काय पर मड़प उठा लिया। राग पहाड़ पर चढ़ कर गाव को पो। परनी भारी वानवा साध परना मत्पन्त पटिन पा विन्तु शाप मे पाय गावपानी मे वर पढ़ाना पर पढ़ते जा रहे ५। परनी पा लिय रागों का यह लग एमा प्रतीत हो रहा था जैगे घोटियानी मना गुवर वारिप दीवार पर पढ़ रही हा । पाछ गोछ तल्मीर दार मारव म्यम एदे पल या रह थ। यति भर म रिगीमा पार पर पड़ता पा आमियों वप हुए हापा जाते तान जान रितन धमागां का इलाग गमाप्त हो पाती पर मा नया मा पा र विजय + गीर गाना या वा पला वारा पा समाएर चपावन मोर गय और म भी उनसे माप घरगिया। पान पगार पर गा-गह मन नोच को मार प यन्निम दृष्टिगती।

चपावत का आवमायोर २५ नीच मदान था जिसमें आज का भयानक नाटप कुछ क्षणा पूर्व समाप्त हुआ था। और पास ही वह माही थी जिसके काटा में अब भी मृत वालिका ने कुछ शारटके हुए हवा में झूम रहे थे। मुदर मुहान पे पास मृत वालिया की चिता से पूनराति ऊपर उठ रही थी। चपावत मी मरभक्षिणो य अन्तिम गितार सी चिता धू धू कर जर रही थी ठीक उसी म्थान पर जहा आज स्वय आदमखोर न दम ताडा या। भाजनापरान्त म बाहर मागन में आसड़ा हुआ। नीच गांव में गांववाले उत्सव मना रहे थे । लोग नाच नाच पर अपन पहाडी लोकगीता ना गा रह य और बीच-बीच में चौह की मगार धमव उठनी पा-छोट-छोट रुपहल जुगनुभा की भाति । एष घट याद साग भरनीषा मेरे पाम ल आय । इतनी भीड में खाए उतारना सम्भव न था। मत मन TT स पर पज घमर पाट पर गप शाम दूसरे दिन रिय हा रिया। दूसरे ग्नि राा पर एक पुरिमवार का पहरा लगा दिया गया और धरनी पजा घ पूछ ५ टुक्ड एागों में वितरित कर दिय गय । इन घस्सुभाये तावीज बच्चा पे गरे में पहिनाय जात ह। इनव पहिनन में भूत प्रतों स यच्चा की रक्षा होती ह एमा लागा का विवाम ह। शरनी के पेट में मृत यारिया की उगरिया मिली। इनका मन याद में ननीतार रे साल में मन्नादेवी मनिरपास गाड दिया। गाववाला न अगर विम एव समाराह का मायाजन किया था जिमषा सभापति 4 मत बनाना पाहा थ। मुन दा दिन में ७९ मोर को यात्रा करनी था। इगरिय क्षमा मागते गए मन सहसोनार मे अनराध रिया रि मरा म्यान म पद्दणर में। सारी पार पर गरनीमा सार धाप पर हम रवाना हा गय। दवीधुरा में मार रात में पडाय हारना था। पाली पास झापड र बाग में गुजरत ममय उग गूगी म्बी वाया मा गई जिगरी यहिन मारना उग र गई था। सोचा पार उम भी पवर गुना दू। पारा मन नीष याप रिया और नीकी गापा मापदराज पर विद्यालया। वन मरा इस पारवा वादा घुर प। पाय-पोय पर उहान पानी मा रा रमापर में गवर दी। पुण्यामा पामत ह मिरिमो प्रसार परगन म मनप्प भी अपनी कुमायू रेकर गेर चुछ शक्ति या वरना है और पुन एम धार रगन पर पिया की यह अक्सि पापम छोर पाती । म इम विषय म मानी सम्मति नहीं दना चाहता हूँ। हा यह अवय मन म्यय अपनी भाषा म दया कि गत एक थप म जो स्त्री विल्कुल गगा यो व इम ममय चिल्ला चिलगकर अपन पनि वा पुकार रही था कि साहब पो गई हु चीज सामान दमल। गूगो मह मे निको हुए इन स्पष्ट पा षा मुनवर वच्चा के विस्मय की सीमा न रही। कुछ दर गांव में विश्राम रस मन पायपा और पुन रवाना हा गया । गाववाले धौल-बौना मुझ आया रे रहे थे। दूसरे दिन प्रात पार मरा मयभर एक सेंदुव में हो पा। इस कारण कुछ विम्ब हा गया और मरे घाड पर या सा बाझ और यह गया। घाटा तगडा था और परन-गेत विमा भौति हमन • घट में ५ मीर का रास्ता पार रिया और ननीतार पहुच गय । कुछ मास वा ननातार म मर जान होवट ५ नतृत्व म एष दरबार हुआ थोर धपायन र तहमीस्टार फाएर ब दूर तथा भडका पराभापारत ममय मेरे माथ चरनवाल मनुष्य पाएष मुन्र गिरारी छग में स्वरूप प्रगान किया गया। इन तारपा पर उनक नाम मरे हुए थे। व उन कुटम्बा को पत्र गम्पत्ति रहेंग।

रौविन मैन उनके माता पिता का सभी या न था। जिम 'शार व मरणार' (भगा) ममन उम गरी था उमरा पहना था कि वह 'म्पनियार जातिमा प्राणी था। उसका नाम पिचा पा और उमका पिता एक कुगल पिकारी नुमा था। इमर अतिरिक्त म उगमा वावगे विषय में और अधिक पुछ मरीमर माना। मुम छार पिल्लमो नाव मरता म पो किंतु जब मन उम परी उम ममय मोमाय मरी व मित्र भा था। पर गटावरा में पिया यपन छ भाई पहिना गाय पहा हा था। इमा टोपरा में ग निकाल पर य पिता मित्र पाणिगाय गय। पिचा यान परिवार रामपम छाग एव वागमग प्राणा था अनाव पर पा रिवर जायन मनाममा अन्तिम मात्रा पर पापण मर चुरापा। आन यमाग भावहिपा पर उमन एक बार मरा परित्रमा ग और पिर मरे या पावार वाम एस पर घर गया। उग निगवर व टर पा। मन उम उसपर भान पर अग पर लिया। ममता दमान हुए उगन मरा मर मार गिया।

कुमायू के कर गर तब उमकी आय वेवल तीन माह की थी और पन्द्रह रुपय मन उस खरीद लिया था। आज उसकी आयु तरह वप की है और ममस्त भारत का साना भी उमे नही सरीद सकता। जव म उमआया तो प्रथम वार उमरा परिचय अच्छ भाजन गम पानी व सावन में हुआ। उमा पुराना नाम पिंषा छोर पर नया नाम रोश्नि रम दिया गया। जब मरी आयु छ वष को और मेरे भाई को घार बप की पो ता बोली जाति एप पुत्त न एक युद्ध रोछनी के आक्रमण से हमारे प्राण वधाय च । उम पुत्त मा भो नाम गैविन था उसी का स्मृतिस्वरूप विचा का नाम हमन रोविा परिया। र धरती का रिम भाति वर्षा की आवश्यक्ता हातोह उसा भाति रोविन को भोजन की आय पक्ता पो। जब उस हमारे माप दुछ मनाह हा गय ता यह साचत हुए वि पञ्च या पिले याशिवारम्भ गीप ही हाना चाहिय म उम अपन माप एक दिन बाहर गया। म चाहना था पि दामार वार मामन बन्दर चला पर उम बन्दूक का आदी बनाम हमारी जागीर व नीच का आर पाटाको कुछ घना झारिया यो। इन्हा माडिया पाम पार लगा रहा था कि मानी उपर पर जी। मेरे पीछ पोछ रोविन मरा अनुमरण पर रहा था जिमना म मूर हो गया था। मन वन्द्र परापर मारना का गिरिया। पपणा हुई यह एक पटोली शाही में गिर पगे और उगा गमय रोदिन भी उसपर अपट पड़ा। प्रारिया पनी तथा *गे। पी अन यहा मरा पहनना अगम्भव पा। माल्या ने पीय पुछ गली जगह पी और उमरे या पन पक्षां व पाग पा जगए था। म जानता पा दिपायर मारना उग जगत में पहपन सा प्रयत परेगी इमरिय दौड पर म पापा गया। गरह मान में पूप फूट रही था। यति मरे घर चित्र मग हाता ता पर मदन चित्र यामन पा मुअवगर माा मिर गवना पा। मारनी पुरा पी उमरा एक ना टूट चुका पा मोर वापर वारण उगरी गनर पर पर गप प। १. मीषो जग नी र अअमर हो रहा पा उपर बी आवाज रोधिन रोविन भी रणभूमि म डट हुए य और मोरना का पूछ महारे घिसटत हुए पले जा रहे या वववफा म मन दोड पर मारनारी गदन पक्ड पर उसे जमीन म ऊपर उठा रिया। दूसरे हो सण उसन एमो दुल सो साहारि रोविन मुखदर पर इलावाडा खाते नजर आम। पिन्तु पर मारते हो रोविन फिर खडा हा गया और जब मन मा मोरनी को भूमि पर रख दिया तो वह नाच-नाच का उममी परिक्रमा परन और दोष-बीच में उसका गान व पूछ का नापन रगा। इस प्रसार उम प्रात काला पाठ ममाप्त हुआ। जब हम घर यापम और रदय तब यह बताना पटिन था कि हम दाना मस अधिक गव फिमका पा-विन ना अपना प्रथम शिकार मारन पर, मा मुम इम 'गुदडील का पान पर? शिकार के मौसम मा अन्त समीप आ रहा था और फिर बाद कुछ गिना वर रोविन का बटर फाला मा इक्के-दुखे तीतर का उठा हान दे अतिरिक्त कोई बयराम नहा दिया गया। गमिया हमन पहाड़ पर पार्टी। नवावर में हम मलहटी पहाहा पर उतर माय । पह मार वा ल्वा रास्ता समाप्न र म एर माई पर पहुच हो प वि रुगूरा पा एम द पहाड़ पर सर सहर पार पर गया। य लगूर रोविन विस्कुल समाप से निपल । मरी सोटो को परवाह नाले हुए रोबिन मपट पर लगूरा पौछ मह में उतर गया। एगर तत्परता स एक पक्ष पर जा पह। उपर मान बुला हुआ पा रेल कही मही पर पेटय । मैगन कुछ घोडाहता हुमा नाच घाटी में मिल गया था। इस घोडी जगह र दाहिनी मार गुरु माडिया या। परमाती पानी बग्न मदन मारियाच में एक मारामा वन गया पा। रोविन इन गाडिमा में पुमार पुरतो ग बाहर निकल पाया और दूगर हो दाण माना या पाछ पर और दुमदा पर उगन दोड लगा। उमर पाएगोष्ट एर भामसाय तेसुगा मरपट पण आ रहा था। प्रतिक्षण रोविन य ने व वाष पापामगरमजा रहा था। म मापन या और हा मरन म अतिगिरा मरिगा भाभि मा रोविन गगहायता मनीपर मरता था। एम मानमारागहर । कुमायू पूरगर में भाग लिया और जव सकडा रगूरा न मो चोषना आरम्भ पर दिया तो पाराइल पा मीमा न रही। बीस पचोम गज तक रोविन व तेंदुव का दौर चालू रहा रिन्तु जस हा रोविन तत्व को पप म मान को पा वि तेंदुवा न जान क्या घूम पर पाटी में गायब हा गया। उधर रोविन पहाड का पर लता हुआ मुझस आमिण। उम नि रोबिन न दा पाठ मोख जिह वह आजम न भूला। एक ता यह विल्गरा का अनमरण पग्ना सप्तरनार हाता ह और दूसरा यह मि गूरा का चाख मा भय होता ह आमपाम म यहीं तदुध को उपस्थिति। वसत में रोपिन की Pिा में बाधा पर गई थी पितु यब पुन यह बारम्भ पर दा गई। अब यह पर हा गया कि अपन गाव म पाय भूम्व रहन से व ठाम प्रकार परमन हान के वारण उमग दिल पर इसका प्रभाव पड गया था याकि जब तनिक गभायम में उपरान यह अचत गजाता था। मिवारा बुन का मरमे अधिन निराशा नय हाता है जब उसा स्वामी उमे पर पर मारा छा पर शिकारमा पर देना है। चूमि भव चिपिया 2 शिफार का रोविन गिय एक प्रकार म निषध मा हा गया था मन उमे रन माय वा शिवार मग जाना जारभ पर लिया। इस नम बरा उमन बर पाप म अगावार कर लिया योर तर मे आर मष नव भो म राहपल सेवर निकलाह वह मरा महपर रहा। मरा सरावा यह है वि सहा हो गितार निवर जाना और दार या सेंदुष माग का पात्र वर उगवा वनमरण परना। जव जानवर के सात दिमन में म उनका पाछा और पनि जानवराडिया महातापाछापानपा वाम गैबिन परे। इग माति सना बगरा पर उगन माग जानवगं मा अनुमरण मर उ पा लिया। पल भरपर गिर मारना अधिक महज । बजाय इम पिजानवर पर हाया की पार पर ग या मचानकार म । एक ना पर विरार में या न दिपायल पापा पोटा परन में व्यय म गारा नहीं पाई जाता और दगग पह दि जाना ममाथाना पर जमान ग अग सय गाया जा गरनार यानि पिराग और पिसार रही घराना परत। ऊना म जानवर परीर ममग्परामामना पर गायना पग्निहा जाना। पूष मायान न पर भा मन म्बर नई ययगरा पर गर या मेंदुवारा

रोबिन
मेवर पायर ही कर पाया जिहान मक्ष पर भारमण रिया और उनका ममाप्न
परन में मर मरी या तामरी वार तर बन्दूर पाना पडी। तन वर्षों
म हम साथ साथ गिर सल्ल रद किंतु क्या एक बार रोविन मुझ
वहा कठिन परिस्थिति में घिरा छाइ भाग गया था। उम दिन जब वह
सुध दर भी अनपस्थिति प पचात मर पाम गट आया हमन नि वय
दिया कि इस घटना का जिक्र पभा न मगा। अरे हमाग यायमुन
दुवा ह और मभवन बब हम उनन भावुर मा नहा है विपतमा
रोधिन जिमन अपन यान जावन की परम मोमा या अतिक्रमण पर
पिया है और इस ममय मर पाया पाम रटा हुआ है जहा में अब वह
कभी नहा हट पावगा। अपना भूरा आखा म मम्परा पर नमी
तुम हिलात हुए उमन मन यापन मह रहाना रहन का जनति में
दीहा
पाडा म पार निवन र पहा श्म उम मेंदुप का नया सम पाम और
तब उगन टिटवर यान वाप पर पाठ मा पर दमा व एक भीमकाय
तेंदुपा था। उनकी गार बड़ा मुरय चिना थी। गहरे पोर रग रार
पर पडए पार पृट एम रगत जम बिमीन मनमरर पर पिसारा योहा।
मर पाग भमूर यवाग राहाल थी। पर गार पासन पर मन मुस्ता पर
उपमा दाहिना काय पर गाय पादामटव प हय में और गाय में कितना
अन्तर या इमयमाई मतलब नही। जब गाय सेंवर पार नियन र पचाय
गज पर धूर जादा यो नव वह हवा में मारापानी पामर जिम मादाम निरला
या उमा में जा गिरा। ८०-५० गतब हम मापौर उमर पना
गाट गुनत ह । पिर निस्तम्धमा छा गई। इस निम्नमाया
दा मय हासन प-माता में वन दम साड गिया पायावर सुर मगन
में पहप गया था।
उपनिमामाघर पर । मूर्यानहान पापा और हम पर ग पार
दूर प। नगर इम भाग में मनप्यासनामारपन दिन्नु न था और
गत में उपर म निमार गवरन मामा भागमापना न पी। पर मार
लिय पर एक पाग था। यह रि नर मा उमा भाति धाड या
आम पाग दान दा इमरियन माम उग यहा पर

- ३२ कुमायूके र शेरे सरते व और न तेंदुव का साजन उसे माय ही ल जा मक्ते । श्रवण्य उत्सर की बार मुख कर हम पर को पल पर। इस जगह कोई चिह छोड जान को मन यादन्यवतामयी क्याफिगभग गत २५ वर्षों मे म मई वार रात दिन इस पन में घूम चुका था और आय वन्त रखे भी म मरना गम्मा मरता था। पी पटन दोहा यी कि म बोर रोविन गत रात्रि के घटनास्य पर पहप गय । एक कुगर मनियको भाति गैदिन न जमीन पा निरीक्षण किया और गान सर पर वाव सूचना परकर दिया। फिर यह बह र उम माडी के समक्ष जा पया जहा सेंटवा गिरा था। शादी के पाम हो रश्न व छोट पहुए । मम रस्न का देख कर यह नि पयरन की आवश्यक्ता न थी कि गोली सेंदुद निग अग पर सगो है। समीप म बन्दुक परान के पारण मन गोली को रगत रेष रिया पा और तेंदुद के दमरी ओर धूल उडन म मा मालूम होता था रिगाला गरार को पार कर गई। कुछ देर बार रक्त की धार का अनुमरण परना अनिवाय था। किंतु भार मोर के पावे के या यु मुम्ना सेना भी आवश्यक पा। इमस हम लाभ ही हया। मूप नियटन नाही पा और ममम्स वन में पहुआ पायावागमन हा गया था। बागबान में पहर यह जरूरी था रिया की गतिविधि को भी दम्ब रिमा जावे। पाम हो एक पानाच कमान मूमा हुई थी। पेडमी छाया वाण यहा परमाम नहा गिरा पा। इमा जगह म बट गया और रोविन भी मरे पर पाम मा दुवका। मन अभी अपनी गिगरट समाप्त हो की पोसिमामन ई आर प निरिया पर उगे। फिर दूसरी पिर मामग और फिर सई धोमला भी मयात धीपार म गारा जगर गूज ! गेविन धार पर उद बेटा और चुपर सु उपर पर पा जिधर म पागला की आवाजें आ रही पी। नगग घाली घटना + वा उग और भी अनभव हा बुरे ५ और पर अन्य वन्य प्राणिया व ममान भरा भामि मानना पारि धोतर चिमगर उन11 मेवा अग्पिसिनीमावनागप। विग भाति पाना चिाहय उमम मानहानापारिमामार मारागारमनिर पयरगन मय बना गरन परिवादिन पा नहागभग ५ मिनट गव कर रह रोबिन थ और तब अपस्मात एर धार कूक कर वे साधारणतया उस तरह पासन रुग जिम भाति पीतर चाखता ह । तेंदुवा अभी जीवित था और एक साडी से पल पर दसरी में पहुष पर निश्च' हो गया था। मव मवर यह जानना शप था कि तेंदुवा मिस स्थिति में धा ह और यह केवल पीतला फो टूक कर ही जाना जा समतामा। बाय के विपरीत ५० गज पर पर हम साडी में पहुंच गय और घीतला का दूफ्ना भारम्भ कर दिया। यह पटिन भाम न था क्याकि लब अभ्यास स मम जगर में घुपचाप चलन का अच्छा अभ्यास हा गया था और रोविन सो पिसी भी जगल म बिल्ली की भाति दूमन में निपुण ही था। चौतर हमें तब सय न दिमाई पर जब तक कि हम उनने ममीप न आ गय। खुले मदान में मा-यह वह टकटकी स्गा पर उतर की आर दख रहे य (जिपर पर शाम तदुव की सहमहाहर यन हो गई थी)। चीतला स हमें वही सहायता मिली यद्यपि इममें एक पटना ममय नष्ट हा पुका था । मरि पीतल अब हमें देश एन ता धना मनाया सल चौपट था क्यानि वह पुन कूकरममम्स वन मोहमारी उपस्थिति बना दत। म मह मान हो रहा था कि वापम घरभर चौका पोछ स तेंदुवे को देखा जाय या सेंदुव की बोरी वा पर उह सामन से हटा दिया जाय कि एक पितरिया की दष्टि मुम पर पड गई। दूसरे ही दाण 'मावधान' मनुष्य की परगा पर उनमें भगार मच गई। भुन में और पुर मदान में कवर पाच गरमा अन्तर पा। प पुरसो म माग पूरा किंतु तेंदुव न मन में भी अपिर पुरती नियाई। मुम वय झास में छिती हुई दुम पी एवं अन्य रियाई पड़ी। पोमगन मारे परिश्रम पर पाना पर दिया था और अब फिर म पान भारम्भ हाना पो। रितु इस बार यह माम रोचिन समिपुर पा। मगर मान में सम हो गया। म त वा समय दना पाहता पा दि पुन पिगी स्थान पर सजाय और हवा में माना गप छाड६ तारि रोविन पा उगरा मनमरण परल में मुगमनाहा। वायु उमर को लिाम यह रहा था। म रोविन । पाव म हटार पचिमा ओर २ गया। हम मगमग ६०७० गज गय गरि गैरिन टिडर पर वारसा बार मुह गया। जगर में परन समय रोपिन काम पूरा गानाहा उगा ममम्न स्नायु ३४ पुमायू र गर उमप वा में रहत है। नदुवे का गर पा जान पर या उस देख रन पर जान शरीर के एम विप अग का काहिए न से नहा राव मस्ता मोर वह है उसका पूछ। इम ममय भा उमा दुम हिल रही था। गत वप जगत व इम माग म एव अवदस्त अघड आया था जिमा पारण वृक्ष गिर गय थ। इस समय एक गिर हा वृक्ष की आर रोविन देख रहा पा। वृक्ष का भाखाय हमारी पार पा और उमर आमपाम मुर शादिया था। पाई और अवमर हामा ता म योर रोयिन एकरम आग वह आत। किंतु इम अवमर पर विप सावधानी से काम रना उचित था। इमलिय नहीं कि हम एक एम जानवर में आंम्व-मियोना चल रहे ५ जा घायर होन पर यह जानता ही नहीं नि भय क्या वस्तु ह वषि इमलिय कि हमारा पालण एक एस तेंदुव म पहा पाया कि गत प-ह घटा म वाला लन मायाजना बना रहा था और जिममीनरी ममस्त प्रमिया इस समय जाग्रत थी पर मचात ममय मन कर पामवाण २७५ राइपर उठा थी। गिधार में लादन प लिय यह ए अच्छा घदूक था किंतु धायल सदुद मा मपावला परन पनिय यह पर्याप्त न था। इमलिय मीध बाग न वापर गिर हुए वृक्ष नगमानान्तर आग या-आग-आग रोपिन पा और पोछ-पीछ म । कुछ हा दूर वान पचान रोविन ठप गया। मन भी उधर मुड़कर देखा कि रोदिन का ध्यान मापन तव या सहगता हुई दुम का आर मावपिन पा। जब तदुवा मनप्य पर बारमण परता है ता पार इमा भाति तुम का उमान पर पटकन एगा । यह उमरे हमर का पतावनी है। मन पुरता म घूम कर गइपर गपग स्याहा यानि वह हम पर कर पहा । जानवर या कम पाटन र पश्यि मन जाता में यदूर चला दा। गाय पेट व नौच ग निकल पर पिछी जाप म जाएगा। गाग म अधिक प्रभाव यन्दूव की आवाज मा हमा। परे दाहिन प प ये कार म उघन पर यह ए मारिया में पाया गया। मुम दूमग वार परन का अगर न मिए पाया। गैविन मरे पावापाम महानथा। मन माथ गाष उमान का निरामण पिया। पापा रस्त गिराहा था वितु यह पहला दिन पा पि रस्त नाव पार में गिरा पाया जार पानरमारण नदुवमा पुगना पार गर गया। रोविन पान गर वाला माममदन पा। उमन यही मारता म रस पी रोविन धार का बनसरण करना आरम्भ कर दिया। आग घुटनों तक ऊधी घास थी। हम कुर' दूर गय वि मुझ सामन तेंदुवा उठता हुआ दिखाई पडा। राइफल उरान तक यह दृष्टि से आपर हार भौरमार (Lantana) सी एफ मान में जा घुसा। झाडी काफी बडी था इसलिय उममें तदुवा मज से छिप गया। अव उमे हम पर मात्रमण करन में भी आसानी होगी। रोविन का व मेरा आजमायाम वडा सतापमना रहा था। अब आग पीछा करना मूखता था। अत हम साध पर का चल पड़। दूसरे दिन प्रात काठ हम पुन उम जगह पहुंच। रोविन बडा उतावरा सा एगता था। आज म अपनी बड़ी रारफल ४५०१४ . उठा लाया था इमरिय मुा वा प्रसन्नता हो रही थी। घायल जानवरा की खोज में बड़ी मार पी राइफलों पर यहत भरामा रहता है। जब हम भौरमार की नाही सएगभग २-३ मी गज दूर रह गय मन शारे सरोमिन यो मावयान पर दिया। यह भरोमा नहा मरना चाहिए कि घायल जानवर जहा छाड लिया जाये वहा पर दूमर दिन मिल जायगा। उन्हरणाप निम्नलिखित घटनारा विवरण पठिय मर एक मित्र न एक वार एक पारा घायल कर लिया। पई भोर सर वह गय पागे . किनारे रका का धार का अनुमरण परत रह। दूसरे दिन मवरे यह कुछ बामियों का एपर पार का मानन चल पर। आग-आग माहव मी पाला बन्दूप लिय हुए एप भादमी पल रहा था। गम नियम की रस्ती धार पर हापर य पल रह प और नहा र छोट पिा गया पा उम ग्यान गएगभग पर माल इयर होम परिमाग वार मनुष्य का पर घायर पर पर जा पडा।परन तरकार"उग माराग। गप गंग प्राण बचान गिय वृक्षा पर जा पाया गर पर पर रग कर बापग दोह आय । मा भौरमारपीसी स्थिति या या1 रोबिन वा वाव यमाएर म एम आर गया। पायपिररात परपर जानवर पायान में रोबिन वहा दम था। गुपदर जाकर रोचिन र गया और फिर वाय मागूध पर मराआर नापन Pगा। यह मा पा रहा था रि उगवाय में तेंदुए को मार मिल गया। परपी मानि आज मा यह एप गरे गिर हुए पाया आर मरा प्यान मारपित पर रारा था। गिर Pा पर इस बार का गुण हुई भूमि या रितु उम कुमायू के क्रूर शर योर कमर सर ऊची वसौंटा की झाडियां थी। रोबिन का इशारा देत हुए हम एक सूख नाले पर पहुंच गय । मन अपना कोट उतार रिया और उसकी जबो ठूम-ठूम कर राड मर रिय। पत्यरा म मर इस झाल को लेकर म खुले मदान में वापस आ गया। गिरे हुए पेर स १५ गज को दूरी पर खर होकर मन कोट पहन लिया और राइफर तयार करके उस वृक्ष पर सपा आसपास की झाडिया पर हर मारना शुरु कर लिया। म पाहता था कि इस भानि तेंदुवा हम पर यात्रमण करे। उस सर मदान में निकलन से मुन्न गाली पलान का अवसर मिल सकता था। पत्थर ममाप्त हो जान पर मन साली बजार वासना और चिल्लाना आरम्म दिया किंतु न तो सेंदुवा बाहर हा निगरा और न बोला ही। क्या वह मर चका या? पह मव कुछ पर रन के वार म मीध भाग वर पर वृक्ष के उम तरफ साफ सपता था रितु तिन्द' मरा तय जानिय जब गलनिवारी जाय' वाली इम पुरानी पहावत को याद करते हुए मन इम गिरे हुए वृक्ष घर गाना आरम्भ पर निया। मरी इच्छा थी कि इस भाति चकरा का छोटा परता हुआ वृक्षरएकरम ममीप पहुच जाऊ। पहा पावर दरर म गुमरा आरम्भ कर ही रहा था कि रोविन रुष गमा। गुर्राता हुया तेंदुवा हम पर दौडा आ रहा था। गामन हिल्ती हुई पाम अलवा मुभ कुछ न रिमाई पड़ा। इतन ही में पास की माडी म बाहर तदुवा निकला। मन इतना ही ममय मिरा मि दाहिनी थार धूमपरवन्दूर माघए। सेंटव का माम पर मरना और मरी बहन का गरजना यह दोना माम माप ही माय हुए। पिश तेजी म पसरा बल पर मन बगर म ही वन्दूष का दूसरा पायर पाम म गजरते हुए तेंवे पर पर लिया। जव पायन पर या तेंदुवा मीधा मात्रमण परमार और अपन निवार वा पपड नहीं पाता मो वह बिना मुर मीधा ही मला जाना है और जब तक पुन एडाननाए, लौटमा महा। रोविन का बचात हाए म वाई आर ह गया था। अव दमामा उम नदार पाया। आज प्रथम वार उगन मुगएमी पटिन परिस्थिति में माणधार पिया था। बगमित वर जगत में घर रा गम्ता मात्र रहा हो। जगा गम्नापगतगम उमरा याना परिन था। इसव अतिरिक्त वमारमा निन-नवा गुल्गार

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३८ कुमायूक कर शर हृदय अत्यन्त कमजोर हो गया था। अतएव विमी बनात मागका से विचरित हो म उमे दूहन मुश। तभा मक्ष एक ठूर के पो म निकलना हुआ उसका सर निवाई पड़ा। जव मन हाय ये गारे उमे पाम युगया ता वह पुन धाम म छिप गया। कुछ र बार नतमस्तक हा सा गुमाय हुए यह आकर मेरे पर से लिपट गया। मन राइपर जमीन पर रणगे और उसे गो म उठा लिया। अपन जीवन में दूमरी वार उमन आज फिर में मेरा मुह घाट रिया और दवी हुई गुर्रा ट स मम मूचित बग्न गा वि मुझ मगर देष कर वर क्तिना प्रसन्न था और मुझ अबेगधरेन पर वह कितना लजित था। जब मन रोविन का वि वाम गिनिया पि हमाग माय एट जान में उमा मादाप न था मा उमन कापना यर किया। फिर उम गो- स उतार कर हम सदुवे की गार पाम पहप । एमा यहादुरा पा युट पर निम वह करीय पराव जात हा गया था तवा जमान पर मग पड़ा था। म बापका पहानी मुना बुरा है। म रिस्वत ममय मरे माय रोविन नहीं ह--मनुष्य का सबम बीर व विश्वासपात्र मित्र' अब वह (परलाक) उस सुपर मारपटस्थान में मरी प्रतीक्षा मरना होगा। -:

चौगढ के ओर
मेरे
मामन पूर्वी मुमायू का नया टगा हुआ ह जिममें गई म्याना परxरे
चितवन हुए र और प्रत्या x 4 नीच एक सारीष लिया हुई है।
प्रन्यर ४ पिर अधिान रपयत्रा में नरभ भी TEारा मारे गय मनुप्या
पा मयुराव मय का ताराखा वा मूर।
एगही ६८ विग म सम्पूण
मा भग हमार। मलाराम मूषा पाटीर मानन र ग्यि म नयार नही
। सारि ग ना मा टाग मा दा वप हा चय। और इस यान मार्ग
मौना पा गूनना मत मादा गई। इमर नितिन जिन गा मारन
पयर पावर काम छाडरिया ओर या में उमसामयुहागई व वपार x चिट
रथा नारागर अधिवारी मPTE
नाम अनमार प्रथम या १५ मिम्बर १०-५ रा मथा अनिम २१
माघ १. साहु थी। उमरदा x चिनवान मषिक म

४० कुमायू घधिक ५० मोर का अन्तर ह और पूर्व से पश्चिम तक ३० मीर का। बोध मा यह प्रग एगभग १५ ० वग माल ह । इस प्रटेग में अधिशा पाटिया एव पवत ह जा जाहा म हिमाच्छान्ति रहते हैं और गर्मिया में तो इन घाटियों में मुल्मानवाली गर्मी के कारण रहना दुप्चर हा जाता ह । इसा प्रदेश में पौगर मेदारन अपना आता जमा वाया। इम प्रग में छाट-बद कई गांव घस हुए ह । नग पावा से पलन पारण यहा प्राकृतिक पगडझ्यिा बन गई है और इही पगडडिया से य गाव आपस में सयुक्न ह । एस कुछ माग घन वना में में हावर निकल है और जब इन पर आदमबार का प्रकोप रहता ह एक ग्राम स मरे ग्राम तक सवार चिल्ला-चिल्ला पर पहुंचा दिया जाता है। किमी ऊची चट्टान पर खड हापर ग्रामीण जार में पूर गाता है और उसका उमर दूमर गाववाला देता ह । इस भाति मन्त्रणा यही शीघ्रता म आमपाम में ग्रामा में दूर दूर ना दिया जाता है। फरवरी १९२९ में एक जिला मम्मन में मुझ इमारता मारन का नाम सौंपा गया। उम ममय कुमायू डिविजन में तीन नरमती शर प किंतु अधिव शनि कवर घोगट पर नही की पी। अतएव इसी का पीछा पहल परन मा मन निचय दिया। मरवार द्वारा दिय गय xचिव ताराबागाने नवा म मुम यह माएम हा गया विपासासागर की घाटी के उत्तर और पूर्वीय भाग मे गावा म आम वार का दिप आनर ।। पगर का यह मोर वा भाग ८५ पीट ऊधा ह और इगक गिर पर पना जगर । धारी उतरीय भाग ग रूगी हुई कि नगगे मप वान और पयूष (Rhododendron) या परत'' घन वन में ग निवपता हुई जगर और जुना भूमि र यीच में गोमा वन गई है। एक स्थान पर पह मार धूम ग' और 'मी माड़ पर मालागरमा डावगग स्पिन ह । इमा बगले पर मुन पपना था। अपर १.२. की एक गध्या को पोट कोमडी पठाई पसर या पहप गया। नरमदी का अतिम गिरार एक २२ सपा युवा था। मगियां वा परान ममय उम गर न मार दाग था। दूगर विग इम मत युवा पीटी मुसग मिलन आ'। उगन मा यतागया मग-परा वा पहाडी नाम चौगढ़ के शेर कि विना मिमी छह-छाउ र शरन उसने एकमात्र पौत्र को मार डाला था। मृत सुवर के गणा की सराहना करते हुए उसन मुझे उसका समस्त इतिहास वता डारा। फिर उसन मुझमे अनुराध दिया कि मचान के नीच वाचन परिय म उमरी मोन दुधारू भमा वास्ता जाम । उममा रहना या नि यदि इन भर्ती को सहायता से नरभक्षा मारा जावे तो उस वडा सन्ताप हागा वि अपन पति को हत्या का वदण रेन म उमन हाय वटाया। भरे ग्यि य बड़ी भमें पिसी वाम फोन पी किन्तु यह अम्वीकार परन स उम असा ये हाय गाठस भगता। अत मन उस बाबासन दिया कि मरे चार पटरा समाप्त हो जान पर म उमस भमें लगा पास के गांवा र मखिया न मुल मूपिन रिया वि अतिम वार पर २० मीर दूर एक गाव में देखा गया था। दस दिन पूर्व उमन गाव ५ पूर्वीय दाल में एर मनप्य तथा उमरी पत्नी को मार पर या डाग था। पार पदम दिन पुरान भाग ना अनुसरण करना व्यप सा भा। मत भूमिया म बातचीत पय मन गनिमा जान पा निचय दिया। दरवनिया मालगागर म १० माल दूरह। त्रिम गांव में पूर्वोक्त पुरुप व या मा हस्या हुई था वह मा यहा म नवर उतना हादूर है। नागे मालूमाता पा पिया महर सनिया प मामपाम हाह। दूगर दिन प्रातकार जापान र उपराम म दलपनिमा का पर दिया। जिम महवपरम पल रहा था यह पन जगल बोच म गई थी। इस गहन पर पर मा इत्याश्मिाजना हुआ मग वर उग म्यान पर पहपा जग एक दूसरा राम्ना गरम ग मिरता था। यहा मन मुध सपनिमा ( भागमा मिल। पाण आगरवालान पर आवाज लगा र मूचित कर दिया था कि म उन गांव में पाव डालन आ रहा है। म मा गयर न र ग्यि आग या आप ५ रि उग गबर १. मार दूरगान मल पाता दुध पिया पर पारमण र पिया था। परा रा नवा लिया गटारी आर मार माग पुरा पा और माग यान मा भा नपार पो रिन्नु जर प्रामीणा न मा बनाया निराग्ना वा ऊपर-गावर और पन जगल मेंहार निगरता हा मन पानाम्पर पर मरमान निषय रिमा। मरे नौरान में पारा नाला बना ४२ अमाप + क्रूर गर गिया। उसे मारर वज म अरन १० मारपघाव पर पर लिया। माधारणत १० माना गम्ना घर में करना म पाग जा मरता किंतु इम ममर परियति था और यो। राम्ना पगड व पूर्वीय भाग म हाता आ इ घाटिया महारगराया। म्यान स्यान पर पट्टाना माहिया नया वृमा म गम्ना का हा था। इन सागपाडा भा नरमभा छिपा र माता था। प्रत्या सन्म पर पक कर रखना पड़ता था। पर चलन में विलम्ब हाना म्वाभाविक मा पा। सरन भ्य म म अभा माल दूर पा रिन्तु मध्या ममाप दम मा आग वान का विचार म्यगित पर ना पडा। विमा मा अन्य प्रम नारा नोच मम पनामा गम्या पर मार राषि भागम म काटा जा माता - पिनु पग ममि पर माना या हापा मन्य का बाहान वरना पा। एव अभ्याम कारण वग्न र रिया पर छाग्न और उमम आराम मावट जानरा बात ऊचा जगह म रान पाना मरे लिय मरल था। इम ममय मन एक वान ना वक्ष पमन किया। एक पापा के मगर बन्दूष मजबूता म वाधार म मा गया। कुछ घटा बार पना का मरमराह म मेरो ना मर गई। वृक्ष के नाप जानवरा र पान मा माशार आ रही थी। बावार सानो ही गई और उमा ममय व पलला पामरावते हुए पजा का मावार मुना पाही। कुछ दूर पर काफ'वक्षा पर भारपाया परिवार पर रहा था। सात ममय राठ आरम में घरी तरह का करते। भाराम भाजन ममाप्त हान म पहल ना मानापग्नि या। मूय निरा गुमना गया जर म गाद पला। जगलीप म गुप गुला भमि था। मा मि म प गाय नपा दा मापा म निर्मित गनिहा का गाय बमा एजा पा सामान बग्यन भपान प। मार उन पा मामा म गी। उन उम्मुर । म मन वह गर पा गत शिपाया जिसमें पिर मन बाना नान पिन्या पावताना पर पारयानमार पगडा म. पर र उचा परा। या वाग्राम । 17 अनाहाना हाइगरा पर ग्गसाओर मान में माग नाम मनप्प और गगनों बह पाय गमानपा आगर र म भाष्ागहामाह।

धौगढ़ के गर
दया गया था। जिस मनप्य न स्त्रिया को पुकार कर सावधान पिया था
ममम वाय माहव हमारा हल्ला सुननर पर जगर का लौट गया। वहा स
एर दुमरा गर भी उमो माया दिया और फिर व दाना साथ-साथ घाटी में
उतर गया
दोना झापग में रहनयार गत भर न मा मरे क्यापि अपना अमफ्रता पर
टाघर रात भर दात रह। गाय म मर पहचन ए कुछ हा दर पहल
उनका डना बन्न हया था। इन मव दाता का मुनकर म इस परिणाम पर
पहुचा मिनरभक्षा र माप म व जदान पाठा भा।
पहा | वह अतिमिपूजव है । वह इस बात पर जार दन एग किम
उनम गांव म भाजन करता जाऊ। उन अनग का ममता म टालत हुए
मन बदल एक गिलास पाया इच्छा प्रकट गरिन्तु गाव में पाय न था। अत
पापी मात्रा में गामिणार मुछ दूध म मरा मार दिया गया। महमानारी
मी रस्में पूरा हा मुक्न पर ग्रामाला न मम प्राथना का कि गास पसर
पटन ता में उनका पहरामा ए।
मध्याह व गमय ग्रामीणा का पभकामनामा सहित म उस पाराका आर
पर रिया मियर पर दहाडन सुनाई गए थे।
जिम स्थान पर ध्या नपौर और पूर्वी गोला मन्यिा यल्गहराता उमम
२० मोर माग तर काय आर यह घाटी पर गई थी। पास में पना
जंग परियगा यानि दसरा रा का अनमरण रग्ना सम्भव था।
या ना माना आर यावपितान पर होगर रिमा पन या पिर म अन्य
गय प्राणियामामुपगना मोर परायन ग उन यिनि का पता पाता।
जिना पत पवर नार्मा ग्यास पिरारनामाहा उर
या जानना गमगायर हागा रि जगल पायभासद वायरप्रवाह पाएम
गिरा में वामगय रहता।। यहा पर उन जानवग नाम नहीं लिया
गपत जिनरपान पर निरगिराग अरना प्राण मा मरना और
माय? गाय मानगिरपामाज मरताराम प्रत में हा
होपन पर उमाबारापाटायनराजाना मनाम पर भिन्न
प्रभागिा पता ऊपाबा अमरावा पर नहा परता।
पनि आमगार पर विर में मरा मागपूण म्पान ? मलबम

कुमायू के क्रूर शेर विषय में कुछ लिखना म आवश्यक समझता है । गर का यह मान नहीं होता कि मनप्य में प्राणारा अदष्ट पशुको पहचानन कोक्ति नहीं होती। जब पर नरभक्षी वन जाता ह तव वह मनुष्य को भी अन्य धन पायों-मा समझता ह । अब वह मनप्य को दकता ह तब वायुप्रवाह से विपरीत दिशा में अपन भक्ष्य की आर बनता ह या प्रवाह की ओर उमको पात में छिप पर वठ जाता ह। इस बात को साथक्ता तव स्पष्ट होती ह जब यह भी प्रकार ममझ लिया जाय निशिकारी जब गर की तार म रहता ह दार भी बहुधा उमका प्रतीक्षा में छिपा रहता ह या उस दृक्ता रहता है । पर या अपन रग आकार ठया छिपकर घग्न की याग्यता में कई लाभ है। यदि गिमारी ना घायु की महायता न हो तो शर से उमकी कोई बराबरी नहीं। अपन गिकार को पर चुपये में दूक्कर माग्न में पीछ मे मात्रमण करता है । इमलिय एम वन में जहा नरभक्षीका आना-जाना ही विना वाय प्रवाह कोमहायता ग्यि घमना एक प्रकार में आ मन्या करना मा ह। उगहरणाय मान लीजिय मितिकारी परिस्थिनिया साचार हाकर उस आर बना ह जिघर सहवा घर रही हा। इम भाति अवश्य ही वसग उसके पछि रहेगा क्यापि पीठ ने पीछ गिवारी को गप जानवर का मश में मिर जावेगी और पीछ याक्रमण में वरना यहुत कठिन है। यदि वह वायुप्रवाह र प्राय आरपार चलता रह सा मसरा उमक गाय या याय रगा और आत्मरक्षा अधिक मरल हागी। कागज 4 ऊपर यर याजना उतनी आपपर नही रगती वितुआजमान पर य काम दनी है। अन्यया घन नगर में जहा भूमा नरभक्षी छिपा हा वहा वायुन विपरीम पान द मिवाय और का अच्छा व सुरक्षित उपाय म नहीं जानता। मध्या ना म पाटी र सारा भाग पर पहुंच गया। अभी तर म ना मुझ पर ही रियाई पढे प और न पापक्षिया न ही वाई चनावना दो पो। आबाला का एक मात्र चिन्ह जा मार पर रिपाई लिया वा यो घाटगे उत्तर में स्थित एव गागरा इम रात मानगरिय मन मावधानी म एम अच्छा पर छाट दिया। रात भर म आराम म गाता रहा। अपगहान र कुछ दर पायात पर वार और गाय ही गाप भराऊ पन्दूर मोदा आवाजें आई । इमर बार कुछ ग्वालों के चिल्लानमा आवार गुनाई दो और पिर मव मान हा गया।

7 धौगढ़ के गर दूसरे दिन दोपहर तक मन पाटीया चप्पा चप्पा छान अला और जब म असन बारमिया से मिरपन दरवनिया की आरघग्न सगा तव गोगाला की भोर मे पिसी में पुरारन की आवाज सुनाई दी। जब मन उस पुफार का उत्तर द दिया सब मामन का पट्टान पर एक आदमी दिसाई पठा। उसन चिल्गार मुझसे पूछा क्या आरममार का माग्न रिय आय हुए न नीताल क साहब आप ही ह मरे हा बहन पर उसन मुभ मूचित किया कि दोपहर का घाटी म परत हुए उसके मवेशिया में भगदड़ मच गई पो। गाय भसा घर लोटन पर गिनता का गई तो एक सफद गाम पम मिले। उसका सन्ह हो रहा था कि गाय रात में दहाइवे हुए परा दारा मारी गई थी। इस मूचना लिय उमे धन्यवाद देता हुमा म पाटीपी आर चल दिया। कुछ ही दूर जान पर मुम वह स्थान मिल गया जहा स मवणी भाग या जानबरामेसामा अनुसरण परन पर म उस स्थान पर पहुंच गया जहा पर न गाय मारा था। गाय को मार बरदार उम घाटी का गहराई में घसीट गया था। शरसाटों पर चलना उचित न था अत'म एमरवा परकर लगाकर उस स्थान पर जा पहुषा जहो मा मिल्न का मा यो। नारे का यह भाग दूमर भाग ग कम गहरा पा और 'रोन' (Bracken) का धनी मारिया मे मराहमा पा। यया मउ स दूगर माग वा जा सकता था। सावधानास पाय रयत हुए मन मर समर ता ऊपी रोना माहिया में हा पन्ना शुरू किया। नाल को तलही म म लगभग ३० ही गर रह गया कि मुझ मामन बाई वस्तु हिलतो ती दिगाई पड़ी। फिर अकस्मात रिमी पारा एक सप पर उरता हा निया और दूसरे ही क्षण गरी कायमग गुर्ग-ट सुनाई दी। पर सामान में जर इए य और मार-चाच में मापम में शह पहत प। पापा सनम भूतिपत महा। परापागुर्राट बहा गई थी किंतु परमर पर पर भी हिलता जा रहा था। परा और ममीप जाना उचित म पा सारि नि म गमोप पदव पर एव भर पर गारी धग मारवा ना मा दूगर मात्रमा भय था। ममि यहा पर एमाथा रि मरना बाराबाई Prमारनाहान था। बाग मरा याई आर पर पट्टान था।रिमा भानि सपना म म मट्टान पर पप गाना ना अपाय होपरा पर गाय पगनमा मगर मि मानाया। रामा माग-आग मरराना आराय पादान कुमायू के क्रूर शर विषय में कुछ लिखना म आवश्यक समझता है। शर को यह शान नहा हाता कि मनप्य में प्राणारा अदष्ट पा को पहचानन की शक्ति मही होती। जव शर नरभक्षी बन जाता ह तव वह मनष्य को मो अन्य वन पगा-मा ममझना ह । जव व मनप्य को पता ह तय वायुप्रवाह से विपरीत दिशा में अपन भक्ष्य को आर बनना ह या प्रवाह या आर उमको पात में छिप पर घठ जाता है। इस बात की साथवता तव स्पष्ट हानी ह जब यह भी प्रकार ममान लिया जाय कि गिवारी जव धार की ताक म रहता हशर भी बहुधा उमका प्रतीक्षा में छिपा रहता ह या उस दृपता रहता ह । गर का अपन रग आकार तथा छिपकर पठन की योग्यता से पराम है। यदि तिवारी का वाय मा महायता नहा तो शर म उसका वाई बरावरी नहीं। मान मिगार को गर पपर म ढक्कर मारन में पोछ म आरमण करता ह । इसपिय एम वन म जहानरभक्षाका आना जाना हा विना वाय प्रवाहकीमहायता रिय पमना एव प्रकार म आत्महया परना मा ह । उता रणाय मान लीजिय मिगिकारीमा परिस्थिमिया माचार होकर उस आर वढना ह जिघर मे हवा चल रहा। इम भाति अवाय हा खतरा उमर पीछ रहेगा क्यागि पोट पीठ गिवारी को गघ जानवर का मज़ में मिर जावेगा और पाछ बारमण मे बचना वहस पठिन है। यदि यह वायुप्रवाह व पाय यारपार घरमा रह सायतरा उमर दाय या पाय रहेगा ओर यात्मरक्षा अधिर मरर हागा। वागड ऊपर य? याजना उननी आरपर नहा लगता किंतु आजमान पर याम देती .! अन्यथा धन जगम में जग भूया नरभक्षा छिपा हा यहा वापर विपरीत पग्न मे मिवाय और वा अन्या व मुरभिस उपाय म नहा जानता। गघ्या तर म पाटी ऊपरी भाग पर परच गया। अभा सा न ना मुन्न पार हा सिगा पहप और म पापिया न हाका चनावना दो या। भावादीका गर मात्र पि' या मा अव निवाई दिया यह था घागर उत्तर में स्थित एक गागागा इम गत मान रिय मन मावयानी म एक अन्टा पर घाट रिया। रात भर म मागम म माता रहा। अधरा हान व कुछ देर पपात पर वार भोर माय ही गाप भराऊ यन्दूर पो दा मापान माई । इमरे वा पुछ ग्वाला, मिल्लानामामार मुना तो और गिर गइ मानता एमा।

चौगढ़ के गर दुमरे दिन दापहर तन मन घाटी का चप्पा चप्पा याना और जव म मरन आदमियो म मिन दर निया का ओर चलन एगा सब गोगाला की आर से मिमी र पुवारन की आवाज सुनाई दा। जव मन उस पुनार वा उना दरिया तब सामन नी घट्टान पर एक आदमी लिखाई पडा । उसन चिल्गपर मुझसे पूछा क्या आ-मसार का मारन + लिय आय हुए न नीतार प साहव आप हा ह ? मेरे हा महन पर उमन मुन्न भूचित किया कि दोपहर को पानी में चरत हुए उसने मनिया में भगदए मर गई या। गाय भमाक घरगेन पर गिनती की गई तो एष सफट गाय कम मिली। उसको सन्दह हो रहा था कि गाय रात में दहाइते हुए शरा द्वारा मारो गई थी। इस सूचना के लिय उस धन्यवाद देता हुमा म पाटीपी मार पर दिया। कुछ ही दूर जान पर मुग्न वह स्थान मिल गया जहा म म भाग प। जानवरों सागका अनुसरण गरन पर म उगम्थान पर पहुंच गया जहा पर न गाय मारा था। गाय मा मार पर उम घाटीमी गहराई में धमाल गया पारने सादापर पलना उचित न पा अत म एकस्वा पाकर गायर उम म्यान पर जा पहधा जहा मुन्ना मिल्न फी आयो। नाला यह भाग दूमर भाग मे कम गहरा था मोर 'गेन' (Bracken) का धनी झाडिया स भरा हुआ था। यहा वह मज मरूपपर याग वढा जा सकता था। मावधाना स पाय रसनहरा मन रमर कमरसर ऊनारोन सामाठिया महामना दिया। नाले की सलती म म एगभग ३० ही गर रह गया कि मा मामन काई वस्तु हिन्नो उरनी दियाई पगे। फिर अरस्मात् रिमा पापा एम म पर उठना मा निया और दूमर हा सण गराको पापभरी गर्रार सुनाई दी। सामान में जट हुए य और माय-बाप में मापम में ला परत य। मापार तर म मृत्तिवन महा रहा ! रारा गुरहित वन हा गई या रितु यह मर पर मद भारिता आ रहा पा र मोर मार राना रित नपा वारिममि गमीप पाप र रगर पर गारी पाना मला नामा मरे र आमा नप या। ममि महा पर एमो पाकिसना ना मम्मारना न पार भाग मरी बाई आर एन पट्टान पाकि मामा म उन महान पर पाम जाना सामाया मगर पर भरगामि गरता था। बन्दूरावाग याग मकामानारrir गर र पर पुमायू के वर उगता हुआ म चट्टान के ना पहुच गया। एक मिनट सुस्ता परमन देवा नि मेरा गया ठाव म भरा हुई है कि म चट्टान पर जा पठा। उस आर सावन पर मन्न गनाभर रियाई पड। एक गर गाप क पिछधड का ममाप्त करन में मगन था और दूसरा पाम हा मेटा हमा सरन पजा का पाट रहा था। आभार में दाना पर कराव एक पमान य वितु जागर अपना पजा चाट रहा पा उमरा रग दूसरे म हया था। नीना का रग पारा सा दम कर मन मोचा कि पहा वह पुगना नर भक्षिणा ह। मावधानी मनिताना माधपर मन बन्दूर चना दी। गा एगन हो वह पिछ? पौधा परपरा हार पाठ की यार सदर गई। दूसरा पर कू कर पाटा म अदाय - गया। मन दूमरा थाडा वान का मौका तर न मिए पाया । भरा मारा हुई गरना न पछ तक नहीं हिलाई। वार कर मारसर म उमर ममाप जा पहुंचा। ममीप यान पर मरा प्रसन्नता निराशा म परिणित हाई स्यामि मन में मन ना देवच वा मार डाला था। मरी इम तनिक मी भए कारण आगामा थप तर जि १५ मनध्यारा प्राणा म हाप धाना पहा। मम्भवन म भीम्पय मपन प्राणा मेहाय था बटना। पार का यह पाटो अवमरा पर मनुष्या का हल्या करन में मानो माना पा हाथ या मापा और मनध्य माम का स्वार मा उम मुह में लगी का था। वह स्वय नरभक्षिणी म कम न था। यह माच पर मरी निराला मुष्पमा गई। गुरु मगन में मनप्यासा एक उपयत औजारामा महायता म गर या बाल उतारना परत ह पिनु यहा पर यह काय सम्पन्न पटिन पा योरि म चारा आरमपना मारियामपिएहसा था और चम उतारननिय एक मा पार, अतिरिक्त मर पाग अपना हथियार न था। पाप दूसरा गाना पा मम भय न था क्यापि र अपना आव पवना म माधव शिवार मा ना माना। फिर मा म जान को मन मा प्रमोन हा रहा पा विग्ना बन पामाशिपाई मर प्रन्यर नाम का मारा। गय ऊन पहारेपाछ ग्राममिचौना पलता मा पश्चिम की आर मिम समाग जा गा था। मग पटिन नाम मा ममाप्न हा मुका था। गत मन आज भी उग ही में पतात करना था। मन मन उया स्थान पर दान चौगढ़ के शेर ४७ का निश्चय कर रिया। पानी के खाला म मुझ माम हो गया कि वह पुरानी गरनी था। उम जिठ में गभग प्रत्यक मनुष्य के पास बन्दूर था। अत इम गरना का मनप्य जाति तथा उस क्त्तव्य का अच्छा अनुभव था। अधिन आयु हान मगरनी चाफा मत्तक पा वितु फिर भी राम पर उमक रोटन को मम्भावना था। यहा पर पड अधिक न प इमलिय एक साधारण म वृक्ष पर म जा चहा । इस वृक्षा में यठन पर रात भर बहा षष्ट रहा। वीच बीच में भरनी वार उठनी था। जम जस प्रात वार हान एगा वर्म वसे उमा थालना क्षीणतर होता गया और अन्त में ऊपर की घाटी पर ममाप्त हा गया। भाजन पिय मझ ' घट हा च य। भूख-प्याम से बुरा हाल था और पकान मे ममम्न परीर मुन्न हा गया था। रात का पानी वरम चा पा इस पारण का शरीर मे पिपर हुए य । जब कुछ उजा हा आया सब कार में पर पीपाल बाधकर मनिपा वापर दिया। परमा माजा मार का मन भी तोग नहा (मय पजा व मिर) विन्नु यह म दाव व गाय मह माना है कि भल ही परत समय उमरा वजन २० मर रहा हा मिन्नुप पहचन पहुंचन उसका वजन १ ० मर हा गया था। भरे भागभी एक यागन में मगहा ग्रामीणा माथ परामा में लग हुए थे। रसत और पाना म मना हुआ एडपडाता हुआ म जब उनर पाम पहचा ता उन पापारावार न रहा। मरा उगन जो म्यागन दिया उम म भाजम महा भूर गरना। मग २ मरवाहा मग तम्यू कुछ दूर पर रियायत में गाया गया था। मर यस्मा पर सम्ना रखरमन बना गई और मा मज पर मर लिप पाय लगा दी गई। मर नोपर काफी पुरान च और गई भवगरा पर गिरार में माप यात्रा पर घुर प। वा का मुम पना मा वि जब गांववाला न पर गामा रिगर न मुा मार हागर ता उ' विगम न हुआ। और जब दनिया रमपिया न यह प्रम्नाव उना मम्मुग रम्मानिमाड़ा व ननागार मा मरे गायव हान पो मूमना भन जाए ता उहाँन इममा विगप पिया। उह पूण यागा पाकिम मोर आऊगा। मो आगा प्रनार पाप पी बनी माग पर पहाईगोर सोया।

पुमायू र शेर थकान व गनगी कारण स्नान करना अत्यत आवश्यक था। गम पानी में नहाकर म सान को जा ही रहा था कि आकाग में विजली मी चमक-दम शुरू हागई। मारे याममान में काली घटा उमड आई थी। भावी शशावन के रक्षणा को देख कर त काल ही खीम भी रम्सिपा का खूटिया ने महारे मजबूती से बाघ दिया गया। अघड साथ दष्टि भी हान लगी। एक घट तफ अघह पानी जारी रहा। मरी सभी वस्तुए भीग गई थी और नम्बू के अन्दर ता एक नन्ही-सी नदी हा वह रही थी। क्वल मरा विस्तरा भीगन म बच गया था। अन्न में १ वज के परीव हम लागों न विस्तरा को शरण ली। मेरे आरमिया लिय गांवयारा न एक कमरा दे दिया था। उसी में कुडिया पढापर व मो रह । म भी भरा वन्दूक वगर में डार कर सा गया। दूमरा दिन कपड़ों को मुखाने और गर की खाल को बूटियों पर तानन में ध्यतीत हमा। गाँवयाले भी छुट्टी मना रहे य । व लाग मुझ पर हुए थे । कोई अपन अनुभव सुना रहा था ताना मेरे अनुभव सुनन को लालायित था। विरला ही एसा व्यक्ति या जिस निसी न किमी रितसर का आदमवार न न मारा हा। प्राप कई ला दारीर या चहरे में गर व दात मा पजा के निशान पर हुए थ । गरत गरनी के मारे जान पर जव मन दुम प्रवट क्यिा हा वे इस मानन का तयार ही न हुए। हाल ही में एक मनप्य व उमकी पत्नी साथ माघ मार गय प इसलिय उनका दृट विवाम था कि नरभक्षिणा एक नही बल्कि दाना दारनिया ही थी। मरा खामा पहार के ऊपर एम स्थान पर लगा हुआ था जहा स पारों आर का दृश्य गाफ पिता था। मरे नीष नपौर मी घाटी यी जिसका दूसरी ओर स्गभग ९० पौर ऊचा पवन था। पहाड़ पर परी भी आवादी के चिह नहीं शिवाई देरहे थ। म मातानुमा पता नी मर पर दूरवीन और मरवारी नगारिय घटा था और गांववा' मझ व स्थान बतान जा रहे प जरा गन तीन वर्षों म २० नियामा स्यारा भरभक्षिणी पर गुगी थी। ४ थग मीर प्रग में य अन्यायपा। मामा पा पहा व जगा में मवा परान ना यनुमति मिरा हुई था। इहा मगिया माग पर बन चार मटर वाचन वामन निजय शिपा अगर १०गिनागरपारापागाई सवरन मिगे। मवर नाम म भमा पा - - घौगढ़ रेगर प्रमानुसार माता और वापता रहता था और दिन भर जगागका माजता था। म यही मरी दिनचया या। ग्यारहव नि मर हत्य में बागा का कुछ-कुछ मचार हुवा। मवर मिला कि पान - नार में एक गाम मारा गई है परन्तु फिर राा पर पहुंचा हा मारम हा गया कि हमारा पर नहा बल्कि वाप है। मा पामीणों न वाग्रह रिया किम इस नदुव का मार डाल। रई वर्षों म मवेशियों का यह साप परन में समाहा याइसलिय मन सेंदुर लिय गठन पानिय र रिया। सा पाम हा म एक गुहा में जा छिपा। कुछ ही दर वा नालका उम आर म आता हुआ तवा मुझरिया पडा। सभ्य साध र भ वन्दूम पान का प्रस्नुन मा हो या फि गाय स निमी की भवाई हुई आवास मुनाई दी। मुझरा पुकार सा था। पुकारन या रव एष हो यय हा सरना वा। अपना टाप उठापर म पुरता म पार पर पड़ा। तेंदुवा वचारा तापता हरा रह गया। पल ता पद पटम वर परना पर मिट गया विनुपिर पुरता हुआ कर भर भाग गया। दोना हुआ म मार को घार पर पहया और चिल्लाकर मन पुपारनवाल रामन यान का मूपना देश। वह मामा वपारा गर म साधा नाही पायाया था। दम पर उमन मुसा बताया कि गौरस पाय मार पोदूरी पर यामबार न एक स्त्री मार सय था। यह सबर मुनत हा म गोवा बार दोपडा। आगन में सामापरे हुए नर मनुष्य बटया याल्पिाकार यात्रामारनान फारग्विापा। मरपाटपामुराए हाथा महार यह युप बर्गया। तन माम रन रसारण उसवा दरम्पर जन-मनीआर-नाच हारहापा। मारा चहा रकम मना था और गान पर गुन बार जमना जा पाया। मम मायर उपर हो गई। ममती पात्रों का निरोगा पाहा पा शिगों न मा बारमाहार मुनाना बारम्न र पिया। गरा मान में कई मका जाम्पिति में रला ना पर म प्रिया पार पाना मगर मानापतिमा या पर था। मगर मिरगन पर गनी Fmसपावर पर जरा माग दिया। Finा बनसर TET मा गदर दन पर पिप frनु हास पान पर ग्वय हो गांव वारण आग पा। मामा पानि छहा कर शर कुमायू क्षणों मेंडकी मर जावेगी और उसकीपर बठ कर मपरनीरा मार एमा। विमी भयभीत एव घायल पाकी भाति व वालिका टपटर। गाय मझ देख रही था। उसकी दृष्टि म याचना पी। सडी वा स्वच्छ वाय पो आवश्यक्ता थी। और हम वाराह पूर्ण वातावरण में मुश म्बय गुछ न मूझ रहा था। अतएव पामलता पा परित्याग कर मन बलपूर्वक भीर का घमा में हटा दिया। पाम हो रही एक लडकी । मूर्छा मी आ रही थी मत उम मन वषा हद पर लान को भज दिया। फिर कुछ स्त्रिया को पानी गम यग्न का तथा मरा कमाज फाडकर पट्टिया बनान का आग लिया। गम पानी व पट्टिया मयार ना चुकी पा कुछ दर वा बह गयी कची रमाई। गाय भर म यही एम ची पी और यह भी एक मत दर्जी की विधवा ग प्राप्त हुई थी। यह यिषया उगरा आर पाटनर काम में लाया परती पी। पचाय पण पर बरी नरह म जग लगी हुई था और पाटने म बनता था। अन्त में घर का मन मगन हुए भारत को एटा को उसो भाति र लिया। मवम घर घाव साकी वे माय रथ परनी न प म पोपडो को सोर लिया था और दूसरा पाय माय म पाा तर था। इन पर धावा के अतिरिक्त हिन स्तन ध और गटन पर भोईघाव प। आर वा अधिवा अग क्षत-विगन पाहिन हाप पर भा एवं पाप या जाभाय थारमरक्षा परत गमय एग गया था। मेरे एर रार मित्र न भी मुग एप शागी मिमी पोले रगनी सरल औपधि की दी थी। एमी अवमरा लिय पह मुझ यताई गई पा। इम ममय भी यह गोगी मरो बब में मयार यो। पहन लिन पुगनी होनप पारण दयारामापी माग उड गया था किंतु पिर मादीला में पयाप्त औषधि थी। नुग्नीशी गामा सा पर मन नली १ घावा में मारो वा उपर दी और रि पट्टिया धाप ।। सनतर याशि का उगर मन उमय पर पढ़या रिया। पनि सा रस जान गय मन मखास भट की। गार में आन तिमिम बह द्वार पर वादा था।

घौगढ़ के शर गदन में गहरे पान के अतिरिक्त अन्य सब घाव भर चुपे थे। थान हापा स नाका हटारर उसन मुसबापहो पा घाव दिखगमा। सापडी क टकड अपन स्थान पर जुड़ गय ५। मुस्कराते हुए उसन कहा साहब अच्छा हा हा कि उस दिन मरी महिन जग रगो हुई बची रे आई। (मुडा हुआ सर वधव्य का चिहह।) यदि म मा य पक्तिया मरे डाक्टर मित्र पढ तो जान रे पि उनको को हुई पोनी औपधिन एव वदुर नवयुक्ती + प्राण यधाय थे। यह सब कर धुनन पर मन उस स्थान पर एक मारी थाप दश जहा गरना न युवती पर आरमप किया था और पाम हो सर बाम ये एव वृक्ष पर वरपर मन गत्रि माटो। पारनी व मुह से पास छीन पिया गया था भत भाजन की माज म उसरे पोटन की गम्भावना थी। परन्तु यह गेट पर न भाई। दूमर नि प्रातराल मन भूमि का निराक्षण दिया। सा पर भारमण मान पचात शरना पारी के आरी भाग में घटी गई थी। परनो मनिया माग पर हागर गई थी। यही माग माग धरनरनपोदीना पार परता है। माल माग जिस स्थान पर यह माग जगरी महर समिताह परकर पारनीमपामा गय । दा नि त आसपास १ ग्रामवासी अपन परा मदर नहा गय । पर आप पर मामा जलिय ही बे याहर निकलते य । सासरे दिन बहसारन आगर मा गूपना दा लिपनिया म ५ माल दूर राहागे गाव में नरमणान हत्या पर डारोपी। मनीघ हो मानी तयारिया पर री और दोपहर पुरवा अपन पार पपामारम पर पढ़ा। दा माल मा मा पाई गमाप्त 7 हम दरवनिया गाण में स्थित पहाराचा पर पहल गय । तान मोर नीच गरना नहाया भी थो। दमये अतिरिक्त पर पप अप और कुछ मुगमता TI FTTला समीपस्थ ग्राम य रहनवा पा १. पन उ गपर मिग यो। गागवारी अनुगप पर 4 मुत गमित परन रनिया पर घाम । पआर काम गा प पण मानिए। मुम्नान र यि यहा बारम धूमपान गरन भगा। मा गाया र म मा बामपाम को मुम्ब चारा कुमायू के फर शर जगहें बताते जा रह प। हमारे नाच एक बडी चट्टान र नीच छाटी सी मापी थी। इमसापडी की कहानी मेरे माथियों न मुझ इम प्रभार बनाई चार वप पूर्व एक भाटिया (भूटान को एक जाति जिनको मुख्य जापिका यकराव यात्रा पर मामान राट फर व्यापार करना है ) इम झापड में रहता था। जाडा में वह अपनी बवरिया पर नमन गुरु मारि द पर दूर दर के पहाड़ी प्रदेश में व्यापार करता था और गर्मी २ वरमात में बरनी करियाको लकर मी प्रोपर में रहता था। इस प्रकार वारियों को माराम भी मिर जाता था और य धागामी थप काम प रिम तयार हो जाती थी। एक बार इन यकरिया न उस विस्मा सुनानवाले मनुष्य का पसल मा ननसान कर दिया। जव य लोग शिकायत परन कार पहुच तो भोटिय पो नदार पाया। पाम ही जजीर मे बधा हुआ मरा कुत्ता पापाजो झापडामोरखवारी करता था। लोगा का यह रहस्य मय व्यापार दल मन्देह हुआ। अतएव कुछ लागा का एक टोलान भाटिम को खोजना मारम्भ कर दिया। ४०० गज की दूरी पर विराम का हुआ एक वाझ पा का था। मा वृक्ष नीच भाटिय का अस्थिपंजर पड़ा हुआ था और उगक पर पड भी। यही चौगढी नरभक्षिणी का प्रथम मानव गिवार पा। पहार म एक मनीष उतरन मामा माग न पा। आदमिया न मुझ पताया निमुछ माग वापर एक ढालू रास्ते में गहाली पहुंचा जा सकता था। रास्ता सराय था। हम साग बाधा माग तय पर पुन प कि अवम्मात मन्न एमा एगा जैसे पाई हमारा पीछा कर रहा है । यद्यपि सिर इस बात को मानन का तयार न पा क्यारिग प्रण में यव देवर र बाममोर पग्नी रह गई पो और उग धरना न तीन मार दूर बिगा का मार हारा मा। उसी गायो छाान को कोई गम्भायना म यो। यव हम चोरी | चौर भाग पर पहप गप पवितु पिर मा मर हाय में मन्द बना था। अत आनमिया ना वहा पर था पर म पास्मनिरपरनोवा यात्र में पर पड़ा । जगर में यापम पहुंच पर म गावधानी मयरन या-मियामाआरपग जगरा में परनोगमा भा पिहन। पित भी इस पाना बनान् मन बामिया मा बाग पान मा बाग रिया। पार-पीट यन्द्गार नपार रिस म पण। जब म उग र म गाय में पट्टच गय पहा ग य या मी मा बगान मन गप य मरे गाधियों न ममम पित मागी।

चौगढ़ के शर मन बड़ी प्रसन्नता से उहे अनमति दे दी यद्यपि अभी एक मोर और घन जगल में मन जाना पा किंतु इतन आरमियां की रक्षा करन के मदले केवर अपनी ही रक्षा करना मन आसान समझा। कुछ नीच एक स्वच्छ जलसात था। इयो मोत म गाँववाल पाना भरा परत थ। यहा मुझ गाला मिट्टी में आरमखोर २ ताज बांट मिले। य खाँद गांव को पार से पाय थ। कुछ ही दूर पर पाही दर पहले मुम एमालग रहा था कि परना हमारा पीछा कर रहा है। इन सब वाला समाचते हुए मुझ प्रतीत हुमा किला की खोज में मरा माना निरथम हुआ ह। जगल मे जमे हो म बाहर आया कि मामन लाहारी पर गौर दिसलाई पमा यह गांव ५६मकाना काया। एव घरद्वार पर इस समय सब साग एषत्रित य। मुम जगल म निवरत हुए पागा न देख लिया था। मरा स्वागत करनये रिय पुछ मनप्य भाग बढ़ अश्य : एक वृद्ध न प र मरे पर छू लिय। उसका मापा म अविरर भयुपाग बह रहा यो। मारव भरी गहरी को वचा ग उमन अम्पुर म्यर म मुझसे प्राथना गा। गक्षप में उमन अपनी दुम क्पा मन मुना दी। उमयो एवगैनी पुत्री जा विधवा पा अपन कुछ रितारा माय जगर में इसन बानन गई। पक्षामा र ओर पारी में हावा हुमा एर सोता बहला था। इमा मान की इमरी तरफ मुछ मीडानमा सत पापही पता में उम घट की सहा पटिया गीन रही थी। कुछ दर पार तर किनार कर पाता स्त्रिया नएसी मा पोवार गुनी। माता पारना पडको लियाई हुए पटीग माडियों गुरम में पली जा रही या। औरत गरपट गायपो मागी और हरामनाया। भयभीत गायवाला नागार में जान ससाई प्रयत्न न दिया। मुश र वान रेग्यि पागर गांव ग पार मनुष्य मनप गय ! सगभग माम घर या पार सीमागदाती हुई पर बा पाटचो । उमरा ना था कि जवरना उग पर उधरीतर रसामन्य उपायमा पहपगहमनीच पर पड़ा पिन्तु पारना न उम हवा में ही परम शिया और सामा रिप नान भाई। शायर उमछयाम पारा पान पर उमन मान कुमायू के बेर पर या पानी के समीप पाया। चिरान की शक्ति उसम न यो अत हाथ-परा से पमिटती हुई वह पर पहुच गया। वदमी कगनी मुन रन पर मन दरवाज मे भाह को हटाया और अन्दर जाकर घाय सहकाम पर पड़ी हुई खून मे मनी पार को अलग क्यिा। Vडकी की दयनीय दशा का वणन परन का म साहस भी नहा कर सकता। यदि म माधुनिक यत्रा स मुमग्जित साकार होता ता भी समधन म उसको जानन बचा पाना। फिर मतो था एक माधारण मनप्य । ग्याई रूप में मरो जव में पारा सा पाटामियम पमॅगनट पड़ा हुमा था। मा परिस्थिति में लड़की के प्राण वचाना असम्भव था। वर कमरे में बहुत गर्मी व मारण पाव पर घुमय। गनीमन थी कि वह बचारी पवल अपचतनावस्था म पी। रवी का पिता मो माप ही धमरे में थागया था। केवल उम मतुष्ट करन क लिए मन एड़की के पावा को पन्छी तरह पानामियम पर्मेगनट मिश्रित जल से पा दिया। अपन पडाय पर सौरन के लिय यय विम्व हो चुका था। अत रात पाटन लियाई स्थान पानना था। पुछ दूर माने र किनारे एक वहत्वाय पीपल मा यक्ष था। इमपीपल र नाच पूजा नाति परनय लियब पवूनरा बना हुवा था। इस पबूतरे पर पर उतार कर मन सात में स्नान पिया और फिर भरा राइपल एपर पेठ म पोठ साप रात माग्न पो तयार हा गया। वस यह स्थान रात व्यतीत भरन , लिय अनपूर न था किंतु गौव , उस प पवारमय गम कमरे से पहा मविपया या भुट भिनभिना रहा था और पातना में पटरी पर स्त्री अपनी यन्तिम पहिया गिन रही थी यह म्यान हर प्रकार म महतर था। रान में गांव म बाती हुई काण अन्न समाराम हा गया कि पापर वालिया पप्पमा भन्न हा गया है। प्रातभाल म जब गाव ग गुजरा ता उमकी चन्तप्टि त्रियामायापारनहोरहा था। दनपनिया पपा गगवानी हरयामा मादयपर यह स्पष्ट हा गया थापि पटा पानी मामा पर मपनी पाठी पर ही निमर रहा करता पा। घायर परम्न पर मनप्यापागरमपानमामामदारनापाटा गमराना थी। प्राय नरगिया द्वारा भावान्न मनप्या मेंग बिरहा पाई घर माग चौगढ़ के शेर पाता है किंतु इस विशप नरभक्षिणी द्वारा आक्रमण हान पर अधिकार रोग क्वल धाय लहा हुए थ । ममापस्य अस्पसार ५० मीर दूर था। वादम ननीताल होटन पर मन सरकार से निवदन किया कि एस गांवा के मुखिया को जहा कि मा मखोरा का प्रकोप हो कीटाणुनाशक औषधिमा एव पट्टिया आदि भज दी जाय। दूसरी बार उघर लौटन पर मुझे जान पर हप हुआ कि मेरी यह प्राथना स्वीकार कर ली गई थी और इन मौषधियाग द्वारा कई लोगाने प्राण बच गय । दरवनिया में एक सप्ताह और रह पर मन शनिवार या ननीताल वापस लोटन पा निमय कर रिया। नरभक्षिणी से राय में मुश लगभग एरमास हा चुका था। निरन्तर सुले स्थाना में सोन से व खसरे के स्थानों में न जान हिनन मोर पलन सेम अपना अस्वस्थ सामनभव परन एगा था। मरी पह पोपणा सुनकर प्रामीणा को बड़ा दुख हया। मुझस उहोंन मनराप दिया मि म जान पा विचार स्थगित कर दू । भने उनका वचन दिया वि मजदी ही लौट भाऊगा। इनवार दिन गाव रा मुखिया बोला माहव जान में पह हमारे रिप पुछ शिकार मारत जाय । मन उसको प्रापना का सत्कार स्वीकार कर लिया और बाघ पट धार म भानी २७५ साल प पांच मारतूम एपर ५भा मिया महित जगर को घर पड़ा। गामन पहारी द्वार पर मन अपन पोम से पई चार पुराना परत हुए देगा था। मरे माय- ५ आनमिपा में स एष पापी एवा एव दुवागमता था। उसरा पहरा सत्यस म्प था। वह पहर पई यार भर यामे में मा पुगा था। म उगमा याता वा पर ध्यान से सुनता पारगार यह मन बानी पा मसार ग मुटभर यापहानी मुना पुरा पा पसा तर ति मुन उगरीबहानी पठाय हो गया और मनो में भी उस हरा गस्ना पा। उसोर में म उसको पानी निगाना है। यह परमार पूर परित हुई थी। परीवार पर उम घोरपरामार देपर ह न माहर? उमन उगा उगाहरा रहा। 'हाा य । पानिपूप से मार यह वामा पट्टान है। यग गर कार शर में गर म मा पर भारमण रिपा पा। मारियाणा कर शर सुमायू में मानमो दीवार की माति एवम सीधा पडा है। पहाडिया में अतिरिक्त इसपर कोई भी पर नहीं जमा मरता। उस दिन म और मेरा आट वर्षीय पुष इम ढाए पर घास पार रह थ। घास काट कर हम ऊपर मदान पर रखते जाते या चार दिनार पर बड होकर म पास का गटठर बना रहा था कि अकस्मात् यादमखोर मुझ पर फूट पड़ा। मरी दाहिनी घाख पे नोच या ठोड़ी व गदन पर उसन अपन पर्ने दात गा दिया। उसके बजन से और हमले की झपेट से म पीठ पर गिर पड़ा। पर मेरे ऊपर था गया था। उम मीन से मेरा मोना पिपरा हुमा था और मरी टागा बीच उसका पद था। गिरते समय मन मांश की एक पासा पका ली थी। स देख मेरे मस्तिष्क में एक विचार आपा। यदि म अपना टागा को समट कर पार ने मोन से मिल और उमे दाल द ता पदाचित् वधर भागन का अवसर मिल जाय। सर मेरे चहरे हड्डिया को चूर चूर क्रला जा रहा था। आहा यातना थी! गाहब म पिर भी पहोना। मारे गाँव का मयम सगड़ा युवक म ही या उमन मगव अपनी माम पेगिया को मुलान हा भाग महा। धीर धीर मन अपन पर मिनाह पर पर की छाती म गा रिय और वाय हाथ मा जार सगात हुए एव झटक में माघ मन पर अपनी टागा पर माधन हुए वा म उरा लिया। दूसर क्षण घार वार मनोच रदकता नजर आया। पदि पेड पी टहनी का म पग पर पप नहाना नाग्वय गिर जाना। भम 4 मारे मरा या मत्रमुग्ध मा पा ही रह गया था। मन उसकी पातो मे याना मा स्पेग और गांव पहुष गया। पर पहप का मन अपनी म्की पहा frमर मित्रा का दावा दा मरन में पहल म सग मिरना पाहता था। 'मरे मित्र मा पारपाई पर बर ५ मी र अम्मोर पे अपनाए ल जाना पाइने प रितु मन उरे मना कर लिया। पीडा भगाय पो भरा पल समाप पा और मरा प्रबर इन्टा पी दि मरी मृत्य सा प्राप में हा जहाँ मेग महमा पार जब रागान मा पानी पिणन का प्रयल रिया वह मरे ग पावा से बाहर निकणा

धौगढ़ के गर
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म पागा ग मारताहमा असन यना प्रमाणापा रहा था पारि म
पोड़ा स मम्म हर प्रसार अम्ही यो। पारे-यार म्यप ही भरे पाष भर
गय और म स्वम्यहो गया। माय जमा माप मरग रहा म समापन

५८ कुमायू के फर शर । अव मरा गरार भी दुवल हा गया है। रोग मुम घृणापूर्वक देपत ह। 'मेरी पत्रु वह नरभक्षिणी अमी जीवित ह। यह गरनी व रूप में कोई प्रतात्मा है और जब भा भा उम सन पी जात होती है वह घर का रूप धारण कराया भरता ह । गा का कहना ह कि बाप माधु ह । जापनिया आपको रक्षा परती ह वे प्रतात्मा में वह अन्यथा माप तीन दिन रात जगल में अकेले रह पर से लोट आय' उमन म्पुरकाय गरीर का दर पर मालूम हाता था कि वह अपन समय में सचमच ही प्य यहा परिष्ट पुरुप रहा होगा अन्यथा माधारण मनप्य की शक्ति नहवि यह शरमा टागा पर रप कर उछार । यही विरक्षण मनप्य इम ममय हमारा पथ प्रगार बना हुया आग आग पल रहा था। उमर प य पर एक मुनर मी पुहाडी थी। टढ-मट रास्ता से ए जात हुए उमन हम नाथ पाटा में पहुंचा दिया। मपौर मी पार पर हम कुछ एम म्यमा पार आ पहप जिनका आमदार र भय म उनाड घाड पिया गया था। इस बार हमें यही पडी चढाई पटना पड़ा। मरे मायी में अब भी तावत की पमी न था। म वाच-बीच में ठहर कर आसपाम गुटर दश्य वा सराहता जा रहा था अयथा उमरे माप-गाथ पल्ना कठिन हो जाता। पहा प गर म निफर पर हम पाम गार पर पहुंच गय। इमो मार एक पत्थर की विशाल चट्टान थी। एगभग १ पीट सा यह उपरो पला गई या। इमा पट्टान र ऊपर पाडी मी हरियागे या जिग पर परत हए धुरा रा म मान पोम ग देख चुका था। हम बाग कुछ ही दूर गय हाग वि नीष पारा म एप पर निर पर ऊपर मा चान एगा। मरा गाय गान हा दर हा गया और मामता हुआ आंगा रा आसर हा गया। पट्टान का तकनी म गाया मा एप मरा घर यदूर की मायाज स पॉप पर चहाा ऊपर दोरा। एयर का चट्टान पर परड़ एव पार प यतिरिक्त अय राई मा जानवर “म प्रार दोन वा माहम नही पर सपना। पर कार का बढ़ना हो जा रगपा। यन्दूर का मामा मा १० चौगढ़ और साच पर रख कर म उमद रकन की प्रतीक्षा करन एगा। अन्त में ऊपर एष चट्टान पर खड़ा होकर वह हमें ताक्न -गा। मरी गाली गन पर वह पर- महाया सभा और फिर धीरे-धारे चढन एगा। दूसरी गोली से वह गिर पडा और लदरता हुया कहा जा गिरा जहा म वह पसा या। स्तुक्ता-रक्ता अन्त में वह हममे १५ गज नीच एक पगडा पर रख गया। इस बार जो घटना घटित हुई वह मरे लव भिसारी जीवन की एक यन्तिीय घटना थी। इससे पूर्व मेवर एक अवसर पर मन एमा दृश्य देखा था किंतु उम ममय रुटरा एक वाघ था। पुरड लुढवता हुआ आर जम ही रका वम ही पास के नाल में बड़ा-मा रीछ (Himalayan bear) निकल पर सीधा पुर के पास आ गया। फिर वह वहा पर वठ गया और पुरडया गार म उठा पर धन एगा। उसी समय मन गाली पगदी। या ता मुझस वन्दूर चरान में कुछ जली हा गई या मन अधिर दवा पर निशाना साधा क्यापि मीन म बजाय गाला भार देपेट में जाएगी। इग आपस्मिर ययापात को रोठ न पुरड की ही करतून समक्ष र उम जार म उछाल पर दूर पंप लिया और गर्राता हुआ नीच वा भागा। जिम ममय वह गज नीष स भागता जा रहा था मन अपना अन्तिम पारलूम उम पर दाग दिया। गारी पिछल पह म माम में जा घमी। मन थामिया पापुरह उठान भज लिया और म्वय रकम र चिन्ह देपन पर लिया। यून स माराम हा गया कि राछ का पार परारा गो है किंतु फिर भी पागे राफर एवर उमरा गाजना उचित न पा। प्राय एम थामरा पर भार पा मुगावरा पाना या परिन हाता।। मापारणतया भी रोछ म्वभाव का समपानर हाना है। मीमा पो म बढ़त दूर था। अत यहा म कारतूग मगवान का गमय न पा। यि यह निश्चय हुआ रि पप्पर और मुगा म माल पा ममाप्य पर पिया जाय। पण पापा ऊना था और उग पर माडिया शिपम्प मन थी। जार पर पतरन गहमागमाम बन मरता पा और न मय था किहमारा टागे माबाई नामग्य गतर में रहगा। आग-आग मन पग्ना गुरु रिया और - कुमायू के फर पर पोछ पीछ दमनध्य एका घरह को अपनी पीठ पर लाद हुए चले आ रहे। रक्त की धार नीच नारे की ओर चली गई थी। पहा से हमारी टारी दो भागा में विभाजित हो गई। म और मरा कुल्हाड़ीवारा साथी नारे के बरीन परीव पर रहे य और गप आदमिया को कुछ दूर पर परन का आदा दे दिया था। हमस पचास गत नीच नाले में कुछ छोट वामा का एक पुज या । जब इस झुरमुट में पत्थर मा गया तो भालू गुस्स में पाखता आ बाहर निकल आया। दूमरे ही क्षण हमारी टोली ग पुरती में पहार पर जा घढ। मन इस ढग मी ममरत का सम्यास नहीं था। जव मन पीछ मह पर गदा भार नौच रो वापस भाग रहा था। मन आवाज गा पर अपन सामिया मे पन रीछ का पीछा परम पिय पहा । हम राग वाच-बीच में उमपर पपराकी चौगार परत जा रहे थ जिनका उत्तर रीछ गुर्राकर देता जा रहा था। अन्स में एक माह पर भालअदृश्य हा गया। अब फिर आग रक्त की धार या अनमरण परना उचित न था पयापि हम रग पथरीले प्रोग में आ गय थ। पिमा भी पट्टान म पोछ भालू छिपा रह सकता था। कुछ गुप्ताफर दाना पार मे हम Pण भाग वढ़। म ऊचा घट्टान पर जा पहा बीर भुवा नोच माया ना भाल पाहुया पाया। भने ग १५ गर या द्वारा उठा दिया और निगाना स्पर उम रोए पर गिरा लिया। परपर गेछ को नार र पुछ आग गिरा और उगी ममय यह उठ र पर गिया। फिर यसमा पहाडबी बगर में गिाई पड़ा। पिरम उगवा पील गरगर्मी ग पुरा गया। यहा मगन गा "आ था अन हम भी लोहत हुए उगवा पीछा करने रहे। एगभग एप मौर दौरन पर मग पुट मोडीनमा गना में जा पाप। यरमान र पानीम इन गता में नालिया-गोवन मा एमोहोकनारी मराठन जावर भरणला। मित्र घर में मरम्पद भरनवाग पवा र एमा पाटा पा धिमा पाम पुम्हारी पी। मन मवगम्मति मे जन्ना वाम रिप उमी गोपना गया। विना मिली मिर और मादपानी म यह रोष्ठ के पाग चौगढ़ के शर ६१ पहुंच गया और एक बार हवा म अपन घमवील कुल्हाड का घुमा कर उसन फल उल्ट भाग स रीछ के माथ पर एष भरपूर हाथ जमा दिया। अपन परियम का परिणाम उल्टा देखकर वह स्तम्भित रह गया। कुल्हाडी का सिरा राछ का बोपदी पर से एसा उछग जसे माना वह रवर दर पर मारा गया हा। राछ गम्स स चीखकर पिछ? पांवा पर वहा हा गया किंतु भाग्यवा उमन हमला नहीं दिया। रोछ कुछ दूर घर पर फिर एक नारी म छिप गया। अब मरी बारी थी। परन्तु एक घोट खा एन पर रीछ सतर हो गया था और मुझ पाम फटक्न मा न दता या। यही पठिनाई से म पसर काटकर उमरे समीप पहुंच गया। मुस बचपन से ही बनता जाकर एक लकडहारा वनन पी आराक्षा थी। इमारिय मुझ कुल्हार से चाट परन का यन्छा अभ्यास या। म रियामलाई की मोष को कुल्हार ये पर म एक बार में धार पर दा कर सकता था। मुन पुगडय स्वामी की भाति कु हाट म पिमल्पर पत्थरा पर सराव हान का भय न था। जस हो म रीछ के ममीप पहचा मन कुल्हाद पा समूचा फल उसकी सापटी में घसा दिया। रोठ की मार पहारिया र लिय एक बहुमूल्य वस्तु है। जव मन कुल्हाड १ माकि म कहा कि यह पुरड म माम पदा हिम्मा र साथ ही माप रीछ नी गारा भी एमवताह तो उसके गव की मीमा न रही। अन्य लोग उस ईया भरी दष्टि में दख रह ५। अब घटनास्थल पर गांव के और भी कई मनुष्य मा गय ५। घुरता , मागमा वग्वारा हा रहा था और भारपा गार निवाण जा रही थी। म गांव यापम पण यापा । म नि भर रा पकाएमा पा। पर उग रात नरभक्षिणा उपर मा निगमती तो मममुगी मुा या ऊपता हुआ पाती। गरम मनिया आया था या वरी गगय था। ईम्पाना पर विसर पाया पाना पली पा। जय मन याना विचार गांववाल्या यताया उडान राप दा नि मा हान हात हा नाना पाहि । म गम्न म पर पा मिरता था और फिर गाय नीन गनावाग पाना जामाता या गनाराम में मननातार मजा गानापा।

कुमायू के फरार यात्रा की तयारी परन र लिय मन अपन आदमिया से रात ही में बह दिया था। उहे सामान वाधन के लिय पोछ छोड़कर म दिन निकएन से मुछ पूष ही दयनियापारा में विदा घर घर पगा। जिस पगडी स म इस समय जा रहा था वह उसम भिन्न यो जिमम हम लोग दयनिया बाय प। इम पगाडी से गांववार पहार को सलहटी बाजारो में मोरा एन जाया करते थे। यह पगडठी वाश और चौ" में जगा म से होकर गई थी। गम मप्ताह मे परना की कोई सूचना नहीं मिली थी। इसी से म और भी मन हागया था। अन्त में एक पर वाद म वन में से निकर पर पहाड पी चाटी जा पहुंचा। पहाड़ का यह खला हुआ भाग एगभग १० गज रम्बा एव ५० गज चौगया। इसका मापार कुछ-कुछ नागपानी सा था और इसने बीच में वध हुए पानी का एक पावर था। मामर इत्यादि बरा पामर स पानी पिया बरते य और किनारे पर सारा वरत थ । सावन लिय म पासर - ममीप धग आया। जलासय में विनार गोरी मिट्टी पर शरनी न सात अपित य। जिधर स म आया था उसी मार सरनी मी आई ।। मेरे पहुधन म घर मदाचित मामन ६ घन जगए में चला गई यो। मन एर मुअवसर मा पिया था क्यापि यदि जरा सावधानी म म आग देगता पमा घरा हाता ता पर मन हो उम या हाता। फिर भा म नप में पा स्यापि पारनी पवाय ही मुम ऐप चुकी थी अपया वर पोपर से हवा कर भागती मगे। वह यह भी देख पड़ी थी कि म अरेण पा। काचिन वह यह अनमान एमाती हागी पिउगी की भांति म भी पायर में पानी पीन जाऊँगा। अव य ही यह आऊ से मुल देमनी जा रहा हागी। अब तक मरी मा विलुर म्यामाविर पी और यदि म उस पिधारा नि पामा कि उसकी उपम्पिनि पा मग पान नहा । सो गभवन वह मुभ दूगरा अगर ती। अत मुक्त हा मन पई यार मागा और पानी का हाथ महिलाया। गाय ही माय बड़ी मनाता में म टाप , नोच म घर-उघर दयता जा रहा था। दगा या पुछ गूगी वडिया चीनना हा म धौर-यारे पट्टान 4 नौष आगया। यग मने पुछ आग उगला और महान स पार मार गिगरर पान रगा। गिगरेट प ममाण हान सर भाग धौगढ़ गर भी या चुकी थी। फ्रिम अपन वाय हाथ पर सर रख कर हट गया। गइफर मन जमीन पर रस दो किंतु उगी घोड पर तयार था। मरे ऊपर की चट्टान काफी ऊची यो और उम पर किमी मा जानवर का मडा होना असम्भव था। मुझ पचर मामन की ओर से मतक रहन की यावश्यक्ता पी। सामन नी झाही भी लगभग २० गज दूर या त म भरी मामि मुरक्षित था। यद्यपि अभा सा मन गरनी की आहट नहा पाई थी और न उसे देवा हो या परन्तु मुन दढ विश्वाम था कि वह मा देख मरे टाप व पिनारे म मगे आप ढकी हुई थी रिन्तु म नीच से भग भाति दप मषता था। जहा तक मरी दृष्टि पहुच मरती थी मन जगल 4 सप्पे- पण या भरी भाति देख डा। चाय निस्पन्न थी और पेड न पत्त सक स्थिर थ। म अपन आमिया या आग दे आया था कि व दमट्ट हारर गात हए मुझस मिर। अभी तब वे पहुच न प और पम म मम हत घट तक आन की माता भी न था। इम वीच मभवत गरनी मुझ पर मारमण नग्न या मानो नान के लिय आह ग बाहर निकल आय । कुछ अवमरा पर समय पी गति वही मन रहती है। सभी एक-एक पल एष एव पप ममान प्रमीत होता ह और कुछ अवमरा पर पता भा नहा परता मि समय पर पट गया। मरा वाया हाप जिम पर म मर ग्वय हुआ था परी दर म मुम्न हा गया था किन्तु फिर भी नीच घाटो समाती हुई मेरे मा मिया रगान पी आयाज मुझम दम मुनाई पडी। बावा तर हाती गई मोर मी गमय मुप्त य एष मा पर निवाई पड। मभवन इमी माड़ पर पारनी न मा पानी पोपरगोन गमय दम रिया पा। यह दूमरी अमफरता पो और इम पारा अतिम अवगर। पर पुछार मरे या मी मुम्ना रिय तब हम हमान न हारवगर मी बार पर रिय। मगरता २० मार एया था। एगभग १०० गत्र पर मान में मर धान पर हम सागा गास्ना एक पन जगर में महातामा पग गया पार पो म मन मान मानमिया आग पर पिया और पीटर म्वय पानगा। मा भाविनमार पर एन पर हमें मार में गहना र मनुप्प गि यिा। दभानी भमा को परा गा पाIrमार जाना पुमायू रे क्रूर गर और उममें घास और माडियो का घना जगल उग आया था। नरभक्षिणी भरनी + उत्पाना मा अभी अन्न नहीं हुआ था और वह अव भो स्वच्छन्तापूषन जगा में विचरण कर रहा थी। इमलिय इम झाडी में जाना उचित म था। दाहिनी ओर एक हा भरा ढार या किन्तु विल्कुम खली जगह होने के कारण उधर में छिप पर ा क ममीप पहुचना कठिन था। पहाडी चोटो मे एकर नीष नपौर नदी तक एफ नारा चला गया था। इस नार म घना जगल था और यह नारा पाम से ही निकला था। जिम वक्ष पर गिर पठ हुए थ वह इमी नाले की कगार पर था। इसा नाल में होकर आग बढन का मन निश्चय दिया। जब म म ग्रामिणा की महायता म दूवन को याजना बना रहा था तब तक मेरे भामिया न मेरे लिय चाय तयार पर दो। दिन दूवन को था पिन्तु इसना ममय था दि मला को देख कर अपन पठाव पर पापिम गेट धोका जान म प म अपन मनध्या का आदेश दे गया कि यधेि बन्दूक का आवाज मुनें और मुश ला पाम की मुली जग में यहा दाव ता २~८ मामी खुले मदान महान ए मर पाम भज दिए जाय। परि इसक विपगत घ यन्दूष की आवाज न मुनें और म मुबह क न लगेर ता मुझ पोजन का वायाजन पिया जाये। श्म नाल में यडी-वडी पट्टानें थी और वह रममरी (Raspberry) की साडिया म भराया था। इमपि मृक्ष धीरे-धारे आग पाना पा रहा था। यन्न में ही पढाई पर धुवन पर म उम वृक्ष के पास पहप गया जिस पर गिद यट हुए थ। परन्तु इम म्यान मसा नहीं लियाई पर रही थी। जिम उजाह गत मा म दूरवीन म माधा दम घुमाया पाम थान पर शात इमा कि वह अयचमा हआर पना जगर था और दूगरी ओर पहाड। Tा का दमन + लिया या ना वृक्ष पर पाना पाना या एम्या पपकर एगाना पाता। मन पण को शरण एना उचित मममा। गाप की PTT Ts म गमग २० गज दूर परो हुई पा और बाचित् तदया इमम भा गमाप या पतएव दिरा संतरे को घर परा दक्ष पर पाना थमम्भव था । ६ स पर पिट न हान मा म पेड़ पर पहन का प्रपन्न भी न पाता। वृक्ष पर एगभग २ गिद घौगढ़ के शेर ६७ बाहुए थ। दो ओर गिसों आ जान पर वृष में कररव मा मच गया। यह श पहाड की कगार पर झुषा हुमा या और ार की ओर इसमें से एक मोटी गावा निरला हुई थी। बन्दूक यि हुए इस शाखा तक पहुचन में मुझ कठिनाई हुई। इस बार जव गिदा में फिर से झगडा गुरू हुआ तो म आग वढ भर एक टहनी पर जा बठा। यदि जरा भी पाय घर से उधर हो जाना तो नीच गिरन सहही पसरी घूर-चूर हो जाती। इम स्थान ससाफ दिखाई पड रही थी। एमा याडा-सा भाग खाया गया था। मुन्न टहनी पर वठ काई १० ही मिनट हुए हाग दि दोनों नवागतुर गिट पर मे उहवर जमीन पर भागय । वक्ष पर थय गिढा न उनका विप 'भार सलार नहीं किया था। य गिद्ध भूमि पर वठे ही य कि पुन उड गय । चमी क्षण मरी आर नी माडिया में म एक मुनर सॅवा बाहर निकर आया। जिन Pागा न सॅटव का अपन प्रारतिर पर जगल में नहीं देखा ह व उममी पपरता और गुन्न रगान मार की पल्पना भी नरी पर सकत । हमार भारतीय जगला का यह सव म मुनर और गानदार जानवर है। उसका मौनय पर याहगे ही नही ह क्योंकि उमय परीर को प्रयन मामपेशा में बल भरा हमा है। माहम एप पर में उमकी तुलना फिमी भय पशुम नहा की जा मरता। भारत में कई जगह सदुवे गा परिभाषा मा जाता ह -- गल्ल मानि या नवमान पहपान बाग एर पकाम जानवर' (Vermin) वितु इम मुन्र पामा य' नाम दना अपाय ह । तेंदुवा धकाम निकर जानवर पयल वे हीबह सपने है जिहान निरियामानां में यन बमजार, रागा और भूम म दाणवाय तवा पादपाहा पर दम ममम मरे मामन या दुपा मुन्दर सा या मितु दण्डनीय या बयारि उमन गांव मनियावामाग्ना सरशिपापा। म गांववागा वचन ८ पुरा पानि उनर इम घर पराम बरमर मिरन पर अवय मारगा। पर अगर भव मागया था मोर मरा ममा में संभव न बन्दूरा आयात मी म मुनीगो नि कर पट गया। मनप्य सामान जायन में मानाय परिम्पिनियांधा मामना परना परना नमें मरम विनिा ह-नियो मनुष्य वि या परिवार पर दुर्भाग्य व कुमामू के कर शर पर आना । उदाहरणाय इसा मृत गाय ६ म्वामा काजिस । उसकी आम आठ वप का थी। दो बप पूर्व पास काटते समय उसकी माता का आगम सार न मार द्वारा पा इम पटना पटाफ एम यप पचात उस पितापी भी यहा गति। पिता छार म ऋण वा चपाने में घर की होडी तक मिक गई और इस सहप न भवर एक गाय एकर आना जाविमा बारम कर दी। गांव।२० - मनियमसनदुये न या पदर मी गाय का चना। (एडवे रस को दर पग्न लिय मन उस एक नई पगडी गायल दी। किन्तु इसरा उस दिएप सारवना न मिला-वह मृत सफर गाय उसकी चिरमगिना था।) दरनिया पढपते हा मन अपन कटरा का वाधना आरम पर दिया यपि मुम शग्नी द्वारा इन स्टराव मार जान का मायापम मा । नघोर पार्टी क पाच माल नीच एक घडी मो चट्टान की तलहटी पर एक घाटा-मा गांव बसा हुवा ह। यह पट्टान गभग हजार फार ऊचार । गत महीना में घामसार मी गाय की मीमा पर पार मनप्या पा मार चुगा पा : सेंदुव का मारनप या ही मर पाम गौश्वाला र कुछ प्रनिनिधि यह अनरोप पर पहम नि म अपन वतमान पडाव मा उठा 47 गाव न ममाप एपल गरनी को कई बार गांव के ऊपर का पट्टान पर प्रामाणों न दम लिया पा और एमा प्रतीत हाता या नि पट्टान में आरपी मिमी गफा में ही उसकी मार भी। भुस मनाया गया नि यात्र ही मुषह पाग काटनी कुछ स्त्रिया न पारनी का दस रिया था। मी पारण ममम्न ग्राम में आता था मौर लोगा। घरा मे याहर निकन ताना माहग महातापा। मन गांववापरा मजा ग प्रतिनिधि माला वपन दिया जिम मरमन उनसी महायता यमगा। म दूसरे दिन नार रवाना हो गया। गौय म मामनयार पा पर घर पर मादर तर अपना दाबान ग पट्टान दमना रहा। इमर मा पासा पार कर म गौर ऊपर महान पर पहम गया। या पान में मनायो भनिना हुई क्यारि पार पिमल्न म नाय गिर पान का भय था। यति पहा सरनो इम जगह पानमण र देना ता अपना रक्षा करना भी अगम्भव था। बाबजन मन पट्टान का भी प्रकार दस पिया मोर भाजन करन के घोगढ़ के शेर निय अरन बीमार हो रहा था रिपीछ की ओर से दा आत्मो मरी आर दौल हुए रिमाई पर। मर पाम पहुचन की उहान मझ घताया कि एक गहरे नार में (जग म नि में जा चदा पा) नो न एर बर का अभी अभी मार हागथा) यह नागदा मो गज गहरा और मो गज चौटा था। Pा पर पहचन में मारम हआ कि गिदों न कुछ हड्डिया और सा' यतिरिक्त पुछ मी गप नहीं शास। यह म्याा गांव मे पवर एक मो गज फामर पर था किन्तु ऊपर जान परिय बाई मीधा राम्नान था। मन भरा पथ प्रगार मुहदा पग घाटी मनीय समाया। इमो म्यान म मशिया में चलना एक माग भी गुरू या था। यह माग धन जगल में महाता हुआ धूम वा गांव का जाता था। इसी माग म म गांव पदच । गौर पापन पर मन मुमिया का बताया कि गिदा न Pा ममान र पिया है। मन उगम एक कटरा और कुछ मजबूत म्मिया का प्रबंधन का भा पर दिया। जव मा य प्रव पारि रह च मरा भाजन दरवनिया म बागया। मूर्यान में रा न पा जव म पुट मानमिया का लगर नाल वापर गया गय में पर नगहा कटरा भी र लिया था। म ५ गजदूर यरमातो पानी नाग वहा हमा एम पोडवा व पडा था। मवाना मिरा नारद में गूब गहरा धुगा हया या। इमा वम या निक हुए मिर म मटर का मजबूती म वाघ पर गांववाल गौद मो यापिग पर गय । आमराम में पणा न प इमलिय मा नारी पगार पर ही चरना पड़ा। यह पगार नाट २० पौर ऊनी पी। कगार युध नोने चट्टान पता की ओर मुर गपी और यह मामा भाग र मन गिा पहना था। बग्न न मिय या. या गरार जगह पा। मर जिपर म पनीर वान री मम्मारना यो उमी आर पार कर मर गया। माम गनर मामन पाग धाआ पा। गूम दूर पुरा पा र पग पर नार र यो आरन सा। दूसरी साकार गर परपर मरता या नीम मा गिग। चिएर म बाधार माई पो उम पार पदा पगना रूप मा गरिय म पापार अंगा। कुछ देवापामरा मार मा गरा। पर पारिवह ३ ७० कुमामू के फर शर जानवर या देख कर भयभीत हा गया था और वह जानवर चट्टान के नीच की गुफा में था। पानी ही देर म अपन नीच मन शर के मर का निक्ल्स हुए देखा। पर मिर पर गाली वर विप अवसरा पर ही चलाई आती ह और तनिक भी हिलन हुरन स र मन देख रता। दो या तीन मिनट तक घर का सिर स्थिर रहा और फिर एक छाग में वह कटरे पर टूट पड़ा। जसा मि म ऊपर बता चुका क्टरे का मह घर की ओर था। मामन स आत्रमण करन म मटर कमीगा से शर का घाट आन की सम्भावना था। अत भर न कटरे पर पाव स आक्रमण किया। न तो शर को इधर-उधर दात ही मारन पर और न कोई यद ही हआ। दो सरीरा व परम्पर टकरान के गर के बनिरिवन काई बावाज त न हुई। दूसरे ही क्षण शर क्टर के ऊपर था। कटरा स्थिर पड़ा आ था और भार उरी गरे से दवाच हुए था। प्राय लोगा का एमा विश्वास ह कि भर अपन शिकार की गदन पर थप्पा मार कर मारता है। यह असरय ह । दार अपन निवार का दाता में मारताह । पर भी दाहिनी कास मरा ओर पी। मावधानी में निशाना लेयर मन अपनी २७५ उस पर घरा दी। पदर मा छोड पर विना वार पर मुहा भोर पर कर घाटी में अदृश्य हो गया। अव य ही भरा निगाना धूप गया -पारण मुन्न स्वय मालूम न था। यति गर न मुन्न या राइफल की चमक का नहीं देखा ता उसब लोटन की मम्भावना पी। इसरिय म राइफल फिर से भर पर यठा रहा। पर चल जान पर भी पटरा उमा भाति स्थिर पहा रक्ष। अब मुझ भय होन रुगा कि वहा भूर से मन पार स्थान पर पटर पर गोली न पा दी हो। दम या पद्रह मिनट मीत चुहाग जव गर दुमरी यार फिर मरे नीच भी गुफा से बाहर निकला। इस बार भी यह योर सन माग रहा फिर धीरे धीरे घण और कटरे पास आगर उम देखन एगा। इस अवसर पर निशाना चूरन की सम्भावना न पी गयाकि र भी पूरा पीट मेरी ओर था। सावधाना स निगाना पर मन घाडा त्या लिया। मरन की अपेगा जमी मि मल आग पो गर या ार उघर पर वगन छट स नार में पम गया। नीम उनरन में पपर पदसाता गया।

चौगढ़ के पार पवर ३० गज के फासले पर काफी बन्छी रानी में मन दोना गोरिया गई पा और चारा आर भोला तक उनकी आवाज़ गांववार मुन चुर थ। भनि मुझस आफर इन गालिया के विषय में पूछत तो पटरे पर लगी हुई गालिया पदाछि अतिरिक्त म उहें पता ही क्या मकना था? यह स्पष्ट या कि मरी दृष्टि क्षीण हो गई थी या चट्टान पर घडत ममय टक्कर एगन म बन्दूर की भस्मी अपनी सीयस बिमक गई थी। यासपाम को छाता छाटा वस्तुआ पर दष्टि डालन से पता चला कि मरी बीमा में पाई भा दाप न मा और हार म देखा ता मक्खी को भी मही म्यान पर पाया। दानों वार निशाना चूदने का कवर एक ही कारण हा मरना था-मन निगाना हा महा नहा माया। र तीमर चार सौटन को बाई मम्भावना न थी और. यदि वह सीरता भी ना पुपल प्रा में उम पर वार पर म उम घायर करना उचित नहीं था। इर्मा य पट्टान पर बट रहना व्यय मा। मरेपनि भर परियम के पचात पमीन म सयपप हा गय पाठरा पाम पर रही थी और प्रतिक्षण उममें ठह वदती ही जा रही यो पट्टान भी गन और टडी या। इन पर भार वरा हाल हुआ जा रहा पा। उपर म गोप में गयार गम पाय मा म्वप्न दस रहा था। दिनु इन सब बातों म पित नरनार या आगममोर मा मय। अधार हा पला था। गांव पहपन पिगपोगा दुगम पप धन अगला में हार गया था। गांववाला पाग पा जिउन पर कादया था। इमर भतिरिक्त मरे पाम अय पाई मरून न पाकिभरना महार या फिर जिम दर पर मन अभा गाला भाग पी यामगार पाचरनी म ममप ५. मार दूर भा हा मवनी यो भोर विगु गमोप भी। इन गव माना पा माववर उम म्यान में रहना पायरन पर मा मन उगा पट्टान पर गधि व्यतीन परनानि च पर रिया। गत म आमगारपणे पिमान माया मनाधिना' मा या मण ज्या ग्या मनाम विषय में माना ग्या पाम धारणामा पाया। जब या गरनी निलम नही मारी गागा ना फिर उग अपना आय पूरा परामरन रेगिय पारदना उमिन पा।

७२ कुमायू के क्रूर र जव प्रातभार या घुघरा प्रयास इधर-उधर फ्रन रूगा ता म चट्टान पर में उतर पहा । उतरन म मरा पाव पर गया किन्तु भाग्यवण म रेत में गिरा। म जव गांव पहुचा ता लाग जाग घर थ। एक छोटी मोटा मोड न मन घर पिया और मुझ पर प्रना का बौछार मो शुरू हो गई। उत्तर में म केवल यही वह सपा म ता मनगढत सारा पर खाली वारलूम चलाता रहा। मभपती हुई बाग रे समाप बठपर गम माय पीन स पर मुग्न सरार में गर्मी लौट आई। फिर पुछ मनुष्या का लकर म रात्रि घटनास्थल पर पहुंचा। मन अपन माथिया या बताया कि मि माति गुफा से पर बाहर निकला था ओर विम तरह मन उस पर गाली गई थी। जम ही मन नामे पी उस ओर. गरा दिया जिधर र भागा या पिवई चिल्ला उठा य दमय मात्र र मराजा पड़ा है। गनिजागरण म मरी बस पकी हुई पी। परतु मामन गिरे हुए घर या पहषानन में मुसकाई न हुआ। जब गांववाला न मुझस माघा मा मवार दिया कि दुवारा मन नर पर गाली मयों पाई पन उन्हें बताया कि दूसरा वार पिर पर निपग था और गारी समान पर नार व उम और घग गया था। इनन में हा लाग फिर चीप उर गाव या पडा हमरापर। दाना पगना थाना एक मा था और जहा से मन गारी गई थी यहा ग६० गारपागर पर पर हुए । जय मन गांववारा ग मरे गर म विषय में पूछा उन्हान बनाया कि आज तर पर कारवाया गया था। यय पापा अपक्षा गराना गावाम र मुष्ठ अधिन म्या हाता-मववर ग अप्रम का परि न मा हा रा में ग व भा नागिणी नग्नी थी मा पह स्पष्ट था कि उम जारामिए गया था। नार में पापन यि य पगाल का गई और मय गौरवागन माप म नाच जा पहचा। परनी व गमा आन पर मरा था यान एगी पापि बाप यदा परनी थी। उमरे पजागा निरोगण परन गिय म उसप पाग पर गया।

७३ धौगढ़ क शर गहू को पम- काटना हुई स्त्री पर जब शरनोन आक्रमण परन का प्रयत्न क्यिा था तब वह सत र पिनारे अपन साप खा छाहती गई थी। नरभक्षिणोरे वार सब मन प्रथम बार दख प और खूब सावधाना स उनका निरीक्षण कर लिया पा। सादा से मुन्न मारम हा गया था कि रनी अत्पन्न बसा थी और बड़ी यामान पारण उसने पाय माहर की आर मुर हुए प। गल पनों को गद्दिया में गहरा स्कोर पड़ा हुई थी और दाहिन पज की गद्दी में एक गहरी एकीर, बागे पड़ा हुई था। अगूठ अत्यन लव थ (किमा भी अन्य पर न इसन रूम अगूठ मन नही दम)। एस विप परावाली बादमवार परनी पा १०० रा रे सुर म भी आसाना मे पहिचाना जा सकता - था। दुर्भाग्य स मामन परी हुई मन परना चौगर का नरभक्षिणा न था। जब मन एकत्रिम गांववाल का यह बात बताई ना उनमें अविवाम मी एरर-यो दोर गई। म ही स्वय पहल अवसर पर उह बना चुका था पिपरनी पूना है और इमो स्थान पर धार मनष्य मार डा' गम प~मम अधिर या प्रमाण है। माना था' पर ना सभा पराकममान एगा अबम्पा में दूमरा र आय ही नर पा। मगवान पर दसाना उम एक मुलगा पर पाया। गरारा मोहापायाप और धूप नन पर। एमी अवम्पा में मुस पार उनान में याग्निा हुई। तर यराम ममाप्त हो गया। आमिया पर मार रम गाव मोपगिया। प्रातमा आमनागवार और उना ममिया मर पाम याय। जानम नाम पतावनाला गया कि पोगरा याममारारना अमा मरी न पा और ममता में परिजरा भा अमावगनाई नापन अधमरा मता नहीं। शिग मग सायना का अदनान परत ता बामगार गानो मोर हार नरपानो (जमा र उमन या महाना में पिया)। frरसगर नाकामहा पिरो र मनाहरनिया में और गरम नगर्दा यिामुम मुघरियाणा म मिना पा। - कुमायू माच १९२ म हमार जिला कमिन्नर श्री विवियन यात्मवार के राय में दौरा कर रह थ। माच २२ का मझ उनका पन मिला जिसम उन्हान मुझस सत्कार माराआगर आन का अनरोप दिया था। वहा वह मरी प्रतीक्षा कर रह थ। ननीनार मे काराआगर लगभग ५ माल है। मदो दिन वा काराआगर शकबगार पर जा पहुंचा। यहाँ विवियन परिवार टिका हुया था। भोजन करत समय मुम उन गोगा न बनाया कि वे अफगठे म २१ तारीस का पररे और जब वे घरामने म चाय पी रह थे सव बगरे यहात में घाम काटनी हुई छ स्त्रिया में म एक का भागमसार भरना मारकर उठा ले गयी पुरती ग राइफल त मुख मा विवियन न पर या अनुमरग किया। घमी टन रे चिन्हा कापीछा करत ह व एम एस म्यान पहच जहा भरना न मृत यवती का एक वामन पक्ष नीच का पानी में ठूस रखा था। भा' में जब मन घटनाम्य का निरीक्षण किया ता माल हुआ मि विवियन पहुचते ही ग्ली पहाड से नीच की आर चणे गई थी और एक रममरी की माडा में छिप पर मब मुष्ट रखती रहा। यह भाडा मासदेवर ५ गज पी तत्वारामधान बनाकर मछ लोगा म माथ विवियन लाग पर बठ गय परन्तु गत भर मठ रहन पर भा शग्नी नहीं लौटी। दूमरे नि पान कार दाहएम रिय स्त्री पी लाल का उटया रिया गया और बगर मे कुछ दर पर एक कटरा बाघ दिया गया। उमा रात परनानगर मा मार गया और दूमरी रात विवियन सम्पति मचान पर वर गय । एछ देर बाट मघ्या रे मुरपुर में हॉन रूपा ममाप रिमा पा वा आते हए दगा। इस पशु का उहान भार ममता । दुभाग्य म यति यह भूत महाती तो अपन गारमण परियम का पर अवय पिस्ता और प नरभगिणी पा मार एल क्यापि विवियन दाति या राइपल का निशाना अण्टा था। २५ तारोप या श्री मया श्रीमता विवियन वागागर में कर दिय। पर मन दयनिया स अपन चार बटर भी मगवा ग्यि । घूपि अय पारनी इम पारे पर स्पपन रूगी पो मन मन जगली सर पर - भौगर शेरे प्रमिनिन अपन पररा का मुछ दूरी पर बाधना प्रारम्भ कर दिया। निरन्तर सीन रात परनी पटरा के समीप म उह विना मारे निकल गई परन्तु चौथी रात्रिका बगल समीपवाला कटरा मार डाला गया। मबरे गा देखन पर वहा निराशा हुई श्याकि कटरे को एक तवा भी जाडी न मारा था। इन तेवा का मन रात में वगल के उपर की ओर गुगी सुना था। यद्यपि मत इन तेंदुवा का मारन का इच्छा न यो क्यापि इम प्रदा में बन्दून की आवाज मुनदर गरनी सतक हावर भाग मक्ती थी परन्तु यह भी स्पष्ट था कि यरि म तदुवामान मारता ताधे मरेप स्टरा का घट कर जात। इमरिय मन टूम पर इन तेंदुवा या मार डाला। कारावागर हारगले से जगली मडन पश्चिम की ओर मीला तक चाड वान और धन र मुटर पन में हार गई है। शिकार की दृष्टि म पुमायूँ में इसमें मुनर अन्य वन काई नहा ह । साभर पावर और मूयरा ने अति रिक्त पहा माना प्रकार की चिनिया भी पाई जाती है। दा अवमरा पर मुन्न गह या पि सरनी न म जगल म माभर मारा है पिन्तु वहत खानन पर भी गणन मिल पाई। इमा पचात दा ममाह तर म नि भर जगह में और सपा पर पमता गा। इस मोष दाभवमरा पर म सरनो ममीप पहचा। र पार मालायागर पश्चिम में स्थित एप उजद हुए गाय म गेट रहा था। पगडी पा पर पलन जव म पट्टाना ममाप पहुधा ता मन एमा प्रतीत हुआ दिमाग मनराह। पहाडमी चाटी म जगनगी महर तब ३० गज का पाया था। 4 पट्टान पगाडी र मध्य में पी और पट्टाना में पूरा माग धनी पिनर आर पा मार था स १०० गर बाग एप मा और था। पिस पा रास्ता मारम मिस जानापा। इग माग मम वार गुजा पा पा। मितु पट्टाना पाग म निकरने में मुग भय मान ही मागम हा रहा था। गार पर पहपन रिप यया रात शव प और शाध्यिा में हार गय प। যুব দিল না বা গল বিল र म महानारामार अगर हमा। पवा उपरी आर पर रहा यो अन मा पाई र माया मार कुमायू के कर मेर रेपन की आवश्यकता न थी। मेवर १ गज तक वनरा था। घि पर बदूष तयार रखवर मन मावधाना मे याग वढना सारम दिया। मेरा दृष्टि पट्टानों पर गड़ी हुई थी और म एक एक परम मावधानी मे रखता हुआ पर रहा था। पट्टान म एगभग ३ गज में फामरे पर कुछ खलो हुई भूमि थी। इमी पर हुए स्थान में एक मादा पाकर चर रही थी। म उसे मनस्त्रियास देवता हुआ आग बढ गया। मा देखते ही उमन सर उठा लिया और मूर्तियत् मरीहो गई। (जव जानवर ममझतह कि उहे क्मिो न देखा नहा है वे इसी प्रकार ठिरपर रह जात है। यह काकड आदि जानवरा नो दिप प्रवृति माह पर पहुंच कर मन पछि देखा ना पाकर का पुन परन में मरान पाया। मार म म कुछ हो आग गया कि वह मादा फामा भौक्ती' हुई कार मा भागौ। पाघ्र सौर पर म मार पर पहुपा ना पगो पूछ झारिया पाहिलात पाया। यह म्पप था विपासान भरनी मा पगाडी पर रेप लिया था। माग मा मा पिमी चिपिया व घुसन में हिली घी या परना घमन में। बाग यडन में पहले हम मा पना घराना जरूरी था। पगारा पा पर मिट्टा घट्टाना पर ग टपरमा जल ग गीला हो गई थी। पन्त ममय इम गाग भूमि पर म ान पापित छाहता गया था। अब मरे परचिन उपर परनाक विस्तन मा अफिम प। इमी स्थान पर गरना पट्टाना पर गवती था। मरा अनमग्ण परमहा उगाह नगर लिया था और वापर भीगन पर वह पग छार पर भारी में म"यहाग पान अगर प्रपर भाग म पग्ना परिचित थी और मम माग्न का प्रपम अवमर पार पगचित व दमरे माइपर मरी प्रनामा रही थी। सद पगडा पर हावर पसना उचित न था। अनाण्य म सरी भूमि मेलामा महरा आर परा। परि पर्याप्त प्रकार एका ता अदायही ' पापी वाला बिगुल मुत्त या गा पाता है। इम barking deer भी पान

चौगढ़ पर
म भग्ना पर विजय पा लता क्यापि उस घट्टान का यायय छाडन हो अव
सर याने भर अनपर पडनी। उसी की भाति म मो इस वन मे भली प्रकार
परिचित था। मम मारम था कि वह मुप मारना चाहती है परतु उसके
बार में मरा क्या इरादा था यह यह नहीं जान सकी थी।
परतु म इन मव वाता मे सराम न उठा सका क्यापि मध्या रात्रि में
परिणित हाती जा रहा था।
म पर भी महा शिव चवादि हमारे शरीर म एक एमी बदस्य इद्रिय
हैजा में भावी आया को चेतावनी दे देती हैं। यह गति बडी सीव ह।
परन्तु यह किम मातिराम मरतीह यह म स्वय नही जानता।
उहरणाप मी यवसर को सीजिय । मन न ना शग्नी का दावा मुना
हापा और न उमगी उपम्पिनि मुन निमा पा पक्षी न हा यालाई यो। परन्तु
फिर भा पट्टाना र ममीप पहुँचत हा मरा हुल्य घय उठा था और मा दक्ष
विवाम गया पारि चट्टाना में नरभिणा मरी प्रतीक्षा में छिपी हुई है। हम
भाषामो पुष्टि कुछ दर बाराको चाख रा मुनपर हो गई। दुभरा
प्रमाण पा मरे परचि पर अस्ति भरनी सार।
जा पाप मरा पहानी पयपूबर पर रहे है उन्हें मारना में अपना
प्रथम एव अन्तिम मातमा मदिनार मणन मुनाना पाहता हूँ।
या मिरन ११ अपर १३ मध्या' में आ मरे मायागर पहुंचन
१०नि नाता
उम नि म जगली मार पर अपन बटर यापन गया हुआ था। वगरम
एप मार दूर मा माग्या शनना पुध मनुप्या पीएफ टायमिग।
दाला में पूर मनपर १ वर्षीय पुत्र सामा"मगार न र महोन पर
मार गया। म गुप्तान पि मापन पिनार बर गया और वह धूता
मा असनापसाना गुनान म्गा।
उमग्नि गरहिया पाग्न अगर
गपए प। रानी न पाप ना अन्य राय माग गए।
इम गमय भामटारम ५-एम मनष्य या पदरी पर ममप
इम

पुमायू कर शर घटनास्थल पर उपस्थित थे। वृद्ध न उनका दाप देना आरम्भ कर लिया कि उमा सडकको मृत्यु के मुख में छाह कर वे भाग गय थ। यह सुनते ही गरम वहम शुरू हागई। उन मनुष्या का पहना या कि वृद्ध न ही मवप्रथम चिल्लाकर भगर मचाई थी। मुम अफ्मोस हुआ कि व्यय ही मन यह प्रसग छइ दिमा अन्यया यह वादविवार ही न उठना । बनगड समाप्त परन से लिय मन वृद्ध मे कहा कि जिम स्थान पर उनके पुत्र की मृत्य हई या उसी स्थान पर म एम पटरा बाधूगा। दाकाराको मन गदगले वापस भिजवा दिया और एक फारे का वाचन कयि से चल्ग। मन दो मानमिया का साथ ले लिया। जगली सहक पर पहुचन के लिय दा मोल ना एक टढी मढी पगाडी म जाना पहना था। इमो पगरा के किनारे एष वान का जगा था जिसमें युद्ध का पुत्र माग गया था। बात को मा किनारे से लगी हुई कुछ खुला भूमि थी। इस भूमि में एक वाम र ठठ म मन पटर वायाध लिया। इस बार व मनुष्य का मन क्टर दलिय घामपाट कर आन रिय मज पिया और दूसरे आत्मा (मायामि जावि प्रथम महापद्ध म गढवाल पलन में रह चुका था और आजकल यू पी मिविल पादनियर पाम में काम कर रहा है) काम वाम पर पदकर पुलाम म आवाज परत हुए सूब जारम हरार एगान प्रिय मह लिया-जमा वि पहाडी गग पाम एकही कारन ममय इम कार म पुछ दूर पर एक छोटी मो चट्टान पर जा बरा। पट्टान व पीछ पर दमदार पा और इम द्वार पर पना जगर था। मायामिह पार गार म गाता जा रहा पा और दूसरा मनुष्य कटी हुई पाम गारमा मम्मग रमता जा रहा था। म वाय हाय में राम-ग्यि हा घट्टान पर पड़ा या गिगरेट पी रहा था कि अरस्मात् मा एमा प्रतान हमा मिनरमागणी आ गई हो। मन पौग्न गन म पागवारा अपन गमीप बुला लिया और मोटी म माघागिह का ध्यान आवपिन परत हुए उप चुप रहन मा आगदगिया। मीना पार ग भूमि पुणेई थी। मापामिह मर गामन पाई आर पा। पाग बनवाग मनप्य गामन और पटग शाहिना आर क्या हुआ था।

- चौगद २ गर भाग में भग्नी मुझ बिना रिम धाहर निकल नहा मरनी थी। रवल एक बगह यह इस ममय हा सकता था-मरपाठ घट्टान र नाप ढाल में। घट्टान पर बटन समय मन जय सिया था कि पट्टान र आग का भाग दिल पहा और रिना या और पहाड म नीष ८-१० फीट तर बना हुआ पा। इसम नीष शाी थी। परना इस पर घट ययाय ममता था किंतु उमनी आवाज मुनपर मनमे दम्ब सकता था। इसमें मह नहीं नि माधामिह का आवाज स मापित हार शरनो बट्टान नीम भा गई थी। उमर ऊपर का मन ही मुझ उमकी उपस्थिति का भान हा गया था। माम लोटत दम व लागा चपहा जान म यह आरित हो गई थी। कुछ मिनटा वा मुत नीच जगल में एक टहनी १ टूटन नागर मुनाई पिया जिमम म निचिन मा हा गया। भग्ना गट गई थी। एष मुनर मवमर हाय म निकर गया परन्तु अव भी मुश उम पर गारी पान मा मौरा मिल माता पा क्यापि हमार जान ही यह कटरे या मारन अपप गेटता। अभी ४-५ घर नि और पा ओर घाटा का पार पर दूगरा मारव पहारकीदार मरना पर गारी पाई जा सरमाया। हा पागग २०-५० गजरा पडना था। मग २७५ राफरपा निगाना या अचूर पा और यरिना रवा घायर मारा जाना ना मा अनुसरण पानरपिता पार मिली जाना। साजता म जमा में व्यय भटकता रहा मा-उमम यह ही अन्टाहाता। माप मनुप्यारा बारगम भा नहीं भजा जा सरना पा। मन विवाहामन 37 रन मायाया। पारा और भी मानी म गांघ पर म मामन , पगडी आर पर रिया १०. गर बाग पान पर हमें एक नाग मिग। इस नाले म पारी दूर गम्ना पन जगर महार गया था। दामालमियासमाय में पर HIT में घुमना उचित न था। भर मन नाम में हार जाना नियम म मानि नार में पहप र म आरमार राना पार मातापा। मागगनग १० गत योग और पार पाठ माग पा। जमा म ८० - कुमायू रेकर पार मम उतरा वि पास की चट्टान पर मे एप कुचकुचवा (एक छाता जाति का उलू) । पपदाता हमा उड गया। जिस स्थान म यह उड़ा था वहा पर दा अपड हुए थ। इन अडा का रग ह का पोला या और इनमें मूरे छार पड हुए थ । इनका यापार घडा विचित्र था। अना एम्बा एव नमीरा पा और दूगरा एकमगारा मुझ भाति भाति १ अडा का जमा परन का गौष था। मर मप्र म कुपचुप व अट नहा थ। अत मन इन्ह 3 घलन का निचय दिया। भर पाम इम ममय इन अडा का गबन के लिय पाई चीज न यो अतएव मन उह पुष्पाई बीच रख कर बायें हाथ की मुद्री में दाव लिया। नारक नीच पहपन पर पिनार यस्य न ऊच प । बरमाती बहाव वारण किनारे की चट्टान वितुर पिकनी हा गर्न पी और उस पर पाव जमाना असम्भव था। इमलिय असन आमिया का अपनी घदूष थमावर म विमरना हुमा नीच मा उनग्न एगा। जम ही म नाच रताली मि पर उतग त्याही मरे दाना आमा भग वगल में कर या पर हुए और घवरापर उहान मर हाथ म राफर ट्रम दी व परनी पा वारत मुन धुप थ। चट्टान पर मे नाच विमान की आवाज व वारण में कुछ मुन न पाया था। पूछन पर मर यामिमा न बताया कि उहान गरना को दवी गगट मुनी था। उह मानम न था कि गर्राहट किम आर ग आई। पार गुर्रा पर अपन पिशर का अपनी उपम्पिमि बताया नहापरत। यह गम्भव था रि गरनी हमारे चल रन पर मार महान में मारा प्रतीक्षा में जा रिपी थी और जम ही वह मुन्न पर अपना प्रस्नुन हु म घट्टान म नीन पा गया। इमी ग निगाहा पर गम्भवन बद गर्रा उरीहा प.अनमान गर भीमबना था। या फिर पर मानना पडगा किमीनों मनप्या में मारना न आन भाजन गिय मुना घना था। हम ताना इग गमय नार में या प। हमारे पीए पट्टान पा वा ओर मुछ पाया र नाम पर हुए और गानो मार भा पट्टाना वा दावार मी माया मामन र विगार चीर का वा गिरा हुआ था। पारण नार में एक याप मा बन गया था और बहन मा रन जमा हा गई पा। या नोगे भूमि दाहिनी पार पट्टाना र पाठ परी ग पा इगा पर व पाय म इस पर -- चौगढ़ के गर पदाया। रन कारण चलन में सनिक भा यावाज नहा हा रहा था। जम हा इम चट्टान का दीवार म याग वयर मन पाछ दवा ना गरना म मरा मोल पार हो गई। म्पिति यह था- चान व पार को रतारी भूमि ममनर था। दाग्निा आर चट्टाना का बडा दावार थी और व पार गेग झाडिया था। दूसरा सरफ मा एक सिनो चट्टान था। यह मग हरतारा भूमि (जिम पर हम माथ) लगभग • पोर सम्वाद १ पीर घोडी थी। मझम ८पार वादूरा (वा में नापा गया) पर आक्रमण व नियमिकुडी हर गरना था। अगर पज उमन याग का पग ग्वम्म और पिठो पर मिाह रम थ। उमा चरे पर व मम्बान था- जैमा मुम्बान दर म रोट हाए म्यामा ना म्यागत रन गिा एक म्वामामक्त कुन मह पर पी जा सकता है। मरे मस्तिष में विद्युत गनि मना विचार आय। ए ता यह वि मा प्रथम वार परला पाहिए और दूमरा य. दि वार म भाति रिया जाय कि भग्ना मतर नहा पाय। मगे बन्दूर मराहिन हाथ में मानव पर आडी रममा हुई थी। गम (वन्दूम का प्यार करन मा या गरन का एक पुग) मग हवा पा मोर भग्ना उपराय मापन नियमाय म तान चोयाई वनापार पारगना आवाया था। मन पहाय ग वन्दूर पापघा आर धार धार उगना आगम किया। जमजम मरा हाप मापा हाता जा रहा था पन्दूर पावरन भी बढ़ता ही जा रहा पा। महापामापा मग्ना था। भग्नीपाधि मन्नार म एक क्षण मिय भाना-उमर पहर में प्रमग्नतामा भाव याथा। मा पर उगन में जिना ममय गा मरना मरता। एषि म मा मरती पर ग आंग नहा हा माना पा बनाव म वन्दूमा नारी बार म सा न गरा। प्रतिगामा मारमाता पा जि प रा यह पार ग हीन हागा। मारपसारया मा मार गया था। मन में बदर मर प म वा Fगा और उस ही गस नानार परनोरमरपी मोप में बाई मन पापिया।

- حس
مقر
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म चौगढ़ के शेर ८३ प्राम स्वप्न में हम देखते ह निमोई भयानक जन्नु हम पर आक्रमण कर रहा ३ ओर हम धन्दूर पा घोडा बान का व्यष प्रयत्ल कर रह ह किन्तु बन्दूष धरन म माफ इनकार कर देती हैं। कुछ कुछ एस ही स्वप्नि संसार भर रहा था किन्तु य दूर की आवाज और परारी फटकार न मेरा सदा का निवारण पर दिया। क्षण मात्र के सिय पनी स्थिर रहा और फिर मगर पजा पर सर रख कर मर गई। गागरे छिद्र से रमत का पहारा छूट पडा। गोली रोट में रगती हुई हलय में घम गई थी। पट्टान पी माइन कारण मरे मादमी इस पाना फो देख न पाय प। परन्तु मरे सिर घुमान मे ये समन गय ५ मिन परना का दम लिया ह और परना ममीप में है। मापासिंह न बाद में मझ वतामा मि वह चिल्लाकर मामे असे गिरापरमाना हापा म राइफल पाइन न लिए पहना चाहता था। गाग चलाना हो मन सक्त द्वारा मापासिंह का पाम बुलाया और उगे मपनी बन्दूम पमा दा। मर पर जवाब दे रहे थे। पास ही गिरे हुए पक्ष पर म माया गरनी पना की गद्दिपा दमन में पहा ही मन चौगड़ पोनरमपिणीपश्चान पिया। भाग्यवतारो जिमममीन उमे ६४ मानव जीवन-मूत्रा का कारन में महायता दापा आज उमा मे स्वप उगरा जीवन-मूत्र कट गया था। जिरे लगा माना था पि उगन १२८ मनुष्य मार थ । निम्नलिगिन सीन बातें बिरें आप मो प्रतिकूल ममग यास्तव में मरे अनरपी (अ) भर यायें राप में रम हुए प्रा (4) हल्दो बन्दूक जिम म यि हुआ था और (ग) मरो मामा माधारण र म नहा रमि एक नर भक्षिणा महा रही था। यदि भरे हाय में अरन हात ता तसार म दाना हापापा पारपीट घूमना। मुग नपरेप पर हो परना न मुझ पर पान बारमण नापिया था। बिन्दूरोनहाता सब म सा म उम भारे पार ही पाता और नाप मीपा कर पा पाना। और यति दाना गाधारण 'ग्ना हाती ला आन पा पिग आ पावर मुम भान माग गनिर जाती। माना नारा परिणाम मापारण भामरता।

दुमायू के क्रूर शर अपन माथिया का मन कटरे की रम्मो या न यि भज गिया (क्यापि अब रम्मी गरना या याधन १ गिय चाभिा था) और म म्वय अडा वा उनकी स्वामिनीपोलोटान नारेबी आर पुलिया। अपन अय तिवारी भाइया का माति म भी कुछ अविश्वामी हूँ। गत घप म मगरनी पीछ माग मारा फिर रहा था और फिर भी असफल रहा। अडान उठान । कुछ ही क्षणा पश्चात मग भाग्य पलट गया था। हाय म रखप रहन म अड अभी गम ५। मन उह घट्टान के ऊपर रम लिया और जब आध घट यार म उधर मे गजरा ता मन कुचपुचवी का उनक उपर षठा पाया। उमद पवा पा रग दियुर घट्टान में मिलता जता था और देखन मे पता नही पलमा था कि महपहा अदय हा गय। और उग लिन समाज म माम पाम विस्तृत प्रग म एष भी नर हत्या मामन ग हुए नका पर मन अब एक और नाम चिह अक्ति पर गिया ह-मॉम व तारीख की अधिकारिणी घोगढ़ की आमवार गरनी यो। यह नाम वापआगर में मी पश्चिम की आर ओर सारीप ह ११ अपर गरनी व नाबून टूर ए प और दात भी। इन्ही कारणा म वह नरभक्षिणा यन गई थी और अपन गिवार का भी प्रकार मार नहीं मवती थी। उमपी महापिका पारी पाम पहा अवसर पर भूरू म मार पाया।

पोलगढ का कुंआरा हमार जाटार घर म मोर दूर जगल मध्य म लगभग ८०० वग गज माय मरा हुआ मशन है। इस मान में हरा घाम का गोचा-सा बिछा हुआ है और स्मान स्थान पर वह वह वक्षा एव वेंत का जगरू मा उग आया है । इसा खुली हुई भूमि में मन मव प्रथम उस पर की दवा जो कि ममम्न मयानपान में पौगट का दुआरा 4 नाम म प्रमिद हागया था। मन १.२ म १९ ताई राग इस गिरकोटा म रह चाय। प्रान काल का समय पा। मूर्योन्य दुरा अभी दर न हुई थी जब म पूर्याश्न गुर टमय मामन या हाल जमीन पर जा च।। कुछ दूर पर एम स्वच्छ गाय दिनार ०-२५ वन-मुगिया का एक ड मूबी पत्तिया ६ दर में म बाना पारा पाज रहा था। हरियार मगन में आमरण मिलमिल पर बमामा मगन में ५०६० चानल मा धरन में व्यस्त य । म एप यूर पर गहुआ म मुराय का अवगरन पर रहा था कि मयम ममीप यो एप पिपिया न मरा आर मार करना आरम्भ कर लिया। दूसरे हा शाण मर नाच ग घना माडिया में म कुआरा पुर मगन में निकल आया। गुर र नायर मा मिर क्यि गरूप मगमम्न दृष्य ना मिहावामान करता रहा और फिर साता या पारे भार मान का पार परन एगा। जाड पातुबाण उगा पम मपन्न मुनर पा और इस समय वमपर मूय पी गुनानगर मया पर उम और भी मुना बना रही था। उमर स्वागत ग्दा पागलान पर उधर इद पर कार में गाय मा बना पिया पा। का माग म मुमताहुमा पर लिया। विमना मुनर रूगना पा वह सिआग बा र उमन चाय में मरना प्याम युनाई और पर वर वर में माप हलया। नगर में धमन स पूर्व वा तीन पार गरजा । पल मगन में उगर निरसनही मभन्न वन प्रापिरान पामारमानारया पारि मानी कार भिवान्नका यर प्रायमर या ८६ कुमापू के पूर गेर पास्तव में उमरिन कुआरा अपनी माद स बहुत दूर निरल आया था क्यापि उसका घर छ मोर दूर एक नाल में था। एमे प्रदा में जहा कि अधिकारी शरा या शिवार हाथिया की महायता म हाता ह उमन अपना घर साच समझ पर बनाया था। एक मार स्वा यह नाल पहाडा सरी तरछर की ओर चला गया था और इमक दोना आर पयत मह था ना ऊपरी सिरे पर लगभग योम फीट ऊचा एक परना था और नीचे के मुगन पर पानी से भर मिट्टी स्ट गई पी इमा कारण इम आर नालामबगहा गया था। बतएव कोई भी शिकारी यदि युआरे ८ घर जाकर उमस राहा उन वा प्रयत्न करता ता उमे विवा होकर पार हो जाना पहता। सरकारी पानूना + अन मार रात्रि में शिकार मरना भी मना है इस प्रकार कुंआरा अपन बहु वाच्छित चम + शिवारिया की घातक बन्दूका म वचाय हुए था। कई अवमग पर शिकारी पुआरे गा पटरा पर ससचा घुर थ। परतु उम पर गाली कभी भी न घर पाई थी यद्यपि दो अवमरा पर वह मौत म आंखमिचौनी पल चुका था। प्रपम अवसर पर वह हार में निकर आया था परतु फट ऐंडरसन को राइफल मपान पी रस्मी में उरझर रह गई। दूमरी बार हाव में पल ही यह मचान में ममीप था या हुआ रिन्तु जब उसन हा एदी मान्य का अपना पाइप भरन में मगन पाया ता तम्बापू ५ याविप्पारस पी हाई दना हुआ व यन में अन्य हा गया। इन दोनों अवमरा पर वह मचान मे पर दो फाट पी दूरी पर दया गया था। एटरमनन क्षनानुसार उगषा सागर एक टट्टस वरावर था पिन्तु एडी उमरी उपमा एक मगड गप गन्नप। एग हो गई यमपल प्रयन्ना पश्चात म भान मामिाना मी विहम को नाए कार में निरीहई याग-नन' पर रगया। ग माग पर प्रात पार म बार दे ताज गारों को देख पुगा था। यो यिाम व गमान परापा जानवार भारताप में पनाचित ही वा अय व्यक्ति हागा। *ग गमय उनन माप दा अनुभवाशिवारी भाय। परमादापा भग भाति नापार विरम मी मम्मति हुई किरियाय वाच' साना जान पर पर पीपाल। पोट म्या होगी। यय दो गिरिया का मत या हि सगा वा गास पर पीता 'मुगान त्यि गर का पारा ६ गटिया पर साना जाता है।

Kumaun Ke Kroor Sher

Author
Jim,koirbet
Title
Kumaun Ke Kroor Sher
File name
Kumaun Ke Kroor Sher
Text
OCR done
Citation
1957
Published
2010/12
Publisher
Bambay,axford,university Press
Language
Sanskrit
Pages
101
Library
Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Classification
History
DLI number
514944
Barcode
4990010022611.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
wBdvNXhk3py
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