Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner

Prashna Chinha

Madanlal Sharma · 2011/03

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Front matter

मानव मशीनगन बना प्राज,
मानवता रह गई नारों में।
सारी खुशिया कैद हो गई,
एटम के गुब्बारो में।
खाने को उग रहे प्राज यहा,
हथियार गोलिया हथगोले।
अनाज नहीं पर नाज करो,
इनसे भरकर खाली झोलें।
प्रातक, तस्करी ड्रग्स बने,
जीवन के प्रग, अभिन।
मानस पर उभरा इसीलिए,
फिर से एक प्रश्न-चि ह॥
एक प्रश्न जो अपने ही चिह में
उतर तलाश रहा है।

? ? ?
प्रश्न-चिन्ह
[सहज-मचीय, हास्य व्यग्य के तीन नाटक]
.
लेखक
मदन शर्मा
अरुणोदय
जयपुर

1991
श्रीमती सुशीला शर्मा
जयपुर
अभिनय-प्रदर्शन, अनुवाद, फिल्मीकरण आदि के लिये
श्रीमती सुशीला शर्मा की लिखित पूर्व-अनुमति आवश्यक है ।
-
-
पता
975 गली नानाजी
रास्ता गोपाल जी
जयपुर 302003
-
प्रथम सस्करण
मूल्य
1991
- पचास रुपये
-
प्रकाशक
अरुणोदय
975 गली नानाजी
रास्ता गोपाल जी
जयपुर 302003
नरेन्द्र कुमावत
कम्पोज
मुद्रण
फोटोसेट (इण्डिया)
404, सूर्या चेम्बर्स,
जयपुर
टेलिफोन 560709

RANIपुर राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर के आर्थिक सहयोग से प्रकाशित

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अपने उद्गार बहुत छोटा था मैं उस समय ! घर के पीछे मैदान मे रामलीला हो रही थी । मैं हर दिन देखने जाता था । कलाकारो के अभिनय ने मुझे बहुत प्रभावित किया था । मेरे लिये वे सभी महान् बन गये थे। एक दिन पिताजी ने पूरी मण्डली को खाने पर बुलाया । सभी कलाकार घर मे मौजूद थे । अपने घर मे उन महान् कलाकारो को इतने करीब पाकर मुझे जो प्रसन्नता हो रही थी, मैं उसे व्यक्त नहीं कर सकता हूँ | नाटक के प्रति आकर्षण का वह प्रथम बीज था । वक्त ने करवट बदली और बडा होकर मैं जुड गया आकाशवाणी से । सोभाग्य मे रेडियो नाटय-विधा से । फिर एक निरन्तरता बनती चली गयी । सीखा, सोचा, समझा, लिखा, पढ़ा, किया और खूब किया । सस्कृत साहित्य में नाटक को "पचम वेद" कहा गया है | इतिहास, ज्ञान, शिल्प, कला, अभिनय और कथा आदि सब कुछ इसमें निहित है । इसीलिये इसे वाङ्मय कहा जाता है । भरत मुनि ने नाट्य कला के-10 भेद किये हैं । 1 6 व्यायोग 2 3 नाटक प्रकरण भाण प्रहसन डिम 7 समवकार 8 वीथी 9 उपेक 10 ईहामृत 4 5 किन्तु समय के साथ-साथ नाट्य-कला मे भी परिवर्तन आ गया है । आज नाटक बदल गया है । कथा बदल गयी है । अभिनय बदल गया है । प्रस्तुति बदल गयी है । परिभाषा बदल गयी है । यही ममय की मांग भी है । समय की सदा माँग यह भी रही है कि अच्छे नाटक हो । आज भी अच्छे नाटक होते हैं । सशक्त कथावस्तु भी है 1 अभिनय-कौशल भी है । शिक्षित अनुभवी कलाकार भी है। तकनीकी पक्ष भी उत्तम है । किन्तु फिर भी दर्शक नहीं है। जो हैं वे टिकिट खरीद कर दर्शक बनना अपनी शान के चिलाफ समझते हैं । दर्शक स्वय को नाटक के साथ नहीं जोड़ पा रहा है किन्तु अब नाटक ने स्वयं को दर्शको के साथ जोड लिया है । नाटक आज दर्शको के द्वार पर पहुँच गया है। यह एक क्रान्तिकारी परिवर्तन है अपनी पहचान बनाये रखने का। किन्तु इसके साथ ही साथ कई चुनौतियाँ भी उभर आयी है । पहले दर्शक प्रेक्षागृह मे बैठकर वही देखता था जो कुछ निर्देशक और कलाकार उसे दिखाना चाहते थे । किन्तु आज वह दिखाना है जो कुछ दर्शक देखना चाहता है एक श्रेष्ठ नाटक के माध्यम से । नाटको में श्रेष्ठता की परिभाषा भी आज बदल गयी है । श्रेष्ठ नाटक कौन-सा होता है ? जिसम जीवन का यथार्थवादी चित्रण हो या यथार्थ का चित्रण साधारण फोटो फ्रेम न होकर "एब्सट्रक्ट" विकृत व्याकृत या विरूप हो? नाटक की श्रेष्ठता सहज बोधगम्यता में हो पा शब्दो मे हो ? जैसे कवित्तमय, शुद्ध अलकृत, अर्थपूर्ण या सारगर्भित शब्द ? सैट प्रधार हो या सेट प्रतीक या कलाकारी व निर्देशक की कलाबाजी हो ? आसान नहीं है आज के नाटक को किसी परिभाषा मे पिरो । आज नाटक जब आम आदमी के बीच पहुँचता जा रहा है तो मोटे तौर पर यही कहा जा सकता है कि वही नाटक श्रेष्ठ है जो सहज हो । जिसमे गति हो । जो रुचिकर हो, ओर जो कुछ कलाकार या निर्देशक कहना चाहते हैं, वह आसानी से दर्शको की समझ में आ जाये। इन्हीं रातो को ध्यान मे रखकर मी नाटक लिखे है । कहाँ तक सफल रहा हूँ, इमका निर्णय में स्वय नहीं कर सकता है किन्तु इस बात की प्रसस्ता है कि इनके प्रकाशन से पूर्व ही ये मचित हो चुके हैं, पुरस्कृत हो चुके हैं और दूसरी भाषा मे अनुवाद भी हो चुका है। लेखक -क्रम- 1 आगत की प्रतीक्षा 2 प्रश्न चिन्ह 3 रोशनी और रक्तबीज -आगत की प्रतीक्षा- - 1 अखिल हाडौती नाट्य प्रतियोगिता "सर्वश्रेष्ठ नाटक। (1975) 2 अखिल भारतीय नाट्य प्रतियोगिता रागनगर (नैनीताल) (द्वितीय सर्वश्रेष्ठ नाटक) [श्रीराम कला केन्द्र कोटा द्वारा प्रस्तुत] 3 गुजराती मे आवाद- यारे उगशे अप्रभात

आगत की प्रतीक्षा
पात्र
1
2
3
4
5
6
मदारी
जमूरा
नेता
विरोधीराम
ऑफीसर
क्लर्क
चपरासी
सेठ
7
8
व
पाँच अन्य

आगत की प्रतीक्षा (मच को एक बाजार का रूप दिया गया है | किन्तु भीड़ नहीं है । दाहिनी ओर से मदारी और जमूरा प्रवेश करते है । एक लम्बी रस्सी से दोनो बधे है । रस्सी का एक सिरा मदारी की बाँह पर बधा है और दूसरा सिरा जमूरे के पेट पर | आगे मदारी हे पीछे जमूरा । जभूरा जानवरो की तरह चल रहा है।) बेटा जमूरे । - बाप मदारी। मैं कौन? बडा आदमी - तू कौन ? छोटा इन्सान । - 7 मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जभूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा जो पूछूगा नहीं बताऊँगा। जहाँ भेजूंगा? नहीं जाऊँगा। क्यो? पैट्राल के दाम बहुत बढ़ गये है | लेकिन तुझे कार से नहीं हवा पर सवार होकर जाना है। आज कल हवा भी अच्छी नहीं चल रही है मदारी । वायुमण्डल का क्या हुआ शुद्ध वायु चीनी की तरह सस्ती दरो पर विदेशो को भेज दी गयी। और मण्डल ? कमण्डल हो गया। तब तो हमारा धन्धा भी चौपट हो गया | अरे लोग अभी तक हमारा तमाशा देखने इकट्ठे नहीं वा नहीं आयगे मदारी । क्यो? 7 मदारी जमूरा मदारी - 7 जमूरा मदारी - B जमूरा मदारी जमूरा मदारी शहर में हमारे तमाशे से भी बड़ा तमाशा हो रहा है। कौन-सा? आजकल सभाओ के अधिवेशन चालू है। अच्छा हुआ लाग आय नहीं । आ जाते तो उन्हें तुम दिखाते क्या ? जमूरा मदारी - जमूरा मदारी जमूरा मदारी লামু मदारी A जमूरा हमेशा की तरह यह अपना भूखा पेट । अरे तुमन अभी तक पेट पर रस्सी बाध रखी है ? खोल दो इमे। नहीं मदारी में इसे नहीं खोलूगा । क्यो? इसके खुलते ही मुझे भूख सताने लगती है । भूख क्या होती है जमूरे ? भूख एक वेदना होती है मदारी । और वेदना क्या होती है ? (मदारी और जमूरा एक दूसरे की तरफ पीठ करके आगे के सवाद बोलते है । मदारी और जमूरा वाला लहजा भी इन सवादो मे नहीं आता है।) इसे तुम नहीं जानोगे । क्योकि इसे तुमने कभी महसूस नहीं किया ! पिछले कई वर्षो से में तुम्हारा पेट भरता आ रहा हूँ । किन्तु तुमने कभी मेरे पेट तरफ ध्यान नहीं दिया। तुम्हारे जूठे बचे भात ओर रोटी के टुकडा से मेरा पेट नहीं भरता। अधिक खाने से बदहज्मी हो जाती है। और भूख ना मिटने से इन्सान जल उठता है । क्या तुम जल रहे हो? हाँ जल रहा हूँ और जला देना चाहता हूँ। किसे? अपने पेट पर बधी इस रम्सी को । जला क्यो नहीं डालते इसी रस्सी से तो हम और तुम जुडे है । जिस दिन यह जल गई उस दिन हमारे सम्बन्धों का अस्तित्व ही मिट जाएगा। -- मदारी जमूरा मदारी - - मदारी जमूरा मदारी जमूग - 9

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जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जभूरा मेरा पेट भिच रहा है। मैं तुम्हारे पेट की नहीं खिचाव की बात कर रहा हूँ | हम अलग-अलग दिशाओ की ओर बढ़ रहे है । खिचाव आवश्यक है इसे कम कैसे किया जाये ? एक ही दिशा मे सोच कर । ठीक है, तुम मेरी दिशा मे आकर सोचो । तुम्ही मेरी दिशा मे आकर क्यो नही मोचते ? नहीं मैं नहीं सोच सकता । तो फिर खिचाव को और बढ़ने दो । आखिर इसका कोई अन्त तो होगा । अन्त है। क्या ? सघर्ष के बाद मुक्ति । मुक्ति किससे? - गरीबी से बेकारी से। (दाहिनी तरफ से तीन-चार व्यक्ति नारे लगाते हुए निकलते एक दो तीन चार मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी भूख एक अभिशाप है। रोजी-रोटी चाहिए। तन ढकने को कपडा दो। माँ बहनो की इज्जत नगी है। (नारे लगाते हुए लोग मदारी और जमूरे के चारो ओर चक्कर काटते है और फिर चले जाते हैं 1) ये क्या है जमूरे? सघर्ष की स्थिति । ये लोग क्या चाहते है ? साफ-सुथरा नेतृत्व । वो कौन दे सकता है ? एक ईमानदार इन्सान । वह कहा बनता है? - - उसकी यहा कोई फैक्ट्री नहीं है । जमूरा मदारी जमूरा क्यो? यहाँ वही फैक्ट्री लगाई जाती है जिसके कल पुणे विदेशी ग मिलते हो । ईमानदारी के कल पुर्जे देशी है और देशी माल पर हमारे देशवासियो को विश्वास नहीं । हूँ | हमको धन्धा मिल गया जमूरे । क्या? मदारी जमूरा मदारी जमूरा -- हम यह फैक्ट्री लगायेगे । ईमानदार इन्सान बनायेगे । एक बार फिर सोच लो मदारी । फैक्ट्री के लिए जगह का अलॉटमैन्ट बडी मुश्किल से होगा । क्या? मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा क्याकि तुम्हारी फैक्ट्री से आसपास के बुरे लोगो के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। और ? कच्चा माल बड़ी मुश्किल से मिलेगा । ओर ? इन्कम और सेल-टैक्स वाले परेशान करेगे । और यूनियनी की मागे माननी पडेगी । ठीक है, हम उनका सामना करेगे । तो फिर चलो। (ज्योही मदारी और जमूरा घूमते हैं, दाहिनी ओर से पाँच छह लोग निकल कर मच के बीच मे घेरा बना लेते है और चारो ओर घूमते है । मदारी खडा रहता है । जमूरा मशीन चलाने का अभिनय करता है। धेरे के लोग पहले मशीन की आवाज़ मुह से निकालते है फिर कुछ अस्पष्ट-सा को वोट दो" का नारा लगाते हैं । मशीन की आवाज़ और यह नारा कुछ क्षणो तक साथ-साथ चलते हैं । अन्त मे "जीत गया भाई जीत गया" की आवाजे निकलती है । चक्कर काटते हुए लोग ठहर जाते हैं । बीच मे एक व्यक्ति "नता" खडा होता है, बाकी सब लोग घेरा तोड कर नेता के पीछे लाइन में खड़े हो जाते हैं ।) " 12 मदारी - - - जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी देखो यह है हमारी फैक्ट्री की पहली प्रोडक्ट । ईमानदार इसान । (जमूरा नेता को गौर से देखता है।) क्या यही है ? हाँ। फार्मूला गलत हो गया मदारी । कैस ? हमने तो ईमानदार इन्सान बनाने की सोची थी । यह तो भ्रष्ट नेता बन गया। अच्छा ? ज़रूर देशी माल मे मिलावट थी। इसीलिए तो लोग देशी माल पर भरोसा नहीं करते हैं । लेकिन अब क्या करे ? करता क्या है ? यह माल विदेशो को निर्यात कर दो। बाहर के देशो में इस माल की कोई डिमान्ड नहीं है और फिर अभी हमारे पास एक्सपोर्ट लाइसेन्म भी नहीं है । फिर तो इसे हमको ही भुगतना पडेगा । मगर इससे बात तो करे, हो सकता है माल अच्छा हो। हाँ हों चलो। (मदारी और जमूरा धूमते हैं । तभी नेता मच के दाहिनी ओर आगे आकर खडा हो जाता है । उसके पीछे एक व्यक्ति आता है और नेता के पी ए का अभिनय करता है । नेता आगे खडा है ! थोडा हट कर पी ए । मदारी और जमूरा आते हैं । पी ए से मूकाभिनय मे बात करते हैं । स्लिप लिखकर देते है । स्लिप लेकर पी ए नेता के पास जाता है।) (स्लिप पढ़कर) भाई कमाल है । अभी हम पूरी तरह पैदा भी नहीं हुए और मिलने वाले आ पहुचे । खर, भेज दो उन्हे | (पी ए आकर मदारी और जमूरे को अन्दर भेजता है। मदारी और जम्रा नेता को गौर से देखते है 1) जमूरा मदारी जमूरा नेता 13 नेता - दोनो नेता अरे भाई ! इस तरह क्या देख रहे हो ? हम ही नेता हैं। आप लोग की है? हम आपके निर्माता है। ओह, समझे-समझे । आप लोग वोटर्स है । भाई आप लोगो ने बहुत बड़ी जिम्मेदारी हमारे कन्धो पर डाल दी है। हम उसे पूरा करने का प्रयत्न करेगे । हाँ तो कहो, क्या चाहिए मदारी नेता जमूरा नेता - मदारी नेता - मदारी नेता जी मुझे एक्सपोर्ट लाइसेन्स चाहिए । क्यो? ताकि हम आपको एक्सपोर्ट कर दे | हाँ, हमको भी विदेश भ्रमण का बहुत शौक है । हग तो स्वय विदेश जाने के बहाने तलाश करते रहते है। वैसे भी जिस चीज़ की हमारे देश मे बहुतायत हो, उसका निर्यात विदेशा को होना ही चाहिए । इसीलिये मुझे एक्सपोर्ट लाइसेन्स चाहिये । सवाल यह नहीं है कि तुम्हे क्या चाहिये ? सवाल यह है कि हम क्या चाहते हैं ? आप क्या चाहते है ? यह हमारा पी ए जानता है । पी ए , इन्हे बताओ, हम क्या चाहते है। रिश्वत । बेवकूफ । ब्रेकिट की बाते समझने और समझाने की होती है, बोलने की नहीं। यस सर। अभी नया है ता, इसलिये सच बोल गया । किन्तु जब भी हमसे कोई कुछ मागता है तो हम उसे देते अवश्य है । वो नहीं, जो वह चाहता है, बल्कि वो, जो हम चाहते है । यानी भाषण | पी ए इन्हे हमारा वह भाषण पढ़कर सुनाओ, जो हमको व्यापारियो के अखिल भारतीय सम्मेलन मे देता है । जिसमे हमने व्यापारियो से कुछ चाहा है । यस सर । छुआछूत एक भयकर बीमारी है । इसके कीटाणु बच्चे के पैदा होते ही फैलने शुरू हो जाते है । पी ए नेता पी ए . नेता . पी ए - 14 नेता जमूरा नेता जमूरा नेता - जमूरा मदारी नेता पी ए नेता इसलिये हम चाहते हैं कि बच्चो के पैदा होने से पहले ही उनके छुआछूत का टीका लगा दिया जाये । व्यापारियो को इस बीमारी की रोकथाम के लिये ठोस कदम उठाने चाहिये। (जमूरा जोर से हँसता है ।) हँसो मत। क्यो? हँसने से हमारे भाषण की गम्भीरता खत्म हो जाती है । तो मैं रो लेता हूँ। शौक से 1 किन्तु हम पर या हमारे भाषण पर नहीं, अपने दुर्भाग्य पर ऑसू बहाना । सही कहते हैं आप ! इससे बडा दुर्भाग्य हमारा और हो भी क्या सकता है ? में एक्सपोर्ट लाइसेन्स के लिये कह रहा था । पी ए यस सर । अब इन्हे वह भाषण सुनाओ, जिसमे हमने वैज्ञानिको से कुछ चाहा है। हमारे देश मे साडा की अच्छी नस्ले है किन्तु फिर भी इस क्षेत्र मे अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है | हम चाहते हैं कि हमारे वैज्ञानिक बुरी नस्लो के साडो की जिम्मेदारी अपने कधो पर ले ताकि देश आत्मनिर्भर हो सके | (जमूरा रोता है ।) अरे । तुम तो रो रहे हो। हाँ। इसमे तुम्हारा कोई दोष नहीं है । हमारे भाषण होते ही बडे मार्मिक हैं। तुम्हारे भाषण पर नहीं, अपने दुर्भाग्य पर रो रहा हूँ । अगर तुम लोग इन छोटी-छोटी बातो पर इसी तरह रोते रहे तो हमको रोने-चिल्लाने पर भी राशन करना पड़ेगा । खैर, बोलो, क्या चाहिये तुम्हे - पी ए । - नेता जमूरा नेता जमूरा नेता - 15 जमूरा पी ए नेता पी ए नेता - पी ए नेता नेता जमूरा नेता जमूरा नेता पी ए मुझे भूख लगी है। यह बडा काइयाँ है सर। कैसे ? इसने इस गूढ रहस्य को जान लिया है कि जब तक बच्चा... रोता नहीं, माँ भी उसे दूध नहीं पिलाती । इसलिये इसने पहले से ही रोना शुरू कर दिया है। तो क्या इसे दूध चाहिये। यस सर । (नेता जमूरे के पास जाता है) ए555 | तुम्हे दूध चाहिये ? (जमूरा रोता रहता है) रोओ नहीं-हम तुम्हारे लिये इस देश में दूध-दही की नदियाँ बहा देगे | बोलो, और क्या चाहते हो ? मुझे भूख लगी है। तो हमसे क्या चाहते हो ? रोटी। भई, तुम लोगो मे मागने की यह आदत बुरी है । सर, भाषण के दो-चार टुकड़े फेंक दीजिये । अपने आप चुप हो जायेगा। नहीं । भाषण के टुकड़ो के साथ इसे थोड़ा आश्वासनो का आचार भी चाहिये। मैं भूखा हूँ। (नेता भाषण देता है) हमारे देश में पिछले साल की भाँति इस बार भी फसल बहुत अच्छी हुई है । समय पर बारिश होने से ही यह सम्भव हुआ है। हमारे नदी तालाब पानी से भर गये है। खेत अनाज की बालियो से लदे झूम रहे है । अब कोई भूखा नहीं रहेगा । फिर भी [पीछे लाइन में खड़े व्यक्तियो मे से एक व्यक्ति अखबार बेचने वाले का अभिनय करता है और मच पर चक्कर काटता है।] नेता - - जमूरा नेता 16 अखबार वाला जमूरा नेता जमूरा नेता जमूरा नेता जमूरा नेता जमूरा नेता जमूरा नेता जमूरा नेता जमूरा नेता जमूरा नेता भूख से तग आकर माँ ने बच्चो को कुएँ मे ढकेला । स्वय द्वारा भी आत्म हत्या । भूख ने मासूमो की जान ली । आज की ताजा खबर, आज की ताजा खबर । में भी भूखा हूँ। तुम्हे रोटी चाहिये। हाँ। तो फिर जैसा मैं कहता हूँ वैसा कहो । अच्छा। (नेता जमूरे की आँखो मे झाँक कर हिप्नोटाइज करने का अभिनय करता है ) बोलो-मैं भूखा नहीं हूँ । मैं भूखा नहीं हूँ। मैं उपवास कर रहा हूँ। मैं उपवास कर रहा हूँ। ताकि अन्न की बचत हो। ताकि अन्न की बचत हो। मैं आत्म-शुद्धि कर रहा हूँ। मैं आत्म-शुद्धि कर रहा हूँ। और आत्म-शुद्धि के लिये और आत्म-शुद्धि के लिये शरीर को कष्ट देना आवश्यक है । शरीर को कष्ट देना आवश्यक है। बस, इसे रटते रहो । भूख अपने आप मिट जायेगी । (पी ए व नेता चले जाते हैं ।) (जमूरा इन्हीं शब्दो को दोहराता है ।) क्या कर रहे हो जमूरे ? मैं उपवास कर रहा हूँ। क्यो? ताकि अन्न की बचत हो। तुम सन्यासी कब से हो गये ? मैं आत्म-शुद्धि कर रहा हूँ। - - - मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा - 17 मदारी लगता है, अभी तक तुम जागे नहीं हो । तुम्हे जगाना पड़ेगा । जमूरे । [जमूरे को झकझोरता है। जमूरे ।। - क्या हुआ 7 ओह । ख्वाब देख रहा था मदारी । क्या देखा? जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा अनाज ही अनाज रोटियाँ ही रोटियाँ। पेट भरा? हाँ, खूब जमकर खाया है । - क्या ? - मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी देसी घी मे तले हुये भाषण के टुकड़े और सरसो के तेल से बना आश्वासनो का आचार । मिलावट तो नहीं थी? घी और तेल मे थी | भाषण और आश्वासनो मे नहीं । खैर, छोडो अब ये बाते । धन्धे की बात करो। करो। तुम्हे पता है, पहली प्रोडक्ट मे हमको नुकसान हुआ है । इस माल की कहीं कोई डिमान्ड नहीं । पता है। फिर इस नुकसान को कैसे पूरा किया जाये ? बाई-प्रोडक्ट बनाकर। नहीं, हम कोई वाई-प्रोडक्ट नहीं बनायेगे । - - जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी फिर? जमूरा हम फार्मूला बदल देगे । इस बार हम ईमानदार इन्सान जरूर बनायेगे। अच्छा, तो चलो। (प्रकाश लुप्त होता है । फिर मच के बीच मे कुछ लोग उसी तरह मशीन की आवाज निकालते हैं और इसी आवाज़ के बीच स्वर उभरते है "आरोप लगाओ-शोर मचाओ ~ लागो को बहरा बनाओ पर पहरा बिठाओ", आदि। धीरे-धीरे प्रकाश तेज़ होता प्रगति के सूरज 18 - है। लोग उसी तरह बैठते है और उनके घेरे के बीच मे क्रोधित मुद्रा मे एक व्यक्ति उभरता है 1) लगता है, अब काम बन गया है। नहीं मदारी । इस बार विरोधीराम बन गया है । यह कैसा है ? यह भी उन जैसा है। नाम ? प्रगति का निरोध -- काम ? - मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी विरोध ही विरोध। क्या यह भी ईमानदार नहीं ? स्वय के प्रति भी नहीं । ऐसा मत कहो जमूरे, मेरा जी जलता है । यह वह गिरगिट है जो हर वक्त रग बदलता है। और क्या करता है? प्रगति के सूरज पर पहरा बिठाता है । और? - - - जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी अन्धकार ही अधकार दिखाता है। और ? कभी-कभी नौजवानो को गुमराह भी करता है । नहीं-ऐसा नहीं हो सकता । लगता है, तुम मुझे गुमराह कर रहे हो। चलो, तुम खुद चलकर देख लो । ठीक है चलो। मगर एक बात का ध्यान रखना । वह क्या? अपना दिमाग और आँखे खुली रखना। क्यो? कहीं उसकी दलीलो से तुम्हारा दिमाग न बदल जाए ! नहीं, मैं उसका निर्माता हूँ | मुझ पर असर नहीं होगा। मदारी चलो । 19 - जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी - 1 विरोधीराम- सभी श्रोता विरोधीराम - सभी श्रोता विरोधीराम (मदारी आगे बढ़ता है । जमूरा फिर रोकता है।) सुनो मदारी। अब क्या है ? क्यो मुझे छेडा है ? इसलिये कि आदमी यह टेढ़ा है। तो ? इसे समझने के लिये पहले दूर से ही देखना होगा ठीक है | तुम कहते हो तो दूर से ही देखते है | चलो । (प्रकाश दाहिनी तरफ केन्द्रित होता है । वहाँ एक स्टूल रक्खा है । विरोधीराम घेरे से निकल कर स्टूल पर खड़ा होता है । घेरे के लोग उसके सामने श्रोता बनकर खडे हो जाते हैं । जमूरा दूर रहता है और मदारी भीड़ के पीछे खड़ा रहता है ।) हॉ तो मैं कह रहा था कि सरकार ने क्या किया ? बहुत कुछ किया है सरकार ने | स्कूल और कॉलेज खोलकर युवको को बेरोजगार बना दिया । हाँ सा । रेल की लाइने बिछाकर हमारे खेतो को रौंद डाला। हाँ-सा। बिजली की चकाचौध से हमारी आँखो को कमजोर कर दिया। हाँ-सा ! जगह-जगह अस्पताल खोलकर हमको मरीज़ बना दिया। हॉ-सा । किन्तु हम अब यह बर्दाश्त नहीं करेगे । हम मरीज़ नहीं बनेगे। हम बिजली की चकाचौध के बावजूद अपनी आँखे खुली रक्खेगे और स्कूल कॉलेजो मे अपने बच्चो को भेजकर उन्हे बेरोजगार नहीं बनाएगे, नहीं बनाएगे नहीं बनाएगे। (सभी श्रोता तालियाँ बजाते है ।) धन्यवाद । मैं विरोधीराम वल्द आलोचक नाथ पुण्डरीक सत्यनिष्ठ कर्मयोगी आपका सेवक आपको बताना चाहता हूँ कि हमारे खेतो मे चूहे किसने छोडे ? नालियो मे कीडो को - सभी श्रोता विरोधीराम- सभी श्रोता विरोधीराम विरोधीराम 20 ? सभी श्रोता विरोधीराम विरोधीराम- किसने आने दिया ! हवा और बादलो को किसने रोका ? बता दूं हाँ-सा। सरकार ने । आप लोग इस समय पसीने से लथपथ खडे हैं। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि आप लोगो की सुख सुविधा के लिये मैं बादलो का एक समूह और शीतल हवा लेकर चला था । किन्तु सरकार के सिपाहियो ने बादलो के उस समूह को चौराहे से आगे नहीं बढ़ने दिया और उस मैदान मे हवा पर पहरा बिठा दिया | मेरे मतदाताओ, मैं तो आप सभी को ठडा करना चाहता हूँ किन्तु सरकार करने ही नहीं देती। (सभी श्रोता तालियाँ बजाते है ।) धन्यवाद । में विरोधीराम वल्द आलोचक नाथ पुण्डरीक सत्यनिष्ठ कर्मयोगी आपका सेवक आपको बताना चाहता हूँ कि आपके मोहल्लो मे मच्छर आपको क्यो परेशान करते है और आपकी चारपाइयो मे गैरकानूनी अतिक्रमण से बसे खटमल आपका खून क्यो चूसते हैं ? बता दूँ हाँ सा । यह सब सरकार की मेहरबानी है । एक गुप्त समझौता हुआ है सरकार का मच्छरो और खटमलो से । उस समझौते की पहली शर्त यही है कि मच्छर आपके मोहल्लो मे घुसकर आप पर आक्रमण करे और खटमल आपका खून चूसे | आप अपनी चारपाइयो को गौर से देखियेगा आप लोग पायेगे कि जो खटमल आपका खून चूस रहे हैं वे देशी नहीं विदेशी है । विदेशी खटमलो का आयात किया है सरकार ने और इसमे करोडो रुपयो का कमीशन खाया है । (सभी श्रोता तालियाँ बजाते है ।) मेरे मतदाताआ मह तालियाँ बजाने की बात नहीं है। शर्म की बात है । सब मिलकर बोलिये शेम-शेम । हाँ-सा । शेम-शेम-शेम । और अब में आपको बता दूँ कि ऐसा क्यो किया गया ? हाँ-सा। ? सभी श्रोता विरोधीराम विरोधीराम - सभी श्रोता विरोधीराम सभी श्रोता 21 विरोधीराम - ॥ सभी श्रोता. विरोधीराम - विरोधीराम ऐसा इसलिये किया गया, ताकि आप हमारी सही दलीले ना सुन सके | आप ही सोचिये, यदि मच्छर आपके कानो के पास भिनभिनाते रहेगे तो क्या आप हमारी बाते सुन सकेगे? ना-सा और विदेशी खटमलो का आयात कमीशन खाकर इसलिये किया गया ताकि वे आपका खून चूसते रहे, आप अपना बदन खुजाते रहे और आपका ध्यान सरकार के भ्रष्टाचार की ओर न जाये | आप शरीर से कमजोर हो जाये और क्रान्ति । कर पाये। (सभी श्रोता हँसते है ।) मेरे मतदाताओ, अभी कुछ ही देर पहले आपने गलत बात पर तालियाँ बजायी थीं ओर अब गलत बात पर हँस रहे हैं। यह बात हँसने की नहीं, नारे लगाने की है। मेरे साथ आप नारे लगाये | मैं बोलूँगा-खटमलो का आयात, आप बोलेगे-नहीं होगा-नहीं होगा ! मैं बोलूंगा-मच्छरो से गुप्त समझौता, आप बोलेगे नहीं होगा-नहीं होगा । तो शुरू करूँ? हाँ-सा । खटमलो का आयात-- नहीं होगा- नहीं होगा । मच्छरी से गुप्त समझौता नहीं होगा- नहीं होगा । धन्यवाद | मैं विरोधीराम वल्द आलोचक नाथ पुण्डरीक सत्यनिष्ठ कर्मयोगी आपका सेवक अब आपको सरकार का एक और घृणित काम बताता हूँ। बता दूँ हाँ-सा । आज सरकार कह रही है कि महगाई इसलिये बढ़ रही है, क्योकि आबादी बढ़ गयी है । लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूँ कि यह आबादी किसने बढ़ायी ? आपके घरो मे बच्चो की लाइन किसने लगायी ? कौन है इसके पीछे ? बता दूं - सभी श्रोता विरोधीराम- सभी श्रोता विरोधीराम सभी श्रोता विरोधीराम- - 7 - सभी श्रोता विरोधीराम - 7 22 . सभी श्रोता विरोधीराम मदारी सरकार । सरकार ने लगायी है आपके घरो मे बच्चो की लाइन ! इसके लिये आप स्वय को भले ही जिम्मेदार मानते हो, लेकिन मैं फिर कहता हूँ कि इसके जिम्मेदार आप नहीं, सरकार है। बन्द करो अपनी यह बकवास । बहुत हो गया। (सवाद बोलते हुये मदारी विरोधीराम के पास जाता है।) आपकी तारीफ ? मैं तुम्हारा निर्माता हूँ। निर्माता ? मेरा कोई निर्माता नहीं है । मैं तो जगली धास की तरह पैदा हुआ हूँ और जगली फूल की तरह पनप रहा विरोधीराम मदारी विरोधीराम - - मदारी विरोधीराम - मदारी विरोधीराम - 7 - यह तुम्हारा भ्रम है । ससार की प्रत्येक वस्तु का कोई न कोई निर्माता अवश्य होता है । चलो, माने लेता हूँ कि तुम मेरे निर्माता हो । मगर सरकारी एजेन्ट की तरह अकड़ क्यो रहे हो ? क्या चाहते हो? मैं यह कहना चाहता हूँ कि तुम लोगो को गुमराह क्यो कर रहे हो? मैं किसे गुमराह कर रहा हूँ ? लोग मुझे सुनना चाहते हैं और मैं सत्य बोल रहा हूँ। तुम झूठ बोल रहे हो। क्यो भाइयो ? क्या मैं झूठ बोल रहा हूँ? नासा । लो सुन लो । क्या कह रहे है यह लोग ? अरे, यह तो अन्धे, गूंगे और बहरे है । इनका सत्य वही है जो तुम्हारे जैसे चतुर लोगो का झूठ है । बकवास बन्द करो “अगर तुम यह साबित कर दो कि मैं झूठ बोल रहा हूँ तो मैं अपने मतदाताओं के सामने शपथ लेता हूँ कि मैं कोई पद ग्रहण नहीं करूंगा और सत्ता से दूर रहूँगा। मदारी विरोधीराम सभी श्रोता विरोधीराम मदारी - विरोधीराम - 23 मदारी तुम क्या कह रहे थे अभी, कि आबादी सरकार ने बढ़ायी - विरोधीराम - हाँ, मै सावित कर सकता हूँ कि आबादी सरकार ने बढ़ायी है। मेरे मतदाताओ, सावित कर दूं? सभी योता हाँ सा । विरोधीराम तो सुनो । प्रजातन्त्र मे सरकार किसकी होती है ? जनता की। जो आज जनता है, वही कल सरकार है । जो आज सरकार है, वही कल जाता होगी। मतलब जाता ही सरकार है और सरकार ही जनता है 1 मैंने कहा है कि आबादी सरकार ने बढायी है तो क्या गलत कहा है ? क्या सरकार जनता नहीं है ? बोलो ? मदारी तुम्हारे समीकरण मेरी समझ में नहीं आ रहे है । विरोधीराम तो फिर क्या आ रहा है तुम्हारी समझ मे ? मदारी यही कि तुम बहुत चालाक हो । तुम्हारा हर समीकरण तुम्हारा स्वार्थ है । भाइयो, मैं आप लोगो से कहना चाहता हूँ विरोधीराम मदारी विरोधीराम सभी श्रोता मदारी क्या कहना चाहते हो? सत्य कहना चाहता हूँ। वह मैं तुम्हे कहो नहीं दूंगा | भाइयो, यह आदमी सरकारी एजेन्ट है । सरकार ने इसे हमारी सभा में गड़बड़ी करने के लिये भेजा है । इस सरकारी एजन्ट को यहाँ से भगा दीजिये। हाँ सा ! मारो-मारो---! मेरी बात सुनिये- मैं--- मैं- (लोग मदारी की तरफ बढ़ते है । मदारी भागता है । लोग "मारो मारो" कहते हुये मदारी के पीछे भागते हैं। स्टेज का पूरा चक्कर लगाने के बाद मदारी भागता हुआ जमूरे के पास आता है और लोग पीछे जाकर फिर लाइन मे खड़े हो जाते है ।) जमूरे जमूरे । क्या हुआ मदारी ? अरे, इतने हाँफ क्यो रहे हो ? क्या मदारी जमूरा हुआ? 24 मदारी जमूरा मदारी कुछ नहीं । तुम तुम सही कहते थे । यह तो एक खतरनाक इन्सान है। इसीलिये तो तुम्हे दूर से देखने-सुनने के लिये कहा था। लगता है, थक गये हो। नहीं । अब पकने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता | इन लोगो के लिये जवाब भी तो तैयार करना है । चलो जमूरे, हम फिर कोशिश करगे । इस बार एक सच्चा और ईमानदार इन्सान हम जरूर बनाएगे । चलो । (मदारी और जमूरा मच के बीच आते हैं । लोग घेरा बनाते है । प्रकाश यहीं केन्द्रित हो जाता है । मदारी और जमूरा मशीन चलाने का अभिनय करते है । लोग घूमना आरम्भ करते हैं | चक्कर काटते हुए लोग बोलते रहते है-"कम्पीटीशन कम्पीटीशन | कमीशन कमीशन, सलैक्शन सलैक्शन" सभी लोग फिर मशीन की ध्वनि मुँह से निकालते है और धीरे धीरे बैठना शुरू करते है और बीच से एक ऑफीसर उठना आरम्भ करता है और अन्त मे सब व्यक्ति बैठ जाते हैं और ऑफीसर पूरे रूप मे खडा हो जाता है ।) ये है हमारी तीसरी प्रोडक्ट । (जमूरा गौर से ऑफीसर को देखता है ।) इस बार हम जरूर कामयाम हुए हैं । नहीं मदारी | फार्मूला फिर गलत हो गया । क्यो ? क्या यह भी ईमानदार इन्सान नहीं है ? ईमानदारी से इसका दूर का भी रिश्ता नहीं है । इस बार क्या बन गया? ईमानदार इन्सान की जगह भ्रष्ट ऑफीसर । क्या हमारे देश मे इसकी कमी है ? नही यह तो हर शाख पर बैठा है। क्या ये दोनो प्रोडक्ट्स से भी ज्यादा खतरनाक है ? बहुत ज्यादा । तीनो मे अन्तर? वे बोलते ज्यादा है-ये लिखता ज्यादा है । मदारी - मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा 25 और? - मदारी जमूरा मदारी जभूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा . उनका जीवन पाँच साल है, इसका अठावन साल । ट्रेनिंग के लिये इसे विदेश भेज दे तो? फिर यह लौटकर नहीं आयेगा | नुकसान ज्यादा होगा। फिर क्या करे? इसे समय से पहले रिटायर कर दो। लेकिन पहले देखे तो, शायद ईमादार हो। हाँहों, देख आओ । मैं यहीं बैठा हूँ | (मदारी आगे बढ़ता है । आफीसर और दो व्यक्ति धेरे से निकल कर मच के बायीं ओर आगे आते है, वहाँ दो कुर्सियाँ और एक स्टूल रक्खा है। ऑफीसर थोडा आगे कोने पर बैठ कर शराब पीने का अभिनय करता है । पहले एक व्यक्ति फिर चपरासी बैठता है । मदारी ज्योही चपरासी के पास आगे बढ़ता है, त्योही ए । कहाँ घुसा जा रहा है ? मुझे साब से मिलना है। पहले हमको प्रणाम कर । प्रणाम। हूँ | क्या काम है ? जी एक दरख्वास्त देनी है। जेब मे क्या है ? - - चपरासी मदारी चपरासी मदारी चपरासी मदारी चपरासी मदारी चपरासी मदारी चपरासी मदारी चपरासी मदारी चपरासी मदारी कुछ नहीं। - - कुछ नहीं ? अबे खाली जेब साब से मिलो चला है ? हाँ हाँ, याद आया- एक बीडी है । साब बीड़ी नहीं पीता। तो क्या पीता है? अग्रेज़ी सिगरेट । वो तो नहीं है । मगर साब बात तो करेगा न? करेगा। वो भी अंग्रेजी मे। अग्रेजी सिगरेट अग्रेजी बात? यह हर जगह अग्रेजी स्यो ? अग्रेजी शराब अग्रेज़ी शराब 26 मदारी चपरासी - मदारी चपरासी चपरासी क्लर्क क्योकि साव का बाप एक अग्रेज था। ओह । अरे, तुझे गुफ्त मे ही दफ्तर का सारा राज बता दिया। हाँ तो, क्या है तेरी जेब मे? बताया न । बीड़ी। चल बीड़ी ही निकाल और जा अन्दर । (मदारी बीड़ी देता है और चला जाता है।) साले चले आते है खाली जेब | आज तो कम्बस्त ने बोणी ही पराव कर दी। (मदारी आगे बढ़ता है । क्लर्क कुर्सी पर बैठा सो रक्षा है। क्लर्क की गर्दन कभी गिरती है कभी उठती है । मदारी ताली बजाकर उसे जगाता है) (चीककर) यम सर । है ? अवे कौन है तू ? धत्तेरे की। अबे तुझे इमी ममय आना था ? हाय-हाय कितना प्यारा सपना देख रहा था में। तुम सपना देख रहे थे? अबे तो इस कुर्मी पर बैठकर और क्या देख सकते है ? बहुत सुन्दर मपना था ? बहुत सुन्दर । क्या देखा? मौ देखा, मैं साव की कुर्सी पर बैठा हूँ और साब मेरी कुर्सी पर बैठा है । मैंने बटन दबाया | साब दौड़ता हुआ मेरे पास आया । मैंने एक फाइल मैंगवायी । वह दोडकर फाइल ले आया । मैंने मिर्फ फाइल कवर देखा और साब को एक मोटी सी गाली दी और फाइल फेंककर उनके मुँह पर दे मारी ! साब ने गरदन झुकाली । मैने गेटआउट कहा । साब सर झुकाकर ऑसू बहाते हुए बाहर निकल गया | फिर मैंने चपरासी को बुला कर अपनी स्टैनो मिस रोज़ी को बुलाने को कहा और यह भी कहा कि रोजी के कमरे में आने के बाद किसी को भी अन्दर न आने दिया जाये । हूँ। फिर रोजी आयी? - मदारी क्ल मदारी क्लर्क मदारी क्लर्क मदारी 27 क्लर्क - मदारी क्लर्क - - -- मदारी क्लर्क मदारी क्लर्क मदारी क्लर्क मदारी क्लर्क मदारी क्लर्क मदारी क्लर्क - नहीं । रोजी की जगह तुम आ गये ! मैं पूछता हूँ तुम दस मिनट बाद नहीं आ सकते थे ? जी मुझे पता नहीं था कि आप ख्वाब देख रहे है। अबे मैं ही क्या मेरा जैसा हर व्यक्ति ऐसा ही ख्वाब देखता है ! खैर, बोल क्या काम है ? मुझे साव से मिलना है। क्यो? एक दरख्वास्त देनी है। वजन साथ लाये हो? क्या मतलब ? बगैर वजन के तुम्हारा कागज कहीं उड जायेगा । तो फिर इसके साथ एक पत्थर का टुकडा और दे देता हूँ। हाँ कोई भी प्रीसियस स्टोन चलेगा । जी? हीरा-पना-नीलम कुछ भी । इतने हल्के से कागज़ पर इता भारी वजन कागज जितना ज्यादा हल्का होता है वज़न उतना ही भारी रखा जाता है। एक बात पूछु पूछो। ये सारा वजन तुम्हीं रख लेते हो ? नहीं भाई । अपने को तो सिर्फ टेन-परसेन्ट भार मिलता है। बाकी? साब उठा लेता है। फिर ये काम तुम क्यो करते हो ? नहीं करूँ जो साब मेरी सी आर खराब करके दूसरे ही दिन मेरा ट्रांसफर ऐसी जगह कर देगा-जहाँ पीने को पानी भी नहीं मिलेगा | समझा ओह । इतना आतक ? यह तो बता, तू एन्टीकरप्शन का आदमी तो नहीं है ? 7 - ? मदारी क्लर्क मदारी क्लर्क मदारी क्लर्क मदारी क्लर्क - मदारी क्लर्क मदारी - - नहीं। 28 क्लर्क मदारी क्लर्क मदारी क्लर्क तो कौन है? में तुम्हारे साव का निर्माता हूँ। है जिर्माता ? काहे को झूठ बोलता है यार । साब के वाप को गुजरे तो तीस साल हो चुके हैं। मैं सच कहता हूँ। अच्छा बाबा, मान लेता हूँ | यह कलयुग है । हो सकता है, दो नम्बर के पैसे की तरह आजकल दो नम्बर के बाप भी चलते हो | आप वैठिए, मैं अभी साब को बोलता हूँ। (क्लर्क थोडा आगे बढ़कर पर्दा हटाने का अभिनय करता क्लर्क अफसर क्लर्क अफसर क्लर्क अफसर क्लर्क अफसर मे आई कम इन सर ? (गुस्मे मे) वाट डू यू वाट ? सर सब बॉडी वान्टस टू सी यू । अपाइन्टगेन्ट लिया है उसो ? नहीं साब। - क्लर्क 7 कोन है ? अपने आपको आपका निर्माता बताता है । पेरा निर्माता ? यू मी सलेक्शन कमेटी का मैम्बर आया है? फौरा भेजो उसे अन्दर । यस सर। (क्लर्क मदारी को भेजता है | अफसर मदारी को हैरानी से देखता है, फिर गुस्सा होता है ।) यू हू आर यू हिन्दी मे बात कीजिए। ? तुम्हारा निर्माता। तुम मलैक्शन कमेटी का आदमी है ? नही। फिर हमारा निर्माता कैसे हो सकता है । केसे अन्दर आया? आप अन्दर दुलाया । ओह । क्या मागता है ? अफसर मदारी अफ्सर मदारी अपसर मदारी अफसर मदारी अफसर कौन हो तुम - 29 मागने नहीं, देने आया हूँ ! क्या ? - मदारी अफसर मदारी अफसर मदारी अफसर मदारी अफसर मदारी अफसर मदारी अफसर मदारी अफसर मदारी अफसर मदारी - यह दरख्वास्त । पेपरवेट रखा ? जरूरी है ? हाँ! अगर नहीं रख तो? दरख्वास्त की उम्र बढ़ जाएगी । कितनी? तुम्हारी उम्र से भी ज्यादा ऐसा अब आगे नहीं चलेगा । तुम्हे जवाब देना होगा | जवाब ? किसे? सच्चे और ईमानदार इन्सान को । कहा है वो ? वह आने ही वाला है । गैट-आऊट फ्राम हियर । तुम्हे जवाब देना होगा वह आने ही वाला है। (कहता हुआ मदारी जमूरे के पास आता है 1) यू रबिश जमूरा मदारी क्या हुआ 7 जमूरा तुम ठीक कहते थे ! यह भी बहुत खतरनाक इन्सान है। चलो जमूरे हम फिर कोशिश करेगे । इस बार ईमानदार इन्सान जरूर बनाएगे। चलो | एक बार और देख लो । (दोनो मच के बीच की ओर बढ़ते हैं। लोग फिर घेरा बनाकर घूमते है । कुछ मशीन की आवाज़ निकालते हैं। कुछ बोलते हैं- "भ्रष्ट बनाओ लूट मचाओ दाम बढ़ाओ ।' ये शब्द मशीन की आवाज़ मे डूब जाते हैं घूमते हुए लोग धीरे-धीरे बैठते हैं और बीच मे सूट पहने एक व्यक्ति उभरता है ।) इस बार हमने खूब मेहनत की है । ये ईमानदार इन्सान जरूर होना चाहिए। मदारी 30 मेहात फिर बेकार गई मदारी। क्यो ? ये भी ईमानदार इन्सान नहीं ? नहीं। इस बार क्या बन गया बेईमानो का बादशाह । 7 भ्रष्ट व्यापारी । काम ? जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी मिलावट और टैक्सो की चोरी | दाम ? दो नम्बर का। धाम - जमूरा शहर का हर चौराहा । क्या यह उस सभी से ज्यादा भ्रष्ट है? यह उनका गुरु है । सवको प्रष्ट बनाता है । ऐसे इन्सान का मुंह काला करके उसे बाजार में धुमाना चाहिये। कोई फर्क नहीं पडेगा मदारी } ये तो खुद बाजार को काला करता है। तब तो यह इन्सान बडा खोटा है । हाँ चेहरे पर इसके मुखौटा है । फिर इसका क्या करे ? सम्भाल कर रख लो। क्या इसकी भी डिमाण्ड होती है ? हाँ। कब राजनैतिक सौदा होता है तब । ऐसा क्या है इसका बूता । मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी - ? - चाँदी का जूता । - हम भी तो नगे पाँव हैं। हमको यह कुछ नहीं देने का। क्यो ? आखिर हम इसके निर्माता है । 31 - जमूरा मदारी जमूरा मदारी खटमल से खून वापस लेने की उम्मीद रखते हो? तुम यूँ ही बकते हो। तो जाओ एक बार फिर किस्मत आजमाओ । जाता हूँ, और कुछ लेकर ही लौटूगा । (मदारी आगे बढ़ जाता है | व्यापारी घेरे के बीच से निकल कर दाहिनी आर जाता है । दो व्यक्ति उसके दोनो ओर खड़े हो जाते है । मदारी आता है और इनको गौर से देखता . व्यापारी दोनों व्यक्ति- व्यापारी दोनों व्यक्ति- व्यापारी दोनों व्यक्ति- - . -- व्यापारी मदारी । व्यापारी मदारी पार्टनर्स | यस ब्रदर। कल हमने कितने बढ़ाये थे ? (हाथ से इशारा करके) इतने । तो आइये, थोड़े और बढ़ा दे । यस ब्रदर । (तीनो हाथ मिलाकर किसी चीज़ को ऊँचा चढ़ाने जैसा अभिनय करते हैं ।) बस-अभी इतने ही रहो दो । आप लोग अभी क्या चढ़ा रहे थे ? चीज़ो के दाम । हैं ? इतनी आसानी से चढ़ा दिये-बगैर किसी तकलीफ़ के? तकलीफ तो ग्राहक को होती है । तुम्हे कोई तकलीफ नहीं होती ? होती है। कब ? जब ये चढ़े हुए भाव गिरते हैं तब । मगर तुम ये सब क्यो पूछ रहे हो ? कौन हो तुम मुझे नहीं पहचानते निर्माता? (व्यापारी के साथ वाले व्यक्ति उसको पगड़ी और चश्मा देते है । वह चश्मा और पगड़ी पहन कर अब अपने बोलने का लहजा बदल कर सेठ का अभिनय करने लगता है 1) - व्यापारी मदारी व्यापारी मदारी व्यापारी - - - मदारी व्यापारी मैं तुम्हारा निर्माता हूँ। - 32 7 व्यापारी मदारी व्यापारी । मदारी व्यापारी - - मदारी व्यापारी मदारी व्यापारी मदारी क्या बताया तुम्हारा निर्माता। ओ भैया, अपनी तो एक ही माता थी । जिसका स्वर्गवास हो चुका है । फिर तुम कौ-सी माता हो ? निर्माता का अर्थ है, तुम्हे बनाने वाला । हर आदमी आज एक दूसरे को बना ही तो रहा है । तुम हमको काजी बाओ हम तुमको मुल्ला बनायेगे । ओफ्फो । मेरा मतलब है में तुम्हारा जन्मदाता हूँ। हाँ । तो यू कहो कि भगवान् हो । भगवान्, आपके लिये तो मैंने हाल ही में पचास हजार की लागत से मदिर बनवाया है । मूर्ती का ऑर्डर भी दे चुका हूँ लेकिन जब आप स्वय ही आ गये है तो अब आपकी ही स्थापना करूगा । देखिये, आप मुझे गलत समझ रहे है । गलत तो सभी अपने आपको समझ रहे है । जो भगवान् नहीं है, वे भी अपने को भगवान् समझ रहे हैं। देखिये, मैं भगवान नहीं इन्सान हूँ और आप से बात करने आया हूँ। तो यूँ कहो न । बातो का धन्धा करते आये हो । हाँ कहो । जी बात यह है कि जरा ठहरो । पहले यह बताओ कि अपनी बातो की एन्ट्री एक नम्बर के खाते मे होगी या दो नम्बर के खाते मे ? क्या मतलब? अगर तुम बातो का टैक्स देने को तैयार हो, तो एन्ट्री एक नम्बर मे और अगर टैक्स नहीं दोगे तो दो नम्बर में । बातो पर टैक्स ? और फिर टैक्स नहीं देना तो चोरी है। ईमानदार आदमी लगते हो जी नहीं | ईमानदार आदमी बना रहा हूँ और इसीलिए आपके पास आया था कि समझ गया तो फिर कुछ मदद कीजिये न । ईमानदार इन्सान बन गये तो यह धरती स्वर्ग बन जायेगी। - व्यापारी मदारी व्यापारी - - मदारी व्यापारी - मदारी व्यापारी मदारी समझ गया व्यापारी मदारी 33 व्यापारी - - मदारी व्यापारी मदारी व्यापारी - जानता हूँ ऐसे बिजनेस प्रपोजल मेरे पास कई जन्मा से आ रहे है और मैंने कभी उनके लिये ना नहीं को इसका मतलब है कि आप अवश्य मदद करेंगे। अवश्यम्भावी । मै इसका सारा खर्चा देने को तेयार हूँ। जय हो आपकी । मगर एक शर्त है और वो यह कि तुम जो कुछ भी बनाओगे उसके कम्पलीट राईट्स यानी पूरे अधिकार मेरे पास होगे। क्या मतलब ? मतलब यह कि बगैर मेरी मर्जी के तुम उसे बाहर नहीं निकालोगे। लेकिन बाहर जाने से तो सभी का फायदा होगा। तुम फायदे और नुकसान के बारे मे भी नहीं सोचोगे | लेकिन तुम उसका क्या करोगे ? जो आज तक करता आया हूँ । मदारी व्यापारी मदारी व्यापारी मदारी व्यापारी मदारी व्यापारी - - क्या ? - । मदारी व्यापारी मदारी व्यापारी मदारी तुम्हारे ईमानदार इन्सान मे थोडी-सी बेईमानी की मिलावट! जैसे शुद्ध दूध मे थोडे से दही का जामन् । फिर दूध, दूध नहीं रहेगा। मतलब ईमानदार इन्सान सिर्फ इन्सान रहेगा, ईमानदार नहीं। तुम तुम बहुत खतरनाक आदमी हो तुम्हे जवाब देना होगा। जवाब नहीं जामन् देना होगा। हर बात का तुमसे हिसाब मागा जायेगा । अपने खाते मे तो कोई एन्ट्री ही नहीं है । वह सब वक्त बतायेगा । तुम जैसे खटमलो से खून की हर बूद का हिसाब मागा जायेगा। (कहता हुआ मदारी जमूरे की ओर बढ़ता है । व्यापारी और दूसरे व्यक्ति हँसते हुये बाहर चले जाते है ।) क्या हुआ मदारी? तुम ठीक कहते थे । यह तो बहुत खतरनाक इन्सान है। - मदारी 34 फिर? जमूरा मदारी फिर क्या जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी अखबार वाला स्वागत की 7 हम हार मानो वाले नहीं । हम फिर कोशीश करेगे । ईमानदार इन्सान जरूर बनायेगे । वह नहीं बनेगा मदारी। क्यो? क्योकि हमारी मशीन का पुर्जा-पुर्जा ऐसे इन्सान बनाते-बनाते पिप्स चुका है। तो हम हर पुर्जा बदल देगे। वह इतना आसान नहीं है । जानता हूँ । लेकिन ऐसे लोगो को सबक देने के लिए उसे बदलना होगा । चलो मेरे साथ चलो (मदारी जमूरे को घसीटता हुआ ले जाता है । प्रकाश लुप्त होता है । नगाढ़ा बजता है और पुन हल्के प्रकाश मे अखबार बेचने वाला प्रवेश करता है।) आज की ताज़ा खबर आज की ताजा खबर ईमानदार इन्सान का जल्दी ही आगमन तैयारियाँ जोरो पर आज की ताजा खबर आज की ताजा खबर (मच पर पूर्ण प्रकाश फैल जाता है । दोनो तरफ से नेता, विरोधीराम, ऑफीसर-चपरासी, क्लर्क-व्यापारी व अन्य सभी लोग मच पर आकर बिखर जाते है । ईमानदार इन्सान ? नहीं नहीं, ऐसा नहीं हो सकता। ऐसा कभी नहीं हो सकता। हम नहीं होने देगे। यह क्या मुसीबत आ गयी ? मेरे विदेश जाते ही ईमानदार इन्मान पैदा होने लगा। अब क्या होगा? लोग जूते मारेगे लेकिन सुनो सच्चाई का पता लगाने के लिए एक कमीशन विग दो। और हाँ, हर जनाना अस्पताल के बाहर अपने जासूसो का जाल बिछा दो ! जिस बच्चे पर शक हो उसे पैदा ही न होने दिया जाये | जाओ। - अफसर विरोधीराम क्लर्क नेता नेता इस बात की 35 - - पी ए आफीसर क्लर्क ऑफीसर यस सर। ए-इधर आओ यस सर। क्लर्क व्यापारी ऑफीसर देखो, सारी कॉन्फीडेन्शियल फ़ाइले जला दो और बयान जारी कर दो कि बिजली का तार शॉट हो जाने के कारण रेकॉर्ड रूम मे आग लग गई हरी अप । यस सर। गोदामो का सारा माल अन्डर-ग्राउण्ड कर दो । सारा सोना और चाँदी गाडियो के बोनट और चेसिस मे भरकर गाड़ियो को वर्कशॉप मे खडी कर दो । सारा कैश हमारे छोड़े हुए भिखारियो के झोलो मे भर दो। दो नम्बर के खातो को किसी सरकारी दफ्तर के रेकॉर्ड-रूम मे रखवा दो ताकि वह अपने आप जल जाये जाओ नॉनसेन्स । हमारे आराम मे उसे दखल देने का क्या अधिकार है? हाँ-हाँ, कोई अधिकार नहीं । देखो न, मैंने ज्योही अखबार मे पढ़ा कि ईमानदार इन्सान आने वाला है तो अपनी विदेश यात्रा बीच मे ही स्थगित कर दी और फौरन चला आया । भला हमारे देश मे उसका क्या काम | मेरा तो विचार है कि हम सबको उसके खिलाफ एक होकर आवाज़ उठानी चाहिए । इस अन्याय का मुकाबला करना चाहिये। हाँ-हाँ, जरूर करना चाहिए । अगर वह आ गया तो मैं चुनाव मे हार जाऊँगा। आखिर कानून हमको भी तो चैन से रहने की सुविधा देता नेता व्यापारी विरोधीराम- व्यापारी नेता - सब लोग सही है | तो आओ हम मिलकर मुकाबला करे । यह तानाशाही? नहीं चलेगी। यह गद्दारी। नहीं चलेगी। व्यापारी - 36 - ऑफीसर सब नेता - - सब ईमानदार इन्सान-- नहीं बनेगा नहीं बनेगा नहीं बनेगा! ईमानदार आदमी-- नहीं बनेगा-हीं बनेगा--- नहीं बनेगा। (सब नारे लगाते हुए मच के दाहिनी ओर के कोने मे चले जाते है।) (वायी ओर से जमूरा और मदारी का प्रवेश I) यह शोर कैसा है जमूरे हमारी फैक्ट्री की प्रोडक्ट ने हडताल कर दी है। 7 मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी क्यो? क्योकि हम ईमानदार इन्सान बना रहे हैं । वह हम ज़रूर बनायेगे। यही सोच कर हम अब तक अपने आपको धोखा देते आ मदारी जमूरा - मदारी जमूरा मदारी , অদুধ - क्या मतलब ? ईमानदार इन्सान नहीं बनेगा। क्यो? उसे बनाने का अधिकार उसको है जो स्वय ईमानदार हो । क्या तुम ईमानदार हो ? (पॉज) सन्चे और ईमानदार इन्सान बनाये नहीं जाते मदारी, वे पैदा होते हैं । माना कि मैं ईमानदार नहीं, लेकिन अगर यही सवाल में तुमसे करूँ कि क्या तुम ईमानदार हो ? मैं नहीं जानता ? मैं केवल इतना जानता हूँ कि मैवफादार जरूर हूँ। सबूत अगर वफादार नहीं होता तो ये कुत्तो जैसी जिन्दगी नहीं जी रहा होता। (तभी गारे लगाते हुए लोग मदारी और जमूरे का घेराव करते है।) ये ये घेराव है। 7 - मदारी जमूरा - मदारी १ - 37 क्या चाहते हो? -- मदारी ऑफीसर मदारी व्यापारी नेता मदारी नेता मदारी ऑफीसर अपो अधिकारो की रक्षा | क्या है तुम्हारे अधिकार ? भ्रष्टाचार का मुक्त-प्रसार 1 अपने ढग से जीने की सुविधा । समझौते की शर्त? ईमानदार इन्सान न बनाने का इकरार । अगर मैं कर दू इनकार ? तो तुम्हारे सामी इस दाँचे को जलाकर राख का एक ढेर बना दिया जायेगा और तुम्हारी लाश उसके नीचे दफ्न कर दी जायेगी। (अट्टहास) तुमने बहुत देर कर दी। - क्यो। - मदारी व्यापारी मदारी नेता मदारी ऑपीसर मदारी विरोधीराम नेता मदारी नेता मदारी नेता - मैं उसे पहले ही या चुका हूँ। कहाँ है वह ? उसे पोजना तुम्हारा काम है । उसकी पहचान जैसे आसगार मे चाँद । पहेलियां मत गुनाओ। ठीक-ठीक बताओ। मैं नहीं बताता। तुम्हे बताया पड़ेगा। मुझे समय चाहिए । ठीक है | हम तुम्हे दस गिटि का समय देते है । उभे बाहर भेज दो। नहीं भेजो की सरा तुम जानते ही हो । तुम्हारी लाग पर इम पूरे दौथे की राग काटेर । चलो सादिया ।म बाहर उम्पका इन्तजार करते । हमारी एवरा--- - मओपीमर स्तर व्यापारी नेता सर 39 मदारी (तारे लगाते हुए लोग दाहिनी ओर चले जाते हैं और लाइन बनाकर खड़े हो जाते है ।) अब क्या होगा ? मैंने इस ढाँचे को बचाने के लिए झूठ बोला था । कहा से लाऊ सच्चा और ईमानदार इन्सान? वे लोग इस पूरे ढाँचे को जला देगे । सब ठीक होगा मदारी । तुम सिर्फ एक काम करो। क्या ? - जभूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा - मदारी -- मुझे मुक्त कर दो। मतलब? मेरे पेट पर बाँधी रस्सी को खोल दो। इससे क्या होगा? जिस ढाँचे को हम बचाना चाहते हैं, वह बच जायेगा । लेकिन इस ढाँचे का तुम्हारी मुक्ति से क्या सम्बन्ध ? सम्बन्ध है । हम एक ही धरातल पर खडे होकर एक ही दिशा मे सोचेगे । फिर खिचाव नहीं होगा भूख नहीं होगी वेदना नहीं होगी। इसे बचाने के लिए मैं सब कुछ कर सकता हूँ । लो, मैं तुम्हे मुक्त करता हूँ। (मदारी जमूरे की रस्सी खोल देता है ।) ओह । मुक्ति की साँस कितनी मादक होती है | यह आज जान पाया हूँ | अच्छा मदारी विदा लेकिन जाते-जाते एक बात और कहना चाहता हूँ | तुम रुकना नहीं ठहरना नही अपने प्रयत्न जारी रखना लेकिन तुम कहा चले? नाटक की इतिश्री करते। क्या मतलब ? जीवन एक नाटक है मदारी ! सुनो सुनो सुनो (जमुरा आगे बढ़ जाता है । जहाँ लोग लाइन बनाकर खडे जमूरा मदारी जमूरा मदारी जमूरा मदारी - 39 जमूरा नेता जमूरा अफसर जमूरा व्यापारी जमूरा नेता जमूरा ऑफीसर नेता व्यापारी चपरासी जभूरा - क्या कर रहे हो? इन्तजार। किसका? सच्चे और ईमानदार इन्सान का। किसलिए? एक परम्परा का निर्वाह करने के लिए। क्या है परम्परा ? उसकी हत्या। कैसे ? मैं उसे जहर दूगा । मैं उसे सूली पर चढ़ाऊगा। मैं उसे पत्थर मारूगा। मैं उसे गोली मारुगा। तो फिर आगे बढ़ो- मैं ही वह इन्सान हूँ जिसकी तुम्हे प्रतीक्षा है। [सब लोग डरकर पीछे हटते है 1] हर क्यो रहे हो ? मैं निहत्या हूँ और तुम्हारे हाथो मे शस्त्र है-बढ़ो । आगे- (कोई आगे नहीं बढ़ता सब पीछे रहते हैं । जमूरा मच के वीच आकर कहता है) मैं सच्चे और ईमानदार इन्सान का अभिनय मात्र कर रहा हूँ, और मुझे एक पवित्र मृत्यु की प्रतीक्षा है ( यह सवाद तीन बार बोलता है | लोग चारो तरफ से घेर लेते है और उस पर हमला कर मार देते है । एक चीख निकलती है । मदारी दौड़ता हुआ आता है और चीखता जमूरा •बढ़ो। जमूरा - मदारी - नहीं ! (सारे कलाकार फ्रीज़ हो जाते है और मच पर लाल प्रकाश फैल जाता है) (पर्दा गिरता है) 40

-
प्रश्न चिन्ह
(यह नाटक "सथारा" शीर्षक से कई स्थानो पर मचित हो चुका है ।)

प्रश्न चिन्ह
पात्र
1
2
3
4
मानव
कुवेर
कुटिल
कर्नल
मदिरा
पत्रकार 1
पत्रकार 2
सूत्रधार
(चार अन्य व्यक्ति)
6
7
8

(नाटक के सभी पात्र सस्वर कोरस गाते है ।) आदमखोरो की बस्ती मे हम अमन की बसी बजाते है मरघट मे सोये मुदों को हम प्रणय का गीत सुनाते है । मानव मशीनगन बना आज मानवता रह गई नारो मे सारी खुशिया कैद हो गई एटम के गुब्बारो मे खाने को उग रहे आज यहा हथियार गोलिया हथगोले अराज नहीं नाज करो इनसे भरकर खाली झोले सूखी शाखो पर प्रसव हो रहे सड़को पर भटक रहे ककाल माया मदिरा और मोहिनी फैला रही हैं अपने जाल श्वान और शिशु एक ढेर पर चाट जूठन सारा धरती पर रहा अपनी ही आखो का तारा । आतक, तस्करी ट्रास बो जीवन के अग अमित मारास उभरा इसीलिये से प्रान चिन्ह एक प्रश्न चिन्ह (साइक पर प्रश्न चिन्ह उभर कर प्रकाश के माप सुप्त होता है । संगीत उमरता है । प्रकाश फिर मैच के दाहिनी ओर उभरता है । मूत्रधार वहाँ पहा भूखा चिलख एक -- 43

सूत्रधार
नमस्कार । आपको लग रहा होगा कि इस नाटक की
शुरुआत भी कुछ और नाटको जैसी ही हुई । जैसे सबसे
पहले वही कोरस और फिर किसी सूत्रधार का अचानक
मच के किसी कोने से प्रकट होकर प्रलाप करना, नाटक की
भूमिका बाधना ! फिर प्रस्तुति मे नयापन क्या हुआ ? वही
पुरानी शराब नाम की नयी बोतल ।
लेकिन क्या आपको लगता नहीं कि हमारा वही पुराना
आज नये नाम से बेचा जा रहा है । चाहे साहित्य हो, कला
हो या सस्कृति ।
धरती और आकाश की प्रत्येक वस्तु वही है । हमारे
वेदो और महाकाव्यो के अनुसार ये कभी नष्ट नहीं होती ।
केवल उनमे परिवर्तन होता है । हमने उसी परिवर्तन को
"नया" कहकर उसका पर्याय बना दिया है।
परिवर्तन प्रकृति का नियम है । किन्तु शायद यह रियम
इन्सान पर लागू नहीं होता । अगर लागू होता तो क्या
इन्मान की मूल प्रवृत्ति मे परिवर्तन नहीं होता? लगता है
आपको, मानव की मूल प्रवृत्ति में परिवर्तन हुआ है ? वही
शोषण, वही दमन, वही आतक, वही युद्ध | कल का
आदम आज भी आदमखोर । पहले युद्ध के कारण हुआ
करते थे और इन्सान लड़ते हुये मारे जाते थे । आज सैकड़ो
निर्दोष सब्जी खरीदते हुये मारे जाते हैं । आज सबसे सस्ती
चीज़ है मौत । यदि यही हाल रहा तो यह धरती एक दिा
सगीनो का साया होगी और आसमान एटम बमो के धुएँ से
भर जायेगा।
इन्सानो ने धरती को तो बाँट लिया, आज वे आसमान
को भी इसीलिये वाट रहे है ताकि अपने हिस्से के एटम वहा
राक सके । गोया आज का इन्सान स्वय अपनी सलीब अपने
कधो पर ढो रहा है।
44

कैसे बचेगा धरती का यह विलक्षण प्राणी ? फिर वही प्रश्न-चिन्ह ? एक और प्रश्नचिन्ह । (प्रकाश लुप्त होकर मच के मध्य उभरता है ।) (दाहिनी ओर से एक व्यक्ति आकर दूरबी से कहीं दूर देखने का अभिनय करता है । बायीं ओर से दूसरा व्यक्ति सिगरेट पीता हुआ आता है, किन्तु उसकी सिगरेट बुझी हुई है । वह दो-तीन कश लेकर उसे फिर से जलाने का प्रयत्न करता है । किन्तु सिगरेट नहीं जलती ।) कुटिल धत्त तेरे की, यह सिगरेट हे या किसी मुल्क की दान में दी हुई बारूद ? कम्बख्त जलती ही नहीं । (फिर इधर-उधर देखकर, दूरबीन से देख रहे व्यक्ति के पास जाकर उसकी पीठ किसी दरवाजे की तरह खटखटाता कुटिल 7 कुबेर भाई साहब भाई साहब । अमा आदमी हो या कुतुबनुमा की सुई एक ही दिशा मे देखते जा रहे हो । अमा सुनते हो? सुन रहा हूँ । मगर पहले आप मेरी बात भी सुन लीजिये कि यह मेरी पीठ है, कर्जा देने वाले किसी देश का दरवाजा नहीं, जिसे आप खटखटाते रहे । कहिये क्या बात है ? आपके पास माचिस होगी? किसलिये चाहिये ? मिगरेट जलाने के लिये या किसी का घर जलाने के लिये। सिगरेट जलाने के लिये | तब नहीं है। कुटिल कुबेर - क्यो? कुटिल कुबेर कुटिल कुबेर कुटिल कुवेर सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होता है । और दूसरो का घर जलाना उससे अपने स्वार्थ की पूर्ती होती है । 7 45

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कुटिल कुबेर कुटिल - कुबेर बुटिल पा, मगर साहब नो रिटनं { कहीं से कोई घुआ ही उस्ता नजर नहीं आता। तो इसमे भबराने की क्या बात है ? अब आपकी और हमारी दोस्ती हो गयी है । कुछ ही दिनो मे चारो और आपको धुआ ही धुआ नजर आयेगा। मुझे धुआ बहुत पसन्द है । ऐसा महसूस होता है जैसे काली घटाएँ धरती से उठकर आसमान की बाँहो में समा जाना चाहती हैं। एक काली दीवार जो आँखो के सामने ससार के कालेपन को बैंक देती है। इस पसन्द की मैं दाद देता हूँ। वैसे आतिशबाजी का शौकीन मै भी हूँ ! आपको धुश पसन्द है और मुझे आग ! हूँ ! आपने अभी तक यह नहीं बताया कि आप क्या है? मेरा नाम कुटिल है । मैं शतरज का खिलाडी हूँ साहब। चाल चलना और मोहरे बिठाना ही मेरा काम है । कभी शह देता हूँ और कभी मात । यू समझिये कि बाजियो की बन्दगी करता हूँ। वाह । सब कहता हूँ, अगर आप मुझ पहले मिल जाते तो सिकन्दर का सपा अपना भी होता। सपने तो आप अब भी देख सकते है। हा । मैं महसूस कर रहा हूँ, मुझे सपना देखना चाहिये। आखिर मै माचिस के इतने कारखानो का मालिक हूँ। तब तो आप दिन मे भी सपो देख सकते है। हा क्योकि मेरी माविम सूरज की रोशनी को अपने धुएँ से ढंक सकती है। हाँ । धुएँ की बात पर याद आया, आप पूरब की तरफ अभी धुएँ को तलाश कर रहे थे। हाँ.--- हाँ मेरी समझ में नहीं आता है आखिर क्यो नहीं বঃ দ্য ই ব ঘুচা (दूरबीन से फिर देखता है।) जरा गौर से देखिये शायद कोई धुएँ की लकीर ही नजर आ कुर - कुटिल कुबेर - कुटिल कुबेर कुटिल - कुबेर 7 - जाए।

कुटिल कुबेर कुटिल कुदिन कुबेर कुटिल कुबेर कुटिल (कुबेर फिर देखता है।) कुछ नज़र आया ? हाँ। क्या ? (कुबेर चोंक कर फिर दूरबीन से देखता है ।) मैंने कहा, क्या नज़र आ रहा है ? वह व्यक्ति जिसको मैंने धुएँ के लिये माचिस दी थी। क्या कर रहा है वह एक खूबसूरत औरत का पीछा । गोया हज़रत कुछ जलाने के बजार खुद जलने के चक्कर मे 7 कुबेर कुटिल कुबेर कुटिल कुबेर कुटिल ईडीयट । कौन ? वही । (दूरबीन हटा लेता है ।) जरा एक मिनिट अपनी दूरबीन मुझे दोगे ? - - क्यो? मैं देखना चाहता हूँ क्या वह औरत वास्तव मे बहुत खूबसूरत है ? कुबेर कुटिल - कुटिल कुबेर कुटिल कुबेर क्यो? क्या मैं उसे नहीं देख सकता ? तो फिर देखते क्यो नहीं । (कुबेर फिर दूरबीन से देखता है ।) क्या वह वास्तव में खूबसूरत है ? हाँ- बहुत खूबसूरत । जरा उसके हुस्न की रनिंग-कॉमेन्ट्री तो करो । उसकी आँखो मे चमक है | लगता है जैसे बारूद के दो भण्डारो मे आग लगी हो । उसकी जुल्फे उसके कधो पर इस तरह बिखर रही है जैसे पैराशूट से उतर कर सैनिक इधर-उधर बिखर गये हो । उमकी चाल भी मतवाली है मानो कोई टैक झूमता हुआ चला आ रहो हो । (सवाद बोलते हुये दोनो पीछे हटते हैं और बाहर निकलते है । सामने मदिरा और कर्नल हँसते हुये प्रवेश करते है ।) हूँ ! तो आपको यूँखार कुत्ते पालने का शौक है । कर्नल 48 मदिरा हाँ । जानते हो कर्नल, मैं उनको किस तरह फीड करती हूँ? किस तरह खिलाती हूँ? इट शुड भी वैरी इन्ट्रैस्टिग। ऑफकोर्स । बड़ा मजेदार एन्टरटेनिंग तरीका है मेरा। कर्नल मदिरा कर्नल मदिरा - कुछ भूखे बच्चो को इकट्ठा करती हूँ। अपने सामने बिगती हूँ और फिर तरह-तरह की चीजे उनके सामने खाती हूँ। मुझे खाते हुये देखकर उनकी भूख बढ़ जाती है और लार टपकने लगती है । फिर मैं मक्खन लगे रोटी के टुकडे दूर फेकती हूँ । बच्चे उन्हे खाने के लिये दौड पडते है। तभी मैं अपने शिकारी कुत्तो को भी छोड देती हूँ। जाहिर है बच्चे तो उन टुकडों तक पहुँच नहीं पाते लकिन मेरे कुत्ते बच्चा तक ज़रूर पहुँच जाते है और फिर जो एक रोमाचक सीन बनता है तो बस मजा आ जाता है। वन्डरफुल । रीयली वन्डरफुल अब बताओ ! किया है, तुमने अपने आपको कभी इसी तरह एन्टरटैन ? हाँ-हाँ किया है कई बार । लेकिन दूसरे तरीके से । - -- कर्नल मदिरा ~ - कर्नल मदिरा कर्नल मदिरा- T-आ55 निस्सा पिछली लड़ाई का है । दुश्मन का एक जासूस हमारे हाथ लग गया | उससे किस तरह सारी बात उगलवायी जाये, इसके लिय एक एक्सपैरिमैन्ट करना था । तो हमने पास ही के गाव के एक सिविलियन को पकडा और उसके शरीर को पूरी तरह बाधकर एक मेज़ पर लिटा दिया। फिर हमने एक पहाड़ी चूहा पकड़ा और उस चूहे को उस आदमी के पेट पर रखकर उसे एक कटोरे से ढंक कर कटोरे को भी वहा बाँध दिया। रीयली इन्ट्रेस्टिग । फिर? इसके बाद कटोरे पर आग रखकर कटोरे को गर्म किया। गर्मी पाकर पेट पर चूहे ने उछल कूद शुरू करदी । हमने कटोरे को और गर्म किया । चूहे को बाहर निकलने का मदिरा कर्नल 49 - मदिरा -- कर्नल मदिरा कर्नल रास्ता नहीं मिला | उमने पेट कुतरना शुरू कर दिया । हैम- गर्मी बढ़ाते रहे चूहा भीतर उस आदमी को शरीर कुतरता, रहा और अन्त मे कुतरता हुआ बगल से बाहर निकल गया। उस समय उस आदमी की जो हालत थी बस उसे देखकर मजा आ गया | इट वाज सो इन्ट्रेस्टिग कि मैं तुम्हे बता नहीं सकता। (ताली बजाते हुये) वाह-वाह । ब्यूटीफुल । मजा आ गया कर्नल रीयली यू आर ग्रेट । थैक्यू मदिरा । हाँ तो मैं अपनी बात पर फिर लौटता हूँ। कौन-सी बात? वही जो मैंने आपको वहा बतायी थी कि अगर आप मेरा साथ दे तो मैं दुनिया की महारानी का ताज आपके सर पर सजा हूँ। लेकिन कर्नल यह कैसे सम्भव है ? दुनियाँ थ्री बिग डब्ल्यूज़ के बारे मे ही अब तक ज्यादा जानती है । चौथे बिग डब्ल्यू के बारे मे नहीं जो इन तीनो से ज्यादा खतरनाक है । वह मेरी मुटठी मे है और वह चौथा बिग डब्ल्यू है वार । युद्ध । मेरी मुटठी में युद्ध मदिरा जो कभी भी, कहीं भी, किसी पर थोपा जा सकता मदिरा कर्नल है मदिरा कर्नल (कुबेर और कुटिल दोनो पीछे से प्रवेश करते है । दूरबीन कुटिल के हाथो मे है । वह मदिरा को देख रहा है । दोनो धीरे-धीरे आगे बढ़ते है ।) लेकिन दुनियाँ युद्ध की नहीं सुन्दरता की पुजारी है। इसीलिये तो मैं भी तुम्हारा पुजारी बन गया हूँ । यह दुनियाँ भी तुम्हारी पुजारी होगी और मेरी दास । मदिरा, एक बार, केवल एक बार सूरज की रोशनी को धुएँ के बादल से ढंक देने मे मेरी मदद करो, फिर देखो, रोशनी भी हमारी कैद में होगी । नहीं होगी । और धुआ भी नहीं उठेगा | क्योकि माचिस तुम्हारे पास नहीं, मेरे पास है । . कुबेर - 50 वर्नल कुबेर - कर्नल - ओह, मिस्टर कुबेर बात मत करो मुझसे 1 मी तुम्हे आतिशबाजी के लिये भेजा था। मगर तुम तो सुद जगीर-चक्र या कर इसके चारो ओर गचो लगे । याद रक्यो कलि । अगर माचिस नहीं जली तो हम सब अधेरे मे डूब जायेगे । दीवाला निकल जायेगा मेरा । Tहीं किलेगा कुरेर । जब तक काल है, तुम्हारे कारखाने चलते रहेगे । इधर आओ, मैं समझाता हूँ । एक्सक्यूज मी मदिरा। (कलि कुबेर को लेकर मच के दाहिने कोने की ओर जाता है । दोनो महत्त्वपूर्ण बाते करने का मूकाभिनय करते है ।) (इधर कुटिल दूरवीन से मदिरा को देखता हुआ उसके करीब आता है । वाह-वाह-वाह | क्या बात है? ए । इस तरह क्या देख रहे हो तुम आपकी छवि निहार रहा हूँ ओह थेक्यू । कैसी लगती हूँ मैं ? - - ? कुटिल मदिरा कुटिल मदिरा कुटिल मदिरा बुटिल मदिरा कुटिल अनिंद्य सुन्दर ? मदिरा कुटिल मेरी आँखे ? बारूद के भण्डार। (हसती है 1) अच्छा । मेरी बिखरी जुल्फे ? वाह । जैसे रात के अन्धेरे मे पैराशूट से उतर कर मैनिक कधी पर बिखर गये हो। ब्यूटीफुल । और मेरी चाल जैसे कोई टैंक बस्तियो को रौंदता हुआ आगे बढ़ता चला जा रहो हो। रीयली ? ऐसी हूँ मैं? जी हा, पूरी फौजी छावनी । (मदिरा जोर से हँसती है । कर्नल का ध्यान टूटता है । वह मदिरा के तरफ देखता है और दौडकर उसके पास आता मदिरा कुटिल 51 कर्नल मदिरा कर्नल कुटिल कर्नल कुबेर क्या हुआ मदिरा? (हसते हुये) यह यह कह रहा है ए, कौन हो तुम ? यहाँ क्या कर रहे हो ? आपकी फ़ौजी छावनी मे जासूसी कर रहा हूँ। शट-अप । मैं तुम्हे (आते हुए) रुको कर्नल । यह तो अपने ही दोस्त है । कुटिल। - कर्नल कुबेर कुटिल ? कर्नल कुटिल कर्नल मदिरा कुबेर हाँ शतरज के बहुत अच्छे खिलाडी है | चाल चलना और मोहरे बिठाना इन्हे खूब आता है । हमारे लिये बहुत काम के साबित होगे। ओह । सौरी मिस्टर कुटिल । मैं आपको जानता नहीं था। जाते तो हम अब भी एक दूसरे को नहीं है | जिस दिन जा जायेगे या पहचान जायेगे तो फिर किसी फौजी छावनी के पास खडे नहीं होगे। (सब हसते हैं ।) मदिरा | मेरे दोस्त से मिलो । यह है मिस्टर कुबेर । कई कारखानो के मालिक । इनका और मेरा काया और छाया का साथ है। आपसे मिलकर खुशी हुई मिस्टर कुबेर । खुशी मुझे भी बहुत है | कर्नल ने अभी मुझे सब कुछ समझा दिया है । अब सिकन्दर का सपना अपना होगा। जरूर होगा कुबेर | हम एक नहीं, चार है । चार बिग डन्न्यज । अब दुनियाँ हमारी मुट्ठी मे होगी | धरती पर हमारा साम्राज्य होगा। ठहरिये, ठहरिये । एक गडबड होगी | साम्राज्य तो एक का ही होगा । फिर तीन क्या करेगे ? तीन ? हाँ तीनो का भी साम्राज्य होगा। कैसे? बलो, हम धरती के टुकड़े कर लेते हैं । लेकिन कौन, किस टुकडे का मालिक होगा? कर्नल कुटिल - कर्नल कुटिल कुबेर कुटिल - 52 . कर्नल कुटिल कर्नल कुटिल - कुबेर कुटित कर्नल नो प्रॉब्लम । हम कितने है ? चार । और दिशाएँ कितनी है ? चार । हम एक-एक दिशा बाँट लेते हैं। लेकिन कौन-सी दिशा किसकी होगी? तुम बडे वाचाल हो और उत्तर देने में माहिर । इसलिये उत्तर दिशा तुम्हारी हुई। तो फिर यह पूरब मुझे दे दो । सूरज हमेशा पूरब से उगता है और रोशनी सदा पूरब से आती है । मैं अब उसे नहीं कुबेर आने दूगा । कर्नल कुटिल कुबेर A कर्नल . मदिरा कुटिल मदिरा कर्नल ठीक है । बाकी दो दिशाओ का फैसला में और मदिरा कर लेगे। जब बाँट ही रहे हैं तो धरती के साथ-साथ आकाश को भी क्यो नहीं बाँटले । नहीं । आकाश बँट गया तो फिर अन्तरिक्ष भी बाँटना पडेगा। इसलिये अभी आकाश रहने दो । ठीक है । तो आइये इस खुशी के मौके पर हम जश्न मनाए---मनोरजन करे । रीयली मैं भी बोर हो रही हूँ । लेकिन कौन करेगा हमारा मनोरजन? अगर आप चाहे तो एक शतरज की बाजी हो जाये ? ओह नो । इट्स बोरिंग । एक बात का ध्यान रखना कुटिल । हमारे लिये यही अच्छा है कि हम चारो कभी शतरज नहीं खले । यहा कोई नज़र भी तो नहीं आ रहा है। तो फिर कौन करेगा हमारा मनोरजन ? (सामने दर्शको के बीच से फटेहाल एक व्यक्ति गप की ओर आता है।) अरे, यह कौन आ रहा है इधर (चारो उसी ओर देखते है ।) - कुबेर मदिरा 2 दुर 53 कुटिल मदिरा कर्नल पहनावे से लगता है कोई जोकर है। जोकर ? यू मीन हँसाने वाला ? यस । मुझे तो उसकी यह हालत देखकर ही हँसी आ रही कुबेर कुटिल मदिरा कनल (हसता है |) देखो इसके शरीर पर तो पूरे कपड़े भी नहीं है । और पाव मे जूता भी नहीं है । इसका पेट भी पिचका हुआ है । इससे अच्छा जोकर हमको और कहाँ मिल सकता है ? (चारो सवाद बोलते हुए हँसते रहते है । तब तक मानव धीरे-धीरे दर्शको के बीच से मच पर पहुँच जाता है । मच पर पहुंचकर वह इन चारो को देखता है और फिर आगे बढ़ जाता है | चारो उसके पीछे व्यग्य कसते हुये आते हैं।) भूखा । नगा। मदिरा कर्नल कुटिल कुबेर मदिरा कर्नल कुटिल - हड्डियो का ढाँचा। जोकर । जानवर। लाचार। बेचारा। (मानव कोई उत्तर नहीं देता । वह धीरे-धीरे गम्भीर मुद्रा मे आगे बढ़ता रहता है। चारो व्यग्य कसना बन्द करके कुत्तो की तरह भाकना शुरू कर देते हैं । मानव मच के बीच मे बने स्थान पर जाकर बैठ जाता है । चारो चुप होकर एक दूसरे की तरफ देखते हैं ।) यह तो चुपचाप बैठ गया । अगर बैठ गया है तो उठाया भी जा सकता है | मारू साले को, अपने बूट की एक ठोकर ? या जाकर मैं इसे घायल कर दूं अभी नहीं । पहले हम इससे बात करते हैं कि यह कौन है और कहा से आया है ? कुबेर कुटिल कर्नल मदिरा कुटिल - ?

- -- कुबेर मानव मदिरा कुटिल मानव बर्नल मानव कर्नल मानव पुटित मानव मदिरा सुनेर - (चारो मानव के पास जाकर उसे घेर लेते हैं ।) ए । कौन हो तुम? तुम लोगो को क्या लग रहा हूँ? जोकर और जानवर। क्या नाम है तुम्हारा ? जोकर और जानवर का भी कोई नाम होता है? हाँ, होता है । बताओ क्या नाम है 7 तुम्हारा जाना ही चाहते हो तो मेरा नाम "मारा। माव? कहाँ से आ रहे हो -- पूरब से। भाव दुटिन ललि हमारा गतलब है तुम रहते कहाँ हो ? यह पूछो मैं कहाँ नहीं रहता ? गुझे तो कोई पागल लगता है। ए, उठो ! उठो । हाप से याँह को पकड़ते हुए देखते क्याशे, पढ़े हो जाओ। क्यो? इसलिये कि तुम्हे पाचकर हमारा मोरंजा कराई। देश क्या रहे, पढ़े हो जाओ। में बार बार उठ सकता। तुम् उठना होगा । उठो और गायो । कार,ह उठ मक्य | TT सकता । कईसे भूया। और चिता मत करो। पास बहुत युए। - - रुरेर मानर और मानव - पुटिन हा परवईवारणा, सेानित मानर 4 और कुटिल मानव कुबेर मानद बर्नल -- मदिरा मानव - मदिरा कुटिल तुम्हे फसल से क्या मतलब ? तुम्हे तो कुछ खाने को चाहिए न? हाँ हाँ हाँ- कुछ गोलियों है । पाओगे? गोलियाँ ? हाँ बोलो, बन्दूक से साओगे या पिस्तौल से ? (गााव हँसता है।) हसते क्यो हो? तुम लोग अभी मुझको जोकर कह रहे थे न ? अरे जोकर तो तुम लोग हो । मसखरे कहीं के । (मााव हँसते हुए लेट जाता है । चारो उसकी ओर देखते रहते है । प्रकाश मन्द होता है और फिर मानव के परटि उभरते है।) (चारो एक दूसरे की ओर देखते है 1) लो, यह तो सो गया। मेरी समझ में नहीं आता यह भूखे लोग इतने चैन से कैसे सो जाते है ? तुमने सुना नहीं, इस दो कौड़ी के आदमी ने हमारा अपमार किया है । हमको जोकर कहा है । मैं अभी इसका भेजा बाहर निकालता हूँ | (पिस्तौल निकालता है ।) ठहरो । शायद इसको इस बात का अहसास नहीं है कि हम लोग कितने ऊँचे और खतरनाक है । उफ 1 में तो बोर हो रही हूँ | तुम लोग आदगी होकर भी एक जानवर को नहीं नचा सकते ? होन्ट वरी मदिरा, इसे हमारे मनोरजन के लिये नाचना ही पड़ेगा। तो फिर कुछ ऐसा करो त, जिससे इसको सबक मिले और हमारा एन्टरटेन भी हो । ऐसा ही होना चाहिए। सुनो । यह कोई आसानी से काबू ग आने वाला इन्मान - कुबेर कर्नल कुटिल मदिरा कुटिल मदिरा कुबेर कुटिल 56

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कुबेर कुटिल - ? मानव चारो मानव चारो कुबरे कुटिल मदिरा कर्नल चारो - मानव - अरे, तुम इतने बड़े कहाँ हो ? जानते हो, जो पचपन तो बचपन। क्यो, हो गये न अब तो बच्चे ? (चारो हसते हैं ।) लेकिन यह, इतने सारे हथियार तुम्हारी वर्षगाँठ पर हम तुमको यह भेट दे रहे है । इतने हथियार? हाँ । बोलो, तुम्हे कौन-सा खिलौनापसन्द है. अपने दाये। बाए। ऊपर। नीचे। अच्छी तरह से देख लो। (मानव चारो ओर देखता है 1) मुझे यह सब पसन्द नहीं है | इनको देखने से ही मुझे दशहत होती है। (चारो हसते हैं 1) अब बोलो | हमारी ताल और लय पर नाच कर हमारा मनोरजन करोगेन? मैंने कहा न में नाच नहीं सकता । मेरे पाँवा में ताकत नहीं है । मैं भूखा हूँ। तुम्हारे सामने केक भी रक्खा है । केक? (केक की ओर देखता है ) हाँ, तुम्हारे जन्मदिन का केक । हाँ-हाँ-हाँ- (केक उठाकर खाने की कोशिश करता है ।) ५ को रोकते हुए) ओह नो-- यह तुम्हारे नहीं, हमारे लिये है। । केक लेकर खाती है। दूसरा टुकड़ा उठाता है तो कुटिल रोकता है । चारो -- - मानव - कुबेर मानव 58 नहीं है । इसलिये सबसे पहले हमको इसे डरा होगा। कुबेर तुम इसके चारो ओर अपने हथियारो का घेरा डाल दो ! कर्नल तुम मोर्चे पर जम जाओ, और मदिरा तुम इस बात का ध्यान रक्खो कि यह जागने न पाए, क्योकि इसके जागने से पहले ही हमको यह सब कर लेना होगा। (प्रकाश लुप्त होता है । संगीत उभरता है ।) (जब पुन प्रकाश फैलता है तो दिखाई देता है कि मानव के चारो ओर हथियारो का घेरा है । सामने साइक पर भी हथियारो की परछाइयाँ उभर रही है। मानव के सिर पर बडे-बड़े गुब्बारे लटक रहे है, जिन पर एटम लिखा हुआ है | सामने एक मेज़ पर एक केक रक्खा है और उस पर पाँच मोमबत्तिया जल रही है ।) सामने दर्शको की ओर पीठ किये एक तरफ कर्नल खडा है । दूसरी ओर कुबेर | मदिरा मानव के पाँवो की ओर खडी है और सिर के पास कुटिल खडा है । कुछ क्षणो पश्चात् मानव अगडाई लेकर उठता है ।) (चारो गाते हैं ।) चारो हैप्पी बर्थ डे टू यू हैप्पी बर्थ डे टू यू मानव हैप्पी बर्थ डे टू यू - सब क्या है? मानव मदिरा मानव कुटिल मैनी हैप्पी रिटर्न्स ऑफ दी डे (चारो तालियाँ बजाकर हँसते है ।) (हैरानी से) यह यह आज तुम्हारा जन्म दिन है । जन्म दिन, मेरा जम दिन ? हाँ । क्या हम तुम्हारा जन्म दिन नहीं मना सकते ? लेकिन मेरा जन्म दिन तो आज नहीं है और फिर इतने बडे का जन्म दिन में पचपन साल का हूँ। मानव 57 कुबेर कुटिल ? - v - मानव चारो मानव चारो कुबरे कुटिल मदिरा कर्नल चारो मानव - अरे, तुम इतो बडे कहाँ हो ? जानते हो, जो पचपन तो बचपन। क्यो, हो गये न अब तो बच्चे ? (चारो हसते हैं 1) लेकिन यह, इतने सारे हथियार तुम्हारी वर्षगाँठ पर हम तुमको यह भेट दे रहे हैं । इतने हथियार? हाँ । बोलो, तुम्हे कौन-सा खिलौना पसन्द है. अपने दाये बाए। ऊपर। नीचे । अच्छी तरह से देख लो। (मानव चारो ओर देखता ह 1) मुझे यह सब पसन्द नहीं है । इनको देखने से ही मुझे दशहत होती है। (चारो हप्तते हैं ) अब बोलो | हमारी ताल और लय पर नाच कर हमारा मनोरजन करोगे न मैने कहा न मैं नाच नहीं सकता। मेरे पाँवो मे ताकत नहीं है । मैं भूखा हूँ| तुम्हारे सामने केक भी रक्खा है | केक? (केक की ओर देखता है 1) हाँ, तुम्हारे जन्मदिन का केक | हाँ-~- हाँ-हाँ- (केक उठाकर खाने की कोशिश करता है 1) (मानव को रोकते हुए) ओह नो- यह तुम्हारे लिये नहीं, हमारे लिये है। (मदिरा केक लेकर खाती है ।) (मानव दूसरा टुकड़ा उगता है तो कुटिल रोकता है। चारो - ? मानव कुबेर मानव - कुटिल मानव मदिरा 58 कर्नल तीसरा उठाता है तो कुबेर और चौपे टुकड़े पर कल रोकता है ) यह हम खाएगे। (चारो इसते हुए केक खाते है | गाव देखता रहता अगर सब तुम्हीं लोग खा गये तो मैं क्या खाऊगा ? मानव चारो मानव हमारी जूठन । - जून क्यो? कुबेर - कुटिल - मदिरा कर्नल - कुबेर - इसलिये कि आज तुम बच्चे हो । और बच्चे जब किसी की जूठन चाटते हैं तो हमको बहुत अच्छा लगता है। जूठन का ढेर, बच्चो का झुड और पास ही कुत्ता की भी गौ । (चारो कुत्तो की तरह भौकते है ।) रीयली इट्स ए ग्रेट एन्टरटेन्मेन्ट | (चारो हसते हैं। लो मैं अपनी थोड़ी जूठन फेंकता है । जाओ चाट लो इसे । नहीं । तुम लोगो की जूठन खाने से मैं मरना बेहतर समझूगा। लेकिन तुम मरोगे भी कहाँ ? क्यो? अब हम तुम्हे मरने ही नहीं देगे। क्यो ? बदनामी से डरते हो? बदनामी? कैसी बदनामी तुम लोगो की बदनामी । आदमी को भूखा मार दोगे तो क्या बदनामी नहीं होगी? मानव कुटिल मानव कुबेर मानव कर्नल मदिरा मानव (चारो हसते हैं ।) 59

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ima मानव चारो मानव चारो मानव चारो जानता हूँ । ये तुम्हारे विनाश के बीज है । एक बार फिर सोच लो। सोचना तम्हे है । मैं सघर्ष के लिये तैयार हूँ । तो तुम नहीं मानोगे? नहीं नहीं नहीं । तो तुम्हारी जिद का जवाब है जेल ! (साइक पर जेल की सलाखे उभरती है। चारो ताली बजाते है । जगली वेशभूषा मे चार व्यक्ति भाले लिये "हो-हो-हो-" करते हुये प्रवेश करते हैं और मानव को घेर लेते हैं । सगीत उभरता है और प्रकाश लुप्त होता है।) (प्रकाश पुन फैलता है । मानव सामने लेटा हुआ है । भाला लिये व्यक्ति उसके चारो तरफ पहरा दे रहे है । पास ही एक कनस्तर रखा है ।बायीं ओर से दो व्यक्ति प्रवेश करते है । उनकी पीठ पर "पत्रकार" लिखा है । दोनो पहरा देते हुये जगली व्यक्तियो से छुपते-छुपाते हुये मानव के पास पहुँच जाते हैं ।) हमने सुना है आप कई दिनो से भूखे है । आपको भोजन नहीं दिया जा रहा है। क्या यह बात सही है ? (मानव किसी तरह चारपाई से उठकर) हाँ यह सत्य है। लेकिन प्रश्न भूख का नहीं मानवता का है । अन्याय और अतिक्रमण के विरुद्ध संघर्ष का है -और (पत्रकारो को देखकर चारो जगली व्यक्ति "हो-हो--- हो- हो" करते हुये कनस्तर पीटना शुरू कर देते है । मानव के केवल होठ हिलते दिखाई देते हैं, मगर शब्द सुनाई नहीं देते । तभी कुबेर कुटिल, कर्नल और मदिरा भी आ जाते है । पारो मानव के पीछे खडे होकर शोर के बीच बोलते है ।) हमसे न मानव को खतरा है, न मानवता को। हम तो मानव को सुखी और तन्दुरुस्त देखता चाहते है। मानव की हत्या करने का हमारा कोई इरादा नहीं । हम तो शान्ति चाहते है। पत्रकार - मानव - कुबेर कुटिल कर्नल 61 मदिरा -- एक पत्रकार- दूपत्रकार कुबेर कुटिल कर्नल मदिरा एक पत्रकार- दू पत्रकार कुबेर कुटिल दोनो कर्नल दोनो मदिरा दोनो चारों दोनो - फिर भी यदि कहीं कोई गड़बड़ है तो हम वार्ता के लिये तैयार है। (चीख कर) फिर भी मानव परेशान क्यो है ? उसके चारो तरफ पहरा क्यो है ? पहरा मानव के खिलाफ नहीं है। पहरा तो मानवता की रक्षा के लिये है। मानवता को खतरा हमसे नहीं है, बल्कि मानव से है। मानव से मानवता को बचाने के लिये ही यह पहरा है। हमारी समझ में नहीं आ रहा है आप लोग क्या कह रहे है ? हमे मानव को सुनने दीजिये। जरुर । हम स्वय आपको मानव से मिलवायेगे । किन्तु शाम को कॉकटेल पार्टी के बाद । कॉकटेल? हाँ । उसके बाद फाइव स्टार होटल में आपका डिनर होगा। फाइव स्टार मे डिनर ? हाँ । उसके बाद एक अच्छी-सी गिफ्ट भी होगी। गिफ्ट भी? हाँ । कॉकटेल-~-डिनर-गिफ्ट । रिपोर्ट क्या देनी है? (कर्नल, कुबेर, कुटिल और मदिरा चारो हसते है।) "हो-हो-हो-हो" व कनस्तर का शोर बढ़ जाता है । मानव बोलने का प्रयत्न करता रहता है । उसके होठ हिलते रहते है । मगर शब्द सुनाई नहीं देते । प्रकाश धीरे-धीरे लुप्त होता है - - -- -- (पुन प्रकाश फैलता है तो दिखाई देता है कि कुबैर, कुटिल, कर्नल और मदिरा कुछ सोचने की मुद्रा में इधर-उधर टहल रहे हैं । मानव लेटा है ।) उसके चेहरे पर आक्रोश है। है हड्डियो का ढाचा, फिर भी जोश है । कर्नल कुटिल 62 कुबेर लगता है, उसके अन्दर ज्वाला है। सिर्फ बाहर से खामोश कर्नल कुटिल मदिरा कुटिल कुबेर इसीलिये कहता हूँ, इससे पहले कि उसके भीतर की ज्वाला बाहर निकले, उसे शान्त कर देना चाहिये । हमारे पहरे मे वह मर तो वैसे ही जायेगा । लेकिन उसके मरने से पहले उसका एक राज मालूम करना होगा। राज? कौन-सा राज? यही कि आखिर उसके पास ऐसा क्या है जो इन हालात के बीच भी उसे जिन्दा रक्खे हुये है और हमसे संघर्ष करने की शक्ति देता है। तुमने एक बात महसूस की ? जब-जब हम उसके करीब गये है, तब-तब उसके बदन से एक अजीब-सी खुशबू एक महक उठती हुई महसूस होती है । हाँ, मैंने भी महसूस किया है । और मैंने भी। आखिर वह खुशबू है क्या ? शायद यही वह राज है जो उसे हमसे टकराने की हिम्मत देता है । हो सकता है वह कोई बढ़िया सैन्ट इस्तेमाल करता हो। डोन्ट बी सिली | इस हालत में उसके पास इत्र कहाँ से - कर्नल मदिरा कुटिल मदिरा कर्नल आएगा? - मदिरा कुटिल कुबेर कर्नल दैन वाट इज दैट? यही तो हमको जानना है । और फिर उसे, उससे छीन लेना है । तो फिर देर किस बात की है ? आओ अभी मालूम करते - चारों (चारो मानव के करीब जाकर उसको घेर लेते है । मानव उनको देखकर खड़ा हो जाता है ।) तुम्ही मानव हो न? (व्यग्य पूछते है ) मानव तो तुम लोग भी हो । लेकिन हम तुम्हारे जैसे नहीं । मानव चारो 63 - मानव चारो मानव - - - मृत्यु १ चारों मानव चारो मानव चारो मानव चारो मानव चारों कुबेर कुटिल मदिरा कर्नल चारों मानव हाँ । इसीलिये दानव हो । हमारे और तुम्हारे बीच बहुत अन्तर है । अगर नहीं होता तो इस धरती पर सघर्ष ही क्यो होता? (मानव उठकर आगे बढ़ता है । कल तक तो तुम उठ भी नहीं सकते थे आज चलने लगे ? हा, संघर्ष जो छिड़ गया है। डर नहीं लग रहा तुम्हे मृत्यु से ? मैं नहीं जानता डर क्या होता है ? और मैंने गीता पढ़ी है, इसलिये जानता हूँ कि मृत्यु क्या है । और इसके लिये तुम तैयार हो ? तैयार तो तुम जैसे लोगो को भी रहना चाहिये । नहीं । हार हमारी नहीं होगी। हमारे पास हथियारो का भण्डार है। राजनीति का चक्रव्यूह है। कुटिलता की चाल है। और तुम पर लादने के लिये युद्ध है । और तुम, इन सबके सामने निर्बल और अकैले हो । फिर तुम्हे किस बात की प्रतीक्षा है ? एक राज जानने की। राज़ ? कौनसा राज़? तुम्हारे पास ऐसा क्या है, जो इन सबके बीच तुम्हे चैन से सोने देता है। (मानव हँसकर आगे बढ़ता है।) बोलो, क्या है यह? मेरे जैसे मानव के पास तो केवल मानवता है। नहीं । एक खुशबू है जो इत्र से भी ज्यादा मीठी है । वह क्या है ? मैं कोई इत्र इस्तेमाल नहीं करता। तो फिर तुम्हारे बदन से जो महक उठती है वह क्या है? बदन से? मानव कुटिल कर्नल मानव कुबेर मानव कुटिल मानव - 64 चारो मानव चारो मानव चारो मानव चारो ? मानव चारो मानव - । 1 चारो मानव चारो मानव चारो हाँ । वह ? अरे वह तो मेरे परिश्रम और पसीने की महक है। सच कहते हो? हाँ । मैं झूठ नहीं बोलता। हूँ | तो फिर हमको तुम्हारा वही परिश्रम और पसीना चाहिये। लेकिन वह तो तुम्हारे पास भी है । हमारे पास हाँ । लेकिन तुमने उस महक को कभी महसूस ही नहीं किया । क्योकि तुमने तो हमेशा दूसरो का खून बहाया है, अपना पसीना नहीं। खून तो हम तुम्हारा भी बहा देगे । लेकिन तुम्हारा पसीना लेकर । मेरा परिश्रम और पसीना मेरी पूजी है । मैं उस पर तुम्हारा अधिकार नहीं होने दूगा हमको छीनना भी आता है। कोशिश करके देख लो ! यह तुम्हारा आखिरी फैसला है ? हाँ। ठीक है । हमारा आखिरी फैसला भी यही है कि तुम्हारे परिश्रम और पसीने पर अब हमारा अधिकार होगा । (सगीत उभरता है और प्रकाश लुप्त होता है ।) (प्रकाश पुन फैलता है । मच के दाहिी कोने में कर्नल, कुबेर, कुटिल व मदिरा कोधित मुद्रा में बैठे सोच रहे हैं। अचानक कर्नल खडा होता है 1) उसने फिर हमारी इन्सैल्ट की है। जब तक उसके पास परिश्रम की पूजी है, वह इसी तरह हमारा अपमान करता रहेगा। इस पूजी पर अब हमारा अधिकार होना चाहिये । और उसकी महक को उसके बदन से अलग कर देना चाहिये। लेकिन उसके जिन्दा रहते हुये यह होगा कैसे ? कर्नल कुटिल कुबेर मदिरा मदिरा 65 कुटिल 1 मैं बताता हूँ | तुम लोगो ने मशहूर इत्र शैनल तीन का नाम सुना है? - सुना है। कुबेर मदिरा कुटिल तीनो कुटिल - - कुबेर कर्नल और मै तो उसे इस्तमाल भी करती हूँ | आप लोग जानते है, वह इत्र किस तरह निकाला जाता है? नहीं। मैं बताता हूँ | यह इत्र अफ्रीका मे पायी जाने वाली स्वेिट बिल्ली से निकाला जाता है। स्विट बिल्ली के सिर को स्टील के दाँतो वाले एक पिंजरे में जकड़ कर उस पर कोड़े बरसाये जाते है । इस जकड़न और मार से बिल्ली पागल हो जाती है । फिर एक व्यक्ति उसकी टाग और पूछ पकड कर पिंजरे से बाहर खींचता है तो दूसरा व्यक्ति एक चाकू से उसकी एक ग्रन्थी जिसमे इस यातना से सुगन्ध भर जाती है, मे चीरा लगाता है और बिल्ली के मरने से पहले सारी सुगन्ध बाहर निकाल लेता है । बिल्ली को जितनी यातना दी जाती है उतनी ही ज्यादा सुगन्ध इकट्ठी होती जाती है । तो तुम्हारा मतलब है कि हम भी हाँ, हम भी मानव से उसके पसीने की सुगन्ध इसी तरह अलग कर देगे। और फिर उसको खत्म कर देगे। मैं एक ही गोली मे उमका काम तमाम कर दूगा। नहीं, तुम अकेले उसे नहीं मार सकते । उसने हम चारो का अपमान किया है । इसलिये हम चारो उस पर वार करेंगे। और अपने-अपने तरीके से उसे मारेगे । ठीक है । इससे अच्छा एन्टरटेन्मेन्ट और होगा भी क्या? हम मानव के शरीर को चार हिस्सो मे बाट लेते हैं । आप लोग अपनी-अपनी पसन्द का हिस्सा बताइये। लेडीज फर्स्ट । मुझे कलेजी बहुत पसन्द है । मुझे उसका कलेजा चाहिये । एण्ड आई लाइक भेजा ! मुझे उसका सिर चाहिये। मैं उसके हाथ तोड़ दूगा। - मदिरा कर्नल कुबेर कुटिल मदिरा कर्नल कुटिल कर्नल मदिरा कुटिल कुबेर 66 कर्नल तो फिर उसके पाँव मेरे हुये । मैं उसे भागने नहीं दूगा} (सगीत उभरता है । प्रकाश लुप्त होता है ।) चारी - मानव जब प्रकाश पुन फैलता है तो दिखाई देता है कि मानव पर एक जाल है ( उसका सिर काँटेदार तारो से जकडा है और वह चार रस्सियो से बधा है 1 गले की रस्सी का दूसरा सिरा मदिरा के हाथ में, पेट पर बधी रस्सी का सिरा कुबेर के हाथ मे, हाथो पर बधी रस्सी का सिरा कुटिल के हाथ में और पावो पर बधी रस्सी का सिरा कर्नल के हाथ मे है । इनके चारो ओर जगली लोग "हो-हो-हो-" करके नाच रहे है । मानव तडप रहा है और कुबेर, कुटिल, मदिरा और कर्नल हँस रहे है। अपना परिश्रम और पसीना हमको दे दे मानव । नहीं। नहीं। नहीं नहीं नहीं। (चारो उसे रस्सी खींच कर गिरा देते है और उस पर कोड़े बरसाते है और हँसते रहते है।) मानव दर्द से चीखता है । चारो जगली व्यक्ति "हो हो" करके चारो ओर नाचते रहते हैं। कर्नल मानव के सिर के बाल पकड़ कर उसका चेहरा ऊपर उठाता है। चारो उसके चेहरे के पास आते है) हम तुझे एक बार फिर कहते हैं मानव, सू अपना परिश्रम और पसीना हमको दे दे। नहीं-कभी नहीं दूगा (चारो फिर उस पर कोड़े बरसाते है । फिर कर्नल चाकू निकाल कर मानव के चेहरे को बाल पकड़ कर ऊपर उठाता है और उसे चाकू दिखाता है। चारो फिर पूछते मानव । 67 - चारों मानव मानव चारो मानव - कुबेर कुटिल यह हमारी आखिरी चेतावनी है मानव । तू अपना परिश्रम और पसीना हमको दे दे । (मानव के चेहरे से खून टपकता है । वह धीमी आवाज़ में बुदबुदाता है । फिर उसकी धीमी आवाज़ सुनाई देती है ।) मैं-मैं-मैं-- तैयार हूँ । (चारो "ह-हे-है" कह कर चीखते है ।) लेकिन मैं एक बात जानना चाहता हूँ | वह क्या ? तुम लोग पहले यह तो तय कर लो कि मेरे परिथम ओर पसीने पर अधिकार किसका होगा? मेरा होगा । क्योकि मेरे पास अथाह दौलत है | हथियारो के कारखाने हैं । नहीं । यह सारी योजना मेरी थी इसलिये अधिकार मेरा होगा। इस पर अधिकार तुम दोनो का नहीं होगा | इस पर अधिकार उसका होगा जिसके हाथो मे ताकत होगी। मेरे हाथो मे ताकत भी है और मुट्ठी मे युद्ध। इसलिये इस पर मेरा अधिकार होगा। तुम सब मेरे दास हो और दास कभी स्वामी नहीं होते । इसलिये इस पर अधिकार मेरा होगा | नहीं, मेरा होगा। कहा न, मेरा होगा। मेरे हाथो मे ताकत है और मुट्ठी मे युद्ध इसलिये इस पर अधिकार मेरा होगा। (चारो झगहते हैं । हाथापाई होती है ।) हथियार । कर्नल - मदिरा - - कुबेर कुटिल कर्नल मदिरा -- - कुबेर कुटिल मदिरा कर्नल चाल । षडयन्त्र। युद्ध । (युद्ध का ध्वनि प्रभाव उभरता है । मच पर भाग-दौड होती है । चीख पुकार उभरती है । साइक पर भी 68

भाग-दौड़ उभरती है । प्रकाश इसी के अनुरूप बदलता
रहता है । मच के दोनो ओर से धुआँ उठता है । योडी देर
के बाद सब कुछ शान्त होता है । केवल धुंआ उठता रहता
है । मच पर लाशे बिखरी रहती है। इन्हीं लाशो के बीच
से मानव खून से लथपथ उठता है | उसके हाथ और पाव
मुडे हुये है । मुह टेढ़ा हो गया है। वह उठ कर धीरे धीरे
चलता हुआ साइक के पास पहुँचता है । साइक पर
प्रश्न-चिन्ह उभरता है । उसकी ओर देख कर मानद दर्शको
की ओर देखता रहता है।)
(पर्दा गिरता है।)
69

रोशनी और रक्तबीज

पात्र
-
1
2
3
4
5
6
रक्तबीज
जगत
जमाल
सेठ
व्यक्ति
दलदली
अम्मी
पिता
7
8
व
चार अन्य

. (मच पर स्वप्निल प्रकाश फैला हुआ है । पात्रो का चेहरा सष्ट नज़र नहीं आता । चार युवक मच पर इस तरह अलग-अलग स्थानो पर भटक रहे हैं, मानो उन्हें किसी की तलाश हो और कुछ दिखाई नहीं दे रहा हो | तभी मच पर बिजली चमकती है 1) रोशनी। हो रोशनी । मैंने भी देखी है । युवक एक - पुवक दो युवक तीन - युवक चार कहा है? चारों युवक - रक्तबीज अर्दली रक्तबीज चारो युवक रक्तबीज - एक युवक - रक्तबीज रोशनी । (फिर इधर-उधर देखते हैं । तभी काले कपडे पहने एक व्यक्ति प्रवेश करता है | उसके पीछे एक अर्दली है।) (चौककर) रोशनी ? कहाँ से आयी रोशनी ? पता नहीं हुजूर । मैंने तो आपके हुक्म के मुताबिक सूरज के आगे छतरी लगा दी थी। हूँ | तो फिर यह इनका भ्रम है | रोशनी । खामोश । कहाँ है रोशनी ? वह मेरी कोठी में कैद है । (विस्फोट की आवाज) यह आवाज विस्फोट की। (एक चीख उभरती है।) यह चीख ? हत्या की 1) (शोर उभरता है ।) यह शोर ? असन्तोष का । विस्फोट- हत्या- असतोष (रक्तबीज अट्टहास करता है ।) १ दूसरा युवक रक्तबीज तीसरा युवक रक्तबीज - चौथा युवक रक्तबीज चारो युवक 72 चारो युवक एक युवक दूसरा युवक - विस्फोट हत्या- असतोष-- अट्टहास । मेरा दम घुट रहा है। रात अधरी है। मुझे दूर जाना है। रोशनी -- तीसरा युवक चारो युवक हवा ? रक्तबीज एक युवक रक्तबीज दूसरा युवक तीसरा युवक रक्तबीज चारो युवक - रक्तबीज - चारों युवक - रक्तबीज बोझिल है। हम भटक रहे हैं । गिर रहे है। हमको सहारा दो। लो। यह किसका सहारा है ? हिंसा का। हिंसा--हिमा--हिंसा- नहीं । तो फिर भटकते रहो । अभावो मे जीते रहो । बोझिल हवा मे सास लेते रहो । आदर्शों को पढ़ते रहो। आदर्श सोटी और लंगोटी। तीन बन्दर बुरा मत कहो। बुरा मत सुनो। बुरा मत देखो। नहीं । जो अच्छा काम करते हैं, उन्हे बुरा कहो । जिन्हाने रोशनी को कैद किया है उन्हे सुनो । जिन्होने हवा को बोशिल बनाया है उन्हे देखो । एक युवक दूसरा युवक -- तीसरा युवक चौपा युवक 4 - एक युवक दूसरा युवक रक्तबीज . चारो युवक 7 रक्तबीज एक युवक रक्तबीज दूसरा युवक हौँ में । मुझे देखो मुझे सुनो । मैं तुम्हारे लिये रोशनी लाऊँगा। हिंसा से। मैं हवा को हल्का बनाऊँगा। हथियार से। 73 रक्तबीज तीसरा युवक रक्तबीज चारो युवक रक्तबीज - चारो युवक - रक्तबीज - चारो युवक मैं तुम्हे रास्ता दिखाऊँगा। रक्तभरा। तो तुम मुझे नहीं स्वीकारते । नहीं। मै तुम्हे विवश कर दूंगा। हम तुम्हारी हत्या कर देगे । इसका अर्थ है तुम मुझे ही दोहराओगे । मैं फिर भी नहीं मरूँगा। तुम अमर नहीं हो। मैं रक्तबीज हूँ | तुम्हारी हर राह मे मेरे बीज बिखरे पडे है। | तुम उनसे अपना दामन नहीं बचा सकते । तुम्हारे बीज? हाँ । कहीं हत्या के, कहीं भ्रष्टाचार के, कहीं असतोष के । आओ मेरे पास आओ । मैं तुम्हे नया जीवन दूँगा। एक स्वतत्र जीवन । लो, उठाओ हथियार । नहीं । मैं कहता हूँ, उठाओ हथियार । नहीं । रक्तबीज एक युवक रक्तबीज - चारो युवक रक्तबीज -- चारो युवक - रक्तबीज - उठाओ। चारो युवक - जमाल जगत (चीख-कर) नहीं ।। (क्षीण प्रकाश लुप्त होता है और मच के दाहिनी ओर उभरता है । एक तख्त पर जगत लेटा हुआ जोर से चीखता है "नहीं" 'तभी जमाल प्रवेश करता है ।) जगत- जगत--- क्या हुआ ? क्या नहीं ? जमाल-जमाल-फिर वही साया, वही स्वप्न वही छाया । वही-- जो हमको बार-बार झकझोरती है ? हाँ वही, जो न चैन से रहने देती है और न सोने देती है। मुझे लगता है जगत, इसका शिकजा हमारे चारो तरफ कसता जा रहा है। समझ मे नहीं आता हम क्या करे ? जमाल कभी-कभी लगता है, यह अजगर हमको लील जायेगा । जमाल जगत जमाल - जगत 74 जमाल - जगत जमाल - जगत - ऐसा मत कहो जगत । जब तुम इस तरह की बात करते हो तो मेरी हिम्मत जवाब दे जाती है । क्या सोचा था हमने गाँव से चलते समय? सोचा था शहर जाकर एक अच्छी-सी नौकरी करेंगे । तरक्की करेगे। लेकिन यहा आकर क्या मिला ? बेकारो की लम्बी सूची मे हमारा नाम और जुड गया । जगत, कही यह साया इसलिये तो हमको परेशान नहीं कर रहा, कि हम बेकार है ? क्या मालूम ? लेकिन अगर यह बात सत्य भी हो तो कौन दे रहा है हमको नौकरी ? हाँ, कहाँ है हमारी रोजी-रोटी का साधन ? कई बार जी करता है जला दूं इन सारी डिगरियो को। क्या अर्थ है जमाल - जगत जमाल इनका? जगत जमाल जगत पिताजी नहीं जमाल ऐसे नहीं सोचते । हो मकता है, कमजोरी हमारे भीतर ही कही हो । हम कहीं कमजोर है इसीलिये तो यह अजगर हमारी तरफ बढ़ रहा है। आज मुझे अपने पिताजी के शब्द याद आ रहे है । जानते हो, गाव से चलते समय उन्होने क्या कहा था ? (मच के मध्य प्रकाश उभरता है । एक बुजुर्ग व्यक्ति वहाँ कुछ सोचने की मुद्रा मे खड़ा है | फिर कहता है।) (पजावी लहजे मे) तुसी जाना चाहते हो तो जाओ । मैं तुम्हे नहीं रोकूगा । शहर जाकर तरक्की करना चाहते हो। करो । मगर पुत्तर इतना ध्यान रखना, बड़े शहरो की सडके आदमी को निगल जाती है । अगर कभी तुम्हे लगे कि पसीना बहाने के बावजूद भी तुम फौलाद नहीं बन पा रहे हो और पिघल रहे हो, तो फिर अपने गाव वापस आ जाना । तरक्की शहरो में ही नहीं, गाँवो में भी होती है । अगर तुम पिघल कर भी लौटोगे तो तुम्हारे खेत तुम्हे फिर से फौलाद बना देगे। 75 जमाल जगत - (मच के मध्य से प्रकाश लुप्त होकर पुन जगत व जमाल पर उभरता है ।) हूँ | इसका अर्थ कहीं यह तो नहीं लि हम पिघल रहे है? नहीं जमाल । हमको पिघलना नहीं है । न यह सडके हमको निगल सकती है और न यह अजगर हमको लील सकता है। हमको और कोशिश करनी है। हमारी हिम्मत ही इस समय हमारा सबसे बडा सहारा है । चलो जगत एक बार फिर अपने पाँवो की ताकत आजमाते जमाल - जगत-जमाल तीनो व्यक्ति जगत-जमाल जगत-जमाल तीनों व्यक्ति (प्रकाश लुप्त होता है | सगीत उभरता है । जब पुन प्रकाश उभरता है, तो तीन व्यक्ति योड़ी दूरी पर अलग-अलग स्थानो पर खड़े दिखाई देते है । जगत और जमाल दौडने का अभिनय करते हुये पहले व्यक्ति के सामने दौड़ते हुए कहते हैं ।) डिग्री है । मेहनत है । ईमानदारी है । नौकरी चाहिये । सिफारिश है ? रिश्वत है ? नहीं। (पहला व्यक्ति मुँह फेरकर खड़ा हो जाता है । जगत और जमाल दौडते हुये दूसरे व्यक्ति के सामने पहुँचते है।) डिग्री है । मेहनत है। ईमानदारी है। नौकरी चाहिये। किसके बेटे हो ? किसके भाई हो ? किसके भतीजे हो? किसी से कहलवा सकते हो ? नहीं (दूसरा व्यक्ति भी मुँह फेरकर खड़ा हो जाता है । जगत और जमाल तीसरे व्यक्ति के सामने जाते है। डिग्री है। मेहनत है। ईमानदारी है । नौकरी चाहिये । रक्षित रक्षित रक्षित हो? नहीं। (तीसरा व्यक्ति भी मुँह फेरकर खड़ा हो जाता है । कुछ समय तक जगत और जमाल दौडते हुये इन तीनो जगत-जमाल जगत-जमाल तीसरा व्यक्ति जगत-जमाल 76 जमाल रक्तबीज व्यक्तियो के चक्कर काटते है । सभी मवाद यथावत चलते रहते है | कुछ क्षणो पश्चात् तीनो व्यक्ति अपने सवाद चोलते हुये चले जाते हैं।) (गर के बायी और प्रकाश उभरता है, जहाँ रक्तबीज अट्टहाम कर रहा है ।रताचीज को देखकर जगत और जमाल ठहर जाते हैं । वही रक्तबीज का अट्टहास । वही क्रूरता । वहीं चुनौती । क्या ? ठहर क्यो गये ? क्या पाँवो की ताकत ने जवाब दे दिया? (जगत जगाल खामोश रहते है।) में नहीं कहता या ' तुम्हारी हर राह में मेरे वीज बिखरे पड हैं । तुम्हारे सामन सिर्फ एक ही रास्ता शेष है | मेरे पास आन का। यह तुम्हारा भ्रम है। ऐमा कभी नहीं होगा। है। इसका अर्थ है कि अभी शक्ति शेष है । जाओ और आजमाओ । मुझ तो तुम्हारे जेसे नौजवानो की हमेशा तलाश रहती है । जब चाहो मेरे पास चले आना | मैं तुम्हे वह सब कुछ दूगा, जिसकी इस उम्र में तुम्हे आवश्यकता रक्तबीज - -- जमाल जमाल रक्तबीज - जगत --- (हँसता हुआ चला जाता है ) लगता है, यह आसानी से हमारा पीछा नहीं छोड़ेगा । लेकिन हमारे न चाहते हुए भी इसका चेहरा हमारे सामो उभर क्यो आता है ? शायद हमारी परेशानिया ने हमारे दिमाग के किसी कोने में इसे बिठा दिया है। जानते हो, मेरी अम्मी बचपन म क्या कहा करती थी? (मर के मध्य प्रकाश उभरता है और एक औरत पर केन्द्रित हो जाता है । बेटे, शैतान दिमाग मे घर बहुत जल्दी बना लेता है। अगर कभी एसा हो तो अपने दिमारा की हर खिडकी खुली 77 - - जगत जमाल रखना, ताकि ताजी हवा और रोशनी हर तरफ से तुम्हारे दिमाग मे आ सके । जहाँ रोशनी और ताजी हवा होती है, शैतान वहाँ नहीं टिकता है | खुदा को सदा याद रखा । उसकी इबादत करना और उसके सज़दे मे सिर युकाकर गुजारिश करना कि ए परवर दिगार | मुझे रोशनी अता कर ताकि मैं इस शैतान को दूर भगा सकूँ। (प्रकाश मच के मध्य से लुप्त होकर जगत और जमाल पर उभरता है।) तुम्हारी अम्मी ठीक ही कहती थी। हमको अपने दिमारा की हर खिड़की को खुला रखना चाहिये । ओर उसके सजदे मै सिर झुकाकर उसकी इबादत करनी चाहिये। (जगत हाथ जोडकर खडा होता है और जमाल नमाज़ पढ़ने की मुद्रा मे बैठ जाता है । पीछे से अज़ान का स्वर उभरता है और उसके पश्चात् गुरुवाणी के स्वर उभरते हैं। प्रकाश धीरे-धीरे लुप्त होता है ।) (प्रकाश पुन फैलता है | एक व्यक्ति ताश का खेल दिखाने का अभिनय कर रहा है ।) आइये--- आइये-- गौर से देखिये । यह कोई हाथ की सफाई नहीं है और न जुआ का नेल । गौर से देखिये देखिये, जवानो मेरे दोनो हाथ पाली है। (जगत और जमाल आकर खड़े होते हैं। अच्छी तरह देख लीजिये । यह बच्चो और ब्दो का येल नहीं है । इसलिये बच्चे और ब्ढ़े चले जाए और जवानो को आगे आने दे। आइये-आइये हाँ तो मैं कह रहा था, मेरे दोनो हाथ खाली हैं | अब मै एक हाथ मे यह आग उगलो वाला खिलोना लेता हूँ | ध्यान रहे, यह जादू का खिलौना है | यह वह खिलौना है जो आपको मनचाही वस्तु देगा | देखिये, मेरे एक हाथ मे पिलीता है और दूसरा हाथ व्यक्ति व्यक्ति 78 जगत जमाल व्यक्ति है । देखिये, खिलौने के आते ही मेरे दूसरे हाथ मे क्या आ गये हैं ? अरे, ढेर सारे नोट? यह कैसे आ गये? यह सब इस खिलोने का कमाल है । आप भी इसे आज़माइये । यह आपको सब कुछ देगा । तुम्हारा खिलौना हमको कोई काम दिला सकता है ? - जगत व्यक्ति जमाल व्यक्ति काम ? - , - जगत जमाल व्यक्ति 7 जगत व्यक्ति जगत-जमाल व्यक्ति जगत व्यक्ति जमाल व्यक्ति हाँ, कोई नौकरी? आप एक बार यह खिलौना हाथ मे तो लीजिये । दुनियाँ आपकी नौकर होगी। हमको अलादीन का चिराग नहीं चाहिये । हमको केवल काम चाहिये | यह काम तो इतने दिला देगा कि आप लोगो के लिये चुनाव करना भी मुश्किल हो जायेगा । सच कह रहे हो ? हाँ । बिलकुल सच । तुम्हे काम चाहिये न हाँ। कितनी ज़रूरत है काम की ? ज़िन्दा रहने के लिये जितनी साँस की। तब ठीक है | आओ मेरे साथ । कहाँ ? काम के गोदाम मे | आ जाओ मेरे पीछे-पीछे। (जगत और जमाल व्यक्ति के पीछे चले जाते है । सगीत उभरता है और प्रकाश लुप्त होता है ।) (प्रकाश पुन उभरता है।) (कुछ लोग बैठे हुये चीज़ो मे मिलावट करने का अभिनय कर रहे हैं । सेठजी पास ही खड़े प्रसन्न हो रहे है।) शाबास-- शाबास-जरा और जल्दी-जल्दी हाथ चलाओ-अरे, तम्हारे हाथ क्यो काँप रहे है ? कौन-सा ईमानदारी का काम कर रहे हो जो डर रहे हो । - सेठजी (मिलावट करने की गति तेज हो जाती है ।) शाबास शाबास तुम आटे मे घीया भाटा। तुम मसाले मे लीद । तुम काली मिर्च मे पपीते के बीज | 7 सेठजी एक सेठ दो सेठजी तीन सेठजी चार सेठजी - 2 . तुम दूध मे पानी। - - व्यक्ति सेठजी जगत-जमाल सेठजी जगत-जमाल सेठजी नमस्ते-नमस्ते, 7 मिलाओ-मिलाओ खूब मिलाओ ऐसे ही तो हमारा राज जल्दी आयेगा । (व्यक्ति प्रवेश करता है !) सेठजी वह दोनो आ गये है। आ गये है, तो अन्दर भेज दो । (जगत व जमाल का प्रवेश) नमस्ते सेठजी । हाँ तो तुम बेकार है। है ? बेकार हो ? अरे आजकल इतने धन्धे हमने चला रक्खे है कि हमको आदमी नहीं मिलते और तुम बेकार हो? जी कौन-कौन से? अरे बताना रे इन्हे । दगा। मिलावट। हत्या। आगजनी । और तरस्करी बोलो कौन-सा धन्धा पसन्द है ? कोई नहीं। क्यो? इससे देश की समस्याएँ हल नहीं होगी | - जगत सेठजी एक दो तीन चार सेठ - - जमाल सठजी जगत - 80 सेठजी अरे, हम भी तो देश की सबसे बड़ी समस्या हल कर रहे जमाल सेठजी - जगत सेठजी 7 दलदली सेठजी दलदली सेठजी कोनसी? बढ़ती हुई जनसख्या की । हम जनसंख्या कम कर रहे है। अगर जासख्या कम हो गई, तो देश की सारी समस्याएँ अपने आप हल हो जायेगी । क्या समझे? जी यह सब हमारी समझ से परे है। एक बार मेरे साथ काम करना शुरू कर दो । सब अपने-आप समझ मे आ जायेगा । सोच लो सोच लो इतनी देर मे मैं एक और काम कर लूँ । अरे, दलदली, यहा आना। आया सेठजी जी कल कितनी नींव खोदी थी। जी इतनी। तो चलो, आज थोड़ी और खोद दे । (दोनो खोदने जैसा अभिनय करते है ।) (जगत जमाल आश्चर्य से देखते रहते है ।) बस दलदली । आज इतनी ही काझी है काम कर सेठजी-आप और दलदली यह क्या कर रहे थे। नींव खोखली कर रहे थे। किसकी? अरे सरकार की और किसकी ? क्यो सरकार को उखाड़ना जो है । किसलिये ताकि अपना राज आये और अपना धन्धा और आगे बढ़े। वह दिन कभी नहीं आयेगा । आयेगा-आयेगा जल्दी ही आयेगा बस थोड़ा खोदना और बाकी है क्यो दलदली? सेठजी जा दूसरा जगत सेठजी जमाल सेठजी जगत सेठजी जमाल सेठ - - - जगत सेठ 81 दलदली हा सेठजी सेठव कारिन्दे -- सेठ - और अपना राज चुपचाप नहीं ढोल ढमक्के से अयोगा। हाँ अब आयेगा अपना राज ढोल-ढमक्के से | मिल जायेगे सब सुख-साज ढोल-ढमक्के से | (सब झूम कर गाते है ।) देखा, कितना मज़ा आया ? जब इस कल्पना मे ही इतना मज़ा है तो इसके साकार होने के बाद कितना मज़ा आयेगा। याद मत दिलाइये सेठजी मै बेहोश हो जाऊगा। हाँ, तो तुम लोगो ने क्या तय किया ? जी हम कुछ तय नहीं कर पाये है । आपके करतब देखकर तो लगता है कि आपका राज अब जल्दी ही आने वाला है। इसीलिये तो कहता हूँ हमारे साथ मिलकर धन्धा करो दलदली सेठ जगत जमाल सेठ - - धन्धा ? जगत जमाल सेठ जगत जमाल सेठ कौनसा धन्धा? काला बाजारी तस्करी तस्करी? यह क्या होता है? मैं सब तुम्हे बत्ता दूगा तुम तो हम से हाथ मिला लो। मिलाओ अरे, झिझक क्यो रहे हो ? मिला लो । (सेठ जबरदस्ती दोनो से हाथ मिलाता है हाँ यह हुई न मर्दो वाली बात ! अरे दलदली देख क्या रहे हो ? नये मेहमानो को हमजोली बनाओ। (एक कारिन्दा ट्रे मे गिलास और शराब लाता है । सब मिलकर जगत और जमाल को जबरदस्ती शराब पिलाते है। प्रकाश मन्द पड़ता है । सगीत उभरता है । कुछ क्षणो के पश्चात् प्रकाश पुन फैल जाता है । सब लोग जगत--जमाल को घेरकर खडे है ।) हम कहा है ? (नशे मे दोनो लडखडाते है ।) जगत-जमाल - हमारी गिरफ्त में (गम्भीर स्वर में) क्या करो के लिये? दगा। - आगज़नी हत्या। और तस्करी के लिये । हमे? मरकार का तख्ता उलटना है। और ? कालाबाजारी करनी है । और ? लोगो को भडकाना है । आतक फैलाना है । हम सब कर दगे, पहले घर जाकर थोडा सो ले । नहीं, अगर हम सो गये तो इन्सानियत जाग जायेगे हमे अराजकता का ताण्डव करते रहना है । - - दलदली जगत सेठ दलदली सेठ दलदली जगत सेठ जमाल दलदली जगत सेठ जमाल दलदली सेठ दलदली जगत सेठ जमाल दलदली सेठ जगत दलदली जमाल सेठ जगत दलदली जमाल सेठ जमाल दलदली जाओ। - - कहाँ ? समुद्र के किनारे। क्यो? वहाँ लक्ष्मी है। उमे इस सूटकेस मे कैद करके लाना है। कैद करना है तो हथकड़ी दो | सूटकेस क्यो दे रहे हैं बको मत । जैसा हम कहते हैं, वैसा करो। अच्छा फिर क्या करना है? फिर पैसा बनाना है। - करो की चोरी करनी है। - फिर? चुनाव लड़ना है। फिर? फिर सिंहासन पर बैठना है। 83 जगत जमाल जगत जमाल - दलदली जगत सेठ - पालन तुम्हारा - दलदली सेठ दलदली जगत सेठ जमाल सेठ दलदली सेठ दलदली सेठ जगत दलदली जमाल सेठ जगत दलदली अरे सुन रहा है न? सुा रहा हूँ। इस मुर्गी ने तो सोने का अण्डा बहुत जल्दी दे दिया । तो क्यो न इसको खत्म करके सारे अण्डे एक साथ ही निकाल ले। क्या बकते हो? कुछ नहीं- कुछ नहीं- खवरदार- अब आगे से हमसे पूछे बगैर जुबान नहीं खोलोगे। शब्द हमारे होगे जुबारा तुम्हारी | आदेश हमारे हागे । समझे 7 समझ गये। तो लो-1 ये क्या है ? सूटकेस तस्करी के लिये। ये हथियार हिंसा के लिये ये नकली बहीखाते करो की चोरी के लिये । यह माचिस आगजनी के लिये। और यह मटका। इस मटके मे क्या है ? कीचड । यह किसलिये? सरकार पर उछालने के लिये । समझ गये | समझ गये। आज से हम तुम्हारा नया नाम रखते हैं । तुम हो तस्कर सम्राट् । और तुम हो कर-चोर, मिस्टर किग । तो चले ? हा जाओ, जनता का विश्वास तुम्हारे साथ है । चलो किग । - - - - - जमाल दलदली जगत जमाल चलो सम्राट् । 84 - जगत जमाल जगत दलदली सेठ दलदली - (जगत और जमाल कुछ कदम चलने के पश्चात् गिर जाते हैं । सभी लोग हँसते है 1) अरे, हम लोग गिर रहे है। और तुम हस रहे हो? यहा आओ | हमको उठाओ। नहीं । हम तुम्हारे पास नहीं आ सकते । हम सिर्फ दूर से तुम्हे सहारा देते रहेगे । आगे का सफर तुम्हे स्वय तय करना है । (सभी व्यक्ति "आगे का सफर तुम्हे स्वय तय करना हे' कहते हुये स्टेज से बाहर आ जाते हैं । प्रकाश जगत जमाल पर केन्द्रित रहता हे ।) अजीब लोग हैं। हाँ देखो न, इतना बोझ हमारे कधो पर लाद दिया । और फिर कहते हैं यह सफर तुम्ह ही तय करना है । इन्होने हमको कमजोर समझ लिया है । यह समझते हैं कि हम गिर गये हैं तो अब उठ नहीं सकते। हम उठ सकते हैं । सुन रहे हो तुम लोग । हम उठ सकते हैं । मत दो हमको महारा ( हम खुद उठ जायेगे। चल उठ जमाल। (दोनो उठने की कोशिश करते हैं किन्तु फिर गिर जाते जगत जमाल जगत जमाल जगत जमाल - - जगत जमाल जगत जमाल जगत जमाल अरे कोई है ? इधर आओ। हमको उठाओ। (प्रकाश मन्द पड़ता है । रक्तबीज का अट्टहास उभरता है।) वही रक्तपीज का अट्टहास । वही क्रूरता-वही चुनौती। जमाल हमको लील गया रे यह अजगर । हमको सहारा दो। (रक्तचीज का प्रवेश) मैं तो बहुत पहले से कह रहा हूँ तुम्हे देवल मरे सहारे की जरूरत है। उये। इधर आओ रक्तबीज 85 (रक्तबीज जगत और जमाल को उठाता है ।) जाओ, अब आगे बढ़ो। - कहा, रक्तबीज जगत-जमाल रक्तबीज जगत जमाल - जगत - जगत जमाल - जमाल उसी रास्ते पर जो तुम्हे दिखाया जा चुका है । हाँ हाँ हाँ सिंहासन का रास्ता सिंहासन का रास्ता और सोने का अण्डा देने वाली मुर्गी। चलो जगत । चलो जमाल । (रक्तवीज अट्टहास करता हुआ चला जाता है ।) (दोगो गाते हैं ।) मैं तस्कर सम्राट हूँ। और मैं हूँ मिस्टर किग । (कुछ कदम चलो के पश्चात् दोनो फिर गिर जाते है।) जगत हम तो फिर गिर गये | तो फिर दो आवाज । कोई न कोई हमको फिर उठाएगा । अरे कोई है ? हमको उठाओ | है कोई ? हम गिर गये है। उठाओ हमको | कोई है ? गिर गये है हम । (प्रकाश की किरण उभर कर साइक पर स्थिर हो जाती है और सिर्फ आवाज़ आती है 1) हाँ, तुम गिर गये हो । वैसे भी जिस रास्ते पर तुग जा ग्र हो वहाँ गिरने के, और है ही क्या ? ऐ अदब से बात करो हम सम्राट है । और हम मिस्टर किंग । उठाओ हमको । जगत जमाल जगत जमाल आवाज़ जगत जमाल आवाज़ उठो। जगत (जगत और जमाल इस तरह उठते हैं जैसे जो सहारा देकर उठा रहा हो ।) बैंक्यू लेकिा गुम कहाँ हाँ, यहाँ तो कोई नहीं फिर वि" जमाल हम नशे में है क्या धन्यवाद १ जमाल जगत 7 86 जमाल जगत जमाल जगत जमाल - - जगत जमाल जगत जमाल - - आवाज़ जगत-जमाल পার্বাল जगत आवाज़ जमाल आवाज़ जगत नहीं बिलकुल नहीं। तो फिर किसने सहारा दिया हमको ? हो सकता है, हम गिरे ही न हो। हाँ । क्या पता यह हमारा अहसास ही हो । हाँ-हाँ-हाँ हम गिरे ही नहीं थे । हम तो खडे है। तो फिर चलो । आगे चले आगे सिहासन है। सिंहासन । चलो । मैं तस्कर सम्राट हूँ | मैं हूँ मिस्टर किग। (जगत और जमाल आगे बढ़ते हैं, तभी आवाज़ फिर आती है 1) ठहरो । आगे मत बदो। क्यो? क्योकि यह राम्ता रसातल को जाता है। चुप । हमको माल्म है यह रास्ता सिहासन का रास्ता है। यह रास्ता नहीं भटकनो का बीहड है। तो? अगर इसमे भटक गये तो लौट नहीं पाओगे । हम भी तो उन अभावो मे लौटना नहीं चाहते है | चलो जमाल। चलो जगत। नहीं । मैं तुम्हे नहीं भटकने दूंगी | नहीं जाने दूंगी। (जगत और जमाल इस तरह का अभिनय करते है जैसे उन्हें किसी ने जकड लिया हो ।) अरे छोडो छोड़ो हमको। लेकिन लेकिन किसने जकड़ा है हमको ? यहाँ तो कोई नहीं। हाँ हाँ कोई नहीं है यहाँ । कहाँ हो तुम तुम मुझे बाहर तलाश कर रहे हो, जबकि मैं तुम्हारे भीतर हूँ। भीतर ? कौन हो तुम तुम्हारी चेतना। - जमाल आवाज़ जगत - जमाल - 2 जगत आवाज़ २ जगत आवाज़ 87

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जमाल जगत जमाल जगत हाँ-तुम ठीक कहते हो । पाँवो की ताक़त तो हमने खूब आज़माली | अब थोडी हाथो की ताकत भी आज़माले । ठीक है । आज से हम दिशा बदल देते हैं । चलो। ठहरो जगत | मेरी अम्मी कहा करती थीं, "खिडकिया खुली रखने से ताजी हवा आती है । रोशनी आती है, और रोशनी आने से अच्छे खयाल आते हैं । जब भी तुम्हारे जहन मे अच्छे खयाल आऐ तो खुदा को मत भूलना । उसके सजदे मे सिर झुकाकर उसका शुक्रिया जरूर अदा करना। तो आओ, हम अच्छे विचारो के लिये पहले उसका शुक्रिया अदा कर दे। (जगत हाथ जोड़कर खड़ा होता है और जमाल नमाज़ पढ़ने की मुद्रा मे बैठता है । अजान का स्वर उभरता है और उसके पश्चात् कीर्तन के स्वर उभरते हैं । कीर्तन के स्वर ज्योही धीमे होते हैं तो समाचार-वाचक के स्वर उभरते है ।) एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकार ऋण देने के लिये एक बड़ी राशि उपलब्ध कराएगी । इस राशि का सम्पूर्ण उपयोग वेरोजगार युवको को अपना स्वय का कारोबार शुरु करने के लिये किया जायेगा । युवको से अपील की गई है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएँ और (वाचक का स्वर सगीत मे विलीन हो जाता है । सगीत पर ही कारखाने की ध्वनि उभरती है । यह ध्वनि कुछ क्षणो तक चलती रहती है । प्रकाश पुन उभरकर मच के मध्य एक बोर्ड पर केन्द्रित हो जाता है । बोर्ड पर लिखा है "जगत जमाल इन्डस्ट्रीज" । जगत और जमाल प्रवेश समाचार वाचक करते है ।) जगत जमाल जगत अब हम बेकार नहीं है। लोन लेकर हमने अपना कारखाना लगाया है । यह खूब पनप रहा है। 90 नयाम Xins जपान जगत - अल्लाह तार का शुक्र है । भटकाव के बीहड़ से अब हम बाहर है। रक्तबीज का खौफ भी अब नहीं रहा । हाँ, रह-रहकर उसके कराहने की आवाजे कभी-कभी अवश्य सुनाई पड़ती है। जिन्दगी का एक तजुर्बा हासिल हुआ है हमको । जो अच्छा काम करते है, ईश्वर उसका फल अवश्य देता जमाल जगत जमाल - और जो बुरा काम करते है खुदा उन्हे कभी माफ नहीं करता। (मंच के दायीं ओर से सेठ दलदली व अन्य मिलावट करने वाले एक रस्सी से बंधे प्रवेश करते है । उनके आगे एक - हाय कगाको आरसी क्या, यह देखिये । (३) आरे में? श्रीलाभारा। काली मिर्च मे पपीते के बीज। साले मे m . मिलाते। सोस होता। सरसोशली. । को नहीं जाते। 91 दलदली जगत सेठ जगत . - सेठ जमाल दलदली जगत - अरे जा कौा रहा है ? हम तो बाइज्जत ले जाये जा रहे है। अच्छा एक बात बताइये । पूछिये । आपले जितो भी काले कारनामे किये उसका आपको कोई अफसोस नहीं? यह अफसोस क्या होता है ? मतलब आपकी इासानियत ने वह सब कैसे गवारा किया? यह इन्सानियत क्या होती है ? मतलब कभी आपने ये भी सोचा कि आप देश को कितना बड़ा नुकसान पहुंचा रहे है। यह देश क्या होता है ? क्या आप लोग अफसोस, इन्सानियत और देश का अर्थ नहीं जानते ? नहीं । तो फिर क्या जाते है ? आटे मे? घीया भाटा। काली मिर्च में? पपीते के बीज | मसाले में? लीद। - सेठ जमाल सेठ व दलदली जगत सेठ - एक व्यक्ति सेठ दूसरा व्यक्ति - - दूध मे। सेठ तीसरा व्यक्ति सेठ चौथा व्यक्ति जमाल सेठ दलदली सेठ दलदली सेठ दलदली सेठ पाती। अच्छा और क्या जाते है ? सुनो। - दाम ? बढ़ाने के लिये। नींव? खोखली करने के लिये। कीचड़ उछालने के लिये होता है। - 92 जमाल जगत जमाल जगत अल्लाह ताला का शुक है भटकाव के बीहड से अब हम बाहर है। रक्तबीज का खौफ भी अब नहीं रहा । हाँ, रह-रहकर उसके कराहने की आवाजे कभी-कभी अवश्य सुनाई पड़ती है। जिन्दगी का एक तजुर्बा हासिल हुआ है हमको । जो अच्छा काम करते हैं, ईश्वर उसका फल अवश्य देता जमाल - जगत जमाल - जगत सेठ और जो बुरा काम करते है खुदा उन्हे कभी माफ नहीं करता। (मच के दायीं ओर से सेठ दलदली व अन्य मिलावट करने वाले एक रस्सी से बधे प्रवेश करते हैं । उनके आगे एक सन्तरी है !) हाथ कगन को आरसी क्या, यह देखिये । (रोते हुये) आटे मे? घीया भाटा। काली मिर्च मे ? पपीते के बीज । मसाले मे? लीद। - एक व्यक्ति सेठ - दूसरा व्यक्ति सेठ तीसरा व्यक्ति सेठ चौथा व्यक्ति सेठ दूध मे? पानी। अगर न मिलाते ? तो ये हाल नहीं होता। एक व्यक्ति दाम? - - नहीं बढ़ाते । नींव खोखली? नहीं करते। सेठ दलदली सेठ दलदली सेठ दलदली सेठ जगल-जमाल - कीचड़? नहीं उछालते। - - तो? जेल में नहीं जाते। 91 दलदली - अरे जा कौन रहा है ? हम तो बाइज्जत ले जाये जा रहे जगत सेठ जगत - सेठ जमाल दलदली - जगत - सेठ जमाल अच्छा एक बात बताइये । पूछिये । आपने जितने भी काले कारनामे किये उसका आपको कोई अफसोस नहीं? यह अफसोस क्या होता है ? मतलब आपकी इनसानियत ने वह सब कैसे गवारा किया? यह इन्सानियत क्या होती है ? मतलब कभी आपने ये भी सोचा कि आप देश को कितना बड़ा नुकसान पहुंचा रहे है । यह देश क्या होता है ? क्या आप लोग अफसोस, इन्सानियत और देश का अर्थ नहीं जानते ? नहीं। तो फिर क्या जानते है ? आटे मे ? घीया भाटा। काली मिर्च मे? पपीते के बीज । मसाले में? लीद । सेठ व दलदली जगत सेठ - एक व्यक्ति सेठ दूसरा व्यक्ति - - दूध मे ? सेठ तीसरा व्यक्ति सेठ चौथा व्यक्ति जमाल सेठ दलदली सेठ दलदली सेठ दलदली सेठ पानी। अच्छा और क्या जानते है ? सुनो। - - दाम? - बढ़ाने के लिये। नींव? खोखली करने के लिये। कीचड ? उछालने के लिये होता है | 4- 92 जगत सेठ जमाल जगत - सेठ एक व्यक्ति सेठ +- दूसरा व्यक्ति जमाल जगत जमाल जगत वाह-वाह । फिर इसमें एक बात और जोड लीजिये। वह क्या ? जेल-- आप जैसे लोगो के लिये ही होती है। (जगत जमाल हँसते हैं ।) इनकी बात पर ध्यान मत दो-चलो, पुरानी यादे फिर ताज़ा करले-आटे में? घीया भाटा। काली मिर्च मे? पपीते के बीज । (कहते हुये मच से बाहर चले जाते है ।) (रक्तबीज के कराहने का स्वर उभरता है ।) यह कराह किसकी ? रक्तबीज की। क्या उसे भी पीडा होती है ? हा । जब-जब रोशनी उदय होती है, तब-तब वह इसी तरह कराहता है। (रक्तबीज का प्रवेश) (कराहते हुये) यह यह चकाचौंध कैसी ? यह यह क्या है ? रोशनी। कहाँ है? चारो ओर बिखरी है। यह मेरी कैद से बाहर कैसे आ गयी? चेतना के रास्ते से। यह यह मेरी आँखो मे चुभ रही है । मुझे कुछ भी दिखायी नहीं देता । मुझे मुझे सहारा दो। लो। (रघुपति राघव राजा राम की धुन उभरती है।) यह यह किसका सहारा है ? अहिंसा का । रक्तबीज जगत रक्तबीज जमाल रक्तबीज जगत रक्तबीज - - जमाल रक्तबीज जगत 93 रक्तबीज - रक्तबीज नहीं नहीं I में हिनाक रक्त-माँस-हिमा । हत्य (जगत और जमाल हँसते हैं। यह अट्टहास- अहिम- यह- हवा को क्या हु हवा अब हल्की हो गई है। विस्कोट? उत्पादन में हो रहा है। - - - हत्या - - जमाल रक्तवीज जगत रक्तबीज जमाल रक्तबीज जगत रक्तबीज जगत-जमाल रक्तबीज जगत रक्तबीज जमाल जगत रक्तबीज हिंसा की हो रही है असन्तोप? अमन में समा रह तो सब कुछ बदन स्वर भी। बदल। अच जगत रक्तबीज जमाल जगत जमाल जगत रक्तबीज जगत-जर- रक्तबीज जगत-7- रक्तवीर - जगत रक्तबीज जमाल जगत रक्तबीज - हाँ, तुम्हें परास्त करने का यही मूलमत्र है । किन्तु में परास्त नहीं हूँ। जीत तुम्हारी नहीं हुई है। हम तुम्हारी गिरफ्त से बाहर है। यही तो अफमोस है । किन्तु मैं फिर भी महान् हूँ । मेरा वैभव मेरे साथ है । मैं परास्त नहीं हो सकता-मैं परास्त नहीं हो सकता। (कहते हुये मच से बाहर हो जाता है ।) (जगत जमाल हॅसते है।) बेचारा रक्तबीज । भीतर से टूटा हुआ जगत जमाल जगत जमाल - जगत - जमाल जगत -- जमाल बाहर से अपने को जोड़ने का प्रयत्न कर रहा है । ऐ खुदावन्द । ऐसे लोगो को रोशनी अता कर । इन्हे माफ कर दो प्रभा । क्योकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे है ? इन्हे अन्धकार से बाहर निकालो प्रभो । इन्हे रोशनी अता कर खुदावन्द-रोशनी अता कर । (जगत प्रार्थना करने की मुद्रा मे ओर जमाल नमाज़ पढ़ने की मुद्रा मे बैठ जाता है | साइक पर रोशनी की किरण उभर जाती है । गूंजते हुये स्वरो मे श्लोक उभरता है ।) असतो मा सद् गमय् मृत्योर्मा अमृतम्गमय तममोर्मा ज्योर्तिगमय (पर्दा गिरता है)

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मदन शर्मा
नाटक के क्षेत्र में सुपरिचित नाम ।
प्रापके नाटक देश के सभी भागों में मचित
पुरस्कृत एवं अनुवादित ।
दूरदर्शन व प्राकाशवाणी से अखिल
भारतीय स्तर पर प्रसारित।
नाटकों के लिए दो बार (1975 व 1990)
प्राकाशवाणी पुरस्कार से सम्मानित ।
देश की सभी प्रमुख पत्र पत्रिकामो में
प्रापकी रचनाएँ निरन्तर प्रकाशित ।
सम्प्रति कार्यक्रम अधिकारी
प्राकाशवाणी, जयपुर

Prashna Chinha

Author
Madanlal Sharma
Title
Prashna Chinha
File name
Prashna Chinha
Text
OCR done
Citation
1960
Published
2011/03
Publisher
Rajasthan Sahitya Akadmi Udaipur
Language
Sanskrit
Pages
104
Library
Shree Jubilee Naagari Bhandar Bikaner
Classification
Literature
DLI number
551195
Barcode
4990010031961.00
Scanning centre
C-DAK, Kolkata
Digital publisher
Digital Library Of India
VMLT id
ybYd2IPXTEt
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