Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner

Arth Haribalam Ras

Khamraj · 2011/08

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॥ अथ हरिवलमछीको रास लिख्यते ॥ ॥ दुहा ॥ मयम धगधव जगधणी, प्रथम श्रमण पण ए६ ।। प्रयम नीकर जग भयो, मथम गुरु पमह ॥ १ ॥ विश्वस्थिीन कारक प्रयम, कारक विष उपोत ॥ धारक अतिशय आदि नि न, कारक मानिधि पान |॥ २ ॥ सवप इछा इसनी, पारण दिन पग नेह मष्ट नेहने सदा, नाभिनंदन प्रणमेह ॥ ३ ॥ सिद्धरना संगमें, अहक एक्यो दिन रात ॥ हुं तस पदपंक जन, निन्य उठी परभान-॥ ४॥ हमासन जे सरसनी, वरम ति बनन विलास ॥ कविजन कंग हृदयमें, करती बुद्धि काम ॥५॥ न ई मणने मारनी. पारनि जद अंधार ॥ मुझ मन मंदिर पसी. करवा मश उपगार ॥॥ पाना मुझ महोटो करी, टेजे र • चन रसाल ॥ गरंगीली जनमभा. मामले पर उनमाल ॥ १७॥ जनाएं चित्तम, ने तूं कर पात १ बनननी रचना रम दिया, वाचे नुन आग्मान || < | गुरु माना माता पिता, गु रुपी अधिक न कोष ॥ देवधर्म गुम औरम्या, बलिहारी गुरु सो य॥९॥ ने गुरु चरण नमी करी, भविपणन नकार || गम र हरिरल नगो, पुण्य उपर अधिकार || " ॥ पुण्ये वंचित पार्याय, पन्य महि नव नाच ॥ पृण्य महिला मेरम, पृ मुद सद ॥११॥ जीवदया पाली निग, निण उपरायपुर ॥ मर नर नम सानिब करे, मान ते दिन धन्य ॥ १२॥ जीव दपायी पामियो, हरिवन मच्छी राप || तास पच मगतां पंको, मपनों पानक भाय ॥१३॥ रास सरम मुगमां थी 4 जे को करशे नात ॥ तेहने नस बल्लम तणा, सम देउं सात ॥ ११ ॥ जिम मृग नाट लिपो रहे, निमुणे यह एकरंग ॥ तिम मुणजो भवियण तुमें, आणी वित्त अभंग ॥ १५ ॥ ॥ दाल १ ली । रमीयानी देगी। ला जोजननो रे जंबुद्वीप ए कहो, शाश्वत वर्तुलाकार ॥ सौभागी ॥ नेहमें क्षेत्र ए नंद हामणं, कुलगिरि सात कक्षा सार ॥ सो० ॥१॥ भाव परीने रे भरि में मामलो ॥ रसिया देई रे कान ॥ सो० ॥ सुणतां रंग रस ऊपने, मुखमै राख्यां जिम पान ॥ सो• ॥ भा० ॥ २॥ क्षेत्र तिनमें करमी बसे निहां, भमि मशि कपी रोजगार ॥ सो०॥ आजीविकायें जीव जीवाढवा, पाख्या ए तीन व्यापार ॥ सो ॥ मा० ॥ ३ ॥ पीनां क्षेत्र जे अगला धर्मना, भारुयां अ करमि उदार । सो० ॥ तिहां को व्यापार तीनमें नवि लहे, छे कक्षना भाहार । सो० ॥ भा०॥ ४॥ तेहमें पदयुगलादिक क्षेत्र जे, मरन ने ऐरवत विदेह ॥ सो० ॥ ए ना क्षेत्र जंबुद्वीपमा, गोभिन नोभे छ एह ॥ सो•॥ भा० ॥५॥ए नव क्षेत्र सात छे फुलगिरि, तेहनो अनिही विस्तार ॥ सो० ॥ क्षेत्र समास में गुरुमख सांभली, धारचो तास विचार || सो० ॥ भा०॥६॥ पण इहां हग्बिल मच्छी रायनं, चरित्र मणो चित्त लाय || सो॥ हक उखाणो जगमा इम को, जे परणे ते गवाय ॥ सो० ॥ ॥ भा० ॥ ७॥ हिरे जंबुद्रा अति भलु, भरत क्षेत्र कहाय ॥ मो० ॥ पांचशे छब्बीश जोजन पटकला, धनुपाकार सोहाय । मो० ॥ भा•॥ <!! सहस पत्रीय ते जन पद नेहमां, तेहना स्त खंड होय ॥ मो० ॥ निण पिचगे पस्या बैनाड्यो रजतनो, बनण पचासनो जोय ॥सो भा॥९॥ पटखहमें खंड 11 तिन मणे करपा, दक्षिण उत्तर श्रेण || सो० ॥ सोल सो महस ए जनपदमें . यसती अनार्यनी तेग ॥ सा ॥ - । भा• 2.} मास परवीश भार्य भति मला, की अर्ध ममेत || मो. ॥ श्रीजिनधर्मनो बाम तिहां लो, महस वनीग पध्य एत ॥ सो० ॥१॥ भा०॥ ते मारे यहां आस्य देशमां, कनकपुरी मभिधान ॥ सो ॥ सार सोनामय मुंदर शोभती, भारपुरी उपमान || सौ. ॥ १२ ॥ भा० ॥ नलिनीगुरम विमा न तणी परे, एकविन भूमि भावास । मो॥ रतन जटितमें गो स विरानता, करता नेन प्रकाम ॥ सो० ॥१३ ॥ मा० ॥ कृती आर प पर टिभेणि रामती, छाननी विनपना पंक्तिसो देश देशांतर विगम करे बहु, परसे वन धारा शक्ति ।। सो० ॥ १४॥ मा० ॥ पनन पनद भंडारी सारिखा, वसे विहां नगरीमां लोक ।। सो० ॥ पंच विपपना रसतीगा रहे, भोगी चातुर लोक ।। । मो० ॥ १५ ।। मा० ॥ पट दरसनना पोपक मन बहु, पाले निन निन धर्म ॥ सो• ॥ पर घर भत्कार करे घणा. लेहवा शिव मुखराम ॥ सो० ॥ १६ ॥ मा. || निनशासनना देउल दीपा, पत्री यदा मामाद ॥ सो.॥ चोराधी मंटर भनि यो प, करता सरग पाद मो० ॥ १७ ॥ भा• ॥ दंडपना भ निसरने फरारे, नाचे पाचे मनरंग ॥ सो० ॥ धन्य टिवम मन जिन शिर चही. पावन करवा मुझ भंग । मो०॥ १८ ॥ भा०॥ श्रीजिन फेरी भगति करे सदा, मरिक जीर अपार ॥ मो. " नायकर पद ने उपरानता, सरगनी परें मार ॥ नौ ॥१०॥ ।। भा• ॥ याण महार बस निण नगरीये, नागिय मा भर नार ।। सो ॥ गह मद मंदिर पालि भोभा पी, भूरमपी उर हार ॥ पाठांतर ॥ नगर फनकारनामें मोम. समपुर्ग अनु गर । सो० ॥ २ ॥ मा० ॥ नंदनम्न मम परिसर वाटिका, विदिमि नमरीनी पास || सौ.। वापी कल मगेवर जन भरर्धा, मटका पले मुनाम ॥ मो० ॥ २१॥ भा. ॥ काल इकाट ने (४) कोनवि कालिखे, महोनिन मुखनी ऐ वान || सो० ॥ ईनि उपदर सुपर्ने नदि जाणे, पुहवीय मगटीए ख्यान || सो. ॥ २२॥ । भा० ॥ कनकपुरीना प गुण सामली, लानी लंफा तिवार ॥ गो. ॥ जलनिधिमां जा वूही बापडी, नाणे सकल संमार मो० ॥ २३ ॥ मा० ॥ सर्गपुरी पण गभर्मा मह रही, नि मणी नेहना भयाम ॥ सौ. ॥ एह नगरी कनकपुरी तणी. दिन दिन पत्ती छ लान । सो ॥ २४ ॥ मार ॥ करकरी नोरे वयण पखाणतां, पभणी पहेली ए बाल ॥ सो० ॥ घिविजय को भविपण सांभलो, आगल वान रसाल ॥ ॥ सो० ॥ २५ ॥ भा.॥ ॥ दुहा ।। तिण नगर्गय राजी, वसंतसेन भूपाल ॥ न्याय निपुग यमदेव यं, करुणात कपाल ॥ ॥ वाक्य बल १ रिद निम्यो, भुनयलि भीमममान ॥ अरियण सबला वश कर्ग, उतारयां नम मान || २॥ परनाने पाले सदा, को इथली छांद ॥ दाण जगात दिम नही, करदंड वंधन क्याड ॥७॥ करदंड मुनि देउल गिर, न त्रीशिरकैच ॥ वसंत मेन नृप इणि परें, पाले गम्य विशेष ॥ ४ ॥ तम पटराणी पर मिनी, रूपे ग्भ मपान || गाल मुरंगी शुमरती, यमंतसेना से भिशन ॥ ५॥ मालती मधुकरनी पर, भीतरी जिम जलमीन ॥तिम नृगणी एकमना, रंगे रहे लय लीन ॥६॥ दोगंडक मानी पा, पनविषय मुख्य भोग ॥ नागणी मिलमे सदा, पूर्व पुग्य मयोग || ॥ ॥बननी ॥ रहो रहो रहो रहो पाता पदेनी दिलमे माग ने गनी. दामना साप लाल रे ॥ जन्न भफल लेस मंगे, ना पायो भाप लालो ॥ १॥ गुणग मनेड़ा मामलों . थागल वात रसाल || ला ॥ जीवदया पाली भिणे, ते लगो में गल पाल ॥ ला ॥२॥ म. ॥ राम ऋदि रमणी घणी, पाय पुष्पपमाय ॥ ला || मुरपत्तिनी पर रानी, पुढचीये ते गारा AIRTER | सु• ॥ पण उस पुत्र ते को नहीं, तेणें चिंतातुर होय ॥ ला. याय उपाय करे घणा, टेकी न लागे कोय ॥छा०॥४॥मु.॥ देव दक्षगर लव नौ मिले. तो पण तिण थी न पाय || सा०॥ कर्म पागल चाले नहीं, जो करे लक्ष पाय ।। ला० ॥ ५ ॥ मु. ॥ माहादेव महोदो महीतले, लोक माहे परसिद ॥ ला ॥ पार्वती सरखी नारीने, करमें पुष न दीय ॥ ला० ॥ ६ ।। मु॥ तो बीजार्ने गर्नु, ए सवि कर्म नां काम ॥ सा• ॥ कर्म साबाई जो दुवे, मनांछित फल ताम 17. एक शुभ फरें करी, पुत्र तणे घरे पत्र ला. ॥ नाप करे चिह इंडमा, राख पाना मूत्र ! ला. ॥ ॥ ८॥ मु० ॥ एकने पुर दिना सही, सूना तस भागार !! सा. ॥ऐन मंदिर सम जाणीये, पुत्र विना परवार । ला• ॥९॥ ॥ पुत्र विना गति को नही, पुत्र विना नही स्वर्ग || सा० ॥ लौकिक मतना शाखमें, भाप रुपियन वर्ग ॥ ला० ॥ १०113. उक्तंच ॥ गाया । गेई तमि मसाणे, नच्छ न दीसंनि भूलि धूसराया || देन परत रत, दो तिनि भिान दीसनि ॥शक । अत्रस्य गतिनास्ति, सगनियर नेवर ॥ तस्मात्पू प्रमुरवं रटवा, पथान म ममाचरेत् ।। ॥ दाल उपाली !! अहोनिस दस दिनां करे, वसंतगेन भूपारा लागि शवमा पर ध्यानिपी, आदी नित्यो तदार दान ।। २१ स. ॥ भागन नीगमी को, शाम तणे अनुमार ।। या। एसो पंडित देसाने, नरपति पुग्यो अपार ॥ ला. 981 उटीने मीरा करे, मार पी मनातला.

- मुद्रा सहित फल फ्ल. पुस्तक पूने उगाह ॥ ला• ॥ . १३-11 मु०॥ येकर जोडी नये, कीजें करुणा कपाल || ला॥ जूको मम माइरे, दोशे बाल गोपाल || ला० ॥ १४॥ मु.॥ तर पंडित नरू जोइन, बेला साग सार । ला० ॥१५॥. लगन कहे रायने, मांभलमो मुविचार ॥ ला ॥ पुत्र ने तुम करम नही, पूच भावी भोग ॥ ला ॥ पण एक पुत्री सही, पूब पुण्य संजोग । ला० ॥ १६ ॥ १०॥ रूप रंभास रिखी, नंदिनी तोहागे तुम ॥ ला• ॥ जाणीयें वीनी शारदा,' गट होर ते गुप्त ।। ला०॥ १७ ॥ १०॥ एम कहीने विम ते गयो लो पंछित दान ॥ ला० ॥ नृप मनमें हररुयो पणं, निमरर कग इकतान ॥ ला० ॥ १८ ॥ सु• ॥ विम वचन ने योगयी गणी गर्भ घरेप ॥ला ॥ यमंट का फल फूल, शोभित र पना लहेय ।। ला• ॥ १९ ॥ म. ॥ जागी तर नृपने कई, पना तणो अधिकार ॥ ला ॥ सांभली ना हरख्यो पगं, न श्रीफिरतार ॥ ला० ॥ २० ॥ मु.॥ हरखित यह रागी, ते गर्भगतन II ला.॥ अनुक्रमें मारा गयई, जन्नी पुत्री र ॥ ला॥ २१ ॥मः ॥ हुवा हरख वधामणां, घर पर। गलमा ल । ला• ॥ लब्धिविनय रंगें करी, पमणी चीनी दाल ॥ ल ॥ २२ ॥ १० ॥ ॥ दहा । गन्मोच्य अति है कर. वमंतर्मन भूपाल || भाष माणक माती घगा, वरसे ज्यु वरसाल ॥ १ ॥ कुंभम केसर का टणा, दीन को विशाल [! सोहर सपि टोल मिली, गारे गीव रमा ॥२॥ घर पर गुड़ी उछ है, घर घर द्रोणी माल । पर घर तोगा यांबीयां, दोमे झाक प्रमाल || ३ || नृत्य करे निदवा भला, खेले नवना सल ॥ वंडीजन मक्या परा, उप भारे रंगोल ॥ ४ ॥ इम उच्छा करना थका, बोल्या दिन ने " पार ।। नगरोजन सा पोपीया, देई मिष्ट आहार ॥५॥ निन कट्टर मी कारे. पुत्री मना टबीन । मुपन तणा अनुसारथी, संनमिरि ते कहीन ॥६॥ फमरी ते दिन दिन बये, ज्यं गधे सुदंर !! चंद्रकला जिम पीमयी, वाघे तेज अखंड ॥७॥ इम करतां वपती यर, पंचवरसनी पाल ॥ गमलम ई करी. भइ पापी नीशाल ॥ ८॥ वटदराननां शान ने, तेदर्मा यई प्रवीण ॥ रंग राग नाटक कला, यंत्रराजित मिलीन ॥९॥ पट मापा महनी मुवं, चौपट कलानिधान || अभिनर जागे शारदा, प्रगट पर सावधान ॥ १० ॥ इम करता ते अनुरूमें, बरस ययां जद सोल ॥ नवयोवन नारी तणा, सलथ्या काम कलोल ॥ ११॥ मान पिना हरख पणु, पुत्री देसी रदम ।। परनी चिना चित घरे, करतां कोरियतम ।। १२॥ ॥ दाल ३ जी ॥ मुमति सदा दिलमा धरो॥ ए देशी ।। ति ण नगरीम एक दे, धीवर दरिनल नाम || सनेही ॥ अपर मोव हणे सदा. मेले दुष्कृन टाम ॥ सनेही ॥ १॥ वे मुपजी तेनी कया, मूकी सपलो प्रमाद ॥ स० ॥ साकर दाग ती परे, विण पइस त्यो स्वाद || स० ॥ २॥ ६ ॥ धीरर ने ना ण नही, जीवदयानो धर्म ॥ म. ॥ उपम उदरने कारण, कर नित्य करणीहकर्म ॥ स०॥ ३ ॥ १० ॥ विगांधग दुग्मर पेंटने, पेट कराने वेड । सः॥ उत्तम मध्यम मागीने, पेट ते रावेने - ८ । स• ॥ ४ ॥ ६० ।। पेटो कारणे जीवडा, नारे देश संदेश - || स || नावे जलनिरिमारग, पेटने हेतविशेप ॥म. ॥१॥ १. ॥ अगन्यांनी करणी करे, नोरी हेरी मत्वर । म ॥ पटना = अर्थी जे अरे, न गणे मस अभक्ष ॥ स.॥६॥ १०॥ यानक ला दल पर्ग, नहा नटवी जोर ॥ म०॥ मार व जमने, पटने भय पोर ॥ स ॥७॥ ६ ॥ जिनामादि माना.

1 T नागरपि Tara TM पर मागे पाग पाया। पटन कारण ।' म गानद मांग राजा पर क्या नीर । }} • Iz.लिम ] हबर माना काल जन }} , रमाका TITH र नन मानाच्या 477 1 दिन हग्रिम न जलाठे पनियर वो मामा तिमे जाल ना रहा U 11 ना राग । 7 का . 4 - म ३ T श्रत म म राणा.. 7 पहाग में मारमा जादराना म पदयापारी - धम । दाणे गया. ग गदा पटवा नही नमा नाम निज गलल प.शहा या प्राणा मन जीरा ने पार नही. पान त ? ग्व अपार । म प्रमदन नकोदो, पडीया नरक मनार १८ ॥ । माता पितादिक बनवा, पाम चिया ने मंद ।। म ॥ दालिद दांडग नपिटल, मले न बल्लभट 11 म. I{ १९॥ ६० ॥ हेप दिये को दिन पर्ने, दर को दान मपात्र मनेहयो दश गुगो लाम छ, जीवनतन को गार । म २,८०॥ इम उपदेन ते सांभली, बोले पछी नि म - - ॥म० ॥१०॥ २१ ॥ धीवर फुलें आची पट्या, स्पां रहे गुरु नमान ||म० ॥ आनीविका ए पेटनी, दोषी करमें निदान, म०॥०॥ २२ ॥ पण मुस्जी तुम पचनयी, आनी में पप टीप म. ॥ पंडली जालमा जी ने. तेहने में जीरिन दौर ॥ म.॥• ॥ २३ ॥ इणि परें अभिग्रह आदरी, हरिवल पलियों नाम ॥ स० ॥ पनि पण ईपी रोषता, पोता धीने टाम ॥ म. ॥• ॥ १४ ॥ एलुआ करमी जोर जे, नरत मोरे उपदेन ॥ स. ॥ भारे करमो जीवरा, मान नही लबला ॥ स० ॥ १० ॥ २५ ॥ पापीने मनियोपा, पन पो सा नाय 1 स. ॥ टपलो मरागे चहावी, यारीसो नर गार || सः ॥६॥ २६ ॥ हरिवलनी परें मागोपा, गुरुमुर परे ना ॥ सा ॥ गुरुनां वचन ददय धरे. पनगउन लो नेहम... ॥ २७ ॥ लगिरनय गंगे करी, भागी ए. पीनी दाल ॥ ॥ हरिवल जीवदयापकी, लेहो मंगल मानग०॥१. ॥२८॥ ॥ दुरावल अभिप्रा लोने, पामा वलियो जाम ॥ शिल भगरें मर मारपी, मस्सिन जलनिधि स्वामि ॥१॥ भासी मानी देवनां, रूप को नमकाल ॥ धीरन मन ग्रो मना, मज दुवो एगल ॥1॥ धीर ने जलमें ना, यांनी नानी बाल ॥ मार मगनो जालना, लांश पर माल।। ॥ तर धीवर ने पाउने. एके रुगारंत ।। रुन सरन टये परी. पाने से उलसंत ॥ ४ ॥ वली बीजे पानमना, डेरा द्वानां ना ॥ नानी दा सिरि मन्जन, याप्पी जाल मागल ॥५॥ते पण बोजा कोचो, नोपर निन मंमार का सोसार लारितो. जास ने धोनी बार ॥६॥ जमीन

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... इम करतां संध्या पई रे, आव्यो नगर ननीक ॥ पण निज मंदिर नारीनी रे, मनमें आणी लोक ॥म् ॥ १२ ॥ पेट भरा नही नही रे, मोरो रांड कुहाडा ॥ जाइश जो खाली परे रे, पेसो लेई राड ॥ म० ॥ १३ ॥ काली नागणनी परें रे, रोपे भरी छ चंट ॥ छोकरडांने मारे पणु रे, पोले ज्यु खोखर भंट ॥ मू०॥ १४ ॥ मुखमांची मोठा पटे रे, कोइ बोलावे पोल ॥ वलगे वापणनी परे रे, राखे नही तस तोल ॥०॥ १५ ॥ दीपालीनो परोडीयो रे, दीमंती जाणे अलछ ॥ आंगण आवे को मानवी रे, देसी जाये गछ । मु० ॥ १६ ॥ कूड़ा बोली फर्कशा रे, दे वली अछतां आल ॥ गुण अवगुण जागे नहीं ने, परिणामें विकराल ॥म. ॥ १७ ॥ उतरे जे वर्ष सातनी रे, ने ८ पनौती कहाय ॥ पण लागि पनाती जन्मनी रे, ते कि म रनरी नाप ॥ ॥ १८॥ जाणी वंशुल कोयला रे, एहवं रूप नीहाल ॥'सापानी संख्या नहीं रे, जाणीय पेटमें काल ॥०॥ १९ ॥ घीपर कहे मुझ नारीनां रे, केतां क ह वखाण ।। पूर्ण पापना जोगी रे, मिली ए कर्य प्रमाण ॥म० ॥ २० ॥ हरिस्ट चिनचिन रे, ननड्यो जचा जीव ॥ घरे जावं, तो बोकडी रे, रूली कर रीव ॥ मू० ॥ २१ ॥ ते माटे वनमें रही रे, रजना लंड विराम || दिन उगे घर जाइश रे, जर जीविक ताम ॥ २ ॥ ३२ ॥ इम नाणी ने वनमें रे, हरिवल रहियो ताम ॥ कालीकाने देवलें रे, लीयो निहां विश्राम ॥ ॥ ॥ २३ ॥ पीवर मूतो चितो, पन धन जीवदया धर्म ।। एक में जीव उगारीयो रे, तो वाधी मुझ शर्म ॥ मू० ॥ २४ ॥ माम नि आनथी रे, हणयो नही कर जीर ॥ जल निधि नो पनी देवनारे, फलशे मुझ सदीर ॥०॥ २५ ॥ पातरस देवी पार रे, धीवर हरसे पइट || जीवदया धर्म उपरे रे, -

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Tom बिनम आरनो, परवान हो यर्ग आगो त के ! प्पहारी रम्यगे पणं, पुमगन हो देखीने पिन नं : माने, निन परन से लाने वित्त के 10 शनी नंदिनी, मुली कम हो निरवाही पार Tीति मिनी, कि हमिणी कि ॥॥॥ हि अलगी कि नागी, सिं किलां अन पसरत से॥ किहां इमर्गने, म कि ये मान के ॥ . ॥ ॥ मानि म सरगी गरले संसार के | किस जारे प्यार के ॥के.॥६॥ री, पर एक नामे दम पर के ॥ मला में. इसी को नरपे नी फेर के कुं. !:: तपरकर, पल माजे दोनिन नाद ! पदपी, किरदे माने गरे॥ मना, परनार्गो सा घरे गमः । मोपलो. सीपारगिनीमा गिरनां पदाग्निां. देयतां पापमपामारी.जोर पा ॥5॥१॥ जनमें पारे पास नरनिररने पण ना रोक के.॥ गरम अतिर ॥ परनाना -- मिलन गंगन ॥ शि:- net." परेशाने बर्ग ए %3-

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रजा ॥ १ ॥ अव रत्न दो लेइने, आदी / नुम कम ॥ उघ तभी उतारला, आची चडो यह सम ॥३॥ हरिवल वणीक ते जाणीने, विनवे कुमरी वाम ॥ धीवर सूतो जागीयो, केहने के हे भिराम ॥ ४॥ हरिलंकी अप्सर समी, देखी कुमरी रूप ।। धीर मन विन्हल ययु, ए | दीसे सरूप ॥ ५ ॥ चमत्कार पिचमें लही, धीवर चिंते वाम ॥ कोइक वात विचार के, मौन करगर्ने काम ॥६॥ अणवोल्यो ऊठ्यो तुरत, करी असवारी सार ।। फुपरी मन हरखित यई, नाल्यां पय विचार ॥ ७ ॥ पाणीपंया घोडला, तेहई करहा जोर ॥ पंथे चाल्या चटवडी, पहोतां ने वन घोर ॥ ८॥ वसंतसिरी कुमरी डिवे, टाली सप टी वीक ॥ हरिवलने वोलावा, आवी पास नजीक ॥ ९ ॥ ॥ दाल ६ठी ॥ पारकर देशयी आयो ॥ ए देशी ॥ हिवे हरिवल प्रभुनी बोली, मनवल्लभ पनहें मालो रे ॥ माहरा जी बननी तुम बोलो | हिवे काई दर मत आणो, मा मेल्पा तुम अम टागोर ॥ मा० ॥ १।। मुझ मरखो नुन नारी, पिण पैसे मिनि मुख कारी रे ॥ मा० ॥ कनक रयण के साये, नुमें वावरो मुनिज हाय रे ॥मा० ॥२॥ पेहरा नव नवा वाचा, नर तारी वांधो पाया रे ॥ मा० ॥ खटग्स रमवती सारी, करी पारसं मोदनगारी रे।। मा० ॥३॥ तुम संग रहे कर जोडे करंटे हल ते आलम छोडी रे ।। मा• ॥ ९; तुम प्रेम विलुद्धी, मा थोई हुँ म सूधी रे ॥ मा० ॥ ४ ॥ हिव नुस ययग न लोएं, जीविन लगें वरमाला रो रे ।। मा० ॥ करहा ने साते ओप्पा, लैई तुम गजे सॉप्यारे ॥मा ॥५॥ नन मन धन तुन केरं, क रिसपनो ए भलारे ॥ मा. ॥ एक तुम मेहेरनी आशा, अमें गर मेमना पामारे ॥ मा० ॥ ६ ॥ राणे परें कनरी. माले, पण हरिरल वाया न खोले रे ।। मा. ।। तब निहां बुमरी - तमामे, शपथगिक न भासे रे ॥मा॥ ७ ॥ इमारता गाने हागं । दीर मुख श्याम ज्यं भाणं रे ॥ मा० ॥ दिन T ने दीगे, दीन वध पिणो धीरे !! मा० ॥ ८ ॥ मागे मालानो पिंड, गाणे पाइयो दे। दंडरे ॥ मा० ॥ देही गरीगर वान, गलि मागे कोफिल मान रे|| मा॥९॥ माता पीय नाणी, ना मरी मन उलनाणी रे || मार ॥ दी पर निशानी, नित पद हाणीने हागीरे ॥मा• ॥१०॥ मराम कर मम्मे, फल चाम्या और आयो रे || मा०॥ wr Tना पामी, पण निमच्यो कना निकामीरे ॥ मा०॥ । पंग चहारी, पण देने में प्रपदाची रे ॥ मा. इल परजादा मही, पण पानी मनि गुको रे ॥ मा० ॥ १२ ॥ मग तो मा., गोला गाफण पण पोईरे मा. ॥ तिम पसमागा मेन्या, निन मंदिर फुल पारेन्यो रे ॥ मा• ॥ " " नाग नापन, म ने लाहो निगरे ॥ मा. ॥ 17 Rन मी, नाशि ही न पानीमा !! पर. नांगो पिमामी, दीपक कामा? नागना जे करे मंग, ना जानर ने गोटा दंग । नाय ने गिरने नग्न, निज मन में !! पाय बागान पारी. गगना • का. १६ ॥ जननी नार मा. मीने • पा. गोरगीता लामा, मानाने पा... || घरवगा, पा na " या " मा || नांदीप गांग, भाग मारी || १८॥ दीगरको स. प्रायोगिक माग र जागा, परवा पटना ॥ १॥ मी . . . Arr -- - . दिएर मन रेने, मादारं गोरग एल वही रे॥ मा० ॥ इम मुंगे पिलंपती, लड़ी मी पडी ते धरती रे ॥ मा ॥ २० ॥ नब दिदां धीरर हरे ॥ मन ते पुग्प अरे रे । मा० ॥ मते एश की. निन मंदिर की दीई रे ॥ मा० ॥ २१ ॥ लपलेश पांक न सायी, निमें छाये दाधोरे ॥ मा. ॥ पहे लोक उखाणो, ते में तो नगर पिछान्यो रे । मा० ॥१२॥ फोगट मुरी माप, थापी योई पानी आप रे मा० ॥ ए दुःख रोदने दावं. एडवो नही कोइ माय रे । मा० ॥ २३ ॥ मुख दुःस जेलियां पाने, ते भोगवे जीव एक ताने रे ॥ मा० ॥धी चर पनमें विमाने, गैदरान न पामे उडाम रे ॥ मा० ॥ २४ ॥ एनो मुंदरी मोहटिी, किस रांक घरे हे बोटी रे ॥ मा ।। रूपेरे भसमान, किम सुंदरी दे मुझ पान ॥ मा० ॥ २५ ॥ विग मुझ जीरित एक, परि पो सना में बेहरे ॥ मा० ॥ माहरं दुरूप देवी, कमरीये नारख्या उचखीरे ॥ मा० ॥ २६ ॥ विग रिंग जानि अकामी, मुरा देखी मच्छी पामी रे ॥ मा० ॥ धीवर दावी यो अपार, बहे नयणे आंसु धार रे ॥ मा० ॥ २७ ॥ विहां गो सागर देव, मुझ काम पडे इहां देवरे || मा० ॥ मुंदरी "जे मायाणी, करे जीवित ते मुरष साणी रे ॥ मा० ॥ २८ ॥ जरनिषि मर तर पाये, धीवरने दर्प उपावे रे ॥मा० ॥ लयि कई टाल भटी, कुमरीने करे हिव बेटी रे ॥मा ॥ १९ ॥ ! दुका ॥ धीवर ननमें संगम, ननाखण सागर देव ॥ अमृ त गलई करी, कुमरी गंगेच ॥१॥ रंभा फल पवे की, करयो पवन उपचार || नर कुमरी सानी , पारी चलन मार ॥२॥ आंत उयादी मिसियु, हरिवल के रूप ॥ याला पी गिनने, एदा देव तरूप ॥ ३॥ कालो वरणमिरी मी, मगयो मोरन वान ॥ भद्भत कांत पुरीग्नी, दीपे देवरा - . - । -

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(२१) इशा ने साच || ४ ॥ एम सही अठ्यांतरद, ले. निज परि वार | नगरीमा जाना था. शान ययां श्रीकार ॥ ५ ॥ दुर्गा काक ने धान शुभ, रात्री भैरव संत ॥ सांद मारस सर तुर्ग, जिमणां काली हुंत ॥ ६ ॥ अंगज दशरथ मृततणा, यांने तोरण सार || शकुन धयां जाणी दिशे, कर तां पुर पेसार ॥ . ॥ दाल ८ मी ॥ बन्यो रे मगुरुनीनो कलपरी ॥ए देगी। जीरे शुभ लगर्ने शुभ मुहूरने, एनो नगीम कीप प्रवेश रे ।। मुजाण ।। विग समे सनमुख वला यया, शुभ कारी शकुन विशे परे ।। मु. [17• ॥ १ ॥ कन्या पांच सहामी मिली, एतो लेइ दीप योन रे ॥१०॥ गजरथ शिणगरचा भला, मिलि सनम ख रयणनी ज्योत रे ॥ ग. ॥ ॥२॥ जीरे एहवं माकुने नगरीमें, एनो दरिदले पगलं दीप रे ॥मु०॥ तिण समे एक व्यवहारियो, मिल्या रानात मणिपन कीप रे । मु०॥ ॥ १॥ ३ ॥ तव हरिवल पूछ वणिकने, श्रम वोद यनावो गेहरे ॥ ।।मु० ॥ वास करु भमें नई तिहां, एतो लद्दी मुख ससनेह रे । मु. ॥१० ॥ ४॥ जीरे तर कर जोर्डी वणिक ने, हरि बलंग करे मनुहार रे । मु. ॥ अम परे आयो माहा, मैं देश मोहोट आगार ॥ गु० ॥ श० ॥५॥ जीरे आग्रह क गने वगिक ने, तेही भाथ्यो निज आगार रे ।। मु.॥ भगति जी निभलि सापी, तो देर मीग आहार। म || N० ॥ ६ ॥ जोर वणिक हील कारणे, रदेवाने दीया आवाम रे ॥ मु.॥ बनकरयपर मालीयां, एनो सोहराब प्रकाश रे ॥ १० ॥१०॥७॥ एगो चारा करयो ना इम, एनो इरिबले आ गि ग्लास रे ॥ मु. ॥ गहनतमा परभाषी, एनो पुण्य ल ग्गामा रे ॥ १० ॥ शु० ॥ ८॥ दिये हरिवल पूई वणिक T- पा 5711 ने, तुम नाम कही गगन : मा नाम छ श्रीन मंत। मणी तर इग्बिल बायांत बET मनमानीयो, पना पिता || यि गावर म. || मानामा... .. मा देव भर मा प - म मनाग 4, " ॥ दान छाड लना या अधार मृदंगना. तो वा । न": 46 भाभा, लोहान. में वान डो. पाना म नृप भागले. पना सपना ! . It ॥ एना सबारे गवा ।। म || भगवाली भीम ममो बडी एनी दानं विक्रम पारे । म ।। ।। १५ || भाव्या आपणा न यम्मा पना पद भी पाहणी नोर रे ॥ १० ॥ दमनश्री नम मारना ना रूप भ नकार रे । मु.॥ १० ॥ १६ ॥ पादचारमा, पता हरिल करी वानरे ।मु०॥ क्षत्री गगना पता वोब केगं नात रे ॥ म ||०१७ ॥ मदनग नृप मा भी. पनों मन हीरागरे ॥ मु० ॥ तो बालापन, पता जाने माग रे ॥म.गु. ॥१८ दानी गान नृप नहा, एलो मावाने दीप भादेव रे || मु० ॥ नायर र तराने, तमें मावनी भर विशेष रे ।मु०॥ नमिग मचित तिलां नई, गरिबलने की प्रणाम । म. न त नम भगे, तुमें भारी मातगरान -- .

(२) ॥२. ॥ उठी हरिवन ततखिणे, पन्यो मन रत्न गुण गेहरे ॥मः॥ भर मी तर भागले, माझी नृप प्रणारे । ।मु०॥ ॥ २१ ॥ नर पण हरिवलने नदा, एतो उठीने दी भी बांह म॥ पेटा एका गादीप, एतो हरिवल नृप र पारे ।मु० ॥ ३० ॥ २२ ॥ भागम नीगमनी करी, एतो रेपरीवारनी गाडिरे ॥ मु. ॥ भन्यो भन्प रानी पपा, निम कर रहे माकर पोठिरे ॥मः ॥ १० ॥ २३ ॥ मागर देव समादयी, एनो परिवन केलं तेन रे ॥ १०॥ राम्पसमा दिक रन, एदी देखी गराध्यं न रे ॥ १० ॥ ॥ ।। २४॥ दीनन विरदावली, एनो पोले सत्री पंग रे ॥म. ॥ माता बीग जनसीपी, एनो वीररस फुल अवतंस रे ॥ मु० ॥ ४० ॥१५॥ हरिपल गुण नर सामली, एनो मंत्रीसर पद दीव रे ॥ मु० ॥ भामाग अगें उबी, एतो न निगरंध रकीरे ॥ ॥• ॥ २६ ॥ अक्ष अमूरक पाटरी, एनो परिरक पाना काम रे ॥ म. || पनी भार नर करी, एदी परल बरानी गा रे ॥ मु.॥४०॥ १७ ॥ एती म भान्या नु नपा, नुम आरे वध्यं वन रे ॥ म. ॥ नगरी मन पान वई, ती दिन दिन चहने तेन रे । म० ॥ ॥ ॥ ॥ इस मनमानी पोलारियो, पनो चमंसिरीने मेरे ॥ १ ॥ नमो दार बाटमी, पती पुप लाम्मे पारे॥०॥॥१९॥ ॥mलिने मिन मिर, मापी करा भादंग ।। मत गिरि रमित पो. देखी दिनी रंग ॥ ॥ १॥ पदन जमाती मदा, गरे निमदिन मेर | बाप र दरगानी, पर घरे दार ॥ ६ ॥ रान मरिगल नगो, पोलिसाना ॥ नारण मरि कार रसा, अलगावां

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(२५)
। स० ॥ ४ ॥ तुमयों यावी अमें यहोटा, तुमें छो वंछित
पोटा रे ॥ तु छो गिरुवा गापर पेग, तुम नजरें या घेटा रे
॥स.॥५॥ तुम शिर महोदो छ परमेसर, जगशिर मधु नुमें
सहना रे ।। नुमे छो जगमें कर्ता हर्ता, शें कहो बिहुना रे
॥स०॥९॥ इणिपरें मीठे वचनें नृपने, रोझवी हरिवल बोले ।।
अरज मुगो एक प्रभुनी हमार्ग, नोतर वचन ते खोले रे ॥
॥स॥७॥ नगर सहित तुमें रान पधारो, इम परे भोज
न करवा रे ॥ आव्यो छु तेडया साल, तुमने जिमण आचर
वारे ॥ ख.॥ ॥ नव दखिन यह नृप परिवार, हरिवल
मंदिर आवे रे ॥ सोवन याल कोलां मांटी, निजस्वी पास
पिग्मा रे ॥ स० ॥९॥ ममी नवनवा मिणगार पेहरी, न
- पन भोजन पीरसे रे ॥ हरिवल पिण नृप जिपना नाख, पंग
पवन जगीस रे ॥स०॥१०॥ एकविरा जाननी सम्खडी पिर
मी, फलने मीटा मेवा रे ॥ सिंहकमरीया मोदक महोनादे
आरोगे एहवा रे ॥स. ॥११॥ अमृत पाक न भांवां पोली,
भीखंड सीरा महाली रे ॥ शास दाल ने घृत पग्नालि, पिर
से ज्यु गंगा वाली रे ॥ स.॥ १२ ॥ खातं सायं विषां व्य
जन, वीश नातिनां धामे रे ॥ आ3 नगरीमहागन ने, निम
7 तो ति न पाम रे ॥ख० ॥ १३ ॥ निमतां निमतां अन्योअन्य,
रसवनी जा बखाणे रे ॥ के देव आकर्षी रसोइ. हरिचले
करि दण टागरे ।ख ॥ १४ ॥ रसीयावाटे मिल्या जन
जर, रे मन आल्हारे ॥ अमली मंगी जंगी जन ने, कीयां
भोजन सा रे ।। स०॥ १५॥ पान सौपारी तशेल रंग, दे
मनामनी बुकी रे ॥ इण परि नगरी मार्ग निमाडी, भागोले
॥स०॥ १६ ॥ परमें जरा पडतो वमहारी, ह
रिसले ते जस लीय रे ॥ धीवर कुल लहि होय पानं, महा
-
चौपा की

. (२४) भकम ॥ ३ ॥ शरिषक नृपर्ने एक मन, दीमंता दन पानी पूरण भीती, ज्यं नख मांसने हाय }} ४ !! सिरि अपछर समी, पामी पुण्य संयोग ॥ दोगडा मानी हरिवल भोगवे भाग ॥ ६ ॥ एक दिन वेग रंग... करे विचार ॥ र नगरीने गौनरी, दीमें भांगन सार irt | ता प्यारी पियुने कई, सांभलो माणारि ॥ वाते कण ना कटे, करतां पुण्य उपचार |॥ ॥ पग पान विचार छे, धारो चित मार ॥ दीपक लेइ ६ तेडी नृप आगार ॥ ८ ॥ नृप मंत्री ने चादीयो, काग मोनार ।। पता नो आपणां की कोटि मकार ।। माटे तुमने कह, करजो सममी काम ॥ र नगरीने पो भोजन अभिगम ॥ १० ॥ सांभल गोगे मारी, कही ने कान ॥ नो छ दाहा पायरा, शंकरशे टप या ॥ ११ ॥ पथ्ये पेग भरला. पुण्य पाप दिलाय ! पुष्प र जो कीमिये, तो मधला दुम जाय ॥ १२ ॥ ते माटे भर प्रिया, जो प्रभु दीपी आय ॥ निनणे हा दीजिये, ते भार माय ॥ १३ ॥ ॥ दामी ।। गगधर दश पर मुंदर ॥ अयरा ।। कही आया जब गर्ने । एदेशी ॥ वे हरिवल . 1. फर्गने, भातमागे भली रे ॥ गोधूम नंदुल मिगिरी संस मामग्री मवीरें ।' । गरम भोजन सार नि. देव मारे ॥ नोवर देवा नृप दम्बारे, हरिवल पौने जां. । म ॥२॥ माया करि निन भामन भाये, हरिवल्ने नई तर ॥ मदनगंग को हरिवलने, में में जीवन जी । ||.॥३॥ नर नृपने हायल कर जोडी, मांस ii मापीर ॥ मगर सम पद केगे, तुम मुझ जानीरे । .

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॥ स० ॥ ४ ॥ तुमपी यावो अमे महोग, तुमें छो बंछित
पोटारे ॥ तुम छो गिरुवा गायर पेरा, तुम नजरें याउं घेदारे
na. ॥ ५ ॥ तुम शिर महोटो छे परमेसर, जगशिर प्रभु तुमें
सहुना रे ॥ में छो जगमें कां हां, कही विना रे
ख० ॥ ॥ इणिपर मीठे वचनं नृपने, रीझवी हरिवल बोले रे॥
भरज मुगो एक मभजी हमार्ग, नोतर वचन ते खोले रे ॥
। ख. ॥७॥ नगर सहित नुमें राज पधारो, हम परे मान
न करबारे ॥ ९ आल्या छं तैडवा साल, तुमने जिमण आचर
वा रे ।। सः॥८॥ तव हरखित थइ तृप परिवार, हरियल
मंदिर आवे रे ॥ सोवन याल कपोला मांडी, निजस्वी पास
पिसाव रे ॥०॥९॥ कुमी नवनवा शिणगार पेहरी, नृ
पन भोजन पोरसे रे ॥ हरिवल रिण नृप जिमना नाख, पंखे
पवन नगीसे रे ॥ स० ॥१०॥ एसविध जातनी सखडी पिर
सी, फलने पौग मेवा रे ॥ सिंहकमरीया मोदक महोदा, देखें
आगेगे एहवारे ॥स. ॥११॥ अमृत पाक न आयां पाली,
भीपंड सीरा मुंहाली रे | शाल दाल ने मृत परनालि, पिर
से ज्यु गंगा वाली रे || स. ॥ १२ ॥ सारां सादा निखां व्यं
जन, वीश जातिनां धामे रे ॥ न पा नगरीमहाजन ते, जिम
नां दृषि न पाप रे ॥ख० ॥ १३ ॥ जिमतां निमतां अन्योन्य,
रसती जीमें वखाणे रे ।। { देव आरूपी ग्मोर. हरिचलें
करि ग टाणे रे ॥ सा ॥ १४ ॥ रसीयावारे मिल्या जन
ज्जर, सो पन आहा रे ॥ अमली भगी जंगी जन ने, कीयां
भोजन सा रे ॥१०॥ १५ ॥ पान सोपारी तोल , दे
पुनरासनी चक्की रे ॥ इण परि नगगे सारी निमाडी, भागोलें
पोग्गा मूकी रे
। स० ॥ १६ ॥ पुरस जस पडडो बगहानी,
रिब ते जस नी रे ॥ धीवर कृत लह होगेवक पातं, मन

- मका ॥ ३ ॥ हरिवल नृपर्नु एक मन, दीगंता न • पानी पूग्ण पीनही, ज्यं नख मांगने होय ॥ ४ ॥ सिरि अपर समो, पामी पुग्य संयोग ॥ दोगंडक मार्न हरिवल भौगो भोग ॥ ६ ॥ एक दिन वेग गमें को विचार || हर नगरीने नोतरी, दीन मांगन स । तर प्यारी पियुने कई, सांगली माणाधार यांने कृण ना कई, करतो पृय उपचार ॥ ७ ॥ पर बात विचार छ, धारो चिर मार ॥ दीपक लेइ. सेडी नृप आगार ॥ ८ ॥ तृप मंत्री ने चाटीयो, कार मानार ॥ एता नोद्दे यापणां, कीजे कादि प्रकार ॥ माटे तुमने कहे, करजो समभी काम ॥ र नगरीने धी भोजन अभिगा ॥ १० ॥ माभल गोग मारी. कही ते वान ॥ जो छ दाहाहा पापरा, शंकरशे शप ॥ ११ ॥ पाय बैग भागला, पुग्ये पार दिलाय ॥ पुष्प स नो कीनिये, तो मयलां दख जाय ॥ १२ ॥ ते माटे भर मिया, जो प्रभु दीधी आय ॥ निनणे दायें दीजिये, ते भाव माय ॥ १३ ॥ ॥ बार मी॥ गगपर दा पथर मुंदर ॥ गया | करी आयो जब गर्ने ॥ ए देशी ॥ दिवे हरिवल ... धगने, मातमा भेली रे ॥ गोधूम तंदुल मिगिरी संग, मामग्री की। ॥ गटारा भोगन सार निमाई .. देव मारे || नौगदेग नृप दरबार, हरिवल पोते जांच "म.॥२॥ आग्रह करि निन भामन आये, हरिवलने तर ॥ मनरेग को हरिवलने, तुम ही जीवन जो रे ॥ नर नुन हरियल कर जोडी, मवि Hin- मानीरे ॥ मेरस तुम पद केंगे, तुम मा अनाजानीरे .

। ख. ॥ ४ ॥ तुमयी यात्रा में पहोटा, तुमें छो वंछित
मोटारे ॥ तुम छो गिरुवा गायर पेटा, तुम नजरें याडं घेटा रे
॥ स. ॥५॥ तुम सिर महोटो छ परमेसर, जगशिर प्रभु तुमें
सहना रे । तुम छो जगमें कर्ना हता, शंकही बिहुना रे
|| ख० ॥ इणिपरें मीठे वचनें नृपने, रीझवी हरिवल बोले रे॥
भरन मुगो एक प्रश्नी मागे, नोतर वचन ते खोले रे ।।
॥ स.॥७॥ नगर सहित में राज पधारो, दम घरे भोज
न कग्यारे ॥ आन्या छु तेडवा सारु, नुमने जिमण आचर
वारे । खः॥८॥ तव हरखिन यह नृप परिवारे, हरियल
मंदिर आरे रे ॥ सोवन याल कपोलो मांटी, निजस्ती पासे
पिसावरे ॥ स्व० ॥९॥ कुमी नवनवा शिणगार पेहरी, नृ
पन भोजन परिसे रे ॥ हरियल पिण नृप जिमना नास, पैसे
पवन जगीसे रे । स० ॥१०॥ एकविरा जाननी सम्बडी पिर
सी, फलने मोटा मेवा रे ॥ सिंहकसरीया मोदक महोश, देव
आगेगे एहवा रे ॥ स ॥ ११ ॥ अमृत पास न आंवा पोली,
भीमंड सीरा मुंहाली रे ॥ गाल दाल ने घृत परनाल, पिर
से गगा वाली रे ॥स. ॥ १२ ॥ वारा गाटा निरव व्यं
जन, वीग जातिनां चामे रे ॥म आहे नगरीमहाजन ते. निम
तां हति न पामे रे । ख०॥ १३ ॥ मिमतां जिमतां अन्मोजन्य,
रसवती में वखाणे रे ।। के यं देव भारी गोइ. हरिचर्ने
कारण रागे रे | पु. ॥ 2 ॥ रनीयावाले मित्या जन
ज्र, मेमन आरबारे || अमली भंगी नंगी जनते, कीयां
भोजन सारे ॥ ख० ॥ १५ ॥ पान सोपारी तेरोल , दे
पुरवासनी की रे ॥ इण परि नगगे सारी गिमारी, भागोले
पोसा मूत्री रे ॥ख० ॥ १६ ॥ परम जस पडदो पजहावी, ह
विले वे जस लीयरे ॥ धीवर फुट लदि हाचल पातं. मात

7 मकस ॥ ३ ॥ दशौयल नृपर्ने एक मन, दीर्मदा तन' माझी पूग्ण मीतडी, यं नस मांसने होय ॥ ४ ॥ सिरि अपर ममा, पामी पुण्य संयोग | दोगडा मुरनी हरिवल भौगो माग ॥ ६ ॥ एक दिन बैग रंग, करे विचार ॥ र नगगने गोतरी, दीमें भोजन पर ९ ॥ तर प्यारी पियने कहे, सांपलो प्राणाधार । वाते कण ना कहे, करतां पृण्य उपचार ॥ ७ ॥ एग बात विरार छे. धागे चित्त मार ॥ दीपक लेइ दे सेटी नृप आगार ॥ ८ ॥ मग मंत्री ने चादीयो, काग मोनार ।। पता नोहे आपणां. की कोटि प्रकार ॥॥ माटे नुमने कह, करजी समसी काम ॥ नृर नगरीने न.. यो मोनन भिगा ॥ १० ॥ सांभल गोग मारी, कही ने वात ॥ नौ ऐ दााहा पारा, शंकरशेष ॥ ११ ।। पाये बैग भांपला. पुण्यें पाप दिलाय ॥ पुत्र स जो कीनिये, नो मयलां दुख नाग ॥ १२ ॥ ते मारे मन्द प्रिया, जो प्रभु दीधी आय ॥ निनणे हाय दीजिये, ने भार माय ॥ १३ ॥ ॥ हामी । गगयर दश पर मुंदर ॥ अथरा ॥ की आन्या व गते ॥ ए देशी डिवे परिवल पगेन, मानमागे भली रे ॥ गोधूम तंदल मिथिरी संस) मामग्री की । ॥ गटस भोजन सार निपाई. दामा रे ।। नीलम देवा नृप दरबारे, हरिवल पाने जा ।।म ॥ २ ॥ प्रायर कार निन भासन जाप, हरिवलने तर ॥ पदनांग को हरिवनने, नुम सो झीवन जेने 1. 10 नर नृपने परिवल कर जोडी, मगि मां साना ॥ मेरनुम पद केगे, तुम मुन्न मरजानी त

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॥ २० ॥ ४ ॥ तुमयी यात्रो अमे महोटा, तुमें छो वंचित
पोटा रे ॥ तुम,छो गिरुवा गायर पेटा, तुम नजरें या पेारे
॥ स. ॥५॥ तुम निर महोटो छ परमेसर, जगशिर प्रभु नुमें
सहना रे ॥ - तुम छो जगमें कर्ना इना, कहीं बिहुना रे
॥ स० ॥ ९॥ इणिपर मीटे वचनें नृपने, रीझवी हरिवल बोले ।।
अरज मुणो एक प्रभूजी हमार्ग, नोतरं वचन दे खोले रे ॥
। ख• ॥७॥ नगर सहित नुमें रान पधारो, हम घरे भोर
न कग्यारे ॥ हुँ माया छं नेडवा साल, नुमने जिमण आर
वारे । ख. ॥८॥ तव दरखित थइ नृप परिवार, हरियर
मंदिर आवे रे ॥ सोवन याल कचोलां मांटी, निजसो पारे
पिरसाव रे ।। स० ॥९॥ कमी नवनवा शिणगार पेहरी,
पन भोजन परिसे रे ॥ हरिवल पिण नृप जिमना नाख, पर
पवन जीस रे ॥ ख. ॥१०॥ एकविता जाननी सखडी पि
सी, फलने मोग मेवा रे ॥ सिंहकेसरीपा मोदक महोदा,
आगेगे पहवारे ॥ स. ॥११॥ अमृत पाक न आंपां पोली
सिंड सीरा मंदाली रे ॥ शास दाल ने गत परनालि, पि
से ज्यु गंगा वाली रे ॥ स॥ १२॥ सारा सारां तिसर
जन, वीश जानिना, घामे रे ॥ नृप आ नगरीमहाजन ते, नि
तां वसि न पामे रे ॥ ख०॥ १३ ॥ निमतां जिमनां अन्योअन्य
रसवती जी वखाणे रे । के युं देव आकपी रसोइ. हरिवं
फार इण टागरे । ख. ॥ ११ ॥ रमीपारा मियाज
कार, होम आल्हा रे ॥ अमली भी जंगी जनते, कीर
भोजन सादरे ॥ स०॥ १५ ॥ पान स्पारी तरोल रंग,
भगवासनी की रे ॥ इण परि नगरी सारी निमाडी, भागों
पोगा मूकी रे ॥ ख० ॥ १६ ॥ पुरमें जस पइदो पमहानी,
रिबले ते जस लीधं रे ॥ धीवर कृष्ट लहि हारेवर पात, ना

१ (२१) मका ॥ ३ ॥ हरिवल नृपन एक मन, दीसंता दन पानी पूरण पीतडी, ऽयं नख मांगने हाय ॥ ४ ॥ सिरि अपर समो, पामी पुण्य संयोग ॥ दोगडा मानी हरिपल भोगवे भोग ॥ ६ ॥ एक दिन पेश गर्ने, . करे विचार || र नगरीने नोतरी, दीमें भीगन सार ॥ ९ ॥ तत्र प्यारी पियुने कहे, सांगली माणाधार । वाते कुण ना कई, करतो पुण्य उपचार ॥ ७ ॥ पण वात विचार ऐ. धारो चिर मशार || दीपक लेइ ६९- तेडी नृप आगार ॥ ८ ॥ नृप मंत्री ने घाटीयो, काग मोनार । एता नोद्दे आपणां, की कोटि प्रकार || ... मारे नमने कई. करजो समनी काम ॥ नृर नगरीने । घो भोगन अभिगर ॥ १० ॥ सांभल गोगे मालरी, कही ते कान ॥ जो छे दाहाहा पाघरा, शंकरशे शप ॥ ११ ॥ पण्ये वैरी आपला, पुग्ये पाप दिलाय ॥ पुष्प स गो कीजिये, तो मयलां दुख जाय ॥ १२ ॥ ते माटे भर निया, जो प्रभु दीधी आय ॥ निनणे हाय दीजिये, ने भाव माय || १३ ॥ ॥ हामी 11 गगवर दग पंधर मुंदर ॥ अथा। कही आव्यो अव गर्ने || ए देशी ॥ हरिपल .१९ धर्गने, मानमग्ने भेली रे ॥ गोधूम तंदुल मिगिरी संहा सामग्री मेरे ॥ १ ॥ खदास भोजन सार निगाई. ! देर ममारे ॥ नौतर देवा नृप दरबारें, हरिवल पोन गांच ॥मः ॥ २॥ आग्रह करि निन भासन आपे, हरिवलने ने र ॥ मदनरेग कई परिवलने, तुम भीवन जनेरे ॥ यः॥३॥ नर नृपने हरिवल कर जोडी, मांग मां- सालीरे ॥हुँ सेवक एनम पद केगे, तुम मुझ अनजानीरे

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॥ खः ॥ ४ ॥ तुमयी यत्रो अमें महोय, तुमें छो पंछित
पोगरे । तुमें छो गिरुवा गायर पेय, तुम नजरें था पेटारे
॥ स्व० ॥५॥ तुम भिर महोरो छ परमेसर, जगशिर मभु नये
सहना रे ।। तुम छो जगमें का पता, कहीयें बिहुना रे
॥ ख• ॥९॥ इणिपरें मीठे वचनें नृपने, रीझवो हरिवल बोले रे।।
अरज मुणो एक प्रमनी हमार्ग, नोतरं वचन ते सोले रे ॥
पाख• ॥ ७॥ नगर सहित में राम पपारो, हम घरै भोज
न कग्यारं ॥ हुँ आन्या छु तेडवा सारु, नृमने जिमण आचर
'वा रे ॥ खः॥८॥ वव हरखित यइ नृप परिवारें, हरियल
मंदिर आवे रे ॥ सोवन याल कचोला मांडी, निनवी पास
पिरसाव रे ॥ ख० ॥९॥ फुमी नवनवा मिणगार पेहरी, न
पन भोजन पारस रे ॥ इरिवल पिण नृप जिमना गास, पैसे
पवन जगी रे ॥ ख० ॥ १०॥ एकविश ज्ञातनी सखडी पिर
सी, फलने मीठा मेवा रे ॥ सिंहकेसरीया मोदक महोदा, देव
आगेगे एहना रे । ख० ॥ ११ ॥ अमृत पाक न आंवा पोली,
भीवंद सीरा मंहाली रे ॥ शाल दाल ने घृत परनालि, पिर
से ज्यु गंगा वाली रे ।। सः ॥ १२॥ सारा साटा तिसाव्य
जन, वीर जानिनां धामे रे ।। नृप आ3 नगरीमहाजन ने, निम
नां पति न पामे रे ॥ य० ॥ १३॥ निमतां जिमतां अन्योअन्य,
रसवती जीमें दखाणे रे ॥ के झुं देव आकी रसोइ. हरिचलें
कारे इण टांगरे । ख. ॥ १४ ॥ रमीयाले मिल्या जन
चर, इन मन माल्हा रे || अमली भंगी नंगी जन , कीयो
भोजन सा रे ।। स०॥ १५ ॥ पान सोरारी तंबोल रंगे, दे
मुम्बरामनी की रे ॥ इण परि नगरी सारी गिमाडी, भागोले
चौपा की रे ॥स. ॥ १६ ॥ पुर जस पडही वमडारी, ह
रिबले ने जाली रे ॥ धीवर कृल लहि हाधिक पात, मुछन
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(२७) भर अमर 'दो भ्राना, रवि शगिपरें दीपंना रे ॥ स. ।। ।।३०॥ गुरुचरण पसाय लन्धि, पुण्य उपर परयंध रे ॥ रेला उल्लास को नव दाल, हारेवल केरो संबंध रेख० ॥३१॥ ॥ इति श्रीहरिदलचरित्र हरिवल राजाप पुरवर्णन नृपवर्णना दि प्रथमउल्लासः संपूर्णः ॥१॥ ॥ अथ द्वितीयउल्लासः प्रारंभ्यते ॥ ॥ दहा ॥ परम ज्योति प्रकाश कर, त्रिभुवन निलक समान ॥ गरिव नियाज गोडी घणी, भयभंजन भगवान ॥ १ ॥ अविनाशी अव्यय अरुण, अशरीरी अरिहंत । ज्योतिरूप जग दीश जे, ने मणपुं शुभ संन ॥ २ ॥ फरिमन हृदय महीतले, शारद मान विशाल ॥ वचनामृन वरमें मदा, प्रगट थई उनमाल ॥ ३ ॥ मूरख मूंगां चांबडा, अफलविणा जेह ॥ तस घट भीतग्में वसी, सरगरु सम करे तह ॥४॥ परउपगारी मातनी, पाला त्रिपुरा सोप ॥ ते ९ प्रणम भारनी, निग मुझ पंलिन होय ॥५॥ कोविद केशर अमरना, चरण कमल नमि नाम ॥ हरियल मळगपनी, पभगु विनी उल्लाग ॥ ६ ॥ गंगीली जनसभा, सांगन बेचक जाण ॥ मकरनी परें रसीप, गण चंन भार प्रमाण ॥ ७ || सरस नीरस रमिया लहे, चाना का जह ॥ पण मृग्य पशु आपटा, जाग रम तेह ॥ ८ ॥ सम्म निग्स महकर लर, जे सेवे वनगय ॥ पण नाण नी सदो. गूकां दकड खाय ॥ १ ॥ खटपद सस्मिा चार नर, चार चमन रसाल || राने सरम कापा मुगी, दिया ननी घि । चार ॥ १० ॥ बताने यांना मुणी, माहामो साहामी दृष्ट ।। । एक मरीसी जो हवे, मुगतां उगने मिट ।। ११॥ नगाटे भा

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कारज की, रे ॥ ख० ॥ १७ ॥ मदने वेगें रसवनी जिमना ।
संसिरी ते दीठी रे ॥ मृगनयणीन रूप मुझोमल, देखत
मीठी रे ॥ स० ॥ १८ ॥ नृपर्नु मन विव्हल ययं जिमता, कामे
थो जोरो रे ॥ नृप चिसे मुझ खी छे भलेरी, पण नहि
तोरी रे ॥ब० ॥ १९॥ खटरस भोजननी मुघडाई,.
मनमें बैठी रे ॥ कामध्यस्थी भोजन भूल्यो, सीना
रे। स० ॥ २० ॥ साधु नरवाई करीने नृपते,मन विमनो
ट्यो रे ॥ अमेनियो यह हप घरे क्लायो, जागे
ट्यो रे ॥स० ॥ २१ ॥ चमकी चितमें चतृरा ततसिण,
नृप मन विगढऱ्या रे ॥ तव भीतमने कहे निज प्यारी,
चतो
हेन उघडणुरे ॥ ब० ॥ २२ ॥ नव हरिवल कहे सांभल ।
भारी दृशे ने थारो रे ॥ सणशे ने पडशे खाईमा, आपणं
न नाही रे ॥ स. ॥ २३ ॥ चिहुं जगमें हरिवलनी कौनि,
ले गीगगन जीहा रे ॥ म समाः दंपति दोये, मुपये
दे दीया रे ॥ प. ॥ २४ ॥ जानो भविया धीवर जाति,
जो नीर बगायो रे ॥ मुन्मानिध मनांछित फलियं,
जग विस्ताग्यो रे ॥गः ॥ २५ ॥ शुद्ध परंपर ता.
होगीन मारिंगया रे ॥ साह अकबर ने प्रतियोगी,
दीपाया रेप ॥२६।। तम शिप्य धर्मविनय धर्मघोरी, सपल
करिशने ॥ कारिदगिर मुमभि सोहे, तस निप्प
हर्ष गजे रे ॥ ॥ २५ ॥ तस शिष्य कमलविनय कपि।
दिनमाग तेन माया रे ॥ तम या गाणे कमल विनय :
तम अनशान मुद्दामा रे ॥५०॥ २८॥ तम शिष्य पंडित
ध्या विनय गर, मोद मात्र नगीना रे ॥ मान किया है
पानी, भातम मापन कोना रे ॥स. ॥२९॥ तग
यदीपा मार गिमाग, कुमती मद झीना रे ॥
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(२) का माल्या नेती रवानने ॥ ॥ भरता भवा नर, कारत का? तर ॥ पाः॥ आपा दे भीम पुणावता || जी होना नाग, गाही करता पान || आ० ।। थापा ते याप पागमता ॥९॥ बीगडला जे काय, इनुपत र सनार ।। मा.) पापा ने प्रति पानी ॥ भगत पेगगी शाप, प्लांरा टीना रनार || मा. ॥ भापान ईन वामनी ॥१०॥ इणि परनिनिया शर, उदने कारण फोक ॥ मा० ॥ निरिमा सन्चार नपा । निज निज त कला सर. करया परी गर्न ।। आ. ॥ निज निज वा भणी ॥ ११ ॥ करे एर नाही देर, नाने नो रोग अप ॥ भा० ॥ दाा जर पुरानी ॥ी पाने वर, मुन गोली मप || माः ।। छतीशगणे गहरी ॥ १२ ॥ जना बराचे मर्य, मनरा माम ॥ या• 1 ली पर पोपी गदा || घर में कार र पार पर नाग न मार ॥ भा० ॥ वैशमाव पांगी पक्षा ॥1॥ सन्मानी शान, मावि एगन माग || आ. ।। कर पीरागने ॥ ने पाटे कगे दोर, जाप य रोगनीको ॥ भा. ॥ गोहान पोरापने ॥ १४ ॥ जाप से मराल, निपारे सा ॥ पा. ॥ ने प्रा नानी रहा करे ॥ सदा सानमन ए, सानो रिय र ॥ " मा. मग पो ॥१॥ एकर पेट भार. भनी बार || मारेपनी मानी मोन ॥ परमानोगेएटीपोरा । परन भी दी नि.६ ॥ सा रे नपोलमने दिन राम ॥ भारत से भगाने कान पर नोग || मा. ॥ शान तिा ना ॥ १..॥ स, पर मार ॥

(२८) बुक नमें, मामलनी चिन लाय ॥ पग ने मुणा मन को, माहिरी किन्नर न्याय ॥ १२ ॥ नृपने लेडी हरित्रले, की धी भक्ति विख्यात ॥ से सुगनो मरियन तुमें, शीशी निपने वान ॥ १३ ॥ ॥ दाल १ ली ॥ आछे लालनी देगी ॥ तेही नृपने आ गार, भायण देइ मार ॥ आछ लाल ॥ हरिचलें कीच पहेरा पणी ॥ माण मागा लख लेय, अग आभूपण देय ॥ आ० ॥ पालाव्यो नृप गृह भणी ॥ १ ॥ मदनग नृप ताम, मंदिर व लिया नाम ।। आ. ॥ यमनमिरी मनमें वमी ॥ अंगनारूप निहाल, मनमा या चकवाल ॥ आ० ।। नृप मननी डगरी गमी ॥ २ ॥ गार यो ललचाय, ज्यं मधु खग लपटाय ।। ॥ या• !॥ काम को करी जरियो | कामातुर थयो राय, आ काल व्याकुल थाय । आः ॥ कामम्मर नृप पूनिया ॥३॥ परमग या नृप देह, अनसनम यो देह ॥ आः ॥ पिकलपू निपर भयो । विग यादिर निग मांहि, नरुन परे गिन क्यांहि ॥ मा०॥ दामिनीवाहण वहिगयो ॥ ४॥ न गने ममनी मैन, न गप अंडीज ।। भा० ॥ गन कान पण न सिगने ॥ नगमे पान नपाल, न गमे पान टट । भा० ॥ मन उदार मन नग्नेि ।। || सवी परनामाल, मदनगम छगल ॥ आ. ॥ वीर वीर तो गरी ॥मोह याण लाग भनेप. पयोगिहा पेच ॥ मा. ॥ कामिनीय काय नान रो।। ६॥ ना योग्या अंत, जानीय लाग्यो न । आ॥ मान मपिन नहीला ॥ पीना नराग. या पर वार मेष || मा. ॥ पाया मनी न नौटया जामा नारी निचर, पहाम्गना पेन ॥ आ: ॥ तयां में रावने ॥ दो दिमें दोयमी, नाग पग ने गर्म

ना || आया लेडी लवाजने ॥ ८ ॥ परता भूवा जह,
कारण काटे तेह | माः ॥ बापा ते मोग धुगावता ॥ जडी
फोना नाप, गान्डी करता वस्गण ॥ या० ॥ थापा ते याप
पस्वागता ॥९॥ वीगाउमा जे काय, हनुमंत हाक यजाय ।
आ.!| आगा ते भक्ति अपामनी ॥ भगत येरागी चाय, लांपा
टोलां धनाप || या.!| भायाने दंन उवासनी ॥ १० ॥ इणि
पर मिलिया लोक, उदरने कारण फोक ॥ आ० ॥ चिकित्मा
करवा पती ॥ निज निज त मला सर्व, करवा मांही अ
गई ।। आ. ॥ निन निज जश लेवा भणी ॥ ११ ॥ कहे
एक नारी देस, नरने तो रोग पोप ॥ आ० । दाह ज्वर
मुच्छा नदी | सकी बोले वय, से मुझ गोली सघ || माः॥
वीय गेग हणे सही ॥ १२॥ ने हता वैद्य ते सर्व, मनरा
बना गई ॥ याः ॥ पाली मठ पोपी रया ॥ बहु ते कोच उ
पाय. पन नागेम न जाय ॥ या० ॥ वैद्य समन्व पोथी वदा
॥ १३ ॥ मोन्या जोमी गाग, भाव लगन प्रमाण || आ. ॥
मड पीडा रामने ॥ ते माटे करो होग, जाय ज्यं रोगनो जो
९ ॥ - ॥ गोदान यो में लापने ॥ १४ ॥ जाप जपो
सरा मल, निमा हारे ला || आ. ॥ ने प्रद नपनी
ना करे ॥ पोल्या मनवमन एन, मानो ने सि ॥
॥जा ॥ मगांना मुन्द बरे ॥१॥ एक कद्दे पेटमें मार,
उ भनी आहार ॥ आः ॥ रेवनी गाली कौनिय ॥ कई
पर मारनी रोग, पीडा छडी चोग ॥ बा ॥ चरण की दी
निय ॥६॥ भवा गोरे गोर, नाले झोटिंग वास ॥
॥ मा० ॥ देसरली सिगनभा ॥ धूणे गावी ग्राम, पाडे
पहली नीम || आ. ॥ वाप उतारे चिना जा ॥ १.."
मांबांकडला कंय, वाचा टोकन प ! मा. ॥ पण ले

आ (२८) युक नमें, सांभलनो चित लाय ॥ पग ते मणी मन कगे, पहिणी किन्नर न्याय ॥ १२ ॥ नृपने लेडी हरिचले, की धी भक्ति विख्यात ॥ ते मुणनो भरियन • तुमें, शी शी निपजे यात ॥ १३ ॥ ।। दाल १ ली ॥ आछे लालनी देशी ॥ तेही नृपने आ गार, भोयण देइ सार ॥ आछे लाल ॥ हरिवले कीय पोस मगी ॥ माण मागफ लख लेय, अंग आपण देय ॥ पा० ॥ वोलान्यो नृप गृह भणी ॥ १ ॥ मदनवेग नृप ताम, मंदिर क लियो जाम || आ० ॥ वसंतसिरी मनमें वमी || अंगनारू निहाल, मनमा यइ चकचाल ॥ आ. ॥ तृप मननी डगली रासी ।। २ ।। गौर ग्यो ललचाय, ज्यु मधु सग लपटाय ।। ॥ था. || काम वर्श करी जूरियो || कामातुर ययो राय, कल व्याकुल थाप ॥ आ० । कामम्बरें नृप पूरियो ॥ ३ ॥ परवश यइ नृप देह, असमंजम यो तेह ॥ आ० ॥ विफल ति पर भयो ॥ विण याहिर विण मांहि, गरुन पडे पित क्यांहि ॥ पा० ॥ कामिनीवाहण वडिगयो ॥ ४ ॥ न गमे मुमनी मेन, म गमे अंडी ॥ आ. ॥ गन कान पणन पिगमे ।। गर्म पान नबोध, न गमे यात टहोल ॥ आ० ।- मन उदास मन ना रने ॥५॥ दावी परजापाल, मदनगम उराल ॥आ० । वीराधि वीर हनो मरो ॥ मोह पाप लागः अंगप. पट्या हिंदा पेच ॥ आ० ॥ कामिनीय करयो जान से ॥६॥ ना थयो मरा अन, जानीय लाग्यो मन । आ॥ मंका सचिाने मेडीया । पहरी नव नवा वंशय घर पाइ प्रशंप !! आ. || पाया मंत्री न जेडिया ॥ ७ ॥ नाग्या गोरी शिप, पहा ने माना हमेन ॥ आ० ॥ तव्य नेदरानने ॥ दो दिने दोच्या सी, जाग मीण ते स । भा॥ भाच्या तेही लवाजने ॥ ८ || भरता भूवा जेह, कारण काहे ते६ ॥ आः॥ आपा ते शोध पूणावता || जडी कुट्टीना नाण, गागडी करता यगण || आ० ॥ वाया ते आप यस्वागता ॥९॥ वीराउला जे काय, हनुमंत हाक बजाय ।। मा० ॥ आया ने शक्ति उपासना ॥ भगन बेरागी घाय, लावा श्रीला बनाय || आ० ॥ भायाते दंन बासनी ॥ १० ॥ इणि परें मिलिया लोक, उदरने कारण फोक ॥ आ० । चिकित्सा करला कानपी । निज निज ते कला सर्व, करवा पांदी अ गर्व ।। आ०॥ निज निज श लेवा भणी ॥ ११ ॥ कहे एक नाही देख, नृपने तो रोग अशेप ॥ आ० ॥ दाद ज्चर मूच्छी लही ॥ दी गोले वैद्य, से मुझ गोली सय ॥ मा० ॥ उहाय गेग रणे सही ॥ १२॥ जे हता वैध ते सर्व, मनशं रा खला गर्व ॥ भा० ॥ पाली मठ पोपी रया ॥ यह ते काय उ पाय, पण नागेगन नाय || श्रा० ।। वैद्य प्रमुख पोयी वद्या 11131॥ घोन्या जोगी गाण, भाख लगन प्रमाण || आ. ॥ मा पीडा रे रापने ॥ ते माटे करो होम, जाय ज्यं रोगनो जो म ।। आ. ॥ गोदान चो तुम लापने ॥ १४ ॥ जाप जपो सवा साल, निम तर होवे मत्वा ॥ श्रा० ॥ ते ग्रह नृपनी रक्षा करे ॥ बोत्या भगनगन एम, मानो ते विष्णु जेन ॥ !! भा० ॥ मां नप मुख उचो ॥ १६॥ एक को पेटमें भार, ई भनीण नाहार ।। आ० ॥ रेचनी गाली कीजियें ॥ कहे एक गांटनी रोग, पीरो उल्ली योग ॥ मा० ॥ चूरण की दी नि ॥ १६ ॥ मना बोले गोच, नृाने झोटिंग खास ॥ ॥ या० ॥ देदारी गिग भइ ॥ धूणे पूणावी चीग, पाडे वाली चीरा ॥ मा. ॥ वाण उतारे चिता जइ ॥ १..॥ मांगा मांडला केय, याच्या टोकलां गेप ॥ भा० ॥ पण ले -

(३०)
से को नावियां ॥ अणे को जे जेम, तेणे कम्युं ते नेम ।।
आ० ॥ पण नप चित्त न मारियां ॥ १८ ॥ एम अनेक
पाप, भलमला जाण कहाय ॥ आ. ॥ जाणपण एटकीय
ल्या ॥ विराउला हना नेह, परबंधी पण तेह ॥ आ० ।
सिद्ध साधक सघला गल्या ।। १९ ।। भगत संन्यासी णः
गलिया ज्यं पाणी लुल ॥ आ० ॥ फोगट गाल फुल्लावता ॥
मडी युट्टीना जाण, वादीगर गया ठाण || आ. 1 जाग
पणं ने डुलारता ॥ २० ॥ तिणसमे मंत्री एक, जाणे सात
बैंक ॥ भा०॥ मेहर नामें मंत्रीसरु जिहां पोट्या छे राप
निहांकिण आयो धाय || मा० ॥ नाही जोइ तिहां गुणारु ।
॥ ११॥ सायो नादी भेद, मंत्री लम्रो ने उमेद । आ• ॥
मखरे ने ना नट्यो । मण गो निण योग, पूरब कर्मन
मोग । मा० ॥ काम अगल फँडै पस्यो ।॥ २२ ॥ जेड
अपने रोग, तैर जागे लोग ।। आ० ॥ अंतरगतनी क
यो । कामदं मेहेर अयाह, नृपने ते साम्यो दाह ॥ आ.
कहो ने रोगने कग यो ॥ २३ ॥ निहायी प्रगट्यो दुःख, ।
हांधी होये गाव ॥ आ० ॥ भगीन बल्यो अगनी हो ।
रहानलनी राफ. नहने रहिनन मार ॥ आ॥ ते शीन
रमणी को ॥ २४ ॥ इस चिती मनमांद, रा रामक्ष उच्छाहे
भा. | मेहर मंत्री इग भग || नृपने रोग न कांय ॥ फोर
कोपा उपाय ॥ या ॥ जाण प्रवीगर्न प्रयगुणे ॥ २५ ॥ :
गनु भोपय कान, सार म निदान | मा० ॥ मिद्ध मार
माम गिन्या || भाग्मती पीट, कामचरनी रीट ॥ आ.
ते को नारी अरग ॥ २६ ॥ जलो घान विचार
में गुम मम गार !! पा || ते नागे सरलीकय करें।
मिन्मा म, न ना मानो म ।। आ० ॥ ते करें आर
.

पाकला ! २७ ॥ सभा विसजी ताम, मह पोता निन या ॥ था. ॥ पंग हिचे वैदू पारे । योना उल्लासनी द्वाल, पहला कहाँ उजमाल || आ० ।। लांबावजय इम उच्चरे ॥२८॥ ॥ दुहा ॥ टिव मेहर मंत्रीसा, लोकोने दे शीख ॥ नृपनी पोटा दालवा, पंटो आइ ननी ॥ ॥ कामातुर नृपने लही, सचिव फर दपचार ॥ राणी सचली तेडीयो, गोल सजी मिण गार ॥ २ ॥ रम शन करती आवाई, रूमें अपछर सार । मदन तपी जे पाटिका, कार्माने मुरसकार ॥ ३ ॥ आवी नृपना पग तल्लां, बोलासें उल्लास ॥ पवन करे रंभादले, आंजे नेत्र व रास ॥ १ ॥ पराणा ने पदमनी, नृपर्ने भीडी अंग ॥ यन करनी पदि दो लगे, उतरको ताम अनंग ॥ ५ ॥ कोक भाव नगे चलें, बीयो ए उपचार | आंस उपाही नासणे. म पिनिय निगवार ॥ ६ ॥ कामयर हलको थयो, पाम्पो चे तन सार । मैहर मंत्री जसी, वरत्या जयजय कार ॥ ७॥ मदनग दरल्यो घगं, देसी वृद्धि नियान ॥ सन्मान्यो मिनीमरू, देई बलं मान ॥ ८ ॥ वीजा सचिन दरें कन्या. 'गव्या पड प्रधान || मुझने मोहोंगे गुण करचो, दी जीवित दान ॥ ९ ॥ नृप कई मंत्री तुं पयो, नाहरा दुखनो जाण ॥ राव्यो नाइने सही, नन मन करिने माग ॥ १० ॥ तव कडे मंत्री नृप मुणो, हुई तुमारो दास ॥ केशो ते करणं अमे, तर मन कार एफगग ॥ ११ ॥ पण मुझने साची कहो, ए कारण य{ फेम ॥ अंतरगतनी बानडी, जाणी जाए नेम ॥ १२ ॥ विगर कई किन नाणिये, पारका मननी वान ॥ तव नृप मंत्रीने रहे, पांढी सघनी घात ॥ १३ ॥ ॥ दाल २ जी !! नदी जमुनाके नीर, उडे दोप पंसीयां ।। १.प.देशी ।। नृप कह मांभल मंत्री, कह ना नोपनी ॥ इत्यिक है कित्सा कर्म, न जाणे शाखनो मर्म ॥ आ० ॥ ते करे मार सिद्ध साधक सथला गल्या ॥ १९ ॥ भगत संन्यामी मृपने रोग, तेह हो जाणे लोग | आ० ॥ अंतरगानी . कदो ते रोगने कुग हे ॥ २३ ॥ जिहांयी प्रगट्यो पु.द.. हाथी होये मुख | आ. ॥ अगनि बल्यो अगनी तो। रहानलनी वाफ. जहन रहि तन व्याप ॥ आ० ॥ रमणी करे ।। २४ ॥ इम चिंती मनमांद, रामा रामक्ष उच्छाई मा.॥ मेहर भत्री दम भणे ॥ नपने रोगन कांय ॥ कोपा उपाय || आ०॥ जाण भवीगने अवगणे ॥२५॥ मरख गित्या || अंतरगतनी पीर, कामज्वरनी रीड ॥ आर. ते कृणे नावि अटकरा ॥ २६ ॥ जे लहे शास विचार, जे गुरु मुख सार । आते जागे सरली कला।। संको (३०) से को नावियां ॥ जेणे कयो ने जैम, नेणे करो आ. ॥ पण ना चित्त न भावियां ॥ १८ ॥ एम अनेक पाय, मलमला जाण कहाय || आ. ॥ जागरण त्या ॥ विरारला हता जेह, परबंधी पण तेइ । अा. गलिया ज्यं पाणी लुल ॥ आ॥ फोगट गाल फलाना जड़ी बूटीना जाण, वादीगर गया ठाण ॥ आर ॥ रणं जे हुँलावता ॥ २० ॥ तिणसमे मंत्री एक, जागे । वेक । आ० ॥ मेहर नामें मंत्रीसजिहां पोठ्या र तिहांकिण आल्यो पाय || आ॥ नाही जोइ तिहो । ॥ ११ ॥ लाधो नाडी भेद, मंत्री लो ते उमेद ॥ आ. ". मवर ते नृप नडयो ॥ मूरा ब्यो तिण योग, पूत. मोग ॥ मा० ॥ काम अनल डे पत्यो ॥ २२ ॥ लदे ।। काम मेहेर अयाह, नृपने ते लाग्यो दाह । आ. खत भोपय कान, कोरतेम निशान ॥ आ० । सिद्ध 1 .

तिला ॥ २७ ॥ सभा चिरागों ताम, सह पोगता निन घा ॥ था. ॥ मंत्री व वैटू करे ॥ पोजा उल्लासनी दाल, हलां कहीं उनमाल ॥ आ० । लाजायजय इम उच्चरे ॥२८॥ ॥ दुटा । टिब मेहर मंीसरु, लोकोने दे सीख ॥ नृपनी मोटा टालवा, वेटो आउ नी ।' कामानुर नृपने लही, चित्र कर उपचार || रामी सबली तेडीयो, गोल सजी शिण र ।। २ ॥ रम इन करती आई, हमें अपछर सार || दिन तपी जे पाटिका, कामीने मुखकार ॥ ३ ॥ आषी नाना गतला, औलासे उल्लास ॥ पवन करे रंभादले, आंजे नेत्र व प्राप्त ॥ १ ॥ पटराणा ने पदमगी, नृपन भीडी अग ॥श चन करचो पटि दो लगें, उनरयो ताम अनंग ॥ ५ ॥ कोक शाख नगे वलें, दीयो ए उपचार ॥ भांख उपाढी नगखणे, म "दिपति तिन बार ॥ ६॥ कामधर हतको थयो, पाम्यो पे तन सार ॥ मेदर मंत्री सन्यो, घरत्यो जपजय कार ॥७॥ ‘मदनग दरग्यो घणं, देसी वृद्धि नियान ॥ सन्मान्यो मंत्रीसरू, देई बहुलं मान ॥ ८ ॥ वीजा सचिव दूर करया, गया पह प्रधान ॥ मुझने मोहोरो गुण करगे, दोधं जीवित दान ॥ ९ ॥ नृप कडे मंत्री तुं ययो, माहरा दुसनो जाण ॥ में राज्यो मुझन सही, तन मन करिने माग ॥ १० ॥ नब कई मंत्री नृप मुणो, हुइ नमारी दास ॥ केशो ने करा अमें, ता मन करि एकगस ॥ ११ ॥ एण मुझने साची कहो, ए कारण पर्दा कम । अंगरगननी यानी, जाणी जाए जेम ॥ १२ ॥ विगर कई किम जाणिय, पारका गननी यात ॥ तब नृप मंत्रीने कहे, माही मयसरी पात ॥ १३ ॥ ॥ दाल २ जी ॥ नदी जमुनाक तीर, उडे दोष पसीयां ॥ प.देशी । नृप कई मांभल मंत्री, कह सुझ नीपनी ॥ हरिवक 44 सिरसाधक संपला गल्या ॥ १२ ॥ भात संध्यामी मृपने रोग, तेह जागे लोग | भा० ॥ अतरगानी कहो त रोगने कग ग्रे ॥ २३ ॥ विहांदी मगरयो : रहानलनी वाफ. जेहन रहितन व्याप || मा० ॥ते. ते कृणे नाव अट्करण ॥ २६ ॥ जेलहे शास पिया किरसा की, न जाणे भास्खनो मर्म ॥ आ० ॥ ते करे खेको नालियां ॥णे कमीपणे पार मा० ॥ पण नप दिन न मारियां ॥ १८ ॥ एम प्रो. पाप, मलमला जाण कहाय ॥ मार ॥ मागाये स्या ॥ विराउला ना मेह, पापी पण ना " गलिया ज्यं पाणी लुल || भा. ॥ फागः गाल फमा मी युहीना जाण, वादीगर गया गण ॥ भा? " पर्ण जे मुलावता || २. ॥ निणममे मंत्री एस, जान येक ॥ भा० ॥ मेहर नामें मंत्री पोशा तिहाकिण आव्यो थाय || भा० ॥ नादी जोड तिहो । ॥ २१॥ लायो नाही भेट मंत्री लयो ने उमेद ॥ आ. - मन्चरे ते नृप नस्यों ॥ मरमा यो निण योग, पूर्व भोग ॥ मा० ॥ काम अगल फँदै पस्यों ॥ २२ ॥ लहे ॥ कामन मेहेर अपाह, नृपने ने लाग्यो टार ॥ हाथी होये मुख ॥ आ० ॥ अगनि वल्या भगनी उरे रमणी करें ।। २४ ॥ इस चिनी मन-नोट, राजा राम जी भा• ॥ मेरर मंत्री इम भगे ॥ नृपन रोग न कांय , कीया उपाय ॥ आ०॥ नाण गर्न अजगणे ॥ २५ खनु औषय कान, कोथं ते निदान || मा. ॥ सिद्ध मुरव गिल्या ॥ अंतरगतगी पीड, काममरनी रीट । ने गुरु मुरब सार || आः॥ ते नाणे संपली काला कला ॥ २७ ॥ सभा विमगी नाम, मह पोरोता निन श ॥ या. ॥ मंत्री दिवे बंद करे ॥ पांना अल्लासनी दाल, हला कहां उजमा ॥ आ० ॥ लांबायजय इम उच्चर ॥२८॥ ।। दुहा ॥ दिव मेटर मंत्रीगम, लोकोने दे शीख ॥ नृपनी डा टालबा, वेटो आइ नीतः ॥ ॥ कामातुर नृपने लही, चिव कर उपचार || राणी सचली तेडीयो, गोल सजी शिण र ॥१॥ रम पम करदी आवई, रूमें अपछा मार ॥ दन तपी जे पाटिका, कार्माने मुखकार ॥ ३ ॥ भावी नृपना गतला, आलाम उल्लास || पवन करे रंभादले, अनि नेत्र व दत || १ ॥ पराणा ने पदमगी, नृपन मीही भंग ॥ न करनी पदि दो लगे, उनरयो नाम अनंग ॥ ५ ॥ कोक गाव नगे चलें, कीयो एउपचार । भाख उपाडी नगीषण, म पनि निग बार ॥ ६ ॥ कामपर हकको थयो, पाम्यो च इन मार ॥ मेहर मंत्री जस न्यो, घरलो जपजय कार ॥ ७॥ 'पदनरेग हरयो यगं, देखी यदि निवान ॥ सन्मान्यो मंत्रीमरू, देई बद्दल मान ॥ ८ ॥ वीना सचित्र दूर करघा, गल्यो एह प्रधान ॥ मुझने मोहोंगे गुग करना, दीयं जीवित दान ॥ ६ ॥ नृप कई मंत्री तुं पयो, माहरा दुसनो जाण ॥ में राख्यो नझने मद्दी, तन मन करिन माण ॥ १० ॥ तव कडे मंत्री नृप मुणो, हु तुमारो दास ॥ केहयो ते करा अमे, नग मन करि एकगग ॥ ११ ॥ एण मुझने माची कहो, ए कारण य' कम ॥ अंतरगननी यातरी, गाणी जाए जेम ॥ १२ ॥ विगर करे किम जाणिये, पारका गननी वात ॥ तव नृप मंत्रीने कहे, मांडी मपली धात ॥ १३ ॥ ।। दाल २ जी ॥ नदी जमनाक तीर, उडे दोय पंखीयां ॥ ए देशी ॥ र कहे मांभल मंत्री, कह नु नोपनी ॥ हरियक

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गरी ते नयण न, निरमे पति भले ॥ घरनां कारज ति
मी, काहि न जाले ॥ १० ॥ लोभीनी परें गौर, रहे
निज ने को ॥ साधा पिपानी सूप, नही ने, जोरने ॥ सूनी
फिरे नम देह के, मन विण मानी ॥ लप लागी पजार ने,
सलना अभिनवी ॥ ११॥ विरुभो विषय विकार के, राष्ट्र
लागे जिका ॥ चीपपीनी दिल दाइ, जाणे केवली तिका ।।
मदिग पी जोव, एमाई स्युं हे ॥ विरहनो लाणो भीर,
माइत्यू पो ॥ १२ ॥ जोजो भरियां मीनटी, लागे जेहने
। मेरे पहावाल के, मानव तहने । विरहनी वारता पीती,
दसले नाग पण निमनही पुस, शं ते पिठाण ॥
॥ १३ ॥ मननी गलच रात, दिवस रहे नेहरा ।। न गण
मुख दाब भीर, पंचागो महा ॥ मारिणी लीगो जीर,
पटे वे समां ॥ तन धन सोपे नहीं ने, सर त परमा ॥
॥ १४ ॥ रपणी मां नेब ने, काल पंकी || मगटेक
दर्प मन, बगा निकली ॥ कापी जन मनवने, बराए ने सं
परी । मानलना सिण एकमें, जाये ते परी ॥ १५ ॥ का
मी जनने काम, मुभर परे ॥ विरही जनने आनिति
रिण स्ने नरे ॥ कार पराद ते कास्नी, संगयी भामरे ॥
समजननां मन ने, वर पांतर करे ॥ १६ ॥ सपन पुरुष
माकोर ने, जावे पराक्रम ॥ कापिनी मोरे श्रीजग, एक का
रू -1 कामगारां नारी चे, साने वश करे ॥ रागना सीमा
सरनर-को मिरे - १७ ॥ माला ने नरला पर, ग्री
सनरी पर सो .मारी मांग भाग, मंत्री तुम काई ॥
पंगेन. मागल, मांग में की। संगमिरीन कारण..ए
नीरन मो१८॥ भोजन परवा गदा ना, ए फल मारिया।
कारन बरीने कारन, लोमन साहिसा ॥करण शिरतों

117) प - नप पुणे जड्यो । ना. विधावी प्रावियो । एउवाणी कमें, मावो के विया ॥ ७॥ न मा बि मोडक थप कीजिये । नमिर्गपुग्न दग्वि, मुबाग्म पीयें जो कोड निगा डोन नो. पलकमें जा मिलु || पवमान पन निहायी न नीकल । ॥२०॥ दि घर परपन कग काह कर मनो वाहाला, मुझन मला तन मन कर खम्बान के । मुग्नने मिले । यारं कोटि पयार कगे भले मन ।। ए कार ने मवला. मंत्रोयं मभिल्यो ।। कामावर भयो । य. पीय अटकन्यो । यण वाया पण पिड. अनादी में पायो । तिम ग्यी मार मालपा || १२॥ तो डिव कांहरू पाल, म बाल कहा मला ।। नपना मनमें श्रीना. फिकर काद पटा । मबल कमल रशे तो. पानप मान ॥ तो भीग्रामण मपली. लखें प्राण ।। ।। २ ।। मामलजा भवि भागल, पीठी वारना । मामला मग पाल यांना दिल ना ॥ मीना उल्लामनी दाल, ए की जीप कग ॥ नाने मन गमती ए, लधियें उच्नग ।। ४ ।। 11 बड़ा ।। हिरे मंत्री नृपने को, सभिलो प्रभू महागन ॥ अनागतनी में कही, ते में निमणी आग ॥ १ ॥ पण एषा नाकी नही. से भारी महिनाय । गणवा दरान यमदंडना, नभा भावी वाय ॥ २ ॥ तिम ए ग्रीशु नहलो, करयो में निम ॥ छहो मंगति एहनी, यं लहो मुख मुमल ॥ ॥ ॥ज की मने मम, सामी मागे अपार ॥ पार जोग संग गाभगं, क्या य नाम पुकार ॥ ॥ पर दुःखभंजन गी. पाजन पाले मार ॥ र भोयें जिहां थी, गा किस र पार ॥ ५ ॥ अगवरती ए पानटी, किम it R नाय ॥ देखी पेसी वाघना, मुरवगे धारची हाय || ॥६॥ वसंवसिरी नारी सणो, जो कमि प्रतिपंप ॥ णनी पाती नदि रहे, हिंग तणो नेय गंध ॥ ७ ॥ पोतानी परणी मिया, अपनारे संगरेल ॥ जगमें से परणी पली, पर परणी विपवेल ॥ ८ ॥ कागी कोची करपली, काकी करी जाण! परणी र पनावडी, पदमिनी वा पिणा ॥ ९ ॥ मापणी गावटी पंद्रमा, जे दोही पीनाय || कीजें परनी मळी, मे दोही नदि नाय ॥ १० ॥ परती संगति से करे, तानां पूर ण पाप ॥ इंप करी से नहीं, न मिटे तास संताप ॥ ११ ॥ घृतकम सरिसा नर कमा, भगनि सरीखी नार ॥ मधु खररी सिधार ल्यू, तिम स्त्रीसंग विचार ॥ १२ ॥ परनारीना का एथी, ने यया विपपामंध ॥ नरकनिगोस्वल्पा, मृणमो दास संरंप ॥ १५ ॥ । हाल १ जी ॥ नणदलनी देशी ॥ राजन हे गजन, पण सरिखो रामनी, जे बलीयो कहेवाय ॥ हे गमन ॥ ला खरेतालीस गज तुरी, सेवे सोल सास राप ॥ गणन ॥१॥ पिक कि काम विदना, कामें लन्या जेह ॥ हे रा० ॥ जस अपनस कांह नहि गणे, नगणे सुख दुःख ते ॥ई रा० ॥ वि० ॥ १ ॥ बचीर सहस अंतेटरी, में अपर पाप ॥रा. ॥ ते सरदीने भवगुणी, रावण सीता हराय ॥ हेरा|| वि• ॥ ३ ॥ राम ने लिच्मण बेहु मिली, मेली कटक अपार ॥ हेरा. ॥ पार यरस लगे आकरा, झ्या नर शंकार ॥ हेरा॥ शि० ॥ १ || सीताकाणे रावणे, कैर गुमट एगाय ॥ ॥ भंते पण रावण नां, दन म स्तक पदाप ॥ रा. ॥ वि० ॥ ५ ॥ त्रिनगम कंटके वरी, नाम परावनो मह ॥हे रा० ॥ चौपी नरके ने गपो, परवीनां फल पर ॥ हे रा• ॥ पि. ॥ ६ ॥ लंका परलं

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रेरा० ॥ परिष रमे कई जातिना, पामी ते निज दाब ॥ है रा. वि. ॥१९॥ फूट कपटनी ओरडी, गोरदी निगुण नि रोल ॥ हे रा०॥ अभपा राणी तणि परें, कोह न राखे तोल ।। हे रा० ॥ पि• ॥ २० ॥ रपी तणां मन एहवां, जेहवां पाकां पोर ।। हे रा०॥ वाहिर मुंदर देखा, माहे कठिण कठो र ॥२०॥ कि० ॥ २१ ॥ महिला केरो नहलो, महतो सध्या राग ॥रा. ॥ यासों मासनो मेहलो, नेहवो स्त्रीनी राग ॥रा॥ वि० ॥ २२ ॥ स्वारय पहोंचे मिह लां में, निहां लगे कर रंग रेल ॥ हे रा. ॥ पूही तन धन हरि लिये, स्टी विपना वेल ॥ हेरा० ॥ पि० ॥ २३ ॥ मुरी कनायँ कतने, हणियो देई र ॥ हे रा० ॥ नारी इष्ट होवे स दा, न जुबे करतां केर ।। हे रा. ॥ वि० ॥ २४ ॥ वध दत्तने मारवा, लाम्वनां मंदिर कीर ॥ है रा० ॥ चुल्लणीय निज पुत्रने, स्वहस्तै वन्हि दीप ॥ ईरा० ॥ वि०॥ २५ ॥ पापं रत भुनानणं, खबराव्यं सरनांस ॥ है रा. ॥ से नित हने रागो, नारूपो जलधि तास ॥ हे रा• ॥ पि• ॥ ॥ २६ ॥ नारी न होवे आपणी, वानांनो कारयें लक्ष ॥ हे राः॥ दूपन डांग दो भामिनी, देखाहे परतक्ष ॥ हेरा० ॥ बि० ॥ २७ ॥ मोह देखारी दगी करे, नीनो छ ए दंग ॥ है रा० ॥ ते माटे नुमे रामदी, म करो परखी संग ॥ है रा• ॥ वि० ॥ २८ ॥ इणि पर- नृपने मंत्री, दारुपा केइ इटांत ।। हे रा...|| पण नृपर्नु मन-नवि मिलें, वसंतसिरी चित्त आंत रा०॥ धि० ॥ २९ ॥ मन साग जेह उपर, विसार नवि जाप || हे रा. ॥ मोहनी मदिरा याकमां, उपदेश नारे दाप | रा. ॥ धिः ॥ ३० ॥ लगि सीजा उल्लासनी, है। . । . 4 भार भरि में मभिसो, It'पा . ।' 4: परेमा नान पोश ॥ जाणे 141 || हम जाणी नगर्म भीत घगी, 4'11'1 -13 भाषण, भणसा म। भागनल पाप ॥ ना ।कहाय) परना 1 पाए कि मू 4HI हिंग. मुर जउ भाग " नाले मन A 4 1 , । M . . AAP . ८ । पान गने . सपना परिमा ना निमगा भान रे 77 . "ग सीन 11. श्री J . 7 . 1 मारा दे एक तान, शिर रमणी देतस मान रे || म ॥ ॥ तो नील छे गुणनं निधान, सीलें पामे स्वर्ग विमान रे ॥२०॥ ए तोशीलें संकट भांजे, शीळ ते हरि ज्युं गाने रे ॥ न• ॥ ॥५॥ ए तो शोले कंभर श्रीपाल, नस कोर गयो ववकाल रे "न• ॥ ए तो पलं अदर्शन शेटे, राति फीटी सिंहासन पेठ रे ॥ न० ॥ ६ ॥ ए तो शीले मंत्र स्वामी, लघुवयमें ययो शिवगामी रे ॥ २० ॥ ए मो शील नेम कुमार, पपी शिवरम जी उरणार रे ॥ न० ॥ ७ ॥ एतो शीले भेषकुमार. जेणे केटी आठे नार रे ॥ न. || ए तो शी गनसुकमान, शिवप दवी लही सरसाल रे ॥ १० ॥ ८ ॥ ए मो शीळं लिभद्र नाम, राख्यं चिहु जगमे भीमराम रे ॥ न || ए तो गले भीमल्लिनाय, ए तो मुगतिवधू करि दाय रे ॥ न• ॥ ९ ॥ ए तो शीले सीता नारी, करी धीजतां शील समारी रे॥ न० ॥ ए तो शीलें मुभदा भाटी, चंपा पोल उपाठी रे ॥ न. ।। १.॥ए तो द्रोपदी पांच केरी, जेणे कौरवें लना उवे रीरे ॥ न॥ ए तो तेहने शील ममा, सर सत अष्ट ची र पहेरावे रे । न• ॥ ११ ॥ ए तो शीलवती मुकुमाल, अहि फीटी या फुलमाल रे ॥ न. || ए तो शीले चंदनवा ला, पोरें करी पाक प्रमाला रे ॥ २० ॥ १२ ॥ ए तो त्यादिक अवरात. कई शीलनी केती आरूपात रे । न. ॥ जे पाले शील नर नारी. हुंना तस बलिहारी रे ॥ न० ॥ ॥ १३ ॥ नीलियो किहां न सटाय. फुकर ज्युं घसा साप रे । न॥ शीरने पाहे कुटी, निम परमाथी दांदी फूटी रे ।। न. ॥ १४ ॥ कशीलनो नारे रिसास, कुशीलियो फिरे या दास रे ।। न० ॥ कुसीलियो गनि नावि पामे, नाये नरक नि गोदने गरे ॥ न. ॥ १५॥ फीलियो सपले भाय, .. । 1 - नाविक दंताय । न समीरना कम भोर, म वो भव मिया चार न मत्र यंत्र ने कि या जा, यमीन नकल ना ॥ न. । मिद साधना म ग. कमीन जस कादनावरे न ७ मा हाय ने देव कटाय. मागथा मार नग्मा जाय रे । न. " अहिल्याम उदया. ता मामभनी नाम दीपारे । न ॥ १८ कर पाटो मार कराये गा मान फिम नामोरे न ले गया गणिका मग टी न ममी ने दगे रे॥ ।। वप मरम र चारय पाली कंडगना परजा नमन कण गते नर वठा नारकीपी मालनी करणी माटी, करतो फिरे नाना महोट गीलन तप जप फोक. वर बंधन बहाग दिल नवि भावे बार बार ॥ न. तो जहने गे पदी ना नारा न. ।। २२ ॥ ते माटे. उता परमाना गायरे न. ॥ कुगीलर्नु मा । २३ ॥ दिल मावन सामना पटना माया माना। पा मापामा. उजवान मन पानी काठारे न 11 वा मनालग जे वाला. मन कंगे पदशं चालार न नाय नम 1 जगन मा. पण बार न लागेज - || ना परदेगा पर टूडे, पण मग ग्वटर || दम पाने परचार, पण नई कार नाक । ॥ मगायें पकड़ी नाना तमाम नरा तानार 11 न ।। नव मत्री थयो नयागा मान्य नागर भगणा || न. 1॥ २७ ।। H -- न - ।।

हिच सुगना में नृप पोले, मंत्री आगल पोयी खोल रे । न. ॥ ए दो गा रहासनी दाल, कही चौथी सन् र साल रे ॥ न. ॥ २८ ॥ इति ॥ ॥ दहा ।। वयण मणी मंत्री तणां, नृपने लागी हिंग ॥ भूत भराड ते नृप थयो, भागे लाग विंग ॥ १ ॥ हित पीलापण देवतां, नृपने की शाल ॥ आगे अहि मंडियो, तिम हुवो नृप विकराल ॥ २ ॥ आगे वानरने वली, विजय चटको कीघ ॥ आगे कैदराने वी. पान- विरुद ते दीप ॥ ३ ॥ तिम ? प मंत्री उपरे, कोपाकल यह राय ॥ पदनवेग तिहां सचिव बोल्पो भ्रकटी चढाप ॥ ४ ॥ रे मंत्री है जाणतो, तुझने चा गुर कोक ॥ व दाणा तुझमें नही, जे बोले ते फोक ॥ ५ ॥ ने किम जाम्पा कुशीलिया, करणी हीणा नह ।। परस्त्री गमन किया पर, सर्गे पहोवा केह ॥ १ ॥ ते सभिल तुम ने कई, माम तणे अनुसार ॥ व्रत भांगी ने मुनिवरा, पाम्पा भवनो पार ॥ ६ ॥ ।। दाल ५ मा ।। जीणा मारुजारी करहलही || ए देगी । अनेना कहे सचिवने, सांभल नु एकंगो भइने कान उघाटी हो राज ॥ चोषिश वर्ष परे रही, मुनियर आई कुमार व्रतने लान लगादी हो रान ॥ १ ॥ ते गयो ज्योति भागारमें, सिद्ध वधना संगमें नइ मुख भोगवे पुरा हो रान ॥ साख भली नस परही, धीरमदेवनी- हिंडमें मर जो तुं सनूरा हो रान ॥ ॥१॥ अगिा रापनो कुंवर, नामें नंदिरोण जे बलियो यइम नलीनो हो राज ॥ तेणे पण व्रत भांजीने, गणिकाएं पर मांडिगो रंग भीनो दो गज ॥ ३ ॥ र वरस मुख भोग बो, गजरामर पद लहियो करणी सह जग जागे हो रान ॥ माहानिनीय जे मूत्रमा, साख भली भागने मंत्री लिखित पनाग .

होगन || २ ।। पापी पिलानी पुत्र ने. म्री हत्या जिणे
धी मोटी का व्याया हो गन ॥ ने गया मग लोक आठ
माग्य भली न जा गंज था योगभावे उपायो हो गन ॥ ५
आपादमति मगर जे. नामकीन माथें बार वरम घर
रयो हो गन । माय भी तम चरित्रमां, ने गयो शिवग
माहे जाणी जे बन बदबा हा गन ॥ ६॥ पंद्रशेखर विष्ट
धम ने निज भागनि माय निगिदिन रंग रमतो हो गज ।। ते
या भान र प्रिया. श्रीमत्र ना माहानम सार्या छ मन गम
गगन ।। ७ ।। ची भरत नगमा, गंगा देवीन घर रहि
८ सयवासी रन । गहम चम्म मुख भोगवी, भुक
पाया ज्ञान उन्लामी हो गन ॥ ८ ॥ अष्टाप
जमा माय मत परीय पहना होरा
'तना : जाणजे, जंबीरप बानमा प्रभर पहला हो रा
न आना जाणीय, नाटक गाना ला भटस्यो
गा।' कंवल मण ने पामिन, मुगति पगरें ।
। सदो गज ।। ।। ..र मार्ग का
प, दो भार नहनी नका : गन
11 मामी. गारबाइन पिणा पा रही
: ।। ।। १ । ने पट भाषा परगा
महिम ५व मुलाक हो गज । नेहना
मना मालामाद वानी जी का गन
न नकव्या. नागभ यादा
मस । चिहाहामि चमग्य नापना. मद
राम ना हो रान ||
वन टाटा मेमनी मीठी मन लागी हो गन
मा+7 माना गपित गउरी पर्ने सपना गा
.
ז ין'
मा
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हो राग ॥ १४ ॥ प्रमपुराणे ते प्रमान, परमेमर कार मान इनियां एकण ध्यान हो राज ॥ तारक जग परमंसर, निन भी दिलसे रंगे यह एक तान ऐ राज ॥ १५ ॥ उमपा नारी रवीन, जटामध्ये पनी रातो पिर गंगा हा रार ।। सारक नाणी शंभने, परण अटार जे मानषि रुदने पूर्व एकंगा पोरान ॥ १५ ॥ पृषी ऊसा देसी, विनेषी यो शंकर विण दिनथी गवराणो दोरान ॥ गिनां पर निग दिनयी लिंग पुरागें चादो अपर से मपराणी हो नन ॥ १७ ॥नि शु पुरागे विष्णु , कान गोवाल थइन लोकमदि पूनागोरो राम ॥ त्रास सहस धंते उरी, से उरी महीयारी रापा साधे गवाणी राम ॥ १८ १९ फुगा पार नृप नमी, लपुरपने नारी मुग्न देवे विकसी हो रान ॥ करण ययो ने उदरनो. जग घा ते देवनी सहु जग माने उलगी राग ॥ १९ ॥ ५ अवदान में कमा. करमा दीपक लेइ देखी कप केइ पदि या हो राम ॥ बलवंताई शिरोमाण, ते सरिया पण बलि या गलिया र नाहिया दो राज ॥ २० ॥ तो माहारो कोण याभगे, तिन भवनमें मर्पने कर्मे मुक्या चूगी हो गत ॥ ने पने गन उहिया, तेणे पपने करी घाई होगरी लेवा पूगी हो गन ॥ २१ ॥ यानि मुगति ने पामी, ने करी संपली भरितम्यताने हाय हो राम ॥ जेने समय भागीय, शुभाशुभ ना पंच जे बांध्या ते आवे साधे हो राज ॥ १२ ॥ उग्र तपस्या नो वी, नितारि नृप जिननी रागी पूरण हुनी हो राम ॥ ते मरीने पो मूभडी, किहां गइ फरणी तेदनी गिरियंध गतिमा पहातो दो राज ॥ २१ ॥ ए अधिकार तुं नाणो, श्री शे मा माहानप माह छ ए सापी राज ॥ करणानं कारग की नहीं, भक्तिकाला कारण सपले जिन पाणी भांची शेरान {११) ॥ २४ ॥ भपस्थिति पूरी या विना, उचम नोव करे पगले ख कदिय न आवे हो रान ॥ माली सींचे सो गणां, पग ते इनी उतावले ऋतु विना फल नदि पार हो गग ॥ २५ ॥ तिम आपणी ऊनावले, समकित रयण विना किम भवस्थिति पाकी जाय हो राज ॥ पण भूख्यो पण / करे, लाख उ सावल करीयें वे करथी न जिमाप हो राज ॥ २९ ॥ तिम द्रव्य क्रियायी न ऊपदे, भावक्रिया जब भ्यंतर प्रगटे तर शिव पारे दो गन । जिहां मुधी मफित नवि लम्रो विहां मूवी ते नविन चिह्न गति कर्म भाव हो गन ॥ १७ ॥ द्रव्ययी भो या चरवला, एकठा कीधा जीवें मेरु वडा ढगला हो रान ।। तो पण गरज मर्ग नही, भाव विना जे किरिया कोपी दंभी दयं वगला हो गज ॥ २८ ॥ ने माटे मंत्री तृमें, शील कुची लन कारण कोइ इहां मन गणमो हो राज || पांचे कारण ज म मिलें, भवितव्यनाने जोगे शुभाशुभ तव भणमे हो राम । ॥ २९ ॥ पडवो उत्तर मंत्रीने, मदनदेगें दीयो चोखो हायमें साहको राज ॥ वर्ग कहे सांभल मंत्री, नुन करणी विगता वी नारा कान उपाह, हो गन ॥ ३० ॥ लन्चे पीना उ हामगा, मंत्रीने समझायो भलि परें पांचमी दालें हो रान ।। दिवे सुणजो मरियग तुमें, आगल शी भी वान नि पंज ते उजमाल हो रान ॥ १॥ ॥ दुद्दा ॥ रे मंत्री नाहरां, जाणुं मपल चरित || पा पर साई पदममी, नुं पपो महोटो पवित्र ! ! || पहा खा औ श्रम वगा, त्यो बलि लोकां लांच ॥ लवा देवा मापलां. गयो यहां माच ॥ २॥ यह कपट दिये धरी, बोली मिठाराल | घो दिन तो मणं, राखी कहा तोल ॥ ३ ॥ परनिंदा करता किगे, पापं नाको चिट ! माची जटी करो पगी, काहा ज मा इद ॥ १ ॥ अम उपराले सोकने, पो सपनो पार ॥ परवीटी परजन, देवो दुःख मपार ॥ ५ ॥ अमें भोसरी पा पपी, नु न भोसरो कोप ॥ मरण रीक राखो नही, डावी. पदप होय ॥ ६ ॥ पर उपदेश देवा पj, हापण रालो नक | आप न जाये सासरे, दिये परापां शीख ॥ ७ ॥ निज अवगुण जोदो नहीं, पर अवगुण तुम लेप ॥ पापनी पांधी गांउरा, गंगे शीश परेय ॥ ८ ॥ चंदन भार गर्दम मिरे, भागे लोकें दीप ॥ भारोबार गर्दभ पपो, पण चंदन स्वाद न मीप ॥९॥ निम मंत्री तुं जागने, तुझमा एहसभार ॥ पुन उपगार नाग्यो नहीं, गर्दभ सम यपो गर ॥ १० ॥ पाप पन महिपति नगां, सांभलि चमक्यो विच ॥ मना पीनो यंत्र ची, राजा केहना मिव ॥ ११ ॥ हित शीखामण देवतां, सा हा देव दीप ॥ गोलो गर्दभने हणी, गामशं राखे रोप ।। ॥ १२ ॥ महिपनिने मन ओलखी, पोल्यो मरि तिवार || स्वामी नमन कही, मान वे निरधार ॥ १३ ॥ रागा के पर मेसरू, जे वाले ने सत्त ।। एहमें भूठ न संपने, दोमें छे. दैवष ।। ॥ १४॥ मुखयी साकर पालीने, नृपने करचो प्रसन ॥ महिप निये एप मंत्रीने, सनमान्यो मुवचम ॥ १५ ॥ सिरपार देर बोलावियो, मंत्रीने निज गय ॥ रान कान गुम चालवे, मद नग विहां राप ॥ १६ ॥ इति ।। ॥ दाल ठी॥ पन मेतारज मुनिबरु ॥ ए देसी ॥ एक दिन पैडो पालांये, नृप मदन पेग ॥ संतसिरी चिच मांगरी, नम भयो उदवंग ॥ १ ॥ पिग चिग काम विटंबना, मोरे जोपन मागे ॥ आंकणी ॥ मोहनी दुर्नप नीततां, प इंदौलं लागे ॥ वि० ॥ २ ॥ तिण अवसर एक मेहतलो, कालमेन ते नामे !! नृपने नमि अनि दूकडी, बेठो भोवराम ॥

। ॥ | मननी मला माविया, मद मग्यो कंट मग ।। पण ने मानणी पो. माहा दट करद्धि । वि।। ॥ ४ || नगद प्रामापी ने न जाणे अठग्नो भेल ॥ चाही मुगली कावी. काटे गम्ना तर का कर्ग : मंगमा, पंठा नपन काने ।। ग्बिर केंग वारता, मादी एक लान हारबन कानि विस्तीन गर्ग जन मा. न माली नमो गण व नांहे ।। भार लापन ने, न कान भेरघो।। नार का ।। १० ॥ ८ ॥ समागम हा चलन उछापवा, मा पमा नाणो भछो. हरि सनम पातो॥ 'नो सेवा ॥ जनमाणस . 17पन । 14 T 7 -- - T मण ।। पले कोमा में ॥ पादशी अग मग पणा. मणा भूपति अगर ममी, हपिल जननी एघारी॥ नम जनम अलेखे। 1 . 411 . .. 41 . मामी ने घरे, तस .. पर हॉचलनी की, - ५, काइ बाकी नरा माया न माटा, चमायो चिनमा नयी आग प्राता नप परत या दा । वि० ॥

[४७) 1॥१८॥ आगे देरी कर चश्यो. वली करयकी हो ॥ आगे जहारीन वली, मिल्यो साथी जूडो ॥ धि० ॥ १९ ॥ मागे सर्प दिने, करचो पुंग्या नांदो ॥ आगे अनि झालमा, सिं यो पृत मांदो ॥ पिः ॥ २० ॥ विम नृप हरिनळ ऊपर, पण रोप भराणो ॥ रे मंत्री हरिवल एणी, सखी पर आगो ॥ वि०॥ २१ ॥ तव मंत्री कालसेन दे, कई नृपने वाणी ॥ स्वामी हरिवलने हणे, जनमां जाय पाणी ॥ पि० ॥ २२ ॥ पण एक स्वामी सपाय छे. नुम बुद्धि बताई ॥ हरिवलने तुमें मोकली, लंका गह गg ॥ ॥ २३ ॥ जलनिपिमें जाता थका बोये एह बोलें ॥ तव नारी तुम मंदिरे, आव रंगरोल ॥ वि. ॥ २४ ॥ ठाकर चाकरनी इहां, साची खबर ते पडो ॥ मुम आणा ते शिर धरी, लंका गट पहछे । वि० ॥ १५ ॥ माटे तेही नुमें, हरिवलने पूणे ॥ एस कही परे महेंतलो, ग यो पाली मंटो ॥ धि० ॥ २६ ॥ लमें पीना उल्ला सनी, कही छठी दाल ॥ आगल भवि तुमें सांभलो, मी ठी वात रमाल ॥ वि ॥ २७ ॥ ॥ दहा ॥ इणि परप मंत्रीसर, एक मनो करि दोय ॥ महिति पहोतो महलमां, मंत्री गयो घर सोप ॥ १ ॥ गोमे दिन रवि गिपो, प्रगयो राग विपास ॥ रानिये बांह पसा रीयां. करन कीर विकास ॥ २ ॥ वाडामा वलगा जई, धावाने हण ॥ दोवा से भामिनी. मेहने छ घर घेण ॥ ॥ ३ ॥ देउल सघले वाभियां, झालरना झणकार ॥ वास अदद अपना पका, रजनी नाठि तिवार ॥ १ ॥ मुलुम को पी जावडा, मांडे निज खटर्म ॥ साधुजन मुग्व ' मोमती. पांची निनधर्म ॥६॥ पंगल वानां वानियां, बामो गहिर निशाण ॥ एकरणी परभातनी, नर ऊगे शुम भाग ॥६॥ ..

मदनगर निगम TTI 27 TE या महामन मा पामे, द माल सर नगन नाम पर नबन जगत नादनात रत . समा नपा ,, , . 1 1 १ 7 4 1 .. I 6 . का प म 7 'ना 7 प 7 ५ .. 1 . नगर प्रा। का भीनय क्र. ५. घन । पग पीर प्राा मी, कोइ नभ ८ ।। मग पटा मरिनी पोरे, मान काग गया। ! माग नगी वो करी , भयो मयले गर E: १ ॥ प्रयोटि करोरी, मस्ट्री पापहा. म. । म

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- ।। सः ॥ दंची नवि जुरे रे. लम्मागा राहु कोय ॥
En० ॥ १० ॥ नव कर जोडी पत्री कहो. कालसन ने
॥ स॥ माय ने कही वारता रे, सामली हुआ गनुर
। सः॥ ११ ॥ पण रिपर पंथ भाकरी. जलविमें केपन
पाप ॥ स. ॥ पग व सिद्ध न संपने रे, भुजायी न सराप
स. ॥ १२ ॥ गा पाखर अंतगर रे. नाखो तुम राजान
स. ॥ ते किम निगयों कंपरा रे, ची थारा निदान ॥
॥ ४० ॥ १६ ॥ मनकोटनी कटि उपर रे, मुकी गोलनी गुण
॥ स. ॥ गात्र विना कम उमे, में करे गभा विरुण ॥
॥ सा ॥४॥ निम मामी लंका गा रे, शक्ति विना कुण
माय ॥ स० ॥ पूगे पराक्रमी जे हुवे रे, ने जावा भंगमाय
|| स.॥५॥ के व लंका देवता रे, के विद्यापर य
।।म० । के तपमी मात्र जना रे, तो तेरे जलनिधि नोय ।।
॥ स. ॥ १५॥ योनानी शो आशरोरे, जलनिविना लहे ना
ग॥ स. ॥ दारयगत एक सांभन्यो रे, मलभिय आंधी पाग
! ग॥ १७ ॥ कवकी रियलने मण्यो रे, मे पेठो तुम
पास ॥ म० ॥ नावे ए लंका गरे, बीट पीने उल्लास ॥
॥स. ॥ १८ ॥ सबल पुरुप ए नागि रे, पदमां जग
दोश | स॥ काम नृमा सारशे रे, पूशे मननी नगीश
॥ म॥ १९ ॥ इगि परें फलति मंत्रिय रे, नृपन दिनानि
कीर ।। १० ॥ मुभर भिगमणि पूण समे रे, दीसे हरिवल
मिद ॥ यः ॥ २० ॥ त निमगी ना निग वेला रे, हरि
चन्दने कई राप ॥ १० ॥ शीन पी बीई ग्रहो रे, निन मस
रोपण पाप ! स. ॥ ११ ॥ राप विभीषणने नारे, नेडि
भावनो भांति ॥ स. ॥ मान मुजो तुम नगो में, जाति
मनी उणार || ग. ॥ २२ ॥ नर बिल :
१

मन विमासे भाग ॥ स. ॥ नो नाकारो इहां का रे, तो न रहे मुझ वाम ॥ स० ॥ २३ ॥ लाने कपट पहेरीय रे. लाने दी. दान ॥ स. ॥ लाने पंचमें वैसीय रे, लाने वारे मान | स० ॥ २४ ॥ लाने गह कोट सोनिय रे, लामे राली मत्त । म० ॥ लाम क्यी पुश पिएं जा रे, किन कहुं ना हिरे झन ॥ स० ॥ २५ ॥ इणिरे मनमा सोचीनेगे, वोल्या इबिल ताम ॥ म. ॥ लावु ना लंकाधीरे, तो ई खरो मुझ स्वाम ॥ स० ॥ २५ ॥ मलनु तुम लंकापति रे, तो मुझ देनो शायाम ॥ सः ॥ एम कही बोई ग्रही रे, हरिवल आन्यो आवास ॥ मा ॥ २७ ॥ थइ निनपति मुख देवि ने रे, वसंतामरी उगमाल || म. ॥ बीमा उल्लामनी ए की रे, लब्धियें मातमी हाल ॥ स० ॥ २८ ॥ ॥ दहा ॥ हम्बिल को निज नागने, सांभर प्यारी मन ।। जावो के लंका भणी, मागं भागा तृन । ॥ विर चिन की गो तुमं, देगी दान मुगाव ॥ शील मर पालीने, करना निल गात ॥ २ ॥ धरमो ध्यान ना पर मण, चउद पाय नु सार ॥ ममाया गिम सानिध कर. भाग गिवमुखकार : 1॥ संनो गुरु दव एफ मने, जेग गधारी गर्म | कीर थी कुमर करना, भोलसाची जिनधर्म ॥ ४ ॥ मीतम वचन तमाम श्री, वमनगिरी कई एम ॥ शं कारण नार परे, ने कई जाण नेम ॥ ५ ॥ ना मांडी इकिगत कटी, प्यारी आगन ता। निग कारण जायु पहे. सांभल तु मसनह ।। ६ । पियनं गमन ते मामली, कुमरी या दिलगीर ॥ जाणे भादव ६ स्य, बरसे आंसु नीर ॥ ७ ॥ कालजको बाली नहो.4 मम नम निमना || निशि दिन गिगों नम विना, बले मुरंगी। ॥ ८॥ सपनु दाब खपीये. प्रम, पण िन बनाय प

.
निसानलनी दाफ, पियं विण कम भोलाप ॥ ९ ॥
मातम नुमें. मन नामा परदेश || मर झिम वह मूगना. माने
पाले बेन ।। १.॥ नपर्ने कारज पिए न, मारोट लाव्या विंग ।।
लंकालिनी जाणम्पो, निहो गया ना निंग ॥ ११ ॥
मोमिनम भालो नुमें. तो इन तेरो मंग ॥ टोल परे तुम
नी, मोसंका रंग ॥ १२ ॥
॥ पार ८मी ।। मामणग योगी ॥ ए देनी । नापी
म की मांगन पारी, मुझसे मोहनगगे रे ॥ मंदरी सम
नौ | तुप भर देखि इमाव पा. तुम निधि दिन चिनने
ध्यारे । मं० ॥ १ ॥ मागयरी छ न पन वादाली. गि
प पंदने गरणी वाहाली रे ॥ मु.॥ चिवाल समा
चदि निशाना रे || मुं० ॥ २ ॥ जर या ने म
नी पांग्रानी, मीनदी पानी रे !! मुं. ॥ लेवग्विन
पपीतमा संगी, पया मेरेय पु पोरे ॥ में. ॥३॥
मनिम लाटर रोकेग, प प कार का फेगरे
॥० ॥ भने कता मन नपी कोनी, पं पारा पग
नयी पोतारे ॥ मुं. ॥ ४ ॥ पण करी नृपती मंत्रा,
साली परे पेटनी वारे ॥ मु.॥ जो नपर्ने रोष कारे
में, नो सानो जन रिस परिप रे । म. ॥ ५ ॥ जान
पानां शारया मारो. नम पानी पीनो बालारे ॥ मं. ॥
ए मंगामें मार से मारने, काम गरेनर से मरने ।
॥ ॥ ६ ॥ मारे तु मंगे मी मने भालाय
मोगरे ॥ में. ॥ नीन-ने पितानानं लगा
में पोदोरे ॥ . . दर पनी नामांकन पाग,
गरज समाना रसागरे ॥ बातम ममनी ॥ रन
पंगसार मानिस, निस्ता, आम ॥10॥

. पाएँ विमागे भार ॥ स. ॥ मो नाकारो हां करे, नरेमा काम || स ॥२१॥ लाने कपर पोरीग बादीदार || सः ॥ लाने पंप सी रे, ला, पान ।। . || ." ! का न: कोर लोनिय रे, गरी मन ॥ म. ॥ लाभ की मुन्न चिट गगे रे, ६. नामित ॥ म || २५ ॥ इणिारे मनमा गोली गोबर ताप ॥ ग. ॥ ला गा लंकापणी, मंगमा || ग.॥ ॥ मलय तुम लंकापति रे. पना नसा ॥ म. ॥ एम कही बाई ग्री, प्रागा नाम ॥ म० ॥ २७ ॥ निना मर नर, वनागरी सतमा || ग. ॥ धीना लामनी सी, धियं पातमी साठ ॥ स ॥ २८ ॥ दानलानिन नार्गने, गांभर पारा पुन । लंका मी. पाग भागा ना || || fort शेतुप. . दान गर || मील मार्ग पाटी, कर | मानना ना, पर 'मा ५ मा का, Hir iamमार। माह बाने, गमागम भागात निन ॥ ५ ॥ पोय पकाना परत ना माटी गर की मार्ग प्रा. २९, 17 साग . ममता ॥ ITTER माग. माहियो भार rn. प्रारी, मामा मामा. .imi Mial:airm, 4 मार .: 1.7 . भ. प. ।। नमा । 24 . + सिनलनी सराफ, पिपं विण केन भोलाय ॥ ९ ॥ ताटे मांवम मुमें, मन नाभी परदेश ॥ मन किम वारी मुकनां, मन्नने पाले च ॥ १०॥ नृपन कारज रिय नमें, महोई लाव्या विंग ।। लंकापतिनो भागम्पो, मिहो गया टना निंग ॥ ११ ॥ जो मिनय मालो तुम तो मुझने मंग ॥ टोर पर तुम बनी, भोग लंका रंग ॥ ११ ॥ ।। दाम ८पी ॥ मासणग योगी ॥ ए देनी ॥ ना भी नम की मापत प्यारी, मन्स तु मोहनगगेर ॥ मंदरी मम नी।। तुम मम देवि माव पारं, तुम निति दिन चिनों पारे । म० ॥ १ ॥ प्रागपकी मन वाहाली. नि प पंदने गदणी बापाली रे ॥ १० ॥ तं चितारेल समा नी, पर गाद निशानारे | मुं० ॥ १ ॥ जय शा ने प्रभ नीमोग्दानी, भीतरी वा पानी रे ॥ ० ॥ ले व नियम पपो ना मेरो, पयो मरंच पुणे मेलो रे ॥ पं. ॥ ३ ॥ मानिस लानर द न करे. पपा का काफेरे 10 || दुहने हातां मन ना कहेना, पंरे पाटलां पग नया गाना || मुं• ॥ ४ ॥ पण कगरें नृपती मगा, सानी परे पेटनी वारे ॥ मुं. !! भो नृपन को नपि सारे प.माननी जन हिम परिप रे । मुः ।। ने कोरिया मारी, तम परनो भोटो भारी ।। में. !! गगगासे मन, कानारे नम मरे । ॥ ने पाटे मंदगे मोती. पन माना: हिरे नागरे ॥ ग. ॥ मोशनी आरिश दोषी, वरनं लगा। नेकोमोरे । . ॥ ७॥ नर मनीरामांपर पर समाना पागरे । प्रानन मनी ॥ से गर सरि मागिनमिरा को भाया ।

में करी कोमो रे. तेहन मन वश करी गोरे ॥"पणी लामण दीन रे, तस अमृतफलरस ली रे ॥१॥ वधामणी पहेली रे, लेइ भावनी दी छतों पहेली.रे । ख मलामण दीपी रे, दोय दासीने विदाय कीपी रे, ।।.. दासी पण ठार ने लेई रे, पहोती हरिपल परई रे ॥ मेठी हरिमल नारी , मकी छाप ते आगल सारी रे ।। को दासी मपुरी वाणी रे, नृप मुकी ए तुमने जागीरे ॥ उपर से घणो नेह रे. पणं करिये गुणगारे ॥२०॥ दिनयी तुम पर भाव्यारे, तिण दिनपी तुम दिल भाष्यो ... भला मोमन अव में प्रीस्योरे, तिण वेलायौ नृप दिल स्या रे ॥ २१ ॥ देखा तृपारी सुधाइरे. नृप पाहे तुमने... दारे ॥ एक लालच हे तुप केगो, निम मोमीने गरे ॥ २२ ॥ तुम विर की नपरे, गम कान त मुरयां रे ॥ जैम योगी प्रभने प्यावे रे, नेम नृप तुम नाम जपाव ॥ २३ ॥ इम गम्बे पकगी नुपर्श, मन मेल करो तुमें ॥ सरिखा सरिखो मिल्यो जोगे रे, नृपा तुम जान म तोमेरे ॥ २४ ॥ पार नन मोहोटी पुण्पाइरे, नृार पर मात सगाई। एवात विधाना पेली रे, भाणे पपा साकर भेली रे ॥ २५ तु मो को सारंगनपणा रे, नप मारे तुम घरे रपारे । पाने बाम नुमनेरे, रानी की पोशायो भमरे ॥ २९ इम दामीनी सांभनी वाणीरे, नव करी रोपे भरालारे ॥ । र सागे विर्णनो पटकोरे, निम कुमरीने लागे मटकोरे : ॥ २७ ॥ वि मुगः कृमगे प्यारे रे, र मुखरी, ५.. ने मारे ॥ एतो बीमा हामी लरे, लय, नवपी रमासरे ॥ २८ ॥ ॥ ॥ विमा कोरे को, देवामान मार॥

- (५७) निम गौक्ति लगे, गदा पाट प्रहार || १ || नाटी जावित ले हुने, चतुरा डाहा नेह ।। नृप आगल आवो कहे, सपली मादी तेह ॥ २॥ नासंत भूमारे सइ, केनी कई माहागन ॥ लहंगे भी देणे परी. ए फल लयो तुम काम ॥ ३ ॥ स्वामी नुम प रसादी, जटियो दीपाक || सानी हलदर सेवशं, तब दो तन चाक ॥ ४ ॥ स्वामी हरिचलनी पिया, 'दीठी वी कु पात्र ॥ जाणे कोअचवेली, पर सखी नही यात्र ॥ ५ ॥ ते माडे अमनो गुणो, ए नारे तुम हाय ॥ एडयो मनड वाल जो, कर मोटी कटु नाय ॥१॥ पर वचन दासी तणां, सांभाल नृप परशाप ॥ हा हा में ए ई करणे, इम नृप घाखो कराय ।। ॥७॥ श्री मनमें धागे ना, देवें भी करी वाल ॥ नृप कन्या परमादयी, व्याने द्विन भतात ॥ ८ ॥ जाण्यं हतु वरा भाव से परिवल करी नारि ॥ पण साहा इणि नारिय, उतारनं नृपवारि ॥ ९ ॥ आणि अंने हांसी यह, पर नृप चिंते एम ॥ पर दुख केदने दाखवं, होटें दापो जैम ॥ १० ॥ इम नरपति पुरण करे, सांभलि दामी रेग ॥ ने दिन क्यारे भावशे, देखा से मो नेग ॥ १५ ॥ पाल वानी फिरि मोकलं, जेद विचक्षण होप | पद सरीता मानची, भिनवी आगे सोप ॥ १२ ॥ तर पटराणी निनपिपा, भीतिमती गुण गेर ॥ नहने नेही नृप कडे, मांभल तु ममनह ॥ १३ ॥ कारज एक नुमा भने, गगग लहां कई तुम .॥ हरिवल केरी जे मिया, मेला आणी गुन्न ।। १४ ॥ तर राणी कई कंनने, मामलनी महिनाय ॥ मीति पाग पलकमें, लेइ सा तुम हाय ॥ १५ ॥ पन कर्मा जीनुग्न, बीई अब निग दार ॥ चाली हरिबल मंदिरे, ग जीले परिवार ॥ १६ ॥ ॥ बाल .मी ।। मरनी हिसनाना देगी । चि सुमागे भरी क्रोष वमें परे, बेटी महल मनार ॥ निज ससीयांश परवर्ग, करती के लि अपार ॥ निण अवसर नृपराणी रे, मे गणवाणी रे सार ॥ आरती दीठी रे मीठीये, वसतसीरीय निवार ॥ १ ॥ मरीये जाण्यं मे में दणी, दशमीने काढी रे मोय जे में रणी, तेहनी आवी ए लोय ॥ खाम्यो नृप तब जागी रे, मुकी ए रागाने धाय ॥ इम कुमरी मन चितवी, लटपट मांड्या उपाय ॥ २ ॥ तब कुमरी सनपुग्न जद, राणीन भीटी रे नाव ॥ अगोभग मिलीने रे, चरणे न सह माय ॥ आगत स्वागत गणीनी, कुमरीय कीधी रे जोर || गणनुं मन रीझवे, वसतमि गै निग ठोर ॥ ३ ॥ चंद्रवदनी दो बेठी रे, बातें एकण पान ।। मागे पायी ऊतरी, रमा नम्वी मान ॥ रूप अनूपम ये हुना, ६ कर केनां वखाण ॥ जाणे कंदर्प वाटीय, प्रगटी पुाभ प्रमाण || ४ ॥ एहवी ए राज कुमारी रे, प्यारी दो गुणवंत ।। परम्ला सग्गी रे जोटी, मिलि करी पानही संत ॥ बसंतमिरी भूप गंग, कहे पटगीन माग || भले रे पगारया राणीनी काली म्यारयां रे कान ॥ ५ ॥ तुम भारे अम मंदिर, पान दुवो भी चंग ॥ अम मारने काम हुवे, ते कही जी मुंग । मा गा कर कमर्गने, , एक तुमनी काग || पनि कगने यापया. भावी गुगयाम ॥ १ ॥ रे भाप रे, नवलखो नवसरी हार ॥ वली वीनां बहु ! मां, भग भाप श्रीकार || नव कुमरीय जाग्यं जे, राणीयें मा यो जी पाम ॥ जो नपि गर्ग ना आगल, हो महोटी विना न॥ ७॥ नानी गणीने दुहरना, पवे नटि इण ठान ॥ मागीन कमरी, सभ गम्यां जी ताम ॥ मुसनी पिटाने । गई, मी गाने नेह ॥ वन कर्गन थापा, ने अना गीता ॥ ८॥ मन नागजी रामानी. वसंतामरी एम कहान ।

.
गमन,
भोजाय ॥ ते नहीबाट भाररा, परने वगंदौसाप ॥ उग
पणी दिगिमको जो. ऊगे पनि भाग ।। गमिार जो भीम
प्रो, तो सनी न के ठाण ॥ ९ ॥ पण करीये गगी नी,
अत समानी काम ॥ नृपने जो भमें धाबी, मा पनी फोरेनी
दाम । ने जाणी अमें राखीप, राणीनी नमा पार ॥ प्रामधी
रासी तुम, पानपणु निरधार ! • ॥ पण एक गांभन्ना
निनी, रानीनी कई तुम वात ॥ में प्रतली नाम
नप विधान ॥ ते तप में एक मासन, ने ना पूरे पाय ||
तव नरपनिनी राणीनी, मननी हाम प्रगप ॥ ११॥ इम स
स्प राखवा कमरी, मुख्या साकर घोल ॥ दीयो दिलासो ग
खाने, उपनावी रंगराल ॥ सर हसित पर गणीए. सांभ।
कमी पोल ॥ रामी नाणे मुम भाव्यानो, कामगंगे राख्यो जी
तोर॥ १२ ॥ अवमर लही कुमरीये. रागीने उपाय ।। म
चन वमन करीममी, गणीने कीर रिदाय || रागीये पण
जर नृपन, शीम वर्षा टीय ॥ आनी एक मासांतरें, नृप तुम
मनारय सिद्ध ॥ १५ ॥ मासनु तप कमरीयें, मांडधु महोटे मंडा
ण ॥ ते तप पूरण पइ रहे, इमरी मिलों मजाग ॥ निहां लगे
नापनी बेटा, मनु मजन करेप || निमें परी कमरी, जीर
न पे घरेय ॥ १४ ॥ इजिपरें रागीनी भाभली, पाणी न्।
संन ॥ भाग्य दिशा तुम नागी, भांगी मारट प्रांत ।। नृप
ना मनमे गंग, नरंग ग्यं उठा रंग ॥ नाग मागमं मामने,
अंगरे कुमगा चंग || १५ || सागर पत्योपमनांगे, कम पहा
टारे पाप ॥ ने मरम्रा पण जारने, भोगवनां परी जाय ।।
नोगं में मासन, जाई कतिक पार ॥ आनने काम करता,
रहेगे तास पिचार ॥ १६ ॥ इणिपरें भासा वाममें, मदनोग'
उल्लाम || निधिदिन रो पगन पह, ज्यं पद पर पिलाम ।।

. पर, बंटी महल मझार ॥ निज सखीयांशं परवर्ग, करती है लि अपार ॥ निण अवसर नृपराणी रे, मे गुणखाणी रे सार । आवती दीठी रे मीठीय, समीरीय तिवार ॥ १ ॥ मरीपे जाण्यं जे में इणी, दामीने काही रे मोय ॥ क्रोष वर जे में रणी, तेहनी आवी ए लोय || खोज्यो नृप तब जाणी रे, मुकी ए रार्णाने पाय || इम कमरी मन चितवी, लटपट मांड्यो उपाय ॥ २ ॥ तर कुमरी सनमुख जइ, राणीन भीडी रे बाप ॥ अगोभग मिलीने रे, चरणे न सह माप ॥ आगत स्वागत गणीनी. कुमरी कीवी रे जोर ॥ गणानुं मन रीझवे, वसंतमि गै निग ठोर ॥ ३ ॥ चंद्रवदनी दो बेठी रे, वातें एकण पान MATी उतरी, मानप अनूपम में हुनां, ह कर केतां वग्वाण ॥ जाणे कंदर्प वाटी, मगटी पुग्म प्रमाण ॥ ४॥ एहवी ए गज कमागरे, प्याग दो गुणवत् ।। परग्या मग्यो रे जोडी, मिलि करी वानही संत ।। वसनसिरी शुम गर्ग, को पटगणोने आग ॥ मतं रे पवारयां राणीमा कोटी गधाग्यां रे काम ॥ ५ ॥ तुम भाचे अम मंदिर, पावन खो जी चंग ॥ अम मरिने काम हुर. ने कही जी संग ।। सा गी को कुमरीने, छ एक गुमशनी काग कगन थापया. भावी , गुगयाम ॥१॥ भाप रे, नवनायो नामरो हारं ॥ वली धीनां यह मो, भपण आपे श्रीकार ॥ ना कुमरीय नाण्यं जे, रागीय ट्यो नी पाम ॥ जो नर गया तो आगल, होरे महोटो।.. न॥७॥ नृपनी गणीने दुहरा, पावे नहि इण मग ॥ मागीन करा. मपम गण्यां जी नाम | मपनी मिटाने को समी गाने नेह ॥ चरन कगन था, न . भी ना ॥ ८॥ मन नागना रानी, वमनमिांग ॥ नदिन एम कहाँन

भोगाय ॥ ने नरी कोट ने आरुरा, परने कगरोसाय ॥ उग
मनी दिगिमको जो, ऊगे पनि भाग 1 मगिार मो अनि
मोतो मी न चूके ठाण ॥ ९ ॥ पण करीयें रागी नी.
अतें सपानी काम ॥ नृपने ना भमें दावीये, ना बनी फोरेनी
ठाम । ने जाणी अपें राखी, राणीनी नमा प्यार ॥ भागयी
राया तुमन, बानपणु निरधार ॥ १० ॥ पण एर गांभा
निती, रागीनी रहे तुम पान ॥ में मतलाई से गमन, नामें
तर चिम्पान ॥ तं नप एक मामन. ते जर पूरे थाय ॥
नव नरपनिनी राणीनी, मननी दाम पूगय ॥ १॥ उमस
त्य राखवा कुपर्ग, मुरवयो साकर घोल ॥ दीयो दिलासो ग
सीने, उपनावी रंगरोल || तब इखित पर गीए, सांभरी
हमती रोल ॥ रागी नाणे मुझ आव्यानो, कमरीये राम्पो जी
तो॥ १२ ॥ अवसर लही कुमर्ग. रागीने हर्प उपाय ॥म
सन बसन करीमी, गाने कीर दिदाय ॥ रागीय पम
नद नृपने, गीभ वधाई दीर ॥ भानपी एक मासानरे, नृप तुम
मनारय मिद ॥ १३ ॥ मासनु तप कुमरीये, मांटयु महोरे मंठा
प॥ ले तप पूरण पइ रहे, इमरी मिनो मुनाग ॥ विहां लगे
नायनी वैठा, ममतं मनन करय ॥ निों परो कपरी, नीर
ने धैर्य धरेप ॥ १४ ॥ इगिपरें रागीनी सांभकी, वाणी न्।
खंत || भाग्य दिशा नुन जागी, भांगी भावर प्रांत ॥ नृप
ना मनम गंग, तरंग यं रहयो रंग ॥ जांग माण मामने,
अंगरे पुपरी मंग ॥ १५ ॥ सागर पश्योपमनांगे, कमां महा
टारे पाप ॥ ने माता पण गारने, भागानां रही जाय ॥
नोदमें मामनं, नाई केनिक चार ॥ आनने काम करा,
हंगे काग विचार ॥ १६ ॥ इणिपर आशा बासमें, मदनग
उद्धाम || निशिदिन गं मगन थइ, ज्यु पद पीध लाम ।।

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भोजाय ॥ ने नहीं कौर ने भाकरा, परने कर्ग होलाप ॥ उग
पणी दिवि की जो. जगे पनि माग || मसिार जो अग्नि
मोतो मी न गुरु वाण ॥ ९ ॥ पण करीयें रागी जी.
अंते समर्शजी काम ॥ नृपने नो अमें दावीये, ना वनी फोडेनी
गम ॥ ने जागी अमें राखी, राणीजी तुमा पार ॥ भाजयी
राखीयें नुमन, बहेनप' निरधार ॥ १० ॥ पण एक मामलों
विनती, रानीनी कहं तुम वान ॥ में वन लीछे मत्रत, नामें
तर विख्यान ॥ ते नए रे एक मामन. ते जब पूरूं रे थाय ॥
तव नरपतिनी राणीनी, मननी हाम पूगप ॥ ११॥ इम स
स्प रासना कुमरी, मुरबपी साकर घोल ॥ दीयो दिलातो ग
खाने, उपजावी रंगरोल ॥ सब हरसित यह गणीप, सांभरी
कमी बोल ॥ रागी नाणे मुा आव्यानो, कुमर्गय राख्यो जी
तो ॥ १२ ॥ अवसर लही कुमरी, रागीने पं उपाय ॥ म
शन वसन करी रीमती, गपीने कीय विदाप || रागीय पण
जद नृपने, शीम वाई दीर || आनयी एक मासांतरें, नृप तुम
मनोरय सिद ॥ १३ ॥ मासर्नु तप कुमरीय, मांडधु महोटे मंडा
प॥ ते तप पूरण यह रहे, कुमरी मिली मुमाग ॥ निहां लगे
नायनी वेठा, अभन मनन करेय ॥ निधै मलश कमरी, जोर
ने धैर्य धरेय ॥ १४ ॥ इगिपरें रागीनी सांभी, वाणी न्।
संत || भाग्य दिना तुझ जागी, भांगी भावर प्रति ॥ नृप
ना पनमे गंग, तरंग ग्यं उठा रंग ॥ जांग माणमं मामने,
अंतरे कुमरीश चंग ॥ १५ ॥ गागर पश्योपमनां जे, नयां महा
टां रे आप ॥ ते सरसा पण मीरने, भोगवनां पही जाय ।।
नो इसमें मामनं, ना कनिक चार ! आजने काम करता,
रमे म विचार ॥ १६ ॥ इणिपरें आशा पागम, मदनग
उडान || निशिदिन में मगन था, ज्यं मद पीध स्लिाम ॥

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भागार में नही होट ने भारत, पपने कगरोलाप ॥ग
पणी दिगिएको जो. जंगे पश्चिम भाण ॥ ममिार नो नि
दो मी न म दाग ॥ ९ ॥ पनसर्ग रागी मी.
भने नमानी काम ।। नृपने नी भ दीप, नो बनी पोरनी
दाम ॥ ने जागी अमें गाय, गणीनी नमा पार ॥ भासणी
रानी तुप, बदनपणु निरधार ॥ १ ॥ पण पर मामलों
विनती, रानीनी कई तुम वान ॥ में मत मारे गमत. नामें
नर विम्यान ॥ ने नप से एक मामन ने जर पूरे पार ॥
सब नरपनिनी गणीनी, मननी दाम पुगप ॥ १॥ इम स
त्य गरबा कमरी, मुग्रपी साकर पोल || टीवो दिलासो ग
सीने, सपनाबी रंगरोल ॥ नर हरग्वित पर गाए. मांभरी
मी पोल ॥ गगी भाणे मुन भाव्यागी, पी गया जी
सोर॥ १२ ॥ अवसर मी कुमरी, रानीने पं उपाय । म
धन यसन की गमती, गणीने पीय विदाय ॥ रागीय पण
जा नृपने. नीम पाई टीम ॥ भानपी एक मासांतरें, नृप तुम
मनोग्य मिद ॥ ३ ॥ मासनु तप फमरी, मांद मोटे मंदा
॥ ते नप पुरण पा रहे, इमरी पिन सुमाग ||नि लगें
नापजी नेटा, मभने मजन कोय ॥ निमें परो कमरी, जीर
ने धैप धरेय ॥ १४ ॥ इगिपरें रागीमा माधवी, वाणी न्।
मंत ॥ भाग्य दिशा नन्त जागी, भांगी भार प्रांत ॥ नृप
ना मनमे गंग, नरं यं सहयो रंग ॥ जांग मागणं मामने,
अंतरे कुमर्गा चंग ॥ ५ ॥ मागर पस्योपमनांगे, कयां मा
टोरे आप ॥ ने माता पण भावने. भोगवना करी जाग ।।
नो इगौ मासन, नाई कतिक सर || भानने काम करतो,
बने मान विचार ॥ १६ ॥ इणिपर आशा नागम, मानांग ।
उजाम ॥ निशिदिन में मगन पह, ज्य पद पाध लिाग ॥

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भोटार ॥ ननदीकोट माररा, परने माग ||
पणी दिगमग नो. मगे पश्चिम भाग ॥ गमिार जो र
इनो मतीन मुके गण ॥ ९॥ पन में सर्ग गगी मी.
सं नमानी काम ॥ नृपने नी भ पर,मा पनी पोरनी
टाम ॥ ने गाणी अपें गोप, राणीनी नमा पार ॥ भागधी
राबी हम, पोनर निरधार ॥ १ ॥ पण एक गांभों
बिन्नी, रानीनी को नुम पात ॥ में मनमा गमन, नामें
कर विस्वान ॥ तं तप एक मामन ने नर पूरे पाप ।
दप नरपनिनी राणीनी, मननी हाम पूगप ॥ १॥ इमस
स्प रावरा कमरी, मया सासर पोल ॥ टीयो दिनानोग
सीने, उपनावी रंगरोल ॥ तर हर्गवत पर गए. सांभली
मी पोन ॥ रामी गाणे मुम्ल आप्पागो, पपगगें रारम्पी जी
तारा।३ ॥ अवसर नही कनर्ग, गगाने पं उपाय । म
पान पसन करीरामती, गणीने की विदाप ॥ रागीय पम
ना नृपने. गाल पाई दीर ॥ आनधी एक मासांतर, नृप तुम
मनोग्य मिद ॥ १५ ॥ मासन तप पुमरीये, मांद मोरे मंठा
॥ ने नप पूरण यह रे, इमरी मिन मुनाग । ति लगे
नायनी नेरा, अमनं मनन करेय ॥ निधे परी कमरी, नीर
ने प धरय ॥ १५ ॥ इगिपरे गीगी भाभी, वाणीन।
यंत ॥ भाग्य दिशा नझ मागी, भांगी भारः प्रांत ॥ नृप
ना मनमे गंग. नांग उठा रंग ॥ नाग माणगं मामने,
अंतर कुमारी चंग ॥ १५ ॥ गागर पत्योपमनांजे, नयां पहा
दो भाप ॥ ने मारा पण मीरने, भोगरतां वही जाय ॥
गोइगर्भ माग, नाई कतिक र ॥ भानने काम करता,
नागर विचार । १६ गियर भासा पागम, मनरंग
राम ॥ निशिदिन में मगन धर. ज्यु पद पा लिाग ।

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भागार में नही बोट माग, पपने गंमार | ग
पपीलिका मा. गे पनि माग || पगिरी पत्रि
नो मी न एरे टाग ॥ १ ॥ पप गनी भी.
अनेकांनी पार ।। नृपनेनी भी पार्शय,मा पनी पानी
दाम ॥ नाणी अपें गरीय, राणीनी नपा पार ॥ मागणी
गनी कमर पोनर निग्धार ॥ १ ॥ पण पर. गाममा
निती. रानीनी को नुप पात ॥ में प्रसमा गमन. ना
ना सिन्धान ||
नेपामामन. ने नर पूरे पार ||
गर नगपतिनी गनीनी, मननी मग ॥ ११॥ मम
स्प गमरा कमी, मगरपी सासर बाल ।। दीयो दिलामाग
खाने. उपनावी अंगगल ॥ मा एग्विन पर सीए, सांभरी
महीपाल ॥ गनी मागे मुम भाग्यानो, पपग राख्यो जी
तो॥२॥ अवमा नही की, गनीना उपाप । म
शन वमन गगनी. गणीने कोर विदाप ॥ रागीये पण
मा नृपने. नीम दाई दी | भानी एक मानरें, नृप तुम
मनोरय मिद ॥ ५ ॥ मासन ता पुरी, माधु पहारे मंडा
प॥ ने नर प्राण या गे, इमरी मिनो नाग । तिस लगे
नापनी नेटा, मभनं मनन कोय ॥ निधे पकने परी, और
नगधरेय ॥ ११ ॥ गिरी गगनी सांभापाणी न्।
संत ॥ भाग्य दिशा नम बागी, भांगी भारत मां नृप
ना मनमे गंग, नांक को रंग || मांग मान पामने,
अंतर सुमार्गी भंग ॥ .. ॥सागर पापोपमनां म. का पहा
टां रे भाय ॥ नगरमा पप गौरने, भोगानां वही जाय ।।
दो मासनं, नाई बतिक पार || भानने काम करना,
बाम रिचार || १६ || पिपर भासा याममें, मग
उद्धाम ॥ निमिदिन गं मगन थर, ज्यं मद पीप पिलाम ॥

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भोजाय ॥ ने नही सोट ने मारुरा, परने कगं टोलाय | उग
पणी दिगिएकी नो, ऊगे पनि माग | ममिार जो श्रीम
मो, ना मतीन मूर्द ठाण ॥ ९ ॥ पण करीये गगी जी.
अंने तपाजी काम ॥ नृपने नो ममें दावीय, मो वली फोरेनी
दाम । ने लाणी अमें गीप, रागीनी नुमा पार ॥ प्रामधी
रानी नुम, बहनपणु निरधार ॥ १ ॥ पण एक गांभलो
निती, रानीनी कई तुम वात ॥ में इन ली से गमन, नामें
नर विमान ॥ तप में एक माम. ने जर पूरे थाय ।।
नव नरपतिनी राणीनी, मननी हाम पूमय ॥ ११॥ इम स
स्प राखवा कुमर्ग, मुग्रयी साकर घोल ॥ दीयो दिलामो ग
खीने, उपनावी रंगरोल ॥ तर स्वत पर गणीए, सांभरी
कमी पोल | रामी नाणे मुल भाव्यानो, फमर्गय राख्यो जी
तोर॥ १२ ॥ अवसर लही कमरीयें, रागीने हर्प उपाप ॥ म
सन वसन कर्गमिमी, गणीने कीय विदाय ॥ राणीये पण
जइ नृपने, भीम वचाई दी ॥ भानपी एक मासांनरें, नृप तुम
मनोरय मिद ॥ १३ ॥ मासनु तप कमरीय, मांदधु महोटे मंडा
ण । ते नप पूरण यह रहे, परी मिल सुनाग ॥ नि कमें
नायनी बेटा, मभने मजन करेय ॥ नि मल कमर्ग, जीर
ने धप धेरैप ॥ ११ ॥ इणिपरें गगीनी सांभी, वाणी न्।
यंत ॥ भाग्य दिशा तुप्त जागी, भांगी भावर प्रांत ॥ नृप
ना मनम गंग, नरंग ज्यं रकटयो रंग ॥ नाग माणमं मामने,
धीर कुमरी चंग ॥ १५ ॥ सागर पस्योपमनां जे, कयां पहा
टांग माय || ने मम्ग्या पण मीरने, भोगवनां पी जाय ।।
नो इनमें पान, जाई कतिक गर | आनने का करता,
पहंगे भाग पिचार ॥ १६ ॥ इणिपर भाशा याममें, मदनोग
उडाम ॥ निशिदिन में मगन थर, ज्यू पद पीध लिास ॥

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भोचाय ॥ ते नही कोट ने पारा, परने कग टोलाय || उग
मणी दिगिमको जो, जगे पनि भाग ॥ गमिार जो अनि
शो, तो सनी न गरे गण ॥ ९ ॥ पण शं करीयें रागी जी.
अंने सपनी काम ॥ नृपने नो भमें दुवीय, नो वनी फोडेनी
मम ॥ ने जागी अमें राखोय, राणीनी नुमा प्यार ॥ भामधी
राखीये तुम, बनपगुं निरधार ॥ १० ॥ पण एक मामलों
बिन्ती, रानीनी कई तुम वान ॥ में मन लीधु रे मयत, नामें
नर विमान । ने नप छै एक मासन, ते जर पूरूं रे थाय ||
तब नरपनिनी गणीनी, मननी हाम गय ।। ११॥ इम स
त्य राखता कुमरी, मुसया साकर घोल ॥ दीयो दिलासो ग
खोने, उपनावी रंगरोल ॥ तब हखित पइ गए, सांगली
कुमी बोल ॥ रागी नाणे मुम्न आप्यागो, कमर्गय राख्यो जी
तोर ॥ १२ ॥ अवमर लही कुमरी, गीने इर्प उपाय ।। म
धन वसन करी रोझी, गणीने कीच रिदाय ॥ रागी पण
जर नृपने, शीभ वाई दीर | भानथी एक मासांतर, प तुम
मनोरय सिद ॥ १३ ॥ मासनु नर कमरीये, मांड्युं पोटे मंढा
॥ ते नप पूरण थइ रहे, इमरी मिल में मुजाग ॥ निहां लगे
नायनी वेग, प्रभुत मजन करेप || निधे परी कमरी, जीर
ने धैर्य धरेय ॥ १४ ॥ इगिपरें रागीनी सांभी, वाणी न्।
सवंत ॥ भाग्य दिशा नझ जागी, भांगी भारत प्रांत ॥ नृप
ना मनमे गंग, नरंग र कठो रंग ॥ जाग माणसे मामने,
अंतर कुमरीला नंग ॥ १५ ॥ गागर पश्योपमनांगे, नद्यां महा
टां रे आय ॥ ने सम्खा पण मारने, भागवतां वही जाय ॥
नो गइणमें मासन, नाई कानर पार || मानने साल करतो,
रहे नास पिचार ॥ १६ ॥ इणिपरें आधा वागमें, मदनवेग
उद्धाम || निधिदिन में मगन थड़, न्यू मद पीध लिाम ॥

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भोजाप ॥ ते नही कोट ने भाकरा, पवने कर्ग होताप ॥ उग
मणी दिशि को जो, आगे पनि भाण || मसिहर जो अग्नि
प्रीतो सती न चुके ठाण ॥ ९ ॥ पण करायें रागी जी.
अंतें नमजी काम ॥ नृपने नो भमें दुचीय, नो वली फोडेनी
उगम || ने जाणी अ रासीय, राणीनी नुप प्यार ॥ भाजयी
रालीये तुम, रहेनपणुं निरधार ॥ १० ॥ पण एक मामलों
दिननी, रागीनी कई तुम यात ॥ में प्रन लीडे मनन, नामें
तर विमान ॥ ते तप ले एक मासनं, ते जब पूरूं रे थाय ॥
तप नरपतिनी राणीनी,' मननी हाम पूगय ॥ ११ ॥ इम स
स्य राखवा कमरी, मुरया साकर घोल ॥ दीयो दिलासोग
खीने. उपनावी रंगरोल ॥ सर हरित यह गीए, सांगली
मी बोल ॥ रागी नाणे मुन्न आप्यागो, कमी रारुपी जी
सांग ॥ १२ ॥ अवमर लही कुमरीयें, रागीने हर्प उपाय ॥ म
शन चसन की मिशी, गणीने कीय रिदाय ॥ रागीय पम
जइ नृपने, ग्रीम पाई दीप ॥ भानयी एक मासांनरें, नृप नम
मनोरय सिद ॥ १ ॥ पासवें तप कमरीयें, मांरभुं पडोटे मंढा
प॥ ते तप पूरण यह रहे, इसरी मिलमें मुनाग ॥ नि लगे
नापनी पेठा, मनं मनन करेप || निधे पलो कमर्ग, जीर
ने धेय धरेय ॥ १४ ॥ गिपरें गगीनी मांभी, वाणी न्।
पसंत ॥ भाग्य दिशा तुम जागी, भांगी भारत प्रांत || नृप
ना मनमे गंग, नरंग यं रो रंग ॥ नांग माल मामने,
भनरे फुरी नंग ॥ १५ ॥ मागर पस्योपपनां जे, कलां मा
टारे आप ।। ते मरा पण मीरने, भोगरता ही नाय।।
नो, इनमें मालतं, नारं कातक पार ॥ भानने काम करना,
र मास शिपार ॥ १६ ॥ गिर भामा वामम, मानग
उडाम || निजिदिन में मगन था. व्यं पद पाप लिाग ॥

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भोगाय ॥ ते नहीं कोट जे भाकरा, पवनें कर्ग होलाप 11 उग
मणी दिगि पकी जो, ऊगे पनि भाग ॥ मगिर जो अग्नि
झो, तो सती न चूके ठाण ॥ ९ ॥ पण करीयें रागी जी.
अं समांनी काम || नृपने जो भी दुहवीये, नो वली फोडेनी
ठाम ॥ ने जाणी अमें राखायें, राणीनी तुम प्यार ॥ आनधी
राखीपें तुम, गनपणुं निरधार ॥ १० ॥ पण एक सांभलों
विनती, रागीनी कई नुम वान ॥ में प्रनली छ मयत, नामें
तप विम्यान ॥ ते तप एक मासन, ने जब पूर्फ रे पाय ॥
तव नरपतिनी राणीनी, मननी हाम पूगप ॥ ११॥ इम स
त्य राखवा कुमरीगे, मुलथी साकर घोल ॥ दीयो दिलासो ग
खाने, उपनावी रंगरोल || तब दरखित यह गणीए, सांभनी
कुमरी बोल ॥ रागी जाणे मुझ आव्यागो, कमर्ग राख्यो जी
तोल ॥ १२ ॥ अवसर लही कुमरीयें, रागीने हर्प उपाय || भ
धन वमन करी रीममी, गणीने कीच विदाप ॥ रागीये पण
नई नृपने, नील वर्षाई दीप ॥ आनधी एक मासांनरें, नृप तुम
मनारय सिद्ध ॥ १३ ॥ मासनुं तप कमरीयें, मांत्यु मोटे मंढा
ण ॥ ने तप पूरण यह रहे, परी मिल मुनाग ॥ तिहां लगे
नायी वेटा, प्रभवें भजन करेप ॥ निधै मलो कमरी, जीर
ने धैर्य धरेय ॥ १४ ॥ इगिपरें रागीनी भांभली, वाणी न्।
संत । भाग्य दिशा ना जागी, भांगी भावट ग्रांत ।। नृप
ना मनमे गंग, नरंग उयं उकयो रंग ॥ जाग माण, मामने,
अंतरे कुमरी चंग ॥ १५ ॥ मागर परपोपमनांगे, कदां महा
टांरे आप ॥ ते सरला पण जीरने, भागवतां वही जाय।
नोद इणमें मामन, जाई केनिक र ॥ आजने कार करना,
रहेश मास पिचार ॥ १६ ॥ इणिपर आना याममें, मदनरेग
उड्डाम ॥ निशिदिन में मगन थर, ज्यं पद पीप लाम ।।

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भी चाय ॥ ते नही कोट भाकरा, पवनें कर्ग टोलाप || उग
पनी दिगिको जो, जगे पनि भाण ! मगिर जो अनि
नोती सती न चुरे ठाण ॥ ९ ॥ पण करीयें रागी जी.
अतें समर्शजी काम ॥ नृपने जो ममें दुर्वाय, नो वली फोडेनी
साम ॥ ने जागी अमें राखीय, राणीनी तुमा पार ॥ आनधी
राखीयें नुम, पहनपणुं निरधार ॥ १० ॥ पण एक सांभयो
विनती, रानीनी कई तुम बात ॥ में बन लाधु ऐ मुन्नत, नामें
तर विम्यान ॥ ने नप के एक मामन, ते जर पूरूं रे थाय ।।
नव नरपनिनी राणीजी, पननी हाम पुगप ॥ ११॥ इम स
स्य राखता कुमरीये, मुरवयी साकर घोल ॥ दीयो दिलासो ग
खाने, उपजावी रंगरोल ॥ तब हरित पड़ गणीए, सांभरी
कुमी बोल || रागी नाणे मुल आव्यागो, कुर्ग राख्यो जी
तोर ।। १२ ॥ अवसर लही कुमरी, रागीने हर्प उपाय । म
शन वसन करी रोमी, गणीने कीय विदाय ॥ रागीये पण
जा नृपने, भीभ वधाई दीर ॥ मानी एक मासांनरें, नृप तुम
मनोरय सिद ॥ १३ ॥ मासन तप कुमरीये, माधुं महोटे मंडा
ण ॥ ते नप पूरण भइ रहे, दमरी पिसे मुनाग ॥ नि लगें
नापनी वेठा, प्रभत मनन करेय ॥ निभे परशे कमरी, जीर
ने धेय धरेय ॥ १४ ॥ इगिपरें रागीनी सांभी, वाणी न्।
खेन । भाग्य दिशा तृप्त जागी, भांगी भावट ग्रांन ॥ प
ना मनमे गंग, तरंग ज्यं च कठो रंग || मांग माण, मामने,
अंगरे कुमरी चंग ॥ १५ ॥ सागर पत्योपमनां जे. कदा महा
टां रे आय ॥ ने सरसा पण गीरने, भोगानां यही जाय ।।
नो इणमें मासने, जाई कतिक पार ॥ मानने काक करता,
रंभास विचार || १६ इगियर भाशा वागम, मदनवेग
उद्धाम ।। निशिदिन रहें मगन पह, यं मद पीध लिाग ।

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भीनाय ॥ में नही बार में भाररा, पपने कार्ग दोमाय | ग
पणी दिगिएकी मो. ऊगे पनिगम भाण ॥ गरिनो पि
दोनो मनी न पूरे गण ॥ ९ ॥ पण सी गगी नी.
अने नमानी काम ॥ नृपने भी भ पास. ना पनी फोरनी
टाम ॥ ने नाणी अमें गसीप, राणीनी तमा पार ॥ भासयी
रानी नुमन, पहनपणु निराधार || • ॥ पण पर गांभरे
दिननी, रानीनी का. तुम पात ॥ में प्रन सीए गमन, नारें
नर रिम्यान ॥ ने नप एक मामन, ने ना पूरे पाय ||
तब नरपतिनी गीनी, मननी दाम पुगप ॥ १॥ दमस
त्य राखवा कुमरी, मुरवयी साकर घोल ॥ दीयो दिलासी ग
खीने, चपनारी रंगरोल ॥ मय हर्गम्पत यह गए. सांभरी
मी बोल ॥ गगी माणे मुल भाप्यागो, एमर्ग रारूपो नी
तोर ॥ १२ ॥ अवमर ली कुरी, गर्मान पं उपाय || म
धन बमन की गरमी, गणीने सीप विदाप ॥ रागीये पण
जा नृपने नाम वाई दीप ॥ मामी एक मासांनरें, नृप तुम
मनोग्य सिद॥ ५ ॥ मासन नस कुमरीये, मांत्य महोरे मंदा
॥ ने नप पुरण पर रहे, हमरी मिन मुनाग ॥ निलों
नायनी नेटा, अभनं मनन काय ॥ नि मी कमरी, नीर
{ ने ये घरेय ॥ ११ ॥ इणिपों रागीनी सांभनी, वाणी न्।
सन || भाम्प दिशा नुन जागी, भांगी भारः ग्रांत ॥ नृप
ना मनम गंग, तरंग पर कठो रंग ॥ नांग माणशं पामने,
। अंग कुम ही पंग ॥ १५ ॥ मागर पल्पोपमनांज, कमां महा
टांरे भाप || मरमा पण मीरने, भोगनां यही जाय ।।
तो इसमें मासनं, ना कोनस पार ॥ भागने का करना,
नमें काम विचार ॥ १६ ॥ इणिपर आशा पायम, मदनग
उद्धाम || निशिदिन रहें मान था. जग पद पाप लाम ।।

लार मांड शाप ॥ . गा, ये परेल मार ॥ नित सगीयांग परवर्ग, करना। to पार ॥ निश प्रामर नषगणी रे, में गुणापाणी रे सा ॥ मानी दीठी मीठीये, बसतमग तिगार ॥ १ ॥ मग गाणं में दी. नामीन की मोय ॥ क्रौर की गी, नानी भारी लोय ॥ बोम्यो पता जागी पुती गणान याग ॥ इम कमी मन जिती, ॥ नामरी मनपुष मा, गणान भीसी र । प्रगामा मचान र गरण न गह गां। ॥ भागत मागा गगाना मगय कीती मागी मन गयो, वर्ग मनिदा ॥ २ ॥ नानी दाबीरे, बातें प्राण पान माया ग्मा अब पान ॥ मा अनाम पना... तापमाण ॥ नाग दो पाटीय, पाटी TI ॥ स ग मागः पादोगुगात माया मायामाहा पिटि की नातीगत || मिरी वा * मान भाग || rat गगी ft. गगा... 1 14 भार प्रनमार, m 11 ॥ ॥ प्रया। 1ोजीम गर यमन नाम काग प्रायाम प्रा. नाम in m 120 बीना : TET प्राय धीरा । नाम : नग पपाग। . ॥ TA । .: दी rina sit. Timr" Triram im. aferi.. ..

भोजाप ॥ ने नही कोर ने भामरा, परने कर्ग होलाग | उग
मणी दिशि सकी नो. जगे पश्चिम भाण || गसिार जो अमि
हो, तो मती न चूके ठाण ॥ ९ ॥ पण गं करीये राणी जी.
अतें समानी काम ।। नृपने नो भमें दुहवीयें, नो वली फोरेनी
ठाम ॥ ने नाणी अपें राखायें, रागीनी नुमा प्यार ॥ भाजयी
राखीय तम, बहेनपणुं निरधार ॥ १० ॥ पण एक मामलों
विनती, रागीनी कई तुम वात ॥ में मन ली से मुमत, नामें
नप विधान ॥ ने तप के एक मामनं. ते जर पूरूं रे थाय ॥
तव नरपनिनी राणीनी, मननी हाम पृगय ॥ ११॥ इम स
स्प रासना कुमरी, मुख्य साकर घोल ॥ दीयो दिलासो ग
खोने, उपनावी रंगरोल ॥ तर हालित यह गए. सांभनी
कुमरी पोल ॥ रानी नाणे मुझ आव्यागो, उमरी राख्यो जी
तोच ॥ १३ ॥ अवसर लही कुमरीयें, रागीने हर्ष उपाय । म
शान वसन करी रोमी, गणीने कीर विदाप || रागीये पण
जइ नृपन, शील वाई दीर ॥ भानपी एक मासांतरें, नृप तुम
मनोरय सिद्ध ।। १३ ॥ मासन तर कुमरी, मांशु महोटे मंदा
प॥ ते तप पूरण यह रहे, कुमरी मिली मुजाग ॥ निलों
नायनी वेठा, अमन मनन करेप ॥ निशें मलने कमरी, नीर
ने धप धरेय ॥ १४ ॥ इणिपरें रागीनी सांभत्री, वाणी न्।
राखंत | भाग्य दिशा तुम जागी, भांगी भारर प्रांत ॥ नृप
ना मनम गंग, नरंग ज्यु चकळया रंग ॥ जाग माण मामने,
धनरे बुमरी नंग ॥ १५ ॥ गागर पल्पोपमनां भे, कयां महा
टोरे आप ॥ ते मरसा पण जीरने, भोगवतां यही नाप ।।
कोणमें मासन, नाई केतिक वार || आनने का क करता,
वहंगे -स पिचार ॥ १६ ॥ इणिपर आशा पाम, मदनवेग
उलाम ॥ निशिदिन में मगन था, ज्यं मद पीध पिलाम ॥

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भोसाय ॥ ते नहीं कोर ने भाकरा, परने कर्ग होलाप ॥ उग
मणी दिगिसकी जा. जगे पनि माग ॥ ममिार जो अग्नि
शो, दो सती न भूके गण ॥ ९ ॥ पण { करीयें रागी जी.
अंत समांनी काम ॥ नृपने नो भी दुखीये. तो पली फोडेनी
ठाम । ने जागी अय रासाय, राणीनी तमा पार ॥ भाजयी
राखी तुम, बहेनपणुं निरधार ॥ १० ॥ पण एक मामला
विनती, रागीनी कई तुम वान ॥ में वन लाई छ मनत, नामें
तर विख्यान ॥ ने नप से एक मासनं, ते जर पूरूं रे थाय ॥
तव नरपतिनी राणीजी, मननी हार गय ॥ ११॥ इम स
त्य राखका कुमरी, मुखथी साकर घोल ॥ दीयो दिलासो ग
खाने, उपनावी रंगराळ ॥ सा हरग्वित पर गीए. सांभरी
कुमी बोल ॥ रागी नाणे मुझ आव्यानो, मुमरीये राख्यो जी
तोच ॥ १२ ॥ अवसर लही कुमरीयें. रागाने हर्प उपाय ।। म
शन वसन करी रोझी, गणीने की विदाय ॥ रागीय पण
जद नृपने, शील वर्षाई दीप ॥ भाजयी एक मासांतरें, नृप तुम
मनारय सिद ॥ १३ ॥ यासनु तप परी, मांडयु महोटे मंडा
॥ ते तप पूरण यइ रहे, दुपरी मिलसे मुनाग ॥ विहां लगे
नायी चेटा, मनु मजन रेय ॥ निों पको कुमरी, जीर
ने धेय घरेप ॥ १४ ॥ इगिपरें रागीनी सांभवी, वाणी न्।
पसंत || भाग्य दिशा नुन जागी, भांगी भारट प्रांत ॥ नृप
ना मनमे गंग, तरंग उयं उदयो रंग ॥ नाग माण, मामने,
नरे कुमरीन नंग ॥ ५ ॥ मागर पल्पोपमनां गे, कदां पटा
टांरे आय ॥ ते सगम्बा पणजीरने, भोगवनां वही जाय ।।
नो में इसमें मासन, नाई कतिर पार || आनने काम करता,
रहने काम विचार ॥ १६ ॥ इणिपर आशा पासमें, मदनग
उडाम ॥ निशिदिन में मगन थर, ज्यं मद पीध लिाम ।।

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भोनार । ने नही सोट में भारुरा, परने कर्गोसाय ॥ उग
पणी टिसि की मो. अंग पनि माग ॥ ममिार नो अमि
प्रो, नो मी न पुरे ठाण ॥ ९ ॥ पण सर्रायें रागां मी.
अंने नमांजी काम ॥ नृपने नो भी दावाय. नो वनी फोरनी
टाम ॥ ने जागी अमें राखी, राणीनी नुमा पार ॥ भाजयी
राग्यीय नम, बनपणु निरधार ॥ .. ॥ पण एक गांभी
विनती, रानीनी रह तुम वात ॥ में बनली मयत, नामें
तर विधान ॥ ते नप से एक मामन ने जर पूरे धार ।
तब नरपनिनी राणीनी,' मननी दाम पृगय ॥ १॥ इन स
स्प राबता कुमरी, मारया साकर घोल ॥ दीयो दिलामा ग
सीने, उपनावी रंगरोल | तर हरित यह गीए. सांभरी
मी दोल || रागी नाणे मुन्न भात्यागो, कुमरी राख्या जी
तोर॥ १२ ॥ अवसर लदी कुमरीये. रागीने एप उपाप ॥ म
सन वसन करी गमवी, गणीने कीर विदाय ॥ रागीय पम
भइ नृपने, शाम पाई दीप ॥ भानी एक मासांतरें, नृप तुम
मनोरय सिद् ॥ १३ ॥ मासनु तर कसरी, मांडयु महोटे मंडा
न।। ते नप पुरण यह रहे, कुपरी मिलने सुनाग ॥ नि लगे
नापजी नेटा. प्रभा मजन करेय ॥ नि परो कमी, नीर
में घरेप ॥ १४ ॥ इगिपरें गगनी सांभा, वाणी न्।
न । भाग्य दिशा नुप्त जागी, भांगी भारः ग्रां ।। नृप
ना मनम गंग, नांग यं न वयो रंग ॥ नांग मापमं मामने,
यंतरे कुर्ग जंग |॥ १५ ॥ गागर पयोपमनां जे. कथां महा
टारे आप ॥ ते सम्सा पण मीरने, भोगरनां वही जाय ।।
नो हमें मामनं, नाई कोना गार ॥ भानने का करंगा,
में काम विचार ॥ १६ ॥ इणिपरें भाशा वाममें, पदनोग
उलाम ॥ निधिदिन में मगन पर, ज्य पद पा लिास ॥

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भोसाय ॥ ते नहीं कोट ने आकरा, परनें कर्ग होलाप ॥ उग
मणी दिगि मूकी जो. ऊगे पनि माग || मसिहर जो अनि
शो, तो सती न चुके ठाग ॥ ९ ॥ पण करीयें रागी जी.
अंत समांजी काम ॥ नृपने नो अमें दुहवीये, ना वली फोडेनी
ठाम । ते नाणी अमें रालो, राणीनी तुम प्यार ॥ आनधी
रालीये तुम, रहेनपणुं निरधार ॥ १० ॥ पण एक मामला
गिनती, रानीनी कई तुम वात ॥ में व्रत लाएं रे मयत, नामें
तप विरूपान ॥ ते नप से एक मासनं, ने जर पूरूं रे थाय ॥
तव नरपतिनी राणीनी, मननी हाम पूगय ॥ ११॥ इम स
त्प राखवा कुमरी, मुस्पा साकर घोल ॥ दीयो दिलासो ग
खीने, उपनावी रंगराल || तर हरखित यह गाए. सांगली
इमरी बोल ॥ रामी नाणे मुन आव्यानो, कमरीये राख्यो जी
तो॥ १२ ॥ अवमर लही कपरीय, रागोने उपाय । म
धन वसन करी रोमी, गाने की विदाप ॥ रागीये पण
जइ नृपने, शीम वर्षाई दीर ॥ मानी एक मासांनरें, नृप तुम
मनोरय सिद्ध ॥ १ ॥ मासनुं तर कुमरी, मांत्यु महोटे मंडा
१॥ ने नप पुरण पर रहे, इमरी मिन मुनाग ॥ नि लॉ
नायजी नेटा. प्रभने मजन करेय ॥ नि मलने कमरी, जीर
ने धैय घरेय ॥ ४ ॥ इगिपर गगीना मांभवी, वाणी ।
हामंत | भाग्य दिशा नुन जागी, भांगी भारत प्रांत ॥ नृप
ना मनमे गंग, नरंग उकळया रंग ॥ नाग माग पामने,
अंगरे एमरी पंग ॥ १५ ॥ मागर पत्त्योपमनां जे. कयों पर
यांरे आप ॥ ने माना पण जीरने, भौगातां वही जाय ।।
नो में इज माननं, ना केनिक गर | भानने काम करना,
रहने कास विचार ॥ १६ ॥ इणिपर आशा पालम, मदनवेग
उद्धाम || निशिदिन में मगन थइ, ज्यं पद पीप लाम ॥

स्वारो सागर रे, उपके जले असमान ॥ ते देखी धीवर घगरे, उम्प्यो गइ तस शान रे ॥ H• ॥ .. !! जो फिरी पागे पर भणी रे, जाउं तो नरहे मान || वीई की हं आपियो रे, कोई भमा काम रे ॥ • ॥ ६ ॥ नागें ग्रही ज्युं ग्मंदरी में, मुझे तो भंप याय ॥ भनणी जीव संहरे रे, ए दृष्टांत बनायरे ॥ १० ॥ ७ ॥ वली चरकलीयें प्रमो रे, मुखमा चगिय वोर ।। यायं पाई न उतरे रे, करे पस्तावो जोर || म. ॥ ।। ८॥ इम धीवर अरे घY रे, सागर कांठे उमाय ॥ धारे जाण्यं आनी बन्यो रे, वाच न दीनो न्याय रे किहां गयो मारो इण समे रे, प्राणवल्लभ मुन इष्ट ॥ समरा मार करे पगे, टाले सपला रिट रे ॥ • ॥ १० ॥ इम चिनयतां ततखिों रे, आव्यो सागर देव ॥ कहे मुरशी तुं पिता को रे, लंका तुझ हेव र ॥ . ॥ ११ ॥ हुन ए तुमने इस कणे रे, आवई यये हो केम ॥ सर करे कहोम सपाहिन रे, नान्युं भाये जमे रे ॥ . ॥ १२॥ नव पारि वक को देवने रे, सांभलो तानमी मुस । नृप हत र छवीरे, आप्पो कई ६ तृप्त रे ॥ १० ॥ १३ ॥ ते सांभकी जलपीन पपोरे, देव स्वरूपी अप ॥ हरिवल ते भय नही रे, जला मरी सपोरिषरे ॥ ॥ ११ ॥ प्रभुना भले भाव्यात में नाय ॥ मा तनी ग्रही गय ॥ १० ॥ मुन्न शाण भयो मुर हाय ॥ ॥ तर यो महोये मनावरे ॥ ॥ ॥ १॥ आंकगी। लंका मागमें मूकीने रे, देव भयो परगाह कार पडे तं संभारजे रे, मरने करी गहगहरे ॥ १० ॥१६॥ कहीने मुर गयो रे, पदोनों है निज गम || हरिवल लंका नरे, मनमें मनो माराम रे ॥ १२ ॥ १७ ॥ नन में ..इनरुती रे, हेममय लंका पीठ ॥ जइवी जनपये मान सेनाली ननर टीसरे ॥ ॥ १८ ॥नंदन पन सप पटेगर देगी से मुमसम ॥ परिमल पमरपोनि मां नि कर ॥ १० ॥ १९ ॥ पंग गलार । केकी रे. मोगरा नीना ॥ मागे मावारी लारे.. बत निर मारे ॥म. ॥ १० ॥ भर सदर ने मरतरू : सरलता मोन रेत ॥ हेम नवना मोपरी रे, पमरी गि देरेल रे ॥ १० ॥ ११ ॥ नामावली द्वापना रे, मर भनि मन ॥रेलिभरी फालसारे. दारिन पामोलर 15.11.nातो पास मारनरी रे, गज ने ममाल पम ॥पके पास नीरने रे, पानानानक नप रे ॥३०॥२१॥ देर मुप ने एलची रे, मर मर र ॥ निमा पिता पागला रे पदार असार रे ॥ ॥ १ ॥ पुती श्रीपत मेलने, मांतारल मार ॥ सारस पण काम दोरे, र मार हारे ॥ • ॥ २५ ॥ अनेक ले जा मिनी रे. बसमा मार मार ॥ भंगी बनने कारण,गर पर गनार रे ॥ ॥ २ ॥ पारी का मगर, पार पां भोप परोर ने मारमा रे, नरोसा कर गाय ॥ न दिन माती गरे कारन मरमाल ॥ सधि पीना सामनी रे, मनी । ग्पारपी रामरे ॥५. ॥ ११ ॥ 11 रा. संगपरिमर पटिस, मगरे मषि र ॥ नागेननरन नी भगिनी प्रटननीक ॥ १॥ रनर पिन रा. पाय मी मल ॥ परोसमीरला य समिनि सर ! २ ॥ ना नागरिका, शिप मगर सन ॥ मरम्ममाटो मिनी मारे गीत मार! ॥ पापान भाग, भागीरानो गर !! Tire कोय ॥ ना तुम भाग्ययले कगे, वीटुं में न्यू सोय । ॥ ॥ तेनर भागाइने, हुमाग्यो मांहि ॥ लंकापनि रोडमा ना. किम नकराए त्यांहि ॥ ८ ॥ कुमममिरी यसः कड, मामा माग वान ॥ लंकापनि मदिराव, उंचने के पर गान ॥ ९ ॥ ने मांगो फिम पाश, आप नाई गर । मेकानि की नाययु. काग को तृमें पह ॥ १० ॥ तर मनन को जार वीभाषण पाम ॥ देवनमी एक सरग ज्य पा - मा . ॥ दाल म॥ याग होला ॥ ए देशी ॥ तर 4. नागने, नार उतावला त्याहि || मोमन प्यारी । गाना। गमगन रे बडग ने दहाम ओहि || मे. । माग र लायो, तुमटीम करतो व ।। गाय गति दिन पंचमी रे, लगा म. ।। तो गगे ममने मानौ रे, मदनगंगा .! ।। १ महिना । सहगीरे, कापणीनी में। म नि1 वगना रे, नेनि लारना ता। । ॥ पण पर बदनामी घहरे, नगमे होम र । हागना ?ण हेमन कर जी कोय ॥ मा काना हाय कान, मान की कम्ग मो.। -गरमग्यार नावा दो पाग ॥ ॥ ॥ में कामा कामनार माने इष्टात !! मो० ॥ म भीगा मानी पागलो मान ॥ पो. ॥ हमा क ... Rai || मो. मग कि मनी , मांदा पानी महि ॥ मो. ॥ लिसान घर मा धाम || पनर गगन, प्रीतम शाम " मी.।।८ . - 3 या स्वागी आ खडानी रे, जे कहि सहिनाणी एई ।। मे। । देवनी सडग सर्गनी रे, जलसं मच्छी विशेर । मो. " ॥९॥ हिने सामग्री पनी रे, मेलरे जावोगह ॥ मो० ॥ सार रयण ने मारी रे, पियुने जे कोर भरेप || मो० ॥ १० ॥ नदी मलमायें ग्रहो रे, दंपनी चाल्या दोप ॥ पो० ॥ वान्या ने लंका वही रे, लोमनाछिन सोय ॥ मो. ॥१५॥स परपो सागर देवता रे, मग पई उनमाल ॥ मो० ॥ मा म्यो सर पण देवता रे. करुणावंन कृपाल | मो० ॥ १२ ॥ । किहां हिवे हमने रे. भर पोस्या ततकाल | मो० ॥ को ( सामी भने रे, निज नगरी विश्वाल | मो० ॥ ११ ॥ १ चहाची दो गणा रे, माया नगर नजीक ॥ मो० ॥ चिन न्यु होने तुम तणं रे, मर कहे जाणनो ठीक ॥ मो• ॥ ११ ॥ पम कहीने ते गपो रे, नाली निन थान ॥ मो० ॥ मन ग्नि सफलं थरे, देपतिपृश्य निधान || मो. १५ ॥ नग सनी जनाटिका रे. नेहमें उनारो कोर ॥ मो. ॥ दंपति परे गामहिका रे. जाणे मनोग्य सिद || मो. ॥ १६ ॥ हिचे पाली संख्या समेरे, भाम्पो निज पर इत ॥ मो० ॥ ग्या खाली दृष्टिप रे. आवरी ने ननरें रेत ॥ १७ ॥ किहां गई प्या री. मम मन पारी ।। प भांकणी ॥ हल रिनो जोतो फिरे रे, सपने मंदिर मझ ॥ कि० ॥ पुत्री नदीठी { करेगे, बलि पयो जोवा सझ ॥ कि० ॥ १८ ॥ बलि नहि दीदी मुंबढी रे, ने मरी भन तोय ॥ ॥ ले गई सा तुंवटा रे, कोइक पुरुपने जोय ॥ कि० ॥ १९ ॥ पगन जागा नीकल्यो, पग पण मोनो पार ॥ कि० ॥ पदीपनो पग भटकल्यो रे, नर भयो भने उपचार ॥ कि० ॥ २० ॥ पग नोयो नरिम जीर. पुत्री र करि नाय ॥ कि० ॥ आरामिक ने भीमना,

ममि परया दीप हाय ॥ कि० ॥ २१॥ मातो रातो है।
त्यो रे, भान्यो त निज पेर ॥ कि. ॥ पुत्री विर ते पल्पा,
दिव कर ते पेर ॥ कि० ॥ २२ ॥ पुत्री तुंरी गत पारे,
नाणे गा रण सेत । कि० ॥ रंदानी रंडा गई रे, टप पण
गह लेन ॥ कि. ॥ २१ ॥ रांक तगे घरे मुरमणी रे, तो
कहाँ केती वार || कि. ॥ पर भवनी वैरणी रे, दे गा मो
दो बार || कि॥ २४ ॥ पुत्री परणे जाणतो रे, पाईम
शंद रान ॥ hि. || होश धणी मन मागतो रे, माणश पुत्री
राग ॥ कि० ॥
१५ ॥ तेहमें एकेन संपनी रे, फोक
फोनी कीर ॥ कि० ॥ देवना मनमा श्री भनी रे, एको वात
नसीय ॥ कि ॥ २३ ॥ पण पुत्री पर घर मई रे, वसति
जाणे मंसार || कि० ॥ एक एकने देह वरे रे, पुत्री पर घर
पर । कि• || २७ ॥ ते में सोटी मादी, लोभ लायो
कार ॥कि. ॥ नो किम आवे पारी रे, लोप्पो में व्यवहार ॥
मो० ॥ २८ ॥ नातिनी चाल में नी गणी रे, कापी अनीति
विचार || मो० ॥ तो फिम रहे ए. पदमणी रे, गंक परे मुम
मार || मो० ॥ २९ ॥ हनी मंध ने ले गयो रे, मना करी
ने सोच ॥ मा. ॥ यावं इतृ ने मयुरे, शोह करवा
च। मोः ॥ ३० ॥ मालीयें एम मन वालय भावानी नयाँ
43-14। पालम कल ममालीयु रे, काही नारख्यु गा॥
मो० ॥ ३१॥ मग राधि नागने रे,रीन उताग नाम । मो.
प्राचिये बात रिमाने रे, देरी भाव्या भावाम ॥ मो० ॥
1.११ ॥ सपका वियांग ने भांगियां रे, उपन्या ग माल
"मी.॥ पुष मत जागीयां रे, मागीया दुप जमाल ।
पो. ॥ १३ ॥ बारिशयनी जे पहरे, सांपला पुष्य
बिवाल || मोर ॥ बीना उल्लामनी ९ कही, लमें
भारमा र || मो. "" !!

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(७३)
॥ दुरा ॥ दिवे हरिदल रजनीसमे, वाये की ठाय ॥
कुमममिरी मूको तिहां, पहोतो ते निजधाम ॥ १ ॥ वसंतसिरी
रेली मिया, जो तहनु चरित्र ॥ मत ऊपर पण केह, राख
मना पवित्र ॥ ॥ इस जागी निम मंदिरे, माथ्यो रगनी म
प।। तस्करनी परें सामल, देई. कान ने शुद ॥ ३ ॥ तिण
अवसर जे विराणो, वसंवसिरी ते पाल !! पीयु नान्यो माम
नरें, तेहनी थइ पचाल ॥ ४ ॥ तर एक 'पंसी सूवटो, 'पा
न्यो घरमाहि ॥ नस आगल कहे विगहणी, वसंतसिरीजे
। रठांहि ॥ ५॥ रे पंखो मुझ पीपटो, गयो लंका राम काज ।
वाये कही एक मामनी, ते पर पूरी बाज ॥६॥ गरम
। र पिया कहचले, छह गयंदमसमांहि ॥ जलभव रयण पोका
। रिया. मो भख मावत नाहि ॥ हनीम लगम भाव्यो नहीं, ना
। पो को संदेश ॥ नाह निठर मेहेली गयो, मुझन वाले पेश ॥
। ॥ - ॥ ते दोहा किन निर्ग. किन कगे राखं गोल ॥ मदन'
। ग ने भूवा, के पटियो सील आग लगा तो
। पादर, में पण राज्य एर !पण ते अवधि पूरी यह, कुमनि चत
गलो || शुकवार्य ॥ दीषमता मत नामरिपु, ता त्रिय बाहनाहा
॥ मो मंदर नशमें नहि. कीयो कौन विचार ॥ ९ ॥
। माटे त मडल्दा, ना. मुझ मीनम पास ॥ संदेशो मुन परतणा.
। नइने करेंज ताम ॥ १० ॥
। दाल १५ मी ॥ विसाजीनी ए देशी ॥ मुहानी हो अमी
रस पाउ तुझ्ने रे । म. ॥ चरखा दादिम दारव ॥ महा सपण
राए । एमागणी ॥ सदा बाहो नांच भराई चुरमे रे ॥म. ।।
देर पली भारा सास ॥ मु.॥ ॥ मु० ॥ संदेशो पुन
दावा रे ॥म० ॥ गेलर मुन जी ॥ म.मु.।। गाइ
मई गमनागरे मप्राचिन मची कीव ॥ १० ॥

॥ ॥२॥मु० ॥ दूधे भरीश तुम पैटने रे ॥मु.॥ देश में लांच | सः ॥ मु.॥ जेई योनुं ते सहो रे । मु।। जे करीने साच ॥१०॥३॥०॥ कर जोटी बीन रे मृ. ॥ मामल माहरी वात ॥ मु० ॥ १० ॥ सपला पंसीमें कहीरे ॥ ॥ उत्तम ताहरी जान ॥ म०॥ ४॥ मु०॥ सह पंसी मिरसेहरी रे ॥ १०॥ तुं चतुर मुजाण || मु. ॥ म । म् तु रलियामणो रे । सु.॥ मीठी नाहरी वाण । म II ॥ मु.॥ लीली नाहरी पांखरे ॥ म० ॥ पांच राती अंग ॥ मु. ॥ मु. ॥ रूडी ताहरी आंखढी रे ॥ मु. रानी केश रग ॥ मु. ॥ ६ ॥ मु० ॥ सोने मदाई हीरे ॥ मु० ॥ दुधे पखाल परख ॥ मु. ॥ म. ii हार, व्य गले मोतीनों रे ॥ म. ॥ लाख टकानो अटक ॥ ० ॥ ७ ॥ गु. ॥ विरहिणी नारी तुं देवीन रे ॥ १० ॥ सपा घरे मनमोहे ॥ मु० ॥ १० ॥ संदेशो मुप्त नानि ॥ १०॥ नु ना करें उछारे ॥ मु०॥ ८॥ म. || मानिक गुहा उपगारडोरे ॥ म. ॥ थाइम नही गुण चौर ।। म ||Fo, कायो गुण जाणे नही रे ॥म. ॥ माणस नही ते दोर ॥ मु.॥ ॥ २ गु० ॥ उठाने तु पंखीया रे ॥ म. ॥ तुं मत करो दी . म. । सः ॥ कडेने मन मंदेशही रे । मु.॥गि शं होये नाइ रंगील ॥ मु. ॥ १. ॥ मु. ॥ अरलाइन घर एकलीरे ॥ स. ॥ पिरहिणीने वैग ॥ मु.॥म.॥ भार प्ररि मनर या रे ॥ मु. ॥ यह नाग नवंश || ॥११॥ मु. ॥श्रीतमना विरहापारे । म ॥ मुगार टीम कांग ॥ मु. ॥ म. ॥ पण मवाली पान उयु रे ॥म. दिन दिन पाय || मः ॥ ११ ॥ गु० ॥ पिरतिरों मी नामिरे | P. | नांजपा नेल संगेल | ग ..

रेस कम सामांदगां पापार ॥म. ॥ नमीयां समा टस ॥ मु.॥५॥मु.॥ पिए रिण निणगार परत ।मु.॥ मागे अंगार ममान ॥ मु.॥ ॥ पंदन मा भगीठिपारे म.॥ नागिगी नागर पान ॥ ॥ १४ ॥ • ॥पि पविरों परीगामोरे ॥ ॥ पास में परमज होप ॥ मु. म. मिण परमे लिग भामरे ॥ म. ॥ पिए विण ए पनि जोर ॥१. ॥ १५ ॥ म. ॥ नपगे नारे निदरी रे ॥॥ भार न मम ने पान ।। म.नार विना पेली म गुरे ॥ म. ॥ कहींग के सयाग ॥ . ॥ ६ ॥ मु. पर पाना योगपी रे ॥ मु. ॥ गनीमी जसरार ॥ मु.॥ म. ॥ भजोरन पिय पानी ॥ म. ॥ तम गपो रवार || मु. ॥ १७ ॥ ॥ एमंदिर ए मानियो रे ।। म.॥ सिप रिना शून्य भागार || मु. ॥ पु. सारा रा रे ॥ मु• ॥ मागे ते रित पसार ! म. ॥१८॥ ॥ गौरन करत पार पुरे ॥ म. ॥ रिरिको नारीने गोर ॥ मु.॥ मु. ॥ नाहरिणां कामिनी रे ॥ म. ॥ पस पग पारे ते दोर ॥ मु• ॥ १९ ॥ मु. ॥ कालो कर में होम्यो रे ॥ ॥ निभिदिन से पलाय " म. ॥ मनोमगारम निदिरे ॥ B. || भोर सिप पर भाप म. ॥२॥ ॥ नदिन सारे दंग ॥ • ॥ करा मननी रात ॥ म. म. ॥ बामग्नि मन माने रे । R. || कौर भीतर पार ॥ 5 ॥२॥ मु.॥ दिनार पानां जाने n ॥ गोपीय रे भार HF...॥दो पामगनी उनी ॥ 5. श्री जगना ॥०॥ २॥ १० ॥मोकार मानी गरे। मोगामिंगर :.:. ॥ पेट स्रागला. पर?

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सरोना ॥ १ ॥ में तुमने पायां कही, ते संभारो नाथ ।। नृपने मंदिर दाखल्यं, दीपक लेइ निम हाप ॥ ५॥ ते वात आदी भाग, जब नुमें चाल्या लेक । तर नृप मुझ करें पम्पो, नागीन निःशंक ॥ १ ॥ मेहेमंतो ज्वट पर, गन सिर नासे ल ॥ निप नृप दामी पोकली. करवा मुझ यनुकूल ॥ ७ ॥ ॥ दाल १६ मी ! एतो नपटीगे मोवी अनव बन्यो ॥ ए । देशी ॥ एतो दासी मुन्न कने मोकली, एतो लेह मूखण साच ॥ साहेब मोराहे ॥ एतो सारे चंदन मरगजा, एतो सी सा भ रिया कार || मा. ॥१॥ सांभको पीवम माग ॥ एतो देवा माने सांच ॥ सा० ॥ ए आंकणी ॥ एतो, मीठी साकर मुखरी, एतो मीग मेवा दाख ॥ सा० ॥ एवो शाप मरी वली मोरी, एतो मीटी आंदा माख ॥ सा. ॥ २ ॥ सां० ॥ पसो भरताग शाल मलां, पतो आप्यां नर नवां पीर ॥ सा.॥ माणे पाया मुरनारी तणां, एतो सोई नेजमें होर ॥ सा• ॥ । . मां ॥ इलादिक लेइ भेटणां, एतो मुक्पां बेटी साय | || मा०॥ को चटी मुझ मातीने, तुम भेट करे भनाय ॥ सा. ॥ ४ ॥ मां० ॥ एती दासी को वली मुझने, तुमें सांभली । गिरन नार ॥ सा० ॥ एतो प राखे तुम पर, एकंगो या घ, पोप्पार ॥ सा• ॥ ५ ॥ सां. एतो जे दिन तम यो भाषि- यां, एनो भोजन करवा सार | सा० ॥ एतो ते दिनयी तुने चित्तस्यां मनयी न विसारे लिगार ।। मा. ॥६॥ मां.॥ पता ने ने दिनी तुमने यश, मिलवानी गरे हम ॥ सा ।। पतो एहमें नूठ न नागनो, तुम सत्य करि कई मम ॥ सा.. It || मां०॥ एतो नव ममझीरं चित्तमां. नृप नाप्यो मंटक मात ।। सा० ।। पतो पिय मुन्न रोश बढी यणी, रीने में दी भी लान ।। मा.॥ ॥ मां ।। पनो कंदीपार करो पगा.

॥ मु०॥ के म सही विप साय ॥ मु. ॥ २३ ॥ मु. फैन विना जीवर रे ॥ मु. ॥ कंत विना किश हेग ॥ मुर ॥ मु.॥ कंन विना शं माल रे ॥ मु. ॥ कंत विना थी सेक म. ॥ २४ ॥ मु. ॥ दव पर ती फाटती रे ॥ मु.॥ रही नी शकनी गेह ॥ मु• ॥ मु० ॥ विरहानलनी चाफा ॥8. | दाझी रही हूं तेर । म० ॥ २५ ॥ मुं. ॥ गि हिणी एम विलपे घणु रे ॥ सु. ॥ संतसिरी ससना ॥ मु. ।।मु० ॥ नयणे आम रेडती रे ॥ मु. ॥ जाणे ज्यं भादर या ॥ म० ॥ २६ ॥ मु• ॥ वसतसिरी एम पाठव रे । मु. गाने मंदेशा निगार ॥ मु० ॥ म. ॥ नारीनं ५ सांभलीरे म. ॥ बाल्यो मच्छा निगर | सु• ॥ २७ ॥ गु. ॥ सो लो किवाद गहेलीयां रे ॥ • ॥ मकी मननी राय ॥ पु.॥ अलग्गियो पनि आवियो रे || म० ॥ उमाच्या वा ॥ मुः || २८ ॥ ए. ॥ निनतिनं मम्व देवता रे ॥ म. ॥ शामिनि हर्ष भगय । मम. ॥ प रिनोदजर, पनो । मु. ॥ पुस्तके लिखियां न जाय ॥ मु. ॥ २९॥ नु. ।। मन वल्ली रे ॥ म. ॥ एपंचपदसमी दाल ॥S. 11 H• ॥ बंधाने लगे बीना उल्लासनी रे || F० ॥ की म ग साल !! म ..॥ दहा || हिंद प्रीतम घरे भारता. बाध्या नकली नह ॥ मा पाग्य पामा श्या, भमि वूग मे ॥ १ ॥ ना पहन या माना, रमनतिरी गुगगी ॥ प्रेम मरोवर मीलनां, वानी दा यो देर ॥ ॥ दंपति दौरंगे मिश्यां, मग्य भर की यार। म दोहग में गयां. मगी ने मार भात || ३ | ४ नार पिए मामी. गायी मसना ॥ नु चान्गा कामणी. पान पापालन, एनी सांमली गुरु उपदेन ॥ ॥ नारे बनी पापा एतो परामर मुस विप सा..|| • पदो महप पद परंपरा, तर गाय दि॥ का नोगा अगर पानी, एलो मेरम्पो मान एंद A. 11॥ ॥ तानस शिष्य परित सोरता, निविनय करिराम ! सा. ॥ एतो नम शिष्य नाग यो, नो पति मोगराप मा. ॥ २१ ॥ मो• ॥ लोग शिष मल लिए गांग, कमल रिनप र भ्रात !! ॥ पलो नम निप्प लाभारिन वि. पलो मार लिया मरान ॥ m. ॥ २३ ॥ मा. पतोसम सिप्प रेर अपर दी. पनो नग कम मिलत ! साः । पलो मान की प, दोर पंचव न दोन ॥ सा ॥ ४॥ मो• ॥ एटो मरा पर न सिर. इनो मागविषय रनमा । सा• ॥ भोर पर पुरो करयो, एको पीमो राम सार " सा. 11 २५ ॥ te शने भी जीवितम जगमे गनगन म । २ ॥ ॥ ॥ नि मन मा. मनरा निविदाम सलमानाचीसगीर, ॥ पोति पुना मगने. निनिदिन र ॥ दम पर चलन सहारनामाम परसती. करिनन मील २ नतर रहिन महा. सरदी माता मनाना सलागि सोप ॥ सदा रन दिनोर ॥ ॥रगर कमर ना. पर नान दाम ! म मावि शिल मी, कई यो साम" नाम मारो, रे पर मानी नाला, पापे दर मंगार ॥ ६ ॥ .

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. नर बिल्ने टोय. दो नृप मी लगे • ॥ दो ॥ मा रंग देवाटी. को मुखी पण हो॥ करे र र देर आठर. देना पेसा रे ॥ दे० ॥ ॥ मर गगन कीय, पणां हरियल तणा हो० ॥ ५० ॥ समाचार. नृप हरियल भी हो. ॥ . !! को में फा, गट भाग सिम गया हो. ॥ गः ॥ गर कंग, समापार किन पया .. ॥म. ६ रिपल ते परग, कोना भेटण हो. ॥ : जमारन्य, एनम बेटणं . ॥ ए. : सांभी. ग्वामी तुम मा • ॥ मार मारा ग म पण : माग्ग बाटा टा मेणा हो ।। रोटान्दोगामणा • ॥ ला.. ना. पूनो जन्मांनयां हो ॥ पर सागलादी हा. । म !! एनीपोमन री . | . रे Tोता..नाना 1. ॥ राग्ने गिराने . ॥२॥ चिनिन दर . पर पवार. दोमे पर मापनमा अपनान. मिरा र मार दाग न.पांनो.. ता मी गिरी मां की16.1 - TS (८०) कामने हो. ॥ तु० ॥ कटिण करचो तिहां मन, संमारी । मने हो० ॥ स० ॥ पाछ केम वलाय जे. कामें नीकल्यो का० ॥ मरण कयूल करो पण, पाछो नपि ८८ हो० ॥ पा० ॥ १२ ॥ उत्तमना न बल, ते मनदत ग्मोर ॥ ते० ॥ त पाछा किम भोमर, पंचमें हो. ॥५०॥ पचनी साने वाल जेब यो ते दले हो । ने ते नग्नाग जीवनां, आमां भले हो. ॥ ० ॥ १३ ॥ वयण चको ते मानवी, लेख नाव गणे हो. ॥ ले. ॥: भर परभर कार, गयो तस जिन मण हो ॥ ग. ॥ इम णीने स्वामी, तुमाग काजने हो ॥ तृ. ॥ घाल्यो जलने जीव, कटिग करी लानने हो. ॥का ॥ १४ ॥ वहिक हरिवल कौतुक, नी नृप भागले हो ॥ नी० ॥ कल्पित बात कग कहे, ते सह सांभलं हो. ॥ ते ॥ मला गपोजन आयो, नेह मन मवर्ग हो० ॥ ते० ॥ तप एक राम्पसमा व्यों ने, माहामा जक नरी हो ॥ सा ॥ १ ॥ नो जागीय मन ए, नार प्रमाण ऽय हो• ॥ ता. र ने जाणीय काममान ज्य हो. ॥ ५० ॥ दना लोटा के ल. कर करी कामलो हो । क. ॥ अवली माली दोर, दोग धमी झालफली हो. ॥ दी० ॥ १६ ॥ जाणे आंगों दो उदी, भूरी रंगर दर्ग रो. ॥ . || माई मटोटु ने जाणार हरपले मर्ग हो ॥ ॥ माय कारग कैग, ने नाणों . मगं ० ॥ • ॥ दंगली समा दान. ने विग्ला भार ग. ॥ नवि• ॥ १७ ॥ नारममा दाहायने, गरमी ना हो । ग. ॥ अंगुलीना नम्प नागाय, पावटा लान ". ॥ १० ॥ पंट नो जाणिय, रही, परो अरनी }{. ॥ पंम नगान दो नग्नने गायम भंदनी .. । लोगों

|| कलाल मपान, भयंकर भैरवी भा।
नांग यमनोर. मगामी निगाहो ॥ ॥ रथा
नमनीवाल ने. यावी ..॥ करनी हा
प, में कर दो परनी हो. ॥ ॥ ९ ॥ एमा
HTT. गंगर शंतनो ॥ पं. ॥ सपा
निरु पार मे, में दिन मातनी . पारि
क्षम, मादी मिली.. एक नो नय
विरोनी, गसम देगन्यो • ॥ ग. 11-11 मेंस
मापिलोमा पास भागि हो ॥ पृ. ॥ पिता
पंपरी mei. ॥ ६. ॥ गपन राम मपा.
कादिरी • • ॥ पानी नि बोलायो, गम
गफिी रो• ॥ ग. ॥१॥ भारो मामा .
भाग भरने को त• ॥ मा• ॥ पो भवान ने पाया,
पागने मलि पा र ॥ भा. 11 मामी दुल सादर
टिएम. . । गनी पीर गरम, पानी
मामी • • ॥ ६ ॥ नारस मात्र
afriरी ॥ ॥ किन माना गरि..
मकमी ॥ ॥ नर मिला. EE
मैका मनो.1.} em मागणे, कार
लो. ग. ॥ ॥ गईमा मात्र
...॥ नाम को मानेतराम
सा.दी. ॥ शो, समान
• • ॥ सोहर भाग मात्रग.
॥ २४ ॥ii मर गगग शेडदी in.
पो. हिना माद :.॥
मिरे रो. ॥ . .ti

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२॥ १८ ॥ काल कंकाल समान, भयंकर भैरवो दो० ॥भ.॥
जागे यमनो बंश्य. मगलो अमिन हो. ॥ ॥ क्रोधा
नलनी माल ने, सवयी काटतो होः ॥ १० ॥ करतो अहह
स, ते कर दो पणडतो हो ॥ ते ॥ ९ ॥ ममा
साप ज्यं गंध, गंगय दुनिनो हो. ॥ गं. ॥ उदयी
निकले आहार मे, ते दिन सातनो हो ॥ ते ॥ एडवो गि
हामणो राक्षग, ते साहामो मिल्यो हो० ॥ ॥ एक तो जल
वि वीजी, रासस देखी उल्यो हो० ॥ रा०॥ १०॥ में तय
नाणियो जूना, पन आपिरो हो ॥ पृ. ॥ शिवानीपच्चो
परिणी नगाडिया हो. ॥ य. ॥ राग्य काम सथाना में,
तर घुद्धिकरी हो ॥ में । गानो कहिने बोलाव्यो..
सन में फिरी हो ॥ रा. ॥ २१ ॥ भावो मामा जुहार,
भागेल तुपने करे हो. ॥ मा० ॥ यो अभदान ने मामा,
भागेजने भनि प हो ॥ भा• ॥ स्वामी तुम प्रसादयी,
'दिए जाली हो. ॥ ३० ॥ राजी थयो नव गवस, वाणी
मुगी भी हो. ॥ वा. ॥ २१ ॥ पूछे गलस मागेन, तुं
पद किदां यकी हो ॥ तुं. ॥ किन त आन्यो मलपिम, ते
स कर की हो. ॥ ने. || नरहरिपल करे मामा. मुझ
का नगी हो. ॥ ॥ दागयो माग्ग गारगे, कार
हां घणो होः ॥ का ॥ २३ ॥ जाई नृप कारजा भी
उतारो हो. ॥शी ॥ तब सखस कई भागेन, दीसे नं.
बलो शे० ॥ दी. ॥ मायां वादे चावे. नगाए नई
- ॥ च ॥ यो ना भारी माणेज, संका गर्नु हो।
2. ॥ २४ ॥ मी ले नुन राखम, घोले दी छतां हो.
॥ किन तुझा परवें भागेज, लंका गर जनां ॥
। निपने काम, न वह करी के रो० ॥ ते• || aini

॥ . 1 ॥ १४ ॥ . 1 (२) कामने हो. ॥ १० ॥ कठिण करची तिहां मन, संमागे । पने हो. ॥ सं० ॥ पोळ केम वलाय जे. कामें नीकन्यो । का• ॥ मरण कबूल करगो पग, पाछो नविक it० ॥ पा. ॥ १२ ॥ उत्तमना न चल, ने मनदन न. run ॥ ते० ॥ ग पाछा किम भोमरे, पंचमें आग हो..|| पचनी मान बाल वा यो ने टल हो ॥ ने नानागं मीना, मृभामां भले हो. ॥ मु० ॥ ११ वरण को न माननी. देव नारगणे हो. ले• ॥ मापामा कार, गया दम जिन भग हो ॥ ग. ॥ इन नीने म्यामी, तुमाग कामने हो० ॥ नु० ॥ घान्यो र, कटिग करी लानने • ॥ क. बिल कोक, नी ना पागले ग. ॥ नी० ॥ की कई. ने म. गांभळे हो. ॥ नः ॥ मलने गयोन प्रा. नेर मन मवर्ग हो. ॥ ने. ॥ तर पा रायम ज्या ने. माठापानक नगर मार ॥ ॥ र ना जागोगे मम, नार माग . ॥ ना. रन बागायें वामपान ग हो । 4. ॥ दना लोग ल. काग करा . ॥ क. ॥ पाली माली होगशवाफली • ॥ टी. ॥ १६ ॥ जाने मां यी. टी रंगा . || H. ॥ पाए मारने जाण र मर्ग. ॥ ॥ पारी का कन. हाग ने. गनीमना दोन मसिरा गी."॥ पारम्मा दा गरम : ग. ॥ प्रायना नम नागाव, पास in t. T, 17 नो नामि. , दोधाम: *. पय मनानटो माग गम भरनी

।१८ का ताल समान, भपकर भैरवो हो ॥ भ.॥
राग यमनी वय. गदा पिनी हो ॥ प्र. या
लनी झालने, मुग्दा सानो हो । मु. ॥ करतो आह
स, से कर दी पाटली हो. १५ । ॥ १९ ॥ भूभा
मार ज्यं मंध, गंवाय दुजातनो हो० ॥ गं. जदयी
नेकले आहार में, ने दिन सातनो हो । ने. ॥ एवो दि
मणो राक्षस, न साहामी मिल्यों हो० । नेएक तो जर
ये पोजी, देसी बल्यों हो. ॥ रा०॥ १०॥ में तय
गणियो जना, पूज आलियो हो । प. शिवानीवरची
घरलो नगाडिया हो. ॥ २० ॥ रायनं काम मधारा में,
ब दिकरी हो. ॥ में । गाशे कहिन बोलाव्यो. गन्ध
पना फिी हो० ॥ रा. ॥ २१॥ भावो मामा जदार,
मागेल तुमने को हो. ॥ भा० ॥ घो अभेदान ने मामा,
मागेजने माल पर रोक, भा• ॥ सापी सन सादयो र
दिए जाती है. ॥ ॥ रानी यया नब गायस, वागी
लगी भली ॥ वा ॥ २१ ॥ पुंछ गलस मागेज
दो किदां यकी .. | किन आयो मलपिमें, ने
हर वकी रो० ॥ ३० ॥ नर हरमन को मामा, मुन
का तो ही
..दायरे माम मरे, कार
विहां पो हो ॥ का ॥ २३ ॥ जाई नृप कारन भी
ध्र लाने.. ॥ तब बस को भाणेज, दी।
पालो हो ॥ दो मास रादे चोर. नगा ने ए नचे
॥ प• ॥ यो भागे माणेज, संका जर्नु हो।
• ॥ १४ ॥ नमी के नुन राखर, पाल टी मांडा.
धा॥ किन ताप मात्र, कागद जना हो |
जो निपने काम में नेह करी के रो० ॥ ३० ॥ दामो
"

॥ १४ ॥ वटि.
होठ ते जाणीय वंशसमान ज्य हो. ॥ ३० ॥ दना लोहाग
उदी, भंडी दंगर दर्ग हो. ॥ y• || मायं महोद ने जाणायें,
(२)
कामने हो. || तु० ॥ कटिण करयो तिहां मन, संभारी
मने हो० ॥ सं० ॥ पाल केम वलाय . कामें नीकल्यो ।
॥ का० ॥ मरण कबूल करयो पग, पाछो नवि -
हो० ॥ पा० ॥ १२ ॥ उत्तमना ज चौल, ते मनदत
रथा हो ॥ ते० ॥ त पाछा किम प्रोमरे, पंचमें
हो० ॥५०॥ पचनी साबोल वो यो ते टलें हो ॥ ने.
ते नरनारी जीवनां, मूआमां भले हो. ॥ मु० ॥ ११
वयण चको ते मानवी, लख नवि गणे हो. ॥ ले• ॥
भव परभर कार, गयो स जिन भण हो० ॥ ग. ॥ इन
णीने स्वामी, तुमाग कालने हो॥ तु० ॥ घाल्यो
जीव, कठि ग करी लानने हो० ॥ क.
बिल कौतुक, नी नृप भागले हो० ॥ नी० ॥ कति
करी कहे, ते सह सांभले हो० ॥ ने ॥ मलमें गयोन न
आपो, ते हु मन सवग हो० ॥ ते ॥ तय एक रासस भी
ज्याने, माहामानक तरी हो ॥ सा ॥ १५ ॥ रची
नो जाणीय मत ए, नाट प्रमाण ज्यु हो ॥ ता. ॥ लांग
ल, को क कलमलो हो । क. ॥ अवली मवली दोर
दोये धपी झलफली हो० ॥ दी० ॥ १६ ॥ जाणे आंखो दी
हलपले मरी हो ॥ ॥ माये का कैम, ते जागा
कांगगं ० ॥ ते० ॥ दंगली समा दांत. ते विग्ला भार
मनपि ॥ ७ ॥ नाममा दाहाय ते, गारपस ।
ना हो ॥ ० ॥ अंगालीना नम्म जाणा, पावटा लाना
हो || पा० ॥ पेट तो जाणिये, रडी, यो अरनी हो
। कु० ॥ यंम नगान दो चरण, ने गायम भनी हो ॥

" -संजालमपान. भर भावी ॥ नोपानोर. मग भागनी || R. ॥ नरनी हार, मगधी कानी • ॥ ॥ परमो मन का मी परतो. ॥ ॥ ॥ E 'मार पर, गंगर दागनी || गं. ॥ निकले भार, में निपातनी ॥ २ ॥ हानी गाय, मास मि॥ || Err विरोगी, मनीनगी . ॥ ग..॥ मानवी ना. 17 रिया ॥ • ॥ निगम (पानी गापारी || ६. ॥ गपन राम मगर.. कर दिरी • ॥... पानी गहिन बोलायो गम गरे ! ग॥' ॥ भागमामा जार. भाग ने करे . ॥ बा. बोटान ने मारा. पोजनेरि ॥ मा. ॥ माती मनमामी. दिएर n. ॥ गी सनरारम. वानी . वा. ॥ २१ ॥ गरम पर Hit मार्ग पर | मर नामा मंगनी... दाग ... गणे, पर Writin.T. 'गारी रगत... ॥ बाममोर. . .! ५. ॥ भरा. ग. ॥ गुगल. of n. tir 7, nrriti: ... | गई रे ..

4 " १४ ॥ कामने हो. ॥ तु० ॥ कटिण करचो विहां मन, मंभाग : मने हो ॥ सं० ॥ पो केम वलाय . कामे नीमन्यो का. ॥ माण कत्ल करतो पण, पागे नरि in || पा. ॥ ॥ उगमनानील, ने मनदन न गि ॥ न. ॥ न पाछा किम भीमरे, पंचमें. की. पं. पचनी माल दोल जब यो ने टल हो॥ ने नग्नाग नीयतां ममामां भलं हो. ॥ म. । १३ ॥ वाग नान मानी, दाव नवि गणे हो. ॥ ले. ॥॥ भा परमा कार, गया ‘म जिन भणे हा ॥ ग. ॥ इन नीन मामी, तुमाग काम हो ॥ ॥ पान्यो म का. काट करी लानन ॥ का निल कातक. नी नर भागले डा. ॥ नी० ॥ कनिया की कार ने मा पामर हो० ॥ न. ॥ मलने गयोन प्रायो, तर मन मर्ग हो ॥ ॥ नपपा गया मान. मारामानक नग मा. सत्राणी माप नाट प्रमाण या. रागीय सममान ए हो.॥4. रगं कलपा हा ॥ का मालामाल मकदी . ॥ दी. १ वो माग . . HP REP र मर्ग ... Frm: ।।.। दंगामाटात लामा ...नी.॥"!! तारपादा ग. पवना नमान, पा :: १. वि. मी.' :: मगाम भाना M . ॥ दना लोग । नाने मां १! मार्ग कारनामा " 1

१८काल कंकाल समान. भपकर भैरवी हो ॥ भ० ॥
यमनी वव. मनदी पिनशे हो । म ॥ कौधा
लिनी झालने, मुखयो काढनो हो । मु}} करतो अहर
स, हे कर दी एजनो होः ॥ ले। { १९ । मुभा
र अयं गंध, गंवाय दुर्वातनो हो० ॥ गं. ॥ उदयी
नकले आहार मे, ते दिन मातनो हो । ते• ॥ एवी वि
जामको राक्षस, से सामापो मिल्यो हो० ॥ ने || एक तो जल
पोनी, राक्षस देनी हत्या हो. ग. १२॥ में दर
काणिपो जना. जि आविग हो. • विजानीयचो
चरणी जगादियो हो० ॥ ५० ॥ राज्य काम मवार में,
व वृद्धिकरी हो । मैं !! मामो कहिन बोलायो. गव
पने फिी हो. रा. ॥ २ ॥ आयो मामा जुहार.
पाणन तुझ्ने को हो । भा० ॥ यो अभेडान ते पापा.
भागने मलि रे ॥ भा. ॥ चामी सम मसादर र
दिए माली हो । बु. ॥ रानी थी तब गवस, वागी
भी भली हो. ॥ वा. ॥ २१ ॥ पूरे गलस मागेन, में
दो किदां पकी हो ॥ हैं. ॥ किन आयो जलपमें, ते
कहे की हो ॥ नं. ॥ तर दीपल को माया. मुघ
लंका तगी ही. ॥ ॥ दासको RT मार, कारत
विधी हो॥ का ॥ २३ ॥ नाई नृप कारज सी
ध्र उतावो हो ॥ ॥ त राखस है भागज, दीरो नं,
साली है. ॥ दी मायां वादे चार. नगा नए नk
- ॥ १० ॥ श्यो तुर भारी माणन, संका न हो.
"लं. ॥ २४ ॥ नमी के नुन्न गरम, घोले दी उनां हो.
घो०॥ किन नझापूर भागेन, लंका गह जना totsite |
जहणे निपजे काम में नह तो शक हो । हैं. मा

. . V ॥ ४ ॥ वह पी.हा हा टगे .."'.. माय मारनामों ग. नी." | मरम्मादागत गरम पर गई. दाना सामने हो. ॥ तु. ॥ कठिण करया निहां मन, संमागे मने हो० ॥ स० ॥ पोल केम वलाय. कामें नीमल्यो ॥ का० ॥ मरण कबूल करयो पग, पालो मरि - रा. ॥ पा. ॥ १२ ॥ उनमना ज बोल, मनदन ना ग्ग. ॥ त• ॥ ने पाया किम श्रीम, पंचमें को. पं०॥ पचनी मानवाल जी गो ने टो ने नग्मार्ग जीना, मभामां भल हो. ॥ मु.।। वयग मानमानी व नर्षि गणे हो. ॥ ले• ॥ . भर पाभर कार, गया -म जिन भंग हो । ग. ॥ इन नान म्यामी, दमाग कानन हो. ॥ त. ॥ पान्यो । म. कटि की लाजन हो. ॥ का ग्विल काठक, नीना भागले . ॥ नी० ॥ कागत करी कर. ने मा मांभलं हो. ॥ नं. ॥ मल, गयो आयो, नेर मन मग हो. ॥ - ॥ तप पर गम्पमा म्याने. मात्रामा जान ॥ मा. माताणी मन नाह माग ग्या. घटनजागीय समपान प हो .. क.. का कलपा हो ॥क मानी माली टोग पीटी हो ॥ टी. | " मर्ग . " ।। मायरान प्रदा ॥ . ।। हंगकी मनमान . पीना नम नाग, पाहा गार - ॥ दना लोहा | माने भांगार . नारा . } पर मनाना ना गम भरनी..

-॥१८॥ काल कंकाल नमान. भगर भैरवी ॥भ.
जाग यमनोकर. अगरी भगिनी हो ॥ . || को
नननी जाटने, ममी बानी हो || T. | कानो मा
:म, सं कर पणटनो दो. ॥ ते. ॥ ९ ॥ प्रभ
मार ज्यं प. गंगय दुर्वाननी हो. ॥ गं. ॥ उम्मी
निकले भागने, ने दिन मातनी हो । ने. ॥ परो र
जो गरग, ने मारा मिल्यो • ॥ ने ॥ एक मी दर
विमानी, गम देवी नरो. ॥ ग.॥10॥ न्य
माणिपोजना. पंत आरित हो. ॥ ॥ गिनारपी
पाणी नगादियो रो• ॥ ९ ॥ गम्यन काम गधारा
भर दिरी • ॥ में ! पायो कानि दोलायो. गम
मनफिदो. ॥ ग. | " ॥ भारी मामा जार,
भागेश एक्ने को. | मा० ॥ दो महान ने पापा.
मानने भनि परे ॥ भा. ॥ मानी हाल मारपी,
(दिए उनी . ॥ ॥ गगी एयो नर गलम, पानी
को भी तो. ॥ ॥ २१॥ नरस मात्र,
कि परी॥ ॥ किन माया मलरिन
जसरी रो• ॥ . ॥ ना पर पाया. ER
हामनी • ॥ ॥ दामो माग गा, कार
कोपनी ॥ ॥ ॥ गईना कारज, भी
सारी रोजी ॥ ना गरम भात, दम,
मारो in ॥ दी. ॥ोग परे मनापन
1.प. मोना आरगनापेत. मसाने गर्नु ।
* ॥ २४ ॥ एमाले न गन्न, पोटी ए.
• दिपा पाट, गगन itc..॥
से निपने मरे •॥ । न

॥ (८०) कामने हो ॥ नु० ॥ कटिण करयो तिहां मन, संभारी मने हो० ॥ सं० ॥ पाल केम वलाय जे. कामें नीमल्यों को का. | मरण कत्ल करयो पग, पालो मार हो. ॥ पा० ॥ १२ ॥ उनमनाज बोल, ते मनदन । ग्गर ॥ ते ॥ न पाछा किम धोम, पंचमें उचार हो. ॥०॥ पचनी मानवाल अब यो ने टाहो ॥ ने नानार्ग जीवता, मुभामां भल हो. ॥ मु० ॥ १३ वपण समान मानसी, लख नागणे हो. ॥ ले• ॥1 मा परभर कार, गयो -म जिन भण होरा ग.॥ नीने म्यामी, नमाग कानन हो. ॥ तु. ॥ पागोज र करिन फर्गलानने का बिल कोक, नी नप पागले . ॥ नी० ॥ कलित। कंग की. ने मन मामलं हो. ॥ ने ॥ मलगोन आग. ते मन माग हो । ने. ॥ नय एक गम्यम ज्यान. माहामा जक नगर ॥ मा. नौ जागीय मनप वाहमा उपरा. टन जागीय सममान " हो. ॥ ॥ दना लोग ल. कर की कलम हो ॥ क. ॥ भाभी माली गभरूफली हो• | टी. ॥ टी. सही मार्ग हो. ॥ १. मारा मारा मगे हो. ! पार्यकावान प्राग ..॥ दंगमा दान गरानी!" मारमा दाहाय नाग. . . || श्रीना ना नाग, पारसा गं 7. Tो ग्रामि. रा. दाना y: १२ मन गाय मम मरना " । जाने मांगो , नारा

.
11१८ || काल कंकाल ममान. भरकर भैरवी हो ॥भ.
नाणे यमनो चार. अगदयो ओपन हो ॥ प्र. ॥ को
नलनी पाल ने, मुम्बधी माहता हो. ॥ मु. ॥ करतो अहम
त कर दो पणनो हो. ॥ ते ॥ १९ ॥ मुभा
साप गंध, गंगप दुर्वातनो हो० ॥ गं. ॥ उदयी
निकले आहार मे, ने दिन माननो हो ॥ ते. ॥ एडवो बि
हामणो राक्षस, ते माहामा मिस्या हो । ने.॥ एक तो जल
विबीजो, गक्षम देखी चल्या हो. ॥ ग॥ १०॥ में तय
माणियो जनो. पूर्वज आपियो हो ॥ पृ. ॥ शिवानीपच्ची
पंचरणो जगाटियां हो. ॥ २० ॥ राज्यन काम सधारा में,
तर बद्धिकरी हो. ॥ में !! माना कहिने बोलायो..
सने फिरी . | रा॥ २१ ॥ आप मामा जुहार,
भागेत तुमने करे हो० ॥ मा० ॥ घो अभदान ने मामा,
भागेनने भनि प हो । भा• ॥ स्वामी तुझ प्रसादयी,
दिए उकाली हो. ॥ ॥ गनी थयो तब गवस, वागी
मगी भी हो. ॥ वा. ॥ २१ ॥ पूछे गलस मागंज, तुं
दां किहां पकी हो ॥ तुंः ॥ किन न मान्यो मलपिम, ने
सुन कहे वी डोः ॥ २० ॥ नव इविन कई मामा, मुम
संका नगा हो. ॥ ० ॥ दावशे माग्ग माहरे, कार के
विहां पनी हो ॥ का ॥ २३ ॥ नाएंगे नृप कारन, !
अ उतारा हो ॥ ॥ वर गखम कहे भाणेम, दीसे
गारो हो. ॥ दी. ॥ मीयां वादे चारे. नगा मुंए न
॥ घ• ॥ श्यो नुन मायरो माणेन, संकामें जई हो।
• ॥ २४ ॥ चमी के नुन रासग, पोले दी उनां हा.
•॥ किम तमापूरवें भागेज, लंका गढ जना हो ।
पी निपने काम, तं ते करी के हो० ॥ ते• ॥ यांचा

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|१८|साल कंकाल मसान, भयकर भरवा हो ॥५०॥ नाग यमनी भर. मगठमो अधिनमो हो. ॥ ॥ शोधा लिनी झालने, यी नानी हो ॥ ॥ करतो महा पास, ते कर दो पणतो हो ॥ ने ॥ १९ ॥ प्रभा -आप ज्यं गंभ. गंगर इवाननो हो० ॥ गं. ॥ उम्मी नक आहार ने, ने दिन मातनो हो० ॥ ते. ॥ पावो वि हामणो गाग, ते सातामो पित्यो हो । ने॥ एक ना मन पनी, गम देखी त्यो २० ॥ ग०॥10॥में नव गियो जना. पन आरिग हो ॥ पृ. ॥ शिवानपची पिणी नगाटिया • ॥५. राज्यन काम समानाम, व पदिकरी . ॥ ॥ गामो कहिन बोलायो, गाय उनमें फिरी . ॥ ग. ॥ २ ॥ भावो मामा जदार. बागेश नुमने करे हो• ॥ भाः ॥ पो संभदान ने मामा. गाभेजने भनि पर रो० ॥ भा• ॥ मामी तृषा मादयी, म दए उकली ॥ ॥ गनी पयो नर गन्यस, पानी जगी भी॥ वा. ॥१॥ गवस मागन,d संरितां एसी ॥ न । किन मान्य नलाधने हम कहे यमी रो॥ नं. ॥ नर रियर करे पाग, मुस का ननो हो... || दाबी माग ना. कार. मे पनी रोः ॥ सा ॥ २१ ॥ राईपना कारन. श्री उतार रो. ॥श्री. ॥ तर सायम को पामेम, दीनं, लो . ॥ दी. ।। गारा वादे पोर. नगापन it• ॥ २० ॥ यो नत्र भागे माणेन, मका न रो. 1. ॥ २५ ॥ मी ले तुम रायम, पोट.टी जां . •॥ निदा मारेन, मंशा गहनतां instit.॥ मेरपी निपने पाप, तारकरी भरे ० ॥ ने• ॥ दांत . ल, करे करी कलमलो हो० ॥ क. ॥ अवली सवली उडी, भंडी इंगर दरी हो. ॥y• ॥ माथु महोई ने जा झांसरां हो० ॥ ते० ॥ दंगकी समा दांत. ते निगरा हो. ॥ पार || पेट तो जाणिय, रडो, कुपो झाना (८०) कामने हो. ॥ तु० ॥ कटिण करचो तिहां मन, । मने हो० ॥ सं० ॥ पाड़ केम वलाय जे. कामें नाल्यो ॥ का० ॥ मरण कबूल करयो पण, पाछो नति हो० ॥ पा० ॥ १२ ॥ उत्तमना जोल, ने मनइन स्या हो ॥ ते. ॥ त पाछा किम भोसरे, पंचमें हो ॥५०॥ पचनी सा बोल ले वो यो ने टलें हो। ते नग्नागे जीवतां, आमां भले हो || Hot वयण चकां ते मानवी, लेख नर्षि गणे हो. ॥ ले• 1 भव परभव कार, गयो तस जिन भणे हो. ॥ ग. ॥ णीने स्वामी, तुमारा कानने हो ॥ तु० ॥ पान्यो जीव, कठिग करी लानने हो..॥ क॥ १४ ॥ वर्ष हरिवल कौतुक, नी नृप आगले हो० ॥ नी० ॥ का: करी कहे, ते सह सांभले हो. ॥ ते. ॥ मलमें आयो, ते हु मन संवरी हो० ॥ ते० ॥ तर एक .. व्यो ने, माहामा जक तरी हो० ॥ सा ॥ १५ ॥ नो जाणीय मत ए, ताह प्रमाण ज्यु हो॥ ता. ! होठ ते जाणीय वंशसमान ज्यं हो. ॥ वं• ॥ दना : टोये धमी झलफली हो० ॥ दी. ॥ १६ ॥ जागे । हलपले सरी हो ॥ १० ॥ माये कावग केश, राहो ॥ तविः ॥ १७ ।। तारममा दा हाय ते. ना हो० ॥ रा. ॥ अंगुलीना नख जागीय, पावडा । ते .. ॥ क॥ यंभ नगान दो चरण, ते गायम हनी (८५) . । हाल २ जी ॥ भटियाणीनी देशी || हि गलस कर जोडी ही कहे आलस छोटी रायने, एतो लंकापनि अवधार ॥ ईजर सायर कंठे हो उपकरें छक ते जायने, मुझ बलियो आगार दिव० ॥ १ ॥ तब एक पंथी वेठो हो में दीये निग्रंथो पणे, एमो मायर पेले पार || हुँ गयो जव ते साहामो हो ते पण क हि मामो भगे, तुम आवो मामा जहार ॥ हिवे० ॥ २ ॥ में पण पूजिय तेहने हो तुं कहने भगसे इहां रयो, ता पोल्यो पंथी सार ॥ राप विमोपण केलं होछे शरणं भलं मुझ कयो, ए तो मागेज बोल्यो विचार | हिवे. ॥ ३ ॥ तुम दासणनो यर्थी हो कार करथी छारनी पोटकी, मुन्न यांची दांयी एइ ।। कहे रा रूम नुम सयणे हो तुम नयगे कि ए पोरकी, ए तो भेट करी में नेड ॥ हि ॥ ४ ॥ इम राबस गयो कहिने हो ए तो वही ने फिरी निज पान, तब चिदवे विभीपण चित्त ॥ विस्मय पा म्यो मनमें हो राय जनमें छोटी जाणके, ए तो राग्वसना पोटकी दोन ॥ ५॥ एम इग्निक कहे नृपने हो यगे पल भस्म करें नही मुझ ऑटे अमन नाय ॥ ए आंकगी॥ विचारले करी शुद्धो दो मुझ कांघो जीवता देखता, निगे दीयो फिरि अवतार ॥ सन मान्यो भने न्वामी हो घणं अंतरजामी पेवतां, मुन की गो वह उप गार ॥ ए. ॥ ६ ॥ हानि मुश हो ए हां के में काया दही, मत मांडी हो विग्नान ॥ तब में लंकापनिने हो कदि पनने मांडीने मी, एनो थापगा पानी वात ॥ ए० ॥ " * ॥ बीमालापुर नगरी हो सो मन देगमें, एनो पहारी पुण्य पवित्र । मदनवेग तिहों राया हो मम्वदाया सयला नरस, एना मोहे मनाम छन । प॥ ८ ॥ भंगनने पर पागजम पारा रिहं दिन, एनो पांचो उच्छा रंग । निम का ग प मन्टे हा मन में नव नारा विभ, एना नही - .

मनमें पापीया, हरिवल मुगि 'गस वाग || ? ॥ दिनकर खा एक ज्यं, रजनापति ज्युं चोर ॥ जलघर देखि जवास ज्य त्यं बल सचिव ते जार ॥ १ ॥ पग शं कर पड्यो एकलो, जोर न चाले कोय ॥ जेहना दीहा पावरा, तस और अंथन होप ॥ ६ ॥ कर क्रम योर बांसे थयो, हचिलने ते दृष्ट ॥ छलनाके छलवा भणी. कालसेन उच्चिष्ट ॥ ७॥ एक दिन पेठो मालीये, मदनवेग ते राय ॥ कालसेन तिहां आवियो, पेठगे प्रगमी पाय |॥ ८ ॥ काने लाग्यो चाडियो, कालसेन कीराड ॥ हरिवलने दुःख दाखवा, नृपने याल राड ॥ ९ ॥ || हाल ३ जी|| इण सरोवरायांरी पाल, आंगा दोय राज ला। ललना ॥ ए देशी ॥ हिवे हरिवना क्यण, बलाण ते नृप करे ॥ ल. ॥ खानी त्यागी निकलंकक, शर मुभट सो ॥ द० ॥ जो परधान त एकलो, "का गढ गया ॥ मादरं कान मुवारवा, श्री भस्म थयो । ल. ॥ १ ॥ का ढयो आपणे दो जण, पिने घोवती ॥ ले. वेगी, खम काढी हनी ॥ ल. ॥ पण ने साहाटगतीका टेइने ॥ ल. || आव्यो भापगे मंदिर, रंका देने ॥ ल• ॥ २ ॥ ता में जाण्यो ए ताण, भाग्य की यगो ॥ ल० ॥ जामाता या भाव्यो ए, का गदतगो ॥ त. ॥ गव्यो सा नाणी सहगनी, नपा मत करी || ल० ॥का पनिनी माही दोराकी सरभरी ॥ २० ॥ ३ ॥ वृद्धि भक परपंच ए, दीग मही ॥ ॥ माननंगे पात्र आगल, वान ए मार कही ॥ स. ॥ कारमेनन पगया, मांडी माया लगे । ॥ प्रगटी बाट ते मांभी, जागी अगा अगें ॥ ॥ ॥ बोन्पो मंत्री नाम, कटे रोग यी ल०॥ मटि नुम भाल अनापति हम्विरना करी ॥ द. ॥ ननु जागा मागी. । टा. पाणी मैं " (८१) +- नशाननी रुग!!२०॥ मानो सप घाल ते दूध करी माग ।। ..॥५॥ मार रिंग असंचन, अपपडीयां बरी ॥ २. ॥ गगन कगि नेपाद, गन तेरनी की ॥मः ॥ अ दोगे पंद अनारसनी गरी ॥ ॥ निमाविमा एमा नी, पदुम पानी ॥ ल• ॥ ६ ॥ नाणी पभ बयण, गगन रोदन ॥ ल. ॥ ए दीनां सपल, चरित्र लाभ म० ॥ ने परदेसी रोक ते. दीसे पारा॥ ए. ॥ ना (पेटा नागे, पादीगर जारा | ल. ॥ ७ ॥ कर करट य, रां रुला सेलचे ॥ स. ॥ रसित वान करी, रूरी वा पेरर ॥ ल. ॥ परगामें परदेशी, फिर या ऐलमा ॥ ॥ मोरा मोरी को पगा, पारी खेलमा || स. ॥ ८ ॥ मी परनमें गाती, करे महोटी करी ॥ ल. ॥ रिंग गि परा मे, सौर नाणेपरी ॥ २० ॥ माची जी सी में, मन (पगारो ॥ ॥ पान पोलाप्पु पाटेने, बदन विमारी 3. ॥ १ ॥ माटे मु मामि. गी ग पानी ॥ १२. कपटी दिग्दार प, रिल भागनी || Rः ॥ शिरा शि.. पतिनी पत्रिका ॥ २० ॥ अगाभिमनी २.सा. पदी में घिरा ॥ सा ॥ १. ॥ एनो पार रीवा। ल.पाप्पी नार्ग प रमन मापन ॥w. ॥ नान लिय मिजमार, वारणा भनी । म: ॥ किराए गनिनी, पुग्नी परी ॥e.n ११ ॥ श्री इनिपाने गंगट राती प्रपनी ॥ २ ॥ पनि . मगार पम्पनी ॥ टाग ग गा र मलिने ॥ R. माना बने. रामन ने भारत ॥ R. :: . पानां मोर पानी ॥ 2 ॥ दिम परवीन रहा ।।दना १. गनमें पायो, दरियल मुगि गम याग ॥ १ ॥ दिनकर सापक ज्यं, रमनांर्शन ज्यं चार ॥ जलधर दोग जगमश. सं यस मनिा ते नार ॥ ५ ॥ पणशं करे पडयो एको. जार न पाले काग || जाना दीहा पायग, नम और मान और ॥ १ ॥ का क्रम योर वाम ययो, हचिटने ते दए । घटना घलया भणी, कालमन उचिए ॥ ७ ॥ एक दिन ग पालीय. मदनरेग ने राय ॥ कालसेन निहां आरियो. बेहो प्रगमी पाप ॥ ८ ॥ कान लाग्यो चाडियो, कालमेन कीगा ॥ हरिबलने दाग्य दाम्पा, नृपने घाल गड ॥९॥ ॥ पाठ ३ गी॥ रण मगरायोग पाल, आंग दोय गा पदमा ॥ यहांय ना वाण, वरनाग में ॥ ग्या । न्यागी निकटक शामना मो 12. ॥ जो पायान नगला, का गह गया ॥२॥ पार कान पारगा, वी भम्प यया ॥ रया आणि दा नग, पिन गोपनी ।। वेगी. मग काही ती ॥ 4. ॥ १ त मासा.in प्राध्या श्राप मांदा, टमानाने ।। नाम जाग्या छ पाण, भाग्य मो॥ मामाता या प्रामी, कामना । नागी गगनी. दात करो ॥ ॥ का पतनामा दी ग:। मग्मगे . । बडि भाप:47: ही मी ॥ .. । मनांगे मोर मामी की ... का मनन गया, मी RAT . ..: प्रगटी प्रामापन. नागी प्रगा नगं । भयानाम, कोगों की मां पर art .. ० M ५ टा. पाणी ने ॥ । । यो मा 14 (८) माननी का मानो सपनु घोल ते, दूध करी भाग ।। | ३. ॥ ५ ॥ मारें डिंग भसंबंधने, अणयहीयां की। २०॥ गलतुं कगि मांई, गज नेरनी कली ल॥ अंधे टो चंद्र अमावसन सतही ॥२॥ निमहरिवली एमा नी, नृप तुम वानी ॥ ल. ॥ ६ ॥ जाणी म वयण, विाग करो तुमे । ल. ॥ ९दमानां सपल, चरित्र लई अ लने परदेशी लोक ते, दोसे एहया । ल० ॥ ना चेटक जामे, वादीगर नेहरा ॥ ल० ॥ ७ ॥ कह कपट रपंच, सरी कला केलवे ॥ ल० ॥ हरिपत पात करी, कही पें कही मेल । ल॥ परगामें परदेशी, फिर यह छलसा ॥ 3.॥ मोडा मोही कर पणा, धोबी बेलसा ॥ ल. ॥ ८ ॥ मी परजम बातो. कर महोटी करी । ल. ॥ लिंग हिंग चला में ने, लोक नाणे सरी ल. सावी नदी करे ते, मान लगायें ॥ ल. ॥ पान बोलाव्यु चाटे ते, बदन विगाही क. ॥ ९ ॥ ने माटे में स्वामि. सही कर्ग माननो । ॥ ल. ॥ कार्गमा शिरदार ए, इरियल जागनी || ल. शिश का फिहां लंक, पतिनी पुत्रिका | ल. ॥ अमिलनी ६वान, घड़ी एणे दुरिका " ल. ॥ १. ॥ ए तो कोरक भूत, पणे करी बातडी ॥ . । परण्यो नारी ए उत्तम, मध्यम भावी ॥ ल. ॥ नाम लिये निज आर, धारवा भगवडी ।। }}२० ॥ किहां ए लंकापनिनी, पुत्री ग्ली पडी ॥ R० ॥ ॥ ११ ॥ी इनिपाने सोट, पो हनी पुरपनी !! R॥ कानिये काप, सगाइ ए पुरुपनी ॥ तनाग विद, गया जर महिवलें ॥लए । आच्यं का कोराने, रानसो ने अपमिलें ॥ ॥ १२ ॥ ५ उपाणां गाभली, हा हुने धारना ॥ ह ॥ निम चिनी यादी 4. (८) मनमें पासपी, हरियल मुणि गम वाण ॥ ? || दिनकर साभा ज्यं, रगनापति ज्यं चोर ॥ जलपर टॉग्य जाम सं यल मनिर ने नार || २ ॥ पण शं करे पड्यो एकी. गोर न पाले कोग ॥ जाना दी पायरा, तस और अंत और ॥ १ ॥ कर कम बोइ यमि ययो, हयिलने ते ॥ घरताके च्या भणी, कालमेन उचिष्ट ॥ ७ ॥ एक दिन मंगे मालीप, मदनरेग ने राय ॥ कालसेन निहां आगिरी. यो प्रगमी पाय ॥ ८ ॥ काने लाग्यो नाडियो, कालमेन कीगर ॥ हरिबलने ताप दायरा, नृपने घाल राज ॥ १ ॥ | राम जी ॥ पण मगारायांग पाल, ओगटोप गा हा ।।लना पदमा ॥ कि हांग्यना करण, वाग ने नृप।। ! या न्यागी निकला, शा मुमा में || 2. ॥ जो पग्धान ताला, "का गडगो 12.1 माह कान पापा, यही भम्म यो ।। रमा पापण दा जग. दिने गौरती ।। .. वेगी. बय काटीनी ॥ 4. ॥ पण ने गाली भाग मादा, टंकाने । । ना जाग्यो रण, भाग्य चणे ॥२०॥ मामाता या पाया प. मानतो. मी मा नागी मगनी, ना मत करो || का पतिना मrit दांगी मामी ५ ॥ ।। यदि भाजपा हामी ॥ ।। पदसंग मोरार मी ॥ स मनन गरी, मी मामा । भावार्य प्रार, मानी. ताग प्रगा . : बल्योग नाम.गम मानकर चार far! ". ॥टमा ५ टांगीर ने ॥ भाव्या . " मग ।

ए धातनी का ॥ २०॥ मानो सबलु घोल ते, दूध करी भग • ॥ ५ ॥ मारें डिंग असंबंधने, अणघडीयां वर्ग ॥ ॥ २० ॥ गगनं कगि मांडे, गन तेरनी की ॥ ल. ॥ अंधे दीगे चंद्र अमावसनी रातडी ।ल. ॥ तिम हरिवलनी ए मा ननो, नृप तुम वानी ॥ ल. ॥ ६ ॥ तुं जाणी प्रभ वयण, विपाग करो में ॥ ल. ॥ ए दंभीनां सयल, चरित्र लई अ में !! ल. ॥ जे परदेशी लोक ते, दीसे पहा ॥ ल० ॥ ना टिक चेटक जागे, वादीगर जेहवा ॥ ल० ॥ ७ ॥ फूड कपट परपंच, करां कला केलवे ॥ ल. ॥ कल्पित वात करी, कडी प की मेल ॥ ल. ॥ परगा परदेशी, फिर यह ऐलसा ॥ ल: ॥ मोटा मोडी करे घणा, धोत्री चेलसा ॥ ल. ॥ ८ ॥ (सी परजमें यातो, करे महोटी करी ॥ ल• ॥ हिंग डिंग पला वे में, लोक नाणे सरी ॥ २० ॥ साची जी करे ने, मुखें न लगादी ॥ ल० ॥ धान बोलाव्यु चाटे ते, बदन विगाडीये "ल. ॥ ९ ॥ ते माटे में सामि. सही करी माननो ॥ ॥ल. ॥ करटीमा शिरदार ए, हरिवल जापजो विहां का किहां लंकपतिनी पत्रिका || ल० ॥ अणमिलनी र वात, पडी एवं अत्रिका || ल. ॥ १० ॥ ए सो कोदक तं, पणे करी वातडी ॥ ल. ॥ परण्यो नारी ए उचम, मध्यम ती ॥ ल• ॥ नाम लिये निज आप, धारवा अगवडी । द. ॥ किहां ए लंकापतिनी, पुत्री रली पडी ॥ लः ॥ ११ ॥ भी दुनियाने खोट, पडी हती पुरपनी ॥ ल. पनिये पीप, समाइ ए पुरुपनी ॥ ॥ नमः मग विच्छेद, गपा बर महिनलें ॥ ल. ।। आन्यं का नं. रामसर ने अपमिलें ॥ ल. ॥ १२ ॥ ए उलागा ती, तर तुने धारजी ।। द. ॥ विग इग्विलनी बातों मो (८) मनमें पायो, दरियल मगि गम याग ॥ ? ॥ दिनका सापक ज्य, रजनांन ज्यं चार ॥ जलधर देखि जाम शं. स्य पल मगिर ते जार ॥ ९ ॥ पण शं कर पायो एकमो. गौर न पाले कोग || जाना दहा पावग, नस और आज सेप ॥ १ ॥कर कम पोइ यांमे ययो, हचिलने हेदए । छटलाके छया भणी. कालमन उनिट ॥ ७ ॥ एक दिन बंटी मालीये. मदनवेग ने राय ॥ कालसेन विहां भागिरी. केटो मगमी पाप ॥ ८ ॥ कान लाग्यो चाडियो, कालमेन कीराः || हरिबलने दृश्य दायमा, तृपने घाल राड ॥९॥ । हाल ३ जी॥ इण मारायांग पाल, आंग दोय गा का ॥दना पदनी ॥ हाय-ना वयण, पावाग ने नृप। ॥ ग्वा । न्याी निकटकार मुनर 11 1 नो पाधान तमाला, "का गह गया ॥ माहम कान मुगा, वो भम्म थयो । दया भागटा जग, पिन पोरनी ॥ वेगी. सम कासनी ॥ 4. ॥ पण ने गाहार दी.in भाच्या भाग माटा, ।। ना में गायी पाण, माग्य । यो जामाता या भाग्योप, कागतगी ॥ नागी मागनी, दाता मत करो ॥ ॥ •का पानना मा. होगा मगमग ५. ॥ व मा. पापा पम होगामही .. l: मदन पी आग कही। .: कामनन गतीमांटी माया .: पाटी पार न मांगी जागी गा मंगे । : बली को नाम. गो. मांदार शर. ना .. दा ॥ टावाणी ने ॥ । टंका देने । | -पोमा दो । .

धनती करा २०॥ माना सब घोल ते, दूध करी भगा। म. ॥५॥ मार हिंग असंयन, अभयडयां बरी ॥ २० ॥ गगन कगि तमांड, गन तेरनी कली ॥ल अध से चंद्र अगासनी रानही ।।.॥ तिम हरिवलनी एमा मो. नुम कानही । ल. ॥ ६ ॥ गाणी प्रभ पण, नाग करो जुमे । ल. ॥ ए दमानां सयल, चरित्र लई अ जे परदेशी लोकते, दीसे एहवा ।। ल. }} ना चटक जामे, वादीगर हवा ॥ ल. ॥ ५॥ र कपर रपंच, करा कला केलवे ॥ ॥ काल्पित बात की, कही करी मेलवे ॥ल. परगा परदेशी, फिर यह ऐलसा ॥ । मोटर मोडी करे यणा, घोरी बेलसा । ल' ॥ ८ ॥ मी परनमें वाता, करे महोटी करी ॥ल. ॥ हिंग नि पला 'ने, लोक नाणे सगे । ल । सानी नही करे ते, पुणे न हगाडी ॥ - ॥ दान पोलाप्पु पोरे ने, पदन विगाडी (ल. ॥ ९ ॥ ने माटे में स्थापि. सही कर्ग मानमो ॥ [ल. ॥ काटीमा छिरदार ए, हरिवल जागना ॥ 8 ॥ गो का कहां लंक, पतिनी पत्रिका | ल. ॥ अभिलनी मान, यही एणे त्रिका | ल. ॥ १. १ एनो काक भूत, पगे करी वातही ॥ 8 ॥ परण्यो नारी ए उत्तम, मध्यम भानी ॥ ल. ॥ नाम लिय निज आर, धारवा अगवडी ।। ॥ ॥ किहा ५ लंकापनिनी, पुत्री रली पड़ी ॥ 8 ॥ ॥ ११ ॥ो नियाने सोट, परो हनी पम्पनी ॥ 6 ॥ कानिये पीप, सगाइ ए दुरुपनी } ते नाग विजेद, गपा कर महिनले ॥ ल. । आय का सोने, राजसरे ने अगापिने 12.1 १२ । एमागो गांधली. में शारती ॥ ॥ लिग दिलनी पानी A है मन पायो, दरियल मुगि गम वाग ॥ ४ ॥ दिनका गा एक गं, रगनात उगं चोर ॥ जलधर दाय जगाम . स्पे पर सचित्र ते नार ॥ १ ॥ पग शंकर पञ्यो एकतो. जोर न पाल को ॥ जागा दीटा पावरा, नम और मान ॥ १ ॥ कर क्रम कोइ वाम थयो, हघिलने हे दृष्ट । छनारे छला भणी, कालमन उच्चिष्ट ॥ बंग मामीये. मनरेग ते राय ॥ कालसेन तिहां पारि यो प्रगमी पाप ॥ ८ ॥ कान लाग्यो नाडियो, कारमेन कोगा ॥ हरिगलने दास्य दाम्पा, नृपने पाल गड ॥९॥ I! हाल ३ ज॥ एण मगरायांग पाल, दाप गा रहा।।लना पदमा ॥गि हाग्यमा वाण, नाराण • || या न्यानी निकलक शामभर में ॥ २० ॥ जो परवान नपाला. का गा गया }} 1 माहरू कान पारवा, वो भम्म थयो । दपा पागदा नग, पिने गोपनी ॥ वेग 1. बप काटी हनी ॥ .. मारग मंदिर, दंकाने ॥ ना मंगाया पाण, भाग्यायो । जामाता पर प्रादगी का नानगी ॥ ... नामी मागनी, नपा मत करो ॥ ॥ • पनाम: दोगामामी ॥२. ॥ ॥ में टोमो ॥ ।। मानोगे मार मार मही का मन पारा, मी मापा । २.: अमदी कार ने मारी. नाना गा मा । " नया शनाप. गौतम a.tan !! .. मा ॥ दो पानी । पण न माग it in ॥ प्रादया । यीमा ।

पशानी का मानो सरलु शैल ते, दूध करी मा ।। 10. ॥५॥ मारें डिंग पसंयने, अणयडीयां वरी ॥ २०॥ गन्नं कगि माह, गन तेरनी की ॥ ल. ॥ अंधे दीरी चंद्र अमावसनी राडी ॥ सं.॥ तिपरिवलनी एमा ननो, टप दुम वानी ॥ ल॥ ६ ॥ नाणी प्रम बयण, बवाग करी तुमे । ल. ॥ पदभीनां सपल, चरित्र लहं अ में लाने परदेशी लोक ते, दीसे एहवा । ल॥ ना चेक जागे, वादीगर हवा ॥ ल. ॥ ७ १ फूट कपर परपंच, करी कला केलवे ॥ ल. ॥ कल्पित वात करी, कही की मेलवे ॥ ल. ॥ परगा परदेशी, फिर यह छलसा । : मोटा मोती कर पणा, धोरी पेलसा ! B. 1 ८ ॥ जो परजमें बानो, करे महोटी करी ॥ ल. ॥ डिंग हिंग चला ने, लोक जाण सरी ॥ 8 ॥ साची जी करे , मुन गाडी !! ल. ॥ पान बोलाव्यु चाटे ते, बदन विगार्टी लर ॥ ९॥ ने माटे में सामि. सही कग माननो । ल• बाटीयां सिरदार ए, हरिवल जाननो ल॥ मां का किहां लंकपनिनी पुत्रिका ल. ॥ अमिलनी बाल, घडी एने सुत्रिका | 8. ॥ १. ॥ एता कोइक त, पणे करी बातडी । ल. ॥ परयो नारी ए रचम, मध्यम पावडी ॥ ल. ॥ नाम लिये निज आप, धारवा अगपही ।। {२० । रिदा एकातिनी, पुत्री रती परी !! .॥ ११ । श्री इनिपाने खोट. पोहती पुम्पनी ॥ 7 ॥ देकानिमें कोप, सगार ए पनी ॥ ल. ॥ नक्क नागरिजेद, गया जर महितले १ ला ॥ भाव्य का कौशन. राजसर ते अपमिल ॥ B.॥ १३ ए उसापी गायकी में पारा 2 || नि चिलनी पानी मो पगनगाहारी.in मनमें पाया, हरियल मगि गम याग ॥ ४ ॥ दिनकर सा एक ज्यं, रगनीपनि ज्यं चार ॥ जलधर टेगि जवाम . सं यल सपि ते नार || ५ ॥ पग शं कर पड्यो एको. जोर न चालकोग ॥ नाना दीहा पायग, तस ओर आ होप ॥ १ ॥ कर क्रम पोइ बांसे थयो, हघिलने ते दृष्य । एसनाके छठया मणी, कालमेन उचिट ॥ ७ ॥ एक दिन बंटी मालीये, पटनरेग ते राय ॥ कालसेन विहां भारियो. बेटी प्रगमी पाय |॥ ८ ॥ काने लाग्यो चाडियो, कालमेन कीराः ॥ हरिगलने दम्य दाम्पा, नृपने घाल गड ॥९॥ । हाल ३ जी॥ण मारायांग पाल, आंग दोय या हा ॥ बदना । एदनी ॥हि हाग्यन वयण, नवाग ना.।।... ॥ पात्यागी निकलक केशर मुभर ॥ नी परवान नपाला. का गह गयो माह कान मुगारगा, वही भम्म यया ॥ या आपण टा जग, पिने बोपनी ॥ वेगी. बम काहीती ॥ .. भाषा मांदा, टंका देने । ॥ ना में बायोल पाण, भाग्यायो । जामाता या पाव्या प, का गहनगी ॥ ... नानी महगनी, पक्ष मत करो ॥ ॥ •का पविना मा. दोगामागे ॥ न. ॥ ३ : बदि भा. पा. टीमही ॥ ।' मनरेंगें मीर भाग 1 जी | . का मनन गरी, मांही माया तो न. नाटी पार मांग, नागो गा मग । ५ वाल्या पंग नान, कई गौमांक मार चाव .... . ॥ दा पाणी ने ॥ २ | यो मा मर ॥ " . मना, भागरी पन॥२०॥ मानो गर पोल परी॥ * ॥२मार रिंग मन. मग ॥ ॥ गगन गिनेस. गम नानी की है | से मंद्र मगरमना सनरी . नि बिरनी एका पदमारी R• ॥ ६ ॥ मामी प्रमरपन, गरगने 18 ॥ पदभामा सपल, लिम 20 परदेसी मरने दम पारा॥ ए. ॥ ना नाग, शागर जरा || ह. ॥ - ॥र पर गोलाकरे !! M. कांस मान की नरे । ॥ परासी, रियामा ! रापोटी पका, पोरी मेन्टमा | w• ॥ ८ ॥ मरमतो. मारी की ।। R. ॥ गिदिमा मेर नांगरारी } e. ॥ मारीशीर ने कोन साग. भान रोगप्पा, बदन रिला • ॥ो गा. मोर्गनगे ॥ Roar रिस्ट : । trimirmir. सनी गि. मिली 3. किस.. र 18 मार्ग. Rm म. निमिania 120 मिनी .. को किस टी १ . - स स, ग . . . . .नं. rat . • KE RAri ने मनमें पापोयो, हारेवल सुणि 'गम वाण ॥ ? ॥ दिनकर खा धक ज्यू, रजनापति ज्यं चोर ॥ जलधर देखि जवास त्यं बले सचिव ते जार ॥ ५ ॥ पगझं कर पढ्यो एकन्नो जोर न चाले कोय | जेहना दीहा पायरा, तस और अंधन होय ॥ ६ ॥ कर क्रम धोइ वांसे ययो, हपिलने हे दृष्ट ।। छलताके छलवा भणी, कालसेन उच्चिष्ट ॥ ७ ॥ एक दिन वेगे मालीये, मदनवेग ते राय ॥ कालसेन विहां आवियो. पेठो प्रगमी पाय ॥ ८ ॥ कान लाग्यो चाडियो, कालसेन कीराड ॥ हरिबलने दुःख दाखवा, नृपने पाल राड ॥ ९ ॥ । हाल ३ जी ॥ इण सरोवरायांरी पाल, आंग दोय रा ला।।रलना ॥ ए देशी ॥ हिवे हरिवननां वयण, नृप करे ॥ ३० ॥ ग्यानी त्यागी निकलक के, शर सुभट सेर ॥ द. ॥ जो परधान त एकलो, का गह गया ॥ द | माहरु काम मुबारया, की भस्म थयो ॥ २० ॥ १ ॥ का दयों आपणे दो जण, मिनीने खोवती ।। ल. पेगी, सम काही हनी ॥ ल. ॥ पण ते साहार गडी.लंका टेइने । ल• ॥ आव्यो भापणे मंदिर, हंका टेडने ॥ ल० ॥ २ ॥ ना में जाण्यो ए पूरण, भाग्य की धगोल ॥ जामाता यह आव्यो ए. का महतगो ॥ ल. ॥ लाग्यो तर नाणी सहगनी, नृपश मत करी ॥ ॥का पनिनी माहरी, दो राकी सरभरी ॥ ल. ॥ ३ ॥ वृद्धि भक परपंच ए, में दोगे सही ॥ ॥ मदनवेगें मात्र आगल, वान ए मनि कही ॥ ८ ॥ का सेनने पगया, मांडी माया लगे । ल० ॥ प्रगटी झार ते मांसी, जागी अंगा अगें ॥ २० ॥ ! ४ ॥ बोल्यो मंत्री ताम, कहे रोग यी ल०॥ भलि तुम अकल ने नरपाने. हरिखना करी ॥ . ॥ शं नुमें नागा बागी. वो पाणारे , पानी कग २०॥ मानो सपनु घोन ते दूध करी मग । 1. ॥ ५ ॥ मारें हिंग असंवंधने, अगघडीयां वर्ग ! १२० । गगनुं न मोहे, गम तेरनी की ल. || ये चंद्र अगवमनी रानडी ॥ ॥ तिम हरिवलनी एमा स्नो नृप नुम वाली ॥ . ॥ ६ ॥ नाणी मभ वयण, न्विाग करो में ल. ॥ ए दमानां सपल, चरित्र लह से 00. ॥ जे परदेसी लोक ते, दीसे एहा ॥ B- ॥ ना चेटक नागे, वादीगर जावा ॥ ल. ॥ ७ ॥ कूड कपट सरपंच, कर सला रेलवे । ल. । करिश्त नात करी, कडी पैकडी मलवे ॥ ल• ॥ परगामें परदेशी, फिर यह छन्दसा ॥ • मोहा मोडी करे पणा, घोरी वेलमा , ल ॥८॥ सी परजवानो, करें महोटी करी ॥ ल. ॥टिंग डिंग चला वे ने, लोक नाग सरी ॥ ० ॥ साची जी करे ने, मुन लगारी ! ल । धान बोलाव्यु चाटे ने, बदन विगाडीय ल० ॥ ९ ॥ ते मारे में सामि. सदी करी पानगो । 1. करीम मिरदार ५, हरिपल मागनी ॥ स ।। in का कहां लंका पनिनी पत्रिका । ल. ॥ अभिलनी एबात, पडी एग निका॥ ल. ॥ १.॥नो कारक पूर्ण पणे करी पानडी ) R ॥ परण्यो नारी र उत्तम, मध्यम नाही ॥ ल. ॥ नाम लिये निज आप, पारना अगवडी ।। १२०॥ किह लंकापनिनी, पुत्री रली पडी ॥ ल• ॥ ॥ ११ ॥ शी नियाने सोट. परी हती पुरपनी ॥ ना ॥ लेकानिय राय, सगाइए पुरुएना ! नाग विटेद, गपा जर महिदले ॥ ल' ॥ आन्य का गौडाने, रामर ने अपदिन ॥ ॥१२ । ए जाणा भली. हा नुने पार || a निम इग्विलनी पालो ॥

मर मनमें पापीयो, दरियल मुणि जस वाग || ? !! दिनकर खा धक ज्यू, रजनीपनि ज्यं चोर ॥ जलधर देखि जवास [. त्यं यल सचिव ते जार ॥ ५ ॥ पग कर पड्यो एकहो, जोर न चाले कोर ॥ जेहना दीडा पावरा, तस और अवन होप || ६ ॥ कर क्रम धोइ बांस थयो, हविलने ते दृष्ट । छलताके छलवा भणी, कालसेन उच्चिष्ट ॥ ७ ॥ एक दिन वेठो मालीये, मदनग ते राय ॥ कालसेन तिहां आवियो. वेठो प्रगमी पाय ॥ ८ ॥ काने लाग्यो चाडियो, कालसेन कीरा ॥ हरिवलने दुःख दाखवा, नृपने घाल राड ॥९॥ ॥ हाल ३ जी ॥ इण सरोवरायांरी पाल, आंबा दोय रा. ला ।। ललना || ए देशी ॥ हिवे हरिवना वयण, पखाण ते नृप करे ॥ ल. ॥ ग्वामी त्यागी निकलंक. शरमुभर ॥ छ० ॥ जो परधान त एकलो, "का गह गयो ॥ २० । माहरं कान सुधारया, की भस्म थयो || ल० ॥ १ ॥ का ढची आपणे दो जण, मिनीने सोवती ।। ल. वेगली, खस काही हती ॥ ल. ल. ॥ आव्या भापणे मंदिर, हका देइने । ल० ॥ २ ॥ ता में जाण्यो ए पूरण, भाग्य व घगो ॥ न० ॥ जामाता था आन्पो ए, का मदतगो ॥ ७० ॥ लव्यो सा नाणी सहगनी, नृपशं मन करी ॥ ल. ॥का पनिनी माहरी दो राका सरभरी ॥ ल. ॥ ३ ॥ वृद्धि अक परपंच ए, दोगे सही ॥ ॥ मदनवेगें मात्र आगल, यात ए मरि कही ॥ ल. ॥ कारमेनन पगयी, मांडी माया लगे । ल. ॥ प्रगटी झार ते मांभी, जागी अंगा अगें ।। ॥ ४ ॥ बोन्पो मंत्री ताम, कोरी यी ल०॥ भलि नुम अकल ने नम्पति. हग्विनी करी ॥ ल. ॥ शं नमें जा ॥ दोहे पाणी ॥ पण ते साहा गडी या टेइने ॥ में मामी.

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॥ ॥ २० ॥ रागे पर हास्प फाइल, नी करी मंत्री । ॥ स ॥ सनग्यो मनमा हरिवल, सांपली गंत्री ॥ल.॥ की कानि मंत्री, चकमक झरियो ॥ ल. ॥निपण तणो लिश काटी. नृपने भभेरियो ॥ ल. ॥ २१ ॥ एरेचा दुष्ट क इदिने, कां जगे अवतरण ॥ ल. ॥ पमने मंदिर का न. ग पाने गाल भरण ॥ ल. ॥ परनिंदा करता फिरे. दुष्ट मुसा पनी ॥ ल• ॥ सारे भोसर निंदकी. काक ज्यं चायनी ॥ ल. ॥ २२ ।। तर जप किया कष्ट, करे जे निंदकी ॥ ल• ॥ ने मरि जाप नगर, निगाः ए की ॥ ल. ॥ भार कर्मी जी रसाए निनवरें ॥ ॥ इह मर परभर सपने न, देने मला परें । स० ॥ २९ ॥ पारकां न ज्वे ते. निंदकी यो रा ॥ ल. ॥ देवसीश ने उपमें. ए फल रोक्हां ॥३॥ मरत पड़ने जीव, करे निंदा पारकी ॥ ल. ॥ ने जीवने किम देनी नपी. चहा वारकी ॥ ल. ॥ २१ ॥ म हरिपल म नमनही. मुगस रानी रयो । लः ॥ स मा दार ने भाग ग. पाने जे लयो ॥ ल. ॥ गुरपी मरे जे नीर ते, रिपी न पाग ॥ ल. ॥ उखाणो लोक, करे ते संभारि ॥ ल. ॥२॥ इस पारी मनमोहिते, हरिबल योडीयो ॥ ल. ॥ नाम लंकाभानन, वचन ए सालीयो । न. ॥ नगरि समेत रे परखद. लइ पवारजी ॥ नः ॥ करता टोल ते सगति. मार भवारनो ॥६॥ इम की नृपने मममी, . दिन उटीपो ॥ न. ॥ पन बि माने मंत्रीने, नदीना गीयो ॥ ३ ॥ पीना उसासनी दार ए. पीली पूर्ण पर 13. ॥ लगिको पति मांभगे, जे भागे भो ॥२०॥२७॥ ॥डा || हि रिसर परे आपियो, ती नारी होय ।। सनी दोगे नाहने, मग प्रम मोप ॥ १ ॥ नि भर पेठ . . रंगमें, दंपति करे कल्लोल || प्रेप सगेवर नीता, निम्मे टकोल ॥ २ ॥ हरिवल कहे परनारीने, सांभर मिया मुद्रा ।। ॥का गाडी लेहणं. ते नृप मागे लांच ॥ ३ ॥ पंच मंत्रीये. माग्यं भोजन सार ॥ तव हुं नृपने नोतरी, आव्यो भागार ॥ ४ ॥ तब पटनारी कंतने, कह पिय सांमउम एक बार नृप तेडतां, लान वी नहीं तुझ ॥ ५ ॥ नही यी देव, सरड पूजारो जैम ॥ लोक उखागो जे कहे... छो तुमें तेम ॥ ६ ॥ बाल शी शक नुम धाइयो. मीतम चार ॥ ते हु इस जाणं अई, शान गइ तुम सार ॥ 11: पेसी कूपमें, दीपक लेइ पडो हच्च ॥ नर मंत्री मीई चवे. ते में मानो सच्च ॥ ८ ॥ मीठा बोलां मानवी, केम पतीनां "नारकंट मधुरु लवे, साप सपुच्छो साय ॥ ९ ॥ तेहनी ए जातडी, नृप मंत्री दो ठ ॥ चूक करी तुमने प्रभु, सी दो भंड ॥ १० ॥ वे माटे स्वामी तुमें, म करो कोइ . सास ॥ एतां कहि न धारियें, जो बंछो तन आश ॥ ११ भैप भुजंगम मामिनी, महेन ने भार ॥ ए पांचन जे घी: से नर पामरे कार ॥ १२ ॥ यम वेश्या दासी नदी, भारी काल || ए साते नही आपणां, प्रीतम निज संभार । ॥१३॥ नव श्रीनम बलतुं कहे, दरिकी निमुह ॥ जो दहा पावरा, शं नृप करशे नेह ॥ ११ ॥ ॥ दार ४ थी ॥ प्रीतममेंनी वानवे ।। ए देशी ॥ बार एडवो जरा ते धीवरें, वर्मतसिगने दीध ॥ मारागल भोजननी जे जोइ, मेकी सामग्री मुमिन्द ।। मोरा लार ॥१॥ मार निपाई रमानी. या कही मर्यपाक । मो० ॥ एक: काल रेटमां, टनर तो वही हे लोक ॥ मा० ॥ २॥ द्वारे भार मागर देव पमापयां, नोतरयां नगरी लोग || मो. ॥

-द्वार नदिने नोनलं, भरिलोको रोग। दो ॥ मा.
ग: ॥ मागसरि पर पिद दिले. पंचरंगी रनार ॥
॥ बरनाग किया. पी सनात पी. ॥
सा० ॥ ४ ॥ नर नारीनी पांमां, मांस मार
मपाल पर ।। रतन को सस्नो पारपार
मार ॥ मो. ॥ सा• ॥ ५. स. ॥मा पुपारी
गे, नि मापन ॥ मो. ॥ गार दरगन
र र उनकास ॥ पो. मा. ॥ .. ri• ॥
बरसेगन मरे परिसरोकार ॥ ॥ र राजा
नाना, पान सिर ! मो० ॥ सा ॥ . !
uri ॥ न संगसंगानो, मिरा राना ।
की. मंग बरसाने, मगर फेरामा । मे. मा.
Teri || मने तीनोमना, मार्ग परेश नाति ।।
• || मरी जापना, नी दांदिता नतिरो. ॥
का... ॥ परमानीस मातम्या
२. || ना के.ग. नरकार सरा
को ६ मा॥ १. ॥ .. निगालो मी.
jार ॥ भो ॥ गोमती, घोसना
मो. ॥का ११ ॥ ॥ नाश
eat.
गामि ॥ ॥ भारत ने मारा
..तर..ri..
वासना मरमिर F. भाग
पारेर गार. का. :::
म मे नकारा
गंगासन, एनसे हो...
ht" दारापा, पारनं
.

|| बलि गई । हाल 'मी !! था मा पनग्गा पाग, माना गंगला । मारुनी ॥ प देगी । वि वोल्यो मत्रा नाम काटन काल मन ने || मावजी ।। तुम मांग को स्वामी नाय. नाना पाल ने ॥ माडेवनी ॥ पभ शुतुन पहने नडी. आयो गुण कगे || मा 11 निज यग्नुं मपल मोपी आपाप शु ॥ सा. ॥ एतो गांभन निम, गग्र ग्गा दयो । मा॥ ति महरिबलने म मान, देड ना लयको ।। मा. भ पामें प्रालि, मेलापानी कग ॥ मा. ॥ एनो पाा ध ने व्याल, बगे जनहगे । मा. ॥ २ ॥ नुमें इगि परें रा जन माची. उरवाणो मेलव्या ॥ सा ॥ परदेशी अजाण वे दृशन, भानने हलव्यो ॥ सा० ॥ ए तो वेग नुमची प्रगयो रुमिग्न गोपग | सा॥ तुन हृदय नारीनी माल ते, या मी होगा। सा. ॥ ॥ ए ना ते मारे प्रमु, उगता मेरी स्टाये ॥ मा० ॥ ए नों काल कंटकने छेदना, धर्म न वदीय ॥ पनो ग नुमें सामी, मोहे लगाहो एहन ॥ सा. "ए तो कपटीमा गिरदार, में दाग तेहन ॥ सा. ॥ ४ ॥ पनो कपटें करीने काढी, लाग्यो नारी दी ॥ सा. ॥ बली साव्या भवट ग्वनानो, पुनी सारी दो ॥ सा० ॥ एता जा गनो स्वामी महोती है, जगनो चौर ने ॥ सा. ॥ नुम आगे मारे रिंग, अमवर नार ने || मा॥ ५ ॥ ए तो प्रभ तुर्ने मानी सानी, जाणि मी कदा ॥ सा• ॥ पहुं नाशंदणे कल्पित, बात कंगमही मा० ॥ ए नो एदनो शा शिवा म. करो में गनी || मा. ॥ एनो एहना मायामां पाणी. नपागे ने मानवी || मा० ॥ ६॥ ए तो नी लका श्रीलंका, गहना नायनी || सा• || पता गमुट उदघी जार. ने मुगल सा .मा.

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मनी 1 सा. ॥ ए ना जो जलमें गपो हात तो, पाज नारतो
॥ सा ॥ पना माय मगरमच्छ, मुख गिली भारती ॥ सा.
॥ ७ ॥ तव आपणं नायनी महोई, जोर ते फार ॥ सा० ॥
एनी आप चितन्यं पात, सपलं भावतुं ॥ सा० ॥ पण
पनी नाटक पटक, करीने आविया ॥ सा. ॥ ए तो नारीने
मंदसस्प. मडग दो लारियो ॥ मा० ॥ ८ ॥ निम भान
मगाग्री पाइने, गेटी ले गयो ॥ सा. ॥ वली काकनानो
न्याप, उत्खाना निम थयो । सा ॥ निम भाव्या जागी
दिमा, लंका गाना || सा० ॥ तुप आगल फूल्यो ए रद्ध,
पोलो ररया ॥ सा० ॥ ९ ॥ ए वो एहना नरने मूकीये,
मापी यमपरे ॥ सा• ॥ ए नो कार्टीप आभट छट ने, दूरे
ममी परें ॥ सा० ॥ ए ने दिये तुमें मामी मारी, पुढे चा.
मामा ।। सा• ॥ ५ नो प्रा नमें गीत दो नारी, साय पाल
भो ॥ मा० ॥ .. || ना नरपनि रे सांभल, मंत्री मा
री मा॥ दिवे भान पं रुदि भाग न, मादरी।
॥ सा. ॥ एना जेटली पात करीने, मंत्री ने गरी ।।
॥ मा. ॥ ए नो चोरूम बेटी मादरे, मनई मार्ग ॥ मा. ।।
१५॥ पण नेवि मंत्री यात. पटोको. अभिनवी ॥ मा.
। एनो पार जायी कार्य, मोटो समपरी ।। मा. ! ए नो
रिचरनी शल्प से, न कापगं । सा• ॥ ए ना भारणे
मंदिर दो थारे ने नारी ॥ मा• ॥ १२ ॥ तर मनी
पाल्पो नपने, पगमार ने ॥ माः ॥ एवाननं वं
यह ए ने ॥ मा• || तुम बाद पना मामी. एकी
दिन हो ॥ ना. ॥ ८ नो ने पनी नदि माझे, काम ने
ससे मार ॥ ॥ लिने पाटे ममा. माय वमी
।। नमें पर नोनग्ना पिन,' को
रामा,

॥ दाल मी || घारे माथे पचरंगी पाग, सोनारी'
। मागनी ॥ ए देशी ॥ हिये बोल्यो मंत्री ताम, कुटिल
मन है || सावनी || तु सांभलो स्वामी नाथ, मनाना, पारा
॥ मावनी ॥ प्रभु गु में पहने तेटी, आयो गणक
॥ गा० ॥ निग परनुं सपलं सोपी आपाशे वरो ।
॥ ॥ एतो गभने निम, गुरव रगो देपरी ॥ सा.
महीबाटने प्रभु मान, देश न लेयो ॥ सा ॥ पालक
म पामें नालि, मेटाव्यानी करो ॥ सा ॥ एता पार
ने ध्याल, उग जनहरी ॥ सा ॥ २ ॥ सुहाग पो ।
जन गायो, खाणो मेलव्यो ॥ सा ॥ परदेशी भाषा
पिन, भानने रेलयो । सा० ॥ ए तो वी तुमची पात्रो
हरिग्ने गोपग || गा. || न हदसे नारीनी शासन..
हो दागा ! मा.
॥ • || ए तो में मारे मन, ऊगता के
दहा ॥ मा० ॥ प ती काल कटकने दाधर्म न वेद
॥ मा• ॥ पनो में मामी, मोठगाडो पाना
॥ पनी काटीमा गिरदार, में दाग नेहने || माः ॥
पनो का ऋगन काही, लाग्यो नारी दो ॥ सा• ॥
साध्या भमट पनानी, ती मारी दो ॥ मा. ॥ एनी
नमो मापी पोश, मगनी गारने ॥ मा. ॥ तुम
मोरिंग, अपर जोर || गा.॥ ॥ तो
मालां मानी, माणि मी मा. मात्र
वरित, पात कंगं पणी ॥ मा. ॥ एनो परना ire
ना, गं में गरी ॥ मा. ॥ एता पाना पागना
नगेरेमनी मानी कानालंका, गाल
मारता !! मा. ॥पना गरी नाराज।

जिम श्वान धनी ।। सा॥ एना जो जलमें गया होत तो, पाज नारतो ॥ सा० ॥ र ती महोय मगरमच्छ, मुख गिली अवतो ॥ सा. 11 0 1 तब आपनायनो महोई, जोर ते फार ।। सा० ॥ ए तो आप चिनन्यं यावा, सपलं मारतुं ॥ मा० ॥ पण एनो नाटक चेटक, करीने आवियो ॥ सा० ॥ ए तो नारीने चंद्रहास्य, बडग दो लारियो । सा० ॥ ८ अनाग्या पाइने, गेग ले गयो । सा० ॥ वली काकनानीनो न्पाय, उखागो निम ययो | सा. ॥ तिम आव्या जाणजोह तिल, लंका गह नइ ।। सा० ॥ तुम आगल फूल्यो ए रद्ध, पोलो टोडर यह ॥ मा० ॥ ९ ॥ ए वो एहवा नरने स्काये, स्वामी समयरे ॥ सा ॥ ए नो काहीये आमह डेट ते, दूरे भली परें ॥ सा० ॥ एगे दिवे तुमें मामी माहरी, धुढे चा. नासो । सा• ॥ ए तो प्रभु तुम सीन दो नारी. साये माल भो । मा. ॥ १० ॥ तर नरपनि जपे सांभल, मंत्री मा ॥ सा. ॥ हिवे आज पउँ कदि आण न. लो नाहरी। ए तो जेटली वात करीन, मंत्री सरी ।। । सा० ॥ एतो चौकस बेटी माहरे, मनडे माचरी ॥ सा० ॥ ॥ ११ ॥ पण ने हिव मंत्री वात, घडो कोद अभिनवी ॥ सा. ॥ एनो आपण जेही कार्य, सीसे सगणवी ॥ सा० ॥ ए तो हरिवलना जे चल्य छे, ते काहो पगे ॥ सा. ॥ ए ना आपणे मंदिर दो आने ते करो ॥ सा. ॥ १२ ॥ तर मंनी बोल्यो नृपने, मगमी दर ने ॥ सा ॥ एह बातनं बीई छ- है. यह पद ते ॥ सा० ॥ तम द्धि पताई स्वामी, एरवी दिल ठरे ॥ मा. ॥ एताजे वलयी नवि साझे, काम ते क न करे !! सा. ॥ ३ ॥ हिवे ते माटे नुमें सभा, मध्ये वैसी ने । मा. .।। नुमं यम नौनता हरवल, सोहिणि सश,

॥ दाल मी ॥ थारे माथे पचरगी पाग, सोनारा..
। मारुनी ॥ ए देशी ॥ हि वोल्यो मंत्री ताम, कुटिल
सन ते ॥ सावजी || तु सांभलो स्वामी नाय, मनाना
में ॥ साहेबनी ॥ प्रभु गु नुमें एहने तेही, आयो गुण को
॥ मा० ॥ निज घरनुं सपलं सोपी आपाधवरो
॥ १ ॥ एतो गभने निम, गुरव रगों देयो । सा..
महाबलने प्रभु मान, देइ जश लेययो । सा ॥ बोली
भ पामें शालि, मेलान्यानी करो ॥ सा ॥ ए तो पारा
ने व्याल, वले जनहरी ॥ मा० ॥ २ ॥ तुम इणि पो ।
मन माचो, ग्याणी मैलथ्यो । सा ॥ परदेशी अनाज
दुर्मन, भानने हेलथ्यो ॥ सा० ॥ ए तो वेग तुमचा अग
हविग्ने गोषग || साः || तुन हृदये नारीनी माल ने, .
को टोला ! साः ॥ ॥ तो त मारे प्रभु, उगतों में
प्रदायें ॥ मा० ॥ ए तो काल कंटकने छेदता, धर्म न व
॥ मा. ॥ पनामा नुमें मामी, मोहे लगाडी एन ॥सा
॥पनी कपटीमा निग्दार, मेंदांग तेहने । सा॥..
प.ना कपटे कगने काटी. लायो नारी दो ॥ मा० ॥
गयो अवट मनानी, शूनी मारी दो ॥ सा० ॥ !
तो मामी मो, जगनो चोर ने ॥ सा• ॥ तुमा
मोरिंग, अमवर जोर ने ॥ सा ॥ ५ ॥ एता !
पानी सानी, माणि गरी कही ॥ मा. ॥ पहुंभार
नियत, पार कंग मही ॥ सा || तो पहनी थी in
7. गे नु गनरी ।। मा० ॥ पनी पहना सागनां
र पागले मनगी मा॥६॥पनी भी लंका नीलंका,
नापनी || मा., पनी म उही ना.
4

भनी । मा.॥ एना नो जलमें गया होत तो, पाजे नारतो
|| मा०॥ एता महोटा मगरमच्छ, मुसे गिली मारना ।सा
10 ॥ दर आपणं नायनी महोई. जोर ते फार ॥ सा० ॥
पनो आप चिनव्यं थात, मप- भारतुं । मा० ॥ पण
पनो नाटक चैटक, करीने आरियो | सा. ॥ ए तो नारीने
चंद्रास्य, वडग दो सारियो । सा. ॥ ८ ॥ निम भान
जमाया पाइने, गेटो ले गयो । सा. ॥ वली काकतानो
पाप, उपागो निम पयो । मा० ॥ निन आयो लापनो
रिकत, का गाना ॥ मा० ॥ नुम भागल फुल्यो ए रद,
पोलो रोटर या ॥ सा० ॥ ९ ॥ ए वो एहवा नरने गाये,
सामी पनपरे ॥ मा० ॥ ए नो काही आम उट नं.
भक्षी परें ॥ मा० ॥ एनोदि तुम सामी मारी, बुढे चा-
लामो ॥ सा• ॥ ८ नो प्रभु नमें चीन दो नारी, साचे पाल
भो ॥ सा. ॥ .. ॥ तर नरपनि जो मांभल, मंत्री मा
दी॥ मा. वि भाजप कार भाग न. दामादगे।
॥ मा. ॥ पना जेटली पान करीन. मंत्री ने मर्ग ।।
॥ मा. ॥ ए तो चौकमी मारी, मनटे मारी मा.॥
॥ ११ ॥ पण ने हिरे मंत्री पान. पहरो कोट अभिनवी ॥ मा.
॥ ५ मा आरोही कार्य, मोशे समानती मा. " ए दो
परनी नेमल्यो, ने कासो पगे ॥ मा. ॥ एनी आरणे
मंदिर सा, दो भार ने फगे ॥ मा. ॥ १२ ॥ नामी
ोयो रुपने, पार ले !! माः ॥ ९:राननं पर
या ते ॥ मा. ॥ दम बाद पताई मानी l
दिल ठरे || ना.॥ पता ने नयी नदि मोई, रामक
करे।' मा. ॥ ॥ लिने पाटे जुममा कोरेमी
। न पर नलग्नाहोदन, पिने

॥ दाल मी ॥ धारे माथे पचरंगी पाग, सोनारों
॥ पारुनी ॥ ए देशी | हि वोल्यो मंत्री ताम, कुटिन
सन ते ॥ सावजी ॥ नुमें सांभलो स्वामी नाय, प्रजाना,
ते ॥ साहेवनी ॥ प्रभु शु तुमें पहने तेडी, आयो :.
॥ सा० ॥ निज परतुं सपलं सोंपी आपोपुं शं वरो
॥ १ ॥ एतो गईभने निम, मुरब रगो देययो ॥ सा• !
मं हरिबलने प्रभु मान, देइ जश लेयवौ ॥ सा० ॥ वलि ।
भ पासें शालि, मेलान्यानी करो ॥ सा ॥ ए तो पाइ !
ने व्याल, उमेरो जनहरो ॥ सा ॥ २ ॥ में इणि पर्ने ।
मन साचो, उखाणो मेलव्यो ॥ सा ॥ परदेशी अजान
दुर्शन, चानने हेलथ्यो ॥ सा० ॥ ए तो वेरी नुमो प्रगत
रुरिग्ने शोपा || सा० ॥ तुन हदये नारीनी माल ते,
ली टोपा ! सा० ॥ || ए तोतं मारे प्रभु, जगतो
संदीप ॥ सा० ॥ ए तो काल कंटकने छेदता, धर्म न वदों
॥ सा. ॥ ए नाश तुमें स्वामी, मोहे लगाडो पहंन ॥ मा
॥पना कपटीमां गिरदार, मेंदीग तेहने ॥ सा० ॥
पता कपट करीने काही, लाव्यो नारी दो ॥ सा० ॥
माग्यो भएट खनानी, शनी सारी दो ॥ सा० ॥ एनो,
पनो म्यामी महोटी छ, जगनो चोर ते ॥ सा || तुम in
मारे रिंग, अमदा जोर ते || सा॥५॥ एता प्रभु
मानो साची, माणि मी कही ॥ सा• ॥ पण हुं जाणं इन
कान्यत, वात कगं मही ॥ सा० ॥ ए तो एहना था विजन
म. कग में गनरी ।। मा० ॥ प तो एहना बारामां
न पागे ने मानी ।। मा० ॥६॥ ए तो भी लंका शीलंका,
नापनी ॥ मा. ॥ एनो समुद्र उली जात्र,
.
.

पनी ।। गा• ॥ ५ ना जी जल गया होत सी, पाछो नारतो
॥ सा ॥ ए नो महोटा मगरमच्छ, मुख गिली जावतो ।। सा.
॥ ॥ व आपणं नायनी महोटं. जोर ते फार ॥ सा० ॥
एनो आप चिनव्यं यात, मपलं मातुं ॥ सा० ॥ पण
प. नो नाटक चेटक, करीने आविया ॥ सा० ॥ ए तो नारीने
चंद्रहास्य, खडग दो लाविया ॥ सा ॥ ८ ॥ निम श्वान
मजाग्यां पाउने, गेटी ले गयो ॥ सा० ॥ वली कामनासीनो
न्याय, उखागो निम पयो । सा॥ तिम आव्या जाणतो
चिल, लंका गा जइ ॥ मा० ॥ तुम आगल फुल्यो ए रद्ध,
पोलो दोडर यह ॥ सा० ॥ ९ ॥ ए तो पहवा नरने मूकोये,
स्वामी यमघरे || सा॥ ए तो काहीये आभड छेट ने, दूर
मली परें । सा० ॥ एनो दिवे तुमें स्वामी माहरी, पुढे चा.
लामो ।। सा• ॥ नो प्रभु तुमें शीन दो नारी, सायें माल
सो | मा० ॥ १० ॥ सब नरपनि जपे सांभल, मंत्री मा
हरी॥ सा ॥ हिवे आज पर्छ कदि आण न, लोई नारी ।।
॥ मा• ॥ एता जेटली पान कराने, मंत्री ते परी ॥
। सा० ॥ ए तो चौकस देवी माद, मनहे सहरी ॥ मा० ॥
।। ११ ॥ पण ते दिवे मंत्री वात, यहो कोर अभिनवरी ॥ सा.
॥ एता आप जहयी कार्य, मी सगपती || सा० ॥ ए तो
रिचरनो में शल्प छ, न काही पगे ॥ सा. ॥ ए ना आपणे
मंदिर रामा, दो आरे ते करी ॥ सा ॥ १२ ॥ सर मंत्री
पोल्यो नृपने. भगा इष्ट ने ॥ साः ॥ एह वातन बीई छ
2. हुं पर पुष्ट ते मा० ॥ तुम बदि बनावं स्वामी, एहत्री
दिन्ट टरे ॥ ना• ॥ एतो ने बलयी नवि सोय, काम ते क
न करे । सा. ॥ ॥ हिव ने पाटे में सभा, मध्ये प्रेसी
।। नमें या नोनरता हरिवन,को रिहगि

। दाल ५ मी || थारे माथे पचरंगी पाग, सोनारों
। मारुनी ॥ ए देशी ॥ हिवे योल्यो मंत्री ताम, कटिन
रोन ते ॥ सादेवजी ॥ तु सांभलो स्वामी नाय, अनाना,
में ॥ सावनी ॥ प्रभु शु तुमें एडने तेडी, आयो गज कले
॥ मा० ॥ निज परतुं सपा सोपी आपापु बरो
॥ १ ॥ एतो गभने निम, गुरव रगों देयत्रो ॥ सा..
महाबलने स मान, देव जश लेयो ॥ सा ॥ बलि
म पामें शालि, भेडाव्यानी करी ॥ सा. ॥ ए तो पारा
ने प्याल, उग जनहरो ॥ सा. ॥ २ ॥ में शणि परें ।
नन गायो, उखाणो मेलम्यो ॥ सा ॥ परदेशी प्रजाको
दृग्नन, भानने हेलव्यो । सा० ॥ ए तो वे तुमचा पगा
हरिने गोलग || मा० ॥ न हृदय नारीनी माल ते..
मी टोला । सा. ॥ ॥ एतो त माटे प्रभु, उगता है।
एटांग ॥ मा० ॥ एनों काल कंटकने छेदना, धर्म न पहने
॥ मा• ॥ पनो नृमें मापी, मालगाडी पान ॥ मर
॥पना कपटीमां गिरदार, में दोगे तेहन ॥ सा.
पनो कपटे करीने काही, साप्यो नारी दो ॥ सा ॥d
नाम्या प्रगट ग्वनानी, ती मारी दो ॥ सा. ॥ एतो!
मनोमानी गाने || मा. || तुप का
मारे रिंग, अपनर र ॥ मा• ॥ ५
मानी मापी, माणि मी कहां ।। माः ॥ मई ना
चित, पात कगं मही ॥ मा. ॥ ५ नो एटना शो in
म. गं नृपं गनी ॥ मा. ॥ नो एडना पागना
नपांगरे मन! | मा॥६॥ नी नीलंका नीलंका,
नापती ॥ मा. ॥ तो गट उलया जार. मात्र
एमा

(६७)
.
प.
पनी || सा० ॥ पना जो जलमें गया होत तो, पाज नारतो
। सा० ए ना मोठा मगरमच्छ, मुरे मिली जारती || सा.
॥७॥ तद आपणं नायजी महोई, जोर ते फार ॥ सा० ॥
एनो आर चितन्यं यात, सरलु मावतुं ॥ सा० ॥ पण
को नाटक चटक, करीने आवियो । सा० ॥ ए तो नारीने
चंददाम्य, वडग दो लागियो । सा० ॥ ८॥ निम पान
अनाग्यो पाइने, गेटी ले गपो ॥ सा० ॥ बलो काकनाीनो
न्याय, उखागो निम पयो | सा. ॥ तिम आव्या जाणजोह
रिल. लंका गा जइ ॥ सा० ॥ तुम आगल फुल्यो ए रद्ध,
चोलो टोडर थड़ | सा० ॥ ९ ॥ ए तो एहवा नरने मूकोये,
स्वामी यमयरे ।। सा• ॥ ए तो काहीय आभड र ने, दूर
मली परें । सा० ॥ ए नेटिव तुम्बामी माहरी, बुद्ध चा-
लामो || सा• ॥ ए तो प्रभु तुमें शीन दो नारी, साथै माल
मो ॥ सा ॥ १० ॥ तर नरपति जपे सांभल, मंत्री मा
हरी ॥ सा• ॥ हिवे आज प कदि आण न, तो साहरी ।।
१ मा॥ ए तो जेटली वात करीतें, मंत्री ते सरी ।
: ॥सा. ॥ ए तो चौकम बेटी मागे, मनडे सहचरी ॥ सा० ॥
॥११॥ पण ते दिव मंत्री पात. पडो कोद अभिनवी ॥ सा.
। ए ना थापj जदयी कार्य, सीने सुगपती || सा० ॥ ए तो
- हरिवलना जमल्य छ, ने काटो परी ॥ सा० ॥ ए तो आपणे
। मंदिर रारा, दो आरे ते करा ॥ सा• ॥ १२ ॥ तत्र मंनी
बोल्या नृपने, गगा दुष्ट ते ॥ साः ॥ एह वातनं चीई छ५
है. यइ इष्ट ने ॥ मा. ॥ तुम बुद्धि पतावू स्वामी, एनी
दिल रे ॥ ना. ॥ एताज बलथी नवि साझे, काम ते का
न करे ! सा. ॥ १३ ॥ हि ते माटे तुम सभा, मध्ये वेसी
॥ नमें यम नोनरना हरिवलको चिहगि
.

.
॥ दाल ५ मी । थारे माथे पचरगी पाग, सोनारी
॥ मारुनी ॥ ए. देशी ॥ हि बोल्यों मत्री ताम, फुटिन
सेन ते || सावनी ॥ तुमें सांभको स्वामी नाय, अनाना,
ते ॥ साहेवनी ॥ प्रभु गु तुमें एहने तेही, आयो गुण करो
॥ मा० || निन घरनुं सबलं सॉपी आपा, वरो , सा
॥ १ ॥ एतो गईभने निम, गुरव रगो देयको ॥ सा.
महरिबलने म मान, देइ नश लेयो ॥ सा ॥ बलि
म पामें शालि, मेलाव्यानी करो ॥ सा. || ए तो पारा
ने व्याल. उग जनहरी | सा० ॥ २ ॥ में इगि परें ।
मन माची, उखाणो मेलव्यो ॥ सा ॥ परदेशी प्रमाण
दुर्शन, भानने हेलथ्यो ॥ सा० ॥ ए तो वेग तुमचो गये
रविग्ने गोषणा ॥ सा० ॥ न हदय नार्गनी पाल ने
लो दोषग : सा. ॥ ॥ ए तो त माटे प्रभु, उगना ने
पदायें ॥ मा० ॥ एनों काल कंटकने छेदतां, धर्म न वेदी
॥ मा. ॥ ए नोगु नुमें सामी, मोहे लगातो पान ॥ सा'
॥ ए नो कपटीमा गिग्दार, में दोगे तेहन ॥ सा...!
एनो कपटे कगन काही, लाप्यो नारी दो ॥ सा० ॥ गई
सान्या प्रपट बनानी, नी माग दो ॥ मा० ॥ एनी
णमो मापी मनोग, जगनी मोर ॥ सा || तुम आने
मोहिंग, अमर नारत ॥ सा || एलोप
पानी माची, माणि मी मापना
दन्तित, यात कर्ग मही ॥ मा० ॥ ए तो पहनी शा imy,
ग. कंग में गनी ॥ मा० ॥ तो पाना साग पी.
न पागे ने मानी ! मा॥६॥एना भी लंका गीलंका
नाना ॥ मा. ॥ पनो मयुट उही ना.

(६७)
धनी ॥ सा. ॥ एनी जी जलमें गया हात तो, पानापतो
" मा० ॥ एनी मोटा मगरमच्छ, मुसे गिली जावतो || सा.
It ॥ सर मारणं नायनी महाद्वं. जोर ते फार | सा० ॥
ए ना आपणं चिनन्यं यारत, मपलु मारनुं ॥ मा० ॥ पण
पनी नाटा चेटक, संगने पापियो । सा• ॥ ए तो नारीने
चंद्रदाम्प, बडग दो लाविया ॥ मा० ॥ ८ ॥ निप पान
मनाया पाउने, गरीले गयो | सा. ॥ वली काकनाीनो
न्याप, उन्वागी निम पयो । मा. ॥ निम आन्या जाणमोह
दिवस, लंगा गाजा ॥ सा• ॥ तुम भागल फुल्यो ए रद,
चोलो रोटर या ॥ सा० ॥ ९ ॥ ए तो एहवा नरने कोपे,
मानी पायरे ।। सा० ॥ ए नो का आभट उट ने, हरे
मरी परें ॥ मा० ॥ एगे दिवे तुमें मामी मारी, बुढ़े चा.
नासो | सा. ॥ तो प्रभु नमें शीन दो नारी, माय माल
सो ॥ मा. ॥.. ॥ तर नरपनि नो मामल, मंत्री मा
री॥ मा. ॥ हिवे आज प कदि आप न. सो मारी।।
पनी जेटली पान कर्गत, मंत्री ते बरी ।।
॥ मा. ॥पनो चोकम पेटीमाई, मनपाचरी ॥ मा ।।
११॥ पण नेवि मंत्री वात, पडो सो अभिनी ॥ मा.
"ए मो भाप जडी कार्य, मी मुग्गी ॥ मा. ५ ए मो
पलनी शल्प लेने की पग ॥ मा. ॥ ए को मारने
मंदिर गला, दो मारे ते फगे ॥ मा. ॥ १२ ॥ नर मनी
बोल्यो पने, मनमी दर ने || माः ॥ ९६ राननं कोई गई
या इट ने || मा. ॥ तुम बाद रना मामी. पहली
दिस रे ॥ मा• ॥ एता नेरलपी नारि मोरे, रामक
मन करे। कार ॥ ॥ हिरे ने मारी तु ममा, पये नेमी
॥ न २२ नानदा दिन,' गिगि

.
कन्पितयात कोमड़ी ॥ मा. एता पहनो नाम
म, कंगमगनी ॥ मा. ॥ ना पाना सामागं पाणी,
॥ ढाल ५मी || थारे माये पचरंगी पाग, सोनारी
।। मारुनी ॥ ए देशी || हिये बोल्यो मंत्री ताम, कुटिल
रोन ते ॥ साहेवजी ॥ तुमें सांभली स्वामी नाय, प्रजाना
ते ॥ सावनी ॥ प्रभु शु तु एहने तेडी, आयो 'गुग को
॥ सा० ॥ निज घरनुं सपलं सॉपी आपोपुंश वरो । सा
॥ १ ॥ एसो गईभने जिम, गुरव रगो देयो ॥ सा• A
महरिवलने प्रभ मान, देश लेययो || सा० ॥ वलि
म पासें शालिमेलाव्यानी करो ॥ सा ॥ए तो पार
ने प्याल, उळेगे जनहरो ॥ सा ॥ २ ॥ तुम इगि परे ?
मन साचो, उखाणी मेलव्यो ॥ सा ॥ परदेशी अनाण
दृशन, मानने हेलप्यो । मा० ॥ ए तो वेश तुमची प्रगती
हरिग्न गोषणा | सा० ॥ तुम हृदये नारीनी माल है,
लो दोवा ! मा० ॥ ॥ एतो त माटे प्रभु, ऊगतो में
एटायें ॥ मा० ॥ एनों काल कंटकने छेदता, धर्म नहीं
॥ सा ॥ एनो नुमें मामी, मोहे लगाडो पहन ॥ सा
॥ पनो कपटीमां सिग्दार, में दौठी नेहन ॥ सा•
एनो कपर्ट करीने काटी, लाप्यो नाग दो ॥ सा. ॥ उमा
माया भएट पनानी, शूती सारी दो ॥ सा || ए नोभा
नमो मापी महोदो छ, जगनी मोर ने ॥ सा• ॥ तुप
मार रिंग, अमरनार ते ॥ सा.
मानी माची, आणि मी मी मा. पर मार
न पाग ने मानती || मा॥६॥ एनो श्रीलंका नीलंका गाना
नारनी ॥ मा. ॥ पनो गमुद्र उही ना, ने माल मा
-
आ
॥ ५ ॥ एनो प्रभा

(६७)
,
पनी ||
साना जो जलमें गयो होत तो, पाज नारनो
1 साए तो महोटा मगरमच्छ, मुख गिली जावतो ।। सा०
॥ ७ ॥ तप यापj नायनी पहोर्ट, जोर ते फारवें ॥ सा० ॥
एनो आप नितन्यं यावत, सरलु मावतुं ॥ सा० ॥ पण
पनो नाटक चेटक, करीने आवियो । सा० ॥ ए तो नारीने
चंद्रहास्य. खडग दो लावियो ॥ सा. ॥ ८ ॥ जिम धान
जमाग्यो पाइने, गेटी ले गयो ॥ सा || वली काकनानीनो
न्पाप, उखागो निम भयो । सा. ॥ तिम आव्या जाणजो
सिमका गह जइ ॥ सा० ॥ तुम आगल फुल्यो ए रद्ध,
पोलो टोडर यह ॥ सा० ॥ ९ ॥ ए वो एहना नरने कोये,
सामी पस्यो । सा॥ ए तो काहीये आभड छट ने, दूरे
भली परें । सा० ।। ए गेवि तु सामी माहरी, बुद्धे चा.
नागो सा॥ ए तो प्रभु तुम शीन दो नारी, साये माल
शो ॥ सा ॥ १० ॥ तब नरपति जो मांभल, मंत्री मा
हरी ॥ सा ॥ हिवे आज प कदि आण न, लो नाहरी ।।
। सा• ॥ एनो जेटली वान करीनें, मंत्री ने सरी ।।
॥ सा• ॥ ए तो चोरम गरी मादरे, मनहे महचरी ॥ सा ॥
११ ॥ पण ते हिंदे मंत्री यात, घडो कोर अभिनवी ॥ सा.
॥ ए ती आपण जहथी कार्य, माझे मुगपती || सा० ॥ प तो
हरिचरनो जे गल्य , ने काटो पगे ॥ सा. ॥ एनो आपणे
मंदिर राणा, दो आरे ते करो ॥ सा• ॥ १२ ॥ सब मंग
घोच्या उपने, मनमी दर ने ॥ सा ॥ एह वातनं बीई छई
२. ई यइ इष्ट ते ॥ मा० ॥ तम बाद यताई स्वामी, एहती
दिल उरे ॥ मा. ॥ ए तो जे बलधी नवि साझे, काम ते क
लको ! सा ॥ 3 ॥ हिरे ने मारे नुमें सभा, मध्ये वेसी
ने ॥
।। नमें पम नोनरना हरिवन, तो हिगि

॥ २ ॥ में इगि परें।
या. पारगंदी ॥ मा.। एनोपनो गो ima
म. कोपागनी || मा. ना पना गाना
नपागनी || मा॥६॥६ना भीलकानोरा गाना
॥ दाल ५ मी || थारे माथे पचरंगी पाग, सोनारी
॥ मारुनी ॥ पदेनी ॥ हि योल्यो मंत्री ताम, कुटिल
गेन ते || सावनी ॥ तु सांभलो स्वामी नाप, मनाना,
मे ॥ सावनी ॥ मम शु तु पहने तेडी, आयो गुण को
॥ मा० ॥ निग यरन सघलं सॉपी मापापुंगवरोसा
॥ १ ॥ एनो गईभने जिम, गुरव रगों दयरो ॥ सा•
मधीबाटने म मान, देर न लेयगो ॥ सा ॥ बलिया
भ पा शालि, मेधाग्यानी करो । सा. ॥ ए तो पार
मे च्याल, दो जनारी ॥ सा.
मन मानो, पाणी मैलव्या ॥ मा. ॥ परदेशी माल
देन, पानने हलव्यो । सा० ॥ तो वेग तुमची प्रग
परिग्ने घोषग ॥ गाः ॥ तुम हदय नारीनी माल ते,
मी दासा ॥ सा. ॥ ॥ एताने मारे प्रभु, ऊगतो में
पहा || मा० ॥ पनो काल कंटकने ऐदना, धर्म न व
॥ मा. ॥ पनीर में मामी, मोहे लगाडी पनि ॥
14 नो कपटीमा मिदार, में दौडग तेहने ॥ सा ॥ !
पतो कपटे कगन कादरी, लाल्यो नारी दो ॥ मा० ॥ जी
गागा भरार मनाना, पूनी माग दो ॥ मा. || एलो
ननी मापी मोटी, मानो गाने || मा. || म पार
मोरिंग, अमरनार ॥ मा. ॥ ५ ॥ एनो
मानी माची, माणि मी मा. नायक
नानी I गा. ॥पना गरी जान.

धनी !! सा!! एना जो जलमें गया होत तो, पाणे नावतो
9 ला ॥ एती महोगा मगरमच्छ, मुख गिली जावतो ।। सा०
100 आरपुं नायना महोई, जोर ने फावतुं ॥ सा. ॥
पनो आपणं चिनव्यं यात्रत, सपटु मार्नु ॥ सा० ॥ पण
मनी नाटक पेटक, करीने आवियो ॥ सा ॥ ए तो नारीने
चंद्रदास्य, खडग दो लारियो | मा० ॥ ८ ॥ निम श्वान
अमाग्यो पाइने, गेटी ले गपो ॥ सा. ॥ वली काकनानीनो
न्याप, उत्सागो निम थयो | सा. ॥ निम आन्या जाणजोह
रिस्क मंका गह जइ ॥ मा० ॥ तुम आगल फुल्यो ए रद्ध,
चोलो टोडर था | सा० ॥ ९ ॥ ए तो पहवा नरने मूकाये,
स्वामी यमघरे ॥ सा ॥ ५ तो काहीये आमह छट ते, दूरे
मनी परें ॥ सा० || ए नोटिवे तुमें बामी माहरी, बुढ़े चा-
नमो ॥ सा• ॥ ५ तो प्रभु नुमें चीन दो नारी, सा पाल
शो ॥ मा. ॥ १० ॥ तर नरपति जपे सांभल, मंत्री मा
हरी॥ सा. ॥ हिवे आन पड़े कदि आण न. नाहरी ।।
॥ मा. ॥ ए तो जेटली पान करीने, मंत्री ने सरी ।
॥ मा० ॥ एसो चोकम पेटी माहरे, मनडे सहचरी ॥ सा ।।
॥ ११ ॥ पण ते हि मंत्री पात. घडो कोट अभिनवी ॥ सा.
॥ ए ना आपण जेध्या कार्य, माझे सगणी ।। सा० ॥ ए तो
हरिवलना ने शल्प , ते काशे पगे || सा० ॥ एता आपणे
मंदिर रामा, दो आरे ते करो ॥ सा• ॥ १२ ॥ नब मंत्री
चोल्पो नृपने, मम्मी दृष्ट ते ॥ सा. ॥ एह वानन बीई छ
ए, ई थइ पृष्ट ते ॥ सा. || तुम बद्धि बताई, स्वामी, एहती
दिल ठरे ॥ ना. ॥ एनो जे बली नवि साझे, काम ते क
ल को ।। सा. ॥ १३ ॥ हिच ने पाटे नुमें सभा, मध्ये सी
।। नमें यन नोनाना हरियल, को पिरति
।

. (९८) ने । सा• || जब पीई छवशे हारेयल, ते चित्त रावी । ॥ तव वाली जाली खाख, करीने नाखशुं ॥ सा• |॥ ४ विण पो आपणि दूर, विराप ते जायशे || सा• || शिवयणी मृगनयणी, आपणी यायशे ॥ सा ॥ नदि वायस कंठे, रयणनो हार ते ॥ सा० ॥ ए तो छे तुम नायजी, नारि श्रीकार ते ॥ सा ॥ १५ ॥ मन महिपति मंत्रिनी, वाणी सांभली ॥ सा. ॥ ए तो भली बताइ ते मुखदायीमां भली ॥ सा. ॥ इम दो जने परठ, करयों नृप मंत्रीय ॥ सा० ॥ यम नोतग्यानो करि, इयिल यंत्रीय ॥ सा ॥ १६ ॥ इम दुर्मति दीषि पने, काल सेन ते ॥ सा० ॥ हरिवलने चुकवा दो जनः । लय लीन ते ॥ मा० ॥ पण एतु न जाणे मख, दो जण ने । मा० ॥ किण ठाने किणे कडणे, वेस ट ते ॥ ॥ १७ ॥ जीमलालचियो यइ आकरि, वांधी मोहनी ॥सा कोडा कोडी सागर सत्वर, लहे दुख द्रोहनी ॥ सा । चाराशी जीवा जोनिमें. जीव ते यह रले ॥ सा० ॥' ft पाप भागवतां. साद नवि वले || सा० ॥ १८ ॥ कारें काट ले निम, लोहन भानने ॥ सा. ॥ तेम जोवने. मकर्म, वर मूसाझने ॥ सा० ॥ ए तो पर निद्रा परद्रो, में आकरा || सा० ॥ तेणें दी शिवपद पारण, आदर्श मग ॥ मा• ॥ ११॥ एनी कंचन कामिनी ए दो,. पापहा ॥ मा० ॥ नीव पां निकाचित कर्म, गलीना तां ॥ मा. || जौर मटेके वार अनंती, नरक निगोदमा ॥माः ॥ ए नो मुभम चादर यह फिर, रान ते चौदा । ॥ २०॥ ए नी कंचन कामिनी सारु, जीव भंडाय ॥ सा' एनो भर पम्मा नोर, या दंडाय || मा. ॥ निम 1 r 4 नी देसे दूध, न देखे गंगही ॥ सा० ॥ मिम भार न दोर करनी, आगे अपलाकडी ॥ सा ॥ २१ ॥ इस जाणतो नीर चे नहि, कर्मना जारी ॥ सा• || ए तो मान किया दोनरि गमे, कर्म कोरयो । सा. | इस मंत्री रवि निका चित, कर्मने कालने ॥ सा० ॥ ए नो हारेपल उपर देश, धरे पंल ने ॥ सा ॥ १२ ॥ रिण गने मंत्रि वसि पयो, पर दोगा मूल वे ॥ सा० ॥ पर नृप मंत्रीना मुलमें, पर धूल ॥ सा ॥ कोह बातें पपी वह नही, मंत्री पाल ते ॥ सा. पण अं जातां वहशे, पानी डालते ॥ सा• ॥ २३ ॥ ए तो साहितने परे जीता, सेर एक ॥ सा० ॥ रूही y सीनो जानारो, प्रभु नेर छे ॥ मा• ॥ ए तो काल पस्तावने योगें, करणी संभालम ॥ सा ॥ व वन जलनो बहरो, सी देखाउने ॥ मा. ॥ २४ ॥ एक समारत दिनारे सौरने पोर अंगार ॥ सा. ॥ निषि दिन पन पालो करनो, मर्मत पार ॥ सा० ॥ पगल परावर्तन काल, पनतो ते करे । । सा॥ जा तर क्रिया कष्ट परे ते, सी निःफल परे । सा• ॥ २५ ॥ जेहने परमवा ममकिन, पोन "सा॥ तम अनुमा गरमाग रजि, गव उपोत ॥ ॥ सा.॥ तर जोग योनि सकीनु, हाते मोटार । । सा० ॥ चिदानंद ने मानंदनी, शिव मुगिन । सा. ॥ २६ ॥ नानी करणी म मोटी, सिंगारमें 11 मा. ॥ तन पार को पाने, गम भागारमे । मा। ए वोट ही मम पांयी. धना रातापनी ॥ मा. ॥ एसी लगाकर परिमन जी, भागे सागरी मा. 14 ॥ दा ॥ पनि परे पर नो, यात्री जगदोर। पनि निन पादर, परपणे नर मोर ! ! .

दिन नृप मांत्रियें, किधी कचरी सार । चामर र सिनते. चंठो नवत उदार ॥ २ ॥ छविश रानली मिली, यह वटा ते सामंत ॥ स्वान उमराव ते आविया, परम्बदमें माइंन ॥ ३ ॥ हरिवल पण तिहां आवियो, वेठो नानी संग || एफण गाडी विराजता, नाणे शशि रवि चग ॥ ॥ हिवे नृप तेदु मोक, वणिकनें घर पा मार || महाजन सममत मेरियां, मी निन नकार ॥ । बड यसती व्यवहारिया, डाही माना जेह । दादी मनि छ भहनी, मिलिया ते गणगह ॥ ६ ॥ दान मार्ने आगा, दीमता नहयार ॥ धनद भडार्ग मारिसा, गर्व वह व्यवहार ॥ ॥ दाल ६ ठी ॥ दहाण नायो दीकगे ॥ सांभागी ॥ आयो माम यमत के ॥ लाल माभागः ॥ ए देशी ॥ मा हागन गाथै गद मिठी ॥ सौभागीद। पग भला शिणगार के ॥ लाटमाभागा॥ निज निन घरना भेटगां मोगा ले आया दरसार के ॥ ला• ॥ ॥ श्रीवंत श्रीमंत मागे ॥ सो.॥ शंकर गम मगाठ के ला• । गगन: मूग मूरजी ॥ सो. ॥ मोमागी मदर माल के ॥ का.॥ • || मानो माटोमा उनी ॥ मो. ॥ मा मांगीलाल ॥ ला: || जीज गमी जीरो ॥ गोर ॥ जगनीपन जगमाला ॥ 1. पानो योमग यावर ॥ मो. भाणी भीमो भान के ॥मा || काली केगर कम्मनी: मो. ॥ कल्याण कामी कान के || ला• ॥ ४ ॥ दो देवा देयमे । मो. ॥ दापो दानो दयाल के || मा. ॥ प्रेमी बनी पोममी मोर ॥ पराने पर पान के । ला | सोनमी ना गनी || मे. नायो नयमल नीर के 4 ला• ॥ो 1

-
पनी रंगनी ॥ सो. ॥ रांका रंगी रंगील के ॥ ला• ॥
॥ ६ ॥ यायो चेलो वालनी ॥ सो• ॥ वीरो ने वीरचंद
के ॥ला. ॥ हेमो हीरो हपसी ॥ सो० ॥ हंसो ने दरवं
द के ॥ ला• ॥ ७ ॥ गोडोदाम गगलची ॥ सो० ॥
नांगोने गोपाल के सा० ॥ गगनी गसेश ने गांगनी ॥
। मो० ॥ गोविंद गोरो गलाल के || ला• ॥ ॥ खवों
खीमो खननी || सो० ॥ खागोने मुखमाल के ॥ ला. ॥
तारो तुलमी ग्रीकमो ॥ सो. ॥ ध्यंबकने त्रिभूवन के ॥
। ला• ॥ ९॥ शिवा सेवक श्यामनी ॥ सो. ॥ शामो
ने शिवचंद के ॥ ला• ॥ सारो शिवशी शामजी ॥ सो० ॥
साची साकर हूंद के ॥ ला० ॥ १० ॥ इत्यादिक व्यवहा
रिया ॥ सो. ॥ मिलिया माहाजन साय के || ला० ।। भेट
मला पने करी । सो० ॥ बेटा प्रगपी नाय के ॥ ला.॥
॥ ११ ॥ इगि परें सट्ट नगरी जना ॥ सो० ॥ मेल्या वर्ग
यहार के ॥ ला. ॥ वैसी परसद सह मिली ॥ सो० ॥
नृपने कर्गने जहार के ॥ ला० ॥ १२ ॥ हिवे नृप अवमर
मोइन ॥ सौ. ॥ बोल्यो वयण रिचा के ॥ ला० ॥ चीई
यम आमंत्रण ॥ सो० ॥ मूक पंच सपक्ष के ॥ ला ॥
॥ १३ ॥ रे सामंनो सामलो ॥ सो. ॥ बीई ग्रहो तुम पह
॥ ला• ॥ यपने नौनरं देने ॥ सं० ॥ तेती आतो
नंद के ॥ ला• ॥ १४ ॥ वैशाख शदि पांचा लगे । मो.
॥ तेही लाव जेह के ॥ ला• ॥ माहरी राम ते पामं ॥
मो. ॥ मनाछिन समनह के || ला. ॥ १५॥ ते माटे
बोई प्रोमो ॥ नामां होरे माच ने ॥ ला. ॥ मीविन में
ई तानी सोल॥ पालीश मपर वान के
Hai :प नृप वाणी सामनी ॥ सो. ॥ सभा यी लिस
-

. . . (११) के ॥ला. ॥ पर्षद मौन करी रही । सो ॥ जागे ते युटी मक्ष के ॥ ला ॥ १७ ॥ निज निज मुख सौ. ॥ परपद थइ मन भर के ॥ ला० उपहे कोन जीभडी ॥ सो० ॥ जाणे गरे देवाणो सिंदूर के ।। ला' ॥ ८ ॥ परपद जाणे मम ॥ सो० ॥ ए शुं बोल्यो के ॥ ला. ॥ देखी पेसी यम घरें ॥ सा० ॥ कहो किम हां जाराप के ॥ ला० ॥ १९ ॥ सहि तो ए परज ॥ मो० ॥ नृपनी हाट फिरय के ॥ ला• ॥ लंदी पनने . ॥ मो• ॥ यमन मसलू करेय के ॥ ला• ॥ २० ॥ तो नृप जाणतो ॥ मो० ॥ मिनि कंकण पहेरयां केदार के ॥ ला० ॥ पण काम पढे मीनी मुपाने ॥ • ॥ मित करे संहार के ॥ ला ॥१॥ ए दृष्टांत ते न रचो ॥ लो० ॥ मांध्यो विडानो ए पाम के ॥ ला ! कोइकनी ते फिरी दिगा ॥ सो. ॥ लमी ममी रेशे ॥ ला ॥ २२ ॥ इम समझी मनमें रही ॥ सो० ॥ । परना मान घरेप के || ला ॥ सा मटा मट जोह रही । ॥ मो० ॥ पग उत्तर कोर न देयक ॥ ला. पर घोल्यो पाकीने ॥ मो० ॥ए तो लमण भुकटी के ॥ ला. ॥ ग्रान खामा तुमें अन तगा। सो० ॥ मकान हटाय के ॥ ला. !! २४ ॥ जो भ्रम मापनी करो ॥ मो. || नो नमें ग्रो वीई ए के । ला• ॥ हितर को माग ग्रहो ॥ सो० ॥ अन्य मूकनी होय। ला. ॥ २१॥ इगि परे नरसति चोधियो | मो. ॥ रकी परसद त्यादि के ! ला• ॥ चमायां मना शांग ते ॥ मो. ॥ हर को छ पन ज्यांहि कं ॥ लाः ॥ १ मात्रि दाब छोरनं । 'मो- ॥ को नम कृण . . 5 । ला. ॥ वार जो गनशे चीभरां ॥ मो. ॥ किलांग वाम पुकार के । ला० ॥ २० ॥ हिंद मुना भविय ग तुम मो. ॥ बोल गंत्री काल के ॥ ला. ॥ ए कोल दिलधि टीमही ॥ मो. ॥ ९ नो धोना उद्धामनी ल के ॥ ला. ॥ २८ ॥ ॥हा॥ अवसर भी कानसेन ने, पोल्यो नर कर दि ॥ रज मनी मा मारी, कई नम आलम शेति ॥ १ ॥ पप वा नापनी, पीई प्रहादी जा ॥ देखन मरवा । है. मागनं पाई पर ॥ ३ ॥ पोग्नु पार जे नारे लहे. नागे ने पम्प || गम पार पनिर, नासी सानि तुम्न ३॥ देर राजे मानवी, नानां दरार || जागे निकोलापम रामानं टार || १ || भागे काम मगार गरेरो ना ॥ ने जाने पर नेहरा, रिव। गुगा ॥ || मरासि शिगेमगो, सपरेरा मन परवल के 1ो से सर मुम रस ॥ ६ ॥ इगि पर परखद देवों डा इष्ट ने कान ॥ औरफी घरण नार्गने, दूर रखी माना॥ तर मी काग ने पीली वादगनिदादेसी ॥ व परिररने परो. नगला गंपर सीस गम "पपरा दाने देरग, लागम ए पोरं मह ! पोरारे पाप र चोरेगी धारा लार ॥रना ॥ पाग पारवा, नागमलि पाईन रोर सारा मरको 1. नाला गैरार ॥ ६ ॥२॥ीन ने मा. सागर में नितीन र मरिना. गामार गौरी मैग:.॥॥पन दिन

श्रेणिक
.
ण पर ज्यु फूठार ॥ ते उखाणा नायनी, राज मे।
राय कोल ॥ आपणी नगरी नमाडीने, राम देखायो:
(१)
नवी, लाल अगनी संप सममान ॥ दो पखें उगल :
लाग तन मन करे सुग्यान ॥ पं० ॥ ४ ॥ शिर आहे
ययणयी, लाला रूदी झंडी गाल ॥ मुख दुःख न गंग
याला कपण तगा मति पाल ॥ ५० ॥५
ण करी, लाला परणावी निन धीय ॥ मेतारज मातंगरे.
कीयो जमाइ जीय ॥ ५० ॥ १ ॥ तेमाटे हरिवल तुम,
पीड ग्रहो ए पान ॥ वैशाख शुद्धि पांचम लगे, लाला
परे आण ॥ पं० ॥ ७ ॥ इम नृपाणी सांभली, लाग
ल चिंते ताम || जो नाकारो हुं करूं, लाला तो न रहे मुझ
॥ ५० ॥ ८ ॥ जामगरी सलगाडीने, बाग दुष्ट रह्यो ते दर
भरी गाभि कोश ते, मग नाखी नृपनी हार ॥ ५० ॥:
कोइक भवनो नीमडयो, लाला मंत्री वरी व्या: ॥ मरपन ।
ग्रहाना, लाग कोगो महोटोजना पं. ॥ १० ॥ ता
मभु माहरो. लाला जोछे पाघरो तेह ॥ तास पनायें
लाग जीवी टालं छह ॥ ५० ॥ २१॥ तो मुजरो सरो
रो, लाला जग सर चा वात ॥ महिपा नीत ते महिपीने,
ला पाईने करूं यात ॥ पं. १॥ एम विचारी
लाला हरिवल उठयो त्यहि ॥ नृपने प्रणमी हाय, लग
ग्रयों ने उन्नहि ॥ १ त परजा कर जो
लाला विनवे त्वां महिनाय ॥ हरिवलन उगारीप, राज
कर दो हाय ॥ १४ ॥ रामनगी रे अम ययग विशेष
हो रान प्राणाधार ॥ ए आंकणी ॥ कटकी कोही उपा,
घार ॥रा: ॥ १५ ॥ ए परदेशी पाहुणो. रान...
चोरमारा ॥ १६ ॥ ते नरने किम दृषिय, राज गुण

पण करंर ॥ देर करीने पूजीयें. रान रोवे लाभ अखंड ॥
रा• ॥ १७ ॥ ते पारे नुमें नापनी, राज दोन वंछित दान
मना मिले गहु वीनवे. राज मागे एनुं मान ॥ रा•n ki
पीई यपन, राज यो चीनाने जोय ॥ तुम मखने जे वांछ,
नि करो कान से सोय ॥ रा• ॥ १९ ॥ परियागतना मालं
, राम खाता हो नुम जेह ॥ ते किम पाछा देयश, रान
प परे पग नेह ॥ रा० ॥ २० ॥ तव नृप रोप चढाइने,
गि बोल्यो भून बहाय ॥ रहो अपमोली परज ने, राज से
शो नहीं तमें कांप ॥ रा. ॥ २१ ॥ तब परमा छानी रहि,
नि मममी ते मनमाहि ॥ विण खटे नृप कोपियो, राज मुगुण
करशे आदि ॥ रा० ॥ २२ ॥ घे ना पर्जने शीखही,
जि करतो कोर यपार ॥ आल्यो चांगलदै शिर, राज माल
केरो भार || रा. ॥ २३ ॥ ए उखाणा दाखवी, गन प
नि कीर विदाय ॥ विलखी थइने परम ते, गन टठी मन उल
॥ रा. ॥ २४ ॥ चहुटे पहटे चाचरे, राज मिलाया
पोर अनेक ॥ टोले टोल सा मली, राज करता वात विक
। रा• ॥ २५ ॥ कडे केतांइक मानवी, राम प विगयो यो
इस ॥ राखे परिवल टपर, राज ते मालचधी देष ॥ रा९ ॥
। २८ ॥ कहे केनाइक मन टो, रान कारसेन विनिष्ट ॥ सा
भूटी ते को, गन-काग पर ते जच्चर || ग. ।। २७ ।।
परी दो पापीया. रान महोटा दी। कुजान ॥ हरिबलने
व देयो, गज या लग रहेशे वात ॥ रा. ॥ २८ ॥ इणि
से मानन सह मिा, रान वार्ता यो याम ॥ करता शाहारष
करे, राज सबनी नगरीनां लोक ॥ रा. ॥ २९ ॥ पण
मा सपृ पागे, रान मटशे पास जंजाल .॥ लब्धि को इस
मातमा, रान पाना पल्लासनी धान ॥रा ॥ ३ ॥

1
करीदो हाय ॥ १४ ॥ राजनझीरे अम वयग विशेष
(2)
नवी, मग अगनी झंपे समशान ॥ दो पल उनल
लाग तन मन करे सुम्यान ॥ ५० ॥ ४ ॥ विर भोर
ययणयो, लाला रूला भूडी गाल ॥ सुख दुःख न गण
याला वयण तणा मति पाल ॥ पं० ॥६॥श्रेणिक
ण कगे, लाला परणारी निज धीय ॥ मेतारज मातंगने,
कीधो जमाइ जीय ॥ ५० ॥ ६ ॥ माटे हरिवल तुमें,
बोई ग्रहो ए पान ॥ वैशाख शुद्धि पांचम लंग, लाला
परे आण ॥ ५० ॥ ७ ॥ इम पवाणी सांभली, साग
ल चिने ताम || जो नाकारी हं करुं, लला तो न रहे मुल
॥ ५० ॥ ८ ॥ जामगरी सलगाडीने, दुष्ट रमो ने
भरी गाग्मि कोश ने, नानासी नृपनी हार ॥ पं. !!
कोइक भवनो नीमडयो, लाला मंत्री री व्या ॥ माणन
प्रहावना, ला कोयो महोटोजनाका पं. ॥१०॥ ता.
म माहरो. लाला जोछ पारो तेह ॥ तास पसायें
गा जीवी टालुं छेद ॥ ६ ॥२॥ तो मुजरी खरो
रो, लाला जग मर चा वान ॥ महिपी मात ते मदिपीने,
ला पाईने कर व्यात. एम विचारी,
लाला हरिवल उठयो त्यहि ॥ नृपने प्रणमी हाय , गल
प्रयों ते उन्छांहि ॥ ५० ॥ १३ ॥ तव परजा कर
लाला विनवे त्या महिनाथ ॥ विलन उगारों, रात्र
हो राज मागापार || ए भांकणी ॥ कटकी कीडी उप
हण पर ज्यं फटार ॥ ते उग्याण नायनी, राम मेगे
धार || रा. ॥ १५ ॥ ए परदेशी पाहणो. राज
वायु प्रकोल ॥ आपणी नगरा नमाहीन, राम देसाम्यो
भोग ॥ १६ ॥ ते नरने किम दायें, रान गुम

पुण नारे ॥ ॥ पीवम पारा रे सांभलो ।। ए था यो ।। नार पिणी ने नारी, न गमे पात सोच्याह रे ॥ भी त मुषों घरसती रहे, जाणे इटनो दाइ रे ॥ लागे रोम रोमें हारे, सिरानी झाल असारे ॥ पोरे मदन अयाह रे, न ते क्योहरे ॥ पी. ॥ २ ॥ ए मुख मंदिर मानिया, रिया धन धान्य रे ॥ कंत विना ने कामिनी, नाणे अल वे पान रे ॥ नदिये को तस मान रे, मका निप तरुपान रे, काननु भान रे, गाय तिरी लो अपमान रे, इस सो गि होते गागरे ॥ पी. ॥।॥ दे दीप कुमग दो दैरने, पो हम सीधी अपराय रे, विण स्ने मा कनने, यमपद मुके मार, बीते कीवी ए राध रे, का? ने को पानी दाप रे, रेवियोग अगाय रे, पीरे मंतने साप रे ॥ भी. ॥1॥ हने पर मालपूर्वी पदो, नेह पाडेरे रिपोग रे ॥ गया दिन गते नायनी. कानपी लेतो पतिभोग रे, नाप सपथनारी रे, भांगे मनना से सोग रे, जागे ग्यं सपला ते सोगरे ॥, मी. ॥५॥ व बिना वे दिनोगगी, पाम इस मगर' सिनसनी ने माफर्मा, सौरी र वनसार रे । होरे गालाका 1रे, सारे थारे ते पर रे, जारे रोने भागार रे, नर दे धोकार रे, शिरा ते सी अवतार रे, भारती निधन से मार रे श्री. ॥६॥ रिशीनी नारीने कंगन, पान रहे वसनी हरे ॥डलमा परें कर्मने, पांये निकारि मदीर रे, पर रस गरि पी रे, मोनी की मीर, औरतो दुर्मन मा र रे, पिन ए ोि लापरे ॥ मो. ॥ - ॥ एनि प्यारी संवने, को गागी ससना रे ॥ नपने नलपर र Fधी, नाणे भादव मोरे, रोनीतर तुम ना रे, परंग रे, मागोवन पर पर रे, पानी रोकी ॥

रीहछ ॥ दान सुपात्र पोपनो, करजो पुण्य कयच्छ । देव गुरु समरी सदा, घरजो नर पद ध्यान ॥ पूजा मकि पना, करजोगह सावधान ॥ १० ॥ कृल मर्यादेचालनी जो श्री जिनधर्म ॥ करजो उम्ग्वल पक्ष दो, राखनोकि भौ ॥ ११ ॥ शीग्य भलामण इणि परें, निज नारीने ॥हाल ८ मी ॥ राम भणे हरि उठायें ॥ ए देखें मार, होर नारी पुणारे. होरेगजननी पार 10 ॥ चि हरिवलने गृप को, सामला पंप ग्रहो पम राजनो, पहोंचो नेम सदीय ॥ १ ॥ तर पारयो हसि, सांभलो सामी स्ल || कामे से वे मारणे, ने न पटे फल ॥ २ ॥ तिम तुम कारनमें प्रमा कुण ॥ दारा मषन दोरिया, फण देशे पण ॥ सेनको साचो हो. ते तुम करशे काम ॥ दील रमे तुम भारम घरजो वाम || ४ ॥ एम कही उठ्यो तरक, करी प्रणाम ॥ बीई नही यमदूतन, आव्यो के निज भाम: निन नारी दो भागले, इरिवले मागी शीख ॥ पमने मणी, माधु के सहि इख ॥ ६ ॥ नृपन कारज सापना प्रमो छ एह ॥ यम तेही नृप मंदिरे, आवी सोपू तेह ". से माटे तुमे शीख घो, तुमे गा खित जो पाने होय ॥ ८ ॥ मंदिर सो अएं, तुम ॥ पंथ भणी संवादिन, गमन भगीपदीय ॥ १२ ॥ नां पण ते सांभली, नारी दो अकुलाय ॥ जाणे रंभा पहो, तिम नाग मुर्छाप ॥ १३ ॥ पेतन लहि नारी तदा, पल्लर पियनो ते साही रे ! उ सरें करी, कहे नारा ग्रहियाही रे ॥ हमें रहो तुम मको मरणना गहरे, प्रीतम मुख छाह रे, ली . दोय ॥ होशे मेलो . .

।कुण नारे ॥ १ ॥ प्रीतम प्यारा रे सांभलो ॥ ए आं भी 11 नार पिणी ने नारी, न गमे पात सोच्याह रे ॥ भी ति मुधी घसती रहे, जाणे इटनो दार रे ॥ लागे रोम रो हरे, विरहनी झाल असाह रे ॥ पोडे मदन अयाह रे, न होतो ते पाह रे ॥ पी. ॥ ॥ ए मुख मंदिर माध्यिा, रियां ले धन धान्प रे ॥ कंत विना ते कामिनी, नाणे अल् ते धान रे ॥ नदिये को तस मान रे, मूको जिप तरुपान रे, गामा काननू भान रे, जाय तिहां ला अपमान रे, इम खो गि होते गाण रे ।। पी. ॥१॥ दे दीप कुमग दो देवने, यो तुम कीयो अपराध रे, विण सूने मुझ कंतने, यमगृह मुके मार, वी तें कीवी ए पाय रे, काहिने को मानी दाप रे, पद वियोग अगाप रे, पीरे संतने साप:रे ॥ मी. ॥१॥ इने मुख मरिपुत्री पदो, जेह पाईरे वियोग रे ॥ गग्या दिन ते नायजी. का नथी लेतो पलिभोग रे, भाये सपलाना रो । रे, मांगे मनना ते सोग रे, जाणे ज्युं सपला ते लोग रे ॥, 1मी. ॥ ५ ॥ कंद रिना ते विनोगणी, पाम दुःख पारे । विरहानसनी ते पाफमां, सीप्झी र तनसार रे॥ होवे पमूलाका । रे, खारे थारे ते पर रे, जाने कोने आगार रे, नव देश श्रीकार रे, विरा ते स्त्री अवतार रे, नीरवी निधन से नाररे मी. ॥ ६॥ दिगोणी नारीने तिनं, ध्यान रहे तस मी रे ॥ संदलपच्छ परें कर्मने, धेि निकाचि सदीय रे, सम गरस नवि पीव रे, मोहनी कर्म अतीव रे, जीरतो दुर्भन मा मावरे, चिन्द ए विदी लही रे ॥ श्री. ॥ ७ ॥ पनि प्यारी कंतने, को पाणी ससनेह रे ॥ नयणे जलघर पर तती, नाणे भाद्रव मेहरे, रहो प्रीतम तुम गेह रे, मदहो सरंग बरे, भोगवो नन पन पर रे, पामी पुण्यनी रहे रे ॥ मी• ॥

. ॥ ॥ ८॥ हरिवल कई दीप प्यागने, मांखा अमृत वाण रे म करो मन कोइ सोचना, तुमें छा जीवन प्राण रे, आंखनी की समान रे, पण छ नृपनी से भाण रे, पीई प्रशो में वे भाग रे, होरे ज्यु कोडि कल्याण रे, सुमें घाना मंडाण रे, म खांचा ए ताण', अमें पथी केकाय रे, कर शीघ्र प्रयाण ॥ ९ ॥ सांभर गोली रे मादरी || ए आंकणी ॥ एम कई मरठी चालीयो, गेनी फी ते नार, नृपनु वयण ते पालका आव्यो यहि द. पारगे, नृपने कोर ज़हार रे, कहे मन्छी तिणि बार रे, कग में विटा तय्यार रे. म कोटील लिगार रे, म भी नर चित्त महार रे, पाम्मो पं अपार रे. तेडाव्य। ते नलार रे. चिता विग्यायी मार रे, इस्पिल पले नृप कारणें ॥ ए आंकणी ॥" अगर चंदन कार नी, रचना चपनी ने की ॥ मृगंध द्रव्य ने होमता. नृप कार मनोरथ लीप रे, गाणे ग्मणी ने गिद्ध रे, प्रभुये मुहाने । दार, यह मन पुण्यनी रद रे, भानयी पंधित सिदरे । ॥ हरिवन नप मपी पारीयो, पहेरी यव गि नाल रे ॥ भगे माग गोभतां, पहोया माफ समाल रे, कीर्या तिलकन भालरे, करमा श्रीफ 5 ना, जो मनुष्यनी मान रे, जगदी चपनी ने जाल, दीसंती महा विकराल रे ॥ ॥ • ॥ १२ ॥ निग सम मागर देवता, हरिवल मगरे ने विरे ॥ ताण निरो नायनी, आयो मारें करिनार, नाग्या माल पतिरे, बोल्यो मा पर मिल र, हरिवल, मननी पनि रे, रासने अचित्र चितरे ॥ १० ॥ ३ ॥ एन कही मर देसी रिवन स काफी परे ॥ नाना पाविन देवना, को पप ने नारे. जन मह देमं मारे, नतो मीम नारम्या मंग ने मारे, पाने परियो मारपी" HEY खिलतो मन टेलिने, सपना पपा दि शहाला मानती. रोडे माद रेन नदी नरः पविजल लिपितर ३, सान मन ररे, २ न रोमनां पारे । . ॥ १५ ॥ जाने ना पाया भीम समरः ॥ र टर रही टर ने पार पट मरे ने नाटी, सिने गिरने, रोज कमार रे, रोवेली पदारे JTRI नाती नाटते, लागी नरल कोटरे । इसान पहुं ना ते पी. दीये कालो ने घोट रे, र पिने पस दौर, दीवी वाले ने होट, पयो गरि मागे र र रमनी अंटरे, रमे मीनी गोट . यती दिनभी काट ॥ १. ॥ ७ ॥ इनिपत्तिल दे. कलई रे । पानि हसिन नानियों, नौ रोनिन ददिरे. मग म मादी में, मन को भी सो अगर ज्यादरे, मन घटे ने मार, देवर कार पारि ॥ १८ ॥ मल पाने रिटा मी. ने लापः ॥ समर करी पर ने गरेकाापी इत्त देकरगे, नीट को निगडित यापरे, महान गो. दादा परमार. पाट १९ टिविटीदार, Extr गरा जरीन नारिलो, पास गमी दे टोप र सिदन meerut सरे मोराईने जोर , rk 1.1. !! २. नन मारला Ki - ! मन पर्ने गी. first .

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सारे ॥म. ॥ सामीपपल भाव धरीने, 'जेको पार
सनी ॥ म. ॥ १ ॥ श्रीनिनी भात कौवा, कत
पार पारे । म. ॥ पर बंधनादिक जीर गरे, करुणा
मागी भारी || भ० ॥ ३ ॥ दोगुनादेक तीय जात्रा, ने
को निर गागरे ॥ १० ॥ परियागतना गम खारे, संपली
दिला गरे ॥ भ. ॥ ॥ तर जर संपन मान झिग
दो, पाले कर पीयादो ॥ म. ॥ नप विवरारपी व्रत परच
खाग, को पतुर मजागरे ॥ ५० ॥ २ ॥ इत्यादिक
भकरणी भोली, सपली ए पुग्पनी साखोरे ॥ भ. ॥
दव्यी मारपीज करे करणी, ते भरे पुप्पनी माणी ॥ भ.
॥६॥दव्य सवयी पामें स्त्रगे, सपने मुर उपवगेरे ॥
। य० ॥ मार स्तरथी केवल नाणी, यह बरे कि ते मागारे
॥ प. ॥ ७ ॥ द्रव्पपी माशी पो ने करणी, करे ते लहरि
दरमणी रे ॥ ५० ॥ जे करे भावी करणी निराशी. होने
ते ज्योतिरिकासारे ॥ म. ॥८ ॥ पुन्पधी रे हर मुर नर
रंदा, हलधर पक्री गिगंदारे ॥ ५० ॥ विशट गका पुरुष
रहावे, रत्नप पदवा पावरे ॥ भ० ॥ ९ ॥ से मर सिदि
निलयर भाग्द, शिव पदनां मुख चासो || म. ॥ देव दानव
पग सह वरा भावे, या सपि गाल जावरे || म. ॥
॥ १. i अष्ट माहा भय करिय न देख, निर्भय सपने पेखो
॥ ५० ॥ इति उपद्रव गंग न हो, पातक सपना खो।
॥ ५० ॥ ११ ॥ पंचमे सपले पोल सपोला, पापे नसतह
मौलारे ॥ म० ॥ मत्र सिद्धांतमें नर पवा, हुमा ते पुण्यात
नाबारे ॥ म. ॥ १ ॥ ने नावापी मनोदरि तरोपा, प
अम रसी मीपारे । म. ॥ अभ्पतरनी गांड विशेरी, शि
परमनीशी दोरीरे ॥ म. ॥ १३ ॥ सपा कोरी सापनी

r बित लगें, उपनो हर्प अपार ॥ ७ ॥ दो नारी मुझ प्रभये दीधी हच्छ ॥ तो हं जइ सफलं करूं, मुझ जीवित . छ ॥ ॥ इस जाणी ते सन थयो, मदनवेग ते राय वी सम ते नृप थयो, चूना चंदन लगाय ॥ ९ ॥ को जाणे राजौ, तिम चाल्यो धरी आश || रजनी थइ समे, पहोतो पच्छी आवास ॥ १० ॥ दूरयी भूधणी वसंतासरीय दीठ ॥ शान करी निजतने, हरिवलगृहमें ॥ एटले महिपति आषियो, दो नारीनी पास कुमरी तब उठी तुरत, आसन आप्यु तास ॥ १२ ॥ स्वागत घणि करी, मुखयी साकर घोल ॥ कर जोडी रही. कारिमो करी रगचोल ॥ १३ ॥ कामिनी कहे महि ने, केम पधारचा स्वाम ॥ ते कारण मुझने कहो, खोली मन भिराम ॥ १४ ॥ इमणां पियु गयो यम घरे, राखणे चार ।। अध्यवसाय जे मन तणा, कही पहोंचो दरवार ॥१५ मुझ मंदिर म्वामी नमें, साव्या छो महाराप ॥ पण .. वापली, कहो ने कम समाय ॥ १६॥ ।। दाल १ ली ॥ मंदी रंग लागो ॥ ए देवी । तब खित यह रानवी रे, बोल्यो ते मदनवेग ॥ विषयी वमाना कोइक पुण्यना योगयी रे, ययो तुम शुभ नेग ॥ वि. ॥ १ ॥ जब आव्यो ९ मंदिरें रे. नुमरें मोगन कान ॥ वि० ॥ मोहनी लागी ते यकी रे, ते जागे जिनराज ॥ शि० ॥ २ ॥ जगमा छे नारी घणी रे, पण तगरी जोड ॥ दि. ॥ तुम मुघडाइ देखीने रे, वाध्यो मोहनी ॥ वि० ॥ ३ ॥ न दिनधी नदि वीमरो रे, दो नारी Tit. ॥ जोर रहे चरणांवून रे, तुमरे अविहर ॥हि ॥ ॥ ग्य घरे ध्यान जोगीसरा रे, तिम यरु

.
ध्यान ॥ वि० ॥ सास उसासमें सांभरो रे, भन बार तुम गु
शयान ॥ वि० ॥ ५॥ ते गुणनो लीनो यको रे, आव्यों
धर्गांस ॥ वि० ॥ पहमा अट न जाणजो रे, सत्य कहुं
नम भुस । दि० ॥ ६ ॥ करन करसी शोचना रे, चतुर
में गुणधाम ॥ वि. वाणी मुबारस साभली रे, यो मन
मुस अभिराम || दि. ॥ ७ ॥ तन धन जोबन पापीने रे,
सोने यनुभव लाइ ॥, वि० ॥ पामी अवसर भूली र, तस
रहे दिल दाह || वि. ॥ ८ ॥ यौवनपय सुख पामीने रे,
में नहीं माणे पूर ॥ वि. ॥ बननां कुमप तणी परे रे, ते रहे।
मनपुर । वि. ॥१॥ जीवित मी तुम तणं रे, पालशं
निमिदिन वेण ॥ रि० ॥ हरिवलनी पर रासशुं रे, तन मन
करीने सेण ॥ वि० ॥ १०॥ तुम हम विच्चे कोइ वातनो रे,
दहरो न राखिये कोय ॥ वि० :| मुझ मन प्राणनिंकज, रे.
राखं तुमने दोय ॥ वि० ॥ ११॥ माहारी उत्ती जे राजनी
रे, आनयी सोपी तुम्म ॥ वि• ॥ जो तुमें आपशो हेतशं रे,
ते सही निमशुं भम्म ॥ वि० ॥ १२ ॥ कोइ याते दुहवं नही
रे, मादरी करीने जीह ॥ वि० ॥ सवलु कप र दें धीरे,
भाव रपणे मुझ गीह ॥ वि० ॥ १३ ॥ इम नारी दो आगले
रे, नृप कहे पूर्वी मान || वि०॥ कामातुर यह भाकलों रे,
खाई संपली शान ॥ वि० ॥ १४ ॥ धिग विग काप विटंब
नारे, विग धिग मदनविकार ॥. वि. ॥ मुर नर नारी भी
गळे २, नदि रहे लज्जा लिगार ॥ वि०॥ १५ ॥ कामें कई
नर छेतरचा रे. कहनां नावे पार || वि. ॥ काम पमें मल ए
परे, पड्यो ललितांग कुमार ॥ वि० ॥ १९ ॥ काम
भयो नारकी रे, सानी मुवनकुमार || वि* ॥ हास्प महासाका
रणे २, पहातो दरीपा पार ॥ वि० ॥ १७॥ कामिनी

प्राधा, नाच्या निक बि० ॥ काम या चाहाणगा नदीक । वि. ॥ ८ ॥ उत्तमम यम गीतमा गार पण काम 1 कि. ।। नर नारीनों जादलांग, मां रा टाम पि. ॥ १९ ॥ कामिनी कामना प. दि. || केवलरयपने खामगा • ॥ श्रणिक ग यापक fr. ॥ ते देखी गि १ ॥ पनि AT भन'मगार । वि. निरसी विः ॥ २२ ॥ " काय ॥ वि०॥ दीरें वि. ॥ २३ ॥ T: HT . I म -- "कायमा वि.॥ माहे पर दास ।। । गे कगयें नास ॥ पो. ने रमा का पण बहते मर ॥ • " TEMP पुरण पहेली - मगर, पोरे दो 17 H 1 HTTE जग नाम ॥ ।' मोटी म । । विनर मामला.

--- गमा पर देरल ॥ २ ॥ एमन की नापनी. करदायी सच ॥ विण को कोई गहमें, नाव पेसी मत ॥ ३ ॥ ५ तो सारे रंठन में भांगे मार ॥ ने करणी पडवी करे, का समग सार ॥ १ ॥ परणी परणी से हुवे, तने पटायो SIT || साने ते समो प्रभ, रहदा यो ए लार पर भंजन राजवी, एसे तुम्म विरुद्द ॥ परनारी सहोदर, वे रिप एंडोर ॥६॥ परजा अमें तुम तणी, बेटा बेटी "मनान ॥ अण पटनी ए वानी, म संग रानान ॥ ७ ॥ बार जोइये निहायकी, सिपी आर पार ॥ कहो ते फण भागल कहे, जे निज इसी राठ ॥ ८ ॥ आपला नाणी परी, जान से माखी मद जाणीने आवीरा, लंगर जी कर ॥ ९ ॥ कंठ विही कामिनी, जाप्यं ते मरिगण मन तप, तेणे सपगग ॥ १. ॥ टेकर गाणी पर करे, ना होरी' हाय काम हरे तो चिंह नि, भारे पिंगा साथ ॥1॥ एक नो माग कतर, सरपो नम पर मार ॥ बली हो पररा आवरीया, पर नग्य निर्ला । ॥ १९॥ म दोसरा नावणे, एवा म को बोल ॥ मो सा एक पातरी, तीन पूरे बोल ॥ ११ ॥ पागं पण नेमारी, नगदी नपने नाले ॥ पानी पापा, मी गियो मतमास ॥ १ ॥ लनी मोकार रोटी देनी। दर गोपाल भरा, गिम भा, पीरो, बोलो सारो, दो नए गेमो में गानो कम देशी. मोनोगी नोएकोलोर, दिर पोलोगे पानी में पेशे मी माग गरे पनि " दया म मही ।। मना क्षिणी जाणी, पण मनी में मपराणी, मासे इम वाणी, दो कमर्ग नपने नये रही तुम मन नो देश अम नाय याने मनर, भाग्वे मद पूरे रे, नृप कामातुर या मा ।। र भाम र व्यामल पाय, निमज कविना पड़ नदफाय गार, दो कमगर्नु म सो: हामणु । । यी जपने पहिनाय, नमें सांभलों कुपर्ग माय भी तुम गया मगनी दीपी में आजयी ॥ नमेशा ते काम आतमाम में परशु. मन मुख व. मार्ग गान यणा राजयो ।। 1. ।। ५ । तर परमर्ग यणा नापास मयणा हप दशु रयणां गननजानमा मग ना जो कि पाथवा सारी, ए तो मा किन " । नातिन फिरे मनी वर्ग में पान म. वल व घी मग्न म 17 नगने॥ एमा-गक' म ग्यता, गग्यो मन यमना। गार की या रे, -मग नाग. मना गानोटा 4.1 • र ताग, गीत केटल ॥ मान - , : मन 1 ६ । फरी TU S मनाया अगनी प्र" " , दामन दारामार, नन महान काटा गि संग मानक हि किता नामी कर ग्जि माग म चापा, निम सम्र मा विग्रह जा -यन को मरा खिम अमोनिया ताना ग्दमा म गाना। अनी म पित्तों वो ॥ तु० ॥ १ ॥ अहि आगे हेडहुँ जेने, हरि आगे मग जाप केते, जाप कहो केवरे, पाझ आगे चिटकली दो राने | निम तुमहीन भामिनी मोली, तु म्हेशो आग्यो को दी, जागो किहां रोली ने, मुन्न भागले दिग ते छोडीने ॥ नु॥१. || तब कुमरी भाख चोल, नृप दीनो छो फूटा डोट, निगुण निटोल रे, वडा दीसो छो कोइ तुमें || कहे कुम गरीष अमेरी, निम पदे कच्छी बछरी, नावं नस वेरी रे, नर पतिनी ई अवसा ममें ॥ ४० ॥ ११ ॥ केई नृप हियडो स्टो, के तुम जगदीरा स्लो, केश कांड सूटो रे, तुम सा सोसास हनी निकै । में शं नृप आप बरवाणो, तुर्मे अपला पन नागो, भरलायी जाणो रे, केइ हारथा नर वलीया तिक । तुमें मुगो परदेशी राजा. जहना हती मही ये माना, तद्दनी ने माया रे. मकवाय नख देइ हप्पो । वली नितशत्रु महिनाय, हतो परजनी महोटी आय, राग थरी पाय रे, पियु नाख्यो जगनिधिमें मुग्यो । तु. ॥ १३ ॥ एनो इत्यादिक नर बलीपा, पण नारी आगले गलीया. तो में बलीया रे, अम आगल नरपति यु वको ॥ अप गरि प्रयी को नवि जीत्यो, श्रीनगने नारयो चीतो, मर नर बनों रे, मी आगल को नवि जपो || तु ॥ १४ ॥ सिंह सापक ने होप जाण, तेदनां में चकचं टाग, एकादश गुणदाणे रे, अमें पाई निहांधी नरभणी ॥ अमें लाने ई गो भंडी, ओं चालनी नरकनी इडी, ए अमें इंटी रे, एलो चालना ना दंडक नणी ।। ॥ नुः ॥ १५ ॥ तपारें नृप तुप आतं, अमें कूड कदिप न मांस, रपटोंमें ना रे, उडारी रो महिनो ॥ अमें सतीप न गई, अ दीये ते मा राई, बीजी न पाई रे, नरपनि मो गागिीर को पडे ॥त. ॥ १९ ॥ तुम करघु होप ते र .

पर आ 1 THIT निप परपी गाज M . । . . धान ग . " . . . 31 कोइने । ....... मा. को । . . 1 . 7 . । कार्मिक पिनी नीत । दो कन गा दाभी, नए " नाम्या चम • गाना प्रहार, दामी 4 . . , ३ । - । , - • गाय, कुमरी ने रोग । ' नपनी मूछ. फल ना ।।१४ गय पल तुम जा तम .. गक, काची पूरे रहयो हेडकी ॥ गच, गारुडीची २२ यान ते वगै रे, नपपाणा नाराय: गप योल्यो मा न मोटा मा मनला। .. सहि करें । कता.11 11 पाबरें सय ली नात. मन्याना जाता है पाम्या या माना ॥ ए 1 -- . चोपा रसासनी मोटी, कहो .. लिखी चीठी रे, कही पानी पानी ॥ इहा || इस करता ते रड रिना क्षगकार निय, प्रगया 1 । नरपति कई कुपरीने कर जोड | kal. बंधन और ॥ २ ॥ हे समकमी य ॥ जेदयी करि नेहवी लद्दी, रमानी व गि तो पणी ए था, कांजे करमा मार । १. निम रहे लोकाचार ॥ १ ॥ वांग यी १.. अदि क्षेत्र || कुंदीपाक देइ खगे, गयो है तोपोने दुःख दाखवी, जे कायो अपगब नी, ९ तुम मन साध ।। ६ ॥ इत्यादि हमरी दोष ॥ धनयी छोडचो परों, pin. ॥ ॥ गुप्त पणे नृप तिहां यकी, न मुख पोपा आरियो, निगग यइ निलंड । मुख पालोने, रोदे तस्कर मान || कि, मोपलग्न धान ॥ ९ ॥ जाण्यं त - साय ॥ लगेया देणे पढी सालीपी. बानी देखी परायां माल ॥ ऐट साल ॥ ११ ॥ ते करणां नृपने हर दीवाली दासबे, वह मन होलापूर । लोग, की ममता दूर ॥ एट? न चहने नर ॥ १३ ॥ - । । ॥ दाल ३जी ॥ धग मी हिले इमरी दो कनने, .IN - ने कारयो कूटीने, जिम हांकोटी काटे श्वान || १ ॥ लो प्रीतम माहरा, तुम परसाद वाध्य जोर | लिंक हारथी, मनचुत काढ्या ज्यु करी दौर ॥ सां० ॥ २ ॥ वित लगें नृप जाणशे, खटकशे निशि दिन कालजे साल । निराशी थइ दोन ते मारनी, जी ले गयो माल || सा ॥ ३ ॥ साजी इलदर फटकडी, सेवजी पटने मास वे चार मम्मइ अझेलीयो, खाशे त्यार याशे करार 11 सां० ॥ इत्यादिक श्रवणे मुणी, हरिवल नारीनां करय वखाण ॥ लोणी साची तुम, पणधारी में दौठी मुनाग ॥ ५॥ प्यारी माहरी ॥ ए आंकणी ॥ तुमें छो आतम जीवन माण आंखनी कीकी जे तुमें, तुमें छो महोगं घरनां मंडान ।। सां० ॥६॥ कुलवधूनां ए चिन्ह छे, पियुशुं गख मनह पविन ॥ कष्ट पडे केइ जातिना, तो पण सतीय न मूके सत्त ॥ सां० ॥ ॥ ७ ॥ सत्य वई संसारमां, सत्ययी वरशे जग जल धार !! सत्यी पृथिवी थिर रहे, भूतारी रहे सत्य आधार ॥ सां० ।। ॥ ८ ॥ मुरगिरि पण रहे सत्पथी, सत्ययी शशि रवि चाले आकाश ॥ पृथिवी पण फले सत्ययी, वणसइ भार अहार र ल्यास | सां॥ ९ ॥ वणन व्यापार चाले घर, हुंडी चाले दे प्रदेश ॥ ते पण सत्पथी जाणजो, त्रिजग को सत्य विशेष ॥ सां• ॥ १० ॥ केवली केवल सत्यने, त्रिगडे वेसी करेय प्रकार । धर्मनं मम ते सत्य छ, सत्पथी पामे ज्योति निवास ॥ सां०॥ ॥ ११ ॥ नर नारी सौह सत्ययी, सत्ययी माने सहु संसार सत्पथी के जे मानवी. नव दंडक लहे ते निरधार ॥ सां ।। ॥ १ ॥ शिरनामें लिखे कागले, साटी चम्मोत्तर आंकजे दोष ॥ तेहमे पण जन पंडित, सत्य ठराव्य लोकमे नोप ॥ सां. ॥ ॥ १३ ॥ सत्य मन छोडे मित्र तुं चांगडे लच्छी चौगणी होय । .

॥ भामरंमा दो कर्मनी, राले पण नटले होर ॥ मां. १४ ॥ इगि परें पगलौरिरम, मत्पी पाम समनी । सारी मनो सत्तथी, तो लोसनी मा दंग । मां॥ तीरासन कोरीय, माडे पन नाप !! मगनी परिमाण से, भारे सन्मष धार || मा• ॥ १६ ॥ भद्र मारे दिम पपो, वेगन मार्य सत्य लिगार ॥ दादोसा नृप पारी, सापपी लमो में अपट भार ॥ • ॥ करणपण पार्टी, ते पण सत्य हो परमार || मनधि सोला दिले, रातिय शिगेगान पर गमार ॥ गां• ॥ ॥१८॥ोल सती धापोटी, में पण अचानी गरगर । साप को सरे पापपी. मिनर ने पण म पाप || गां ।। ॥ १९॥ प्रेशर चितामा परप के, मलपाटी पपा पास इस मामा. रामजो पूर्ण गरपरिक nt. ॥ १०॥ शारिरले नारीने, पत्य उपर दी in ॥ नीति कर्ग, दो महोशी ॥२॥ मारे सारे पदारे, जिदिर पो॥ रोहर मानी पर, पररिस ग भोग uni• ॥ ५९२ म मदिर, भापो एपका || लिपि, निरनिने मान , at. ११३ti. FM मार लागतो. गनी...' ॥ rity सामाजाग ने एE Af. 2 २५ र रोत. निरो मा शानहा न. से 1 retur

(२८)
माल
-
मल्प काई आखा जगतनुं, मो मननो पण काहं खार || मां ॥
॥ २०॥ इणनाश हणीय सही, तहतं पाप न गणीय काय ।
जेहवी देवी ते हवी पानरी, एम उखाणी नगमां कहाय || सा॥
॥ २८ ॥ ए मुद्रायें कामिनी, काटने पाल्यान छ काम ।।
काल भूडो छ संसारमां, कालथी पिगडे केहिनां ठाम || स०
।। २९ ॥ इम जाणी एरियल तिहां, समरयो सागरसुर उज
॥ लब्धि कहे गुम सत्यनी, चीया उल्लासनी श्रीनी
दाल | सां• ॥ ३० ॥ इति · }
॥ दहा ॥हिये हरिवल हरखें करी, समरचो सागर देव ।। ते पर
सतक्षिण आषियो, कहो षछ किम समरेव ॥ १ ॥ तव !
रिवल कर जोडिने, मरने कहे सोच्छाहकालसेन कम जातिने, धं
सुमें भीममाह ॥ २ शल्प काही प्रम माइसें, निम लहं मुख पर
पूर ॥ रिण रचूने मुझने नटे, वेहने टालो दूर ॥ १ ॥ इरिय
लगी पाणी मणी, थयो तब मुर परसन्न ॥ इरिग्रल केरीको
निमें, संक्रम्यो मर तस तम ॥ १ ॥ दिल्यांबर पहेरी करी
पहेरी भूपण चंग ॥ दिव्य रूप हरिपल तणं, का मरसम अंग
॥ ५ ॥ हरिपल पासे मर करे, वैक्रिय वीज रूप ॥ नभम
रगयी उनरी, भाव दो भेटे मप ॥ ६ ॥ चमत्कार चिचमे ला
खित परसद सार ॥ हरिबलने देखी तिहां, मलिया
पांद पसार ॥ ॥ नृप मंत्राने मंगटीयं, महाई कुख
अपार । निम रोगाने दीगीय, चांदा उपर खार ॥ ८ ॥ हरि
लने पाली पगे, पल्मे नासी छार ॥ ते किम पाग भायो,
सुश करि शिणगार ॥९॥ हरिवलने सही मोलल्यो, मदनरेग
त राय || भागन स्वागत नृप करे, का प्रगमी पाय ॥ १०॥ पुणे
नृप हरियर मनें, कहो यमराजनी वान ।। मीनी हकीगत सावित
या, कुण ए तुम पात ||११||

गृलगी मुदर ॥ र हारकल नृपने कहे, मांभला माणाधार है। जेहवी नांनी नेहवी कह. तुम आगर सार हे ॥ १ ॥ रंगना रे नृमने रे. मांस दे सांभो । ए आंकगी। जब थइ करुणा तुम नी; की मो भगनी प्यार है ॥२०॥२॥ ननाविण नृप परमादधी नांदो र स्वर्ग मशार है। इद्रपुरी श्रवणे मणी, दीठी ननो श्री. मोर० ॥ ३॥ ते पूरीना नाणजी. पंता को वग्वाण आने गमल कती, नाणे कोरी गमे सम्या भाग है ।। • पंचरंगी रवन फरी, पत्री लाम्व रिमान है ।। - ने उन साना, नवि नारि मातिनां नाण ॥ २० ॥ ५ ॥ एक विमान ऐ, पण चरस प्रमाण ॥ कोरणी की का, सोहपदासीनं ठाण हे ॥ १० ॥ ६ । नेह वि होमता महोटां पर दारो ॥ में दार दक्षिण दिने पर दरबारी ॥ र• || - || भर्गपूर्ग इणि परें, नाग पहाण ॥ तेर सभामा गयो, मिरा पेठो पप ॥र.॥ ८॥ मर अमर नर मेवग. मेली परम्पद तरह - मन्याप सोर नार यं, बेग र यम पत्र ॥र.॥ नेते पम भरवापसी, पीरदिने चंदो ॥ ममा वि रा. देव दापर दिनंद ॥ २० ॥ १. ॥ पुग रोक्ने, सहने गधे एक पारो ॥ ने जारी करणी नां पूरे मारे ॥ र. ॥ ११ ॥ कि पने 1. कहे सामरप तान ॥ शनि पमुना मान माल समातो. र. १॥ यांनी म मा नागी तान ॥ ममा मन भरिपनी, घर 1. ॥१५॥ मात्र भारदो, ८० ॥ना मारा, पानी ।

॥ २० ॥ १४ ॥ दो मंत्री यमरायना, काल अने माहाकालो ॥चित्र विचित्र दो दफनरी, पुण्य पाप लिखन विशाल हे। ॥ २० ॥ १५ ॥ दुनीयां जे करणी करे, मुकृत दुकान देखो ॥ चित्र विचित्र ते मांडिने, दानवे यमने लेख हे ॥ २० ॥ ॥ १९ ॥ ने करणी यम देखीने, घे दुनियाने चीख हे ॥ मुकन ने मुख दावे, दुःकनने दे भीक हे ॥ २० ॥ १७ ॥ इति उपद्रव जगतने, माना जे रोग हे || काल दुकाल ते जे परे, वरना मेलवे जोग हे ॥ • ॥ १८॥ पूर्वन व्यतरी व्यंतरा, बलगे से सनमुख है ॥ ए सवि करणी यम तणी, दुनियां में लद्दे दस हे ॥ २० ॥ १० ॥ रूसे जो यम जगतने, दाबी नारकी धान हे ॥ तूमे तो यम नेहा, आप ते सुख शात हे ।। ॥ जारी घो यमराजनो, कहेता नावे पारो ॥ यमनी विचार विशेष छ, भगवतीमांह विस्तार हे ॥२०॥ ॥ २१॥ लौकिकने मने जे मृणा, तेह में दीठो सत्य है । तेह सभामह यो, यमने कर्म मणिपत्य हे ॥ २० ॥ २२ ॥ तनग्विण यमें मुझ ओलख्यो, अवधि ज्ञाने सार हे ॥ देव शक्ति की मुझने, फिग दाधा अवतार हे ॥ २०॥ २९ ॥ नौतन' काया मार्ग, मुझने जीवित दीय है ॥ सारमह जाणीकरी, सजीव तगमन किधई " आगत स्वाम त घाण की माने ने भगज हे ॥ मोझ समाचार तुम तणा, पूढे ने यमरान है | २० || २५ ॥ ततो तिहां कर माडीने, यमने करि अग्दान हे || भाव्या ह एक रानधी, का तुम उल्लास ई ॥ २० ॥ ६ ॥ विशाला पुग्नो घणी, 'मदनवेग ते राप हे ॥अंगनने पम्पायवा, ओन्छन महोटो कराय है ॥ ॥ ७॥ देश देशागरे गनदी, मेल महोटा राज भो ॥ वैमास शुदि पांचम दिन, परपशे पुत्र रनन ॥ .

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सरो तिभिरार स० [[ कर जोडी कहे रापने, गंत्री ययण उदार ५२ ॥ ॥ ॥ १ ॥ यमनो जे पटिहार छे, ते आवे मुझ. माय ।। स॥ तो नइ यमने भेटी, भरी छिन वाप || स॥ ४॥५॥ तब नृप कहे पडिहारने, मुन मत्राले संग ॥ स. ॥ मर्ग भवन पद दाखवा, भेलयो यमनो रंग ॥ स० ॥ १० ॥ ॥१॥ करी भगिपत माहरी तिहां, करजो मुझ भरदास ॥ स० ॥ होलो पदो अस्वारी, मात्र तुमचे विसास स• ॥ २० ॥ ७ ॥ मोतो सह नगरी तणो, सपलो आवे साय | म॥ यम गनाने भेटया, भावे विशालानाप ॥ स० ॥ १०॥4॥णिपरें दिननी मादरी, यम नृपने करेय ।। स. ॥ शीप्रगते तुम भापगो, पस्नी रमा लेय ॥ स० ॥त. ॥ ९॥ तव भर कहे ते रायने, भी कही नमें गुम || स० ॥ मुन्न सामी यमनापने, मैलवू मंत्री SHR• ||त. ॥ ३० ॥ एम कही पाटिहार ते, मागी मपनी' मंगर ॥ स.॥ पेठो मानी जालमा मह जन देखम ईव ॥ 1.11 ६.११॥ मंषी पण कान्देसन ने, नृपने कोर जार ॥ म.॥ नगरी नन मह गाने, मणमी परे मनगर ।। • ॥ त• ॥ ॥ १२॥ पेठो पपनी जालपा, मंत्री पण तेचिार ग.॥ मुर पगें कारमेन मे, मंधी वली एपो कार ||M. ॥ ॥ १॥ कारी जन मा देसा, की मुर पयो जर ॥१०॥ गोता निण एकपलमें, पदोना मदरशर ग.न. ॥ १४ ॥ नगर्ग. जन नप आदि ने भीनी नारे सार • नाणे पंधी भागे, पर मनी गागाट || || मोती पीप मानो नो पार ॥म ॥ ताप एमन प्राप्ती गी. सोमो पो पार• • ? नररि सेना में करो मा पार प. ने गोपनन मोहरे, प भारे पापा 1. ॥ १७॥ में गाय

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(१३३ कर॥ २ ॥ इस कहतां नगगं जनां. बलीयां निन पर लोक ॥ उ साचो हारलो. पुण्य तगो ए पाक ॥ ३ ॥ कालपेन कृपा मे, पालग हरिष गप || जन दिये रंग वामणां. घर घर हमा दौर। ४ ॥सर्ग नग्ग दनियां मु. भाव सबली वात ।। ती करणी करे, ते नवी वडे म्यान ॥ ५ ॥ शानी नो दे मामयी, देखो स्वर्ग ने नर्ग || पण करे लोक पर्ने करि, रायें नर्गने सौ ॥ ॥ सागरदेव पमायधी, की काप । हाम्चल चरित्र ते देग्विन. लाभ्यो नम्पनि नाम ।। ७॥ हरिरल कर रापने, म कसे मनमे मान ॥ तम मत्री इमतिय, उपरो करायो लोच ॥ ॥ लंका मन मांकल्यो, नि पायो यम घेर ॥ तुम चूपया मुल नार्गश, तर में कार ए २५९ ॥ तुम मंत्रीनी संगते, करता तुम पग साथ ॥ पण में करा वीरता, करुणा आगीनाय ॥ १० ॥ ५ गुण जो मार्ग, रित पूनी भए || एम कहो विल तिहां, आन्या जिया ॥११॥ वनासिरी फमममिरी, दो पार्ग गुणवत ।। रिपु मुमचंद त्रिलोकतां, दो कुमरी दरखन ॥ १२ ॥ माय मिल संसारमा, टाली सपलो र ॥ करणी करे जिन पनी, रिचल मजा अडी- 2 ॥ परताव देपी पावं, राषित करो धर्म । पुरनन मह पी पपा, राधी मिथ्या भर्म । १४ ॥ नरपति पन मन लानियो, निज की परिप।।से देशी पोरो करे, नरपति मनी विविध ॥ १५ ॥ ॥ सन ७ मी ॥ नानो नारलो रे ॥ ए देनी । मलित' मांगे परजने रे, पेटी ने निज धाम || मन मापलो रे ॥रा समें एकाउरे, अगए कार ! ! गा० ॥ गणांत गुग पायसी सामगेरेर मौरीका परीकी इनो रे, नागीन भर पारे | मा. नागपी र सप T . , Tr । - नाम पागा पीक मानामाव मनाम . ना न ग्राम . विण सांय तिर को म्याद नावालान य' 71 THE निदे २. पानने ढोल वाज TIT साना रिली पोप्यं वयर तिर लही नम | मुझटाप ।। । 11 Tr मा मा० जना 7- ।। ६ ।। मगर पानी मान मा || मा पग 1.7.मा. IT' नपान ཀོཔ། *།1 17, मा छ खो अभाची काय गर बारामारा परेन', वापाग..दाप पार". बहन, बनाम 11 TFiT it. जात अनना जिनयर काला बाग ।। मा माना आण।।२। बिगान गमाप || मा काम पोर .. i?. ! म्ग || HIT सा काम दम पर कामच चला रहे, नया तादिक नारे गगन न गण काय काय । न पीती हशेने जागो रे ज कर पात्रा .TT प्र -r 1 . -- ।। - - त 4 सा को खरु विकार रे, सोई तन मन रंग ॥ १६ ॥ साली भने ए उपना, पडवा नारकी कुंड ॥ सा ॥ थिग विग मा गै बुदिने रे. जे थयो व्यसनी भंड ॥ १७ ॥ सा० ॥ धन हरि बलनी चुहिने रे, दीघु जीवित दान | सा० ॥ अजर प्याले इण जीरन्योरे, दीठो वड़ो सावधान ॥ १८ ॥ सा. ॥ जो कोसे मुझ उपर रे, तो करे मंत्रीनी रीत ॥ सा० ।। राज लीये मुझ एकलो रे, तो भी रहे परतीत ॥ १९ ॥ सा० ॥ में महारे हाये करी रे, करणी खोटी कीव ॥ सा० ॥ नोति मारग लोपी करी रे, हरिबलने दाख दीप ।। २० ॥ सा० ॥ ते किम सांइ सांसहे रे, जे हुं चाल्यो अनीत ।। सा० ॥ तो चीखामण भनी नहीं २, कदि नहि विसरे पिच ॥ २१ ॥ सा० ॥ अवगुण उपर- गुण करे रे, ते तो हरिवल एक ॥ मुझने राख्यो जीवनो रे, दयावंत विरेक ॥ २२ ॥ सा० ॥ मगण पुरुप में दीठड़ों रे, हरिवल साहस धीर ॥ सा ।। उगारी शिर सेहरो रे, वीरः शिरोमणि वीर ।। २३ ॥ सा• ॥ धन हरिवना नानने रे, घन हरिवलनी मात ।। सा० ॥ क्षात्रवंशर्मा दीपनी रे, सुभट शिरोमणि जात ।। २१ ॥ सा० ॥ धन धन ते गुरुदेवने रे, जेणे वतापो धर्म सा• ॥ रलिहारी तेहनी रे, जे राखी मुन धर्म ॥२५॥ सा०॥ इम हरिवलना गुण स्तवे रे, परजामें मदनवेग ॥ सा. ॥ तोल वधारयो माहरो रे, हरिवल कार नेग ॥ २६ ॥ सा० ॥ तो ९ पुत्री यारी रे, परणाई शुभ काज || सा० ॥ कर मूकामण वली दीयं रे, महीपल महो] रान ॥ २७ ॥ सा ॥ गुण ओशोगणं ए पहरे, ई हिचे या निम्पार ॥ सा० ॥ पछे हुँ संजप आदरं रे, ज्यु मिटे भवनो संनार ।। २८ ॥ सा ।। एता दिन भूलो भम्पों रे, विण दर्मन मुन जीव । सा० ॥ दिवे करणी पहवी करूं रे, निम लई मुस मदीर ।। १९ ॥ सा० ॥ इस आलोचना परज में

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د ننه شد شمن دشين ما
تر می شد علت منه لم
: د ده
قد ذیه نه ، قئ مننت : ي. : نه. ط طنین
زید ترمه سه ل
امين من معه شی گه ل درد، هد
طعنه سنة خ شده شنا شدن به تو، تند؟
شور شد که بنده نیز به که نه به من شد
نه من نه به س نه انسان می کند ، به
غنية يمضي ستة مشي عندين نه زنة { ، از " شي
منة ل مینه } شد يهوة
لا غمون مه که نه
: نمره ده ت د
کنند من مية عن
تسنیم به این است که امر پر منهن

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दो ॥ मी योगा बालमनी ए काई, शुभ रहो
दिलीदार नो २८ 15
॥रा मदनंग हरये की कीग सव मार मोन
मापद. परम उप जलार ॥ १ || जमारा नगरिया,
नगरी निसारी साररने गने टपो. दग्न्या जय उपहार
।।३॥ यंदोलन पूपा ग. भाणी मन उमगर । प्रामीन
रा करपा, दान देदेकार || । पर मन भनि
रस, रंग जग नगे पार ! पल में गा पयो नानी
शिशिरी पान नगरी जन मा हापा जर पो
परेपल गप | देशदेशालि भेटणा.ले माने नप धार । ' ।
दिमाग कर्ग, ने नर पदनांग : हरिने गम्प
ररी. माल वापी ग ॥ ६ ॥ बिन R 4 भागा.
॥ प्राण नारी चि. हि पनि भान
R॥७॥ नृप मापाता बने. समो माग होय ।।
नोमानी राजोदरा. तो है ले. दीय निश मानपने
परगा, मनमार र रमणी नानी का याच
घार ९॥ एन की नृप मा पपी, चहरे परिवार ।
दहा PATHE.. हरेपन र नाम
लगे भासदनाला बार, भारत
एपी: मंगना का मन कमीशान
मासह पाली रे पानी मा भारमार,
गनी समातिान मे. काही
॥ १॥ मालेगा, न गरेर
पिने सपनों का मत RT
समान सपना !! . पाने मार
Forum पर मार
पा राप मगर

. (११०) २॥ पम्मानमने गेहे रे, समकेत मांडिया रे ॥ मूकी परनो सालं शोच, पच मुष्टिशु कग्यो निहां लोच ॥ राजा राणी आड़ में चारित्रने ग्रह रे ॥ १ ॥ नव हरिवल गभ भावे रे, सप्सराने ऊर्ज रे॥ दीक्षा महोत्सव भावें रे, कग्यो जन संस्तो रे ॥ वरमे ज्यं भादरचानो ज'धार, वरमे न्यु हरिवल सोवन धार ।। की- जन जेता नेता रे, श्लोक भणे घणा रे ॥ ४ ॥ सुरपतिनी परें कीयो, महोत्सव दीक्षनो रे ॥ क्षायिक समकिन केरो रे. ग्रहो दंड ईशना रे ॥ दीक्षा उच्छवन फर एह, हरिवल पाम्यो के गुणगेह ॥ शिव रमणीनो माचो रे. पाला बांधियो रे ॥५॥ धन धन मदनमपिनी रे, बलिहारी ताहरी रे ॥ संगम नारी मारी रे, करी में नाही रे ॥ धन धन स्वामी तुमरो भेज धन धन जीत्या गा ने देप ॥ ते गग लीणो तुमरो रे किं. कर थइ ग्यो २ ॥ ६ ॥ धन्य स्वामी करुणारसे रे, मन संतो पियो रे ॥ रावेग से करी आतम रे, निर्मल पोपियो रे ।। धन पन्य स्वामी नुम दृढ चित्त छांयां धण कण राजनी नीत ।। धन धन्य स्वामी तुमचा रे, मनोरल भावने रे ॥ ७॥ इम गुण महोदारे, मदन रंग ऋषिराजना रे ॥ धन्य धन्य मुखथी जपता पारिवल पुरजना रे ।। इगि परे करता स्तरनां अपार, ऋषिमन मगमी निज भागार ।। इबिल गमा आदि रे, सह वादी पल्या रे ॥ ८॥ हिवे ऋपि मदनगनी रे, गुरुसगे भो रे ॥ चौद पूर्वना भर्य रे, विचार ने संयुगे रे ॥ पा. पूग पंचाचार, नाले सुधा नर व्यवहार || दंपति दोये साचां रे, जिन मतमें वहेरे। ॥ ९ ॥ अध्यातमरा मंदर २, निरवी निह रहे रे॥ विसक तणां गे मंदिर मे, मोयं गह गहे रे ॥ तहमें कीयो दो जणे याम, करे निहां रेठां मान अभ्याम ॥ ज्ञान ने दरिस पर मन रे, रहे गीनां यकां ॥ • ॥ ध्यान मुतसने ठग रे, दो

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. भरिक जीवन निमारे, गति माया रे ॥ भाग प समामिल परम निपान, मगति या दाता निदान ॥ किनारे का रे, गूम सिद्धागार ॥ १९ ॥ पहरा गुग तु गाणी रे, गांकन भारनीर शि विकमा पानी , पर नगारगोरे ॥ [मो भरिया सपकिन गुद. ना गगदीय दे गुमने पुर। सो सरा पाले करीने , गनिमारजो रे ॥ २० ॥ भषिक जारने । कित रे, जीरन प्रल रे || गमगियारी नीयने रे, पिण भारुल के रे ॥ इम करे गम्भिाविप उगमाल, गोपा उपासनी गपगी नाल लगा कर्मा जीररे, गयण ए पानशेरे ॥२१॥ ॥हा॥ति गुणनो भषिगण में, हरिपाल के पान ।। पांशाप नमो, विगारा ॥१॥ मारे दरमाने मपल, मोसो दाननी शा2 || ना सिर गोपगे, देवे दान । शाल ॥ २॥ नर मोजे पुण्य ), गर पणे भनुसार ॥ गन्न सफल फगमा भगी. मोरो राकार || साते सय पारे, को मानन फोर ॥ प्रत्यको नित तणा. मरिस नोट ॥ ५ ॥ ममापिला नि दिरों, गुणी आणा राय । माग गम को उगा, गाने पनी गाय ॥ण गर्ने फोमीने, को न उपाद शम्म । कोही भर भापणा, सम परीख 17 ॥ ६ ॥ण पारिवल गमती, पारे राज्य गरम । परमाने समो, मरिमन भी मपंः ॥७॥ ॥ दाल • पी॥ मानी गागीरा मा धग, समन पिणारे मो. मागे मागिगर मारोए देशी । भरिया नगरी पिशाला भारु, ममाला साहनी रे लो, गान केलारापुरी लो ! ५० ॥ गोमबासीनी पासासी, गोली र लो। ठकार और गीलो॥१॥ ५० ॥ प्रभा भाग, भोगो मगर : को, दिस भाग्य शिाया मो॥ भ. | म परमा गरमने, : नाग . प . ल पारामानने दो। मगर पाम ग । पोलमें देने पुर पिं सीर । ॥ भनी गया ? माग रा. इज्जनो।।।। ५. सम. मारे दो नागिय काग । परतारेग, मार मिहा माग पपरा ग्ज इग, पा राजना गाजरा मेम. ॥ पापा मम्माना गया नाम नाममा सोमन पंटात रितुदी। 1. स्प पानी मानी वेगना रे मो. साये रहा परेवा. मामा परेका राशे॥॥५. ॥ यो मानार रेमी रा प र्गपाल से र.रायापार में पारा 1. निमन्निी दर गरीaniy. कास्नी. Rm सनाटक, समानारे, Pinar पविनाश न. सा भनी मो... पिको नि नितिरको ॥६. * मा मा गई ? ..!! पुर, नस ki. ३ र , FEE Frireak TETTE. Smitri.k Hin ।

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॥ भ० ॥ वैसी एकांत निमें रिवग्यांने यन रे । तमेन भूपाला लो ॥ २२ ॥ भ. " जो जी पी मरा, कमा अगि रेलो. कीयो शाम अमायनो ॥ || चौपा उल्लामनी पुण्य, पचासनी लब्धिय रे ओ. भांबी दानी दाग ले ।। भ।। २३ ।। ॥ दुवा ।। इणिपर चित्तमा चिनी, घमंनमेन भूपाठ । कागत पिश लेखण करी, मालख ग्माः ॥।॥ ममम्ति श्री श्री मना, चरण कमान नाम नाम लिख लियो गम्यामणो. जामा जाने उहास ॥२॥ नृप तडावे नतग्विणे. पनियागा मग ।। ते पग वदस्विग आरियो, मगमी नाय जगीय ॥ कहे सुग मंत्री, आ मोंपू तुझग्य || जामाना मझ पत्रिने, है। रेप विशेष ॥ ४ ॥ कहने प्रणिपत मादर्ग. घी कग मनहार ॥ कहेजे मुसरे नेढया. मूक्यो मुझ निधार ॥ ५ ॥ गाय मा मग इगिरें, मा कांपी जोर || मन मी मच ग. देर नगारे गोर॥ ६ ॥ कचन पुग्ना मानवी, सघने नाणी वा' । जाताना निन पत्रिने, मुक्यो तेहवा साथ || " ॥ मंत्री माथे परवी, सेना पंच हजार ।। पोजन चउसय पिन, श्राव्यो विगा। पार ।। ॥८ || पीवालापुर नयरना, दिदां महोयं मडाण | जाणे मग धरी वसी, आवीन इण टाण ॥ ९ ॥ वाही महोले मलपनि, फाल चिदिशि दनराय | भागे वन नंदननी बहनडी, आय वमी इण टाप ॥ १०॥ इणिपरे सेना मंत्री, देवन हॉर्पत होय ।। पेसारो पुरमें करयो, बेला शुभ घडि जोय ॥ ११ ॥ नगरी ससरी पोरता, आव्या ते दरबार । हरियल नृपने भोटेया. उपनो हर्ष पार ॥ १२ ॥ हरिवल मुरपति सारिखो, घेठो धरावी घर ।। पंजीपण प्रणिपत करी, दीयो नृप कर पत्र ॥ १ ॥ । हाल !ी ॥ भनुजानो वासी साहेव. माहारे दिन रसो रे ।। मोरा माहवा ॥ आदिजिन करूं रे जहार ।। ए देगी।

+
कागल देइ हर्ष ध पित्तशं रे । मोरा साहिया ॥ ए तो..:
मत्री विशेष ॥ तेहवा तुमने मुक्या अपने देता रे || मा० ॥
तुमचे सुसरेजीयें लेस ॥ काग० ॥ ए आंकणी ॥ 1 ॥ निशि
दिन तुमचो राखो मिमचो मल्या तणो रे || मो० ॥ तुम सस.
रोजी भूपाल ॥ दग्सिण दी। पावन की आंगणो रे ॥
मो० ॥ तुमची सामुनो कृपार ॥ का० ॥ ॥ २ ॥ मुसरो
जमाई आनंद पाई एकटा रे ॥ मो० ॥ मी करो रंग रोल ॥,
नेह सुधारस घरसे पावस गया रे । मो० ॥ उपजे ज्युं रंग
घोल ॥ का• ॥ ३ ॥ अमची स्वामी तुम शिर नामी प्रेम
शुरे ॥ मो० ॥ कयं मुख वचनें एम ॥ तमाटे स्वामी अंतर
जामी नेगशु रे ॥ मो० ॥ पाउ घरी घरी मेम ॥ का०॥
॥ ४ ॥ मुसरो ने मामु नही कांहि फार थावती रे । मो० ॥
आव्या गिना माणाधार ॥ पजर तिहां छे जीव इहां से भावधी
रे ॥ मो० ॥ इगिपरे राखे रे प्यार ॥ का० ॥ ५ ॥ ते
माटे तुमने कई शृं मभने घj करी रे ॥ मो० ॥ दंपति थर
एक रंग ॥ वेगा यावो वार म लावो सहचरी रे ॥ मो. ॥ ल्यो
सेना तुम संग ॥ का० ॥ ५ ॥ इगि परें सयणा मंत्री वयणा
सांभली रे ॥ मो० ॥ हरव्यो हरिवल ताम ॥ कागर यांनी
मनमा माची मन रलो रे ॥ मो० ॥ सेना सजि अभिराम ॥
का० ॥ ७ ॥ निहांयी मत्री उठयो गंत्री शीघ्रथी रे ॥मा.॥
आव्यो ने कमरी पास । तातनो मंत्री ओलख्यो यंत्री अग्रयी।
॥ मो० ॥ वसंतसिरी उल्लास ॥ का. ॥ ८॥ मिलवा,
उठी कुमरी ही नयणधी रे ॥ मो० ॥ हर्पनां आंम् जोर ।
जनकने दीरें मिलियां भनि परें सयगयी रे । मो० ॥ मंत्री
कारी सटोर ॥ का. ॥ ९ ॥ वेसि एकांतें कमरी खांत पूछ
तीरे ॥ मो. ॥ कुशल खेमनी रे वात ॥ मान रिनानां

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(१८)
उदाम ॥ हरिवल राणा चात विाना वाजते । मो०॥पा.
ल्या जनमनी भूम ॥ का॥ २० ॥ मुसगनी मंत्री पुण्यप
वित्री नेयता रे ॥ मो० ॥ ले चाल्यो दपति सार । शीय प्र
याण थायो निगागे देयता रे ॥ मो० ॥ आल्या ज्या परणी नार
॥ का० ॥ २१ ॥ ने वन देवी दपति हरखी दीपला रे || मो० ॥
टेरा ते वनमांहि ॥ किया उनाग जीमण सार्ग कोपलारे ॥
मो० ॥ चउरगी सेना उच्छाहि ॥ का. ॥ २२ ॥ प्यारि
पयपे पियुने जपे हेतनी रे ॥ मा० ॥ वाणीय पानवे भूप | र
पुरी सम नाम रहे तिम वेतनी रे ॥ मो० ॥ नगरी बसायो सूप ।।
का० ॥ २३ ॥ श्रीजिनमदिर अनिही मुंदर चौपशु रे । मो० ॥
कग इहां नीरथ दाम ॥ जे मुझ परणी ते करो करणी रूपर
२ ॥ मो० ॥ जिम रहे जगमें नाम ॥ का० ॥ २४ ॥ तब
से मच्छी प्यारी मुलच्छी वययी रे ॥ भो० ॥ समरचो त्यां
सागर देव ॥ गुणणो रागी पुण्यविभागी सयणयी रे ॥ मो.॥
आन्यो सुर ननम्वेव ॥ का० ॥ २५ ॥ मुर कहे शने तेको
मान ते कहां रे ॥ मो० ॥ जे होय मननी व ॥ तर कई हरि
पल दाखा मुरबल मने वहा रे ॥ मो० ॥ नगरी बसायो खून
!! का० ॥ ६ ॥ तर निदा नाकी वाकि न राखी पलकमरे
॥ मी. ॥ वामी त्या नगरी विस्तार ॥ गमह मंदिर पोल'
मुंदर दलको रे ॥ मो० ॥ रचना कीर अपार | का. !
॥ २७ ॥ श्रीमानमुप्रत नग उघृत सो हती रे ॥ मो० ॥
यि हवयं करि पत्त ॥ दंपति दोनी मूरति कीनी मोहनी रे ।।
मो०॥ पूर्व जेलयं देवत्त ।। कार ॥ २८ ॥ राग वेगउक
दिग ने दडल देखिने रे । मो० ॥ दपनि पयो उनमा को
ज्या उल्लासनी म प्रकागनी पेखिने २ ॥ मो० ॥ कहि चियें..
ग्यारमी दाल | का. ॥ २९ ॥ इति ॥

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. रंग वधामणां । ए आंकणी ॥ रतो पूना भक्ति की 4. एतो प्रणम्या देवीना पाय || स. ॥1॥ घन घन मावी जगतमां, मगटी तुं जन मुख इन ॥ स• ॥ दीन दुःखीया जीवने उद्धरी, करी पावन सपद हेन ॥ स० ॥ २॥ इस आसना, वासना देवीनी, करि दंपनी वोले आशीप ॥ स० ॥ माना जीर जे मुगिरिनी परे, अम पुढची सबली जगीरा ॥ स० ॥ ३ ॥ हिवे हरख्यो कंचनपुर धगी, एनो वसनसेन भूपाल ॥ स ॥ तेष घसतसेना रागिणी, पट्टराणी यइ उनमाल ॥ स० ॥ ४ ॥ निन पुत्रीने वर कारणे, शिणगारी नगरी ते सार || स." एतो देव दाणव विद्यावरा, एतो जोया मिलिया अपार ।। स.॥ ॥ ५ ॥ एनो गजरथ घोडा पालवी, शिणगारथा ते बहु ठाठ ।। ॥ स० ॥ राज मारगमा विराजना, पचगव्या सोरन पाट।। स• ॥ ६ ॥ दुर्याना हे तोरण यांनियां, विमें मुरतरु दल मह कंन । स० ॥ एना घर घर चहुदे चाचरे, फुलमालागुंज सोहन ॥ स. ॥ ७ ॥ टोडे टोडे मोतीना गुमणां, लहकी रक्षां तेजमें तेज़ स. ॥ मान कमरी वरने निरखवा, आवी सर्गपुरी नेहे. ज ॥ स. ॥ ८ ॥ शिणगारी नगरी इणिपरें, हरखी नृप वसं तसेन । स० ॥ चतुरगा सेना सन करी, पर कुमरांने तंडवा तेण ।। स॥ ९ ॥ गयणांगण गूडी उच्छले, गुंझाला गुंज नि शाण ॥ स. ॥ मारेला सबल ते सज करयां, नगरीजन कुमर मुजाण ॥स. ॥ १. 1 इम आडरा नरपति सापइयुं सरल सय ॥ स० ॥ चाल्यो उमरी वरने लेडवा, पुरजन हप धेरै य ॥ स• ॥ ११ ॥ नायोवन ना सोहामणी, मिली गावं मधु रां गीत ! म ॥ रंभा उमीना पद गायनी, गार कोकिल स्व पनी रीन || सः ॥ १२ ॥ दलबादल देसा पुत्री, नृप पुत्र इसम भरान । स. ॥ निम भरिकने समक्ति मिले, निम : -

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॥ २५ ॥ जो जो मवियां साधुनी संगने, लाह्या नौवदयाना धर्म ॥ स• ॥ यपो परसन जलनिवि देवता, तिणे वधारयो मच्छीनी मर्म ॥ म ॥ २६ ॥ थयो चावो ते चिहुं इंटमें, भोगवे तुम ऋद्धि समृद्ध ॥ स. ॥ जाणे मुरपनिनो समोवडी, यद वेठो म च्छी प्रसिद्ध ॥ स. ॥ २७ ॥ मलें प्रगट्य सद्गुरु जगतम एपगारी परम कृपाल || स० ॥ कहि चोया उल्लासनी चारमी, सच्य संपोगनी दाल ॥ स. ॥ २८ ॥ ॥ दुहा ॥ एहया सद्गुरु वयगधी, पाम्यो निनावर धर्म ॥ ययो परसन जल देवता, बपियो मच्छी भर्म ॥ १ ॥ हरिवल दो पद पी लयो, सागरदेव पसाय ।। टफराइ रवीश लाखनी, पाप अ व ग्रहाय ॥ २ ॥ शुहा दंड निरानना, दिसता जाणे पहा ।। गशालामें गन घटा, माहे मइस प्रहार ॥ ३ ॥ सब पिलमें संमारना, शोलने रागी सच्छ ॥ पटराणी पापी वडी, वसंत सिरी मुकपच्छ ।॥ ॥ पूलगी परिगतनी, काली कर्कशा नार। ते पण हरिवलं सग्रही, कार आकर अवतार ॥ ५ ॥ अमारि: पला चिहुं दिशे, निदां मूबी छ आग 11 निहां मूवी को जी घना, काही न सके प्राण ॥ ६ ॥ गिपरें लीना भोगवे, पूर्व पुण्य पसाय || चावी यो चिह इंटमें, महोटो हरिवल राय ॥ ७॥ हिये मसरो हरसे करी, वमनमन मपाल !॥ नामानाने वानवे, कर नोडी उनमाल ॥ ८ ॥ यो भन्मनि दीक्षा नगी, आणी पं अपार ॥ शिव रमणी वरवा अमे, लश मजम भार ॥९॥ पम कही भागा लही, मागू मपरी दोय ॥ पंच महावन उच्चरमा मविहिन मद्गुरु जाय ॥१॥ चढ़ने परिणाम करी, पा पंचाचार | उन तपम्पाना एगी, ययां मयां अगगार ॥ १॥ क्षपक श्रेणी बढतो धकां, तर लयो गुणठाण ॥ राम ध्या-ना जो. गपी, पाम्यां केवल नाग ।। १२ ॥ चौपट इवादिक मिली, 7 P1 211 " माप - 1 - नात नंद रचेग ॥ पारिनने माय । ६१३॥रल कमरा भाग. शंटल होकरी, पrint in वसनने, पन नमनपर नार । पर पार || १५ ॥ ॥ दाल १५ मी। नपगं नगीना माग गे, मग दोगवीग माग सहवा कार पदेगा। रंग ॥ पागल अपहा || माग पत्र | यपो गुण भगिनी का । || • .181 प्यारा, पर्मना मोही शुध. अनभव गर। " में पारेवल पन्ना पार हो । ए मारणा दिसे ॥ १० ॥ पाटग देश नि ।। गना || पु. ॥ विलमे य म माग 1 गग किय जीन दया नना ॥ पुः ॥ गण । . परनय देखी पाखरं ॥ १० ॥ हर म... 5. ॥ ३ ॥ ताहिर माहमा धमनी ।। १ उजमाल शे || मानय भा सफका छन माल हो । सः ॥ १ || रम जागा पु. ॥ विहां लोगह उपदेश 1 | ki मुटु ॥ पु. ॥ गावं निहां नाम विशप ॥ ५ ॥ पोश देन सद्दामणा || पृ. ॥ कोस न प्रामाद हो । पर भगाया स्यगमें ॥ पु. ॥ उड़ा मरका प्रपाद हो । मु. ॥ ६ ॥ अमारि पलाये आपी || पु० ॥ पोडश शार हो || भार शद को नवि उपरे ५० । सघरी परना विचार हो । ग. ॥ ७ ॥ नव भैई जे पृण्य ॥ १० ॥ भा देशम

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॥ १९ ॥ पुर जन मा गनी पया, पृ. !! गयणे निगा
॥ साह मिली गुम माना ।। । नपने वा
को मनाप हो ॥ ॥ .. भले भाइबरे उच्च प्रा।
मोदी नृप दरगर ॥ श गनर भी मिन्या
मिडिया पर पसार हो । म..." भल भग गा में
1. ॥ नृप पण दे करें अग हो । मनमाना पछी
जाने ।। यु. | मिया ने रंग हो । मु. । ..।। इमिरे
लीला रागनी ।। १० । भीगई मगर हो रहे भान रमता
में । पु. वीशाला पुरवाय मागास लाप
TAY || .॥ मोहे ज्य नाम हो , f. हरिकल शोर जनर
६॥ पृ०॥ सोरे का हो । मु. । १५ । ए गुण श्रीवर
पानगो । पु. । फलिया नोग्य मिद हो न नाश
सापनी 16 नग्मी कही पनि हो। म ।
॥ सा पर विपप सरा विला, दीना सेना दिन । कर
समिरी परनारी, जन्म्यो पर रतन ॥ , श्री नाप सिंह
नगरी मालन केगे प्रो. मग 1 श्री र
11 २॥ गुममसरी ने मंगनी, निणे पण जन्म्य) पत्र । न
रिनाने मुख दिये. चलो पाना पत्र ॥ ३ ॥ वरना वन
अगटपी ज्यं सक्तिन । मानपिता रम्ये प. दग्नी दो मरन
॥ गमन लपमण जोड सु. मोहे न्य दो भान ॥ दान माने
आगरा, पुवायां को स्यात १५ । मोड
मिली दो भ्रा
मनो, यीशल मुर नाम | गन कानमें नमग, गले मन अमि
TRICी गणी ने अपे, पोइमें नं गम मया तिणे
पण अपना योगयी, जन्म्यो पर रतन ॥ .}} इणि लीना
मोगर, हायल परिसपान । ममारिक ने मुख कशा किलो
सम्म सान ॥ ॥ नन धन भी मन सागनी. मा

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मा. नगणा ने मांः ॥ ६॥ को कहां नात न का कहो पात नेरे को कहो भान ने को कहा जान इणि मर मर न वयणारे, अगरग वैची लीय स्यान । कोकग पनि से करो वरने रे, को ग मात्र ने कोरगा। थावं भने सहने कालयी रे, बाबा पाणी डो परे ।। मा? ॥ ॥ यूट्टी माया ने इट्टी कापिना रे, मटा अगा बंधन लो करे । फूही दुनियां दादाड मरे ने पण अने होवे गरे । मां ॥६॥प्राणी दाहा जाने नामि . गाय बहने गरि ग्रंय रे ॥ पग न हे उभी वारे माता ने साँव पहाटे पंय॥ मा... || कौट गरा का जायो २, की मानी जापणहार रे 1. !" हिणा रण बाटटीरे. शान प्रानी हार पनामा ।। इम ने नरेभाग्याज पर मत कीवनर, उनम्नां ने भरनी :: यो रे मरोंमो काचा भनो : श्यो । ३ बनना मन देखन संध्याग भी परे, टी न जाब विगन करे मा०॥ १३ ॥ दश नि मानव भर नणी . पायी जो न नम कबापरे ॥ नो दली शिर गिर पापा दोन निम करी गगासने न्याय रे ॥ पं. !! .. मारना, भांब्यो जिन्दरें बट ५५ नहनी झा की ने सपनाममापी ये पि निज :- र कसर । मा. ॥ १५ ॥ होने पर गणु पुण्य जात्रा बनाची हाय रे ॥ कोटी गण फल प्रदानयी रेफल पुग्यतुं दलि पर गाय रे ॥ सां- || २६ ॥ त्याने दीये ने धन विपण हे २. चांग, पापे धन पाय रे मन गण पामे Tणे , दान पानी मन्या न साप रे ।। मां ॥ -- 1 । दान २. दासगणु ने

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। । . ॥ इगियों का 4. । पनि ॥ अष्ट करम दल दुल कीयेमया सिद्धनी पहि। म. ५ ॥ एकाग ने श्राद्धनी प्रतिमा, मांगी जे माया सिधि परशुं जिन भानीने, ने पण वहि एक ताने ॥ ॥ १३ ॥ मान भी पाठ ए नाणे, नो नो भरिया रंग ।। दा पार निम वाह शुभ प्रतिमा, निम याद मच्चि अगे। ७॥ पट आवश्यक नाकार भादं, तेहना को उस पान || गनगमणी बावाने देने, पहंग माल प्रधान || भ.।। ।। १८॥ श्रााकन उपधान वया पिण, नकार किया नमूमे ।। मारने प" माग पहा पिण, बागा मत्र न मुझे ।। म. ॥ १९॥ पंनांगा में नो नो मरल, मा पा ||ने मागनिहार बल पाने, को करणी गरम ॥ । गगी गृाटा, माजमन पा. । निकरण गर्दै भार करीने. भानमभर भजन ॥ .' ॥रिका में करेप न्यनीकरणका रोपाटी न उपमुगमा पानी ।। पामे र दीन वरना प्रारमन दिनांग नीग्ण देग,माग पंपात तारा । । पपगाये गगना बचपदावागाः समरा उगमीग गया. म । पर , मिस मा .' यापन अनार की मौत, 1ि.. ५ . प्रमो नाममार, नटी श्री बाहामा म पाणी, ना immit म. . .६ ॥ R11 माँ गनी, गर निना ममता : मानवारी नमानी 17, भाभार्गमा माग गोगे !! R: #. मानी .

। म 1 भ || सोलमो उमा शेषना उप बिजगने प.निये ॥ मारमा महिपाक कल. मा कम्य जमना।।। 4 ।। १६२॥ आनने ममय पाना प्राणी, जे ? भा रनन Ri] । मोतिहासालन करत, गी नम कावी पगना "पटांत मणीने भावियां. मानना मार मान पर्ने ननना ने गग भाग्या. ते मत नाणी पान ." ॥ए भाविकार पुणी ने मई?. नई मंगरमा चो पाहागनी गाल पमम्मो.नए भाग ग्मान ॥ हा ! इस करणी काना पर्ग. वाल्या मगर । निपंद्र केसी, पाउ वारा । । । माना गया. पिया मोमट इ ना पर बिना की मादीनद ॥ १ ॥ गन्ना यशानी काकी १॥ मन्नाने शरमानीने. प्राम पगापों दा रानीरा, पामगर जाप || निरनि: २ पदा निमगह पाय ॥४॥ पापुर. जन पर गर्ग जलन । पपनात जलपर वो कर मन ॥ ॥ दगी मामाननी सगेन । पानी, नानी ममार अमार ॥ मन गी, परोलिमार ।। मग पेंगे मंगागनार ! नगर निगरे नारे मीरा ॥ सारेram रोग - Sm .. मानोर और गरी।। पासना पा मग. मोरगर सोसार मेरे भोपार मेरी और मोनेसामा मागको पोल !ने रिर्ग, - .. परमार

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A r नया ॥ मणमा T . 4 1 भ निपत FI पपने मना नानीना थना नाथ । मामशिना. 'मन की बाउन आय ॥ ३ ॥ कर्माण मन मोह पप मंण राछी तइने उपजावी वर्णी शप भी करणा मरा मिल्या, मुझने दीमा म ।। ना. पाल वर्ग ॥६॥ ना जाना + गजान । पाव भा करणी मना तदान नमी की कर, तेह नहा मागवाय।। || 17.. १. गरकी सह वि मा' - पर मे तदमे जी प - दातानी ॥ जयसिरी 1 [[ पता मामा । नयण वयण मुर ना । : ।। मूनद उपनंद 11 शशि परें सोय, मन 'म्यान मारन वाः, परगावी नमा गि नाक वामांगना मा.. ते कसकी भंग ज्यं पाना सम्बग्गा जी ॥६॥ एक कल्या ग ॥ तन विहां ॥ श्री जिनवर का समग मा ॥ दंसी ने नरली 17 A पाना ॥ ८ ॥ बंदि ते मुनि 1. नी । उपनद पे भरार, काली ने काय कांग, मल प्रसव्या ते f , . 1 मा J न .

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म्या राय करी न माजोग - , + - J मनद न -- . ... स ना भ.॥ . 1 . । Hn . नादी H पर पापी पाजामी गी 17॥ 1 भागो 4 भ ...मर ग मीरा

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एम . C , . . 2' 10 . उगने ने देर भाव ।। पी० । नाना र मार मो. निरपरी हिननी नानि मरे, संतोषी मी मान समी परासनातना रे मना दिन साप पति , ret 1 ॥ १४॥ रिमा पॉलिसी मा EF" कायदान पर 1.मर िपग करने TM मारा न्यानर ...॥रासिम कार. it न भर... भार...', र एन २ . -Par को न " ...। दोरगरी. nindme Fansmita... infrist. tat..::.. । । । . H

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M . । तिहां, उसनंद मिलवा रूप ॥ पावस? मियो मारना j१२ ॥ वि स या ग. करता कार को ।। नग समे बाल्या साघुर्मा. देवा ममा त गार । दाल २० मी ॥ मृडा नु र हूँ, मंदगडाए देवी ॥ कब से सर उटीने. कर जाटी नामें शागरे । गर पम माविक देखाने में, दवे महने यमागापा ।' ।। भाव म पो रे, हां यह पण लाभ कमाव रे ।। ए आणी ।। माम ग्वम गर्ने पार, कर्ग बंटा त्या चित्रगाला रे ॥ माथ मन पग निहा कणे, गुरु पासे बेटा संभाली । भ॥ २ ॥ मका यथा स्पिन कहि, सह बुझच्या प्राणी मजाणार ।। ममाकिन सामना पाया, गुरु मस्तथी मणी यग्वाणो रे ।। ५. ।। नव द्विजणा कर जोडीने, पंछ मंद्रा विशाखानी माना मा दो पुत्री दोन गिणी, तस कांद हा सरख गाना रे ॥ ऋपि दो कुमरी नणी. नम कनी रेखा जाय : भाजयी । एक वर्षमुं, गरु भाव आउ होय रे ।। भ० ।। . । न्याम्पनी मुख पामो, जो जिन पारगः वह गे २ ।। मिया पर जो उद मो, नो पन बहिन लशे रे ॥ भ० ॥ ६ ॥ दम कपि वर मण भानी, तुम मारग शुद्ध वताइरे । जो ने कार वा शो ना इसनी दोरी रपारे ॥ भ० ॥ ॥ ना भणी यह मार जी, न माग्न शुद्ध भांमारे । काज सर नही 7. भारी ने दालो रे ॥ भ. ८ ॥ तर गुरु का सगा भारको. नम पूना मभ शुभ जाणारे ।। मभु पूज्पा ने पामीमा म लोक पण वाणी रे ॥ भ• ॥ ९॥ सदगुरवचन हद वर्ग म आपथी पनरों नाणारे । म वंदन फल गांभी नम मनभा ल आणो रे ॥ ॥ भ० ॥१०॥ भवियां रे तुम जिन वदन भणी जागे रे, तो मांग मेश पायो रे ।। प भांकणी । वामरेजी सारथी भः ।। ।। नत्र अप करणा

(११)
पन निनमणी जान. रे ॥ उलट भाणी भावी तो, योष न
फल पा ॥ भ॥११॥ उठे चैन्य गमण भणी ए तो, पारी
शुट ते शो रे || छठ नणं फल पामी ने लहे, एम केरली दे
उपती॥भः ॥ १२ ॥ चावा मोपारी कर छीपा, तब
उमनं फल पारो ॥ पगल दे जावाने देहरे, तर दवाम तणं कम
भावे रे ॥ म. ॥ १३ ॥ द्वादश तप सम फल लहे, ए तो देहरा
मारग मानारे अपंधे लहे देहरे, ए तो मारा समण फल
आना रे ॥म. ५ ॥ देहम देखे दृष्टिमें, सव मास खमण फन्ट
हाम॥ मा पहोंने चत्य बहडी, नर बटमासी फल खाने ।
11 निनवा वागणना रमथी, ए तो वरसीता
फा हो। वण पदासगा देयता, तम गत व तप फल को
करे | भ. ॥ ५ ॥ महम तं व उपवाम ने, फल होरे मिन
पूने पतोरे । पृश्य मनं ते बरे, निनम्नाना मारें करे तो रे ॥
भ• ॥ ७॥ नन्यम कानो काढता, फट गो उपक मन पारेरे ।।
मांगी ग्ने जापन, परम पापण लाम उपाव रेम.॥
|| १ लाए पग फ लो, तर फनी माला पारे ।
वानिय गांत म भागद. कीर लाम मनन गण मारे ॥
।। १२. ॥ वृत्टीक वन प्राक, कला मारपालारे ॥भा
गति को प्रम निन तणा. नम जाये भाग वागरे । म.
॥ १० ॥ हा को निन। नि, नम होने भानम गुदा
र गयो ५ बाग, न मर गम नो परे ।
.! नारा करदा पीकनिन कि हरिल देश
ग गर मुरनुप पद र मंगाया मांग परारे॥..
२२ ॥ जो प्रग काटना , मासागर पार मारे २।।
प्टा मामाने जामारि गरे ॥म.॥ गर,
मन बहादगे, मग माननी ॥ तापमान न पकिरी

जिन पदवीनी लोवाना रे ॥ भ० ॥ ॥ शिकगण वाग्नी करीही जवनी पूना रे || पच नाभ नधिकर. हांश भावनि चो वीशी राना रे ॥ ५० ॥ २५ । ममारपाल पर भों, कोडी पांचनी फूल चहारे । ॥ देश प्रदाग्नी भागेपनि. थयो फल महारपी फायरे ॥ भ. ॥ २६ ॥ शण पर प्रभनी नापकी, प वो सपला संकट माने रे । स्वर्ग मुगनि मुग्न पापीयें, वली सं सारिक मस ने रे । म. ॥ १७ ॥ ए अधिकार ने सांभली, सानां मन मारें भेदाणारे ॥ जिन वंदन जिन भकिमा. नम आ वम रंग रंगाणारे ।। भ० ॥ १८ ॥ गुम्नी भाग्य माहामणी, पानी दिन सपली साची रे ॥ चौथा उहामनी बीगी, कहि सन्चे भान राची रे ॥ भ. ॥ ०१ ।। ॥हा॥ कपिनी गौम्य सोहामणी, मांभाल भपका विष । निन बदन अवभिनी, दिन दिनणा यया क्षिर ॥।॥ कटे उर नंद मो मनु, मी विच जि मेच ॥ ने विपि कहो अमनें प्रभ, निण विच पुना देव ॥ २ ॥ नब गुरु देव ने दावा, ढोप गान बहार ।। जिन वदन अर्चा तगां. शिवरे गुर आचार ॥ ३ ॥ रपणी ऋद्धि वा की, त्या गग ने देष ।। देव तदर्नु नाम, यांना देव ने रेख ॥ १ ॥ देवते नान धावीन. गाँव कामिनी संग ॥ मे ससाग मा काया, नुयाणा नम ॥जे मुर जीवता हुने, ते भले रार नारि , पण थर मानि शेलनी, सो राखे सार॥६॥ मुभा गया परलांझमें, नो पण नगयो कि कार ॥ ते शुं तारक ताशे, पडिया मोह परमार !! || वाहा लो चयरी एकसम, रेखवे ते खरी देव ॥ तस परुणांबून सेवनां, शहिये मिव तनखेव ॥ ८ ॥ । हाल २१ मी ॥ नुमें पांतांवर पहेरो भी, मन्मने मरकल ए देगी | सांभप्ली गुरनी वाणी जी ॥ हरिदल सांभलो ।। धु ग ।

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[. । - - नंगी माने जे गरेजी: मावि नगि मोरे गरि मदेव व दोड जो साव होनी। नानिना बनी जागी जी भारमनेट मागी जी ।। E. १३ । निन्या ननयी सया || आपापल गाल्ण नो:: मदेने मोह. ॥ न जाने को नानी विमे जो ह । विशां ना एक कापडी पा जी निग गिर वा विगमोदी जी र० ॥ पर मपिणी विद्या शिवाजी ।। हाभाच्या त दो भीदी नी ।। ६ ।।.. । कापी का ने सदन १० ॥ भाच्या न जिम वेडी । उपसरने पर भागे जी :: है. कपट दा भिक्षा मागे जा । १६ मारा धुने गीत गावे जी || || उपन्दना राक नहानी ॥ करिगी विधानांगे जो १ ।। - ना नम योग नी॥ ह.॥ १७ ॥ एक दिन गत ते पालं जी ।।. सिक गांव दोनो एहवे उपनद आयो जी कपरी दार ते पायो जी ॥ ६ ॥ १८ ॥ फरमाचे घार न्या यायो नी ।। १० । उपनद यमवरे नाल्यो जी ।। ४ । भानना कल करी नाराजी ।।६० रुपटी दी त्याचा बाठा जी ।। ह0 || ॥ १९ ॥ पानी र भाइ पाइ भो नी ।। । उपनद द्वारा ग्ण हुमो नी । ४. ॥ जपदेव भाद उटं। नी। ह. ॥ भान्या मह की यंत्र जी ।। ।। २. || रोगिणी देगा दो भेद शा॥..॥ पाल पर्दा तस पेटें जी ।। १०॥ जयदेव को ना देखी जा ।। ४० ॥ इणना कुग तस पलो नी ।। . ॥२६॥ पापा नन दह करें जी॥ ह ॥ न लाया गया कोई परे जी॥१०॥ भारतिनगर कंभाजी॥ इ. ॥न परै मुर कार जारी जी ।। ० ॥ २२ ॥ गने सारले रांड जी 11 | गइ पारेर

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. ग I माग पग को, को हो नागेनर I नाः ।।। हांनी पाप'मन . . रे। ५ पाना॥ नगन मन क्रिम . 1 .. . पर नाणीयें, पाय रगमें A' भाव ताजभाष हाजी , . - शेगा . ना 1 द' ग म धर्म • हांग

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न नाम Tप पार- मा भारी . . मा एक ठो " TE | पीतम Hमम रापर पमा . in को.या - Eart (सौरम .

साज नाले करी मान गोग भरी जाग्यो पो गर्ग
1 मो॥३॥धार न मा व मार भी मजा
मर उभट साचा ।। गगनष दोय चार जगतमान
सामान काचा मोः ।। फोन गनिम मान
पर दोर । झापली मोहना मैन कांदा ।। मारना मना मन्त्री
ग. झोपा मोह न मन्य बाटो । म ।' }। স্নান
दर्शन पर नाने का प्रट पहार न मन: ।। गहना
तो आ जायने, अनभा गबर नरें ।। मा० ।।
१६ ॥ पहंद मोहने आश गभी कग पासनद
यो । बाप रे नाग तमोर नाव दी. मघर जाको म
सीददा ।। पो॥
1) मोइ नापन गगापिका,
भरिपोनिन मन्य मेरी पार मारला ?': ।
मी नृप उपरे बदन बेली ।। पो. ११' या
जन पन पाताया, पानीपा मान का जल ग
पापस्त जकारिया, भावनृप मन में नग्न मग ।
१॥ सायें उमरा ले अरदा भर नगा न मा ।
विश्वमारता ! फोन नव नाहकायनी मारलं. मा -1
ना जोन करना || मो.॥ १० गम ने दंपती पत्र त ८ मा
रेमना करत समाम्मा 11 काम 4.7 मकर :-
लोगो भिगे मन मा ।। मो. "
नालि किरिया की, शो कपायना वार गो।।। • दाम।
कोर पाने कगे, मार नृप पर क.ग्न ला । मो० ॥
॥ १२ ॥ इणिपर माह नृप सैन्य भल ग. जालपो मच्छी
ए पर करवा ।। आमही सामुहा फोन दोपे पिभी. मनमों
फोन दो मंदिराग । मो॥ १३ ॥ मोनुर भास्टर शेप
पोरस चापा, पासा पुदय पर। बस चांगा नानि
.
11
।। शचनामाना

५ । ममा काम किमान " पनमाला IR किमत . " . म . 7 . + . . 1773 MIन', किमत ११ भामा, . 41140 । 4.1 प्रानन काया) किं. १२ क ० आना. भ प्राश 44114क आना. माना, 4 माना ..। म कमनभाना, IFR1 ५ थाना, PATEL म कि १ आना. प्राना . 4 " " r 4 1 .. . . . 7 . . .. + . माता ." +1 मिन १ पाना. +.11%ाना, ".- नमन । आगा. 11. मन माना, ... 'मानत माना. 14.11.17 मना. 24. निमारा REन प्रात्रा, नप्राण. ५.mrata मान राम का माना याता पु.

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Arth Haribalam Ras

Author
Khamraj
Title
Arth Haribalam Ras
File name
Arth Haribalam Ras
Text
OCR done
Citation
1910
Published
2011/08
Publisher
Delhi,manohar Press
Language
Sanskrit
Pages
259
Library
Agarchand Bhairondan Sethiya Jain Parmarthik Sanstha, Bikaner
DLI number
313896
Barcode
99999990311278.00
Scanning centre
Banasthali University
Digital publisher
Digital Library Of India
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ypOtjLilK67
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