Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Prahlad Vijay
Front matter
घ किसानों की प्रतिनिधि संस्था के स में स्वीकार किया गया एक से कुष कानूनी परिवार भी प्रदान किए मए । विमोतिपा का यह पफम और पान र हिसान-सस्पापा पसिनी की कृति पा। उन्होंने सिानों के रोष प कर उसे पताया पौर सफम बनाया । गिजोलिया के किसान पपिकनीकी सेमापों को पार पी यार करते है और उनकी स्मृति में अपना सिर परा से मुका मेहे। बिगोमिया रिसाम सरवाह के सिमसिम में ही पपिकनी कमर पही स्पर्षीय गणेपकर पी विधार्थी के सम्पर्क में पाए पौर दोनों की मिता मंत रमती ही। बिगोनिया के किसानों में विद्यापीबीको रामी भेषी पी और रिचार्गी बीम बिगोमिया के किसानों की कट-नापा और पामोतन को प्रपन पत्र प्रतापरा नियमित प्रसिरि प्रराम की। उसके पामस्वरूप छ राम्प का कोपमानम मनमा पड़ा और 'प्रताप पाराग्म में प्रवेश निपेष कर पिया पया। किन्तु कोई भी साधीनता पार पाय का पप मेने से वित हो सकता है? विचाी ची सचमुष एक स्वापोन देवा परकार। नियोमिपा के समीप ही ये एक पौर सामन्ती टिकाना पा । यहाँ रिमान भी पषिक बी पौर राबस्पाम सेगा सप नेतृत्व में सामन्ती पापण के सिर मानापम पर रहे। यहा राग्य समझाते जाम रमनका मामय शिवा । राम्प में किसानों के एमबमे पर मोनियां पाई। रोसिान पर हर पार मेलों को पिपचार र मिया पपा । मासम पम्स के एक प्रम पपिकारी की रेस में हमा। पविक जी इस मारण में किसानों को पता नहीं पा सको पकिमानों को हिम्मत पाने और पमका मेतृत्वाने मिए गरे मप्प पर। राम्प ने मौका सिर परिपत्रीको गिरफ्तार कर मिया । उन पर एक पिशव्यायालय सामने राणा के पाप में मुरमा पताया गया । यह एक ऐतिहामिक मुरमा पा। पपिक मी पापाय रे सामने एक विमा बयान रिपापा । रस रमोनि रियासतों में पिटिग दूटनीति पापोका पागनिया पापौर रिपामती जमतामन पोषण पर तीनपी एएगी वापरतीपर एसपीराग्प है सपना पायालय से नि मिरमार भी पकिनीमो महाराणा की विसष भासा से पेम मेंबर ला नसा । नन्हें पारवत गारपीन में बना पला। पति में पवितीर भारे माहिरर की रचना की । या प्रार रियाम भी समीपापी रममा। सन् १९२८ में जब यह बेम से रिहा हुए तो समका पारा साहित्य राग्य में अपने पास रोक मिमा पा पार उनका मेपार में प्रवेश निषेप कर दिया था। स्वतग्पता बाद ही मेस में सिया मा साहित्य में वापस मिस सामौर पर पर उनके निपन के बाद पीरे-पीरे पाठकोरे सामने पाया है। उपयपुर म म यिा होने के बार परिकनी में प्रखित मापीय रेपी राग्य सोक परिपए की प्रवृत्तियों में हिस्सा मैमा शुर पिया और यह रमके उपाप्पम पुने गए । प्रेम में गुरु से ही प्रपन को देगी रियामों के मामो मनों से प्रसग एमा। उसके मापों का यह मानना पा कि पापस को एक ममय ही मोरं पर पानी पनि केन्द्रिाकारली पाहिए । पमर भागों से निपर लिया गया तो रामा-महापमा भाने माप ठीर हो पाएंगे। रितु परिक बीमोर दूसरे रिसामवी नेतामा श्री माम्पता इसस मिम्म पो । उनका कहना पाकिमरि रिणामतों से पता छोड़ दिया गया तो प्रेग राजामो का उप पोम मारतीय स्वतन्त्रतापिरोप में रप । असर रियामठी बनवा मगठित पौर रात हामी दो स्पषमता का परा पुर होया पौर राजा-महापा राष्ट्र पिरोपी परमा रागे । प्रणा का सार उमा पर पर नहाने देगा। परनामी मे ग माम्पठा का पोपिरय हो मिस पिया। उस समय कोडेस में रिपागों म पपनी पालाएँ पापम परमा स्वीकार नही किया पिनु पपिक पी पौर मरे रिपामती मेवामी के अनुराप पर मन् १९३० में रियामती ममता को कांग्रेस ने प्रतिनिधि बनने का पषिकाररिया। रियासती ममता पापपने राग्नीतिक पपिकारों की माई सही मानी पड़ी। परश्य ही सपेरापीमति महानुभूति गरे साप पी। रासापान सेवा सपके मम्बाप में यही रो पर पहना मप्रासंगिक नही होगा। जिम प्रसार स्वर्गीय पोपाल पण भोगने में पटमिा पानी बा मामा त मेरे बामे कार्यमा मुममरने के सिर माल सपममिति पौर सीप सामा नासपतराय मे मो मरर ममिति गी मापामापी पानाकी पी मीही पपिपरी ारा स्थापित यह मेस्पा भी पी। मम पसरपान का पारग्म गंगाराम मने रामे माहिर पो पाना पाहिरि पर मापापों एक नया पप्प ही पापित हपापा। उगम पाने पिमर मार्गापौर निजी स्माया पप मिलि र दिपापा । परामि पाम पाने पामेरामन पोरगरपानापों का मापा पी पीर उमरी माविधियों मारे h रामसान को हिला दिया था। मामीम प्रसामगमों के मस्तित्व में पाने पहले एस्पान के निस किमी हिस्से में भी कोई पायोमन सध्या पाहेमा सिरोही का मीस पाम्दोलन हो चाहेरीका किसान पाम्दोलन पार पाहे प्रमगर में मीमपापा का हत्याकाण इस संस्था कार्यकर्ता पारितों का पन मेमे पौर उमें पत पहुँचाने के लिए सबसे पामे होते । प्रारमा निष्ठा पौर मगन कार्यकर्तापों परचित ही रिसाई देवी को इस संस्था के कार्य माधों में पी। परस्मान न पामरष म पपिष्मी पौर परस्पान सेवा संपका मोप कभी मुलाया नही पा सकता। परिम्पी का लेसा पौर कबि एफ उप मिपन से प्ररित बा। उन्होंने पनेक पर्षों को गन्म दिया और उनका समतापूर्वक सम्पान किया। उन्होंने सम् १९२० मप से स्वर्गीप सेठ बमनापामयी पगार के सायोप से 'राज स्थानमरी' साप्ताहिक निासा। समके बाद परमेर से भीम रामस्वाम'को बम रिमा गोबार में 'वरण पस्थान बना । उसके बाद ग्रहोनि भयमेर ही एसम्मान मरेश निकाला। पा राणय पषिक मिरगुप पार पनपा नाम से काम्प-रपना परत । उनमाम्म में भारों की समय भक्ति, मप्प-विनोद पौर मामिमा पर्पन सहन ही होते है। उनके पो पोर नियों की मारेगी बनी है। उनिहाम की विपकर गण एग्या के इतिहाग की पोप-पोर का भी बड़ा काम पिया। साहित्य की पा सापना ग्रहोंने कोई यह वन मानव संसारों के परिवार के महत हेतु से प्ररित होकर लिए उमरे साहित्य सानी मात है। पपिस्नी मे देश को राष्ट्रीय मग पान दिया है। मम इम पान के कारण ही यह साहित्य में पार होने चाहिए। परमेर-बेम में बय सत्याग्रही परीजा यह मा पान पाते में उनसे मिनी प्रराणा पाते पारसकी पेपम पहियां प्राप मित्रो ममेहरी गाना पर भामह पौष भुकाना परवन मम में पाम भी सपा ही गनी एती। मोकाम्प में निपौर मोबा उमा एक नमूना पाहाँ नेपोमास संचरण नही कर सकते। पिसवानियोंपा पाहान परतापौर फिर मसी पोर ऐप प्रतिमा भी पता है:- रेशम रामम कर पियों को ही गा पानातक श्रीन पर हमसे मिमंगी मरम र रमा।
प मुझे पने गाने पर, पामान पिनर गाएम पामन , हामा पाम पत या पयाम विदागि। यया विप के रासम हम मय का प्राय बिात ये हम देश लि यमगर में भी मुदित हाय मिनाएंगे । जिस दिन प्रपर प्टमा पो निर्भय होकर पाएंग पर पीर रामम्पान पा इमिर , नाम हो । पपिरती रामपानको न जानि के पास ये । उनि गरम्पाम प्रामि की पग्निपो प्रगमिन पिया। वह पनि पीम-पीम प्रबर होती गई पौर प्रम में प्रम्पाय प्रौर परपावार पर पिी मामनी म्पबम्पापो भस्म फरी गाई। नमक मरपाग्रह के ममय पर रामपूनाना मध्यमारत पौर परमेर-मापारा प्रान्तीय पापम पमरी पप्पस पोर एसी माले पह दुगारा जेस गागर में उम्हाले कति मिनी पी-पी पारा हाम्य बिनोर या उसम नमूना।। पपिपीन प्रारम्भिक जीबन मोमागिना पे। गीता के निपाम पमयोप में उनकी मही पाम्पा पा। पीरे पीरे उन पर मामबारका प्रभारगर ममा था बमपरा समारा पो बह पाप मनार प्पा मालारोप। पा नुिमापा देशम जिन परिस्पिनियों का निर्मागहमा उना परम पापम पाबना मी पार । उनी मेबापों पी मासात मिपनी पाहिए पी वा उन्हें मही मिनी पौर सपित उनमा मन पितृपया म भर पया था। पार मे पाई गात वर्ष पूर परमर में एक मापारणमा बीमारी पार २ री पातु उनमाम्ना गया। मृतु में पहले परमर के पास भारतार्यों मिल पा मापना पायम पौर माहिर रेप पारित पर की उहोंने पाना बना दी पारगमह निधि पास टिमही ये। ममार पापमपालमा पाने प। रितु मरी मरने नजीवन पाप यही ममास परति तीसम्मा पौर मरममारपीरमाणि प्रसार पौरमारामार्गे में मार्ग मेने पाम र दर पासा पानीवन-रीर एम पपा पोर उमोगर भी पूरी नहोर राम रिमा । पबिस्तीवानापमषित परिषद ममि दिया गया पापस पापमपा ममप में भी नरपति।
मर्थ पाया। उनके पमनीवित मे उनके कवि-मन प्रस्फुटन मैं निरपर गापा सामी। पहा ममत रनके कवि-सभी पर्वा कला पाता है। स्वतन्त्रता संग्राम के सैनिकों को 'गणेय पपिड' का परिचय देने की प्रासापकता नहीं । उनकी कविताएँ उस समय नई भाषना का नई पवना पा प्रतीक बनी हुई वी। पिन उनका करियपनी परमस्पति में पहुँच सका 'महार विनय में । मरान है कि यह पुस्तक रची पाने के मममग तीन मताम्दियों बार मन पराप में प्रा रही है। दो पतामियों को मारपपपुर राग्य के कारा गार में कर रही पौर उसके बार पषिक भी अपनी पस्ततामों में उसके प्रशासन की मुरिषा न बुटा पाए । अब भी पर प्रकासों के उत्पाद कारग प्रकार में नहीं पा रही। परम् इसका थप पषिक पी के एम स्नेहियों साषिों एवं मतों को हैबो समको कीति रता का प्रयत्न कर ये है। पुस्तक परमपुर कारावास में रची । पापा इस प्रकार के व्यस्त साहिरिया राजनीतियों के लिए कारापास ही ऐसा स्वत वहाँ है बम्प रितामों से मुळ होकर साहित्य मृबन में रत्तचित्त हो पाते ।।र-काम्प का प्राचार मुरासुर संग्राम की मुपरिचित पौराणिक कथा है-हिरप्पपिपु [दिरम्यम्पप] का रेषनोक पर पाश्मण उसका रसात ममानक संडाम पंत मरेब-पथ की विजय पार हिरम्पपिपु का पमासम रसकी गर्भवती रानी फा रेष-सेना हम पा पाना पोर एका उसको सपोच निसके प्रमाण से परामान्तर म रानी के वर्म से सम्म मेकर प्रहार में प्रमुरों का उगार किमा। पपा का पयन रने में पपिपरा मूगम से माम लिया है। उसके विधाम में उगाने प्रामुरी सामाग्यकारका नापारिक समान का मारियों की सुरक्षा का वो सत्य-अहिंसा प्रमापौर नारी अमवा भाषारित रिस के सनका मा पित्र सौंपा है सपने उम् मात्र कपि मागे पने रिया पर भरिम्परप्टा बना दिया है पार गर्दै राष्ट्रीय परियों की सपणी पति म मा बंटापा है। रमना भीमबम की रिपेषता पर पिपिक जी पावारण से निपरा हार, ता महाबाम्ति पी प्रापार पाने पौरम मात्र रिमी एष्ट्रीय प्रामामा माम प्राने गने ले। गनि सिमानाम्पबार रिपोरटिशाग मानाया और गमता मानि भषा पाप पर पापारिक म निस भए पियामासना की। उसने इमरपना का देश सपा कानपी सीमामों से कार रख दिया है। यही कारण है कि पार तीन सारी बार सबका प्रकाशन होने पर भी, ममे ही उसका पालम्पाम र मापा कृष पुरानी नपदी हो एमा प्रामाम होता है कि परिकबी पार मी परमिप सामाग्यपार को पुर पसार पमुमो रमी ग स समकार रह है पोर उमा प्रतिकार के लिए सत्य पा रिमा बीरतापूर्स पारम हमारे मामन रस रहे हैं। हम समाप म मौसिकता बरतठे हुए मी बह रेस की प्रमुग गापीपारी पारा से ही बिता नहीं होते- मही बीरता है पिपुषो! 40 बप करने म है पीरल सत्य पर निमय रे हा मरन म ! सम्मा विपी है म बह गयी होगरा पाना है मस्पुत यह गा बिना मुनिर प्रण पर मिट गाता है। हसिगोतर प्रपासपी ति गाको विस्ता पार से महाममरों से वादित परिम मानरक्षा का पिता बन गाती है- पुर नही उप पर्म-कार्य, हिमा नहरी प्रति स्मातम्याधिन मुरसा 0 बम उमी प्रतुमति है। इसी पुरविर समरत नमार की मारिया-मानामा बहनों । परिमयों -रासर ती हिरप्पा रिमा गना पहनी है- पमुर-पहिली पाली 'गुग्मा । मुझ गा है पारा रिसाग पिमा प्राणिमात्र पर प्रेम, मात्र है भम मोर परिणाम ! अपर ना होना परा प्रमो ! गुर रमा # गिननी पार पईयो मास मग माना पाणारा था।" पर संयुक्त राष्ट्रपती रामा पनि पुरागतिक पारी में- निरषय मा मत्री गो भाग भिमाना एक समर पर राष्ट-मोरे प्रनिनिपि पुमगना! जिन्न भिग्न माग धापति नामे रिमिम्मों मिन्न-भिन्न पहारों पर मिन-भिन्न र राग्य या मरो प्रतिनिधि रिपन और पबमा। मन मिन बी गितगानिपोतम मीबिना।
प । पौर प्रत में इन्द्रसम्मों में नए विश्व का सम देपिए- फि, इस पिसम्म अप में सुख का सा पहा फिर बयत पर बन्नु-भाव की विमान परिका घाए फिर, मयत शक्ति कुंगो स्मित पुष्पों से घर माएँ, फिर, कोकित 'वसुदेव मुटुमाम् की रागिनी मुनाए । फिर, बम की पूजा उठकर हो साप म्याम की पी फिर, परबर में स्वाप पोरहो स्पति-भक्ति की। पाप । यह रपमा समय से प्रभाव में भा गई होती। कौन रह सकता है कि तमी मौर विश्व साहित्य को पपिक जी से इससे भी पेष्ठ रपनाएं ममिनी होती। रमिक हिन्दुस्तान शरभ्यु नई रिस्मी।
प्रथम सर्ग
पीप्मा प्रमात पा प्रपालपूर्ग परतों में
पिरी एपरी पी ग्यौं गरिमा रही
पषी भवनोंदवारों प्रारमपे उपपनों में
पी मन पग्पिन गमार मापन।
मरण के प्रम-पगो मुमुग्गी प्रमा पी मुम
विगु मुपनों . ट पुरगुरी पमा रही
भीने भीने पर मुमो के मुग पर घर
पाईमनी पी पी दीपिोहगा पी'
रेगन परग प्रमानी पटरियों से
मार मृति मी पी पा मुहिल मा ना
पाना अप-बारिमा मिन्ना का पर
विमाप हो पंपों मनमा जी!
प्रथम सर्ग या सभूमि माम्य की निया का अन्त प्रापा रेख पुष्प-पक्ति पराग हो मुरा पही प्रमया कमस राधि देस उम-माप नेह सोले सर में हो हास्य हिलोर उठा हो । ऐसे ही उमप प्रातकाममान-सम क्साम्त एक सैनिक पुरी की पोर माता वा कमी पीप रेखता पा कभी निर पुन-भरे पस्त्र पर-बामों की पुस माता पा। पाता कमी या परों की प्रगति कभी रष्टि नमधुरी दुर्ग की रिया उठावा या कभी किसी चिंतनाभिभूत मा घूम बाता- मानो यह भी शिपिस पोर पाला बाता था। सा प्यान-मनपा किनारपास प्रहाम- प्रश्न भी, मुने कुन बाँचे पसा पावा पा प्पान ही मना दि बन है या हदपुरीयह पा प्हा पा कोई सामने या नहीं पाता था। बनाना हावा परमान + किनारे मितु पपना का स्वप्ण से पानेकपा रिताता पा पाने जमरोस ही हि पर भी पपिरसे टीर-दी बपि हुए कम से माता पा! परी-देयते सपन पुरोपियों में पाच पामबीएप ज्यों मिमीन हो गया परम पारे निर पित्ति मनोवृत्ति दिना हासात प्रारि दो पक्षम्मे में एरो मया । २ प्रमाद विजय मानो सम्प पिपित विविध चाप-योको ममी भांति देखने के पूर्व कोई हो गया या उगान मरे गाता पनि पापानने के पूर्व दीपों अगित मिरों मम्म सो मया । इसी समय मुर-सदन की पन-गवन-पम्मीर- तुमुम बाप-मनि से सकल ग उठी मापीर । फिर सण भर पापात् ही बसी समगन रत-सवाका पर भरने मगी सान तत्यण साही इष्टि पुम ही पार या समी हापों में भप कामों को भी पा सगी सभी मये मिन टि-पितु से भर्प नमान एवं प्रपने ही विचार को सत्य बताने ! मुरपिनामों की समा वगा जगह पुराने ममी पर पर में हम प्रन की ही पर्श हिने तमी ! पपर बमण प्यादिका सार पोरकर, विवित पसचित नियति नियम पोरकर सरियत हो निर पड़ोसियों पा साप बनाते अपने अपने प्रमानों की पपा सुनार पत्तनम पिन सबर्ष दो मोर ममोस्तुपम शिश ज्यो हौ भरिपागा पो मिन्यु तिमिलिए
प्रथम सर्व
दम भर में नाबम-रन सुर-कावार बम गमा
पुष्पों तक पर पुरिचन्वायत् भार पम पमा
सरप गानने की सबको पुन जमी हुई थी
सबही के मन में उत्सुकता बनी हुई थी।
प्रकस्मात् पय पोप से नर-नीम मम हिम रहा
जिसे प्रमण कर मुरों का मुन परसिर-न पिम उठा।
रिम्य तपस्वीप मम्द मति परण उठाते
पवित्रता की प्रभा विधामों में फैलाते
पा-ष्टि से मुषा-प्टि सबपर परमाते
मत होते मुर-मिर-मुमना को पीस मुकाते-
क्षमा ! की प्रतिमान में मृा मुसमाते हुए:
रीस पडे पर-सहित निर्गर-पति पाते
1
एम भर में मारी गप्पा पार होई
मानो सब
उस्मता
प्रम पौर था में गया हय मर गया
परि-पक्ति में माना मरण प्रमार पिर पया!
सिंहासन निट मा मुरपति महमा रफ गए,
सम्मुनीन मुग्-संक्ति मिर पावर से गुपए !
मोपवमग्ने पार पारेम
पन-मौर मकर मेरो मम नरेगा !
मरमण ! निषप हरि प्राप समोलु मुनने से बह रेसु
पुमाया ! मसो मिममिए, निार विपत्ति का मरन ।
४
प्रसार पिय 1 । पात भी है एसो हो मन्पु निम्-सी भी करने से र पादित कर सकते हम न भादी में पुष हेरा-फर म्पर्प । परिषम देना तुम्ह 'टपर' के प्रमुरों का मित्र पर पुरे है पो पपने पाप बलि कायप-बंध-पवित्र ! फिर वही हिरप्पा यप मुपति साप मे प्रमाणित सैन्य ममूह समाफर कटिन समर के सार बना एकटा मूपी-प्यूह पोर की भांति रात्रि के समय पार है सीमा पर प्राचा पौर पर एपुरी को पार बना माता है मरमर परा इस तरह सम विस मुरमरिम मुरों का पा मेमा गा रहा मार है वहीं पनप का चिम प्रमुर बसपा भगाता रहा H भारमण की परिभ मुन पपा भाटिया मुरमग पीपा गई परम्ने ममे पोष र-पति सन ही प्रोण पर बाई ! तीव हो पसी साम-गति नपनाप में पति हो पम हाय के स्पिरलम कोमन भाव भी ममुक्त जित शाहिस उठे ! फारते हुए दी भुगताण सा ही प्रमि पर जाने ममे पारमग र देन पो स्वय पण माना प्रसार मग ! पपीपति फिर बाम 'मुरगत ! पर्व है पामा पा भी गानfr frगा विन मर-माग बिमारे भी प्रागा पा पान पारि लिन पप्रियमुपर मार लिए मदा में पे सोनी पर मनो टामन राइसन गो ! यहा। मुर-ममात्र का गग मुनिषित नान बिप THIT विमम माम्प माप पातम्प गाम्तिा पाना पपिरार! , एम-दर भरमगरनीसम में।
प्रथम सर्म
किन्तु प्रश्न हैप्प की स्वतंत्रता मा पार
भीवित रह सकया मही सोकर पिसे उमाब।
स्वतंत्रता प्राग सृष्टि के पुम कर्मों की
स्माता भित्ति भक्ति की सरमों की
स्वग्नता है जीवन का जीवन पेतन में
स्वतन्यता है सोभा की पोभा उपगम में !
सवत्रता ही विस में है मुरपण ! सुरपुर-मुहति
स्वतन्त्रता ही गए है स्तम्मता ही है प्रकृति ।
स्वतावा ही सम्मति का पर विपनाती है,
स्वग्वाही सत्व-साधना सिसमाती है
सतनवा बीवन को पणीय बनाती
स्वतन्त्रता है कर्मों को करपाय बनाती।
स्मतता के साप ही मनुष्य का मनुप्यत्व
स्मतमता ही मुऐं को रेती पर बल!
पो पन पपमा स-सपासन होते है
पीमित ही बीवन से कर बो मते
परमाता-पिप र मिपता ही जाता है
मीकि-मप्टरमा दासता सिवनाता है।
पौर्य प्रेम मानारि गुण फिर एनमें मिमते नहीं
ससिसनीन सर में भी स्मिा-सरोग पिमते नहीं !
यो मुरमण परवत्र होगए अनुर-नृपति वे
वो समझो मुर-पम उठ गया शिव प्राति से
प्रमुर राग्य की भाति मुरों को फिर गिधा
से पाएगी पुटिम ममुरमन की दीगा!
प्रसार त्रिम
हिमा म्पसम विसास सब मिहिन बनी सहर ही
भारों के पापाप से कप उसी तुर-मही !
पाएमा प्रयोग सुररामों को रिमाया
कि है भमुरणप में एएको वर्ष बनाया
पौर यह कि उनके पितु सम्म पानी
म्यैव बनेगा फिर उन पजा मनमानी!
भेद-मार पहनमह के सुर बन ठने परम
पापी पामे पर पामिर पापि मम ।
पता हो, परसवा को सोहर ग्रेगे!
पररा रण में परि से बने हए मरोगे ?
बन पारी के राम परष उमड़े बोपोये।
मा जिमी हो बलिदेरी पर सोपोगे ?
सोपे मिन ए की स्वरता पाती st?
पपरा परि 1 सेम्प को प्रोशित में हाती हो ?
स्या गोमे तुम मुरपुर को पाग मुरावे ?
सदेपरी पर सम्मुर र फेसाठे ?
या मुनों में पी + मुरबानाएं-
सुररमो रे तुममा श्री सुमर मामा--
दवी रि पिस र मुगाने के लिए?
wि
महीम !" और म मया शाम
गुरपनि रि ने सर मुर-मुनो भान !
प्रपर
बम्प पीरमण ! यही तुम्हारे बोम्म बात है
इस साहस
सम्मुव रिपु को क्या पिसात?
हो बापो रण-मुग्म प्रार नित्र म रिसमाशे
मरला काते किसे मा को यह सिखसारो !
बनि-धीरों की हाफ से प्राय उपप्रहना दिन
पर-पर पर रण भूमि में पोसित मरियो पापर्ने ।
बिनारो पद्यपि हम सब पाम्पि-उपासक
नहीं चाहते बनना हम पोरों के सामक
सपि हममे हर गृहस्प सबमे स्वतंत्र है
या स्वतत्रता ही मुरपुर का राग्यवत्र है
जबपि रसाई एम्प प्रभीन है,
है प्रणात उतमे पिक ही हम पुर प्रवीण!!
दिलमाो निस भौति हमें सहना पाता है
पोर पशु से भी मिमार हना भाता है
प्रेम-पाय के सम्मुस हम पिस भाति म है
सम्बनता के सम्मुख ग्यों हम परण-म।
उसी तप समत्व के लिए प्रत्तप की मान!
स्वतंबता
के एर्षय पामबराम।
पापी समर मगरनार पर सब भागामो
सारपान हा निर सेना
में गुसर, महिल तुम्हारे माप बन मा
दुर्ग! परन्तु रन में तो प्रथम पर पा|
मार पना ! समर में पिमरा मोर बम
राबरकार कोई पुगा पार, पर मोना मिने !
पर बनायो
महार विपर
पठो पक्ति देने पमुर देखे सब संसार
कि इस शान्ति-सर में भी प्रमय-गार !
उठो सिंह ग्यों पर पाकर सम्मा पाता है
टोकरमा गिम ठप सर्प फन फैमाता है
पड़ो गिस व पावस-पन रिपर पात है
गवन कर पापाग सय ता पहनाते है!
जाने परि पाने मत पौर्य मुरों ा मुस पा
पान्ति प्रम ग मही पापा ममा मुप्त पा!"
उठ सभी जय-पाप म ग गया मम ।
मरा रोइ रम प्रति-हाय मानो लिये महेश !
पमे सभी कर गको प्रेम-महित प्रणिपात
मितने मुप उनमी मई ममी निमम बात!
मरे ही सण पर-पर में
मुराममाए
हमरम मित्र पति-मुनों का मगाने लगी
बीरप भूपा शिरम्माण ययम्म पानि
प्रम-प्मुन-गुमति पामान मगी!
परिप
पमि
पाग पनु पोर
शरिरसाद मुइ मजान-बाने ममी।
बीर धर्म बीर म वीर गुमनान प्रान
भान बमिरान पी पपा पा मुनान मगी!
साम-दाम में घिर गए, पर म यह मदो-
रतना सा रस-मारमर !"
प्रथम सर्व
पठे है देखते गिपाल इन्द्रपुरीनार
बकि रक-पूर मुर-सैनिकों से मर गए
पूरे युगा बमहीन बमबान समी
भाग रम-नय र पप मे पर गए।
प्राय गम पाम पर-सैम्प का प्रवाह घसा
मौर रेख भीत वायुदेष भी ठहर मए
पम्पक पमेमी कचनार गुन्द कलियों के
पुम परे मुब मानो गीति से उतर गए !
सप्त
पामए मुष भी निमार एमेत नरों की
संग्य लिए सेमिरों का साहस बढ़ाते हुए
मुणगामे ऐरावत-मेवारी
मानो पैर रस की मुष्टि परसाठे हए !
र पतुरमिणी चमू । कर रिया ॥
पूर रस मिनिष पताकाएँ गड़ाते हुए
नाम नमोदेश मप्प मातों की रपए पनी
मानो रोप-पिता की मीषिया बनाते हुए !
गिरि-गग मुहह
गू छठ पब मे पवन
जय बोपणामों से मुरित नर-मामों की
मर गई पुरानो म पो पी मीर पनि
पहनाद-मुख भन्मकार करवातो की
या की मारि-मम एरित कमाने मिए
मोपमरी गर्जना समर-मतवालों
मूमि पम पासु को पाने मपी हम माति-
मानो पम्पनी प्रमप-पन-मानों दी।
मनार बिम
पा रहा पा संम्प या पा बामनी प्रवाह, पत्र
ही ये या ये तार परमों म नृत्य करते
गर पेमा र बा हे गिरि-सप रष
दे पा मुऐं के सदन
५ नमन मरते!
उमो ९ नीरगीर-निषि साप-माप या में
मेर और निगमपन मुग्म हो पिणे
मामे न पा ग्ालामुखी मिहार समूर पिसे
एम म पमुरचना के लिए 4 पिरते'
पाई सुम्प पीग गिदियों के पास होन
नमे पौर पैर एप्टिमममाने ममे
पास बन्न हो पना वित्त म भणीना भी
प्रम्प पोर भूमि मानो मिम मित पाने लगे।
प्राव पास ही में मूर्य मस्त होमपा फोर
पममा के लिए प्टि गम्प में फिराने मपे
धम भूमे निपानाब भी मार-म्य लिए
पिरामि पान पूष ति म गाने मप !
रपर जयन्त पनपरनिर मुरामपके स्पषन में
बया-गलिटा पा मरियमय रसमान प्रापन म
मागप्प समीर साम्प्यों में पुलों के परिमस से
ममिम पहारोंनी गौतमता रो पगिराश्मित से
पीनस पौर मुपरिपत बन समति पातर पाता
एम पापा पारमियो के गुणी माता !
अपम सर्व
जयन्त र प्रह-पाषा की पार्व
मुना पा पा
प्रावर किस विधि सुरपा पमना यह बता रहा पा!
बना हा पा मिलने पाहन सो घाम पप
कहाँ-कहां एकमा होपा सब कितने विषम समे
कौम कौन से मीय बस के पप में समे
किस-किस सम्मान्य प्रविपि बनना सीपार कामे ।
बमा पहीपणी घधि-स्वामि मुग बार-बार
एस मामो वन को पुस्प बाप ही की
कमी करतो भी पवि से पसार कमी पूर्व
मम्बरों के मानमर्य पर मममा पी थी।
पगमुख पर पतंगों पर
करनर एप शेप का मया पी की
मुख
पोनटीपी बिबम मामठी पीकभी
पत्री पंगहाई मेवी मानो ममसा रही पी।
ऐसा ही समय भीति मरे मौम्पसम मानो
"म राम राम में ही विप पोमन रे मिा
ष-ममा प्रति मुगम्यत्र
इन पाने एक सती न समाचार लिए।
*मही दुमामा समे पा उपन्त ने सत्वर,
पौर न पा ही पा एमा शिर मत लिए
पविता ऐ मोम पाने सगा जवन गया
गने ममी पाए सिम्तनामिन-ए !
प्रमार गिराय
उपर तपा गयो ग्यों गयन्त सम्बार पत्र के पाने
रसों-स्पों मये माष नर उमके मुख-मगत पर पिरने !
परवे-पाने मकस्मात् पपूरा परि पा मामा
तटस्प मुर-पामों पर निश्य प्रस्पाचार मामा !"
कमी क्षोभ में भी पणा से उसमा मम भर गाता
कभी पाता मरि कभी पा बसनों प्रपर खाता !
देष देश मा ग्या-हरय म नामुमा बाली बी
रह-रहार प्रश्मा भी मन में पांधी-
मीमीबी।
किन्तु म होता पा माहम एप पपम्त म कहम का
समम रही पी निरषय गुपकारमा पने पा।
इसी समय मुर-पति-नारन ने ऊपी एप्टि उगई
किन्तुम भी यह पद जिगने पी गपि का हमी मिसाई!
-
भरे हुए पसमें मूतन रिषि मार मूनन :
पणाप, प्रमिताभ: ममी
उपरगुपम
स्निाप भावना मुग्प भावना मी हंगाने बामी
बह परिमम-मी एपिहरय-पपि यो उममाने पाणी
समयेही पी फिर भी पी सपये प्रपनन मानो
मपुर पाणे ग्यों रामी ने पो सो हो म प्यापी !
प्रस्तु फिर भी हम नपा 1 पन न गमना
मुनकर गा-हाय में भी ग्यों रोप परम मा दाग !
बाल-मू-मम तमा उगामितामा-मुग राण में
दमासी पाना समिनि हिम गिरपिापण में ।
जपत ने रि पर मे मैनावी महानिरिपिगामी
पौर रस मीपे ममरोम में गाने पी टानी !
प्रथम सर्व
पठे प्रधामक मनों में दोनों पुष भाव
किन्तु मिप को पा कहाँ पासीर बिमार !
पाणी-मत पिर हो रहे, यो दोनों रग साप
मिपिनाटि ही में दिया हो यो युग सवार।
अन्त में सास करके पा सनी गाने
निचय ही माप
प्रारमे यह पीपित पर ठार कमी मेरी बात !
ोपमा धार बया का प्रम
परंग लिषय या प्रण मपन माह बन रक्षक मगवान |
प्रत्पपा ऐ पाप निश्चिन्त पानती है मैं भी
दिन
पर से सेना पनि-प्रनिमोष पहण कर सग बार तमवर्म ।
पिपाना पर को पाना है म माग्यिो ममर भूमि के लिए
म गिरते रामके पर नहीं बिना परिसर मौरिसत पिए !
पौर यह महो तो मुझे माल मियामाना पनिम बर्म
हर विधि-विधि माना पनि मम हमारा है साराणर्म !
कौन है को छिरिपरीत पर सके हमाग ?
प्रेय पप रम पर माविम जीवन का ग
मठ मगर यह करते हुए बया , पति-पर किया प्रणाम
अदिता जपत में भी पहा "करेंगे सब गुब सीमा पाम !
मन्विा करना प मी प्रिये मुरों की मियागी विरस
मरप ममुष रितुनी र टहर मरवा मिलन ममय ।
प्रस्तु पर गिरा पे मारपी बार दो मिा यार
मिस्तर पप बगाते हुए, कर ऐ मनिक सर !
बयानी ही मेरे निधि प्रनपिसा" फिर मिया प्रणाम
पाक समान भी पति हरप में बराबर मूनि समान !
माघ
द्विताय सर्ग
मनुर मनिकों ने उपर पा मूना मान
कई प्रदेणेसरिया मन परफर राम !
प्रसयहि की वर भनुरदम फल पपा भामा मे
एक पार से पाग नमारी मुममय मुरपामा में !
देशरपान भ्रष्ट करपामिक पप मटरगम
उमो हम पहो मे पिगु पिसगु तक नहीं मिपाम!
हिरबो भाप सरो उपगारों के पाट मारा
भूग उठा गए 4 मुर-नीमा पबह प्रान्तर मारा।
७
तीय सर्म
प्राय नमाई पईयनों में माया सार प्रायका
प्रात धर्मों के लिए कही ए ममान पामय का ।
पनपद नपचर तक मे मिग-गिय प्राण पतुरिक मारे
विषम पात शि, भयमामों में गिरि, मन त्यापे ।
बन-बमाबानमीमा मिति पराप
सम भूम्य
में मम्मि करने बत-विसास।
तमस
कोष के सफ्रान
महामतप-विमान धम
पूम-बर मिरे बन पश्य मम पाने मये
बढ़ाते पन-बटाएँ-सी पाते
प्टि निफिस बनाते पार विपठिकाने पे!
मौत सभी प्रामी पन्य-से प्रम भूम मासा
ही की पोर पम-मूम मायेचो पाने गये
पौर दुष्टता के सस सु देखरेच यह
महासा भूमि-धम्म को मुंगाने भने ।
मचा हाहाकार पापों का न पाए
इह बन परम बम भार के सरन गए;
प्रम के पयोद मुन्न समा के बिनौर भो
प्राग की पोपुल बन गए
देते पे सांस्म सिंधु सभ्य भागिर-सम
कम बन पारवे ही पन्ध भिका पए
करते थे मुख बोस्निग्प प्रभा को भी उस
पो प्रारण बन भीति के नाम पर
प्रस्तु सांस तक यों भमुरों ने घोरिपत-पम मपाई
जिपर मए उस पार नाव की मांधी प्रबम पठाई।
कौन महे मितने उस रिन परबम सो पए सदा मो
तिनों के कर, पद र दुम-वीपर वो मप सदाको
स्तिनों में समाही से पा पाव-मिचौनी मोटी
पीपन-गोर तोर इस यम से पगत-पिता से गोरी !
कौन कहे या पाप ममी की मुर ग्रामों को म
या सुरगण-हदयों में पति पौत्र भाव-पुगों में ।
इन निर्दयबारों मे मा कतिपय को विवश मुतापा
परवा सारे स्वमर को भाषी पण माया !
कौन पहे पशुमा नगा वा कुष होमी भावो में
या रमने पपगादी पीपा प्रमय-सात सामों में !
मनुर हमनेम "पा गुम अबसर प्रापा,
मे बिना हानि ही हमन स्वर्ग पम्प पाया है।
भब गुरवण का माहम पा पो हममे पुर करेंगे
पनी पार नामी क्या हम पमुरा में मोए म !
पिनु पता ना दिम विपाता रो स्या रति प्यागे!
भरिप्य-पर पीये रिम प्रमिभयदी तयारी"
पस मेम्प मर मागप्प ममप बम ग्यम्स मरवा पाए,
मर-गट मुहर पवन पी पाप नमपाए।
पनुर रार में भी पामा करी 'यही पर ममामा'
पार इसी सपन में भर ममारे मिति तनापा।
रिसरा पा सुर-बन म परि की परामपी पाने
मग अमरमग मगर म म तिर मिाम बनाने।
वितीय इसी समय कुध मुसषरों मे पा सम्बार सुनाए- 'मीति-पस्त सूर भाप ये है रेरा-और राए । सात-पात पोयम तक सुर-सेना का पता नही । पर पाम्मए की मी पपीनस कहीं-कहीं है। सुर-मैमिक रिठने पे प्रामा ! सर मार गिराए, पोर पो बन्दीसह में पो बो-बचाए । पहुंचे है न अभी तक तो सुरपुर सम्मार हमारे फिर भी बिठा रिए ! सारे नाकों पर हरकारे। फिर क्या पा निश्चित भारनिन प्रमाण माया मृत्य गाम में मह-पान में मनमर रेप मामा । कहीं हास्म के ही गान के मने पुहारे पुटने कही पिकेहीति मगे बगाने नुटमे। उस पोर पमुरपति मी मरकर पियपाभिमान में मुसमता मिग रल-प्रषित मुन्दर विवान में पारा ठसावा ! सेनापति पण पान दिवस पर सारे व जमाने मिन-निगमकीरतियोपोरैगरविषिष सोम रिपमाने! 'सब पन मुरसग ही रोपी 4 पोर प्रमुर निर रिया मुरों में ही पात्र मा पमुमता का ऐप ! प्राम-माम में मुर हपा फिर प्रमुरा न म पाई पौर पराजित मुरगण पर गोषित पया रिपाई! पंगासि मा हास्य माल मा सगा पमुपति मुनम प्रमम-मेप ग्पा मर पापामगा मुक्ति मिने !
मुम सब पात फिर स्मरवियों का उत्साह बढ़ावा
रनकी हतियों पर हपित हो प्रसन्नता दिलमाता
बोमा 'मापोमो रिमान्ति मनमर पानम्द मनामो
निस निस्मा भी प्रापरसाया हो यह रिसरामो ।
प्राव उपासास में है मुरपुर
नापना
भोरमकमान पन में ही है सिविर बनाना ।
मुम मातिषण गरे हो र सतह प्रथाम
मा लिमनिर पिपिर, रो रियाम ।
चिन्नु भाग्य की बात नहीं की हम मन की पाही
मा परे पपिपुरी में मोरे हा सिपाही !
उनका रमपति मुख नपामा पानी पपा मुनाने
- रमिभर पी सब भटमा मिनपाने !
पेट सपा प्रमुरा भी नही बि पामन विदार
पौर मा मुनने गित रेकर उमरी का मरिसर !
गमा मुनान रमति भी मुर प्रमुर-पुरको पार्ने
पहोनही मिग बिपि मरी मपम हुई बी पाते।
लिप प्रसार पसुरों में मुरगा भस्म froमो दूरे
लिम प्रारमिश्मि पात के मुरा मारणे टूटे।
मुम मनुषि मुग पर भी प्रमना मा पाई
रसारिरमा हमिन मुग उमने यि उगा!
रिमी सग पुर मोगा मातु पी पार
प्राने में मगn पा सानिया रि!
हितीय पूर्व इसी समय कुछ गुतपरों मे मा सम्बार मुनाए- "मीति-पस्त सुर भाम पेरेर उठाए । सात-सात योमम तक सुर-सेना का पता नहीं है जबर माझमण नी भी पापी बम कहीं-कही है ! सुर-सैनिक जितने में प्राय है सम मार गिराए, पौर पर है बन्दी-गृह में बोई गवाए ! परम ममी तर तो मुरपुर सम्मार हमारे फिर भी विल रिएसारे नाकों पर हरपारे । फिर क्या ना निश्चिन्त भाष मे मित्र प्रमाण माया मच-पान में मनभर रंग जमाया। गुस्प-पान में भी हास्य ही भान २ सय फुहारे पुने म्ही परपिकेही शतिनमे वगाने मुटने ! रस पोर प्रसुरपति भी भरकर पियामिनान में मुसराता भिम रल-गचित मुम्दर पिवान में पाकर बेटा परमावा सेनापति करण पा सरे दिवस भर सारे वृत बतमा मिर-विमरमपीपतियों को रैम व विविवरवा मे रिलतामे 'सब पन मुरपल ही रोपौ प पोर प्रमुर मिर किया मुरों ने ही गाठ का प्रमुत्तों का पेप। प्राम-पाम में मुर हुपा फिर पमुप ने बम पाई पौर पमित नुरमरण पर देवोषित राहिला! पंपापित मा हाम्प गहिन मुब ममा प्रमुरपति मुनये प्रमप-मैप मिष्ट हो नाममा मुलि हो मिलने
मसाप विषय
मुन मन पाते फिर रमपतियों का उत्साह महावा
उनकी पतियों पर हपित हो प्रमन्नता रिपमाता
मोसा 'बापामो विधामि मनमर प्रानन मनामो
जिस सैनिक को जा पावसपना हो वह दिनमामो ।
प्रातः उपा-माम म है मुरपुर को परराना
पोरनमान बन म ही है शिपिर मामा ।
मुन सपत्तियण ना हो कर मस्तह प्रधान
गा बिदा मनिज गिपिर, परमपा विधाम ।
लिनु माग्य की बात पहाबी हुन मन पी पाही
पा प? रेपिपुरी मे मोटे हा सिपाही ।
उमा दमपति तुप मगा पा प्रपनी पपा मुनाने
पग पर रिमभर परी गम परमात पिमरान !
पर सपा पमुगरा भी यही निर पानन विपाकर
भौर ममा मुनने पिता रमीपा मबिस्तर !
मगा मुनाने समाति भी मुर पमुग-पुरमी पावें
समानामगि विपि रमपी मापही पाते।
शिस प्रार मसुरों में मुर-यह भग्म मि मी मरे
शिम भार रिम-रिम पम पमुख मारप रे
गुन प्रमुगपिा मुग पर भी प्रमाना पापा
सानिमा इमिन मुग उमा पि आई!
निपुगी पण पुर हो को पार
पान ग मगा गया सात मगिर।
१
मितीय से
कम्पित पर-पर मत-नयन बागीगत इसमाम
सड़ा ए पया ए पास प्रस्तर-मृति समान !
रेव प्रसुरपति में भी पूछा पारण पबराने
कहा 'कहो कच काम नहीं है इस भए मप बामे का ।
रम है, हा मान बातों में परि परास्त होते ।
यहाँ पषित निश्चय ही हम भी निग सैनिक सोते हैं।"
मपति माश्यासित हो बीना "ब मुर में मारे,
एक स्थान पर हो । असुरों के नानी हारे ।
है उसका भी पापी मेरा सहपर ही पन्त
पिसी पीवि-समा से पूरितमामय रिपन्त ।
सुम पावेग पीर प्रचार से मानो पस्थिर होकर
मरणभर रेप चमूपति का मुन फिर गिर पंर्य संगोकर
करने मगा प्रभुरपति मा बमपति यह भी है संभव।
frपा अपरन्त सैम्य पा ऐसी जगह परामय।
नियमिव पुरम पापा पा निम्यस्त्र सुरों से माला
निमय प्रहमार्यों में रत प्रामीणों पर गा पहना।"
बमपति बोमा "रेर एक रा इसा तु रिप
भेगा पा उमे
पारने
पिया।
पिनु! मोफ यहाँ प प्रारंप २ मा साइमी पीय
पता र सपि पहा मर्न नगिपिन न ही मुरा प्रापीर
हरपि माता बाना र पुगा-गर बरने पो पा रहे
मोप-पर-मोपपईरिनु म पीपे सिम मर भी रहे।
प्रमार विनय
बात भी फिर इस रण में एक प्रमुवना पासुत पोर नवीन
बार ये हम पर करते थे म पोर मते थे निराठ भी न ।
पहव समझाया मत बन मूर्प करो निय पन-जन का बमिरान
पस्त्र मेकर पा तो रण करो या परो प्रमुरामा सम्मान !
किन्तु बामे के 'प्राभीमात्र हमारे तो है बापु-समान
किस तप कर मरते है भमा हम मिमी प्रापा की हानि ?
होम अपना मनीति मे कमी सत्य पर सहदेना प्राण
हमारा प्रपानतम पर्म धर्म पर हो पाना प्रियमास ।
पता पिमय हमारी पहीदिीपित होतम पर्म
पना मिानों में पर्प तुम्हाग पशुपम पौन-नम !
बाहो मही पीर के पति स्वर पर परसा हम पपिकार
रितुमने को अपने स्वरष भी नहीं हो मा मापार !
ममी पप में पाए गए. नो मरने की एप परसाद
मंगहों पार गिराए मग, तापि उन नपरा रस्साह !
सर पा भारत में यह प्रभो हा ही प्राणापूर्ण विधि
ऐगार हो जाता पा उमे पार त माना स्वयं पवित्र !
गुमनाम तना में पशु-महप यह सा माहम प्रति.
मरप परति प्रेम पर पम्प मम निर्मत हिलगिरि मम भक्ति!
नाम परमार्यो तर में महा पनि धानेरा उमाम
मातु-चम्पा पर भी प्रगगर्ग-मुर्गों पर ही प्रममय हाम !
एक के पिते ही साम मरे गा मा जामा पही
रेग गातो पी yिा पौर प्रगना पपी म गाने महा।
वीय सर्ग
कौन बा फिर बो उनपर सब घोड़ता बनाय पापाप ?
दखीमे क्या होकर फेक रिए पबम्त ने पमुप-बाम!
प्रम्प सेमिष भी करने से मारने में समरोइन्कार
मता पीछे हर पाना पा, समीको रस बन मापार "
पर पसुरपति को मुन यह रूपा या स्पन पर पापा मेष
चार्य प्रिम को भाता । यहाँ उचित प्रमुक्ति का भेद प्रबोप ।
कर लिए प्रेम । मोह
पया पायरता पमा प्रनीति
सत्व-सम्मुन मुना प्रशाम सरमता मूगों की पति ।
मानवा फिर किस निधि मुरप-कषित वृपपत-गुणों का मोल !
तुमा हो म बी यहाँ पर दुरि सत्य को रिस पर सक्ती तोन !
साप ही पाम कृति को चित मानना परमा मह स्वीकार
कि उसकी नस तोही पनप पा समर भी परवापार ।
पौर यदि प्रमुर भूम मि तुरत इस तरह बरसे स्वीकार
तो
मुगम पुन मम्प मेर हो क्सा पाए संसार।
मत परमोना बम-बम बहुत दो पुश कापरता-गुण-बान
पान पाता है न पायम सम्म हो तुम भी सित समान |
पौर मब मौलिए समस्त की पगरवारे रंग
पाहवे हो एपमा एप उमे पपा मेने वन रंग !
परिपत सी सण उमे हमारे भाग नायर यही
उमेगा पी ना माती भी हम नए के बोरों की नहीं !"
मुप मुम गाम र पठा और भय पिम्ता परखामा
मित्र पनिटार म्मान पापना में भी लापा
प्रसार विजय
गया, पई पार प्राप्त महा प्रमुरलपन का सार
किन्तु या वोठा पा प्रथम ही हपा मरने को क्यार !
पार के राजपा हा हय पर उगके प्रमा प्रभाव
हो या पा मानो गाम्त भूस वह अपना सरन समान ।
पानवा पा फिर यह है पनि प्रमुर से पाना म्याय उपात
मत बोना "तो भय पर्यो ? तो विपाही नपा मने दात ?
पान का पया में कि हम धर्म मान ६भूम कर रहे पाप
धर्म ही पा तब मेरा तुरत भूमि पर परेना पर पाप !
पसो सब कान में गया भीतिरेमा पपा बह मगा प्राण !
सरप पर मरमा भी है पेष्ठ, पाप से पाने में नाग !
किए। तिने ही पाप साप सग इमरे रम्प-निमित्त
पार हैरला मुभको रषित प्रमय हो उनका प्रायदिन
परिपार्ष पर देव पहम गान
तो है है पर्म पर भी हमार ही प्राण ।
र स्वात्रिय समिरा हम विपटिन पा मरप,
प्ररपुर हम ये साप मे पर भोर पप भरप
फिर बोला "पर तक भुटिपर भी सना है समीर
गि पियाम बामने पर मैंने रिपोई र!
सरा ए म निर शिलामो रे ही मनुमार
पापी मुम पाम पापा ठरहीररिपा मुपार !"
गुरप मोरने नगा "सग्य में श्रीमी गति?
पानिपर ममभन नपता है मान को सन्नि!
२३
द्वितीय पर्म मही पापियों को ममता है मय कर्मों के पनका बहाँ-सरप प्रेमी को होता है विश्वास मुफम का !" मुरप संप परन्त पसुरपति-सम्मुख पाया देस प पसुराधिप ने मी भीम रठाया ! कितु इमा मह पति बपदम्त मुलाहति टपक रही थी जिससे निर्भयता पश्चिम एति ! ससके मुख पर विर भी न बा ताप-परिताप रा बैठा पाबह सिह-मम मे पामय निर बाप का । प्रस्तु पमुरपति मै पृषा उससे टू स्वर में- "कहो किस तप हुए पराजित मान समर में ? गया चार वे हो तुम निर पापरता ? मुरपण है सम्मुख दियाई पामरता पा परनामों में ले पा मग्गा पाईनही ? परि हारे तो पर्यों नहीं हीरानी हाई नही ?" पर बना दृपदम्त "मुझे भय है , ताप म हो पिया मैंने पोई प्रपम्प वहाँ पपाय पाई मन पचम में मही हार पाई है परि एम-चौरस में। हारा तो मम म यो प्रारमा रा पर पौर मुझे इम हार पर प्रसन्नता , मरं है! मुन हिरम्परपा राप्रम परोसपा परोप- 'नने पर पी बर्ष १ होने का निर?
मसार विनय
इसका तो यह पर्व है कि है भीति वीरता
पौर पुणित वापरता का नाम पीरता !
निचय तू परम्त पार हो रहा प्रमित है
पाहो बैठा सिी मंत्रए मान-रहित है।"
एसा न हो कि यह तुम बिना मृत्यु ही मार मे
पता ममा हो भूम यह परि तू यही मुपारने !
पर बोमा प्रपदात है यह अनुपित पनुमान
म तो प्रमित है पित मम म है हरप पमान ।
बात पापी किवीरता में दिया पार तक
मीस्ता का भूत मेरी दुटि को प्रमाए पा
पौर बम कप पर पूरा-स्वार्य करमारि-
पा पयोर मरे हान-मूर्य पी पिए पा !
मोह पमिमान पोर मोम का पोटा मुझे
पग्प बना प्रमावार पाप में प्रमाण पा
सत्य प्रसरण पाप प्रेम को बया को दोप
दिलाने का मंत्र मुझे दिनुप बनाए भा।
पिनु पार देग दिप पत्तियों भी मतिरपति,
पहीन सम भोमने के पमामानों को
ग म मी मित्र पोर पार में परित भाव
रेश गाने बामे रिम्प बमिसानों !
मुन-गुन
वीरता मुपीना
मारला
माप प्रम परे राप पीरों के तनों को
रंग मिया मने है सामों भी गानों को।
२.
मितीय सर्म
पात
मार गान पाया पीर-धर्म का पस्म में
पाम बाना दि पुर पर्म मही पाप है
प्रतिपाठ रहपाव नही पै माप
पुफ्त सवा ही बीरखा पा ठीक माप !
पौर स्मार्च या प्रवर्म-मक्ष सिपाही बन
रक्त पहाना तो नई पति-माप है
ऐसी कर पक्ति पा समूह बरदान नहीं
पिाय के मिा विधुप रेवतों का पाप है।
मुन पमुश हो पधीर नाम रठा "बम
दुटिहीन बम्ब कर पर्व बरवार को
म्पर्प है प्रयान विपरीत विशवा क
मपता नही रामडीह पपवार यो!
"गग्यशाह माँ पापी
है यह हमही है पुनौती बनवार को
मम माम मू मा प्रब मारपी मनीति मप्य
प्प बनाना पिर विचार को।
नही है यह पदम पौवन पीनिक वन पर
मिराबादी सो शिर तुम गाए पर!
जो पप प्रनिगाप .प से उत्तपन ली
पान्ति मरापि युगप-गों पीहर पती है !
पोर न म्पित है मेरा मिणम हामिति प्रम भर पर
अनि तिमी पनि मानी हो बिमा पर!
मसार विजय
सत्प, प्रेम पी पिएप यमाती है मन पर प्रधिकार
पाटनही सको सिमा बम्पन को दुमिपटार।
मुन या पाम मग गई मानो पमुएरार के तन में
बौता 'पभो तुम दा दुरी परवा मा सण में ।
है पुष मान सामन रिमा वान बना है?
सिरोपपन प्रपम पर की गावा मुना पहा है।
किंतु हुमा पान परम पम पमरी का परिणाम
बहन मगा रमी निमपता स बह प्रमि पर-पाम |
'मुझे मार है प्रमुर राम + मम्मुम बोल रहा है
मौर रहीडी टिम नीति का पर्दा पोम पाई।
पर मै निक, पावा मुमको निर्भय हा मरना
निय बिराम-बर्मनी पर मन-मन मबाप परला ।
पामैंने निर पम चा नही म्पपम
कर समता में नहीं भौनिया रो अनुषित पर्म।
मनिट में पना तुम्हारा विसा परने को
प्रया-पग्र राना भी रसा में मान-परत रो!
रिमुनिकों पीपा कर पाना माना
पानापों गिमुर्गा पूलो पर पपु-मम पण माना
जानु प्रयामा भूर-पीटकर परसारिका बनाना
पर मारापरा पर गए गाना
पपग प्रगति पपा मप गप बटाना
पापीन नादम तिमनना
૨
हितीर सर्व
प्रश्न यह है कि गर्मनवपरीत प्राधरण को क्या हम पाप!
पौर रामनिवारय धर्म रमा जब ऐन साम्म ?"
फिर प्रमुख सेमापठि सा 'पापका भी है ममा मय महो।
पितु सपति बोला सहरोष “मी एंगा में या मति नहीं।
मीति-इव वमपके लिये धर्म को करने से पतिवार
येष्ठ समस्या नि समाम तुम्हारा में दे देना पाण !
पिश मिमै मित्र की नीति मिष मीमारी परिक!
सिमाए मित्रको प्रम्म पाप पर मित्र नहीं बधिक
इस पौरों की लिपि फिर “मायु पर के सारे उपकार
निकोटि पर परिहबमा रियासते मरा में सार ।
तो मरहम सब सिरे पर्च पायापासिका।
परो मम श्रुटि को हम पी पित्र यहाँ से मन्तिम माम"
निपात मे पर 'म मानता में तो पुरि भी नही
। पन 7 पपभी दून मुपारे गा मान होगी।
का मेरा म रिमा मेना परि पाप
होगा पनुगामा पा मार- गलता परने पनि ।
रिया यह बसमामा बमा पम पम शामीको
निषिदेमर बार पेसोपना पली!"
अपुग सारि पोपा frg मोर पाप मान !
पाप गरिपा, पनाममी पार तापमपाधिन पर।
प्रसार पिय
हा, मौकर सनुप है किम बन का म्यागार ?
एक पूल से घर में बिमरे पास उपरार'
शिमोगार, पाप भी हो परना ही
पापामा रे पिरोप में भी हा दरना ही।
'पपिर भमे ही उर पाग गाकर मर मीने
पर मतृप्यताम मौकरी पर पीपीरे।
रिफा काम भी मिम ममी पर प्रमुग काम मापार
मानन को मनि के प्रात मर्मापागा के प्रपिर,
पोमिसना गम में म्याय बिमा निमारा अपनी पति
धर्मापा गाने पेप मा में, बिना पर मनि।
पीकरण । माषु : पप गार पगार
नु गर्मों में पति हो पाती है निम्नार ।"
मुरुप राग ममर-गन्नर पोर भी मर ा पार
गोमापन होता न मुल पर मैन पो मार,
पम में मारे ग ममुग म रहा "पीने पुनरिपार
पम्पपा हम मरा भी स्पारपत्र पर पर मीरे पीर ।
हमारी मदिप भी मही रिमोरा ग में पा पपिपार
निमी पति परिशिप परे । मनिए पो मापार
पामगर र । मने रिया गाभे व मी मही
पौरपान सपन शनि की नपरीति मे नही!
मही यह माग गर्म पुर। प्रम frमा मागर
पौर समय नागरिमरा निपिन पपिपार।
मित किनिरम पनुमार मी या सामर पुर
मरीमरी मापी भी गरमी पुर!ि"
रितीय सर्प
थषण र पमुररारी मुरि ठिकाने हद पार गत कोष
जगा काने हो ध नम्र हमी को देठा हुमा प्रयोग
'महीपा मेरा भाग पापि कि मारा ही माए पपम्त
मितु विना मप पा प्रनिरार्य इस प्रपति करने को पन्त !
समा परणाम पर रसे पर पमा माय पर इसी पान
पम्प को पमपति या उन्य सस रिपव में न पुप पान !"
पभूपति बोसे हो हवाय * | सब मिपि पे निषित
पापकी उपरवा ने स्वर दिया। पशान्तिका पम्न ।
पागा के अनुसार ही हॉप सारे काम !
हुप विदा कह भूपति कर-कर पुन प्रणाम !
परम्न पे भी गह-युन गुप को च्यिा प्रणाम
तपादा "किर मी यरि मेरे पोप की नाम
हो तो निशेष स्मएम करिएमा मैं माअंगा
कबह सेना पर पपमुष पतिराय मुग पापा !
मुझे नही १५ प्रश्न का यह मर्म का गमा
से समझे सरा पार अमरो यह ही अनुमामी !"
परप परन्त पीरा यह ग्वार म्पहार
एरंपरस्परण निरपति रसके उपचार
पुखमरिया हा मरहमा एवं मुम्ना रिपार
लिपिा परत दौरा करे समुचित पारस
तृतीय सर्ग
मार
एमपुरी मप्प पा प्रगत पम्प भीति
मिन्टना ना मानो पे ही सह-पा पा ही की
रेपो बिम पांग सही भी गानों का प्रिय
पात-मित्र-समाचार मानो पामा सी पी।
स्तिनी ही पाता रिमी पवित्र हो पाा देश
पौड़ी रमही गे व पपने को गा दी की
पिनी ही
म गिरि-गगि, प्रटारियों के
पीपी चारों प्रार दि भटसा पी पी!
पो-यो नि पाना पा स्पोनों पापमा ती पी
रहद पा पर भागों मोर पानी पी !
उपर दीप्यमी मोम स्नाता प्रमग पपानी न पी
भीतर-बार हो गए, म पपानान !
११
तृवीप सम
बम प्रपात भी मार नहीं मानो "सारप" मावे
सतिन-पत्र भी पत मेत्रों से पामू बरसाते थे
इसी भांति पत्पन-कम्पन में पा सब मुरगुर भूमा
माम कवापित हो पा को इप-कमम तो फूमा ।
दिन पा किन्तु किसी भी हर का नकसी दिनकर पा
पा मारा उमा पी विन्तु कहाँ ग्मा पधिपरमा!
हरय महीं दे पार निराणा-प्राणा, राम-बम रे
मृतिमान पिम्वन राससी स्थिर बम थे।
पन्न में सहमा सेप्या-समय मुना यह सब ही ने सासाद
कि मुरपनि यपित कोई न प्रमी साया है ष सम्बार !
मच गई बम पर पर में म पोकर ही निजमिर काम
पा म से कोई कुमरीप स्मरण कप्ता पोई हरिलाम
मगार राई र र, प्रान्ति-बाप में बहती हुई
पपू मा पोई मार सपा सबसपने को महती हुई
पमी हम पापी मन की मोर, बना मिर-निय सनिपों के मुत
पर हो म्पों मर-मम पार हरित तरबस्तरियों के मुत।
धेनी सिधि भारी रप पनेक मसामपित मर्मन
रिनानी नन्दन-बन के नुमन-एपी मॉति विपि विनय
सभी पापी पनि हल पी सरको पारर रिया
साम्पना ११ माम र पत्र मुनने का पाया।
मुमाया गया पापे मैम्प पमित पा मा मुररस में मिले
मी पुर मोस्मा परिचा पाराने पे निर्मम पसे।
रिया पनीर मे पनुरोष रिभ्यु पारिनाम सीतार
हमारना या प्रेमा रिपान न हो पर परिजीमा पार।
-
विजय का है पूरा पिवास, म कोई एप पिम्ता मर करें,
मही मत-मिति हीन सम्पार रिवीके मुम से मुनकर गरे।
पर अपए कर सभीने पाई किषित पाम्ति
मिटी बहन-भूप पर्प पी चिन्तामों की प्रान्ति !
पत्री पी स्वयं पितमामत किन्तु पौरों को रेती स्पर्य
बताने मपी किसिविपि उन्हें उचित है रपमा निषस पर्य।
किस वह रनका साहस दौर मरों का रेमा गुनी पक्ति,
परेनी प्रिय रहा किम माति समर म उनकी सच्ची भक्ति।
मत में माहत-गरण सवार्य पोगनाएँ बतमाकर मम्म
बताया फिर पा उना सायम् इम रिया में गया मुधित्तम्य ।
इसी बिपिपर पमे माताप नई कितनी ही मिर-मिर पाम
पिस्तु कितनी ही मेवी ही मी पुन पर जाने का माम
प्रतियण रेय रही बी ए कमातीएप पूतम पाठ
पौर पाएँ भी वो सिमिए ! काटमी ता भी अपकर रात
पिम मा जी पी मुप-नीर मिरा पाती पर इतना मार?
कौन ए ममता पा निश्चिम दाय में एक यह मारामार'
इमी भए एमापार रख
पार पो पोर पान-से पार लिहिनाए;
बम घिरा पा साग पड़ी मारी स्मृति माना
मत बनली पपोर रख
मुन
प्पान मन पोर बन्द पण स्ट
मनी मति मार पी मरों को पाठ
पासा पान ही मुना मुनो पारि
सिमीर मुनेही मी यो पान म मा !
पर
पाए।
उठ
पृवीय
पामे रख पीछे पती उल्लुक मी प्रपाय
क्षण में पा परे सभी इन-भवन के पर!
पपीने मी पर रिचा न्मों ही एप पोर मुनी
स्पों ही बास साप उठी मारहार रिसा मनी
पम्मकों की भीड़ से मौ मानो वा गुणाषिक
चिन्तना की भी माहिती के पित्तमा समी।
पाम इतने में किसीसे कि पाया है पपन्त
एक कप पाण-पाति एम एची के बमी
मगा बिमाय हास्म प्रबरों में मौर
पागे बड़ी पनी पापपरी प्रेम भाव में पसी ।
चिन्तु पर मैं पयत में नहीं बया मे पामु
को पिर मुकाते हुए प्रम से पण पुएः
र मामिमी में भी पाही को जयन्त मान
पसे से मपाया प्रेम प्रय,
परतावे
मठा-पी सिपट दोनों सिरोही रोक
मानो मुरिनिगाम में कमाल धित गाए,
या पत्रय पदवी पी मदार परियों में
पोग्गिमा मपर हो मिवर पित्त सहे!
परनु दर्प में पा सरटी पिडीपपा फिर पर पी
उपन्त + रणमिरिमा पान के मुभ-अवघर की।
बमम एक-एक कर मारी समुरा पाने की
पित गरोदर, गम्मियों के पति के सम पाने की
निमामि विपि को सनाधीपमा स्वर बों पा?
पारि पानी प्रथम या में विस्तार गममा!
प्रसार विनय
फिर पुर-गि ने सुरपुर के सारे प्रत सुनाए,
पर्वमान स क पण-वन से पाए पन रिमाए ।
बया मु की ममाम्त मारा के न पा पारा
पहले तनी पुर में ऐसी दिन भर तपी-उपा
भुमित माम्त सेना का रिए से कही पुर नि पाए
हर ठो गरीसर ही नरसना की तार बचाए ।
बस इतना का बहुत समा में पिता फैलाने को
समानोपा सविशेषन प्रतिमा रिसनाने को!
गुने प प्रविवातियों के सगा पमने पास
ने ममी भविष्यवाणियां पर से पिपवाम !
ल सपा की बुटि का यह कर नर-महिषी हो रिन्तित
पग्ने समी मन परने का म पर्व का प्रममित!
पामी बेटीएम विम्ति हो न पटनापों में
मुरगण । पर्यात पोप माने में पापाों है !
फिरपुर-गुरु पौर मुणगारे दरमुर माप मुराराम
मगर
पति पप काम मी मम्मुग उनो बम !
म्पाप-परा रे पुषि मुर्गे का पार-पस पपुणे
मा मगर में विपी होगा विषय म मुरों 11"
हिर पात-रेरा प्रमम ममम ममरपा मारी
बमा ग्या में पूण
टी मा राप तुमारी ?"
रमा मुति मोती, हरता इससे गाय,
पौन स मम पर मुरणामामो हो पपरमा?
गत साधी मा म प माप गम्दी
पोर पाप मे इम मुत्र में परम पानिपाउंमो।"
१८
तृतीय सप
मोमी पची,
'सरिम्हा या मेटी मोम्प तुम्हारे
प्रेम सेवा तो है ही प्राणाबार हमारे ।
इन तीनों ही में है केमित पौरण महिलामौका
मही धर्म है, सब देशों में मुर-मर-बानामों का।
मार्य हमारा है, पुस्यों को निस्वार्थ सहाय,
कर्म-मार्ग में सपास बनाने ष सभी पार
उनके कटु तम्प-मान को परम पम्प बनाना
पर मे भी प्रारमीय भाव रसना बगको सिमाना।
रिसमाना जिम विपि हम पाना हो भी परकीय
कर मेती है वास्तव में पति-पतिमा सभी स्वीप
निस बिपि हम सचमुच पति की प्रापिनि बन पाती।
उनके मुग में सीस तपा एषों में एप पानी।
रसी माति सम्मर बन को भी प्रात्यीय बनाना
सबमुष समष्टि मुनष से पन का मुगम पाना
पर निर पतिल भून मासे गावं समाना
पण मुटुमा र्म-बरी पर मीरन मुक्ति पाना।"
पर भी पापित ही उपा मुरोपनामणवित्त
रएर सोचने ममी महाप-निमित्त !
इमी सम्म हिर पाए सम्बार कि मुर-पति-पर पाया है एर
साप ही पाए दरमुक बने वर्षों में भी पुत्त पनेर!
एबी माहारी पताप किपर मामा शाही
दूसममा प्रणाम प, रिया पत्र मुर-महिरी पाने ममी!
मुनाया पिर मिलिपि परि-गार ना RTER बड़ी
लिए मुनि मनुराए पी म मुन गना प्रारको!
प्रसार विषय
--
किम साहम से नुएँ में निर पप्टों को भून
वर्षा ही में पत्रु पर रिए मत्त गर हुन
एमफिर बोस रठी 'मुर-मैम्प में नहीं किया योग्य यह काम
पुग्नु में तो निरपर ही उह टहरपर मना पा विधाम ।
दूत बोला " मुरपण रेवि फोन से प्रापे में बन ऐ
हाय में मनही र मो प्रतिहिमा से बन रह!
गाय ही मेनापति एपारि ममी का पा रामा पनुमान
सिरपण परन में मामगा मिमेपा हमको माम महान
गैर है पुष । करेंगे मर मुम ही भगवान,
रों का माहम नापीपा पमूपतियों का अनुपम-बान ।
पानापापी हरि भक्ति राष्ट्र का सत्पपूर्ण व्यवहार
करने लिप विपी राह भर ही मनु मन मसार।
पहा शिर सबम
'यब मुरदन पौर्य है एमा दिलमा रह
तुम भी मन का गोप पा मया मामा ऐ
तर हमारा भी है याही पम बिमपर मालीवीरामना
मपानर मन में भी भीनि पराजय पानि बीमा!
रहै प्रस्तुत महिमाएं बना पर मे परम । मपाम
तमा करनपरि पानाग या मिटाने का पाना माम!
हमा इमरा प्रभार भी उषित मभी के मन म गारमा
स्पर निया पर प्राय म ममित ने मनी!
परामर माम मर ही सी मोपन पुप पाहलमय पार
रोपाभी गिा माँ निर पद प्रम पौरा!
गग पनि पासपी रे मन में पति पानन्द
मदी बह गिन नर र परि मामा गदर!
Y
तृतीय सर्प
पत्र मिब, परको ६ फिर कहा "मेर से इसको पात तुरन्त
और फिर पाकर मो विधाम से इस र-भूप का पम्त ।"
बया परेश पी पी गाट, मिने कुप पन्त का रेप
किन्तुषमा म परमे नही दिया ग्रमी में कुप मिरण ।
उपर सबके सम्मुख भी मान पूमा सम्भव ऐसी बात
रितु उस्मुफ्ता का भी पहा नहर में मिटता का पाठ
पहा प्रसमस बेसन कमा मार मनरन्धा में पित
बह बमी मरी रक्त की प्रबर-पोतों पर मानी पाई।
'त नियमापरिको म फूट नयन भी सरियत हो मुफ गए;
पास भी रेस मा प्रवास एक मो-नयों एसपए
धम्त में सारा मप्पम मा सासुको उठकर पिया प्रणाम
पौर सहमरी-सहित मा च्यिा मनाइट सपनामार मनाम |
हिरहो दुमका पर को ममी ने एए-सम्मती बात
बमा समासमा को भोर या होगी र तिमी पत?
मनामन पेनिम्स के पते प्रमुख समानारण माम'
मार्ग म हो परिमोई मिना प्रमुग भर-सनापति बमपाम !
निम्नु पा पर मचतुर, पह गमम ही मरा नहीं जयापीबाट
पौर रे मीप रत्तर बना देगने पर पाने की पात !
जपा भी परस दोष निजी पितु फिर समम त मिर
बाप साहम मूतन पर-बाप स्पापकर सरम इस प्रति रोष
पुरम मपी परमगरम्प मा गा पा र पपरा नही ?
इनमे भी प्रापर गवस, र ए मामी ! मही।
मम्भव । पा पप हो मेरे
पाषाण
लिनु म ममम तापप सम्पार !
12
प्रतार बिजय
मुन जपा करकेबर को गिरा गई पम्पा पर करने एपम
पिम होते ही पेकर या दिना निय पम्दी पाए मपन !
रहा बा पहमे तो चित पिरा समाने म पयन्- गार
पहुंचने में फिर मुरपुर और वहाँ परने में विपिप पिचार !
देखने में पप के मर गप्प मी परने में कोई बात
रितु इम ममय न पा कुछ काम रोकने को चिम्ठा की पात !
मत पा प्रबसर पिम्ता प्रौर गिराने की अपनी तान
पमाने नप पठों भी वह परधित प्रबमा पर रे बाण ।
सको पदामों में हृदय-मम पा पेड़ी उनस-गुपस'
पर क्या अंग-प्रम हो उठ स्मिता की खासा - विक्स !
दूत से मुनी हुई पन-माम अयार में माना मा गिरी
पतिमा पले ही राषि बनीमा मुरीप हो पसी!
पस-यन पत्र म अयम्त का बिसीके माम
भी हो पनी भाम्ठि मनिपों को हमी भेगम
तामा की नरर पनि
मात्र मुमार
ही र भागों म म भानपी रमन ।
माम दिगाई रन पर दो निराश पड़ी
पम्पा मप्प मगी हर मुपों के फरने
पसी तन न उमाने भी माने
कभा गुमानी उठ-उठ न !
भी पप-प पाठ करने शरीर
RTE तानिनु परपा पानी पी?
मारो देश-दप पानं प्रगानी माना
रपये पपुर पदमा विसर मागी पा!
तृतीय सर्म
पानों को भी प्रमरों में भटकाती किसी बिपि
पो न मानोवृत्ति मन प्रब मनावी भी
मंत मे निराश हुम्ती निपास फिर
पुष्प-पणि-सी से। मम्प पर मातीवी ।
फिर परिचारिका में रापिमा पिाती भी
चौपा गए पति-पिक मपपाती पी
कभी पिकाती सारी पम्मा में चुनाव कमी
माती पर सारी पुपमाताएँ विपाती थी।
हए होवे रे पसीने पदराठा मम
पीने की भी माचार पूरए बाती थी
मूनी मब होप कर-कर रोष रोप ती
सोयामिए दो मनाती थी।
कमी मन मार दूर करने को पूर्व मन
पर मर पेन की तरप मन मातीची
किन्तु प्रम पे पो भमक हे इस
में तो ऐमे नमूो मिह जमी गाती बी।
पिरमरपतीपी मांगों में पति पनिषत्र
तब एक पीर बापा र पाठी धी
ऐप भप पारित्रिम गाय नही
बिना रोण भार-युठाली महीं पाती बी।
टेप्स पी कपड़े बना पर पुष
गिर हे पं रममा पर गारमे
संगमगन नाते मनीष
ले ही मतले पारगे!
प्रमार विजय पषि-मुपा-मौकर परस रहे पे सतन रिनु पार ये तण देम की पार-मै सारे ही पास पंपो प्रम मात्र पगे पार बन रहे त्याम्प वे दुरापार मे ! नगा एप ही क्षण के पपा पारन पप रक्षिए नयन हो पहा पपा पप पर पटिश गागरम फिर मा एन ? बोलने नया प्रनिगा पग पुम-मम पणे ग पूर्ण हो पणे समय रातम मार गया की चोटा से स्वर्ण-सी देह पर पमी सीट पानि-मुख ममी भीत हो मपे पाष पापा-पापित ही राम मौरपर सि-रि पाने मये। - म मरियों पाप्रा प प प माय पी के नि मुनार मारी बातें पा प्रापा , मानुमी सिर ! पी ने तुरन ग्यार में पार पिया हम देग ग्मितो उटर पया मास्वियु परने मनी राय ! पपीरोपर प्राशाम पिर मर पर रिटा पुप मापानी भूमि पमामु पण निसर सपा में परगती हुई! पीन देव पनेक बॉनि मागता पहा-"यों मर्प पनामा बालों के तिरप मपारर भोपित प्र! समाप दिए गंगा पीर बन ना सिरा म नया मोन परेमा पौरों से भी मिहल ! नरिए मोरो मिही गर म सग होत नपो पपीर होल हरी पौर हार ग सिनि-मर तीर! तिलिपमि मे पिm तिन- पर पता मोहापार तृतीय सम मास्तर में पिता के मिए नहीं है अब तक कुष भी बात" कह पपी मेकर मर पर नव-नयर पुत्र- पके हाथ कहा "इसको पढ़ निश्चम तुम्हें मिनेगी बेटी मन्त्री पति माप ही होपी सब सपना प्रमाणित बस प्रम की माति!" पया मे पा बोलकर पड़ा पार सपमुभ हो पाई प्रान्ति पवाए उसके मुख पर चमक उठी बह ही पहने की शान्ति !
चतुर्थ सर्ग
पर पमू मुरन्तर यो रिना र सग एर
मी मी पा सेपी निरा पुर की टेक
पपीडि* समभाया एत देवरा ! मै मो निपानि
पानहोमोगमकर नो गणितानी मिट जाएगान!
सनु भोग भाग का गि पार हो की गामा बम पी
मनी स्यों में प्रतिोप भार पो पापी रए।
र मिमे रिमन पार पण पौर रोगी रति रपा
का हो रपने प्रदेश एप पी रह मर्यात मा!
गौने निति र पिा "पार भोरम पर
नही पसरप रिपानि पी एमिर पुष ।
पर पुर-मीनानगर-मार रामनि-परमार
यामाहापामारहराप मे पि गर
चतुर्व सर्व
पन्त
पाति को तब तक है मुर पग | स्मरण करना भी होगा पाप'
हम वो गितमा पनी ने मिना दीये परिवत से पार !"
असणी की पटाह-सम भूमि भान बरसाता पा पाकाप
मुरी मपों से हो पपा बम्द वा प्रमों तक का बास !
कृपामी मरियाँ बर में प्रस्त मा रही की पराई
पायु भी दूर ही पी पार मताों में म्हनाई हुई।
प्रागन प्रस्तों से मोव ए प सर्प सहग फुहार
पिन मुर-म
मे आग भी कहीं ठहरना नहीं किया स्वीसार।
ग्याँ-स्पो मम्मा निधापति नपत रिवाई रिए
निमा ने निरपणापम का मगर, पिरि ण पाट लिए ।
पायु को बाहर पापा बर मूमो का बनना हा पा
पूर्व प्रमापर, पप-मिपि-गर्भ-मम्प ना मुग ाि तो गया।
पर-सम रश्मियां बना गाष नरम तप पर ले वी
गेमठी हुई मुदित हो भोग गिधौनी दिपती परने नमी !
पर सेना रो
माये t गुप्तपर परे पमेको बेग
बम हे परसवे यह प्पान रिरिपु मा कुप मिस पार माग |
प्रपाना सई रिलाई एि, एक भाड़ी में पो प्रमेय
मीर मय पुप पमुरों के ल भूसार निय निपुतिमा !
मुरपर्गे मै उनको तास बापर निर बमीर लिया
पौर उनी से साप मान, रास्ता मुरारमा शिर निया ।
नग्यारी पोसा टूट पाम्प है रिमीमिर गया
पर की गर विमति का पना मुराकानी में मित्त मा !
गारे उपनगरसट गिरिर मराने की भी माई बार
हमा बसो मुनार मनोर frm पर रिनामा
-
मसार पिय
परामर पन-पटमों में तो रिसामों पास कर मिया
रात्रि में मानो सारी भूमि पौर नम-नाम पो पर लिया ।
पा गया महप म पोप पिनो बटी पानी पनि
भीम में प्रा पा प्रतार व मोर्गे में उमड़ी मनि ।
इमरे ही पम पमी पर साम दापना काम
पापु में भी पाप और, मापा गर्मा ने पागम !
पानीपनि मुरमग गे पाा पपि प्रतिपय नियर
हामि "ग गमय अपने पार्य पुर का बना पा सिर'
परे भी हो ममी पारो रिपाम
मानः परि म परमे निषयी मप्राम
रिंग रए नि मिषय अनुसार
प्रौरा मामन पोतो !
गमाति मीरा समर युन
एमी गमरा प्रारमा हमें परेगा मुला
र ममम नाम "मुरा' परि पभी पुररमा
गान राशि में ही पारी पा पर भरमा ।
तो निर्भर हार रहिए सो एप पानि नही १
परिम मिल जाने की सरावासो पपित !!
पितु देवा ! तिमो पहले परपान रसी
च-पाप से मुरगर समापीये।"
मैतिरोने पर 01 मायारा'
गगनेनो पो गरि मटर मा!"
पतु मर्म
गुगबोले 'निचर ही परिकपटी अत्याचारी
उसने पा-बस से ही की है इसनी हामि हमारी ।
उसी मे अनेक हार्मों को है स्मपान बनाया
परमानों सिमुनों तक पर है विपति-बच महपमा ।
पर फिर भी क्या उसके सम होता है धर्म हमारा ?"
पोते दतपति है या पतका हमने दिया इमारा
कर सम्स्यु पर साई-पर्थ ममरीति,
तो निर या प्रपों बहन हम यह नीति !
पहें न हम पापीति अम्त परि मी तो बाने--
पैसे फन माती : सोम की तार्ने ।
प्रभा ! म इम इस अवसर को सासा पोप
प्रचर्म हो तो भी न स समम मुंह मोडपे ।
सह पाते हैं निर्ग, गुरपर ! निज प्राों की हानि
सत्वनिष्ठ परि तरको समठे हैनिज पन मान |
किन्तु नही सह एक्से पिए परनामों का अपमान
परवा होना बर्म और साम्य पारि मसान !
बामपर रो क्या प्राष्टि से भी पात करना
प्सिी नाति हो मा निश्चय ही तत्व ही मरेगा !
हिर कारप दी है निमों पर पति पतराई
पार सम्हा सते पिक कौनपी?
पार सौरी करता ही बने चिपाप
रितने शिशु जीरित ही बार महामार!
मी पुन पद रोपे रिहनी प्रांतों की मानी।
पीरितमी मुमनी परापी रानी!
प्रसार नियम
पर मातापी-चप में है मिहिन प्रामुपे मीकि
पामा दीरे हमें पाप दो छोर पर्म की भीति"
गुरु बोमे "परिवार पे मत बीए, बोषमय होकर,
माना प्रमुर पो है मुरण के पौधे कर घोहर !
न मिट ग्याप पारिका पुष भी मुम्प नही।
उनके निरा सा ऐरर मुग-युग अब माम वहीं है !
रितु रमण! र रेस हो । र गमे
भी न रिपुदीए नीति में अन्य गमे ।
सोरो पनि पादपम प्रति पाद्यम माम मी पपना
प्रमुर पी पप-मून मोति को प्रपनी मीति बनाम
निरित पोप गिरिरों में सफर प्राग मगा ₹
फिर भयभीत पनायित मना पर पाम्पाप मारे
ता शिरपा पम्तर मुर-मगुरोंगोपति मप्प ऐसा'
पौर दुरों का पेट पोर अनुरों म भमा रोगा।
गि बस पर हम मसुरों को निसार-ममराम'
रिम पर पर हिमा पर भी मक्ति हो मारेंगे।
पा शिपार गमगे, है मम्मा पण माग?
गि बल पर पामे हमारी मांगे मिने भाारा!
पता अपना भर रात्रिए निर मना पाने की
पएमा र पारा ६ गुणग मर पाने पी!
और पहमि मापन मा एमारास
निरनिय नाहीमोगोरले पादान!
है पर गुमरारीत नुर गरिहाण
वो रिमप निररों होमा पानत रोग।
सेमापति ने पुम्पर त में कहा "राया हो स्वामी !
प्रतियोगों ही में बात के इस क्षण हम अनुमामी !
मुन-सुन भीपण या प्रमुर पण प्रत्याचारों की
मिरोपों निर्णोष मुरों पर हुए र पारों को।
पापनापन ऐ समी हमको पुष भान नहीं है
हमें इस समम पुर मारमा पर पुषमान नहीं है।
परिमाण भर के भी लिए पाप पुष! इस प्रयट मामा को
इस परि करयों की स्मृति-पट पर ममममती कवि मामा को ।
राम मावी को दो मुर-पुरकों पयों में पलती है
सन होपी को को पार सुरों कारों में उमठी है
म स्वाभिमानको यो टोकर पार पागम बन जावा
उम मगरलोषित मन को गिसमें तुल पार पाता है
इम मह जान से तीरनाको निर मन पर सकते
तो निरषय ही हम मोर्यो की विधि का पनुभव करते।
भरत, भेगते भी हम मिन विप
ठीक समय पर पशु को देने रण-सोप !'
पमा त परि पिपिर में देने महान
पर नया तुर-सन्म में होने मूह-विधान !
पमा पर पूरा दुरणम का पोही पशु-रतों में
यो ही पारों भोरमर पई माग रितु-गिरिरों में!
पौर निमाही बाबरोबर्गा मारा
पर जाप मार हीने पोसिपों पर एमा।
मोनियों में भी पम्ति रखर ६ मा बेटा
पौर रिसीले गम्पित उत्तर पर भी हस्पनरा!
प्रसार विजय
माटे
पा रिमीने, परे ! मुरी मे बिल पापा मारा
पहा पिसीने भस्म हो मया पर शिविर साप है।
कोई बोधा माप ऐ१ सर तुम भी प्रापो
कोई बोमा परे। भगो पुपचाप मम मचामो ।
फरठ को पागा बरठ मागा मुह उठा पिरको
पोई पमा मांग पीचे ही पाने र पिपर को।
पूर पए परमास सिी पौर पिमापी पपड़ी
हाप पहा बस परिष मिमी पोर रिसी साड़ी।
किमी-किमाने स्त्री पी मिर पर बधी कशी
म्मिी-फितीने परसिरसी में पैरों में पहनी!
खिने बन पाय मीरे पापस ही
पिने मग तो माने तो पम्मे से पा है।
कितने ही गेम पो पाए । पपौर पानी
परत पा है एप रष्टि नहीं पाता ,
गगन र मी पण पन-गिरी ऐमी
रात्रि में भी जमा नही पुर दिया गया है।
तुम भी रिपिर प्राणी दागी। दूसरों का मुग
मानो तुम्हे जी पांग भी नही नहाता है
माने के समय पने पारा मते हो पाँ
पक्षी परता भी भने मामी माना।
पा मारा हर हिरम्पररपर सिर
र पर पसान पारी परेग !
पर पा गए पुरा है हमें अभ्यास
मानिया सामने पाप्रपाम!
पन
पतु सर्व सेनापतिर्मों से कर प्रयल समाया सबको विपति सण! फिर न विमल र पे मूह पर कहीं पदातिक-पप समूह पर रठे संग मेरी निणान बन्दीपण पामे सो मान! पलपति निव-निय बस को प्रचार गुमाई न करने वमार! महवानों का मा प्रकार सम मापा मानो हो हवा! उस मोर पण सरे सार मपटेग्या मपि मासेट बाजा गामा में गुम बस परमास्त्र पा, पापए, पठी पमि मार-मार। मिा पो मुमट ठग प्राण-प्रीति पापी मममीता मृत्यु भीति । ती बार किसीने र कपास कोई मे पड़ा सुतीपण बाल । कोई मेकर अमिता कटारर गिर परि पर पर मंठा प्रहार। पर बसे पयत पहि-समान पाए परमेश्य मराादाम पन में तो पी बसा एम बस पी पहाँ पपना पनेक! दोनों पत--रक-पाच पोर वाहन स रात तुमुम भोर । पन पोर विनिमः समार बसपोप पूरपरा पम्प माप ! माहव पुपर परमारों की कटु रणसर- मेष पया यो तरित माए पो मिपु-वर्ष में पमि-बार । सपना में पनपना नियम से मप हो पर रपनी-मनी की सपनता पवारण-पति में गोपई ! गोमारोमा बलों के पीर रण में पाए मामामुगी से कोपरा ग्र्यो परस्पर लिए पए। मी मायाम को प्रमाम माम मानौ हिर मेपबामा पोर-पोर ष्टि परनाम सपी पमा पनी मानो काम गषि महालका बम-गारिमी से अमिनोगत रिगानेसमी।
बामु रही मानो पेप-सम्पा मोप, फन
उठा पप रो रोनों पक्षों को रामेमगी
उपोका पोवासमा मानो पूग्य सृष्टि पर
पगई मगम से गोलियां माने मयी!
लिनु र मुरगन्य का पटा एम्पोत्साह
दे से हो गए हर बीवन की परवाह ।
उस मोर पीरों को परम करने को पूरे
पुत्प पीननामों के पुर-गीठ गाने मगे
पर गान माते इमाठे, मुसाठे मानो
कर पुरता को भी सरल बनाने मे!
हम को हटाते इष्टि सरों की माठे पुष्प
माताएं रिणाने पुराने को ममपान नमे
रेप-देश पर मुर्गों के प्रेमी मुप धूम
-पूर अनिवारा मप्य महाने गये।
भनिरोंकामाना भान पान मिरपसभी
पषी तए पुन बपि मोजाये पे
पर पर पमुर-पााति, पी पहिरपी
गार में गो माता सीता पर बने।
पपार पा पापि हार ते ५
रसता मे नाम ररिरोपी को दियो
मो-या पार पाने मोरयौ माता या पियार
मार-गार मार र पाये हो गोर
रेखते ही देखते पोन्मत्त बाह के
कर, पर परिप पाण बाप पर पए
कही पैरों से पास ही हमरों से एपी
सामने पहा बो बीर उस ही से मिट पए।
हार काटे किसी केटो परम पिसी कीदि,
धीश र पीर स्तिने ही भूमि पर पए
पोई मुफ भूप गयोही भूमि मिरे त्योही पन--
पोर पपासान मम्म बीच कीष पाए ।
पोई पुर पो मार-मार का कोई
समीत साथियों का साहस ना हे
कोई ण प लिए तो में दो
कोई पशु को कम में पाए मा रहे !
कोई बठे हुए, भूपिसात परिसर पर
वायु में परिष निगाय + हिमा हे
पोई निर को उठाए हा पम्प पिण
व्याये रस ण बह्मपोर की रिग्रा ये!
पर मुरपर पाटो पूना ही या पापों
पारों पोर एबन पसार मगा ऐ
करपरिष प्रपग मिए
देवमारियों का और-और ये भपा !
हो नीति होती की पहप-य? पर
पा पुगों ना माम पया है
भूगनापाप
निमारी
गिह मम परते बह रामाय!
गमान
प्रसार विषय
प्रमे होम पे सौ मुरेणों के समान
पन में यहाँ तो क्षप वहाँ गा पुकारते
कहीं प्रमुरों को मेप-पुत्प यो ममान हुए,
की निगर प्रख-कायों में उतारते !
यहाँ मुरवाहिनी समिक भी हटाती पर
नही रेल गात मुरीमो मनकारते
पानीपर-बमे कभी बारिश भी गर
भी रप टेरपी गणों का प्रमाणे !
गिम पार गाली ग प्रमि प्रमग्नीपी
पूर गुम हरिपार पूर पाते
म्यान म निपम नहीं पूमती रीता मानो
मागन ही मायने भी भाग्य पूर पाठे ।
पार बरपा पमुरी म ऐमी एम पी कि
दृष्टि म ही माना रेविर ठ पाने
प्रहार करने से बाह रटने ही
परिप
यह पमी एग की पारती रिमाम मरी
पटे बाट पार समय ग सरान मय
राम
घिरवाया
भगमन पिनि
पा-माह-मार माग र जाम सप ।
गुग को पी पपीन रए
पर पाति
पर पानी की मैना पा गार नय
नग गला दुम्म गाणीमातम
भाषमाप मन मग,
पतु पड़ी पर पकि मानो मोहित-समा मम्म और-डोर मम्म दीप पुणों की वार है पा समा-पर्म-पत पैन-रिपयों के देस हे सरेप-पुर की महार।। पद पर मानो पाप मरों से गिर गए बैठे सिम्पुकायों के बो सिरपार! जिस पोर रेखो बस भासपा पुमान रंग मानो पाए पम्प-श्री के पानी त्योहार।। हो मया पोरी दूत-वाहिनी पिणपियों को प्रसर के रेष वनाप पूरव र उठे प्रमि पोमी पर भी बस उभर पाई मानो एजन्मों मी मा प्रफर उठे । पत्रिकेपरों कीकोमा पेश की मद माते-पामै सब घोरिएत से भर उठे मत्त पासी कर 2 मिारी सुम- मुस पिय प्राण हिम अंक में मिहर उठे । प्रम्पार से एकपा सरसो माम महान परवापारपेषनिवसारी मनुमान! पस्तु पई से परिक पनि पई, तब ही पारियों के पुत्त पति गो मपे बियरले निमानाप भगत-गपोप से पिग पिनाहीन बने गम्प में मरे पिाने ! पुर भूमि पर से पति से प्रराय मिनल ममे सभूमि उतरने
प्रहार विनय
देव-सना पीछे हट माई पी पधिक रेप
मेर मुर-सैनिकों के ममे रोप मरने !
सेनानीगण सैनिकों को परे पिस्तार
सेना में करने मये मबारसार सवार !
पेप-पगे मुर भी बड़े मरते रहपार
निश्चय ,परि सैम्प को पररने यो सार।
ठरकी दए ग पिचत-मतिम मुर प्राम
मामो मश्न-पाण-माल होम उमापति माग ।
पण-सममगी मुम्प मुर-मेगा पापूर-पन-गम पिरने
परकर मापी पीरों के मयुविन्तु मम गिरने ।
पिम्तु पवस्था में पमुरों का एग उस्माह बढ़ापा
मोर उम्होंने भी हिम-मिरिक्त हो माया!
परयवहारमा मुपरि म तिस पर पर मनाया
मसुरों ने इस बार मुरों का प्रदर पौर्य शिपापा!
पारण भी पा स्पष्ट पपुरराम प्राप पापा पा
गमो रिपय प्राप्ति भी पागापमपामा पा!
उपर दृषपर मम ये बार मप बात परमान
रत-परिषौ तिता पस्चारी भी ममान !
इम पाना में पुर-रगा ने मामा पनरा गाया
पहली बार पर्म-गना म भए म परमाया !
पाप मा पो पारेर माग
पही गला पाया पदरित निमारे !
पतु सर्प
वसमतेरे परि को नही मार पाने के
सोर जमाने के पाने ही तुर मारे पाते।
कितने ही निर पार्मो में पर शप-रिसा गो
विम्मु पिन पाहत हो फिर भूतम पर गिर पड़ते थे।
प पूपा-सा महामात पांचों में परमाता पा
पारम्पति बेदम होकर मरा भर में पिर मातामा!
पस्तु, बम विषम हममे भरपुर
गुमवावा
मम विपत्ति का सर पस्म उनको पारराममा!
मुम मुरमेस हाय पनुप मे सबको मै माया
पहा ए हो प्रमी मिटेगी सब असुरों की माना ।
घर संपान मास र परिको फिर गुपवाषपनाए
प में ममचारी प्रमुरों के सर प प पिराए !
बाहुपा मह काग मुरों के मी मजीरि पाग
एक बार फिर मुर-सेना-नन २ र पापा!
frgण गोप र बाबु-वेप से ममी सुरप बाने
परकी बार मपी प्रमुरों मभीठि पा पाने ।
मौनमय नियमेना मगर सन्त में पाया
सामे प्रथम रितुमरों में पाकर पीए मुपाया।
फिर परिषप पा रापमोपित मूह बनाए
सागरी पोर प्रति रो परमाप पाए !
पितागुपर मा-माम्प पर मुरम पार पापा
परने मरे पर भी प्राविपिनाकीमापा!
प्रसाद विराम कर रोष पर टमोर, मनयुष समता मी दोनों के परयर म्यबहारों में पेप्टापों में, पति में सर में एवं कारों में इवनी पी किरेल पपरर से पर ही बाण मनपा पाय भर यो घोर, मवाना मन्त्रायन पाहिम पा ! प्रस्तु भरे प्रतियोष भार परसा की मांति इष्टि पैम्प में किरावा हा मानो पर ही में विजयर पथ म्पूर प्रारि ममी बान पंगम बनाता पर मंमिों . उमंग भी उठानी पाप-पपर स्पर्माना पता हमा दे तोता रिसियों सिपी उपन्त मा रिणाएं गुजाना हमा मैन्य मप्र मा गुरों को समार, बोजा पा) पाग पर पीये हा र पमर रहाते , हो पा पार पुर निय -नीति भीठि मार से पम् गा ! मोको एमति तुम मी मनेोरि सरों के प्रम के अयोग्य हो ला के fry नाम राम मरर मुर-पnि पोहो उप निर हरी पा भी लगाएं! भूम पारा पनी ममुरों में पुर माया पा प्रनम्नता में सरकार मारा पा पनाति नीत गायन मुर fryपों को भरो ग ग पर। प्रमुरी है
पतु सर्य
करोगे क्या पमा एवं ? नहीं कभी नहीं
तो महामो पामे पैर, पीरो! बोमो पर्वहर
पड़ो मृवरण-सम प्रसुर-मृयों के
मपट बपेट
मारो धयों को परबर !
पमन्वयारों का प्रा मंग-ममाम प्रभाव
पाप मुरए पर गिरा यो समुा अस-यार !
रमित स-सम कोषकर, बना-बना निज मह
बार-मैप मे या बारे सुरपुर-सैम्प समूह ।
गुरेम भी मिर हाम में भर वन उत्साह
पुम परिवमू गिपु में मैंने रिपु-बस पाह
गुमठे फिर ममोपों से परमि-मृम्म
दुपित गुरों के मुग-पगम
उमा पठे
रामिमीनी म्य-मम नामी पाम राषि मम्म
माप्तॊ बामे भाने मममसाले पमा रहे।
पारी पोर मार-मार, वीरों पीसार मप्र
कासीकर भिगम-ग्रपर गनः रे
1 बार मुरम्प-नना को मुन
कोरों में पोपा गरे भगा उठे।
ममुरम के पामों में भी स्व-गैगिता ग
परामसार, देगना, पाठ पमी गए
मी टान टानो गाामोगी मुरगम ,
हिर गम सपने होपा ममप पाए।
प्रसार विषय
पैम बन मा पर्यों के तो बन गार्य रिम्नु
कामों का पर रंच भी न पौधे हर पारा
मूर्य उमने के पूर्व भार प्रमु का मग
बाव भी कि इनपुरी मप्प पहए ।
बहा प्रमुरों का मन मैम्प पिरे मानो पन
पुमा-मा
पोर पोर पुर होने मगा
बाण-वृष्टि पारि-पारा + प्रभाह मप्प को
पो रण-मर-मरों मा गोने ममा।
प्रमि-पपमा को पनुराई मरी पाने देश
परों को नाम रंग मारा भिगोन मगा
मा से सासे मासे मारिण-मनिस मरे,
तृणों का समूह मत-मत मम धोने मगा!
मनापमामान तमाम समान बत
गर रामान मत सैम्य मम माने
मागत मन तर तनों के प्रसाद-मम
परनट परों पर तो पड़ने ।
एगा पनि मणि रत यो मुारों में
एन, मानो भागों में प्रगारे मरे माने
मग मुरेप के घरों में गर भन मे
ममे
गुम्र-पर पो मगर पाइने !
एप्रपा पा पपमा पनम और
पर्यों म पारों पोर प्रनर-मी दाने ।
पटा पापु-
मेगन पान में लिपा
मापराए में निर परको ना !
पतु गर्न
महराते
पर गुम पाटो
पोरस के समाम दुत पार्ष के समान दौरा
परों से बो पपु-मैग्य में वे मानो पाने हए
छोट-पोट पापों को मार पापा मों मानो
समी पशु-सम्म रमो में पहपाने हए ।
पाए सारे पूवे पे मामो विप-म्याम मुरम
एक एक बोग-पौस दस्थों को काटते
कौन लिए मंत्र जाप उमा उतारता मो
पाप मंगवारियों ही को ये मृत्यु बाटते ।
ही पहराने पणे
गिले यहाँ
जिम पोर पाते उम पोर महीन
ष्टि माने रस्म मि पो त पारवे ।
रिमु यम दाम में इम रण मेहमा मम्मोप
उमरो पारिपाम्पप पर ही गाविस रोग ।
पौर पनुरपति कही संन्य में मगर नहीं माता पा
प्रयानकर भी अपम्त उमगो नही पायापा।
अपम्त इसलिए पन्त में मही मंच मन ठाना
कि पाहि परिमिति में पारा पा समाना !
पहा मारपी परणों से मरेन होगापो
प में पान पमेगा बीर गापो !
पार पाँपतिविर में गाएँ,
सम्पनमोई भी गेमानी साप हमारे पाएँ !
पारस यह मनुर नमानी पाया
तिनकी पारो पर!
मातार विषय
पिपा प्रपल उन्होंने भी मरसक बाग देने का
प्रयका पन्त को ही भोणा रेफर पर लेने का।
मिस्तु पयम्त-गरों के सम्मुन्य किसका बम पमता पा?
यो सम्मुख पाता पा तत्पए भूमि पड़ा मिसतापा
परपि मगा पोपों पम्त रस मिट पिपिरमाने
यो-स्यों मने प्राण ममुरों मरिक-मधिक भकुनाने !
पर परि भी समूह रष मरण प्रतिमा ठान
पोहो गए मार्ग में प्रचार हिमारि-समान !
तुमुम पुर मप मया कदिन हो मया पान कारमा
करते हुए सामना परि से पर रेरों पर समा
उपर पमुरपए मै पिर मिल भीपण पायंत्र रचाया
बानि रहार भी कपणे मोकाट गिराया।
मिर पन्त पर मपे मभी मिस पाण-वृष्टि परमाने
उपन्त पर ही परने की मुरा प्रतिमा ठाने ।
परा में गए पसार एक-एक कर मारे
E-TE र मिरे पर भी यत-विरानो गारे।
परा मारपीसो मा पर परिप भी दटा
बयप भी पय-परों में पाया मेण!
रापि ममप मा नरमा पोप भी पता नही पा
नही पर R रामेवामा पोई मित्र ही था।
रंग हा मारपी पर पमि-पान
पोर पान सपा नियमम्पत्तिा हमार!
मा परण र मारपी मे मारे मगर
पमामा की दुका जप 1 1 ग्मा !
पर
पारसकों का मरण एवं पकी हानि
पित इम-मुख हो गठा तप्त सूपल समान |
पहा कोष सुरपति के अमने नमे पंप मो सारे
पाने ममे प्रसौष-युप्म सम प्रासों से पंगारे !
मथर फाकने भये भूटिया भीति मनी ताने
दस-पंक्तियांसपीस्मा मापस में मित मिम बाने।
पर पानही मिन पप समा मार्ग परमे
प्रतिपम उनको मपा प्रसप पुर की वय मारने ।
तुपकर पाधारित ऐरावत' को निष्ट मंगामा
पौर पर परित काम मू-सम-निग मनुप उठाया।
माझा दी दो ऐपषत की पुणे में पास
तवा फरखी म एमबन निय निर बाप महासे
धोग मान हो पनाम पिर, मिए सम्मिनित सापी
इमरिया मुरपति मे निम पा सम्म म हावी !
सिया परामन हर प्रमर पानो भनुरा उठाया
पम्प में प्रमुर-पम्प के हापों में मप पम्प अमाया |
एसन + मम पर ही पनने सात पारे
पाम्प पेपरन् रमन भरि दम स महारे ।
पेपरवालों की दृष्टि प्रमर की नारी
पीपी पण-गण में गुरमण की पिपरी!
ममुर-मन्य भी ममी प्रथम वा मिम पापा पाने
रितुमि पर मुसलिमे र पीर पर खाने
मामाग्पा पर गम्मुगमा पानी
मपमा देग मूर्षा हमपी ममा ट पानी है।
प्रसार पिय
मी मारमी ममुर पम्प में, होय तो पीरों के
मुरपति तीरों के मामे रिपे रेत पीरों !
मामो मत पसन्द ना परत पर मोम पठाने
पषमा पुपित मिा पम-पुरों को पर इन मिसाने !
पाप बसे परि पारी + पौष का पुते
भरा पोम पर ममते सरपी पिपाते।
परोपमी ममुरों की पर पापा भर-पौरम म
गोर मीमिमा बा नरे मन में पा गई गपन में !
कैग मुपरमर मुर-गेना में भी निगरापा
प्रमुरों ने भी सममभूमकर मपमा मत रहारा !
पोह पर पति को पुर-मेमा पर पाहो
पोर मुणे मी मनोरप पि Gang प्रो।
पुर यहाँ रमा विपि पुर हा गपा गरी
भूम मा म पिर परा । ऐगर महारी!
पर पिना पीए मुहरंग सर भय पिमा स्यास
पपम्न की शर्यत वाले मन पाग!
मिशन मानो परेतमममा एने बानपा
तापापा-
मारी पारम्प और गरम पा!
मही बलियो र मेना मे पिर मानेकी
निी परमा-बन पाएगा।
लार रातो कार पEET
Mum पगार भी गतिनिापति
पतु सम
कितुपा नन्हें मप भी मान इस समय में पारण रस परे
पा पे में पापे परिपत्र पौर पौधे उनके घर मे।
किस समय मैते पे किस समय पता देते थेगानिस पाए
निकट बैठे सापी भी पार म सकते उनके पापान |
कर-रक्षित ऐरात ममम बन पापा ममुरों का काम
मि-परिया मानो किर पाता सर में भरे मृणाम !
सहमों का रखी भावेट, पह पौदी उसकी तसपार
सहनों उसके अपने हुए, पो करते से हानाकार!
गिपर पावा ताम्त-सम टूर गृह रपमा हो जाती
नवा साहम ही काम करण-कौषम पा पवा पर्य।
हस्पसिना विविध बन पया निकितने ही मर रपयन
मुटने नये इसके मम्प इम समरकोपस पानन्द !
नुिमापा महीन पार्यों पर पान
पो ापेरे को बह दो पाप-नमान |
में अनन्त
सरपरमाने रोपामगारे बदमासान
मानो
गपाते
मम पद पार करम
पर अपन मिरट मुग पाते
रितुपापमोपहा या प्पान पूम पर तो
वाण परमाते हुए
मानो
मापुतन-बमगर मा-पर
पूम ए मे निरसर ममाते !
प्रसार पिय
बारपार रस्सुपों के सैम्प बोपचाप दस
कोष के पयोर बन पिर गिर पाते थे
पितु जिपी रसम्त के घरों परिषि में
यो पग बरावे ३, मौट फिर गाते थे!
पाव-कोट गया पा गाम पा समुर अमरीका
रा-सैग्य मानो मदराति भग्यते ये
गहाँ पजे पं पर गाल में तुरन्त उन्हें
बाप परवान स्वर्गपाम पहपाने
पाम मरती की ममुरगण की कोई वाम
पग पे पार पा मुरपनि-मुरन मगाम !
Fry: समान पूर्ण हो पी पी रह
वापि पिमता प्रतियों में भी नहीं
मुत-गौर्य मुरगन्मान
पमिमान
पर रटा गरी मा पिर मीहोती।
म
माम नरेश पानसरों के
गपपोप । उपम्त ममापि नी रही
हाप रे र उठे भोप ति पौर तिर
मुशिीन दया यह वीर गिर मरा नहीं।
पिरो ग यम को मम उठे मुररार
पमा पारपा पया प्रमो। मममीपम मात्र!
विपिन परमार यह पिमहापमा रित
frre गर म प्रायु में रहीं पापु गरिमा
उपर नुपरगरण पनुर-मैना ने पर मग्पाने
माम मुगों में शिदा मरे हिलाने !
पर्व
परम भर में परहित सम्होने दिया रिमा मुगपति को
पागनाहा-हा करती थी इस प्रतिको!
मपी रिवाई से पषि-मुख पर पिम्मा की बाया
स्पाप पाया रवनी का मुझ परन-इप्प भवराया।
पुमा साप पिस ही हम मे मिया फिर पिचमुप लीय
उमी पापा में मिद को मृत्यु दीपाया बम्भीर ।
म पम में पमुर-पार्य , मह र पालो का पाप'
, मुदित रपम्न का उन
परों में पाने की मार ।
फिर सी टिपित मुरमाय मर शूम्प गुमाने नये
प्रनिता महसम' परि-मम्मो मिरा पुन पिमाने गये।
एक पम में मसुरों का पर्व हो दो मे रिम पा
पुदिनी को पी पमह माप के दरमिय-या दिन पया!
बुर लामा मर-तुप पर जाना हो पा प्रणाम
ममे होने उठने के पूर्व दो पुना पिरले दो परि पाप ।
परोपी मानी है रि-मम्परता दी प्रति लिने
अनूपील पर ग्यों पीपफीम प्रमि रोपिने तनी।
पन्न भमु, मिन रमा पर पीपन पास
ममी पर तमामोसार माने में पाए ।
। या परों । प्रमुख
पित पर पान
भापनि
पाशुपति गोपनियर ोप पौर मानो हम पर माne
एम-मम पाएर नयाँ निमा
पौर रीमे “हैप्से ! मार रही दो दोप तुपारे पौर
प्रसाद विनय पान कर रेगर र प्राय पर प्रमुरों क सम्पाप पौर शाता है तो मात कि पाया प्रतिम पप्याप ! न समझो मुरमण है ममर्ण, मानवे मही प्रामुरी पुर पा नही है हामिल ममा में तुम्हारी ही माति . ! परगण्याही पनु परयाग मा मम में भसमम रठी भूमि कोगी पराया पूग्प उसपर-माल- बाप उटी । पषता परत पर पिना पार से रिपपाम पराप में प्यारमना सी निम्मने ममी एम ग्याम सभी रो अनुमा होने मगा प्रभी होन दामी ! समय पिना ही पनि माम ऐ निरपा गया है निरषयमा ममय ! पमुरकी सन्धित पन ए पो पिने सम भी पाए मारने सपी नसा प्रति पमा गुन्य मूनम रे मनिम पोर । परी उस्मों की पप टामन सपा विप पश्चिगन पुरण बोगस पे मग बसे वनपर भी हो ममप ! मपाना मपर भूमि म प्रानपाप गुप प्रमा पाई निमा पर माना भयभीष मगल-हीरामनिया गा! लि' रिमी पर पाप गप्प र निमम मानिए, पते में महिमामा गिर मंप माप्रपा पारण im- भाप में पावापानि स-गिगा-गम दिली पानिमा बाप- शिप में या टिपी माना पर सुमति में प्रपा लिापों , firm r2. मान मनी-पापप मिर, गोपुरमा अनमोर!
पर्व
देखकर सहमा सेवा-सहित प्रेम से मुऐन-सिर मुम ममा
भून संपाम संम्प प्रवेश पर मूभिव-सा हो म मया !
दूसरे ही पम पम-सम्मार गिरा से कहने मगे मोस
विपति में चाहिए नमों पम-नियम को देना नुमा मुरेस !
तुम्हें । मात पुत्र ! सुर-च-मप्प यह वैमानिक संग्राम
वमा शानिए पस्त्रास्तार से लिया जाना रम में काम ।
पारम रमा मौर समवमी के लिए भी है भार्म
पा बन पर तो इनका बार मिला गाता है पोर मर्म ।
और मुरमा मनुष्य के लिए भी स्वरया पतिम उचित
पकि पस्त्रास्त्र पक्ति, मौसान योग्यता में भरि हो सम-पित
पमान्त निति निवारण तटस्थ रमण नित जन पर मामात
दिमाता स्पों तक गप्ट प्रापियों को रोष में बात !
उमपन तुम ही करने नमो तात ! परि इन नियोगासन
वो पारितने पण वरिपर, हमरेमा यह महापगत!
मिया है फिर तुमने तो नए पत्र पारे परमों का पति
पिय समता है जो सब सृष्टि पर प्रमम-गए महान मिपत्ति !
म्प होतात ! यह भी बताना तुम्हे,
पाक्ति पापार दुनि-हीनों माने।
पक्ति प्रपितर ही गाईपापिता
पति-पर + परिणाम पर पाने
मामिए पक्ति रिनी हो उठनेही प्रफ
पर्ष जाने पम पाने !
मीलिए पप्ठ वन मठि पिारे मे मी,
म्पाप पान्तिमा बाले पहात!!
मुख गतिमान
प्रसार जिस
परि मृरराव । मिग्प मूर्य प्रोप प्रम्प बन
मीति घोर तो कौन उनके समान है?
मिनु मही छोले है मौसिए हमें अपर
पति नहीं ताव ! म्याप गठिा निशान है !
पत्र पति भी म करता है गो पनीति निमे
निज प्रपों मरने प्रपिक प्यान ,
निय मन पर पूर्ण गामन किया प्रात
गिमन गेम! पही मम्मा गतिमान है।
वा ! नियम यह भप्प इसी में है मुर-पोष
तरते ६ मरि पर पार बस-मम ।
मनपान पर पाप होप पग भनय प्रापरण
नहीं पाता | अपम पनासमरा!
मुरपनि गहाद * बोहरा से नाम
तदिन रष्टि म मुग्प देगोवा पिपनि समाम
रोले "रेरामा हो पर रिसह पुम होरेगी
परम दुधियम कमी पंप मम पिपत्तिम गारेगी !"
मुनने पाइनि हो गई पनपान पान में
पर मया सम न गने रहो प्रभा रह पान में!
राए पर रहे मी तिम्मिान रिपुपमये सम्म
बामो समापिय मोपी मदे पर-या तुमने !
पपा (पन पर मामा पामे
पौर परितो ऐ गार पदमरा पाये !
एग गरने का मुरार पनि
पौर गले ही सम पी मयूर निर त!
पतु सग
के मर मिन तल्लण अपस्त को हौदे में मे पाए,
पौर तरास फिर पर निर रोना भी दिया |
मुरपति मपे उमी भुग-बम से डौमा मा बनाने
सण-आण में पगः परि-सेना को यमपुर पचाने ।
ऐप पगुर भी पिता-गुष को यो हामों में बाये
ममे पान निम-निर सैमा अपित ए, बम पाने ।
पहा प्रेमिको में "यह गरी गुर पत्रों की माया
मी पान मे उसम को मुरेश ने में पाया !
है पिसार, पीप सेना में एम प्रोमा पाम्प
लिए गा रहा है यम्त पोनिय बना स्टार!"
परन्तु मुरपति ग्मी लिपि परिको ने पाम'
पुष को सुर-माहल-पावाम !
पर मिपप भी सराव पोर पर पार
मये पपम्त पणादि उपचार।
इममे पिक
हग प्रमु कोपमा पर भी रोष
मगे और इनके सिर परस्पर ।
पभोले एपर सेमा दो
कई मपे पमुरापिप पर रने दुपयोपर!
रिमोमन पर प्रतिमा परिकारमाया
पौर पपपीतामा मे उने प्रपिकमाया!
पसरत बानों टपारा पाने ।
पोरगरेपपण हो गया!
पामा पीपान ही भगुर्गेमो रि र पाने की
पर भारतिर मुलत सपत पाने की।
प्रसार विनय
इमीमित ये समे सैनिकों में उत्साह जपाने
बिश्य प्राप्तिप्रवगर कस्सिव सपान छिपाने !
मोमे सैनिक भी दमपतियों की बातों में भूसे
विजय प्राणि पीपा पो ही मरहे सुरा फसे !
हिर पपरोपों मे रह-रए नमो सगे पाने
मोरगाह मफिर पुम दम में सपे माप पहपमे !
रमी गमय पूध प्रहपा परपे रग में हाप पटाने
राष्ट्रवार पर निर परा-पस मुचि मुमम पड़ाने !
मूर्यरेष तो पनप मो-यात्रा
एवं मगि भिर पनीमी' के रंग में रंग हा प
परिमार-मान-गपी पिग पर पुरम कर मरत पे
ह गुर-मैना रे पप स सम पापा हर मपठे !
मा मंगम मागे प्रपा मैप को र मगाएमा
T समा मा भी मत “म्पो म्यो"
पुरावापा
देकरम पमुरगणु पौर, मम्म गिन गिनरामगने नये
म नुन मौन मान उटा मम्य उमे पिनप रमने मगे !
मुरप मे वाद गिया यह भाग दो रिया मनिक गमकोरिख
लुिपर परमय भीम-बाप र प पॉपले गुण
पानपरा मरबार रिया पंपमा गरा
HT पर परोपार परम में पतिय पन!
पापी माशिवराबी पति ने नग भौम पाग
पग-महरा की सभा को पार रिसर!
१ नाम पभिसा (1)
पतुर्पस
अम-प्रसमबत् उसकी पर पार पहा ने पती प्रमुरम सार
रमपमा पोते पामे सपा प्रतुर सेना का पुर पहा ।
मेप भी प्रश्नों को हर मात मचाने ममा बमों में शुम'
साप ही पर उसके न प रा मेवे रे म ।
देय यह स्महास्य का परिलाम ममे परिकरने परपाताप
पितु मा म्पर्ष पौटमा नीक पमा र पया हाप से alr!
पर रपया म पौर नया करें मुमता पा उनको यह भीम
भमरा न माप का नहें मारला मारमा बमहीन ।
तब पुष सोष प्रमुर सेनापतियों में रप र पविनय
हा भेटियों के पर रिपुनम में फैमाया पति भय ।
रोग मे गालीन हो सपा पर भय माने
एप
भय बमने पौ या गिताने।
गमम भीम । नाम भेरियों को पर पर टारे,
म भरिये भबने
मेमे पानी
पान विपारे।
किन्तु मी रा कमरा प्रमुर बहिरा बार
पीपे से मा पिरा मैप पर असर मेप न र!
फमा पुरे मेर पर बह भार पमा नुररस में
एवं गीप मिरापन कोरिया प्रमुर पम में ।
पाराभर ममा मन की पोर को गुर पाने
पर प्रमुर पीसने पन-गम पप ग्माने ।
तुल रोनित ष में ठामा
Trafa दोनों में मापे पर गाय!
महार रिस
पा-सारणी सया गरम रप की पतित बनाने
पारोनों हापों से लगा पाए पनाने ।
पिा युस पिर नए मोर मे ममुर-बमू पर
पित रिपिनो प्रमरणों से ममुणपतिमा
हरिग्निवा एक भगा तो प्रवास मरा पापा
उष्ट्र भगाया हाहाकी में पारपर माया!
परप मममी ममे मार-मुख मोष-मोपवण परम
भीत सेनिकोंपों म पौर प्रपिक भय भरन ।
पमा ममे मोपन रमपतिपिम निषित पारा?
बोसा एक 'राष्ट्र पा मित्रा परमे बम्पु पारा !
या उमे यह पार शिलार मपनी पार मिमामा
पिने मम्मा तो मुरमन मे दूना र आमा ।
तनिक मुरातो मुरमण पा उठ गापा रिनाम
ग्निा पुर ही दम प्रसार गा रिपु ना नाग"
पा मुरप मे "रिनुपान पद पममा रात परिम'
रना मुराने में गो शेन मा शरन ।"
प्रताप मलप्रपन में पानि
पर एक में रिया रसगर निगा यान'
पारिपरिबाना
पा हो पनुरों में परने मे मुष गार'
म पाहीं मुर्गे पापा ना पाप
कि पापा पार गुणाग मिरपा सिग!
for भी रन से दुगा रे तुम नार में
सपनारा पापा पर मारा परम!
पतु
बम से भी बारा हुमा टिका प्रभाव परि-
पल-सूण मने पाहि पाहि मों पुकारले
म पई पार शिव पोर रस पोर रस्म
ही मा समे मत्त पर गुल भी विपारने ।
वृपयामकी मार हे रबर भप बने बान
फिरा केतु भी सुपत में फिर हा पमसान।
पाई प्रमुरों के लिए फिर पिम्ठा की प
नये सोचने में पुनः कुप वर उसाट !
अन्त में रम्हनि उसी नीति का प्रयोग र
सिंह बन सारी रसभूमि में मनाया शोर
रेप पनिपम उठाए पूंष भाय सा
मपि मपामा पनि र मे बहुत गोर।
देश भित्र मृर्पस हम
र पनि रमा रसाए को मा-भोप
परमर रेत रिपुर्षों में भी बनाया पाम
पर गमिरेर को nि रिपा ममर पोर!
रस्म स ग्ठे
देश मा रहो हो गिर पार मगर
नीच म पो ए मिलाएर
पौर मरे सप पहा या परिसर
ग्मोंगपम्द- पप एम ममा मिसाने पर।
रपर पापा ने भी पाप प्राला पास
देग मारने न मिनी मा निगमप !
प्रमार विषय
पमित इए सारे बह मिसकर ममे मवाने इन
म पम पमुरों के दमपति सर पीपल-पम-छन्द
भौम-केतु पनि सर यरबाहन पा परिहदप पावे
सगे पूमने यो गयन्द दण एम का नाम मिटाते ।
इमी समय नुरपति में मार पी रण में मसराफ
मुनपर मानो हमा मैन्य में पिता मंचार !
पाय-गना र मुराराम ने केंपा रिपा रगम
परिवटि मे सगे ऐपने नमो माया नेत्र!
फिर पत्रा की मनम्नाहट मुन बहने मी रम
एह पनगी पीर हायों में रहने रो तरंन ।
मुन निब मेना शिपम पर पागया प्रमुरपति-जी
मुनकर निमकी हार पर उरी प्रमुरोपीहए-नयी ।
भीम-पना कर उसने भी प्रमुरा यो मनसारा
बोसा, "मो मुर हिल गनेर मुनार माम तुम्हारा
उनके सम्मुग होठे हो तुम यो बसपा पपीर।
सगो पार! एप्ट गरोसम्माीवीर।
मो गिगावाति पार ने भयाना
मनी बनि रीप प्रगान मर्मती पराना।
नहीं परगने मी परिप गिामी ही पाप
रही मनी उसों की तो पते भरमगार!
परला हा लि ला पनि होपमा उनको
मारमा सगर गले में सि-4!
पतु व
रोनापस
बस पकडा प्रसुरों ने सारा मुरदम पर विपक्षि में
भूम गए पह पण मी सारी शनि-मति इस पुति म !
सभी रिचामों में रिपु करने नये मुरित किमकारी
मामे ममी चमू मसुरों की भर-भर फिर कारी!
बना उसी पल पुर में एक नवीन बमार
पदस बने मकर रिसे मसुरो ता भार !
मुरण पोर दुप मप्प पिकापा तुमुम पाण-संपाम
भमुपारी
रोमो पे बसपाम!
सर एमबिएम पर कोई भी परि पर जय पाठा पा
दोनों रिण पास हो पाता यह ही कर पाता था।
भता मुरष का पर जित हो पुप मे पॉप निरापा
एवं मा पापात मुरष की दृष्टि में नहीं पाया !
फमता पर साप-साप ही पुरष गिरा भूगल पप
दरा पर दुप भी गा पानिपट तुरस्त ग्यार।
पौर सुरष सम्हमे पर बह गाय पानी र
पर रठे मुर भी सरा पुरको पर पाते पाती पर !
-पार सपा प्रमुरों में हुमा भौति-मबार
पसरप पर पर पर वे ए पोर पाप
पुष हा गुरष से भर से परने को मार
या प्रणाम नेपा रिनुपए निषिपार !
पा मुरप में भी सपार में हो पाप
पापा में कोई ना हो साचार!
सुन कोष र रिमारत र पटाया
रितुनी परा परि १५ र पो पारामा !
प्रसार विजय
तुप मे मूम्प रिपा रेषा परि मोमे 'पपा करते हो।
पतित पत्र पर पप उठा जीवन में प्रप भरते हो?
सारिक माम के लिए यों पर सपर्म पीप
क्या मापे मुर नाम पर, प्रिय तुम अमर समर?
किर पया पहपोरख मुरप का। इस के पोम्प !
गोपो । म बिपि बनते हो तुम पापरला भार!
मन गरगा मानो युप को भी मुनीतिमी स्मृति पाई
पर मन म समझ, निर नीची टि भुता।
पण नर पुप ए पोमा 'मुभो रामा करें ऐप
घूम गया ना में कि मापरण है यह नीति-पिपर"
हिर पनि मत कर, निर कर पाईपूर गुरप सभापय
उठा पा "निर दन में जामो बीर भने ही निर्मम !
-
भून गाइये दम पभिनय यो पो पा रोगापीन
मे गुरमण में पाएंगे पनुर पनीति भी न
हो यह रिपारने सातामा मिर मार गुपारे
किहाँ तक रचित पार पा पुरपिरहमारे !
पोवीस गिाया है तुमने परिम प्रार में
परा है गोमारह उभरा रोग मनोनि-मपर में,
मना माने बार अपर पाntसा रिर पाना
एवं पपनी मृग पर की मम मर गूग गुमाता!
मुगष! नहीं है रोग को frमा पारी
परमपमा रताप यि यह नपारी
पतु सर्व
अन्यमा म सेप ।प हमको मसुरों से
रण में भी न मिनेपी तुमको प्रमप मुरों से ।
मसुर र पारे पर मुर पर नीति ही
मुर करते हैं समर मी भरि प्रति एकर प्रीति हो।"
मुन पद-पर हो सुरप ने चुप से कहा सप्रीति
'समर की भी पिसे सुर-गेमा की भीति !
मुर सेमा की मीटि पीर सामनुपमता
पीन पी। उसे प्रापपी पर्न-मटमना !
मित्र ! , पब से मुरष पमय का मामी होमा
इस रण में भी बह पत-नय का त्यागी होगा !
रसता पभी प८ मिनु नहीं।
गोर युर में होना अपना सी |"
ह प्रणाम पर रपया निर सेनापीपोप
पुप भी पाये कोमा मुन वा दुप पोर।
या मिनरम पमुर । मह उप-मुरष धर्मप
उन मा हो पर पापमा म पनप पा रेप !
पिरापर करने मयेरने एम-नीति
करने को ममर सत्य-नहित रीति
रितु मी पण उम बन मा को मंत्री ने मार
रिम रंग मारो पपुरों पर गली पवनहार !
पिर पामुरी मार मार पा पपिर माया
रिपिल मोहरों में नरम पर पापा !
मसार दिन
yिष वेप से ये मुरपन पर मगे पात्रमण करने
सम-मरण सो से मो मगो भूमि पपरमे ।
रपर द भी मानो पाकर विष्ट से सम्म
मा परपरमात परिप से मानो भुमित मृगेम !
पर गजन परिदत पर घर का मुरों में राप
मारामार मी सर मैनिक बा लिए पात्रो !
मी का मे बात करार पर ही हिर
मी “छिन्नमस्ता पम्-गम् र मरठी रणार!
विकटहानी रण-दमा मिागभी प्रण टान
पा हो पाएंगे पि पारे मे प्राण !
सपर पुदी पमि ममी ने सुपर गिराय
देग रिसे स्पिर हा एा परम भूत मार!
करणे हद्वार पुर मही उपकार मानो
वनि पनों में निर तीखा दिगान मागी
मर पौरनामी deण रहो मगाती मेर
मेला खिों पो णि भूगर मियने मपी !
सापियोंगमितानी पापारादिमिमी
भुगराठी यो पिमा उमे पार पान ममी
पानमा रंगी पान गाए श्मिरे एप
सपी रमही गोमात मार बसान ममी!
रंग मुकम्प भी ऐ मन प-मा
गरा में भूमि राह पराने मी
राधापी पाग गी पियो मन
नमो मना बनाने मर्ग।
पर्य
पों की पिपार, नमकार रप-बांकुरों की
मेरों को प्रमा पनि मम्मर हिमाने सपी
देख मृत पों की प्रगम पतियों को भग
मीठ पारपती परपरको बिपाने मपी।
पम्बकार घोरा पातेही रण की विधि-
रखा रोना ही मों को पि मम्म प्रामे सपा
भोपरा भमानी विभीपिकामों से अपूर्व
मुर भूमि मीरा का एप कंपो ममी !
पा-मम्प रेप ममी रिपामा में सुर-जीत
नियम की माचा पो जीवन बचाने नमी
पार निम पा सपा ही पाटी पाप
वों को मनाती मोनो-म्पारद मनाने मपी।
एमे ही समप पास-पास प्रदेश में से
पुरे पुराना पीर ए में सगे-समाएर
मातृभूमि रमशा पुर में बसाने आप
रमपित ति पुरदेर के निष्ट पाए ।
पुरु गनने हीरे गा को पुरानी यह
रेल इम सैम्प को प्रमन्न ए, मुराए
बने पर स्वप दमापीय पार निको
गृहमार nि पगिरि की पोर पाए ।
नमे पे पपिता पुग में चि भनाय गितार,
प्रए बनाया पालि में पनु सिम बनाकर।
मा जिम माम म पति मरे
मोमिल पमुरा प्रति ममें हम भार परे।
पसार नियम सम मकस्मात् गुस्सैम्प का, यह मधिस्य प्रापात पपुर-मैम्प के लिए पा प्रमप्र वित-पाठ ! इसौमिए ऐसा पारमा-विष्य पाया ऐप पुरात धीर-वीरों का भी पै सूर गया ऐसार-विमारिवा-मुहाप दैत्यभाम्प पास रपि पावन के प्रपम ही पूर पया। टूट पर गगमा यि पप्त हो मापे सब ग्यो प्रपूर्ण तास का विशाम बाप टूट गया सभी नम कोमने विधाता का विलुम्म हुए, पो पास प्रसम्म और भार स्ठ पपा ! भाने रिम्म भयभीत परिजिसको पिरारकी पुन सगी यो रेरा बानत-सित बन हरिण-घेणी र मानी ! मागे पनुए पीपे मुरों दस वसा ममतारवा मामामुपी है ज्यों मबम मारा पना मारता । पर मामु परि माग बसे निज मिति घोर निरबत प्यों मोर! ए पर ममी पाम सार, पारोगी, हन गर र नाति! मुर तिान गो नि परवालय परमामय विमान! इस पामीन, हपीन पान मणि गनगार मुग ! भागे पो पप कापीन नमा पर महेछ । MA पंगुम बर रारा बन गण महारत या पराम! मोई राम को पमाई पोरी सबमे मार द्वारा प मोर भार पुप पोरान ! पुप पारी श्रीगण पुरी बास मह पार! र मा . म य को करना ना भेनल! कोई मुमार।
पतु सर्व
पुष यानों पर बड़े भाप कुछ छिपे यनों में पान त्याग |
पुष तरों में पए मेटा कुछ पेट बड़ा बन गए सेट !
बुध निर्बम सापी को रवाए उसके वाहन पर हो सकार।
भर पसे गिरकामा माग पसका दिपा का रहा मान !
पुष वाम परे सुर-रप पर, पड़ो परो समकारते
निज सैम्प को सेनानियों को भूपति को पिपकारते !
पर रेवपण की इन्द्र की गुस्सेष की उम्पारते
मन में मुरों को भाप से पार अममम माखे ।
हिरप्पकम्प मगाम हो माम पापा
मासु-य से मुर-मीमा को स्याम पहा पा
पीपे पौधे एक पान में भी मा रानी
गिसको परे ए पर ऐसे सेनानी।
मार-माप प्रा पीपी एक और भी पामकी
परसाती पीयोमही समता परमीपाम की!
ग ही में पी मर्मती पनापति गुिपी
विस विवित प्रहार भात की मा नप-महिषी
रानी मुप हिरप्पास्यप को कुमार,
पहा प्रेम पुन 'माप प्रा पर मिना कर
मुझे पोर मुर-सीम से साबर पार हो जाए
मेरे
मिपी रिया मन में नाए ।
में यदि रिपु र बन्दिनी हो पापी
हा मी सिप हप भी पानी
परमार्को पो भी देरमण गरी गाा
पौर पन्दिपों को मा अप भीनदी रिगाने!
प्रसार विषय
मत पाप निश्चित हा निर पप पर भागे बरें
ऐसा न हो रिमामर भी परिकल्प गरें!"
पसी समय यहास बने दुध सैनिप पाए,
दुर सेना के प्रान के मम्बार मुनाए,
निराध प मे धम्म दिशा मित्र रष्टि रसाई
प्रा पार पीपन में स्मृति मिरीमाई ।
रानी मुमकाई, भूपति मरियत हो निर पर पर
पूर्ण बेस ऐ पामकी पाही भागे हो ।
फितु भागार मी न प्रमुरपति मुरवन स स पापा
सुर-सेना की एक पमू में पा ही उसे हराया !
रेश पमुरपति के सापी मिर प्राण बचाकर भागे
दिरम्पकस्यप गहित यहाँ के तहाँ परप पागे !
कोई पापा पर रोई दिश भाग मारी #
पोई र पपा पुपाप हो किमी पगारी !
गम्मि ममय मुगा पाप मप हाप
मृत्यु ममय म्यों भूमि-पन पर ले। पाप !
उपर गधि पापमापा नमन मपित-माहोर
दमी पान रे नि मा पा पा मर रिमा गार!
अभी भी बह रमिलों पर पार
रेगा पापा नुरव पामलामी freणों पर ।
गेलो पेरी मुगापि, पनी होने
पीपीपाएगा पा र रा!
देग गामने हिरप्पापा को परि गापामा
गाहा नपान पनि होला ८ पमा
पर सम
पुध पन-पक्षों पर बड़े भाग प चिो पनों में पम्प त्यान !
घ मृत रेरों में मए मैट पुष पैट पका बम पए सेठ 1
पुप नियंत सापी को सवाए उसक वाहन पर हो सबार !
भय चमे विपरकाया प्यार पसका म रिसा का पाशान
पुष वस परे मुरप पर, पमा परो समकारते
निर सैम्प को सेनामियों को, नृपत्ति की पिटाखे ।
पप बमस की हम को पुरष की उम्पारखे
मन में मुरों को पाप बेट और असमय मारते !
हिरप्पयामप पास हो माग पहा या
वायु-वेग से मुर-मीमा को स्पाम पापा
पीपे-पीछे एक पान में भी
पनी
रिमको परे हुए पस हे २ सेनानी !
साप-माप पापीबी एक और भी पासकी
पर सस्ती पी पोनही समता परीचाली!
इस ही में पी गर्मपती पतापति दुिपी
गिर पिरिन प्रसार माती मा भूप-महिपी
रानी में प हिरप्पास्यप को गुमवार
पहा प्रेम पुन "पाप प्रगा पर प्रमिलाकर
मुझे पोर मुर-सीम से सासर पारो पाए
मेरे सिमर भी तिषिमा मरमसाए!
में मरि रिपु हाप परिती हो पाऊबी
मा भी मियप मरष्ट पुष भी पानी
परनामों को भी समग नहीं मनाने
पोरनमा सेवामय भीमी गाना
प्रान
पठ मार निश्चित हो निग पर पर भाप में
एमानो दिमागकर भी परि हवे!"
इमी ममय बहास बन पूष मनिष पाए,
मुर सेना के
८ मम्बार मुनाए
দিয়ে में
प्रन्य रिला निर रष्टि उग
प्रथम बार जीवन में स्मृति पर भी पाई!
राना मुमराई भूपति मरियत । निर पररा
पूर्ण देम म पामा पापही भागेग
रितु पागपर भी म प्रमुगपति मुरदन म वष पापा
मुर हेमा बी एक चमू ने प्राही उमे पापा ।
रेप प्रमुग्पति के मापी निर प्राग पवार मामे
हिरण्यमयर हिल हो नहाँ प्रस्त्र र रयागे !
कोई पाप पर, दो गि माप मारी में
पोईवर पपा गुपपुर हा रिमी गारी में।
पनि ममप ममुगमा पार से सराय
मृतु ममप ग्यों भूमि पन र माप
-
उपर गधि पारामा त अमित-मा पर
हमा स्पानःनिर मा पापा मरपिमा गार।
अभी भी गरम हमारपर्ग मे पाय
देगा पा र वामपासी निर्गों का भूपर ।
गारोपी मात पसीना
पीना पासा पास !
रंग मापने हित पा पप माता
पापा हम पुष MIT परगा
पतुर
फिर पूष पर्यो पाप पकते महो किस नए भाए ?
पाएन भी बिन बोले मुर-समिक दिवमाए।
रेसनपी परत कोम पर समझो में सा
उसने कहा "माप इस माली में सुप हो बठे पर।
मैं गावा पर से करने दो-दो बात
माण है ईना सफल मिना पाव प्रतिपाठ!
पर प्रमरम प्रसङ्गम पा दो फिर होगाम
पर कमेमा पाप कर परसा प्राय !"
कह उसने पारण म्मिा अपना सनिकप
रेक ममुरपति-हरय भी पाया पुप माम!
बोसे "रस हो तो पुराना एकाकी रण-सर में
दरपे दोनों मिलकर ही पार समर में!
पाठो दोनों मिमे पाहणे रेप
!म्हणे बम दमहीको माम्म-पाकार!
पही प्रात पाकम एवं पर भी वही प्रभात
बिना है यह पतुरों के लिए पमा की पत!
बिहें पिमाई गुपा पप पराये पशु पर मरने को
पार पाया प्रिमेह तुम्ही हो प्रस्तुत मरने को!
सप दुभाषी ही दुपत में पाम
मयुमपा ही ली तम्-पुष्प पर मपान !"
राषित हो पाता "मर मे पाया
मारी पापु पापको मा पर गमा-गापा।
परिमपरामगाम माया तारिणिनिपामा?"
हिरोमा परमो मारोगापा।
मेरे पते पर गई यदि सामी को पुष हानि
दो से पाएगा मेरा बीवन व्यर्ष समान !
प्रत माप तो रण पिाते ही भाग पर बहाएँ,
कोई रसा स्थान देकर अपने प्राप बनाएँ !
मेरे लिए न चिन्ता दीरे सरा सत्य के बस से
में मिषय रो मा तब तक परि को रण-कौसम से !"
कह मेकर घर पाप बड़ा यह मुर-सेना की पोप
पसा पा रहा था मुर-दस भी करता मन पोर।
देस-सोच परत माग में सफर पे स्पम पर
राह रेतन सपा पत्रु माने को निम्म मतम पर।
किन्तु मुरों में न सिपा उमका एवं तिहा
भेगा एक मेम्पनापको जो सब भद विदित हो ।
नायक म वा निकट देग पूषा रसपति का नाम
पर मोमा परम्त तुम्हें इन बातों से क्या नाम ?
मापक याना प्रमी परमो प्राया । गुरे
पुरमा सुषमाग तुम्हाराण!
पर बोमा पारन रितु मी रसा? मारले हो।
तुम पुर हार मगे पापा पीपा पों पर।
मरनिय नसून पा पया यह गुन मममम म'
मारा गर तो है हम ! गप सिर पप में !
दगी गमय मुरगति भी मर मि गानी
पासमा "मा पप गे! तुपने मंनिस-मानी !
?
पतु सरं
क्या तुमको नीति ममी निय प्राों के गाने की
प्ररमा परिहो बार देखते में मुर-दय भाने की?
परि हो पविष पसे पापो मैं सग्य साम वाई
सब दायित्व सर्म-सीमा मे रक्षण का मेता है।
परिो घा, तो प्रमट होकर निम पास्त्र समायो
रणरमे के अपने मन मब परमान निकालो।
किन्तु पोमे हो न प्रव हो पर तक यमुषित कारण
तर तक मुर न करमे पास्त्र विस तुमारे पारण !
मुग समाषतः हनिम हो मुर-पतपति से गोमा
'भेद पापके पार पर मैने नहै पभी योमा !
पितु पर मुझे न पोना प्रबना निम निस्साय
माप समझने मुमपर प्रहार करमा भन्याय
पर फिर भने पाक पीय है क्या यह परमार?
मुर हो बयोंमिा प्रामे पमुरनाम स्वीकार?
बीरपष्ठ! मैं वास्तव में ममुररानका पनुपर
परवठा म बात पर पार यही निषपर
किम मुरपण म्पाय-युक्त मेरी पनुनय को मारें
एवं पमुरगर ना पीपीपल पी साने
तो फिर स्टार मही प्राणवन में मंग्राम पाऊ
प्रमुर सवारि मुरा को मार रमपम मिया।
पा पाप या तो अपनीना ने पिर पाd
भाषा पास का रो सुगर्ष मुनय बना !
मानेमा में पालो पर विपर भी पाने
पा, म र सो बारे मा भारे ।
प्रसाद नियम
परि रस ही करना हो तो फिर पापो करो तयारी
एक-एक कर पुर रो पा निसार मना सारी !
तुम समुम्प, में एक तुम विजयी, 4 मीठ
फिर भी देणे पछिका ने रिमो बीत?
उदुमी पिने से रलमीत
मुरम रती है या बप कर में पाग प्रतीनि!
फिर गोमा 'यह भी मथप निम पारिपागा
मुर मण गम्त प्रामुर्ग एण पर हसाएना !
पोत गया पाममय माम बापम मुभमे पाता पा
पर मुमो पर्चा प्रति कौल में पार माता मा ।
परम तुम मिन रण में परिचित हो यह पुरसगा
मान ए परम औपन में पलरिम मागा"
सुन मुर इमररि पनि हो दोपा "बा परम!
पिया की पुरी म पा जिगने प प्रा ?
रिम पगुरपनि + पिा वा प्रागाना '
मुरप-गुष्टि होग गरी मिमी ह ?"
धारण भी पति हपा या गरिमारीगा
१ मुर-मेगा पर सारि पो र
सपा मारा हम पी गुम
भोर मुझे न प पनप पापले परम!
मुर मानिने पौरि श्री अनुपिपपप
पाहो म गो पाना मम
Tim
'पानरनिराकर पाना
पौर पर मायामाना।
स्या है तुमको भीति तमी निर प्रामों के जाने की,
अपना परिहो बाट रेखते में सुर-दम प्राने की!
मधि हो पषिक बने पापो में सम्प साब देवा ।
सर पापिरव स्पर्म-सीमा में रक्षण का नेता है!
परि हो स वो प्रस्ट होकर निय प्रस्त्रास्त्र समामो
रएकरमे के अपने मन मय परमान निकामो!
पिस्तु परमे हो म प्रतः हो ग तक समुचित कारण
तब तक मुर, करपे पस्त्र विस तुमारे पारस !"
मुन समारा बह बिनम हो गुरमपठि से बीमा
"मेर पापके सागर पर मैंने मई प्रमौ होला !
फितुर मुम रेस पकेना भषमा मिन मिसाप
पाप समान है मुमपर प्रहार करना अम्पाय
तम फिर भपे पषु पीय है या यह पर-मार ।
मुर हो गयी है पिया पापने प्रमुर-माम स्वीकार
पीरपष्ट ! में वास्तव म पमुख्य का अनुपर
बेटा इस बात पर पार पही निषय पर
किन गुरमण म्याप-पुक्त मेरी पनुनप को माने
एवं पमुरराम का पीछा ही परसपी गर्ने
पा Eिर इटार यही प्राणप्रण बाम पचास
14 अनुर तथापि मुरा को पार सपर्म सिपाई!
पा पार पाटो प्रपनी सेना को मैं फिर बाएं
पवा पारम या मरो पुरा मुमय बना।
गाने गा मन पापको भर विप मा भी पाग
, गाम म म म पन पाहे मात्र भागे।
सार विषय
परम
परि रण ही करना हो तो फिर पामो को तयारी
एम्एक कर मुठ करो पा मिमार सेना सारी !
तुम सपम्प, मैं एक तुम बिनमी में भीत
फिर भी है बगिया से किसको बीत?
हो बामे से दुदुमी हिने दो रमीत
मरप बसी है पारि बम दर में प्राय प्रोति ।
फिर बोमा 'यह भी न करें मप तिम पारि पाएमा
सुर मम को परन्त प्रागुरी रण कर पसाएना!
बीत पपा बह ममय मान र एम मुममे पाता पा
समुमो प्रमो प्रति झोपत में पानर माता पा!
तुम
रए परिषित हो र पुरकर या
मार हुए पर इस बारन में प्रसारिप फिर म मामा!"
मुम मुर-सपति रक्ति हो गोमा "पा परम्न 7
लिया जापि पुरी में पा निमने रम पम्त ?
भिमे पनुरपति में पिा पा प्राणाम्ना ?
गुरप-युक्ति ही ए सकी गिमसी द पगा?
बसन्त थी पति हमा यह ऐप मारी या
है मुरममा पूर्व सति पो पारण
तपा बाग पहा होम बही तुम्यान,
पौर मुझे उग पनय पापले पर पन्त !
गुरमति ने मोरपिर भी पमुपप-प्रमे
पाहा तुम ण में गाने पाना चारनम?
पानमा “पर्म पागर मिपा पर पाना
मोर पर्व मग मरमा प्रयोगाना।
पतु सर्व
1
सभी पौरपर जग में निय-निरकवि का फम पाते है
मत मूर्ग है ये बनबो परकी इति पर गाते है !"
दमपति बोमा पापी । साण भी अप रपस
पुपमवन्त ने कहा 'ठीक है पचपि ये भी मसरा
किन्तु प्रपम तो है यह इम परस पिरत सभी बातों
फिर कुछ सम्पप म मम रया का मषपातों से 1
मै है पहाय मांगी है मने की स्वीकार
निरषय है या मी कि कार्य मेरा है मय-अनुगार
फिर मम में भागी होना या प्रौस्माइन पविदित है
दोपी पी रमा संसदियो प्रायः सा रवित है!
प्रतः पाहवा नहीं गमा में सुपर मतकर्म ।
मुझे देनमा है यह गया है इन पत्र मेरा पर्म ?"
मुन मुररमाति मुरित हो योमा “मपति वर्ष !
पमुरों में पर पम-पशि है पर मारपर्य!
हिर नुम तो ममुरेप के सेनाप्पा प्रवीण
ो भी हो पात मसगत प्रमुए भार रोहीन !"
फिर पापे पमन्त की मत्रम हाय ममाया
बोमा “पन्य बंप परिसने है तुम नम मुन पासा !
पौर | तुमगारे तिरे देण हरप गो माले है
सायनिए दीग में हब बनिगाले!
पितमा गुम होना, परि ऐना होता पनुरेश
वर पो मार मित्र राल परानों देवा
पम्पर! पर हम पन में ही रिमाणे
बिना यो म नुरमात पर पीपा परने पाये।
प्रसार पिय
निषय मित्र ! प्रनय है मगठे परि पर पास्त्र प्रहार
किन्तु प्रमुर प्रति पा सरगण-दयों में प्रोष पपार !
पौर मही कह सकता यदि तुम माम में म पा पाते
वो ममुरापिप पार कौन-सी दुर्गति मुर कर पाते ?
अपना होवा जमा तुम्हारी कोई पम्प प्रवीर
तो फिर यह पाहे होता तिना ही रणधीर
भीम पार सुरों के र सेवा जीवित वर पाना
म ही प्रमुरपति गिगी माति मम र यसपने पाता !"
मुन मनगरपदन में माना पति पामार
पहा ऐगा घायु मर, जीवित पर सफार !
मित्र नहीं । पर मर मनुपरव मे हीन
उनमें भी है पपी संगति पपपि क्षीण ।
म रिपि निय भूप को पा र सरोपित पाम
दिश
हमा पदम
कर मारो प्रेम प्रणाम |
पचम सर्ग
नुर सीमा से मैम्प मह मिान मया मनुरेम
मुन मुरेष ने भी दिया गुरमण को मारे।
"सबमनिक रितशे नौ निव-निरपाम
पा जयन्त मरदम पर पन र पिपाय !
बत कर रिपाम प्रपुरा मैनापति गाए
नीमा पर मब पोर मुहरु पौरिया दिगए ।
दुघ नुपोप पर मरम्प पीछे पाए,
पौर गरमी मरमविनापि वा नपाएं !"
५
प्रसार पिय
पलाम रणसिमा समर से लौटने का इंछ पपा
करमुरों का मुम मिस गिम पर पायहीं पर गया !
दुप देर में ही प्राप सर एस प्रमुग दम में प्रा मिले
उतरा ममा पर थाम्ति कारले ममी अनुभव पते !
माने पर मब दनों के गापा मग
गि पर रिहम भूम हिरोपमे गम'
पहिवार से जयपोर्गे मे मम्म पुगाते
बजे सम्म पाए विजय-मत्त पाते घटनाते!
पास्मात् परम ही रिपत मुरार मिम पए
रंग गोद मे मुरगण के मुग-नमम पिम मा ।
मम्मुग मा मत शिर समी मर-मुग्प मे पापा
मानो परा भार म भागों मुर गिर मुरा।
मुरपति भी स्मित पुगी साली सपना
पर मुरा! पहले है इमोपन निवाहना!
गुमने निय स्वायत्र प्रेम मारो पिारिता
पार पर्यापाठ गपग पो मिगा लिया !
पर जन मरका पार पीरिपामि
प्रात परे पुरीमा पिमुन पानि !"
रिले पोष मन्य र पापा
मानो पाने m गार में पसरा गारा!
मनिर पुर मुमम "नाग पग
रोगगार प्रम पप !
गर गिर निरपि पाग र
रिमा पन म प्रारप्रम-गाराम!
पषम सन
मन में उनके विचपी का पभिमान पय पा
सर्वत्रता का सर्वाधिक सम्पान मरा पा!
मुर-पुर पसने पर सायत, मुग-पोरस के
परिवन से मिलने के नबमुस के ग्रुप
विकल्पना प्रतय ही रप-रेसर एस पीपी
भविष्य का प्रत्येक पुरा प्रण मिप पीपी!
पिस्तु सौम्पल सुमनों में कटा मी
पौरव-पिरि पर पहिसादिषा-मम सक
पे।
रिचय म पी पद गुरु रक्त में सनी हुईबी
नीति मुटी पर मरनपा पर बनी हुई पी!
पोनिए रिपु-दण पर भी इस करने ममे
हतो पाहतो कीपा पर निवास भरले मरे ।
फिन ही निर हा मिषों को मरे रिमाने
पौर नये तिन ही सर अप रहाये !
मेरे इमरे, मामे पर पै पाने
जीपन पी पनिषता २ मिसराम मुपाने !
मिसनेही निरोपम्त रेग मरबारमा
पम्परामरते मरे करणार लिया।
दमी भनि भर पम्पना-पन में प्रो र
पा परे परि शिविर में उपम-गरम !
परगति में ही मया मुर रामगिरि पना
पर प्रहा पासा पर उतरे मुर !
गुिमाउन सिना म गमप भी गमुषित पाम !
पापा का लिमम" रामा म अपमान?
प्रमार विषय
एफ एम का भी बनना प्रमुग बना देता है जीवन-मार
भनेता के मुग-युग का प्याम प्रमेरों के विभिन्न प्यार
पौर भामरता को गान पूर्ति करमा सबकी
म्पतिगत सुग-मापन पपिरार, पर्प पर पर देना मिराम
पारि बन जातं. पप्प पार्य बात निवप्रति नम
पर भी धूम म ग तंम्प में यिनो गाती है मम्मम्म ।
सत्राम
रोमः प्रमुम महिपाई रिमने पर मिया
कणों मे ही जिग नियुम पिताको परी पर एरिया
पहा ही मरापिम ममय बिनाका उमरी पम'
उमा पहरी पगपारात पर्म पनन !
पत ममा पो गवन-मम्प भरपर पर पो पाराम
पौर परमो पापा गिरि प्रम पर गम्हें प्रणाम
पोप परमार पर शिरणागर पाई महिल मिरपान
रेगने को पात पापम दुग्ण मरपति मे पिया प्रमान'
जसम्म पागमसि पार माता पान
गरमा गरमाप को मार सपा पाम !
रिमा भर परसागर
4 गया उन्हें भी पर गर्ने पुल!
रंग पापा गमोर विपिनामा ताप
महीनारियापीमी'
गपागपानात पाना पy-nार
MIT मा सिराम माना!
पंचम
मात्र अगिनी का-सा मुधि प्रेम कार्य-पिता तत्परखा पान्ति
म्पपित से म्पपिता की तुख मिटा रेता दी पानी पसान्ति !
वरपि नितनों हीपी सत विसत-रेह, पी से हाहापाप
न मन सुन व सुरेपनप हो रठा सोड़ पापार!
पवस्था पी भी ऐसी ही हर रपयों से परिपूर्ण
कि जिसको रेप पयात टिम एप भी हो सकते थे।
Fष येते ये एपी से पुष मरने से पराते
अप नियमियों को सुमिरण कर-कर धोत्रामु महाते थे।
विकास नहीं करवा पा फिर निर पर गा पाने का कोई
पोपमहान परिवारों को जीवित पा मम्मे का काई।
का निर रमणा माता की स्मृति से विखम हो गावा पा
कोई निरपसा या में वित मोवामीमा रहमाठा था।
दुप रवि ५ पूगों मने पली सरापा गिनिा
निर पीवन-यापनार्य रमलो पुप सापन-ममिपाणि दिना
उपनिर प्य प्रमोशन में पिर नि पिता माता में
पभग पाए, पर परते पे रोरो प्ररिया बिपाता में!
गरम पा और एक पण दुस-परमातमिया पीनामा
गोवापरला पा गुमान पो रेवमन बीमा |
सनिपता प्रिय पी रहे मही बाराप पर्ष नामानमा
विण प्रेम पा राराराप भा मन में मम्मानना!
२ पशु म रि पारण गाणी पिणाले
सपा पम्म पापी नि पिाने
प्रसार विजय
१ पाप मा पुष्प पर इसकी परवार म करते ५
पनदाता के संकेतों पर मुनि सम माप
मरते !
मुररामदाम, गुन सब बात का भय से भर कप मया
मनी पर की प्रसन्नता को मानो हम सामागमा!
पर नमे सोचने "हाय ! सारितना पोर पनापारी
पिम मोति स्मारदामों दी मातीति गति मति मारी।
सिमका का जपरीवर मे सरिक मशाम बनाया है
सरो भी ल मप्तरेनों में पापा का पाठ पापा है।
भीर पूर्वनित भी पा प्रम्पे हो परणे "
यो पौरों के रहने से पर मिल?
पम्त उमप निविदा पर तो पे गुर पाएंगे
स्वामी पालानेबाने तब
कर पाई पामे !
पुर मही पुप पर्मनाप दमा नही प्रगति है
स्वातम्यापिर नरसाप हो बम रमी अनुपति !
महोदरपा पोर रिमी रिपि एसा पसार
पुरनिनितितो पाहोना पर।
मय माग मा उगमें मालिक को भी मिटर
समहमपम मे रिता समरगार निरिता
पानाहोरिनाम उग निकामी पापा मिति
महामि मापा मार रिलीम पात!
पम्पपा र परसेपो या पन-गह पसेको
मन-माप परेमा मनप से सुपरने से।
पुर सी रपारलता पम्फा Et
माया मोही पापा शार!
..
पषम पर्य
पास्तव में गिरा घासन मा प्रेस राम्प-विस्ताप
प्रपया भय द्वारा मनवाना उबरो भित्र प्रपिकार 1
राग्य मही, मग ममारों का सुमटित समुराया
उसके साप योग देना है गर्दिवतम पन्याप !
फिर इन युरों के होन के लिए गौन है पापी ?
गया हो पुर मिर्म परि दुर्गों को न सिमा मिपाही ?
दरा रिपि पे पनि बम हिमा ही महीं कमाते
है स्वाप निशेप जनों को परम-राम बनाते ।
पमत में पन परपग होकर गिराने एग पारे।
उन सबने मी पाप दही केमिर पारे पाते !!
क्या बिग हिरप्पा यात्रा पग सेनानियों का?
पपा बिगहा गुप पानमसाडियो ।
गए मुरक्षित निज दो मरे पि रिलाये
पर मरे में उपर मर भूग प्राभित सारे ।
हा तिने बगों नाही पग्न हो गया रागा
मात्र पिउने बाग एल पापया होगा ।
म मानि बिना लिा में मोने गान, उतराने
पाने हम मारे । मन ही मप्य साने!
पौना से गारा भप्रेमा इसे पाने
रमर पीर बने मुमति पो मयन गे गत !
पाप में देगने ममर भूमि पर
रितुप पागापौर पनि !
।
मार मिय
पाप-वे पुष्प-गा पा साम-सास एक मास
प्याम रंम लिए मूग भूमि से मपा हुपा
गाती पी यहाँ सो रष्टि नहीं मो था मामो प्रति
पस्सप पापाप हम पाप में पगा हमा
पमा हमा भूमि पर, वृष्टि का विमम पस
भीगा मामो उमीद रम म रमा हमा
पारों भार तप्रिय पगि पगु गोपते में
मानो मागास्प का मगान हो मा हुमा !
मागी वारें बटे सन पोर्मों पर
भिन्न भिन्न भाषा का पाषामा सपार की
भरकरणाम पी रिगीरी रिमी पा
कोई मनु-या ग पाम भी पाए पी!
पो हँग पी बीहात दीगनी पीसोई
पोई प्रतिनी पो माग मापी
पोई पगि रही जीपी बोर में कोई
परिप ट र पाये पो मार दी।
fratी करों में रपमनों के मारे मूर
im रन पा•ि कोही पं गान
तिनेही पोगे मे लगाए आप गुप मुम
पोरे गोरो मारे पुरे गे!
लियोनीपाना में भरे प प पार भी पे
लिने मन मेरा पण
लिने र मनो
पों में मे 4गर पर नि !
पंचम सर्व
पण विवाह के पे तिनों पर,
कोई निग प्रमिका का विष सिए पाए पे
कई निव-निन हरेष-भूति पन्य पारि
पसनों भी दो पल से छिपाए थे।
कोई निज ष्टि पौर बार दोनों सम्पनीमा
एकरक प्रार्थना के मार से उठाए थे
कोई बेतहीन पो पार भी राहते थे
कोई पाप-मीष पों समापि ही ममाए थे।
तिने ही ग बर पर हो-हा मरहीम
रतप्रिय अस्तुपों से भीत भपे फिरते
पिने पे
भायने में ममम पटक
पा-कोप
पुकार पर गिरते!
तिना का पापा न वा पुर पारि
ता मी पे में प्रारण पाने के पर्व मराठे
पर उरते पे भूमि पर पो साल तक
पर ति पाठ है पुषार से!
गीरा पार पगा रितम पारि
गयी ये गारो निरनिर और मीरा
पोषों में परा पर मृत पारो की पार्ग
शीरगोर गोपले भी चौपा
पी में पिएमाँ भी मामले में प्राण
गि सनुप प भी पौरने को मारने
काम गरीर र मापनाप नाप
पग
पीटने।
धमार विनय
?
रेत यह पया मुरपति प्रतिशप रिकम हा उडे
उको मा प्राण प्रम-मुत हरा रो उठे।
पहने मपे 'अप पग्मा हो पाता है?
पों दुनिया में एमरे को साता है?
भूमि पार साप्रारय । पर तक भी पिसके हए
कौन कहे जाते समय अपने बैंगसे ?
पदो। पार मिनी माताएं रोवी होंगी
पिनी मर चुत निर पाय खोती होगी।
पंप-हीन बनकर रितने एग पाते होंगे
शिवने फोमम मम मृग मुरमावे होंगे !
पिट रंगों में नहीं कोई भी पापपा
विनों का प्रसय में दम पम सरबह गापमा!
पगुटर मा पर्प नही कर रगडे,
तम पसी समपर र मिस पर रहने ।
पोई भरने लिए और रो मही गाना
पता दूगरों पर पपमा नहीं !
रितु मान में पाठ र पमुर, ममुर पगुन्य में
श्री पोषबर परपर मरने ।पानम्द से !
प्रमनुसुम की मार को सपाली तमसार
रि भोर पोते पूर्ण पुर-मार!
fret हमारा ऐता पशु मारेगा।
मला ना रे मर्म मार गाने!
सा मी कोर it
टोरिसमा-मा!ि
पंचम तय
मिनु पार है दमके दुग पर कौन रया दिनसावा?
इमकी पाहो पर पाम् भी कोन मिराता?
सनिकों की हम करके योग कराते हैं उनका उपचाप
मापितों को भी उनके कही दिया जाता है प उपहार !
पर हम माने मृन इस तरह ज्यों है ये पापाप
मही होता इनको कुर कट नहीं हो इनोसर में प्राण !
करेमा ग पमीति को भता मा रमा पग पा र ?
रपि में है सर गिसकी एक मुर प्रमुप, पगु-कमि बिम-नपार !
स्वर्ग म नमें पोगिन पास ग्रामि-प कर माने अभिमान
पौर म नर्क यह मिरा र परमरा-मा सामान !
पर्दै मग य नि मृष्टि का FिET सपा ममवान्
मातिमी नि म प्राणी सभी पितु-मा सहसवान !
पर राना बमपर हो पा fr पारी पा निवर--
ममी पा भगिनि म प र परिवार के मुहमा ।
पिस्तु पारी में मद मूग परस्पर निमार र प्रशा
गारम-रम निर मामार्प बापु के बिमस रस की पार।
पौर मरो मार्ने धीरत पर्म पर्तम्प गए
पहें ग बामरिको प्रमो। पम्प प्रपा र सिर
]ि पोर्गो में पा समग ! पिरतार
पौर व पेही गर एए-नाग पर सिम 5
दूमरों मिल राई र पोए पपिपार?
मिणा माना पौरों पोपा मितए सर?"
छठा सर्ग
पारा मुररार मुन मारण उरणार,
अनुमर कसे के मनसार या मार
बसामि बोसे "प्रमो। पोएमपीर
माना है हमरो पहा निर रसा रे !
nिा पर्व रमापार
मान पति ने मुरद सार !
तिने तर रा पम्मलि दोन
तिनति मो गा गो, सन्माो।"
-
को मुग्पति " ५ पम्फार सिमरों में
रिसोंगे परमाफी पर पं पार ति मुरा।
पहा सर्प
किन्तु पाप प्रति पाप देवपन ! पुष्य नहीं हो पाता
कोई पम की पमह पम्नि मे पाना मही भाग।
पौर नपा हा मिन रपा? याही पो मागस
जिसकी मामा में पलते । साी अपनी बात!
बसी मा में तो सदा मुवे । बमहीन
रमे गाते है प्रमितु सोफबनाकर रोन!
मेकरही स्पसियाम्तों के प्रपारारिता माम
कहीं बनाने को पसभ्य लोगों को सद्गुग-पाम
रखी पी पोसियों के गा में भी नहीं मुशम्ति
पहीबार परीमि से होनी यम में प्राति ।
पौरही परमहमिहिनी रमापरले गो-
हो हो हो है पार पन राग करने मरने की।
पिन रसा सास बनाकर तो दुष्ट सरक्ता
परा बहाते है मिह निर भनौं का रत!
रितु मी भावों से परिबन पाप म्याप्प संगम
वो रिपुरा पहा पा रोन जपत्र में पाय!
सर बनकर बमिट करने को पानी रखा
पुरो मुटा पो देने यो निर नम-गा।
ली नातिर पर से तो पपुरों में पाएन
मास-मरा म्पमिषा, टमी । नाम
रिप्पा-पर भी पर्दा माता राण
रबल समसारी निर्मम पनीनमा पोषण !
5
प्रसाद विप
पता सरप रक्षा ही है हितनाति भी पर्म
है निग रसा पर्प तो भोजन तक प्रपफर्म !
फिर क्या रखे है नुरम निर प्राणों के गाने से ?
पपया प्रन्यापों के सम्मुप लिपिय ग्ट पाने से?
मा पीने-मरने में उनके लिए भेद है भारी?
जीवन-मरण, नहीं है दोनों एक क्षेत्र की पारी ?
मही वर का प्राव यकता है इन तसगारों की?
सिस म्पाप्यता होती है कर इन निरय बारों की?
पौर मुरोपसहयोग है पान मौन सह सपना ?
बिमा हमारे मौन रहो पण भर मी रह समता
रिमीति गति पनि कापणा तुरख मही एक मावा?
कौन बसी है यो मुर-म को रेस मही झुर समता ?
पार हमारी सहायता ही में तो सर पमा है !
पत्ता भी पर पवन रेप योग बिना हिसता है?"
पार बोम गरेर! परतु को बीवनी माप
उन्हें पीन पा निट पर करना पत्रु पराप
भीमा पप , फिर यररमा मे मम्भरता'
रिपीदमा रिना मि तरह पर पराम!"
मुपति गीत " पीरम-मान एना पार
पर मम निता, मुर-मगार बनामार!
नाममार गितमा निमारमा पार
गताना न्या उमा विषापार |
पिरऔन गापन गर भी मोबाहीमाप्प
मिमामा मतिर गागमा
पठा सर्व
प्रणमा नहीं है कि कोई हम निर सा-या
प्रश्नकि पे पम्प मल पा सभी हो केम्पर्प ।
मिसम्बद सपर्म और स्पात पाने ना,
समी पतियों का इनकी रक्षा सहारा लेना
प्राणी का धम फितु इसका यह पर्व नहीं।
कि पपयोग पापविक बत का समुचित सभी कही।।
धर्म-पर्व भी पपुषन का रपयोग नहीं समुचित ।
पौर किसी भी पाति सरव रचा बा पधम्मपित!
या बो पक्ति पनप से परिकी पम्प नही भय त्यारे
नहीं सत्प पर सह समया मामागे ।
यामीविहीन मरिपिसका एवं पिसके पाश्रित ।।
निन परणात रोपी सपा ममानित सम्पति।
मा रिस बम प्रयोग से प्रतिपक्षी का पार,
उसके मिप निहित है मुरपप ! पबम का व्यवहार ।
नही पौरता है रिपो! ३ का प र म
है पीराम सस्प पर निमम + हुए परने में !
सपा रिपपी मरी हार का माता
प्ररपुत्र पर यो रिना मुरेनिय प्रम पर मिर गाता है!
परपा यो प्रविगी पर ही परेपा बाय
बिम मृत्यु समप मादन म मार मार !
पौ मा o भपता है रम्प-ना गमम्प
मिर्षयता ममा ही शानी मोकार पीप!
मिशनरी जिमम nविपना मेरा
गिनम हो बस मिरपुर समाना पाप ।
प्रसामिनय जम- मम्मियों पर पयों पत्र प्रहार? गे मारने में तो मरना ही है प रसर! पर देवपिपुरी बिन परिकप किए गए सभी मान व पर्यो एप साते न मुर उमी एण मपनी प्रान' मोष यहाँ l रहेगा निपी पमाम विसमें मिा सारा समता नही कभी दमिरान ! बुरिपुण्य प्राणी है गुरमण ! सिम एम भूतन पर, पाप ही मरे पीरन है पर निर्भर । पण पामिन रामास सम्पादन पायम मे मसुर निराशप पनप एवा, प. पही बुद्धि गे पोर मरप-बम मे नप क्या करना शिवि मार में भी विवादित पप परी पमना सासरपण पी बुधि है सनीति पहनाना मी माम माद में प्राप्यारिमारमा पाठी! रिहो जिन- पशु-नम म मैना मार तिलो को पो रममा । गा-गु ममुर्गा का मren! मोर पिया मायने पगुणबीमामि प्रपाल मपपा ममम गाल प म मरिया हम भी तो म TAar मिार, र सो प्रतिभा पुरा ? पर मग तिगुग्मनमाने , स्प frभी समरि-गुन ?
पठाई
'पाट्यं पाया
पे रुप मकर स्वपन धमे हपन सुस पासन में
इस रण में मीम पीप-यामा किस-किसके मन में !
इस विधिया रायित्व नहीं है हमपर भी इस रण का?
गया है मात्र ममुर रम ही उतारक इस कारण का?"
करते-करते अपपितित हो फिर मुरपति रह पोमे-
'धम्म प्रमो । मम पम मापने ठीक समय पर सोम !
ठीक पार से मुरगण प्रपना र पप गये
सचमुच मर सपथर में यह बापु मार देखें।
मिसे बना ही है नास प्रास- पास्त
सत्य होरा पर उमा सियाम्त !
उत्तेवनाम पर मुरग को बोषित बना ममी
कोई पनि म र नुरमामन पाणमा सोनी!
सम-पुरी को पोर भय मुर परामर में
सर्प ही नहीं प्रब मुर-शामर पहुँचेगा पापा ]
पग-पग होमर भी गिर धर्म नही पोपि
पितु सापही नृगएको धीर नहीं तमे ।
पर मुरमामनपा प्रापार हामा पशुपम लि
पर मुर-मटिगी लार ममता मेरा भक्ति ।
पर मोरगे पर पपी बनारfr
होगा मरा ऐप बनाना मारा ममर भित्र ।
बातम मालिमममे प्रेम-बम समार
पा र पुर पर मगर वीर मानः पप भार!
होपा उमरा प्राम पन म नरप्रति गमाधि
माग्निपातिर पर मरप-नपा की प्रेमिनधि।
प्रसार पिय
पम पम है साम्य पान्ति यही मिरप गाएम
सब जग को समा-पर्म की महिमा रिषमाएंगे!
इम निकषय से पुरपति मन में पाई प्रदान शान्ति
उनके मुम पर ममारठी इम पति भी शाति!
महरू ग्ठा हो र गिता पर एपित मामा बरन
मार तप परिताप मम्मि में स्वर्ण हो मया दुम्दन
परपावाप पणि में पिता मस्म दो पई सारी
पूम पई पोषों में मानी पावन की मुग-पारी !
मी ममप मुर जिदिर मे में गुरु का पादेश
माया एक पदादि मम पाप रे मुरेग!
पुषण सुरसामान मुगवा ग्लुम्स बनाए,
रिमय हाय पी वर्ग से गुरुविधान में पाए ।
पुरी स्थापन कर साा, पामम पर सर पियपा
और गाय पहा "यह ए मा एप लगाया।
परा सारे तयों को गुद ही पूरे र मोमे ।
मागेको म गुपा मगध भी भा रागे ।
(म गामा में पा सरवन मेरो गए?
ग पसमय में मपर भूमि या मरा"
मरति मिनो मापा मारा हाप मनावर
मारताने पौर रंग
पूनम
मशिमर लिगी ममम पापा
पराग पर सोमपम भारापा?"
घम
सुर-मुर पह घुम, हपित होर म सोपने मन में-
स्पात् पुनः पर तुपति पान पासे सुर-पन में !
तरही तो प्राचीन संसदि फिर प्रस्फुरित हुई।
वरही तो पुरपति-मन में यह करणा परिण हुई है।
ठोक प्रठीसा भी जिसकी मुझको मह मही धमय है
पर इस संतति-नाता पर ही निर्भर पाति-निरय है!
फिर प्रसन्न हो बोमे 'दुरपति ! सब यह अनुमान
मुर-बीवन में पान कधी हिमा को इठमा मान ।
पूर्व कास का मुर-जीवन का मास्तर म पादर्य
कौन पा सरा। पम में उससे गार उत्तर
गपोषन पात पा उसमें तितिहाँ पठी पी ?
पीवन या पा प्रति-मुरमरी मूवम पर बहती !
कभी विकारन उनके मन हर पाते थे अपिमाप
पुर-गपुगण र प्राप्तिर सम करते पे मगा!
सुर-तुष्ट सबके टब मुरपण मम भा भावन !
तबमोमों में समन्ति-मास पैमाने सापना
मुरगपरे जीवन का पावर पर में नया मान
कि गर समारों में पाया उसने उप पान |
सरपापिड दिए निररि ममार
करने से पाने महा पानि स्पर्म पर।
नहीं होने पर पूर्ण नहीं पा पापी नियम
की मुधिरोपरापाई की 1714-गमार।
मुमाग मामुग पात्र बना निर मारपिनमागा
ममीरवारपाप-गिर नि निर्मान!
प्रसाद पिय
काप पा सका दुर्गम भितरोन बन का परमा सफार
रियाना प्रमों को तामा पतिव-सन का दरमा पसार!
प्याग कर मारे मुप-म्पापार मा हिमा प्रष अपकार
लिए मैं परमा सरम प्रचार, ग्याप का सामा परिकार।
पर्ण शिपा र एम एप मादिरों में एना मुक्त,
समीपर एपना गम पनुराम नमीको देना पनि उपयुक्त !
सभीको रमना बर्माल मरमे दमा नहीं पगान्ति
मत हो तमोगा मिए, करानी होरे शासन-प्रन्ति !
मुरपनि बाम
रिम पए पिर यह पनाम?
पो बग के पार गुर से रवापर ?"
पपुणे
पुरु रोमे, "है यह भी मुरपति ! मुदोर्प महानी
बह पुष
भी पा मारपीठए ही पुरों का मानी।
में भी पात्र भी हर पर्षमाम्प पाराम
पर प्राय पागम मार्ग पे समीति तुला
भुग मे । गब पर, रसारिक र प गाने
रिमुवा गमप भी पी पा ।
रिमाको लिग पिगीपा भी पा पदारों में
सीरगपुम मा पा एम पिपारो !
मागभी देयों श्री रमम प्रति माया
न मिल रपे मर रमा थापा !
निगरपापा गभी गोपा पिसारा
प मर giph निरि पुराना
पा सर्व मुरपुर में ही पूरा अन्त में समारोह यह भारी तपोभूमि ममा पस दिन मी यह सिर-मुमनों की पारी! निम्न-भिन्न भाषा प्राति पास विभिन्न देपी भिन्न-भिम्न म्यहा बामे भिन्न भिन्न देणों के एम्प प्रगा सबके प्रतिनिधि निशान बीर म्पयसायी सबने मिम पी विष-यान्ति की मूतन नीति बमाई। मुरपति में सोमुर पूछा "बाया मा म विपान' पक्ष मुरुमे 'गुनो दात ! उसका सतिप्त बयान । नियम हुमा प्रथम दो हिमा रण को प्रप ठहराना पाप मानना मानिक रण समिपा-मोठ बनाना । पीर सा पारिसम्प-पात्र-कोयता नाम मिटाना प्रात-सित गीपन को ही पर्म पानामा ! सत्प बोतमा सत्य पाषरण करना पोरकरामा पाति राष्ट्र ममुराप पारिक मनुविन भर मिटामा ! समा मारकम्पारिक प्रमीतिमप पापोगन- को प्रत्यरा परारा पिसी दिपि देना भीम पर रितु नहीं सापारण मगहों पा मिर सरमा नाम पाम लोग मर पर ही मम पाना पाय ! नही चपन में मर पोपी मुनि प्रपना मुरबा गाने पाविती मही गपतियों में भी पर माते ! पापा मिति उना भी निकिल पर ठहराना पापाप नगो एणमा मप में मुन्नामा !
प्रसाद रिप
मिपम बना परि मरना तो भी घर मे गाम म मा
पर को भी ममरमचम, श्री पोग्गा ना!
मही भयानर पिपात रात्री-पात्रो अपनाना
पोरम बनाम में नियम पर पापमाना!
मुएमाण को मरने हग ना-नग का नामः व्हराया
पोर माहीमो मा राम का म्यायाधीग बलापा !
पात भरमा
चाजो मामाद
परम्प ये मारे मा मान र सिमान्त।
गुरगणार पर्म १ मया एना मुटिन मना
पुरमा पो के सिम को गहाना मा }
पुर म ने ना ग में पानि राहामा
गर मुग्मों में प्त नियमों रिमन परा परगना ।
मानिस मारि मी र ले गाने पे
शिश सती न मुगुर पाते थे ।
गुग दोपे 'गी पी पी राम-माता!
म र राष्ट्री मी र पापा !
रहा गुमने “ग भरा तो पी मर। एप
मनियमों के पागना पा बाप्प राप्रापा ।
गरिमापनाना पा र सिमापा
गर्गे पापागार निर FAT Rm T!
नामा मोना पर निर्मापी
लपन-मना गर राणी मी मगर मी!
पगम गमुनि पामत पे
in मर मा गमरगे अनुसार।
मग सर्व मुरपुर में हो पा प्रत में समापेह यह मारी तपोभूमि या उस दिन पी यह पिर-मुमनों की पारी । भिन्न-भिन्न मापा प्राति बाप्त रिमिनों के भिन्न-भिन्न प्यबहारों बामे भिन्न भिन्न बों के राग्य प्रमा सबप्रतिनिधि विधान पीर प्परसापी सबने मिम पी विष-म्ति की मूतन मीति बनाई ! मुरपति मे सोत्सुफ पूपा या या या विमान " में मुमा वात! उमका संशिप्त पमान ! निषय हुमा प्रथम दो हिमा रण को पप टहराना पाप मानना हानिक एण समिपा-मोत बनाना | परिसा पाणिग्य-पम्पनौत मामाम मिगना प्रा-जरा औरत को ही धर्मा पहनाना । सत्य बोतना माप पापर करना और मामा गावि, राष्ट्र ममुराय माहिक पति और मिष्टामा । सेना माफ स्पारिक प्रनाविमम पापोरम- पो प्ररपरा परोश रिनी पिषिमा भीम पोषण! पिनुनही पापारण मप ना मिर मरमा नाम पाम ओष पर परतेम में प्राता बाप ! नही रपा न मर मोदी मुनि पपरा गुरबन मान पातिकमही गनियों में भी न माने । पापा मिति नरा मा निसिापपरामा मागाप्प नमोrm frमा अमन पुरयनारा ।
साबिनम
नियम बना पनि माना ता भी एप से काम म सेना
नहीं ग को भी समर-स्पन में भी पोगा देना।
मही मयानर विपात पत्रों-परमों का मरनाना
पौर म बमकोर में नियम पर पत्राात्र बहामा
गुरगण को मदने ग मप-बम का मासा व्हरापा
पौर बहरीको गर पदों का म्पापापी बनाया !
हर दान परमा गुम
रोम-पोर पानात
प्राप दे पाने म, माई तटस्प पिनाम्त ।
गुरगणा पर्म से पपा रगना मुगस्ति सेना
पुलारियों के गिर न हो मापना देगा !
पुरन ने ना ग में पाति प्राह बहाना
गर मुग्नों में न नियमों की रिमन पसापरगना ।
पमानित मापारि भी पही तप गे गाने पे
frपती पे मैंने गुरार पाने में 1
गुरगनबापे कमी पी पुर रिमोरार मापा ?
पुरा गर रार्थों की भररामीम पापा !
पमा गुरमे "मूग म्ममा तो ५ गो एप
मनियमों के पापनाप पा बाप्प एप प्रादे!
नियमापन गामा पा पहातापा
दोगी गुणानुगार नियत रगोश पा!
हैन पपानोरों पर निर्भर वा
मामर-मना मा समापी पनुपरपी!
मानों में मार मि गामन में
मंतर मी पाति को पगरी !
घटा सा
सार ।
निपिन हारा नियव होता नहीं मरेश,
कही गुणों की परीणा का पा नियम विप !
जो होता रत्तीस, मह पाता नुप-पर-माम
मापका प्रमुन ही मेवा प्रमुग स्पान !
कही प्रयु मर एकही न करता पा राम
कही वीसरे-पांच बर्ष बदमदा
इनमें भी ये कई मे कुछ रसते मे सह-सम्मति
एप पते पे समी प्रामा पनि मन पापित ।
पिर उससे हाती पी सबके लिए समान म्पमस्था
ऐमी हरिभिानवा-मय पी तानीन परस्मा !
पाम-कोप में पी वर्ष की परत पमा होती पी
पही मृतक की पतरापिगरी ममता होती पी !
एम पम मेरी सामानाशाग गागन पमनाना
दुकानों में माही में मारा भोगम पिमना पा!
महारापीपीपातीमरमानिजिपित
सहरीद्वारा सा गावा पा पाप गुरसित !"
पूपा मुरी गे गुप! 'मान मग?"
मुरोग ना ! मा माना गुर-ग'
मार यह किसे सम्म पुन ५ मभी माम्पापा
अपम बनान प्रान पार्व-जीवनाम गनुरों !
पौर सदस्य, विधा पनि गागन में
पार माम मरे प्रातिर मामा-नपान !
हरापमोदितिर पर बनाना
सपा पतिरामनाए ममिरियाना।
प्रसार दिन
गुमरी में
पुस्चम मा पुमति दुमका पार पा
या गमू पपिः सता पारापापा !
किमी माविका भी धामन स्वीकार न येरते
ही स्वतंत्रता की nा में एक मिमार मरत ।
बमे रे होते पे मरमे पपि म्यापीय रमानी
परयलिए
मेगाप्रिय एवं धारि-पन पनुरामी!
गि ने बार मामा कुन गती पी
पूर-मरती नपरको का मन्दिमा तापी ।
करपा पापा पुप रिमीरोन ने पे
मे नितीमोरोंबी मिलि गर्म मे पे!
को व स्गमित होता रमही में पले र
एकमत भी उनमें मिनता पा न मामपी एए।
प्रम रंग में पौरमी उनकी गर कुति
प्रप पर्म पानीति रोपी उनी रात्रीनि।
पुगी गुम-मन पाना मा पा गर पाप
गुगा पे णि ही मापार, पौग !
जिम में वापस सामोरे
fontसपनो मौरी भी मरिमीमे परे !
fr
मागमा नो पिपरामा
fuी प्रादुर भी मा मोगरा
हिसभी पापिषम
नपा मर रामा गनिन।
गुर। परनामे मम मा पुगता
प्रो कपालम सिनेमा
पा पूर्ण मुरपति दोले पहा ! रिसा सा मुम्दर हामा ! उपमुरही यह परम पिता का मोतिर मन्दिर होगा। पुस मोमे "मुरपुर से भी मर्द नही पा कर पा दुर मण से मी मुब मनुष्यों का परिण पार पा! सत्य प्रेम स्वातंत्र्य, साम्प गहयोग पवित्र परमता रेस स्वाभाषिक मुग निश्छमता परि मृानता ! -रेग उस परिष भीम को मुर नामा मार-मार मर-तन परने को मृत्यु-मोर माते ! पितु पन में उम पुपके भी पिरने पानि पापा परास्त ग्म मनपुग में पता म परमाया ! समयः भूवस पर प्रमुगेका म मा पपिपार निमस जम परपा में पाया कि प्यार! नसा महान स्पार्प में ए पत गर रेग म रिमामयाग में आग: गारे प्रमा-मरेप! अपनासी नुर- मरों तक में पनेर प्रमुर पाएँ तो तानने पिने ही पनी ही पुराना ! पुने गित स्पा मुगणी भर पो पानापा उप मपति में पीपे एपो पनुरों मे मिलाया ! पाराममा धारमा पो पणि मनीषाने पारिधी मप मापीमारिका । गा बन पा मगा मोरियाममा पाया बमिरामारीमा गरी मापा ! पोर पार हो नि । मुमरगमा भून तिनो पारी पाभों को पान।
यही भूममममा में है भूम पा ग सारा
पपरमार प्रम-मोरा गमिता नही किमारा !
मुरगव ने समारत इममें भी बाश पराई
पुट पारियो के nिa की पूरी दानि मगा!
मीलिए मुर पमुर (पमामि गिने नाम है
रोमा नियमित मालपोप में पमा
माही में मुरपण न गमिषना को पपनापा
पौर सभी गे मुर जीवन में पागर-या पापा!"
मुपनि बा forg पर ता है पद गर पर्ष
मेप दिन मभ में भगा पिटना पाप?
गिट पुरी मारी चालीन प्पामा
नतिन मुरारीची पररया !
तर यह परि मृगगु गयान ।
पुष्प नहरी पाने के माहरा लिपान !
पर मोग चिरनिरनमानना
रिमापे मुरगान-मन मे पानना !
बाप पुर हे हीर मगर मार माग
सभा-या तभी परमारा!
महीमही पर तो म गम भागार में
मार-मारत गिरि गार
मागागा पाली मी
पानिपर पनीमही!
घा सर्ग
मुरपति बोमे "महा ! पिय यह कैसा मुन्दर हामा ।
सपमुष ही या परम-पिता का भौतिक ममिर होगा।
मुरगोमे "तष मुरपुर से भी मर्प रही या कर पा
सुर मण से भी मुझ मनुष्यों का परिपाकर पा !
सत्य प्रेम सातश्य साम्प सहयोग पषिष परमता
वे सबके स्वाभाषिक मुग्म निाएमा पौर मृानता !
देप उस पवित्र जीवन को सुर ममावे
बार-बार नर-सन परने को मृत्यु-मोर यावे!
किन्तु पन्त में रम सुन के भी गिरने का रिन प्राया
परा प्रस्त उम सतयुम में वा ने पर पाया !
प्रमा भूवन पर प्रमुर्गे का फम पमा प्रशिकार
निमत जम पर पाई मे ईमामा निर प्पापार।
फैन सा पान स्वाब मेंब पा राब रेम
से रिसास-पाप में समा मारे प्रमा-गोप।
पपमासी मुर-मनुगों तक ने अनेक प्रमुर प्रधाएँ
मगे मानने रिखने ही उनी ही मुरतमाएँ !
पुपने निर रहा ममुरपणी नपा पानामा
गुपपति । सौगे गुपो प्रमुरों में निगमाया !
पा वामनाएँ मारमा का पति ममी पाने
रसारिरि भी मर मानिने !
राप बन मया मपा मोस्पान प्रम पापाया
बमिरामों की गार पाने में रस मारा !
पोर पार तो तिरही मुरम्मरसमा भूग
गिरने । पामुरी प्रपापों को गर्म काम !
प्रसार पिय
इम ही सुमसुमपा में है भूम पा जग सारा
पमा भाग प्रम-नौरा दो मिनता नही किनारा
मुरमन ने सभापत इमम पी पापा पहुँपाई
पुर गारिया के पिर पी पूर्ण परिल सगाई।
इसीसिए मुर पगुर स्वभाविक पधु पिने पाता
दोनो नियनर पातों को ग म माते है!
काही म मुगण ने पेनिस्ता को अपनाया है
पौर भी गै मुर-बीवन में पामम-पन पाया है।
मुरपति पाप गरिनु पर तो है यह मरम्पर्य
पेप पल मय में ममा रिता या पर।
रिपारी पर मार्ग प्राचीन परमा
म यह विरोम पुरा पीपी पपम्पा !
तर यह पिके का पिगु गपाल,
पुपमही पात्रों के संग्रह रिपान है!
पर भमा है गठन पिरनिरा महामना
शिर मम्पे पुर पोतन-मन म पामना !
बोले र “टी पम्प पर मार दुपारा
म पगानि-गुम पापी पर रिलाय।
सीनही पर ना स राम पसर में
मारतारापून पिपु-गार में
पाया रेणापसी मा पाली नही
पादित पिनेर पाली मही!
पास
उमरे हम है म प्रवाह में बहे पा ये
पी-गही समातियों को भी । भुमा हे।
पार र मिर रिम्प सध्मिां भूम है।
मात्र रामसिक कमा म ही धूम थे।
थी-सत्ता का माह मी ही उनमें या पा
पौर शक्ति-प्रपिमान भी है हो प्रमर पाहा!
मपि वह
निम्तु तुम्ह भी एक नाम की बात बतानी
मुर-मन्दिनि । भार प्रमुरपति में पटरानी ।
हिरपारप पोर पपा पा ग्मे परत
गर्भरती सर-पीड़ित ।
पाया गंगा में उमै माप एक पागी-माहित
रहा रगी ,हमार-गुन मुरक्षित !"
रानी को? 7 मुरपति बोमे गुप प्रापय बिगार
गुरु
रानी दमित्री बनार
पदि पी म पता भी वो पी परि-मायामों में
नपा पेना पा मा म न पुषित पामामों है ।
महिला हिर बह को भीहो. मुरपण बीच
उमो बगिनि पसे गला ही अनुषित-निन्य !
मुर न "मनुषित तो इस गप भी नही हुमाई
गुर-मैगाम पुर निपमा अनुगरण पिपा है।
गाना हो पर गने को पे मनिसा पाप
दिन देना पा उसको नही मिी तिरिमाप्र!
है। पद दिला होने से की गिर पाररपीय
मोरपिा माल रिया में मापनका
प्रसार बिरय
प्रस्तु ममी सेनापति मारर मुनि को सुनवामि
पोर मह उग मेकर परिदम में परषा पामे !
पितु देर ! है उसे पापो पर्थन की प्रमिमारा
पह दिएपी है पौर मुभ है उममे मम भाचा
एह मेरा मन परला है या दुप रंग माएगी
इसकी प्रतिमा री प्रमुरों को मसष दिगमागी ।
प्रत पार पामे पो गाकर, पुष भोगम पा सीये
रिपुपर प्यन कर ग पर हम को मुग सोने!
सप्पा ममम पाग होकर रि रमो
बुमा
उमोहाय मार मुन
ममुषित हो नि मा !
गाइए ! म पर मोर रिमी मगो में पिरम गाना
मन पोगा मुझ पार मरपान" पर पाना ।
मुरु मामा स्वीकार पर मित मुरेग
गग पिपिर पर म गो गा दिने नि!
सैमा
सर्व पात्रा पा पाया ग म प धीम पाले हा
पगुमामी के रप पार र गोरो !
स्मरण गपापीरसिपोरा भी
रश्मिा भी नि भर
पीसीबी मार।
तुमु सो निर मे गोपने पार पान
पारा स प्रति नने गरे गगिनन!
गी पगबारे पार, नि राति पाग
1 स नर पर पगमा हात सि मोकामना
गम प्रोगारी पि दिसती
पसी पर दिल-मिरमानात मारी।
पय सर्व
फिरती महिपि स्वपद-मय-समी भूमिकस पर मोहोस्पिरपी
पा-माहम पो ग्यों निर ममोमाय भूतम पर हो मित हो!
समझ प्रगर्मचम मानो महिपि-हदय-सपी को परसे सप
यो हो भारर देते हुए नये गाने मुररार सहर्ष ।
'तुम्हारे रवित मान सरसार में पी हो पर कोई भूम
पुषि दोरमा हमको पमा प्रस्मा र महो पनाम !
मुझे यदि होता पहने मा म तुम माई हो पाती यहाँ
गां होती मगुरों की सम्य तुरत पहुंचा जाती वहाँ !
रेल या पित्रोपित मार पौर मुरपति की पावन मूर्ति
गिप-मार मा पराटि यो जगत को देनी पी रति
हदप पमी का सहगा मरम गिमु-माग भानों से भर पा
सीमा में यह वृम मार-1 भप का गिर गया।
पा मषित न फिर संगोष मार पनो पर में भी उठा
गुरु वाणीक बयन गित भीमा के पमुप से दुरा!
गोर गपिनयमाने मपी मुरोपी सबनना मुर पर!
पार्मिकता परिपता श्रीति घिरी है पर में रिममे मार'
मगी! मैं बारीपीए पण से भी परली पी
भान होगा, मुमो वो हि म ! एपी!
गर! ना माग पनुपर्म की पतियों पर नुरराम
ममममी पपातामसी मा भी मार रिम रिपि पार !
पा माती परिमर स! मुझे नी मोनानि
निती मर मुरे पर ही पर औरत की!
गातार गरी शुभे मntो मेर
मनाना वर्गहरे गोमाग मानो नि !
प्रसार पिय
तानि से सहसा घधि-मुग-कान्ति इस नए पुंषमी-मी पापमी
हसपने से ग्यों प्रम हीन होपसीधा मग पम्प-नमी !
पहण परने पा पागन मान्य प्रविपि को ले पुम पारेप
मनुर वीणा-स्पर से पीयूष-वृष्टि-गम रहने मपे मुरेण!
'पा है पिपि में महिमा-झाम रमा-गुचिता-मनेह को पामि
समाणिक और योग्य है कि तुम्हारे लिए
मेम्मानि।
पाहवा हूँ मैं फिनमा पहो ! म्याय होता र म मिा
दिया होता पुरुषों का ही हरप यो तुमको वमन पिा'
ममुर-महिपी बोमी मुरनाप मुभ हो। पदविवाम
दिना प्राणिमान पर प्रम मार है पर्म पौर परिहाग!
भपर रहोता मेरा प्रमो। मुर करना मैं गिनती पास
उप-माम पो मा मानती परमार पा पार !
पहा । परि होता यह, तो पार विस हाता पैसा मुगवेग
रिम र मितार रहन मभी पमुपनि पनि मुरेन्द्र माग!
सिमसार यो रिपि 14. पुरा पी रपमा ?
पपा मिग रिसा भार मसो मारना पवना
पामारोप मारमा पार गिपापा'
। TALो प्रमुग बनारा?
बामे मुरलि गप पुग! पनुमान
सागर प्रहरी मार frra!
प्रनाम, ११ घोर र
प्रम मारे पर्माता
पठार्म
किराती महिपि सपनाप-पनी भूमिवन पर माँ हो पिर पी
पार-माहम को ग्यों निज मनोभार मूराम पर हो मिस ही।
रामम पमर्मनस मानो महिपिसमय-वत्री को करसे स्पध
गो हो पादर हए, ममे कहने मुरपर सहप !
'तुम्हारे सवित माम सरकार में ही हो परि कोई भूम
पुषि! दोकाना हमामा प्रस्था हैन यहाँ पनुस ।
मुफे मरि होता परमे माल न तुम नाई ही माती महाँ
यहाँ होती प्रमुरा की म्य तुरत पहुंचा दी जाती हो ।
देय यह पित्रोमित मसान पोर मुरपति की पावन मूर्ति
-मारह पास्पद टिगो जमत को लीपी स्पूति
हरप रामी 7 महमा मरम गिगु-महग भागो से भर पया
ही मार पहा मार-परा मप पा पिर गया।
पहा माबित न फिर समोर भार पमरों पर भी उटा
गुर गागी पन ति भीमा के पुम मे पुरा!
मोटर गपिनप गाने ममी गुरोपी गगनता र राष।
पामिना गरिनता प्रीति पिस में मिमे पार ?
मही! मसीपीए प्रण को भी परली पां
भान ता । पुमो नोकि पिह में हमें एपी।
सप! मैं नाना पमुसर्प दो पतियों पर मुरार
ममम में ही दुध पाना मी घमा भी मामगि मिपि भार
सा मा म पनि मुझे नी मरी मानि
गानी लिनी या मु, मर्पही पर तीन की हानि ।
गाना परोग मुझे म Ont मो मेर
मनाना गरे । बीमारे निरयाना में प्र!"
मामि से सहमा गधि-मुगमाम्ति इस तण ऍषमी-सी पर पसी
मूह सपने से ग्यों प्रमहीम ऐपमी हो मग पापा-ममी ।
प्राण पर पापामन मान्य प्रतिपि को रेल गुम पारेम
मपुर वीणा-स्सर से पीपूप-वृष्टि-गम पहने सो मुग
'राविपि ने महिमा-हृदय रमा मुश्तिा-मनेह की गानि
स्वभाषिक पौर मोम्प है कि तुम्हारे लिए पुर मे म्मानि '
पाहता हूँ #मिमा पहो ग्याय होता ईसर मे प्पिा
पिा होता पुगों को बही हदप जो तुमको उगने रिपा |
मपुर-महिषी योमी
'मुरमाप मुभता पहा विमाग
रिना प्रालिमार पर प्रम मात्र पर्म और परिहाम
मगरसहोता मेरा प्रमा' पुर परना में गिनती पार
पा-माम पास मानती पापारा पार !
महा। परिहाता यह तो भान तिता पमा मुगनेग
रिम निमार ने मभी ममुपति मुपति मुरे मोग!
गिमगात पा लिपि में 41 पुग पारसना'
पमा निगरिया भाप ममपा मानापमा'
पी है पाम बोप
माना गार दिया।
पोग में पदोना प्रमुग बना।'
बोने मुनि गप्प ! पर पनुमान
सामान Frमार अतिमान !
प्रमाण गरम सार
या पामरा मारे मार!
१४
पठासम प्रेम है uts पान्ति + पोर रस को प्रम है पीयूष महि-गुपा के दीवानों को प्रेम है प्रदीप पम मुसे परिणों के लिए प्रेम पापहारिणी प्रभा । अप-यानों को। प्रेम ही है भार पववार भवसर पार होने वाम पौरखती पती महिमानों को प्रान काम प्यारा प्रेस प्रम एक प्रम मोरा स्प है मुविम पुरिमानों को । पौर पापो प्रमही कि मृष्टि-मम हीम प्रेम पीर प रोनौ प्रातिप्रपाम है बिन रखना ही कर पी है पुरा, मात्र प्रेम प्राव पेप प्रम-ठाराम ।। प्रहार नगर, समाग राष्ट्र राम्प- ही पी रचनाएँ म सत्य की प्रमाण पुर नही मुर प्रेमपर्म, सियों पीप मीमा प्रेम प्रमुग पान है" पनी ने ममी "प्रमा!"बान समझ में माती 'प्रम प्रार-पा माटी पनि रिसरो मही मुगती ? रितु तिर महा प्रम में मर मिर पो । रिया में ही मार माफ मिसार ने ! सीमित पग होती है ही अप भूम होनात पात पाति ग प या म? रिसे मौन मनपाला? प्राय पारवासामा पाता।
प्रसार निय
प्रमु । पोर तो प्रम-विषम पति दानापं मरते है
उसके लिए पनि सर को रवि-गुम भाण करते है !
हाकिम ऐ दिवम भए पतिपयोग पारी
रितुग्लिाता है पनि उमपर पर समापण भर मी?"
मुरपति मोमे "देवि ! भूम है पोड़ी इम म्याम्मा म
नहीं प्रम-परिमाण माती दिमाम मा म !
पतमाम जग म्पबदारों म है मोहामाम
उसे प्रीति पहना तो हागा करमा प्रोत्नुहाग !
सपा प्रमभी निरपया माना।
परीर परपर प्रपना प्रभार गिमाता है।
!ि प्रमही तो एग भूमि पर पस्तम
मोटाती पात्रियों को मुनि पा
मदग'
नि-पुता , प्रमिपों का।
भनियोग पापिया र निपा प्रत्य
निष मुग-गारियों को मार गि, पिपर
रामनियों से परामा
प्रेम . पार गर्दाग पुरियों के
निरि पर
का
प्प
सनी मी पापितरो पास'
मि गोमा र म?
भापती! र गरिदम
पारि ोि भा-गा।'
पाय!
या यम
किन्तु प्रेम प्रामान्य पर, इनका पुष भी माप
पाना सम्भव नहीं यदि वन सो विषार!
हो है कटा मुम प्राव रोमो ही पम में ग्रनी
प्राति रेविहीबमनी स-तम-सपी पगमानी !
किन्तु म्पेय है कांटों का मुर्मों का रक्षण करना
म कि पुष्प के एई पर जीवन में मय भारता!
इसी तरह एक-तम है सतके योग्नति साधन
ग्यो पठराम्नि बटर में पार करती है रस-पाचन ।
रितु भूमकर हम सावन को साम्प बना मेरा
संपत कर मितियों का निउ रत्तेजन रेवे।।
पार मही पाच-बसन-बन तन रमा के सामन
प्ररयुत तन का ध्येय बन मयामा प्रायवन 1
पिसा में भी मिल्प हमें है बाता यही बताया
नाम हमारा मेवा करना पानावर मावा !
नहीं बनाया जाता पनिषा हित-मम्मद
विमवे, परीय परस्पर हम बरो बन प्रण!
इसलिए मार कर रहे गुण पठन हमारा
मीमिए है नहीं प्रम मो मियापही महारा!
पपपप्प पा पामाप पारित रो भातात'
पा की मार से भगा है।
का पनारायः पप हम भर-मेगा पोपले।
मर्ष र पौरों की पन-यी पाना पर मले।।
freोपुर म. दामों प्रार गगन में
मा ultate मुताति मति में !
प्रसार विषय
मागापरवा-पम विधि से पिप वर पापा पावा?
पौर मुगा-मम वही माप रोगी को पीपाता है!
Fry पनामाया एत से भी होता थारप्प गित है
पही नियम पम्तर-बाहर जग पर सत्र परित है।
मरि हम कर सभी का पावरपरवा पर उपमोम
वोन पुरा नही पाये जगत में !
रिमाय नही रिमो नम कभी नही उसावा
पौर सौमरिमोहोनित रमह-नागरी मावा ?
एक पाठ है और देश में रिमिक पाठी
सभी प्राप्त भोगी से है वि पानी ही मर पाठी!
रि वन पंग करनी पी मित्र बनता
तर पनि पिर पनेरी हो सरीर टिमठा!
पाइमा पर पर्प नही भूिम मरे में?
पारम पेय ठपा प्रेम पु-माण मुमने में
परि भौतिक पन भागरी पारमा सय
वो माम" याममा पर्ग पार रि प?
रानी रोमी रितुर । परि मी मापन
मार का एल-मारपर्व ही गमाजिक जीरम !
प्रश्न ही भूपि प्रमपी रिमामी"
पाम पार सय में भी यह मारपसी'
रि समारोप मर रंग अन गारे"
मुपाचमा भी मार! पारस रामाने"
दुनिया सिर २९ भी नही
पायापारत'
११
घा सप मममा पो मा-पष्ठ समीके पर्व परम पोप है सर पार्यों में स्वास्प्प-मुमधि की रमति का घोतक है। तरपि मनुष्य अपूर्ण जीव है प्राम्यारिमा रिमान- हता है उसके संसर में मम दौर समान ! फिर भी यदि उसको न सिपाएँ हम कुछ निज म्पापाप तो मिषप, करेसा वह पग में ऐसे संहार । सिस्नु पापुरम एम सिधा मिम उसके जीवन में कर देते प्राति-विरोपी परिवर्तन पपा में ! पिका प्रारम्भिक जीवन में मौक्षिक प्रमान एता उगकी पति-गति मति गर ही पर प्राधान्य ! पौर शिति-पमान माति है पुम्मम्मोर समान एक दूसरे का स्वभाव पतामही परिवाषा वो गिर गुण दिरामाते है यो विष दुग का मुग बसा है। विषको मुला मुपा पनी पहने नगी "कौन है तब मा! बह पापपी गिनती मुटि से पाग बार पिनि मी मापी ? बमा इम पुन म बोई गाही मी गमार पाम महार पर नम गम्मा ािपार' मा म रामारी सीमही माय पर प्टि! और गीर पारण मारी भट सी है पि? मानिमा मनुभव सा गुप्पति पिर मारिए पिमा गा गाता गो पार र पो गमि तरह गुर मा पमुर मनुष्य गभीर बम मनि पुपरी, म मापन nd पोजिir! 11.
असाप मित्र
पर ऐगे मर ही समुदाय पिने गाने । मो मरिस
इप में होता शिमरे सतत है या प्रप भार ताम!
राममने कोरपिन पसि स्वरमाक निश्चित परिपाय
बिहे हैरी विवि ने सम्म परिम्परमायारिमरा मनाम !
सभी (पपपि रोपी रेपि! पम के नियमों ८ पनुपाय,
सीमा होपा मोर कि मुमपर पा मापक भार ।
अपाम प्रागिमपा प्रमुग पात हा 'पा मम पम
किम बन मगा पा पाठा एग गर उपम
रिम महिपापा ममा गा नही मरा यह पून
पाप कसरी चुनना m८ गनार के भी पूप
सुमारपा प्या मनुष बनन। र दाग
माम पर रपमरे
मूर पमा परमी मत
पिपर मन !! पोम रामरी पलपि
सण-गम हो गई निर पार यह पर गुस्मृधि ।
पार मुराप के गुनागरनार्या । म पुरा
ममम मो गुरगमार में fm पुरा भी गगम हो पुरा
रिपापा निनामगर दीपा मार
पारगिम भी पीता, गुरमीतमाम !
पार मे गुरमन मुपुर र पुरना र
पुर प्रतिगोप, निभा MRIमर'
प्रारतिर पगार भी नाम:
र पनुगर मा को भी , rr:
नभीपर 138 पार
गरातो गम मा
(4 सप मार Tam
पाई
।
अनुर-महिती मपर हो उठी यह पमी नो से पमपाप
पयामारिए से मानो सिमा सुमा की पाने नर्मी मार
हो पाती उसपी पासी पचत सय र मापों का तुझान
पूर्ण परिस सिपुर मचा रंगों का हो म्पों ममसान !
प्रत पायो भित्र बापादेश रोककयह भरा साप
सकर फिर मुरेमा परण नयी करणे सुनि पो हार
'पन्य देय। स्याम प्रापका पम्प पापको प्रीति
पम्य पापकी पर्म-पीरता बम्प निष्कपट माति।
प्रभो! मारको पोर पोर है भी पिसमें या पति
यो सारे पर पो रिलता र पिसको रहते पस्ति ।
पीर कीन है जिसपर मुमकर सरते हो पभिमान
मोकर रा प्राप्त रिपुरेपों में भी सम्मान !
जोरे प्रतिपातों का परमा प्रम पार मानों से
मो पर मनीति को ठित अपने बप्तिरालों
प्रिसपा मामस्मरण हाय में मुर ग्यान विताए
मरा ममना रपाग भार की सममारिनी हाग
पा दुम्पिा मो-गप में राम वृष्टि परमार
रिपर पाय उप पोर प्रेपसारमपन उमए!
पर बनिनन पारा प्र! निश्चम नर मुप सापा
नारस रिभूनम पर प्पर एसप नामहपणा !
रिम मारमरे सनम पर गुमर पिने
शिर र २ Ang) गारे हरप मिमी !
रिसर में रमतामाश्मि पापी!
गिबनना पीगीर निर पर पर महगामी!"
प्रमार रिणय
गुरपति बोले
'बि । नहीं है इसमें उप भी गप्प
मात्र किया है मैंने तो पापम पाना सनम
इतने दिन हर मही पिया मही का परिताप
कौन पाहे वो हम यह, पिमरा पा पह था"
रानी दीप्ती ! प्रारम पार भरे भर-भर में
ने करते हो तना भी गिनिदर में
पित रिनो निमशाम में प्यारा?
पा परग मारि पर्व पर, नन मन भर माग!
.
लुि होरेग पिम रिपि ममुरा ना मार
मिरे उप-मोम मम्मुग नग का जीरन मार
बता रनो मिन मषित मा आमा ।
तरता परमही पाति गुम नि म में भाग 1
मुरारि पर नपे "पौर पराला माना।
मार गिरो में पम् पासा!!
पार गामासार म पगुनि पुरा पान
फोर पाप की मरम नियमों । ना।
का निसरी सम मो दाग रग रासाय
में भी मानीस में मनरपान1"
सिमे
मामात राम राम'
निसरीर पर मा
पपरा र २ मग रि मिाहप भूपता
पठा वर्ग
पपुवम भय को
भप बरा है
मासम मापार बनाना
परपावारी दुम-मरा पाना
दोनों ही पोरतम पार प्रासियों के लिए,
तोपन नम्पा के ममानियो नि !
और पास निपलप भी प्रमिमग्नीय है
क्यापिपाषरण शिव म मगनीय है
उन ही गा पापण देतार अप पप्सता है
उम ही से सभापों को पापण मिलता है।
विसमतो मुरतुरी उसका मम स्पान ।
रममा अनुमन तामा नीयम-नियम विपान है।
पितु प्रमा कर-ममुर भूप मे भो ,,
पौर बिराति उत्तर पग में पिरे
मुर। पिम्प मापरण सात ग.
बी पी-शिवामापन प्रात राह
पुग्ण परिमा-गर्म में पाप मागे frग वह?
कार हेम पी पास ही मता बम रिग तरह
पौरस समभी परिमा 1 प्रामात
प्रमरप मो मुण्प पर्म के पग म गित
अपर पान मर गभी गा पगार
रा, निजग, पपम-परामिण
पद पर मरहमा पदी
ग म मा मापौरभप!
प्रागाणी 4 datी जान
पौर तिरपनि नपाल में
प्रसार किय
रोगा रणि पाम दिपा भी पारे
सागः पुष साम पाम मे रे ! नगारे !
कभी माना यह मुगर मिप एरेगा रुपम
प्रीति में योगी सानि-मुपा-बारा रिम!
मुरपति मप मरने मिती ! पहप मंमार में
है भिन्नता नर, गुर, प्रमुर पापा ।
प्रापेक है मा पर गरमान मापार में !
दि नहींपावापुम मम ही पार में ।
भी रिपन र मुम्प पर Tr-aml
माग मित एक वरती पनाली,
पिलार पार गुप 1 मि
यामिनाहाम रियरवानी।
हमी मान र मारी गृति मार
मरासिग यति भी की निगानी
र मृति में भी हमारी पण र मोर
पर मगरम्यानाति पानी'!
सोमपठामप्प भी लिन!
Trn
मितिमा
पिन मिन र
समि ] frm प
ना गारग निगने।
पठा सर्व
कोई है तो कोई मपुर कर्मने दीरण
कोई ना पोई परेत, को काले ।
तो भी है प्रमी पे एक दूसरे के पोपणा
मारे ही की पति बहाने बासे,
उसी माति भरतो ऐ रहगे भी सरा
सम्मानही दिपिक का एक राम माएँ ।
मूर्य , यो मुपापु-मीर, पगार मि
रश्मि सैम्प लिए रम रोपौ सपा मगा।
पौनीय मात्र यही है कि ध्येय मान
से सारे मे भार पंगों में बम था।
मे पारतानुसार
सानुएम सापनों पा
कर उपयोम सभी बिन में बसम्म साए ?
ग्नुि माप ही मुरी में महारा अनुरों का पाग
मुर र माले नहीं पमुरगण र गोपन-निर्माण ।
पारण एमा प्राप मरती वा में या प्रम
मिन भायों से रममा प्राविपिडि पमुहम है।
मात्र भापरण मर्मीय ही उना साम्म
मरीय मार्ग मानन ही रा बाप ।
मात्र भूगिता गमार ही दम पम्पद पा भूर
महाले। गनाप्रति सर पुन
परनु परों में पिया मार मार
मार पारित पर ही मरा-मार!
मा प्रमुग्मन में ही सपोई गुर पा
कमी पनुर हनों में मेरा रिबर्मापुर पा!
।
प्रसार पिय
सभी प्रमुरगण वर्षमान पाता परको घोरगे
मी मरे एम भी दम पुगे मुग मापे ।
पसुर-महिपि बोमी
'यह कम ! गम्भावित होमा
पश्चिम में भी मम्मर है या रिनर उरिपन होया ?
पपा गया में भी उग्यमना परा होगाती ?
पा भी गया मागदी पाममता पो माती'
महीमाता रमार नही पा'
सार नही हैसी पारने मामा मरे मर का !
गुरपपिपरने ममे 'नी पाप भी होना
पौर यह क्यों, पी, पि! पानाहीगो ना!
भर बनेगा मे उम ही म मिा,
प्रमग दर्गे पान गिन न ये समा रा!
पागिर तम में होना निार प्राप्ति होता,
लिाप में होता पार सिमित !
सरा माली, पमु। मरि गरारे नगी
तोरामरती मही मनापगरि उमी?
पौर मुझे बारेमा भामिा tir गो-
पनों ही मे पमुएगों के पा रग मारे।
मगर यही nि पर्मा की गुम PTI
रिमोम रोग सपनो!
और मुभ मामा तुम दमामी am
गार परामन मेश्रीमगार
पनीरोपी "ममा परमार मानी।"
पीसीपग पग नसा गपुर पर मानी।"
पठा सर्व
फिर भी परि में कोई भी ऐमा प्रवयर पाउंगी
पो मिाचम ही स्वात्तम्प पर बमि तक हो जामी!
मेरा सबसे बाप्पेब पवि-म का परमार
बर्तमान पापाग नीति में परमा सबका माण ।
'नही है यपि मुमको देष ! धर्म-सम्बन्धी पूरा माम
तरपि है इतना को शिमाम किया कुटुम्म महाम !
पाई योनि मिष रह पोर हम सभी प्रग प्रायम
एक प्राणु की भी पति है सभी गिर पर माती प्रपना रम !
मत हम जो कुछ मोच र प्पेस उमा हो मबका बाप
तमी हो मुस्ता है सर्वत्र परापरा लिपित फस्पारण !"
है पुषी' पी तो भनिन मृतियों का मर्म
भारत में तो हम पम मान मही मित गर धर्म ।
पर्म गति पर ही रापमा प्रापार
पर्म है यह परियतम पहिरि निगम पाभित गमार !
लिनुपर्म पारा सग यहाँ । यह पाठ का र
नहीं है यह एतर, दुर्गप्प पिति नरमी की भी पार!
मान-युत गर्म प-मुन शान ना पला है म पम्पाग
गानलमान का रिमा मापान !
मागुणा
परेमाबरदान मिगर सपा भान
ET में मानााम पर्म गो
भोप में योग nि में 11 गे गणरा में गई
नितिमागारमा गभी मम पिनियन!
प्पपिपास पापमा ममना से
मभीमा पार पापा ने र
प्रमाद नियम
!
प्रमुर परि में इतना ही मान करा तुम गरो नहें पद माम
तपिपिप समय देखि रिदमम होगा माम महाम
रामी फरने ममी रिनु र ! मी यह पम्मर
निकर गाम ममुर्गे में दन मनमायामागमा
प्राप्त मही। मुरों में यह पर हम परमामों को
धोना गुमा दोष मी ति पयामा !
पदमाम गम तो पारतव में देषी बाना ,
दामी मममुष ।। बगे परिणी परमानी है।
पम रे प्रात पारसी पर सेता। गाठ बाम पा
ही पोरगी पाना नदि परम पार परग का !
उगार मिरामपा गता कि सिर मुग पम
प्रिय-गग । तृप्ति मात्र मरियामा !
अपारीन हमारे पनि मा म परन में
न्तुि पमिग । मूा भो पिरन म !
हम उस पनगापन । सीमे
परगानीमनगरमा पराभीगी।
मुन
रोमाen मुतापनगर
को मापा पनुरो मन तो भी भोरे?
1 गुणातर या प्रसार र पर
fro- राम नमो मार दुम
पापा पर म ममा भी गप-ममा
गा-रामीमा सामान
[RRIAn art समान
पररा पना TH. तीन-पान
-
पठा सर्व
नित्य नारिक नृप इन-गुन मन को सम्पबनाना
पर पीपे की रम्नति कर, पर्याप्त बाद पहुंचाना
नही किसीसी पतंत्रता सापारिक पिसने रेमा
सरो ना स्थापनम्मो पर मिरे ए फम सेना!
पहा ! भो भूपति प्रभावों से अधिक मुनी पाई
बारे पपन या पितुर सवा पा रहवा?"
रानी बाप्ती "पितु उन्हें होता पर पर भान ।
ए भी ये मृप-मय ही तो है न मम की पात्र ?
राग्य स्वर बप दुराचार, एम-बन को अपनाना।
तर पप का भप प्र! अनार में भी एट गाता है।
फिर मिला हो बला नाय हो भौतिक भोर-मास
उनले ती परमो परपस पवे ही हार्यो गान ?"
मुरपठि यो तापि मारियों पर ही है यह माफ
विर सर्वप समार भी पाना चार!
जा में सबसे निरीही म बमना पाना है
रिना दिलाकर मुग गमपर भी करता?
नाग भामना पापरा पाप
पए पति ने उनम गीरन पर गंडाम !
रिसामने महिपात मुम पतिमान
होगी। नसा गातिर मुणगन ।
नम्म पनि यो पर्ममार्ग पर माना
पौरमतानुपा सा नीस मार बनाना।
Trm ही सर! पागर परिमान
रायपार भी तीन भिसाप मारि मान?
१४२
प्रमार विषय
।
-
पर भी इस शामि-मौस्य है समी तुम्हारे घर में
इम पम पा उपपाप पुति से परे अपने परम
तुम पुरषों को दिया बना सकती हा मर काम से
कर मरती हो तत्पर उमरो पम भर्प मरन का।
सरी मारिपुमान में पति का गान रेनी
यह हिप उमर पापे पप पपन मिर है।
पारण वह पहमिगि है पर मार है उसपर
पराग नहीं हा स्वामी ही मुगप पर
प-िपति पर्म-मार्ग तर सा पहायाग साना
परमपप हिंगो भीर में माम म मना !
पनि वह पापहर परेता पाणी अप-ग
रामनियम -महपापी भी पाना , ममदार
पौर भाप ही HिI 2 या पति पापित
पर पाधित राना भी तोरना पप ही मषित।
गरि सिम भी मर-मम र मान
हर पर पापित nमीपा पामेना, पप-गान!
ररिलिपासपर भिर मेग गया,
उस पुमो fr६ पामू पगु न !!
हामी पनि नरामम हमापार
गि लिnिt.मि वरिपार
मुपति मारा हो भाग र
रियाग में गार
पोप
पति र पारा पानि
सोसार मन मुग- पर
१
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प्रसार रिचय
पर भी का चाम्नि-मोस मी तुम्हारेर में
इस बम पा उपपाय पुक्ति पर अपने घर में
तुम पुपोंगो बिना सकती हो मद करना
पर मनी हो तर उमरी पम पर्ष परन !
रिमारि या पुमान में पति पो गान देता।
यह मिमप मा पापे पर पपने मिर मेती है।
पारण वह मापमिगि है पाप मार उमपर,
बिहपरे गापाम नही । स्वामी यही मुपए पर ।
पपिडि पर्म-माग तर हा प्रमायाग करना
पर नाम ग्मिी मीर में भाग नमना !
पटिरा मपापा म परेमो पाागी प्रप-गा
कर्म-नियम है-महसोपी भी पाना , ममनाए ।
पौरन ही तिप्राताn या पनि प्राधित
पर पापित रहना भी तोपरता पपी मति ।
गररि सिगे भी मर-मय पर मार
नग पर-प्रापित nमीमा पर मना, पर माम!
सालीपा निरटा गा.
गपुरानो र पाम्पस !
नामी मति गनु'मममोपार'
पनि गि: ne" मि तिपिपास?"
मुगपत मर ने "पर हीमो माग र
राना ममम प्राप समोस!
साना र नाही furni
मा पार THEIR दुगमगार
और निडर हो समार को वह है स्पष्ट मनीति
पर्म बहाती है समान की पारण-की नीति !
फिर मून परस्पर के सब सम्पादों का धर्म
प्रत स्याम पति स्वधर्म को यदि मरने लगे प्राम
तो परनी का है हो बाठा मा सम्म निवार्य
किस्याप पति-सहयोग करे निर्भय निव पार्मिक कार्य !
पमा पम्पमा मेर ऐसा क्या रासी-हिणी में।
क्या पन्तर होगा म्पभिचारिरिस एवं इस रमनी में ?
हा विपरेचा सोमारिक यस प्रसाम्ति पह में भरमा
पान पनुमरण पतिका पर्म-विहित कार्यों में करमा'
निग गार-विमास सापनों पर उत्पात मचामा
कठिनाई को व भीत हो सपम् पूमा पवाना
प विषय पति के विम पर-पायों का सपना
प्रावि पाप है और चाहिए लसे सबको अपना !"
गोची मापि व 1 तब तो बो दीन प्रमुरबानाएं,
प्रेम-रिव हो पपरली बन करवी । सेवाएँ
तर देती है सा-समान सम्पति के सब पधिकार
दिमती पति का मन्त्रानुगमन ही पौरन-साप
एवं पीछे सन्तति-मह गिल भी बावी । दासी
उनकी ये कतिया मी होनी मन्त प्रमों की पासी ।
मुन मुरेल उप प्रस्पिर, एवं होकर फिर पम्मीद
पोमे निश्चय पिा ने सभी कृति पाप पुटीर ।
पौर रेगि। ऐसे करयों का प्रेम माम बवामाना
तो पाचन प्रम-नाम पर चार म मगाना !
-
प्रमाविप
गमा प्रम ग्वाभिमानी प्राणी में ही पता,
पौर सानिमानी, कभी नियम-मान गोता!!
पहला पारमगमग प्रारमसमर्पण ही है
पर मिसा, गम मालागी को।
पपम म्पतिको स्पय नहीं करता है प भी स्याम'
रमके लिए दाम-मर मेना , मेना पुस्मि ।
परिवार में मारी पो पुर-ममान
पर मीच पर मैगाह करता हरिपा पपमान !
गामी रिमोग, निर पर पर या रोपभमानी
निरषय, उन पर पनि-गति पर दुर्गनिही पाती।
मी पी हो गई !ि तुम प्रेममयो इम पर्प
निस प्रमाण मापो प में पहचानि पर।
मागतास तुपा यह नुर-बर महिनामों को
Frtinा रो पुरनों की पति पुतार्पो पो।
मौर मिगत से अम में मरमे मिनार ना
पर नीरम में नही पौर रीमा पण माना!
पातिा में सपा तुमको उदय परता
और पपुर रम पर्प प्रमाणारा पप पाना !
हा काम मारे पगुगे ।
मानब म प्रम-गर निगमा
मान, मा दुमो नित म जाता
भनी धर्म-गुरा गर विभागर गतिमा!
भाग पास ऐसी दुम । ८६ पापाग
गुर पालना नगारा !
पा सर
र हानिकर हो समाप को यह सिष्ट प्रनीति
धर्म नहाती है समान की पारण-की-नीति !
फिर है मून परस्पर सब समानों का पर्म
मता स्याग पति स्वमर्म को यहि करने गरेमकर्म
तो पत्नी का हो बावा यह कम्म निवार्य
कि स्याम पति-सहमोम परे निर्भय निव मामिड कार्य ।
भमा प्रन्या भैव पेगा क्या पासी-पहिसी में ?
क्या पातर होगा स्पषितारिणि एवं कुम रमनी में !
हा विपयेचा मोगारिक मल प्रसान्ति में
भरला
मा न अनुसरण पति का धर्म-विशीत कार्यों में परमा
निष शुमार बिवास पापनों पर पत्पाठ मचाना
कठिनाई को देख भीत हो स्वयम् पृषक रवाना
पवियर पति के विरस पठ-पव्यों बना
प्रारि पाप । पौर चाहिए इनसे सबको अपना !
बोनी महिपि "रेव ! सब तो पो बीन प्रमुरबानाएँ,
प्रेम-विषय हो उपपत्नी बन करती । सेवाएँ
ठम देती ह-समार सम्पति के सब परिकार
गिनती । पदि का प्रमानुपमन ही जीवन-साप
एवं पीछे सम्तति-मह गिन मी बाती । रासी
सनकी ये पतिया भी हॉपी पम्स प्रों की फांसी ।"
मुन मुरेम कुछ प्रस्थिर, एवं होकर फिर पम्मीद
बोमे भाषम रमिट पे समीति पाप पुटीर !
पौर पि| ऐम करयों का प्रेम माम बनाना
पो पायन प्रम-माम पर पार कर्मक मामा ।
मदार पिय
गप्पा मम गभिमानी प्राणी में ही होता ।
पौर स्वाभिमानी न मी निरा पर्म-मान मोता है।
परपरला पारमममर्पण पारपमर्पगनीपो
गरनि रेखा है गांम पर्वमान" को।
माम पनि यो स्पर्य नही काला है एप भी पाग
नमः गिरा मगर मेगा , मेना दुर्माम्म !
बिरा। विर में मारी से पुरण-मपान
पर मौष पर मेगासमा रिा परमान
कापी पिपावधि पर पर पहनपानी
मिावर उग पपर पति-नहित यानि पाती ।
मुष प्रममपी माप
रिम प्रेमा मापो का यह मानि-पगई।
मयुन । गणित पर मुर-र महिलापों को
मित शेरपुर मनुबिल पगुलापोंगे।
पोर मिगो प्रप में मरमे विनर राना
परजील मी पौर मी मा दुग मना !
पागf E ना पा तुमको २५ पला
पौर पर पप प्रमाा पा रापमा !
पा प्राम मारे मुर्गा मो मा सारा
मानस में प्रागार निमार
दुपारे नि ग माना
पानी पर्म-गुसरा परम तत्पर रम पिता।
गार की य स पापी माग
नnि of TT दुराग !
का वर्ग
रेमि । पूग्य नारा पुष एण में ही मामे बाम है
बह ही में सहा पचाने को पाने माने !!
पत्तम हो तुम गमसे मे मो भक्तियोग की दौमा
बहकर सकते हैं पर प्रकापों की परम समीमा ।
सिर करे तुमारे इमा-बन में ऋतुपति पाएँ;
फिर इस प्रसुर-भाग मम्प सत्पीवि-समीर गाएँ !
फिर इस रेप-राष बस में सुरु का मा भाराए,
फिर, गमती पर मनु-भाव की बिमम पनिका पाए ।
फिर, मरमन बितों स्मित पुणों से भर जाएं
फिर कोकिन 'बसुभष टुम्बकम्' की रागिनी मुनाएँ ।
फिर बम की पूग उठकर हो सरप म्याम की पर्चा
फिर घर-घर में लाई छोर हो स्पति मक्ति की।
मुद मुरपति रहे
परसावे उस्मास
पनी मी मे परम-रव माई निय प्रावास ।
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