Shri Jain Swetamber Khartargacch Sangh, Jaipur

Aacharang-sutra

Swami, Sudharma · 2011/01

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पुण्य-स्मरण अने धन्यवाद आ अन्य प्रकाशित करवा माटे, अमदाबाद निवासी स्वर्गस्थ सेठ कालिदास मल्लीचंदनी धर्मपली भाविका मंगुवाइए, पोताना पतीना पुण्यस्मरणार्थ जे द्रव्य सहायता आपी छे, ते बदल तेमने धन्यवाद घटे छे.

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जैन साहित्यसंशोधक ग्रन्थमाला श्री खरतरगच्छीय ज्ञान मन्दिर, जयपुर आचाराङ्ग-सूत्रम् मूलपाठ-विशिष्ट पाठभेद-शब्दकोष-समन्वितम् (प्रथमः श्रुतस्कन्धः) 26- जर्मनराष्ट्रनिवासि-डॉक्टर-इत्युपाधिधारि-वाल्टर शुबिंग-नामधेयेन विद्वद्वरेण संशोधितं, जर्मन-देशान्तर्गत-लाइजिग-नगर संस्थित- प्राच्यविद्या-गवेषक समितिद्वारा रोमनलिप्यां प्रकटीभूतं च पुस्तकमनुसृत्य भारतवान्तर्गत- पुण्यपत्तन-संस्थापित जैन साहित्य संशोधक समिति नामकसंस्थायाः सञ्चालकेन देवनागराक्षरैः प्रकटी कृतम् महावीर निर्वाणान्द २४५०] [विक्रम संवत्सर १९८०.

प्रकाशक:--मुनि तिलकविजय, भारत जैन विद्यालय, पूना शहर. मुद्रकः-लक्ष्मण माऊराव कोकाटे, हनुमान प्रेस, ३०० सदाशिव पेठ, पुना शहर.

॥ आयारंग-सुत्तं ॥ ॥'बम्भचराई' नाम पढमो सुयक्ख-धो॥ स स्थ परिन्ना १-१ (१) सुयं मे, आउस, तेण भगवया एवमक्खायः- इहमेगेसि नो सन्ना भवइ, (२) त-जहाः 'पुरस्थिमाओ वा दिसाओ आगओ अहमसि, दाहिणा- ओ वा दिसाओ...., पच्चस्थिमाओ वा दिसाओ.. ,उत्तराओ वा दिसाओ...., उड्डा वा दिसाओ. , अहेदिसाओ वा... , अन्नयरीओ वा दिसाओ वा अणुदिसाओ वा आगओ अहमसि'—एवमेगेसिं नो नायं भवइः (३) 'अत्यि मे आया उववाइए, नस्थि मे आया उववा-5 इए ? के अह आसी के वा इओ चुओ इह पेच्चा भविस्सामि ?'। (४) से ज्ज पुण जाणेज्जा सह-सम्मुइयाए पर-वागरण अन्नेसि वा अन्तिए सोच्चा, त-जहा :- 'पुरस्थिमाओ वा दिसाओ आगओ अहमसि जाव अन्नयरीओ वा दिसाओ वा अणुदिसाओ वा आगओ अहमसि'-एवमेगेसिं नाय भवइ :- अस्थि मे आया उव- वाइए; जो इमाओ दिसाओ अणुदिसाओ वा अणुसचरइ, सव्याओ दिसाओ सवाओ अणु 10 दिसाओ सोऽह'। (५) से आया-बाई लोगा-वाई कम्मा-बाई किरिया-वाई य । करिस्त चहं कारावेस्स च'हं करओ यावि समगुन्ने भविस्सामि'--एयावन्ती सव्वावन्ती लोगसि कम्म-समारम्भा परिजाणियव्वा भवन्ति । (६)अपरिन्नाय कम्मे खलु अय पुरिसे, जो इमाओ दिसाओ वा अणुदिसाओ वा अणुसचरइ, सव्वाओ दिसाओ सव्वाओ अणुदिसाओ सहेइ, 15 अणेग-रूवाओ जोणीओ सन्धेइ, विरूव-रूवे फासे पडिसवेएइ । (७) तत्थ खलु भगवया परिना पवेइया इमस्स चेव जीवियस्स परिवन्दण-माणण-पूयणाए, जाइ-मरण-मोयणाए दुक्ख -पडिघाय-हेउ---एयावन्ती सव्वावन्ती लोगसि कम्मसमारम्भा परिजाणियव्वा भवन्ति । जस्से'ए लोगांस कम्म-समारम्भा परिन्नाया भवन्ति, से हु मुणी परिन्नाय-कम्मे-त्ति बेमि ॥ । १-२ (१) अट्टे लोए परिजुण्णे दुस्संवोहे अविजाणए । अस्सि लोए पव्वहिए तत्थ-तत्थ पुढो पास आउरा परियावन्ति । 20 ૨ आगारंग-सुतं [ उद्दे०३ - -PARANA AMMA AN (२) सन्ति पाणा पुढी-मिया । लगमाणा पुढो पास। । अणगारा मो" ति एगे पक्यमाणा । जमिण विस्व-स्वेहिं सायटि पुढवि-धम्मसमारम्भेण पुढवि-सर्थ समारम्भमाणे अन्ने 5व' गरूचे पाणे विहिंसद--( ३) तथ सल भगवया परिना पवेश्या मस्स चव नीधि- स्स परिचन्दण-माणण-पूयणाए, गागरण-गोयणाग, दुस्ख-मडिवाय-हेट से सयमेव पुढवि-सन्थ समारम्भर अन्नेहिं वा पुढवि-मय समारम्भावेट भन्ने चा पुढवि-सन्यं समार- म्भन्ते समणुजाण ( ४ ) त से अहियाए, त में अबोहाए । से च सवुज्तमाणे जायाणीय, समुहाए सोच्चा सल भगवओ अणगाराण वा अन्तिए इहमेगेसिं नाय भवद • एस खल 10 गन्थे, एस सलु मोहे, एस खलु मारे, एस सलु नरए । इच्चत्य गढिए लोपा जमिणं विलव-स्वेदि सन्थेहिं पुढवि-यम्मसमारम्भेण पुढवि-साथ समारम्भमाणे अन्ने वणे'ग-रूवे पाणे विहिंसा- (५) से घेमि अप्पगे अधमव्भे,अव्येगे अचान्छे अप्पेगे पायमन्भे,अपेगे पायमच्छ,.... 16 गुप्फ.. जय....जाणु . .ऊर... काहिं....नाभि .. .उयर .. उयर ....पासं ....पिटिं....उर....हियय.... थण.. खन्न....वाहु....इत्थं....अगुलि ...नद....गीव....हणु....होट....दन्तं....जिम्म....ताल ....गल....गण्ड....कण्ण....नासं....अछि.... भगुहं ....निलाड. ..सांसं.... अप्पेगे संपमारए अप्येगे उद्दवए । (६) एत्थ सत्थं समारम्भमाणस्स एचए जारम्भा अपरिमाया भवन्ति, एत्य साथ 20 समारम्भमाणस्स इच्चेए आरम्मा परिन्नाया भवन्ति । त परिन्नाय मेहावी नेद सय पुढवि-सत्थं समारभेजा नेव'न्नेहिं पुरवि-सत्थ समारम्भाना नेव'ने पुढवि-सत्य समारभन्ते समणुजाणेजा। जस्से'ए पुढवि-फम्म-समारम्भा परिन्नाया भवन्ति, से हु मुणी परिनाय-फम्मे ----त्ति बेमि ॥ 95 (१) से वेमि · से जहा वि- अणगारे उजुकडे निगाग-पहिवन्ने अमायं कुवमाणे वियाहिए। (२) जाए सद्धाण निरखन्तो, तमेव अणुपालिया; वियहितु विसोतिय पणया वीरा महा-चीहि लोग च आणए अभिसमेचा अनुओभय । (३) से वेभिः-नेव सय लोग अभाइक्खेज्जा, नव अत्ताण अभाइखेजा जे लोगं 30अमाइक्खइ, से अताण अन्भाइरसइ, जे अचाणं अन्माइनखइ, से लोग अन्भाइरसह । (४-६) 'लज्जमाणा....( यथा ५० २-१३. नपर पुढवि स्याने उदय भगनीय) विहिसह- .

उ०४-५.] पढम अजअयण . (७) से बेमि : सन्ति पाणा उदय-निस्सिया जीवा अणेगा। इह च खलु भो अणगाराण उदय जीवा वियाहिया । सत्थं चेत्थ अणुवीइ, पास पुढो सत्थ पवेइयं : अदुवा अइन्ना'याणं कप्पड़ कप्प अदु वा विभूसाए पुढो सत्थेहिं विउदृन्ति । एत्थ वि तेर्सि नो निकरणाए। (८) एत्थ सत्थ... ( यथा २, १९-२२. नवर पुढवि स्थाने उदय भणनीय )...परिन्नाय- कम्मे--वि बेमि ॥ णे णे पाउ", 6 - 15 (१-२) से वेमि : नेव सयं... ( यथा २, २९-३० )... लोग अब्भाइक्खइ । जे दीहलोग-सत्थस्स खयन्ने, से असत्थस्स खेयन्ने; जे असत्थस्स खेयन्ने, से दीहलोग-सत्थस्स खेयन्ने । 10 (३) वीरेहिं एय अभिभूय दिढे संजएहि सया जएहिं सया अप्पमत्तहिं : जे पमते गुणट्ठिए, से हु दण्डे पवुच्चइ । तं परिन्नाय मेहावी " इयाणि नो, जमहं पुवमकासी पमाएणं" | (४-५) 'लज्जमाणा ..( यथा २, २-१३. नवर पुढवि स्थाने अगणि भणनीय ).... विहिंसइ. ६) से वेमि : सन्ति पाणा पुढवि-निस्सिया तण-निस्सिया पत्तनिस्सिया कह-निस्सिया गोमय-निस्सिया कयवर-निस्सिया, 'सन्ति संपाइमा पाणा, आहच्च सपयन्ति य'। अगाणं च खलु पुट्ठा एगे संघायमावज्जन्ति; जे तत्थ सघायमावजन्ति, ते तत्थपरियाविजन्ति; जे तत्थ परि-20 याविजन्ति, ते तत्थ उद्दायन्ति । (७) एत्थ सत्थ... (यथा २, १९-२२. नवर पुढवि स्थाने अगणि भणनीय ) परिन्नाय-कम्मे-त्ति बेमि॥ 25 १-५ (१) "त नो करिस्सामि समुट्ठाए मत्ता मइम अभय विइत्ता । त जे नो करए, एसोवरए; एत्थोवरए एस अणगारे त्ति पवुच्चइ । (२) जे गुणे से आवटे, जे आवट्टे से गुणे · उड्ढ अह तिरिय पाईण पासमाणे रूवार पासइ, सुणमाणे सद्दाइ सुणइ; (३) उड्ड अह तिरिय पाईण मुच्छमाणे रूवेसु मुच्छइ सद्देसु यावि । एल्थ अगुत्ते अणाणाए । एस लोए वियाहिए पुणो-पुणो गुणासाए वक-समायारे पमचे गारमावसे । (४-५) 'लज्ममाणा....(यया २,२-१३ नवर पुढवि स्पाने वणस्सह भणनीय )...विहिंसइ- 30 - भायारंग सुत्त [उदे०६-७ (६) से वेमि : इमं पि जाइ-धम्मय, पयं पि जाइ-धम्मय, इम पि बुट्टि-धम्मय, एयं पि बुद्धि-धम्मय ...चित्तमन्तय....छिन्न मिलाइ....आहारगं....अनिच्चय.... असाय.... चयावचश्य....विपरिणाम-बम्मय । (७) एत्य सत्य ( यथा २, १९-२२ नवरं पुढवि स्थाने वणस्सइ भणनीय) परिन्नाय-कम्मे-ति वेमि ।। , १-६ (१) से बेमि : सन्ति मे तसा पाणा, त-जहा:-अण्टया पोयया गराउया रसया ससेयया सम्मुच्छिमा उभिया उववाइया। स ससारे ति पवुच्च (२) मन्दस्त अविजाणो। 10 निमाइत्ता पडिलेहिता पतेय परिणियाणं सव्वेसिं पाणाणं, सव्वेसि भयाण, सम्वेसि जीवाण, सव्वेसि सत्ताण असाय अपरिणिन्वाण । महन्मय दुक्ख ति बेमि " तसन्ति पाणा पदिसो दिसामु य । त थ-तस्थ पुढो पास आउरा परियावेन्ति । (३) सन्ति पाणा पुटो-सिया। 16 (४) (यथा २,२-१३. नगर पुढवि स्याने तसकाय भणनीय) विहिंसइ- (५) से बेमि : अप्पेगे अञ्चाए हणन्ति, अप्पेगे अजिणाए वहन्ति,....मसाए....मोणि- याए...., एव हिययाए पित्ताए वसाए पिच्याप पुच्छाए बालाए सिंगाए विसाणाए दन्ताए टाढाए नहाए हारुणीए अहीए जट्टिमिजाए-अट्टाए अणद्वाए; अप्पेगे 'हिंसिनु मे तिवा वहन्ति, अप्पेगे हिंसन्ति मे' ति वा वहन्ति, आपेगे हिसिस्मन्ति मे' ति वा वहन्ति । (६) एत्य सत्य....( यथा २,१९-२२, नयर पुढवि स्याने तसकाय भगनीय )... परिन्नाय- कम्मे-तिमि ॥ लज्जामाणा .... - 20 १-७ (१) पहू य एजस्स दुगुग्छणाए। आयक दसी 'अहिय' ति नवा । 25 ने अज्मथ जाणइ, से बहिया जाणइ; जे वहिया जाणइ, से अमात्यं जाणइ : एय तुल अन्नेसि । इह सन्ति-गया दविया नावसन्ति जीविउ । (२-३) लजमाणा.. ( यथा २, २-१३. नवर पुढवि स्याने घाउ भगनीय )....विहिसह-- ( ४ ) से बेमि. 30 सन्ति संपाइमा पाणा, आहच सपयन्ति य ।

M उ० १.] विईम अज्झयणं फरिसं च खल पुट्ठा ( यथा ३, १९-२१) उद्दायन्ति । (५) एत्थ सत्थं .... ( यथा २, १९-२२ नवर पुढवि स्थाने वाउ भणनीय ).... परिन्नाय-कम्मे-ति बेमि ।। (६) एत्थ पि जाणे उवाईयमाणा जे आयारे न रमन्ति, आरम्भमाणा विणयं वयन्ति; छन्दोवणीया अज्झोववन्ना आरम्भसता पकरेन्ति सग। से वसुमं सब-समन्नागय-पन्नाणेण अप्पाणेणं अकरणिज्ज पावं कम्मन्तं नो अन्नेसि । (७) तं परिन्नाय मेहावी (यथा २, २०-२२ नर पुढवि स्याने छाजीवनिकाय 10 भणनीय) परिन्नाय-कम्मे---त्ति बेमि ॥ 6 लोग विज ओ २-१ (१) जे गुणे से मूल-हाणे, जे मूल-हाणे से गुणे । इति से गुणट्ठी महया परियावेण वसे पमत्ते, तं-जहा:- ' माया मे, पिया में, भाया मे, भइणी मे, भज्जा मे, पुत्ता मे, धूया मे, 16 सुहा मे, सहि-सयण-संगन्य-सथुया मे, विचित्तोवगरण-परियट्टण-भोयण'च्छायणं मे 'इच्चत्थं गढिए लोए'। 'वसे पमत्ते' अहो य राओ परितप्पमाणे कालाकाल-समुट्ठाई सजोगट्ठी अत्थालोभी आलुम्पे सहसाकारे विनिविट्ठ-चित्ते एत्थ सत्थे पुणो-पुणो'। (२) अप्प च खलु आउं इहमेगेसि माणवाणं, त-जहा:-सोय-परिन्नाणेहिं परिहायमाणेहिं, चक्खु-प० प०, घाण- १० प०, रस-प० प०, फास-प० प०, अभिकन्त च खलु वय सँपेहाए-तओ से एगया मूढ- भावं जणयन्ति; जेहिं वा सद्धिं सवसइ, ते व ण एगया नियगा पुटिव परिवयन्ति सो वा ते 25 नियगे पच्छा परिवएजा। नाल ते तव ताणाए वा सरणा ए वा, तुमम्पि तेसि नाल ताणाए वा सरणाए वा । (३)' से न हस्साए, न किड्डाए,न रईए,न विभूसाए' इच्चेव समुट्ठिए 'अहो विहाराए। अन्तर च खलु इम सॅपेहाए धीरे मुहुत्तमवि नो पमायए; चओ अच्चेइ जोवण च जीविए 20 30 द आयारंग सुझं [उदे०२-३ M 16 इह ने पमत्ता,- से हन्ता छत्ता भेता लुम्पित्ता विलम्पित्ता उहवेता उत्तासत्ता । अहं करिस्तामि तिमन्नमाणे । जहिं वा (यया ५, २५-२८. नयर परिचयन्ति तथा परियपजा म्याने पोमेन्ति तथा पोसेजा भगीय) ... सरणाए था। (४) उचाईय-सेसन्तण वा सन्निहि-सन्निचओ फाड 5 इहमे गिसि माणवाण भोयणाए । तयो से एगया रोग-समुप्पाया समुप्पान्ति; जीह वा .... ( यथा ५, १५-२८ नवर परिहरन्ति तथा परिहरेजा पठनीय). सरणारा वा। (५) जाणितु दुक्ख पतेय माय अणभिवन्त च खलु वयं संपेहाए सण जाणाहि पण्डिए 10 जाव सोत्त-परिन्नाणेहिं अपरिहायमाणोहिं, नेत-१० म० घाण-५० म०, रस-प००, फास-प० अ०; इच्चेएहि विरत्व-त्वहिं परिनाणेहि अपरिहायमाणेहिं । मायट्ट सम्म समणुवासे- ज्जासि-त्ति बेमि ॥ २-२ (१) अरइ आउट्टे से मेहावी, खणसि मुझे अणाणाए पुट्टा वि एगे नियन्ति मन्दा मोहेण पाउडा: " अपरिगहा मविसामो" समुहाए लढे मामे भिगाहा । अणाणाए मुणिणो पडिलेहन्ति; एत्य मोहे पुणो पुणो सन्ना नो हवाए नो पाराए। विमुत्ता हु ते जणा, जे जणा पार-गामिणो। 20 लोभ अलोभेण दुगुन्छमाणे लद्धे कामे नोभिगाहर। विणइत्तु लोभ निक्खम्म एस अफम्मे जाणइ पासइ, पडिलेहाए नाचकखद, एत सणगारे ति पवुच्चइ । (२) अहो य राओ....( यथा ५, १९-२१)... पुणो-पुणो से आय-बले, से नाइ- वले, से मित्त-वले, से पेच्च-बले, से देव-बले, से राय-बले, से चोर-वले, से माहि-बले, से किवण-वले, से समण-वले, (३) डच्चेएहिं विल्व-स्वेहि फजोहिं दण्ड-समायाण सपेहाए भया कज्जड 'पाव-मोक्खो' ति मन्नमाणे अदु वा आमसाए । त परिनाय मेहाची नेव सय एएहिं पजेहिं दण्ट समारम्भेज्जा, नेव'न एएहि कज्जेहिं दण्ड समारम्भावेज्जा, नेव'न्न 30 एएहिं दण्ड समारभन्त समणुजाणेया। एस मग्गे आरिएहिं पवेइए, जहेत्थ कुसले नोवलिप्पे- ज्जासि-~-ति वेमि॥ 25 - (१) से मसह उच्चा-गोए, असइ नाया-गोए, नो होणे, नो अइरिते : नो पहिए । इति सखाए के गोया-वाई, के माणा-बाई, कास वा एगे गिज्ो ? (२) तम्हा उद्दे० ४.] विईयं अज्झयणं R 15 पण्डिए नो हरिसे, नो कुज्ने भूएहिं जाण पडिलेह सायं समिए एयाणुपस्सी, त-जहा : अन्धत्त बहिरत्त मूयत्त काणत कुग्टतं खुज्जतं वइभत्त सामत्त सवलतं, सह पमाएणं अणेग-रूवाओ जोणीमओ सधेइ,विरूव हवे फासे पडिसवेएइ। (३) से अबुज्झमाणे हओवहए । जाई-मरण अणुपरियट्टमाणे । जीविय पुढो पिय इह मेगेसि माणवाणं खेत्त-वत्यु ममायमाणाण; आरत विरत्त माण- कुण्डलं सह हिरण्णेण, इस्थियाओ परिगिज्ज्ञ तत्थेव रत्ता, न एत्य तवो वा दमो वा नियमो वा दिस्स; सपुण्णं वाले जीविउ-कामे लालप्पमाणे 10 मूढे विपरियासु'वेइ । ( ४ ) इणेमव नावकखन्ति जे जणा धुव-चारिणो; जाई-मरण परिन्नाय चरे सक्रमणे दढे। नत्थि कालस्सणागमो-सव्वे पाणा पिया'ऊया सुह-साया दुक्ख-पडिफूला अप्पिय-वहा पिय-जीविणो जीविउ-कामा। सम्वोस जीवियं पिय, (५) तं परिगिज्श दुपयं चउप्पयं अभिजुञ्जियाणं ससचियाण तिविहेण-जा वि से तत्थ मत्ता भवइ अप्पा वा बहुगा वा, से तत्थ गढिए चिट्ठइ भोयणाए । तओ से एगया विपरिसिह सभूय महोवगरण भवइ, त पि से एगया दायादा विभ-20 यन्ति, अदत्तहारो वा से अवहरइ, रायाणो वा से विलुम्पन्ति; नस्सइ वा से, विनस्सइ वा से, अगार-दाहेण वा से उज्झइ । इति से परस्सट्टाए कूराई कम्माइ वाले पकुवमाणे तेण दुक्खेण मूढे विपरियासु'वेश् । मुणिणा हु एवं पवेइय : नो य ओहं तरित्तए अतीरंगमा एए, नो य तीर गमित्तए ; अपारगमा एए, नो य पारं गमित्तए । आयाणिजा च आयाय तम्मि ठाणे न चिट्ठा, वितह पप्प'खेयन्ने तम्मि ठाणम्मि चिट्ठइ । उद्देमो पासगस्स नस्थि; वाले पुण निहे काम-समणुन्ने असमिय-दुक्खे दुक्खी 30 दुक्खाणमेव आवट्टमणुपरियट्टइ-ति वेमि ॥ 25 अणोहन्तरा एए, . २-४ (१) तओ से एगया....( यमा ५, १५-२८. नतर परिदरन्ति त्या परिहरेज्जा माने INV ट आयारंग-मुत्तं [उद्दे०५. परिचयन्ति त्या परिचयाजा भणनीय )... सरणाए वा । (२) जाणितु दुक्ख पत्तये-सायं भोगामेव अणुमोयन्ति--इह मेगसि माणवाण-तिविहेण....(यया७,१९-२२ नदर अवहरा स्याने हरप भणनीय )....विप्परियासुवेई':- (३) मासं च छन्द च विगिंच धीरे, तुम चेव, त सहल शाहट्टा जेण सिया, तेण नो सिया । इणमेव नावबुज्यन्ति जे जणा मोह-पाउदा । थीभि लोए पव्वहिए; ते भो वयन्तिः " एयाइ आययणाद से दुखाए मोहाए माराए नरगाए नरम-तिरिक्साए ! सयय मूढे धम्म नाभिजाण । उयाहु वीरेः अप्पमाओ महा-मोहे ! (४) अलं कुसलस्स पमाएण सन्ति-मरण पेहाए, भेउर-धम्म संपेहाए । " नाल पाम "-~अल तव एएहिं ! एयं पास, मुणी, महब्भय, नाइवाएज्ज कचण । एस चीरे पससिए, जे न निविचाइ आयाणाए: 16 'न मे देइ । न कुप्पेजा, थोव लध्दं न खिंसए, पडिसेडिओ परिणमेजा। एवं मोण समणुवासेज्जासि-ति वेमि || 10 २-५ (१) जमिणं चिरूव-स्वेहि सत्यहिं लोगम्स कम्म-समारम्भा फज्जन्ति, त-जहाः अप्पणो से पुत्ताणं धूयाण सुण्हाण नाईण धाईण राईण दासाण दासीण कम्म-कराण कम्म- 20 फरीण आएसाए, पुढो पहेणाए, सा'मासाए पायरासाए सन्निहि-सन्निचओ कमाइ (२) इह मेगोसिं माणवाणं भोयणाए समुट्ठिए अणगारे आरिए आरिय-पन्ने आरिय-दसी 'अय सधी' ति अदक्खु से नाइए नाइयावए न समणुजाणाइ । सवामगन्धे परिन्नाय निरामगन्धे परिवए । (३) अदिस्समाणे कय-विकएमु से न किणे, न किणावए, किणन्त न समणुजाणए । से भिक्खू कालन्ने वलन्ने मायने खेयन्ने खणयन्ने विणयन्ने स-समयन्ने पर-समयन्ने भावन्ने, परिगह, अममायमाणे, काले'णुढाई अपडिन्ने, दुहओ 30 छित्ता नियाइ। वत्थं पडिगई, कम्बल पाथ-पुच्छणं ओगहं च कडासणः 26 पि . उद्दे ६०1 विइयं अज्झयणं एएसु चेव जाणेज्जा लद्धे आहारे अणगारो माय जाणेज्जा से जहेय भगवया पवेश्य: लाभो' ति न मज्जेज्जा, ' अलाभो' ति न सोयए, बहु लध्दु न निहे। परिगहाओ अप्पाण अवसज्जा, अन्नहा ण पासए परिहरेज्जा | एस मगे आरिएहि पवेइए, जहे'स्थ कुसले नोवलिप्पज्जासि-त्ति वेमि । ( ४ ) कामा दुरइकमा, जीविय दुप्पडिवूहण; काम-कामी खलु अय पुरिसे, से सोयइ जूरइ तिप्पइ पिट्टइ परितप्पइ । आयय-चक्खू लोग-विपस्सी 10 लोगस्स अहे-भाग जाणइ, उड्ड भाग जाणइ, तिरिय भाग जाणइ गढिए. अणुप- रियट्टमाणे; सधि विइत्ता इह मच्चिएहिं एस वीरे पससिए, जे बद्ध पडिमोयए'। (५) जहा अन्तो तहा वाहि, जहा वाहिं तहा अन्तो । अन्तो-अन्तो पद-देह-15 न्तराणि पासइ पुढो विसवन्ताइ पण्डिए पडिलेहाए, से मइम परिन्नाए । मा य हु लाल पच्चासी, मा तेसु तिरिच्छं अपाण आवायए । कासकसे'य बल पुरिसे, वहु-माई, कडेण मुढे पुणो तं करेइ लोभं; वेरं वड्डेहि अप्पणो । जमिण परिकहिज्जड, इमस्स चेव पडिवूहणयाए अमरायइ महा-सड्डी, अट्टमेय तु पेहाए अपरिन्नाएँ कन्दइ; " से त जाणह, जमह वोमि ।" 26 (६) तेइच्छं पण्डिए पवयमाणे । से हन्ता छेत्ता भेत्ता लुम्पित्ता विलुम्पित्ता उद्दव- इत्ता ' अकड करिस्सामि' ति मन्नमाणे । जस्स वि य ण करेइ, अल बालस्स सगेण, जे वा से कारेइ, बाले । 90 न एव अणगारस्स जायइ-त्ति बेमि ॥ , 20 २-६ (१) से त सवुज्झमाणे आयाणीय, समुद्राए--तम्हा पाव कम्म ने'च कुज्जा न कारवे ।

१० आधारंग-सुर्त [उद्दे०६. --- ram- 5 . 10 । सिया तत्थे'गयरं विपरामुसइ, छयु अन्नयरम्मि कप्पा । सुट्ठी लालप्यमाणे सएण दुक्खेण मुढे विप्परियासु'वेट । सएण विप्पमाएण पुढी वय पकुवइ, जसि मे पाणा पवाहिया । पडिलेहा " नो निकरणाए एम परिना पवुच्चर, कम्मोवमन्ती। जे ममाइय-मई जहार, से जहाइ ममाडय; से हु दिट्ट-भए मुणी, जन्त नत्यि ममाध्य । त परिनाय मेहावी विइदा लोग, वन्ता लोग-सन्न से मइम परयमेन्जासि-ति वेमि । (३) नारइ सहए वीरे, वारे नो सहाए रह जम्हा अविमणे वारे, तम्हा चीरे न रजई। 15 सद्दे य फासे अहियासमाणे निम्विन्द नन्दि इह जीवियस्त । मुणी मोण समायाय धुणे कम्म-सरिग; पन्त लुह सेवन्ति वीरा सम्मत-दसिणो। एस मोहतरे मुणी तिणे मुते विरए विवाहिए-ति वेमि । 20 (४) दुवमु-मुणी अणाणाए तुच्छए गिलाइ वट्टए 'एस वारे पससिए', 'अञ्चेइ लोग-सजाग, एस नाए पवुच्चइ'; ज दुक्ख पवेइय 'इह माणवाणं' तस्स 'दुक्खस्स कुसला परिन्न उदाहरन्ति'. (५)' इति कम्म परिनाय सम्वसो' जे अणन-दसी से अणन्नारामे, जे अणन्नारामे से अणन्न-दसी. जहा पुण्णस्स कथई, तहा तुच्छस्स यह। जहा तुच्छस्स कथई, तहा पुण्णस्त कयई। जवि य हणे अणाइय माणे. एथम्पि जाण. सेय ति नत्थि "फेयं पुरिसे क च नए ? ! एस वीरे पससिए, जे बद्धे पढिमोयए ।' उड्ड अहं तिरिय दिसासु से सबओ सव्व परिन्न-चारी न लिप्पई छण-पएण वीरे। 20 से मेहावी, जे अणुन्घायणस्स खेबन्ने, जे य वन्ध-पमोक्खमन्नेसी: कुसले पुण नो बद्ध नो मुझे से ज्ज च आरभे न च नारभे ! (५) अणारद्ध च नारभे, 25 .उद्दे० १.] तश्यं अज्झयणं ११ छण-छणं परिन्नाय लोग सन्न च सव्वसो । उद्देसो पासगस्स...( यथा ७,३० )... आवट्ट अणुपरियट्टइ-त्ति बेमि ॥ 5 10 17 सी ओस णि जं ३-१ (१) सुत्ता अमुणी, मुणिणो सयय जागरन्ति; लोगसि जाण आहियाय दुक्ख । समय लोगस्स जाणिता एत्थ सत्यावरए । जस्सि'मे सदा य रूवा य गन्धा य रसा य फासा य अभिसमन्नागया भवन्ति, (२) से आयव नाणव वेयव धम्मव वम्भव, पन्नाणेहिं परिजाणइ लोग। मुणी ति बच्चे, धम्मविउ ति अञ्जू, आवट्ट-सोए सगमिण'भिजाणइ । सीओसिण-चाई से निगन्ये अरइ-रइ-सहे फरुसिय नो वेएइ । जागर-वेरोवरए वीरे एव दुक्खा पमोक्खसि । (३) जरा-मच्चु-वसोवणीए नरे, सययं मूढे धम्म नाभिजाणइ । पासिय आउरे पाणे अपमत्तो परिव्यए । मन्ता एय अहिय ति पास आरम्भज दुक्ख मिण ति नच्चा माई पमाई पुनरेइ गम्भ । उवेहमाणो सद्द-रूवेसु उज्जू माराभिसकि मरणा पमुच्चइ । अप्पमत्तो कामेहिं, उबरओ पाव-कम्मे हिं, वीरे आय-गुत्ते, जे खेयन्ने । (४) पज्जवजाय-सत्थस्स खेयन्ने; से असत्थस्स खेयन्ने; जे असत्थस्स खेयन्ने, से पज्जवजाय- सत्थस्स खेयन्ने । अकम्मस्त ववहारो न विज्जद कम्मुणा उवाही जाय। कम्म च पडिलेहाए कम्म मूल च ज छण पडिलेहिय, सव्व समायाय25 दोहिं अन्तेहि अदिस्समाणे त परिन्नाय मेहावी विइत्ता लोग, वन्ता लोग-सन्न से मइम परकमेज्जासि-त्ति बेमि | 15 20 मायारंग-सुत्तं [उद्दे० २ १. जाइ च बुद्धिं च इह'ज्ज पास, मगह साय पहिलेह जाणे; तम्हा' इविज्जो 'परम ' ति नच्चा मम्मत्त-दसी न करेइ पाव ॥ 5 २. उम्मुञ्च पास इह मच्चिएहि; पारम्भ-जीवी उभयाणुपस्सी कामेनु गिद्धा निचय करेन्ति, ससिच्चमाणा पुनरेन्ति गम्भ ।। ३. अवि से हासमासज्ज 'हन्ता नन्दी ' ति मन्न। 10 अल वालस्स सगेण, वेर वट्टर अप्पणो ।। ४. तम्हा'इविज्ज 'परम' ति नच्चा आयक-दसी न कोइ पाव; अग्ग च मूल च विगिश्च धीरे पलिच्छिन्दियाण निकम्म-दसी ।। 16 (१) एस मरणा पमुच्चड, से हु दिट्ठ-भए मुणी लोगसि परम-दसी विवित्त-जीवी उवसन्ते समिए सहिए सया जए कालागी परिवाए। बहु च खलु पाव कम्म पगड़। 20 सच्चम्मि धिर कुन्वहा । एत्थोवरए मेहावी सव्व पाव कम्म झोसेढ । (२) अणेग-चित्ते खलु मय पुरिसे से केयण अरिहर पूरश्त्तए, से अन्न-वहाए अन्न-परियावाग अन्न-परिगहाए, जणवय-वहाए नणवय-परियावाए जणवय-परिभाहाए । ( ३ ) आसेवित्ता एयमह इच्चबेगे समुडिया; 25 तम्हा त विइय नो सेवए निस्सार पासिय नाणी। उववाय चवण नच्चा अणन्न चर माहणे । से न छणे न छणावार छणन्त नाणुजाणए । निम्विन्द नन्दि अरए पयासु अणोमदसी 30 निसण्णो पावहिं कम्महि । ५. कोहाइमाण हणिया य वीरे, लोभस्स पासे निरय महन्तः तम्हा हि वीरे विरओ वहाओ उहे०३.] तइयं अज्ञयण १३ M ६. छिन्देज्ज सोय लहुभूय-गामी । गन्थ परिन्नाय इह'ज्ज वीरे सोय परिन्नाय चरज्ज दन्ते; उम्मुग्गा लध्दु इह माणवेहि नो पाणिण पाणे समारभेज्जासि-त्ति वेमि ॥ 5 10 (१) संद्धि लोगस्त जाणित्ता आयओ वहिया पास, तम्हा न हन्ता न वि घायए । जमिण अन्नमन्न-विइगिञ्छाए पडिलेहाए न दरेड पाव कम्म, किं तत्थ, मुणी, कारणं सिया ? १. समय तत्थु वेहाए अप्पाण विप्पसायए; अणन्न-परम-न्नाणी नो पमाए कयाइ वि ।। आय-गुत्ते सया धीरे जाया-मायाऍ जावए, (२) विरागं रूवेसु गच्छेज्जा महया खुड्डएहि वा । आगइ गई परिन्नाय 15 दोहि वि अन्तेहिं अदिस्समाणे से न छिज्जइ न भिजाइ न उज्झइ, न हम्मइ (३) कवण सव्व लोए। अवरेण पुव्वं न सरन्ति एगे हिस्स'ईय किं वा'गमिस्स; भासति एगे इह माणवा उः जमस्स'ईय तमा'गमिस्स। नाईयमद्व न य आगमिस्स अद्ध नियच्छन्ति तहागया उB विधूय कप्पे एयाणुपस्सि निज्ज्ञोसइत्ता खवए महेसी। २. का अरइ के या'णन्दे ? ए-थ पि अगहे चरे; सव्व हास परिच्चज्ज अल्लीण-गुत्तो परिव्वए । (४) पुरिसा । तुममेव तुम-मित्त, किं वहिया मित्तमिच्छसी ? जं जाणेज्जा उच्चालइय, त जाणेजा दूरालइय; ज जाणेज्जा दूर ; त जाणेज्जाso उच्चालइय। पुरिसा ! अत्ताणमेव अभिनिगिज्म, एवं दुक्खा 20 25 ཨར १४ आयारंग-सुत् [उद्दे० ४,४-१ पुरिसा! सच्चमेव समभिजाणाहि ! सच्चस्स आणाए उवहिए मेहावी मार तरह। सहिए धम्ममायाय सेय समणुपत्तइ । दुहओ • जीवियस्स परिवन्दण-माणण-पूयणाए, जसि एगे पमायन्ति; सहिए दुक्खमत्ताए पुट्ठो; नो झञ्झाए । पासिम दविए लोए लोगालोग-पवधागो पमुचर- तियोमि ।। - 5 से सव्व जाणड; जे सव्व जाणइ, VAN ३-४ (१) से वन्ता कोह च माण च माय च लोभ च एय पासगस्स दसण, उवरय- सत्थस्स पलियन्त-करस्स आयाण सगडभि । जे पग जाणड, से एग जाणइ । सव्वओ पमत्तस्स भय, सव्यो अप्मत्तम्स नत्यि भय । २ जे 'एग ' नामे, से 'बहु' नामे; जे 'बहु' नामे, से ' एग ' नामे । 10 दुक्ख लोगस्स जाणिवा वन्ता लोगस्त सजोग जन्ति वीरा महा-जाण, परेण पर नन्ति, नावनखन्ति जीविय । (३) एग विगिच्चमाणे पुढो विगियइ, पुढो विगिञ्चमाणे एग विगिश्चद । सड्डी आणाएँ मेहावी, लोग च आणाए अभिसमेचा अकुओभय । 15 परेण पर, नत्थि असन्थ परेण पर: ( ४ ) जे कोह-दसी से माण-दसी, जे माण-दसी से माय-दसी, . लोभ-द० पेज-द० . दोस-द० मोह-द० गन्मद जम्म-द० मार-द० . नरय-द० तिरिय-द० दुक्ख-दसी । से मेहावी अभिानव्यज्जा कोहं च माण च मायं च लोभ च पेज्ज च दोस च मोह च गभ च जम्म च मार च नरय च तिरिय 20च दुक्ख च । एय (यया ६). जायाण निसिद्धा सगडभि । किमाथि उवाही पासगस्स ? न विज्जइ, नत्यि-ति वेमि ॥ अत्थि सत्थ ... सम्म तं ४-१ (१) से वेमि. जे य अईया जे य पटुप्पन्ना जे य आगमिस्सा अरहन्ता भग- न्वतो, सव्वे ते एवमाइक्खन्ति एव भासन्ति एव पनवेन्ति एव पल्वेन्ति.-सव्वे पाणा सव्वे भूया सव्वे जीवा सन्चे सत्ता न हन्तव्वा न अज्जावयन्वा न परिघेतवा न परियायव्वा 25 न उद्दवेयव्वा । (२) एस धम्मे सुद्धे नितिए सासए समेच्च लोग खेयन्नहिं पवेइए, त-जहा- उट्टिएसु वा अणुट्टिएमु वा, उवट्ठिएसु वा अणुवट्ठिएतु वा, उवरय-दण्डेसु वा अणुवरय दण्डेसु वा, सोवहिएसु वा अणुवहिएसु वा, सजोग-रएसु वा असजोग-रएमु वा । तच चेय तहा चेय, अत्सि चेय पवुच्चड । (३) त आइत्तु न निहे, न निक्खिवे, जाणितु धम्म जहा-तहा ।

उद्दे०२] चउत्थं अज्मयणं wwwwwww दिद्वेहिं निव्वेयं गच्छेज्जा, नो लोगस्से'सण चरे। जस्त नत्थि इमा नाई, अन्ना तस्त को सिया ? दिट्ट सुय मयं विनाय, ज एव परिकहिज्जड । समेमाणा चलेमाणा ' पुणो-पुणो जाइ पकप्पेन्ति 'अहो य राओ जयमाणे धीरे,' सया आगय-पन्नाणे । पमत्ते बहिया पास, अप्पमत्ते सया परकमेज्जासि-ति बेमि ।। , 5 10 16 (१)जे आसवा ते परिस्सवा, जे परिस्तवा ते आसवा । जे अणासवा ते अपरिस्सवा, जे अपरिस्सवा ते अणासवा । एए पए सवुज्झमाणे लोग च आणाए अभिसमेच्चा पुढो पवेइयं आघाइ नाणी इह माणवाण ससार पडिवन्नाण संबुज्ज्ञमाणाणं विन्नाण-पत्ताणः (२) अट्टा वि सन्ता अदु वा पमत्ता ! अहा-सच्चमिण ति बेमिः ना'णागमो मच्चु-मुहस्स अत्थि; इच्छा-पणीया वकानिया काल-गहीया निचए निविट्ठा पुढो-पुढो जाई पकप्पयन्ति । (३) एगे वयन्ति अदु वा वि नाणी नाणी वयन्ति अदु वा वि एगे: आवन्ती केया'वन्ती लोगसि समणा य माहणा य पुढो विवायं वयन्तिः-" से दिट्ठ च णे, सुय च णे, मय च णे, विनाय च णे, उड्ड अहे या तिरिय दिसासु 20 सव्वओ सुपडिलहिय च णेः सव्वे पाणा सव्वे भूया सव्वे जीवा सव्वे सत्ता हन्तव्वा अज्जावेयव्वा परिघेतव्वा उद्दवेयव्या; एत्थ पि जाणहः नत्थेत्थ दोसो" ( ४ ) अणारिय-वयणमेय । तत्थ जे ते आरिया, ते एव वयासी: :-" से दुद्दिट्ट च भे, दुस्सुय च भे, दुम्मय भे, दुम्विन्नाय च मे, 'उड्ड दुप्पडिलेहिय च भे, 26 जं ण तुम्भे एवमाइक्खह एव भासह एवं पन्नवेह एवं परूवेह. सव्वे... दोसो' । अणारियवयण- मयं । (५) वयं पुण एवमाइक्खामो एव भासामो एव पन्नवेमो एव परूवेमो. सव्वे पाणा ४ न हन्तव्वा न अज्जावेयव्वा न परियावेयव्वा न परिघेत्तव्वा न उद्दवेयन्या; 'एत्थ पि जाणहः नत्थेत्थ दोसो। आरिय-वयणमेय" । पुव निकाय समय पत्तेय-पत्तेय पुच्छि- स्सामो:-" हं भो पावाउया! किं भे साय दुक्ख उयाहु आसाय ? " समिया-पडिवन्ने यावि 30 एव बूयाः-" सव्वेसिं पाणाण ४ असाय अपरिणिन्वाण महभय दुक्ख" ति-ति बेमि ।।

आयारंग-नुत [ उ०३-५ ---- 5 - 10 (१) उवेद पण पहिया य लोग! में गरम-लोगनि चिन्न ; अणुवीर पास निविपन-दण्टा जे छेदता पलिय चयन्ति । नरा मुय च्चा पमा विउ नि अज़ आरम्भन दुतामिण निनच्चा पवमा मात्तदमिणो ( २ ) ते मी पावादगा; दुवपस्स कमा परिनगुदाररन्ति ' इति फम्म परिनाय सव्यमा 'द जापानी पण्डिा अनिदे एगाप्पाण सॉपैदाग धुणे शेरग सेहि अप्पाण, जरेदि जप्याण जहा मुष्णा पट्टाप वाहो पाया। एवमत-समादिए पनि विगिन फोह जविरम्प हम निरुदा उय महाए, दुक्स च जाण अदुवा गमिम्म पुढो फासाइच फासए लोग च पास विष्फगाण, (३) निबुडा पावहिं कोहि बनियाना ते वियाहिया । तम्हा'इविज्जो नो पनिसजासि-~-ति बेमि ॥ 16 20 (१) आलिए पपीरए निप्पीलए जहिता पुव्य-संजोग हिच्चा उसम; 25 -- तम्हा अविमणे धीरे सारए समिए सहिए सया जए-दुरणुचरो मम्मो वीराण अनियट्ट-गामीण- विगिञ्च मस-सोणिय । (२) एम पुरिमे दविए पोरे सायाणिज्जे वियाहिए, मे धुणाट समुरसय वसित्ता वम्भचेरसि। नेत्तेहिं पलिच्छन्नहि आयाण-सोय-गढिए वाले अव्वोच्छिन्न-बन्धणे अणभिकन्त-सजोए, 30 उद्दे० १.] पञ्चमं अज्झयणं www 5 तमांसि अविजाणओ आणाए लम्भो नत्थि ति वेमि, ( ३ ) जस्स नत्थि पुरा पच्छा, मज्झे तस्स कुओ सिया ? से हु पन्नाणमन्ते बुद्धे आरभ्भोवरए; सम्ममेय ति पासहा । जेण वन्धं वह घोर परियावं च दारुण पलिच्छिन्दिय बाहिरग च सोय निकम्म-इसी इह मच्चिएहिं, कम्मुणा स-फलं दडं तो निज्जाइ वेयवी । ( ४ ) जे खलु भो वीरा समिया सहिया सया जया संघड-दसिणो आओवरया 10 अहा-तह लोग उवेहमाणा, पाईणं पडीण दाहिण उदीण इति, सच्चंसि परिविचिद्दिषु, साहिस्सामो नाण वीराण समियाण सहियाण सया जयाणं संघड-इसीण आओवरयाण अहा- तहा लोग समुप्पेहमाणाणं । किमस्थि उवाही पासगस्स ? न विज्जइ, नस्थि-त्ति बेमि ।। 20 लोग सा रो (आवन्ती) ५-१ (१) आवन्ती केय'विन्ती लोगंसि विप्परामुसन्ती अट्ठाए अणट्ठाए वा एएसु चेव 15 विप्परामुसन्ती । गुरू से कामा, तओ से मारस्त अन्तो; जओ से मारस्त अन्तो, तओ से दूरे । नेव से अन्तो, नेव से दूरे । से पासइ फुसियमिव कुसग्गे पणुन्न निवइयं वाएरिय एव वालस्स जीविय मन्दस्स अविजाणओ। कूराई कम्माई वाले पकुवमाणे तेण दुक्खेण मूढे विष्परियासमेइ, मोहेण गम्भ मरणाइ एइ, एत्थ मोहे पुणो-पुणो' । संसयं परिजाणओ संसारे परिन्नाए भवइ; संसय अपरि- नाणओ ससारे अपरिन्नाए भवइ । जे छेए, सागारियं न सेवए, कट्ठ एवमवयाणओ विइया मन्दस्त वालिया लद्धा हुरत्था । पडिलेहाए आयमेत्ता अणासेवणाए-त्ति बेमि । (२) पासह एगे रूवेसु गिद्धे परिणिज्जमाणे, एस्थं फासे पुणो-पुणो'। आवन्ती केया'वन्ती लोगसि आरम्भजीवी, एएसु चेव आरम्मजीवी 130 25 ३ १८ थायारग-सुन्तं [ उद्दे० २ एल्य वि वाले परिपच्चमाणे रमइ पावहिं कम्मे हि असरण 'सरण ' नि मन्नमाणे । इहमेगेसि एग-चरिया भवड । ( ३ ) से बहु-कोहे ब-माणे बहु-माए बहु-लोभे, वहु-रए 5बहु-नडे वहु-सढे बहु-सकप्पे आसव-सही पलिओच्छन्ने; उठिय-वाय पवयमाणे-'मा में केइ अदक्खू ' । अन्नाण-पमाय-दोसेण सयय मूहे धम्म नाभिजाणइ । अट्टा पया, माणव, कम्म कोविया, जे अणुवरया अविज्जाए पलिमोरखमाहु; आवट्टमेव अणुपरियट्टन्ति-ति बेमि ॥ 1. 15 : ५-२ (१) आवन्ती केवा'वन्ती लोगसि अणारम्भ-जीवी, एएमु चेव अणारम्मजीवी । 10 एत्थोवरए त मोसमाणे अय सधी' ति यद्दक्खू, जे ' इमस्स विगहम्स अयं सणे' ति अन्नसी। एस मगे आरिएहिं पवईए । (२) उहिए नो पमायए । 'जाणितु दुक्ख पत्तेय-सायं पुढो-छन्दा इह माणवा-पुढो दुक्ख पवेडयं । से अविहिंसमाणे अनवयमाणे पुढो फासे विपणोल्लए, एस समिया-परियाए वियाहिए। ( ३ ) जे असता पावहिं कम्मेहिं उयाहु : " ते आयका फुसन्ति " इति, उयाहु 20वीरे : ' ते फासे पुढे'हियासए' । से पुन्छ पेय पच्छा वेय भेउर-धम्म विद्धसण-बम्म अधुव अनितिय असासय चयावचइयं विपरिणाम-धम्म पासह । एवरूव-सधि समुवेहमाणस्स एगाय- यण-रयस्स इह विप्पमुझस्स नत्थि मन्गे विरयस्त--ति वेमि ( ४ ) आवन्ती केया वन्ती लोगसि परिग्गहावन्ती . से अप्प वा बहु वा अणु वा थूल वा चित्तमन्त वा अचित्त वा, एएसु चेव परिगहावन्ती, एयदेवेगेसिं महब्भय भवइ । लोग-वित्त च ण उबेहाए, एए संगे अविजाणओ, ' से सुप्पडिबुद्ध सूवणीय ' ति नच्चा पुरिसा ! परम-चक्खू विप्परकम एएस चेव वम्भचेरं ! ति वेमि; (५)" से सुय च मे अज्थ च मे " वन्ध-प्पमोक्खो तुज्झज्झत्थेव । एत्थ विरए अणगारे दीह-राय तिइक्खए; 30 पमत्ते बहिया पास, अप्पमते परिवए । एय मोण सम्म अणुवासेज्जासि-त्ति बेमि । 25 उद्दे० ३-४.] पञ्चमं अज्झयण , 10 (१) आवन्ती केया'वन्ती लोगंनि अपरिग्गहावन्ती, एएसु चेव अपरिगहावन्ती । सोच्चा वइ मेहावी पण्डियाण निसामिया -~-समियाए धम्मे आरिएहिं पवेइए-"जहेत्थ मए संधी झोसिए, एव अन्नत्थ; संधी दुशोसए भवइ । तम्हा वेमि" : नो निण्हवेज्ज वीरियं । 6 (२) जे पुवुहायी नो पच्छा-निवाई, जे पुवुढाई पच्छा-निवाई, जे नो पुवुट्ठाई नो पच्छा-निवाई से वि तारिसए सिया, जे परिन्नाय लोगमन्नेसिए । एय नियाय मुणिणा पवेश्य, इह आणा कंखी पण्डिए अनिहे पुव्वावर-राय जयमाणे सया सील सॉपेहाए सुणिया भवे अकामे अझञ्झे । इमेण चेव जुज्माहि ! किं ते जुज्झेण बज्झओ ? मुद्धारिहं खलु दुल्लभं । जहेत्थ कुसलेहिं परिन्ना-विवेगे भासिए । चुए हु वाले गम्भाइ रिज्ज 15 (३) ' अस्सि चेय पवुच्चई । रूवासि वा छणंसि वा ' से हु एगे संविद्धभए मुणी अन्नहा लोगमुवेहमाणे ' इति कम्म परिन्नाय सव्वसो से न हिंसई', सजमई, नो पगभई । (४) उवेहमाणो पत्तेय-सायं वण्णाएसी नारभे कचण सव्व-लोए, एग-प्पमुहे विदिस-प्पइण्णे निविण्ण-चारी अरए पयासु। से वसुमं सव्व-समन्नागय-पन्नाणेण अप्पाणेण अकरणिज्ज पावं कम्मन्त नो अन्ने- सी । जं सम्म ति पासहा, त मोण ति पासहा; ज मोण ति पासहा त सम्म ति पासहा । न36 इम सक्क सिढिलेहिं आइज्जमणिोहिं गुणासाएहिं वक-समायारेहिं पमत्तेहिं गारमावसन्तेहिं । (५) मुणी मोण समायाए धुणे कम्म-सरीरग; पन्त लूह च सेवन्ती वीरा सम्मत्त-दसिणो । एस ओहतरे मुणी तिण्णे मुत्ते विरए वियाहिए-त्ति बेमि ॥ - 20 30 (१) गामाणु-गामं दूइज्जमाणस्स दुज्जाय दुप्परकन्त भवइ अवियत्तस्स भिक्खुणोः वयसा वि एगे वुइया कुप्पन्ति माणवा, २० PARIA 5 आयारंग-तुत [१० उन्नयमाणे य नरे मह्या मोहेण नुपर- (२) सनाला बांये भुजो दुरदमा अजाणो अपामओ। एय ते मा होउ एय युसम्म दसणं, तदिट्टीए तम्मुतीण नपुरकारे तस्मन्नी तन्निवेसणे जय-विहारी चित्त-निवाई पन्य-निमशाई वलि बाहिर पासिय पाणे मन्टेना। (३) से अभिय.ममाणे पन्टियममाणे, सचेमाणे पमारमाणे विनियमाणे सपलिमजनमाणे । 10 एगया गुण-समियरस रीयनो काय-सफार्म अणुचिष्णा गया पाणा उद्दायन्ति; रह लोग-वेयण-वेजावटिय। ज जाउट्टी-स्य कम्म, त परिनाय विवेगमेर; ण्य से अप्पमाएण विवेग फिर चेयवी। (४) से पहुय-दसी पहूय-परिन्नाणे उवसन्ते सहिए मया जए दुई 15 विप्पडिएट जप्पाण सिमेस जपो फरिस्मद? एस से परमारामे, जाओ लोगम्मि इस्थिनो'। मुणिणा हु एवं पवेइय : (५) उन्नाहिजमाणे गाम-धम्महि जविनिव्वळासए, अवि ओमोयरिय कुज्जा, अवि उह ठाण ठाएज्जा, जवि गामाणुगामं दूइज्जेजा, अवि माहार वोच्छिन्देज्जा, अवि चए इन्धीनु मण : पुज्य दण्टा पच्चा फासा, पुव्य फासा पच्छा दण्डा-बच्चेए 20 कलहा सगरा भवन्ति । पटिलेहाए आगमेता आणवेन्ना अणासेवणाग--ति बेमि । से नो काहिए नो पामणिए नो मपमारण नो मामए नो क्य-किरिए; 'वड-गुत्ते अज्ञप्प-सबुडे ' परिवजए सया पाव । एय मोण ममणुवासेज्जामि-त्ति वेमि । . से बेमि त-जहा . 26 (१) अवि हरए पडिपुण्णे समसि भामें चिट्टइ, उवसन्त-रए सारस्खमाणे से चिठ्ठइ सोयमज्जा-गए। से पाम सम्वओ गुत्ते पास लोए महेसिणो, ने य पन्नाणमन्ता पवुद्रा आरम्भोवरया; समम्मेय ति पासहा । कालस्स कखाए परिव्ययन्ति'- ति बेमि । 30 (२) विगिञ्छ-समावन्नेण अप्पाणेण नो लभइ समाहिं । 'सिया वेगे अणुग- च्छन्ति ?, आसिया वे'गे अणुगच्छन्ति ? ' अणुगच्छमाणेहिं अणुगच्छमाणे कहं न निविज्जे ? (३) तमेव सच्च नीसक, ज जिणेहिं पवेइय । सड्डिस्स ण समणुनस्स सपवयमाणम्स " सामिय ' ति मन्नमाणस्स एगया समिया .

, ४ ५ 10 उद्दे० ६.] पञ्चमं अज्झयणं २१ होइ, स० ति म० ए० ' असमिया' हो०, 'असमियं' ति० म० ए० समिया हो० म० ' ति म० ए० असमिया होइ। समिय' तिम० 'समिया वा असमिया वा', समिया होइ उवेहाए, 'असमिय' ति म० स०वा अ० वा' असमिया होइ उवेहाए । उवेहमाणं अणुवेहमाणं वूया : " उवेहाहि समियाए" । इच्चेवं तत्थ सधी झोसिए भवइ । ( ४ ) से उद्वियस्स ठियस्स गइ समणुपस्सह, 5 एत्थ वि वाल-भावे अप्पाण नो उवदसज्जा । तुम सि नाम त चेव ज ' हन्तव्वं । ति मन्नसि । तुम सि नाम त चेव जं 'अज्जावयव्व ' ति मनसि, 'परियावयन्व' परिघेतव्व' 'उद्दवेयन्व' अजू चेयपडिवुद्ध-जीवी ।' तम्हा न हन्ता न वि घायए। (५) अणुसवेयण अप्पाणेणं ' ज हन्तव्वं ' ति नाभिपत्थए । जे आया से विन्नाया, जे विन्नाया से आया : जेण विजाणइ से आया । त पडुच्च पडिसखाए एस आया-वाई। समियाए परियाए वियाहिए-त्ति बेमि ॥ ५-६ (१) अणाणाए एगे सोवट्ठाणा, आणाए एगे निरुवट्ठाणा एयं ते मा होउ 115 एयं कुसलस्स देसणं, ' तदिहीए तम्मुत्तीए, तप्पुरकारे तस्सन्नी तन्निवेसणे । अभिभूय अद्दक्खू अणभिभूए; पहू निरालम्बणयाए जे मह अवही-मणे । पवाएण पवाय जाणेज्जा सह-सम्मुइयाए पर-वायरणेणं अन्नोस वा अन्तिए सोच्चा, (५) निद्देस नाइवत्तेज्जा मेहावी । सुपडिलोहिय सव्वओ सव्वयाए सम्ममेव समभिजाणिया । इहाराम परिन्नाय अलणि-गुत्तो परिवए; निट्टियट्ठी वीरे आगमेणं सया परकमेज्जासि-ति बेमि । (२) उड्ड सोया अहे सोया तिरिय सोया वियाहिया; एए सोया वियक्खाया जेहिं सग ति पासहा । आवट्ट तु उवेहाए एत्थ विरमेज्ज वेयवी, विणइत्तु सोय निक्खम्म एस महमकम्मा जाणइ पासइ, पडिलेहाए नावकखइ; (३) इह आगइ गइ परिन्नाय अच्चेइ जाइ मरणस्स वडुमगं विक्खाय-रए; सचे सरा नियन्ति। तका जत्थ न विज्जइ, मई तत्थ न गाहिया । 30 ओए अप्पइट्ठाणस्स खेयन्ने । ( ४ ) से न दोहे न हस्ते न वट्टे न तसे न चउरसे न परिमण्डले, न किण्हे न नीले न लोहिए न हालिद्दे न सुकिले, न सुरभिगधेन दुरभिगधे, न तिते न कड्डए न कसाए न अविले न महुरे, न कक्खडे न मउए, न गुरुए न लहुए, न सीए न उण्हे, 20 25 .

आयारंग-सुतं [उद्दे! न निद्धे न लुक्खे, न काऊ, न रहे न संगे, न इत्थी न पुरिमे न अन्नहा । 'परिन्ने सन्ने उवमा न विज्जइ' । अल्वी सता, अपयस्त पयं नस्थि । से न सद्दे न स्वे न गन्धे न रसे न फासे डच्चे- यावन्ति--ति वेमि॥ धु यं 5 10 15 (१) ओवुज्झमाणे दह माणवेसु आघाइ से नरे जस्सि'माओ जाईओसव्यओ सुपटिलेहियाओ भवन्ति, अधार से धुयं णाणमणेलिस। से मिट्टड तेसि समुट्टियाण निविखत्त-दण्ठाण समाहियाण पन्नाणमन्ताण इइ मुत्ति-मग । एव पेगे महावीरा विपरक्ष्मन्ति, पासह एगे अवसीयमाणे अगत्त-पन्न । ( २ ) से वेमि · से जहा वि कुम्मे हरए विनिविट्ठ-चिते पच्छन्न-पलासे उम्मुग से नो लभा । भनगा इव पन्निवेस नो चयन्ति, एव पेगे अणेग-स्वेहिं पुलेहिं जाया स्वेहिं सत्ता कलुण थणन्ति, नियाणमोते न लभन्ति मोक्ख । अह पास तेहिं कलेहिं आयत्ताए जाया १. गण्डी अदु वा कोट्ठी रायसी, अवमारिय काणिय झिम्मिय चेव कुणिय स्तुस्जिय तहा, 20 उयरिं च पास मुत्तिं च सूणिय च मिलासिण वेवय पीढ-प्पि च सिलिवइ महु-मेहिण- सोलस एए रोगा अखाया अणुपुव्वसो । अह ण फुसन्ति आयका फासा य अममजसा। मरण तेसि सॉपहाए उववाय चवण च नच्चा परिपाग च सॉपेहाए त मुणेह जहा तहा । 25 (३) सन्ति पाणा अधा तमास वियाहिया। तामेव सइमसइमझ्यच्च उच्चावए फासे पडिसवेएइ । बुद्धदेय पवेडय। (४) सन्ति पाणा वासगा रसगा उदए उदय-चरा गास-गामिणो-- पाणा पाणे किलेसन्ति . पास लोए महब्भय । 30 बहु-दुक्खा हु जन्तवो : सत्ता कामहिं माणवा। २. ३. ४.

उद्दे० २.] छट्ट अज्झयणं 5 आयाण अवशेण वह गच्छन्ति सरीरेण पभगुरेण; अट्टे से बहु-दुक्खे इती वाले पकुम्वइ एए रोगे वहू नच्चा आउरा परियावए। नाल पास"-अल तवे'एहिं ! एय पास, मुणी, महन्भय, नाइवाएज्ज कचण । भो सुस्सूस भो! धूय-वायं पवेएस्सामि । (५) इह खलु अत्तत्ताए तेहि-तेहिं कुलेहिं अभिसेएण अभिसभूया आभिसंजाया अभिनिव्वट्टा अभिसवुडा अभिसवुद्धा अभिनिक्खन्ता अणुपुव्वेण महामुणी । तं परक्कमन्त परिदेवमाणा 10 णे चयाहि " इति ते वयन्ति; (६) छन्दोवणीया अज्झोववन्ना अक्कन्द-कारी जणगा रुयन्ति । अतारिसे मुणी ओहतरए, जणगा जेण विप्पजढा; सरण तत्थ नो समेइ । किह नाम से तत्थ रमइ १ एयं नाणं सया समणुवासेज्जासि त्ति-बोम ॥ 15 मा 20 ( १ ) आउर लोग मायाए चइत्ता पुन्व-सजोग हिच्चा उवसम वसित्ता बम्भचेरसि वसु वा अणुवसुवा जाणित्तु धम्मं जहा-तहा अहेगे तमच्चाई कुसीला वत्थ पडिग्गह कम्बल पाय-पुञ्छण विओसिज्जा अणुपुग्वेण अणहियासेमाणा परसिहे दुरहियासए । कामे ममायमाणस्स इयाणं वा मुहुत्ते वा अपरि-माणाए भेओ एवं से अन्तराइएहिं कामहिं आकेवलिएहिं; अविइण्णा चे'ए। (२) अहे'गे धम्ममायाए- आयाण-पभिइ-सुप्पणिहिए चरे अपलीयमाणे दढे; सव्व गेहिं परिन्नाय एस पणए महा-मुणी, अइयच्च सव्वओ सग न महं अत्थी' ति । इति ' एगो अहमसि' जयमाणे एत्थ विरए अणगारे सव्वओ मुण्डे रीयए। जे अचेले परिवुसिए सचिक्खइ ओमोयरियाए, से 25 80 New 5 आपारंग-युचे । ६०३ अकुट्टे व रण व कमिए वा पलिय-प्पगन्ये सदु वा पगन्ध जतहदि सह-फासेहिं । इति मंसाए गयरे मनयरे जभिनाय तिसरामाणे परिचा। जे य हिरी । जे र गहिरामाणे चेच्चा सच विस्तोचियं सफामे फोमेनानिय-दमणे । (३) एए भो नगिणा बुता, जे लोगामि अणागमण-मिलो आणाए मामग धमा, एम उतर-बाप द माणशाप नियाहिए। एत्योवरए त होसमाणे आयाणिज्ज परिलाय परियारण विनिमः। इहमेगेसि एग-चरिया हो । तत्यियरा-नवरे पुरोहिं मुदं मजाए ममपाण से मेहावी परिक्षण सुमि वा अदु वा दुभि अनु वा तन्थ भेरवा' पाणा पाणे फिलेसन्ति । ते फासे पुट्ठो वीर हियासएग्जामि-शि मि ॥ 10 16 (१) एय सु, मुणी, आयाण । 'सया मुअक्खाय-मम्मे, ''विधूय-कप्पे निजोसचा 'जे अत्रेले परिसुमिर, तरस भिक्खुस्स नो एव भवतः 'परिजुणे मे वन्थे; वाथ जाइल्मानि, मुरंजाइम्मानि, सर जामा- मि, सधिस्तामि, सिव्विस्सामि, उपासिस्तामि, बुरसिम्ताभि, परिहिम्मानि, पाउणिस्सामि'। (२) अदु वा तत्य परय गन्त भुजो अचेलं तण-कामा फुसन्ति, नीय-फा० 20 फु०, तेओ-फा० फु०, दसमसग-फा० फु०---एगयरे जनयरे विन्यस्वे फासे महियासर सचेले लाघवमागममीणे तवे से अभिसम नागए भवर जहे 'य भगवया पवेश्य, तमेव अभिसच्चा सव्वओ सन्वयाए समत्तमेव समाभिजाणिया। एव तेस महा-वाराणं चिर-रायं पुन्वाई वासाइ शय-गाणाणं दवियाण पास'हियासिय; आगय-पन्नाणाणं किसा वाहा भवन्ति पवणुए य मंस-तोणिए । विस्सेणी-मट्ठ परिन्नाय एस तिष्णे मुते विरए विवाहिए-ति वेमि । ( ३ ) विरयं भिक्खु रीयन्त चिर-राओसिय अरई तत्य किं विधारए ? सधेमाणे समुट्ठिए; जहा से दीवे असदीणे एव से धम्मे आरिय-देसिए। ते अणवकखमाणा अणइवाएमाणा दइया मेहाविणो पण्डिया । एवं तेसि भगवओ अणु- द्वाणे । जहा से दिया-पोए, एव ते सिस्ता दिया य रामओ य अणुपुश्वेण वाइयति बेमि ।। 26 30 उद्दे०४-५.] छ अज्झयणं 10 15 -- (१) एच ते 'सिस्सा दिया य राओ य अणुपुत्रेण वाइया' तेहिं महावीरेहिं पन्ना- णमन्तेहिं, तेस'न्तिए पन्नाण उपलभ हिच्चा उवसम फारुसिय समाइयन्ति, 'वसित्ता वम्भ- आण 'तं नो' ति मन्नमाणा आघाय तु सोच्चा निसम्म 'समणुन्ना जीविस्सामो' एगे निक्खम्म ते असभवन्ता विडज्झमाणा कामेहिं गिद्धा अज्ञोववन्ना समाहिमाघायमझोसयन्ता सत्थारमेव फरुस वयन्ति । सीलमन्ता उवसन्ता सखाएँ रीयमाणा 'असीला' अणुवयमाणस्स विडया मन्दस्स बालिया। नियमाणा वेगे आयार-गोयरमाइक्खन्तिः नाण-भट्ठा दसण-लूसिणो नममाणा एगे जीविय विप्परिणामेन्ति; पुट्ठा वेगे नियन्ति जीवियस्सेव कारणा। निक्खन्त पि तेसि दुण्णिक्खन्त भवइ । (२) 'वाला-'वयणिज्जा हु ते नरा; 'पुणो-पुणो जाइ पगप्पेन्ति' । अहे सभवन्ता विद्दायमाणा " अहमसीति " विउकसे, उदासीणे 'फरुसं वयन्ति' 'पलियप्पगन्थे अदु वा पगन्थे मतहेहिं त मेहावी जाणेज्जा धम्म । अहमट्टी " तुमं सि नाम बाले ", आरम्भट्ठी अणुवयमाणे: हण पाणे !" घायमीणे हणओ यावि समणुजाणमीणेः "घोरे धम्मे उदीरिए !" 20 उवेहइ ण अणाणाए, एस विसणे वितण्डे वियाहिए-त्ति बेमि । (३) 'किमणेण भो जणेण करिस्सामि ?' त्ति मन्नमाणा एव पे'गे विइत्ता। मायर पियर हेच्चा नायओ य परिग्गह वीरायमाणे समुट्ठाए 25 विहिंसे सुव्वए दन्ते पास दीणे उप्पइए पडिवयमाणे । वसट्टा कायरा जणा लूसगा भवन्ति । अहमेगेसिं सिलोए पावए भवइः " से समण-विन्भन्ते, से समण-विब्भन्ते । " पासहे'गे समन्नागएहिं असमन्नागए, नममाणेहि अनममाणे, विरएहिं अविरए, दविएहिं अदविए । अभिसमेच्चा पण्डिए मेहावी 30 निट्ठियढे वीरे आगमेण सया परक्कमेज्जासि-ति वेमि ।। - * ६-५ (१) से गिहेसु वा गिहन्तरेसु वा गामेसु वा गामन्तरेसु वा नगरेसु वा नगरन्तरेसु २६ आयारंग-सुत्तं [उहे०५. HAM nama 5 वा जणवएसु वा जणवयन्तरेस वा सन्ते'गइया 'जणा लुसगा भवन्ति, ' अटु वा फासा फुसन्ति ते फासे 'पुट्ठो वीरोहियासए'। (२) ओए समय-दसणे दय लोगस्स जाणिवा पाईण पढीण दाहिणं रीण आइखे विभए विट्टे वेयवी; से उढिएसु वा अणुट्टिामु वा युस्सुसमाणे पवेयए ( ३ ) सन्ति विरइ उपसम निव्वाणं सोय अज्जविय मद्दविय लाघविय अणइ-बत्तिय; सव्वेसि पाणाण सेन्वेसि भूयाणं सव्वेसि जीवाण सव्वेसि सत्ताण अणुवीइ भिक्खु धम्ममाइसज्जा। (४) अणुवाइ भिक्खु-धम्ममा इक्व- 10माणे नो अत्ताण आसाएजा नो पर आसाएज्मा, नो अन्नाइ पाणाइ भूयाई जीवाइ सवार आसाएज्जा : से अणासायए अणासायमीणे। चज्झमाणाण पाणाण भूयाण जीवाण सताण 'नहा से दीचे असदीणे' एवं से भवइ सरण महा-मुणी। (५) एव स उहिए ठियप्पा अनिहे अचले चले अवहि-लेसे परिचए । सखाय पेसल धम्म दिहिम परिणिन्बुडे । तम्हा सगं ति पासहा । गन्थेहिं गढिया नरा, विसण्णा फाम-विप्पिया । तम्हा लहाओ नो परिवितसेज्जा, जस्सि'मे आरम्भा सव्वओ सव्वयाए सुपरिन्नाया नोसमे लूसिणो नो परिवित्तसन्ति । से वन्ता कोह च माण च माय च " 15 20 भवन्ति, लोभ च - 25 एस तिउट्टे वियाहिए-ति वोम । (६) कायस्स विओचाए एस सगाम-सीसे वियाहिए। से ह पारगमे मुणी । अविहम्ममाणे फलगावयही फालोवणीए कखेज्ज काल नाव सरीर-भेमो-ति वेमि ॥ महापरिन्ना' नाम सप्तममध्ययनं विनष्टामिति प्राचीनः प्रवादः श्रूयते।

उद्दे० १-२.] अट्ठमं अन्झयणं. वि मो हो ८-१ (१) से बेमि : समणुन्नस्स वा असमणुन्नस्स वा असण वा पाण वा खाइम वा साइमं वा वत्थं वा पडिगह वा कम्बल वा पाय-पुन्छणं वा नो पाएज्जा नो निमन्तेज्जा, नो कुज्जा वेयावडियं परं आढायमीणे--त्ति बेमि । (२) धुवं चेय जाणेज्जा असण वा जाव पाय-पुञ्छण वा लभिय नो लभिय, भुजिय नो भुञ्जिय-पन्थ विवत्तूण विउक्कम विभत्त धम्म झोसेमाणे समेमाणे पाएज्जा निम-5 न्तज्जा, कुज्जा वेयावडियं पर अणाढायमीणे-त्ति बेमि । (३) इहमेगेसि आयार-गोयरे नो सुनिसन्ते भवइ । ते इह आरम्भट्ठी, अणुवयमाणा : हण पाणे ! " घायमीणा इणओ यावि समणुजाणमीणा, अदु वा अदिन्नमाइयन्ति अदु वा वायाओ विउञ्जन्ति, त-जहा:-अस्थि लोए, नत्थि लोए; धुवे लोए, अधुवे लोए; साइए लोए, अणाइए लोए; स-पज्जवसिए लोए, अपज्जवसिए लोए; 'सुकडे ' ति वा दुक्कडे '10 ति वा, 'कल्लाणे' ति वा 'पावए' ति वा, - ' साहु' ति वा ' असाहु' ति वा, 'सिद्धि' ति वा ' असिद्धि' तिवा, निरए ' ति वा ' अनिरए' ति वा । जमिण विप्पडिवन्ना मामग धम्म पन्नवेमाणाः एत्थ वि जाणेह · अकस्मात् । एव तेसिं नो सुय- क्खाए नो सुपन्नत्ते धम्मे भवइ-से जहे'य भगवया पवेइय आसु-पन्नेण जाणया पासया-अदुवा गुत्ती वओ-गायरस्स-ति बेमि । ( ४ ) सव्वत्थ सम्मय पाव; तमेव उवाइकम्म एस मह विवेगे वियाहिए । गामे वा अदुवा रणे नेव गामे नेव रणे धम्ममायाणह पवेइय माहणेण मईमया जामा तिणि उदाहिया, जेसु इमे आरिया सम्बुज्झमाणा समुट्ठिया। 20 ने निव्वुडा पावहिं कम्मेहिं अनियाणा ते वियाहिया। उड्ढ अह तिरिय दिसासु सव्वओ सव्वावन्ती च ण पडिक जीवहिं कम्म समारम्भेण-त परिन्नाय मेहावी नेव सयं एएहिं काएहिं दण्ड समारभेज्जा,नेव'न्नेहिं एएहिं काएहिं दण्ड समारम्भावेज्जा,ने'वन्ने एएहि काएहिं दण्ड समारम्भन्ते वि समणुजाणेजा । जे वन्ने एएहिं काएहिं दण्ड समारभन्ति, तेसि पि वयं 25 लामो । त परिन्नाय मेहावी त वा दण्ड अन्न वा दण्ड- नो दण्ड-भी दण्ड समारभेज्जासि-ति बेमि ।। 16 ८-२ (१) से भिक्खू परकमेज्ज वा चिट्ठज्ज वा निसिएज्ज वा तुयटेज वा सुसाणसि वा सुन्नागारसि वा गिरि-गुहसि वा रुख-मूलसि वा काययणसि वा हुरत्था वा । काहींचे विह- ૨૮ आयारंग-गुत्तं [उद्दे० ३. । - N रमाण त भिक्खु उवसकमित्तु गाहावई व्या.-"आरसन्तो समणा! अहं सलु तव अट्टाए असण वा ४ वत्य वा ४ पाणाइ ४ समारब्भ समुद्दिम्स फीयं पामिचं अच्छेग्य अनिमई आमिहड आटु चेम, आवसह वा समुस्सिणामि, से मुन्जह बसह, (२)आउसन्तो समणा!" भिक्खू त गाहावद समणस सवयस पडियारखे.-" आउसन्तो गातावर! नो खल ते वयण आढामि, नो खलु ते वयण परिजाणामि, जो तुम मम अद्याप असण वा ४ वय वा ४ पाणार ४ समारब्भ.... आइटु चेपसि, आवसह वा समुस्सिणासि । से बिरओ, आउसो, गाहावर एयस्साकरणयाप (३) से भिक्खू परकामेज्ज वा जाव हुरत्या वा गाहावई आयगयाए पेहाए असण. . आटु चेएइ, आवसह वा समुस्सिणाइ, भिनतु त परिघासेउ । त च भिक्खू जाणेज्जा 10 सह-सम्मुइयाए परवागरणेण अनोसि वा अन्तिए सोचा : 'अय खलु गाहावई मा अद्याप असण....समुस्सिणाई' । त च भिख पहिलहाए नागमेता आणवेज्जा अणासेवणाप-शि मि। ( ४ ) भिक्खु च सलु पुट्ठा वा अपुट्टा वा-जे इमे आय गन्था फुसन्ति “से हन्ता, हणह सणह छिन्दह दहह पयह आलुम्पह विलुम्पह महस पारेह विष्परानुमह !" ते फासे पुढे वीरो अहियासए'। 16 अदु वा आयार-गोयर आइक्खे तधिया णमणेलिस, अदु वा वइ-गुत्तीए गोयरस्स अणुपुषेण सम्म पडिलेहाए आय गुत्ते । 'बुद्धेहे'य पवेइय.' स समणुन्ने असमणुन्नस्स असण वा... ( यथा २७, १-३.) .. पर आढायमीणाए-ति बेमि । (५) 'धम्ममायाणह पवेश्य माहणेण मईमया' । ममणुन्ने समणुन्नस्स असण वा. (यथा २७, १-३ ननर नो न नगनीय पर आढायमीणेति बमि ॥ 20 ) - ८-३ (१) मज्झिमेण वयसा वि एगे सम्ममाणा समुट्ठिया सोचा वाई मेहावणि पण्डियाण निसामिया । समियाए धम्मे आरिएहिं पवेइए ते अणवरुखमाणा अणडवाएमाणा अपरिगहमीणा नो 25 परिगहावन्ती । सम्वावन्ती त ण लोगसि- निहया दण्ड पाणेहिं पाव कम्म अकुवमाणे एसमह अगन्ये वियाहिए । (२) ओए जुइमस्स खेयन्ने उववाय चवण च नच्चा; आहारोवचया देहा परीसह-पभगुरा । पासहे'गे सन्विन्दिएहिं परिगिलायमाणेहिं ओए; दय दयइ जे सनिहाण-सत्यस्त 30 खेयन्ने । से भिक्खू कालन्ने वलन्ने मायन्ने खणन्ने विणयन्ने समयन्ने परिगह अममायमणि काले'णुढाई अपडिन्ने दुहओ 'छिता नियाइ'। ( ३ ) त भिक्खु सीयफास-परिवेवमाण-गाव उवसकमित्तु गाहावई बूया --" आउस- न्तो समणा ! नो खलु ते गाम-धम्मा उव्वाहन्ति ? " " आउसन्तो गाहावई ! नो खल मे उद्दे०४-५.] अट्ठम अज्अयणं २९ गाम-धम्मा उन्नाहन्ति, सीय-फास च नो खलु अह सचाएमि अहियासेत्तए । नो खलु में कप्पइ अगणि-काय उज्जालेत्तए वा पज्जालेत्तए वा, काय आयावेत्तए वा पयावेत्तए वा, अन्नेसिं वा वयणाओ"। सिया सेव वयन्तरस परो अगाणि-काय उज्जालेता कार्य आयावेज्जा वा पयावेज्जा वा । त च भिक्खू पडिलेहाए आगमेत्ता आणवेज्जा अणासेवणाए-ति नेमि ।। ८-४ (१) जे भिक्खू तिहिं वत्थेहिं परिवुसिए पाय-चउत्थेहिं, तस्स ण नो एवं भवइ । चउत्थ वत्थं जाइस्सामि' । से अहेसणिज्जाइ वत्थार जाएज्जा, अहा-परिग्गहियाई वत्थाइ धारेज्जा, नो घोवेज्जा नो रएज्जा, नो धोय-रत्ताइ वत्थाइ धारेजा, अपलिउच्चमाणे गामन्तरेसु ओमचेलिए । एय खु वत्थ-धारिस्स सामग्गिय । अह पुण एव जाणेज्जा : ' उवा- इक्वन्ते खलु हेमन्ते, गिम्हे पडिवन्ने, ' अहा-परिअण्णाइ वत्थाइ परिडवेजा, अहा-परिजुष्णाई वत्थाइ परिठवेत्ता अदु वा सन्तरुत्तरे अदु वा ओमचेलिए अदु वा एग-साडे अदु वा अचेले 10 लाविय आगममीणे तवे से अभिसमन्नागए भवइ । जहे'य भगवया पवेइयं तमेव अभिसमे- च्चा सव्वओ सव्वयाए समत्तमेव सम भिजाणिया । (२) जस्स ण भिक्खुस्स एव भवइ : ' पुट्ठो खलु अहमसि, नाल अहमंसि सीय- फासं अहियासेत्तए '-से वसुम सव्व-समन्नागय-पन्नाणेण अप्पाणेण केइ अकरणाए आउट्टे, तवस्सिणो हु त सेय ज सेगे विहमाइए । तत्थावि तस्स काल-परियाए, से वि तत्थ वियन्त-कारए । इच्चेय विमोहाययण हिय सुह खम निस्सेस आणुगामिय-ति वेमि ॥ - 15 .... ( १ ) जे भिक्खू दोहिं वत्थेहि परिसिए पाय-तइएहिं, तस्स ण नो एव भवद : तइयं वत्थ जाइस्सामि' । से अहेसणिज्जाइ वत्थाइ जाएजा (यथा ६-१३, मवर अदु वा सन्तरुत्तरे पाठो वर्जनीय , तथा वत्थधारिस्स स्थाने तस्स भिक्खुस्स पाठ' पठनीय : )20 एव भवइ . 'पुट्ठो अबलो अहमंसि, नालमहमसि गिहन्तर-सकमण भिक्खायरिय गम- णाए, ' (२) से एच वयन्तस्स परो अभिहड असण वा ४ आहटु इलएज्जा; से पुव्वामेव आलोएज्जा : " आउसन्तो गाहावई | नो खलु मे कप्पइ अभिहडे असणे ना ४ भोत्तए ना पायए वा अन्ने वा सहप्पगारे "। (३) जस्स ण भिक्खुस्स अय पगप्पे –' अह च खलु पडिन्नत्तो अपडिन्नतोहिं, 26 गिलाणो अगिलाणोहिं अभिकख-साहम्मिएहि कीरमाण वेयावडिय साइज्जिस्सामि, अह चावि खलु अपडिन्नत्तो पडिन्नत्तस्स अगिलाणो गिलाणस्स अभिकख-साहम्मियस्स कुजा वेयावढिय फरणाए : ( ४ ) ' आहटु परिन्न आनक्खेस्सामि आहड च साइजिस्सामि, आ० प० आ० आ० च नो सा०, आ०प० नो० आ० आ० च सा०, ० नो आ० आ० च "आ० ३० आयारंग-सुस्त उद्दे०६-७. नो सा०, तस्थावि '-एव से अहा-किट्टियमेव धम्म समाभिजाणमाणे सते विरए सुसमाहिय-लेस्से । (यथा २९, १६ ) आणुगामिय-ति वेमि ॥ . . ८-६ (१) जे भिक्खू एगेण वत्येण परिसिए पाय-विइएण, तस्स नो एवं भवड 'विइयं वत्थ जाइस्सामि'। से अहेसणिज्ज वत्थ जाएजा .. (यथा २९, ६-१३. नवर जुण्णा वत्थाइ स्याने जुण्णं चत्यं पठनीय, अपलि. गाम० ओम० , तया अदु वा सन्तरुत्तरे अदु वा ओमचेलए वर्जनीय , तथैव चत्यधारिस्स स्थाने तस्स भिखुस्स भणनीय )... एवं मवई : 'एगो अहमंसि; न मे अत्यि कोइ न याहमवि कस्सइ, एव स एगाणियमेव अपाण समभिजाणेया ; लाघविय....( यया २९, ११.)....समभिजाणिया । (२) से भिक्खू वा भिक्खुणी वा असणं वा ४ आहारेमाणे नो वामामओ हणु- 10 याओ दाहिण हणुय सचारेमा आसाएमाणे, दाहिणाओ वा हणुमाओ वाम हणुय नो सचारेज्जा आसाएमाणे । से अणासायमाणे लापविय....( यया २९, ११.).... समभिजाणिया । (३) जस्स ण भिक्खुस्त एव भवर : ' से गिलामी च खलु अह इमम्मि समए इमं सरीरंग अणुपुव्वेण परिवहितए, ' से अणुपुब्वेण आहार सवदृज्जा, अणुप्पुवेणं आहार 15 सवढेता ' कसाए पयणुए किच्चा' समाहियच्चे फलगावयट्टी उहाय भिक्खू अभिनिव्वुढच्चे (४) अणुपविसित्ता गाम वा नगर वा खेड वा कन्नड बा मडम्ब वा पट्टण वा दोण-मुह वा आगर वा आसम वा सन्निवेस वा निगम वा रायहाणिं वा तणाइ जाएज्जा, तणार 20 जाइत्ता से तमायाए एगन्तमवक मेजा, एगन्तमववामित्वा अप्पण्डे अप्प-पाणे अप्प-वीए अप्प-हरिए अप्पोसे अप्पुदए अप्पुतिंग-पणग-दग-मट्टिय-मकडा-सन्ताणए पहिलेहिय २ पमन्जिय २ तणाइ सन्थरेज्जा, तणाइ सन्थरेता एत्य वि समए इतिरिय कुजा। (५) त सच . सच्चा-वाई ओए तिणे छिन्न-कहकहे आईयढे आणाईए चेच्चाण भेउर काय सविहुणिय विरूव-रूवे परीसहोवसग्गे अस्सि विस्तम्भणयाए भेरवमणुचिण्णे । तत्थावि.... ( यथा २९, १६ )....आणुगामिय'-ति वेमि ॥ " 25 ८-७ (१) जे भिक्खू अचेले परिवुसिए, तस्स ण एव भवः 'चाएमि अह तण-फासं अहियासेत्तए, सीय- फा० अ०, तेओ-फा० अ०, दस-मसग-फा अ०, एगयरे अन्नयरे विख्व. रूवे फासे अहियासेत्तए; हिरिपडिच्छायण च'ह नो सचाएमि अहियासेतए, एव से कप्पर ३ कडिबन्धण धारेत्तए । अदु वा तत्थ परकमन्त भुज्जो अचल तण-फासा फुसन्ति, सीय-फा० फु०, तेओ-फा० फु०, दसमसग-फा० फु०, एगयरे अन्नयरे विरूव-रूवे फासे अहियासेइ । अचले लापविय ...( यथा २९, ११ ).. सममिजाणिया ।

AUn - उद्दे० ८.] अट्ठम अज्झयणं ३१ (२) 'जस्स ण भिक्खुस्स एव भवइ : अह च खलु अन्नेसि भिक्खूणं असण वा ४ आह९ दलइस्लामि आहड च साइज्जिस्सामि, जस्स....द० आ० च नो सा०, जस्स ....नो द० आ० च सा०, जस्स....नो द० आ० च नो सा०, (३) अह च खलु तेण अहाइरित्तेण अहेसणिज्जेण अहा-परिगहिएण असणेण वा ४ अभिकख साहाम्मियस्स कुज्जा वेयावडिय करणाए, अहं चावि तेण....साहम्मिएहिं कीरमाण वेयावडिय साइज्जिस्सामि'-5 (३) लाघवियं....(यथा २९, ११.)....समभिजाणिया। (४) जस्स ण भिक्खुस्स एव भवइ : से गिलामी ....( यथा ३०, १३-२२.).... समए कायं च जोगं च इरिय च पञ्चक्खाएज्जा। त च सच्च....( यथा ३०,२३-२६ ).... आणुगामिय–ति बेमि ॥ 10 15 20 ८-८ १. अणुपुम्वेण विमोहाइ जाइ धीरा समासज्जा वसुमन्तो मइमन्तो सव्व नच्चा अणेलिस २. दुविह पि विइत्ताणं बुद्धा धम्मस्स पारगा अणुपुवीए सखाए कम्मुणाओ तिउट्टइ । ३. कसाए पयणुए किच्चा अप्पाहारो तिइक्खए; अह भिक्खू गिलाएज्जा आहारस्सेव अन्तिय, जीविय नाभिकजा मरण नो वि पत्थए: दुहओ वि न सज्जेज्जा जीविए मरणे तहा । ५. मज्झत्यो निज्जरा-पेही समाहिमणुपालए; अन्तो बहिं विओसज्ज अज्झत्थ सुद्धमेसए । ६. ज किंचुवक्कम जाणे आउक्खेमस्समप्पणो, तस्सव अन्तरद्धाए खिप्प सिक्खेज्ज पण्डिए । ७. गामे वा अदु वा रणे थण्डिलं पडिलेहिया अप्प-पाण तु विन्नाय तणाइ सन्थरे मुणी। ८. अणाहारो तुय ज्जा, पुट्ठो तत्थ हियासए, नाश्वेल उवचरे माणुस्सेही वि पुट्ठव । ससप्पगा य जे पाणा जे य उड्डमहेचरा भुञ्जन्ते मस-सोणीय न छणे न पमज्जए। १० पाणा देह विहिंसन्ति-ठाणाओ न विउब्भमे, आसवोहिं विचित्तोहं तिप्पमाणोहियासए । ११ गन्थेहिं विचित्तोहि आउ-कालस्स पारए; पग्गहीयतर चेयं दवियस्स वियागओ १२. अयं से अवरे धम्मे नायपुत्वेण साहिए : 26 ९. 30 ..

१२ आयारंग-सुतं [उद्दे०८, 10 10 आय-वज पडीयार विजहेजा तिहा-तिहा। १३. हरिएमु न निवजोजा, थण्डिल मुणिया सए, विओसेन्ज अणाहारो पुट्ठो तत्थ'हियासए । १४. इन्दिएहिं गिलायन्तो समिवमाहरे मुणी, तहावि से अगरहे अचरे ने समाहिए। १५. आभक्कमे पडिकमे सकुचए पसारए काय-साहारणहाए एत्थ वा वि अचेयण । १६. परिकमे परिकिलन्ते अदु वा चिटे अहा-यए, ठाणेण परिकिलन्ते निसिएज्जा य अन्तसो; १७. आसणिणेलिस मरण इन्द्रियाणि समीरए । कोला'वास समासज्ज वितह पादुरेसए, १८. जो वजा समुप्पज्जे न तत्थ अवलम्बए, तओ उकसे अप्पाण, सव्वे फासे हियासए । १९. अय चाययतरे सिया जो एव अणुपालए . सव्वगाय-निरोघे विठाणाओ न विउन्भमेः अय से उत्तमे धम्मे पुन्वट्ठाणस्स पागहे। अचिर पडिलेहिता विहरे चिट्ठा माहणे, २१. अचित्त तु समासज्ज ठावए तत्थ अप्पग, वोसिरे सव्वसो काय : 'न मे देहे परीसहा'। २२. जावज्जीव परीसहा उसगा य सखाय सवुडे देह-भेयाए इति पन्ने'हियासए । २३. भेउरेसु न रज्जेज्जा कामेसु बहुयरेसु वि, इच्छा-कोभ न सेवेज्जा धुवं वण्ण सॉपेहिया, २४, 'सासएहिं ' निमन्तेज्जा--: दिव्त्र माय न सरहे । त पडिबुज्झ माहणे सव्व नूम विहूणिया । २५. सव्वट्ठोहिं अमुच्छिए आउ-कालस्स पारए; तिइक्ख परम नच्चा विमोहन्नयर हिय-ति बेमि ।। 15 २०. - 90 25 नवमं अज्झयणं ३३ उ व हा ण सुयं ९-१ २. 5 ५. 10 15 १. अहा-सुय वइस्सामि नहा से समणे भगव उठाय सखाएँ तसि हेमन्ते अहुणा-पव्वाइए रीइत्था । 'नो चेवि मेण वायेणं पीहिस्सामि तसि हेमन्ते...- से पारऍ आवकहाए, एय खु अणुधम्मिय तस्स । ३. चत्वारि साहिए मासे बहवे पाण-जाइयागम्म माभिरुज्ज्ञ काय विहरिंसु, आरुसियाण तत्थ हिंसिसु । ४, संवच्छर साहियं मास ज न रिकासि वत्थग भगवं, अचेलए तओ चाई त वोसज्ज वत्थमणगारे । अदु पोरिसिं तिरिय-भित्तिं चक्खुमासज्ज अन्तसो झाइ3B अह चक्खु-भीय-सहिया ते " हन्ता हन्ता" बहवे कन्दिसु । ६. सयणेहिं वीइमिस्सहिं इथिओ तत्थ से परिन्नाया; सागारियं न से सेवे, इति से सयं पवेसिया झाइ । ७. जे के'इमे अगारस्था, मीसी-भाव पहाय से झाइ पुट्ठो वि नाभिभासिंसु, गच्छइ नाइवत्तई अञ्जू । ८. नो सुकरमेगेसिंः नाभिभासे अभिवायमीणे, हय-पुन्वों तत्थ दण्डेहि, लूसियपुन्वा अप्प-पुण्णेहि । ९. फरुसाइ दुत्तिइक्खाइ अइयच्चे मुणी परकममाणे आघाय-नट्ट-गीयाइ दण्ड जुज्झाइ मुहि जुज्झाइ १०. गढिए मिहु-कहासु समयम्मि नाइ-सुए विसोएँ अदक्खू एयाई सो उरालाइ गच्छइ नायपुत्ते असरणाए । ११. अवि साहिए दुवे वासे सीओद अभोच्चा निक्खन्ते; एगत्त-गए पिहियच्चे से अभिन्नाय-दसणे सन्ते । १२. पुढवि च आउ-काय च तेउ काय च वाउ-काय च पणगाइ बीय-हरियाइ तस-काय च सव्वसो नच्चा एयाइ सन्ति' पडिलेहे 'चित्तमन्ताइ । से अभिन्नाय परिवज्जियाण विहरित्था इति सखाएँ से महावीरेः १४. अदु थावरा य तसत्ताए तसजीवा य थावरचाए, अदु सम्बजोणिया सत्ता, कम्मुणा कप्पिया पुढो नाला'। 20 26 ५ आयारग-सुत्तं [जे 'M na--- मयसो १५. भगव च एवमन्नेसी : ' सोवहिए हु लुप्पई वाले' कम्म च सव्वसो नच्चा त पडियाइख पावग भगव । १६. दुविह समेच्च मेहावी किरियमक्सायणलिस नाणी आयाणसोयमइवाय-सोय जोग च सव्यसो नच्चा १७. अइवत्तियमणादि सगयन्नमि अमरणयाए : जस्तिथिओ परिन्नाया सम्यकम्मावहाओं अदक्खू । १८. अहा-कड न से सेवे, कम्मुणा य अद्दखू ज फिश्चि पावग, भगव त अकुत्र वियर भुजित्था । १९. नासेवई य परवत्य, पर-पाए नि से न भुजित्था, परिवज्जियाण ओमाण गच्छद सखडिं असरणाए। २०. मायने असण पाणस्स नाणुगिद्धे रसेलु अपडिन्ने अच्छि पि नो पमज्जिया, नो वि य कण्डयए मुणी गाय । २१. अप्प तिरिय पेहाए अप्प पिदुमओ व पेहाए अप्प वुइए पडिभाणी पन्थ-पेही चरे जयमाणे। २२. मिसिरसि अद्ध-पडिवन्ने त वोसज वत्यमणगारे पसारेतु वाहूँ परकमे नो अवलम्बियाण सन्धसि । एस विही अणुक्वन्तो माहणेण मईमया वहुसो अपडिन्नेण भगवया एव रीयन्ते-त्ति वेमि ।। २३. १. चरियासणाइ सेज्जाओ एगइयाओं जाओं वुइयाओ, आइस्ख ताइ सयणासणाइ जाई सेविथ से महा-वीरे। २. आवेसण-सभा पवासु पणिय-सालासु एगया वासो अदु वा पलिय-हाणेलु पलाल-पुजेसु एगया वासो। ३. आगन्तारे आरामागारे नगरे वि एगया वासो, सुसाणे सुन्न-गारे वा रुक्ख-मूले वि एगया चासो । ४. एएहिं मुणी सयहिं समणे आसि प-तेलस वासे; राईदियं पि जयमाणे अप्पमते समाहिए झाड; ५. निदं पि नो पगामाए सेवद य भगवं उट्टाए; जन्गावई य अप्पाण, ईसि साइयासी अपडिन्ने । ६. सम्वुज्शमाणे पुनरावि आसिलु भगव उट्टाए निक्खम्म एगया राओ वहि चक्रमिया मुहुत्ताग । सयणहिं तस्वमग्गा भीमा आसी अणेग-व्वा यः ससप्पगा य जे पाणा अदु वा पक्विणो उवचरन्ति । ८. अदु कुचरा उवचरन्ति गाम-रक्खा य सत्ति-हत्था य, ७.

.३] नवमं अज्झयणं , 3 १२. अदु गामिया उवसम्गा : इत्थी एगइया पुरिसो वा। ९. इह-लोइयाइ पर-लोडयाइ भीमाई अणेगरूवाइ, अवि सुम्भि-दुन्भि-गन्धाइ सदाइ अणेग-रूवाई १०. अहियासए सया समिए फासाई विरूव-रूवाई, अरई रई च अभिभूय रीयई माहणे अवहु-बाई । ११. सयहिं तत्थ पुच्छिम् एग-चरा वि एगया राओ, अव्वाहिए कसाइत्था; पैहमाणे समाहिं अपडिन्ने । " अयमन्तरसि, को एत्थ ? " " अहमसि " ति " भिक्खु" आ६१ अयमुत्तमे से धम्मे : तुसिणीऍ स कसाइए झाइ । १३. जंसि प्पेगें पवेवन्ति सिसिरे मारुए पवायन्ते तंसि प्पेगे अणगारा हिमवाए निवायमेसन्तिः १४. 'संघाडीओ पविसिस्सामो, एहा य समादहमाणा पिहिया वा सक्खामो; अइदुक्ख हिमग-सफासा !' १५. तसि भगव अपडिन्ने अहे-वियडे अहियासए दविए, निक्खम्म एगया राओ चाएइ भगव समियाए । १६. एस विही अणुकन्तो माहणेण मईमया बहुसो अपडिन्नण भगवया एवं रायन्ते - त्ति वेमि ।। ) 5 20 २. ९-३ १. तण-फास सीय-फासे य तेओ-फासे य दंस-मसए य अहियासए सया समिए फासाई विरूव-रूवाई। अह दुच्चर-लाढ अचारी वज्ज-भूमि च सुम्भ-भाम च, पन्तं सेज्ज सेविसु आसणगाई चेव पन्ता । ३. लाहिं तस्सुवसन्गा वहवेः जाणवया लसिसु, अह लुक्ख-देसिए भत्ते, कुक्कुरा तत्थ हिसिसु निवइसु । ४. अप्पे जणे निवारेइ लसणए सुणए डसमाणे, छुच्छुक् ' कारेन्ति आहन्तुं " समण कुकुरा डसन्तु" त्ति । ५. एलिक्खए जणे भुज्जो बहवे वज्ज-भूमि फरुसासी, लढि गहाय नालीय समणा तत्थ एव विहरिसु; एव पि तत्थ विहरन्ता पुट्ट-पुव्या अहेसि सुणएहि, सलञ्चमाणा सुणएहि -दुच्चरगाणि तत्थ लाहिं। ७. निहाय दण्ड पाणेहि त काय चोसज्जेमणगोर अह गाम-कण्टए, भगव ते अहियासए अभिसमेच्चा, नाओ' सगाम-सासे व पारए तत्थ से महावीरे । 25 80 ८.

आयारंग-मुत्तं [हे. 6 एवं पि तत्थ लाढेहिं अलद्ध-पुन्वो वि एगया गामो; ९. उवसकमन्तमपडिन्न गामन्तिय पि अप्पत्त पडिनिक्ख मितु लसिसु : " एयाओ पर पलेहि !" ति । १०. हय-पुन्चों तत्थ दण्डेण अदु वा मुट्टिणा अदु फलेण अदु लेलुणा कवालेण ; “ हन्ता इन्ता" वहवे कन्दिसु । मसाण छिन्न-पुव्वाइ, ओट्ठभियाएँ एगया काय परिस्सहार लुञ्चिसु अदु वा पसुणा उवकरिंसु, १२. उच्चालइय निहणिंसु अदु वा आसणाओं खलइसु- वोसट्ठ-काएँ पणयासी दुक्ख-सहे भगवं अपडिन्ने । १३. स्रो सगामसीसे व सवुडे तत्थ से महावीरे पढिसवमाणों फरुसाइ अचले भगव रीइत्था । १४. एस विही अणुक्वन्तो माहणेण मईमया वहुसो अपडिन्नेण भगववया एव रीयन्ते-ति बेमि ।। 10 Anamne 1 20 १. ओमोयरिय चाएई अपुढे वि भगवं रोगेहिं; पुट्ठो व से अपुट्ठो वा नो से साइज्जह तेइच्छं । २. ससोहणं च वमण च गायभगण सिणाण च सवाहणं न से कप्पे दन्त-परखालण परिन्नाए । ३. विरए य गाम-धम्मेहि रीयइ माहणे अवहु-वाई, सिसिरम्मि एगया भगव छायाऍ झाइ आसी य। ४. मायावई य गिम्हाण अच्छइ उक्कुडुए अभितावे, अदु जावइत्थ लूहेण ओयण-मन्थु-कुम्मासेण । एयाणि तिण्णि पडिसेवे अट्ठ मासे य जावए भगव, अपिडत्य एगया भगव अद्ध-मासं अदु चा मास पि । ६. अवि साहिए दुवे मासे छप्पि मासे अदु वा अपिवित्था, राओविरायं अपडिन्ने अन्न-गिलायमेगया भुञ्जे । ७. छटेणमेगया भुले अदु वा अट्टमेण दसमेण, दुवालसमेण एगया मुले पेहमाणे समाहिं अपडिन्ने । नच्चाण से महावीरे नो वि य पावग सयमकासी भन्नेहिं वी न कारेत्था कीरन्त पि नाणुजाणिस्था । गाम पविस्त नगर वा घासमेसे कड परद्वाए सुविसुद्धमेसिया भगव आयय जोगयाऍ सेविस्था । १०. अदु वायसा दिगिच्छन्ता, जे अन्ने रसेसिणो सत्ता घासेसणाएँ चिट्ठन्ते सयय निवइए य पेहाए, 26 ९. 30

उ०४]
नवमं अज्झयण
A wwww
Varu
११. अदु माहणं व समणं वा गाम-पिण्डोलगं व अइहिं वा
सोवागॉ मूसियारि वा कुक्कुर वा विविहं ठियं पुरओ,
१२. वित्ति-च्छेय वज्जन्तो तेस'प्पत्तियं परिहरन्तो
मन्दं परक्कमे भगव, अहिंसमाणो घाममेसित्था ।
१३. अवि सइयं व सुक्कं वा सीय-पिण्ड पुराण कुम्मासं
अदु बोक्कसं पुलाग वा लद्धे पिण्डे अलद्धए दविए ।
१४. अवि शाइ से महावीरे आसत्थे अकुक्कुए शाण,
उड अहे य तिरिय च लोऍ शायइ समाहिमपडिन्ने ।
१५. अकासी विगय-गेही य सद-रूवेसु अमुच्छिए झाइ
छउमत्थो वि परक्कममाणे न पमाय सइ पि कुम्वित्था ।
१६. सयमेव अभिसमागम्म आयय-जोगमाय-सोहीए
अभिनिव्वुडे अमाइले आवकह भगवं समियासी ।
१७. एस विही अणुक्कन्तो माहणेण मईमया ।
बहुसो अपडिन्नणं भगवया एवं रीयन्ते-ति बेमि ॥
॥समत्तो पढमो सुयक्वन्धो ॥
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अकारादि-शब्दानुक्रमणिका SHARE थप्नत्य अन्यत्र अन्नयर अन्यता अन्नदा अन्यथा अन्नसिय अन्तविक अप्प धार अप्पग आत्मक अप्पण० आत्मन् यभंगण अभ्यद्ग,-अभ्यजन अभिनाय भगिताप अभिवाय आभिजात अभिसंकिण समिशदिकन् अभिसेय भमिरेक समराया अमरायत ( ममर इवा. चरति) माग्विल आम्ल अयं (सर्वनाम) अय, भणेण,स. - अइदुक्य अतिदुग अइमाण अतिमान अवत्तिय अतित्तिक अहवाइय अनिपानित अहवाय अतिपात अइविज्ज अतिविद्य आइविनं अतिविमान् यइविण्णू अतिविश अरवेल भनिवेल अइहि अतिथि अफन्द आफन्द अगाणि अमि अगार (गृह) यग्ग अप अंगाल अया अर्चा अच्छायण आच्छादन मच्छि भक्षि अजिण भाजन १अज भद्य अज आय अजय आर्जन अजविया आर्जवता १अज्झत्य अध्यात्म २अन्त्य अध्यस्त अजयस्थिय भध्यात्मिक अजयप्प अध्यात्म अट्ट भर्ति १ अह अर्थ २ अट्ट मष्टन् अहम अश्म अट्ठया भयंता अट्टिण. अधिन्, २ अहिण अन्थिन अट्टिय अधिक अणु अतु, २ अणु मा अणुगानं अनुपामम् अणुगामिय अनुमामिफ अणुरण अनुस्थापित टाणुट्टाण अनुमान अणुदिना अनुदिश अणुधम्मिय अनुपर्मिक अणुपरिसण अनुदर्शिन् শুৰ নুর अणुवसु अनुवमु यणुवीइ अनुविचि अणुसंवेयण भनुमोदन अण्टय अण्डज यत्तण्० आत्मन् अत्तत्त आत्मत्य अत्तत्ता आत्मता,-आरमत्राण यन्थ अर्य आत्यण्० अपिन् अदु या ट यद् वा यद् उ या, यदि , यद्वा १ यद्ध अपन, २ अद्ध-अध अन्तगइय आन्तरायिक अन्तसो अन्तश थन्तिय अन्तिम अन्तो अन्तर अन्धत्त अन्यत्व स्स, मस्सि अरहन्त्० महत् अरिह अह थरिदह अर्हति यलद्धग अलयक अयं अवान्य अवचइय मपचायक अवम हीन अवमारिय अपस्मारिक अवयहि भवतष्टि अवर अपर अवसकिण भपवा कन् अवि आप अस् (धातु) असि, भत्धि, सन्ति, सिया, असिया, आसि, सन्त, भण- सिगा अन्न मन्य असण-रय] अकारादि-शब्दानुक्रमणिका १ अह मह, में . इओ इतस् अहे अवसू अहो अधस् अहर १ आउ आपस् आउ आयुस् । असण अशन आणुधम्मिय आनुवर्मिक आहच्च (आहत्य) अह (धातु) आहु, उयाहु, आहूय आप ( पातु) आयतर, आत्ततर, आहरण पत्त, अपत्त, पप्प आहाकड यथाकृत अथ आम अपक्क आहार २ अह अधस् अहं ( सर्व०) अह, मे, मए, मम, आय-या आत्मन् आहारग आहारक आयग आत्मक इ (धातु) एन्ति, उवेइ, एचा, भ- आयंक आतड्क अहा यथा च्चेइ, अईय, समई, समिय, समेचा, अहिय अधिक आयत्त आत्मत्व अभिसभेचा आययण आयतन अहुणा अधुना आयरिय आचार्य इच्च्० इति ( इच्चत्य इत्यर्थ) आयवन्त्० आत्मवन्त इच्छा आयाण आदान १ अहो इण ( एण) इदमर्थक आयार आचार २ अहो (आश्चयें) इति ( इच्च्०) आरम्भ (पापजनक प्रति ) आइ आदि आराम इत्वरक आइय आदिक आरिय आर्य,-आचार्य इत्थिया स्त्रीका आईय आदिक,-आ अतीत आलइय आलायक इत्थी स्त्री आलुम्प इन्दिय इन्द्रिय २ आलोभिण्० आलोभिन् इम ( सर्वनाम ) इम, इमा, इमेण, आउट्टी आकुट्टी आवकहा यावत्कथा इमस्स, इमाम्म, इमे, इमाओ इय इति आवन्त० यावन्त इयर इतर आवसह आवसथ इयाणि इदानिम् आउसन्त० आयुष्मन्त् आवह इरिया ईर्या आवास इव, व इवार्थक आएसिण्० आदेशिन् आवेसण आवेशन ( शन्यगृह ) १ इप (धातु) एसे, एसन्ति,एसए, आकखिण्० आकांक्षिन् आस् (धातु) आससु, आसिसु, एसित्या, एसिया, अन्नेसन्ति, सि आफेवलिय आकेवलिक आसीण, उदासीण न्ति, पादुरेसए, पाउडएसए आगइ आगति आस आश (प्रातराशादि) २ इप (धातु) इच्छसि, इच्छिया- आगन्तार प्रसङ्गा यात्वा आगत्य आसंसा आशसा निच्छिय वा यन तिष्ठन्ति (व्याख्या) आसण आसन इसि ऋपि आगमण आगमन आसणा आसनक इह,-हिं) इहार्थक आगमिस्स आगमिष्य आसम आश्रम ईक्ष् (धातु) उबेहइ, उवेह, उवे- आगर आकर आसव आभव हाइ, उवेहमाण, अणुवे०, अणुवे- आसा आशा हाए, उबेहा, समुप्पेहमाण, समुवे- आसाय आस्वाद हमाण, पेहमाण, • मीण, पहाए, आणन्द आनन्द आसु आशु संपेहाए-पहाए, उपेहिया आसेवणा आसेवना ईरय् (धातु) रिय, उदीरिय, स- आणुगामिय आनुगामिक आसेवणया आसेवनता मरिए आवट्ट आवत आउय आयुष्क आउर आतुर आउरिय आतुरक - आएस आवेश - आगास आकाश आघवेत्तग आख्यापयितृक आणा आज्ञा - याचारांग सूत्रस्य [सं-कयम् -A-MAmARH --AAA ANNAPAN - उचा उरचार्थक उट माई उद् उदकार्थक इसि ईपद् उवराय उपरान एवं एसमर्थक उ (ओ) पचाय औपपादि (नि) एस एप उपवाय उपपान पसग एपक उपकुहय उत्कहा उपस (स) गग उपगं एसणा एपणा उग्घायण उरातन उपसन्ति उपशान्ति पसिण० एपिन् उपसम उपशम पह एध उचालइत्तर- उचालयित उधालय उचालयिक उवहाण उपधान यो वास्यप्रणायक उयहि उपवि उञ्चावय उपावच ओग्गह भवप्रह उपदिय उपधिक उजु-उजु हजु,अन्जु मोह मोड उजुकड,-डे ऋजुफन्, जुकारी उयाय उपाय योम भवमान उवाहि उपाधि उठाइण्० उत्पायिन श्रोमाण अवमान उवेहा उपेक्षा ओय ओज उब्वेग उद्वेग उण्ह काम मओयण मोदन उसणित उणीय ओयरिया आदर्य उसिण उाग ओसा भवदया उत्तासाच० उत्यापित ओश्वास्य औरपादि(ति) उत्तिग क (धातु) अच्छा याद भोप ए- (मर्वनाम) एहि ओहाण अवधान उदय उदक एस्क एक उदीण उदीचीन क (सर्यना०).के, को, का, कि, एग (भग) एक ( मनेक) उद्दवात्तर० क, अकस्मय, काम, के, फोह, उहवेत्त० एगइय एकतिक विनि, आफचण, कचण, कस्सइ, उद्देस देश कहिचि, के (बहु०), केय उम्मि उद्दि पात्त एव एगन्त एकान्त उपय कस्वड - श एगयर एकतर उम्मग्गा कंसी कांक्षा उन्माना एगया एकदा उम्मुगा कंखि० कातिन् एगागिण० एकाकिन् एगाणिय कट्ठ काठ उयर उदर एज वायु कडट कृत उयरिण० उदरिन् एण, इण (सर्व) एन-एण, इर्ण कडि कटि एन्य (स्यं) मन कडुय कटुक उर उरस एय (सर्व) एतदर्यक-एय, ए- कण्टग कण्टक उराल उदार याओ, एयरस, एए, एयाई, एयानि कण्डग काण्डक उपरकम उपक्रम कण्डूय् (धातु) कण्ड्यए उवगरण उपकरण एयावन्त्०एतावन्न उपचाश्य उपचयिक एलिफ्नग ईदृशक उववय उपचय एलिस (अगेलि.) ईदृश (भनीह०) कत्था कुलचित, उवरद उपरति एव, एवार्थक कथय (धातु) कहिय, परिकरिना } उद्वपापयित् एगओ एकतम् कमो फनस् - } कज कार्य उयाहु उताहो एएहि, एएसु कण्ण कर्ण कन्ध-कुथ्] अकारादि-शब्दानुक्रमणिका कन्ध स्कन्ध कासकस काषकप करिस्सामो, करन्त ,-अकुर्वन्त , कप्प कर काहीय कयिक कुव्वमाण,गड, अकड, दुक्कड,सुकड, कम्बड कट कि कय, किरिय, कायव्व, अकरणिज्ज, कम्प (धातु) अविकम्पमाण किड्डा क्रिडा अकरणीय,कट,किच्चा,कज्जइ,किज्जइ, कम्बल किण्ह कृष्ण फज्जन्ति, कीरन्त, करिमाण, कारेइ कम्म कर्मन् कित्ति ( अकि० ) कीर्ति (अकी.) कारेन्ति, कारवे, कारेत्या, कारोवेसु, कय (विक्य) क्रय ( विक्रय ) किमण कृपण काराविस्स, काराविस्सु, कारावेस्स, कयवर कचवर किरिया क्रिया पकरन्ति, पकरेन्ति, पकुब्वइ, पकु- कयाइ कदाचित् किव (वि) ण कृपण व्यमाण, पगड, सखय कर, री किस कृश २ क (धातु) उवकरिसु करण किह कथा कृश् (,) कसेइ करणया करणता कीर्तय् (धातु) किट्टइ, कि? कृप (,) उकसे, उक्कसिस्सामि, कलह कुओ कुतस् विउकसे, वुकसिस्सामि, अवकस्सण कलुण करुण कुक्कुय कोकृत क्लप (धातु) कप्पइ, पकप्पेइ,कप्पे, कल्लाण कल्याण कुक्कुर कप्पिया, पकप्पयन्ति, पकन्ति कवाल कपाल कुच् (धातु) अपलिउम्चमाण, स- केयण केतन कशाय् (धातु) फसाइत्या कुचए, सकुचिय, सकुचमाण कोट्ट कोछ कसाइय, सकसाइय कुचर चोरो पारदारिया य (व्याख्या) कोहिण- कुट् (धातु) आउद्दे, विउदृन्ति कोढिण- कसाइण्० कपायिन् कुट्टि कुष्ठिन् कोल (घुणा,उद्देहिया वा,व्याख्या) कसाय कपाय कुणिय कुणिक कोविय कोविद कसायय कपायक कुण्टत्त कुण्टत्व कोह क्रोध कुण्डल फन्द् (धातु) कन्दइ, कन्दिसु कहा कथा कुन्त क्रम् (धातु) चकमित्ता, चकमिय, काउ काय कुन्तग कुन्तक चक्कमिय, उवाइकन्त, उवाइकम्म, काक्ष् (धातु) कखेज्जा, अभिक कुए (धातु) कुप्पन्ति, कुप्पेज्जा अभिक्कमे, अभिकममाण, भणभिकमे, सेज्जा, अवकखइ, अवकसन्ति, कुम्भार भणभिकममाण, अवकमज्जा, अव- अणवकसमाण,. कखे० कमित्ता, अकन्त, अणुकन्त, विउ- कुम्मास कुल्माप कम्म, निकन्त, दुणिकन्त, निकम्म, कुल अभिनिकन्त, पडिनिकमित्त, पडि- काम कुस कुश कमे, पडिकममाण, परकमे, परक- कामिण्० कामिन् कुसल कुशल मेउजा, परकमेज्जासि, परकमन्त, काय कुसील कुशील परकममाण, दुप्परकन्त, विप्परि- कमन्ति, विप्परिकम्म, उवसकमन्त, कूर क्रूर कार उवसकमित्ता, उवसकमित्त १ क (धातु) करेमि, करेइ, करेन्ति, कारण करए, कुज्जा, कुबह, अकरेसु, क्री (धातु) किणे, किणावेइ, कि- कारिण्० कारिन् अकरिस्सु, अकासी, अगास, कुब्धि- स्या, करिस्स, करिस्सामि, करिस्सइ, क्रुधू (,) कुज्झे कपायय" कसाइए } फुष्ठिन् कईकहा कयकथा . कुम्म कूर्म काणत्त काणत्व काणिय काणक - कायर कातर - णन्त, कीय याचारांग सूत्रस्य [फुग-चत्तावित युग (धनु) सह, शाह गण्डिण गरिन् सम् (,) रिनानेपन, परिक गन्य गुप्फ गुल्फ गुप्फग गुल्फक - पाहम पाटिन लिहा (,) बिगन्ति, परिधि गम्भ गर्भ गुरग गुहा गम् । धातु) गया, गच्छन्ति, गुहा लप (.) छगे गन्ना, गम, गमित्तए, अश्या, गृ (धातु) जागरन्ति, जागिता, क्षिप् (,) निश्मिये, नितिन अपुगन्नि, अगुगरयमाण, अप- जग्गावह राण या सुगच्छमाण, भागममान, . मी गृध् (धातु ) गिज्झे, गिद्ध, अपु- घणय आगय, भागमेत्ता, आगम्म, सम गिद्ध, परिगिज्या पन् ( धानु) गण नागय, भसम०, भभिसममागय, गेहि गृद्धि पन्ध र भनिगमागम्म, नियन्ति,पिंगय- गोमय म सम गम-यया पारगम, तीरगम गोय गोत्र गमण गमन गोयर गोचर प, पु, पल्पक गरहा (अगरहा ) गर्दा (अग:) प्रथ् (धातु ) गरिय मयय क्षरक गल्य गुरुक अभ् ग्रह , गहिय, गाय, भ- गल मिनिगिज्य,मपरिगहमाग, भीग, निस (धान) सिमए गरम् (वानु) पालमा अपरिमाहेमाण, परिगिस, पगही- मिप्य क्षिर गवेप गसिस्था यतरा गयेसग गरेपक ग्ला (धातु) गिलाएमि, hिar. सुजिय गुन्जा गह (अगह ) ग्रह ( मप्रह) पामि, गिलामी, मिलाइ, गिला- पुग-वृदिय मुद्रा गाम प्राम एज्जा, गिलायन्त, गिलाण, अगि- पेट सेट गामिण० गामिन् लाण, गिलाय, परिगिलायमाण घेत्त क्षेत्र गाभिय प्रामिक घर गृह प्रेम क्षम गाय गान घस् (धातु) परिघासेतु, दिगि- प्य क्षेत्र गार अगार उन्त, दिगिरिएन्त, दिगिरिष्टन्ता, यन्न रोद, क्षेमन गाह (धातु) अभिगाइड दिगिरदन्ता रया (धातु ) भयपार, भग्पाद, गाहय ( गाहिया) प्राइक (माहिका) घाण प्राण माधाद, भाइवामी, भादरमद, गाहायर गृहपनि घातर (धातु) घायए, पायमाण, गन्न,मायो, आना, गिद्धि गृद्धि घायमीन भवानि,आइकन, अग्याइस्सामो, गिम्द प्राप्म घास प्रास भारपसमाग, अपनाय, अग्याय, गिरि हए (धानु) परिघेतय, पारधेयर थापाय, आय, अभाद६, गिलासिण- प्रासिन् घोर अम्मारना, उशादिर, परय गिलासिणी प्रासिगी परमारना, पदिाप, मन्या- निह गृह च, (यो, या, भ) चाया हिव,पाहिय, विस्वाय,-विरसाय, गीय गीत घउत्य गनु विवाहिय, सचिवगड, माए, गीय प्रीय चापय चष्मा स्य पटिगाय गुण गपा पारग रमग गुत्ति शुमि चस्यु घर गुप् (धा) गुज, अगा, दुगुन्छगन चचारि चस्मारि . - - चउरंस चतुरश अकारादि-शब्दानुक्रमणिका M . - - च्छन्न. वा, यावन्ती . . " चम्म चर्मन छ? पठ जाण यान घयण च्यवन छण क्षण जाणक्य जानपद चय छणण क्षणन जाणु जानु चर् (धातु ) चरे, चरेज्जा, अचारी, छद् (धातु) पलिओच्छन्न, पलि- जाम याम अणुचिण्ण,उवचरन्ति,उवचरे, विय- पच्छन्न जाय जात रिसु, संचरिज्जा, अणुसंचरइ छन्द छन्दस् जाया याता छाया जावन्त, जाव यावन्त , यावन्नी- चरिया चर्या छिद् (धातु) छिज्जइ, छिन्देज, चल (धातु) चॉलमाण, उच्चा छिन्दह, छिन्न, छित्ता, वोच्छिन्दे- जि ( धातु) विइत्ता, विएत्तु लिय ज्जा, अव्वोच्छिन्न, अच्छे, अच्छेज जिण जिन चल (अचल) परिच्छिन्दिय, पलि. जिम्मा जिव्हा चवण (चयण) च्यवन छुर-(छुच्छुकारेन्ति) जीव् (धातु) जीविस्सामो, जी. चाइण-त्यागिन् छेत्तर-छेतृ विउ, जीविउ-काम चाय (धातु) निकाय, (निका- १ छेय छेक प्य, निचाय्य, निकाएऊण, नि- २ च्य छेद जीव काएयव्वा) जीविण- जीविन् चारिण- चारिन् जीविय जीवित चि (धातु) ससचियाण ज यथा अण्डज पोतज जीहा जिव्हा २चि अणुवाइ(य) ज ( सर्वनाम य) जे, (एक-बहु०) जुइमन्त० द्युतिमन्तू अणुविचिय जो, ज, जा, जेण, जाए, ज, जुज्झ युध्य चिट्ठा चेष्टा जस्स, जसि, जाइ, जाओ, जेहिं, जुद्ध युद्ध चित् (धातु) चेएमि चेएइ जेसिं, जेसु जुप् (धातु) झोसेमाण, असो- सयन्त चित्त ( अचित्त) जई यदि जओ यतः जूर (धातु) जूरइ, जूरह चित्तमन्त चित्तमन्त् जरेहि, जुण्ण, परि- जंघ चित्तमन्तग जुण्ण जण चिन्तय् ( वातु ) अणुविचिन्तिय जोग योग जणग जनक चिर जणवय जनपद जोगया योगता चुद् (धातु) चुइय (चोइओ) जोणि योनि- जत्थ यत्र जन्, जा (धातु) जायइ, जाय, जोणिय योनिक जणयन्ति, अभिसजाय जोव्वण यौवन जन्तु ज्ञा (धातु) जाणइ, जाणेज्जा, जाण, चेष्ट ( धातु) विपरिचिट्ठइ, परिवि- जाणे, जाणाहि, जाणह, जाणेह, जरा अन्नेसी, अन्नसि, जाणन्त्, अजा- चिहिसु जराउ जरायु चोर चौर जहा यथा त्त, नच्चा, नच्चाण, अणुजाणइ, च्यु (धातु) चुय अणुजाणए, अणुनाइ, अणुजा जाय जातिक णिस्था, समणुजाणइ, स० जागाइ, स० जाणेजा, स. जाणमाण, जागर - जन चेइ चयइ ( त्यज्) चेयण ( अचे) चेतन (अचे.) चेल ( अचे०) वस्त्रार्थक चेलग, चेलिय चेलक . णन्त , अयाणन्त, जाणित्ता,जाणि- जाइ जाति ४४ आचारांगसूत्रस्य [ज्वल-दस् } तदर्थक - . . तो मत माण, अभिजाणा, व्याणइ, भ. तण तृण तिरिन्छ भिनाय, समभिनाणिया, म तत्तो ततः तिरिय जाणना, स० जाणादि, स. जाण- १ तत्थ तन तिविद विविध माण, अवयाणइ, अवयाणन्त, आ २ तत्य (भत० ) तथ्य ( अत:) तिहा विधा जाण, आयाण, थायाणह, आ. तार -अतारगम णाए, आणवेना, आणावेज्जा, तन्- तु भजाययय, आणावे, परिजा- तप्- तुह यून णामि, परिजाणइ, परिजाणन् , तप् (धातु ) भायावेउजा, आया- तुच्छ अप०, परिनाय, अप०,सुप०, सु. घर्ड, अभिताये, आयावयइ, सानाये- तुच्छग तुन्छक जाणियय्य, मु०माए, स० माया, तए, पयावेउजा, पयावेत्तए, परित- तुम (मनाम ) स्यम् , तप, ते, सुपनत्त, पनवेमो, पनवेह, पप- प्पड, परितप्पमाण, परियाविउज- तुम, तुन्स, भ घेन्ति, पढिग्नत्त, अप०, विजाणइ, ति, व्यावज्जन्ति, व्यायेन्ति, तुला विजाणन्त् , चिया०, अनि०, पि- • यावए, याविय, व्याययव्य तुसिणीय तणाक प्राय, दुव्यि०, वियाणित्ता तम्-ता तृ (धातु ) तर, तिन, तारतर ज्वल (धातु ) उज्जालेत्तए, पगा- तम तमम् अपडण्ण, पइण्ण, अघिडण्ण लेत्तए, पजालेत्ता तर (ग)-(०) तेच्छा चिरित्सा सदा (माया-लोभेच्छा, प्यारया) त ( धातु ) सझियाण, तेउ, तो तेजम् तव तपस् हायिण-ध्यायिन् तवस्सिण- तपस्विन् त्यञ् (धातु) चेह-चयइ, चयन्ति, झण ध्यान झिमिय जिम्हिक (अलस्यवाही) तस्-तद् चए, चाएनि, चाएस्सामो, चयाहि, तस चइत्ता, चेचा (०), चाएमि, झूस् (धातु ) शोसेड सोसमाण, तसत्त नसत्य मीण, मोसिय, दुसोसिय चाएड, परिम्पयन्ति, परिवएना, तह (तथ्य) परिधन, सचाएमि तदा तया मन् (धातु) नमन्ति, परिवि. ठाण स्थान तहागय तथागत तिमन्ति, परिचित्तसेजा डण्ड दण्ड ताण प्राण त्वग्वर्तम् (धातु ) नुहन्ना डाह दाह तारिस ( अता० ) तादृश (अता.) थ स्य यथा-अगारत्य, आसणस्थ, तारिसय तादृशक छाउमत्थ, मवत्थ, मज्सत्य पहारुणी नायुनी थण स्तन ताल त (सर्वना.) तदर्थक त, ता, स- मासगत-तद् यया तज्झोसमाण, ताव तावत् थडिल,-ल स्थण्डिल तदिष्ठीय, तेण (-१), तम्हा, त- ति इति थावर स्थावर स्स, तसि, तम्मि, ते, ताइ, तोह, तिइक्पा तितिक्षा थावरत्त स्थावरत्व तेसि, तेमु तिक् (धातु ) तिप्पइ, तिप्पमाण थी स्त्री तइय तृतीय तिज् तिइकाए, तिइक्समाण शूल स्थूल तिणि त्राणि-तिहिं थोव स्तोक तित्त तिक्त तफ्का तो तिय निक दस् (धातु ) डसन्तु, हसन्तु, द- तच तत्त्व तिरिक्त तिर्यक् सन्तु, उसमाण, उसमाण, दसमाण . . णं नूनम् - तो ततः तंस यश दुग्गइ दुर्गति , . दविय द्रव्य . देल- জাহি-হাঙ্গিনটিাকা ४५ दस दश दिश् (धातु ) देसिय, समुहिस्स, देह दंसण दर्शन पदेसिय दो दौ देसिण० दर्शिन् दिसा दिश दोणमुह द्रोणमुख दग उदक दि (धातु) क्षये-दोण, असदीण, दोस दीप दर दृढ सदइ सदिजइ वा सदीणो धरम धर्म दण्ड, उण्ड दीव दीप धम्मय धर्मक दन्त दहि दर्घि धम्मवन्त- धर्मपन्त दुक्ख दुःस धम्मिण- धर्मिन् दम दुक्खिण्- दुखिन् धा (धातु) हिय, अहिय, माढाए- दय् (धातु ) दयइ, दइय दुगञ्छणा, दुगु० जुगुप्सा मि, आढायमाण, मर्माण, आढाय- दया माणाग, अणाढा०, समाहिय, सु- दरिसण दर्शन दुचर दुश्चर समाहिय-, निहे, निहेज, निहाय, दुचरग दुधरक सुप्पणिहिय, परिहिस्सामि, पीडि- दसम दशम दुज्झोसग दुरणुपाल्य स्सामि, पहेसामि, पिहिय-, स- दह (धातु ) दहह, दहह, डज्झइ, दुत्तिइक्ख दुस्तितिक्ष धाएइ, सधए, अभिसधए, भाढा- द०, समादहमाण, डह०, विडज्म- दुपय द्विपद एमाण माण दुप्पडिवूहग, ०वूहण दु'प्रति- धाई धात्री दा (धातु ) दयाइ, देइ, दलइस्सामि, वृहणीय धारिण दासामि, दाहामि, दत्त-, अदत्त-, दुन्भि, भि दुरभि धारिय धारिक अइण्ण-, आइयन्ति, आइए, आइ- दुरइक्कम दुरतिक्रम धात् (धातु ) सधावा यावए, आइजमीण, अणाड्यमाण, दुरणुचर धीर -०मीण, आईट-आइहिण- (आ- दुरभि धुव, धुय ध्रुव दत्तार्थ), अणाईय, 'आयाणिज्ज, दुरहियासग दुरधिवासमीय धू (धातु ) धुणाइ, धुणे, धूय-, भायाणीय, आइत्तु, आयाए, माय, दुल्लभ दुर्लभ विहूणिया, विधूय-, सविहूणिय उवाईयमाण, पाएजा, समाइयन्ति, दुवालसम द्वादश धूयर्- दुहित समायाए, समाय दुविह द्विविध धृ (धातु ) धारेज्जा, धारेत्तए, वि- दुव्वसु दुर्वसु(-मुनि) धारए दुसंवोह दु सम्बोध धौ (,) घोवेना, धोय दारुण दुहओ द्विधातस् ध्या (,) झाइ, झायइ, निझा- दास दूतय् (धातु ) दूइज्जा, दूइज्जेज्जा, इत्ता दासी दूइज्जमाण, (हेमन्तगिम्हासु दोसु, दाह डाह रिजइ दूइज्जइ, दोहि वा पाएहि १ न ज्ञ दाहिण दक्षिण रिजइ दूइज्जइ-व्याख्या) दिहिमन्त्- दृष्टिमन्त् नश् (धातु) आणक्सेस्सामि, अण, दिट्ठीय दृष्टिक दृश् (वातु ) अद( ६ )क्खू , माणिक दिय द्विज दिट्ठ, दुट्टि, दह, दहण, दिस्सइ, नगर दिया दिवा दीसई, अहिस्समाण, उवदसेना नगिण नग्न दिव् (धातु ) परिदेवमाण देव नट्ट नृत्य दिव्य देसिय देशिक - . दाढ दष्ट्र दायाद - दिव्व नट - - - - 4 पार) - आचारांगसूत्रस्य [नलि-पत नन्दि निमोसात्तर- निपापयिन पहाण ( अप्प०) प्रतिष्ठान, नम् (धातु ) नममाण, अनममाण, निडाल ललाट (अप्र०) नय, अनवयमाण, उन्नयमाण, परि- नितिय ( आन०) नित्य ( अनि०) पंसु पशु णमेजा, विप्परिणामन्नि, विपरि- निदा निद्रा पक्कस दृष्टव्य पपरस पामेन्ति, पणय निस निदेश पालण प्रक्षालन नमस्य् (वातु ) नममिय नियग पक्षिण- पक्षिन् नर नियट्ट (अनि०) निवर्त ( भनि० ) पगन्थ प्रप्रन्य गरग नरक नियम पगप्प प्रकल्प ( सामाचारी नश् (धातु) नस्मड, नासइ, वि. नियाग न्याय साचार) णमा नियाण निदान पगाम प्रकाम नह नर निरय पगार प्रसार १ नाइ जाति (शासिगुन-महा• निगमगन्ध पग्गह प्रग्रह निरालम्पनया निरागबना पम् (धातु ) पयह, पारपरमाण २ नाइ शानि (जाति-बल) निरुवहाण निहायान पग्वि नाग निराह निगध पद्यात्तम प्रयतिम नाण जान निलाट ललाट पचामिण- प्रत्याशिन् नाणवन्न्- भानवन्त निघाइण्- निपातिन् पच्छा पधात् नाणिण- मानिन् नियाय निपात पज्जव पयय नाभि निवेसण निवेशन पनवमिय दृष्टय मन् (धात ) नाम नामन् निव्याण (ने०) निर्वाण पंचग पञ्चक (शब्द, रर, रम, नामय नामक निध्येय निवंद १चाय जात गन्ध, स्पश) निस्सार नि मार २ नाय ज्ञात पदण पटन निस्सयस नि श्रेयस नायपुत्त भातृपुर पडिकल प्रतिकूल निस्सेस (न) नि शेष नालीय नालिक पनिछ (पाडियम) प्रत्येक निस्समिय नि शपिक पग्ग्गिह प्रानेग्रह नास नाश निकरण (नो निकरणाए त्ति, नो नी (धातु) उपाय, मुवीय, पडिच्छायण प्रातच्छादन निह ( अनि० ) निघ ( हन् धातु) पाडग्गय प्राघात निव्वय कर्तुं समर्थः, व्याख्या) परिणिज्जमाग, विणइत्तु, विणएत्ता पाइन्न ( अप०) प्रतिज्ञ (अप्र०) निकरणया निकरणता नीया नीचा १ निकाय पडियक दृष्टव्य पटिए नील २ निकाय दृष्टव्य चाय (धातु) नीसंक नि शङ्क पडिलेहा प्रतिलेखा (लिप धानु) निकेत (अनि०) नीसेस दृष्टव्य निस्सेम पडितणया प्रतिहणता निकम्म निष्कर्म पडीण प्रतीचीन नुद (धातु) पणन, विप्पणोलए निगम पडीयार प्रतीकार विपु० निग्गन्य निप्रेन्य नूम कर्म, माया ( अभिन्म अभि- पडुच्च दृष्टव्य बत् (घतु ) निचय मुख्येन कर्म माया वा) पणग पनक निश्चग (अनि०) नित्यक (अनि०) नेत्त, नेय नेत्र पणिय पण्य निजरा निर्जरा नेवाण निर्वाण पडिय पण्डित निज्वाइण्- निम्यायिन् पत् (धातु) भइवाएज्जा, अणइ- वाएमाण, भावडिय, अपइय, निव ४७ ~ प्राग , - पडिसो प्रदिशस् पाप पतलस-पौड] अकारादि-शब्दानुक्रमणिका इसु, निनइय, पडिवयमाण, सप. परिन्ना परिज्ञा पाईण प्राचीन यन्ति परिन्नाण परिज्ञान पाउ प्रादुस् पतेलस (पतेरस ) प्रत्रयोदश- परिपाग (पलि०) परिपाक पाडियक्ष दृष्टव्य पडिक पगय पत्थिय वा तेरसम वरिस परिमंडल १ पाण पान जेसि वरिसाण-प्रकण त्रयोदशम परिमाण २ पाण वर्षम् व्याख्या) परिमोक्ख दृष्टव्य पलिमोक्स पाणिण- प्रागिन् पत्त पत्र परियण परिवर्तन पामिच्च प्रामित्य (पामिश्चति अप- पत्तिय प्रतीत परियंदण परिवन्दन रस्मादृच्छिनमुद्यत्कम् , व्याख्या ) पत्तेय प्रत्येक परियाय पर्याय (श्रामण्यफाल) 1 पाय पात्र २ पाय परियाव परितप पाद पद् (धातु ) आवज्जन्ति, आवा यए, परियावज्जन्ति, समावन्न, परिवन्दण ( परिय०) परिवन्दन पायर्- प्रातर् ( यथा प्रातराश ) अज्झोववन्न, पडुपन्न, समुप्पजेन्ति, परिस दृष्टव्य फरिस पार (यथा पारग, पारगामिन्, समुज्जे, निवज्जइ, निवज्जेज्जा, परिस्लव परिस्रव पारगम) परिस्सह परीपह पडिवन, विप्पडिवन, सपन्न पारुसिया पारुषता परीसह पालय् (धातु) पालेमाण, भणु- पन्त प्रान्त पलाल (पलालपुज) पालए, पालिय, पालिज्जा, ०पालेज्जासि पन्थ पन्यन् (पथिन् ) पलास पलाश पाव पलिपाग दृष्टव्य परिपाग प्राज्ञ पलिवाहर ( हिर) प्रतीप आहरे पावग पापक चरण सकोचए देसी भासाए- पाचाइय प्रावादिक पन्नाणमन्त्- प्रज्ञानवन्त व्याख्या पावाउय प्राबादुक पलिमोक्न ( परि०) परिमोक्ष १ पास पार्श्व पलिय कर्म (पलियठाण, पलिय- २ पास पमाइण- प्रमादिन प्पगन्य-इत्यादि) पासग पश्यक पमाय प्रमाद पवंच प्रपञ्च पासणिय प्रानिक पमुह प्रमुख पवा प्रपा पासिम दर्शनीय पमोक्ख प्रमोक्ष पवाय प्रवाद पासिमन्त्- (पस्सतीति पस्सिम पश् (धातु) पासइ, पासे, पस्स, पास, व्याख्या) २ पय प्रज पासह, पासन्त-, अपासन्त-,पस्स- पिच्छ, पिञ्छ पिच्छ पयण प्रतनु माण, पासमाण, पासिय, समणुप- पिट् (धातु ) पिट्टइ पयांग स्सइ, स० पस्सह, स० पासह पिट्ट पृष्ठ पसु ( अप०) पशु (अप०) पिट्टि पृष्टि पसुग (अप०) पशुक (अप०) पिण्ड परम पिण्डोलग पिण्डोलक परिग्गह (अप०) परिग्रह (अपं०) पहु प्रभु पित्त परिग्गहावन्त परिग्रहवन्त पहेण (प्रहेणक) पिय (अप्पि०) प्रिय (अप्रि.) परिणिव्वाण (अप० ) परिनिर्वाण पा (धातु ) अपिइत्थ, अपिवित्या, पियर्- पितृ (अप०) पीड् (धातु) पिइ, आलिए, पन्ना प्रज्ञा पन्नाण प्रज्ञान पभंगुर प्रभड्गुर पभिइ प्रभृति पाश १पय पद प्रतनुक पया प्रजा (परेण पर) पह पथ पाउ, पायए, अपिबित्ता ૮ आचारांगसूत्रस्य [पीट-भुजो - फलक पुञ्ण छन पुढवी प्रथिवी पुणर " - यमओ वाह्यनम् -- पवीलए, निपीलए परुप अनुज्ञन्ति, ओयुज्झमाण, पसुद्ध, पीढ पीठ फरसया-सिया पक्ष्यता पहिबुद्ध, मुपहियुद्ध, पडिनुज्ज्ञ, पुच्छ मनुज्ज्ञमाणा, अमिमबुद्ध बुसिमन्त बुसी राजमो व्याख्या बेहि बोधि पुज फलत्व चू (धातु ) बेमि, बुइत्त, युझ्य, फारसिया पारुपता पुढो पृथक् यूना फास स्पी पुण पुनर् फुसिय स्पष्ट भहणी भगिनी भगवन्त पुणो भज् (धातु) विभयन्ति, विमए, पुण्ण पुण्य विमत पुत्त पुन वन्य् (धातु) बद्ध पुरओ पुरतम् वन्ध भजा भार्या भंजन वन्धण वन्यन भलक (भू ति भूनी, पुरस्कार पुरस्कार पुरथिम पुरस्तिम यंभ ब्रह्मन् ताए जाया भजगा, भजगा वृक्षा) धंभवन्ठ ब्राह्मवन्त भण् (वातु) पहिभागी भक्त पुराण यल पुरिस पुरुष बलि भमुद्दा का भय पुरे पुरस् यहिं बहिस् पुलाग भव पुलाक घहिया बाह्याद यहिरत्त बधिरस्व भाग घह भायर पुन्वं पूर्व त्रात भाव पुचि बहुग बहुक भाए (धातु) भासामो, भासह, मा- पुष् (धातु) पोसन्ति, पोसन्ति, घहुयर बहुतर सन्ति, मामिय, अभिमासे, अभि- पोसज्जा, पोसिय बहुल बहुसो बहुशस् मासिंमु भि भिद् पूयणा पूजन वाध (धातु ) बज्झमाण, उच्चा- पृश् (धातु) पुच्छिम, पुच्चि- हन्ति, उच्चाहिज्जमाण भिउर,-मे० भिदुर भिक्खायरिया मिक्षाचर्या स्सामो, पु, अपुष्ट, पडिपुच्छमाण थाल पृ (धातु) पुण्ग, पूरइत्तए, रेइत्तए, भिन्नु भिक्षु -लिया वालना वालया- भिम्युणी भिक्षुणी पडिपुण्ग, पुण्ग वाहा बाह भित्ति पेच प्रेत्य बाहि वाद्यम् पेज प्रेयस् भिज्जइ, अन्मे वाहिर,-हर बाहिर मिद् (वातु) भी पेसल पेशल बाहिरग बाह्य भीम पहा प्रेक्षा (ईक्ष वातु) बाहु भीत पेहिण- प्रेक्षिन् भीय थिईय, वी० द्वितीय पोरिसी पौरुषी १वीय भुज् (धातु) भुजे, भुजह, भुजित्या, २वीय बीज भुजत, भुजिय, मभोचा, भोत्तए फरिस स्पर्श युध् (धातु) अयुज्झमाण, युद्ध) भुजो भूयस् पुग्ध पूर्व - " र प्रति - - - भू-मोद] ४९ अकारादि-शब्दानुक्रमणिका . - भेउर, मि० भिदुर भेवर भेतृ भेय भेद यमाण, भो भोस् - मुहुत मुहूर्त - भू (धातु) भवइ (होइ ), भव- मद् (धातु) मज्जेन्ना,पमन्नेजा, पमत्त, मीसी मित्री न्ति, भवे, भविस्सामि, भविस्सा अप्पमत्त मुच् (धातु) मुच्चइ, मुक्क, मुत्त, मो, होइ (भवइ ), होन्ति, होउ, मद्दविया मार्दवता उम्मुच्च, मुश्च, पमुच्चसि, पमुम्बइ, अहेसि, भूय, अणभिभूय, अभि- मन् (धातु) मनसि, मन्नइ, मन्नमाण, पमोक्ससि, विप्पमुक्क, पडिमोयए, भूय, पभूय, सभवन्त, अस०, स- मय, दुम्मय, मणुया, मत्ता, मन्ता, विमुक्क, विमुत्त भूय, अभिसभूय सम्मय मुट्टि (मुंठि) मुष्टि भूमि मंत्रम् (धातु) निमन्तेज्जा मुणि मुनि भूय भूत मन्थ मुण्ड मन्द मुत्ति मुक्ति ममाइय ममायित मुत्तिण- मूनिन् ममाय् (धातु ) ममायमाण, अममा- मुत्तिय मुक्तिक भेरव भैरव अममायमीण मुन् (धातु) मुय, मुणिया, सम्मुय ममाग (मामग) ममक मुह, मुज्झइ, मूढ, सम्मूद भोहण भोजिन् मरण भोग मुह मुख मसग मशक भोम भोम भोयण भोजन महन्त मुहत्ताग मुहर्तक भ्रंश् (धातु) भट महु मधु सुइण- मुचिन् महुर मधुर मूय मूक (मूय, मूइ) भर मति मूयत्त मूकत्व ममन्त् मतिमन्त मूर्छ (धातु) मुच्छइ, मुच्छमाण. माइल (अमा॰), (भमा०) अमुच्छिय मंकड मर्कटक माण मान मूल भाणण मानन ( यया वन्दन, मानन, मुसियारी मूपिकारी (मार्जारी ) मंस मांस पूजन) मृ (धातु) मुयम (मृताचा मृता माणव मानव मक्कडग मर्फटफ विनष्टा अर्चा (तेजस् ) कपायरूपा माणुस्स मानुष्य मग्ग मार्ग येपा ते मृतार्चा. व्याख्या) सपमारए मामग मामक (मदीय) मश्चिय मर्स मृज , सपलिमजमाण, पमबए, पम- मायर- मातृ मच्चु मृत्यु जिन्ना, पमज्जिया, पमज्जिय १माया मात्रा • मृप् (धातु) आमुसन्त, विष्परामसह. मा मध्य १माया माता मज्झिम मध्यम मुसइ, मसह, मुसह, मुसन्ती ३माया मट्टिया मृत्तिका मेहाविन् मेवापिन् मार मडंय मेहणिय मेहनिक मारुय मारुत मेहिण- मेहिन् मण मनस् मास मोस्ख मोक्ष माहण (घंभण, चम्हण) ब्राह्मण मोण मौन माणि मिजा मज्जा मोत्तिय मौक्तिक मणुस ( •स्स) मनुप ( ०ध्य) मित्त भिन्न मोयण मोचन भत्ता मात्रा मिटुं मिथुस् मोद मयू (पाद) पमत्या, पमन्य मिह मिय माइण- माथिन् मउय मृदुक - भंसु मनु मणस मनस् - यम् ॥ " लुपदत्तरलुम्पयितुं - ५० आधारांगसूत्रस्य [म्ला-प? म्ला (धातु ) मिलार राय रात्र पडिलोहत्ता, पडिलहिय, सुपरिले- १य च रायसिण्-राजासिन् हिया २ य ज ( यथा अण्डय, उम्भिय, राय-राजन् लिए ओलिग्जा, जराज्य, पोयय, रसय, ससेयय रायहाणी राजधानी उवलिप्जामि, लिपे०, लिंपेज्जा इत्यादि) ऋ (धातु) रिज्जा, रीयइ, रीयए, ली दृष्टव्य ब्ली? यत् (धातु ) जयाहि, जयमाण रीयन्ते, रीयन्त- रीइत्या, रीयमाण लुक्स स्क्ष जय ( यतेत् ), आयय, रिच (धातु) रिक्क, अरित्त, रि- लुन्च ( धातु ) लुबिसु, लाविय, सलु- आयतर, नियच्छन्ति, सजमइ, क्कासि ( त्यक्तवान् !) चमाण सजय, असजय. रीया ईयो लप लुप्पइ, आलुपह, विल्लुपह १ या च रुस्ख रुक्ष विल्लुपन्ति २ या (धातु) जन्ति, दुग्जाय, रुद् (धातु ) स्यन्ति, रोयन्ति जावए, जावइत्य, निजाई, नियाइ रुध् निरुद्ध याच जाएउजा, जाहस्सामि, रुश् । आरुसियाण लुन् (धातु) सिम, (पिन्ति, जाइत्ता रुह् ॥ भभिज्म, आरज्म, जिहिसु) लूसिय युज् , अभिजुजियाण, सुजिया, समारहन्ति लूसग लूपक विप्पउजन्ति रुह (इह वीजजन्मनि ) लूसणग लपणक স্তু जुज्झाहि रूपय् , परूवेमो, परवेइ, पवेन्नि! लूसिण-लूपिन् रुव रइ (अर०) रति ( अर०) लूह ( रख) क्ष रूविण ( मह० ) रूपिन् ( भरू०) लेटु, लेलु लेष्टु रक्ख रक्ष रोग लेस्सा लेप्या रक्ष (धातु ) सारक्खमाण, मीण लोइय लोकिक रज, रज्जइ, रएज्जा, रत्त, लज्ज्ञ (धातु) लग्जामो, लग्जमाण आरत्त, विरज्जए, विरत्त लोग लोक लहि यष्टि रपण अरण्य लोच् (धातु) आलोएइ,मालोएज लद्धि लब्धि लोभ रम् (धातु) भारभे, आरममाण, लप् (धातु ) लालप्पमाण, मीण, अणारद्ध, समार (र) भइ लभ् लोव लोप रमन्ति, र(२)भेउजासि, उजा, अलद्ध, •द्धग, सदु, लभिय, र (र) भन्त, र (र) भमाण, उपलभ, पहलन्भ, पडिलामिय व इव, एव, वा असमारभ, रम, समारभायेइ, लम्व् (धातु) अवलनए, अवलमि- बई वान् याण रमइ, रमन्ति, रय, अरय लवण वरकस, प. चिरन्तनधान्योदनम् , उवरय, अणुवरय, विरमेजा, विरय, लहु लघु पुरातनसक्नुपिण्डम् , यहुदिवस- अविरय लहुग लघुक सभृतगोरसगोधूममण्डकम् - व्याख्या रय रजसू लाघव वंक रस लाविया लापरता घच् (धातु ) धुत्त, पत्तए, वाइय, रसण रसन लाढ राडा पवुच्चा राइ रात्रि लाला वच नय, वाच्य राहन्दिय रात्रिदिव लिख् (धातु) पडिलेहन्ति, पडिलेहे, बज बज (-भूमि) पडिलेह, सुडिलहिय, पडिलेहाए, घट्ट वृत्त . लुभइ, लभन्ति, लद्ध, लोहिय लोहित " वओ वचस् वेजा रम् ॥ पन - वहमग-विश्] अकारादि-शब्दानुक्रमणिका घहमग वर्मक • वर्मक , चण्ण वर्ण . . घम् ॥ • १ षय वयस् २ वा (धातु) पवायन्त वित्त वहमग्ग वर्मन मार्ग ३ वा (धातु) उद्दायन्ति, उद्दवए, वित्ति पृत्ति घडभत्त घटभत्व उद्दवेयव्य विद् (धातु) विइत्ता, विइत्तार्ण, घडमग, १०, वाइण वादिन एइ, एज्जा, वेयण, पवेएन्ति, घणस्सा बनस्पति वाउ वायु पवेयन्ति, पवेयए, पवेएस्सामि, वागरण व्याकरण पवेयइस्सामि, पवेइय, पडिवेयमाण; पत्थ वस्त्र घाम विप्पटिवेएइ, पडिसवेयइ,प० वेदइ, पत्थग वस्त्रक १वाय वात प० वेएइ ५० वेय (य)न्ति पत्थु बास्तु २ वाय वाद २ विद् (धातु) विज्जइ, विज्जए, वद् (धातु ) वयन्ति, वयासी, वइ. वायस निविज्जइ, निविज्जे, निविद, स्सामि, वयन्त, वयमाण, अनवय- चाया (वाच् ) निविण्ण माण, पइत्ता, अणुवयमाण, माण, वाला (चमरी) विदिसा विदिश परिवयन्ति, ०वएज्जा, पवयमाण, १ वास वर्ष विद्वाय् (धातु) विद्दायमाण, मीण २वास (विद्वांसो क्यमित्येवमात्मान मन्य- य पहन्ति, बहेन्ति, अभि- १ चासग वर्षक, मानाः -व्याख्या ) निव्वदेज्जा, निजहइ २ वासग वाशक चिन्नाण विज्ञान वन्ता १वि अपि विनयर-विज्ञात घमण पमन २वि विद् विन्नु विज्ञ विइगिच्छा, • गिच्छा विचिकित्सा विप् (धातु) परिवेपमाण, परेयन्ति २चय व्रत विइमिस्स व्यतिमिश्र विपस्सिण-(विदार्शन ) घयण घदन विउ विदु विप्परिणाम विपरिणाम- २ घयण वचन विओवाय व्यवपाद, व्यापात, व्य- विप्परियास विपर्यास तिपात विप्पिय विप्रिय ववहार व्यवहार विजय विक्रय विमोक्क्षण विमोक्षण वस् (धातु) वसे, वसह, वसित्ता, विग्गह विग्रह विमोह विमोक्ष अहियासेइ, अहियासए, महिसे- विच् (धातु ) विगिचइ, विगिच , वियड विक्ट जासि, अहियासमाण, भणहि- माण, विवित्त, विगिचित्ता .वियड विकृत अहिया- विचित्त विचित्र वियन्त-कारग व्यन्तिकारक सेत्तए, अणुवासेज्जासि, आवसे, विजय वियाघाय व्याघात आवसन्त, परिसिय, सवसइ. विजा (या) णग विजानक विरह विरति विजंत् विद्वन् विराग वसा विजा विद्या विस्व विरूप वसु ( वसु द्रव्यम् ) विणइण-विनयिन् वसुमन्त् विणय विनय विलुपित्तर वह ( धातु) वज्समाण, परिव- विणा विना विवाय विवाद हित्तए वितण्ड विवेग विवेक वितद्द वितर्द विश् (धातु) पावियर (ग), १ वा व वा ( विकल्पार्थक) वितह वितथ निविह, विनिविद्व, पविसए, पविसि. घयस वचस् यासेमाण, अहियासिय, , घस वश विलुपयित्तर विलुम्पयित यह वध भाचारांगसूपस्य । विसंघण-सान्ति वज ॥ , शक्" विपिसा १शम् ॥ २ शम्" सामो,पवित्स,पयेमिया,अणुपविसित्ताव र संवच्छर सवत्सर विसंहण विधम्मण घेवय घेपक संसप्पग समर्पक चिसय विषय व्यय् (धातु) पहिय संसय संशय विसाण विपाण व्यथ् ॥ सविद्ध, पहिय ससार विसोग विशोक परिव्वयन्ति परिवः संसेय सस्वेद विसोत्तिया विनोतसिका परिवएजासि, पव्वइय संसोहण संशोधन विस्सभणया विधम्मणता वली भालीण, अलीण सहारण विस्सेणी विश्रयणी सकि सक्ति शंस् (धातु) पससिय विह विख संकप्प सकार सन्सामो, सक्क, सक्का विहार संक्रमण सम्मण शत् , भासाएज्जा, (सस्कृत-आ- विहि विधि संखडि सस्कृति शातयेत् ) मणासायमाण, मीण विहारिण- विहारिन् संग सन्त, समिय, समेमाण संगंथ सप्रन्य सुनिसन्त ( स० मुनि- विहिंसग विहिंसक संगाम सप्राम श्रान्त) निसम्म, निसामिया, संघाडी सपाटी चीइमिस्स व्यतिमित्र निसामेत्ता धीर संघाय संघात शिष् , सिक्सेउजा, सुसिज्जा. पीराय् (धातु ) पीरायमाण (अ- सच्च सत्य सुसिक्ने धीरा पीरा-भविता) सज् ( धातु ) सज्जेज्मा, सत्त घीरिय वीर्य विप्पसिह, परिसिह, सु. হিাযু। सजोग संयोग विसिह धीहि चीपि शी सड्डिण्- प्रदिन् सए वुक्कम ध्युत्क्रम बुडि वृद्धि सोयइ, सोएग्जा, सोयए, सढ शठ अणुसोयन्ति सत्त सत्व वृ (धातु) पाउणिस्सामि, पाउड; सत्ता निवारेइ, निव्वुड, अभिनिव्वुड, शुध् ॥ सुद्ध, मुविसुद्ध सत्ति शकि परिनिव्वुड, सवुड श्रद्धा सद्दहे १ सत्य शत्र श्री सिय अणुसिय, अणुस्सिया, वृज् ,, वजेना, वज्जन्त, वन, २ सत्थ शाल परिवजए, परिवज्जियाण, अणुस्तित्ति, समुस्मिणामि, •णोमि, सत्यर्- शास्त समुस्सिणासि, ०णोसि, ०णाइ, वृत् , अइसत्त १)इ०, वत्ते (है)उज, सद (धातु) मन, अवमीयमाण, तिउइ. निस्सिय तिउद, तुझे माउद, आसज्ज, निसिएज्जा, समासज्ज, वट्ट, नियन्ति, नियमाण, सुणइ, सुणेइ, सुणेह, सुण- अभिनित- श्र निसण्ण, विप्पसायए, विसीयमाण, तेज्जा, विनियमाण, अणुपरियदृइ, माण, सुय, दुस्सुय, सुणिया, सोचा, विसण्ण यहमाण, वियत्तण,विउट्टाण,वियइत्ता, सस्सूस, सुस्सूममाण सद्द शब्द सबढेग्जा, 1, सवइत्ता, सवत्ता प्वक अवसरकज्जा सद्धा श्रद्धा बड्डह, वढेह, अभिसवुट्ट १ स, से, सो स (तत् सर्वनाम, सद्धि सधीम् वेय वेद पुल्लिङ्ग-प्रथमैकवचन) सन् (धातु) अपज्जवसिय, पज्जव- वेयण वेदन २स सहायक सिय, सपज्जवसाण चेयवत्- वेदवन्त- ३ स स्त्र संताणग सन्तानक वेयावडिय चैयामृत्य सई सकृद् संति शान्ति - . . वृध , संतेगड्य-सुणिम] अकारादि-शब्दानुक्रमाणको संतेगड्य सन्येक- संथर सस्तर संथव सस्तव संथारग सस्तारक संथुय सस्तुत संधण सन्धान संधि सन्ना सज्ञा संनिचय संनिवेस सनिवेश संनिहाण सनिधान संनिहि सनिधि सप्पिण- सर्पिन् सवलत्त शबलाव सभा सिंग शुमा - सम्मुइया सम्मुतिता सामग्गिय सामग्न्य सम्मुच्छिम समूच्छिम सामत्त श्यामत्व १सय शय सामिण- स्वामिन् २ सय स्वक साय साय १सयण शयन १सार २ सयण स्वजन २सार स्मार सयं स्वयम् सारग स्मारक सययं सततम् साला शाला सया सदा सासय शाश्वत सर स्मर साहम्मिय साधर्मिक १ सरण शरण साहारण साधारण २ सरण स्मरण साहु साधु १सरणया शरणता २ सरणया स्मरणता सिच् (धातु ) ससिचमाण, सं सरीर शरीर व०, ससिम्चियाण सरीरग शरीरक सिढिल शिथिल सल्ल शल्य सिणाण सान सवण श्रवण सिद्धि सिध् (धातु) निसिद्धा, पडिसेहिय सव्वओ सर्वतसू सिर शिरस् सव्वत्त सर्वत्व सिलिवइण- लीपदिन (डीपद सव्वत्थ सर्वत्र पादादौ काठिन्यम्-व्याख्या) सधया सर्वदा सिलोग श्लोक सव्वसो सर्वशस् सिसिर शिशिर सव्वावन्त -सर्वावन्त सिस्स शिष्य सस्सय दृष्टव्य सासय सीय शीत सह (धातु) सहइ, सहए सील शील १ सह सीलमंत शीलवन्त २ सह स्वक (सह सम्मइ. सीत् (धातु) सिविस्वामि, या स्वकसन्मत्या) सीवि० सहसाकारय् (धातु) सहस सीस शीर्ष कारह सुकर साइण-शायिन् सुकरण सुफ शुष्क सागारिय सागारिक सुशिल शुक साड शाट सुटु सुख साध् (धातु) साइइ, साइ, सुणग शुनक साहिस्सामो, साहिय सुणिम सच सर्व समंजस समण श्रमण समणुन्न समनुज्ञ समय समया समता समायाण समादान समायार - समाचार समारंभ समाहि समाधि समिय, .या सम्यक समुठ्ठाइण- समुत्थायिन् समुप्पाय समुत्पाद सम्मुस्सय समुच्छ्रय संपसारग सप्रसारक संपाइम सपातिम सफास सस्पर्श संवाह सम्बाध संयाहण सम्बाधन सम्मइ सम्मति सम्मइया सम्मतिता सम्म सम्यक सम्मत्त सम्यक्त्व - - सहि सखि - साइम स्वादिम ... सम्मुह सम्मति आचविंग सूधस्य [सुन्हा- MAAN PAAAAAAWAlwaraWAAAAAAAAMw . - . सुसाण श्मशान सुह सुख सूह सूचि हिय हर सुण्डा स्नुषा सोचाग श्वपाक 'हस्स हर्ष सुत्त सूत्र सोहि सोधि २हस्स, हु० -हस्त्र सुन्न शून्य स्खल् (धातु) खलयिमु हा (धातु) जहाइ, जहति, जहादि, सुप् (धातु) सुत्त स्तन् । थणति हीण,जहित्ता,विज०,हिच्चा परिहा- सुम शुत्र स्तम् , ओहमियाए, ओहभिया यमाण, अप०, अपरिहीण, पहाय, सुभि सुरभि " सथरए, सथरेज्जा, सथ विपजढ, विजहित्ता, वियाहत्त १ सुर्य श्रुत रित्ता हार २ सुय सुत स्था चिढइ, चितु, चिज्जा, हालिद हारिद्र सुरभि -गन्ध ठाएउजा, चित्-, अचिट्ठत, ठिय, १ हास हर्ष सुवसु ठावए उहिय, अणुट्टिय, उहाए, उठाय: २ हास -हास्य सुन्वय सुव्रत समुट्टिय, समुट्ठाय, उवट्ठिय, अणुव०, हि परिवेज्जा, परिवेत्ता, विपरिचिट्ठइ, हिंस (धातु ) हिंसइ, हिंसन्ति, विट्ठिय, परिविचिट्ठइ हिंसिस्सन्ति, हिंसिसु, अहिंसमाण, सुहम सूक्ष्म स्पंद् , विष्फन्दमाण विहिसइ, विहिंसन्ति, मविहिंसमाण स्पृश् , फुसन्ति, फासए, पवन्द-, हिंसा सूझ्य सूप्य, अथवा सपिक हिमग हिमक लूणिय शूनिक स्पृह पीहए हिमवाय हिमपात सूर भर स्फुट विफुडमाण ए (धातु) पसारए, पसारेमाणे, स्म स (म) रन्ति, अणुस- हियय हृदय पसारिय, पसारेतु, सपसारए, सरह हिरण्ण हिरण्य अणुससरह धीसवन्त हिरिण- (हीमन्त) वोसिरे, वासह, विओसज्ज, सिज्ज, सेन्ज, वोसज्ज, आणिस? स्वाद् , साइज्जइ, साइज्जिस्सामि, हिरी ही साय, असाय, अस्साय हु सल सज्जा शग्या हंता हन्त सेय श्रेयस् हंभो हुरत्था हुरस्तात् से ( धातु ) सेवइ, • ए, सेवन्ति, हणु हनु हुस्स हस्व सेवेज्जा, सेवित्था, सेविंसु, सेवित्ता, हणुय हनुक ह (धातु) अभिहड, अवहरन्ति, आसेवइ, ० ए, भासेवित्ता, पहि- हत्थ आहरे, आहद, आहट्ट, सेवे, पडिसेवमाण हन् (धातु ) हणति, हणिया, हणे, आहारेमाण, उदाहरन्ति, उदाहह, सेस शेष हण, हणह, हणत्-, हतन्व, हय, परिहरन्ति, परिहरेज्जा, परिहरन्त, सेहि (सिद्धि) (हओवहय), हम्मइ, हन्नइ, आहतु विहरे, विहरित्या, विहरिसु, विह- सोणि (णी) य शोणित उवहय, निहणिज्ज,निहणिसु,अविह रन्त, विहरमाण, विहरेजा सोत्त श्रोत्र म्ममाण, हर (धातु) हरिसे १सोय शौच हंतर्- हन्त हेउ हेतु २ सोय श्रोत्र हरय हेमंत हैमन्त ३ सोय स्रोतस् हरिय हरित हो? सोयचिया शौचवता हव्व मर्वाक् हुनु (धातु) निण्हवइ, निण्हवेज्जा सोलस षोडश २ हव्व हव्य अहिरीमाण . (st- - - , हु० ओष्ठ ही " कतिपया विशिष्टाः पाठ-भेदाः। ---- " " । १ पं. १ आउसतेण, आमुसतेण, भावसतेण, ताव जीवाभिगमे कायवे जाव इच्छि- , १०. अणुसचरइ, स्थाने अणुससरइ. याणिच्छिय सायासाय वियाणित्ता , १६. सन्धेइ स्थाने सन्धावइ. हिंसोवरई फायव्वा' पताहशो १७ मोयणाए स्थाने भोयणाए. नागार्जुनीयो पि पाठभेदः। I. २.५ २४ नियाग स्थाने नियाय, निकाय. १४. पियाउया स्थाने पियायया. ॥ २६. वियहित्तु विसोत्तिय स्थाने विजहिता पृ ८.५ १४. वीरे पससिए स्थाने धीरे तथा ( वियहिय, वा) पुष्वसजोग नमंसिओ . ३ पं. ३ सत्य चेत्य स्थाने पास चेस्थ. १६. पढिसहिओ स्थाने पडिलाभिओ. ७. पासमाणे रुवाइ स्थाने पासमाणो , १८. ०रूवेहिं सत्येहिं इत्यादि पाठस्थाने पासिमाइ, सुणमाणे सद्दाइ स्थाने सुण- सत्येहिं विरूव-रूवाण भट्टाए, त-जहा माणो सुणिमाइ. एपः पाठः। ३. ४.पं.२३. एजस्स स्थाने एयस्स, एगस्स. २३. अय सन्धीति० स्थाने अय सन्धि २७. इह स्थाने इति. अदक्खु. २०. चित्ते स्थाने चिटे पृ. ९. पं ६. अन्नहा ण पासए स्थाने अभयरेण २१ सत्थे स्थाने सत्ते पासएण २२. माणवाण स्थाने असमजयाण. २५. से त जाणह, जमह बेमि स्थान से २३. परिन्नाणेहिं स्थाने पन्नाणेहि एवमायाणह ज बेमि. पृ. ६.पं. १० जावसोत्तपरिनाणेहिं अपरिहायमाणेहिं पृ. १०. पं. ९ दिठ-भए स्थाने दिठ-पहे. स्थाने जाव सोत्तपन्नाणा भपरिहोणा. १४. तम्हा धीरे न रन्नइ स्थाने तम्हादेष ॥ १५. कचित् वि एगे नास्ति. विरज्जए " २३. विणइत्तु स्थाने विणा वि २१ चित् एस पोरे पससिए नास्ति. , २६. क्वचित् णाइबले अग्रे सयणवले कचित् सुवसु वीरे ५० अधिकपाठ पृ. ११. पं. २. • आवट अणु० स्थाने दुक्खाषष्टमेष ॥ २७. दण्ड-समायाण स्थाने दण्ड समारमइ, अणु०. भया दण्ड-समायाण सपहाए, इति वा ७. आयव नाणघ स्थाने आयवी नाणवी. , ३२.से असइ इत्यादि पाठस्थाने ॥ ११ माराभिसकी स्थाने मारावसक्की, 'एगमेगे खलु जीपे भईयद्धाए असइ- , २५ फम्म-मूल च ज स्थाने कम्ममाहू यज. उभ्यागोए असइ नीया-गोए, कण्डगढ़- याए नो होणे नो भइरित्ते.' एतादृशो , २९ मइम स्थाने मेहावी. नागार्जुनीय' पाठ'। पृ. १२. पं. १३. अग च इत्यादि स्थाने कचित् मूलं पृ. ७. पं. २. क्वचित् साय नास्ति । तथैव 'पुरि- च अग्ग च विएत धीरे, इति तथैव सेण खाड पसुम्नेगसुहेसएणे पुब्धि मूल प लग्न प पिएच पीरे, फम्मास " ५६ " आचारांगसूत्रस्य चेइ विमोक्पण च इति नागार्जु १५ पुढो पुढो इत्यादि पंक्तिस्थाने एता- नीयः पाठभेदः। दृशं पाटान्तरम्-एत्य मोहे पुणो , २६ नाणुजाणए अग्रे कचित् छणन्त नाणु- पुणो, इहमेगेमिं तत्थ-तत्य मपयो भवइ, मोएय अधिक पाठ । महोववाइए पामे पटिमवेययन्ति, ३०. निसण्गो पावहिं कम्महिं स्थाने तेसु चित्तं कुरेहि फम्मेहिं चित्त परिपिचिहहः फम्मेसु पाव. अचित्त रोहिं फम्मेहिं नो चित्त पृ.१३ पं १ गामी स्थाने गाम, परिवि चिड १३ धीरे स्थान पोरे तथा २१.ते एय पयासि स्थाने एवमाइयरान्ति. विसय पञ्चगम्मिावि , २५ चर्णिपुस्तके भणारियवयणमेय दुविहम्मि तिन-तिय नास्ति. भावमो सुदव जाणित्ता , ३० पापाउया स्थाने चूर्णिपुस्तके समणा से न लिप्पइ दोमु वि. माहणा (१ विसयम्मि पनगम्मि इसपि प्रत्यन्तरे) पृ १७ पं. १ तमसि स्थाने त अस्म. इत्येवंरूपो नागार्जुनीय. पाठभेद । ९ कम्मुणा मफल स्थाने कम्माण सफलत. , १९. अवरेण पुन्य न सरन्ति एगे इत्यादि १५ आवन्ती इत्यादिवाफ्यस्थाने नागा- पंक्तिस्थाने र्जुनीयमेतादृशं पाठान्तरम्- अवरेण पुय्य किह से भईय जायन्ति के लोए पकाय-यह समार- किह भागमिस्स न सरन्ति एगे, मन्ति महाए अणहाए वा भासन्ति एगे इह माणवा उ (मो) २१ मरणाइ एर स्थाने मरणादुइ. जह से मईय तह आगमिस्स । २५ फद् एवमधयाणओ इत्यादि पंकि- एवंरूपाः पंक्तयः। स्थाने नागार्जुनीयपाठभेदो यथा- , २३. अद्धं स्थाने अत्य, मह वा पाठ'। जे साल विसए सेवा, सेवित्ता वा नालो. पृ १४ पं २ दुक्रा-मत्ताए स्थाने दुस्समायाए। एइ परेण पृट्टो निम्बइ, महवा त पर धम्ममायाय. इति वा पाठ । सण या पोसेग पावियरएण पा ६. चूर्णिपुस्तके उवरय जाव सगडम्भि दोसण उवलिंपरजा। पाठो नोपलभ्यते । २९, फासे स्थाने मोहे; कृचिन पुगो अग्ने १९. चित् मार स्थाने मरणा कचिय ससय परिजागओ विशेष । मार च मरण च उभयमपि । पृ. १८.पं. १ पचमाणे स्थाने तप्पमाणे पृ. १५.पं. १. नो लोग० एतवाफ्यस्थाने नो य , १६ छन्द इह मागवा स्थाने छन्दाणं इह लोगेसण चरे. माणयाण, ४. जयमाणे धीरे स्थाने जयाहि एवं ॥ २६. से मुप्पठि• एतत्पंक्तिस्थाने से सुय ८. आघाइ स्थाने भक्खाइ तवैवं अणुविचिन्तिय नया. नागार्जुनीयः पाठभेद:-आघाइ , ३१. अप्पमत्ते परिपए स्थाने चूर्णिपुस्तके धम्म सलु से जीवाण, त-जहाः ससार- अप्पमाय सुसिक्खेज्जा. परिवानाण मणुस-भपस्याण भारम्भ- , ३२ मणुवासेज्जासि स्थाने अणुपालेउमासि. विणईण दुक्युवेग सुहेसगाण धन्म- पृ.१९. पं. ८ सिया स्थाने चेव, सन्नेसिए स्थाने सयण गवेसगाण निश्राित्त-सत्याण सु- मगुस्सित्ति; अणुस्सित्ता स्सुसमाणाण परिपुच्छमाणाणे विनाण । १३. जुद्वा० एतत्पकिस्थाने सुद्धारियन प्रत्ताण, हुलभ " " कतिपया विशिष्टाः पाठ-भेदाः । ५७ " १६. भए स्थाने पहे. "समणा भविस्सामो भणगारा अकि- पृ. २१. पं.२६. एत्य विरमेज्ज वेयवी स्थाने विवेग चणा अपुत्ता अपसू अविहिंसगा सुव्वय किटेइ वेयवी. दन्ता परदत्त-मोइणो, पाव कम्म नो , २७. विणइत्तु स्थाने विणएत्ता. करिस्सामो" समुहाए। , २९. वडुमग स्थाने वमग. " ३२. सया परफमज्जासि स्थाने चूर्णि- पृ. २२.पं.१४. अणेग-रूवेहिं कुलेहिं जाया स्थाने पुस्तके सम्बो परिव्वएनासि भणेगो तेसु कुलेसु. पृ. २६. पं. ६.आइक्खे वि• पतत्पक्तिस्थाने , १५ स्वेहि सत्ता स्थाने सवेसु गिद्धा. नागार्जुनीयमेतत्पाठान्तरम्--जे पृ.२३. पं. २, पकुवइ स्थाने पगम्भइ. खलु भिक्खू बहु-स्सुए बदमागमे आह- ७. धूयवाय प० एतत्पक्तिस्थाने धुव, रण-हेउ कुपले धम्म कहा लद्धि-सम्पन्ने धुय इति वा पाठः । तथैव धूयो- खेत्त काल पुरिस समासज्ज 'के भय वाय पवेयइस्सामि इति नागार्जुनीय- पुरिसे क वा दरिसण अभिसपन्ने ?' मपि पाठान्तरम् । एव गुणजाईए पभू धम्मस्स आघवेत्तए। " १७. चइत्ता पुव्व संजोग स्थाने चूर्णिपुस्तके , २०. तम्हा लहाओ नो परिवित्तसेज्जा जहित्ता पुव्वमाययण. स्थाने चूर्णिपुस्तके जसिमे लूसिणो २६. अहेगे धम्ममायाए स्थाने सहिए धम्म- नो परिवित्तसन्ति इति पाठान्तरम् । मायाय. २४. विमोवाए स्थाने वियाघाए, वियावाए, २८. गेहि स्थाने गत्थ, गिद्धि. विवायाए, विवाघाए; इति पाठा- पू.२५. पं. १४. वीरे स्थाने धीरे. न्तराणि। , १५ एय खु मुणी स्थाने एस मुणी २७. कालोवणीए• इत्यादि वाक्यस्थाने २१. लाघवमा० इत्यादिपंक्तिस्थाने एता- नागार्जुनीया. पठन्ति- दृशो नागार्जुनीयः पाठभेद जाइ खलु अह अपुण्णे भाउ-तेउ-काल एवं खलु से उवगरण-लाविय तव करिस्सामि, तो परिणा-लोवे अकित्ती फम्म-क्खयकारण करेइ । दुग्गइ-गमणागमण च भविस्सइ । , २२. सव्वओ सव्वत्ताए स्थाने नागार्जुनीय पृ. २७. प. १३. नो सुय० इत्यादि शब्दस्थाने चूर्णि पाठान्तरं-सव्व सव्वत्ताए पुस्तके न एस धम्मे सुयक्खाए सुप- २८. सधेमाणे स्थाने सन्धणाए, समुहिए नत्ते भवइ एते शब्दाः। स्थाने समुहिए. २० उदाहिया स्थाने उदाहडा. " ३०. अणवकखमाणा स्थाने अणवकखेमाणा , २३. पडिक स्थाने परिक, पाडियक्क, (णे), अवयमाणा, इति वा. पडिइक, पडियक, पाठान्तराणि, २५.पं. १ तेहिं महावीरेहि स्थाने चूर्णिपुस्तके तत्रैव जीवेहि कम्मसमार- । तेसि महावीराण. म्भेण स्थाने दण्ड समारभन्ते पाठा- २. उवलन्म स्थान पइलभ, हिचा उव. न्तरम्। इत्यादिवाक्यस्थाने हिचा उवसम पृ. २८. पं. ३. चेएमि स्थाने चूर्णिपुस्तके ( कई- अहेगे फारुसिय समारभन्ति । भणन्ति ) फरेमि (त तु न जुज्जइ). , १५ जाइ स्थाने गन्भाइ २३. सोच्चावई मेहा० इत्यादिशब्दस्थाने , २६ भविहिंसे इत्यादिशब्दस्थाने अवि- सोच्चा मेहावी वयण प० । हिंसगा सुव्वया दन्ता अहेग पस्स. , २९. सनिहाण-सत्यस्स स्थाने चूर्णिपुस्त- इत्येवंरूपाशब्दा तथा-एता. के सानहाणास सेयने (मन्नवायणाए). दृशो नागार्जुनीयः पाठभेद'- मनिहाणसत्यस्स खे०। " .

धी सरतरगच्छीय शान मन्दिर, जयपुर आचारांगसूत्रस्य । , २९., १० ओम-चेलिए स्थाने अयम चेलए, , २३ दुव वण्ण स्थाने धुव अन्न. तयय चूर्णिपुस्तके अदुवा अचेले पाठो सुहुम यण्ण इति पाठान्तर नोपलभ्यते ,२६. सव्वस्थाने सम्पत्ये. १७. निस्सेष स्थान निस्सेनिय, निस्सेयस, पृ.३३., ६. अभिज्ज्ञ स्थाने आरज्म, विहरिस नीसेस, इति पाठा स्थाने वियरिसु २२ एव स्थाने य, अव टीकाकारसं , १४ पृट्टो वि नाभिमासिम स्थाने पुढे व से गृहीतमेतादृशं पाठान्तरम्'-०गम- मपुट्टे वा इति चूर्णिसम्मतपाटः । णाए] त भिस्तु केइ गाहावई स्वसक- वयव मित्तु वूया माउउन्तो समणा' अह पुहो व सोमपुटो पा। ण तव अहाए भसग या ४ अमिहट नो मणुनाइ पापगं भगव। दलामि।" से पुयामेव जाणेज्जा इति नागार्जुनीय पाठभेद. । "माउसन्तो गाहावई। जण तुम १९. नाइ-मुए स्थाने नाइ पुत्ते मम भट्टाए असण वा ४ चेएमि, नो पृ ३४. , ७. अहाकडं स्थाने आहाफम्म खलु मे कप्पह एयरपगार असण वाट ॥ १६. उन्धसि स्थाने पट्टसि भोत्तए वा पायए या भने वा तह-प- , १८. बहुमो अपरिवेणं स्थाने भपडिनेण धोरण. गारए। पृ३०. ७ एगाणिय स्थान एगागिग, पृ.३४. ,२१ पणियसालामु स्थाने सालाघराण २७. ' निद्द पिनो पगामाए सेवा य ममव ,११. सचारेज्जा स्थाने साहरेज्जा चु०, उहाए' एतद्वास्यस्थाने निदावि आसाएमाणे स्थाने आढायमी (मा) न पगामा मामी तहेव चहाए पताह. णे पाठान्तरंच. टी पुस्तके शो नागार्जुनीयः पाट । २०. पढिलेहिय-इत्यादिशब्दस्याने पदि ,, २९. भासिमु भगव उहाए स्थाने न चिर लेहिता सथारग सपरेउजा एता. जॉगित्ता ईसिं साइयासि इति चूर्णि- दृश शष्टभेट । पुस्तके पाठ । २७ ण एव स्थाने ण भिरस्म एव । चा ,३१. तस्मुषसग्गा स्थान तत्थुवसग्या. एमि स्थाने सचा. पृ ३५ ॥ ४. समिए फामाइ विरुवस्वाइ स्थान , ३१., २ दलइस्यामि स्थाने दाहामि, दासामि, साहिए इति मन्ता भगव मणगारे इति वा पाठ। चूर्णिगतपाठ । ११ वसुमन्तो स्थाने बुस्मिन्तो , ९ भयमुत्तमे से धम्मे स्थाने "को एल्य १२. विइत्ताण स्थाने विगिचित्ता सामी ठिमो" एप' पाठ चर्णिपु०। १३ पुष्यीए स्थान पुब्धिय, कम्मुणाओ ,१३ पिहिया पा सक्खामो स्थाने पिहिया य स्थाने भारमाओ। चाएस्सामो चूर्णि ॥ १५ अन्तिय स्थाने कारणा पृ ३६ , ४ भदु फलेण स्थाने मह कुन्ते (न्तए) ण. , २३. तु विनाय स्थाने रियाणित्ता ६ मोहभियाए स्थाने उहरिया २४. तुयहेज्जा स्थाने तु बज्जेज्जा, निवज्जे- ,१७ न से कप्पे स्थाने न सेवित्या ज्जा, वा पाठ । २४ अपिवित्या स्थान विहरित्या , ३१. पगहीय तर स्थाने व्हीय तरगं, हीय- ३०. घासमेसे कट स्थाने घासमात कड, तराग, वा पाठ । ३१ मुविसुद्ध स्थाने सुविसिह, गयाए पृ ३२., ११. पादुरेसए स्थाने पाउडएमए सेवित्या स्थाने • गया गसित्या १४ चाययतरे स्थाने चायतरे चूर्णि० ,२० य ससाय स्थाने इति संखया ३३ सयय स्थाने सन्यरे २२. भेउरेसु स्थाने मिउरेसु, तथैव बहुः पृ. ३७ ८ झायइ समाहिमपहिने स्थाने मायई लेसु वि इत्यपि पाठान्तरं. समिय पेइमाणो चूर्णि ३१." " . "

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Aacharang-sutra

Author
Swami, Sudharma
Title
Aacharang-sutra
File name
Aacharang-sutra
Text
OCR done
Citation
1924
Published
2011/01
Publisher
Puna., Jain Saihtya Snsodhak Samiti
Language
Sanskrit
Pages
64
Library
Shri Jain Swetamber Khartargacch Sangh, Jaipur
Classification
Devotional
DLI number
446207
Barcode
99999990027826.00
Scanning centre
Banasthali University
Digital publisher
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