Bhartiya Vidya Mandir Shoudh Pratisthan,bikaner
Ek Kamre Ki Kahani
Front matter
No text on this page.
एक कमरे की
कहानी
सयक
यादवेन्द्र शर्मा 'पद्र'
Oporror Gas7270
मपिरार-मार दाग मुर्गा
प्रमाण - प्रशासन
कार
शितm -१६नितीगरिमार्गसिमी-
मुम्म
मुर-मुचमा करारा
पूनम प्रग
पोरनी चीफ रिनी
EK KAAMRO KI KAHANI INover by CHANDRA
Price RC3:00
प्रकाशकीय
भगरत्न प्रकापनामापार एक दिम मचान परस्पान
बपि मारपीरमादि पनि साहित्यकार थी पारग पर्मा पर
केपन पर बन पया। पी पद ने दिग्दी में म माहिरप -
गुरम करक रामस्थान का मान बहाया है और उनकी पु
गुमराती मराठी मिन्नी नपा में मनूपारित प्रकाशित मिों में
रापमा काममा पारगाम्बित किया।
हमारीबोर मे उसी प्रषिक पपिनियां शाशित रमे
की पेप्टा रहेगी पोर मय प्रागों द्वारा पपी उनकी पृम भी
बाप यहाँ से महराता से प्राण र मरेंगे।
म प्रकामन भबमा पर हम पर बोले पोषानेरवामी
भारमीपरनो विरार मानि (बीरानेर) मोर मामो (ल्तिी)
मामारीदिनीने मातरम मापार रस और मानी
पोरनमें फिमिमगर रंग मरे।
एबार में परिताप सेन रावस्पानामोर प्रगामी
मोमो को पम्पबार तीहूं बियॉन पर की पुग्म पप्रिम
गरोदर मुमे बस दिया।
पोतिरेपी महापा
प्राम्पिन
हमारे यहां से प्रमाणित बीबी भय सिपा
.
एकतारीमो.
एमपतानजम्म
तान्त्रिी
पहानियाँ
(सपा)
में इतना ही कहूंगा
एक कमरे की कहानी-नवीन उपम्याम । पानक रिस्ती का
एक कमरा
बाप स मा पम्यास में बार के बरसते बीमम पौर
विषमतावों से गिरे इसानों की एक सनी कहानी पापे । पमा
पानिपत बहुत ही मत-समम पर किया है पर गुप ऐसे पपाई
पिन पर पतारमक पापरप नहींगला गा सकता।
मायके प्राणन पर मारल प्रकाशन रेपन सभी सहयोगियों
पापामारी गिगहोंने मेरे विचारों को मूर्त रूप दिया ।
पाठक अपनी सम्मति भेगमे।
मारण पनि
माने की होती
बीपर
No text on this page.
बमर तुम्हारा स्तर वही है जो पीरन का
है पर तुम्हारी परपना ऐ नमूनों की
सना नहीं कर सरती को बीवन में मौजूर
, रहते हुए भी पसे सुपारने लिए
पापापक है तब तुम्हाराविस पिम पर्व
कौवा है और तुम्हारे परे दीपा
साता
-पोषा
(एक पाक से)
No text on this page.
में एक कमरा कमरा? पीहा में एक मरा सिसकी हामी बार बाप उमदीपनी पानी मुनो। मामे पहरे में अपनी स्थिति है पापको पत्ति करा पारित भैरानकारी देते समय में पुपमा एपरम साफ- माफ नही पा बोंकि ऐसा करते समय मुझे मेरे मामने पाम सापी कमरे के मालिक का पारार पुता पार माता गोस्वामृया पर भी अपने मालिक की सेवा-सुरमा परवा है। फिर भमा में अपने स्वामी साप ऐसी भारी से कर सकता है। मातिए 4 बापको अपनी पानी माग से मुनाना कि मेरी यह कहानी मुन र बनेकोंपरों की कहानी बम पापगी। पति कोपा समूह की क्पा बन पाय पही पंप्ठ कमा-गया। पाप मुमठे पह प्रान भी र मे कि पर तुम मपने मासिक प्रति मिलि पार हो तर तुमयपनी पानी पयों मुपाने होपात तुम्हारे मानि म पृष्ठों को माता का नही होगी योबाप मार मौर री। मएमकार कसा मदिन पर कोई मामिा एकम बाईपर गरमाये मोर रस कमरेको भूम पाये यो उनके दरिलोंग मापी रहा है सो पाए हमरा नहीं सरस गावे? पारगमरा प पोयम न पा । बनारसमाप
No text on this page.
किन मैं अपनी मनुभूठियों को दिया रमता है और पी पेरे
मर के कमरों में होता है म जान कर मुनता हूँ मार
मरे में वाहमा देवता भी हूँ।
पर के पातीपान कमरे में हाहारी-पकी शिपया के पास
पारम् रहते हैं। महसू भी एक दूसरे से सपा प्रमम । पाहा से मेरा
तात्पर्य एसकी सारी सम्वानों एवं एक बहू से पार निमो
पन की टीपा ममता बेटी रामा पोटी बेटी रेषा भीर मेटे की
बारिश
मेरे पाये एक तम गनी है। सारे वीम कोर पड़ी। पपकी
सम। बन्द मोरिया। पानी को पार करने के साप ही बीस कोट
पौड़ी पर दोनों मार एका। मीराबहाँ या साफ मेन रोग
मिनठी वहाँ रख सड़क पर मारियों के मानापमान को रोम
+ लिए तीन पहतीर गार रिपे गपे बिससे इस घर से
नाम साईलि सार ही निपा देरोकटोक मा पा सकये है।
यह मार की स्थिति पर बाबारी के पहमे म मियो
सरात पसी की परचून की दमन बी मिपा मारत बली
एकमाही मारा और रामान पा। पारमे मकर कम
तोगना की बात की। बटिया मियों को रंगकर एपदय नाम
बनाना बाटे में इममीवीर पीसकर मिना देना भी मिी
समुहम्मत है पेपर पामा पात बात परपरीर पाहकों को माराम
भीमाती देना में न उतम र मरे पर थे। यही पाह
पीरियर पिनार ने उसे बोनार मा । पाकिस्तान
बमने नदा तब इस मुमनमानी मोरस्म में भी समयमी मी। मोर
पामने पे । मरामियो अपने नाम से सरा सटा ही पामला
पायबरसान हम्मान कोबादमखोर की तप पारपापा
तरहरात पिया बटोरने में व्यस्त पाामने मौसम
भापोहए अपने
पापने सीन की और सारी
No text on this page.
-
बहुत परेशान होती है। हम ये सारी दीना सेपर पसी, पहात
बड़ी विजारत पर गौर
सदसद् भागापर।
मिपाकी सासक गयी। मपकी हर उसपीबीसों में सिमट
सिर उन्हें पिरकर पपी। उसने परवीन को मोर देता।
परवीन मे मा मरीना से पवित्र ोिं की मोर देवकर पुरा है
बिनती की और फिर अपने पति से दौमी देगा मापके नाम
कामवीमा ? भागाम हाप पोना परगा। हर एक साती
को भाषार मुगावी पो । बाराम कांप रही पो । “वामा पोतो
चाचा मिया बारा लोनो मुझे बाबो पोसोम पाया।
"कौन? परवीन पूष्णा।
में सुरैया बानुरता रम बामे को बेटी बापो भतीगी होतो
पारा पोसो गुरे मेरा पीपा कर रहे।।"
परवीन दरबारा नोप्तमे के लिए भाषेबदी। मियो मे उसको
रोक दिया परबागा मतमोतो।"
परपोन में कहा "मुपाई बापड़ी
मैंने कहा किरपारा मत पोती ग त कोई मिी काही
तभी मारी परमादी पाग पाकर समापे
रही हो पपी । मुरैया की बी, रोने में बस पी। रन पीयों
दसे परमभीरोपही अपने पान पाकर मिये और
वह दुष्करठ गपी।
मुरपा की पीएं मूनी पारियों की तपपूर पर दूर होपर
गामोष हो यसरी पर रसपी रवीन रिममेकमार फोमम
पियारों से टकराती रही।
"मग पिया I" एक परिचित बाराहरमापी।
सपात पिसा पेहप पीने से भाग गया। मपमीन दृष्टि
पमने परोन पी बोर देगा। परोपकार भी पमोने सेमीमा
मुहारियों की पूपिया पोनी महमानों की मुहम्मत की निपानियाँ
पूठियां धीमी पवामिम इम्मान न सूटेरों से कम नही पापी
उस पपती बाग में हिम् मुसनमारको नसार सोमठ
को रखे थे।
रिम्पों के हमले पारी।
इसके पूर्व र पनी में हिम मुसलमान का कोई मेरमार मही
पारस मुसलमानी मोहल्ले में पुप हिस्ट्री पर मवान कि
कोई भी रिसीदीबहिन-बैटी की मगरकर मेता कोई भरा पिप्रमी
पीव पाठा या मुरवाता परीफ मोगा एक बार पाह।
पर
समय बरमा । समय सापमान रिती-रिमाम । न ही
पून। तो हो-एक दिन सराप्त मिया भी बनी पानी
में मोर पोर सोना सा कर मामले की पेष्टा करणे गये।
मुझे बच्ची वरा यार । पस समय मोमबत्ती । मेरा दिन बम
पापा और में महिम रोपनी मे पसकी पिनीनी मूरत बाबा।
उसके सामने बोट पर पेपरात पोरे पोर पास बार
बार-बार बाबा पापा मैं ने सारे पर्यो । पाकिस्तानम
बहुत ही शान पोम्पा।
असा गबहाना उसकी कबीपी परवीन को पागलपन
था मप रहा था । वह हुमनोहरा की मूर्ति परवीन मिसका पारा
इम रितपेज परमानों को रयकर स्पाह पर पया पा जिसके
परान विस्म की पारी महोती पायब हो नापी उसकी रीप
बीखिों में मापन सा का पापा को हर पीत पर दुराम
पाक बाम की दीपा बोपी (पापारला या में बापको बताना
भून पया ना कि परवीन बरामत मिपा की तीसरी बीपीपी) अपमै
बौहर की इस हरकत पर विस्मित हो गयी। पूर्व पापमहाँ
48-4ठे तिमारत ही करते री या अपनी बान देकर पाये।
'चान है तो महान परस्त परगान मी बिना दोष
-
बात परेशान होती है। हम में सारी मत मेकर पक, वहाँगात
बड़ी विशारत करने और
पदरुद् परमार
मिया की सांस सक बनी। भमकी सहर उसकी भागों में सिमर
सिरार उन्हें स्पिर कर भी । बसने परवीन की मोर वा।
परवीन ने मामा मीना के पवित्र चिों को मार देवकर चा से
दिमती की और फिर अपने पति से बोली देखा मापके मामष
मधीमा ? मा बामहाप धोना परगा। बाहर एक पुती
भी पाबार सुनापी पहो । बागाव काप रही पौ। पागा मोनो
भाषा मिमी पपागा बोतो मुझे बाबा सोमो म पाग।
“कौन है। परपीन पूछ।
"मैं मुरमा मापुस्मा सबाने की बेटी बापकी भतीगी वोमी
पापा बोसो मुरे मेरा पीर ।
परतीम रमावर बोलने के लिए मापे की। मिया रसको
'परवावा मतमोतो।"
परमोम का "मुरैया बापा
'मैने कहा किरणारा मत पोमो हम बहकोई किसी का नहीं
है। सभी लई भारी कामों की माग कर माम माये
हरही हो गया । मुसा पीपीले रोने में गरम पर्ण । गीतों
द से परवीन भी रो पड़ी। उसने मपने राम बमपर निये दौर
बहटरठ पपी।
मुरवासी पोभूनी भाटियों की तरह दूर बहस दर होकर
खामोर होसी पर सही मग परवीन रिममेक मोर कोमप्स
पिना परावीती।
सपल मिर्ग।" एक अपरिचित मापार बाहर मै बासी
सरान मियां का हरा पसीने से भोर मया । भयभीत दिसे
उसने परपीर की बार रेपा । परवीराहरा भी पोने भीगा
-
हमा पाऔर भय सगीन होकर उसके चेहरे पर मात्र खपा।
मो सराहत मिया बारा पोमते हो या वारी
सरात मिया सरप
माती पारे।
'कामी पनि । बोध पाती मा पाहता है।"
"पहने दरबारा वो पोन ।
"मही पागे ममी मरणापा नहीं सोत मकना "गरपात
समीर पारी बारमीयता है बोमा म मगर तेरी भाभी
पान भी भीतर है। मानते होम पहनन-पराग से बहुत
पराती।'
कामी पागे एकबंदी गातीपी बोरमह बोता 'चामीगान
कपणे पारा होमवर्मा मैं तुझे ।
मियो सरमनीयता परपीन कीबोर रेखा परपीय
-
गरवारा पीर। एक बोरप्रक्रिया पर पमाका एमा। मैं
रो पड़ा। मेरा सारा बन काप उठा। यहाँ तक की मेरी रोड़ की
ही पामे भी मी काप एठी ।
"बरपाया पोस रीलिए। परवीन बीम से कहा इसी में
इम सबकी वैरा
तरान्त मै एक र ससकी मोर नफरत परी नरखा।
उसकी मां मानी नए हक रही । होठों को चबाए बोता
"तुम्हे म र पानता है। तुम उम्र भर मुझसे परत करती पो बब
मुहते ।
परमारे टूट पमें। मेरे अपनी बार बद करमी । एप्पुष्ट
कानी न पी मार पाने में अपनी मूबों पर सारे पापा।
तपात मियो पाली से अपनी पेरवानी में रपए पाकर पानी के
माँ में पिर पर पिपिडाने भगा माती पामे तू हिलू है । तुझे
यि मा की कसम यरि मुझे मारा तो में मुझे यह दुकान देता
"मोर मह बड़ी रकममा याचना करवा पा।
मराम्ता परपीन को मून पया पा। उमने अपनी मम्पूर्ण प्रार्यमा
परवीन का माम तक नहीं किया।
मुमे मन्त्री तरा पार पायम चिड़िया की तरह अपने पंच
मिटे परसीन मेरी बायोग-कोने में पुरकी दी। वह रो रही थी।
इसके मान मानों पर मामुमों का नाम सा रिए नया पा।
परवीन कहाँ है? कालो मे पा कर कहा।
'यो यो रही कामी यो। एमने संपते हुए परसीर की बार
कित किया। परवीन बपने रिपोक पौर मीच पति पर दुपा से रो
गी। कानी उमको बोरगा । परपीन पाम माया । उसका
छाप पकड़ा। पुड़ियाँ परमरा कर टूट कर बिहर मपी । कामी ने
से सपने मीने से नमाया मापे की बिरी मिट गयी। परवीन विरोध
र पी पो । सराप्रत अपनी ऐसाती को समान रहा था। काली
मटके में मारो सम्दार में पत्ती परपीम कोरोमा र पिया।
से मपनी गोद में उठाया और बपने मापियों से कहा हमरेको
पोर देना।' और यह मरान के पास बार गर्ग, पिणापत करेगा
तो रेस में पाते हुए को काट गनपा। उमने अपनी कमर से एक
चमकती हुई कयर निकामी।र से सगाव पोर पड़ा 'मही नहीं।
में किसी से भी अपनही कहूमा। तू इसे मेगा । मुमे छोर है। यह
माम मी हेरी यह मास मी त्य' !
फामी परवीन का मुहबाप कर पमा । पुगे में मेरे समे
हुए पो न कर दिया। मुझे एकप ममा बना दिया । मुझे
अपनी दुपा का बरा भी रचनही हुमा पर में परसौनी रन बड़ी
बहीबापों को मार भी नहीं मम सरा मि में ग्म रिन भरती
की गारी सपा तिरोहित होकर सपनपन मा पीपी। उसका
पसरात अपनी र मना रहा था। बोह! एसान रितमा
पुरा गर्न पार पनीम होममा ।
परपीन कहाँ है। यह नही पामा योकि मादी पागेको
मैंने पस रिन बार कभी नहीं पता पर पोड़ी ही देर में नीरे सामी
एपित साप मेकर मापेबार रातों की लपट्टाहास कर मेरी
पाती पर उसे 1 पर्य। एम-विसत नाप यि की पी में मही
पहन सका। सोपा कर पा कि वह एक मुमनमान की नाप है।
नहीं-नही पह एक हिम्प को नाप नहीं-नही यह एकसान की
नाम मोबपने पिते हुए गून के रो में पुनाहियों की हगारों
सरा लिए हर मेरी भावी पर रिल साना पा अपनी सच
पौर बबलू से मुझे कर लिकमबार परेशान करता था। उसकी
हामत पर मुझे रोना नाता पा और उसकी मां पर मनाहट ।
बाम एक रिन दुषमाय मापे और मुझे महमा पुना दिया।
उस तास कोमेकी तरह उपकर बाहर जमापे और मार
की जया एक कमरा हो गया।
मुझे बार भी पार है। इन दिनों इस पती में महान पती की
बौर आये हुए हजारों भरपापियों के बर्ष मगह-नपाईप रिया
करते थे। मुबह यर भपिन पासाने साफ करने माती तब यहाँ बापू
म सामाग्य स्थापित हो पाता था । मीही मीर। पोरगुम और
रोगा।
मेरा नया मालिक महत लिो तक मुटनों में नहपापे रोता
पापा क्योकि उसे भी कादी पारे की तप किसी तान पुणे
परमार कर दिया पा । गोरोपौठे माई, उसकी पत्नियां बोर
उसकी सर बड़ी बेटी रोहषी को वहीं सके सामने मौत के घाट
पवारमा पा
बोरे-वारे सब मामाग्य हो गया।
एक वर्ष भीतर यहाँ परमाबोर एकदम पो पुरषारी
1
हो गये । ठोर मेहनत र रिस्मी की काया को ही बदल दिया।
मेरे मामिक रामनात सगका पंगा सुरू कर दिया । सम्बी
मंग में एक मारे पर सम्मियां वापरते बौर पनका साका
यो कसम मिरिन पास का एक परचून की दुकान में नौकरी नग
बया पा। यही पौर मममी बेटी सम में पाने माने नमी भी मौर
रेखते-देखत रामनाम की पली फिर मर्भवती हो गई । रेषा जो इस
समय १४ वर्ष की मेरे गये मालिक की मागिरी सम्मान है।
इस मनी की मामे पानी पती में दो होटम समये । इन दिनों
इन होटलों में होगा दूरी हई बबनी हुई थी पर मोप पाय सूब
पीते रे। परन की माने तथा एक सम्मी की दुकान और मुम
बपी पी।
मेरा पप सब पापा । मेरे पारों बोर मुटन पर सोमन
मौर मवेपमा पता पा । ममी की मादियों की पूर्वग्प से हमा महरा
कर उस बर के मस्तिस का मान हर बड़ी मुमे करातो रातीको।
कोई नया बादमी पर पाना पाने पाता तो इस पर के मारे
पाना नहीं खा सकता पा । मेरा रंग बम रिपा पमा मात्र मुमे
हरा बोवा पहना रिमा मया। हाप का सिता एमा हरा पोपा ।
समाव की मागे स्मृतियां मिटा री पपी सिर्फ बबी रह वमी उतरे
समयको बिना परवारों को बसमारियो जिन पर मापन
रहे ये पुरानी साड़ी।
पोर-पार समय पुगरता रहा है।
साप परिकार बनाया पौर एसों में भूलता हमरा की रहापा
एक नि एक पिरामापी।
बह सुबह थी। मैं भी पा पूर्ण ससे पूम मया पाकिमी पहा
एक मवात मिया भी पहा पा मोर कभी मेरी गोद में एक हमीन मोड
सी पुरती सफा रोगोषी ठपा पमका कापर पति पसे मेरे
हवानेहीमाप या पा।
२८
विषापमा परिषय हे जारी पारा मया । वमी
या गया रामनात । या निगोविरा मरपि पर बोसा
गोमामी परी यह मूरत मुमसे नहीं देसी चाची 1 बसा बसा बोर
मूरत पीरी। पीता परे रंगमें मित कर दो बाता पा।
पूर्व मोरपी नपती थी।
मापन्तुमा पम रोती रही। परमाम उनकी गिनी प्रसा
कावा पा सापय उनादकता वा । मागिर या रोना
पौना बन हो गया। बात बपने मसरपरमा गयो।
बाप मेरे और। मैं बाप से एक विनती करने
पानी।
दोन भामी पौर मुझे हुपम कर ।
'मेरी बिरा को तबसमी बर बना है। बर दिए बीस
की हो पपी।सको चिन्ता मुझे पत को सोने नहीं देती। इसमें
म रती भी नहीं बोलती कि इनिरा को देखकर मेरा कोरा
पैन हो पाता है और मावों में पनकी तस्वीर ठिर बाती है।"
राममान + मिन्तातुर सरगा' 'हम सभी ही मिरभामेरे
पना गर्योगपना बतन मोर बाठे पर्योपमा पर घोरमाते । मेरा
माहिराको पानी की कितने पोर-पोर से तैयारियां कर पा
पारिको होना पा पाहो मया पब
बनपिन्या-
धोरर पम्बिएको में बपनी बना पा ।
नर के पाप विषाको प्रपना कौन रिया और मा मेसी
पवान में विरोध किया "तुन पे हो तो पितागी हमें
भी पा और रामा विवाह करना है।
'हम कौर करने पाने विकार वो अपमान करेंगे।बा मेरी
मामी बा ।हेरी बेटी मैरी यह।
बस हो गयी पात बार एक दिन इस भर में बाबा यी। मेपे
दोनों के बीच पाठींचन गन रिया बपा। बनीमत समझो कि
पार्यपन एक मोरे मीने रंप के कपड़े का हो पा । पर हाँ यह पर्चा
तीन वर्ष में ही फट गया और फटने के बार दुवारा नहीं बन सका ।
x
x
x
माप की तरा समयमा।
प्रिमोचन को तनसाह बम एक सौ पचास रपये 1 पिता की
उम्र साठ के मममम। मां का सभाप बार किए हुए पाकी
तरह तेर।
सिनी की ठिठुरती पिठी रात। ठीक इस बर पे ।
गनी में सन्नाटाहो पया है। मेरे एक कोने मेपिसोपन का बाप हुस्का
पुराठा गाहा साप में बसता भी। उसने अपना बाबर
कर रिया पर्योकि पठिया के रोप की बगहरे बह जब पन फिर
मही सकता है। मां बह से हर पड़ी बम ? रहती है। उसका
कहना है कि माते ही उसके पति का मारा व्यापार पोपट हो
पया मोरये बीमार पड़ मये पामसुम है पर यह उसकी कोई परमार
नहीं करती।
रूपा बी.ए. में पाती है और रामा मे इसी पर्प कार में
रामिता पाया है। मा परिण भी पाती है कि यह हाई स्फूम
में फर्स्ट बायो।
कपा कारंप- सापारप है। महमा रम पर मा-माया
बये। पानी की अपनी सुनाई दौर मार्पन होता है। यह बहुत
बन्पेरंग से एवीरे मोर उसकी माभी उस पर मान देती है।
पोटी बीन रेसा मे अभी तक हार हेरेगरी पास गरे यिा ।।
राठ की परिनीका लिहाफ सिमरने गया है।
-
.
विपना ने अपना परिषय : पंजाबीमारा में रिया। मी
मा पपा रामनाम सि विपण फोरेस कर बह भरपि सर बोसा
पपोभाभी रीमारत मुमसे नहीं हो पाती । पपारंप प और
पूरत पोरी।पोमा परेरंपमें मिल कर एक हो जाता था।
ग सोमपी ममती पी।
भारम्भ देनत रोगी ही। रामनार की जितनी असा
करवा पा उसकाय माही फरापा।माविर पा रोना
बोना बरही गवा । बात परने मवसरपरमा गयी।
बाप मेरे बर्मबीर । म बाप से एक भिमती करणे
पामी ।।"
दोस मामी बोल तू मुझे हुपम कर ।
'मेरी इमिरा को तू मपनी बना मे। मा दलित बीस
की ही पपी है। उसकी पिम्ता मुझे रात को सोने नहीं रेठी। इसमें
में रती भी मूठ नहीं बोलती इन्दिराको देखकर मेरा मेवा
पिन हो पाता है और पांवों में उनकी तस्वीर गिर पाती है।
रापमान मे मिन्तातुर स्वर में कहा "हम प्रमी ही निरमापे में
बर्मा पोमपना बतन पोरवाते अपना पर पोदबाते । मेरा
भाई इनिराकी पारीको तिने बोर-शोर से तैयारियां कर पा
पा । और बी होना था वह हो पया पर बात चिन्ता-पिक
छोड़ हिराकी में अपनी बहू बनाया।
समाप विषयाकोबपना काम दिया और बीबी
समान में विरोध किया "सुन हो निमोचन के पितागी हमें
भी रूपा और रामा का विवाह करना है।
'हम फोन करने वाले विवाह वो अपमान कर। वा मेरी
मामीबारी बेटी मेरी
पस हो गयी पात मार एक दिन इस पर में बहू पा गयी। मेरी
रोबाची बीच पार्टीबन गरिया पया। पनीमत समयो कि
-
पापिन एक मोटे मोते रैमरे कपड़े काही पाापर हो यह परी
चीन मई में ही फट पया बोर फटने के पार पारा महीं बन सका ।
x
x
x
माप की तरह समय पड़ा।
प्रिमोशन को वनमाहब एक सौ पच्चीस रपये । पिता की
एम साठ वर्ष के मयमय। मोका समाप पार किए हुए पाकी
तरहर।
यह रात है।
किमी की रिती कापतो रात। ठीक इस पर थे।
पमी में सन्नाटा हो गया है। मेरे एक कोने मरितोषन का बाप हुम्ला
गापुराता गा पा साप में बसता मी। उसने अपना पावन
कर रिया र्पोटि पठिया के रोग की बरबह मर रस-फिर
मही पनामा बहू से रबी म परे हवी है। रसग
पलाकर के दावे ही रो पति का मारा म्यापार पोपट हो
पया और पीपार पर पपे बह ममुमो पर बरसपी कोई परगा।
नहीं करती है।
मा बी.ए. में पाती है और रामासी वर्ष पामेर
दाविना पाया है। र परिग्र मी पाठी माई मन
में पार्ट पापी है।
सा का रंग-समापारपा र रमा
बम्पे। सरानी की बपनी मनाई
बीगण
पदप से रहती र मोर रा र दी
पाटी बहिन रेवाने बमीटरrrirak
राती पानी निग!
मेरी मोर में सभी प्रागी।।
एक कोने में इमिरा उमरेबान ही यामी विस्तरा कि
रिमोचन भी होने की एक सम्मिनित मैर पर राम के खाते-
बही ठीक करारामा अपने दो कोको' पुस्तक पड़ी रही
पीर मा मपमै गएर परिति तम माहित्पर सम्ममा एक
पपग्मान पदरही माप की दोस्ती स्पा और रामा रोगों से है।
गामा मा पर पड़ी "बर परा अनुर को पूरप नो पिता।
इरिस पूर्वपत सोनी दी।
मा फिर पिम्सायी क्या काम में ईवापर सोपी होम
यो कहती हूँ बह मुनापी नही पाला है या ।
मिरा सारठी परे पनी पारसे पंकी मार
मामी पिरने जैसी भागार में प्रकार करती होती बोगी
देर पाने पूषा तो भाप बोमी कि ममी मही पीमै मार ही
भेरी बात नमी से ही परिमाना पुरु कर दिया। पड़ो भर भी
बापम नही ।से कमरों के हाथों मा में मुझे बांगा है।
माने का सुसमीर न सोने का मग ।
इमाप मुम में भागना भरी।
धितोपमहापकीसमयी। हमाचौर रामा मे मानी
की पोर रेखा । रेषा परी मर रही पी। बाप का इसका पुराना
'पैसा कोषमा अपनी बातों से देखते किरीब मेरे
पापसा
समूह पली है। पैनी की तण मग पर अपटती ।
बाट पाने को है। तेरे मामने भी इसे मिरेबाप को पूष पित्ताये
लिए कहा था। मा कांपनी मिनोचन पाम बा बयो ।
पसने रसकी मैर पर पौर का पाप मा01 मैग अपनी बरतुरंत
धोंडोसेकर कांप रही।
रिसोरन में बड़ी परस्पना से अपनी मां और बहू कोरेगा।
बाद में पादिरा स बोना इन्दिरा तुम्हें मारे साप ऐमा म
नहीं करना चाहिए । बाहिर बहस मददी मा है।"
"यो मोपमा प्रवास रख सके उसके माप बम्या महार
फोन कितने रिमटक करेया। इम्भिरा की बात ममी।
मां की पारी के मापे मुस्मे की पुरा पयो । रसने सपनी
पाचों को पोप मौर मिपमित्रा पर हा रेस मपनी हीर की
पमान को मोवी सी पा रही है। मुन रे मिमोचन बरनी
इस रिमोगान को मममा पर्ना में भी बमुमा में पूर मस्यौ।
नियोधन ने इमिराको मात्रा मरेपर में हा चुप रह
इन्दिरामी पोप मी मरे से पूरा कर लिया पर, इसका
कहा मुनापुरा मत मामा कर।"
'बरे रे पुत्तर एसे पाप मरे का ? मरिमें ही करनी
निरमामी नहीं होती तो पयों मुमा पाकिस्तान पाना? पों में मपनी
हरी मरी हस्पी को छोड़कर बाती ? को मेरे पर ऐमी मुंहफा
चौर मिनी बह पाठी? कार को तो लोम नहीं पाती पर
गान मारे गये बात रहे। य मेरे माग पर मोमोर
नहान में सरी की बागार मनी र मेरेना में 'काला
रोना मा।
इम्पियसिप मगाबरता सप्ताहणार म बोमो
“परी मरीया पानी पदमे मंगता रामा परतो तो!"
"पर परमायुपान ! यह तामा मुझे नहीं मपने संसा
कोरे। मरेतो मात-पान पना बाता पर पारिएकमही दम
गीम बनने काले बास पे । मोरोप मा रेया मि दिन म उनमें
मितारोंरागारमा महामारी पी पी दिन में एप पर
पारिपि मौरस मिरि वाम परमै सपी दी मममी कीमो
२२
तो अपने इस साठ सात बपुर से पूपमे । यो रेषा के पिता को
पोम पो मही।
राममान में उनकी और भी पार नही रिया पी-गारी
हुममा गुरागाने सरा।
हरिरा मै तुमसर जबाब रिया 'पन इम पापों की पा हो
गया मेरी माय पोर पो बही। यों नहीं यहाँ पर परों की
पारिश होती।
पितोषन मे गोर से मेर पर पाप माप। मैन हिल कमी।
भीरपया।
पिनोपन पुर ततर विकको वप रहा । पर्ष कर बोता
'तुम रोनों पुप नही र सकती । कम-से-कम एक को दो घाव एला
चाहिए।"
रूपानेमाको समहाया मी तुमे पास तपस पुरता
नही करना चाहिए।"
पमा ठपट बाबी मौरसाकी बात कोकाले ए बोली
'तू मी को पयों कहती मामी को क्यों नहीं समाती मासे
इस परह बवान महावे ए वे धर्म नहीबाती।"
बलिरा से मामेव मैनों से देखा। रामा ने इसकी कोई
पामारमही की। मौऔर हलिग दोनों एक साप बागा में।
पपई। बार-बीरे पति का पयो । यो काम होमा पापी
पगा। हारपीकर सो पया।
बरे-धीरे सब सो परितोषन एकवारपसायमानी है
साकीरेता अपनी बाहियों को पर किया । बार-बारेमोरी तप
अपनी पहली पात मामा। पसे मिमोड़ा बिरामे ताप कर
गाया है!
'पुर ।" ने अपने मुरे पर पुदी रसीदनिय कपट
परवर सो पपी। पितोषन की मात्रा में विपता मोर बणियों
का सापर महरा रठा ।सने एक बार पीनी सीमगर मपनी
पोपीमिया पर गमो भार बह पपने रित में प्यासों की मासों
पाकर प्रपमरा सा मो मया ।
X
x
x
सुबह
स्टोव मन पहावा। एक परमारे से प्रभाव सहमा-मामा पा
बा हा पा । बाए, मैं अपना घोड़ा और परिषय रे।
पर एक घटका पनगाहमा है। ऊपर की पटरियों पर बन
सन इए है। बेतरतीवी से सामान पर है। एक मोर चुम्हा है
बीर पूसरी मोर लाने का सामान ।
स्टोग पर पानी सन पा है। उन्-वम् की इतकी ममि मा
पीएम और पाप स्टोर के पास पराइमरानै नपा कर
पौनी पीपे को समाना। यह एक बम पामी पा उसमे भितोषन
सेमा "माप गरा ग्रमा से कह कियह मामा से सेर मर पानी
।
"तुम नहीं कह सस्तो।
पर्यो?
"ररियान मेरा मन ठीक नहीं है । गुस्से में फिर भगतम
निकल गया तो यह सारा पर मुझे मौपने को हेया।"
गया बीर भारत हो ? सी बात ये बिना एही नही
माती।बरे पराजपने रिमाप कौगरपाकर ।
उसने पितोषन की बोर नाती पिसे रेखा और फिर बात
काम में व्यस्त हो गयी।
२४
पिसोपन मे रामा से पा 'पमा! बा नाना पारी
मेर मर पीनामबा।
नापी भैया 1" पर रामा बिना पट्ट हो जाता
दुकान कीबोर बम पड़ो। एजार मम्मपरी दी। नाना
पान बेटेगर में रामा पन्ना रोगों को सीबी नगरसे
या। रामा ममा गमी। उसने अपने हापों को स्टा रसिया।
भीमा पये पाचार्य भारती भी। एक बार्य समागी मन में हिली
मप्पापक बार ही कामीन मिताप मानाचगान
मोही रामा की रेतात्यो हीना भी सिकोडकर बोले हरेनारे
पयापमामा माया है। बेटा हमको भारी सौरा।'
पमा वीरा मेकर भाम बापी। उसने तुमा, पपा मारेकी
गारदीपरपोरिया विना बोडेहीबारी।
चाय पीने के बाद पाना पकाना होता था पर बारमियका
मा बराबा। पापाय पीती-पोती सोच रहावी-4 सी
निरमागी। मां ने मुझे बोट पया की तर इस कोठरी गगन
रिया । मबहाँ काम की का, पहा मासानों का मिहान ।
दिन-पर इनके लिए बोसपे पर मतीरावाने बोसो में मिले ।
है मुनाबि मुझे त परक में पर्योगवागिपीपा बाम ही
बाम समोर बाप । सास मुझे निपूती मवीरको
दौरत बपनी कोर कोन मी से सकती है? सोने की बहन
सने का मौका । धादिमी दूर है मरेबीर से पिन नाम
ठमके। उसका मन एकाम वराब हो गया। पसकी इन्चा
बहरामो विचार पथके पस्तिपसारनपा में
रा समरे। पाठी । पनी बान्तरिक यिों की
जागा सेना पायपीचबैठकर अपनपी।
पापीठ पीब देते हुए पूछा
स्यामा भानी"
बी मिषबापा
पों?
"पता नहीं।
रामा ने मार मी मिको से यह सब सच नहीं नाटक
बिर्सन किया हुमा नाटक । वमी पा से पुकारा रमापामा
कर पानवास से एक पीपरमेंट का पान मेबा।"
पमा इस बार सिहाफ मोरर पमी। उसे सहसा मापाय
बी मारमा परे । पान मा पपा । पान बाकर पिए बोरकर सो
पसी। सोते-सीते उसने मोगा कि बार में दिम पर कोई काम नहीं
करगी। मुझे से मरने का फम बर मिनेमा । सारी मम मूतनायेमी
पेटियो सेकते-सेकते। फिर से वह इस से भर भर मामी
कोई मुल नहीं मिस मौरत को पति के नंब सोने का मुख न हो
उसकी कोख से पुल सकती है! उमरे मन मन में एक मम्हे
पिसुके पार यम्म मारे। पौष टमाटमक कर बमने ममे। पह
ममता से मीन मपी । पने में पुरती स्माई मामू बनकर बरस
पड़ो। रिसार भव भी बनारस कप में पम रहे पे कोई मेह
की भार भूमि पर से प्यार नहीं करता बह रासी की तालि
भर काम करती है। कोई भी उसके काम की तारीफ नहीं करता
कोई भी उसकी पीठ कोमहीपपरपावा सभी से सवा पाते
। बस एक पा सके मर्म को एती उसके लि की बात
समझती है। यह मिशन हो पसी।
बामसर में पूछा 'भार पाना नहीं पोपा गया?
मिरा मे कोई पर नहीं दिया।
मी तपसर में बोली" साहामारीको कर रात पोहा मा
काममा दिया मानों कोई बड़ा मारीत्म कर दिया। मैं निरमापी
पेमी हूँ कि जबान पर काबू नही रए सस्ती।
स्पा दिप पार पपी। मा सदा मापस में समतोटा
रुपया करती थी। उसके जीवन की नीति पीकपड़े होकार
२१
की बगाम उसे ठ कर दिया पाप । माप को ये माती बीनों
पासामों को पीडामोड़ा भुषा तो उसमें मम हो सम्मा है।
मिरा उगकी मोर मांत परी बोयो हेरेमा। बीसे रोने
से बात हो गयी बीबरोनियों के मुताबम बाम गीर परे।
पहरा भूमी पाटिमो की पप रामपा।
पया पालभाभी।
'
पीकही है।"
कोई बात नही । बामा में पका मेवी हूँ।' मा पूमा
संभाला।
मनोमा मामने साप ही पमा की बाहों में एक बल
सीमाम धमकी भौर नामी बोली मामबाग यहाँ साना नही
तारबी मुझे मेरी महमी यहाँ बाना है।"मोर पापा के पास
स्पा मारती बापी मेरे लिए मामा मठ
बाकर बोमी
पाहगी पाताको ममम पयो। बरबह पाना बनाने की
पोरमा करती है तब वह अपने साप रामा को भी यती पर
भान रामा मेड़ी समई से किनारा कर मिया। बह जली हाप
मुहमोकर बाहर निगम गयी।
पीपली? बाप पास । सम्परेचा एकमेलक।
स्वर मेसन पेपा करता है।
चारी स्पा १२ बजे काना पकाती रही। निरास
दिन भाना नहीं पाया ।पा अमेव बी मेट पहुंची।
x
x
x
राजपये मैक पती बीएक दिन के पिए ।र में
नबी बी स्पा पमा रेषा और मां-बाप हानांकि मार मार पर मिलोपन का मालिकामा दीन दयाल उसे पोड़ी देर के लिए परने पर बुलाकर मेकका एम्नेस्टमेंट कराता है। मामार- बार अपने पति को पानीको पीप पेर मुमार के वर्णन करने काबनुरोपका ही पी पर बाप कह पाबा किसों के बिना यहां से पापा पा सकता? ठमीमा तीन पम निकालकर पिता बीको रिये और रेवा कोपामा दी कि वहम साबपनीमाय। बन रहपीबी- स्पा और रामा। उभीमा पासा। मम्प को देखते ही पमा सित ठी। मा पमीर मुरा बनापे हुए इसे नमस्कार किया। "हो से बाना हमा सपाटने के मापही का मतोमारे पार बाहर का रही हूँ। " ही बाबमा। पर मापा बा। यो पान पायो फमारे माया है। केरल पान?" पाने मुस्कार पूमा। "पाय तो तुम भी पीता सती हो?" मा पास का करने के लिए बाहर पपी। बाहर से पड़ोसी सरकारका मागता मिस पपा। उसने बचा को नहा 'मा होटन पाने मतामा किपीन पाय मिलोपन बार पर पहुंचा ? इसी बीच सस ने अपनी याममा परी बीजों को रामा पर पान उसके लिए नहीं हरे लिए नामा है। पर पाबाने मार रहा है। उसमे अपनी पांचों को मायामीमा में वापस न लिपा सार
में कपी योगने मनी । अहाहमा किश्मा, सस्प की समस
हरमन को मही रेषा को संभव कामामा मा मस्ती की।
मी मोड़ा सा गपाडोम हो बमा सिप रे सरसर uमा फूटवे
हए एकजरको बाबिया।"
मा मिहंस कर कहा चाय पी माप के लिए मा पी।
और कोई तम"
अपनही । मुझे पाय मित बार पह। पान मने बात
ही कम कर रिपे है। यह सब मापके समाधार रोकने का मतीमा
है। इसके लिए में बाप का हेरित से मुम्पिा मा करवाई।
पमा पड़ने का बहाना करने नयी । पुस्तक पीपरमुनी रतफर
उसे बार की और वोमी 'कौर सीमई पुस्तक पप रहीमापकी ।
'तीन बारकप हे। तीनो एतिहासिक कोम में सपने के
पाईरापम्प मिले।"
'तमी बारात बात पीत में नारकीयता मा हो ।" माने
इसकी पुटकी नी।
स्वाभाविक है।"
चाय या पयी। ममी चाय पी। पा पैसा देने के लिए
अपना एक पोतने सपी । तभी समोबपने
पुस्तक
मीरखकर रामा को बाहर किया किम पास भाकर
नेपाऊपा और मर में बना हुमा योना, बन्ना पापी
पापा। पौरतुरामा इस बार भी फर्सबाना।
पार पापीया। ससने पटखट पन से परमा।
समाहरसता बना।
सपा भी कपासमरपनी गयी।
बोली रामा और मैं 1 ममे भी रामाको पार सेवा । पमा
बारवारबपने पापको एक मोटरपंच में पतारकोटा कर
२६
पौरममा रापा ।
पसाव पैरा हो ।पमा साग
गाापने पुत्र को बोमा मौर इसरा पाना। तभी मुझे रमकी
पानानी मारवायी।
पर पा बाहर बानेसपी र रामा में बड़े मोरोपन से हा
"पा स्वरूप मेगा अपनी या पुस्ता मूत पये। उसने पुस्तक हाय
में ठामी।
भूत गये तो मेने भी माने। कमरे में ही पना। इसे
पुमा घोगर मत पाना समनी।"
महरिवनी पतुर हो पई। पच गोषन के समान प्रापो को
सर एप सोबारेटे हैं।
समी सम्पािर बने।
पमा मपमठे हर उसका स्वागत छिया। उसो पारों में
प्रथम मौरन का बरापन पा उमरेबरों परमरपट परी मुस्कान
पौ। सोपान माती हुई बोतो' 'पुस्तक मेरे बाप हो?"
बारास तुम्हारी पापरायत एवमर हो गयी।
'तुमारे कारप।"
।" उमने रसेम भीपमा से ऐसा पोया यह पूप रहो
हो पियों?
“परि तुम्हारी मूरत रेतमे वेगार मुम पुष मी स्याम नहीं
मापने मीर मुग बनानी।
"तुम क्या सोचने
'मैं मौष या चिप्पारागार परा होगा। मोहम
पर रहे। बागिरमाt?"
पहपार।
'म भी मामता पर यह बिसेमा।
हर निमेपा। तुम में हिम्मत होमी पाहिए।
"मुझे विगका भय है।"
अपने बरपासोमा
'नहरी । मैं उनसे पाने के लिए रोटिमा पो ही माना है।
पमा ! ही पति अपने विचारों के पनुपूत अपनी मा की
पूरा कर सकताबोवापिक दृष्टि है बामनिर्भर हो।
'फिर में भी हिम्मत रखूमी " उसने वार को परम करके पूषा
'बपने हापसेवाम बना कर पिमा ।
पिसाबो।
में कमरा बार देखता हाकि सम्प मुमसे पार पाने
तक पहल पमीर बना रहा। उसने कोई भी विपनी हस्त नही
की। उसने पारामा होचूमा तक नही पा सोपता या अमीर
मोन बना सोचनापा।
तुम्हें पया हो पया ?" रामा से पूछ ।
पुष नहीं सोचा रहाईसा को पब या मासूम होगा
किम तुम्हें प्यार करता है उस दिन उसे बड़ा एप होगा। मरिन
अतिरित पिर पापोंकि मिटने मी स्नेह-या-ममता और
सिपास के गाभार । गम्हें मा-बहिनो मेह में माम रस
है। 'पमा ! कल तुम बापक मेरे पर पहुंची तो में हम पवा
पा। मुझे सपने में भी यह माम नहीं पाकिहमारे मान सस्व प्रेम
मामलों का यह प्रभार बार यह मतिभ्यिा होगी। उन भामुष्पा
भरे पड़ों का यह प्रतिपम प्रतिराम मिलेगा।
रामा बीच में ही दोपपड़ी 'मैं तुम्हें सम्मति से चाहती।।
सिर मे पाहा तो मैं तुम्हारी होरपी।चोगे इन फिगम को पार्टी
को बीमा पात मेरे हापसायो।
फिर इस पान को तुम बपने हाल में मुझे मिसानो।"
सम्प मे बितव निसाह से उसे पान विमाया।
पपरापी की तरापन मुबाकर बाहर निकला। मैंने सोचा कि
इम्सान की बात्मा की पाणों में सोपी मण्याइयो जापापती
महसपरेवाप पर मान बरसाता है।
x
x
x
बान पर मरस्यों की एक गमा पी। ममी मरस्य दोटी रेसा
को र उपस्थित।
मामसाबा गम्भीर पा।
नामा पीर पूष बाम का एक-एक माह का बचाया पा
पया पाऔर मप महीना भी सत्म होने वामा पा। पर मार
पिसोधन की मारीतमपा और पनाम इपये मरिक कपड़ो मयषहो
पपे थे। इस माह उसे मिर्ष पहत्तर पपे हो मिलये। ग्यारा पर
मांग नहीं मया। इस पर भी ता उम पर दुकानासमोनो
मार मामा ने मौदा रेमे से इनकार कर दिया फासाव
परतापुम्दे पर ममता रहा। इनिरा मांगीपनाकर हाप पर
हापरणेठी रही । सिी ने एक पा भी निकाम करमही रिया
दिभिमसेमार बारामापा रास।
माम न निम्मी बैठी एमा की पहा गार बारा पर्यों नहीं
माती? बेठी-ठी मम्मिा पार सी है।"
रामा अपनी पुरको मेन पर पटककर पूष पिएर
में योगी 'परी मेरी मा में हैरे रिकारही मामा के
हरी ससा मेरा मुह माइप हाकि पाने बसमा ना भार
होगा में।
मगही बता कि मैं मोरामा ?
मारियोंगरारे पर एक कम्पन सा मामा । तुरिया
और पहरीहो पयी। बोदी 'बपनी भाभी से एक रुपया ने
मिलोपन माने यामामहे म तुम मोग रोयान
ला करो।
गिरा तुनः पड़ी। अपने सामने पर पटोरी को मन से
पटकती हुई मोमी 'म हो रपया दू । वेय पूठ मुझे मही पर
भरकर मुका पाकर पो देताम! भरी में दो ऐमी रिमापी
कि इस पर में मानेगार रस नया नोट किस रस का
हीसा । नये से पार एका बारकाई!"
सम्माटा।
मरवा दिरा बह माह टमाटर की तरह हो गयी है।
पुस्से में पापौर सुम्मा तो नहीं मपटी पी पर उसका पहरा एकमये
का बीब प्रभाष पोरवा बा। उमरे होंठ गुस्से में जमे होकर
प्रेम और हिसवे पे।
पामेरामा कहा,हेरे पास
सानाकि उसके पास से उपए बचाये हुए पे परह पानी की
किने बार उसे वापस नहीं मिल सकते इसलिए मारपर्य का
मार पर करते हुए मोती 'मेरे पास फूटी कोसी भी।
महीने पुरम पार पए मिमवे पर कभी सरम हो परे ।
भोरे-वारे भरिको गुमने नगी । मुमती नपियों के एने
मुझमें पुटर पैरा कर दी। मेरा रम मुटने नमा । महा हो उस
पन्दिरा पहा कि उसने बाप को एकसम ठंग कर दिया । बीरे
पौरे पुर्वा पता पमा। सबकी मारुति स्पष्ट मिसपी ।
रामा मापात पाने में तम्मम ही नवी । इन्दिरा पुलों को ग
करके हमों में मन को पाकर 8 पपी। कमी मी वह अपना
।
प्पा मापत भर के लिए प्यार यह बनाने का प्रयास करतीकि
यह पापाताप की बार में पच ही है।
मामुत की। एसकी बाजों में बपाह मूनापन प्रमक रहा था।
पाप निरपेक्ष योगी की तरह अपना हा पुरपुरा पापा ।
मुरष मया । मेरापुर के साप मिलकर यमुना के रत
पार बस उपनपरों है पम मुरंजन-माह पर से हावामा मारी
रिस्तीको स्याह कर गया।
रूपा मई सेगिम पानकर बाईबी। उसकी पर-सट ने सरका
म्मान मपनी मोर मापित यि । हप की पुग्नकों को गमत में
बाहर बह पड़ी । पावे एनय बह एक सम्मा सौम मिया करती
बी। बारपोरेन ने सिडीमा बनाने का षम नहीं रिया पा इनमिए
एक मौका बसा मीचे रखा हमामा पो मनुरात से बहुत मीर पा
और पाने में एक रिशेप पति का प्रयोग करमा परता था।
रामा से ही सेगिम को हासिकमस की तरह लिस
कर पूछा 'या सेगिम कहाँ से नाई?"
'मेणि? हमने हात् पूणण।
पाम तो प्रस्न काला पवारा नही हुबा पर र
उप रही । उमने रामा रे पारे को पावे हुए कहा फिम ना
दोसना पोमा नहीं देता, मैने दौपा से पणा पए उपार लिए पे
बामा परीपर्म बाहिम और बहरहाल ही मध्ये नाते-पीते पर की
हैसममी।"
मा पीप में ही कहा "सेमिन मिने की है?"
'मा टेरापए की।
फिर गती मे रामा हो एक पयासादि यह माम कर
बाराबारे बारमानामोश देने में माफमर काति
है।" उसकी भौगों में बता पार पा ।
४
पारेको पप दिने । पमा बाटा पायी। महा पुन वेतन
हो गया। मपर्ट तो पिछले बीमम माम को स्पर्ष करने नही।
रेटिमा किरा बनमने भाव से कम भयो ।
बार मातम का बसेरा बाबमी मारमी विदा पर मुर्ने
की तमेवीचा पईसाय बन कर भी जीता है।
याबार की बत्यन्त पीमित विरामना।
इसमी मरकामीय स्थिति में भी पनि वामा सारा भूनते
पतिवार वंसार में कोई बड़ी प्रर-बरपरकी माप ।
किनी भी तरह उसको माहा।
सबने अपने पेट की बार को बुला लिया ।
तभी धितोपर पापा । रापाठ बरे और पमी में होटल
में पर पेरियो दौत की कोई पनी म पा पानी पी।
मामा पा किसी फ्रिम का कोई नापीतमा ।
भिमोरा पहब परास पा। उसकी मर्म टपौल से कट पपी पी
पाने उमटी पेन्टको रेसा नोबपरापूस बेठी' या पेमस
पीयेसेसे फट पपी"
'जब समीर ही हो पर ऐना ही पापा ।" उसने
प्पमावि निभगत छोड़ा।
क्षेनिफीस?"
रिसमा से । उसर रहा पातमी पीछे से एक नोहे की पत्ती से
पट पवी।
रुपा मे रिसपा और उसके मामिक को कोसमा मुमकिया। रेषा
खामा भार अपनी सहमी बता को गहिन मुरिम पर बने पमी
बची।
त्रिसोधन बाम पाले में निपटने गया । हाँसेमाका ना
बैमान पेटिमा तोर मया।बाये कीमा बना म भिमाको पर्ष
-
इसके बार बार की पम्मीर सभा का बारम्भ होता है।
पिसोधन ने पुछा माना में गया कहाँ ?"
रामा मे मपनी हाप की पुस्तक पर पान मा कर भाई पर
एक सरसरी प्टि से फेंक कर कहा 'राममे माप-पाफ भागों में
कह दिया कि पहले का बकाया रेरो भोर नया पोरा दो।"
निमोचन मापे से बाहर हो पया। मामा को को भरी पालियो
दीवारों को मापस में पीसता हवा पर योमा साता कितना
मीर है ! एक तो हमसे मम पाहे राम मेयर मुनाफा कमाता है
दूसरा मरमरा भी मिझारमाही एपता । बभी बाकर कमत
की मार सेता हूँ।
मा बहुत ही विषयीन है। बहुत ही मोष समय अपमान
पर दम रखती है। ऐसा प्रतीत होता है किस प्रस्फुटित कमी को
पराम की पह परिवार मार सहमा पाता है। पो पराम मार
सेट राम बह परिवार के भार से पारित ऐगी । एक असता
प्रान मुझे पता रहता है।
बागपत स्पर में पानी "तना पुस्प यही पाना चाहिए मैया
परमार सहिए उसकी पर्वत सबीही ऐपी । बाप से
बिनती कीपिए बिहपूपरिमाकी पीर मोहमत वादि उसका
बकाया पुमा हो गए।
'मैं उसको एक पाई मीनही मा । बम रस मया पैसा मी ऐना
राम परार है। इस माम से मौत
भाषा का पपा कोषमा पारेरक परमपित हो गया।
रचना रे पारप पर पपनै मपा । रमफे गिर की ममें फूम
ममी।
'मार पर्ष में उत्तचित हो। काम पैमों का .
सोपी होपा।" दिरामय सा में मा।
“पैसा पपीहर पाने को भी नहीं है।
पुप्पी।
देबत होकी समुहाइट।
मा मे पचानक अपमे सिर पर हम मारकर रोने सरम
कहा 'मनमागी मर-प पाती वो निहाम हो पाती इस बुआ
मैं मुस से अपने पद का महान महीया पाता । ऐसे रिम
देने के पहले सत पुष मेरी बार मैठा तो बन्पा होता । बाग
पिरे ऐसे मोमों पर निपनि हमसे हमारा बतन श्रीन लिया ।'
पब माम पति नाटकीय मरे बभिनय को मने सपे। सपा
में मारे मनुरोपहिया 'मो इन तर समो होस यो रे तो हम
बों का पया हाम होगा हम अपने पौरन को कहा हर ?"
'तुप रह मेरी माँ।" मा सम्मापी 'मेरे पुनर को कोई
नही जानता ? पर मैं दुप रिम में कुल मोर इस पर रोनीमारी
पमान धोरियो रा न म निको पानाहरभी हाय
।
बिमोचन मे बाप भरी पर सेरेसा । रामा मैं मापरवाही
भरा पू पापन वा स्पिा बरसार को यमाह महरों में घिर गयी
पो। इन्दिरा बसें फार पाकर मा को च पी पी । मेकिन
पार पहाँ सेम्पाप हम सबका बाप प्यारा अपना कोने में प्रस्तर
प्रतिमा बनामका पुस्ता हा पा ।
पा ने उप भारी पौन को तोड़ा 'मातूप पाबमी पारी
पान पोरियों के बारे में सोचने का समय नही ।।बमी या
सोचना है कि मामा प पूषणाने पर से गये पाप !
इन्दियोगको सिर करकपनाही की पान को बीच
कर कहा "पा औफ कहती है।"
मिलोपन मम मोचीकोमा, परम्प माप कहाँ है?"
मेरा मापा मुझ पर ऐसे ही विषणा पता बार-बार अपनी कम
कम होने का रोना रोता है । मेरी हिम्मत पमरे मेमनार को
रेसकर युव मामने की महीं होती। यदि मांग भी तू मा सो यह कोरा
उत्तरही देगा।
रामा मै एकममा प्रस्ताव रखा 'पा । तू बीना से पर्यों नही
बार मांगमेती "
सबकी बार एक साप स्मा पर बम पी । म्पा एक माप इतनी
मांगों को नहीं सदसको । बह से अपने बापको किमी मपराप से
पूर करने की भावना मेकर बोसी नहीं नहीं में उमसे संपए मही
माम सकती।
'देसा भवा पहबपनी पेशित के लिए अपए मांग सकती है पर
पर के लिए नहीं। रामा में स्पा पर साना कसा ।
रिमोषम विपिनाता हुमायोमा 'मा रे बाप में हमारी
भाग है। मेरी बहिन है बगानती है दिम किम तरह इम पहस्प
प्रपाका पमा रहा है। सब रास्ते पर है इसलिए तुमे यह तकमीफ
है
मा भी स्वर में कहा मरी तेरी सहेती का रूपमा
पायें ये नहीं बीरे-मीरे पुरता कर रखे। मारे , मरी मागे ।
विपता को एक पल रसकी मांगों की पुतियों के मामे
पापी और ममीस रमकी बाहों की ग्योत्स्ना का स्त्रोत एक पस
के लिए मूग यया हो । जैसे रसको रिपार बारा नगर के लिए पहरे
पुरासे से पारन हो गयी हो ।
इन्दिरा मामी भी अपनी मास की बात का समर्पन म्यिा
"तु हमें इस संकट से पगारना ही पोपा । यह हमारे पर को
सतपासबात है।
पाका मनुरोष
स्पा मेसी वियपण ही भरी उसकी स्पीति में नहीं
मदूरी पीमित की निर्मम पिटापी से पोर पोरी करने की
सीति प्रदान करता है।
दूसरे नि सए मा गये । सामा गोरपरा का नया ।
पा पाप पए मपनी मा हाप में भी पोरी पदिय । म
माही पर साप रिल से अपनी इस पामेनूरी मापीपरी और
से एक पा एम्हा मिमे इसकी पुमधामना की।
मेपिन बितोषनी मपी पेट नही बनी । उमके कपड़ों
और पहन-मनपा स्तर वा नही उदा।
इम्पिराको भी परे सितारें वीपी हो गयी थी। मापिर
पसने पर ही पाटिन की निसवार पहन सी। फिर ममा पा? मान
मेपर में पोषम मना रिया । गास-बहू में उमरिन फिर बड़ी तू-
में हुई।
सा में दूसरे ही बिन इन्दिरा का मोहासा एक पा मेवे एमा
को डर दिया भाभी कोरबा गेटमा बच्चा नहीं मासिर यह
मीरम्मान है। इसे गितमा मुमत कपी उपना ही मनु तुम
परसतदेमा।
माकीस्पोरिया बापी । पटकार कर रोमी
बबानमपाम ममा । एकविसात की मर कर बाप मिति
बात मत मार । मुझे उपदेश देने पनीरी मेरी कोल पंप
होकर मेरीही रिपाती है । अपनी रा मामी को मात मुझे
तकलीफ होती. मी में रोस्तो-रोकती मरी पुनी परगाह
को बिसीकी। मा पोरका हाथ पमीन पे मारा।
प रह।
बौन सम्म । मैं बता मेरी तरह मेरा भयोम सादी राममाम
एक बाप बोला "चुप हभितोषण की माँ हेरी गुजान की भी
पुम पम नहीं निकासाती। तेरी हासनाव मे त परकी मुख-पाधि
पर हम भी इनकी भोरपीसो पा पाया । राम पा
इस बह में सब परपया पारन्टोना कर दिया है। सभी इसी को ही
और ममा रहे।
मैं कहता हूँ कितप रह पर्मा में तेरी जुबान सोपत्मा।
एप।
मां फूट-फूट कर रो पड़ी। उसक र रोने से में बहरा हो गया।
हरका देवी से पुराने लगा। पोटी नरकी रेवा भी सिसक पड़ी।
पामर नसे मां के रोने को देखकर रोना बा पया पा। रामा तमापा-
बीन की तरा हाप की पुस्तक के सहारे मपनी पर्दन को टिकाये
निस्पंव मीठी दी।
धीरे-धीरे सब पय ।सामा पहर हो गया। किसी ने भी सपि
से नही जाया। स्पा इम-पुलिया और मिरा मे मुह में राना भी
नही गमा निमोचन इस तनाव को केवल ममाप ही समता।
पत पा गपी । नीदी मी पायपी। इन्दिरामे ना चाहा कि
मा नपने पति को सब गुह बता कर अपना रित हसरा घर से
मेकिन यह सेवापे पास ही सभी सोये हुए पे।परा सी भागार
से कर कमरे-दिया की नीर युत दीपाती।
पह यव मर इसी क्षमास में पहरी नीद नहीं सो पापी ।
।
x
x
x
.
पर ठिठुरती हमारे पत्तों पर किसी रामनि ठी हो पा
कानों में ममित हो रही थी। साई सल्यास पाणीपी
पावे-पाते मह पर पपी। बसम और पचन सहसा मारीपम
४.
उसकी पसकोको सपने मया। मने एक बहाई मो मार बासस
सरोका।
मैने रेखा-सा परराक परे । पौदों पर
तो हमरेनहमके पिए भी।
राठौर एकात।
मेरीबाव सर पारे पर बम मपी।पर।
मी में बपने मुसको तो तमी। for TET पस
पारोपौर रेया। सब पोये हुए सने हामिमान का सास लिया।
फिर पारेर तक अपने चेहरे कोरसती को।
देखते-रावे खो बालभर मामी। उसमे पीपेकोरवरिया
और पहबपने पारी बोर नेहए परफको रेसने मपी। मामी
की एक पनीर में ही भैया की टीम पर बा पिरी। पाप मुर्रा सा
पठरी बना एक कोने में बोर से परहिं में रहा। एसके पायठाने
माँ अपना मुरघोसीपी । पतकी मगर बरे-वारे दूसरी
चोर भाषी । पूमारा पड़ा पा मोर पापर पसको यह भी ी
हो बमी पौ। रोबर्टन कूठे पो । वहाँ से पी नगर और
सिमी। भाई की फटी पेंट बौर परी विष्ट पमे कोर पर अपनी
सम्पूर्ण कामासाप सापभी।
गह शिान होकरी। उपका सर मौन हाहाकार करा
'एसी किमयी। पासा बीनारक सीनता
मारक रिए और भीपाक।
बसने पम्प करना।
गलमय समाप्त हो गया।
पर उसके अन्त में बनेगरक को कोर मिल सकता है।सकी
पस्वीर को कौन सा पर पिसका सापका सन्तान हमिट
पहरे पर की तरह
यह बहुत देर तक सिसकती रही बहुत रे तक तापती रही।
नबाने उसे करीरमा परी?
स्वप्न का सवरंपा संसार।
बोहा वीरान पक्ष ।
बेपन के एक मोर पी-ऊपी परंत मासाएं दौर दूसरी मोर
भूसा-नवा रेगिस्तान।
उस मयामक संगम में एक युवती एक चुकी बौर पर पोत
रेपमी बाबी साहो पहने करय विमाप कर दी है। उसके गानों
पर गर्म-गर्म भासू इतक रहे। मोर पसका चेहरा निरन्तर रोने से
से मुर्गा पया है। विपार से प्याकुच उसकी बोलें चारों बोरर
ही हमैग्नि एक मोर मन मोर इमरी मोर सम्नाटे में सोपी
पर्वत मालाएँ।
गुरती बहादुर सही है।
पीरे-वारेमा पास माती है। उसकी मारुति स्पष्ट हो हो ।
पोपा है। स्पा पर्वत मातामों की बोर रेखती
है। पीये की पना होती है। उसका रोम रोम कांप बाता है। यह
भाती है। उसकी पति पवन प सी और उसका अपरंपा परीर
भापता हा बहुत ही बाकर्षक मप रहा।
बह एक मूनी मोपी पर्वत बाटी में पारपतीपीठन समीर
का मौका समोरकों को सूखाने ममता है। धीरे-रे मा सार
होती है। पान के मारे रसका पंप मप टूट रहा है इसलिए उसे
भगवादी नीर मारती है।
पाएरममा बर पर ।।
उसकी मां पाती है।बह पीस परती।। गनी कामे मोग
'भपे में म्पत नाच रहे हैं। महाप में रिपाठ हरियार ।
बार उनी म पो बसी।
काय पुन बोलता है।
परेमा
1
४२ एकमनी पाने सर में वा- हम अपने बना करपे प्रमान देवररे की बसिहदेवी रोमही तुम्हारी पनि से होगी नहीं । हमारे रक्त से भर पर पा पोरसे हाहाकार करती है। इसकी पनि मुम पगी। सपना मंब हो पया । उसने मार मार पसानी। पानी का एक मिनार पिया।ौरतकमा मापकोगमारस्त करती रही। बह स्मण सकी मोमावा? धीरे-धीरे ममे विस्वव किमा। में सभी उमः विपम वीनस ती 'पमानों ने मोर रता है और वह उनसे गिर रही। बाने माती बिपी पायर पते एक- पग का सौरा करना पड़े। अपने बापकी महा पीसामी परे। बनने पापम बम्बेराकर लिया। पर उसे मार नही मापी। हरकी मम्मी और सूची पत के प्रस्थान की पड़ी ममी गाव रबी। उसके लिए यह सर पर से पमा किया इस भूनेपन को सबपनी मासे फिर बचानक एके दिमाय नेम मये-मेगा मोगल वाम। पामर भर बाबी। यह विमानसी-परसा औरण बहसा बीमित पना। भात्री पंपाय कर रही। मौकामाबारेए बाकि पेशाब बाहर किया बाम पर पानी में हमपाको प्रोपा बामका भीतरभाकर की। x
।
6.का मौसम पमी भयो
भी में बिमोचन बोर इमिराको पासचीत करने के
बरसर मियते । मा गोर बाप बाहर वार गमकर सोते । साप
ही एक छोटी सी लाट पर रेषा । इसके साथ ही र गनी तमिठने
भी मूरपड़िया होते है उनके बिस्तर बाहर निकम माते है न
पम्पत्तियों में भी जिनको भीतर की पर्मी सहन नहीं होती है।
माबार पापमो गये थे । भामी इम्बिरा पोकेसमा रातको
बन-उन पार सर-संपर रही पी। बहकी-मी रात को एक पेटेण्ट
रेसमी पूट पामती पी मिस वह सुबह होने एप पूर्व मन में
बापस भीतर सती पी। रामा इम परिवर्तन का मर्म समझती
है। पमा इम पोपा का बर्ष समझती ।यसभामी को
रेप देस कर मर मुस्कान बिखेरती रहती है। सम पेहरे पर एक
उग्मार मरा मनोनापन बाप पाता है।
कपा ममी तह मही बायो पौ। मानकनगर से पाती दी।
उसका मापा किसने एक ट्यूमन कर लिया है मिससे परकी
इन्कम में पास उपयों की वृद्धि हो गयी है । मो रस प्यूपम है
समनपर पी पर मामी गत ही पुरा दी ।मिलोपन में बहिन के
इस प्रस्ताव कोरसर में मान लिया। उसने सपा से
पहमी हा
किन इसमें से पच्चीस रुपए हर माह पमी सहेली बीमा कोरे।
पा बापी।पसको माखों में पान का ममापन पावादी से
विपापी ही पुस्तके पोड़ी सी बस्तन्यस्त दी। एसने पम में पुस्तकों
को बाते सारे ही मेहनतसर में बोली
मामीमा
रोप, बड़ी मूय तपी है।"
भानी तुरस्त दात पापा पोररवाना परोसने मदी। रामा
सापान मारहा "कन मुझे पाच रुपयों को सस्रत
1
"पयों।
सहेमियों की पिजनिक
भयामबममा।"
भया के पास से बागकन । म मानिक भी एमस
माराराही ना, रोमीम।
रामा बड़ी प्रसम्म ऐसी पहन रे अपने रिस्वरे पर गाकर
पा पपी। माँ बहन भी पता नीर महाँमा पो पो। यह
करके ही बीर पा से बोली "सुने पर्मी ही नमती।
में पर्मी मारे मरपोर।
'तू पामीर में पैसtr"
"पा तू मेरा पगार मतकर।" उसके सर में पाया मनुगमनेर
पामा- माघे कहकर मार भर के लिए मुझे बाहर जाने पर
"वा चुप-चाप या साप सौपा।"
रामासी-सुपी बार नमी बपी । इनिरा मा को माना
विमानास्पाइमिरा की चमकती पोपासकोडा सका
मन मनमानी पपा स भर माया । पा सके विवाह का बोड़ा,
नग मम्मम कर सती पर मन में उत्साह पाया गया
असे पानती।
इमिरा मनरवरे पर बपनी नगर टिका र एरे सर
इम पार तूमपनी सहेली कोपए रेकर मेरे लिए कपड़े
गमगरे तो जिवना बन्यो। मेरे सारे का फर पपे।।'
सबनमा- भाभी महीने पए नहीं पहले तो हमारी
- ससपेसी और पतपत पर हमें कोई भी एक पैसा
४१
सकार नहीं देमा। मरिकलेम ही ऐसे पोप काम माते है।
"तू ठीक कहती है पर मुझे अपफटे कपड़ों में बना बच्चा नहीं
मयता। समने पम सपकार एकसम्मा सौस मिया मीर कहा
कि में पड़ी निवी मी नहीं हूं। काना बदर मैस बराबर है वरना में
भी तेरी तरह ही मौकरी कर लेती ही टपूपम कर मेती । म तो
केशन रोटैम रोटियां सड़ सकती है।
मच्या मामी में कोपिएकरगी।
इन्दिरा पो हमसे बड़ी सोलना मिमी।
भैया मा पापा झाप बोका बाहर चपी पपी बाब
इम्भिरा मौर मिनोमन दोनों के साथ-साप बामा डापा । एक से
बार एक दूसरे में एक दूसरे के मुह में कौर भी गमे । जीवन के
मसीम मुनव बम रनके लिए बहुत कम माते थे।
हरिरामे साना गैस कर कहा 'म परा अपने पान मेवार
भेती हूँ।"
बिमोचन म माम पर पुटकी मरी। छान स्पा मा पपी।
पा का मन से भर पाया । मोष बैठी हम मोग कितने बमामे
है। जीवन पर कोई भी मुह हमारे हिस्से में नहीं । हम पस ऐप के
पपीहे वहाँ माति का अपम नहीं।
उमने मनिग्या से पानी पिया।
'मैं भाभी बाहर मोरपी पमी बहुत पी है।
इम्बिरा सब गमन पसी । शिमोधन संकोच से पा गया।
मनपा की वह मुबह इम्पिरा रेमिए बहन यमदी मुबह पी।
मह सबसे बड़ी गुम पी पर गुम की ।
रोनित पये।
या सिरी मी है या प्रतिसदस्नूर हि विमो बस्त
मही से गहन मिनाबीर बिगो पाम एषनहीं उसनेहमीर
भौमता।
बाप बीमार पड़ा।
एमएक पर पार में ममा पार बगा। इसमान में भी
कराया पया। हम पिन्वायनाबरों का जमाव । पितोषन
मानिक मे मी ऐसे सेट के समय से सोपए अपिम रिपे । मेकिन
4सा और पाहिएा क्या किया गार ?स समय भी मा की
सदेती काम पामी रपया नगर पर्ष हमा पर पिताजी नहीगर
सके। मा विषा हो पपी। मेरा एक मुल वैसा ही सानी हमेमा
लिए पता रमा । सारा परिवार मांजर माविक संकटा में पुराने
ममा।
साप राबर माता पारावारे परिवार में परमर पुनमित
भरा पा । एक अमिम सरस्म भोर मारपीय की तरह।
मर्मी के साप पा सुई।
विमोचन की मौरी एट पपी । उसके मासिक मे अपनी पानी
पौर की दुकान को..गर की पड़ी में मेष रिया । यह नारी
कम कभीमबीबीपुजीपति वर्ष भी गया पर
है?रकारी प्रांगों के नीचे पा मानपर काम करता है। सरपर
एक बान किती है दोबह इगर पाडू पैराब से काट देता है।
धितोपहरबान
रोपहर की।
इन्दिरापरास पति को बममम सौम्ये हए या हो सका
पमेगा पर एबमा । समोर बाहर पी बोनी, गया
"क्या करते हो?"
४७
"प्रैक कर पाई। उसके एवज में मुझे सिर ना ही मिना
रिपोपार पाच सौ रपए मासा -पग माफ हो पपे बीर
एक महीने की पसार मुफ्त में मिली। इन प्राइवेट मौकरियों में पाही
तोहराबीरिय मासिक मौकर का पत्ता काट है।
बापया हाया ?
से तकरीर में मिला होगा।"
माम को घर में एक बार हुई।
रममें काफी बार-विमा पापात यह निरषय हुमा दिपा
अपना पाना पोडरमोरी करेगी और त्रिसोधन यी नौकरी की
समाप करेगा।
सनि तु मारीया को ? त्रिसोधन ने पूछा ।
'यहाँ में टपून करती हूँ वही सेठ मार । बोधे माम
उगमे विनम्रता म कहा।
'मुझे भी सो यहाँ समा रो। मपा मेरा।
'तुम्हेंदो मौकरी नही मिम माती।
पनि पर्यो।
पाकि तुम मैट्रिक पाम नही हो । दुनी या परामी तुम्हे
रतमा कर म बहा बपना पमान मही परवा माती । मैया तुम
पर्यो फिर भीरे पीरे तुम्हें मोती मिम ही वापसी।
पाकी मोरी मम पपी
।
विमोचन मौरीको साम मे मि पर मारा-मारा फिरना बा।
भी परमानी में कामपना एक एक दिन बिताता पा। रात को वह
पाता तो इमिरा मोर मा म म मा हवा मिलता था। मिरा का
प्रमुख मोर उसकी पपा मनोनिदिन निरिमा पीपीप
मोमबहे गामने रोिप करती थी। रमे बहती महोती
पीविरहाने गोमा रवी की।
४८
एक रिम व दोनों के बीच पानी बार हो रही थी ।का
पामयी मह भाभी परस्मा पही तुमपर्म नही पाती मां को
गरते बापिर यह हमारी मां है।
'हो में पवार ! ममे तो इसका का विहान रण गरे
घुमम पहे पर बर मुम से दुच भी नही पहा पाता बब में एक की
दो मुनामे बिना नही हसमती इन्दिरा का नाप तमतमा हा
मौर रह पा सम हापो का परम्पटा कर शहीदी
मने पृभा में कोई पोड़ी की वप रक हे ।
सेनि
हम मीरी पहबाबी नहीं सह साठे । राप मर
भया इसका मवता मह नही हमादि मां को कोई इग्यत दी।
'मा की एन । उसने गुस्से में वकारे ।की बॉयों
में
पृषा बह रही हो पपी। यह बहुत बड़ा विस्फोट कमा
चाहती थी किन्तु उसी समय प्रिमोशन में प्ररेणारया बोरया सारी
स्थिति में परिषित होने लिए पाबमा होमे धया । मह पौष
ही सारी स्थिति से परिचित हो पपा और उसने इमिरा को पापन
की तरह पीटना पुस्कर दिया।
अत्यन्त ही नाम और विरारक दास बा।
पिमोचन की पिटायी साप बिरामेबपने मापको पूरी
पप पौटना धुर कर दिया। उसके बाम बिखर बने और पसकारण
माल हो पपा । पासुमों से पसके पास पर दो परे मोर पह
बोर से मू- करपे रोने लगी। सपा मै मिलोचन को गोकठिनता
सकार किमा बौर पसने भरमौत दृष्टि से इसकी बार देता ।ग
गया पत्र माकोर पर कराया रेपो पब हाय
हाय पोर किप-कप मची रहती है । सबके सब पानवर हो गमे है।
एक मिमट मीम और जाति नहीं। परमपम नहीबाती दौर
पर यह न । और वह घिर पर कर रही सुपको
Asode
नमा । रेषा भार रामा मी-मीट पर बी पी पी । धम्होंने पाया
को रोते हुए वा ठप रे रोना बीपी रखा। गर्मी।
इमिरा बमीन पर ही रह रही थी।
स्पा मामी पास गयी। ये घसमा चाहा। मामी मे मा
कर पमहाप को रिया भने मत रहो हो पया
४पमा हपिटा और पिटा इम कमी से पिय समी
रीमाकोरमा पर मेरा मह टपरेसा तब तेरीमा रकमेये
की मापरी होगी। मारह हा मारकर रो उठी।
स्पा को मासूम या कि उससे कोई मा पो पपा है।
रहबपने बापकोराबी समझने सदी फवार उनकी बातों से
बम पमपमा पाये।
"मरने रेतून गरी माह हम सबको सार ही रम,
मेनी। पिता बीमर बये और मेरे पोपबाम प गये।
पिर पता बोरकर मुझे मार पिए। रमिरा बीवी ।
"तुप पुप पो भया । मममान के लिए पुर हो। मैं परिल
रोगों के कपड़े में नहीं पोसती दो महसमा गतामाही । बाम
मेरी म पोम को मये।"
"मा पर पपी है। मो सास सठिया पसी है। पर
पहमपम मममर, इसे हो रकम को सामने नदी
बोलना चाहिए।
'मैं बोल भी और हगार दारोम्पो चाहे माप मेरी राम
ही निपान रोगिए पाका रेकर पर बाहर र पोभिए, म मय
परने वाली नही हूँ। यह मा की तरह नमार र मयी।
'पा तुम गम पामा मनुहार गोली हूँ।
बिमोचनपुरो दया।
बीरे धीरे बोमिन बाताबरण सामान्य होनमा । मामा ५
रित भीमना । मेलि राव को मामा किया गहवर
पानी की तुपामरकर परमही नहीमापागाती
रही। मिसकती-बस्तीगी।
कसा मी भर भर बाबी।बास रोको बीच यो मोती।
यह पोन दोनों का पराममहा।
उसने बारे में रेखा-सब सोये हुए है। मुझे भी भीरबा
शा
x
x
x
मिरा रम नि पा की पुस्मन हो गयी। पाते नाश
मनामा चाहा पर पहनहीं मानी। पामसे बात करने की कोधिप
करती इससे अपनी पुरानी गलतियों को बमा माता की। मा की
पापभूती से विरारिराम भी रिया "मुझे माह तापमा
नहीं। मुझे हम परमोरासपने मुममम, में अपने गुम
स्पाहारमयी।
गिलोचन पारकत मनी रेगका बाम पटिमा होटतम
पता पा। दिन मर मेहबारबाठ बामे की चाय पी पाता और
पाम मोराफर पो बाताब समका बोपारा पाठा गाता
पौर उसो गपो बभागों की मुटन पसरे दिल को एक-एक परत से
टकराती तो पर मेरी सोयी हुई बार में एवी पोर में अपनी पत्नी
इन्दिरा को माबोस में भर देता और उसे इस पुर्ण पप से
घूमता
किम्मा और रामा काम होगा। स्पा अपमे बापकोषम
करती बिन मा की नमी पपानी परम विपी बासयाकी
बाप एकरवारों में प्रसपाती बारमा सम्पको कर
मानसिक तृप्तियों में सवाती।
में इस पारे-टें परिवार को देशमा। पता नहीं क्यों मुस
यह मय ममता दिप मनिष्ट होपा बार यह मत इस परिवार की
गैरत और बाबा को मिटा देगी।
विमोचन पा रहा है।
उसकी पेंट पीड से फट गयी है और कमोग की सिर पर मन
बम र समग मरीबी का मार गा पा है। यह बीड़ो पी रहा
है। उपके बारे को हीमों ने पर उभर कर उसकी बची-कुची
मुन्दरता को भी जाम कर दिया है।
स्म से बाहर मामी से बोमी "भाभी मरी यह मॉक
पर पपी है । सत में माफिया मेरी बड़ी हसी गाती है।
'अपनी बड़ी बहन को क्यों नहीं कहती! तेरा मैया भागात
पर मटेरी बाहर भी कोई मरा नहीं कर सकी। हो
तेरी मां से ममबत्ता एप पए मिल मरते है।
रेखा मा के पास गयो। मां सराही वर पोर में पीलमा
पाती पी पर गिराकी कठोर मुद्रा बार तीबी मसर में सरते हुए
बामोरमोरेपार पपुप हो पपी। उस लि की मार्मिक मामा के
बार माइनिरा पररने लगी थी।
'मुझे मारेने पाता बेटी हपार पसा पया।
पहाटे एए कहा।
तपोभापपी रामा।
पारास पार सुस्त पी। माबर पुपचाप मैर पर मिर टेक
परमपरठ यवी।
चिसोपन पूछ "क्या बात है रामा? तू बार लनी मुम्न
पर्यो
पिर मे है।
'पाप पोस।
“पर में दूध नही है।" इन्दिरा बापी।
मौन बाम
'टदर में तुझे हरम से सा देवा।।
इसकी बरत नाही। इमिरा रामा रे पाम मा गमी 'मेरे
सापपन गरा कमपसी से माटा मी ताना बीर मामा सामान।
पाताभारा पीमेगा तब तक पाप पीना मोर एक एनासिम
की मोसीनीमे मेमा।
रामानेगा की मसमर्मता प्रष्ट की पर इमिरा भार ससे
स्नेह के अतिरेक से मिमोती पपी । रामा भी मामी रा बरपापित
स्नेह को पाकर पाने की सपत हो पपी।
मामी मे का पीपा बपने सिर पर तारा ।
दोनों मामा परी में मोटी । यहाँ कोई नही पा।
मामी में प्रापम से इए कहा
मसिर का मतलब
प्रमावती ।
"क्या मतमर? गरमी रामा। उसकेएम में
सम्बी मानेगामामा पा।
'मैं मम्मर पर सममती किरा मसती मा
'गया है।
'मिरी पच्ची नगर में भी गौरत बात बौरत के रिली
बात मुमसे चिपी नहीं रा सकती। में सब समलती है।
मेसा मा
"पया स्मरूप से झड़ा हो गया?
यो । ससे मेरा कपड़ा करों होगा।
पौकि यह खरी मुहम्मत रुपमा
'भाभी बह मेरे माई की तर।" उसमे बड़ी सापळा हे या
सफेर मूठ बोबा।
इन्दिरा का परिवामी पना नया । सने पुरम्प बात को पता
"रामा बात मा किसा पर का वर्ष बनाती है। बाबास
परी मामषिम है।बप लो तो हम कितने बरपा पहनते।
१३
हमारे पास करने को एक सा मी नहीं होता। रास्माको
रेखो हर महीने एक नपा मुट। मुझे पुष लाम में राना मगर
माता है।"
'मार
"मसरा पक्षाही समा।'
1
म मिर्फ
उनी रात रामा मे परमभी सोग सो पये बम्पा के पर्म को
मोत मिया बहीपन हो पनी । बहपधारोगाने ममी में पयी।
उसने देखा कि मो-मोक नोन मार और दुप घोटे मोट।
स्लिप ! उसमें मिमा पारिकम तुझे मेरे सार रात को पनाहै।
पर पर कोई गाना बनार बा गाना। हमिय मप्पा
एकपा मना मा तेरा सामोर!
रामा मुम्न मी उस स्तिप को देखती रही। फिर उसने उसमें
से मौत एक मोर निकाला। रस पर्म गो ग्यों का स्पोरकर
रवरिया
उसे रात मरमीमही मापी। बार-बार बह राराठी
बीमे मो मन में कोई संका गाम गाडी रामा ने मीरम
मापोह में रात सोपी।
मुरहा। पूपराम पमता रहा। पा र गाने को
समार। उसने अपना पर ममात एक मौा मोट पापर पा।
रामा पालिरापापा। नामे एक पार गरमगरसे
मगो देगा। सेतुरम पह मामम हो पया दिए किमने लिये
पकमरे से बाहर निसनी।
पारबार रमने रामागेपुरापा पमा कार मनाप
पमा पारपरपहर बायो। बोमी पासी नगर
मारे मुबी की।
'तूने मेरे पासए निमाये। बीमे सेस्मा बोनी ।
मही रोची मरे पए मों निममूपी ।
स्पा रागरसी पर पड़ी। एमाहॉटों पर
तुरन्त पुरता मरी मुस्कान नाच सटी और रमने अपनी मुद्रा कठोर
करमी।
पिनोपन बना गया । मी बाहरसाट गमकर मोमवी। रामा
बीरे का 'भाभी स्पा सी होमिमार मिकती बरे र एक
समीरमा ।"
हो बहसपने पेटटेरापोरर' ।
पि-पपरकी बम-बापरखाक में मिमा पी।बार
मानेरे।
"बारह स रात फिर बाहर रहेगी।
या पाती है?
करती है । मेरा भरोमा कर, भूक नहीं बोलती।
उसकी मुष्टियो तन गयी।
पमा उस रात को देर है बामी। बाते ही उसने भैरा एम
रस का नोट बमाया । शिम पर मोती या मुझे उस चौराहे
किस पर मिमा।
निमोपन बार की तरह पस मोटरसपट पड़ा । दिनों
बारसने बनाया नोट बपने बाप में चापा।बहनोट को
पासी मवर से देखता था।
हरिरामेकर पूछा 'माम वरेरक्यापाबी
'बहेनी साप सिनेमा बोपनी पमी पी।"
परजाना चाहिए।"
यामाही मिक्षा।
देखा बापने " इम्पिने पितोषन की बोर मारा।
धितोपन ए सी सी ईसर बाना मी कमी-कभी छोटी
बोटी बात को लेकर पाती है।चारी मन्त्री है, पराम बापी
तो क्या या
रामाको मन-ही-मन बारपर्य हो पाया कि मामी एकपम
4से बम मपीहै? यह उसके पथ पी? उसने प्रश्न
परीभर से पसेरेना। भामी मे मार मा सिकोड़ा।
उस दिन पाव पर मेरो म हो गये।
रामा मोपए परम हो गये। उसकी बार्षिक दया पुन
राब हो गयी। पाप पर्स बर मा बाली मिनता बा। बोकि
रमने एक मममारी किया, सपा लिये विनमें एक मन तासा
मया एनाबाबोर जिसकी तासी इम्भिरारे पास रहती बी।दिरा
भूमे म्प से पाका पम मेने मम पपी पी। पितोषन मी पा की
ही वारी करता था।
एक रिम मुबह ही सुबह स्पस्प बाया ।
पा बाहर काम कर रही थी। स्वप को रेस कर मुस्करायी।
पुस्मा र बोमी मने गो मममाया पासमम बना?"
"एकदमा
'नाटक में कामी नहीं मानी चाहिए।
'पप भीनहीं।"
जाइए भीतर।"
सस मीटर पया। पिसोपण हा 'बार समभी पार
गुगनगन टपक पड़े?
पाय पीने की चाहो पषी।मरा मामी मे गुमाया था।
पसरूपानीमोरगा।
दो मने बापो मामा पापा सहरसा में
बात पर किहो सौ सयों को सम्तमारत है। बाप पोरे
निॉलिएसम्।।
रहा। उसने रेस में पैसे निकास कर कहा "बार मुण
मुबह ही बापके पात माने परिसपर पर पर बापा है।
लिमोमग मे बार में ही हा महीनही बाप पने पीगिए।
'सम मतलब है कि बाप मुझे परामा समझते हैं।
बीच में इन्दिरा पार पए पौन पिये। ये बापहो
परामा सममठे तो समझते हैं पर में ही समचती की
मांकरी नपते ही पापस कर दी।"
रामा की बालों में एकपमा दी।
'उसमे मन-ही-मन कहा 'स्वरूप पास इतने रुपये।
बा
उसके पास की सीमामी।
उतरे जाने पर सप वप सा गया। रामा मयुर सार
मैं हा या हम नौग माप मामासान नहीं भूने।
पप सम्पदा से निवृत होकर बाहर पया र रामा एकाएक
बांककर पर से बाहर निकली मार पिल्मायी, स्वप भैया मो
स्वरूप धया।
सम्म एम सफर पापस मुहरा।
हाफमे का अभिनय करती हुईमा सम्पपास पहुँची। मानी
में मारती याहीपी।सम्म में अपनी मावाने मान रख
मिना। अपना रामा को रेसने मना ।
'भुगोया ।
'एक बात बपर तुम गुराग मानो ठो?"
'तुम मुझे भम्पा कहना मोह से हमारे समव।
इसके अनुसार यह सम्मान और नही है।
१७
'मोह !" पर यमीर होकर बोसी "म्हारे कहने का मनमब
कि हमारे बीच मुम्बाम है से है हमारे समापन होने
पाहिए से मुझे यहाँ दरबार मे रिना गला ही नहीं है ? सस
कपन बार प्यार में पामार है। हम सभी जानती वा करते
मीर मबहार में हम मपा बारो परेकाम करते है। हम एकाप
सत्यवादी नहीं बन साठे । बन जाये तो यह दुनिया हमे चिन्ता नहीं
पने देसीएल पुनिया ने अपने पारों मोर एक पा शाम रखा है
पर पाने ही यह मान ही पी मोर बगाए बन जाती है।
सहा रामा है पम्मीर मुन को पैसा पोर बह एप नहीं
"तुम कम दोपहरका पर मामीये।
"लों?
'पत गरी राम है।
पूछा।
"मानोगे या नहीं रपने प्रेमसागरने पर
मनि माने गया नाम ? तुम्हारे घर में।
मानी नया पाहामा तुमन रोमो गए रियम'
मा रोपारको पहामी बुड़िपा यही पनी गती।"
फिरमाननीय रया।
x
मिरा दिन।
रोपहर।
रामा गोलाबाम सम्पपीपीपा रही बात उसके
धरने पापको माया पा । पोप में पर पामीन मारियो
पुसदी बाम और।
१८
एक बार मैंने इस पुस्तक के रस बारह पृष्ठ पर दिए । गाया
माया में अपने मन का संतुलन पोठा । वासना का विकट मुत
मप सोपको मेरी तरह पा गया । सास अपमे पन को सममाना
पाहा र यह नहीं समझा । नासिर मजबूर होकर मम पनी ममीप
पानीकोठरी पर बधाकार कर लिया ।पया का रस पुस्तक की
पड़ने के बार में पासना सेवा हो पया था।
नही पुस्तक सम्हास में पी । पता नहीं ऐसी गन्दी पुस्त
धोरिमा कहां से माती | 1 मह दित्ती रे को रापानी
बिदेसियों का टीप मान (परमार की परह है) और यहाँ ऐसा
पाहिप ? घिमि हमारे देश के गुप्तरी पौर सिपाहियों कमातों
पर यह एक माषा-सा?
सम्म या भया।
सम्नाटा एकाव और एस पदी पुस्तक का प्रभाव ।पमा ने
इपर-नगर की माने कर सके गले में मारे गमकर कहा "मुझे
मी तुमय भुमरे पितामे हगि सिर्फ तीस रपए म।
कौन समुमका
खोक्यो नही कामों के मुमके कितने बने हो पानी
स्वरूप तुम्हारे पास माकन बात ये है। पर तुम भैया को
बी पए रे सपट हो तब मुझे हमके से मुमके भी यों नहीं बिता
मेकित पेकिन मैं पुष नही समाती । पुर्म हमके रिसाने ही
पागे का हमारी दोस्ती ट।"
"ऐया न कही रामा मेरे मम में गुप भी हो पर यह भी
सरल है कि मैं तुम्हें वाहवाई।"
माभिकर बोनी "बाहते पार हो पर मुमके नहीं गिना
११
'युष रिन की मोहतारो।"
*पयों?
पर हापापी में है।
"मली। एसने छोर मुगा कर भी मुझे हो बहस हो पपा
पादितुम मु पार करो।रबमान तुम मा को चाहते हो?
पापा मुभीकोपपने मन में समेट सेमी।"
'नहीं-नही पमा उसने रिपाकरहा ऐमा वीमती हो?"
'मा म तुमुमो रिसापा।
रामा हरे पर पुगियों का सापर महप उठा । उसके मन
सरोवर में कई उप म तर तये ।गार सामने ही
हुई बोली 'सस्प मेरी कसम खाकर पतामो सिरे पहले भी
तुमने निमी से प्यार म्मिा पा?"
बहप पा । वप भर के लिए उमरेमपों की तपन मर पनी
बौर से महमूहमा से सपेरे को मारी पार मोबाईप
पपी।
'बोमले परों नहीं। समाधिम मरायी पाप
समार
ममय शतरह।
'पया बोसू ? पमा पार पहोनही रागिम कोई प्यार
नहीं करता।पार के लिए सभी तरसटेगारठे और उस वापरकी
एकही माय मारपनों की बारमानों को दूत र मानी है।"
"नमें भी त्रिी ने पार दिपा में निर्ष यह गाना पाहसी
है? पमा बाबोस्वरहा।
+
मुम पर भरपूर दृष्टिगती । म प्टि में मिनी
नापी मपमहीन मरेप-मगार में
पीतर परत रियापीका पापा। डने गए सरमा
मैंने प्यार किया पा। एक माकी पी तरमा ।म और उसका
भाई गाप-माय पदने पे । माप साप ही पाने में मार पठ
कोम ही गोता पा । मीरे-पीरे मेरा समाप तरसा से बड़ा । पहने
हम बलगम मीर भामेग्म में एक पूसरे को बनने अपने प्रेम का
प्रदर्शन कर रहे बार में हम पौड़े प्रकट हुए।
यह पटना रामा उन दिनों की पा में फिर इयर में पाता
पा। मेरा सारा समय प्राय कामियममाया परतार पर पर ही
गुगरता था । एक मैतिकता का मारप बोटे हम मोय अपने प्रेम की
रोर का भगवन र रोपे।
पह एक पन्धी फैमिली थी। उमका पाप एकनीनियर पा गौर
समकी मागोमगीत में विपी। परमारी पहिने गौरी
मी एक एक मराको प्यार करती थी और तुम्हें बारपर्य होपा हिर
गहिग दूसरी पनि प्रम राबब से परिचित पी पर इन बहिनों
के बीच एक मौन समझौता पा। यही कारण था कि हर एक मरी
का राग एपाठी थी और परारा मदर मी देती थी और मुझे यह
मुनकर बदा ही विस्मय मा किसमकी सबसे छोटी बहिन धिमकी
उ म ममय नेपाल वाहर वर्ष की पी यह भी एक पड़ोसी घोफरे
प्यार करती पी । मगवा पा कि इस युग में प्रग का तुमन
मापा मार बार ये ममी नपियो गर्म में ही प्यार पसा मीमर
पीक मौसम में सारा परिवार बस की हट्टियों समाचार
कमरों में सा बाना
पारमा सत यो पी भौर पम पर
का एक मत्स्य पा पा इसलिए हम दोनों पूसरे कमरे में बसे पाते
और प्यार की मपुर भीर समीती वा किया करते थे।
एपनि मचान उसने कहा, 'बाबो मुप्त से पंगा वादो।
मने उसे प्रपन नरी नगर से रेशा 1बह मुसराई ।बहरे मपनल
से बौनी 'महायोम
। मैंने अपना हाथ उसकी मार पड़ा दिया । मग समय तक यौन सम्मायी मेरा माम मुम्प के बराबर पा । मुझे तरमा से उप-छप पर मिसने में वानर माता पा । एफ बानिर्वचनीय मुग्न प्राप्त होता पा। हम दोनों ने पंजाये । मुझे सिहरन मो हुई 1 मा नाना पदामपा । दिन पुगरे। महीनो मे भी बीरे-धीरे करम बढ़ाये । हम में यौवन पौर यौन की सभी पनीरी बातें पैदा हो गयी । हमारा प्रमय किसी भी ऐतिहासिक महत्व प्राप्त प्रमय कबा के मायक-नायिका से कम नाही पा। पीरे-वीरे यह राबा हो गया। उसके पाप ने मुझे अपमे पर मैं बामे की मनाही कररी पर हम रात का छप-एप कर मिमते पे । राठ की महायों में शामोशी की मोर में चुपचाप । इसके बाद में ट्रेनिंग कमिए दूसरी पाह पाना मया । यहाँ से मैंने उसे एक प्रेम पत्र मिपा । वह प्रेम पत्र पसा पया । बौर पता नहीं रामा उसके माप उराको नशा कहा कि मब हट गया। मेरे पाप ने मी मुमस सम्मप ममामा कर लिया। क्योकिमने सनो मी विवाह रिपते का होर दिया था । मेर रिमाय में यम करना ही तरसा पी ममे दरसा से कई बार मिमने की टाकी पर यह बदस मयी । उसक कई प्रेम पप मरे पाम । म पनों को पढ़कर तुम्ई मयेमा कि पह प्पार प्रतिमाएँ वचन सभी पास है उपहाम है। ममें कोई ममरता परता नही । मारी पा जीवन में किसी से एक बार ही प्यार करती हैबह मपन प्यार को सि राहगता घे मप्ता भी देती है इसका प्रमाण होपे मेरी तरमा के पक्ष । 'तुम मुने पड़ने रोपे। 'पूपा। सारे पन मेरे पाम नही है। कुछ ही है। 'परमानोगे ? ममी पो। पर तुम उम पोंका निक किसी से भी नहीं करोपी पौर नही उगका अनुपित साम रायोमी ।
मा बागमी दी। दोनोपस पये। बाहर निकलते ही साप
बक्षमता प्रमट करते हुए कहा 'प्रमो में तुम्हें अपमे सप्ताह काम
रिमा पाठपा।
भकिन रिसाना पस परेपा।
बहरा
रोमो मेरी बायों से मामलहो गये।
x
+
X
रात.
पर में समी सरस्म मौर। सभी अपने-अपने कार्यों में पस्त ।
इम्राि बार दो युपपी। मिमोचन भी बार-बार मिय की
मोर रेण पावा। सा अपपाप मेटोपी। हमटी-मेटी को
पम्मा पापी पी।
मेर पर मुकी रामा भी पा रही थी। गर सब सो मपे । तर
इम्बिरा मै रामा को मो बामे मिएका । रामा मे मट से कहा
प्रमी पाही।। इमिरा को गुस्सा मा गया। यह दुगा धमा
होती हो गयी।
उमा मारे ही रामा में पत्र निकाले । पत्रों में कोई वारसम्म
नहीं पा। परातु म पों में एक माको प्रथप का बलम्त
भाबुकम्प पाामा मिति मस्त परिवार की मौकी पी। सरप
का पूरा माम स्वरूप प्रसार वा।
प्रामप्रिय स्वामी SP
में तुम्हारे पीछे सब पुपकर ही दुनिया का मुकाबला
यहाँ तक कि मपने पाप न भी गुदामना कर रही हूँ। अपने दिन
पर
की बात याने कोई भी बात तुमसे नहीं छिपातीमाती
मेकिन मुझे दुख इस बात कही है कि तुम हर बात मुम से पिपाडे
हो । मार सोपहर को भी तुम रामेर (रमही सबसे छोटी बहन
का प्रेमी) को पारों में पुण्बा मममा रहे थे। उससे बातें करना
पाहते गानघूम कर बीच में मा बैठी। तभी तुमने कहा कि
पायर रिचार मुने! बन कर बामो पर में माप गई पी । तुम मुझे
पही स रकाना चाहते थे इसलिए मैं उठी मही । पर मैं तुम्हें इतना
करती हूँ कि तुम्हारा यह दुराप हम दोनों के प्यार को पाका म सगा
२१ मार मी तरह तुम मेरे से बात छिपाने एतो पायद एकति
बापना में तुम्हारे प्यार को भी मा मममने को मगपूर हो
पाठ ? मौर फिर इमिए पगर बा छपाने की बजाय तुम
मुझे नवा दिया करो ता बममा पेमा । मैं ममी तुम वना पाहनी
ई प्यार करती हूँ मैं तुम्हारे पिला दम भर भी नहीं प मानी
पर तुम मुझे इस बार मिए मयूर कर रहे हो कि मैं
तुम
से
रकरार ? मैं तुम्हें अपना पति भाम हो। तुमने मेरी मांग
मररी है। गारी पी वो तुम से बर्मा नही कर गौ। पत्र देना ।
only your queen OCT
सरा पत्र
प्राणप्रिय स्वामीSP
मुझे शाम को या मरमा (उममे पटी दिन) वायू
(चिनारी) पागा माहिमे पर कहा कि सम्प इममिए पो रिम
कमी मामा पॉमिकी फिमो होटल में सहाई हो पपी है।
इस बात को नुन र मेरे लिप्स पर भारी मममी । मुने माम
है कि तुम पाका रोगी बने त हौटम में बैठे गरे हो । मया ये
बात परीक मामियों को है? तु कितनी बार यह पूरी हूँ
म बानी परी मोसापटी को पारो पर्ना मरे बोर
इगी मेकित पर तुमने मुझे धोनी होम लिया तो ठीकरा
सूब पगापमरी। रात भर होटतों में रहो। माप नहीं पी।
पयोकि पीसी में से तुम्हें एक पीर पुननी मौर मुझे गिरास
है कि तुममे पुरानी गरी सोयायटी और मार पीट मेरी तबीयत
हो खरार हनी पर पर यह बात सुनीता बौर पर
हो पपी।
[एक कोने में मेरे मरों में मिया बा]
मही तुम्हारी पमान बौर गापरा है जिग सार बाङमा
देश लिया।
वही निम्दपी की ठुकराबी
Torta
तीगरा पत्र
प्रापप्रिय स्वामी SP
मार बीबी (मा) मे बरन को सफरते देय लिया।
उसके बाद पर यह रसोई में बामीको मनिहा कि बीबी सबक
तुम पमा कर रही थी। मैंने यह सीरियस मूर में ना तो बानी
कहने मपी कि जब एमेरे हाँ ठीककारे को बनती। मेर
में । म यह बात बीवी ने कही मुग उनका जन्म था । समपा
हे-हम कह रही थी। फिर मैंने गा किनार का मूल्यों
पराबतो मने बनी 'गह तो बसे ही। मैंने पुप मी नमी
कहा। मैं अपनी जान पर येत पानी पिन हेरी कोई बात नहीं
म
दोनों कि पततिमा पैस रही है। परमैनेजा कि
हमने ऐसी क्या पचती करी? फिर करने मयी कि में सम्प से
पुमा किमने बाबू से म मी नहीं पा । फिर तुम्हें मामा ।
पसकेपार बीबी समधामा मोर मा पम पठ-छ।
पसके बार पुम बीबी के साथ बाहर यो। मन बीबी से पूध पाकि
-
गी। मैं
बस से तुमारी क्या बात ! उनानि कहा कि मुख मी नहीं। वह
माफी माप दादा पौर बार ही से नमाने को कह रहा था। स्वस्थ
पापा कि इसमें काम नहीं है। मैंने इतनी बार समझापा ।
फिर पन्त में पति मुझे भी मुभनामा किस का कोई पात हो
माती हो मेरा ही हसा होता । स ब Ruby bhaba हगि
मबीर सामबार ।
only your quoco
Turia
होगा पत्र
1
-
प्राप्रिम स्पपी SP
तुम्बीवी ने कहा कि सरता को भुस पायो पौर भावी होनी
मुस्लिम है पर पह गाउँ पसमे मुझे नहीं बता मेरे से तो बस कहा
किम से सममाया पापैर मेरे लिए तुम ममी नहीं हो पो पाहत
।बही प्यार को पहले पा मार बागी पारा से नहीं होने देवी ।
पर होगर । मो हाप में भी तो इनकी बाचा बानी बात है। दीगी,
पापा से प्रेम है। इसलिए वह मुझ से मीठी योग बामती है।
भारी पार होगी। मने तो दुमा हाप पाया । इसे ही पारीवन'
निभायी । बस रोग की बात है। पासाबी-मामी (स्वम्म
मोबाप) परी होगा। हो म म अमेर माइन नहीं कर
सकती किसान पा रही है। बवागमो को पना किसी
में भी मन नहीं ममता । रिमाम सुम पता है पर मैं सगीत सिम् मी
दो माह काले किसी पी तपोपट मी? तुम पर दोपहर
को मा पापा सुगमार पाम बापा रोपाप्मी-कमी पो
राईरे रोपाचागापा रो।म एक मरे पर भसे ही रें
पर हमारा रित तो हमेपा पास ही है। (ष्ट में) हो कम सुबह
साडे माठ बजे पीजी बार मौसी मा के साथ अस्पताल पापी दो
बा गाना । मौका मिन भावानिपन काBaby babaगिन
पर only your queen
Turla
पांच पर
प्राप्रिय स्वामी
तुम या पपे इतने मुवे इतनी पुसी हई कि बता नहीं सदी।
मैपित एक सास बात यह पाकि तुमने हमारे म मास्टर
मौरीकर के बारे में जो बातें पतापी पर ठीक ही निकली । मेकिन
समें मरता की मसती मही पी पिप पुर मुत मतमय निश्चममा
पारवा पा और मुझे मरने वात में देखना चाहता पा । मेकिन तुमने
मुझे पहले हो बामा र रिया पा इससिए में उसके पास में सी
मही और पस रिन कप में उसन पोनवी मममस्ते ही
करती । रसकी माने से नीमन ए पी है भकिन यह नाटक
मुनीर सिर्फ सरता को ही मामूम है और किसी को नही । पर्योंकि
इस पणा कोण्यामा पक्षाने से अबतार पी की बदनामी होपी
पोंकि पवार बीही पौरीधर गीको नामे में इसलिए इस
बानोपमे पेट में रखमा।
पटना इस प्रकार है-
तुम्हें मामूप ही होपा शि पवार पीने सरता को पोला ।
शिमा मार पनी दास नगपुर में मरिसर मी है। इस दिन
पहम परवरी में पौरोपकर जी बसर बा एक चिट्ठी मागा
पागो कितार जी की पौ। सरला माम। उस चिट्ठी में
बरवार पी से बनी मूठी मगदूरी बार सूख वापसी समाको
रिणाम पम मने भी पापा और मुख रिन बार एक पर
पोरीकर को बाबा और उसने बह पर मुझे पपाप प्रवप से
पिया ना मोर कहा कि इस पत्र का विसरमा से मत करना मार
पाकर वापस कर देना। मन पण पर मीर बह पप मवतार बी
का पा।
[पमा पर पड़ने में परेर म्पबयान हो नया पर्योकिम्पि
मामी में उमर नमी में पेशाब किया मीरापमा को मूबी दृष्टि
से रेवार सो गयी।
ममतारी मे लिखा पारिता तुम्हारी बहुत पार पाती है
मुझे तुम्हारा एक पर मी नहीं मिमा गा परेशान है। मेरा पत्ता
गौरीकर से पूध मेमा बार इस पत्र का विक सरमा है मत करना ।
मैं पुस्से में मर रठी। ये सभी मोग कितने पति और नीम हो पपे
है। मन उग पत्र का मरमा से जिम कर दिया। मैंने सोचा दिपायर
बह सरमा क बारे में चुपचाप मुममे पूना पाहते है मगमे दिन
मने गौरी से कहा कि मास्टर पी इस पत्र का नया मतसग है तो
कहा कि बाप बताइये । मैंने कहा हि मनार को मरता के बारे में
पूफ्ना पाहते तो पौरी ने कहा नही । इसका मतमा तो रित
पुम मीपा किमरबह मापको भी चुपचाप मुनती पी।
किर पौरी महानिमाहीमहीं पातार पी मे बापत लिए
बहुत दुषपदमामा है। माप मेरे पर विचार को मामी इम-नम
साम माना।
में फिर आपको रात में माकिम पर पोष
माळवा मोर मार-पार कहा कि माप मोमी मामा । मैंने कहा कि
माटरजी बोबी माप मा गाई तो? कहा कि महीं मोनी
दस-दान टाम पर माना। पदबाव मुनके ही मुझे परन तुम्हारे
बामे पाप पारमा मप कियह मामी मध्धा मही। माम्टर*
नेप में भेड़िया है होपियार रहना । फिर में गमा पो रिमात
गुपनी, मह गुरही मेरे से मतमा निकामना पाहता है।
गाव-चार पारी में फिर कहा कि बाप पानीम? मनमा
कि मापरतो मामी । भयो कि मैंने मास्टर को मारा।
६८
कहा कि मास्टर भी पाप हाथ में पा पाए। बार बीको
भी कर पारिए। परि मारपुर होठे पो पायप में उप पप्पा
मार देती पदोने मरी मरमा दो पोता रिया है । मन पहा
जब में कभी भी माप से और मयारी में कोई चिट्ठी नहीं की।
इस पर पौरी ने कहा कि माप को मेरे पर माना ही होगा और मेरे
पप्रमो का उपर देना ही मा। पाकर स्वा उमा पास
सरनाक मेम-पत्र बोर मने कहा कि मास्टर भी परा यो
सना वा सो मैंने सुना दिया। मैंने कहा कि परमही पाठ पी बस ।
उस दिन बार पोरी मुघे टेडी निगाह रेसा कभी पून
सूता है पर मैं उससे नही बोमती । भभी यह बमबर पपा एमा।
अब मेरा कहना है कि तुम से सच कहना मुनमा म ठोशा-पिपरी भी
मत करना पीर यह बात हरपिर पिसी और से मत बताना । बामे
या उपदेगा और मपर दे तो मा श्वे पनी तरह
पनपी । वैवात से क्या फायरा मोर हो गवार बी यही
कोt Examta नाम है। परमा उनसे मिलने गयी थी। वह मुमसे कुप
महीं बोली।बहुत दुखी है मेधारी। मेरे साथ तुम ऐमा न करता
पिर।
वय और इस सम् + पट्ट सूर्य (सिमक्षा का प्रेमी) भी
मारे नाटक किये-पर में पुसमै सिए। बड़ी-बड़ी मिठाया
मेगी
को प्राइवेट कप मर म दिलाया। बमी भी गा
माता-जाना है। caly your quera
Tarla
प्राणप्रिय स्वामी
तुमम राजोपयम में मिमने के लिए कहा और मैंने भी हो
मर मी नोति तुम्हारे पानिपन में पामे पार हो रोग हो गये।
fir फिर एकाएक र पपी। यह हारोग का मितना कहीं
।
बरगारम पर सबिमला मासरामक मूय में यहीं पर हर रोज
मिमता है ता रसा या मवाना रहा है? मार पर में हो
पी है । बौर म क फूल वापी हालत महग है। यह हारत
पायर मरी नहीं होगी। लेकिन मर म बरामदे में मिसकर मश की
बरनामी नही म मुख्ती । मेरा नाम बदनाम होया तुम्हारा मान
बपनाम होगा । एमिया को निमाह मै हम मरे ईसे तो हमार
मां-बाप गायर यादिर में पारी कमिए भी हो घर में रही निमन
की पात्र मो मान बहा मग्धा मौका मिसा पा । पर्योक में तुम
बाहर पाते हए मममाने मापी मौर तुमसे पानिपन को कहा पर तुम
नहीं माने । तुम हर राम इम टाइम या पापा करा । इस समय पर
कोई नहीं रहा । मोवी मेटी रहती है। फिर क्या है एक बासिन्न
हम याराम सन सको। सबर परामरे में मिलने की बात मो
कही बापू मा पाषा मे देख लिया तो मरा होगा? ममता है तुम फिर
मूर्य रीमा में मा गये हो। पारीको घोर र परामरे बानी
बात कहते हो? तुमने कहा पा पिपारी परमे babrnbn हपि
मौर पर मया पपे हो? गार में सीएमी हूँ बापी।
पपोतर चीन देना पीन।
होनही तुम्हारी
Tal
।
-
माया पत्र
प्राणप्रिय मामी s.P
मार रोपहर में पा पार से माये। संचमा यार पा। नय
रहीने बोरी मे कहा कि माना मातो! पीरी मे हा फि मही
गास मी मुमे पार से माऐ है। बाद मे गुम्मा होकर रहा कि
परमही मारमा नो पौर नपा
मापेपा ? मुबह साया म
मराज पापा म पर पा दी हो। इस पर पीरो रो ममी बार
कहा किवा हो बब मौतार ही मां को मारने पर वार हो तो
पपा नाई। बाद में भी सपना मिर फोह मिया मोर गाणे पाने
पर उठ गमे पर करीब तीन बरे बाद में मुझे पोमे में गुमाया
कमा फितूबीबी म मा मापने कार में मानसाही
सपी रही । मैंने कहा कि किरबह पुस्सा हाने सवा लो बापू
ने भी कहा कि शिमला में वह कहतराना रिमा बहुत दुखी
फमा-पमा बम भेकिन मम तोचा कि मसरमा मामी तो फिर
बोन पान होगी और फिर हामि हशि पर बीपी सोकर उठी तो
बाबू में कहा (बीबीको रोग विलाने के लिए ) रेखा विमना-सरमा
तुम सबरी बीबी की मात्रा मावनी पोपी और बीपी तु परबीची
बम र बाहर पसी मयी। फिर मैंने बार से कहा कि रसतो
माँ ही टीका बोलने में फिर कार मात गोपी। बम पहपरना है।
मसन में पीवी पिसी बरा पात मेरे से क्योंकि कम दोपहर में गुस्से
है परपी। मैंने बीबी पूछ लिया कि पानात काति पायो
कहाँ ? (पोकि मात्र पाषा सेब मम्बरम का रिसे वरमा
पामती पौ) वो यह तुम यो बार करने ममी किती भाद्र
भी अगर यह बची। बम गा तुम शीघ्र ही पोतर में
नियना किमामाफी मात्र या नहीं मारा भूर
टीकाप हो ? हो एक बात और हिमाबोर
रपये के बीच में तुम पा पाया रोपौर साप में किमी रोस्त को
माया करो क्योंकि तुमारे बसे शबाना काही बोंकि पाकिसो
से बोमती मही सिवाय परता। बिममा पमी पाठी। पाती
ठे पिर रिमान पराब होता है। अपहेस बोतने में पळ 'पास'
हो जायेगा | baby-daha होप न ? पोचर देना।
सिही तरमा पुगहारी।
०१
बाठया पत्र
प्रापप्रिय स्वामीSP
बन पाहे तुम सरता पूप मेना ने सपने को कितनी चेष्टा
को मेरिल या क मादूर पो। सारा पर एक तरफ में मोमी एक
तरफ। मुझे पाय पर रहम मा पया। तुम्ही कहो कि ससार में इतना
दुलो इम्मान है कोई? उसके चारों मोर माप हो बाम।बीबी घिमास
हर एकमेटी म पोपे दीरानी तोमों के ताने सर मुझे उन पर गा
पस पाया। सोचने सपी की हम सब इस पर बीमाले रापन ।
बम मस इमान को मापी । मेरा रिस भर बापा । मरे
पए रिमाप सब सिनेमा पाती बामा मैपरी ऐपमान परमी।
मरिम बिमना नहीं मानी मासिर मुझे गामा पहा। मैं तुम्हें रिपास
दिमानी कि तुम्हारी पत्नी है और हमेमा-नमसा तुमारी
राम बम्म में नहीं अपने सम्म में भी। मैं रोष परान से प्रार्पमा
परती हूँ। तुम सपना वासी बात के बीच में माता-
बेकार में। और न ऐमा होने दूपी ।
तुम
पहा पारिपरि तुम ममता से ग्यारा मनमानोता सरो कोषि
यह पह वाहनी है कि रिमी नए तरमा पो सम्पस मफरत हो
गाय तो माप को अपने रस में फंमा । तुप मा परमा।हम
रोमो रिखने ना । मोरमोर ऐ । होम सारापा
baby होपी mba होगा। तुम पाम (पाय) को सर पर
बाबोये बी-पायोमरे कि पापा पो पाये। मारे लिए
पास बनाएर मार मी नुए बाते हो मेरे सर पर प्यार में
हार फेरोपे और में दमदारे सोने हैसप गामी । तुम गम
बाद महाबिर पर रही पर मो। तीन मान पर राय
हो मगर र निरान नहीं पतूमी। हाएगा यह है कि तुम
अपर मुई मिल भी गायो ग्यारा मन मोत्तमा। बरनी मोसायटी
यह सामने भी
१२
मगर पी।
पर पम्मा मत पाने रो। बुर (१) को पिपर पर पममा ।
का भी मरीजी मही सया। मेमि पपा का
भाभी बोके पर पर पाङमी Khsमर रोगोपा
करगी। मानिमन घर में मौका पाती। एक महीने बाद
तुम्हारे जाने के बाद गया राम होपा । म तुम्हारे निमा मर पाक दी।
और सा होती है कि मैश पुम्हारी गोरी पर सर रसेठी
bady pabaपि नासिर हाने ।
tarta
[भापा की गलतियां मुभारला और नहीं समझा ]
रात पाव हो पपी पो। रामा में मंगलाई ताप एक बासी
मी 1पीरे से -तीन पुटकिया गगामी। पा से मिरिताल
समस पापी मौर पर पसीने से तय है। उसने मूटी पर ये हुए
एक पनवे से अपना पसीना मोपा। यह मेट परी। उसकी पाली में
ममी प्रेम-पा पुम पेपे। कितने रतेचित मौर किसने मार।
इसबार से सम्मकी बारहोपायौ ।
तमी शन्दिरा भाभी पाप करने के लिए ठी। रामा उसे रेशर
मन-ही मन मुस्कायो। बाग भाभी को बाव पेपार मा रहा है।
इस मामय में निहित इसकी पुष्टया उसके कमरों पर मुस्तान बन
कर पिरक रोबो बरे कीपगह से इम्बिरा महोरेस पापी।
एसने भाभी से कहा "मुझे नीरमा रही है तुम रोपनी बार
इमिरारीनी बहकर दी। रामा को मीर नही बाबी।
उसके मन-गगन पर सम्म ने लगा। मह सिना इवभागा।
बारतरमा उससे बोमती नहीं।बाज पर सवार में बिना पानी
दो पपी की वह ताप पाहै। मुषपुष यह पर बनाया है।
तिम रम पर प्यार करने में मुगा र माप निनाऊ गो।
धौर म एमिर कनरा उन पर्यो को पा कर मोरपा
कि ये पत्र एक साताप्त फ एक परिवार पर्प को पानी
ज, प्रवीर है।मयो पर पुरानो पाग्यवार्मो १ दीव में माही
रवारपारका दौर। हम नहीं जानते कि योग शिडियों
से सपाय पडे हुए पान में गि परिपाम से टकरायगे।
मुरारी पार एक पोप नगर पाता।और यह पर्पोर हमारे
पीरन को पोटेगी सरल रहा है। पुरानी माम्मनाए मतिरा
ही मोर मची सह-पालीम या हमारे जीन में पोरचौरे
मावताएँ प्रान कर रही है। पुरमा को मा परिवहीन है। रमरा
पपने दर मार बपित गरम है। उमे रसको ममी नाति
पानी पोर उसका प्रतिश्मिा यह कि मनी नदी पात्र
सुपात्र काही रिना पार करने मो। उई किसी का भय नहीं।
लोप पर उन नोरन को एक दिन माप में पने मिरा
रियकर .
बरे पाहीही मार मामा को उगने पर।
पका ने पाराम्न मरने में निगर पदिरा मुकाम
मेर पादरीर मामा दो। उमरी पारा
एम मपीपी पोरे गोरे पगमारामा दोनों कान परे
पानीदरहो रे।
परेराममा ठगा होगई।
रास रामानी का एप मरीदारी पर पड़ी।
माल्पिग्मी उत्तेजना गरगरीनिशोरी
समय सादाय में गांगहोमतो नानीमा से मिरर
रमरा बरपान किया ये पता किम र रमली।पह
माची पोगा। शोर रागराइए।
हलमा पहारा पीरे सी। पर उसने बिजली पता
सापिर बम्मेण किया। भाभीऔर भैयासोस सोनार
पहा साप मर के लिए ऐसा सम्नाटा छा गया से रम सम्नाटे में
वरती मुटन में सबपरम पुरमामा ।
रामा किबारगोने । बाहर बार पेशाब किया ।गत पुप
पी पर उसने अपनी सुधी को गाहिर नहीं किया । वह बागान बनी
वापस सो मवी।
में पानता कि उस रात इम्पिरा सो नहीं सदी । पसे अपने
और अपनी मजबूरियों पर तरस जा रहा था। यह मा वीमन है।
यहा बिन्दा राना? उमसे तो फुटपाम मिवारीहीबन्छ।
निश्चित होकर मावे-पीते और मोठे तो कभी-कभी उसके मानस
में हिंसा का मन मठ बावा पा और ससकी रया होती बी
बह उठकर इस रामाही पी को पीटे और उसने मम-ही-मम
उसे पीटमे कामभिमय मी मिया।
मुबह से ही उसका मुरबहुत खराब हो गया मा मह सिरसने
का बहाना बना र सो रही । म्पा मे मामिए पूरा ससमे ना
ररिया। मिलोपनको पिस रण में बाबा उत वा में उसका
मा साहस नही माफिया रामा से वो उसकी बगान बहिन है
मपर मिमा सरबत यह होटस म बाप पीने पमा गया। स्पा को
बहम बरार हो गया पाकिष हमा पार है । यह हामी मोर
पर पसरम तक पहपये में मधपर रही।
मा सरा की तरा पा रही थी। मां स्नानादि से निवृत होकर
रामायण का पाटकर पी पी। इपानीमान होते हए भी पसे
ते मागे मा पा । रेवासा साप विस्तापप रिला ।
यह सही सही वा कि तीनों साबर मी पर काम करना
नही पाही की। सगी मही होती थी कि उन्हें पग-पकासा
मिन गायबीर बाराम से पेर भानपास शमिरा से बाये
यह तनाब
७ गारहमानों ठनी पी मौर रमको मनपस्पिति में मां पर कि उसके पाम समय होना चाहिए । बहिब पर्प की पारमोन मोर पूमा ऐन में बहुत पस्त पती पी। सपा में मोरा कि उसकी उपस्थिति र रमे परेका राम सौंप सकती है इसलिए ग्मने हाँ से मिक मामा ही समया मममा । बह रती से कपड़े पहनने का बहाना बना पर पती ची। रस पाठेही निरा में करपट बरती ।सा में उसके लिए दुसरा पाय बनापी । पाय देर सरे पाम पपी। रमी पौने पा बरोष यिा। उटो। पाप कार मेती रह मा काम दृष्टि से देखने लगी कि पाप से पहना पाहतो है। स्पा उसको इपिका अभियाय सम मी । उमने बरयम् पीने प्रदा "बीयत ग्यारा पाष भामो ?" नाहीत? "मनो वाममो?" मेरी एकमा मामोपी 'पही एक पातमा हो।" मा मारा रिस्मा तमाम पपी मीरबह यह मौगान पपी कि मामोरासमार पर नि प्रतिदिन ना पिरिए 'उमने मामी को भारत को एका पउनादेगा। पनि परा। पत! परपुष पापही मार हमारे जीवन की नमता को पार- है। पाम हो वा हम पिने पमहार हा गार? पपने मा गुरपिने सपेरिमारिप मोपों को भी मार! x X x
रामा मापी पुना मा होती हसको मृरिया र मी
सिपको वएतमी हर पी। अपने माते हो हामी पुस्तः मेव पर
फेंडी पार यह पेट बारा पर मैट मपी । मा। पूष्प नया बात है
पमा नबीय टीम
"मेरे सिर में दर्द
"पयों?
" या सटर " उसने शिकार का । यस
पवन इमिरा की बोर मुशातिर होकर हा 'बडू बरा एक
कप पायानाकर सेरे।
'इप नहीं है।
'दूप मही है।परा होटम है मगरासे ।"
4सा नहीं है।
चुप रहमा पर्यो पत्र बबाम जोमती है। पापा को
विमाठीपौर रूपा इसे पिलाती है । मैं भी इसकी प्रोमी मरमे
म यो पा मुझे भी अपनी पनको पर विषये रखें।"
'ऐसी परिमारिमी पा की मने नही सी है बर निमा
जाकर देनी है और मैं उसमे सारा पर पसई पाती।
इमिराकमकर कहा।
उस वममा में रेपमी सादियां नहीं पहनी जाती ?"
पन्छा मेरी पटी-पुरानी रेसमी सादियां पी तुम नही
सहावी ।" यह र कर पा रिरिवाने नमी "मरममनी !
हो ऐसी दम भर का सुा मही मेरे माग्प में । मेरे बस पर यहाँ
केबारमिपों को पिड़ा भीमही मुहाता ।
धीरे धीरे पर का पाताबरम विपाठहो गया ।म 4 बपनी
बेटी का परसिया । बालियोन स्तर भी कभी-कभी गरी मोरे
ज्वरबातापानी भिगोषन प्रवेश किया।रपर्म बार्ग
.. परम को रेसवे ही समरे हरे का रस बदन पराठारता उसके बहरे मोरने समौ । मह म र बोसा “पारिस बात का पड़ा . . बस दोनों जगाम रोने सये। पृफ्तार मागिर वान पपा है? रामा ने माम् पौधहए या मिरे सिर में दर पा मन मामी से एक प्यामी पाय मांगो। मामी मे छोरा उत्तर दे दिया दूप नहीं । पर पीने होटम स माने क लिए पहा दर मामी ने मे म होने का यहाना बना मिसा । पर इसनी हो। "यह पात्र ऐमी नो महीं है कि पिसम तुम दोनों पर को हिर पर मनो। वह उन बानों को समझाने कार में पोता पोति पारी मार पनि कारप ही मानो बानी है । माह हाँ बाटो। सो निहायत ही उसकेपमा । अम्बिरा न मुकिया मरठे हुए परा 'मुझे मनिसाम का दुख हमा । मा हारे हुए मने रामा की बार जमा नहीं रहा ।" 'मग मर तुम रोगों गात पो । सो मष नाना तुम पायनामो।" पाय बन पपीरामा पाय पोर गा पनी म मरे पास पपा । पर सिर पर हाप रपा ।ए मदुप-म्पा से पी। सपने देश में पुरधारते ए हा 'पराशा नहीं पमा में कमरा 1पा एप मेरे । तुम्हारे पुरा में मेरा दर शनि हो पा है। पानी मार तुम सम परों हो? उसो मारोगे भीम पये। मुप मिसरियों के मन मरे बमम में मारपुर मन से मारापोर कहा 'पायमोही मन की बात करने में मन का हो गता बोनो पपा बात?" । +
प
बात पर कि मात्र स्वरूप में मेरा और मेरे प्यार का अपमान
किया है।
'उसने मुझसे वापरा किया पाकिम पु मुमके दिमाठमा।
मे बार उपके पास पी 1 उसने मुझे इपर-पर पों पर
मा कर एकदम हाय हा दिए ।
'सायद पराके पास पैसा महो।
पैसा उसके पास बार। पमा मे परता के साथ कहा
•से न होते तो बह दो सौ रुपये भाभी की कहाँ से रेता? असम में
बात यह कि में पर निरमागो। रूपा बहुत ही सुमाषी । मुस
से पर पानी भी गुन्दर महा पर से सभी प्यार करते भी
कभी मुझे रूपा पर या पुस्ता माग है। होती है कि उसे परी
तरी मुना?
'ऐसा नहीं करना चाहिए ।
'पयों नहीं करना चाहिए । पा रह नहीं मानती कि सम्प
मुझे प्यार करता है। उसने कई बार मेरी और स्वस्म की बातचीत
मुनी।बापीत रापा मम मरीबी?
'पायर पर तुम्हारा भ्रम हो कि उसमे तुमारी बात सुनी हो।
गीती मस्त्री निपबना सरत नही। पापा करमोमी 'बह
सब जामवीरे मोर पानार मनमान पाती है। यकीया ही पी
है कि यह सभी को पर ही पटाने।" पूषा उसके पारे पर इस पर
मापी से किसी में उसके पहरे को रप रिया हो । मैं चुप पाबीर
पसकी मोसों में नाचती एक बार पौरतो पानी परषायों को
बता पा । वा पत भर बारमोमी 'मेरा मुवकिसी को नहीं
सुहावा । मैं सबको यस समठी।
शिरोपरा पपनी मामी की भी स्थिति मेरो पारी
से सोना मौनधीब नहीं होता । बाहिर मामी बरत।।
बह पाकर भी किसी से मीठा नहीं मोस सकती । तुम्हारा पर
अप मोर पोन से बहुत पीहिल है।"
'पीरित हो रहे । में किसी की परवाह नहीं पसी ।में
सरूप की भी परवाह नहीं करती ।बह मममता कि मुझे उसके
सिबाय को भी मारा नहीं मिलता है ।है। मुझे तीन सौ छापन
मा मिमते है। पया कमी है मुप्त में। बार तलाम उमाली कम्पमा
में मो मो की तस्वीर म मयी। पह मरका
पणे पूरस्टोर के मालिक का बेटा मुनीम । कार में भी ए
पाता पानौर र कंगन करता पा। नयी जायन की बुए मार
कम-मोरीकी पट पालता पा ।
मैमे उसे समझाया 'रामा ऐसा मिर्मय उचित मही । पर
जीवन को मस्सस्प परम्परामों की मोरमता है।"
'स्वस्प-मम्मस्प अपने अपने मन होते है। एक पान किमी के
लिए मग्छी होती है, यही बात इमरे के लिए मन्धी महीं होती।
साप से सम्मान रिकामी । मोह ! समने मुरलिग तरह
एनों माये पुमापा। मम्मी-मममी सराफों की मानें । म प्यासी
दृष्टि से माले-रमको पो रमों में रम हुए मुमकों को देखती रही।
सम दुष्ट मे मुरे यह पहमे नही पतापा फि मरे पास पैसे नहीं है । मुझे
पहरी मामीयता मे कहता रहा पहल रिवाने देयो। पुम पूम कर
रेपा । गोपनर बापे मुझे बतारोही मुमक मैं तुम्हें रिपमाळपा।
बहसम्मों की तरह मुझे प्रमोनन देकर बनाता रहा। मगोप
होती ही।बासिर मैंने एक बड़ी सुपका पसंद कर मिपा । बह ग्यादा
महगा भी नहीं पा । एमने कहा पहमे हम एक कप हॉपी पिपंगे।
हम दोनों कॉफी पीने एक याद रेम्बो में पुमे। रेधी पीतवार
नियंत्रिम पा। हमने माफी पो एप माता भी किया। एक-एक
पामसेट पोरदो-दो साग । 'मैंने सोरा यह एक मेसमोर
पारा मी। मान म सगी प्रेमिका और कम उममी परनी भी
.
मन समता हूँ। म साप बाम पीठे हुए मुपे इतना ही पर्व हुवा
रिखना किमी महान योगादी प्रेमिका को मम्पकाम में होता था।
हम दोनी मे यो मोमेशन पुसारे।
रेसा से पाहर निकले। बाहर मिलते ही पवने मुमसे
वपरयाधित यह प्रश्न यिा मेरी एकपात मानौली।
पी।
पहले पायगरो।
मुम पर रिपाग मही है।
सहरमान
मदुर्ग मुमके पार नही रिसा सापा। भाग मर पास से
नही है। लेकिन मैं तुम्हें पांच दिन बाद ही मानीस रुपए बाये
मुमा र रिता मा।"
मेरी बाधामों पर्दापायपात हो पमा । म पम उसकी बार
रेया। गुस्से में में नाम हो गयी। न्याकि मैं बसे मोर से
निडा? पर मैंने अपने को नाम किया। ठामे स्वर में बोगी
"नही मुझे बमी ही बितायो ।
'पभी कही से रिसाहा मभी मेरे पास इतने से नही।।"
और सम्म + अपना बटुमा गोल कर रिमा पिमा । वास्तव में उसमें
मुरिष्म से पौन-च रुपए पे। मेरे तन मन में भाग घी मना गयी।
मैने उसे एकांत में मेकर का 'तुमने मुझे विसौना समम रखा।
तुम मेरी मामगायों को इस परहमी से दुषमा हो। स्परप । तुमने
मेरे नाम ममा पम्फनी स्मिा है।
मानता हूँ और उसके मिए धमा माषना मी करता । या
कर सर पर से किसी भी वार को बार्षिक महागठा ही मिसती
बौर पर हिन्दी प्रासा मेसी पापापकता पर एक या
भी नहीं देते।
A
"फिर तुमने इतना नाटक पर्यो रपा ?"
'सोबा मगा तुम एमएफ इम्हार सुनोगो ता गव मुस्सा
होगो पी।"
'तुम्हें मुन्म से सर सपना है?"
"भूठे कही के 'तुम पह नहीं रामः दि हम माम बहन
गिरेहए। हमारी पुरंधा की हसी तुम पाहो तब का
सकते हो।"
"नहीं-नही । तु म तरह नहीं सोचना चाहिए । में तुई बी
बार की दृष्टि साहूँ। मारियो हर एक पीप मपी है।
बार कौन है ऐसा पो किसी न किसी तरह मगदूर नहीं है'
“मकिन हम बहुत ही मगर है। तुम हमारे पर पी हर मुर
माठ को पानते हो? तुम एक साथ हम दोनों पहिनों को पार ने
"नहीं । मेरी पा से केबम रोस्ती है।
'मुस को प्यार करते हो?
'बोसवे पर्यों नहीं।
करता हूँ। पर वरबसप्प बात यह है कि ठरमा से सन्यास
रिसर हो रे भार तुम परतीचाको हो रिमने मुझे मिपर दिया है।
शिर भी माम पाएमा प्राता है।"
पर्योटिम तुम्हारी पागराए पूरी नहीं कर पाऊगा। मैं
एकापारप पा सो है। फिर मुमे पारनार या मताकि मुझे
मेरी तरसा एर दिन पारमित नायगो।"
'मोह! मने दुग से बन इतना हीरा मीर पती पारी
.
असने मुझे मही रोड़ा। फिर मैने सोश कियह मेरे जीवन में मुख की
एक पिलमारी भी नहीं बता सकता। मौर में राम मरममावों में
पमती पी।सेकिन उसने मेरो जोरपएकही से साकर मामी को
दिसे? मैंने इस पर बहुवेरा हो । मुझे निवास हो गया किया
मुझ से मूठ बोमता। यह मुझे मुसरे दिलाना नहीं पाता है।
पछे मेरे प्यार की कोई कानहीं। में इसी उमेस में नोट
पोस पूम पी पी। मेरा मन ही मही ममता बा बार मेरे पास
बस के किराये के विरित एक मी पैसा नहीं था। अपने बाप पर
मुझे बहुत ससाइट या ही पी।
समी में देसवी किमा सस्म के साम है । मने पर से रेखा-
रोनों भाव प्रसम्म ।। मुझे फिर मुस्ता या नमा बसे पप भी पुष
कार बन रही है। ममे एक जासूत की
सरा का पीछा किया। का मार मेरो Mot किम
उन दोनों के सामने जाकर में पाग! ममि मने ऐसा मही
किया। पक रेस्त्रा में से। पर या बीया बाबत में एक
साधारण मासी रेस्मा में बुख पयो पोर बारी-बानी काफी पौहर
बाहर निकमी मोर मोनों की प्रतीक्षा करले तभी।
पापा पाटा बीत गया । दोनों नहीं बाये। साहस के साथ
ग्स रेस्मा में पमी । प्टि हामी ।। दोनों ही नही।
मुझे मिस्सास हो गया पिरोनों मौवर पापे हपि तप पयह
नही मिमी होगी पौरोड़ी दर पवनार करके पते पर हपि।
में विनित हो गयी गौर मासर मिठने के बार हारेर
गुमारी की तए मैं कुध गतेरित भी हो पयो । म पर सर पूम
हो यो। मषाना मेरी दृषि मा पर पड़ी। यह अपनी अपम में
एक पटकपड़ा बाए ए बी को कापसपी मेंपा।
मुठे होगा हैरान हो गयी। मन परष से पूमा 'बार
पतरमही पदो
'पीपी पर बीच में हीमा पपी।"
पों?
"यह कपड़ा वरीपना मा । परमों मेरी पर्प यांउti'
"रा रे " उसमे मेरे हाप में कपड़ा पमा दिया। मैं रमे
देवार ग रह पपी। कासी मिस्वार मार पीसा दर्ता | पारक्या
मैप परेमा ?"
पा मार परीक्षा
"मुझे मही मासूम।"
'पया मुसका मिमा
'फिर से पाया
'सरूप मे रिसाया है।"
"मरे पाम तो पैसा ही नहीं था।
'या तुम्हें मे माम?
" मोदी देर पहले उसके माय पी।
मोर! बह एकदम गाम हो पपी 'पमा ! अपने आपको
ममामोअपने गोपनो मरफ बना रही? या स्वरूप पहन
मास मेपा है पर या । रामा तुम मनी सिर मपमो पाई
मिारा। सभी दुर्गा पुषपरला है। बहने से कई नाम
नही होगा। गोपन परमारो गायेमा। पहरो मपरिपता
पपीही परमाती।
मुझे मामासन मादा ही सपा। मर सोयगो काम
पुरते उमः लिए ही दूसरों को मना करते हैं। परावी
परोपों पर बोमजाई मारा गुमाम सने दी ममील
देश और मापरित और मंपिग पी करती है। या
परासिमना नही?मान मो सो पमहीना में परपाप
पनी मामी। मोती रहो-यह मेरी बहिन एक सोसारटोना
विमोचन की भोर बना कर कहा 'मीगिए, वहाँ भूम माइए । भाग
पापडी बहिन की पर्व मोठम।
ममे पह मोर मे सिपा और बात पहा-चमी पारितास की
वरदरिसकी कोई बहिन वैश्या हो। और उसकी कमाई पर बीमित
हा। सदा मन पोरानायक तानि से भर पया। ही रिचारों की
पत्तेगमा में यह मनी के बाहर हो पपा । परिचित होटल में
कोई फिमी पीत बर पहा पा। फिमी मिदेपी पुन पर नाबारित
पा नीत एक बार हर एक का मन अपनी पोर बापित कर
निता था।
x
x
इसरे लि रामा गाही गाम का पातुन मकर 48 पपी।
स्वरूप प्रति उसकी गा परम सीमा पर पर गयी थी। पर उसे
दुप पमत्कार रिसाना चाहती थी। बारसे यह बताना चाहती थी
कि अगर बह किमी से प्यार करे वो यह साफा उसरे प्यार में
रन मुमोदी वहीं सभी दुध प्रपपर सस्ता है।महान पर
रही थी और उसकी मार सुनील के कमरे की सिसकी कीबोरगी।
बोपीर बार सुनीम के पेडा । दोनों को मारें पारपामगरों
की अपनी एक बनम भाषा होती।से पर बारमी को नही माती
पर से ही प्रेम की अनुभूति होती है, से ही यह इसकी है
सम्पारती संत से परिचित हो जाता है।
रामा सुनीपोखतो पो बपक्षा बोर मुनीत पसे । पानी
बार अपने पहले का मन पार मुनोत मुसरा पड़ा। तर राम में
पैसा मकर या उसके बारे है पुगरा । समीप माकर बारने मा ।
पोप समधिए पती हमम सुपीन का कोई मिष पा यया । उसने
परपम्त प्रफस्मित सर में कहा 'भार भुगा-मुबह से ?
'बस तम्हारी बोर ही पा रहा पा।
'पयों?"
उसने अपने बड़े होमे का पोनीयम बरसा। बर बहरामा के
माममे बा पौर रामा मुम्मा करती हुई हर दूसरे पम सगे देख रही
पी। उसमे पमा पर दृष्टि बमा कर कहा
'म समीने या
'मोर पर
में भी बसता हूँ।
'नही यार तुम पर पाकर मौको बाप बनाने के लिए हो और
में मपहर ममी पापा। और उसने रामा को कमसी मार कर
संकेत किमा।पीरे सापही उसरे परीर में भय की लहर दौड़ी।
मुरारी सीपूटी। बहनपा कर मती से बाहर हो गया।
मुनीम चौराहे पर राग हो पया। उसकी हर मान इस तरह
रामा की प्रतीक्षा कर पीपी धिम तरह बह रसको पिर
परिषिता हो।
पमा भीमा नमो। सम्पी का पता उसके हाथ में पा। दोनों
रिस पाक रहे । पास बाते ही मुनील ने कहा तम मुझसे
मिस सपनी हो?
नही तुम हो।
'कामीरी पेटमा में।
“तिने बरे?
८८
पह सम्मो सेपर पापस वा पयो। प्रमा की अपनी पुरी में
अपर मपी और बह गई गणहर सांस मे ही पी। बार
सगने पिमा तरह का पीपा नहीं किया। पर पाना सार
कमिर बसी मयो।
x
x
x
यह याम को मौटी। उसकी मा ममीर पी पहने पाना माममात्र
कोसाया पाकिमुनीसरे पाय इसने रोपहर कोबहन मारी माता
मे मिया पा। बार इसमे इन्दिरा मामी को भी पुपमही कहा।
बार मा की तरह उसकी भी परी मरयेश विविपि में मिषस्पी
महत ही कम थी। सा मे पार फिर रहमा रिया पाकिमान
वागत को महीमा सकी।
दूरी मा प्रश्नवाचा दृष्टि इन्दिरा पर पमा कर कहा
"अपाम पेटी का रात को पर म पाना बम्पा नहीं है बह।
और पास-पड़ोस पासे मोग इसे पा समय।
हभिरा म तुरन्त अपनी सास भी बोर असती दृष्टि से देखा।
उस दधि में पुत्व का समाव का । मो सम दृष्टि को नहीं सा की।
अपनी पुष्टि को पालते हुए पपे पर पमा कर मां बोली "मैं ठीक
करती बरी पाकमोरहो पाती है पर दुमिपारा
4 समझती है। मान रात-रात भर म मामा मुझे पन्ना माही
मयता।
"मोम माहे पर या नरें पर मापने तो पुरुपरहीरी।
मेरी सासजी पा पर पमी पठाने बामे की नपती काटा।
कपा कोई मामूनो भाको पहीबारी मनर है।
लेकिन मुडे मागण्या मही पता।"
Et
'बाप पुणे सामात की है। पापको इम बमाने की बात
मी बातें अधीमही नप गयो।
रामा इन दोनों की पारचीत में तटस्प पी। भाभी मां पर
हानी होने सगी बसने पीरे ये कहा फिर भी माफी की अपनी
एक बसम मात्रा होती है भाभी ! हफ्ते में नियमित रूप से एक-दो
दिन रात काम बाना समेह को ही बग्म देता है। मो रितुम
निरापार बात नहीं करती।
इन्दिरा के होंठ ईस गये । मार्यों में पूना न हो पठी तुम
इस तरह मोन पी हो से तुम रूपा के संप-मम फिरती हो। कान खोत
कर मुनतो पर कबारे में इस तरह सोचना माप रोगों को पोमा
मीता। मगरा सामान परीदने बाहर का ही है।
निरा बाहर पसे गाने के बार मुममें दाप मर लिए
सन्नाटा पा परा। मां की मान मरम हो रौं । यमने मपना मुर
सों में छपा मिया । मादी बेदना रामा से नहीं की परी । एक
पार रमकी चाहि मारा मे मा को कर दे मीर यह भी
बना रे कि एक प भी पर तभी ससे मुनीम का पान मा गया
मौरपदमागमीप बैठ कर पारसीम रोताह बोमी तुम
पापपा रितित होती दो मा को भी मसत रम नही उठ्य
माली।बह एक समनार मापी है।"
मा ने कोई उत्तर नहीं पा ।हमोड़ी पर पूर्वपत पटी रही
पम्त में पागापरी मुने पदमा बग्या नहीं माना 1 बरा भी
मही माना ।
बार रामा सोष यही पी, 'मामी ने मुझे गुरण पने पत्र
में रमेना चाहिए। विमा एमको गे में पिये में बारी से
पूम
पिरमही ममी।"
संमोग में दूसरे दिन सने पाए के भीतर मे दो प
प्राप्त पर निये । इस पों में सामोरर में रमा पारिह पना
रात महीमा बाए। उसको सम्बोपन भावाने मन से इस सदी में
पिया ममा मा । म उन पत्रों को पड़ा। पूमा गै यह रिफर गयी।
बाम पहनाभी को टीपीए बहुत प्रसन्न ही बनी बौर
भाभी को बार-बार पृषमे मपी कि मा कहो। भया का मायक।
दग्दिरा म प्रापिर पूछ सिवा बारपारको पयों
पूम
एक परी काम है।
क्या?
'भाभी ! तुम बता धरती हो कि यह बीमा कौन है?
पा को सहेमी।
"तुम उसे चानती हो ?
'बन्धी तारा । उससे कई बार मिस की हूँ।"
मा अपने गारा पर एक सनी महारपुब मूसती मोवी
पहबार पैसेवामी है।
'पा पठको प्राममहा पटी है।
'बी परतू मा समययों पूर्व रही है।
में समिए पृथती ।'रामा ने रेशा किमकान बरे
रामिए के दोनों पर भीवर पमीपवी। रामा पपने पाय
को बात ही पीमे से किया मामी तुम सूर पोमती हो?
'तुम तुम
पायर नामद भी। पता नही हा मरों को मौत बनकर
परिमय देने में क्यों मामाने समा!'
"रामा /-
मामी मार भैया को भाने रो। मै सननंगी कि सपा की
गगा पा गांभीर यहाँ पाती है। बीमा नाम की मामी
नही। यह वीमा नाम पर ।"
पा। भाभी रोख पड़ी।
"पणे मत ! मो पास में से है। यह मप पुष वाम गामी ।
बह मह सब नहीं सह पारमी । बेचारी धर्म में मारमहत्या कर
मेमी । मामो मेरे पाम रामोदर के पत्र बोर ममें ।"
भामी का पारा पापी पारमा की तह सफेहो पा । पर
मिकममी की तरह बड़ी रही। समरे होटवार कर रह परे।
'तुम दोनों स्पिने दिन तक हमें पोपा दोपी ।मार भैया को
बाने से।म सब परवानी।
किनी में शियाई गरवाटाये ।
मामी ने स्पा हाब माटी से पर मिये । यह मनुनय
मरे सर में बोली तुम चुप रहना । भैया को गाने में फिर तुममे
सुप पीवारो।"
सिागुमे।
चन दोनों की माने नम मोर पी । ग्रहोंने रेयाका
पी। मामी परसादी बोर गपी। उमने उसका हाप पहा
मंतिऔर कापते पर पहा सब पीरटही पदा।
'पया?
'समा सर पुष गान ममी है ।बहरे या रोमी
पाने लिए सार है ।
पर सोएप पर दिपा । ममा गयी पी कि पर
बापापना में अपिक नति हो चाहेका बेहरे पर भी
म्यापन पापा । रसने मौसमोर पा । बहमनी
शिपिपों से मानस सपने बाप में एग्मर दी। उमाहीट प द पे
पौर बाम्बान किमी पर वामम मार्योरी तरह सीरी
तुम पर इन तीन रहियों और कर रहाय यो गानो की
रेप्टा कर पी पी ।
"
पारामा" पापत सर में पूछा।
में सबष . मामी से पूष तो। सा रमसे एम करे, हम पहले ही मामी म्परता से योग नही "राने तुम्हारे ततमिए है। इसका कहना है कि तुम्हारी मीना माम की कोई सहेली नही है । तुम रात को पीमा के यहाँ मही पामोरके वही मोती हो? पर काफी रोपित हो मपी और पसीनाजों में प्रसीम पातर मामी "यह हितमा मूठ बोमती है।मकी पर की ग्यत का मी स्याम नही । मा ने रामा की बोर माभिप्राय प्टि से रेवा मोर मा से सीच कर भार मे पपी। बाहर मे मा कर उसने मे सर में पा तुम बया पानती। भामती 'मकिन क्या। कि तुम । में गपोवर के महा गाठी हूँ। मैं उसे प्रेम करती प्रेम बामे हमें बह जीवन का मुत्त देता है।पमा मैं चाहती यह परीबी और कठिनाइयां हम सब के जीवन को नियते बाममोना ही एकर मदुम गमी सोपों के मिए यह मत करना । इमसे मां को पमा गुम होगा पापा का पर धानकर अपने बापको पुनि कर" "या पर सब भाभी भी मानती है। "ननी । मामी पारी मोसी है। वह इन बातों को पहराई मे पाना नहीं चाहती । से पैसा चाहिए, मुभ-मुविधा पाहिए बोते पर भिम रही है। बाधा पुप रही बम हम पराम किस । मौको माम। परगना धूम कर पायी पौड़ी प्रसान पी मानता पा किदोनों के बीच को पड़ा भारी समनौवा हो गया है। मानी बमा एन पोनों को मार ति सी पी ।
उस दिन दोनों में साप-याप लामा बाया। मां ने बार रामा
को प्रमन मे गा कर पूयना चाहा पर यमागबसर ही नहीं दिया।
मेकिन इमरी सुगा मा को अवसर मिम ही मया मोर उसने रामा
से पूषा कम समोर को मेकर या बातें हो पीपी।
'मुम से पुपाती हो।
"नही मा बात पह है कि मेरी भाभी से परा भी नही परती
है। परमल पा रोपी से महाँ मामी से पूना करती है इसलिए
मेने का वानसून कर एक पपू पोड़ा।
कौन सा
'कि भाभी मेरे साप यह मार-वह भाष रपती है। मैं चाहती है कि
मामी को धन-स मिने । स में इस बात को कर काफी
परितर उही बपी पी किन्तु स्पा बीरी मे मुझे सममा रिया।
पसने कहा कि परिवार की ति मन की पति से पपारा महत्वपूर्ण
है। पपरे मा क सुप लिए परिवार को पिम्न-भिन्न करने
कौप्य नहीं करनी चाहिए। उसने मुझे बोनो वा मतापी इससे
मने भी यह स्पीपार कर लिया किमही पामती पर पी।"
माँ की पासूमी निरापार हो पपी । रामा कोई फिमो
बीत नमुनाने नवी।
x
राना बने बाहर कोई सिमो पीत पा रहा है मेरा
यूगा है बापानी । पीनपारो का यह मोऽप्रिय पाना कभी-कमी
मुपीत मुम भी नुमा देता है और इस मोत ही पनि ग्यों ही भीतर
बाती है पोरामा पाने का बहाना बनाकर मार देगी
पाय। मीन बी की रही। बस उनकी प्रति प्राप-सम
को रोग्मीकी तरह उसक कमरे में रही थी।
नम पर मारा पीहो?
मुर नपा है।
"पहाँ बैठ पायो । वहां किसी का रही है। यहाँ म बीर
तुम हो । रेवो रामा पह स्वाम पा सुरक्षित है और यहाँ इम
होना पूरी ममता माप बाबीत र सन्ते। अभी मारी
पभी सोपी है।
नही बिगी ने रा लिया तो?
कोई मही धिया। एमने माने में ये एक गिटार
निकाना । रस से से विमुट अपने हाथ में मिले बोधि मुनीम
पम्वी से भी इस मप रिपय को पास ला पाहता पा।
पसके मस्तिष्क में बौरन से सम्मानित गजित
सूफान बा।
'वो यह सोतो।
'मही हाप मे दे दो।
'पार में ऐसा पोरेही होता है। रसने से विस्र उसने
मह म स पिणे मोर रस पानी को गोर गरिमा । रामा में
पस पनवी मनापा दृष्टि से रेपा मानो बह पूच रही किया
पार इस प्रकार के सर्प को मत है। पता नहीं हो सापको
समर्पण करने की एवी पी पर मुनौत स्पर्म मान में पा
सेक्यो मर बाबी बहसस एमम पर पपपी।
मुझेगा पसरना। रामाये यह वाक्य इस तरह
से गाम्भिी महरीमाई से योग ही हो।
क्यों?
यह निस्वर रही। इसकी बौखों में ममजमिन भाष मारकर
भावे बौर पर नितान्त निषित हो पपी।
-
पर मुनीम से बाहों में भर लिया मीर !
पौर यह बपने होठों पर एक नया कपाट कर मामी। वह
मुरी क्षों में गिरी पड़ी पी-सी के सम्माटे में। उमः हाप में पुष
पपये पे । माते ममय मुनीम पहा पा में यह मर तुम्हें रह
है प्यार के बदले में। यह मेरे प्यार का प्रतिमान नहीं रपम उपहार
किस तुम पपनी पायता की ममी पी सरीद कर निश्चित
हो पायो । एक वर्ष पुट का कपड़ा मी परीरमा ।
इमरे दिन या पपने मी मपनी भामी के लिए कुछ कपड़े मेकर
बापी। कपोहकर मां ने पापम की तरह पिम्मा कर पूछा 'तुम
परसब कही सतावी।
इसे मने रिलापा है। रबियबीच में ही बाम पड़ी।
माँ चुप हो गयी।
मम्मि सौम होते ही विमोचन माया। सरे बाते ही मार कहा
शुमारी बहिनों का पात पतन मुझे ममा मही सपना है। यह इतना
कहाँ पाता है।
यह सुनते ही विमोचन पुस्मै में पर पया। बोना बार रन
रोमोकोमारो।
मिरा पसे तुरन्त परें में मैं पपी। बीरे से बोली "तुम्हारी मा
का माषा सराय है। यह मही पाहतो किमानों मुप सौर पति
पापीयम पापन करें। मामा परत गया ! पोर तुम इस पूरी-
पूषटकी गातों का रसास करते हो? यह सरा १पन गुप ममी गठ
भोपनी रहती है। बाहिर मह ऐमा मोरेनो मोरे भी पपा ? पारी
नि भर विरामीबठोठी हर गाती है। मो पह पाप पर
पौर पामो इस मामो। मोर रमने गहों में पर कर उसे मिया
"मरी प्रतीमारपी।
पिनोपन एकसम पुर्श बन पा। वह पांच पर मारवादर
पमा अपा। मी यावेही इम्मिय मा पररापही "मुन पान
1
'मेरा इग बम्पो में मटने समता है। मय मेरे मिए
अगए है। पौर पमा की स्मृति-पोर में पुनीम के मरे का बम्परा
बम गया। पम्पेरा मिना उत्तेरित गतिमा वाममारमक
होता है। पर्म यों के समुनर मे माठ में दोनों एक-दूसरे
को गपुरी तय माने की रेप्टाएँ करते है कि दोनों पानी
वस्तुस्थिति से पृषकहो जाने । बम्पेरा और पामरा।
साप सहना यह मारेरा सपमुष में हम सब काममा
है।
सपी सिगरेट पसाने लिए तााटर जमाया । यष भर के
निए एपमा उमामा हस। उस पनामे में सबने एक दूसरे की
बाहतिमा रेसी । ये बावियो पृपापक प्रमावरेही पी। स्वाप
की पिरामा पर भी। बहुत तेग बौर साकपि जैसे हम
रही कि रामा में सिमा परियान या पया है?
रतने वाटर पापस गुमाना पहा पर रामाने से मना कर
रिया से पमा रहने से मेरा और मैं रम पुटता है।"
तमी लामा पमी । उसले साप मिस्त्री बा । मिस्त्री से
ही पण पोटरीमा वैसे ही मिमोचन मेपर में प्रवेश दिया।
पसके पारगम्या ऐप मस्तमासा की तरह भूप पापा।
ससमे बाठे ही हसाते हुए सर में कहा, बरे तुम मोपों में
बोरामों कर रहा है। ग्गावा करो"
'बाईट पराब हो ममी। मिस्त्री करा।।
मोह"सने पास मारबह सारेखा । अपामवा मा
यह परमीवर पता पपा । परे भीतर से ही उसने पाराया
"मुझे नीरजा रही है मुझे मत अपाना।
पर समान गयी किमह पाकर मामा ।।सोम ही वना
सम्म हो गया। में प्रकाप से बरपा उठा।
सपा 'रामा भर राम नहीं टेपा ?'
नही। मने मारता से कहा।
स्पा । पह मया रुपम्याग मैं तुर्ग ममपित करपा पोंकि
उसकी मून प्रेरमा तुम्ही मेरी है
"इम पारित का
पह में सममता हूँ। रमने पर बाध रूपा से हा पर ऐसा
पमा की मार | रामा मन नुन पपी । मोष बठो कि मम्प सरा
उमरापमान करने का प्रयरम में रहता है। रामा पिककर गोली
षत पापो नही उसरे
एक ताड़ना पी पारेपर में हामहर राम में
गर मत पासा करो। ममी तो इमी-पार की बात पर तो
उसे बना गंभीरता मे गयो माहो?"
मों मने ममी ? पल टोन से पिर ही मने यह
पहा । बहार-1 पर मुझ पर टि-संगता है।
स्वम्प गुणपमा पापना मरेपर में
तुम पर ग नार मेनी हो तो मैं तुमम पारी माना
पप्पा मार माथी मांगने मै 17 ममता है !
मा मे मुह पिता का उर पसी और पपा यकिनर परने
नपीनमीपरामपारामा पाम बापरोसम्दाम
पपेतमी । माने गीगार मही गाती मोम र पी
कीन्दिरा पपीमा पर उपर गभीनी भाया जात
पर पीरे हे पहा "रामा ! रामा! बोन में सना बहमी मोर
अम्भिर होकर नहीं बनना राहिए I तुम्हारी से ग्या
पेरी महम
मन मापमान किया ?
'हुमरे म मापे मुहमारीमानी।
t? रोरी । तुमने मुग्ने अपनी परिषा मर-मन
पापोतीरप गान मातीमोर मानती भी
पी। दामोरमारा सम्माप मार मह पर्व से तुम भी मेरे
पारे में सभी एप बानती ही होगी लेकिन यह तप प्यार मुभ
करवा और ! महकमीना बहर कमीमा से यहाँ पाने की
मनाही कर दो। बह कांप सी गयी।
"कापी। पाकर महम्पपित हो सो पयो ।
रावरहीमीयों पर पमा का मीर नही ।बर
रात को प्रपा निया में देवमा बाइसी।मो पत बेतर और
पह पनी-पपा।
सुमीत उराकी प्रतीयार पाई।
रामा भीतर घुमती है। सुनीम रहे बाहों में मर म के
बाब में मोटकावार, मो पाच सौ रुपए पो
तुप होम अपनी बहिन से मीडिया साडी नाना रामा । मरे
मिए पासमोसारे भी सा सया।
सुनील फिम्म हारो की नए मापारहीन शुि बगमार संसार
बोरठापा
सम्बाटा और मेरा।
'परवागा मुमता नही है सुमीत ।' बीरे से पावसामी रामा।
एक सा सा सपा नीत रिस पर मारती हो? गप पोर
नमागोमा।
पमा में अपनी पूरी सक्ति के पाप पारेको बोसने की 'टा
की पर बरपाया नही लुमा । समीप्स के भीतर का हेरित पाकर
अपनी पम्पूर्ण पति से सीधा पर पटक फाटक बाब किसकी
बांस बारसपारे परीर से पसीना रममा। उसमे समीर
इप्टि को मरे में साते हुए कांपते सर में पूष में म्सिी,
पैसा तो नही ?"
।
फिर
मोगादेवा रामा ! मेरी तो नही।
तेरा नया बिगहेमा मऔरत गात मरी मारी एम
में मिल पायेगा।
तेरी यस नपा धुम मे मिसेपो । तुम ऐनो गहिना का साप
मोहस्सा रामता है मा माई बरार और पारी में दानों
बहिन पेपर
"ममास मी मसन पारण मेर बिमामा ।
गिगाप सिी को मी समर्पप नहीं किया है। मैं तुम पार परली
पौर तुमने मुने बचन दिया ,दि में तुमरे विणा हया
मन मुम्हारे
मुनोस : रिचार बाबत ॥ठे र परिपीन बीरत एक
भाषी पावही पूर्ण बोर महीपनिमय करती है । तुम पुण्यम
पौरही।
गमापी मांग भर वायी।गमरपि पर में बागी हम गरीब
Irमारे ममा मे हमार मौतर मपम्प परम्परामरा जम्म
पायापरपमना मीर नीच मन मममा । मुनीम !
नियर गपगपे ।
नरीमा गरी ।
रिस गरें।
रामा भयम गापामगर मुमोम के पोपे एप पपी
'ग्राना करो। मुनीत रे बाप की कोप मी पापार थापी ।
मुनीम भर म मिदर गाया मेरे दिमागमा परे।
नापामा
रामा दमा मुनाग पिया ना माप उमा भाई
नापन नौ । बामपानी की मिर पर नमीप
मगे। यही स्पिनि मुनीन ।
गप्प बानी दिनाम बलि' मेरे बटे पा प्रमाण
देरा परमूरती है। मै रहे. मेगरी मेरापाए पप ।
निमोपन की मांग
पर पी। पसने सुनीम वापर
में बापफ पाच पकरता है पाप पीरोनिए,
-
मापका या बिनड़ा । पहभापायक इस बात को मेरे
पारों रुपमै पुरा पुरा र पिना चुका है। उन सो को कौन
देमा माप मा यह
रामा महक ठी पौर मेरी रयत की कीमत कौन देगा।
मापरे येरे में मुझे विवाह के लिए भरोसा कर पो मेरी बस्मत
पूटी उम ममूस्य का मौस कौन देगा।
पिनोपन गुस्से में पाप कर उसे एक बापा मार रिमा । रामा
उसकी कोई परवाह नहीं की। वह बोली इमने मेरे माप बस
किमा मुझे बरवार किया है।"
'तूप रह बरकार पल ।
बिमोचन इसका हाप पका करने वाया बोर कमरे में जाकर
उसे से बुरी तर पीय । रामा का सारा परि मग ममा । मुर
सेनन पाने मगा। इमिरा और सपा मे पाने पेप्टा कौतो
पिनोचन मे पन रीनों को भी पानियों कर पीटना शुरू कर
दिया ।पोसी चोगमा बो। उगाने मसतो रहस्प का पता
नपाने की बजाय यही कहा कि पार पाने पर वारपी और मया
करेया। साथ ही रमनि पितोषन को पात मी कर दिया।
विमोचन पत्र की तरह फूट-फूटकर रोने लगा। रोते रोते
सामने मारपत प्रानी की तप बपने सिर को पीय पौर बारा
ग्रा पर गया।
रामा एक कोने में अपने मुहको पाये पड़ी थी। रोते ते
उसकी भी बनाम हो गयी थी। सपा और इन्दिरा इस पर
बहीनी से दोनों किसी म मातम बना पो हों। मी निसोपन
+ पाम बीमार बसे भीरप पपा रही थी। कटुता रमकी पान
।
पोडों में रही थी। यह मसप्ट स्वर में पलटी "यह मब
मेरी बहू के करटर है। में बार-बार पहनी पा किन छोरियों
* मान मादे मही पर मैरी गा पयों के माम में मम्मीना
रही पी।
परिमरा ममर हाता तो इन्दिरा नगी काम की नरहवीमती
साम पर मपट पाती पर बनी यह गाना मनुष्या की प्रतिमुनि
पनी पी। मपने बारिक पुस्से में अपने दोसा हाटों को पुरो
तरह भीष पापी
मारा पेहरा महापापी की तरह स्वाह, पापा ।
शिमोबनपरे प्रस्टस को मारी विशाम्पर में भर कर
पहा कम से तुम दामों में पर सबाहर पार रहा नगेनार
या। मौरी-बारी पाना लिखना ममदार
बहरी माय मौन !
माग्रि पन एन. सभी मुप-पग मे मुत करने सामान की
पोर में मरने अपने सोनिय ह्दयों को मार मो पये।
पार कराई मापी पर मे बाहर मी गरी । रिमोपन उदास
उपस पा र रण। पपा से मिली ने नी पपीत नहीं की।
उसले भारतीय का मानब पा कि घर में फिर पति को
जग्म देना। मारमा परि पौर प्रमुम्न रिगामी परतो पी। पर
मौर मेटियों सविताप गरबह जमरिकमा रापपीमाकि
रसीपी-पी धोरणावती मोमो म एक पमह पा एमापमा
गोबिस्तियों को मागों में परे में दिगापो पाती।
माय मनापी। उसने किसी के मुरोर नही किया।
देवम पह सपने मारे पास गयी मीर उगा गिर पर फोमगा
सेाप फरर ग्मिती नरे सर में लगी "पाप पी में।
पिनास मौकोनामो विदेया मोर सपने ममा गान
मिपा । पन मरलि मोरियाप में पद रिचारबाग किमी
पसे चाय की जगह पर मार २६ बाय पार पत्तम रहेगा।
मारो उसकी स्थिर दृष्टि का अभिप्राय समय पमी दो मापने पर
को बौर कोममतप पनाती हुई दोखो मे पाम बिना पास के
हरी दमीयत ठीक नहीं रहेपी ।
उसने पाय का प्यासा हाम से पिया। एकबार उसने अपने
मुर्ण परिवार पर पिगसी-पमा के अतिरिक्त गमी बाप हे
पर लिस्तर नही पोह। उसने चाय पी। मो मे भी। उन
दोनों ने जब चाय पीनी तव मा मे सपा से कहा
यह नाम परी
तुम सायपीसा
स्पा मे मठकर पाय प्यासियों में राती।सएम-एक व्यामा
पर ममी सदस्योकी तरफ बाया । बाप मापी सभी प्राणियों
इस बिना प्रेम की चाय का पी भी लिया । पिपरामा मै नही पी।
रामा मे पिकाम प्टि सभी परस्यों को सिर्फ वा । निमोपन उस
दृष्टि को मही सह सका। मां मे करमा ऐमे गयो भूपती
है? पाप पयों नहीं रीती?
में पाम नही पीकमी।
पौरपाना।
'नही वाट दी । म नप कमीने मुनीम को भरे गामार म जूते
मारक बन पानी पाप नही की।
बमी रसमा चिपका रो हो इस परिह पा निसोपन
बह रामा रेशस पमा । सवालों को पाकर बोगा परमही
समान को मपाम नही पायेपी पत पो समामा रेसा रसमे भी
नही भरा । न घर से बाहर करम रख दिया तो में प्रमे बीते नौ
बता सम् गा।
बार पमा देना । बाप मुभे चितना पी पाहे मारवा-पीटना
किन्तु मैं उसे मवा बनाये बिना ही गो। इसमे मुन्न पोषा दिवा
है पसने मुझे प्यार के नाम पर गरबार किया है। मैं ससे माफ नहीं
।
?
कर सकती।हमापन उत्तेजितसर में बोल रही थी।
"प ए हिनात! विमान मे हाप रटाया । कामे साफ
पर से पका सिमा रिमोचन ने पपाए सर में हाप दोहन
की पकीरी बाद में पड़ामे दीपेप्टा की पर साने मरने दोनों
हापों से हितोपनहाप को मरती से पको रगा।
"बार त रहिए, म इमे समता इमो।"
पर में एक बार इस्मा सबले-मपा रह गया। रोपहर कोर
बोरगाहर बने परे । माके मपने-मपने मनप पाने पे। मेरी पौद
पपरी-मा मोर रामा!
म्पा ने रामा सपए समान स्तरित हो जाती हा
रामा ने मुम्पीते स्वर से पहा ना हा न हो पाने के
कोम पीर पपहा? मग्मीने का बिमा मारेन
नहीं रहेपी पाहे मुझे पाली मी माहोर्यो माय
मा में रसे परामय भरे सर में पहा 'यह पापनारदेन
परम हो गया है। भाभी ला रही है कि मुनीन को उसके पाप ने
गुरगह की पाली से बाहर और रिया है।"
रामा मेगान को हर महीबार देगा।
"हो रामा उगो पापा बनुमान है कि हम ममी पिए
मोरमौर हम रोगों मोमारी पर्म है। हमारी काया-वापस
दीदइसलिए गाने मरनेही पोरापुर मेना बक्षा मममा ।
रामा मिमा पोस्पा पहा के बारे काहे गरा
गरी मने से मरमामासासे प्यार किया था।
निहसमिए कि एमतिकमरीन पुराई और मुन
मेरिकहरनेका पारा गिरा। इसी बापरे पर म उसे
अपना मा समर्पण रिपा । एकरपा यादम
१.
'नो हो गया, उसे भूम पाये में ही पायरा । पाने
उपरेप की तरह हा भारका पीपा प्रायम्त पतिगाम ।
सपी में हर साल रिनों में मुमा दी जाती है और बीमारी
मुग मे हमारे मूल्यों के मामरस दिया है । दुई मने कई बार
घमनाया पानि मादानी मा करो। तुम मुझ से ही पता पने
मपी । तुम मुम यही और सेनेगर गयी।
राबाप
।
स्पा मे मा 'हम बहुत ही मगपूर ।। मुझे अपने बापको
सि पया में पीमित रममा पापा है यह में ही मानवी हूँ। मैंने
सोचा कि मेरा पठन तुम मोयों का पीवन संपार देगा पर तुम मुम से
होड करने समी ।मी म समय ठोकरें इन्सान को पही रास्ते
रिसाठी
मेवा यही नहीं रहेगी। मुझे इस रिस्मी से ही पिए हो यमी
है। उमा सर में मिरविड बी और बालों में प्रवास परमाया।
'इस तरा निरास नहीं होरा चाहिए। मैया गुस्से में बस
स्वभिमान भौर परत पर बम पोट भपीलिए उसमे हम सभी
सोनों कबीरन पर मनुषित प्रतिमाम सपाने की वाया पर
यह प्रतिबम्प पमिक दिन पमने वाला नहीं है। भूम सबको डीकर
ती है। तुम कि अपने पापको पीडित मत राबपि मारमा
योधन भी ही बीत पसी को भूना देना ही यस्कर है।
इस तरह पा रामाको बगर समपाती रही और प्रमा
बाप में एक नया ही विचार पनपता पा।
x
+
बसायोग।
अप्रेषों पग्य में माटो महात्मा गांधी माद्वान पर
पिनियों से मसहयोग भारतीय समठा ने किया पा मा पर मेरे कोक
वासी इन पह-सदस्यों ने पिमोचन से पिया।
रामा पा और इन्दिरा तीनों एक तरफ हो मए मोर पिसीपन
रमा मरी तरफ । रेपा भारत की विदेश मीति की तरह तटस्प।
पहचारी सबसे छोटो सबसे बपिड पुस ईमती। हर कोई उस पर
हरम पमाता मौर पर देगारी पक कर टूट पाती।
भिमोचन सुबह ही पर से पाहर निकमवा वीर पाम तक मारा
मारा फिर पर मा गावा। वह हम्राि से रोटी नहीं मांगता यह
पपनी दोनों पहिलो रोटी नहीं मोमजा । बामपनी मा स सामाह
हीन स्वर में कहना मा साना तैयार है। मा उमके मुरमाए हए
माम्तनसाव मुम को देसती और उसका हृदय पुरा से मर बासा ।
यह विमा कोई नचर दिसे उसे पाना परोस देनी। बह पा सेठा।
उसका साहस नही होता पा कि वह परिवार सरस्मों की मोर
। एक पुरन मोर एक पामोपी पामी रहती थी। एसा नमना
पाकि यहाँ मसहमोम यौर पुमा के सदस्य हम्साम भूम पूम काम
घोंटू उबासी मा ऐहै।
हर घाम य रोपनी का समम्दर समटे सूर्य पस्त हा पाता है
से मस्त होता है इसे मिमोपा नहीं चामता । पादिमदों
पेपर पर नहीं गया है पौर पमन बस्तु होते हुए मूर्य को नहीं रंगा
रोशित ग्यो-यों दिमिरस सने समते है याँरयों उमका
पर एक टूटन स बिगरने ममता और उमड़ी इदा होती बिह
रायपीमाये पर सनकी परह से पानी पानी के मम्मुप हाथ
साम को पाप्य नहीं करती। वह रामसाम पाट सतौर एए मान
की तरह पाय मोर टूटकर पर पाता।
बार उगे या मुसामा मिना । मामे असमरी दृष्टि से
बेटे की घोर देगा। पासप्ताह भर पा बौर पमा पर में पैसे
4ठी न्नपुरी वीपस पापा पा । उसने पर का रहस्य पालना
पाहा पर वह नहीं मान गया। एक समाः ममता के कारण बाप
चार समा गया पाकिकोई मनहोनी घटमा यही पर पटी है। पा बाम रपे । रामा की सिलवार में मारपस्ता मषिक समबरें पही । इपि मामी की पौरियां पड़ी। बाप मा सपास यों हो। सम्प में पूधा। 'मही वो। मा मे महा। बात या किनार मेरे पेट में ऐसा मयानक मावि परिवार की सारी पवमा बस्त-पस्त हो गयी। मनी भी पोडा-पोहार।" मास उसके कान में नहीं पड़ी। बिसोचम मे मासे पूषा पूम्हा यक्षा माही। "वयों" बाटा नमक और रोत सभी मुख भरम हो गया है।" "तुम इन्दिय से पैसा मांग मेती ।" इमिरा पर के पौधे पेरनी की सपबाहर निकली । परकी बारेमाप बरसा रही पी। हालको पराकमा रमकर पोर का मटा कर मह बोली 'मेरे पास तुमने लपाने भरकर रस घोमे है जो मतद। बिसीपनको इमिरा का यह पाय बमप ममा। बह सिर से पाप तमामसना उठा । उसकी यादीस मुहट की बधीती एक वापर में वो रामेन्नि महमरस्य गेरियों है ये साम पद बंधा हमा बैठा । रिस में इतना तुझान मेकर भी पर मही उठ पा । पस बनती पौनों से इमिण को देना पा। इन्दिरामापस परें में बती गयी। मा में पिम्न स्तर महा 'पब मे तुमने दोनों पोकरियों का बाहर भाना-बाना पर किया है तब से हेपे बह का मापसी हराम हो गया है। उसे पुष भी नही मुहावा । उसके बहरे की परमार होठों की हमी मी गमी है।"
'हमी म सकती है इपिरामास योगी मार यह यमागा
नि पाना ही पा । 'मेवारी फन पी पप्पी रेरा सुबह से एक राने
के सिए पर रही है। मग्मा किपर में छोटे-पाटे पणे नही है
बना यहपर बाम बहालम बन जाता। रनों का शिसपना
तभी पाइर मार का पार मुनापी पग । एक मादमी बहतारा
भाषा गा रहा था बसेपा हरकारा हो पौर कोई गया मपना
पम्य समाप्तकर पुमा हा हो। यह कह रहा पाआम राम्ने में
एक औरत को वषा हो गया रास्ते में एक मोरठ -
उसकी इस पोपमा गे मोतामा म सपना बागनी गयी
पौर मोय सी-बत्ती उस मोर नागने ममे ।
स्सा रामा रेषा बोर मां भी मपनी उत्पुरता का नाही राफ
राकी सब पर पड़ी। प गये-इनिरा मौर निगोचन ।
पिसोरन से उसकी मो रन देते हुए कहा या महार पाम
म भी पमा नहीं?
मही।"
म यह ममानवामितुपयत हुए है पर पर की ग्राम मरमे
नको रे । म गममा पाकिमा मादी वनसाह म वानी रिसमे
हम सबकाप बसता है सैन्नि रस रिन का नसारागार कौन
भाई गिरा उठाकर पन मगा। उमने सदुरमा।
'मापने गोपा न ममता मोर हाय हाय पा रोनागिर रामा
की महीपपाहै? यम्मी है बरम मपी । इसका मामय यह नहीं
माप एनसे गारे पर की प्यास्पा को पोर में जामती
मिनापको साहमा हो पर मुझे नी कम मम भी मांग
प्यार पर नहीं गानो । मेति इममे बषियों पर ऐसा
पटोर डिप गरी समाया मा गना। मुनीम मे गमामो प्रेम रा
मामा रेकर दियाममें रपमा या दोप?
मेशिपए।
इमिरापोर मे ही बोली 'यह सब पर है। सुनौस केा
का परया भी हो सपता है? ऐसा करने पहरामा परिण।
बिराने का माटकर पता।
विमापम का पहरा गौर हो गया। पुष हमी हस्ती न माना
प्याप्त हो गयी।
"कत्सबमार का एकराना मीपर में मही हेगा। मापको कार
माज मिपदा म पाने कब मिम । मुखोपार दिल से पपिकना
निकासीबासमती। मेरा कहा मानिए मारपीन असा पापा
पाने दीपिए पपिक होठो माप रामा को पसिब पहुंचा पार
परमार वापस मे माया करें । इससे पापको मामूम हो जाये
बिम्बी कमी है।
मिलोपन की मुद्रा पोड़ी सी उसरे परा में होती सी मपी
स्पिर इपिट में तनिक सति का बाभास ससका । दलिय ने अप
को भोर मीर बनाते हुए कहा में बापा कहती कि पर
परा भी दुरी माफी नही है । बाप पानते ही है कि रामा बी- भूत
परा भी नही पटती। पर मैं पप्सत मिदा किसीबी मीनही कर सर
पाप गय पाति के योग भीत्रिए, मेरी बात पापको ठीकदी नमनी।
बाकीबाबायसन योगोकोपका दिया । शिमोपनी
इन्दिरा इस तरह बैठ गये किसे उन पापम मैं परा मी बावामा
महीमा है।
श्वा ने बाद ही सरसाहपूर्वका "भामी पनम हो गया।
ममा फूस या मा पोर मोर यहां के मोम बड़े बेगम है।
तराहा हो पये कोई मासा हो। या बीरत साप से मर
रही थी। यह दो बाप समधिए चिो पार मम्मी महिलाएं।
गपी और राहोंने स्पित को हार मिया बर्मा पदमी पम
मारे मर पाती।
सससाप कोई बोर नहींपा।
"नहीं । बह निहामत एक परीन परकी भौरव है । उसका
पति मुबह ही मारी पर पमा पाता या पार यह भारी भी कही
काम काम करने बतो पाती है। इसके साप ही एक मामी कह रहा
पाकिस्मेनों काम मकरतोपने परिवार या पोपण मी
मही कर सकते।
इम्मान बहुत मगर है।
कपा मे मा पर पिपरी पुवकों को तरतीब से रपये हए रहा
पहा की सरकार को सबसे पहले मानों को शिल्पो काका से
तेना पाहिए। यह निसिवा ही मार के पीवम की ममुर और
मुपी कर सकती है।
पायचीत गाव देर र पमती ही । एकाएपदिरापमा
गावों का पता पोर कर कहा 'सा! कस से तुम अपने काम पर
मा राप्ती हो और रामा तुम मी
भाको निी मे पोरकी पिछोटी भरनी हो इसे पिका
बोनी "ये रोगों पर से पाहर मही पा सकती।"
'नहीं पा रात्री पों। इनिरा ने प्रस्न यिा।
मो ने पितीपन को और देना पर चिसोपन मे मौकीमोर
पमई मही सापी । मी समा गयो किस नाम में मेरे पर
बाद कर रिया है । पसको पोई पट्टी पिता की है। फिर भी अपने
अपने पदों पर पोरकर हा दासिए विपरपीमा-भारत
मरमे बड़ी मोर पोहरियों मया परा भी याद नहीं है।
"fe:
पिस से हम पापमोबपनी एप पर पीपा नही
ग्यातना पाहिए । ममी तोप मपन परी परत पर पूम पाप
पर पास है और माप से स्पाती है। भाप
पानी पाहिए। और हिप रामा की पाई मपूरी एपायय
पोर पा स परह मोरी पार कर रही सलो। या
।
जिम्मेवारी होती है मौरी भी मपनी मामिक पुलिस को भेज पर भी इसे एसा ।। विमोचन इस पर भी पप रहा। मां की बातों में रोप व पा रोनों वर पायी । बोली "एक कार से माप सबका दित नहीं भरा पपा विमोचन में पीमि सकियों को । इमिप मीष मेमोसी 'याप रिम में अविसासपरकर पया है । म मापका प्यारा पिरोपमही हकी। पाक बापत्र नाकाकाम पर सोतब तक पाकाम पर पानी और पमा की पाई में पाप बापामही राम एकती। उसका निमय गुमकासब में हरापत मा निभम्र गोरम बीर बाहर मांकने लगी। बाहर कीड़ों की तपसान बम-फिर एक मपा पन्चा इस देगी से भाप पाहा पापों की पात्रों में कौतुक सा पठा वीर मोठ हैसी से भर पाये। पोरी होरर मा पिमूर सी बड़ी सी।बा गाव पुसी परेशान पीर बिरस पी कि पसका प्रमुल मर पा सका पौरव र पया। पनी बर्थी मिकती। राम नाम सत्पी पनि करती हो। पायद कोईपबाम की मौत पी समिए जीत बानै पामेरो पे रहे थे। मां ने मन ही मन पहा हे प्रमू तू मुझे भी मर ठाने। x एक वर्ष बार- समय मोर नदेय दो पावों में प्रसन्नता पार मानता बोपों गीत हो रही पी। रामा नै जैसे ही कमरे में प्रवेश पिया से की बोनो मानों में पुषियों का सार पहा । उसके होठो पर हाव मकर पिडा हा बा। इम्बिरा मे पूपण, या बात हैरामा पार ?'
वृष नही मामी चीवन परत पापा मेरा सपना पूरा हो
जाएगा।
'मैं विरेश पाळमो। पेरिस म्यूपा मम्मत
'सष!
-
रामा ने विविध पनपनी पसमधामी। बांगों को
दिरा के मूहरे पर चमाते हुए उसमै सपनी चोटी को निगम
पोमा और बनाया फिर रमको मटके के साथ पीछे की मोर पंन्टी
हुरे पहरहठी “पए की पलं मामी नि प्रतिदिन पटती पा
रही। रोममी एकदम पर होगर मरे मामने न रही है। मामी
की एक ममिनापा मे ही पूरी होगी।सेही पिया उमरे चेहरे
परमार न हो पाती।
मामी एप ग्राम मी हो पयी। सपने पहरे पस्त को अपनी
ममुमी धोर से बोषीमह बोसी तुम म गुमी में मेरा
मारमही दोगो जिमम मुझे बरसों से दमगार पा।
कर मौ?
म मा बनने पालो।
ग" उसम मामी को मानिमन में पारस र म मिया।
मामी कागड़ी की यमस्या में परस्य रहने वामा पदप
मंकोष से मुस्मया मपनी पतरों को नियों कोमपाती
दुपपती वह हर बोपी हा में मो पनने पामी हूँ। मेरे मानने
के बारही तुम्ह गाना होगा।
मन्त्रि भाभी ?
का? मामौदागों में प्रानपा।
मुगे जानेगेन में मुमसर बल हो कम मिम।
पोमाप समाyिो या मुसमर मिल पा परा है। यो
मारम्मर मोमोरोपार मामी मुगे मपने जीपम .
जेब में उतमा रपया नहीं। नितमा पहसे होता था। बादमिप ममुकाप रामा की गार विप है। यह सो पाती है। कभी बरेमी बोर कमी रेगा के साप सोने में गये मसोम मातोषिक मानंद की अनुभूति होगी । सकी मुपारुति पर पापरता की किरणें रिडी हा पाती पोर ममता का साबर सिगुनसमट कर मुझे मपर्यों में माता है । पात्र की एक भूग में खोयी हुई पपपपाती गीर कमी कभी एम भी सेती है तब रेषा वाम गाती है । मीर पर बम्त महताब मीनेएन से प्रयती है बड़ी दोरी यह क्या करती हो? "तुम्हें पूमती रेवा तू मेरी गालीम ?" रेवा की मांगों में प्रबोपताना पटती मोर मा के चेहरे की मरमा से पहन्ति हो पाती है। म्पा। बसम्तोष की माग में समिया की मांति बन रही है। बीवन की परिस्थितियों और वियताएँ इन धामपी की रा से प्रचस्मित कर रही। पर उसने अपने पापको पैसे गाड़ी बभामिन नामा हैनौर से महसूस हुमा किया नितान्त ही बसस्थवीपम पी रही है। इस बीपन मे कोई भी स्वाभाविकता नही है कोई सहर दुय माही । बतायात ही बम्तमुप हो गयी है और इस बम्त- मुखता - उमे ग्रामियों में मेर रिया है। मोर की परसर की मापार करती र रामा पाती। उसके अप-अप से सुन बरमती है और मेरे मस्तिष्क में एक मारताप पाती है। उसका दुपट्टा पुण्यू का स्रोत वौर उसम बागमर पातावरण में बसन्त-हार पाने वाला होता है। पीकर बाती है। तब पसरेसम वागावे बहादुरगावी बाकरा पपने कमरे में फिर सम्म पाती। पसका कमरा ठीक मेरे पर है इसलिए मेधारी दुनिया कीमता है कभी-कभी या
बानियाह किए हुए रेवती पोरमौर कमी-कभी बह सरस
पहने हुए ही गम्स शुरू कर देती है सर सरहद पद से मेरे सिर में
रहने मयता है और बुद्धिमा परेसान रोकर ऊपर पाठी पौर
बर पार पापस मौरती हम उसकी गानों में मामू माहुए होते है।
मुबह पमा पठकर अपनी समूह बीमती है और उनमें रपे हुए
मोरों पर एष मोर मार रख सो ऐप मामी को पसाती।
मामी मुण्हो पाती है मौर रामा वपन रिरेणाने का प्लान मुनाती
है। प्मान बहार राम सुना है।
म मर जीवन प्रसर रहा पा इस परिवार का ।
x
x
x
बानर एक पान मारा। इस पान रो में भी सहन महार
पाए मारगीची दुप मेप-परमात पपन पर रहे।
मो मेरी पोर में 4ठी हा पर दो पारकर पी भी शिलिए
मागी-मापौगामी माय पी रुपा राग नहीं गोमतीदा हमने
कई बार पिसागरगटा है।
मोहमाया मापा।
रिपोपन और गोर गिरतरा ररा पा मोर मा बीप
पीपा करमाकामागरमा रही थी। रेशा पाप गही पी।
तमो दो-बार पदोमी या पे । उगोने पर प्रसार पारिवागा
तोड़ दिया जाय।
सारा तोड़ दिया गया।
विस्तरे पर पा निमा में सोमोह है। रमकी सारी रेह महर
पार मेसी मोर मार धीरे-ौरमा पा रहा है।
हुए कहा इसोकहोरोमा रही पामो तार में एक-एक
पापी बाय।
मने गुस्से में दवि पीसे । एप नहीं कहा । सिर्फ उसे रेखती रही।
मा रेशिमक होकर मह रही भी यहाँ क्यों पड़ी हो। पहोन!
पापोवर ने मुझे मी अपने माफिम में एप्लाइस्टमेंट दिया है।"
म सारी सकरपती पायी । उस दिन में यमुना किनारे बहन
देर तक बंठी दी। महरों पर मनोरमा की दुष्ट और हपी हाँ
मुसाहट वर कर किनारे के पास मा रही थी बार मुवे बिना
बीपी । वीरे-धीरे मूर्य र मपा । बम्बेरा अपने मौन सगरों से
माने ममा । मेरा मन गुग्यता से भर मपा बार मुझे पामार का
प्यार, बापरे और उसकी उम्र मर साथ रहने की कसमें बार बाने
नमी। उसने मुमसे दायरा प्पिा पा किम उम्र भर तुमारे प्यार
पौर समर्पण की महामता को निमारूपा। से एकनिष्ठ लिरकी
सरा मानू गा । ममे उसे सब एप पिया। तन, मन और बच ।
बारमानोरका परि सरम और पहना। मने भी गोचा कि
ऐसा समई पुगक पाकरम अपनी बार पपरे परिवार की समस्त
समस्याओं को हम करगी। मैंने उसे एक पवित्रता की तप
सच्चा पति माना बीर बीपन के बन्तिम सम पर भी की
पोलियो मुझे महोप करेंगी उसका ही प्यान करपी पोकिमी
मुझे तुम बात सी बा बवामी ।।
रामा । उस नि मुम्न पीनन गया बसह पिताना पौरता
सपा । दूसरे नि मरे पामोर से मिलना चाहा, पस मुफ प मिषने
की पसमर्मता पर करी। म्न पाम को मने किसी भी तप
से पका ही लिया । उससे मेरी गत सी बातें हुई पर उसने मुझे
साफ-साफ पों में कााि कि वह मेरे लियत बीपन में अधिक
हस्तक्षेप करे। लेकिन माविक मरर म पूर्ववत रेतारमाया
पत्ता पा सका। वे नही पा सकती । ममे म रमित पों
।
१२॥
में से पिपनी पिम्पी भग पार रिलाये बो हमारे पवित्र
पार के प्रतीक ये तो उसने एक सहए प्यापारी की एका
जसकी कीमत में बहुन पुका हूँ।
इसके बाद मैंने उससे किसी भी तरह पात-चीत करनी राषित
नारी समझो।
रामा | सस्प मेरा पुर मैत्री समान है। यह मुझे यो-यो
उपहार या पये मार देशा पा बस्तु ताम्हें पद में उसे पहन
सारसी पी।पादेचारा किमी मोर से प्यार करता है और
उसे विराम है कि एक म एक दिन ये मामायिक मापन टूट कर
रमे फिर मिमने रे । रमे तुम पक्षत मत समझना । उसकी
बानि-स्थिति भी पारा प्राधी नहीं है।
एमा! मग में तुम से मुषपना चाहती हूँ। तुम्हारे जीवन का
परिनाम पर हो सकता है। यह होरत में राव रात मर गाना
रिटेप के सपने देखना और रमके बदले में एक मम्पम दिसामी
पीरन बीवाना कहा पाप नंमत है ? ममप तुम्हें मीमी तरा
निडरपमा पाया मीर तुम्हारी तमन्नाएँ म दिन निम पीड़ा
का मनुमय फरेमी पापर यह पुई मौसी गाम से राराने के लिए
विषम कर। फिर ममा त पानी मिरी फूस मौ रेषा भी इसी
तपम रिसामी पौरन लिए, इन्हीं यसप परम्पपों
मरीकों को अपनाए ? गभी बपनीमारीवभिपापाों पर मी
रए पेमे होगामोदरों को बमारकार करने को विपासाको एक
मग ममाते हो? पापी परती भी मह पराई माटी
विसमें पैसा बीर रामोपी साही देर उबेमा। में पानी है कि
पसमको रिपीर परे। पाभिी मौजही संतों की गिकार
म हो ? फिर तेरी नाभी मी मां बनने वाली है। यह भी एक से
निगुको पम्म रेपी । पपा इस मपे पिाहाप में नही बगेरा रोगी
पो सो दिपो को पपपर की तरह निपत गरिसके प्रमुख
१२५
मुस्कान इस दुड़िया की नही, इस पर्प की है वो पाती हाबों
बीर स्वस्थ मुख भोप में मिट-मर पाती बोर स्वस्थता में मनपरत
सनीयतारों डीसएमीन व करती रहती है।
में भी पुपए पोंकि बाबिर इम सब इस जाति काम की
हमारी विकृतियों को लेकर से मष्टि का सर कर
सकते है।मने वरा बमिरान ही हमें और हमारे पान-प
मएस ए बीवन को बापात पा र उसमें मामूमन
परिवर्तन मार्य।
मह परिवार सणे पुर की मोर कहा है। सब कमी
पिसोपन पत को काम करते-करते कपातार पमा पाती।
मा बाटी रवा भाती है और सारा परिवार मिस कर एक बानम्म
मोर साप के साथ बातों ही बातों में पारा काम परम करता
में विभोर होहरम सा है-पही सपा पीयन है। प्रम में
मामर पोर मेहनत में मुस। मीर में अपना मरण हाप रामा
के सिर पर रहता है। में से बहुत ही प्यार करतापयोंकि
हर कमरा ऐसे होमरपी को प्यार करता। योगीवन में स्वस्थता
माने की पेष्टा करते। बौर पुर उसे अपने जीवन में नाम।
मेरी कहाना तस्म होती है।
श्री यादवेन्द्र शर्मा 'चन्द्र' की अन्य कृतियाँ
उपयास
संम्मासी मार सुम्परी
[मराठी मराठी में परित
रीमा रसा! बीमा दुमा
मिट्टी का कम
(पुनरातीद सिपी प्रति]
प्रोफेडर
पौषम में दूर बीमों में पानी
पटने बाम
भयमा भीर मरे
[पुजराती परसपुर तिथी म मक्षित]
मयाइम्सान
[पुराती में परित]
गूनकाश
बाबारमी
पपकीरी
मि में पति]
मपमा
प्याग
रामारावर
सगरमाम साहित्य प्रहारमी में पुरात
प पुरानो मेरित
१२५
समाएर
मुग वा
जमीरी
[गुजराती में परित
मुनाहों की वी
ठहरामी
नीमेमाकापतो
एक पसीय
महानी साह
विश्वामित्रकीरोग
बरफको समाधी
एकांकी संग्रह
पुप्पी और तारा
बाल साहित्य
भीमटे
मफेरबतक
माम परबारमाह
पणा का सूरज
मुझमान
टमी टोरी
No text on this page.