Shri Jain Swetamber Khartargacch Sangh, Jaipur

Sutagame

Swami, Sudharm · 2011/01

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के जाटश्यक उपकरण
2 श्रासन, 4 घा
2 गरम काबली,
1 ग्लास पूछने का
1 गरम मोटा कबल
Gooor
५
एव फालना, जालोर, नाकोडा, बालोत
-
-
जी
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EARS

SSA तय पुप्फ णमोऽत्थु णं समणस्स भगवओ णायपुत्त-महावीरस्स चरिमतित्थयरणायपुत्तमहावीरस्स पंचमगणहर- सुहम्मायरियविरइय 18 सुत्तागमे तत्थ णं सूयगडे ३ संवायग णायपुत्त-महावीरजइणमघाणुआई-लद्यम-पुप्फ भिक्खु प्रकाशिका श्रीसूत्रागमप्रकाशरसमिति, जेनस्थानक, रेत्वेरोड, गुडगाँर-छावणी (पूर्वपजाव ) 18 वीरमात् २४.४ } विक्रमाब्द २००७ { काइट सन् १९५१ बाबू रामलाल जैन, मंत्री. निर्णयसागर प्रेस, मुंबई नं. २ S Printed by Kamchandra Yesu Shedge, at the Nirnayasagar Press, 26-28, Kolbhat street, Bombay २ , सूयणा सूयगडमेयमम्हमायरियाणमाकुन्ध सुयणंधुरुहबोहणमण्णाणमोहतिमिरमरहरणध. म्मुजोयकरणेकतछिच्छाणऽसेतावकराणममिगव्य उग्गतवतेयदिशामऽसम्वभक्तीण ससहस्व विधुहजणमणचओराणममदाणददायगभव्यहिययकेरयवियासगाणं नियसि- यजसजुण्हाधवलियदियतराणमण्णउत्थियचकविहडणपयडमहप्पाणे पावकलंकाका- गविमुवाग मगरहरूल्व गंभीरिमामेराणाणचरणाइनिम्मलगुणरमभाऊरियाणं, किंतु पयइसारतपरिचत्ताण मरालुन्च परगुणखीरगहणदोसबुविवजणवियाखणाण अहिल्य धारिमापडिहत्याणमजदमईण व व अणप्पकुवियप्पसंकप्पमुण्णाणं अमरतमणुप ताणं सिरि १०८ अज्जपरमपुजवदणिजाण ४ फकीरचंदमहापुरिसाणं धार- णाववहाराणुसार विजइ, जइ दिठिमुद्दणदोसत्तो वा कत्य वि कावि अमुखी हुन सोहिजउ पेसिज अस्सोवरिससम्मई इमस्स ममाय कहु बुहा हिराबाई सह पाउगतु त्ति बेइ। गुरुचलणसयवत्तरसाङ, पुष्फमिक्खु १ णायसाहिचविसारयस्स मुणिपुक्खरस्स सम्मई मुरूवेण दिट्ठ मए पुत्थय, भिक्खुणा पुप्फनामेण सवाइय, भवालहितरणि गयकुमइलयसूरणे, वजडडुव्वैपरवाइधरचूरणे, कूवअण्णाणपडियाणहत्वावल, बर्ण पाववणडहणडहणुल्व ज १ कम्मारउहि भिडताण माहमिव, सुतपासायरहमत्य- मोवाणमिव, मोक्खमग्गे पयाणपाहेजमिव, णाणतिसियाण ण हमारपेजेभिव मि इव चवरमणकारगिरोहे अल, ण जयव्वाहिलुग्गाण महुरोसेई , वाश्मयमेह- पडिसेहणे वीऊ ण, दाही साहेज मित्त व अभासिणं ३ दुइजलणउल्हवणमेहुँ सत्याहु ग, दीहससारक्तारनित्यारणे, गिम्भदिनमणिण तत्तहँ विडवितीर्यायऽसहि- यह सुभोज व हरिही अवाय ॥४॥ हिययकुमुयवोसहिही मइसिंधूपरिवहिही, पुषि- मससिपुत्थयामिण, जो निश्चलमणुपट्टिही ॥५॥णायसाहिञ्चतित्याइपयवीधरै, पेसिया' सम्मई इय मुणीपुक्खर, सादडीनामधेजाओ णयरा इमा, भयगर्यणवोमैनेम्मि सवच्छरे ॥ माहतियपक्षबीयाए दियहे बुहे सक्कया पाइए मइ समणुवाइमा ॥ ७॥ सूचना यह प्रकाशन मेरे वर्माचार्य, माधुकुलशिरोमणि, श्री १०८ श्री श्री श्री फकीर- चद्रजी महाराज (स्वर्गीय) के वारणा व्यवहारके अनुसार है। यदि कोई दृष्टिदोष रह गया है तो मुघारकर पढ़ें। ३. आगम इसी प्रकार एक पुस्तकाकारमें प्रकाशित हो रहे हैं । मुनिगण अपनी सम्मति समिति को भेज दें। पुष्फ मिकाबु - श्रीसूत्रागम प्रकाशक समितिके द्वितीय-संरक्षक, श्रीमान मोहनलाल वनराज कर्गावट, भवानी पेठ पूना नं. २.

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धी खरतरगच्छीय ज्ञान मन्दि जयपुर * ... १ सु० भ० १-उ० १] सुत्तागमे णमो त्यु णं समणस्स भगवमओ णायपुत्त महावीरस्स सूयगई (सा. क्र. पढमे सुयक्बंध समयज्झयणे पदमे जयपुर बुज्झिज त्ति तिउहिजा वन्धणं परिजाणिया। किमाह बन्धक वीसे कि मजाण तिउट्टइ ॥ १॥१॥ चित्तमन्तमचित्त वा परिगिज्झ किसामवि । अन्न वा अणुजा- णाइ एव दुक्खा न मुम्बई ॥ २॥२॥ सय तिवायए पाणे अदुवऽनेहि घायए। हणन्तं वाऽणुजाणाइ वेर वढेइ अप्पणो ॥ ३ ॥ ३ ॥ जस्सि कुले समुप्पन्ने जेहिं वा सवसे नरे । ममाइ लुप्पई वाले अन्ने अन्नेहि मुच्छिए ॥ ४॥ ४ ॥ वित्त सोयरिया चेव सव्वमेय न ताणइ । सखाएँ जीविय चेव कम्मुणा उ तिउट्टइ ॥ ५॥५॥ एए गन्थे विउकम्म एगे समणमाहणा । अयाणन्ता विउस्सित्ता सत्ता कामेहि माणवा ॥ ६॥ ६ ॥ सन्ति पञ्च महब्भूया इहमेगेसिमाहिया । पुढवी आउ तेऊ वा वाउ आगासपञ्चमा ॥७॥७॥ एए पञ्च महन्भूया तेभो एगो त्ति आहिया। अह तेसिं विणासेणं विणासो होइ देहिणो ॥ ८॥ ८ ॥ जहा य पुढवीथूमे एगे नाणाहि दीसइ । एव भो कसिणे लोए विनू नाणाहि दीसइ ॥९॥९॥ एवमेगे त्ति जम्पन्ति मन्दा आरम्भनिस्सिया। एगे किचा सय पाव तिव्व दुक्स नियच्छइ ॥१०॥१०॥ पत्तेय कसिणे आया जे बाला जे य पण्डिया । सन्ति पिच्चा न ते सन्ति नत्थि सत्तोववाइया ॥ ११॥ ११॥ नत्थि पुण्णे व पावे वा नत्यि लोए इओवरे । सरी- रस्स विणासेण विणासो होइ देहिणो ॥ १२ ॥ १२ ॥ कुव्व च कारय चेव सवं कुव्ध न विजई । एव अकारओ अप्पा एव ते उ पगभिया॥१३॥१३॥ जे ते उ वाइगो एव लोए तेसिं कओ सिया। तमाओ ते तम जन्ति मन्दा आरम्भनि- स्मिया ॥ १४ ॥ १४ ॥ सन्ति पञ्च महन्भूया इहमेगेसिमाहिया । आयछट्ठा पुणो आहु आया लोो य सासए ॥ १५॥ १५॥ दुहओ न विणस्सन्ति नो य उप्पजए अस। सव्वे वि सव्वहा भावा नियत्तीभावमागया ॥ १६ ॥ १६ ॥ पञ्च खन्धे वयन्तेगे वाला उ खणजोइणो। अन्नो अणन्नो नेवाहु हेउय च अहेउय ॥१७॥१७॥ पुढवी आउ तेऊ य तहा वाऊ य एगओ। चत्तारि धाउणो रूव एवमाहसु आवरे ॥ १८ ॥ १८ ॥ अगारमावसन्ता वि अरण्णा वा वि पन्वया ।इम दरिमणमावन्ना सव्वदुक्खा विमुम्बई ॥१९॥१९॥ ते नावि सधिं नच्चा ण न ते धम्मविऊ जणा। ७अ सुत्ता

सुत्तागमे
[सूयगई-
-
जे ते उ वाइणो एव न ते ओहतराऽऽहिया ॥२०॥२०॥ ते नावि सधिं नचाण
न ते यम्मविऊ जणा । जे ते उ वाडगो एव न ते ससारपारगा ॥ २१ ॥ २१ ॥
ते नावि सधि नच्चा ण न ते धम्मविऊ जणा [जे ते उ वाइणो एव न ते गन्भस्स
पारगा ॥ २० ॥०॥ ते नावि सधि नच्चा ण न ते धम्मपिऊ जणा। जे ते उ
वाइणो एव न ते जम्मस्स पारगा ॥ २३ ॥ २३॥ ते नावि सधि नच्चा ण न ते
धम्मविऊ जणा । जे ते उ वाइणो एव न ते दुक्सस्स पारगा ॥ २४ ॥ २४ ॥ ते
नावि साधि नच्चा ण न ते चम्मविऊ जणा जे ते उ वाइणो एवं न ते मारस्स
पारगा ॥ २५ ॥ २५ ॥ नाणाविहाइ दुक्साइ अणुहोन्ति पुणो पुणो । समारचक-
वालम्मि मचुवाहिजराकुले ॥ २६ ॥ २६ ॥ उच्चावयाणि गच्छन्ता गम्भमेस्सन्ति
णन्तमो । नायपुत्ते महावीरे एवमाह जिणुत्तमे ॥ २७ ॥ २७ ॥ त्ति वेमि ॥
समयज्झयणे पढमुद्देसो॥
आघाय पुण एगेसिं उववन्ना पुढो जिया । वेदयन्ति सुह दुक्ख अदु वा लुप्पन्ति
ठाणओ ॥ १॥ २८ ॥ न त सय कड दुक्ख को अन्नकड च ण । सुह वा जइ
वा दुक्ख सेहिय वा असेहिय ॥ २॥ २९ ॥ सय कड न भन्नेहिं वेदयन्ति पुढो
जिया । सगइय त तहा तेसिं इहमेगेसिमाहिय ॥ ३ ॥३०॥ एवमेयाणि जम्पन्ता
वाला पण्डियमाणिणो। निययानियय सन्त अयाणन्ता अवुद्धिया ॥ ४ ॥ ३१ ॥
एवमेगे उ पामत्या ते भुजो विप्पगन्भिया। एवं उवट्ठिया सन्ता न ते दुक्ख-
विमोक्खगा ॥ ५॥ ३२॥ जविगो मिगा जहा सन्ता परियाणेण वज्जिया ।
असकियाइ सङ्कन्ति सकियाइँ असक्षिणो ॥ ६॥ ३३ ॥ परियाणियाणि सन्ता
पासियाणि असङ्किणो। अन्नाणभयसविग्गा सपलिन्ति तहिं तहिं ॥ ७ ॥ ३४ ॥
अह त पवेज वज्झ अहे बज्झस्म वा वए । मुच्चेज पयपासाओ त तु मन्दे न
देहई ॥ ८॥ ३५ ॥ अहियप्पाहियपन्नाणे विसमन्तेणुवागए। स बद्ध पयपासेण
तत्य घाय नियच्छड ॥ ९ ॥ ३६ ॥ एव तु समणा एगे मिच्छदिट्ठी अणारिया ।
असकियाइ सङ्कन्ति सदियाइँ असद्विणो ॥ १०॥ ३७ ॥ धम्मपन्नवणा जा सा
त तु सङ्कन्ति मूढगा । आरम्भाइ न सङ्कन्ति अवियत्ता अकोविया ॥११॥३८॥
सव्वप्पग विउकस्स मव्व नूमं विहृणिया। अप्पत्तिय अझम्मसे एयमह
मिगे
॥ १२ ॥ ३९ ॥ जे एय नाभिजाणन्ति मिच्छदिट्ठी अणारिया । मिगा वा पास-
चद्धा ते घायमेस्मन्ति पन्तसो ॥ १३ ॥ ४० ॥ माहणा समणा एगे सव्वे नाग
मय वए । सव्वलोगे विजे पाणा न ते जाणन्ति किंचण ॥ १४ ॥४१॥ मिलक्खु
अमिलक्स्स जहा वुत्ताणुमासए । न हेउ से वियाणाइ भासिय तऽणुभासए ॥१५॥

१ सु० अ० १-उ०३] सुत्तागमे १०३ ॥ ४२ ॥ एवमन्नाणिया नाण वयन्ता वि सयं सय । निच्छयत्य ण जाणन्ति मिलक्खु ब्व अवोहिया ॥ १६ ॥४३॥ अन्नाणियाण वीमसा अन्नाणे न नियच्छइ । अप्पणो य पर नाल कुतो अन्नाणुसासिउ ॥ १७ ॥ ४४ ॥ वणे मूढे जहा जन्तू मूढे नेयाणुगामिए । दो वि एए अकोविया तिव्वं सोय नियच्छई ॥ १८ ॥ ४५ ॥ अन्धो अन्ध पह नेन्तो दूरमद्धाणुगच्छइ । आवजे उप्पह जन्तू अदु वा पन्थाणुः गामिए ॥ १९ ॥ ४६ ॥ एवमेगे नियागट्ठी धम्ममाराहगा वय । अदु वा अहम्म- मावजे न ते सव्वजय वए ॥ २० ॥ ४७ ॥ एवमेगे वियकाहिं नो अन्न पज्जु- वासिया। अप्पणो य वियकाहि अयमजू हि दुम्मई ॥ २१ ॥ ४० ॥ एव तत्काइ साहेन्ता धम्माधम्मे अकोविया । दुक्सं ते नाइतुट्टेन्ति सउणी पजर जहा॥ २२ ॥ ॥ ४९ ॥ सय सय पससन्ता गरहन्ता पर वय । जे उ तत्थ विउस्सन्ति ससार ते विउस्सिया ॥ २३ ॥ ५० ॥ अहावर पुरक्खाय किरियावाइदरिसणं । कम्मचिन्ता- पणट्ठाण ससारस्स पवडण ॥ २४ ॥ ५१ ॥ जाण काएणऽणाउट्टी अवुहो ज च हिंसइ । पुट्ठो सवेयइ पर अवियत्त खु सावज ॥ २५ ॥५२॥ सन्तिमे तउ आयाणा जेहि कीरइ पावग । अभिकम्मा य पेसा य मणसा अणुजाणिया ॥ २६ ॥ ५३ ॥ एए उ तउ आयाणा जेहिं कीरइ पावग । एव भावविसोहीए निव्वाणमभिगच्छई ॥ २७ ॥ ५४॥ पुत्त पिया समारब्भ आहारेज असजए। भुञ्जमाणो य मेहावी कम्मुणा नोवलिप्पई ॥ २८ ॥ ५५ ॥ मणसा जे पउस्सन्ति चित्तं तेसिं न विजइ । अणवजमतह तेसिं न ते सवुडचारिणो ॥२९॥ ॥५६ ॥ इच्चैयाहि य दिट्ठीहिं सायागारवनिस्सिया। सरणं ति मन्नमाणा सेवन्ती पावग जणा ॥ ३० ॥ ५७ ॥ जहा अस्साविणिं नाव जाइअन्धो दुरूहिया । इच्छई पारमागन्तु अन्तरा य विसीयई ॥ ३१ ॥ ५८ ॥ एवं तु समणा एगे मिच्छदिट्टी अणारिया । ससारपारकखी ते ससार अणुपरियन्ति ॥ ३२ ॥ ५९॥ त्ति बेमि ॥ समयज्झयणे विइयुद्देसो॥ ज किंचि उ पूइकड सट्ठीमागन्तुमीहिय । सहस्सन्तरिय भुझे दुपक्ख चेक सेवई ॥१॥६०॥ तमेव अवियाणन्ता विसमसि अकोविया । मच्छा वेसालिया चेव उदगस्सभियागमे ॥ २॥ ६१ ॥ उदगस्स पहावेणं सुक्क सिग्धं तमेन्ति उ । ढङ्केहि य कङ्केहि य आमिसत्थेहि ते दुही ॥३॥ ६२ ॥ एव तु समणा एगे वट्टमाणसुहेसिणो। मच्छा वेसालिया चेव घायमेस्सन्ति गन्तसो ॥ ४ ॥ ६३ ॥ इणमन्न तु अन्नाण इहमेगेसिमाहिय । देवउत्ते अय लोए वम्भउत्ते इ आवरे ॥५॥ ॥ ६४ ॥ ईसरेण कडे लोए पहाणाइ तहावरे । जीवाजीवसमाउत्ते सुहदुक्खसम- १०४ मुत्तागमे [सूर्यगई- लिए ॥६॥६५॥ मयंभुणा रहे लोए इयुत महेरिणा। मारेण सउया मारा तेण लोए यमामए ॥ ७ ॥६६॥ माहणा समा एगे आह अन्दर जए। अगो तत्तमकासी य अयाणन्ता मुस वए ॥ ८॥ १७॥ मह परियाएहिं रोगं चूया परे ति य । तत्त ते न पियानि न विासी स्याद दि॥९॥ ६ ॥ अमणु उसमुप्पाय दुस्पमेव पियागिया । समुप्पायमयागन्ना यह नायन्ति सुवर ॥ १०॥ ६९ ॥ नुदे अपावए आया हमेगेमिमाडिय । पुणो रिमापदोग सो तत्य अवरस ॥ ११ ॥ ७० ॥ इह ममुढे मुणी जाए पन्ग हो. अपावए। दियटम्बु जहा मुजो नीग्य नस्य तदा ॥ १०॥ १ ॥ एयापुर महानी बम्भ- चेण ते बने। पुढो पापाउया मच्चे अक्वायागे मय मय ॥ १३ ॥ ७॥ गए मए महाग निद्विमेव न अनहा । अहे दहेव यापी गव्यकाममममिए । १४ ॥ ॥ ॥जदा य ते अरोगे य हमेगतिमाहिय । जिदिमेर पुरी सटामए गडिया नग ॥ १५॥ ७८ ॥ अमनु अगाध्य भमिहिन्नि पुणो पुगो । कप्प. कालमुवजन्नि ठाणा आमुरफियिनिय ॥ १६ ॥ ७५ ।। त्ति मि ॥ समय- ज्ययणे तयुदसो॥ एए जिया भी न मरण याला पण्टियमागिणो। हिचा ण पुण्यनगेय निया रियोवएमगा ॥१॥ ७६ ॥ तच भिरा पानाय निय तेनु न मुच्छए । अपु- पस्से अपलोणे मज्मेण मुीि जावए ।॥ ॥ ७७ ॥ मपरिग्गहा य सारम्मा दहमेगेतिमाहिय । अपरिग्गहा अगारम्मा भिरग ताण परिचए ।॥ ३ ॥ ८ ॥ बढेमु घारमेसेजा कि टत्तेमण चरे। अगिदो पिप्पमुफो य ओमाण परिपजए ॥४॥ ७९ ॥ लोगवाय निमामेजा इहमेगेगिमाहिय । विपरीयपनसभूय अन्नदत्त तयाणुय ॥ ५॥ ८०॥ अगन्ते निइए लोए मामए न विस्मई । अन्तर निदए रोए इइ धीरोऽतिपागडे ॥६॥ ८१॥ अपरिमाण बियाणाइ दहमेगेसिमाहिए । सत्य सपरिमाणं इइ धीरोऽतिपामई ॥ ७॥ ८२॥ जे के तसा पाणा चिन्ति अदु यावरा । परियाण अन्यि से अब जेग ते तमयावरा ॥ ८ ॥ ८ ॥ उराल जगओ जोग विवजाम परेन्ति य । मब्वे अपन्तदुस्मा य अओ मने अर्हितिया ॥९॥ ८४ ॥ एक सु नामिणो मार ज न हिंसद किंचण । अहिंमासमय चेन एयावन्त विवामिया ॥ १० ॥ ४५ ॥ बुखिए य निगयगेही आयाम सम्म रक्ाए । चरियामणसेजामु भत्तपाणे च अन्तसो ॥ ११ ॥८६॥ एएहिं तिहि ठाणेहिं सजए सयय मुणी । उक्त जल्ण न्म मन्सन्य च विगिदए ॥ १२॥ ८७ ॥ मलिए उ मया साह पयसवरसमुढे । सिएहि असिए भि आमोरमाए परिव्वएज्जाति ॥१३॥८८॥ति बेमि ।। समयज्झयणं पढमं ॥

१ सु० म०२-उ०.] सुत्तागमे १०५ वेयालियज्झयणे विइए सवुज्झह कि न बुज्झह सबोही खलु पेच्च दुल्लहा । नो हुवणमन्ति राइयो नो सुलभ पुणरावि जीविय ॥ १॥८९ ॥ इहरा बुड्ढा य पासह गन्मत्था वि चयन्ति माणवा । सेणे जह वट्टय हरे एव आउखयम्मि तुट्टई ॥२॥९०॥ मायाहि पियाहि लुप्पई नो सुलहा सुगई य पेचओ । एयाइ भयाइ पेहिया आरम्भा विरमेज सुव्वए ॥३॥९१॥ जमिण जगई पुढो जगा कम्मेहिं लुप्पन्ति पाणिणो । सयमेव कडेहि गाहई नो तस्स मुच्चेजऽपुठ्ठय ॥ ४ ॥ ९२ ॥ देवा गन्धव्वरक्ससा असुरा भूमिचरा सरीसिवा । राया नरसेठिमाहणा ठाणा ते वि चयन्ति दुक्खिया ॥ ५॥ ९३ ॥ कामेहि य सथवेहि गिद्धा कम्मसहा कालेण जन्तवो । ताले जह बन्धणञ्चुए एव आउखयम्मि तुट्टई ॥६॥९४॥ जे यावि वहुस्सुए सिया धम्मिय माहण भिक्खुए सिया। अभिनूमकडेहि मुच्छिए तिव्व ते कम्मेहि किचई ॥ ७ ॥ ९५॥ अह पास विवेगमुट्ठिए अवितिण्णे इह भासई धुव । नाहिसि आर कओ पर वेहासे कम्मेहि किच्चई ॥ ८॥ ९६ ॥ जइ वि य नगिणे किसे चरे जइ वि य भुञ्जिय मासमन्तसो । जे इह मायाहि मिजई आगन्ता गन्भाय णन्तसो ॥९॥ ९७ ॥ पुरिसोरम पावकम्मुणा पलियन्त मणुयाण जीविय । सन्ना इह काममुच्छिया मोह जन्ति नरा असवुडा ॥ १० ॥ ९८ ॥ जयय विहराहि जोगव अणुपाणा पन्था दुरुत्तरा । अणुसासणमेव पक्कमे वीरेहिं सम्म पवेइय ॥ ११ ॥ ९९ ॥ विरया वीरा समुट्ठिया कोहकायरियाइपीसणा । पाणे न हणन्ति सव्वसो पावाओ विरया- ऽभिनिव्वुडा ॥ १२॥१००॥ न वि ता अहमेव लुप्पए लुप्पन्ती लोगसि पाणिणो। एव सहिएहि पासए अणिहे से पुढेऽहियासए ।। १३ ॥ १०१॥ धुणिया कुलिय व लेवव किसए देहमणासणाइहिं । अविहिंसामेव पव्वए अणुधम्मो मुणिणा पवेइयो ।। १४ ।। १०२ ॥ सउणी जह पसुगुण्डिया विहुणिय घसयई सिय रय । एवं दविओवहाणव कम्म खवइ तवस्सि माहणे ॥ १५॥ १०३ ॥ उट्ठियमणगारमेसण समग ठाणठिय तवस्सिण । डहरा बुडा य पत्थए अवि सुस्से न य त लमेज नो ॥ १६ ॥ १०४ ॥ जइ कालुणियाणि कासिया जइ रोयन्ति य पुत्तकारणा। दविय भिक्खु समुट्ठियं नो लभन्ति न सठवित्तए ॥ १७ ॥ १०५॥ जइ वि य कामेहि लाविया जइ नेजाहि ण वन्धिउ घर । जइ जीविय नावकसए नो लब्भन्ति न सठवित्तए ॥ १८॥ १०६ ॥ सेहन्ति य ण ममाइणो माय पिया य सुया य भारिया। पोसाहि ण पासओ तुम लोग पर पि जहासि पोसणो ॥ १९॥ १०७॥ अन्ने अन्नेहि मुच्छिया मोह जन्ति नरा असवुडा। विसम विसमेहि गाहिया ते

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१ सु० भ० २-उ० ३] सुत्तागमे १०७ असमाही उ तहागयस्स वि ॥ १८॥ १२८ ॥ अहिगरणकडस्स भिक्खुणो वयमाणस्स पसज्झ दारुणं । अढे परिहायई बहु अहिगरण न करेज पण्डिए ॥ १९ ॥ १२९ ॥ सीओदग पडि दुगुछिणो अपडिन्नस्स लवावसप्पिणो । सामाइ- यमाहु तस्स ज जो गिहिमत्तेऽसण न भुआई ॥ २० ॥ १३० ॥ न य सखयमाहु जीविय तह वि य बालजणो पगन्मई। बाले पावेहि मिजई इइ सखाय मुणी न मज्जई ॥ २१ ॥ १३१ ॥ छदेण पले इमा पया बहुमाया मोहेण पाचुडा । वियडेण पलेन्ति माहणे सीउण्ह वयसा हियासए ॥ २२॥ १३२ ॥ कुजए अपराजिए जहा अक्खेहिं कुसलेहिं दीवय । कडमेव गहाय नो कलिं नो तीय नो चेव दावर ॥ २३ ॥ १३३ ॥ एव लोगम्मि ताइणा वुइए जे धम्मे अणुत्तरे । त गिण्ह हिय ति उत्तम कडमिव सेसऽवहाय पण्डिए ॥ २४ ॥ १३४ ॥ उत्तर मणुयाण आहिया गामधम्म इइ मे अणुस्सुयं । जसी विरया समुटिया कासवस्स अणुधम्मचारिणो ॥ २५ ॥ १३५ ॥ जे एय चरन्ति आहिय नाएण महया महेसिणा । ते उट्टिय ते समुट्ठिया अन्नोन्न सारेन्ति धम्मओ ॥ २६ ॥ १३६ ॥ मा पेह पुरा पणामए अभिकखे उवहि धुणित्तए । जे दूमण तेहि नो नया ते जाणन्ति समाहिमाहिय ॥ २७ ॥ १३७ ॥ नो काहिएँ होज सजए पासणिए न य सपसारए । नच्चा धम्म अणुत्तर कयकिरिए न यावि मामए ॥ २८ ॥ १३८ ॥ छन्न च पसस नो करे न य उकोस पगास माहणे । तेसिं सुविवेगमाहिए पणया जेहि सुजोसिय धुय ॥२९॥ ॥ १३९ ॥ अनिहे सहिए सुसवुडे धम्मट्ठी उवहाणवीरिए । विहरेज समाहिइदिए अत्तहिय खु दुहेण लब्भइ ॥ ३० ॥ १४० ॥ न हि नूण पुरा अणुस्सुय अदुवा त तह नो समुट्ठिय । मुणिणा सामाइ आहिय नाएण जगसव्वदसिणा ॥३१॥१४१॥ एव मत्ता महन्तर वम्ममिण सहिया बहू जणा । गुरुगो छदाणुवत्तगा विरया तिण्ण महोघमाहिय ॥३२॥१४२॥ ति वेमि ॥ चेयालियज्झयणम्मि विइयुद्देसो॥ सवुडकम्मस्स भिक्खुणो ज दुक्ख पुट्ट अवोहिंए । त सजमओऽवचिन्नई मरण हेच वयन्ति पण्डिया॥१॥१४३॥ जे विनवणाहिजोसिया सतिण्णेहि सम वियाहिया। तम्हा उद् ति पासहा अदक्खु कामा रोगव ॥ २॥ १४४ ॥ अग्ग वणिएहि आहिय धारेन्ती राइणिया इह । एव परमा महन्वया अक्खाया उ सराइभोयणा ॥३॥ १४५॥ जे इह सायाणुगा नरा अज्झोववन्ना कामेहि मुच्छिया। किवणेण सम पगम्भिया न वि जाणन्ति समाहिमाहिय ॥ ४ ॥ १४६ ॥ वाहेण जहा व विच्छए अवले होइ गव पचोइए । से अन्तसो अप्पथामए नाइवहे अवले विसीयइ ॥५॥ १४७ ।। एव कामेसण विऊ अज्ज सुए पयहेज सथव । कामी कामे न परमागए मुत्तागर्म [मुबगर- कामए लदे गा वि अलर कोई ॥ ६॥ १४८ ॥ मा पन्च अगदया भवे अभही भगुलाम अप्पग । अहिय ग अगादु गोगई मे भगः परिदेवः बहु ॥ ७॥१८॥ द जीवियव पामहा तरणे या गरायम्न त । टारपासे य युजद गिर नरा गगु मुदिया॥ ८॥१५० ॥ जे द आरम्भालिया मायद एगन्नीगा। गन्ता ते पारोगय चिराय भागरिय Hि ॥ ॥ १५१ ॥ न य संयमाहु जीवियं तदपि य पालजपो पामर ॥ पशुप्पण गरिय यो मुटु ॥ १० ॥ १५२ ॥ अदक्ता दयावापियं न नरहनु असगुदना । हरहु मुनिरददमणे मोहा एग पदेग कम्गुणा ॥ ११ ॥ १३ ॥ टुक्ती मोहे पुणे पुणे निलिज सिलोगगर्ग। एा महिए हिपामए आपनुल पागेरि सनए ॥१०॥ ॥ १५४ ॥ गार पि ग आपने नरे अमुल्य पाहि मजए। ममया मबत्य गप्पए देयाग गन्छे मठोगय ॥ १३ ॥ १५५ ॥ गोगा भगवाणुग मो तत्य रेनु. वाम । गव्यत्य शिणीयमन्तरे उन्म भिपिमुद्धमादरे ॥ १४॥ १५६ ॥ नवं नया अहिट्टए धम्मट्टी डाहागीरिए । गुप्ते जुत्ते मया जए आयारे परमारतहिए ॥ १५॥ १५७ ॥ पिन पमयो य नाइओ त पाले सरण ति मन । एए मम तेगु जी अह तो नाग नगणं न विनम् ॥ १६ ॥ १५८ ॥ भन्भागनियम्नि या दुरे अहया डामिए भवन्निए । एगस्थ गई य आगई विदुमन्ना मरण न मम् ॥ १७ ॥ १५९ ॥ नव्वे गयफम्माप्पिया अनियत्तेग दुदेश पापियो। हिन्ति भयाउला सठा जाइजरामरणेहिऽभिदुया ॥ १८ ॥ १६० ॥ दशमेव ता पियारिया नो मुलभ चोहिं च आहियं । एष महिए हिपागए आह जिणे दणमेव सैसगा ॥ १९ ॥ १६१ ॥ अभािंमु पुरा मि भिरगुपो आएसा नि भनन्ति सुप्पया। एया गुणाई आहु ते कामवम्स अणुधम्मचारिणो ॥२०॥ १६ ॥ निविहेण वि पाण मा हणे आयहिए अगियाण समुढे । एव निशा अगन्ननो सपरजेय अणागयावरे ॥ २१ ॥ १६३ ॥ एव से उदाहु भणुत्तरनाणी अणुत्तरदंसी मजुत्तर- नाणटमणधरे । अरहा नायपुत्ते भगव वेमालिए विवाहिए ॥ २२ ॥ १६४ ॥ त्ति वेमि॥ वेयालियज्झयणं विइयं ॥ उवसग्गज्झयणे तइए सूरं मन्नइ अप्पाण जाव जेय न पस्मई। जुज्क्षन्त ददधम्माग सिमुपालो व महारह ॥ १॥ १६५ ॥ पयाया सूरा रणसीसे सगामम्मि उपढ़िए । माया पुत्त

१ सु० भ०३-उ० २]
सुत्तागमे
१०९
न जाणाइ जेएण परिविच्छए ॥ २ ॥१६६ ॥ एव सेहे वि अप्पुढे भिक्खायरिया-
अकोविए । सूर मन्नइ अप्पाण जाव लह न सेवए ॥ ३ ॥ १६७ ॥ जया हेमन्त-
मासम्मि सीय फुसइ सव्वग । तत्थ मन्दा विसीयन्ति रजहीणा व खत्तिया ॥ ४ ॥
॥ १६८ ॥ पुढे गिम्हाहितावेणं विमणे सुपिवासिए । तत्थ मन्दा विसीयन्ति मच्छा
अप्पोदए जहा ॥ ५॥ १६९ ॥ सया दत्तेसणा दुक्खा जायणा दुप्पणोलिया।
कम्मत्ता दुभगा चेव इच्चाहसु पुढोजणा ॥ ६ ॥ १७० ॥ एए सद्दे अचायन्ता गामेसु
नगरेसु वा । तत्थ मन्दा विसीयन्ति सगामम्मि व भीख्या ॥७॥१७१॥ अप्पेगे
खुहिय भिक्खुं सुणी डसइ लूसए । तत्थ मन्दा विसीयन्ति तेउपुट्ठा व पाणिणो
॥८॥ १७२ ॥ अप्पेगे पडिभासन्ति पडिपन्थियमागया । पडियारगया एए जे
एए एवजीविणो ॥ ९॥ १७३ ॥ अप्पेगे वइ जुञ्जन्ति नगिणा पिण्डोलगाहमा।
मुण्डा कण्डूविणना उज्जल्ला असमाहिया ॥१०॥ १७४ ॥ एवं विप्पडिवन्नेगे
अप्पणा उ अजाणया। तमाओ ते तम जन्ति मन्दा मोहेण पावुडा॥११॥ १७५॥
पुट्ठो य दसमसगेहिं तणफासमचाइया । न मे दिढे परे लोए जइ पर मरणं सिया
॥ १२॥ १७६ ॥ सतत्ता केसलोएण बम्भचेरपराइया। तत्थ मन्दा विसीयन्ति
मच्छा विट्ठा व केयणे ॥ १३ ॥ १७७॥ आयदण्डसमायारे मिच्छासठियभावणा ।
हरिसप्पओसमावन्ना केई लूसन्तिऽनारिया ॥ १४ ॥ १७८ ॥ अप्पेगे पलियन्तेसिं
चारो चोरो त्ति सुव्वय । बन्धन्ति भिक्खुय वाला कसायवयणेहि य ॥ १५॥ १७९ ॥
तत्य दण्डेण सवीते मुट्टिणा अदु फलेण वा। नाईणं सरई वाले इत्थी वा कुद्धगा-
मिणी ॥ १६ ॥ १८० ॥ एए भो कसिणा फासा फरसा दुरहियासया। हत्थी वा
सरसवित्ता कीवावस गया गिह ॥ १७ ॥ १८१ ॥ ति बेमि ॥ उवसग्गज्झयणे
पढमुद्देसे ॥
अहिमे सुहुमा सगा भिक्खूण जे दुरुत्तरा। जत्थ एगे विसीयन्ति न चयन्ति
जवित्तए ॥ १॥ १८२ ॥ अप्पेगे नायओ दिस्स रोयन्ति परिवारिया। पोसणे
ताय पुठो सि कस्स ताय जहासि णे ॥ २ ॥ १८३ ॥ पिया ते थेरओ ताय ससा
ते खुट्टिया इमा । भायरो ते सगा ताय सोयरा कि जहासि णे ॥ ३ ॥ १८४ ॥
मायर पियर पोस एव लोगो भविस्सइ । एवं खु लोइय ताय जे पालेन्ति य मायर
॥ ४ ॥ १८५ ॥ उत्तरा महुरलावा पुत्ता ते ताय खुड्डया । भारिया ते नवा ताय
मा सा अन्न जण गमे ॥ ५॥ १८६ ॥ एहि ताय घर जामो मा य कम्मे सहा
वयं । बिइय पि ताय पासामो जामु ताव सय गिह ॥६॥१८७॥ गन्तुं ताय पुणो
गच्छे न तेणा समणो सिया । अकामग परिकम्म को ते वारिउमरिहइ ॥७॥१८॥

मुगागमे
[स्यगई-
जकिचि अपग तारत पि गव्य नगीच्य । हिरण यहागइन पि दाहानु ने यर
॥८॥१८॥ दमेव मुसहन्नि पाटणीयमुहिना । पिरो नाउमगेहि नोडगा
पहार ॥९॥ १९० ॥ जहा लगपणे जार माटमा पटिनन्धर । एवं परि-
बन्धन्ति नाइओ आमाहिता ॥ १०॥ १९१॥ हिरदो नाइमोहिं दरदीया दि
ननगाहे। पिट्टो परितप्पन्नि गय गो व्य अगए ॥ ११ ॥ १०॥ एमगा
माताग पायाला व अनारिमा। पीया जल य किस्मन्नि नामोहि मुछिया
॥१०॥ १९३॥ तच मिरा परिणाय मच्चे सगा महानमा । जीवित नायम्-
पिना मोचा धम्ममनर ॥ १३ ॥ १९॥ अर्डिने गन्ति आया सामने
पपेश्या । बुना जत्यायमपन्ति सायन्नि समुदा जहि ॥ १४ ॥ १९५॥ रायागो
रायऽमगा य माहणा अदु र सत्तिया । निमन्तयन्ति भोहिं भिस्य जीवित
॥ १५॥ १९६ ॥ हत्यस्नरहजाणेहिं शिवारगमणेहि य । मुख मोो दने सन्थे
महरिसी पूजयानु त ॥ १६ ॥ १९७ ॥ पत्यगन्धमत्कार इत्मीनो गयगालिया
भुमाहिमा भोगाइ आउमो पूजयाम न ॥ १७ ॥ १९८ ॥ जो नुने नियमो चियो
भिस्तु भारम्मि मुचया । अगारमावान्तस्त गयो नविजए तहा ॥ १८॥१९९||
चिर दबमाणस्म दोनो दागिं युओ तव । इयेय निमन्तेन्नि नीवारेण य सूयर
॥ १९ ॥ २०० ॥ चोडया मित्राचरियाए अनयन्ता जनितए । तत्य मन्दा
विसीयन्ति उजागति य दुयला ॥ २० ॥२०१॥ अचयन्ना व लहेग उपहाणेण
तजिया। तत्य मन्दा विसीयन्ति उजाणति जरग्गवा ॥ २१ ॥ २०२ ॥ एव
निमन्ता लगु मुच्छिया गिर इन्यिनु । अन्झोपवता कामेहिं चोइजन्ता गया गिह
॥ २२ ॥ २० ॥ ति बेनि ॥ उयसग्गज्ययणे विइयुद्देसे ॥
जहा सगामकालम्मि पिट्टओ भीरु वेहह । वलय गर्ग नूम को गणइ पराजय
॥१॥ २०४ ॥ मुहुत्ताग मुहुत्तस्स मुहुत्तो होइ तारिगो । पराजियाऽवाप्पानो
इइ भीरू उवेहई ॥ २ ॥ २०५॥ एव उ समगा एो अवल नयाण अप्पग ।
अणागय भय दिस्म अवाप्पन्तिम मुय ॥ ३ ॥ २०॥ को जाणइ विझवाय
इत्थीओ उदगाउ वा । चोइजन्ता परस्सामो न नो अत्यि परप्पिय ॥४॥२०७॥
इपेर पडिलेहन्ति वलया पडिलेहिगो। चितिगिन्छममावला पन्याग च असोविया
॥५॥२०८ ॥ जे उ सगामकालम्मि नाया सूरपुरगमा । नो ते पि हिन्ति
कि पर मरण सिया ॥६॥ २०९ ॥ एव ममुट्टिए मिस्स् बोतिजा गारवन्धन ।
आरम्भ तिरिय कटु अत्तत्ताए परिव्वए ॥ ७॥ २१० ॥ तमेगे परिभातन्ति
भिक्सुयं साहुजीविर्ग । जे एव परिभासन्ति अन्तए ते समाहिए ॥ ८॥ २११॥

'सु०म० ३-उ० ४] सुत्तागमे सबद्धसमकप्पा उ अन्नमन्नेसु मुच्छिया। पिण्डवाय गिलाणस्स ज सारेह दलाह य ॥९॥ २१२ ॥ एव तुम्मे सरागत्या अन्नमन्नमणुव्वसा । नट्ठसप्पहसब्भावा ससारस्स अपारगा ॥१०॥ २१३ ॥ अह ते परिभासेजा भिक्खु मोक्ख- विसारए । एवं तुम्भे पभासन्ता दुपक्ख चेव सेवह ॥ ११॥ २१४ ॥ तुन्भे भुञ्जह पाएसु गिलागो अभिहडम्मि य । त च बीओदग भोच्चा तमुहिस्सादि ज कड ॥ १२॥ २१५॥ लित्ता तिव्वाभितावेण उज्झिया असमाहिया । नाइकण्डइय सेय अरुयस्सावरज्झई ॥ १३ ॥ २१६॥ तत्तेण अणुसिहा ते अपडिन्नेण जाणया । न एस नियए मग्गे असमिक्खा वई किई ॥ १४ ॥ २१७ ॥ एरिसा जा वई एसा अग्गवेणु व्व करिसिया। गिहिणो अभिहडं सेय भुजिउ न उ भिक्खुणं ॥ १५ ॥ २१८ ॥ धम्मपन्नवणा जा सा सारम्भा न विसोहिया । न उ एयाहि दिट्ठीहिं पुन्वमासिं पगप्पिय ॥ १६ ॥ २१९ ॥ सव्वाहि अणुजुत्तीहि अचयन्ता जवित्तए । तओ वाय निराकिच्चा ते भुजो वि पगन्भिया ॥ १७ ॥ २२० ॥ राग- दोसाभिभूयप्पा मिच्छत्तेण अभिडुया । आउस्से सरण जन्ति टकणा इव पन्वय ॥१८॥ २२१ ॥ बहुगुणप्पगप्पाइ कुजा अत्तसमाहिए । जेणन्ने न विरुज्झेजा तेण त त समायरे ॥ १९ ॥ २२२॥ इम च धम्ममायाय कासवेण पवेइय । कुन्जा भिक्खू गिलाणस्स अगिलाए समाहिए ॥ २० ॥ २२३ ॥ सखाय पेसल धम्म दिट्ठिम परिनिव्वुडे । उवसग्गे नियामित्ता आमोक्खाए परिव्वएजासि ॥२१॥२२४॥ त्ति बेमि ।। उवसग्गज्झयणे तइयुद्देसे ॥ आहसु महापुरिसा पुल्विं तत्ततवोधणा। उदएण सिद्धिमावना तत्थ मन्दो विसीयइ ॥१॥ २२५ ॥ अभुजिया नमी विदेही रामगुत्ते य भुजिया । बाहुए उदग भोचा तहा नारायणे रिसी ॥२॥ २२६ ॥ आसिले देविले चेव दीवायण महारिसी। पारासरे दग भोचा बीयाणि हरियाणि य ॥ ३ ॥ २२७ ॥ एए पुव्व महापुरिसा आहिया इह समया । भोच्चा वीयोदग सिद्धा इइ मेयमणुस्सुय ॥ ४ ॥२२८॥ तत्थ मन्दा विसीयन्ति वाहच्छिन्ना व गद्दभा। पिट्ठओ परिसप्पन्ति पिट्ठसप्पी य सभमे ॥ ५ ॥ २२९ ॥ इहमेगे उ भासन्ति साय साएण विजई । जे तत्थ आरिय मग्गं परम च समाहिय ॥ ६ ॥ २३० ॥ मा एयं अवमन्नन्ता अप्पेण लुम्पहा बहु । एयस्स उ अमोक्खाए अयोहारि व्व जूरह ॥ ७ ॥ २३१ ॥ पाणाइवाए वट्टन्ता मुसावाए असजया । अदिन्नादाणे वदृन्ता मेहुणे य परिग्गहे ॥ ८ ॥ १३२ ॥ एवमेगे उ पासत्या पन्नवन्ति अणारिया । इत्थीवस गया वाला जिणसासणपरमुहा ॥९॥ २३३ ॥ जहा गण्ड पिलाग वा परिपीलेज मुहुत्तगं । एव विनवणित्थीसु -- मुतागमे [बगर- ११२ दोसो तत्य को उिया ॥ १०॥ २३४ ॥ जहा मन्धादणे नाम थिमिव भुई दग । एव विनागिरमी दोनो सत्य को शिया ॥ ११॥ २३५॥ जहा दंगमा पिता थिमिय भुईदगाएव विवागत्यीमुदीगो तत्य को जिया ॥ १०॥२३॥ एवमेगे उ पासत्या मिच्छट्टिी अणारिया । अझोपपमा कामे पूया इव तस्गर ॥ १३ ॥ २३७ ॥ अपागयमपस्मन्ना पगुप्पतासगा। ते पच्छा पग्निपात सीणे आउम्मि जोन्यते॥१४॥३८॥ जहियाले परियन न पन्या परित प्पए। ते धीरा बघणुम्गुया नावस्मन्नि जीविय ॥ १५॥३९॥ रहा न वेयरणी दुतरा इद समया । एप तोगति नारीओ दुतग समईमया ॥१६॥२४० जेहिं नारीग सजोगा पूर्वगा पिभो फया । मव्यय निरारिया ते ठिा गुग्म दिए ॥ १७ ॥४१॥ एए ओघ तारस्सन्ति समुह ववहारिणो । जत्य पात विन। माति कियन्ती मगसम्मुणा ॥ १८ ॥ २४ ॥ त न मिस्र परिलाय मुम्बए । समिए चरे । मुसावाय च पजिना अदिनादाराच योगिरे ॥ १९ ॥ २४३ ॥ उहमहे तिरिय वा जे के तसयावरा । सन्पत्य विरइ पुजा मन्नि निवागनाडिन ॥ २० ॥ २४४ ॥ इन च धम्ममायाय कागवेग पवेइर । पुना भिनलिस्त मगिलाए समाहिए ॥ २१॥ ४५ ॥ ससाय पेमल धन्न दिटिम परिनियुटे। उवमग्गे नियामिता आमोक्साए परिव्वएनानि ॥२०॥२४६॥ नि बेमि ।। उवसग्गज्ययणं तइयं ॥ इत्यिपरिमज्मयणे चउत्थे जे मायर च पिचर च विप्पजहाय पुष्यनजोग । एो सहिए चरित्नानि भार यमेहुणो विवितेन ॥ १॥ ०४७ ॥ मुहुनेग त परिषम्म छपएग इन्थिो मन्दा उब्वाय पि ताउ जागनु जहा लिस्सन्ति मिस्ड एरो॥२॥४८॥ पासे मिल निसीयन्ति अभिक्खग पोमवत्य परिहिन्ति । काय महे वि दनान्नि बाह उदा कक्समगुव्वए ॥ ३ ॥ २४९ ॥ मयगासहि जोगेहि इन्थियो एण्या निमन्तेन्नि एयाणि चेव से जाणे पासागि विरुवस्वाणि ॥४॥२५०॥ नो तानु चस्तु सधेन नो वि य साहस समभिजाणे । नो सहिय पि विहरेजा एक्सप्पा सुरक्लिो हो ॥५॥ २५१ ॥ आमन्निय उस्सविया भिक्नु आयमा निमन्वेन्नि । एपारी चे से जाणे सद्दानि हिवरूवागि ॥ ६ ॥ २५ ॥ मगवन्यहि मोहि क्टाविणी मवगसित्तागं । अदु मजुलाई भासन्ति आणवयन्ति निन्दाहिँ ॥ ७ ॥ २५३ ।

सु० म०४-30.] सुत्तागमे ११३ सीह जहा व कुणिमेग निभयमेगचर ति पासेग । एवित्थियाउ वन्धन्ति सवुड एगइयमणगार ॥ ८ ॥२५४ ॥ अह तत्य पुणो नमयन्ती रहकारो व नेमि आणुपु- वीए । वद्धो मिए व पासेग फन्दन्ते वि न मुच्चए ताहे ॥ ९ ॥ २५५ ॥ अह सेऽणुतप्पई पच्छा भोचा पायस व विसमिस्स । एव विवेगमायाय सवासो न वि कप्पए दविए ॥ १० ॥ २५६ ॥ तम्हा उ वजए इत्थी विसलित्त व कण्टग नच्चा। ओए कुलाणि वसवत्ती आधाए न से वि निग्गन्थे ॥ ११॥२५७ ॥ जे एय उञ्छ अणुगिद्धा अन्नयरा होन्ति कुसीलाग । सुतवस्सिए वि से भिक्खू नो विहरे सह णमि- त्थीसु ॥ १२॥ २५८ ॥ अवि धूयराहि सुण्हाहि धाईहिं अदुव दासीहिं । महईहि वा कुमारीहिं सयव से न कुज्जा अणगारे ॥ १३ ॥ २५९ ॥ अदु नाइण च सुहीण वा अप्पिय द१ एगया होइ । गिद्धा सत्ता कामेहिं रक्खणपोसणे मणुस्सोऽसि ॥ १४ ॥ ॥ २६० ॥ समग पि दहृदासीण तत्य वि ताव एगे कुप्पन्ति । अदु वा भोयणेहि नत्थेहिं इत्थीदोस सकिणो होन्ति ॥ १५॥ २६१॥ कुम्वन्ति सथव ताहिं पन्भट्ठा समाहिजोगेहिं । तम्हा समणा न समेन्ति आयहियाए सनिसेनाओ ॥१६॥२६२॥ बहवे गिहा। अवहटु मिस्सीभाव पत्थुया य एगे । धुवमग्गमेव पवयन्ति वायावीरिय कुसीलाण ॥ १७ ॥ २६३ ॥ सुद्ध रवइ परिसाए अह रहस्सम्मि दुक्कड करेन्ति । जाणन्ति य ण तहाविऊ माइल्ले महासढेऽय ति ॥ १८ ॥ २६४ ॥ सय दुक्कड च न वयइ आइट्ठो वि पकत्थई वाले। वेयाणुवीइ मा कासी चोइजन्तो गिलाइ से भुजो ॥ १९ ॥ २६५ ॥ ओसिया वि इत्थिपोसेसु पुरिसा इत्यिवेयखेयन्ना । पन्नास- मन्निया वेगे नारीण वस उवफसन्ति ॥२०॥२६६॥ अवि हत्यपायछेयाए अदुवा वद्धमसउकन्ते । अवि तेयसाभितावणाणि तच्छिय खारसिंचणा' य ॥२१॥२६७॥ अदु कण्णनासछेय कण्ठच्छेयण तिइक्खन्ती । इइ एत्थ पावसतत्ता न वेन्ति पुणो न काहिन्ति ॥२॥ २६८ ॥ सुयमेयमेवमेगेसिं इत्थीवेय त्ति हु सुयक्ताय । एय पिता वइत्ताण अदु वा कम्मुणा अवफरेन्ति ॥ २३ ॥ २६९ ॥ अन्न मणेण चिन्तेन्ति वाया अन्न च कम्मुणा अन्न । तम्हा न सद्दहे भिक्खू बहुमायाओ इथिओ नचा ॥ २४ ॥ २७० ।। जुवई समण बूया विचित्तलकारवत्थगाणि परिहित्ता । विरया चरिस्सह रुक्खं धम्ममाइक्ख णे भयन्तारो ॥ २५ ॥ २७१ ।। अदु सावि- यापवाएण अहमसि साहम्मिणी य समणाण । जउकुम्मे जहा उवज्जोई सवासे विऊ विसीएजा ॥ २६ ॥ २७२ ॥ जउकुम्भे जोइउवगूढे आसुमितत्ते नासमुक्याइ । एवित्थियाहि अणगारा सवासेण नासमुवयन्ति ॥ २७ ॥ २७३ ॥ कुव्वन्ति पावग कम्म पुट्ठा वेगेवमाहिंसु । नो ह करेमि पाव ति अकेसाइणी ममेस त्ति ॥२८॥२७४॥ ८ सुत्ता० 1 - मुत्तागमे [सूबा- पालमग मन्य पीर जैन का अपना हो । दुगुणा करे से पा पूयाकामी निगरमी 1.110. ॥ मगेणिजमगारं आयगय निमन्तणेगाहमु । कल च ताट पाय वा अन पाग पहिगाहे ।। 30 ॥ २७ ॥ नागारमेर बुझेत्रानो टनो अगारमागन्नु । यंद मिपारोटि मोहमाय-ट पुणौ मरे॥३१॥33॥ नि वेमि ॥ सन्धिपरिनन्ययणे पढमुदसे ॥ ओए गया न रजेला भोगरामा पुगो विग्जेमा । भोगे ममणाण मद जह भुन्नि भिक्गुणो एगे। 110.01 अहत तु मेयमावन मुनिय निम्नु साममदनः । परिभिन्दिया न तो पाया पादुदह मुद्धि पहन्नि ॥ ॥७९॥ जट पेनिया ण मए भिन्नु नो हिरे मह पमित्थीए । केलाणवि हरगिस नाय मए बरेजारी॥ ॥ ०८० ॥ अह जमे होट उपल्लो तो पेसन्नि तहाभूणहैं । अलराउन्य पेहेहि यगुफलाइ आदराहि ति ॥ ८ ॥२८१! दामणि मागपागाए पोओ या भरिस्माई राओ। पायालय में रयाहि एहि ता मे पिट्टोनहे ॥२॥ ॥ २८॥ वत्याशय में पटिरहेहि अर पाणच आहगाह नि । गन्ध । रओहरण च सवा च मे ममशुजाहि ॥६॥२८३ ॥ अदु अगि अग्यार कुरया मे पयलाहि । लोनं च लोमकुनुम च येणुपन्गनिय च गुलिय च ॥ ७ ॥ ॥२८४ ॥ युट्ट नारच अगर मपिट्ट गम्म गिरेगा तेल मुहभिजाए येणुफलाइ मनिहाए ॥ ८ ॥ ८ ॥ नन्दीचुग्गगाइ पाइराहि उत्तोपाणहच जासहि। मारव मूपन्छेबाए मागील च यत्यय रयायेहि ॥५॥८६॥ नुक्रमीच नागपागाए आमलगाइ दगाहरण च । तिलारमियसलाग विमु मे विहृपय पिजाहि ॥ १० ॥ २८ ॥ नहालग च फरिह च सीहरिपामग न आगााहे । आदमुग च पयच्छादि दन्नपस्मालग पवेमाहि ॥११॥२८॥ पूगफल तोश्य सह मुत्तग च जायाहि । कोस च मोयमेहाए मुमुस्वाग च सारगाला च ॥ १० ॥ ॥ २८९ ॥ चन्दालग च करन च वयघरं च आउनो अगाहि । नरपायर च जायाए गोरहग च मामणेराए ॥ १३ ॥ ०९०॥ घडिग च मडिण्द्रिमा च चेल- गोल कुमारभाए। वास समभिआवश्य भावसद च जाग भत्त ।।॥ १४ ॥ २९१ ॥ आमन्दिय च नवनुत्त पाटगड मुकमट्टाए । अदु पुत्तटोहल्टाए आगप्पा वन्ति दामा वा ॥ १५ ॥ २९ ॥ जाए फ्टे समुप्पले गेण्हन बाग अहया उहाहि । अह पुत्तपोतियो एगे भारवहा हवन्ति उा वा ॥ १६ ॥ २९३ ॥ राओलि रष्टिना मन्ता टारग च सम्वन्नि बाई वा। मुहिरामणा वि ते मन्ता वत्ययोरा हवन्ति हसा वा ॥ १७ ॥ ०९४ ॥ एव यहुहिं क्यपुव भोगत्याए जेऽभियावना। - सु० भ० ५ उ०१] सुत्तागमे दासे मिए व पेसे व पसुभूए वा से न वा केई ॥ १८ ॥ २९५ ॥ एव खु तासु विनप्प सथव सवास च वजेजा। तजातिया इमे कामा वजकरा य एवमक्खाए ॥ १९ ॥ २९६ ॥ एय भयं न सेयाए इइ से अप्पग निरुम्भित्ता। नो इत्थि नो पसु भिक्खु नो सय पाणिणा निलिजेजा ॥ २० ॥ २९७ ॥ सुविसुद्धलेसे मेहावी परकिरिय च वजए नाणी । मणसा वयसा कारण सव्वफाससहे अणगारे ॥२१॥ ॥ २९८ ॥ इन्चेवमाहु से वीरे धुयरए धुयमोहे से भिक्खु । तम्हा अज्झत्तविसुद्धे सुविमुक्के आमोक्खाए परिव्वएजासि ॥ २२ ॥ २९९ ॥ त्ति बेमि ॥ इत्थिपरि- नज्झयणं चउत्थं ॥ 1 निरयविभत्तियज्झयणे पञ्चमे पुच्छिस्सह केवलिय महेसिं कह भितावा नरगा पुरत्या। अजाणओ मे मुणि बूहि जाणं कहिं नु बाला नरग उवेन्ति ॥ १॥ ३०० ॥ एवं मए पुढे महाणुभावे इणमोऽब्ववी कासवे आसुपन्ने । पवेयइस्स दुहमट्ठदुग्ग आईणिय दुक्कडिग पुरत्था ॥२॥ ३०१॥ जे केइ बाला इह जीवियट्ठी पावाइँ कम्मा करेन्ति रुद्दा । ते घोररूवे तमिसन्धयारे तिव्वाभितावे नरगे पडन्ति ॥ ३॥ ३०२ ॥ तिव्व तसे पाणिणो थावरे य जे हिंसई आयसुह पडुच्चा । जे लूसए होइ अदत्तहारी न सिक्खई सेयवियस्स किचि ॥ ४ ॥ ३०३ ॥ पागन्भि पाणे वहुण तिवाई अनिव्वुए घायमु- वेड वाले। निहो निस गच्छइ अन्तकाले अहोसिर कटु उवेइ दुग्ग ॥ ५॥ ३०४ ॥ हण छिन्दह भिन्दह ण दहेति सद्दे सुणेन्ता परधम्मियाण । ते नारगाओ भयभिन्न- सन्ना कसन्ति क नाम दिस वयामो ॥ ६ ॥ ३०५॥ इझालरासिं जलिय सजोइ तत्तोवम भूमिमणुकमन्ता । ते डज्झमाणा कलुण यणन्ति अरहस्सरा तत्थ चिरट्ठि- ईया ॥७॥ ३०६ ॥ जइ ते सुया वेयरणी भिदुग्गा निसिओ जहा खुर इव तिक्खसोया । तरन्ति ते वेयरणिं भिदुग्ग उसुचोइया सत्तिसु हम्ममाणा ॥ ८ ॥ ॥ ३०७ ॥ कीलेहि विज्झन्ति असाहुकम्मा नाव उवेन्ते सइविप्पहणा। अन्ने उ सूलाहि तिसूलियाहिं दीहाहि विद्रूण अहे करेन्ति ॥ ९ ॥ ३०८ ॥ केसिं च बन्धित्तु गले सिलाओ उदगसि बोलेन्ति महालयसि । कलबुयावालुयमुम्मुरे य लोलन्ति पञ्चन्ति य तत्थ अन्ने ॥ १० ॥ ३०९ ॥ आसूरिय नाम महाभिता अन्धतम दुप्पतर महन्त । उड्ड अहे य तिरिय दिसासु समाहिओ जत्थगणी झियाइ ॥ ११ ॥ ३१० ॥ जसी गुहाए जलणेऽतिउट्टे अविजाणओ डज्झइ लुत्तपनो। सया य कलुण पुण घम्मठाण गाढोवणीय अइदुक्खधम्म ॥ १२ ॥ ३११ ॥ चत्तारि [स्यगई सुत्तागमे अगणीओ गमारभेत्ता जा करसम्मा भिनन्ति बाल । ते तत्य चिट्ठन्तभितप्प- मागा मला र जीवन्तोष जोइपत्ता ॥ १३॥ ११॥ सतच्छग नाम महाभिताव ते नारगा जन्य अमाहुरुम्मा। इत्येहि पाएहि य यन्धिऊग फलग व तन्ठन्ति पुद्दाहहत्या ॥ १४॥ ३१३ ॥ रुहिरे पुणो ययगमुस्मियगे भिनुत्तमो परिवत्तयन्ना। पयन्ति पनेरदए फुरन्ते मजीवमन्ठे व अरोस्वरे ॥ १५॥३१॥नो चेव ठे तत्य मसीभवन्ति न मिजई विश्चभियगाए । तमागुभाग अणुवेश्यन्ता दुक्खन्ति दुस्ती दह दुाडेग ॥ १६॥ १५ ॥ तहिं च ते रोलगपगाढे गाड मुनत्त भाग वयन्ति । न तत्य साय लहई भिटुग्गे अरहिराभिताया तह वी तवेन्ति ॥ १७ ॥ ३५६ ॥ से मुबई नगरवहे व गद्दे दुहोमणीयाणि पयाग तत्य । उटिग्गाम्माग उदिग्गरम्मा पुगो पुणे ते मरह दुहेन्ति ॥ १८॥ ३१७ ॥ पागेदि ण पाव नियोजयन्ति त में परस्सामि जहातहेन । दण्डेहि तत्या सरयन्नि बाला सव्वेहि दण्डेहि पुगकएहि ॥ १९ ॥ ३१८ ॥ ते हम्ममाणा नररो पडन्ति पुणे दुस्पस्म महाभिताये । ते तत्व चिट्टन्नि दुस्वभासी तुन्ति कम्मोवगया किनीहिं ॥ २०॥ ३१९ ॥ सपा कतिग पुण धम्मठाग गाटोवणीन अइदुस्पधम्म । अन्दूनु पक्मिप्प विहन्तु देह वेहेग सीस सेऽभितावयन्ति ॥ २१ ॥ ३०० ॥ छिन्दन्नि वालस्म गुरेग ना ओढे मिलिन्दन्ति दुवे वि करणे। जिन्भं पिणिपस्त विहत्यि- मेत तिक्साहि सूलाहि मितावयन्ति ॥२०॥ ३२१॥ ते तिप्पमाणा तरसपुट व राइदिय तत्य थगन्ति याला । गलन्ति ते मोनियपूयमस पोइया सारपइदिनगा ॥ २३ ॥ ३०२ ॥ जड ते मुया लोहियायपाई बालागणी तेअगुगा परेग । कुम्भी महन्ताहियोस्तीया समूपिया लोहिययपुण्गा ॥ २४ ॥ ३०३ ॥ पक्सिप्प तामु पययन्ति वाले अहस्मरे ते कटग रमन्ते । तण्हाइया ते तरतम्बतत्त पजिजमाण- स्यर रसन्ति ॥ २५ ॥ ३०४ ॥ अप्पेग अप्प इह वनइत्ता भवाहमे पुव्वमए महस्से । चिट्ठन्ति तत्या बहुफरकम्मा उहा कट सम्म तहाति भारे ॥ २६॥ ३२५॥ समजिगित्ता कलुस अणजा इठेहि क्न्तेहि य विप्पहणा । ते दुन्भिगन्धे कमिणे य फासे कम्मोवगा कुणिमे आवमन्ति ॥२७॥२६॥त्ति वेमि निरयविभत्तिय- ज्झयणे पढमुद्देसे ॥ अहावर सासयदुक्खधम्म त भे पवक्सामि जहातहेगं । बाला जहा दुराड- कम्मकारी वेयन्ति कम्मा पुरेकडाइ ॥ १॥ ३२७ ॥ हत्यहि पाएहि य चन्धिमा उयर विकत्तन्ति पुरासिएहिं । गिम्हित्तु बालस्म विहत्तु देह वद्ध विर पिट्ठउ उदरन्ति ॥ ॥ ३०८॥ वाहू पकत्तन्ति य मूलओ से धूल वियास मुहे आड- १ सु० भ० ५ उ०२] सुत्तागमे हन्ति । रहंसि जुत्त सरयन्ति वाल आरुस्स विज्झन्ति तुटेण पिढे ॥ ३ ॥ ३२९ ।। अय व तत्त जलिय सजोइ तऊवम भूमिमणुक्कमन्ता । ते डज्झमाणा कलुण थणन्ति उसुचोइया तत्तजुगेसु जुत्ता ॥ ४ ॥ ३३० ॥ वाला बला भूमिमणुक्कमन्ता पविजल लोहपह च तत्त । जसी भिदुग्गसि पवज्जमाणा पेसे व दण्डेहि पुरा करेन्ति ॥५॥ ॥ ३३१॥ ते सपगाढसि पवजमाणा सिलाहि हम्मन्ति निपातिणीहि । सतावणी नाम चिरट्टिईया सतप्पई जत्थ असाहुकम्मा ॥ ६॥ ३३२ ॥ कन्दूसु पक्खिप्प पयन्ति बाल तओ वि दड्डा पुण उप्पयन्ति । ते उड्ढकाएहि पखज्जमाणा अवरेहि खजन्ति सणप्फएहि ॥ ७ ॥ ३३३ ॥ समूसिय नाम विधूमठाण जं सोयतत्ता कलुणं थणन्ति । अहोसिर कट्ठ विगत्तिऊण अय व सत्येहि समोसवेन्ति ॥ ८ ॥ ॥ ३३४ ॥ समूसिया तत्य विसूणियंगा पक्खीहिं खजन्ति अयोमुहेहि । सजीवणी नाम चिरहिईया जसी पया हम्मइ पावचेया ॥ ९ ॥ ३३५ ॥ तिक्खाहि सूलाहि निवाययन्ति वसोगय सावयय व लद्ध । ते सूलविद्धा कलुण थणन्ति एगन्तदुक्तं दुहओ गिलाणा ॥ १० ॥ ३३६ ॥ सया जल नाम निह महन्त जसी जलन्तो अगणी अकट्ठो । चिट्ठन्ति बद्धा बहुकूरकम्मा अरहस्सरा केइ चिरहिईया ॥ ११ ॥ ।। ३३७ ॥ चिया महन्तीउ समारभित्ता छुन्भन्ति ते त कलुण रसन्ति । आवद्दई तत्य असाहुकम्मा सप्पी जहा पडिय जोइमझे ॥ १२॥ ३३८॥ सया कसिण पुण धम्मठाण गाढोवणीय अइदुक्सधम्म । हत्थेहि पाएहि य वन्धिऊण सत्तु- व्वदण्डे हि समारभन्ति ॥ १३ ॥ ३३९ ॥ भजन्ति वालस्स वहेण पुट्ठी सीस पि भिन्दन्ति अयोधणेहिं । ते भिन्नदेहा फलग व तच्छा तत्ताहि आराहि नियोजयन्ति ॥ १४ ॥ ३४० ॥ अभिजुजिया रद्द असाहुकम्मा उसुचोइया हत्थिवह वहन्ति । एग दुरूहित्तु दुवे तओ वा आरुस्स विज्झन्ति ककाणओ से ॥ १५॥ ३४१॥ वाला बला भूमिमणुकमन्ता पविजल कण्टइल महन्त । विवद्धतप्पेहि विवण्णचित्ते समी- रिया कोटवाल करेन्ति ॥ १६ ॥ ३४२ ॥ वेयालिए नाम महाभितावे एगायए पन्वयमन्तलिक्खे । हम्मन्ति तत्था बहुकूरकम्मा पर सहस्साण मुहुत्तगाण ॥ १७ ॥ ॥ ३४३ ॥ सबाहिया दुक्कडिणो थणन्ति अहो य राओ परितप्पमाणा। एगन्तकूडे नरगे महन्ते कूडेण तत्था विसमे हया उ ॥ १८ ॥ ३४४ ॥ भजन्ति ण पुवमरी सरोस समुग्गरे ते मुसले गहेउ । ते भिन्नदेहा रुहिर वमन्ता ओमुद्धगा धरणितले पडन्ति ॥ १९ ॥ ३४५ ॥ अणासिया नाम महासियाला पागभिणो तत्थ सयावकोवा । खजन्ति तत्या बहुकूरकम्मा अदूरगा ससलियाहि बद्धा ॥ २०॥ ॥ ३४६ ॥ सयाजला नाम नई भिदुग्गा पविजल लोहविलीणतत्ता । जसी भिदु- ११८ सुत्तागमे [सूयगई रगति पवबमाणा एगायताणरमण क्रेन्ति ॥ २१ ॥ ३४७ ॥ एयाइ फामाई फुसन्ति बाल निरन्तर तत्य चिरटिईय । न हम्ममाणस्स उ होड ताण एगो मय पाणुहोइ दुमत ॥ २० ॥ ३४८ ॥ ज जारिम पुचमकाति कम्म नमेव आगच्छद सपराए । एगन्तदुक्य भवमत्तिा वेयन्ति टुम्खी तमणन्तदुक्य ॥२३॥ ॥ ३४९ ॥ एयाणि मोया नरगाणि धीरेन हिंगए किंचा गचलोए । एगन्तदिही अपरिग्गहे उ युज्झिन लोगस्न वस न गच्छे ॥ २४ ॥ ५० ॥ एवं निरिक्खे मणुयामरेनु चउरन्नणन्न तयशुचिवाग । म मन्यमेय इइ यहत्ता कमेन शल युयमायरेज ॥ २५॥ ३.१॥ नि बेमि ॥ निरयविभत्तियज्झयणं पञ्चमं ॥ सिरिवीरत्युइयज्झयणे छटे पुन्ठिस्मु ण ममणा माहणा य अगारिणो या परनित्यिया यासे केद नेगनहिय धम्ममाहु अणेटिस साहुममित्तगाए ॥१॥ ३५२ ।। कह च नाणं कह दवा से सील कह नायनुयस्न आनि । जाणाति ण भिस्तु जहातहेग महामु यूहि जहा निमन्त ॥ ॥ ३५ ॥ यनए से कुमलामुपने अणन्तनाणी य अणन्तदसी। जसमिणो चम्पह ठियस्स जाणाहि धम्म च पिड च पेहि ॥ ॥ ३५४॥ दस अहे य तिरिय दिमाम तमा य जे थावर जे य पाणा। से नियनिधेहि समिक्स पन्ने दीवे व धम्म ममिय उदाह ॥ ४ ॥ ३५५ ॥ से मव्वदसी अभिभूचनाणी निरामगन्धे विदम ठियप्पा । अगुत्तरे सव्वजगजि विज गन्या अईए अभए अगाऊ ॥ ५॥ ३५६ ॥ से भूटपने अगिएअचारी ओहतरे धीरे अगन्तचक्य । अगुत्तर तप्पड़ मूरिए वा पइरोसीन्दे व तम पगासे ॥ ६ ॥ ३५७ ॥ अणुनर धन्नामा जिगाण नेया मुणी शासव आमुपन्ले । इन्दे व देवाण महाणुभावे महम्मणेया दिवि म मितिद्वे॥७॥ ३५८ ॥ से पदया अस्पयसागरे वा महोदही वा विपन्न- पारे । अगानिटे वा अस्माइ मुये न व देवाहिवई जुईम ॥ ८ ॥ ३५९ ॥ से वीरिएग पडिपुण्णवीरिए नुदमणे या नगसबसेठे। मुरालए वा नि मुदागरे से निरायए नेगगुगोववेए ॥९॥ ३६० ॥ मय महस्माण उ जोयणाण तिकडगे पण्डगवेजयन्ते । से जोयणे नवनवते सहस्ते उद्यमियो हेतु सहस्ममेग ॥ १० ॥ ॥३६१ ॥ पुढे नमे चिड भूमिवहिए ज सूरिया अणुपरिवट्यन्ति । से हेमवाणे चहुनन्दणे य जत्ती रइ वेययई महिन्दा ॥ ११॥ ३६॥ से पपए मद्दमहप्पगाते विरायई कयणमट्टवणे । मणुत्तरे गिरिनु य पव्वदुग्गे गिरीवरे से जलिए व भोमे सु०म०६] सुत्तागमे ११९ ॥ १२ ॥ ३६३ ॥ महीइ मज्झम्मि ठिए नगिन्दे पन्नायए सूरियसुद्धलेसे । एव सिरीए उ स भूरिवण्णे मणोरमे जोयइ अचिमाली ॥ १३ ॥ ३६४ ॥ सुदसणस्सेव जसो गिरिस्स पवुच्चई महओ पव्वयस्स । एओवमे समणे नायपुत्ते जाईजसोदसण- नाणसीले ॥ १४ ॥ ३६५ ॥ गिरीवरे वा निसहाययागं रुयए व सेढे वलयाययाण । तओचमे से जगभूइपन्ने मुणीण मज्झे तमुदाहु पने ॥ १५॥ ३६६ ॥ अणुत्तर धम्ममुईरइत्ता अणुत्तर झाणवर झियाइ । मुसुक्कसुक अपगण्डसुक ससिन्दुएगन्तव- दायक ।। १६ ॥ ३६७ ॥ अणुत्तररंग परम महेसी असेसकम्म स विसोहइत्ता । . सिद्धिं गए साइमणन्तपत्ते नाणेण सीलेण य दसणेण ॥ १७ ॥ ३६८ ॥ रुक्खेसु णाए जह सामली वा जस्सिं रइ वेययई सुवण्णा । वणेसु वा नन्दणमाहु सेट्ठ नाणेण सीलेण य भूइपने ॥ १८ ॥ ३६९ ।। थणिय व सद्दाण अणुत्तरे उ चन्दो व ताराण महाणुभावे । गन्धेसु वा चन्दणमाहु सेट्ठ एवं मुणीण अपडिन्नमाहु ॥१९॥३७०॥ जहा सयभू उदहीण सेढे नागेसु वा धरणिन्दमाहु सेठ । खोओदए वा रस वेजयन्ते तवोवहाणे मुणि वेजयन्ते ॥२०॥३७१॥ हत्थीसु एरावणमाहु नाए सीहो मिगाण सलिलाण गङ्गा । पक्खीसु वा गरुळे वेणुदेवो निव्वाणवादीणिह नायपुत्ते ॥ २१ ।। ॥ ३७२ ॥ जोहेसु नाए जह वीससेणे पुप्फेस वा जह अरविन्दमाहु । खत्तीण सेढे जह दन्तवके इसीण सेढे तह वद्धमाणे ॥ २२ ॥ ३७३ ॥ दाणाण सेठं अभयप्प- याणं सच्चेसु वा अणवज वयन्ति । तवेसु वा उत्तम वम्भर लोगुत्तमे समणे नाय- पुत्ते ।। २३ ॥ ३७४ ॥ ठिईण सेट्ठा लवसत्तमा वा सभा सुहम्मा व सभाण सेट्टा। निव्वाणसेट्ठा जह सव्वधम्मा न नायपुत्ता परमत्यि नाणी ॥ २४ ॥ ३७५ ॥ पुढोवमे धुणइ विगयगेही न सनिहिं कुम्वइ आसुपन्ने । तरिउ समुई व महाभवोध अभयकरे वीर अणन्तचक्खू ॥ २५॥ ३७६ ॥ कोह च माण च तहेव माय लोभ चात्य अज्झत्तदोसा । एयाणि वन्ता अरहा महेसी न कुबई पाव न कारवेइ ॥ २६ ॥ ३७७ ॥ किरियाकिरिय वेणइयाणुवाय अन्नाणियाण पडियच ठाण । से सव्ववाय इइ चेयइत्ता उवट्ठिए सजमदीहाय ।। २७ ॥ ३७८ ॥ से वारिया इत्यि सराइभत्त उवहाणव दुक्खसयट्टयाए । लोग विदित्ता आर पर च सन्वं पभू वारिय सव्ववार ॥ २८ ॥ ३७९ ॥ सोचा य धम्म अरहन्तभासिय समाहियं अट्ठपदोव- सुद्ध । त सदहाणा य जणा अणाऊ इन्दा व देवाहिव आगमिस्सन्ति ॥२९॥३८०॥ त्ति बेमि । सिरिवीरत्युइज्झयणं छह ।।

गुपगमे [मुपगर कुसीलपरिभामियज्झयणे सत्तमे पुगीय भाऊ जगणी या तापीया गलगाय पागले भाडया गराइ पागा मभेगमा गाभिहा॥1॥२८१ ॥ एमाई याग पव:गार गाणे पटि माग । सायद पर या विमार- यानि ॥ ॥ ३८ ॥ गई अनुपरिरात्माण नगमापी मिमिवाद । में जाट जाइ यद्वारसम्म निमः तेग पाडे ॥ ३ ॥ ३८ ॥ अग्गिन रोग गट या परत्या गवगतोपाना अगला मारमा परे पर ने पनि पनि 7 दुमियान ॥ ८ ॥ ३८४ ॥ जे माय वा पियर व हिना नमाव्या भगति गमारभिता । अदाल, रेसो सुन्नीरसम्मे भगाद और आयराए 10 ॥ १८ ॥ उजाओ पाशनिवायाला निष्पाओ अनिवायवेना । तम्या मेहाती गमिरा धम्म न परिता अर्गा ममामिला ।। || 3८२ ॥ पुढवी व जागा आऊ पि नीचा पाय समारन मपयन । ममेयश टुगन्निया गए। को अगनि गमाग्भन्ते ॥ ॥ ८॥ एरियाती भूयारी रिपन्यगा आगर हा व पुरी निगाः। ने छिन्दः मायट पर पागन्भि पाने या निवाई ॥८॥ १८८ ॥ नान हिच विमान रन्ते पीपार असना आयरन्टे । अहार में लोए भाजपम्ने पीयाद में गिद आयाए ॥ ॥ २८ ॥ गम्भार मिजान्न बुयायागा नग पर पाक्षिा पुमाग । उगागा मनिमम गाय चमन्नि त बाउए पm | 10 ॥३९० ॥ मा जन्नों मातुनरा दहें भय वारिसे अनमो। एगन्नदुग्ने जरिए व रोए गरम् विपरियानवेड ॥ ११ ॥३१॥ रहेग न्टा पायन्ति मोरगं आहारमपनापनोय सीओदामेको हु एगे पश्यन्ति मोकग ॥ १२ ॥ ३९ ॥ पाओनि नन्धि मोस्नो बारसा लोगन जगारमेण । ते मजमसंलनुणं च भोगा मनत्य वाम परिसम्पयन्ति ॥ १३॥ ३९३ ॥ उदगे जे सिन्निदारनि नाय च पानं उदग फान्ता। उपास्म पाडेग पिया य मिनी शिक्षिा पागा यह दापि ॥१४॥ ३९४ ॥ मन्दा य उम्मा य जरा य मगू य उद्या टारना | अट्टालमेर मला वयन्नि उम्गाजे सिदिमुसाहरन्ति ॥ १५ ॥ ३९ ॥ उदग जई कम्ममल हरेजा एम मुह इच्छामिनमेव । अन्ध नेयाग्नस्तरिता पागात चेच हिन्ति मन्दा ॥ १६ ॥ ३९६॥ पापा कम्माई परवी हि रिओदग क जइ त हरेजा। विदिशतु एगे दगमत्तपाई मुस वयन्ते जलगिदिमाहु ।।१७॥ ॥ ३९७ ।। हुण्ग जे उिभिमुदाहरन्ति माय व पाय आणि फुन्ना। एतरिया सु० भ०८ ] सुत्तागमे १२१ सिद्धि हवेज तम्हा अगगिं फुमन्ताण कुम्मिण पि ॥ १०॥ ३९८ ॥ अपरिक्स दिट्ट न हु एव सिद्धी एहिन्ति ते पायममुज्समाणा। भूएहि जाण पडिलेह साय निज गहाय तसचावरेहिं ॥ १९ ॥ ३९९ ॥ यगन्ति लुप्पन्ति तसन्ति कम्नी पुटो जगा परिसलाय भिरा । तम्हा विक विरो आयगुत्ते दळु तसे या पडिसहरेजा ॥ २० ॥ ४०० ॥ जे धम्मलद्ध पिणिहाय भुजे पियटेण साहट य जे सिणाई । जे धोई लमयई व वत्य अहा ते नागीियस्म दूरे॥२१॥४०१॥ कम्म परिमाय दगनि धीरे नियटेण जीवेज य आदिमोक्न । से पीयफन्दाइ अभुरामाणे विरए विणागाटन रत्थियातु॥२२॥ ४०२॥ जे मायर च पियर च हिया गार तहा पुत्तपनु धग न । पुलर जे धावइ साउगाइ अहाहु से मामगियस्त दूरे ॥ २३ ॥ ॥ ४० ॥ युगई जे धायइ गाउगाड आधाइ धम्म उयराणुगिदे। अहाहु से आयरियाग मयने जे लावएना असणस्स हेक॥ २४ ॥ ४०४ ॥ निगम दीणे परभोयगम्नि मुहमालीए उयराणुगिटे । नीवारगिल व महावरा भरए एहिद पायमेव ॥ २५॥ ४०५॥ अन्नस्त पागत्मिहलोऽयस्त अणुप्पिय भागद मेयमाणे। पारत्यय चेष पुजीलय च निस्वारए होड जहा पुलाए ॥ २६ ॥ ४०६ ।। अनाय- पिग्रेण हियानएना नो पूजा तवना आवरेजा। गद्देहि स्पेहि असजमाग मवेहि कानेहि विणीय हि ॥ २७ ॥ ४०७ ॥ सपा मगाइँ अदय धीरे सव्वाद दुपराइ तितिक्समागे । अतिले अगिने अगएयचारी अभयकरे भिम अणा- दिलप्पा ॥ २८ ॥ ४०८ ॥ भारस्न जाआ मुणि गुजएजा पोज पावस्त पिवेग भिवग । दुस्सेग पुढे धुनमा:जा सगामसीने य पर दमेना ॥ २९ ॥ ४०९ ॥ आप हम्ममागे फ्लगायतट्टी गमागम कमा अन्तगरन । निधूय कम्म न पचनुपेइ अपए वा मग ति चेमि ॥ ३० ॥ १० ॥ कुमीलपरिभासियज्ययणं सत्तमं॥ वीरियज्मयणे अट्ठमे दुहा वेध नुयस्ताय नीग्यि नि पगई। किंतु वीरस्म वीरत का चेय पपई ॥१॥४११ ॥ सम्ममो पन्ति अपम्म या वि मुव्वया । एहिं दोहि ठाणेटिं जहिदीसन्नि मचिया ॥०॥ ४१०॥पमाय कम्ममाहनु अप्पमाय सहावर । तवमानादेमओ वा नियाल पण्डियमय वा ॥३॥ ४१३ ॥ नत्यमेगे तु उिपरान्ता अश्यायाय पानिग । एगे मन्ते अहिजन्लि पाणभूयपिटिगो ॥ ४ ॥ ४१४ ॥ मायियो माया य पामभोगे समारभे। हन्ता छेत्ता पगम्भित्ता आयसायाणु- 1 १२२ सुतात्तमे [मयगर गामिणो ॥५॥ १५॥ मगमा ययगा चेप कायगा व अन्नना। आरओ पाओ या पि दुहा वि य असजया ॥ ६ ॥ १६ ॥ राई कुल्बई वेग तओ रहि रजई । पागोवगा य आरम्मा दुस्वफामा य अन्तगो॥ ७ ॥ १७॥ सपराय नियन्टन्नि अत्तदुपटमारिगो । गगदोमस्मिया याला पार त्यन्ति ने बह ॥ ८ ॥ १८॥ एवं गकम्मगिरिय चालानु पवैश्य । इत्तो अचम्मनिग्यि पण्टिया मुह मे ॥५॥ ॥ ४१९ ॥ दरिए पन्धणुम्मु गचओ जिसन्धणे। पगोड पाग कम्मर काइ अन्तगो ॥ १० ॥ ४० ॥ नयाय गुसराय यायाय मनीहए । भुनो भुजो दुहापास अाहत तहा तदा ॥ ११॥ ४०१॥ ठाणी पिपिठागाणि चा- स्मन्ति न समओ । अणियए अयं वासे नायएहि मुहीहि य ॥ १० ॥ ४० ॥ पवमायाय मेहावी अप्पगो गिदिमुद्धरे । आरिय उयसपने गवधम्ममरोपियं ।। १३ ॥ ४० ॥ सहसमए नया धम्मगारं गुणेत्तु वा । ममुवट्टिएट अणगारे पचम्पायपावए ।॥ १८ ॥ ४२४ ॥ ज किंचुसम्म जागे आउनेमन अप्पगो । तस्मैव अन्तरा गिप्प तिम्म जिग्मेज पग्दिए ॥ १५ ॥ ४२५ ॥ जहा मुम्ने समाइ सए देहे ममाहरे । एप पावा. मेहाती असपेग ममाहरे ॥ १९॥ ॥४६॥ माहरे हत्यपाए य मग पनिन्दियाशय । पावग च परीगान भासा. दोम च तारिस ॥ १७ ॥ ४२ ॥ अणु माग च मार च त परिन्गय पण्टिए। मायागारवणिहुए उपसन्ते निहे चरे ॥ १८ ॥ २८ ॥ पाणे य नावाएबा अदिन्न पि य नायए । साइय न मुस घूया एम यम्मे उसीमओ ॥ १९ ॥ ४२९ ॥ अइसम्मन्ति वायाए मगसा वि न पत्यए । नवओ सटे दन्ते आयाग नुमनाहरे ॥२०॥४३० ॥ कट च कनमाग च आगमिस्त च पावग । सब त नाणु- जाणन्ति आयगुत्ता जिइन्दिया ॥ २१ ॥ ४३३ ॥ जे याऽसुद्धा महाभागा वीरा असमत्तदनिगो । अनुद्ध तेमि परफन्त सफल होइ मचसो॥२॥४३॥ य युद्धा महाभागा वीरा मम्मतदतिगो । मुद्व तेमि परान्त अफल होइ मव्दको ॥ २३ ॥ ४३३ ॥ तेमि पि न तवो नदो निस्सन्ता जे महाकुला । ज नवग्ने पियाणन्ति न सिलोग पवेजए ॥ ४ ॥ ४३४ ॥ अप्पपिग्वाति पाणासि अप्प भासेज मुन्धए । सन्ते भिनिव्वुढे दन्ते वीयगिद्धी मया जए ॥ २५ ॥ ४३ ॥ शाणजोग समाहटु काय विउसेज सध्यमो । तितिक्या परम नया आमोस्याए परिव्वएजाति ॥ २६ ॥ ४३६ ॥ त्ति बेमि ॥ वीरियज्मयणं अट्टमं ।।

'सु० भ० ९] सुत्तागमे १२३ धम्मज्झयणे नवमे १ कयरे धम्मे अक्खाए माहणेण मईमया । अजु धम्म जहातच जिणाण त सुणेह मे ॥ १॥ ४३७ ॥ माहणा सत्तिया वेस्सा चण्डाला अदु वोकसा । एसिया वेसिया सुद्दा जे य आरम्भनिस्सिया ॥२॥ ४३८ ॥ परिग्गहनिविट्ठाण पाव तेसिं पवडई । आरम्भसभिया कामा न ते दुक्खविमोयगा ॥ ३ ॥ ४३९ ।। आघायकिच्चमाहेउ नाइओ विसएसिणो । अन्ने हरन्ति तं वित्त कम्मी कम्मेहि किचई ॥ ४ ॥ ४४० ॥ माया पिया ण्हुसा भाया भजा पुत्ता य ओरसा । नाल ते तव ताणाय लुप्पन्तस्स समम्मुणा ॥ ५॥ ४४१॥ एयमट्ठ सपेहाए परमट्ठा- गुगामिय । निम्ममो निरहकारो चरे भिक्खू जिणाहिय ॥ ६ ॥ ४४२ ॥ चिचा वित्त च पुत्ते य नाइओ य परिग्गह । चिचा ण अन्तग सोय निरवेक्खो परिव्वए ॥ ७॥ ४४३ ॥ पुढवी अगणी वाऊ तणरुक्ख सबीयगा । अण्डया पोयजराऊ रसससेयउब्भिया ॥ ८॥ ४४४ ॥ एएहिं छहिं काएहि त विज परिजाणिया । मणसा कायवकेण नारम्भी न परिग्गही ॥ ९ ॥ ४४५ ॥ मुसावाय वहिद्ध च उग्गहं च अजाइया । सत्यादाणाइ लोगसि त विज परिजाणिया ॥ १० ॥ ४४६ ॥ पलिउच्चण च भयण च थण्डिल्लुस्सयणाणि य । धूणादाणाइ लोगसि त विज परिजाणिया ॥ ११॥ ४४७॥ धोयगं रयण चेव वत्थीफम्म विरेयण । वमणज- णपलीमथ तं विज परिजाणिया ॥ १२॥ ४४८॥ गन्धमल्लसिणाण च दन्त- पक्खालण तहा । परिग्गहित्थिकम्म च त विज परिजाणिया ॥ १३ ॥ ४४९ ॥ उद्देसिय कीयगड पामिञ्च चेव आहड । पूय अणेसणिज च त विज परिजाणिया ॥ १४ ॥ ४५० ॥ आसूणिमक्खिराग च गिद्धुवघायकम्मग । उच्छोलग च कवं च त विज परिजाणिया ॥ १५ ॥ ४५१॥ सपसारी कयकिरिए पसिणाययणाणि य। सागारिय च पिण्डं च त विज परिजाणिया ॥ १६ ॥ ४५२ ॥ अट्ठावय न सिक्खिजा वेहाईय च नो वए । हत्यकम्म विवाय च त विज्ज परिजाणिया ॥ १७ ॥ ४५३ ॥ पाणहाओ य छत्त च नालीय वालवीयण । परकिरिय अन्नमन्न च त विज परिजाणिया ॥ १८ ॥ ४५४ ॥ उच्चार पासवग हरिएसु न करे मुणी । वियडेण वा वि साहमु नावमजे कयाइ वि ।। १९ ।। ४५५ ॥ परमत्ते अन्नपाण न भुजेज कयाइ वि । परवत्य अचेलो वि त विज परिजाणिया ॥ २० ॥ ४५६ ॥ आसन्दी पलियके य निसिज्ज च गिहन्तरे । सपुच्छग सरण वा त विज परिजा- णिया ॥ २१॥ ४५७ ॥ जस कित्तिं सिलोग च जा य वन्दणपूयणा । सव्वलो- यसि जे कामा त विजं परिजाणिया ॥ २२ ॥ ४५८ ॥ जेणेह निव्वहे भिक्खू

१२४
मुत्तागमे
[मृयगर
अनपा तहाद । अणुप्पयागमननि त मिजं परिजागिया ॥ २३ ॥ ४५९।।
एव उदा निग्गन्ये महावीरे महामुणी । अणन्ननागदमी से चम्म, देतिर मुय
॥२४॥४०॥ मागमापो न भाजा नेव यम्फेज मम्मय । माहाग निव-
देना अणुचिनिय विशागरे || .. ॥ ४६१ ॥ तथिमा तटया मामा जं पडत्ता-
गुनप्पर । ज छम त न वत्तव्य एका आगा नियण्ठिमा ॥ २६ ॥ ४६॥
होटानाय गहीराय गोयानाय च नगे वए । तुम तुम ति अमजुन मायगो त न
बत्तए ॥२॥६३ ॥ अरुसीले गया भिमा नेय मुमग्गिय भए । मुहल्या
नत्सास्नग्गा पटिनुन्झेन ने पिऊ ॥ ८॥ ४६४ ॥ ननत्य अन्तराए। परगेहे.
न निसीयए । गामामारि सिह नाइवर हने मुणी ॥ २९ ॥ ४६५ ॥ अणुस्मो
उरालेगु जयमाणो परिव्यय । चग्यिाए अप्पमतो पुट्टो तत्य हियामए ॥३०॥
॥ ४६६ ॥ हम्ममागो न गुपेन युगमागो न सजले । नमो अहियासेजा न य
कोलाहल करे ॥११॥ ४६७ ॥ लदे कामे न पत्थेजा पियेगे एवमाहिए ।
आयरियाद डिसोग गुरुण अन्तिा गया ॥ ३० ॥ ४६८॥ सम्ममाणो उपा-
मेना मुप्पन एतवस्मिय । पीरा जे अनाजेसी विदमन्ता जिइन्दिया ॥ ३ ॥
॥४६९ ॥ गिहे दीयमपानन्ता पुरिमादागिया नरा । ते वीग यम्मुगा
नायस्यन्ति जीविय ॥ ३४ ॥ ४७० ॥ अगिद्धे महासेन आरम्मै अनिस्सिए ।
मन्च त समयातीय जमेय लनिय बहु ॥ ३५॥ १७१ ॥ अम्माण च माय च त
परिनार पण्डिए । गारवागि य मय्याणि निव्वाण सुपए मुरी॥ ३६॥ ४७ ॥
त्ति बेमि ॥ धम्मज्झयणं नवमं ॥
समाहियज्झयणे दसमे
आघ मईमं अणुनीइ धम्म अशू समाहि तमिम मुह । अपडित भित्र उ
समाहिपत्ते अगियाण भूएन परिव्यएजा ॥१॥७३॥ स अहे य तिरिय
दिमागु तमा य जे थावर जे य पाणा। हत्येहि पाएहि य सजमिता अदिलमनेउ
य नो गहेजा ॥ ॥ ४७४ ॥ यक्सायधम्ने वितिगि तिग्गे लाढे चरे आय-
तुले पयाम् । आय न कुना रह जीवियट्ठी चय न कुना नुनपत्लि भिक्य ॥३॥
॥ ४७५ ॥ मबिन्दियाभिनिव्युटे पयानु चरे मुणी सव्वउ विप्पमुये । पामाहि
पाणे य पुटो वि सत्ते दुक्रवण भट्टे परितप्पमाणे ॥ ४ ॥ ४७६ ॥ एएम वाले व
पपुवमाणे आवई कम्मसु पावएन । अइवायओ कीरइ पारसम्म निउरमाणे उ
करेड कम्ग ॥ ५॥ ४७७ ॥ आदीगवित्ती व रेड पान मन्ना उ एगन्तसमाहि-
माहु । जुद्धे समाहीय रए विवेगे पाणाइवाया निरए ठियप्पा ॥६॥ ४७८ ॥

सु० म० १.] सुत्तागमे १२५ सव्व जग तू समयाणुपेही पियमप्पिय कस्स वि नो करेजा । उहाय दीणो य पुणो विसण्यो सपूयण चेव सिलोयकामी ॥ ७ ॥ ४७९ ॥ आहाकड चेव निकाम- मीणे नियामचारी य विसण्णमेसी। इत्थीसु सत्ते य पुढो य बाले परिग्गह चेव पकुव्वमाणे ॥ ८॥ ४८० ॥ वेराणुगिद्धे निचय करेइ इओ चुए से इहमट्ठदुग्गं । तम्हा उ मेहावि समिक्स धम्म चरे मुणि सव्वउ विप्पमुके ॥ ९॥ ४८१ ॥ आय न कुजा इह जीवियट्ठी असजमागो य परिव्वएजा। निसम्मभासी य विणीय गिद्धिं हिंसनियं वा न कह करेजा ॥१०॥ ४८२॥ आहाकड वा न निकामएजा निकामयन्ते य न सथवेजा। धुणे उराल अणुवेमाणे चिच्चा न सोय अणवेक्स- मागो॥ ११ ॥ ४८३ ॥ एगत्तमेय अभिपत्थएजा एवं पमोक्खो न मुस ति पास। एसप्पमोक्खो अमुसे वरे वि अकोहणे सचरए तवस्सी ॥ १२ ॥ ४८४ ॥ इत्थीस या आरय मेहुणाओ परिग्गह चेव अकुवमाणे । उच्चावएसु विसएसु ताई निस्ससय भिक्खु समाहिपत्ते ॥ १३ ॥ ४८५ ॥ अरई रई च अभिभूय भिक्खू तणाइफास तह सीयफास । उण्हं च दस चऽहियासएजा सुभि व दुभि व तितिक्खएज्जा ॥ १४ ॥ ४८६ ॥ गुत्तो वईए य समाहिपत्तो लेस समाहर्ट्स परिव्वएजा । गिह न छाए न वि छायएजा समिस्सभाव पयहे पयासु ॥ १५॥ ४८७ ॥ जे केइ लोगम्मि उ अकिरियआया अनेण पुट्ठा धुयमादिसन्ति । आरम्भसत्ता गढिया य लोए धम्म न जाणन्ति विमोक्सहेउ ॥ १६ ॥ ४८८ ॥ पुढो य छन्दा इह माणवा उ किरियाकिरीय च पुढो य वाय । जायस्स बालस्स पकुव्व देह पवढई वेरम- सजयस्स ॥ १७ ॥ ४८९ ॥ आउक्खय चेव अबुज्झमाणे ममाइ से साहसकारि मन्दे । अहो य राओ परितप्पमाणे अटेसु मूढे अजरामरे व्व ॥ १८ ॥ ४९० ॥ जहाहि वित्त पसवो य सव्व जे वन्धवा जे य पिया य मित्ता । लालप्पई से वि य एइ मोह अन्ने जणा तसि हरन्ति वित्त ॥ १९ ॥ ४९१ ॥ सीह जहा खुडमिगा । चरन्ता दूरे चरन्ति परिसकमाणा। एव तु मेहावि समिक्स धम्म दूरेण पाव परिवजएजा ॥ २० ॥ ४९२ ॥ सवुज्झमाणे उ नरे मईम पावाउ अप्पाण निव- एजा। हिसप्पसूयाइँ दुहाइँ मत्ता वेराणुवन्धीणि महन्भयाणि ॥ २१ ॥ ४९३ ॥ मुस न वूया मुणि अत्तगामी निव्वाणमेय कसिण समाहिं । सय न कुज्जा न य कारवेजा करन्तमन्न पि य नाणुजाणे ॥ २२ ॥ ४९४ ॥ सुद्धे सिया जाएँ न दूस- एजा अमुन्छिए न य अज्झोववन्ने । धिइम विमुक्के न य पूयणट्ठी न सिलोयगामी य परिव्वएज्जा ॥ २३ ॥ ४९५ ॥ निक्खम्म गेहाउ निरावफखी काय विउस्सेज नियाणछिन्ने । नो जीविय नो मरणाभिकखी चरेज भिक्खू वलया विमुक्के ॥ २४ ॥ ॥ ४९६ ॥ त्ति बेमि ॥ समाहियज्झयणं दसमं ॥

मुसागमे [स्यगर मग्गज्झयणे एयारहमे ग्यरे मगे अगाए माहगेग मनमा । ज मग टनु पाविना ओह तरह दुत्तरं ॥ १॥ ४९७ ॥ ज मग पुनरं मुद मन्वदुत्वरिमोक्मा । जागानिस जहा निरन् त जो वृहि महामुणी ॥ 7 ॥ ४९८ ॥ जड जो के पुच्छिना देवा अदुव माणुमा । तेमिं तु कयर मग आटज दादि यो ॥ ३ ॥ ४९९ ॥ जड योन्ड पुच्चिजा या अदुन माणुता । तेगिम पडि साहेबा मग्गगार मुह में ॥ ४॥ ५०० ॥ अणुपुको महापोर पासवे परेन । जमायार दो पुन ममुर पहारिगे॥५॥५०१ ॥ अनरिंग तरन्तगे तरिम्सन्ति अगागया । त गोवा पडिअक्सानि जन्नवो न भूगेद में ॥ ॥५०॥ पुटवानीवा पुडो सना आउ- जीवा तहागणी । वाउजीवा पुटो मत्ता तारा मपीयगा ॥ ७ ॥ ४० ॥ अहाग तमा पागा एर माय आहिवा। एयावए जीवराए नारे रोड विनई ॥ ८ ॥ १०४ ॥ मयार्टि जजुत्तीहिं मदम पडिलेहिया। मव्ये आन्नदुस्या य मओ सच्चे न हिंसा ॥९॥५०॥ एय तु नानिको मार जन हिंडरंचन। अहिंमा समय चेव एपावन्न वियारिया ॥ १० ॥ ५०६ ॥ उस अहे य तिरिय जे फेड नगयारा । मचन्य निरइ पिना सन्नि निवागनाहिय ॥ ११॥ ५०७ ॥ पम् दोमे निगरिया न विरझेन केगी। मामा वरमा व कायमा चेव अन्ततो ॥ १० ॥ ५०८ ॥ सुबुट से महापरे धीरे उनमा चरे। एमगाममिए निघ पजयन्ने अपेमा॥ १ ॥ ५०९ ॥ भूयाइ च नमान्न तमुहिम्ना य जं कह। नारिस तु न गिरहेजा अपात मजए ॥ १४ ॥५१०॥ पईकम्म न सेवेबा एम धम्मे बुसीमओ। ज किचि अभिकरेजा नवमो त न रपए ॥१॥ ॥ ५११॥ गन्न नाणुगणेवा आयगुने निइन्दिए । ठागाइ गन्ति मट्टीगं गागेनु नगरेनु या ॥ १६ ॥ ५० ॥ तहा र ममारम अत्यि पुति नो वए। अबा नथि पुणति एवमेव महन्मर ॥ 1 ॥५१३ ॥ दावा य जे पाणा हम्मन्नि तायावरा । तेतिनारसाहाए नम्हा अथिति नो गए ।।१८॥५१४॥ जेमिं न उवरप्पन्नि मनपाग तहानिह । तेमि सामन्तराय ति तम्हा नमित्ति नो पए ॥ १९॥ ५१५॥ यदा पससन्नि वहमिन्टन्ति पाण। जे यण पडिसहन्नि मिनिन्ठेय सन्नि ते ॥ २० ॥ ५१६ ॥ दहओ वि ते न भामन्ति अन्धि वा नन्धि वा पुगे। आयं रयन्न हेगा जनिव्वाग पानगन्ति ते ॥२५॥ ॥ ५१७ ॥ निव्वाग परन बुद्धा नवयत्ताण व चन्दिमा। तम्हा मया जए दन्ते निवाग सधए मुणी ॥ २२ ॥ ५१८॥ बुझमाग पागाग चिन्ताण ससम्मुणा + - १ सु० अ० १२] सुत्तागमे १२७ आघाइ साहु त दीव पइटेसा पवुच्चई ॥ २३ ॥ ५१९ ॥ आयगुत्ते सया दन्ते छिनसोए अणासवे। जे वम्म सुद्धमक्खाइ पडिपुण्णमणोलिस ॥ २४ ॥ ५२० ॥ तमेव अवियाणन्ता अवुद्धा वुद्धमाणिणो । बुद्धा मो त्ति य मन्नन्ता अन्त एए समा- हिए ॥ २५ ॥ ५२१ ॥ ते य बीयोदग चेव तमुहिस्सा य ज कड । भोच्चा झाण झियायन्ति अखेयन्नासमाहिया ॥ २६ ॥ ५२२ ॥ जहा ढका य कका य कुलला मरगुका सिही । मच्छेसण झियायन्ति झाण ते कलुसाधम ॥ २७ ॥ ५२३ ॥ एव तु समणा एगे मिच्छदिट्ठी अणारिया। विसएमण झियायन्ति कमा वा कलुसाहमा ॥ २८ ॥ ५२४ ॥ सुद्ध मग्ग विराहित्ता इहमेगे उ दुम्मई। उम्मग्गगया दुक्खं घायमेसन्ति त तहा ॥ २९ ॥५२५॥ जहा आसाविणिं नाव जाइअन्धो दुरुहिया। इच्छई पारमागन्तु अन्तरा य विसीयइ ॥ ३० ॥ ५२६ ॥ एव तु समणा एगे मिच्छद्दिट्टी अणारिया। सोयं कसिणमावन्ना आगन्तारो महन्भय ॥३१॥ ५२७ ॥ इम च धम्ममायाय कासवेण पवेइय । तरे सोय महाघोर अत्तत्ताए परिव्वए ॥ ३० ॥ ५२८ ॥ विरए गामधम्मेहिं जे केइ जगई जगा। तेसिं अत्तुवमायाए थाम कुव्व परिव्वए ॥ ३३ ॥ ५२९ ॥ अइमाण च माय च त परिनाय पण्डिए। सव्वमेय निराकिच्चा निव्वाण सधए मुणी ॥ ३४ ॥ ५३० ॥ सधए साहुधम्म च पावधम्म निराकरे । उवहाणवीरिए भिक्खू कोह माण न पत्थए ॥३५॥५३१॥ जे य बुद्धा अतिकन्ता जे य बुद्धा अणागया। सन्ति तेसिं पइट्ठाण भूयाण जगई जहा ॥ ३६ ॥ ५३२ ॥ अह ण वयमावन्न फासा उच्चावया फुसे । न तेसु विणि- हण्णेजा वाएण व महागिरी ॥ ३७ ॥ ५३३ ॥ सत्रुडे से महापन्ने धीरे दत्तेसणं चरे । निव्वुडे कालमाफखी एव केवलिणो मय ॥ ३८ ॥ ५३४ ॥ ति बेमि ॥ मग्गज्झयणं एयारहमं ॥ समोसरणज्झयणे बारहमे चत्तारि समोसरणाणिमाणि पावादुया जाइँ पुटो वयन्ति । फिरिय अकिरियं विणय ति तइय अन्नाणमाहसु चउत्यमेव ॥१॥५३५ ॥ अन्नाणिया ता कुसला वि सन्ता असथुया नो वितिगिच्छतिण्या । अकोविया आहु अकोवियेहिं अणाणु- वीइत्तु मुस वयन्ति ॥ २ ॥ ५३६ ॥ सच्च असच इति चिन्तयन्ता असाहु साहु त्ति उदाहरन्ता । जेमे जणा वेणइया अणेगे पुट्ठा वि भाव विणइसु नाम ॥ ३ ॥ ॥ ५३७ ॥ अगोवसखा इइ ते उदाहु अढे स ओभासइ अम्ह एव । लवावसकी शुनागने सूयगढ़ य गरि नो शिग्यिमाइनु अकिरियवाद ॥८॥५३८॥ ममिस्मभार च गिरा गहीए ने मुम्मुई होट अगागुवाई । म दुपा दममंगपत आग्नु छत्रयाच कन्न ॥५॥ ३९ ॥ ते पचमपन्नि अनुदामाया दियाचा अफिरि पवाई । जे मायदना यही मामा भमन्नि मुसारमगोपदम्ग ॥॥ ॥५४० ॥ नादगो उदेद न आपमेन चन्दिमा वा हाय या। मडिया न मन्दन्नि न यन्ति पापा कन्यो निरओ जिणे द्रोण ॥ ७ ॥५॥ जहा हि अन्ये मह जोरा पियाई नी पस्दहीनने । मन्त पि ते एवमभिरियाई सिरियन पस्मन्नि निन्दपना ॥८॥५४॥ नवन्टर गया था व निमित्तदेह च उप्पादन च। अहामेय पटले अहिना गैगनि जानि अगाायाई ॥ ९ ॥५.३ ।।द्र तिमिना नदिया भवन्नि मिचिन पिप्पडिएट ना। त विजमार अपहिबमामा आरन विजा पग्निोरममेव ॥ १०॥४४॥ ते रकम- क्यन्ति नमिय लोग नहा नहा समगा माहगा र । गय नमःच दुत्व आहमु मिजाचरण पमोस्त ॥13॥',५॥ ते नस्य रोगनिह नायगा 3 मग्गाजुभागन्नि हि पया। दहा वहा समादुओए उनी पपा मा गय रुप. गाठा ॥१०॥५४॥ जे रस्वमा वा उमलोपा वाले या मुरायचा य कामा । आगामगानी य पुढोषिवा जे पुगो पुगो विपरिमान्ति ॥ 3 ॥ ॥ ५० ॥ जमादु ओद मजि अपारग जागाहि प मरगदग दुमोक्न । जसी विरग्गा विरयाहि दुहओलि लोर अनचरन्ति ॥ १४ ॥ ५.८ ॥ न कम्मुग सम्म सबैन्नि याला अन्मुग सम्म पनि धीरा । मेदावि गेम- भयावईया सनोनिगेनो परेनि पार ॥१५॥५४९ || ते तीयउपमा- गयाइ रोस्त नागन्ति तहागराठा नेयारी अमानवा युद्धा हु ते अन्न- फटा भवन्ति ॥ १६ ॥ ५५ ॥ ने नेर कुल्यन्नि न परवेन्नि भूमाहिनाद टुगुन्टमागा। मया जया विप्पगमन्ति पीग विगति पीरा य हन्ति एरो ॥10॥५२१ ॥ दहरे य पागे युद्धे य पाणे ते अनओ पामद गव्वलोए । इव्वेद लोगमा महन्न उदपमतेनु पारव्यएजा ॥ १८ ॥ ५५ ॥ जे आपओ परओ वा पि नया अलमप्पो होन्नि अल परेगि । तं नोदभूत च मरावनेजा ले पाउयुबा अगुवीड धम्म ॥ १९॥५.१॥ ताण जो जाग जो य लोग गइ च जो जाइ नागद च । जो मारय जाग अबानयं च जाइ चमरण च जगोवाय ॥२०॥५१४॥ अहो नि गत्तात विजाच जो आमर जागड अवर च । दुस्वच जो जागड निजर च मो भाविउमरिहह सिरियसाप०१॥

सु० भ० १३] सुत्तागमे १२९ ॥ ५५५ ॥ सद्देसु रुवेसु असज्जमाणे गन्धेसु रसेसु अदुस्समाणे । नो जीविय नो मरणाहिकखी आयाणगुत्ते वलया विमुक्के ॥ २२ ॥ ५५६ ॥ त्ति बेमि ॥ समो- सरणज्झयणं वारहमं॥ आहत्तहीयज्झयणे तेरहमे आहत्तहीय तु पवेयइस्स नाणप्पकार पुरिसस्स जाय । सओ य धम्म असओ असील सन्ति असन्ति करिस्सामि पाउ ॥१॥ ५५७ ॥ अहो य राओ य समुट्ठिएहिं तहागएहिं पडिलब्भ धम्म । समाहिमाघायमजोसयन्ता सत्यारमेवं फरुस वयन्ति ॥ २॥ ५५८ ॥ विसोहियं ते अणुकाहयन्ते जे आयभावेण विया- गरेजा । अठ्ठाणिए होइ बहुगुणाण जे नाणसकाइ मुस वएना ॥ ३ ॥ ५५९ ॥ जे यावि पुट्टा पलिउच्चयन्ति आयाणमटुं खलु वञ्चइत्ता । असाहुणो ते इह साहु- माणी मायणि एस्सन्ति अणन्तघाय ॥ ४ ॥ ५६० ॥ जे कोहणे होइ जयभासी विओसिय जे उ उदीरएज्जा । अन्धे व से दण्डपह गहाय अविओसिए धासइ पावकम्मी ॥५॥५६१॥ जे विग्गहीए अन्नायभासी न से समे होइ अझञ्झ- पत्ते । ओवायकारी य 'हिरीमणे य एगन्तदिट्ठी य अमाइरूवे ॥ ६ ॥ ५६२ ॥ से पेसले सुहुमे पुरिसजाए जच्चन्निए चेव सुउज्जुयारे । बहु पि अणुसासिएँ जे तहच्चा समेह से होइ अझन्झपत्ते ॥ ७ ॥ ५६३ ॥ जे यावि अप्प वसुम ति मत्ता ससाय वाय अपरिक्स कुजा । तवेण वाह सहिउ त्ति मत्ता अन्न जण पस्सइ विम्बभूय ॥ ८॥ ५६४ ॥ एगन्तकूडेण उ से पलेइ न विजई मोणपयसि गोत्ते । जे माणगटेण विउक्कसेज्जा वसुमन्नतरेण अवुज्झमाणे ॥ ९ ॥ ५६५ ॥ जे माहणे खत्तियजायए वा तहुग्गपुत्ते तह लेच्छई वा । जे पवईए परदत्तभोई गोत्ते न जे थन्भइ माणबद्ध ॥ १० ॥५६६ ॥ न तस्स जाई व कुल व ताण नन्नत्य विजा- चरण सुचिण्ण । निक्खम्म से सेवइऽगारिकम्म न से पारए होइ विमोयणाए ॥ ११॥ ५६७ ॥ निकिंचणे मिक्खु सुलहुजीवी जे गारव होइ सिलोगकामी । आजीवमेय तु अवुज्झमाणो पुणो पुणो विप्परियासुवेन्ति ॥ १२ ॥ ५६८ ॥ जे भासव भिक्खु सुसाहुवाई पडिहाणव होइ विसारए य । आगाढपने सुविभावियप्पा अनं जण पनया परिहवेजा ॥ १३ ॥ ५६९ ॥ एव न से होइ समाहिपत्ते जे पन्नव भिक्खु विउक्कसेज्जा । अहवा वि जे लाहमयावलित्ते अन्न जण खिसइ वाल- पन्ने ॥ १४ ॥ ५७० ॥ पन्नामय चेव तवोमय च निन्नामए गोयमय च भिक्खू । ९ सुत्ता.

१३० सुत्तागमे [सूयगर आजीवग चेव चउत्थमाहु से पण्डिए उत्तमपोग्गले से ॥ १५ ॥ ५७१॥ मयाइँ एयाइँ विगिच्च धीरा न ताणि सेवन्ति सुधीरधम्मा । ते सव्वगोत्तावगया महेसी उच्च अगोत्त च गतिं वयन्ति ॥ १६ ॥ ५७० ॥ भिक्सू मुयचे तह दिधम्मे गाम च नगर च अणुप्पविस्सा । से एसण जाणमणेसण च अन्नस्स पाणस्स अणाणुगिद्धे ॥ १७ ॥५७३ ॥ अरइ रइ च अभिभूय भिक्खू बहुजणे वा तह एगचारी । एगन्तमोणेण वियागरेजा एगस्म जन्तो गइरागई य ॥ १८ ॥ ॥५७४ ॥ सय समेचा अदुवा वि सोचा भासेज धम्म हियय पयाण । जे गर- हिया सणियाणप्पओगा न ताणि सेवन्ति मुधीरधम्मा ॥ १९ ॥ ५७५॥ केसिंचि तकाइ अबुज्झ भाव खुद्द पि गच्छेज असद्दहाणे । आउस्स कालाइयार वधाए लद्धाणुमाणे य परेसु अढे ॥ २० ॥ ५७६ ॥ कम्म च छन्द' च विगिच धीरे विणइन ऊ सव्वउ आयभावं । स्वेहि लुप्पन्ति भयावहेहि विज गहाया तसथाव- रेहि ॥ २१ ॥ ५७७ ॥ न पूयण चेव सिलोयकामी पियमप्पिय कस्सइ नो करेजा । सव्वे अणढे परिवजयन्ते अणाउले या अक्साइ भिक्यू ॥ २२ ॥ ॥ ५७८ ॥ आहत्तहीय समुपेहमाणे सव्वेहिं पाणेहिं निहाय दण्ड । नो जीविय नो मरणाहिकखी परिव्वएज्जा वलया विमुक्ने ॥ २३ ॥ ५७९ ॥ त्ति बेमि ॥ आहत्तहीयज्झयण तेरहमं ॥ गन्थज्झयणे चोदहमे गन्य विहाय इह सिक्खमाणो उठाय मुवम्भचेर वसेजा। ओवायकारी विणय सुसिक्से जे छेय से विप्पमाय न कुजा ॥ १ ॥ ५८० ॥ जहा दियापोयमपत्तजार्य सावासगा पविर मनमाण । तमचाइय तरुणमपत्तजाय ढकाइ अन्चत्तगम हरेजा ॥०॥५८१॥ एव तु सेह पि अपुठ्ठधम्म निस्सारिय कुसिम मनमाणा । दियस्स छाय व अपत्तजाय हरिंसु ण पावधम्मा अणेगे ॥ ३ ॥ ५८२ ॥ ओसाणमिच्छे मणुए समाहि अणोसिए णन्तकरि ति नचा। ओभासमाणे दवियस्स वित्त न निकसे वहिया आसुपन्नो ॥४॥५८३॥ जे ठाणओ य सयणासणे य परकमे यावि सुमाहुजुत्ते । समिईसु गुत्तीमु य आयपने वियागरिं ते य पुढो वएना ॥५॥५८४॥ सदाणि सोचा अदु भेरवाणि अणासवे तेसु परिव्वएना । निद्द च भिक्खू न पमाय कुजा कहकह वा वितिगिच्छतिण्णे ॥ ६ ॥ ५८५ ॥ डहरेण बुढेणऽणुसासिए उ राइणिएणावि समव्वएण । सम्म तय थिरओ नाभिगच्छे निजन्तए वावि अपारए से ॥७॥५८६ ॥ विउट्ठिएण समयाणुसिढे डहरेण वुद्वेण उ चोइए य । अचुहि- १ सु०म० १४] सुत्तागमे याए घडदासिए वा अगारिण वा समयाणुसिटे॥८॥५८७ ॥ न तेसु कुज्झे न य पवहेजा न यावि किंची फरस वएज्जा । तहा करिस्स ति पडिस्सुणेजा सेय खु मेयं न पमाय कुजा ॥ ९ ॥५८८ ॥ वणसि मूडस्स जहा अमूढा मगाणुसासन्ति हिय पयाण । तेणेव मज्झं इणमेव सेय ज मे वुहा समणुसासयन्ति ॥१०॥५८९॥ अह तेण मूढेण अमूढगस्स कायव्व पूया सविसेसजुत्ता । एओवर्म तत्य उदाहु वीरे अणुगम्म अत्य उवणेइ सम्म ॥ ११॥ ५९० ॥ नेया जहा अन्ध- कारसि राओ मग न जाणाइ अपस्समाणे । से सूरियस्स अभुग्गमेण मग वियाणाइ पगासियसि ॥ १२ ॥ ५९१ ॥ एवं तु सेहे वि अपुठ्ठधम्मे धम्म न- जाणाइ अबुज्झमाणे । से कोविए जिणवयणेण पच्छा सूरोदए पासइ चक्खुणेव १॥ १३ ॥५९२ ॥ उड्ड अहे यं तिरियं दिसासु तसा य जे थावर जे य पाणा। सया जए तेसु परिव्वएजा मणप्पओस अविकम्पमाणे ॥ १४ ॥ ५९३ ॥ कालेण पुच्छे समिय पयासु आइक्खमाणो दवियस्स वित्त । ते सोयकारी य पुढो पवेसे संखा इम केवलियं समाहि ॥ १५ ॥ ५९४ ॥ अस्सि सुठिच्चा तिविहेण तायी एएसु या सन्ति निरोहमाहु । ते एवमक्खन्ति तिलोगदसी न भुजमेयन्ति पमाय- सगं॥ १६ ॥ ५९५ ॥ निसम्म से भिक्खु समीहियह पडिभाणव होइ विसारए य । आयाणअट्ठी बोदाणमोणं उवेच्च सुद्धेण उवेइ मोक्स ॥ १७ ॥ ५९६ ॥ सखाइ धम्म च वियागरन्ति बुद्धा हु ते अन्तकरा भवन्ति । ते पारगा दोण्ह वि मोयणाए ससोधिय पण्हमुदाहरन्ति ॥ १८ ॥ ५९७ ॥ नो छायए नो वि य दसएजा माण न सेवेज पगासण च । न यावि पन्ने परिहास कुज्जा न याऽऽसियावाय वियागरेजा ॥ १९ ॥ ५९८ ॥ भूयाभिसकाइ दुगुम्छमाणे न निव्वहे मन्तपएण गोय । न किंचिमिच्छे मणुए पयासु असाहुधम्माणि न सवएना ॥ २० ॥ ५९९ ॥ हास पि नो सधइ पावधम्मे ओए तहीय फरुस वियाणे । नो तुच्छए नो य चिकयइज्जा अणाइले या अक्साइ भिक्खू ॥ २१ ॥ ६०० ॥ सकेज याऽसकियभाव भिक्खू विभजवाय च वियागरेजा। भासादुय धम्मसमुहिएहि वियागरेजा समयासुपने ॥ २२ ॥ ६०१ ॥ अणुगच्छमाणे वितह विजाणे तहा तहा साहु अककसेण । न कत्थई भास विहिंसइना निरुद्धग वावि न दीहइजा ॥ २३ ॥६०२॥ समालवेजा पडिपुण्णभासी निसासिया समियाअठ्ठदसी । आणाइ सुद्ध वयण भिउजे अभिसधए पावविवेग भिक्ख ॥ २४ ॥ ६०३ ॥ अहाबुइयाइ सुसिक्खएजा जइज्जया नाइवेल वएजा । से दिहिम दिहि न लूसएजा से जाणइ भासिउ त समाहि ॥२५॥६०४॥ , अल्सए नो पच्छन्नभासी नो सुत्तमत्य च करेज ताई । सत्थारभत्ती अणुवीइ वाय -

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२ सु० १०.] सुत्तागमे १३३ ॥ २०॥ ६२६ ॥ अणुत्तरे य ठाणे से कासवेण पवेइए। जं किचा निव्वुडा एगे निटुं पावन्ति पण्डिया ॥ २१ ॥ ६२७ ॥ पण्डिए वीरिय लगु निग्यायाय पवत्तगं धुणे पुन्वकडं कम्मं नवं वा वि न कुचई ॥ २२ ॥ ६२८॥ न कुवई महावीरे अणुपुवकडं रय । रयसा समुहीभूया कम्म हेचाण ज मय ।। २३ ।। ६२९ ॥ ज मय सव्वसाहूण तं मयं सल्लगत्तण । साहइत्ताण त तिण्णा देवा वा अभविंसु ते ॥२४॥६३०॥ अभवितु पुरा धीरा आगमिस्सा वि मुन्वया। दुनिवोहस्स मग्गस्स अन्त पाउकरा तिण्णे ॥२५॥६३१॥त्ति बेमि ।। आयाणियज्झयणं पण्णरहमं ।। गाहज्झयणे सोळसमे अहाह भगव-एवं से दन्ते दविए वोसट्टकाए त्ति वच्चे माहणे त्ति वा १ समणे त्ति वा २ भिक्खु त्ति वा ३ निग्गन्थे त्ति वा ४ । पडिआह-भन्ते कह नु दन्ते दविए वोसठ्ठकाए त्ति वचे माहणे ति वा समणे त्ति वा भिक्खु ति वा निग्गन्थे त्ति वा। त नो हि महामुणी ॥ इति विरए सव्वपावकम्मेहिं पिजदोसकलह० अब्भ- क्खाण० पेसुन्न० परपरिषाय० अरइरइ० मायामोस० मिच्छादसणसल्लविरए समिए सहिए सया जए नो कुज्झे नो माणी माहणे ति बच्चे ॥ १॥ ६३२ ॥ एत्य वि समणे अनिस्सिए अणियाणे आयाणं च अइवाय च मुसावाय च बहिद्धं च कोह च माणं च माय च लोह च पिज च दोस च इच्चेव जओ जओ आयाण अप्पणो पदोसहेऊ तओ तओ आयाणाओ पुन्व पडिविरए पाणाइवाया सिआ दन्ते दविए वोमट्टकाए समणे ति बच्चे ॥२॥ ६३३॥ एत्य वि भिक्खू अणुन्नए विणीए नामए दन्ते दविए वोसहकाए सविधुणीय विरुवरुवे परीसहोवसग्गे अज्झप्पजोगसुद्धादाणे उवहिए ठिअप्पा सखाए परदत्तभोई भिक्षु ति बच्चे ॥ ३ ॥ ६३४ ॥ एत्य वि निग्गन्थे एगे एगविऊ बुद्ध सछिन्नसोए सुसजए सुसमिए सुसामाइए आयवायपत्ते विऊ दुहओ वि सोयपलिछिने णो पूयणसकारलाभठ्ठी धम्मठी धम्मविऊ नियाग पडिचन्ने समिय चरे दन्ते दविए वोसट्टकाए निग्गन्थे त्ति वच्चे ॥ ४ ॥ ६३५॥ से एवमेव जाणह जमह भयन्तारो ॥ ति बेमि ॥ गाहज्झयणं सोळसम, पढमे सुयक्खन्धे समत्ते ।। पोण्डरियज्झयणे पढमे सुयं मे आउस तेणं भगवया एवमक्खायं । इह खलु पोण्डरीए नामज्झयणे

सुत्तागमे
[सूयगड
तस्स ण अयमढे पन्नत्ते । से जहानामए पुक्खरिणी सिया बहुउदगा बहुसेया बहु-
पुक्खला लट्टा पुण्डरिकिणी पासादिया दरिसणिया अभिरूवा पडिस्वा। तीसे ण
पुक्सरिणीए तत्थ तत्थ देसे देसे तहिं तहिं बहवे पउमवरपोण्डरीया बुइया, अणु-
पुवुट्टिया ऊसिया रुइला वण्णमन्ता गन्धमन्ता रसमन्ता फासमन्ता पासादिया
दरिसणिया अभिरुवा पडिरूवा । तीसे ण पुक्खरिणीए बहुमज्झदेसभाए एगे मह
पउमवरपोण्डरीए बुइए, अणुपुबुट्ठिए ऊसिए रुइले वण्णमन्ते गन्धमन्ते रसमन्ते
फाममन्ते पासादीए जाव पडितवे। सव्वावन्ति च ण तीसे पुक्सरिणीए तत्य तत्थ
देसे देसे तहिं तहि वहवे पउमवरपोण्डरीया वुइया अणुपुन्बुढिया ऊसिया रुइला
जाव पडिरूवा । सव्वावन्ति च ण तीसे ण पुक्खरिणीए वहुमज्झदेसभाए एगे मह
पउमवरपोण्डरीए बुइए अणुपुबुट्ठिए जाव पडिरूवे ॥ १ ॥ ६३६ ॥ अह पुरिसे
पुरित्थिमाओ दिसाओ आगम्म त पुक्खरिणिं तीसे पुक्खरिणीए तीरे ठिचा पासइ
त मह एग पउमवरपोण्डरीय अणुपुन्बुट्ठिय ऊसिय जाव पडिरूव । तए ण से पुरिसे
एव वयासी-अहमसि पुरिसे सेयन्ने कुसले पण्डिए वियत्ते मेहावी अवाले मग्गडे
मग्गविऊ मग्गस्स गइपरिकमन्नू । अहमेय पउमवरपोण्डरीय उन्निक्खिस्सामि त्ति
कट्टु इइ बुया से पुरिसे अभिकमेइ त पुक्खरिणिं । जावं जाव च ण अभिकमेइ
ताव ताव च ण महन्ते उदए महन्ते सेए पहीणे तीर अपत्ते पउमवरपोण्डरीय
नो हव्वाए नो पाराए अन्तरा पुक्खरिणीए सेयसि निसण्णे पढमे पुरिसजाए
॥ २ ॥ ६३७ ॥ अहावरे दोचे पुरिसजाए। अह पुरिसे दक्खिणाओ दिसाओ,
आगम्म त पुक्खरािण तीसे पुक्खरिणीए तीरे ठिचा पासइ त महं एग पउमवर-
पोण्डरीय अणुपुवुट्ठिय पासादीय जाव पडिस्ख । त च एत्य एगं पुरिसजाय पासइ
पहीणतीरं अपत्तपउमवरपोण्डरीय नो हव्वाए नो पाराए अन्तरा पुक्सरिणीए सेयंसि
निसण्ण । तए ण से पुरिसे त पुरिस एव वयासी-अहो णं इमे पुरिसे अखेयन्ने
अकुसले अपण्डिए अवियत्ते अमेहावी वाले नो मग्गट्ट नो मग्गविऊ नो मग्गस्स
गइपरिकमन्नू ज ण एस पुरिसे । अहमसि सेयने कुसले जाव पउमवरपोण्डरीय
उन्निक्सिस्सामि । नो य सलु एय पउमवरपोण्डरीयं एव उनिक्सेयव्व जहा ण एस
पुरिसे मने। अहमसि पुरिसे सेयन्ने कुसले पण्डिए वियत्ते मेहावी अवाले मग्गटे
मग्गविऊ मग्गस्स गइपरिकमनू , अहमेय पउमवरपोण्डरीयं उन्निक्खिस्सामि त्ति कट्ठ
इइ बुया से पुरिसे अभिक्कमे त पुक्सरिणिं । जाव जाव च ण अभिकमेइ ताव ताव
चण महन्ते उदए महन्ते सेए पहीणे तीर अपत्ते पउमवरपोण्डरीय नो हव्वाए
नो पाराए अन्तरा पुक्सरिणीए सेयसि निसण्णे दोचे पुरिसजाए ॥३॥६३८ ॥

२ सु० म० १] सुत्तागमे अहावरे तच्चे पुरिसजाए । अह पुरिसे पञ्चत्यिमाओ दिसाओ आगम्म त पुक्खरिणिं तीसे पुक्खरिणीए तीरे ठिच्चा पासइ त एग महं पउमवरपोण्डरीय अणुपुबुट्ठिय जाव पडिरूव । ते तत्य दोणि पुरिसजाए पासइ पहीणे तीर अपत्ते परमवरपोण्ड- रीयं नो हव्वाए नो पाराए जाव सेयसि निसण्णे । तए ण से पुरिसे एव वयासी- अहो ण इमे पुरिसा अखेयन्ना अकुसला अपण्डिया अवियत्ता अमेहावी याला नो मग्गट्ठा नो मग्गविऊ नो मग्गस्स गइपरिकमन्नू ज ण एए पुरिसा एव मने-अम्हे एवं पउमवरपोण्डरीयं उन्निक्खिस्सामो नो य सलु एय पउमवरपोण्डरीय एवं उन्निक्खेयव्व जहा णं एए पुरिसा मन्ने। अहमंसि पुरिसे खेयन्ने कुसले पण्डिए वियत्ते मेहावी अवाले मग्गढे मग्गविऊ मग्गस्स गइपरिक्कमन्नू अहमेय पउमवर- पोण्डरीय उन्निक्खिस्सामि त्ति कट्ठ इति वुचा से पुरिसे अभिक्मे तं पुक्खरिणिं । जावं जाव च ण अभिक्कमे ताव ताव च णं महन्ते उदए महन्ते सेए जाव अन्तरा पुक्खरिणीए सेयसि निसण्णे तच्चे पुरिसजाए ॥ ४॥ ६३९ ॥ अहावरे चउत्थे पुरिसजाए। अह पुरिसे उत्तराओ दिसाओ आगम्म त पुक्सरिणिं तीसे पुक्खरिणीए तीरे ठिच्चा पासइ त महं एग पउमवरपोण्डरीयं अणुपुबुट्ठिय जाव पडिरूव । ते तत्थ तिणि पुरिसजाए पासइ पहीणे तीर अपत्ते जाव सेयसि निसणे । तए णं से पुरिसे एवं क्यासी-अहो ण इमे पुरिसा अखेयन्ना जाव नो मग्गस्स गइपरिकमनू ज णं एए पुरिसा एव मन्ने-अम्हे एय पउमवरपोण्डरीय उन्निक्खिस्सामो नो य खलु एवं पउमवरपोण्डरीय एव उन्निक्खेयव्वं जहा ण एए पुरिसा मन्ने । अहमसि पुरिसे खेयने जाव मग्गस्स गइपरिकमनू, अहमेय पउमवरपोण्डरीय एवं उन्नि- क्खिस्सामि त्ति कटु इति वुच्चा से पुरिसे अभिक्कमे तं पुक्सरिणिं । जावं जाव च ण अभिक्कमे ताव ताव च ण महन्ते उदए महन्ते सेए जाव निसण्णे चउत्थे पुरिस- जाए ॥ ५॥ ६४० ॥ अह भिक्खू लहे तीरट्ठी खेयन्ने जाव गइपरिकमन्नू अन्नय- राओ दिसाओ वा अणुदिसाओ वा आगम्म त पुक्सरिणिं तीसे पुक्खरिणीए तीरे ठिचा पासइ त मह एग पउमवरपोण्डरीय जाव पडिस्व । ते तत्य चत्तारि पुरि- सजाए पासइ पहीणे तीर अपत्ते जाव पउमवरपोण्डरीय नो हव्वाए नो पाराए अन्तरा पुक्खरिणीए सेयंसि निसण्णे । तए ण से भिक्खू एव वयासी-अहो ण इमे पुरिसा अखेयना जाव नो मग्गस्स गइपरिकमन्नू ज एए पुरिसा एव मन्ने अम्हे एय पउमवरपोण्डरीय उन्निक्खिस्सामो, नो य खलु एय पउमवरपोण्डरीय एव उन्नि- क्खेयव्वं जहा णं एए पुरिसा मन्ने । अहमसि भिक्खू लहे तीरट्ठी खेयन्ने जाव गइ- परिकमन्नू अहमेय पउमवरपोण्डरीय उन्निक्खिस्सामि त्ति कट्ठ इतिं वुच्चा से भिक्खू

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. २ सु० म०१] सुत्तागमे (रायवण्णओ जहा ओववाइए) जाव पसतडिम्बडमर रज पसाहेमाणे विहरइ । तस्स णं रन्नो परिसा भवइ उग्गा उग्गपुत्ता भोगा भोगपुत्ता इक्सागाइ इक्खागाइ- पुत्ता नाया नायपुत्ता कोरवा कोरव्वपुत्ता भट्टा भट्टपुत्ता माहणा माहणपुत्ता लेच्छइ लेच्छइपुत्ता पसत्यारो पसत्यपुत्ता सेणावई सेणावइपुत्ता । तेसिं च ण एगइए सड्डी भवइ काम त समणा चा माहणा वा सपहारिंसु गमणाए । तत्य अन्नयरेणं धम्मेण पन्नत्तारो वय इमेगं धम्मेण पनवइस्सामो से एवमायाणह भयतारो जहा मए एस धम्मे सुयक्साए सुपनत्ते भवइ । त जहा-उड पायतला अहे केसग्गमत्थया तिरिय तयपरियते जीवे एस आयापज्जवे कसिणे एस जीवे जीवइ, एस मए नो जीवइ, सरीरे धरमाणे धरइ विणकृम्मि य नो धरइ । एय त जीविय भवइ, आदहणाए परेहि निजइ, अगणिझामिए सरीरे कवोयवण्णाणि अट्ठीणि भवंति, आसदीपञ्चमा पुरिसा गाम पञ्चागच्छति, एव असते असविजमाणे । जेसि तं असते असविजमाणे तेसिं त सुयक्खाय भवइ-अन्नो भवइ जीवो अन्नं सरीर, तम्हा ते एवं नो विपडिवे- देति-अयमाउसो आया दीहे त्ति वा हस्से त्ति वा परिमण्डले त्ति वा वट्टे त्ति वा तसे ति वा चउरसे त्ति वा आयए ति वा छलंसिए त्ति वा अट्ठसे त्ति वा किण्हे त्ति वा नीले त्ति वा लोहियहालिद्दे त्ति वा सुकिल्ले त्ति वा सुन्भिगधे त्ति वा दुन्भिगंधे त्ति वा तित्ते त्ति वा कडए त्ति वा कसाए त्ति वा अम्बिले त्ति वा महुरे त्ति वा कक्खडे त्ति वा मउए त्ति वा गुरुए ति वा लहुए त्ति वा सीए त्ति वा उसिणे त्ति वा निद्धे त्ति वा लुक्खे त्ति वा । एव असते असविजमाणे । जेसि तं सुयक्साय भवइ-अन्नो जीवो अन्न सरीर, तम्हा ते नो एवं उपलब्भति । से जहानामए-केइ पुरिसे कोसीओ असिं अभिनिव्वट्टित्ता ण उवदसेजा अयमाउसो असी अय कोसी, एवमेव नत्यि के पुरिसे अभिनिव्वहिता ण उवदसेत्तारो अयमाउसो आया इयं सरीर । से जहानामए केइ पुरिसे मुलाओ इसिय अभिनिव्वट्टित्ता ण उवदंसेजा अयमाउसो मुझे इय इसियं, एवमेव नत्यि केइ पुरिसे उवदंसेत्तारो अयमाउसो आया इय सरीर । से जहानामए-केइ पुरिसे मसाओ अहिं अभिनिव्वहिता णं उवदसेज्जा अयमाउसो मसे अय अट्ठी, एवमेव नत्यि केइ पुरिसे उवदसेत्तारो अयमाउसो आया इयं सरीरं । से जहानामए-केद पुरिसे करयलाओ आमलकं अभिनिव्वट्टित्ता ण उवदं- सेज्जा अयमाउसो करयले अयं आमलए, एवमेव नत्यि केइ पुरिसे उवदसेत्तारो अय- माउसो आया इय सरीर । से जहानामए-केइ पुरिसे दहीओ नवणीयं अभिनिव्व- हिता ण उवदंसेजा अयमाउसो नवणीयं अय तु दही, एवमेव नत्यि केइ पुरिसे जाव सरीरं । से जहानामए-केइ पुरिसे तिलेहितो तेल अभिनिव्वट्टित्ता ण उवदंसेजा १३८ सुत्तागमे [सूयगई अयमाउमो तेर अयं पिण्णाए, एवमेव जाप सरीरं । से जहानामए-केइ पुरिसे इओ सोयरस अभिनिव्वहिता ण उपदंसेचा अयमाउसो गोयरसे अय छोए, एवमेव जाय सरीर । से जहानामए-फेट पुरिसे गरणीओ अग्गि अभिनिव्वहिता ण उवदसेजा अयमासो अरणी अय अग्गी, एवमेव जाव सरीरं । एव असते असविजमाणे । जेमि त मुयफ्साय भवइ त जहा-अगे जीवो अन्न सरीरं । तम्हा ते मिच्छा ॥ से हता त हणह सगह छगह टहह पयह आलम्पह विलम्पह सह- सारेह विपरामुमह, एयावया जीवे नत्यि परलोए। ते नो एव विप्पनिवेदेति, त जहा-किरिया इवा असिरिया इ पा उपडे इ वा दुकढे इ वा काणे इ या पावए इ वा साहु इ वा अगाहुइ वा सिद्धी इ या असिसी इ वा निरए इ वा अगिरए इ वा । एव ते विम्यम्वेहि कम्मसमारभेहिं विरुवल्याइ कामभोगाइ समारभन्ति भोयगाए । एवं एगे पागभिया निराम्म मामग धम्म पनवेति । त महमागा त पत्तियमाणा त रोएमाणा साहु मुस्साए समणे त्ति वा माहणे त्ति या काम रालु आउसो तुम पूययामि, त जहा-अमणेण वा पाणेण वा साइमेण वा साइमेण वा यत्येण वा पढिग्गहेण वा कम्बलेण या पायपुग्छणेण पा । तत्यो पूयणाए समा- उडिंतु तत्थेगे पूयगाए निकाइनु । पुव्यमेव तेनि नाय भवइ-गमणा भविस्मामो अणगारा अकिंचणा अपुत्ता अपम् परदत्तभोइ भिक्गो पाव कम्म नो करि- स्सामो समुहाए। ते अप्पणा अप्पडिविरया भवति, मयमाइयति ओ वि आइयावति अन पि आययत समगुजागति एवमेव ते इत्यिकामभोगेहि मुखिया शिदा गडिया अझोववता लद्धा रागदोसवमा । ते नो अप्पाण समुच्छेदेति ते नो पर समुच्छे. देति ते नो भनाइ पाणाइ भूयाइ जीवाइ सत्ताइ समुच्छेति, पहीणा पुव्वसजोग आयरिय मग्ग असपत्ता इति ते नो हव्याए नो पाराए अतरा कामभोगेनु विसण्या। इति पढमे पुरिमजाए तजीवतच्चरीरए ति आहिए ॥९॥ ६४४ ॥ अहावरे दोघे पुरिसजाए परमहन्भूइए त्ति आहिजड। इह सलु पाईण या ६ सन्तेगडया मणुस्सा भवन्ति अणुपुन्वेण लोय उवयना, त जहा-आरिया वो अणारिया वेगे एप जाव दुख्या वेगे। तेमि च णं मह एगे राया भवइ महया एस चेव निरवसेस जाव सेणावडपुत्ता । तेमि च ण एगइए सट्टी भवति पाम त ममणा य मारणा य पहारिंसु गमगाए । तत्य अन्नयरेगं धम्मेग पत्नत्तारोवय इमेग धम्मेगं पनवइस्सामो से एवमायाणह भयन्तारो जहा मए एम धम्मे नुअक्खाए मुपनत्ते भवद । इह रालु पचमहन्भूया जेहिं नो निजइ फिरिय त्ति वा अफिरिय त्ति वा तुपढे त्ति वा दुधडे त्ति वा काणे ति वा पावए त्ति वा साहु त्ति वा भसाहु त्ति २ सु०म०१] सुत्तागमे । वा सिद्धि त्ति वाअसिद्धि त्ति वा निरए त्ति वा अनिरए त्ति वा अवि अन्तसो तणमायमवि ॥ त च पिहुद्देसेणं पुढोभूयसमवाय जाणेज्जा । तं जहा पुढवी एगे महन्भूए, आऊ दुच्चे महब्भूए, तेऊ तच्चे महन्भूए, वाऊ चउत्थे महन्भूए, आगासे पञ्चमे महन्भूए। इच्चेए पञ्च महन्भूया अनिम्मिया अनिम्माविया अकडा नो कित्तिमा नो कडगा अणाइया अणिहणा अवञ्झा अपुरोहिया सतता सासया आयछट्ठा। पुण एगे एवमाहु-सओ नत्थि विणासो असओ नत्थि सभवो। एयावया व जीवकाए एयावया व अस्थिकाए एयावया व सव्वलोए, एय मुह लोगस्स करण- याए, अवि अन्तसो तणमायमवि । से किण किणावेमाणे हण घायमाणे पयं पया- वेमाणे अवि अन्तसो पुरिसमवि कीणित्ता घायइत्ता एत्य पि जाणाहि नत्थित्थ दोसो। ते नो एवं विप्पडिवेदेति । त जहा-किरिया इ वा जाव अनिरए इ वा । एव ते विरुवरुवेहि कम्मसमारभेहिं विरूवरुवाइ कामभोगाई समारभति भोयणाए । एव- मेव ते अणारिया विप्पडिवन्ना त सद्दहमाणा त पत्तियमाणा जाव ते नो हव्वाए नो पाराए अतरा कामभोगेसु विसण्णा । दोचे पुरिसजाए पञ्चमहन्भूइए त्ति आहिए ॥ १० ॥ ६४५ ॥ अहावरे तचे पुरिसजाए ईसरकारणिए त्ति आहिज्जइ । इह खलु पाईणं वा ६ सतेगइया मणुस्सा भवति अणुपुत्वेणं लोय उववन्ना । त जहा-आरिया वेगे जाव तेसिं च ण महते एगे राया भवइ जाव सेणावइपुत्ता । तेसिं च ण एगइए सड्डी भवइ, काम त समणा य माहणा य पहारिंसु गमणाए जाव जहा मए एस धम्मे सुयक्खाए सुपन्नत्ते भवइ । इह खलु धम्मा पुरिसादिया पुरिसोत्तरिया पुरिसप्पणीया पुरिससभूया पुरिसपज्जोइया पुरिसमभिसमन्नागया पुरिसीव अभिभूय चिठ्ठति । से जहानामए-गण्डे सिया सरीरे जाए सरीरे सवुड्ढे सरीरे अभिसमन्नागए सरीरमेव अभिभूय चिट्ठइ, एवमेव धम्मा पुरिसादिया जाव पुरिसमेव अभिभूय चिठ्ठति । से जहानामए-अरई सिया सरीरे जाया सरीरे सवुढा सरीरे अभिसमन्नागया सरीरमेव अभिभूय चिठ्ठइ, एवमेव वम्मा वि पुरि- सादिया जाव पुरिसमेव अभिभूय चिट्ठति से जहानामए-वम्मिए सिया पुढविजाए पुढविसबुढे पुढविअभिसमन्नागए पुढविमेव अभिभूय चिट्टइ, एवमेव धम्मा वि पुरिसादिया जाव पुरिसमेव अभिभूय चिठ्ठति, से जहानामए-रुक्खे सिया पुढविजाए पुढविसबुड्ढे पुढविअभिसमन्नागए पुढविमेव अभिभूय चिठ्ठइ, एवमेव धम्मा वि पुरिसादिया जाव पुरिसमेव अभिभूय चिठ्ठति । से जहानामए-पुक्खरिणी सिया पुढविजाया जाव पुढविमेव अभिभूय चिट्ठइ, एवमेव धम्मा वि पुरिसादिया जाव पुरिसमेव अभिभूय चिठ्ठति । से जहानामए-उदगपुक्खले सिया उदगजाए जाव

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२ सु० म०]] सुत्तागमे १४१ पुरिसजाए नियइवाइए त्ति आहिए ॥ इच्चेए चत्तारि पुरिसजाया नाणापन्ना नाना- छंदा नाणासीला नाणादिट्ठी नाणारुई नाणारम्भा नाणाअज्झवसाणसंजुत्ता पहीण- पुव्वसजोगा आरिय मग्ग असपत्ता इति ते नो हव्वाए नो पाराए अतरा काम- भोगेसु विसण्णा ॥ १२ ॥ ६४७ ॥ से बेमि पाईण वा ६ सन्तेगइया मणुस्सा भवन्ति । त जहा-आरिया वेगे अणारिया वेगे उच्चागोया वेगेनीयागोया वेगे कायमन्ता वेगे हस्समन्ता वेगे सुवण्णा वेगे दुवण्णा वेगे सुरूवा वेगे दुरूवा वेगे। तेसिं च ण खेत्तवत्थूणि परिग्गहियाणि भवति, तं जहा अप्पयरो वा भुजयरो वा। तेसिं च ण जणजाणवयाइ परिग्गहियाइ भवन्ति, तं जहा अप्पयरा भुजयरा वा। तहप्पगारेहिं कुलेहिं आगम्म अभिभूय एगे भिक्खायरियाए समुट्ठिया। सओ वा वि एगे नायओ (अणायओ) य उवगरण च विप्पजहाय भिक्खायरियाए समुट्ठिया। असओ वा वि एगे नायओ (अणायओ) य उवगरण च विप्पजहाय भिक्खाय- रियाए समुट्ठिया । [जे ते सओ वा असओ वा नायओ य अणायओ य उवगरण च विप्पजहाय भिक्सायरियाए समुट्ठिया] पुन्वमेव तेहिं नाय भवइ । त जहा- इह खलु पुरिसे अन्नमन ममट्टाए एव विप्पडिवेदेति । तं जहा-खेत मे वत्थू मे हिरण्ण मे सुवण्ण मे धण मे धन्न मे कस मे दूस मे विपुलधणकणगरयणमणिमो. त्तियसखसिलप्पवालरत्तरयणसतसारसावएय मे । सद्दा मे रूवा मे गंधा मे रसा मे फासा मे । एए खलु मे कामभोगा अहमवि एएसिं । से मेहावी पुत्वामेव अप्पणो एव समभिजाणेजा । त जहा-इह खलु मम अन्नयरे दुक्खे रोगायके समुप्पजेजा अणिढे अकते अप्पिए असुभे अमणुन्ने अमणामे दुक्खे नो सुहे । से हता भयतारो कामभोगाइ मम अन्नयर दुक्सं रोगायक परियाइयह अणि? अकतं अप्पिय असुम अमणुन्न अमणाम दुक्ख नो सुह । ता अह दुक्खामि वा सोयामि वा जूरामि वा तिप्पामि वा पीडामि वा परितप्पामि वा इमाओ मे अन्नयराओ दुक्खाओ रोगायकाओ पडिमोयह अणिट्ठाओ अकताओ अप्पियाओ असुभाओ अमणुनाओ अमणामाओ दुक्खाओ नो सुहाओ । एवमेव नो लद्धपुन्व भवइ । इह खलु कामभोगा नो ताणाए वा नो सरणाए वा । पुरिसे वा एगया पुब्बि कामभोगे विप्पजहइ, कामभोगा वा एगया पुन्धि पुरिस विप्पजहन्ति । अन्ने खलु कामभोगा अन्नो अहमसि । से किमंग पुण वय अन्नमन्नेहिं काममोगेहिं मुच्छामो । इति सखाए णं वय च कामभोगेहिं विप्पजहिस्सामो। से मेहावी जाणेजा बहिरङ्गमेय इणमेव उवणीययराग । त जहा- माया मे पिया मे भाया मे भगिणी मे भज्जा मे पुत्ता मे धूया मे पेसा मे नत्ता मे सुण्हा मे सुहा मे पिया मे सहा मे सयणसगथसयुया मे । एए खलु मम नायओ १४० सुत्तागमे [सूयगा अहमपि एएगि । एक से मेहावी पुत्वानेव अप्पगा एवं समभिजाणेजा। इह मल मन मनपरे दुस्पे रोगारके समुप्पजेना अगिटे जाव दुक्से नो नुहे। चे हता भयंतारो नायगे इमं मम अनयर दुस्सं रोगायक परियाइयह अगिट्ट जाव नो मुह । ता अह दुम्मामि वा मोयामि वा जाव परितप्पामि वा, इमाओ में अनय- राओ दुम्साभी गेगायकाओ परिमोएह अगिटामो जाव नो महाओ, एवमेव नो उदपुष्यं भवः । वसि वा नि भयतारार्ग मम नाययागं अन्नयरे दुक्ने रोगायके ममुप्पजेना अगिटे जार नो मुटे, से हता अहमेएगि भयंताराण नायगाण इन मनयर दुक्त रोगायकं परियाइयामि अगिट्ट जाव नो नहे, मा मे दुस्सतु वा जाप मा मे परितप्पनु या, इमामओ ण अनयराओ दुस्सामओ रोगायकाओ परिमो- एमि अनिहाओ जाय नो मुहाओ, एवमेव नो लदपुव्वं भवः । अनस्स दुस्त मनो न परियायइ अमेण 1 अनो नो पडिनवेदेव पत्तेव जायइ पत्तय मरद पत्तेय चवह पत्तेय उववजह पत्तेय संज्ञा पत्तय सजा पत्तेय मन्ना एम विन नेपणा। इगलु नादसजोगा नो ताणाए वा नो मरणाए वा । पुरिसे वा एगया पुब्धि नाइ- सजोगे विप्पजहइ, नाइसजागा वा एगया पुदि पुरिस विप्पजहन्ति, अने पलु नाइसजोगा अनो अहमति, से किमग पुण वय अनमनेहिं नाइसजोगेहिं मुच्छामो, इति सराए ण वय नादसजोगं विप्पजहिस्सामो । से मेहावी जाणेजा पहिरानेयं, दणमेव उवणीययराग । त जहा-हत्या में पाया मे याहा मे उरू ने उयर मे वीस मेसील मे आऊ मे बल मे वणो मे तया में छाया मे मोयं मे चक्र में पाग मे जिम्मा मे फामा मे ममाइजइ, वयाउ पडिजूरइ । त जहा आउनो बलामो वगाओ तयाओ छायामो सोयाओ जाय फामाओ । मुसपिमो रुपी विसधीमवइ, वलियतरगे गाए भवइ, किण्हा फेमा पलिया भवन्ति । तं जहाज पि य इम मरीरग उरालं आहारोवश्य एय पि य अणुपुत्वेण विप्पजहियच्च भविस्सह। एक मराए से भिस्व भिक्सायरियाए ममुहिए दुहमो लोग जाणेजा, त जहा जीवा चेव अजीवा चेर, तमा चेर थावरा चेव ॥ १३ ॥ ६४८ ॥ इह सल गारत्या भारम्मा मपरिग्गहा, सतेगडया ममणा मागा वि नारम्भा सपरिरगहा, जे इमे तसा थावरा पाणा ते मय ममारभन्ति अनेण वि ममारम्भावति अन पि ममारमत समणुजाणन्ति । इह सलु गारत्या मारम्भा सपरिग्गहा, सतेगइया ममणा माहणा वि मारम्भा सपरिग्गहा, जे इमे कामभोगा सचित्ता वा अचिता चा ते सयं परिगिम्हन्ति अनेण वि परिगण्हावेन्ति अज पि परिनिहतं समय- जागति । इह सलु गारस्या सारम्भा सपरिग्गहा, सतेगइया समगा माहणा कि २ सु० भ० १] सुत्तागमे १४३ सारम्भा सपरिग्गहा, अहं सलु अणारम्भे अपरिग्गहे, जे खलु गारत्या सारम्भा सपरिग्गहा, सतेगइया समणा माहणा वि सारम्भा सपरिग्गहा, एएसिं चेव निस्साए बम्भचेरवास वसिस्सामो। कस्स ण तं हेउ ? जहा पुव्व तहा अवर जहा अवर तहा पुन्व, अजू एए अणुवरया अणुवट्ठिया पुणरवि तारिसगा चेव । जे खलु गारत्था सारम्भा सपरिग्गहा, सतेगइया समणा माहणा वि सारम्भा सपरिग्गहा, दुहओ पावाइ कुव्वति इति सखाए दोहि वि अतेहिं अदिस्समाणो इति भिक्खू रीएजा। से बेमि पाईण वा ६ जावं एव से परिनायकम्मे, एव से ववेयकम्मे, एवं से विअतकारए भवइ त्ति-मक्खाय ॥ १४ ॥ ६४९ ॥ तत्य खलु भगवया छजीवनिकायहेऊ पन्नत्ता । त जहा-पुढवीकाए जाव तसकाए । से जहानामए-मम असाय दण्डेण वा मुट्ठीण वा लेलूण वा कवालेण वा आउट्टिजमाणस्स वा हम्ममाणस्स वा तजिजमाणस्स वा ताडिजमा- णस्स वा परियाविजमाणस्स वा किलामिजमाणस्स वा उद्दविज्जमाणस्स वा जाव लोमुक्खणणमायमवि हिंसाकारग दुक्ख भय पडिसवेदेमि, इच्छेव जाण सव्वे जीवा सव्वे भूया सव्वे पाणा सव्वे सत्ता दण्डेण वा जाव कवालेण वा आउहिजमाणा वा हम्ममाणा वा तज्जिजमाणा वा ताडिजमाणा वा परियाविजमाणा वा किला- मिजमाणा वा उद्दविज्जमाणा वा जाव लोमुक्सणणमायमवि हिंसाकारग दुक्स भय पडिसवेदेति । एवं नचा सव्वे पाणा जाव सत्ता न हतन्वा न अजावेयन्वा न परिपेयव्वा न परितावेयव्वा न उद्दवेयन्वा । से बेमि जे य अईया जे य पडुप्पन्ना जे य आगमिस्सा अरिहता भगवता सव्वे ते एवमाइक्खंति एव भासति एवं पन्नति एव परूवेति सव्वे पाणा जाव सत्ता न हतव्वा न परिघेयव्वा न अजा- वेयव्वा न परितावेयव्वा न उद्दवेयव्वा । एस धम्मे धुवे नीइए सासए समिच्च लोग खेयन्नेहिं पवेइए । एव से भिक्खू विरए पाणाइवायाओ जाव विरए परिग्गहाओ नो दंतपक्खालणेण दते पक्खालेजा नो अजण नो वमण नो धूवणे नो तं परिआवि- एना ॥ से भिक्खू अकिरिए अल्सए अकोहे अमाणे अमाए अलोहे उवसते परि- निव्वुडे नो आसस पुरओ करेजा इमेण मे दिढेण वा सुएण वा मएण वा विनाएण वा इमेण वा सुचरियतवनियमवम्भचेरवासेण इमेण वा जायामायावृत्तिएण धम्मेण इओ चुए पेच्चा देवे सिया कामभोगाण वसवत्ती सिद्ध वा अदुक्खमसुभे एत्य वि सिया एत्य वि नो सिया। से भिक्यू सद्देहिं अमुच्छिए रूवेहिं अमुच्छिए गधेहि अमुच्छिए रसेहिं अमुच्छिए फासेहि अमुच्छिए विरए कोहाओ माणाओ मायाओ लोभाओ पेज्जाओ दोसाओ कलहाओ अब्भक्खाणाओ पेसुनाओ परपरिवायाओ १४४ सुत्नागमे [स्यगई अरइरईओ मायामोमामओ मिच्छादमणमाओ इति से महओ आयाणामओ उवसते वहिए पडिविरए से मिक्स् । जे इमे तमयावरा पाणा भपति ते नो सय ममा- रम्भइ नो पहिं ममारम्भावे ओ समारम्भते नि न ममणुजाणड इति से महओ आयाणाओ उपसते उपढिए पडिविरए से मिक्स् जे इमे रामभोगा सचित्ता वा अचित्ता वा ते णो सय परिगिण्हति णो अपणेण परिगिण्हाति अन परिगिरहंतपि न समणुजागति इति से महओ आयाणाओ उवसते उमहिए पडिनिरओ मे भिरम् । जपि य इम सपराइय कम्म किजइ, नो त सय करेड नो अन्नाणं कारवेइ अन्न पि करत न ममणुजागइ, इति से महओ आयाणाओ उवसते उपढिए पडिविरए। से भिनव जाणेजा अमणं वा ४ अस्मि पडियाए एग साहम्मिय समुहिम पाणाइ भूयाइ जीवाई मत्ताइ समारम्भ समुद्दिस्म कीय पामिच अटिज अनिमट्ठ अभिहट आहुद्देसिय त चेडय सिया त नो मय भुगइ नो अग भुजावेइ अन्न पि भुमत न समणुजाणइ, इति से महमओ आयाणाओ उपसते उवट्टिए पडिविरए से मिक्स् अह पुण एव जाणेजा त विजइ तेसिं परफने । (जस्मट्टा ते वेइय सिया तजहा अप्पगो पुत्ताइणहाए जाव आएसाए पुटो पहेणाए मामासाए पायरामाए सनिहिम- निचओ किन्नइ इह एएमि माणवाण भोयगाए) तत्य भिस्व परफड परनिट्ठियमु- म्गमुप्पायगेमणामृद्ध सत्याईय सत्यपरिणामियं अविहितिय एसिय वेसिय सामुदापियं पत्तमसण कारणटा पमागजुत्त अस्त्रोपावणलेवणभूय सजमजायामायावत्तियं रिलमिव पगभूएण अप्पाणेग आहार आहारेजा अन्न अन्नाले पाग पाणझाले वत्य वत्यमले टेग टेगकाले सयण सयणकाले। से भिस्य मायने अजयर दिस अणुदिस वा पडिवने धम्म आइक्ये निभए कि उवट्टिएमु वा अणुवट्टिएन वा मुस्सूसमाणेसु पवेयए, सतिविरइ उवसन निव्वारा सोयविय अबविय मद्दविय लापविय अणइवाइय सव्वेसिं पागाण सव्वेनि भूयाण जाव सत्ताण अणुवाइ किए धम्म । से भिक्खू धम्म हिमाणे नो अनस्स हेउ धम्ममाइक्सेजा, नो पाणस्स हेट धम्ममाइस्खेजा, नो वत्यस्ल हेउ धम्ममाइक्सेना, नो टेगस्म हेउ धम्म- माइक्रोजा, नो सयमस्म हेड धम्ममाइक्सेना, नो असि वित्वस्वाग कामभो. गाग हेउ धम्ममाइस्सेजा, अगिलाए धम्ममाइक्जा, ननत्य कम्मनिजरहाए धम्ममाइक्रोजा। इह सलु तस्स भिक्तुस्स अतिए धम्म सोचा निसम्म उहा- रोग उट्ठाय वीरा अस्सि धम्मे समुढ़िया । जे तस्स मिक्स्न अतिए धम्म सोचा निसम्म सम्म उहाणेग उद्याय वीरा अस्सि धम्मे समुट्टिया ते एवं सव्वोवगया ते एव सव्योवरया ते एव सव्योवसता ते एव सव्वत्ताए परिणिन्बुढे त्ति बेमि । एवं २ सु०म०२] सुत्तागमे १४५ से भिक्खू धम्मट्ठी धम्मविऊ नियागपडिवन्ने से जहेय बुइय अदुवा पत्ते पउमवर- पोण्डरीय अदुवा अपत्ते पउमवरपोण्डरीय, एव से भिक्खू परिन्नायकम्मे परिन्नाय सगे परिनायगेहवासे उवसते समिए सहिए सयाजए । सेय वयणिजे तं जहा- समणे त्ति वा माहणे त्ति वा खते त्ति वा दते त्ति वा गुत्ते त्ति वा मुत्ते त्ति वा इसि त्ति वा मुणि त्ति वा कइ त्ति वा विउ त्ति वा भिक्खु त्ति वा लहे त्ति वा तीरट्ठि त्ति वा चरणकरणपारविउ त्ति बेमि ॥ १५॥ ६५० ॥ पोण्डरियज्झयणं पढमं समत्तं ॥ वेगे सुरुवा किरियाठाणज्झयणे बिइये सुय मे आउस ! तेण भगवया एवमक्खाय । इह खलु किरियाठाणे नामज्झयणे पन्नत्ते, तस्स ण अयमढे। इह खलु सजूहेण दुवे ठाणे एवमाहिजति । त जहा । धम्मे चेव अधम्मे चेव उवसते चेव अणुवसते चेव । तत्थ पंजे से पढमस्स ठाणस्स अहम्मपक्खस्स विभङ्गे तस्स ण अयमढे पन्नत्ते । इह खलु पाईण वा ६ सतेगइया मणुस्सा भवति । त जहा-आरिया वेगे अणारिया वेगे उच्चागोया वेगे नीयागोया वेगे कायमता वेगे हस्समता वेगे सुवण्णा वेगे दुव्वण्णा वेगे दुरूवा वेगे। तेसिं च ण इम एयारुव दण्डसमादाणं सपेहाए । तं जहा-नेरइ- एसु वा तिरिक्खजोगिएसु वा मणुस्सेसु वा देवेसु वा जे यावन्ने तहप्पगारा पाणा विलू वेयण वेयति ॥ तेसिं पि य ण इमाइ तेरस किरियाठाणाइ भवतीतिमक्खाय । त जहा-अट्टादण्डे १, अणट्ठादण्डे २, हिसादण्डे ३, अकम्हादण्डे ४, दिडिविपरि- यासियादण्डे ५, मोसवत्तिए ६, अदिनादाणवत्तिए ७, अज्झत्थवत्तिए ८,माणवत्तिए ५, मित्तदोसवत्तिए १०, मायावत्तिए ११, लोभवत्तिए १२, इरियावहिए १३ ॥१॥६५१॥ पढमे दण्डसमादाणे अट्ठादण्डवत्तिए त्ति आहिज्जइ । से जहानामए-केइ पुरिसे आयहेउ वा नाइहेउ वा अगारहेउ वा परिवारहेउ वा मित्तहेउ वा नागहेउ वा भूयहेउ वा जक्खहेउ वा त दण्ड तसथावरेहिं पाणेहिं सयमेव निसिरइ अन्नेण वि निसिरावेइ अन्न पि निसिरत समणुयाणइ, एव खलु तस्स तप्पत्तिय सावन ति आहिजइ । पढमे दण्डसमादाणे अट्ठादण्डवत्तिए त्ति आहिए ॥ २॥ ६५२ ॥ अहावरे दोचे दण्डसमादाणे अणट्ठादण्डवत्तिए त्ति आहिंजइ । से जहानामए- केइ पुरिसे जे इमे तसा पाणा भवति ते नो अचाए नो अजिणाए नो मसाए नो सोणियाए एव हिययाए पित्ताए वसाए पिच्छाए पुच्छाए वालाए सिंगाए विसाणाए १० सुत्ता .

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२ सु० अ०२] सुत्तागमे १४७ सावजं आहिजइ । चउत्थे दण्डसमादाणे अकम्हादण्डवत्तिए आहिए ॥५॥६५५॥ - अहावरे पञ्चमे दण्डसमादाणे दिद्विविपरियासियादण्डवत्तिए त्ति आहिजइ । से जहानामए-केइ पुरिसे माईहि वा पिईहिं वा भाईहिं वा भगिणीहिं वा भजाहिं वा पुत्तेहिं वा धूयाहिं वा सुण्हाहि वा सद्धिं सवसमाणे मित्त अमित्तमेव मन्नमाणे मित्ते हयपुग्वे भवइ दिट्ठिविपरियासियादण्डे । से जहानामए-केइ पुरिसे गामघायसि वा नगरपायसि वा खेडघायसि कब्बडघायंसि मडबघायसि वा दोणमुहघायसि वा पट्टणघायसि वा आसमघायसि वा सनिवेसघायसि वा निग्गमघायसि वा रायहाणि- घायसि वा अतेण तेणमिति मन्नमाणे अतेणे हयपुव्वे भवइ दिट्ठिविपरियासियादण्डे । एव खलु तस्स तप्पत्तिय सावज ति आहिजइ । पञ्चमे दण्डसमादाणे दिट्ठिविपरि- यासियादण्डवत्तिए ति आहिए॥६॥६५६॥ अहावरे छठे किरियट्ठाणे मोसावत्तिए त्ति आहिजइ । से जहानामए केइ पुरिसे आयहेउ वा नाइहेउ वा अगारहेउ वा परिवारहेउ वा सयमेव मुस वयइ अण्णेण वि मुस वाएइ मुस वयन्त पि अन्न समणु- जाणइ, एव खलु तस्स तप्पत्तिय सावज ति आहिज्जइ । छठे किरियहाणे मोसावत्तिए त्तिमाहिए ॥७॥६५७॥ अहावरे सत्तमे किरियट्ठाणे अदिनादाणवत्तिए त्ति आहिज्जइ । से जहानामए-केइ पुरिसे आयहेउ वा जाव परिवारहेउ वा सयमेव अदिन्न आदियइ अन्नेग वि अदिन्नं आदियावेइ अदिन्न आदियन्त अन्न समणुजाणइ, एव खलु तस्स तप्पत्तिय सावज ति आहिजइ । सत्तमे किरियट्ठाणे अदिन्नादाणवत्तिए त्ति आहिए ॥८॥६५८॥ अहावरे अट्ठमे किरियट्ठाणे अज्झत्यवत्तिए त्ति आहिजइ । से जहानामए- केइ पुरिसे नत्यि ण केइ किचि विसवादेइ सयमेव हीणे दीणे दुढे दुम्मणे ओहयमण- सकप्पे चिन्तासोगसागरसपविढे करयलपल्हत्यमुहे अज्झागोवगए भूमिगयदिहिए झियाइ, तस्स ण अज्झत्यया आससइया चत्तारि ठाणा एवमाहिजन्ति । त जहा- कोहे माणे माया लोहे । अज्झत्यमेव कोहमाणमायालोहे । एव खलु तस्स तप्प- त्तिय सावज ति आहिजइ । अट्ठमे किरियट्ठाणे अज्झत्यवत्तिए त्ति आहिए॥९॥६५९॥ अहावरे नवमे किरियहाणे माणवत्तिए ति आहिजइ । से जहानामए-केइ पुरिसे जाइमएण वा कुलमएण वा वलमएण वा रूवमएण वा तवमएण वा सुयमएण वा लाभमएण वा इस्सरियमएण वा पन्नामएण वा अन्नयरेण वा मयट्ठाणेण मत्ते समाणे पर हीलेइ निन्देइ खिसइ गरहइ परिभवइ अवमन्नेइ, इत्तरिए अय, अहमसि पुण विसिट्ठजाइकुलबलाइगुगोववेए । एव अप्पाण समुकस्से, देहचुए कम्मविइए अवसे पयाइ । त जहा-गब्भाओ गब्भ ४ जम्माओ जम्म माराओ मार नरगाओ नरग चण्डे थद्धे चवले माणी यावि भवइ । एव खलु तस्स तप्पत्तिय सावज

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, २ सु० म०२] सुत्तागमे १४९ - अझोववना जाव वासाइं चउपञ्चमाइ छहसमाइ अप्पयरो वा भुजयरो वा भुजित्तु भोगभोगाइ कालमासे काल किचा अन्नयरेसु आसुरिएसु किन्विसिएसु ठाणेसु उव- वतारो भवन्ति । तओ विप्पमुच्चमाणे भुजो भुज्जो एलमूयत्ताए तमूयत्ताए जाइय- त्ताए पञ्चायन्ति । एव खलु तस्स तप्पत्तिय सावज ति आहिजइ । दुवालसमे किरियट्ठाणे लोभवत्तिए त्ति आहिए । इचयाइ दुवालस किरियट्ठाणाई दविएण समणेण वा माहणेण वा सम्म सुपरिजाणियब्वाइ भवन्ति ॥ १३ ॥ ६६३ ॥ अहावरे तेरसमे किरियट्ठाणे इरियावहिए त्ति आहिजइ । इह खलु अत्तत्ताए सवुडस्स अणगारस्स इरियासमियस्स भासासमियस्स एसणासमियस्स आयाणभण्ड- मत्तनिस्खेवणासमियस्स उच्चारपासवणखेलसिंघाणजल्लपारिट्ठावणियासमियस्स मणस- मियस्स वयसमियस्स कायसमियस्स मणगुत्तस्स वयगुत्तस्स कायगुत्तस्स गुत्तिन्दि- यस्स गुत्तबम्भयारिस्स आउत्त चिट्ठमाणस्स आउत्त निसीयमाणस्स आउत्त तुयट्टमा- पस्स आउत्तभुञ्जमाणस्स आउत्त गच्छमाणस्स आउत्त भासमाणस्स आउत्त वत्थं पडिग्गह कम्बल पायपुञ्छणं गिण्हमाणस्स वा निक्खिवमाणस्स वा जाव चक्खु- पम्हनिवायमवि अस्थि विमाया सुहुमा किरिया इरियावहिया नाम कन्नइ । सा पढ- मसमए वद्धा पुट्ठा विईयसमए वेइया तइयसमए निजिण्णा सा बद्धा पुठ्ठा उदीरिया वेइया निजिण्णा सेयकाले अकम्मे यावि भवइ । एव खलु तस्स तप्पत्तियं सावज्ज ति आहिजइ, तेरसमे किरियट्ठाणे इरियावहिए त्ति आहिज्जइ।से बेमि जे य अईया जे य पड्डप्पन्ना जे य आगमिस्सा अरिहन्ता भगवन्ता सव्वे ते एयाइ चेव तेरस किरियट्ठाणाइ भासिंसु वा भासेन्ति वा भासिस्सन्ति वा पन्नविंसु वा पनवेन्ति वा पनाविस्सन्ति वा, एव चेव तेरसम किरियद्वाण सेविंसु वा सेवन्ति वा सेविस्सन्ति वा ॥ १४ ॥ ६६४ ॥ अदुत्तर च ण पुरिसविजय विभङ्गमाइक्खिस्सामि । इह खलु नाणापनाण नाणाछन्दाण नाणासीलाण नाणादिट्ठीण नाणारईण नाणारम्भाण नाणाझवसाणसजुत्ताण नाणाविहपावसुयज्झयण एव भवइ । त जहा-भोम उप्पायं सुविण अन्तलिक्ख अङ्ग सर लक्खण वजण इत्यिलक्खण पुरिसलक्षण हयलक्खणं गयलक्षण गोणलक्खण मेण्डलक्खण कुक्कुडलक्खण तित्तिरलक्खण वगलक्षण लावयलक्खण चकलक्खण छत्तलक्खणं चम्मलक्खण दण्डलक्षण असिलक्षण मणिलक्खण कागिणिलक्सण सुभगाकर दुब्भगाकर गब्भाकर मोहणकर आहब्वणिं पागसासणि दव्वहोम खत्तियविज चन्दचरिय सूरचरियं सुकचारियं वहस्सइन्चरिय उकापाय दिसादाह मियचक्क वायसपरिमण्डल पसुवुटिं केसवुद्धिं मसवुद्धिं रुहिखुडिं वेयालिं अद्धवेयालि ओसोवर्णि तालुग्घाडणि सोवागिं सोवारिं दामिलिं कालिङ्गि घी डरतरगन्दीय ज्ञान मन्दिर, जयपुर सुत्तागमे [सूयगर । गोरि गन्धारिं ओवयणिं उप्पयणिं जम्भगिं थम्माणि लेसणिं आमयकरणिं विसह- करणिं पक्मणि अन्तद्धाणिं आयमिणिं, एवमाइयाओ विजाओ अन्नस्स हेड पउजन्ति पाणस्स हेउ पउअन्ति वत्यस्स हेउ पउसन्ति लेगस हेड पउञ्जन्ति सयणस्स हेर्नु पउअन्ति, अन्नेसि वा विरूवरूवाग फामभोगाण हे पउअंति। तिरिच्छ ते विज सेवन्ति, ते अगारिया विप्पडिवन्ना कालमासे काल किचा अन्न- यराइ आतुरियाइ किब्बिसयाइ ठागाइ उववत्तारो भवन्ति । तमो वि विप्पमुच्चमागा भुजो एलनूययाए तमअन्धयाए पञ्चायन्ति ॥ १५ ॥ ६६५ ॥से एगइओ आयहेज वा नायहेउ वा सयगहेउ वा अगारहेउ वा परिवारहेउ वा नायगं वा सहवासिय वा निस्साए अदुवा अणुगामिए १ अदुवा उवचरए २ अदुवा पडिपहिए ३ अदुवा सधिच्छेयए ४ अदुवा गण्ठिच्छेयए ५ अदुवा उरम्भिए ६ अदुवा सोरिए ७ अदुवा वागुरिए ८ अदुवा साउगिए ९ अदुवा मच्छिए १० अदुवा गोधायए ११ अदुवा गोवालए १२ अदुवा सोवगिए १३ अदुवा सोवणियतिए १४ । एगइओ आणुगामियभाव पडिसपाय तमेव अगुगामियाणुगामिय हन्ता छेत्ता भत्ता लुम्पइत्ता विलुम्पइत्ता उद्दवइत्ता आहार आहारेइ, इति से महया पावेहि कम्मेहि अत्ताग उवक्खाइत्ता भवइ । से एगइओ उवचरयभाव पडिसधाय तमेव उवचारय हन्ता छेता भेत्ता लुम्पइत्ता विलुम्पइत्ता उद्दवइत्ता आहार आहारेइ । इति से मया पावेहि कम्मेहिं अत्ताग उवक्साइत्ता भवइ । से एगइओ पाडिपहियभाव पडिसधाय तनेव पडिपहे ठिचा हन्ता छेता भेत्ता लुम्मइत्ता विलुम्पइत्ता उद्दवइत्ता आहार आहारेइ, इति से महया पावेहिं कम्मेहिं अत्ताण उवक्साइत्ता भवद । से एगइओ संधिच्छेदगभाव पडिसधाय तमेव सधिं छेत्ता भत्ता जाव इति से महया पावेहि कम्मेहिं अत्ताग उवक्साइत्ता भवइ । से एगइओ गण्ठिच्छेदगभाव पडिसधाय तमेव गण्ठि छेत्ता भेत्ता जाव इति से महया पावेहि कम्मेहिं अत्ताग उवासाइत्ता भवइ । से एगइओ उरम्भियमाव पडिसधाय उरभ वा अनयर वा तस पाग हन्ता जाव उपस्वाइत्ता भवइ । (एसो अभिलावो सव्वत्य) से एगइओ सोयरियभाव पडि. सधाय महिस वा अन्नयर वा तसं पाग हन्ता जाव उवरसाइत्ता भवइ । से एगइओ वापुरियमावं पडिसधाय मिय वा अन्नयर वा तस पाग हन्ता जाव उक्साइत्ता भवइ । से एगइओ सटणियभाव पडिसवाय सउणि वा अनयरं वा तस पाण हन्ता जाव उवक्साइत्ता भवइ । से एगइओ मच्छियभाव पडिसपाय मच्छ वा अनयर वा तस पाण हन्ता जाव उवासाइत्ता भयइ । से एगइओ गोपायभाव पडिसधाय तमेव गोग वा अनयर वा तस पाग हन्ता जाच उवरसाइत्ता भवइ । से एगइओ २ सु०म०२] सुत्तागमे गोवालभाव पडिसधाय तमेव गोवाल वा परिजविय परिजविय हन्ता जाव उव. क्खाइता भवइ । से एगइओ सोवणियभावं पडिसधाय तमेव सुणगं वा अन्नयर वा तस पाग हन्ता जाव उवक्खाइत्ता भवइ । से एगइओ सोवणियन्तियमाव पडिसधाय तमेव मणुस्स वा अन्नयर वा तस पाणं हन्ता जाव आहार आहारेइ इति से महया पावहिं कम्महिं अत्ताण उवक्खाइत्ता भवइ ॥ १६ ॥ ६६६ ॥ से एगइओ परिसामज्झाओ उद्वित्ता अहमेय हणामि त्ति कहु तित्तिर वा वट्टगं वा लावग वा कत्रोयग वा कविञ्जलं वा अन्नयर वा तस वा पाण हन्ता जाव उवक्खा- इत्ता भवइ । से एगइओ फेणइ आयाणेगं विरुद्ध समाणे अदुवा खलदाणेण अदुवा सुरायालएण गाहावईण वा गाहावइपुत्ताण वा सयमेव अगणिकाएण सस्साइ झामेइ अनेण वि अगणिकाएग सस्साई झामावेइ अगणिकाएणं सस्साइ झामन्तं पि अन्नं समणुजाणइ, इति से महया पावकम्मेहिं अत्ताण उवक्खाइत्ता भवइ । से एगइओ केणइ आयाणेग विरुद्ध समाणे अदुवा खलदाणेग अदुवा सुराथालएण गाहावईण वा गाहावइपुत्ताण वा उट्टाण वा गोणाण वा घोडगाण वा गद्दभाण वा सयमेव धूराओ कैप्पेइ भन्नेण वि कप्पावेइ कप्पन्तं पि अन्न समणुजाणइ, इति से महया जाव भवइ । से एगइओ केणइ आयाणेगं विरुद्ध समाणे अदुवा खलदाणेण अदुवा सुरा- थालएण गाहावईण वा गाहावइपुत्ताण वा उट्टसालाओ वा गोणसालाओ वा घोड- गसालाओ वा गद्दभसालाओ वा कण्टकवोंदियाए पडिपेहित्ता सयमेव अगणिकाएण झामेइ अन्नेण वि झामावेइ झामन्त पि अन्न समणुजाणइ, इति से महया जाव भवइ । से एगइओ केणइ आयाणेण विरुद्ध समाणे अदुवा खलदाणेण अदुवा सुरा- थालएगं गाहावईण वा गाहावइपुत्ताण वा कुण्डल वा मणिं वा मोत्तिय वा सयमेव अवहरइ अन्नेण वि अवहरावेइ अवहरन्त पि अन्न समणुजाणइ इति से महया जाव भवइ ॥ से एगइओ केगइ वि आयाणेग विरुद्ध समाणे अदुवा खलदाणेग अदुवा सुराथालएर्ण समणाण वा माहणाण वा छत्तग वा दण्डग वा भण्डग वा मत्तग वा ललुि वा भिसिग वा चेलग वा चिलिमिलिग वा चम्मय वा छेयणग वा चम्मको- सिय वा सयमेव अवहरइ जाव समणुजाणइ, इति से महया जाव उवक्खाइत्ता भवद ॥ से एगइओ नो वितिगिञ्छइ । त जहा-गाहावईग वा गाहावइपुत्ताण वा सयमेव अगणिकाएण ओसहीओ झामेइ जाव अन्न पि झामन्त समणुजाणइ, इति से महया जाव उवक्साइत्ता भवइ । से एगइओ नो वितिगिन्छइ, त जहा-गाहा- वईण वा गाहावइपुत्ताण वा उडाण वा गोणाण वा घोडगाण वा गद्दभाण वा सय- मेव घूराओ कप्पेइ अन्नेग वि कप्पावेइ अन्न पि कप्पन्त समणुजाणइ । से एगइओ १५२ गुत्तागमे सूयगई नो वितिगिम्मइ, त जहा-गाहावईग वा गाहावापुत्ताण वा रहमालाओ वा जाव गद्दभमालाओ वा कण्टकयोदिगाह पडिपेहित्ता सयमेव अगणिकाएग झामेड जाद समणुजागइ। से एगदओ नो नितिगिन्टर, त जहा गाहावडेग वा गाहावापुमाण वा जाव मोत्तियं वा मयमेव अवहरद जाव समगुजागइ । ने एगइओ नो वितिगि- ग्छ त जहा-समणाण वा मादणाण वा छत्तग वा दण्डग या जान चम्मछेनगग वा सयमेव अवहरद जाच ममणुनाणइ । इति से मया जाव उवक्साइता भवइ । से एगइओ ममण या माण वा दिस्मा नागाविटेहिं पावकम्मेहि अत्ताण उवामा- इना भवइ, अदुवा ण अच्छराए आफालित्ता भवर, अदुवा ण फल्स पदिना भवड, सालेण वि से अणुपविस्म अमण वा पाग वा जान नो दवावेत्ता भवइ, जे इमे भवन्ति वोणमन्ना भारयन्ता अलमगा वसलगा फिवगगा समणगा निउज्जमा वणगा पव्ययन्ति ते इणमेव जीविय धिजीविय सपडिवूहेन्ति, नाइ ते परलोगस्म अट्टाए किचि वि सिलीमन्ति, ते दुस्सन्ति ते मोयन्नि ते जरन्ति ते तिप्पन्नि ते पिन्ति ते परितप्पन्ति ते दुस्पणजूरणनोयगतिप्पगपिट्टणपरितिप्पणवहवन्धणपरि- किलेमाओ अप्पडिविरया भवन्ति । ते महया आरम्मेण ते महया ममारम्मेण ते महया आरम्भसमारम्मेण विरुवस्वेहिं पावकम्मक्रियेहिं उरालाइ माणुस्मगाइ भोगभोगाइ भुअित्तारो भवन्ति । त जहा-अन्न अनझाले पाण पाणाले वत्य पत्यकाले लेण टेगराले नयग सयणकाले सपुव्यावर चण व्हाए कण्ठेमालास्टे आविद्धमणिमुवणे कप्पियमालामटली पडियद्धसरीरे वग्धारियमोगिनुत्तगमग्दाम- कलावे अत्यवत्यपरिहिए चन्दणोक्सित्तगायमरीरे महदमहालियाए कूडागार- सालाए महइमहालयति सीहामणति इत्यीगुम्मसपरिखुढे मन्चराइएग जोइणा झियायमाणेण महयाहयनदृगीयवाइयतन्तीतलतालतुडियघणमुइगपडुप्पवाइयरवेग उरालाइ माणुस्सगाइ भोगभोगाइ भुजमाणे विहह । तस्म ण एगमवि आणवेमाणस्म जाव चत्तारि पर जणा अवुत्ता चेव अब्भुट्ठन्ति । भणह देवाणुप्पिया किं करेमो? कि आहरेमो कि उवणेमो ? किं आचिट्टामो? कि ने हिय इच्छिय? कि भे आसगस्म मयड ? तमेव पासित्ता अगारिया एव क्यन्ति- देवे खलु अय पुरिसे, देवसिणाए खलु अय पुरिसे, देवजीवगिजे खलु अब पुरिसे, अने वि य ण उवजीवन्ति । तमेव पासित्ता आरिया वयन्ति- अभिकन्तकूरकम्मे खलु अय पुरिसे अइधुए अइयायरक्वे दाहिणगामिए नेरइए कण्हपक्सिए आगमिस्माण दुहवोहियाए यावि भविस्सइ। इचेयस्स ठाणस्स उट्टिया वेगे अभिगिज्झन्ति अणुट्ठिया वेगे अभिगिज्यन्ति अभिझझाउरो अभि- २ सुम०२]] सुत्तागमे १५३ गिज्झन्ति । एस ठाणे अणारिए अकेवले अप्पडिपुण्णे अणेयाउए अससुद्धे असल्- गत्तणे असिद्धिमग्गे अमुत्तिमग्गे अनिव्वाणमग्गे अनिजाणमग्गे असव्वदुक्सपहीण- मग्गे एगन्तमिच्छे असाहु । एम खलु पदमस्स ठाणस्स अधम्मपक्खस्स विभङ्गे एवमाहिए ॥१७॥६६॥ अहावरे दोचस्स ठाणस्स धम्मपक्खस्स विभङ्गे एव- माहिजइ । इह खलु पाईग वा पडीण वा उदीणं वा दाहिण वा सन्तेगइया मणुस्सा भवन्ति। त जहा-आरिया वेगे अणारिया वेगे उच्चागोया वेगे नीयागोया वेगे काय- मन्ता वेगे हस्समन्ता वेगे सुवण्णा वेगे दुवण्णा वेगे सुरूवा वेगे दुरूवा वेगे । तेसिं चण खेत्तवत्यूणि परिग्गहियाइ भवन्ति, एसो आलावगो जहा पोण्डरीए तहा नेयव्वो, तेणेव अभिलावेण जाव सव्वोवसन्ता सव्वत्ताए परिनिव्वुडे त्ति बेमि ॥ एस ठाणे आरिए केवले जाव सव्वदुक्खप्पहीणमग्गे एगन्तसम्मे साहु । दोच्चस्स ठाणस्स चम्मपक्खस्स विभङ्गे एवमाहिए॥१८॥६६८॥ अहावरे तच्चस्स ठाणस्स मिस्सगस्स विभङ्गे एवमाहिजइ । जे इमे भवन्ति आरणिया आवसहिया गामणियन्तिया कण्हुईरहस्सिया जाव ते तओ विप्पमुच्चमाणा भुजो एलमूयाए तमूयत्ताए पञ्चा- यन्ति । एस ठाणे अगारिए अकेवले जाव असव्वदुक्खपहीणमग्गे एगन्तमिच्छे असाह । एस खलु तचस्स ठाणस्स मिस्सगस्स विभङ्गे एवमाहिए ॥ १९ ॥ ६६९ ॥ अहावरे पढमस्स ठाणस्स अधम्मपक्सस्स विभङ्गे एवमाहिज्जइ । इह खलु पाईण वा ४ सन्तेगइया मणुस्सा भवन्ति-गिहत्या महिच्छा महारम्भा महापरि- गहा अधम्मिया अधम्माणुया अधम्मिट्ठा अधम्मक्साई अधम्मपायजीविणो अध- म्मपलोई अधम्मपलज्जणा अधम्मसीलसमुदायारा अधम्मेण चेव वित्तिं कप्पेमाणा विहरन्ति । हण छिन्द भिन्द विगत्तगा लोहियपाणी चण्डा रुद्दा खुद्दा साहस्सिया उक्कुचणवञ्चणमायानियडिकूडकवडसाइसपओगबहुला दुस्सीला दुव्वया दुप्पडिया- णन्दा असाहू सव्वाओ पाणाइवायाओ अप्पडिविरया जावज्जीवाए जाव सव्वाओ परिग्गहाओ अप्पडिविरया जावजीवाए सव्वाओ कोहाओ जाव मिच्छादसणसल्लाओ अप्पडिविरया, सव्वाओ पहाणुम्मणवण्णगन्धविलेवणसद्दफरिसरसरुवगन्धमला- लकाराओ अप्पडिविरया जावज्जीवाए सव्वाओ सगडरहजाणजुग्गगिल्लिथिलिसिया- सदमाणियासयणासणजाणवाहणभोगभोयणपवित्थरविहीओ अप्पडिविरया जावज्जी- वाए सव्वाओ कयविक्कयमासद्धमासरूवगसववहाराओ अप्पडिविरया, जावज्जीवाए, सव्वाओ हिरण्णसुवण्णधणधन्नमणिमोत्तियसखसिलप्पवालाओ अप्पडिविरया जाव- जीवाए सव्वाओ कूडतुलकूडमाणाओ अप्पडिविरया जावजीवाए सव्वाओ आरम्भ- समारम्भाओ अप्पडिविरया जावज्जीवाए सव्वाओ करणकारावणाओ अप्पडिविरया

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। २ सु० म०२] सुत्तागमे काल किच्चा धरणियलमइवइत्ता अहे नरगयलपइट्टाणे भवइ ॥ २०॥६७० ॥ ते ण नरगा अन्तो वट्टा बाहिं चउरसा अहे खुरप्पसठाणसठिया निचन्धकारतमसा ववगयगहचन्दसूरनक्खत्तजोइसप्पहा मेदवसामसरुहिरपूयपडलचिक्तिल्ललित्ता- गुलेवणयला असुई वीसा परमदुभिगन्धा कण्हा अगणिवण्णाभा कक्खडफासा दुरहियासा असुभा नरगा असुभा नरएसु वेयणाओ॥ नो चेव नरएसु नेरइया निद्दायन्ति वा पयलायन्ति वा सुइ वा रइ वा धिइ वा मई वा उवलभन्ते । ते ण तत्य उज्जल विउल पगाढ कडय कक्कस चण्डं दुक्खं दुग्गं तिव्वं दुरहियास नेरइया वेयणं पचणुभवमाणा विहरन्ति ॥ २१ ॥ ६७१ ॥ से जहानामए रक्खे सिया पव्वयग्गे जाए मूळे छिन्ने अग्गे गरए जओ निण्ण जओ विसमं जओ दुग्गं तओ पवडइ, एवामेव तहप्पगारे पुरिसजाए गम्भाओ गन्म जम्माओ जम्मं माराओ मारं नरगाओ नरग दुक्साओ दुक्ख दाहिणगामिए नेरइए कण्हपक्सिए आग- मिस्साण दुलहबोहिए यावि भवइ । एस ठाणे अणारिए अकेवले जाव असव्वदुक्ख- पहीगमग्गे एगन्तमिच्छे असाहू । पढमस्स ठाणस्स अधम्मपक्खस्स विभङ्गे एव- माहिए ॥ २२ ॥ ६७२ ॥ अहावरे दोच्चस्स ठाणस्स यम्मपक्खस्स विभङ्गे एव- माहिज्जइ । इह खलु पाईण वा ४ सन्तेगइया मणुस्सा भवन्ति । त जहा-अणारम्भा अपरिग्गहा धम्मिया धम्माणुगा धम्मिट्ठा जाव धम्मेण चेव वित्तिं कप्पेमाणा विहरन्ति, सुसीला सुव्वया सुप्पडियाणन्दा सुसाह सव्वाओ पाणाइवायाओ पडि- विरया जावजीवाए जाव जे यावन्ने तहप्पगारा सावजा अबोहिया कम्मन्ता परपागपरियावणकरा कजन्ति तओ वि पडिविरया जावज्जीवाए ॥ से जहानामए- अणगारा भगवन्तो इरियासमिया भासासमिया एसणासमिया आयाणभण्डमत्त- निक्खेवणसमिया उच्चारपासवणखेलसिंघाणजलपरिहावणियासमिया मणसमिया वय- समिया कायसमिया मणगुत्ता वयगुत्ता कायगुत्ता गुत्ता गुत्तिन्दिया गुत्तवम्भयारी अकोहा अमाणा अमाया अलोभा सन्ता पसन्ता उवसन्ता परिनिव्वुडा अणासवा अग्गन्या छिन्नसोया निरुवलेवा कसपाइ व्व मुकतोया सखो इव निरक्षणा जीव इव अपडियगई गगणतलं पिव निरालम्वणा वाउरिव अपडिबद्धा सारदसलिल व सुद्धहियया पुक्खरपत्त व निस्वलेवा कुम्मो इव गुत्तिन्दिया विहग इव विप्पमुक्का खग्गिविसाण व एगजाया भारुण्डपक्खी व अप्पमत्ता कुञ्जरो इव सोण्डीरा वसभो इव जायत्यामा सीहो इव दुद्धरिसा मन्दरो इव अप्पकम्पा सागरो इव गम्भीरा चन्दो इव सोमलेसा सूरो इव दित्ततेया जच्चकञ्चणगं व जायरुवा वसुंधरा इव सब्बफासविसहा सुहुयहुयासणो विय तेयसा जलन्ता । नत्थि ण तेसिं भगवन्ताण . 1-

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। २ सु०म०२] सुत्तागमे १५७ पवरमलाणुलेवणधरा भासुरबोंदी पलम्बवणमालाधरा दिव्वेणं रूवेणं दिव्वेणं वण्णेण दिन्वेण गन्धेण दिव्वेणं फासेण दिन्वेणं सघाएणं दिव्वेण सठाणेणं दिव्वाए इड्डीए दिव्वाए जुईए दिव्वाए पभाए दिव्वाए छायाए दिव्वाए अचाए दिन्वेणं तेएणं दिवाए लेसाए दस दिसाओ उजोवेमाणा पभासेमाणा गइकलाणा ठिइकल्लाणा आगमेसिभद्दया यावि भवन्ति । एस ठाणे आरिए जाव सव्वदुक्खपहीणमग्गे एग- न्तसम्मे सुसाहू। दोच्चस्स ठाणस्स धम्मपक्खस्स विभङ्गे एवमाहिए ॥२३॥६७३ ॥ अहावरे तच्चस्स ठाणस्स मीसगस्सविभङ्गे एवमाहिजइ । इह खलु पाईण वा ४ सन्तेगइया मणुस्सा भवन्ति । त जहा-अप्पिच्छा अप्पारम्भा अप्पपरिग्गहा धम्मिया धम्माणुया जाव धम्मेण चेव वित्तिं कप्पेमाणा विहरन्ति सुसीला सुन्वया सुप्पडियाणन्दा साह एगचाओ पाणाइवायाओ पडिविरया जावजीवाए एगचाओ अप्पडिविरया जाव जे यावन्ने तहप्पगारा सावज्जा अवोहिया कम्मन्ता परपाणपरि- तावणकरा कजन्ति तओ वि एगचाओ अप्पडिविरया। से जहानामए समणोवासगा भवन्ति अभिगयजीवाजीवा उवलद्धपुण्णपावा आसवसवरवेयणानिजराकिरियाहिंग- रणबन्धमोक्खकुसला असहेजदेवासुरनागसुर्वणजक्खरक्खसकिनरकिंपुरिसगरलग- न्धब्वमहोरगाइएहिं देवगणेहिं निग्गन्थाओ पावयणाओ अणइक्कमणिज्जा, इणमेव निग्गन्थे पावयणे निस्सकिया निकखिया निन्विइगिच्छा लट्ठा गहियट्ठा पुच्छियट्ठा विणिच्छियट्ठा अभिगयट्ठा अछिमिञ्जपेम्माणुरागरत्ता । अयमाउसो निग्गन्थे पावयणे अट्टे अय परमटे सेसे अणढे उसियफलिहा अवगुयदुवाराअचियत्तन्तेउरपरघरपवेसा चाउद्दसटमुद्दिट्टपुणिमासिणीसु पडिपुण्ण पोसह सम्म अणुपालेमाणा समणे निग्गन्थे फासुएसणिज्जेग असणपाणखाइमसाइमेण वत्थपडिग्गहकम्बलपायपुञ्छणेण ओसह- भेसजेग पीठफलगसेज्जासन्थारएण पडिलाभेमाणा वहहिं सीलन्वयगुणवेरमणपञ्च- क्खाणपोसहोववासेहिं महापरिग्गहिएहिं तवोकम्मेहि अप्पाण भावेमाणा विहरन्ति ।। ते ण एयारूवेण विहारेण विहरमाणा वहइ वासाइ समणोवासगपरियाग पाउणति पाउणित्ता आबाहसि उप्पण्णसि वा, अणुप्पण्णसि वा बहूइ भत्ताइ अणसणाए पच- क्खाएन्ति बहुइ भत्ताइ अणसणाए पच्चक्खाएत्ता वहूइ भत्ताइ अणसणाए छेदेन्ति बहुइ भत्ताइ अणसणाए छेइत्ता आलोइयपडिकता समाहिपत्ता कालमासे कालं फिच्चा अन्नयरेसु देवलोएसु देवत्ताए उववत्तारो भवति, तजहा-महड्डिएसु महजुइएसु जाव महासोक्खेसु सेस तहेव जाव एसठ्ठाणे आयरिए जाव एगंतसम्मे साहू तचस्स ठाणस्स मीसगस्स विभगे एवमाहिए ॥ २४ ॥६७४ ॥ अविरइ पडुच्च वाले आहि- बइ विरई पडुच्च पडिए आहिजइ विरयाविरइ पडुच्च बालपडिए आहिजइ, तत्थण . १५८ मुलागी [मगर जा गा गयो जरिए एमाणे भागने भनि नाप जमरामापीरनग पगनिन्, यो ना मा गयो irre angr आए गा गरमागमगार, पागा गगरिमामेन्द्र एमहागे आभगेरामा आम माने गाए ॥ २५ ॥ ६७५ ॥ एपने गगनमा ददि टोन. मी, मामा- परमपम्ने र गर्न पागने पर, में पटनागर अपमानिएपना मा format दुयगवार भाणी गाताया, सरा-शिरिपारिरियापनि मानिस सवाश्यागीपगिनिगागमारती परिमोसनमानीमति गाना ली गायलागे ॥ २९॥ तं गये पाया आगमना নাগাদ দাণ গালি গালা গান গায়, मजुशा एग मद ममि एओ चिही ॥२७॥५. पुस गागनि गालाप पाद प परिपुश अमोगर मान महार से गले पार आरगरा धम्माण गाव Tranायमानीमा पाराच्या आवारा गम्मा ममता सुन्ने मागनिया गाना पायपरिपुर गाय गुरुग पारा परेरोगुना गग संगारिग एजा, जो पगिया जो माइन्मियपादित जोया परमम्मिगवेवापश्य पुजा, उमाकागादिगा मा गुपमा पगारेइ दतिया में पुरि नेमि पापा पारन मागीयान पर पार टिपुट अउमा नगए। गार पाणिनि नाराने पायाया आइगरा गम्मारामाला जाप IITHIMBा पति परिमातिए पुस्ति ते सव्ये पापाए आइगरे पन्ना आप पामो पाराच्या आगरा पम्मा नगरपानमा सम्दान दुन्ने पाणि पठिसाहह पानिको हिना, दि भविस्मः दादागीनगामाता पदिसाहह एप तुल एपमाणे एरागमोगरने पो गुरा परे पना पो गमोसरणे तयर्ग जे ते मा मादमा एपनामति, गप पनि मच पाना जार मता इतना अगवेपन्या परिपेनच्या परियारपया तिनपल्या पाया ते आगतु छेयाए ते आग भेयाए साव आ जाइजागरणजोगिनमान- सारपुणन्मनगन्मयागमयपपचायतीभागि भारती, बदन मुंउगाण नजगार ताला दुरपणा जाप घोण मारगरणा पिमरणा २ सु० म०३] सुत्तागमे भाइमरमाण भगिणीमरणाणं भजापुत्तधूयासुण्हामरणाण दारिदाणं दोहग्गाण अप्पिय- सवासाण पियविप्पओगाण वहण दुक्खदोमणस्साण आभागिणो भविस्सति अणादियं चण अणवयग्गं दीहमद्ध चाउरतससारकतार भुजो भुजो अणुपरियट्टिस्सति ते णो सिज्झिस्सति णो वुझिस्सति जाव णो सव्वदुक्खाणमंतं करिस्सति एस तुला एस पमाणे एस समोसरणे पत्तेय तुला पत्तेयं पमाणे पत्तेयं समोसरणे । तत्थ ण जे ते समणा माहणा एवमाइक्सन्ति जाव परवेन्ति । सव्वे पाणा सव्वे भूया सव्वे जीवा सव्वे सत्ता न हन्तन्वा न अजावेयव्वा न परिघेयव्वा न उद्दवेयवा ते नो आग- न्तुच्छेयाए ते नो आगन्तुभेयाए जाव जाइजरामरणजोणिजम्मणससारपुणब्भवग- भवासभवपवचकलकलीभागिणो भविस्सन्ति, जाव अणाइय च ण अणवयग्ग दीहमद्ध चाउरन्तससारकन्तार भुजो भुज्जो नो अणुपरियहिस्सन्ति, ते सिज्झिस्सन्ति जाव सव्वदुक्सागं अन्त करिस्सन्ति ॥ २८ ॥ ६७८ ॥ इच्चेएहि वारसहिं किरिया- ठाणेहिं वट्टमाणा जीवा नो सिझिसु नो वुझिसु नो मुचिंसु नो परिणिन्वाइसु जाव नो सव्वदुक्खाण अन्त करेंसु वा नो करेन्ति वा नो करिस्सन्ति वा । एयसि चेव तेरसमे किरियाठाणे वद्यमाणा जीवा सिज्झिसु वुझिसु मुचिमु परिणिव्वाइसु जाव सम्वदुक्खाणं अत करेंसु वा करति वा करिस्सति वा। एव से भिक्खू आयट्ठी आय- हिए आयगुत्ते आयजोगे आयपरक्कमे आयरक्खिए आयाणुकम्पए आयणिप्फेडए आयाणमेव पडिसाहरेजाति त्ति बेमि किरियााणज्झयणं विइयं ॥२९॥६७९॥ आहारपरिन्नज्झयणे तइये मय में आउस ! तेगं भगवया एवमक्खायं । इह सलु आहारपरिना नामज्झयणे तस्स ण अयमद्धे । इह सलु पाईण वा ४ सव्वओ सव्वावति य ण लोगसि चत्तारि पीयकाया एवमाहिज्जति । त जहा-अग्गवीया मूलवीया पोरवीया संधवीया । तेसिं च गं अहावीएग अहावगासेण इहेगइया सत्ता पुढवीजोणिया पुढवीसभवा पुढवी- वुकमा तज्जोणिया तस्सभवा तदुवकमा कम्मोवगा कम्मनियाणेण तत्थवुकमा नाणा- विहजोणियासु पुढवीमु खत्ताए विउद्दति ॥ ते जीवा तेसिं नाणाविहजोणियाण पुटवीण सिणेहमाहारेति । ते जीवा आहारैति पुढवीसरीर आउसरीर तेउसरीर वाउसरीर वगस्सइसरीर । नाणाविहाणं तसथावराणं पाणाण सरीर अचित्त कुव्वति परिविद्धत्य । त सरीर पुव्वाहारिय तयाहारिय विपरिणय सारूवियकडं सत । अवरे वि य ण तेसिं पुढविजोणियाण रक्साण सरीरा नाणावण्णा नाणागंधा नाणारसा

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२ सु० म०३] सुत्तागमे १६१ ॥५॥ ६८४ ॥ अहावर पुरक्खाय इहेगइया सत्ता अज्झारोहजोणिया अज्झा. रोहसभवा जाव कम्मनियाणेण तत्थ वुकमा रुक्खजोणिएसु अज्झारोहेसु अज्झा- रोहत्ताए विउदृति ते जीवा तेसिं रुक्खजोणियाण अज्झारोहाण सिणेहमाहारेंति ते जीवा आहारैति पुढवीसरीर जाव सारूवियकड सत अवरेवि य ण तेसिं अज्झारोहजोणियाण अज्झारोहाण सरीरा णाणावण्णा जावमक्खाय ॥ ६॥ ६८५॥ अहावर पुरक्खाय इहेगइया सत्ता अज्झारोहजोणिया अज्झारोहसभवा जाव कम्मनियाणेण तत्य वुकमा अज्झारोहजोणिएसु अज्झारोहत्ताए विउद्दति ते जीवा तेसिं अज्झारोहजोणियाण अज्झारोहाण सिणेहमाहारेति ते जीवा आहारैति- पुढविसरीर आउमरीर जाव सारूवियकड, सत अवरेवि य ण तेसिं अज्झारोह जोणियाण अज्झारोहाण सरीरा णाणावण्णा जावमक्साय ॥ ७ ॥ ६८६ ॥ अहा- वर पुरक्खाय इहेगडया सत्ता अज्झारोहजोणिया अज्झारोहसभवा जाव कम्म. नियाणेण तत्यवुकमा अज्झारोहजोणिएसु अज्झारोहेसु मूलत्ताए जाव बीयत्ताए विउद्देति ते जीवा तेसिं अज्झारोहजोणियाण अज्झारोहाण सिणेहमाहारेति जाव अवरेवि य गं तेसिं अज्झारोहजोणियाण मूलाण जाव वीयाण सरीरा णाणावण्णा जावमक्साय ॥ ८ ॥ ६८७ ॥ अहावर पुरक्खाय इहेगइया सत्ता पुढविजोणिया पुटविसभवा जाव णाणाविहजोणियासु पुढवीसु तणत्ताए विउद्दति ते जीवा तेसिं णाणाविहजोणियाण पुटवीण सिणेहमाहारेंति जाव ते जीवा कम्मोववन्ना भवति त्ति मक्खाय-एव पुढविजोणिएसु तणेसु तणत्ताए विउद्दति जाव मक्खाय-एव तणजोणिएसु तणेसु तणत्ताए विउद्दति तणजोणिय तणसरीर च आहारेंति, जाव- मक्खाय-एव तणजोणिएसु तणेसु मूलत्ताए जाव बीयत्ताए विउद्दति ते जीवा जाव एवमक्खाय-एव ओसहीण वि चत्तारि आलावगा-एव हरियाणवि चत्तारि आला- वगा-॥ ९-१० ॥ ६८८-६८९ ॥ अहावर पुरक्खाय इहेगइया सत्ता पुटवी- जोणिया पुढविसभवा जाव कम्मनियाणेण तत्यबुकमा नाणाविहजोगियासु पुढवीसु आयत्ताए वायत्ताए कायत्ताए कूहणत्ताए कन्दुकत्ताए उव्वेहणियत्ताए निव्वेहणिय- ताए मछत्ताए छत्तगत्ताए वासाणियत्ताए कूरत्ताए विउदृन्ति । ते जीवा तेसिं नाणा- विहजोणियाण पुढवीण सिणेहमाहारेन्ति । ते वि जीवा आहारेन्ति पुढविसरीर जाव सन्त । अवरे वि य ण तेसिं पुढविजोणियाण आयत्ताण जाव कूराण सरीरा नाणावण्णा जाव मक्साय । एगो चेव आलावगो सेसा तिण्णि नत्थि । अहावर पुरक्साय इहेगइया सत्ता उदगजोणिया उदगसभवा जाव कम्मनियाणेण तत्थवुकमा नाणाविहजोणिएसु उदएसु रुक्खत्ताए विउद्दन्ति । ते जीवा तेसिं नाणाविहजोणियाण ११ सुत्ता० सुगागमे [स्यगर उदगाण सिणेहमाहारेन्ति । ते जीवा आहारन्ति पुटपिमरीर जाय सन्त । अवरे वि य ग तेसिं उदगजोगियाण समाग मरीरा नाणानगा जाव मस्तार । जहा पुटनिजोगियाग रस्साण चत्तारि गमा अज्मारहाग वि तहेव, नणाग भोसहीण हरियागं चत्तारि आलायगा मागियच्या एयो, अहार पुरसपाय रहेगट्या सत्ता उदगजोनिया सदगमम्भवा जाय कम्मनियाणेण तत्यममा नाणापिहजोगिएन उदण्ड उदगत्ताए अवगत्ताए पणगत्ताए सेवारत्ताए करम्युगनाए हरत्ताए रमेमनाए कच्छभागिताए उप्पलत्ताए पउमत्ताए कुमुयत्ताए नलिगाए नभानाए मोगन्धि- यत्ताए पोण्डरीयमहापोखरीयत्ताए सयपत्तत्ताए नहम्मपत्नत्ताए पर रहारोग- यत्ताए अरनिन्दनाए तामरसत्ताए भिसभिगमुणालपुस्पलत्ताए पुस्तलनिउभगताए विउदृन्ति । ते जीवा नेमि नागाविहजोगियाण उटगाण हिमाहारेन्ति । ते जीवा आहारेन्ति पुटवीसरीर जार मन्त । अवरे नि तेमि उदगजोलियान उद्गाग जाव पुक्यलच्छिभगाण सरीरा नाणावग्या जाव मन्याव । एगो चेष मालागो ॥ ११ ॥ ६९०॥ अहावर पुरस्साय रहेगइमा मत्ता तेमि चेव पुटपीजोगिए, रुस्नेहिं मगजोषिपहि रमपहिं गत्पजोगिएहि महिं जाव पीरहि, रुस्राजोणिएहि अज्झारोहहिं अमारोहजोगिएहि अज्मारोहहिं अज्झागेहजोगिए, मूलहि जार बीएहि, पुटनिजोगिएहिं तणेहि तगजोनियहि नहिं तणनीशिएहि मूरेहिं जाव वीएहिं । एक ओमहीहि नि तिमि आरामा एन हारेहि वि तिणि आलापगा। पुटपिजोणिएहि वि आएहि काहि जाव रोहि उदगजोगिएहि कोहि रुक्सजोगिएहि सत्यहि स्खजोगिएहि मूलहिं जाय वीएहि एव अज्झागेहेहि वि तिगि । तणेहिं पि तिणि आलावा । ओमहीदि पि तिग्गि, हरिएहि पि निणि, उदगनगेगिएहि, उदएहिं अवएहिं जार पुक्यलन्टिमएहिं तमपाणताए पिचन्ति ।। ते जीवा तेनिंपुटवीजोणियाण उदगजोणियाण रस्सजोणियाण अझागेहजोगियाग तणजोणियाण ओमहीजोगियाण हरियजोगियाग रस्वागअक्षारोहाण तणाग ओस- हीण हरियाण मूलाण जाव बीयाण आयाग कापाग जाव पुरवाग [पूराण] उदगा अवगाण जाव पुस्सलच्छिभगाण सिणेहमाहारेन्ति । ते जर्जावा आहारेन्ति पुरवीमरीर जाव सन्त। अवरे वियण तेमिस्बजोलियाण अज्झारोहजोणियाण तणजोगियाप ओमहिजोगियाण हरियजोणियाण मूलजोणियाण क्न्दजोणियाग जाव बीयजोणियाय आयजोणियाग कायजोणियाण जाव पूरजोपियाण उदगजोणियाण अवगजोगियाण जाव पुरसलच्छिभगजोगियाग तसपाणाग सरीरा नाणावण्या जाब मासाय ॥ १२॥ ६९१ ॥ अहावर पुरक्ताय नागाविहाण मणुस्साग । त जहा कन्मभूम- १० म०३] सुत्तागमे गाण अकम्मभूमगाग अन्तरदीवगाण आरियाण मिलक्खुयाण । तेसिं च ण अहा- बीएगं अहावगासेण इत्थीए पुरिसस्स य कम्मकडाए जोणिए एत्य ण मेहुणवत्तियाए (व) नाम सजोगे समुप्पजइ । ते दुहओ वि सिणेह सचिणन्ति। तत्य ण जीवा इत्थि- त्ताए पुरिसत्ताए नपुसगत्ताए विउन्ति, ते जीवा माओउय पिउसुक्कं त तदुभय ससह कल्स किब्बिस तं पढमत्ताए आहारमाहारेंति तओ पच्छा ज से माया णाणाविहाओ रसविहीओ आहारमाहारेति तओ एगदेसेण ओयमाहारेंति अणुपुन्वेण वुढा पलिपाग- मणुपवन्ना तओ कायाओ अभिनिवट्टमाणा इत्थि वेगया जणयति पुरिस वेगया जण- यति, णपुसग वेगया जगयति, ते जीवा डहरा समाणा माउक्खीर सप्पि आहारेंति आणुपुव्वेगं वुड्डा ओयण कुम्मास तसथावरे य पाणे ते जीवा आहारेंति पुढविसरीर जाव सारुवियकड सतं अवरेवि य ण तेसिं णाणाविहाण मणुस्सगाण कम्मभूमगाण अकम्मभूमगाण अतरदीवगाण आरियाण मिलक्खूण सरीरा णाणावण्णा भवति त्ति मक्खाय ॥ ६९२ ॥ अहावर पुरक्खाय णाणाविहाणं जलचराण पचिंदियतिरिक्ख- जोणियाण, तजहा-मच्छाण जाव सुसुमाराण तेसिं च ण अहाबीएण अहावगासेण इत्थीए पुरिसस्स य कम्मकडा तहेव जाव तओ पच्छा एगदेसेण ओयमाहारेंति आणुपुत्वेण वुड्डा पलिपागमणुपवन्ना तओ कायाओ अभिनिवट्टमाणा अड वेगया जणयति पोय वेगया जणयति, से अडे उन्भिज्जमाणे इत्थिं वेगया जणयति, पुरिस वेगया जणयति, णपुसग वेगया जणयति, ते जीवा डहरा समाणा आउसिणेहमा- हारेंति, आणुपुव्वेण वुड्डा वणस्सइकाय तसथावरे य पाणे ते जीवा आहारेंति पुडविसरीर जाव सत अवरेवि य णं तेसिं णाणाविहाग जलचरपचिंदियतिरिक्ख- जोणियाण मच्छागं सुसुमाराण सरीरा णाणावण्णा जावमक्खाय ॥ ६९३ ॥ अहावर पुरक्खायं णाणाविहाण चउप्पयथलयरपचिंदियतिरिक्खजोणियाण तजहा एगखुराणं दुखुराण गंडीपदाणं सणप्पयाण तेसिं च ण अहाबीएण अहावगासेण इत्थिपुरिसस्स य कम्म जाव मेहुणवत्तिए णाम सजोगे समुप्पज्जइ ते दुहओ सिणेह सचिणति तत्यण जीवा इत्थित्ताए पुरिसत्ताए जाव विउद्दति ते जीवा माउओय पिउसुक्न एव जहा माणुस्साण इत्थि वेगण जणयति पुरिसपि नपुसगपि ते जीवा डहरा समाणा माउक्खीर सप्पिं आहारेंति आणुपुम्वेग वुढा वणस्सइकाय तसथावरे य पाणे ते जीवा आहारेंति पुढविसरीर जाव सत अवरेवि य ण तेसिं णाणाविहाण चउप्प- यथलयरपचिंदियतिरिक्खजोणियाण एगखुराण जाव सणप्पयाण सरीरा णाणावण्णा जावमक्साय ॥ ६९४ ॥ अहावर पुरक्खाय णाणाविहाण उरपरिसप्पथलयरपचिं- दियतिरिक्खजोणियाण तजहा-अहीण अयगराण आसालियाण महोरगाण तेसिं च सुत्तागमे [स्यगर ण अहावीएम अहावगामेग इत्थीए पुग्मिम्म जार एत्यग गेहुणे एक त व नान अ वेगइया जणयति पोय वेगदया जणयति से अढे उन्भिनमाणे इन्धि वेगामा जणयति पुरिसपि णपुमगपि, ने जीवा दहा ममाणा पाउरायमाहारैति माणुगु- पेग युवा वणस्मदाय तसथावरपाणे ते जीवा आहारति पुरविपरीरं जग मत अपरेपि य ण तेमि णाणाविहाग उरपरिमप्पथलयरपचिंदियनिरिगअहीर जाव महोरगाण मरीरा णाणावग्गा गागागधा जावमक्लाय ॥ ६९५ ॥ अहार पुर- काय णागानिहाणं भुवपरि सप्पथलयरपचिंपियतिरिक्सनोशियाण, तंजहा-गोहाण नउलाण सिहाण मग्डाण सत्लाण सरघाग नराण घरकोइलियाण निस्सभराणं मुमगाण मगुमाण पयलाढयाण निरालियाण जोहाण चटप्पाइयाग तेसिंचन अहानीएण अहायगासेग इत्यिए पुरिमा य जहा उरपरिमप्पाण तहा मागियन्त्र जान सावियफट सत अवरेवि य ण तेसिं पाणाविहाण भयपरिमप्पपत्रिंदिवथर प. रतिरिक्साण त० गोहाण जाममस्माय ।। ६९६ ॥ अहावर पुरस्वाय गागाविहाण सहचरपचिंदियतिरिक्वजोणियाण, तजहा चम्मपरवीण लोमपरसीण समुग्ग- परखीण विततपस्वीग तेमिं च ण अहानीएग अहावगामेण इन्धीए जहा उरपरिसप्पाण नाणत्त ते जीवा डहरा ममागा माउगात्तसिणेहमाहारति आणुपुव्वेग बुट्टा वस्सडकाय तसथावरे य पाणे ते जीवा आहारेति पुढविमरीर जार सत अवरे वि य ण तेसिं नाणाविहाण सहचरपधिन्दियतिरिक्सजोणियाण चम्मपासीग जाव मस्साय ॥ १३ ॥ ६९७ ॥ अहावर पुरक्खाय इहेगइया मत्ता नाणानिहजोगिया नाणाविहसभवा नाणाविवुममा तजोणिया तस्सभवा तदुवफ्ना कम्मोवगा रम्न- नियाणेण तत्ययुगमा नाणाविहाण तमथावराण पोग्गलाग सरीरेनु वा सचितन वा अचित्तनु वा अणुसूयत्ताए विउदृन्ति । ते जीवा तेनि नाणाविहाण तमथावराण पाणाण सिणेहमाहारेन्ति । ते जीवा आहारेन्ति पुटपिमरीर जाव मन्त । अवरे वि य ण तेमि तमयावरजोणियाण अणुमूचगाण सरीरा नाणावण्या जाव मस्खाय। एव दुस्वसभवत्ताए । एव पुरदुगत्ताए ॥ १४ ॥ ६९८ ॥ अहावर पुरक्साव इहे. गइया सत्ता नाणाविहजोणिया जाव सम्मनियाणेण तत्यामा नाणाविहाण तमथा- वराण पाणाण सरीरेमु सचित्तेनु वा अचित्तेसु वा त सरीरग वायससिद्ध वा वाय- सगहिय वा वायपरिग्गहिय उपाएम उठभागी भवइ, अहेवाएमु अहेभागी भवइ, तिरियवाएतु तिरियभागी भवइ । त जहा-ओमा हिमए महिया करए हरतणुए सुद्धोदए । ते जीवा तेसिं नाणाविहाण तसथावराण पाणाण मिणेहमाहारेन्ति । ते जीवा आहारेन्ति पुढविसरीर जाव सन्त । अवरे वि य ण तेसिं तमथावरजोणि- २ सु०म० ३] सुत्तागमे यागं ओसाण जाव सुद्धोदगाण सरीरा नाणावण्णा जावमक्खाय । अहावर पुरक्खायं इहेगइया सत्ता उदगजोणिया उदगसभवा जाव कम्मनियाणेण तत्यवुकमा तसथावरजोणिएसु उदएसु उदगत्ताए विउदृन्ति । ते जीवा तेसिं तसथावरजोणियाणं उदगाण सिणेहमाहारेन्ति । ते जीवा आहारेन्ति पुढविसरीर जाव सन्त । अवरे वि य ण तेसिं तसथावरजोणियाण उदगाणं सरीरा नाणावण्णा जाव मक्खाय । अहावर पुरक्सायं इहेगइया सत्ता उदगजोणियाणं जाव कम्मनियाणेणं तत्यवुकमा उदगजोणिएमु उदएसु उदगत्ताए विउद्दन्ति ते जीवा तेसिं उदगजोणियाण उदगाणं सिणेहमाहारेन्ति । ते जीवा आहारेन्ति पुढविसरीर जाव सन्त । अवरे वि य गं तेसिं उदगजोणियाण उदगाणं सरीरा नाणावण्णा जाव मक्साय । अहावर पुरक्खाय इहेगइया सत्ता उदगजोणियाण जाव कम्मनियाणेणं तत्थवुकमा उदग- जोणिएसु उदएसु तसपाणत्ताए विउदृन्ति । ते जीवा तेसिं उदगजोणियाण उदगाण सिणेहमाहारेन्ति । ते जीवा आहारेन्ति पुढविसरीर जाव सन्त । अवरे वि य ण तेसिं उदगजोणियाणं तसपाणाण सरीरा नाणावण्णा जाव मक्खाय ॥ १५ ॥ ६९९ ॥ अहावर पुरक्खाय इहेगइया सत्ता नाणाविहजोणिया जाव कम्मनियाणेण तत्यबुकमा नाणाविहाण तसथावराण पाणाण सरीरेसु सचित्तेसु वा अचित्तेसु वा अगणिकायत्ताए विउदृन्ति । ते जीवा तेसिं नाणाविहाण तसथावराण पाणाण सिणेहमाहारेन्ति । ते जीवा आहारेन्ति पुढविसरीर जाव सन्त । अवरे वि य ण तेसिं तसथावरजोणियाण अगणीण सरीरा नाणावण्णा जावमक्साय । सेसा तिण्णि आलावगा जहा उदगाण। अहावर पुरक्खाय इहेगइया सत्ता नाणाविहजोणियाण जाव कम्मनियाणेण तत्थ- बुकमा नाणाविहाणं तसथावराण पाणाण सरीरेसु सचित्तेसु वा अचित्तेसु वा वाउ- कायत्ताए विउद्यन्ति । जहा अगणीण तहा भाणियव्वा चत्तारि गमा ॥ १६ ॥ ।। ७०० ॥ अहावर पुरक्खाय इहेगइया सत्ता नाणाविहजोणिया जाव कम्मणिया- तत्यवुकमा नाणाविहाण तसयावराण पाणाण सरीरेसु सचित्तेसु वा अचित्तेसु वा पुढवित्ताए सकरत्ताए वालुयत्ताए। इमाओ गाहाओ अणुगन्तव्वाओ-पुढवी य सकरा वालुया य उवले सिला य लोणूसे । अय तउय तम्ब सीसग रुप्प सुवण्णेय वइरे य (१) हरियाले हिंगुलए, मणोसिला सासगजणपवाले, अब्भपडलब्भवा- लुय, वायरकाए मणिविहाणा (२) गोमेजए य रुयए, अके फलिहे य लोहियक्खेय, मरगयमसारगल्ले भुयमोयगइदनीले य (३) चदणगेस्यहसगन्भे, पुलए सोगधिए य बोद्धन्वे, चदप्पभवेरुलिए, जलकते सूरकते य (४) एयाओ एएमु भाणियवाओ सरकतताए विउति, ते जीवा तेसिं गाणाविहाण तसथावराण पेण गाहामो जात १६६ सुत्तागमे [सूयगड पागाणं सिणेहमाहारैति, ते जीवा आहारेंति पुढविसरीर जाव सत अवरे वि य ग तेमि तसथावरजोणियाण पुडवीण जाव सूरकताग सरीरा णाणावण्या जावमक्खाय, सेस तिगि आलावगा जहा उदगाग ॥ ७०१॥ अहावर पुरक्खाय सव्वे पाणा सव्वे भूया, सन्वे जीवा, मव्वे मत्ता, णाणाविहजोणिया, णाणाविहसभवा, णाणा- विहवुमा, सरीरजोणिया, मरीरसभवा, सरीखुपमा, सरीराहारा, कम्मोवगा, कम्मनियाणा, कम्मगईया, कम्मठिईया, कम्मणा चेव विपरियाममुवेति ।। ७०२॥ सेएवमायाणह से एवमायाणित्ता आहारगुत्ते महिए समिए सयाजए त्ति वेमि ॥७०३॥ आहारपरिणयज्झयणं तइय ॥ पच्चक्खाणकिरियज्झयणे चउत्थे सुय मे आउस 1 तेग भगवया एवमक्खाय, इह खलु पञ्चक्साणकिरियाणा- मज्झयणे तस्मग अयमढ़े पण्गत्ते, आया अपचक्याणीयावि भवइ, आया अफिरिया कुसलेयावि भवइ, आया मिच्छासठिएयावि भवइ, आया एगतदडेयावि भवइ, आया एगतनालेयावि भवइ, आया एगतमुत्तेयावि भवइ, आया अवियारमणवयणकायवके- यावि भवइ, आया अप्पडिहयअपञ्चक्खायपावकम्मेयावि भवइ, एस खलु भगवया अक्खाए, असजए, अविरए, अप्पडिहयपचक्सायपावकम्मे, सकिरिए, असवुडे, एगतदडे, एगतवाले, एगतनुत्ते से वाले, अवियारमगवयकायवक्के, सुविणमावि ण पस्सइ पावे य से कम्मे कन्नइ ॥ ७०४ ॥ तत्य चोयए पनवग एव वयासी, असत. एण मणेण पावएण असतियाए वईए पावियाए, असतएग काएण पावएण अह- णतस्स अमगक्खस्स, अवियारमणवयकायवकस्स सुविणमवि अपस्मओ पावकम्मे णो कजा कस्सण त हेउ चोयए एव चवीइ अन्नयरेण मणेग पावएग मणवत्तिए पावे कम्मे कजइ, अन्नयरीए वईए पावियाए वतिवत्तिए पावे कम्मे कजइ, अन्न- यरेण काएग पावएग कायवत्तिए पावेकम्मे कजइ, हणतस्स समणक्सस्स सवियार- मणवयकायवक्स्स सुविणमवि पामओ, एव गुगजाईयस पावेकम्मे कजइ, पुणरवि चोयए, एवं बवीड तत्यण जे ते एवमाहसु असतएग मणेण पावएण असतियाए वईए पावियाए, असतएण काएण पावएग अहणतस्स अमणक्खस्स अवियारमण- वयकायववस्स सुविणमवि अपस्सओ पावे कम्मे कबइ, तत्य ण जे ते एवमाहसु मिच्छा ते एवमाहसु ॥ ७०५ ॥ तत्य पन्नवए चोयग एव वयासी-त सम्म जमए पुव्व वुत्त असतएण मणेण पावएण, असतियाए वईए पावियाए, असतएण काएग पावएग, अहणतस्स अमणक्खस्स अवियारमणवयकायवक्स्स सुविणमवि अपस्सओ २ सु०म० ४] सुत्तागमे पावे कम्मे कजइ, त सम्म कस्स ण तं हे? आयरिय आह, तत्थ खलु भगवया छज्जीवणिकायहेऊ पण्णत्ता, तजहा पुढविकाइया जाव तसफाइया इच्चेएहि छहिं जीव- णिकाएहिं आया अप्पडिहयपचक्खायपावकम्मे,निचं पसढविउवातचित्तदडे, तजहा- पाणाइवाए जाव परिग्गहे, कोहे जाव मिच्छादसणसल्ले ।। ७०६ ॥ आयरिय आह तत्य खलु भगवया वहए दिढन्ते पण्णत्ते । से जहानामए-वहए सिया गाहावइस्स वा गाहावइपुत्तस्स वा रण्णो वा रायपुरिसस्स वा खगं निहाय पविसिस्सामि सण लद्रूण वहिस्सामि सपहारेमाणे से कि नु हु नाम से वहए तस्स गाहावइस्स वा गाहावइपुत्तस्स वा रण्गो वा रायपुरिसस्स वा खण निद्दाय पविसिस्सामि सण लभ्रूण वहिस्सामि पहारेमाणे दिया वा राओ वा सुत्ते वा जागरमाणे वा अमित्तभूए मिच्छा- सठिए निच्च पसढविउवायचित्तदण्डे भवइ? एव वियागरेमाणे समियाए वियागरे चोयए-हंता भवइ। आयरिय आह-जहा से वहए तस्स गाहावइस्स वा तस्स गाहावइपुत्तस्स वा रण्णो वा रायपुरिसस्स वा खण निहाय पविसिस्सामि सण लद्रूण वहिस्सामि त्ति पहारेमाणे दिया वा राओ वा सुत्ते वा जागरमाणे वा अमि- त्तभूए मिच्छासठिए निच पसदविउवायचित्तदण्डे, एवमेव वाले वि सव्वेसिं पाणाण जाव सव्वेसिं सत्ताण दिया वाराओ वा सुत्ते वा जागरमाणे वा अमित्तभूए मिच्छा- सठिए निच्च पसढविउवायचित्तदण्डे । त जहा-पाणाइवाए जाव मिच्छादसणसल्ले । एव सलु भगवया अक्साए असजए अविरए अप्पडिहयपञ्चक्खायपावकम्मे सकि- रिए असवुढे एगन्तदण्डे एगन्तवाले एगन्तसुत्ते यावि भवइ । से वाले अवियारम- णवयणकायवक्ने सुविणमवि न पस्सइ पावे य से कम्मे कजइ । जहा से वहए तस्स वा गाहावइस्स जाव तस्स वा रायपुरिसस्स पत्तेय पत्तेय चित्तसमादाए दिया वा राओ वा सुत्ते वा जागरमाणे वा अमित्तभूए मिच्छासठिए निच्च पसढविउवायचि- तदण्डे भवइ, एवमेव वाले सव्वेसि पाणाम जाव सब्वेसि सत्ताण पत्तेय पत्तेय चित्तसमादाए दिया वा राओ वा सुत्ते वा जागरमाणे वा अमित्तभूए मिच्छासठिए निच्च पसढविउवायचित्तदण्डे भवइ ॥२॥७०७॥ नो इणहे समढे [ चोयए] । इह खलु वहवे पाणा जे इमेग सरीरसमुस्सएण नो दिट्ठा वा सुया वा नाभिमया वा विनाया वा जेसिं नो पत्तेय पत्तेय चित्तसमायाए दिया वा राओ वा सुत्ते वा जागर- माणे वा अमित्तभूए मिच्छासठिए निच पसढविउवायचित्तदण्डे । त जहा पाणाइवाए जाव मिच्छादसणसल्ले ॥३॥७०८॥आयरिय आह-तत्थ सलु भगवया दुवे दिट्ठन्ता पण्णत्ता । त जहा-सन्निदिट्ठन्ते यअसन्निदिढन्ते य । से कि त सन्निदिद्वन्ते? जे इमे सन्निपञ्चिन्दिया पजत्तगा एएसि ण छजीवनिकाए पडुच्च, त जहा-पुढवी- - सुत्तागमे [सूयगड - काय जाय तगफाय । से एगडओ पुढवीकाएग किय करेड नि कारवेद वि । तस्म णं एव भवट-एक पल अह पुटवीकएण किय करेमि विकारयेमि नि, नो चैव प से एव भवर-इमेण वा इमेण पाये एएगं पुटवीमाएग फिच करे नि काग्वेद वि। से ण तओ पुटवीकायाभो असजयअनिरयसपठिहयपयस्यायपावकम्मे यावि भवइ । एव जाप तमझाए ति भाणियव्य । से एगइओ राजीवनिकाएहिं किन करेइ नि कारवेइ नि। तस्य ण एष भवइ-एव गल छजीवनिकाएहि फिच रेमि रिकारवेमि वि। नो चेवण से एप भवड-इमेहि वासे य तेहिं छहिं जीवनिका- एहि जान पारवेइ नि । से य तेहिं उहि जीवनिकाएहिं असजयअनिरयअप्पडिहय- पचनसायपायकम्मे, न जहा-पाणादयाए जाव मिच्छादनणसहे । एम खलु भगवया अस्साए असजए अविरए अप्पडिहयपचम्पायपावकम्मे मुनिगमवि अपस्मओ। पावे य से कम्मे कबइ । से त सजिपिढन्ते ॥ से किं.त अमनिदिढन्ते ? जे हमे अमनिणो पाणा, त जहा-पुटवीकादया जाव वणस्मटकाइमा छट्टा वेगइया तमा पाणा, जेमि नो तफा इ वा मना इ वा पना इ वा मणा इ वा वई इ वा सय वा करणाए अनेहि या कारवेत्तए करन्त वा समणुजाणित्तए, ते विण थाले मब्वेगि पाणाण जाच मवेमि सत्ताण दिया वा राओ वा मुत्ते वा जागरमाणे या अमित्त- भूया मिच्छासठिया निच पमढविउवायचित्तदडा त० पाणादवाए जाव मिच्छा- दसणमहे । इयेव जाव नो चेव मणो नो चेव वई पाणाण जाव मत्ता दुक्खण- याए सोयणयाए जूरणयाए तिप्पणयाए पिशयाए परितप्पणयाए । ते दुक्ख- णसोयण जाव परितप्पणवबन्धणपरिस्टेिसाओ अप्पडिपिरया भवन्ति । इति खलु से असनिणो नि मत्ता अहोनिमि पाणाइवाए उवासाइजन्ति जाव अहोनिसिं परिग्गहे उस्तादजन्ति जाब मिच्छादमणमरे उवक्साइज्वन्ति [एवं भूयवाई]। सव्वजोणिया विगलु सत्ता मन्निगो हुचा असन्निगो होन्ति असन्निणो हुया सन्निको होन्ति, होया सन्नी अदुवा अमन्नी, तत्य से अनिविचित्ता अनिधूणित्ता असमुच्छित्ता अणणुतावित्ता अमनिकायाओ वा सनिकाए सकमन्ति सनिकायाओ वा असनिकाय सममन्ति, सनिकायाओ वा सनिकाय सामन्ति असनिकायाओ वा अमनिकाय सम्मन्ति । जे एए मन्नि वा असति वा सव्वे ते मिच्छायारा निच पमढविउवाय- चित्तदण्डा । त जहा-पाणाइवाए जाव मिच्छादसणमल्ले । एव सलु भगवया अ. क्खाए असजए अविरए अप्पडियपचरसायपावकम्मे सकिरिए असवुडे एगन्तदण्डे एगन्तवाले एगन्तसुत्ते से वाले अवियारमणवयणकायवक्के सुविणमवि न पाम पावे य से कम्मे कज्जइ ॥ ४ ॥ ७०९ ॥ चोयए-से किं कुल्व किं कारव कह सजयविर-

२ सु० भ०५]
सुत्तागमे
१६९
यप्पडिहयपच्चक्खायपावकम्मे भवइ आयरिय आह-तत्थ सलु भगवया छज्जीव-
निकायहेऊ पन्नत्ता, तं जहा-पुढवीकाइया जाव तसकाइया । से जहानामए मम
अस्सायं दण्डेण वा अट्ठीण वा मुट्ठीण वा टेलूण वा कवालेण वा आतोडिज्नमाणस्स
वा जाव उवद्दविजमाणस्स वा जाव लोमुक्खणणमायमवि हिसाकार दुक्ख भय
पडिसवेदेमि, इच्छेव जाण सव्वे पाणा जाव सव्वे सत्ता दण्डेण वा जाव कवालेण वा
आतोडिजमाणे वा हम्ममाणे वा तजिज्जमाणे वा तालिजमाणे जाव उवद्दविजमाणे
वा जाव लोमुक्खणणमायमवि हिंसाकार दुक्ख भय पडिसवेदेन्ति । एव नच्चा सव्वे
पाणा जाव सव्वे सत्ता न हन्तव्वा जाव न उद्दवेयन्वा । एस धम्मे धुवे निइए सासए
समिच लोगं खेयन्नेहिं पवेइए । एव से भिक्खू विरए पाणाइवायाओ जाव मिच्छा-
दसणसल्लाओ। से भिक्खू नो दन्तपक्खालणेणं दन्ते पक्खालेजा, नो अक्षण नो
वमण नो धूवणित्त पि आइए । से भिक्खू अकिरिए अल्सए अकोहे जाव अलोभे
उवसन्ते परिनिव्वुडे । एस खलु भगवया अक्खाए सजयविरयपडियपञ्चक्खाय-
पावकम्मे अकिरिए सवुडे एगन्तपण्डिए भवइ त्ति बेमि ॥ ५॥ ७१०॥ पञ्च-
क्खाणकिरियज्झयणं चउत्थं ॥
आयारसुयज्झयणे पञ्चमे
आदाय बम्भचेर च आसुपने इम वइ । अस्सि धम्मे अणायार नायरेज कयाइ
वि ॥ १॥ ७११॥ अणाईय परिन्नाय अणवदग्गे त्ति वा पुणो । सासयमसासए
वा इइ दिहिं न धारए ॥ २॥ ७१२ ॥ एएहिं दोहि ठाणेहिं ववहारो न विजई ।
एएहिं दोहि ठाणेहिं अणायार तु जाणए ॥ ३ ॥ ७१३ ॥ समुच्छिहिन्ति सत्यारो
सव्वे पाणा अणेलिसा। गण्ठिगा वा भविस्सन्ति सासय ति व नो वए ॥ ४ ॥
॥ ७१४ ॥ एएहिं दोहि ठाणेहिं ववहारो न विजई । एएहिं दोहि ठाणेहिं अणायार
तु जाणए ॥ ५॥ ७१५ ॥ जे केइ खुद्दगा पाणा अदुवा सन्ति महालया। सरिस
तेहि वेर ति असरिस ति य नो वए ॥६॥७१६ ।। एएहिं दोहि ठाणेहिं ववहारो
न विजई । एएहिं दोहि ठाणेहिं अणायार तु जाणए॥७॥ ७१७ ॥ अहाकम्माणि
भुञ्जन्ति, अन्नमन्ने सकम्मुणा । उवलित्ते त्ति जाणिज्जा अणुवलित्ते त्ति वा पुणो
॥ ८॥ ७१८ ॥ एएहिं दोहि ठाणेहिं ववहारो न विजई । एएहिं दोहि ठाणेहिं
अणायार तु जाणए ॥ ९॥ ७१९ ॥ जमिद ओरालमाहार कम्मग च तहेव य ।
सव्वत्य वीरिय अस्थि नत्थि सव्वत्थ वीरिय ॥१०॥७२०॥ एएहिं दोहि ठाणेहिं
ववहारो न विजई । एएहिं दोहि ठाणेहिं अणायार तु जाणए ॥ ११॥ ७२१ ॥

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२ सु० म०६] सुत्तागमे अद्दइजज्झयणे छट्टे पुराकडं अद्द इमं सुणेह मेगन्तयारी समणे पुरासी । से भिक्खुणो उवणेत्ता अणेगे आइक्सएण्हि पुढो वित्थरेण ॥१॥७४४ ॥ साऽऽजीविया पट्टवियाऽथिरेण सभागओ गणओ भिक्खुमज्झे । आइक्खमाणो बहुजन्नमत्य न सधयाई अवरेण पुन्य ॥२॥ ७४५ ॥ एगन्तमेवं अदुवा वि एहि दोऽवनमन्न न समेइ जम्हा । पुचि च एण्हि च अणागयं वा एगन्तमेव पडिसधयाइ ॥ ३ ॥ ७४६ ॥ समिच्छ लोग तसथावराण सेमकरे समणे मारणे वा। आइक्खमाणो वि सहस्समज्झे एग- न्तय सारयई तहचे ॥ ४ ॥ ७४७ ॥ धम्म कहन्तस्स उ नत्यि दोसो खन्तस्स दन्तस्स जिइन्दियस्स । भासाय दोसे य विवजगस्स गुणे य भासाय निसेवगस्स • ॥ ५ ॥ ७४८ ॥ महव्वए पञ्च अणुव्वए य तहेव पञ्चासव सवरे य । विरइ इह स्सामणियम्मि पण्णे लवावसकी समणे त्ति बेमि ॥ ६॥ ७४९ ॥ सीओदग सेवउ वीयकाय आहायकम्म तह इत्थियाओ। एगन्तचारिस्सिह अम्ह धम्मे तवस्सिणो नाभिसमेइ पाव ॥७॥ ७५०॥ सीओदग वा तह बीयकाय आहायकम्म तह इत्थियाओ । एयाइ जाण पडिसेवमाणा अगारिणो अस्समणा भवन्ति ॥ ८ ॥ ॥७५१॥ सिया य बीयोदगइत्थियाओ पडिसेवमाणा समणा भवन्तु । अगारिणो वि समणा भवन्तु सेवन्ति ऊ ते पि तहप्पगार ॥ ९॥ ७५२॥ जे यावि बीयो- दगभोइ भिक्खू भिक्स विह जायइ जीवियही । ते नाइसजोगमविप्पहाय कायोवगा नन्तकरा भवन्ति ॥ १०॥ ७५३ ॥ इम वय तु तुम पाउकुंव्वं पावाइगो गरिहसि सव्व एव । पावाइणो पुढो किट्टयन्ता सय सय दिट्टि करेन्ति पाउ ॥ ११ ॥ ॥ ७५४ ॥ ते अन्नमन्नस्स उ गरमाणा अक्खन्ति भो समणा माणा य । सओ य अत्थी असओ य नत्यि गरहामु दिहिँ न गरहामु किचि ॥ १२ ॥ ७५५ ॥ न किंचि रुवेगऽभिधारयामो सदिहिमग्ग तु करेमु पाउ । मग्गे इमे किट्टिएँ आरिएहि अणुत्तरे सप्पुरिसेहिं अञ्जू ॥ १३ ॥ ७५६ ॥ उड्ढ अहे य तिरिय दिसासु तसा य जे यावर जे य पाणा। भृयाहिसकाभिदुगुञ्छमाणा नो गरहइ खुसिम किचि लोए ॥ १४ ॥ ७५७ ॥ आगन्तगारे आरामगारे समणे उ भीए न उवेइ वास । दक्सा हु सन्ती बहवे मणुस्सा ऊणाइरित्ता य लवालवा य ॥ १५॥ ७५८ ॥ महाविगो सिक्खिय बुद्धिमन्ता सुत्तेहि अत्थेहि य निच्छयन्ना । पुच्छिसु मा णे अणगार अने इइ सकमागो न उवेइ तत्य ॥ १६ ॥ ७५९ ॥ नो कामकिच्चा न य वालकिच्चा रायाभियोगेण कुओ भएण । वियागरेज पसिण न वा वि सकामकिश्चेणिह आरियाण ॥ १७ ॥ ७६० ॥ गन्ता च तत्था अदुवा भगन्ता वियागरेजा समियासुपने ।

मुत्तागमे [म्यगर आगारिया दगणो परिता दइ सम्मागोन उपे तत्य ॥ १८ ॥ ७६१॥ पग जहा पणिए उपयट्ठी आयरग ऐउँ पगरेट मा । नपोयमे ममणे नायपुत्ते दधेर मे होइ मई विगयो ॥ १९ ॥७६२॥ ना न फना पिहुणे पुरान चिघाऽमा तार य माह एर । ण्यारया बम्मनः ति बुत्ता तस्मोग्यही मम तिमि ॥२०॥ ॥ ७६३ ॥ गमारभन्ने पगिया भूयगाम परिगह चेय ममायमाणा ने नादम- जोगमविप्पहाय आयस्न हेउ पगरेन्नि गह ॥ २१ ॥७६४ ॥ पितेनिगो मेदुग- सपगाटा ते भोयगट्टा पगिया वयन्नि । वय नु सामु भनोयना अगारिया पेमरने] पिसा ॥ २२ ॥ ७६५॥ आरम्मग चेय परिग्गर न अपिउस्मिया निस्मिय आयदण्डा । तेचि से उदए ज बयासी नटरलगन्ताय दुहाय नेह ॥ २३ ॥ ७६६ ॥ नेगन्नि नयन्नि य ओदए गो पपन्न ते दो वि गुतोदयम्मि। मे उदए साइमणन्तपत्ते तमुदय नाहयद ताद नाई ।। ०४॥ ७६७ ॥ अहिंसय सम्वपयाणुसम्पी धम्मे ठिर कम्मीिवेगहेउ । तमायदप्टेहि गमायग्न्ता नबोहिए ते पडिस्चमेय ॥ २५ ॥ ७६८ ॥ पिग्गागपिग्मीमावि पिर मूले के पएजा पुरिसे दमे ति । अलावा वा नि पुमारए त्ति म लिप्पई पाणिवहेग अन्ह ॥२६॥ ७६९ ॥ अहया वि पिण मिलतु सूले पिग्गागपीड नर पएजा । कुमारग या वि अलग- बुर ति न लिप्पर पाणिवरेण अम्द ॥ २७ ॥ ७७० ।। पुरिन च विद्रा कुमारग या सूलमि केई पऍ जायतेए । पिण्यागपिग्द राठमारहेता युद्धाग त कप्पड़ पारणाए ॥२८॥ ७७१ ॥ विणायगाण तु दुवे महस्से जे भोरए नियए मिक्या । ते पुण्णसन्ध मुमई जिगित्ता भान्ति आरोप्प महन्त सत्ता ॥ २९ ॥ ७७२ ।। अजोगस्व रह सजयाण पार तु पाणा | पमन काउ । अहिए दोपह वि त असाहु वयन्ति जे गावि पडिम्नुन्ति ॥ ३० ॥ ७७३ ॥ उद अहे य तिरिय दिमान विताय लिग तसथावराण । भूयाभिसकाइ दुगुन्माणे वए करेजा व कुभो निहऽत्यि ॥ ३१॥ ७७४ ॥ पुरिसे त्ति विसत्ति न एवमत्यि अणारिए से पुरिसे तहा हु । को सभयो पिण्यापिण्डियाए वाया पि एमा वुइया असचा ॥ ३२॥ ७७५ ॥ वायाभियोगेण जमावडेजा नो तारिस वायमुदाहरेजा । भट्ठाणमेय वयण गुणाग नो दिक्सिए यमुरालमेय ॥ ३३ ॥ ७७६ ॥ लद्धे अट्टे अहो एव तुम्मे जीवा- गुभागे नुविचिन्तिए व । पुल समुद्द अवर च पुढे भोलोइए पागितले ठिए वा ॥ ३४ ॥ ७७७ ॥ जीवाणुभाग नुनिचिन्तयन्ता आहारिया अनविहीरें सोहिं । न रियागरे छपओपजीवी एसोऽणुधम्मो इह सजयाण ॥ ३५॥ ७७८ ॥ सिणा- यगाणं तु दुवे महस्ते जे भोयए नियए भिस्यागं । असजए लोहियपाणि से ऊ २ सु० भ०६] सुत्तागम १७३ नियच्छई गरिहमिहेव लोए ॥ ३६ ॥ ७७९ ॥ धूलं उरभं इह मारियाण उद्दिष्ट- भत्त च पगप्पएत्ता । त लोणतेल्लेण उपक्खडेत्ता सपिप्पलीय पगरन्ति मस ॥३७॥- ॥ ७८० ॥ त भुञ्जमाणा पिसिय पभूय नो ओवलिप्पामु वय रएण । इच्चेवमाहसु अणजवम्मा अणारिया बाल रसेसु गिद्धा ॥ ३८ ॥ ७८१ ॥ जे यावि भुञ्जन्ति तहप्पगार सेवन्ति ते पावमजाणमाणा । मण न एय कुसला करेन्ति वाया वि एसा चुइया उ मिच्छा ॥ ३९ ॥ ७८२ ॥ सन्वेसि जीवाण दयट्ठयाए सावजदोस परिवज्जयन्ता । तस्सकिणो इसिणो नायपुत्ता उद्दिभत्त परिवज्जयन्ति ॥ ४० ॥ ॥ ७८३ ॥ भूयाभिसकाए दुगुच्छमाणा सव्वेसि पाणाण निहाय दण्ड । तम्हा न भुञ्जन्ति तहप्पगार एसोऽणुवम्मो इह सजयाण ॥४१॥७८४ ॥ निग्गन्यधम्मम्मि इम समाहि अस्सि सुठिच्चा अणिहे चरेजा । बुद्धे मुणी सीलगुणोववेए अञ्चत्थय पाउणई सिलोग ॥ ४२ ॥ ७८५ ॥ सिणायगाण तु दुवे सहस्से जे भोयए नियए माहणाण । ते पुण्णखन्धे सुमहऽजणित्ता भवन्ति देवा इइ वेयवाओ॥४३॥७८६॥ सिणायगाण तु दुवे सहस्से जे भोयए नियए कुलालयाण । से गच्छई लोलुवसप- गाढे तिव्वाभितावी नरगाभिसेवी ॥ ४४ ॥ ७८७ ॥ दयावर धम्म, दुगुञ्छमाणा वहावह धम्म पससमाणा । एग पि जे भोययई असील निवो निस जाइ कुओऽमु- रेहि ॥ ४५ ॥ ७८८ ॥ दुहओ वि धम्मम्मि समुट्ठियामो अस्सि सुट्टिचा तह एस- काल। आयारसीले वुइएह नाणी न सपरायम्मि विसेसमत्थि ॥ ४६ ॥ ७८९ ॥ अव्वत्तरूव पुरिस महन्त सणातण अक्खयमन्वय च । सन्वेसु भूएसु वि सव्वओ से चन्दो व ताराहि समत्तरुवे ॥ ४७ ॥ ७९० ॥ एव न मिजन्ति न ससरन्ति न माहणा सत्तिय वेस पेसा । कीडा य पक्खी य सरीसिवा य नरा य सन्वे तह देवलोगा ॥४८॥ ७९१ ॥ लोग अयाणित्तिह केवलेण कहन्ति जे वम्ममजाण- माणा । नासन्ति अप्पाण पर च नट्ठा ससार घोरम्मि अणोरपारे । ४९ ॥ ७९२ ॥ लोग विजाणन्तिह केवलेण पुण्णेण नाणेण समाहिजुत्ता । वम्म समत्त च कहन्ति जे उ तारन्ति अप्पाण पर च तिण्णा ॥ ५० ॥ ७९३ ॥ जे गरहिय ठाणमिहाव- सन्ति जे यावि लोए चरणोववेया। उदाहड त तु सम मईए अहाउसो विप्परिया- समेव ॥५१॥ ७९४ ॥ सवच्छरेणावि य एगमेग वाणेण मारेउ महागय तु । सेसाण जीवाण दयट्ठयाए वास वय वित्ति पकप्पयामो ॥ ५२ ॥ ७९५ ॥ सवच्छ- रेणावि य एगमेग पाग हणन्ता अणियत्तदोसा । सेसाण जीवाण वहेण लग्गा सिया य थोव गिहिणो वि तम्हा ॥ ५३ ॥ ७९६ ॥ सवच्छरेणावि य एगमेग पाण हणन्ता समणव्वएसु। आयाहिए से पुरिसे अणजे न तारिसे केवलिणो भवन्ति

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२ सु० म०७]] सुत्तागमे १७५ ॥ ८०२॥ आउसो गोयमा, अत्थि सलु कुमारपुत्तिया नाम समणा निग्गन्था तुम्हाण पदयण पवयमाणा गाहावइ समणोवासग उचसपन्न एव पचक्सावेन्ति । नन्नत्य अभिओएण गाहावइचोरग्गहणविमोक्खणयाए तसेहिं पाणेहि निहाय दण्ड । एव ण्ह पञ्चक्खन्ताण दुप्पचक्खाय भवइ । एव ण्हं पञ्चक्खावेमाणाण दुपञ्चक्खा- वियव्व भवइ। एव ते पर पचक्सावेमाणा अइयरन्ति सय पइण्ण । कस्स ण त हेउ ? ससारिया सलु पाणा, थावरा वि पाणा तसत्ताए पञ्चायन्ति, तसा वि पाणा थावरत्ताए पञ्चायन्ति, थावरकायाओ विप्पमुच्चमाणा तमकायसि उववजन्ति, तसका- याओ विप्पमुच्चमाणा यावरकायसि उववजन्ति । तेसिं च ण थावरकायसि उवव- ण्णाण ठौणमेयं चत्त ॥५॥८०३॥ एव ण्ह पञ्चक्खन्ताण सुपचक्साय भवइ । एव व्ह पञ्चक्खावेमाणाण सुपचक्साविय भवइ । एव ते पर पचक्सावेमाणा नाइयरन्ति सय पइण्ण नन्नत्थ अभियोगेग गाहावइचोरग्गहणविमोक्खणयाए तसभूएहिं पाणेहिं निहाय दण्ड । एवमेव सइ भासाए परक्कमे विजमाणे जे ते कोहा वा लोहा वा पर पच्चक्खा- वेन्ति अय पि नो उवएसे नो नेयाउए भवइ। अवियाइ आउसो गोयमा तुब्भ पि एव रोयइ ॥६॥८०४॥ सवाय भगव गोयमे उदय पेढालपुत्त एव वयासी-आउसन्तो उदगा, नो खलु अम्हे एव रोयइ । जे ते समणा वा माहणा वा एवमाइक्खन्ति जाव परवेन्ति नो खलु ते समणा वा निग्गन्या भास भासन्ति, अणुताविय सलु ते भास भासन्ति, अन्भाइक्खन्ति खलु ते समणे समणोवासए वा जेहि पि अन्नेहिं जीवेहि पाणेहिं भूएहिं सत्तेहि सजमयति ताण वि ते अन्भाइक्सन्ति । कस्स ण त हेउ? ससारिया सलु पाणा, तसा वि पाणा थावरत्ताए पञ्चायन्ति यावरा वि वा पाणा तसत्ताए पञ्चायन्ति तसकायाओ विप्पमुच्चमाणा थावरकायसि उववजन्ति, थावर- कायाओ विप्पमुच्चमाणा तसफायसि उववनन्ति, तेसिं च ण तसकायसि उववनाण ठाणमेयं अघत्त ॥ ७॥ ८०५॥ सवायं उदए पेढालपुत्ते भगवं गोयम एव वयासी- कयरे सलु ते आउसन्तो गोयमा तुब्भे वयह तसा पाणा तसा आउ अन्नहा? सवाय भगव गोयमे उदय पेढालपुत्त एव वयासी-आउसन्तो उदगा जे तुब्भे वयह तसभूया पाणा तसा ते वय वयामो तसा पाणा, जे वय वयामो तसा पाणा ते तुन्भे वयह तसभूया पाणा । एए सन्ति दुवे ठाणा तुला एगट्ठा । किमाउसो इमे भे सुप्प- णीयतराए भवइ तसभूया पाणा तसा, इमे भे दुप्पणीयतराए भवइ-तसा पाणा तसा । तओ एगमाउसो पडिकोसह एक अभिनन्दह । अय पि भेदो से नो नेयाउए भवइ । भगव च ण उदाहु-सन्तेगइया मणुस्सा भवन्ति, तेसिं च ण एव वुत्तपुव्व भवइ-नो खलु वय सचाएमो मुण्डा भवित्ता अगाराओ अणगारिय पन्वइत्तए ।

१७६ मुत्तागमे [सूयगड मापय ण्ह अणुपुश्वेण गुत्तस्स लिसिस्मामो। ते एम सरावेन्ति, ते एरस वयन्नि ते एव सम ठावयन्ति नन्नत्य अभिओएग गाहावइचोरग्गहणपिमोक्मणयाए तमे पाणेहि निहाय दण्ड । त पि तमिं बुमलमेर भवइ ॥८॥८०॥ तमा बुबन्ति तसा तससभारकडेण कम्मुणा नाम च णं अभुवगय भवर, तगाउय णं पलि- पसीण भवइ, तमझायट्टिया ते तओ आउय विप्पजहन्ति । ते तो आठय निप्पजहिता थावरत्ताए पचायन्ति । थावरा ति युवन्ति यावरा यावरमभारकडेण कम्मुणा नाम च ण अभुगय भवड थापराउय च प पलिक्सीण भवइ । थापर- मायटिइया ते तो आइय दिपजहन्ति तओ आउय विप्पनहित्ता भुनो परलो- इयत्ताए पचायन्ति । ते पाणा वि युवन्ति, ते तसा वि बुचन्ति, ते महामाया ने चिरहिया ॥ ९ ॥ ८०७ ॥ सवाय उरए पेटालपुत्ते भयव गोयम एस क्यासी- आउमन्तो गोयमा नत्यि ण से केइ परियाए ज ण समगोवासगरम एगपागाइ- वाविरए वि दण्डे निविपत्ते । कस्म ण त हेउ ? ससारिया गलु पाणा, थावरा मी पाणा तसत्ताए पचायन्ति, तसा वि पाणा यावरत्ताए पचायन्ति, धापरकायाभो विप्पमुबमाणा गव्वे तमरायनि उववजन्ति, तगमायाओ विप्पमुखमाणा मध्ये थापरकायसि उवयजन्ति, तेसि च ण थावरसायनि उवपन्नाग ठागमेय पत्त । सवाय भगर गोयमे उदय पेढालपुत्त एवं पयासी-नोगलु आउमो अम्हाक वत्तव्य- एण तुम्भ चेव भणुप्पवाएग अत्यि ण मे परियाए जे ण ममगोवामगस्त सब- पाणेहिं सव्वभूएहि सन्चजीवहिं सव्वमत्तेहिं दण्डे निक्तिते भवड । कस्म न त हेउ? सारिया रालु पाणा, तसा नि पागा यावरत्ताए पचायन्ति, थावरा पिपाशा तसत्ताए पचायन्ति, तमकायाओ विप्पमुचमाणा सव्वे यावर कायनि उवरजन्ति, थावरकायाभो निप्पमुषमाणा मन्वे तमझायसि उपवजन्ति, तेसिं च ण तमकायति उवव नाग ठाणमेय अपत्त । ते पाणा वि वुगन्ति, ते तमा वि युगन्ति, ते महा- काया ते चिरहिश्या । ते यहुयरगा पाणा जेहि समणोवासगस्य सुपगस्वाय भवइ । ते अप्पयरगा पाणा जेहिं समगोवायगस्त अपराममाय भवइ । मे महया तसकायाओ उवसन्तस्म उवटियस्म पडिविरयस्म ज ण तुम्भे वा अनो या एवं वयह-नत्यि ण से केइ परियाए जति समणोवासगस्म एगपाणाए वि दण्डे निक्यिते । अय पि भेदे से नो नेयाउए भवइ ॥ १०॥ ८०८॥ भगव च ण उदाहु नियण्ठा गलु पुच्छियच्या । आउमन्तो नियण्ठा इह सलु सन्तेगइया मणुस्सा भवन्ति । तेसिं च एव वृत्तपुल्य भवइ-जे इमे मुण्डे भवित्ता अगाराओ अणगारिय पन्वइए एसिं च णं आमरणन्ताए दण्डे निक्सित्ते । जे इमे अगारमावसन्ति एएनि २सु० भ०७ सुत्तागमे ग आमरणन्ताए दण्डे नो निक्खित्ते। केई च णं समणा जाव वासाइ चउपञ्चमाई छठसमाइ अप्पयरो वा भुजयरो वा देस दूइजित्ता अगारमावसेज्जा ? हता- वसेज्जा । तस्स णं त गारत्य वहमाणस्स से पच्चस्साणे भङ्गे भवइ ? नो इणद्वे सम? । एवमेव समणोवासगस्स वि तसेहि पाणेहि दण्डे निक्सित्ते, यावरेहिं पाणेहि दण्डे नो निक्सित्ते । तस्म ण त थावरकाय वहमाणस्स से पचक्साणे नो भने भवइ । से एवमायाणह ? नियण्ठा । एवमायाणियव्व ॥ भगवं च ण उदाहु नियण्ठा रालु पुच्छियव्वा-आउसन्तो नियण्ठा इह सलु गाहावई वा गाहावइपुत्तो वा तहप्पगारेहि कुलेहिं आगम्म धम्म मवणवत्तिय उवसकमेजा हन्ता उसकमेना। तेसिं च ण तहप्पगाराण धम्म आइक्पियव्वे ? हन्ता आइक्सियव्ये । कि ते तहप्पगार धम्म मोचा निमम्म एव वएजा इणमेव निग्गन्य पावयण सच अणुत्तर केवलिय पडिपुण्ग ससुद्ध नेयाउय सहत्तण सिद्धिमग्ग मुत्तिमग्ग निजाणमग्ग निव्वाणमग्ग अवितहमसदिद्ध मन्वदुक्सप्पहीणमग्ग । एत्य ठिया जीवा सिज्झन्ति धुज्झन्ति मुच्चन्ति परिणिव्वायन्ति सव्वदुक्साणमन्त करेन्ति । तमाणाए तहा गच्छागो तहा चिट्ठामो तहा निसीयामो तहा तुयट्टामो तहा भुक्षामो तहा भासामो तहा अब्भुट्ठामो तहा उठाए उढेमो त्ति पाणाणं भूयाण जीवाण सत्ताण सजमेणं सजमामो त्ति वएज्जा' हन्ता वएना । कि ते तहप्पगारा कप्पन्ति पव्वावित्तए ! हन्ता कम्पन्ति । कि ते तहप्पगारा कप्पन्ति मुण्डावित्तए हन्ता कप्पन्ति । कि तहप्पगारा कप्पन्ति सिक्सावित्तए ? हन्ता कप्पन्ति । कि ते तहप्पगारा कप्पन्ति उवहावित्तए ? हन्ता कप्पन्ति । तेसिं च ण तहप्पगाराण सव्वपाणेहि जाव सव्वसत्तेहि दण्डे निस्सित्ते? हता निक्सित्ते । से णं एयारवेण विहारेण विहरमाणा जाव वामाइ चउपञ्चमाइं छटसमाइ वा अप्पयरो वा भुजयरो वा देस दइजेत्ता अगार वएज्जा ? हन्ता वएना । तस्म ण सव्वपाणेहिं जाव सव्वसत्तेहि दण्डे नो निक्सित्ते? नो इणढे समढे । से जे से जीवे जस्स परेण सव्वपाणेहि जाव सव्यसत्तेहि दण्डे नो निक्सित्ते । से जे से जीवे जस्स आरेण मच्चपाणेहि जाव सत्तेहिं दण्डे निक्सित्ते । से जे से जीवे जस्स इयाणि सव्वपाणेहिं जाव सत्तहि दण्डे नो निक्खित्ते भवइ, परेण असजए आरेण सजए, दयागिं असजए, असज- यस्स ण सव्वपाणेहि जाव सत्तेहिं दण्डे नो निक्पित्ते भवड । से एवमायाणह ! नियण्ठा से एवमायाणियव्व ॥ भगव च णं उदाहु नियण्ठा पल पुच्छियवा- आउसन्तो नियण्ठा इह सल परिव्वाइया वा परिवाइयाओ वा अनयरहितो तित्याययणहितो आगम्म धम्म सवणवत्तिय उवसरमजा? हन्ता उवसामेजा। १२ सुत्ता० ar

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आमरणं दुग्गइगा - सुचात ते तसावि वुचति ते महामाया ते ठिझ्या ते बहुयरगा आयाणसो इति से मह्याओ ण जण्ण तुम्मे वदह अयपि भेटे से णो णेयाउए भवइ-भगव च ण उदाहु सन्तेगइया मणुस्सा भ त जहा-अणारम्भा अपरिग्गहा धम्मिया धम्माणुया जाव सव्वाओ परिग्ग पडिविरया जावज्जीवाए, जेहि समणोवासगस्स आयाणसो आमरणन्ताए निक्खित्ते, ते तओ आउग विप्पजहन्ति, ते तओ भुजो सगमायाए सोग्गइगा भवन्ति । ते पाणा वि वुचन्ति जाव नो नेयाउए भवइ । भगव च ण सन्तेगइया मणुस्सा भवन्ति । त जहा-अप्पिच्छा अप्पारम्भा अप्पपरि धम्मिया धम्माणुया जाव एगचाओ परिग्गहाओ अप्पडिविरया, जेहिं समणों गस्स आयाणसो आमरणन्ताए दण्डे निक्सित्ते । ते तओ आउग विप्पजह तओ भुजो सगमादाए सोग्गइगामिणो भवन्ति । ते पाणा वि वुचन्ति जा नेयाउए भवइ । भगवं च ण उदाहु सन्तेगइया मणुस्सा भवन्ति । त आरणिया आवसहिया गामणियन्तिया कण्हुईरहस्सिया, जेहिं समणोवास आयाणसो आमरणन्ताए दण्डे निक्सित्ते भवइ । नो वहुसजया नो बहुपडि पाणभूयजीवसत्तेहिं अप्पणा सन्चामोसाइ एवं विप्पडिवेदेन्ति-अह न हन अन्ने हन्तव्वा जाव कालमासे काल किच्चा अन्नयराइ आसुरियाइ किन्चिा जाव उववत्तारो भवन्ति, तओ विप्पमुच्चमाणा भुज्जो एलमुयत्ताए तमोरुन पञ्चायन्ति । ते पाणा वि चुचन्ति जाव नो नेयाउए भवइ । भगवं च ण सन्तेगइया पाणा दीहाउया जेहिं समणोवासगस्स आयाणसो आमरणन्ताए दण्डे निक्खित्ते भवइ । ते पुन्वामेव काल करेन्ति करित्ता पारलोइयत्ताए यन्ति । ते पाणा वि वुचन्ति, ते तसा वि वुच्चन्ति । ते महाकाया ते चिरी ते दीहाउया ते बहुयरगा, पाणा जेहिं समणोवासगस्स सुपचक्खाय भवइ, नो नेयाउए भवइ । भगव च ण उदाहु सन्तेगइया पाणा समाउया, जेहि स वासगस्स आयाणसो आमरणन्ताए जाव दण्डे निक्खित्ते भवइ । ते सयमेव करेन्ति, करित्ता पारलोइयत्ताए पञ्चायन्ति । ते पाणा वि वुचन्ति, तसा वि वुर्च ते महाकाया ते समाउया ते बहुयरगा जेहिं समणोवासगस्स सुपचक्खाय जाव नो नेयाउए भवइ । भगव च ण उदाहु सन्तगइया पाणा अप्पाउया, समणोवागाय- मायो आमरणतारा.जाव दण्डे निक्खित्ते भवह। ते पन्च । 4 काल को

Sutagame

Author
Swami, Sudharm
Title
Sutagame
File name
Sutagame
Text
OCR done
Citation
1951
Published
2011/01
Publisher
Gudgauv., Chavani Sutragam Prakashak Samiti, Jainsthanak Railway Road
Language
Sanskrit
Pages
84
Library
Shri Jain Swetamber Khartargacch Sangh, Jaipur
Classification
Devotional
DLI number
446206
Barcode
99999990027825.00
Scanning centre
Banasthali University
Digital publisher
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VMLT id
ynYavj1W27R
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